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Thursday, March 29, 2018

रोइंग में पार्टी



मायोदिया में मंजिल पर पहुंच कर बर्फ दिखी जो सड़क के दोनों किनारों पर जमी थी, पहाड़ों की ढलान पर भी बर्फ थी और वातावरण में ठंड बढ़ गयी थी. उन्होंने स्वेटर, दस्ताने, टोपी सभी कुछ पहन लिए और फोटोग्राफी करते हुए बर्फ का आनन्द लिया. वापसी की यात्रा अपेक्षाकृत सरल थी. दोपहर डेढ़ बजे वे वापस लौट आये. दोपहर का भोजन कर वे पास के बाजार गये. छोटा सा ही बाजार है, जहाँ आवश्यकता का सब सामान मिलता है. बाहर नव वर्ष की पार्टी की तैयारी हो चुकी है. सुबह ही टेंट लगाने वाले आ गये थे, एक तरफ शामियाने में बुफे का इंतजाम है. दूसरी तरफ गोल श्वेत टेंट के नीचे कुर्सियां लगी थीं. दोपहर से ही भोजन बनाने का कार्य भी आरम्भ हो गया है.

संध्या के बाद श्री पुलू ने उन्हें बुलाया, उनका परिवार भी आ चुका था. दो कमरों के मध्य के हॉल में आग जलाने का प्रबंध है. एक टीन की शीट पर मिट्टी का लेप था उस पर एक लोहे का चूल्हा था जिसमें लकड़ियाँ जलाकर आग सुलगाई जाती है. चारों तरफ चटाइयाँ तथा कार्पेट बिछे थे. उन्होंने ग्रीन टी के साथ गाजर का हलवा पेश किया, बाहर भी कुछ मेहमान आ चुके थे. सुबह से आकाश पर छाये बादल अब छंट गये थे और तारे चमक रहे थे. जैसे प्रकृति भी मेहरबान हो गयी थी, क्योंकि वर्षा होने का अर्थ था सभी को भीतर जाना पड़ता. श्रीमती पुलू डिस्ट्रिक ऑफिस में एकाउंटेंट हैं. वह तेजू में रहती हैं. दोनों बच्चों को पिता ही सम्भालते हैं. श्री पुलू ने कहा, वे हाउस-हसबैंड हैं. उनके कैम्प में देश-विदेश से कई शोध विद्यार्थी आते हैं. अरुणाचल के जंगलों में जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों का अध्ययन करते हैं तथा यहाँ के जंगली प्राणियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करते हैं. वे स्वयं उनके साथ जंगलों में मीलों पैदल चलकर कैमरे तथा अन्य उपकरण आदि लगाने में मदद करते हैं. पक्षी प्रेमी भी वहाँ आकर ठहरते हैं. प्रदेश के इतिहास के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि अरुणाचल वासी शताब्दियों पूर्व चीन से म्यांमार  होते हुए यहाँ आये थे. वे कबीले बनाकर रहते थे. उन्होंने यह भी बताया कि खुदाई करने पर इस इलाके से जो स्तम्भ प्राप्त हुए हैं उन पर लिखी भाषा को पढ़ा नहीं जा सका है यहाँ विवाह संबंध मध्यस्थों के द्वारा तय होते हैं. लड़के वाले लड़की का हाथ मांगने जाते हैं तथा दहेज भी उन्हें ही देना पड़ता है. देखा जाता है कि पिछली दस पुश्तों में दोनों परिवारों में कोई रक्त संबंध तो नहीं था. रोइंग में कोई कालेज नहीं है, पढ़ने के लिए तेजू जाना पड़ता है, पर वहाँ भी केवल कला विषय पढाये जाते हैं. रोचक चर्चा चल रही थी कि भोजन का समय हो गया. पहले उन्होंने वह केक काटा, जो एगलेस केक मांगने पर हलवाई ने उन्हें थमा दिया था पर वह केक के स्थान पर मिठाई निकली, खोये की मिठाई जिसे केक की तरह सजाया गया था.. हमने नये वर्ष का स्वागत करते हुए वह बर्फी केक खाया. भोजन में केले के फूल व आलू की स्वादिष्ट सब्जी थी, लाई का सूखा साग बना था. रोटी सफेद व कोमल थी. बाहर की पार्टी का शोर बढ़ता जा रहा था. अग्नि के पास बैठकर सबने रात्रि भोजन किया, जो मेजबान द्वारा अति प्रेम से परोसा गया था.

कुछ देर बाद वे नये वर्ष की पार्टी में शामिल होने गये. सभी आनन्दमग्न थे, पुराने हिंदी फ़िल्मी गीत बज रह थे, पता चला कि मिथि साहब मुहम्मद रफी के फैन हैं तथा स्वयं भी गाते हैं. महिलाएं डाइनिंग रूम में थीं, नूना वहाँ पहुंची तो आकर्षक परिधानों में सजी स्त्रियाँ समूह में बैठी थीं, श्रीमती मिथि से पहले मिल चुकी थी सो उन्होंने सबसे परिचय कराया, लगभग सभी के पति सरकारी नौकरियों में थे. एक सुंदर गौरवर्णी महिला कहने लगीं उनके समाज में अधेड़ उम्र की महिलाएं उत्सवों में चावल की बनी मदिरा का पान करती हैं. वे इसके फायदे भी गिनाने लगीं. जब उसने कहा बिना पिए ही ये सब प्राप्त हो सकता है तो उन्होंने स्वीकार किया और वहीँ बैठी दो महिलाओं को दिखाकर कहा, ये दोनों बिलकुल नहीं पीतीं. आधा घंटा वहाँ बिताकर वे कमरे में आ गये.     

आज नये वर्ष का पहला  दिन है, सुबह साढ़े पांच बजे नींद खुली. रात को पार्टी सम्भवतः साढ़े दस-ग्यारह बजे तक चली होगी. ठंड काफी थी और और छोटे बच्चे वाले परिवार बहुत थे, सो लोग जल्दी चले गये होंगे. सुबह नहा-धोकर आठ बजे नाश्ता करके वे रोइंग से विदा लेकर रवाना हुए और मार्ग में चार नदियों को पार कर तिनसुकिया में खरीदारी करते हुए वापस एक बजे घर पहुंच गये. मौसम अच्छा है. धूप खिली है. नये वर्ष की पहली शाम का स्वागत करने के लिए वे तैयार हैं.

Monday, June 1, 2015

मैंगो शेक की पार्टी


कल शाम ही वे तावांग की यात्रा से वापस लौट आये, वापसी की यात्रा भी निर्विघ्न सम्पन्न हुई. दोपहर का भोजन एक ढाबे में किया. सुबह बोमडीला से चले तो सर्दी बहुत थी, स्वेटर, शाल सभी कुछ पहना हुआ था पर पहाड़ खत्म होते न होते ही मौसम का मिजाज बदल गया. अज सुबह जल्दी उठे, नन्हे को पढ़ने जाना था. ढेर सारे कपड़े धोये, अभी सभी को सहेज कर रखना है, पहले प्रेस भी करने हैं. यात्रा ने मन प्राण को नवीन उत्साह से भर दिया है. आज भांजी की मंगनी की रस्म भी होने वाली है. कल ही वे फोन करेंगे ताकि सब समाचार मिल सकें. अभी उन्हें तावांग यात्रा में खींचे गये फोटोग्राफ्स का भी इंतजार है. आज सुबह जागरण नहीं सुन पायी, यात्रा के दौरान एक दिन सुना था, “जीवन भी एक यात्रा ही है और उसमें इस शरीर में मिला जीवन तो एक पड़ाव भर है, अगले जन्म में अगला पड़ाव. जैसे शंकर जी के मंदिर में चढ़ने के लिए सीढियां होती हैं, वैसे ही असली मंजिल पर जाने के लिए यह जीवन-मृत्यु सीढ़ी की तरह है. यहाँ कुछ भी चिर स्थायी नहीं है, न ही साथ जाने वाला है सिवाय उस शांति के जो मानव का जन्म सिद्ध अधिकार है. मानव यहाँ दुःख उठाने नहीं आये हैं. इस पथ पर गोविन्द पग-पग पर साथ हैं.”

कल दिन भर बादल बरसते रहे, आज भी रह-रह कर वर्षा हो रही है. कल शाम को उसने तावांग यात्रा पर लेख टाइप करना शुरू किया है. तीन-चार दिन में पूरा करना है. कल रात को नन्हे ने उनके कमरे का फोन का कनेक्शन निकाल दिया, ताकि उन्हें पता न चले, पर देर रात उसे फोन पर बात करते सुना. इस उम्र में बच्चे कुछ कार्य छुपा कर करते ही हैं, चाहे उन्हें घर में कितना भी खुला रहने को कहा जाये. ज्यादा सुविधाएँ भी उन्हें बिगाड़ देती हैं, अपने मूल उद्देश्य से भटककर वे अन्य कार्यों में अपना समय लगाने लगते हैं. आज कई दिनों बाद धूप निकली है, पर मौसम में ठंडक अभी भी मौजूद है. कभी-कभी जीवन  परीक्षा लेता है, ऐसे में ईश्वर पर अटूट विश्वास ही स्थिर रख सकता है. धागे जो उलझ गये हैं अपने आप ही सुलझ जायेंगे, अभी जहाँ अंधकार नजर आता है कल वहीं प्रकाश होगा. वह परम चेतना सभी के भीतर है, सभी को निर्देश दे रही है, सभी सुरक्षित हाथों में हैं, किसी को भी भयभीत होने की जरूरत नहीं है.


आज सुबह जून ने उसे जन्मदिन का कार्ड दिया, जिस पर उनके मन की भावनाएं अंकित थीं, वह उसे कुछ जताना चाहते थे. उन्होंने एक सुंदर उपहार भी दिया और एक चाकलेट भी. सुबह सबसे पहले ससुराल से फोन आया, फिर एक-एक करके पिताजी, भाई-बहनों, सखियों, ननदों, बुआ-फूफा जी सभी के फोन आये. शाम को कुछ मित्र परिवार आयेंगे. वह पाव-भाजी तथा आम-दूध रस यानि मैंगो शेक बनाएगी. नन्हा कल रात को कम्प्यूटर पर कोई कार्ड बना रहा था, कमरे की लाइट बंद करके, जैसे कि उन्हें आभास हो वह सो रहा है, बच्चे इस उम्र में रहस्यमय हो जाते हैं. खैर अपनी तरह से जीने का सभी को हक है. बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो उनकी अपनी सोच होती है. जून सुबह थोड़ा परेशान थे, यह भी स्वाभाविक है, पर उसे तो किसी भी बात पर अब परेशानी होती ही नहीं, आनंद का स्रोत यदि भीतर मिल गया हो तो ये छोटी-छोटी बातें असर नहीं करतीं. वे किसी और महान उद्देश्य को पाने के लिए यहाँ भेजे गये हैं, वह रहस्य उन सबके भीतर है, उसके ही निकट उन्हें जाना है. जीवन के हर क्षण का उपयोग उस परम सत्य की खोज में हो सके तो ही जीवन सफल है. रोजमर्रा का कार्य भी उसी ओर इंगित करे, विचार, आचरण भी वही दर्शाए. अनुभव सच्चा हो, सजग होकर रहें, जीवन को एक विराट परिदृश्य में देखें. वे सभी श्वास के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं, उनकी चेतना परम चेतना का ही अंश है ! वे अपरिमित शक्ति के स्वामी हैं ! 

Wednesday, June 25, 2014

उड़ीसा की बाढ़



पिछले दो दिन फिर स्कूल से आकर भी स्कूल का कार्य करती रही. आज ‘असम बंद’ के कारण सभी स्कूल भी बंद हैं सो हफ्तों बाद वह अपनी पुरानी दिनचर्या का पालन कर पा रही है. अभी-अभी कपड़े देने आये धोबी ने आकर बताया, बायीं तरफ के पड़ोसी के घर के सामने एक कार दुर्घटना हुई है, पता चला एक उड़िया साहब के बच्चों ने (जो खुद ही ड्राइविंग सीख रहे थे) एक पेड़ में टक्कर मार दी. बंद के कारण कोई कार लेकर दफ्तर नहीं गया था, पैदल या साइकिल पर ही जाना पड़ा. बच्चों को घर में रखी कार व खाली सडकें देखकर मन में इच्छा हुई होगी. सुबह छोटे भाई का फोन आया, सभी के बारे में ढेर सारे समाचार मिल गये. कल रात नन्हे ने कहा था सुबह उसे न उठाया जाये, वह स्वयं ही उठा पर साढ़े नौ बजे. कल एक सखी के यहाँ बेटे के जन्मदिन की पार्टी थी, अच्छी रही, उसने पनीर व मिक्स्ड वेज अच्छी बनायी थी. कार्ड पर उसने वह कविता लिख दी थी जो वर्षों पहले छोटी बहन ने नन्हे को उसके जन्मदिन पर लिख भेजी थी. सभी को अच्छी लगी. आज उसे वे सभी पत्रिकाएँ भी देखनी हैं जो पिछले दिनों व्यस्तता के कारण नहीं पढ़ सकी.  

जून के दफ्तर के एक अधिकारी की अचानक हुई मृत्यु से सारा वातावरण दुखमय हो गया है. मृत्यु एक पल में सबकुछ छीन कर ले जाती है. उसके फंदे से कोई नहीं बच पाया, जीवन की डोर मृत्यु के हाथ में है. सारा संसार देखता रह जाता है और प्राणी किसी अज्ञात सफर की ओर चल पड़ता है, कौन जानता है कब उसकी मृत्यु होगी. कौन सा क्षण ईश्वर ने बनाया है जब वह अंतिम श्वास लेगा, परिवार जनों को असहाय रोता-बिलखता छोड़कर बंजारा अपना साजो-सामान समेट  लेता है. जब सभी जानते हैं, एक दिन बिछड़ना है तो क्यों इतने बंधन बाँधते हैं. तभी तो सन्त-महात्मा मोह-माया त्यागने की बात कहते हैं. जो यह सत्य जानता है कि जिसकी मंजिल आ गयी, वह उतर गया, जिसे आगे जाना है वह स्टेशन पर उतर गये लोगों के लिए आंसू नहीं बहता, दुखी नहीं होता.

अभी कुछ देर पूर्व क्लब से आते समय देखा उस घर के सामने बहुत भीड़ थी, आज चौथा है, उसने मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना की. टीवी पर आजकल चुनाव परिणामों की चर्चा है, बीजेपी अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने के लिए पूर्ण बहुमत जुटा चुकी है. कल से स्कूल में अर्ध वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गयी हैं.

परीक्षाएं समाप्त हुईं और पूजा का अवकाश आरम्भ हो गया. पिछले तीन दिन मौसम बादलों के कारण भीगा-भीगा सा था, आज धूप निकली है. पिछले दिनों वे पूजा पंडाल देखने गये, विशेष व्यंजन बनाये और कुछ मित्रों के घर भी गये. उसे परीक्षा की कापियां जांचनी हैं, काम करके उसे सदा ही एक ख़ुशी का अहसास होता है, जीवन को एक अर्थ मिला हो जैसे. उसे पत्र भी लिखने है, और वे सारे काम जो स्कूल खुलने पर नहीं हो पाएंगे. सम्भवतः बाढ़ के कारण कुछ दिनों के लिए  गौहाटी से डिब्रूगढ़ के लिए रेल चलनी बंद हो गयी थी, इस कारण माँ-पिता यहाँ नहीं आ पाए.

स्कूल में फिर से पढ़ाई शुरू हो गयी है और उसने जान लिया है कि पढ़ाना ही उसे पसंद है, टेस्ट, यूनिट टेस्ट और परीक्षाएं ये सब कतई पसंद नहीं, पर ये सब भी शिक्षण का ही अंग हैं. आज खेल का पीरियड भी था, क्लास दो के बच्चे खासतौर पर लडकियाँ पीटी बहुत एन्जॉय करती हैं, लडकों को भागने-दौड़ने वाले खेल ही पसंद हैं. सिलाई का कुछ काम कई दिनों से टल रहा था उसने आज करने की ठानी. नन्हे के घर आने में अभी आधा घंटा शेष है. आजकल वह सुबह उठने में बहुत देर करता है. आज जून डिब्रूगढ़ गये थे, दिसम्बर की उनकी दक्षिण-पश्चिम भारत की यात्रा के लिए टिकट बुक करवाने. आज सुबह उसने जागरण में एक प्रवचन सुना, जिसमें मन की तुलना झरने से की गयी थी जो निरंतर ताजगी लिए रहता है. उन्होंने यह भी कहा, “व्यक्ति को जीवन में प्रतिपल उत्साह बनाये रखना चाहिए ताकि उसमें नीरसता न आ जाये. योगी विचारों से ही पुष्ट होता है और पोषण करता है. मन में लगातार प्रेरणादायक विचारों का प्रवाह चलता रहे तो जीवन खिला रहता है”. उड़ीसा में भयंकर बाढ़ आयी है, वहाँ के लोग भूख-प्यास  से  भले ही पीड़ित हों, तूफान व बाढ़ ने भले ही उन्हें कितना दुःख दिया हो लेकिन जिजीविषा उन्हें पुनः समर्थ बनाएगी. वे फिर खड़े होंगे. दीवाली का त्योहार आने वाला है, जून नन्हे के लिए पटाखे ले आये हैं. उन्होंने सभी को कार्ड्स भी भेज दिए हैं. दीवाली पर एक भोज का आयोजन करने भी विचार है, ईश्वर उनके साथ है.



Monday, May 19, 2014

द स्टुपिडस - एक मजेदार फिल्म


नये वर्ष का शुभारम्भ उनकी देर रात तक चलने वाली पार्टी से हुआ, वे सभी मित्र के यहाँ थे जब घड़ी ने बारह बजाए एक और वर्ष शुरू हुआ. घर लौटते-लौटते पौने एक बज गये थे, सुबह देर से आरम्भ हुई, नाश्ते के बाद चाय बागान में घूमने गये, ठंडी हवा बह रही थी. दोपहर बाद लॉन में बैठकर एक मित्र परिवार के साथ कैरम खेला, थोड़ी देर एक फिल्म देखी. जून के स्वेटर की शुरुआत की. हारमोनियम पर गला साफ किया, शाम होते होते जब ठंड बढ़ गयी थी, मफलर लपेट कर टहलने भी गये. यानि कुल मिला कर नये साल का पहला दिन विभिन्न गतिविधियों से भरपूर रहा.

आज ठंड बहुत बढ़ गयी है, नौ बजने को हैं पर अभी तक कमरे से बाहर निकलने का मन नहीं हो रहा. नन्हे ने star movies पर एक हास्य फिल्म देखी - The Stupids. उसे मगन होकर हँसते हुए देखना अच्छा लगा. परसों से उसका स्कूल भी खुल रहा है. अगले महीने उसकी परीक्षाएं हैं, नूना को उसे ज्यादा समय देना होगा. उसने क्लब की पत्रिका के लिए कविताएँ भेज दी हैं. कल लाइब्रेरी से वह चार नयी किताबें लायी, एक mills and boons भी, जून के दिल्ली जाने के बाद समय थोड़ा ज्यादा मिलेगा, तो किताबें साथ देंगी. उस दिन एक सखी को उनके घर से जाने के बाद सर्दी-जुकाम हो गया तो उसने फोन करके पूछा, एलर्जी वाली कोई वस्तु तो उन्होंने स्प्रे नहीं की थी, उसे अच्छा नहीं लगा, खैर, अस्वस्थ होने वाले को सब माफ़ है.

It is a pleasant morning, she has taken bath, washed her hair and feeling good, has prepared lunch also, jun is going today, he will have early lunch. Nanha is busy with his ever going home work. Last evening they played badminton after many weeks, nanha and she have decided to play it regularly. They went for a walk and then to a friend’s house, she is still having some cold. Read some lines from the book, “ The meaning of culture” it is a difficult book but she likes difficult books, they attract her even though she can not understand them.


Yesterday only jun gave her this new dairy, so she decided to fill the empty pages with new poems which she will write from time to time. She got her Bengali friend’s letter after a long gap, who is in London and when one is far from country he remembers it more. Today is Idul-Juha, she will make some sevian as they cooked  in Good Morning India. Got up  at  5 with jun, did exercise had healthy breakfast of grapes(black one which he brought from Delhi with cheeku) and oats. Read few mind stimulating pages from, “The Learning of Culture” written by John Cowper Powys. It tells one should keep some time for intellectual thinking and not always be busy in worldly matters as she was in last few days, even she did not get time for her favorite magazines and news papers. Now onward she will try to make balance in physical,mental, spiritual and intellectual aspects of life. Yesterday evening she got the prize for ‘walkathon’ that was a great walk, she wanted to win and win only. 

Monday, May 5, 2014

दीवाली का उजास


Just now she read some shlokas from sixth chapter of ‘Bhagvad Gita’ edited by Dr Radhakrishnan, he was a great scholar, earlier politicians used to be great philosophers  but nowadays they are ordinary people, not all, but most of them are dishonest. She learned, to be aware is most essential and meditation helps in this. Gita also teaches methods of meditation, concentrating our mind on a single object. The wandering unstable mind causes misery. June is practicing yoga regularly, he gets up as soon as the alarm rings, and says very sweet ‘good morning’, he is very calm and controlled these days. Every minute he is busy doing something or reading, understands the power of love and harms of anger. So there mornings have become very very pleasant and before going to office they sit for 15 minutes listening and meditating on the instructions given by that teacher. It soothes the nerves and calms the mind. Then she picks up her harmonium. She thought, should also improve herself and most of all, should accept all her weaknesses and drawbacks, then undo them. According to J Krishnamurti when one goes into her/his foolishness, it goes. Also, one should not be judgmental. Take the things as they come.   


Today, after so many days of hot sun, is wet. Since morning clouds were visible and then around 8, it started raining. Last night she made paper caps for dahlia saplings to protect them from intense rays of sun but today all plants are happy to feel water and cold breeze after weeks. She did some more cleaning, Deepawali is very near, and also talked to some friends.

They are planning to have a get together on Diwali eve, so she rang few of her friends to have special meal.  It will be good to gather and celebrate festival of light with all of them. Tomorrow they will go tnk for shopping and doing air tickets reserved  for dec trip to Bhuvneshvar and puri and then to her home place. Today evening there is a film in the club, and her days are always full of books, computer and writing. One of her friend says, to work is very essential for a woman,  to know herself, to express and to gain confidence but she does not have such intense desire in her, what she will prove, she is what she is and it is nobody’s concern, if she does her duties as a sensible member of society, keeps her surroundings clean, does not harm anyone then it is OK, she is happy in her small world !

Woods are lovely dark and deep
But I have promises to keep
Miles to go before I sleep
And miles to go before I sleep

These lines just came to her mind when she opened this page after cleaning and setting the things of last night party. They celebrated Diwali yesterday, house was looking beautiful, decorated with colored bulbs and candles. Food was also liked by all specially ‘Gulab Jamun’ and chhole, which were  same as they ate in highway . Jun and Nanha both helped her in cooking and arranging table etc. Today they will go to club for fireworks and then take a round trip of town to see the shining lighted homes. Nanha is busy in housekeeping, he dose it very well. Diwali is a festival of love and harmony. When one gives sweets to mali, dhobi, sweeper, dhudhvala, a new bond develops.  She prayed, Let the spirit of Deepwali always remain intact.






Thursday, July 25, 2013

नये वर्ष में पिज़ा पार्टी

आज का दिन कुछ इस तरह व्यस्तता में गुजरा कि नये वर्ष के प्रथम दिन न तो वे ढंग से सुबह का नाश्ता ही खा सके न लंच. सुबह देर से उठे क्योंकि रात बारह बजे तक जगना था नये वर्ष का स्वागत करने के लिए. देर से उठने पर कैसा तो आलस्य छा जाता है, थोड़ा सा कुछ खाकर एक मित्र के यहाँ कैसेट लेने निकले वे मिले नहीं, बाजार होते हुए दूसरे मित्र के यहाँ पहुंच गये, वहाँ से बारह बजे लौटे तो शाम की पार्टी का कार्यक्रम बनाकर. वापसी में फिर पहले मित्र के यहाँ गये वापस आये दो बजे, उन्हें लंच पर आने का निमत्रंण देकर, पहले तहरी बनाई, फिर कैरम खेला, उनके जाने के बाद शाम की पिज़ा पार्टी की तैयारी, जो खत्म हुई रात के दस बजे. सो पहला दिन रहा मित्रों के नाम. पिज़ा ठीक बना था बस बेस थोड़ा पतला था जिससे कड़ा हो गया था, मित्रों के मध्य वेज, नॉन  वेज को लेकर थोड़ी बहस भी हो गयी, बात उसने ही शुरू की थी पर यहाँ तक फ़ैल जाएगी अंदेशा नहीं था. नन्हे ने दोस्तों के लिए कार्ड बनाये हैं, उसे मिले भी हैं, उसे पिज़ा भी पसंद आया, उसने अपनी लिखी कविता भी सबको सुनाई.
 आज बहुत दिनों बाद नन्हे का स्कूल खुला है, सुबह से वही पुरानी दिनचर्या शुरू हो गयी. उसे इतवार को धुले कपड़े भी प्रेस करने थे और रात की पार्टी के बाद किचन में फैले सामान को भी. काम तो सभी हो गया जून के आने से पहले, फिर खाना खाते वक्त उन्होंने वह कैसेट भी देख लिया जो कल लेने गये थे, ‘सिलसिला’ फिल्म उसे तो अच्छी नहीं लगी किसी भी लिहाज से. अभी एक और फिल्म ‘नमक हराम’ जो उसकी सखी ने उनके लिए रिकार्ड की है, भी देखनी है, पर समय कहाँ है, आज शाम से क्लब में क्लब मीट के कार्यक्रम आरम्भ हो गये हैं, वे लोग देर से पहुंचे तब तक ‘टी’ लगभग समाप्ति पर थी. कुछ देर बैडमिन्टन का मैच देखते रहे फिर एक कटलेट और चाय ली, ठंड बहुत थी. दोपहर को वह savey पढ़ती रही, ऋचा दत्त का इन्टरव्यू पढ़ा, कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से ग्रसित होने पर भी वह इतनी आशावान है, दुःख इन्सान को साहसी बना देता है. और एक वह है जो छोटी-छोटी बातों से घबरा जाती है. यूँ थोड़े बहुत परिवर्तन उसमें भी आये हैं, मसलन अब वह बीमार पड़ने पर या सिरदर्द होने पर उतनी परेशान नहीं होती. नन्हे पर झुंझलाती भी कम है और जून से नाराज हुए तो महीनों बीत जाते हैं, वैसे वह इतना ख्याल रखते हैं कि ऐसा मौका ही नहीं दते, पहले-पहल वह यूँ ही बहस करने लगती थी पर अब न तो वक्त है न ही energy. रोजाना के काम से थोड़ा सा ज्यादा काम किसी दिन हो जाये तो सिर में दर्द हो जाता है, फिर ऐसे में गुस्सा करके सरदर्द मोल ले ऐसा मूर्ख कौन होगा ?  




Wednesday, April 24, 2013

गणपति बप्पा मोरया



श्रीलंका में ‘पीपुल्स अलाइंस’ को वरीयता, श्रीमती चन्द्रिका कुमार तुंगे नई प्रधान मंत्री चुनी गयी हैं. आज फिर एक अंतराल के बाद उसने डायरी खोली है, जबकि पिछले कई दिनों से मन में यह बात आ रही थी, अपने विचारों को केंद्रित करने का यही एकमात्र साधन है. पिछली रात से ही मस्तिष्क में विचार मंथन चल रहा है, यहाँ तक कि सुबह प्रार्थना के समय भी मन स्थिर नहीं रह पाया. लगा शायद तन के भारीपन के कारण ऐसा हुआ हो, सो दोपहर भोजन में फल ही लिए, एक नाशपाती और एक सेब. जून भी देर से आने वाले थे, अब तन हल्का है ही डायरी उठाते ही मन भी शांत है. कई बार वादा तोड़ चुकी है सो अब नियमित लिखने का कोई वादा नहीं, जबकि उसे मालूम है, यह उसके लिए नितांत आवश्यक है और वर्षों बाद कभी इस साल की कोई बात देखने के लिए डायरी खोलेगी तो खाली पन्ने उसका मुँह तो नहीं चिढ़ायेंगे. पिछले दिनों अपने करीब आने से बचने के लिए ही भागती रही इन पन्नों से. आज शाम को एक मित्र परिवार में बच्चे के पहले जन्मदिन की पार्टी में जाना है, याद आता है उनकी शादी के बाद उन्हें चाय पर बुलाया था. उसने पिस्ते के छिलकों से एक गणपति की आकृति बड़े से लकड़ी के बोर्ड पर बनाई है, उसे सेलोफेन पेपर से ढकना होगा धूल से बचाने के लिए और शिव-पार्वती की उस पेंटिंग को भी फ्रेम करना है जो भाभी ने बनायी था.

  कल शाम पार्टी में किसी दक्षिण भारतीय महिला ने कहा, यू हैव एन आर्टिस्टिक फेस, वर्षों बाद कोई ऐसी बात  सुनकर मन में कई भूली यादें ताजा हो गयीं. वह उसकी परिचिता नहीं थीं, और न ही उसने उनका नाम पूछा. पर घर आकर बाथरूम के शीशे में अपने ही चेहरे को ऐसे देखा जैसे पहली बार देख रही हो. पार्टी में जाने से पहले वे एक और परिचित के यहाँ गए थे, उसने ध्यान दिया अच्छा सामान स्टोर में रखा है और सामान्य सामान बाहर सजाया है. उसका मन हुआ कहे क्या एक दिन उन्हें घर सजाने में मदद कर दे.. ? जून को उसने कहा, वही, उस कम्प्लीमेंट के बारे में, कुछ नहीं बोले...तारीफ करने के मामले में थोड़ा कंजूस हैं, पर प्यार के मामले में नहीं. उसके स्वास्थ्य को लेकर जरा सा पता चल जाये तो इतना ध्यान रखते हैं..नन्हे का आज हिंदी का टेस्ट है, और सोमवार से उसके यूनिट टेस्ट भी हैं, अब उसे परीक्षा से कोई घबराहट नहीं होती, आनंद आता है. कल पार्टी में एक और परिवार मिला, वही जो उस दिन उनके यहाँ आये थे, जून के बीएचयू के प्रोफेसर तथा उनकी बेटी व दामाद. होस्ट अच्छी लग रही थी, बहुत जीवंत है वह, ढेर सारे स्वर्ण आभूषण और भारी बार्डर वाली साड़ी, थकावट का नामोनिशान नहीं था उसके चेहरे पर, शायद नन्हे के पहले जन्मदिन पर नूना भी इतनी ही खुश थी, किसी ने कहा भी था, बेटे से ज्यादा खुश माँ है. गमले में गुलाब का एक सुंदर फूल खिला है उसने सोचा, जून को दिखाएगी.

  सुबह के सवा दस हुए हैं, शनिवार को इस वक्त वह टीवी के सामने होती हैं, ‘जमीन-आसमान’ के पात्रों के साथ, लेकिन आज बिजली चली जाने के कारण पसीने में तर हवा के झोंके की प्रतीक्षा कर रही है. सचमुच अभी-अभी हवा का एक हल्का सा झोंका उसके चेहरे को सहला गया है. ‘धर्मयुग’ में उस लम्बी कहानी का अंत अच्छा नहीं हुआ, बुरे अंत भाते न हों, लेकिन होते हैं, वेद राही की कहानी में बांधे रखने की क्षमता थी. कल बहुत दिनों बाद वे एक परिचित के यहाँ गए, जून ने कहा, लुकिंग गुड, गले में नेकलेस पहन लेने से कितना अंतर आ जाता है व्यक्तित्व में, उसे अब बढ़ती उम्र के साथ इन बातों का ख्याल ज्यादा आ रहा है, शायद यही उचित भी हो. कल उन लोगों से भगवद् गीता का एक कैसेट भी लायी, अभी ध्यान से बैठकर नहीं सुना है, वाचक की आवाज उतनी मधुर नहीं है, पर उसे आवाज से क्या लेना, उनकी बात पर ध्यान देना होगा. सुबह-सुबह एक स्वप्न देखा, वे लोग घर गए हैं, राखी का दिन है पर वह राखी लाना ही भूल गयी है, सभी भाई बैठे हैं, इतने वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि शायद उसकी राखी वक्त पर नहीं मिलेगी. इसी कारण यह स्वप्न आया होगा. कल शाम उन्होंने कैरम खेला. खुली हवा में साइकलिंग की, अब उसे आसान लगती है, अभ्यास न होने के कारण ही पहले उसे परेशानी होती थी.  




Thursday, April 4, 2013

बड़ी और मुंगौड़ी




कल शाम वे एक विवाह की रिसेप्शन पार्टी में गए, जून के एक सहकर्मी का विवाह, जो बड़ी बाधाओं के बाद हुआ था, आने में देर हो गयी पर सुबह वे समय से उठे, वहाँ कई और लोगों से भी मिलना हुआ. उससे पहले नन्हे का एक मित्र आया था अपने माता-पिता के साथ, नन्हा बहुत खुश था.

  महीने का अंतिम दिन है, नन्हे का हाफ डे है, जून आज लंच पर नहीं आने वाले थे सो सुबह उसने अपनी सुध ली, मालिश करके देर तक स्नान किया, कैसा हल्का-हल्का लगता है, इसीलिए स्पा इतने प्रचलित हैं विदेशों में. आज लेडीज क्लब में सलाद सजाने की प्रतियोगिता है. वह नन्हे को लेकर पैदल ही जायेगी, वह कुछ देर वहाँ खेलेगा या पढ़ेगा.

  मार्च महीने का पहला दिन, शुरुआत अच्छी है इंशाअल्लाह अंजाम भी अच्छा होगा. मौसम का रूप बदला नहीं है, बादल गरज कर अभी शांत हैं. कुछ मिनट पहले ही कुछ मुसलमान औरतें ‘फितरा’ मांगने आयीं थीं, चम्पा ने उन्हें यह कहकर कि यहाँ मुस्लिम परिवार नहीं रहता, जाने के लिए कह दिया. कल रात को स्वप्न में फिर पाकिस्तान की सैर की, इससे उसका जुड़ाव किसी पिछले जन्म की याद का परिणाम है, एक कशिश है जो उसे खींचे लिए जाती है, उर्दू सीखनी फिर शुरू करनी होगी, लेकिन असमिया जो पहले सीखनी शुरू की है उसके बाद ही. कल एक पंजाबी सखी से ‘गुरुमुखी’ की वर्णमाला लिखकर लायी है, “गुलदस्ता” पंजाबी पत्रिका अब पढ़ सकती है. कल उसने एक बच्चे का स्वेटर बनाना भी शुरू किया है दस दिन में बन जाना चाहिए. जून कल शाम मोरान से आए तो थके हुए थे पर नन्हे को टीटी के लिए छोड़ने गए, ही इज ए ग्रेट फादर एंड लविंग हसबैंड टू..उसने सोचा आज दोपहर वे ढेर सारी बातें करेंगे, उनके आने से पहले ही वह खाना बना कर रखेगी. आज का नीचे लिखा सूत्र भी कुछ कम नहीं-
Most of the shadows of this life are caused by our standing in our own sunshine.

हम वही बन जाते हैं जैसा सोचते हैं, अँधेरे से हटना है तो मन में सूरज को रास्ता देना ही होगा न..

   दो बजने वाले होंगे, घड़ी लॉन में तो लगाई नहीं जा सकती न, सफेद और पीली तितलियाँ जहाँ उड़कर, पौधों व पेड़ों के पत्ते हिलकर, चिडियाँ बोलकर और धूप सहलाकर उसका मन बहलाव कर रहे हैं. कल शाम को जून जब नन्हे को लेने गए थे इसी जगह लेटकर नीले आकाश को तकते हुए उसने वादा किया था, कल फिर आयेगी. सुबह व्यस्तता भरी थी, जून के कहने पर बड़ियां बनायीं, फिर बेक्ड सब्जी, लोभिया भी, समय तो लगना ही था. नन्हे को चाकलेट देना आज फिर भूल गयी लेकिन उसे आलू परांठा जरूर पसंद आया होगा. आज सुबह असमिया अक्षरों से पहचान बढ़ाने का वक्त ही नहीं मिल पाया, अभी पढ़ेगी. जून के डिपार्टमेंट में उनका कम्पयूटर अभी तक ठीक नहीं हो पाया है. आज बैंक के काम की वजह से वे जल्दी चले गए, उसे उनके बैंक सम्बन्धी कार्यों की समझ नहीं है, सिर्फ पे स्लिप देखने भर से मतलब है, ऐसा होना तो नहीं चाहिए, यह मालूम होना ही चाहिए कि कितना टैक्स वह देते हैं, कितना बचाते हैं. एक दिन सब कुछ पूछेगी, नोट भी कर लेगी क्योंकि उसे याद तो रहेगा नहीं.




Tuesday, February 26, 2013

भुट्टे के पेड़



कल खतों के जवाब का दिन था. शाम को उसकी तीन सखियाँ एक साथ आ गयीं, परसों जो केक बनाया था, उन्हें पसंद आया, आज एक एनिवर्सरी पार्टी में जाना है, कल रात नूना सोच रही थी कि इस अवसर पर एक कविता लिखेगी लेकिन अब सम्भव नहीं लगता, समय नहीं है या कहें कि वैसा मूड नहीं है, शायद लिख भी पाए, कोशिश तो करेगी ही. जून की स्वास्थ्य समस्या अभी ठीक नहीं हुई है, वह आजकल थोड़ा उदासीन से रहते हैं, या फिर उम्र के साथ यह स्वाभाविक है. कल लाइब्रेरी से लौटते समय हल्की बूंदाबांदी होने लगी, वे लोग एक परिचित के यहाँ रुक गए. गृहणी का भाषण शुरू हो गया, वह पता नहीं कैसे इतना बोल लेती हैं.

कल कविता जैसा कुछ लिख नहीं सकी, पार्टी अच्छी रही, लौटने में काफी देर हो गयी. उनका उपहार शायद उन्हें पसंद आया हो शायद नहीं, पर फूल तो अवश्य भाए होंगे, फूल जो वह  हमेशा ले जाती है ऐसे अवसरों पर, उन्हें प्रतीक्षा भी रहती है.. कल रात उसे भी अपनी शादी की स्मृतियाँ ताजा हो गयी थीं. जून भी उसके भावों में सम्मिलित हो गए, वह दिल की बात समझ जाते हैं. नन्हे का लिखने का आजकल बिलकुल मन नहीं करता है, पर पढ़ने में वह ठीक है. आज वह बहुत देर से सोकर उठा है, उसकी मर्जी पर छोड़ दिया जाये तो शायद वह  दस बजे तक भी न उठे.

कल उसने चंद पंक्तियाँ लिखकर भिजवा दीं, अभी तक उनका फोन नहीं आया है, शायद वह झिझक रही हों. आज भी मौसम गर्म है. सुबह देखा गुलाब की पत्तियों में छेद है, जीनिया के पौधों में भी शुरू हो रहे हैं, शाम को दवा का छिडकाव करेंगे. अगले महीने गुलदाउदी की कटिंग्स भी लगनी हैं, उसके पत्तों पर भी दवा का छिड़काव जरूरी है. कोलकाता रेलवे स्टेशन से जो पुस्तक खरीदी थी “किचन गार्डन” उसे भूल ही गयी, आज पढ़ेगी.

नन्हे का परीक्षा परिणाम अच्छा रहा चार सौ में से तीन सौ तिरानवे अंक मिले हैं और दूसरी पोजीशन है क्लास में, वह बहुत खुश था कल. शाम को क्लब में ‘दोस्त’ फिल्म देखी, जो जानवरों पर थी, उसे बहुत पसंद आई, पिछले कुछ दिनों से नूना के दायें हाथ में कुछ अनोखी सी अनुभूति होती है, डाक्टर को बताना भी मुश्किल है, जून को भी नहीं बताया है अभी तक, कभी-कभी लगता है कहीं यह उसका वहम न हो, पर टहलते समय कभी-कभी हाथ देर तक जब लटका रहता है, ऊपर उठाना एक बड़ा काम सा लगता है.

पिछले सप्ताह वे लोग दो दिनों के लिए तेजपुर गए थे. दो दिनों की भीषण गर्मी के बाद आज मौसम अच्छा हुआ है. कल रात को वर्षा हुई, आंधी भी आयी होगी क्योंकि सुबह भुट्टे के सभी पेड़ गिरे हुए थे. पीछे आंगन में व बाहर सभी ओर पत्ते बिखरे हुए हैं. शनिवार को अस्पताल गयी थी, कल पहला इंजेक्शन लगा, कल से हाथ में वैसा अनुभव नहीं हुआ है, एक बार फिर चिकित्सा शास्त्र के प्रति मन श्रद्धा से भर गया है. कल “कल्याण” पढ़ा कुछ देर, मन हल्का होगया, सरे संशयों से दूर..ॐ पूर्ण मदः पूर्ण मिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते, पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्ण मेवावशिष्यते. आज इस समय भी काफी तेज वर्षा हो रही है झमाझम..उसने सोचा, अच्छे-भले मूड को बिगाड़ना हो तो सोनू को कोई काम दे देना चाहिए, कई बार कहने पर भी नहीं होता है जब काम, तो खीझ उठती है और कल्याण में पढ़े वे सारे वाक्य आँखों के सामने आ जाते हैं कि क्रोध आने पर इंसान विवेक शून्य हो जाता है.

Monday, November 19, 2012

आइसक्रीम वाला सपना



पड़ोसियों के यहाँ कल पार्टी में ज्यादा खाना नहीं लगा, थोड़ा बच गया है और वे चाहते हैं कि हम उन्हें कहें, कोई बात नहीं हम खा लेंगे..कैसी अनुचित अपेक्षा..बासी खाना..कल शाम को जून ने ऐसा ही कुछ कहा था, ऐसे ही पड़ोसियों के सम्बन्ध खराब होते हैं, अगर उन्होंने रात को ही हमें बुलाया होता.. छोडो इन बातों को, उसने खुद से कहा. जून आज दोपहर को घर नहीं आ रहे हैं, फील्ड गए हैं. आज सफाई कर्मचारी देर से आया सो वह व्यायाम नहीं कर सकी, अक्सर उसका व्यायाम किसी न किसी कारण से छूट ही जाता है..कल वे एक सिंधी परिवार के यहाँ गए. आज जून यदि समय पर आए तो शाम को वे कहीं जा सकते हैं.

पहली दिसम्बर..यानि बड़े भाई का जन्मदिन..आने के बाद उसने खत लिखा था..छोटे भाई को छोडकर किसी ने भी तो जवाब नहीं दिया,,,,खुश रहें सभी.  कुछ ही दिन में वह सभी को नए वर्ष के कार्ड भेजेगी. उसने एक सूची बनायी. आज मौसम कितना ठंडा है, कल शाम से ही वर्षा हो रही है. जून का दफ्तर कल बंद हो गया आसाम बंद के कारण. नन्हे का स्कूल तो कल बंद था ही, परीक्षायें आने वाली हैं, उसने उसे पढ़ने के लिए कहा.

एक नए सप्ताह की शुरुआत..मौसम तो अच्छा है खिला-खिला और उसका मन भी. दस बजे थे. घंटी बजी, उसे लगा शायद धोबी आया है, पर इलेक्ट्रीशियन था टेबल लैम्प का स्विच ठीक करने आए थे. कल उसकी असमिया सखी आयी थी परिवार सहित, उन्होंने खाने पर बुलाया था, वे लोग नए मकान में जा रहे हैं, बड़ा है, लॉन भी है. अच्छा घर है. कल वे बाजार से लौटते समय देखकर आए. किसी का पत्र नहीं आया, उसने सोचा वह बीस दिसम्बर तक प्रतीक्षा करेगी, फिर अपने हाथ से बनाये कार्ड्स भेजेगी. जून न्यूजट्रैक के दो कैसेट लाए हैं, जम्मूकश्मीर के शरणार्थियों पर कार्यक्रम देखकर बहुत खराब लगा. सरकार कुछ करती क्यों नहीं, असम में राष्ट्रपति शासन है तो क्या कश्मीर में..वहाँ पर इतना जुल्म क्यों..और बेनजीर भुट्टो पहले मित्रता की बातें करती थीं, पर उनके ये भड़काने वाले भाषण..

छह दिसम्बर यानि अयोध्या में विश्व हिन्दूपरिषद तथा बीजेपी द्वारा कार सेवा. जून आजकल तलप में हैं, एक हफ्ते बाद वापस आएंगे, शाम को फिर से फोन करेंगे. वह लिख रही थी कि द्वार पर एक गरीब औरत आयी कुछ मांगने, उसे पैसे देकर आयी ही थी कि फिर घंटी बजी, इस बार धोबी था और वह गया भी नहीं था कि पडोसिन आ गयी सरसों का साग लेकर जिसमें पालक भी मिलायी गयी थी और थोड़ासा खट्टा दही. अच्छा बना था. कल दोपहर वह  नन्हे को लेकर अपनी दूर की रिश्तेदार उसी पंजाबी परिचिता के यहाँ गयी थी. वहाँ पहली बार महाजोंग का खेल सीखा, बहुत रोचक खेल है. उन्होंने एक बात कही कि नन्हे को किसी भाई या बहन की जरूरत है..और उसे भी लगता है कि उनकी बात ठीक है, जून के आने पर वह  उनसे कहेगी जरूर.

आज अभी तक जून का फोन नहीं आया, उसने मन ही मन उसे शुभकामना भेजी. उसके न रहने पर रात को देर से नींद आयी सो सुबह देर से उठी, जल्दी जल्दी नन्हे को तैयार करके भेजा, अब कल-परसों उसका स्कूल बंद है, सोमवार को इंग्लिश का पेपर है. उसे फिर से कल की बात याद आ गयी नन्हे का साथी.. कल शाम उसकी दो परिचित महिलाएं आयीं, एक बच्चा भी साथ था, नन्हा बहुत खुश था. बच्चे एकदूसरे की बात कैसे समझ लेते हैं बिन कहे ही..
आज सुबह उसकी नींद खुल गयी सोनू की हँसी की आवाज से, वह सपने में हँस रहा था. उठा तो कहने लगा मेरा सपना नोट कर लीजिए...जिससे पापा पढ़ सकें-

“ मैं और एक बच्चा जा रहे थे, एक आइसक्रीमवाला और एक किताब वाला मिला. तब तक आइसक्रीम वाले ने अपनी दुकान खोल ली तो मैं उसके पास चला गया. फिर मैंने उसे एक लकड़ी दी कि वह आइसक्रीम उस पर लगाकर दे तो उसने कहा कि नहीं दूँगा. फिर मैंने कहा कि बना कर दो, फिर उसने नहीं बनाया तो उसी ने एक आइसक्रीम को मेरे चेहरे पर लगा दिया फिर मैं खूब हँसने लगा.”  

Saturday, September 22, 2012

जश्न का माहौल



कल रात वे लोग साढ़े दस बजे वापस आए. कार्यक्रम अच्छा था, पर पार्टी का या शादी-ब्याह का भोजन गरिष्ठ तो होता ही है, पेट अभी भी इसकी खबर दे रहा है. समारोह में न सादगी ही थी, न कोई नियम, बस अपने आप चलता जा रहा था, नन्हा तो वहाँ की भीड़, रोशनियों और बच्चों में कैसा घुलमिल गया, उसे बड़ा आनंद आ रहा था था. माँ पहले तो वहाँ जाने के नाम से ही मना कर रही थीं, शुरू में वहाँ अपने को अनफिट भी समझती रहीं पर बाद में बहुत आनंद ले रही थीं. सब मिलाकर देखा जाये तो सब ठीकठाक ही था. आज उसने सभी भाई-बहनों को पत्र लिखे, और एक छोटा सा पत्र जून को भी, उसे कैसा लगेगा इतना छोटा पत्र देख कर. वह उसे एक पेज पर लिख कर ले जायेगी, बाजार से पुस्तकें भी लाएगी और भी कुछ सामान यदि सम्भव हुआ. आज सुबह तीन बजे ही वह छत से नीचे आ गयी थी, ऊपर ठंड बढ़ गयी थी. नन्हे की नाक बंद हो गयी है, उसका बिस्तर पिताजी ने नीचे लगा दिया. वह भी कुछ देर सोयी एक स्वप्न देखा कि कॉलेज में या हॉस्टल में उसके कमरे का ताला बदमाशों ने तोड़ दिया है और उसकी किताब कॉपी चुरा ली है. रो ही पड़ी होती कि नींद खुल गयी. पर अब पढ़ते-पढ़ते उसकी आँखें बंद हो रही हैं, उसने सोचा पहले स्नान करना ही ठीक रहेगा.

एक सुंदर पन्ने पर उसने लिखा- मिसेज एस ने बैठक के दरवाजे पर खड़े होकर कमरे पर आखिरी नजर डाली, हाँ, अब ठीक है. कल ही उन्होंने सारे पर्दे, कुशन, चादरें आदि धुले-धुलाए प्रेस किए हुए बिछाये थे. कमरे की एक-एक वस्तु को पोंछ कर नए सिरे से रखा गया था. कमरा निखरा-निखरा सा लग रहा था. दूसरे कमरों में भी कुछ न कुछ बदलाव तो आए थे और रसोईघर में भी. हों भी क्यों न मिस्टर एस अगले हफ्ते सेवा निवृत्त हो रहे थे. उस अवसर पर उनके सभी बच्चे अपने-अपने परिवारों के साथ आ रहे थे. घर में जश्न का सा माहौल रहेगा. पति-पत्नी दोनों अपने-अपने विचारों में खोये रहते थे. एक-दूसरे से कहे या पूछे बिना ही उनके चेहरे देखकर जाना जा सकता था की वे अपने भविष्य के बारे में सोच रहे हैं. पत्नी प्रसन्न थी कि सेवा निवृत्ति के बाद दोनों साथ-साथ समय बिताएंगे. कम बोलने वाले उनके पति यह सोचा करते थे की अपना समय संगीत, पुस्तकों और बागवानी को देंगे. जाहिर है इसमें पत्नी का साथ तो रहेगा ही. दोनों को साथ-साथ बिताए वर्षों की खट्टी-मीठी स्मृतियाँ बार-बार आकर घेर लेती थीं. मिसेज एस की आँखों में कई बार एक शिकायत झलक जाती थी जो कड़वी स्मृतियों का परिणाम थी और कभी-कभी एक स्निग्ध आभा जो सार्थक क्षणों की देन होती थी. वह  कब चाहती थीं कि उन सब बीती बातों को याद करें पर स्मृतियों पर किसी का वश तो नहीं. यही हाल कमोबेश श्री एस का था, यह अलग बात थी कि उनकी यादों का दायरा कभी घर-परिवार में सिमट जाता था और कभी कार्यालय व सहयोगियों में. अपने विभाग में एक उच्च अधिकारी रहे थे पिछले कई वर्षों से, जिम्मेदारियां काफी थी, जिन्हें वह अच्छी तरह से निभा रहे थे. स्वभाव से मितभाषी, उदार, कोमल हृदयी वह कभी अपने परिवार के प्रति कठोर हो सके थे अब सोचकर जैसे उन्हें विश्वास नहीं होता था. हो सकता है ऐसे किन्हीं दुर्बल क्षणों में उनका हृदय अपनी जीवन संगिनी के प्रति किये गए जाने-अनजाने अपराधों के लिए क्षमा मांग चुका हो. बड़ा पुत्र उनके कठोर अनुशासन में पला जिसका असर उसके मन-मस्तिष्क पर कितना पड़ा यह तो नहीं कहा जा सकता पर यह जरूर है कि वह अंतर्मुखी है मंझले और छोटे बेटे के आते-आते यह अनुशासन काफी ढीला पढ़ गया और सबसे छोटी बेटी तक तो समाप्त प्रायः ही हो गया. अब सभी आ रहे हैं. कभी-कभी किसी विवाह अथवा त्यौहार के अवसर पर ही ऐसा हो पाता है.
आज वह दिन आ ही गया. पिछली रात देर तक बातें होती रहीं. वे दोनों तो मुश्किल से दो-तीन घंटे ही सो पाये होंगे. और सुबह पाँच बजे ही आदत के अनुसार उठ गए हैं. प्रातः भ्रमण उनका पुराना शौक है. पिछले कुछ वर्षों से श्रीमती एस का भी, पहले उन्हें कहाँ वक्त मिल पाता था. जब सब बच्चे छोटे थे. सुबह उठते ही घर के कामों में लग जाना पड़ता था. बच्चे जब तक जगें वह कितना कम निपटा चुकी होती थीं. तब खर्च अधिक था सभी काम उन्हें अपने हाथों से करने होते थे. घर में गैस का चूल्हा भी नहीं था तब. वे दिन क्या वह कभी भूल सकती हैं, सर्दी हो या गर्मी उनके दिन की शुरुआत पाँच बजे ही हो जाती थी. अपनी पूरी मेहनत और आंतरिक शक्ति के बल पर उन्होंने सभी बच्चों को अच्छे संस्कार दिए, आधुनिक माता-पिता की तरह उन्होंने बच्चों के पालन-पोषण पर पुस्तकें तो नहीं पढ़ी थीं बस जो कुछ अपने आस-पास देखा था और जो उनके मन को अच्छा लगा वही शिक्षा उन्हें दी. पर जब परिवार बड़ा हो तो कोई न कोई पक्ष छूट ही जाता है बच्चों को बाहर की दुनिया के जिस कुप्रभाव से बचाकर रखा वहीं घर में उन पर होता अन्याय शायद वे देख नहीं पाए. रोजी-रोटी की फ़िक्र ने तथा परिवार पर विश्वास ने जो कि सामान्यतः हर घर मे होता ही है. बड़ा पुत्र और उसकी पत्नी परसों ही आ गए थे. बेटा अच्छे पद पर है, पत्नी भी मिलनसार और शौक़ीन मिजाज की पाई है. पर ईश्वर जहां फूल खिलाता है कांटे भी उगाता है. बेटे की शादी को दस-ग्यारह साल हो गए हैं पर आंगन अभी तक सूना है. मंझले बेटे की नौकरी भी अच्छी है, वह पत्नी के साथ दो हफ्ते पहले आ गया है. और तीसरे बेटे की शादी अभी हाल में ही हुई है. छोटी बेटी अभी पढ़ाई कर रही है, उसकी शादी को छोडकर सभी बच्चे अपने अपने परिवार में व्यवस्थित हैं. सांसारिक दृष्टि से देखें तो सभी खुश हैं.
वह जो शब्द-चित्र लिख रही थी लगता है, पूरा हो गया है क्योंकि अब कलम रुक-रुक जाती है.

Friday, July 20, 2012

गोलगप्पों का कार्यक्रम


देखते-देखते पूरा एक माह बीत गया. नन्हे का जन्मदिन आया और उससे एक दिन पहले माँ-पापा व छोटा भाई आये थे. उनका आना उन्हें बहुत आनंदित कर गया व उन्हें भी उनका घर देखकर अच्छा लगा. जन्मदिन की पार्टी भी अच्छी रही और उसके बाद वे जगह-जगह घूमने गए, तिनसुकिया, ज्योति होटल, ड्रिलिंग साईट. पापा दिगबोई भी देख आये. एल.पी.जी. प्लांट, ओ.सी.एस. सभी दिखाए उन्होंने. पापा ने कितनी अच्छी बातें बतायीं और माँ ने भी सुनाई अपनी कहानी. छोटा भाई भी कहता रहा बीच-बीच में आपने बैंक के अनुभव, खट्टे-मीठे. और अब वे लोग चले गए हैं, पीछे रह गयी हैं स्मृतियाँ ! जो उनके मनों में सदा सजीव रहेंगी. कल सभी को पत्र भी लिखे. लगता है नन्हे का इरादा आज देर तक सोने का है, वर्षा दो दिन लगातार होकर अभी-अभी रुकी है. सो जून बाइक से ऑफिस चले गए हैं, अभी सात भी नहीं बजे हैं, उसे ढेरों काम करने हैं.

ग्यारह बज चुके हैं, आज जून बस से गए हैं सो आने में देर होगी. उसके सुबह के सभी आवश्यक कार्य हो चुके हैं, आज भी सुबह से बादल बने हैं पर लगता है दिन में मौसम स्वच्छ रहेगा. कल शाम भी तेज वर्षा के कारण वे न घूमने जा सके न ही बाजार. आज सुबह जून से वह बेबात ही गुस्सा हो बैठी, और पता नहीं क्यों दाल में अदरक भी डाल दी जबकि उसे अदरक नापसंद है.

आज भी सुबह-सुबह उसने डायरी खोली है. दिन भर तो किस तरह बीत जाता है पता ही नहीं चलता. कल उसने अपना वजन देखा कितनी तेजी से बढ़ रहा है, नियमित व्यायाम की आदत नहीं रही थी, फिर से डालनी होगी.

उस समय नन्हा उठ गया आजकल बहुत बातें करता है, हर वक्त चाहता है उसी को खिलाते रहें, देखते रहें, सुनते रहें, शाम के समय कुछ ज्यादा ध्यान चाहता है. अभी जून के आने में एक घंटा है. सुबह हुई वर्षा के कारण गोलगप्पों का कार्यक्रम तो स्थगित कर दिया था उन्होंने पर अब अच्छी खासी धूप निकल आयी है. पिछले कई दिनों से वे किसी परिचित के घर नहीं गए हैं सामाजिक शिष्टाचार के अंतर्गत. आजकल वह एक किताब पढ़ रही है- The President’s child अच्छी है, Fay Weldom की लिखी  हुई.


 

Wednesday, February 1, 2012

क्लब में टेलीविजन


आज उनके विवाह को पूरे सात महीने हो गए. कहाँ इंतजार के इतने वर्ष...और अब कैसे बीत गए यह सात महीने. कितनी खट्टी-मीठी यादें हैं इन सात माहों की, खट्टी कम मीठी ज्यादा. आज उसका मन शांत है, कहीं कोई उद्वेग नहीं, जैसे शांत पानी पर धीमे-धीमे नाव अपने लक्ष्य की ओर बहे जा रही हो. न तूफान का डर, न राह भटकने का. जून का साथ आश्वासन भरा है, सुरक्षा भरा. फिर उसमें भी इतना तो साहस है कि भविष्य का चाहे वह सुंदर हो या असुंदर, सामना कर सके. इन महीनों में एकाध बार उसका विश्वास डगमगाया है वैसा होने पर उसे दुःख भी हुआ, अब वैसा न हो इसकी चेष्टा भी करेगी उसने सोचा. दोपहर को एक किताब पढ़ती रही, रमेश बक्षी का उपन्यास ‘बैसाखियों पर टिकी इमारत’ नायक पर क्रोध आया उसे बेहद क्रोध. किताब पढ़ना शुरू करने के बाद बाकी सब भूल जाती है, कई आवश्यक कार्य रह गए अब उसने सोचा है कि सारे काम खत्म करने के बाद ही पढ़ना शुरू करेगी.
आज इतवार है, शाम को क्लब में टीवी पर एक पंजाबी फिल्म दिखाई जायेगी, ‘उडीकां’. सुबह ‘स्टार ट्रेक’ देखने भी वह गए थे. कितने दिनों के बाद नूना ने क्लब में टीवी देखा, पर उसे लगा उसके स्तर में कोई फर्क नहीं आया है, कार्यक्रमों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. इतने दिनों से घर से आये पत्रों से व पत्र-पत्रिकाओं में टीवी कार्यक्रमों के बारे में पढ़कर उसके प्रति जो आकर्षण पैदा हुआ था, वह केवल एक अच्छी फिल्म देखने तक ही रह गया है. कल यानि शनिवार को एक डिनर पार्टी थी, नूना ने पहली बार जून को अपने सहकर्मियों और उच्च अधिकारी के साथ देखा. वह काफ़ी उत्साहित लग रहा था, पार्टी के आयोजन में भी उसका योगदान था. नूना को बहुत अच्छा लगा और उसने मन ही मन दुआ की, कि वह इसी तरह सभी का प्रिय पात्र बना रहे.