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Wednesday, February 27, 2013

तकिये पर खरगोश



आज से वह कोशिश कर रही है कि ज्यादा कार्य बाएं हाथ से करे, दोपहर को अस्पताल जाना है, रिपोर्ट भी मिलेगी, दायें कंधें में भी हल्का खिंचाव है, दर्द भी है मीठा-मीठा सा, अब इस हफ्ते खत लिखने काम जून को ही करना पडेगा. वैसे भी कहते हैं कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है. अस्वस्थ मन से लिखे खत अच्छे नहीं होंगे. नन्हा इस वक्त पड़ोस के मित्र के साथ खेल रहा है. कल शाम वे तीनों पुस्तकालय गए, नन्हा चुपचाप कोई किताब लेकर बैठ जाता है, उसे ऐसा देखना अच्छा लगता है, जबकि और बच्चे शोर मचाने से नहीं चूकते. गिरिबाला और रेवती की दो कहानियाँ पढ़ीं उसने और दो किताबें भी लायी है, दोनों कहानियों की किताबें हैं.

आज हफ्ते का चौथा दिन है, जून को आजकल ज्यादा काम रहता है दफ्तर में, फिर शाम को अक्सर वे सब कहीं न कहीं घूमने चले जाते हैं, नन्हे की छुट्टियाँ जो हैं, सो खत उसे ही लिखने होंगे, इस समय वह कला प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ड्राइंग सीखने गया है, कल दीदी का भी पत्र आया. उन्हें जन्मदिन का कार्ड भी भेजेगी. अभी कुछ देर पहले उसकी बंगाली सखी ने ‘पिजा’ की रेसिपी पूछी थी, वह गलती से टी स्पून की जगह टेबल स्पून कह गयी, ऐसी गलतियाँ अक्सर होती है उससे, इसलिये न कि पूरा ध्यान नहीं रख पाती. शाम को कुछ मित्र आएंगे, वे सब कैरम भी खेलेंगे, उसने दोसा बनाने की तैयारी की है. कल शाम को उसने मेडिकल गाइड में हाथ की अनुभूति के बारे में पढ़ा, इन इंजेक्शन से ठीक हो जाये वर्ना तो ईश्वर ही जानता है..ईश्वर की याद उसे अक्सर ऐसे ही वक्तों पर आती है, वह भी अच्छी तरह समझ गया होगा, लेकिन हर बार ऐसे वक्तों से उसने ही निकाला है.

परसों कैरम खेलने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई उसे, दोसे भी अच्छे बने थे. कल शाम क्लब में फिल्म देखते समय उसे गर्दन में हल्की अकड़न महसूस हुई, घर आकर जून ने मूव जैसी कोई क्रीम लगा दी, वह उनका ख्याल नहीं रख पाती है आजकल, पर वह हैं कि..  जबकि वे खुद भी अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंतित हैं, उनका वजन भी कम हुआ है, कल उन्होंने बनारस फोन किया, उन्हें घर की चिंता भी रहती होगी. नूना को तो बस आराम ही आराम करना है घर बैठकर, फिर भी न जाने कहाँ-कहाँ से परेशानियाँ आकर उसके पीछे पड़ जाती हैं. कल दीदी को जन्मदिन की बधाई भेज दी, छोटी बहन के लिए भी कार्ड लाकर रख दिया है, इसी माह उसका खुद का भी तो जन्मदिन है, आधे से ज्यादा जिंदगी गुजर चुकी है.

कल वे दो परिचित परिवारों से मिलने गए. उसकी गर्दन का दर्द सर झुकाने पर महसूस होता है, इस कारण ही सुबह ठीक से नाश्ता नहीं बना सकी, जून भी उसके आए दिन के इन मर्जों से परेशान हो गए होंगे पर वे जाहिर नहीं करते. हर रात वह सोचती है कि इस अस्वस्थता को स्वयं पर हावी होने नहीं देगी, पर हर सुबह भूल जाती है. आज फिर मौसम बादलों भरा है, परसों वे तिनसुकिया गए थे, उसने हेयरकट करवाए, और फैब्रिक पेंट भी लिया, वह कल तकिये पर पेंटिंग करेगी. आज दोपहर को उसे एक फिल्म देखनी है.

इस समय वह काफी ठीक महसूस कर रही है, कल शाम दायीं तरफ वाले पास के घर में गयी, पड़ोसिन ने बताया कि कठोर बिस्तर पर सोने से निश्चित ही लाभ होगा, उन्हीं की तरह कारपेट बिछाकर उन्होंने भी बेड को कठोर बना लिया है, सुबह उठी तो गर्दन में अकड़न जा चुकी थी. नन्हा देर से उठा और इस समय बहुत धीरे-धीरे मजे से नाश्ता खा रहा है. उसे जल्दी खाने को कहती है पर कोई फायदा नहीं होता, वह तय करती है कि अब उसे टोकना बंद कर देगी, क्योंकि इससे दोनों में से किसी का भी लाभ नहीं है. कल दोनों छोटे भाइयों के पत्र मिले. बहुत दिनों से उसने सिवाय डायरी की चंद पंक्तियों के उसने कुछ नहीं लिखा है. ईश्वर से सहारा, आश्रय, आश्वासन चाहती है पर अपने आप को छोटा नहीं कर सकती उसके सामने, बराबरी के दर्जे पर ऐसे मांगना कि मुँह से शब्द भी न निकलें और वह समझ जाये और उसे यह भी न लगे कि उसने कुछ दिया है उसे.

कल शाम उसने ढोकला बनाया था, दो लोग आने वाले थे. आज उसने बेसन की भुजिया बनाई, फीकी भुजिया बिना मिर्च की. सुबह मूँग की दाल का हलवा बनाया था, पर जून को लगा कि घी कम डाला था, जैसे कि वह यह नहीं जानते कि उससे लाभ तो नहीं हानि ही होगी. कल दोपहर तकिये के गिलाफ पर फूलों के डिजाइन की छपाई की, नन्हे ने भी कुशलता से एक खरगोश छापा.














Monday, June 4, 2012

आटे का हलवा


लगता है वह अब दिन जल्दी ही आने वाला है, कितना उत्सुक है नव जीवन भी बाहर आने के लिये, एक छोटे बच्चे को स्वप्न में देखा पर बाद में वह दीदी की गोद में था. रात को नींद खुल गयी फिर करवट बदलते बीता कुछ समय, उसके बाद भी स्वप्न देखती रही, माँ-पिता को देखा छोटे भाई व बड़ी बहन को भी, छोटा भांजा कितना बड़ा हो गया होगा, बड़ा स्कूल जाने लगा होगा. सुबह वे जल्दी उठ गए थे, रात को जून ने कहा था सुबह जल्दी उठकर आधा घंटा बातें करेंगे, कल दिन भर वे आधा घंटा भी साथ नहीं बैठे होंगे. वह कैमरा लाया था ऑफिस से आते समय जो उसने नागपुर से किसी से मंगवाया था, सोच ही रहा था कि कैमरे के बारे में जानकारी लेने किसी के पास जाये तभी कोई अतिथि आ गए फिर वह उन्हें छोड़ने गया. शाम को वे पुनः पड़ोस के नव शिशु से मिलने गए, अश्विनी नाम रखा है उन्होंने उसका. उसे वही वस्त्र उपहार में दिये जो माँ बनारस से लायी थीं. शाम को एक बंगाली मित्र आयी, तब वे टीवी पर एक नाटक देख रहे थे, जो नूना का पढ़ा हुआ था.
आज दिन की शुरुआत बेसुरे ढंग से हुई है. बाएं पैर में हल्का दर्द है. जून शायद आज डिब्रूगढ जाये सुबह उसके लिये आटे का हलवा बनाया जो बिल्कुल अच्छा नहीं बना, पता नहीं उसे आटे का हलवा इतना पसंद क्यों है. बचपन में घर पर साल में एक बार बनने पर भी वह नहीं खाती थी. रात को अजीब सा स्वप्न देखा, स्वप्न में जून से झगड़ा होता है उसका, इतना सब होने पर यदि मन उदास हो जाये तो स्वाभाविक ही है पर जाते समय वह कह कर गया है कि खुश रहना. और अभी गीता का पांचवा अध्याय पढ़ने के बाद संभव है कुछ सांत्वना मिले.