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Thursday, April 2, 2015

टिफिन में ब्रेड


आज भी कल की तरह वर्षा हो रही है. पिछले चार दिनों से झड़ी लगी है. कल जून का जन्मदिन है और परसों पन्द्रह अगस्त, जिस दिन वे मित्रों को भोजन पर आमंत्रित करेंगे. घर की सफाई का काम भी चल रहा है. ‘कृष्ण’ जिसे लोग मन्दिरों में तलाशते हैं उसे मन के मन्दिर में मिल गये हैं. जिन्होंने सारा का सारा शोक हर लिया है. जीवन को उत्सव बनाया है. ईश्वर की निकटता का अनुभव ही जीवन का सार है !

आज सुबह उठने में देर हुई, नन्हे को टिफिन में पहली बार ब्रेड देनी पड़ी. जल्दी में वह पानी भी नहीं ले गया. ससुराल से पिताजी का फोन आया, वह इस बात से नाराज लगे की माँ कुछ दिनों के लिए यहाँ रहें. पर जून इस बात पर बराबर जोर दे रहे हैं. भविष्य ही बतायेगा क्या होता है, वह दोनों ही तरह से प्रसन्न है. सुबह छोटे भाई से बात हुई, उसे व पिताजीको पत्र मिल गया है, उन्हें पढ़कर ख़ुशी हुई जवाब भी दे दिया है. कल देर शाम को गुलाब जामुन बनाये. दही बड़े के लिए बड़े भी आज ही बनाकर रखेगी.

ईश्वर के पथ पर चलना तलवार की धार पर चलने के समान है, पग-पग पर चोट खाने का अंदेशा रहता है. थोडा सा भी अचेत हुए तो कभी सूक्ष्म अहंकार अपनी छाया से ढक लेता है और कभी क्रोध ही अपने फन उठा लेता है. यदि उसकी स्मृति एक क्षण के लिए भी न हटे तभी वे सजग रह सकते हैं, क्योंकि जो सचेत करता है यदि उसे ही भूल जाएँ तो कौन मार्ग दिखायेगा ? एक उसी की लौ अगर हृदय में जली हो तो संसार का अँधेरा वहाँ कैसे आ सकता है? उसे लगता है अभी तो वह पहली सीढ़ी पर ही है, उसे पाकर भी बार-बार खो देती है, तो ऐसा पाना न पाने के ही बराबर है !

कल ही वह विशेष सत्संग है जब ‘विश्व शांति दिवस’ मनाया जायेगा. एक सखी ने उसे इस अवसर के लिए एक कविता लिखने को कहा है. सद्गुरु के बारे में सोचते ही कितने ही भाव मन में उठते हैं. जून को जन्मदिन पर ढेर सारी बधाइयाँ मिली हैं, उन्हें पढ़कर, भानु दी का भजन सुनकर, ज्ञान सूत्र पढ़कर वैसे ही मन मुग्ध है, सो कविता लिखने के लिए मन की भूमि पूरी तरह उर्वर है. कल नन्हे और उसके मित्र को कोचिंग से वापस आते वक्त पुलिस ने रोका. वे स्कूटर पर थे, मित्र के पास लाइसेंस नहीं था और वे दो लोग स्कूटर पर बैठे थे जो पन्द्रह अगस्त के कारण मना था. एक नया अनुभव उन्हें हुआ. फ़ाईन देकर दोनों छूट पाए.

भक्ति के लिए जप, तप, ध्यान, सुमिरन, कीर्तन आदि कितने उपाय हैं, लेकिन उसे सबसे अधिक ‘ध्यान’ ही रुचता है. हर तरह की मानसिकता वाला व्यक्ति इस मार्ग पर चल सकता है. यह आवश्यक नहीं कि सभी ईश्वर के बारे में एक जैसी अवधारणा रखें. कोई एक परम शक्ति, कोई परम ज्ञान अथवा कोई परम आनंद के रूप में उसकी कल्पना करता है. उसके लिए तो उस एक को जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि उस एक को जानने से सब कुछ जाना जा सकता है. वरना तो ज्ञान की इतनी शाखाएं हैं और कई तो एक दूसरे का विरोध करती हुई लगती हैं. पल-पल वे मृत्यु की ओर बढ़ रहे हैं, न जाने कितने देखते-देखते काल के गाल में समा गये. उनका कोई निशान भी नहीं बचता. मृत्यु से पूर्व यदि इस रहस्य से पर्दा न उठे कि वे यहाँ क्यों हैं, यह संसार क्या है, ईश्वर कहाँ है, उन्हें बार-बार सुख-दुःख के झकोरे में क्यों झूलना पड़ता है? इन सब बातों का ज्ञान तो बाद में होगा, इस मार्ग पर चलते-चलते भी कई अनुभव होते हैं. चित्त को सुधारने का प्रयास करते-करते सुख-दुःख उतना प्रभावित नहीं करते. प्रेम और शांति का उपहार भी मिलता है.


Sunday, November 11, 2012

चार्ली चैप्लिन की फिल्म



कल सुरभि का पत्र आया, अच्छा लगा बहुत दिनों बाद कालेज की सखी का पत्र पाकर, शनिवार को उनका पत्र लिखने का दिन होता है, उसने सोचा वह उसी दिन इस पत्र का जवाब देगी. दो माह पूर्व जो परिवार सदा के लिए चला गया था कल उनका पत्र भी आया, वे परसों उनकी कोई खबर न मिलने की बात कर ही रहे थे, सही कहा है किसी ने कि हर रात के बाद जैसे सुबह होती है हर उलझाव के बाद सुलझाव हो जाता है, सोचा उसने, उसकी असमिया सखी से भी शायद एक दिन सुलझाव हो जाय, वक्त का इंतजार करते हैं. हर कार्य अपने समय पर ही होता है. कल तिनसुकिया जाने से पूर्व जून ‘दिल’ फिल्म का कैसेट दे गए थे, पर वह देख नहीं पाई. वे कार्टून फिल्म के भी दो कैसेट लाए हैं नन्हे के लिए. शाम को कोई परिचित परिवार मिलने आया, सात बजे वे स्वयं भी आ गए. आज नन्हा खुशी-खुशी स्कूल गया है. उसने बताया कि कोई बच्चा उसका टिफिन खा जाता है, अभी थोड़ा वक्त लगेगा उसे अपने को स्कूल के माहौल में एडजस्ट करने में. आज भी उसका कोई टेस्ट है. शाम को नाश्ते में उसे आज इडली बनानी है, उसने सोचा सामने वाले घर से थोड़ा सा करी पत्ता व मिर्च ले आते हैं. रात को एक परिवार को डिनर पर बुलाया है, उसकी भी तैयारी करनी है.

आज फिर तीन-चार दिनों के बाद डायरी खोली है. कल उनके पड़ोस में आए एक नए परिवार से मिलना हुआ. रक्षा बंधन का त्योहार आने वाला है, उसने जून से राखियां लाने को कहा है, वैसे यहाँ पर यह उत्सव नहीं मनाया जाता, पर कहीं न कहीं राखियां मिल ही जाएँगी. आज पता नहीं किस कारणवश बिजली नहीं है, ऐसा यहाँ बहुत कम होता है, कुछ देर पूर्व ही वह  हेयर कट करवा कर आयी है, इस नए हेयर स्टाइल में तो उसकी शक्ल ही बिलकुल बदल गयी है. लम्बे बालों का शौक तो है पर सम्भालना मुश्किल है.

आज छोटी बहन का जन्मदिन है, उसे पत्र व कार्ड भेजा था, दीदी आज परिवार सहित बाहर जा रही है, भारत से बाहर. कल उसने एक आठवीं के विद्यार्थी को भी पढ़ाया, पर लगता है चल नहीं पायेगा, जून और नन्हा, जब तक वह पढ़ाती है, बाहर घूमते रहते हैं, हाँ सुबह उनके उठने से पहले वह पढ़ा सकती है. उसने उस छात्र को शनिवार को आने को कहा है.

उन्होंने कल ‘पंचवटी’ फिल्म देखी, अच्छी है मगर अधूरी सी लगी, जैसी कि लगभग हर आर्ट फिल्म लगती है. समझने के लिए उसने फिर से देखी...तब लगा हाँ, इसके सिवा अंत हो भी क्या सकता था. कुछ दिन पहले टीवी पर एक टेलीफिल्म भी देखी, “विवेक” एक कटु सत्य पर आधारित..

नन्हा सुबह कुछ भी खाने में बहुत नखरे करता है, उसे छह बजे उठाकर ही सात बजे कुछ खिलाया जा सकता है. आज उसका स्कूल बंद है, यहीं बैठकर होमवर्क कर रहा है, इतनी बातें करता है कि...पता नहीं बच्चों के पास इतनी उर्जा कहाँ से आती है. उसका खुद का वजन है कि बढ़ता ही जा रहा है, व्यायाम बंद है और जून जबरदस्ती दाल में घी दाल देते हैं.

कल का इतवार पलक झपकते बीत गया. परसों रात चार्ली चैप्लिन की फिल्म देख कर सोये, ‘ए वोमन ऑफ पेरिस’, सो कल देर से उठे, दोपहर को तिनसुकिया जाना था, एक गाउन लिया, लाल रंग का जिस पर एक सुंदर तितली बनी है, आज सुबह उसने नन्हे को फुल शर्ट पहना दी, तो कहने लगा..कुछ अच्छा सा नहीं लग रहा है, शायद उसको गर्मी लग रही थी. पिछले दिनों वह हावर्ड पास्ट का एक उपन्यास Lola Greg  पढ़ने में भी व्यस्त रही, बहुत रोचक है.






Saturday, September 8, 2012

गुलाब की कटिंग



आज उसकी नाराज सखी अपने परिवार के साथ घर गयी है, उसने सोचा, जब वह वापस आयेगी तब शायद भूल जाये और उनके सम्बन्ध पहले की तरह हो जाएँ. आज फिर वर्षा हो रही है, ठंड भी बहुत है, बिल्कुल पालक के पकौड़े खाने का मौसम है. लेकिन वे बाजार नहीं जा पाएंगे, कल भी नहीं जा पाए थे. नन्हे ने आज ठीक से भोजन नहीं किया, इसी से वह जान जाती है कि उसकी तबियत कुछ नासाज है. जल्दी ही सो भी गया आज. कल शाम वे एक परिवार से मिलने गए, गृहणी को  अच्छा नहीं लगा कि वह बनारस में रहकर पढाई करे, जून चाहते हैं कि अगले माह मार्च में जब वे वहाँ जाएँ उसके बाद वह और सोनू वहीं रुक जायें, जून में प्रवेश परीक्षा है. उसके बाद वापस आने का कोई औचित्य नहीं. खैर भविष्य में जो होगा उसके लिए क्या चिंतित होना, फ़िलहाल उसे आज की बात सोचनी चाहिए, उसने सोचा.

आज कई दिनों के बाद वह लिख रही है, अस्वस्थ थी, अभी भी पूरी तरह स्वस्थ है, ऐसा नहीं कह सकती. आज शनिवार है, संभवतः सोमवार से अपनी पुरानी दिनचर्या आरम्भ कर सके. नन्हा अभी सो रहा है, साढ़े आठ बजे हैं सुबह के, हाफ डे के कारण जून जब दोपहर को सोना चाहेंगे तो सोने नहीं देगा, धूप भी पड़ रही है उस पर खिड़की से, पर कैसे ठाठ से सोया है, जैसे सुबह अलार्म सुनने के बाद भी जून सोये रहते हैं. कई पत्रों के जवाब देने हैं, आज सभी को लिखेगी. कल उसकी मित्र आ गयी, उसकी और से, मित्रता रहे, ऐसी कोई चेष्टा या भाव नजर नहीं आता, जून ने उसे जबरदस्ती भेजा उन्हें भोजन पर बुलाने के लिए, पर वे लोग नहीं आये.

कल शाम नाश्ते में उन्होंने आलू के परांठे खाए, आलू पहले का था शायद इसलिए रात तक जी भारी रहा दोनों का, टिफिन में हल्का नाश्ता ही ठीक रहता है उनके लिए. नन्हा सोया है, कभी-कभी बेहिसाब, असीम प्यार आता है उस पर, उसकी भोली बातों पर. मौसम में गर्मी का पुट आता जा रहा है, अब स्नान करने के बाद स्वेटर पहनने की आवश्यकता महसूस नहीं होती. आज सुबह उसने बहुत दिनों बाद घर के सामने गली में कई चक्कर लगाये, प्रातः कालीन शीतल पवन का आस्वादन किया तभी मन उसका शांत है. सब कुछ ठीकठाक चल रहा हो तो वैसे भी मन शांत रहता है, उसे ध्यान आया, बनारस में वे लोग कैसे होंगे, अब तो दुर्घटना को चार महीने हो गए हैं, पर यह वक्त बहुत थोडा है.

मार्च का महीना, यानि फूलों का महीना. आज मार्च का प्रथम दिन है, खिली-खिली धूप है और वातावरण में है खुनकी सी, नन्हा उठ गया है पर बेड पर लेटे-लेटे ही टीवी देख रहा है. उसके गीले बाल जरा सूख जाएँ तब भीतर जायेगी. कल एक सखी से उसने गुलाब की कटिंग मांगी, जो उनके यहाँ से कितने सारे पौधे ले कर गयी है, पर उसने महसूस किया कि देने में उसे बहुत अड़चन हो रही थी. उसने निर्णय किया कि अब किसी से कुछ नहीं मांगेगी. आज उन्हें एक मित्र के यहाँ जाना है, उनकी बेटी का जन्मदिन है, उसी की तैयारी में थोड़ी सहायता करने.  मौसम के अनुसार मूड भी बदल जाता है तो कल से जून ने गर्मी मनानी शुरू कर दी है, अब देखें उनका रवैया कैसा रहता है, गर्म पानी नहीं आता है आजकल, टंकी में पानी चढ़ ही नहीं पाता है. टीवी पर नन्हे का मनपसंद कार्यक्रम ‘नमूने’ आ रहा है. कल जन्मदिन की पार्टी में उसका एक नई महिला से परिचय हुआ, बातचीत से सहयोग करने वाली लगी, उसके यहाँ भी पार्टी है, उसने सोचा पूछेगी, क्या उसे कोई सहायता चाहिए.