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Thursday, December 19, 2013

लिखे जो खत तुझे


आज भी मौसम मेहरबान है, उनके उस महान स्वीपर ने आज कुछ ढंग से सफाई की है, नैनी ने किचन में रैक्स साफ की, उसका काम सुपरविजन का है. आज शाम को एक मित्र परिवार यात्रा पर जा रहा है, जाने से पहले यहाँ आएंगे, भोजन के लिए और फिर जून उन्हें विदा करने बस स्टैंड भी जायेंगे, ऐसी परम्परा सी बन गयी है, जो वे सदा निभाते हैं अन्यों की तरह सुविधा का ख्याल रखकर नहीं. खैर, उसे अपने मन में किसी प्रकार का क्षोभ, झुंझलाहट देखकर आश्चर्य क्यों नहीं होता, इस बात का दुःख है. बेचैन है यह देखकर बेचैनी भी तो होनी चाहिये न, अपनी आदत ही बना ली है परेशान होने की और...फिर इन बातों पर बजाय नाराज होने के मुस्कुराने की, यानि मर्ज हद से आगे बढ़ चुका है.

आज जून का दफ्तर बंद है, अल्फ़ा ने बंद कॉल किया है बारह घंटों का. सुबह न ही कोई पैदल न साइकिल पर जाता दिखाई दिया. आज यहाँ प्रधानमन्त्री आ रहे हैं, उनके स्वागत का यह तरीका अजीब है. डिब्रूगढ़ तक रेलवे लाइन ब्रॉड गेज हो गयी है, उसी का उद्घाटन करेंगे, तथा उत्तर भारत के अन्य प्रदेशों में भी जायेंगे. देवेगौडा जी भी आये थे, ६००० करोड़ रुपयों की योजनायें शुरू करने का आश्वासन देकर गये थे, पता नहीं कितनों में काम शुरू हुआ भी है या नहीं..इन राजनीतिज्ञों पर भरोसा करना बेहद मुश्किल है. कल शाम उसने वर्षों पूर्व मंगनी के बाद दोनों के लिखे कुछ पत्र पढ़े, आनन्द आया, मन फूल सा हल्का हो गया, जिन्दगी के तनाव भरे क्षणों में ऐसे पत्र रहबर का काम करते हैं. प्रेम में सराबोर ऐसे मधुर पत्र...कि पढ़ने के बाद घंटों मन एक खुमारी में डूबा रहा, तब मन कितना विश्वासपूर्ण था भविष्य के प्रति और वे सारी बातें जो उन्होंने तब सोची थीं सच हुई हैं. कल इतवार था, इतवार की तरह ही बिताया, सुबह से दोपहर तक स्नान, सफाई, लंच नन्हे की पसंद का था, जून कस्टर्ड के लिए tinned फ्रूट्स भी लाये थे. नन्हे को रोज पांच नये शब्द सिखाना भी शुरू किया है कल से.

वर्षा का एक दिन ! कल रात्रि आये तूफान से बंगलादेश में जान-माल का काफी नुकसान हुआ, उसी का असर है कि यहाँ भी कल से लगातार वर्षा हो रही है. सुबह पौने छह बजे नींद खुली एक स्वप्न से.. जिसमें देर शाम तक वह घर से बाहर है एक ऐसी गली में जहां मार-पिटाई रोज का मंजर है. एक बाबा जी भी कुछ दूर पर रहते हैं, पर लगता है उन्हें अपने शिष्यों से ही फुर्सत नहीं मिलती. नाश्ते में उसने आज परांठे बनाये पर उसका असर अभी तक है, जून को भी शायद ऐसा लग रहा हो. नैनी की शक्ल देखकर लग रहा था, जैसे उसके पेट में दर्द है, और स्वीपर का काम तो वैसे ही माशा अल्लाह ही, न बाहर ड्राइववे पर झाड़ू लगाया है न भीतर कारपेट पर, बाहर तो खैर अब हवा और पानी ही सफाई करेंगे, भीतर वह खुद कर सकती है. नन्हा एक घंटा टीवी देख चुका है, आधा घंटा और देखेगा, जब वे छोटे थे तो ज्यादा वक्त घर के बाहर खेलने में गुजरता था आजकल के बच्चे टीवी के सामने बैठ-बैठे ही बड़े हो जाते हैं. एक परिचिता का फोन आया, उनका बेटा आज दोपहर फिर पढ़ने आएगा, सो ले देकर बात यहाँ पर अटकी है कि इतनी सारी  बातों के बाद बेचारा...दिल जाये तो जाये कहां ?


Saturday, September 8, 2012

गुलाब की कटिंग



आज उसकी नाराज सखी अपने परिवार के साथ घर गयी है, उसने सोचा, जब वह वापस आयेगी तब शायद भूल जाये और उनके सम्बन्ध पहले की तरह हो जाएँ. आज फिर वर्षा हो रही है, ठंड भी बहुत है, बिल्कुल पालक के पकौड़े खाने का मौसम है. लेकिन वे बाजार नहीं जा पाएंगे, कल भी नहीं जा पाए थे. नन्हे ने आज ठीक से भोजन नहीं किया, इसी से वह जान जाती है कि उसकी तबियत कुछ नासाज है. जल्दी ही सो भी गया आज. कल शाम वे एक परिवार से मिलने गए, गृहणी को  अच्छा नहीं लगा कि वह बनारस में रहकर पढाई करे, जून चाहते हैं कि अगले माह मार्च में जब वे वहाँ जाएँ उसके बाद वह और सोनू वहीं रुक जायें, जून में प्रवेश परीक्षा है. उसके बाद वापस आने का कोई औचित्य नहीं. खैर भविष्य में जो होगा उसके लिए क्या चिंतित होना, फ़िलहाल उसे आज की बात सोचनी चाहिए, उसने सोचा.

आज कई दिनों के बाद वह लिख रही है, अस्वस्थ थी, अभी भी पूरी तरह स्वस्थ है, ऐसा नहीं कह सकती. आज शनिवार है, संभवतः सोमवार से अपनी पुरानी दिनचर्या आरम्भ कर सके. नन्हा अभी सो रहा है, साढ़े आठ बजे हैं सुबह के, हाफ डे के कारण जून जब दोपहर को सोना चाहेंगे तो सोने नहीं देगा, धूप भी पड़ रही है उस पर खिड़की से, पर कैसे ठाठ से सोया है, जैसे सुबह अलार्म सुनने के बाद भी जून सोये रहते हैं. कई पत्रों के जवाब देने हैं, आज सभी को लिखेगी. कल उसकी मित्र आ गयी, उसकी और से, मित्रता रहे, ऐसी कोई चेष्टा या भाव नजर नहीं आता, जून ने उसे जबरदस्ती भेजा उन्हें भोजन पर बुलाने के लिए, पर वे लोग नहीं आये.

कल शाम नाश्ते में उन्होंने आलू के परांठे खाए, आलू पहले का था शायद इसलिए रात तक जी भारी रहा दोनों का, टिफिन में हल्का नाश्ता ही ठीक रहता है उनके लिए. नन्हा सोया है, कभी-कभी बेहिसाब, असीम प्यार आता है उस पर, उसकी भोली बातों पर. मौसम में गर्मी का पुट आता जा रहा है, अब स्नान करने के बाद स्वेटर पहनने की आवश्यकता महसूस नहीं होती. आज सुबह उसने बहुत दिनों बाद घर के सामने गली में कई चक्कर लगाये, प्रातः कालीन शीतल पवन का आस्वादन किया तभी मन उसका शांत है. सब कुछ ठीकठाक चल रहा हो तो वैसे भी मन शांत रहता है, उसे ध्यान आया, बनारस में वे लोग कैसे होंगे, अब तो दुर्घटना को चार महीने हो गए हैं, पर यह वक्त बहुत थोडा है.

मार्च का महीना, यानि फूलों का महीना. आज मार्च का प्रथम दिन है, खिली-खिली धूप है और वातावरण में है खुनकी सी, नन्हा उठ गया है पर बेड पर लेटे-लेटे ही टीवी देख रहा है. उसके गीले बाल जरा सूख जाएँ तब भीतर जायेगी. कल एक सखी से उसने गुलाब की कटिंग मांगी, जो उनके यहाँ से कितने सारे पौधे ले कर गयी है, पर उसने महसूस किया कि देने में उसे बहुत अड़चन हो रही थी. उसने निर्णय किया कि अब किसी से कुछ नहीं मांगेगी. आज उन्हें एक मित्र के यहाँ जाना है, उनकी बेटी का जन्मदिन है, उसी की तैयारी में थोड़ी सहायता करने.  मौसम के अनुसार मूड भी बदल जाता है तो कल से जून ने गर्मी मनानी शुरू कर दी है, अब देखें उनका रवैया कैसा रहता है, गर्म पानी नहीं आता है आजकल, टंकी में पानी चढ़ ही नहीं पाता है. टीवी पर नन्हे का मनपसंद कार्यक्रम ‘नमूने’ आ रहा है. कल जन्मदिन की पार्टी में उसका एक नई महिला से परिचय हुआ, बातचीत से सहयोग करने वाली लगी, उसके यहाँ भी पार्टी है, उसने सोचा पूछेगी, क्या उसे कोई सहायता चाहिए.