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Tuesday, January 2, 2024

जूलियस सीज़र का कैलेंडर

रात्रि के पौने नौ बजे हैं। वैसे तो चारों ओर शांति है, पर कहीं दूर से किसी के घर कोई मशीन चलने की आवाज़ आ रही है। यहाँ दाँये-बायें, आगे-पीछे कोई न कोई घर बनता ही रहता है, फिर उसमें इंटीरियर का काम शुरू हो जाता है। यह तो अच्छा है कि शाम को छह बजे के बाद शोर नहीं कर सकते, शायद किसी ने विशेष अनुमति ली होगी। मौसम आज ज़्यादा ठंडा नहीं है। बहुत दिनों बाद पंखा चलाया है। रात्रि भ्रमण के समय देखा, आकाश पर चाँद खिला था, कल पूर्णिमा है, आकाश निर्मल था और हवा सुखदायी। उधर उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, और हो भी क्यों न, दिसंबर का अंतिम सप्ताह है।आज हज़रत यूसुफ़ के बारे में एक वीडियो देखा, मिस्र की पुरानी सभ्यता के बारे में रोचक जानकारी मिलती है। उन्हें कितनी तकलीफ़ें सहनी पड़ीं, पर ईश्वर पर उनका भरोसा अटूट था। परमात्मा सभी के भीतर चेतना और संकल्प शक्ति के रूप में मौजूद है। इच्छा, क्रिया व ज्ञान की शक्तियाँ जो मानव के भीतर हैं, परमात्मा की देन हैं। मन जो भी सोचता है, बुद्धि उसे साकार करके दिखाती है। 


नन्हे ने कहा है नये वर्ष के दिन वे सभी पिकनिक के लिए पिरामिड वैली जाएँगे। आज किसानों की सरकार से हुई बातचीत का क्या नतीजा निकाला, पता नहीं है। ईश्वर करे, नया साल शुरू होने से पहले ही किसान अपना आंदोलन वापस ले लें। आज जून एक पेंटर को लाये थे, बेंत व लकड़ी के फ़र्नीचर पर उसने टचवुड लगाया। लगभग हर साल दिसम्बर में वह ऐसा करवाते हैं, इसीलिए वर्षों बाद भी फ़र्नीचर चमकता रहता है। आज सोसाइटी की तरफ़ से पानी डालने वाला आदमी आया तो धनिये की नन्ही पौध पर तेज बौछार कर उसे छितरा दिया। उसने ग़ुस्से का अभिनय किया ताकि वह आगे ऐसा न करे। नाटक ही करना है तो पूरे जज्बे के साथ करना चाहिए, वरना ज़िंदगी एक ख़्वाब से ज़्यादा तो नहीं ! 


वर्ष का अंतिम दिन ! बाहर बच्चों के खेलने की आवाज़ें आ रही हैं। आज संभवतः देर तक जागकर वे नव वर्ष का स्वागत करेंगे। उन दोनों का तो वही प्रतिदिन का सा कार्यक्रम है। यह समय कुछ लिखने-पढ़ने का है। वर्षों पहले टीवी पर ढेर सारे कार्यक्रम देखते थे, अब इच्छा नहीं होती। उसे याद आया, हज़रत यूसुफ़ की कहानी में देखा था, अब्राहम को जब अपने पुत्र इस्माइल को बलिदान करने को कहा गया तो वह राज़ी हो गये। उन्हें अपना पुत्र वापस मिल गया जब वे उसे छोड़ने को राज़ी थे। जब कोई जगत से चिपका रहता है तो जगत उसे नहीं मिलता। जब त्याग देता है तो वह पीछे-पीछे आता है। ‘तेन त्यक्तेन भुंजीथा’ का यही तत्पर्य है। वे श्वास छोड़ते हैं तो अगली श्वास भीतर भर जाती है। जब रिश्तों पर पकड़ ढीली हो तो वे अपने आप ही क़रीब होने का अहसास करा देते हैं। नन्हे ने बताया, सोनू को दो दिन से सर्दी लगी हुई थी। उसकी माँ को भी आँख में कुछ समस्या का पता चला है, डाक्टर ने आँख का व्यायाम करने को कहा है। वे लोग कल सुबह आयेंगे और सब मिलकर घूमने जाएँगे। आज जून के पुराने अधिकारी का फ़ोन आया, उन्हें कोरोना हो गया था, उनके पुत्र को भी।उन्होंने अपने दो अन्य मित्रों से भी बात की, नये साल में कुछ दिनों तक यह आदान-प्रदान चलता रहेगा। उसने नेट पर पढ़ा, चार हज़ार साल पहले भी नया साल मनाने की प्रथा बेबीलोन में थी। पर उस समय यह वसंत के आगमन पर २१ मार्च को मनाया जाता था। जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व पैंतालीसवें वर्ष में पहली बार प्रथम जनवरी को नया वर्ष मनाने की प्रथा की शुरुआत की। 


Tuesday, June 25, 2019

नया कैलेंडर



आज जून ने यह डायरी भेजी है. इस बार की कम्पनी की डायरी पहले मिल गयी थी, सलेटी रंग की, सुंदर है, पर लिखने का स्थान कम था, एक ही पेज में दो तिथियाँ. अब एक वर्ष बाद अंतिम डायरी मिलेगी कम्पनी की. अगले वर्ष अगस्त में उन्हें विदाई दे दी जाएगी. असम में अब दो वर्ष से भी कम समय रह गया है. इस समय का सदुपयोग करना है, सेवा, सत्संग और साधना के द्वारा. रात्रि के पौने आठ बजे हैं. जनवरी का महीना वैसे ही इतना ठंडा होता है, ऊपर से झीनी-झीनी वर्षा भी हो रही है. सुबह से ही बादल बने थे. दोपहर को बूंदा बांदी हुई, जब सर्वेंट लाइन की महिलाओं को योग सिखा रही थी. एक ने कहा, उनकी माँ ने भी कभी इस तरह नहीं समझाया जैसे वह उन्हें लड़ाई-झगड़े से दूर रहने के लिए कहती है. उसने सोचा, माँ को भी किसी ने नहीं समझाया होगा शायद. सुबह सेक्रेटरी ने उसका नाम क्लब के प्रोजेक्ट स्कूल की कमेटी में सम्मिलित कर दिया. प्रेसिडेंट ने दस बजे मीटिंग के लिए बुलाया, पर स्वयं सवा दस बजे आयीं. भारतीय समय में इतनी देरी को सामान्य मान लिया जाता है, पर उस कारण वापसी में देर हुई. दोपहर को एक वरिष्ठ सदस्या के यहाँ जाना था, उनकी बहन का दामाद अमेरिकी अन्तरिक्ष यात्री है, जो परिवार सहित असम आया हुआ है. डेढ़ घंटा वहाँ बिताया. वर्षों पूर्व जब वे नासा गये थे, उनके घर भी गये थे, उसने ही उन्हें घुमाया था. शाम को गायत्री समूह की महिलाओं के साथ नियमित योग की साधना, यानि सारा दिन कैसे गुजर गया पता ही नहीं चला. झींगुर की आवाज आ रही है और कमरे में इतना सन्नाटा है कि घड़ी की टिक-टिक भी स्पष्ट सुनाई दे रही है. पिताजी ने आज स्मार्ट फोन छोटी भाभी को वापस कर दिया है. कुछ दिनों तक व्हाट्स एप पर संदेशों का आदान-प्रदान करने के बाद अब वह उससे विरक्त हो गये हैं, उनका स्वास्थ्य अब ठीक है. टीवी पर तेनाली रामा धारावाहिक आ रहा है, जो रोचक और मनोरंजक भी है.

रात्रि के नौ बजने वाले हैं, यानि सोने से पूर्व आज के दिन की अंतिम घड़ी. जून ने शाम को गाजर का हलवा बनाया है. कल उनके एक मित्र आ रहे हैं गोहाटी से, उन्हें खाने पर बुलाया है. वैसे भी उनके विवाह की वर्षगांठ आने वाली है. दोपहर बाद को ओपरेटिव स्टोर गयी, बीहू के लिए पीठा आदि लिया, सर्दियों के मौसम में तिल खाने की सलाह दी ही जाती है. मन्दिर की साज-सज्जा बदली, ध्यान कक्ष में भी नया कैलेंडर लगाया व नई मूर्तियाँ भी, नये वर्ष का फेर-बदल अभी चल रहा है. आज वर्षा नहीं हुई. आज योग कक्षा में एक साधिका की भांजी भी आई थी, जो बिहार योग स्कूल से योग सीख चुकी है. उसने शिथलीकरण सिखाया और नाड़ी शोधन प्राणायाम भी.

इस समय दोपहर के तीन बजे हैं. वह रात के भोजन की तैयारी कर चुकी है. उनके पूर्व सहकर्मी आयेंगे ऐसा जून ने कहा था पर अब ज्ञात हुआ वह किसी अन्य जगह निमंत्रित हैं. कल दोपहर भी जून का लंच बाहर है, उनके दफ्तर के चार अधिकारी परीक्षा के बाद स्थायी हुए हैं, वे मिलकर पार्टी का आयोजन कर रहे हैं. अब यह भोजन कल रात्रि को खाया जायेगा. कुछ बना हुआ कुछ बनने के लिए तैयार. फ्रिज में रखा हुआ भोजन तो लोग तीन-चार दिन तक भी खाते ही हैं. आज सुबह क्लब गयी, एक स्थानीय क्लब ने उनके क्लब द्वारा चलाई जा रही सिलाई कक्षा के लिए सात सिलाई मशीनें दी हैं, जो उनके यहाँ वर्षों से रखी हुई थीं. कल मृणाल ज्योति में भी मीटिंग है. सुबह एक सखी को पहली बार अपने पति के साथ टहलते देखकर अच्छा लगा, वह वर्षों तक अकेले ही टहलने जाती रही है. उसके लिए उसने मन ही मन शुभकामनायें भेजीं. परमात्मा ही हर आत्मा के द्वारा प्रकट हो रहा है. उन्हें उसके प्रकट होने में बाधक नहीं बनना है. किसी भी तरह की आसक्ति, मोह तथा अहंकार से मुक्त होकर मन को पारदर्शी बनाना है, तभी परमात्मा की ज्योति मन में झलकेगी. वे अकेले ही इस जगत में आते हैं और अकेले ही यहाँ से जाने वाले हैं. मित्रता का भ्रम यदि टूटता है तो वह इसी सत्य की ओर इशारा करता है.