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Tuesday, December 27, 2016

रामलीला मैदान में रामदेव


आज बाबा रामदेव ने हजारों सत्याग्रहियों के साथ मिलकर दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन आरम्भ किया है. वह पिछले कई वर्षों से कालाधन वापस लाने की बात कह रहे हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जून तक नहीं रेंगी. इस बार सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ ठोस कदम उठाने ही पड़ेंगे. कल रात को निष्काम कर्म की व्याख्या सुनते-सुनते सोयी थी. मन उल्लास से भरा था. एक अद्भुत स्वप्न देखा. किसी ने उसे ऊपर उठाया, देह नीचे पड़ी थी और स्वयं की आवाज सुनाई दी, वह ...( नाम) नहीं है, वह है..कई बार यह वाक्य गूँजा और उसे नीचे छोड़ दिया गया, बाद में भी मन में यही विचार आता रहा..स्थिरता की सी मन: स्थिति बनी है सुबह से..

कल सुबह टीवी पर जब सुना, बाबा रामदेव को गिरफ्तार कर लिया गया है, उन्हें वस्त्र बदल कर छुपना पड़ा, जब वह भाग रहे थे तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मैदान में सोये हजारों लोगों को वहाँ से निकाल दिया गया है तो मन विषाद से भर गया. कल दिन भर समाचार ही सुनते बीता. लोगों के मनों में दर्द है, उनके कार्यकर्ताओं को खदेड़ा गया, पीटा गया और कइयों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. शासन में रहने वाले लोग स्वयं को खुदा मानने लगते हैं. लोकतंत्र में ऐसी अमानवीय घटना का होना कितना दुखद है. सरकार को इसका परिणाम भुगतना ही पड़ेगा. देश में जो माहौल बन रहा है वह कुछ परिवर्तन लाकर ही रहेगा. लोकतान्त्रिक व्यवस्था में इसकी अति आवश्यकता है. इतिहास बन रहा है, पीड़ादायक क्षणों से गुजरना होगा, तभी तो नये राष्ट्र का जन्म होगा.

आज सुबह उन्होंने फूलों से भरे वृक्षों की कुछ तस्वीरें उतारीं. यह जगत कितना सुंदर है कोई ध्यान से देखे तो..जून को उसने कहा वह एक ब्लॉग की शुरुआत करें, जिसमें हर दिन कोई सूक्ति लिखी जाये. दीदी ने लिखा है, वह भगवद्गीता को ब्लॉग में लिखकर एक शुभ कार्य कर रही है, पर उसे लगता है वही करवा रहा है जिसकी यह गीता है. बाबा का अनशन जारी है, उन्होंने शेष सभी को तोड़ने के लिए कह दिया है. उनका जज्बा और जोश बरकरार है. अपनी तरफ से उन्होंने सबको क्षमादान भी दे दिया, सन्यासी का दिल कितना कोमल होता है. सरकार उन्हें राष्ट्रभक्त की जगह राष्ट्रद्रोही मान रही है. आज उनका उद्बोधन सुनते-सुनते उसका मन भी द्रवित हो गया.
आज सम्भवतः बाबा अपना अनशन तोड़ देंगे. श्री श्री और मुरारी बापू उनसे मिलने जाने वाले हैं.  उनके गुरूजी ने कहा, “शब्दों की शक्ति को पहचानना है, कुछ भी बोलने से पहले सोचना चाहिए कि श्रोता उसे किस रूप में ग्रहण करता है. आत्मा में मन लगे तो पुण्य और पदार्थ में लगे तो पाप होता है.” पाप और पुण्य की यह परिभाषा बहुत अच्छी है.