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Thursday, June 13, 2019

जुकिनी की पौध





पौने तीन बजने वाले हैं, माली की प्रतीक्षा है. आज सुबह नर्सरी गयी थी, फूल गोभी, पत्ता गोभी, व ब्रोकोली की पौध लायी, शिमला मिर्च, बैंगन व जुकुनी की भी. उसे फोन किया, कहने लगा, आ रहा है. तीन बजे से योग कक्षा आरम्भ हो जाएगी. आज सुबह मृणाल ज्योति में भी बच्चों को योग कराया. नैनी ने बताया उसका पति गलत संगत में पड़ गया है. लोग अपना जीवन स्वयं ही बर्बाद करते हैं. एक बार कुसंगति में पड़ जाने पर उससे निकलना कितना कठिन होता है. आज नन्हे व सोनू के लिये लिखी कविता टाइप की है. अभी कुछ शेष है, उसे सुंदर फॉण्ट में प्रिंट करके ले जाना है. कल शाम को दो अध्यापिकाएं आयीं, टाइनी टॉट्स के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में निमंत्रित करने के लिए, एक डिनर तथा एक लंच भी है.

रात्रि के आठ बजे हैं आज 'टुबड़ी' है, गुरु नानक देव का जन्मदिन. सुबह पिताजी को उनके जन्मदिन की बधाई दी. छोटी भाभी ने बहुत अच्छी तरह से उनका जन्मदिन मनाया. केक बनाया, फूल और स्वेटर उपहार में दिए. व्हाट्स एप पर उनकी आवाज में बधाई का उत्तर दिलवाया. जून को एक सहकर्मी के यहाँ जाकर एक प्रेजेंटेशन तैयार करने का अवसर मिला. सभी पब्लिक सेक्टर्स की कम्पनी के अनुसन्धान विभागों को जोड़ने के लिए भूमिका बनाने का कार्य करने एक उच्च स्तरीय कमेटी कमेटी आ रही है. उसे ही देना है. आज वह कविता पूरी हो गयी, कुछ ज्यादा ही लम्बी हो गयी है, जून इसे प्रिंट करके ला देंगे. आज भी योग वसिष्ठ पर स्वामी अनुभवानंद जी का प्रवचन सुना. मन जब अपने स्वरूप में देर तक टिकने लगता है. एक सहज प्रकाश की नदी में डूबता-उतराता है और नील अम्बर में निर्बाध उड़ता है. जीवन मुक्त इसी को कहते हैं. आत्मा और परमात्मा का भेद भी है और अभेद भी, ज्ञान और भक्ति का अनोखा का संगम ! जीवन कितना सुखद हो सकता है, इसे आत्मज्ञानी ही जान सकता है !

शाम के सवा चार बजे हैं. नवम्बर की हल्की ठंडी शाम है. अभी से पश्चिम के आकाश में लालिमा छा गयी है, यहाँ दिसम्बर आते-आते तो चार बजे अँधेरा ही हो जाता है. महीनों बाद झूले पर बैठकर लिख रही है. जून अभी आये नहीं हैं, दोपहर को भी देर से आये, एक सरकारी कमेटी के कुछ लोग आने वाले हैं, उसी की तैयारी चल रही है उनके विभाग में. आज सुबह टहलने गये तो हल्का अँधेरा था, वापस आते-आते सुरमई उजाला हो गया, हवा में फूलों की गंध घुली थी. पहले गाँव के स्कूल गयी, बच्चों को संगीत की धुन पर व्यायाम करना अच्छा लगा, फिर मृणाल ज्योति. विवाह के कार्ड्स भी दिए. उसके बाद एक अध्यापिका के साथ 'विश्व विकलांग दिवस' के सिलसिले में चार स्कूलों में गयी, उन्हें तीन दिसम्बर पर लगाने के लिए बैज व बुक मार्क दिए. इससे मिलने वाले धन का उपयोग विशेष बच्चों के लिए किया जायेगा.   


Wednesday, August 20, 2014

खिली धूप में सफाई


आज सुबह उसने चित्त की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में सुना, पहली है उदार अवस्था, इसमें चित्त जो भी देखता है, सुनता है, ग्रहण करता जाता है, चाहे वह लाभप्रद हो अथवा हानिप्रद. दूसरी विछिन्न अवस्था जिसमें मन राग-द्वेष से युक्त रहता है, कभी हताश तो कभी प्रसन्न. ज्यादातर चित्त की यही अवस्था होती है.  इस वक्त उसका चित्त थोड़ा ‘पशेमन’ है, (उर्दू के इस शब्द का सही अर्थ कुछ और भी हो सकता है) नैनी को कुछ ज्यादा ही कपड़े धोने को दे दिए हैं, जबकि मशीन घर में है, धोबी भी आता है, इसे आलस्य ही कहा जायेगा न, वह चुपचाप धो रही है, कर भी क्या सकती है. कल शाम जून ने भाईदूज के कार्ड बनाकर दिए, आज उसे खत लिखने हैं. दोपहर को संगीत अध्यापिका व उनके गोद लिए शिशु से मिलने भी जाना है, उसके मन में उस बच्चे के प्रति जो स्नेह उमड़ रहा है वह इसलिए है कि वह पहले अनाथ था या इसलिए कि वह बहुत प्यारा है. उसे देखे बिना ही तो उसके मन ने उसे अपना मान लिया था. उसकी टीचर भी तो बहुत अच्छी हैं, शांत व धैर्यवती, उसे संगीत के सुरों का ज्ञान उन्होंने ही तो कराया है, उसका मन सदा उनका ऋणी रहेगा. फूलों के जो बीज उस दिन माली ने बोये थे, सभी में अंकुर निकल आए हैं, टमाटर व गोभी की पौध नहीं बन पायी है, इन सर्दियों में उनका बगीचा फूलों से भर उठेगा. गुलदाउदी में लेकिन अभी तक कलियाँ नहीं आई हैं. कल शाम को ही उन्होंने उन्हें याद किया और बड़े भाई का फोन भी आ गया. चचेरे भाई की शादी किसी वजह से रुक गयी है, वह उदास होगा लेकिन समझदार तो है ही, संभल जायेगा.

मन रूपी मार्ग पर दिन भर विचारों के यात्री आते-जाते रहते हैं, उन्हें उन पर प्रतिबन्ध लगाना है, यात्री कम होंगे तो मार्ग स्वच्छ रहेगा और धीरे-धीरे उन यात्रियों का आना-जाना इतना कम हो जाये कि मन दर्पण की भांति चमकने लगे. इसमें सन्त उनके मार्गदर्शक हैं, उनके सद्वचनों के द्वारा ही उनमें ईश्वर के प्रति श्रद्धा भाव उत्पन्न होता है. जिससे माधुर्य, सहजता, कोमलता. सहानुभूति और करुणा अपने आप प्रगट होते हैं. वह कहते हैं, श्रद्धाहीन व्यक्ति रसहीन होता है, वह चतुर या ज्ञानी तो हो सकता है पर उसे सहज सुख नहीं मिलता ऐसा आनंद जो मात्र ईश्वर के नाम स्मरण से ही सम्भव है. आज सुबह दीदी को उनके विवाह की रजत जयंती पर बधाई दी. कल शाम को एक पत्र भी लिखा था पर बाद में वह भावुकतापूर्ण व बचकाना लगा, सो नहीं भेजा. आज नन्हे का स्कूल “लक्ष्मी पूजा” के लिए बंद है, वह पढ़ाई कर रहा है. जून का दफ्तर कल बंद है. कल शाम उसने व जून ने पर्दों के पीछे अस्तर लगाने का काम कर दिया.  

Jun is at home today. They ate Alu Paratha in breakfast with tea and now he is reading some magazine. It is raining since morning, Nanha has his last maths test today. Today ‘kartik’ has begun the month of diwali. Last evening they saw many Deepaks and candles lit in front of some houses due to Laxmi Puja. Here in Assam, Bengal and Orrisa also deepavali is the day for Kali puja and they worship Ma Laxmi on purnima. She could not listen ‘jagaran’ today, bur read ‘bhagvad gita’. They should do work for the sake of work, as their duty without any attachment to its result. Last evening she read some more experiments which bapu performed in his Ashram. He seems to be a simple as well as a very complex personality.

At this moment her mind is full of things about Deepawali celebration, whole house has to be properly cleaned and arranged. Somethings are to be purchased. She has to sew cushion covers. Diwali is festival of joy and prosperity and they are eagerly waiting for it. इस इतवार को यानि कल भी यदि मौसम आज सा रहा, जब धूप खिली हो और आकाश नीला हो तो वे सारे गद्दे, तकिये आदि धूप में रख सकते हैं, पुराना सामान घर से निकल कर उसे spacious बना सकते हैं. घर के दरवाजे खिड़कियाँ, रोशनदार सभी कुछ सलीके से पूरी तरह साफ करने हैं, शीशे चमकाने हैं. पीतल के सामान पर पॉलिश करनी है. कम से कम तीन दिन लगेंगे उन्हें, और उन्हें दीवाली आने में अभी दस-बारह दिन शेष हैं पर बगीचे में भी काफी काम शेष है.




Monday, August 4, 2014

कौन बनेगा करोड़पति


कल रात फिर कई स्वप्न देखे पर अब कोई याद नहीं है. सुबह वे उठे तो रोज से देर हो गयी थी. बादल आज भी बने हैं, हल्की बूंदा-बांदी हुई और मौसम कल से बेहतर हो गया है. आज उसका राजसी भाव जाग्रत है तभी मौसम का ख्याल आ रहा है. सात्विक भाव अधिक दिन टिकता नहीं, कारण कई हो सकते हैं एक टीवी भी हो सकता है. “जिन्दगी के बोझ को हंसकर उठाना चाहिए, राह की दुश्वारियों पे मुस्कुराना चाहिए”. सदाचारी बलवान होता है. आज बाबा जी के प्रवचन में स्कूल के बच्चे बैठे हैं. दस बजकर बीस मिनट हो गये हैं, यानि उसके पास केवल दस मिनट हैं लिखने के लिए, फिर किचन में जाना है. आज सुबह-सुबह माली का बेटा आया गया, लॉन में घास काट दी है और कल ही नैनी के बेटे ने हेज काट दी है, पर अभी भी बहुत काम शेष है. धीरे-धीरे सब हो जायेगा, और बगीचा पहले के समान सुंदर हो जायेगा. कल रात वे ‘कौन बनेगा करोड़पति’ देखकर सोये थे. रात को स्वप्न सम्भवतः इसी संबंध में रहे होंगे. अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज और मुस्कुराहट से सारे हिंदुस्तान का दिल जीत लिया है. कल दो पत्र मिले, एक फुफेरी बहन का और दूसरा छोटे भाई का. जून के लिए जन्मदिन का सुंदर कार्ड भी भाई ने भेजा है. नन्हे का टेस्ट ठीक रहा, कल उसने परीक्षा फार्म भी जमा कर दिया.

उसने सुना, मन का माधुर्य बनाये रखना, सदा प्रसन्न रहना ईश्वर की सर्वोच्च उपासना है. चिन्तन बुद्धि को सबल करता है पर चिंता बुद्धि को कुंठित करती है, और उसने गलत चिंता से समय तो व्यर्थ किया ही अपनी मानसिक शांति भंग की, ऊर्जा व्यर्थ की, तभी तो आज दोपहर के एक बजे वह डायरी लिख रही है. इस वक्त तक आज की कविता लिख चुकी होती है, पर आज सुबह से ही मन अस्थिर है, एक जगह नहीं लग रहा है. कल रात नींद भी ठीक से आई. सुबह एक स्वप्न देखा, शायद उसके ही किसी पूर्व जन्म का, वह राजकुमारी है पर घमंडी राजकुमारी और एक सैनिक उसका गलत हुक्म मानने से इंकार कर देता है. आज फिर सुबह से वर्षा हो रही है, सो गर्मी भी कम है. एक सखी से कुछ देर इधर-उधर की बातें करती रही, गलत-सलत और सही भी. संगीत अध्यापिका से भी दो मिनट बात की उन्होंने बुलाया है पर जाने का मन नहीं है. कैसी तो खुमारी अभी भी छायी है, जून के जाने के बाद भी सोती रही पन्द्रह-बीस मिनट. यह सब तामसिक प्रवृत्ति के लक्षण हैं. कल शाम भी उन्होंने रोज की तरह ढेर सारे अमरूद तोड़े, बांटे भी. समाज के किसी काम तो आ रहे हैं उस व्यक्ति के लगाये पेड़ के अमरूद जो उनसे पहले इस घर में रहता होगा. कल अरुंधती राय की एक किताब में पढ़ा कि बड़ी-बड़ी योजनायें चाहे वह डैम हों या अन्य कुछ, लाभ से ज्यादा हानि पहुंचाती हैं. नर्मदा बचाव आन्दोलन से प्रभावित होकर वह वहाँ गयीं, अध्ययन किया और इतने आंकड़ों के साथ किताब छपवायी, उनकी मेहनत अनुपम है.

आज गीता में ईश्वर की विभूतियों का वर्णन पढ़ा. ईश्वर की कल्पना कितनी मधुर है यदि वास्तव में उसका साक्षात्कार हो तो कैसा अद्भुत दृश्य होगा. कबीर ने कहा है जब वह ईश्वर को खोजने गये तो खुद ही खो गये, पर उसके लिए खुद को एक क्षण के लिए भी खोना सम्भव नहीं लगता. आजकल ध्यान भी नहीं कर पाती, मन जाने कहाँ-कहाँ भटकाता है व खुद भी भटकता है. कभी टीवी पर देखे किसी धारावाहिक का दृश्य तो कभी कुछ और, अपेक्षाकृत आज मन शांत है, कल दिनभर बहुत अस्त-व्यस्त सा रहा. संयम, एकाग्रता और अनुशासन इन तीनों में से कोई भी कम हो तो ऐसा होना स्वाभाविक है. सुबह-सुबह जीजाजी को उनके जन्मदिन की बधाई दी, पर उनका जन्मदिन कल है. माँ व भाभी से बात की, अभी तक उन्हें उसका पत्र व राखियाँ नहीं मिली हैं, डाक विभाग अब पहले सा चुस्त व ईमानदार नहीं रहा. जून ने इस पेन में नई जान डाल दी है, वह हमेशा की तरह घर का उसका व नन्हे का बहुत ख्याल रखते हैं. उसे सारी चिताओं से मुक्त कर दिया है. अभी कुछ देर पूर्व प्रार्थना करते समय वह यही कह रही थी कि न तो उसे अपनी जीविका की चिंता है न घर चलाने की, न ही परिवार में कोई परेशानी है, न ही कोई अस्वस्थ है, वह सभी की और ईश्वर की कृतज्ञ है कि उसे सारे सुख दिए हैं. वक्त है उसके पास की ईश्वर चिन्तन कर सके, समझ है, बुद्धि भी ठीक-ठाक सी दी है, स्वयं को सुधारने की इच्छा भी है, पर तब भी मीलों चल चुकने के बाद कभी-कभी लगता है वह जहाँ से चली थी वहीं खड़ी है. मन रह-रह कर सांसारिक आकर्षणों में फंसता है. कभी न कभी चाहे निर्दोष ही क्यों न हो मुंह से असत्य भाषण होता है, प्रमाद छाता है, ऐसे में कोई गुरू होता जो साथ-साथ रहता, सहेजता, वह गुरू तो उसे स्वयं ही बनना होगा.

 


Saturday, January 11, 2014

प्रिंसेस डायना


कल कुछ महिलाओं के साथ नूना क्लब की किन्हीं सदस्या के यहाँ गयी, जिनके पति रिटायर हो गये हैं. उन्हें लेडीज क्लब की तरफ से विदाई देनी थी. वह लिख रही थी कि एक कीड़ा पहले पंखे से टकराया फिर आकर उसपर गिरा, उस पल वह कुछ अस्त-व्यस्त सी हो गयी, उस दिन शाम को उनके माली ने विजिलेंस के आदमियों द्वारा उसकी दावली ले लेने व उसे लाठी से मारने की बात कही तो वह परेशान हो उठी थी, जून को भेजा, स्थिर नहीं रह पाती है हर स्थिति में, अर्थात sensitivity किसी हद तक बची हुई है. कल टीवी समाचारों में Princess Diana की मृत्यु की खबर सुनी तो स्तम्भित रह गयी, ज्यादा प्रचार ने ही उनकी जान ली, प्रेस फोटोग्राफर जो पीछे लगे थे, उन्हें अवश्य सजा मिलनी चाहिए.

कहीं से तेज दुर्गन्ध आ रही है, इतनी तेज कि उसमें साँस लेना भी मुश्किल है उसके लिए, पर बाहर बच्चे खेल रहे हैं, उन्हें खेल के सामने दुनिया की कोई बाधा बाधा नहीं लगती, उनके पड़ोसी भी टहल रहे हैं, शायद वह कुछ ज्यादा ही सेंसिटिव है. सामने वाले चाय बागान में शायद कोई जानवर मर गया है उसे उठाने कोई नहीं आया, दोचार दिन में खुद ही सड़कर मिटटी बन जायेगा मगर तब तक इस दुर्गन्ध को झेलना पड़ेगा.

कल उसकी पड़ोसिन भी उसके साथ गयी थी गाना सीखने, उसने अच्छा गाया और वह नर्वस होकर ठीक से न गा सकी, तभी से मन में वह बात घूम रही है, J Krishnamurti की किताब में ठीक ही पढ़ा था comparison is the sign of immature mind. कल शाम भी स्वयं को संयत न रख सकी और जून को एक पल के लिए परेशान कर दिया, आज सुबह अलार्म बजा तो एक झटके से उठ बैठी, पर ठीक नहीं लगा और एक पल को फिर लेटी तो आँख मुंद गयी. यूँ छोटी-छोटी बातें आत्मा को कलुषित करती चलती हैं और एक वक्त ऐसा आता है कि अपना चेहरा भी धुंधला दिखाई देता है. आज वह आंवले वाला बूढ़ा भी आया है, एक घंटा काम करके आंवले ले जायेगा. उनका पेड़ भी तो लद गया है इतना बोझ सहन नहीं कर पायेगा. आजकल वह ‘हरीश भिमानी’ की लता मंगेशकर पर  लिखी पुस्तक पढ़ रही है, लेखक ने बहुत मेहनत की होगी इसे लिखने में. जून कह रहे हैं शनिवार को वे प्रीति भोज का आयोजन करें, उस दिन ‘गणेश पूजा’ का अवकाश भी है. नन्हे के यूनिट टेस्ट चल रहे हैं, दो टेस्ट पूरी तरह ठीक नहीं हुए, कुछ देर परेशान रहा फिर भूल गया, काश वह भी इसी तरह जल्दी से भूलना सीख पाती, यूँ सीख तो रही है वह, मंझले भाई के पत्र में यहाँ आने का कोई जिक्र न पाकर थोड़ा उदास हुई थी पर एक घंटे बाद ही उसे पत्र का जवाब भी दे दिया. कल जिस दुर्गन्ध से बचने के लिए पहले वे क्लब गये फिर एक मित्र के यहाँ, आज वह नहीं आ रही है.

आज सुबह जून ने उठा दिया सो दीदी से बात कर पाई, उन्होंने पत्र भी भेजा है, कल रात्रि घर पर शेष सबसे बात की थी, नये घर में ‘गृह प्रवेश’ १३ फरवरी को हो रहा है, वे लोग जा तो नहीं सकते उपहार भेजेंगे. कल लाइब्रेरी से Fire and Rose किताब लायी है, उर्दू के आधुनिक शायरों की नज्मों से सजी हुई. उर्दू शायरी को उसी भाषा में पढ़ सकती तो बेहतर होता या फिर हिंदी में, पर अपने देश में अंग्रेजी का सहारा लिए बिना एक कदम भी आगे नहीं चल सकते. शनिवार को उनके यहाँ भोज का कार्यक्रम तो टल गया है, उसी दिन एक मित्र ने अपनी बेटी के जन्मदिन पर बुलाया है, उसी दिन क्लब में debate भी है. वे पहले क्लब जाकर फिर पार्टी में जायेंगे.






Wednesday, December 25, 2013

हरी घास पर पक्षी


गर्मी की लम्बी छुट्टियों के बाद आज नन्हे का स्कूल खुला है. सुबह उसे जल्दी उठा दिया था, हमेशा की तरह थोड़ा सा परेशान था, स्कूल का पहला दिन...क्या होगा ? तरह-तरह के डर उसे सता रहे थे, बेबुनियाद हैं वे डर यह भी उसे पता था, कल से स्वाभाविक हो जायेगा. पड़ोस के बच्चे के साथ भी यही समस्या थी, पहली बस छोड़ दी उसने...ये बच्चे भी उन बड़ों की तरह तनाव का शिकार होते हैं. एक सखी से बात हुई, वह बच्चा भी चिड़चिड़ा हो गया है, पिता की कमी उसे जरुर खलती होगी. कल सुबह उसकी माँ सब कुछ समेट कर दिल्ली जा रही है, वहाँ उसे काम मिल गया है, नया जीवन शुरू करेगी. आज सुबह साढ़े चार बजे अलार्म सुनकर उठ गयी, पांच बजे वह छात्रा पढ़ने आई, हफ्ते में तीन दिन उसी वक्त आया करेगी. छह बजे उसके जाने के बाद जोर से भूख का अहसास हुआ, पर ज्यादा खा नहीं पाई, फिर जून को दफ्तर व नन्हे को स्कूल भेजना और उसके बाद ही फोन पर बात करते करते ही इतना वक्त हो गया है. मौसम बेहद गर्म है, धूप में तेजी है और हवा बंद है. इसी तरह गर्मी के ये उमस भरे दिन बीत जायेंगे और मौसम सुधरेगा..फूलों का मौसम यानि शरद ऋतु आयेगी.

कल दोपहर नन्हा जल्दी आ गया था, आज कल की तरह परेशान नहीं था, पर बहुत खुश भी नहीं था, एक मित्र के आने पर ही उसके चेहरे पर मुस्कान दिखी. कल शाम जून ने भी उसके साथ बगीचे में काम किया. अब पिछला हिस्सा काफी साफ हो गया है. वह जो किताब पढ़ रही है, उसकी तरह उनके बगीचे में भी कई पक्षी आये थे जो शायद कीट खा रहे थे या घास के कोमल पत्ते. विक्रम सेठ की इस पुस्तक में बगीचे का वर्णन इतना रोचक है कि.. काश ! उनके जैसा माली उनके पास भी होता, उनका माली भी अपने आप में एक अनोखा चरित्र है, पूर्वी ऊत्तर प्रदेश की भाषा बोलता, है बूढ़ा, जबकि अपने काम में दक्ष है पर ज्यादा वक्त नहीं है उसके पास, और स्वीपर तो..बुद्धू सा है, इतना बड़ा हो गया है पर बच्चों की तरह बहती नाक लिए घूमता है.

कल क्लब में किसी संगीता ने अपनी मधुर आवाज से सभी को मुग्ध कर दिया, उसके गले से आवाज बिना किसी प्रयास के सहज रूप से निकल रही थी, वह एक ऊंची कलाकार है, वह उससे कहना चाहती थी पर कह नहीं सकी. वह उसी बातूनी सखी के साथ गयी थी, जिसके भीतर कुछ करने का जज्बा है, वह भी गाती है, उसने भी शायद प्रतिद्वंद्वी समझ कर कुछ कहना ठीक न समझा. कल पिता का पत्र आया है, लिखा है वे लोग दिसम्बर में आने का कार्यक्रम बना रहे हैं, पर उसे नहीं लगता यह सम्भव हो पायेगा, पहले भी कई बार उन्होंने कहा है, वह जानती है पिछली बातों को याद करना बुद्धिमानी नहीं है और जिन्दगी का दरिया अगर बहता न रहा तो दूषित हो जायेगा. जो जब जैसा हो उसे स्वीकारना होगा. कल दोपहर उसकी तेलगु पड़ोसिन आई थी, कोलकाता एयर पोर्ट पर मिले किन्हीं तेलगु बैंक मैनेजर से हुई मित्रता की बातें बता रही थी, उन्होंने इसकी थोड़ी तारीफ़ कर दी और यह उन्हें घर आने का निमन्त्रण दे बैठी.

एक आग गमे इश्क की...
वह इश्क जो हमसे रूठ गया अब उसका हाल सुनाएँ क्या
कोई महर नहीं कोई लहर नहीं अब सच्चा शेर सुनाएँ क्या

पीटीवी पर आज बहुत दिनों बाद गजल सुनी. उसके दायें गाल में छाले हो गये हैं, कारण शायद विटामिन बी की कमी या पेट की खराबी ! एक दो दिन में अपने आप ही ठीक हो जायेंगे, जून आज ग्लिसरीन भी लायेंगे जिसे लगाने से आराम मिलता है. नन्हे को कल बाएं हाथ पर चोट लग गयी, sprain हो गया, एक लड़के का घुटना उस पर आ गया, पता नहीं कौन सा खेल खेल रहे होंगे. उसकी सोशल और विज्ञान की टीचर ने अभी तक क्लास में जाना शुरू नहीं किया है. उसका संस्कृत टेस्ट है आज, मगर वह कापी रखना जरूर भूल गया होगा...अगर नहीं भूला हो तो वाकई कुछ बात है ! जून अपना पर्स आज घर पर ही भूल गये हैं. कल शाम वे क्लब में डॉ गांगुली की टॉक सुनने गये थे, अच्छा लगा, जाने की तयारी, वहाँ बैठना और कुछ हद तक सुनना भी. सुबह एक सखी का फोन आया आखिर में कहा आज की present लग गयी न, उसे पसंद नहीं आता उसका यह कहना पर दूसरों को अपनी पसंद, नापसंद बताने का ढंग उसने सीखा ही कहाँ है.



Monday, August 5, 2013

सपनों का ताजमहल



....और कल शाम बस स्टैंड पर बेहद प्रतीक्षा करने के बाद जून आ गये, नन्हे ने दूर से ही देख लिया था, बढ़ी हुई दाढ़ी मैले कपड़े और सफर की थकान, उसने आते ही मौन में ही उससे बात की, उनके एक मित्र भी वहीं थे, उन्हीं की कार से वे लोग गये थे बाद में नहा-धोकर जब वे बाथरूम से निकले तो पहले से नजर आने लगे छलकती हुई मुस्कान के साथ. इस बार भी वह  उनके लिए ढेर सारे उपहार लाये हैं, अपने लिए प्याजी रंग की ऊन जो पहली नजर से देखने पर उसे उतनी अच्छी नहीं लगी पर अब पसंद आ रही है. नन्हा अपना स्कूल बैग पाकर खुश है. घर कैसा भरा-भरा लग रहा है. काम भी जैसे बढ़ गया है, अब उसे समय बिताने के तरीकों के बारे में नहीं सोचना होगा, हर वक्त वे साथ जो होंगे.
आज शाम जब वे टहलने गये तो जून ने सुझाव दिया, सूरत वे नहीं जा रहे तो आगरा ही चलते हैं, ताजमहल देखने की उसे बरसों से तमन्ना है. नन्हे को भी बहुत अच्छा लगा, उसने अभी-अभी ताजमहल के बारे में काफी कुछ पढ़ा है. साथ ही देहरादून जाने पर एक दिन के लिए मसूरी भी जाया जा सकता है.
फरवरी का प्रथम दिन. जून ने फोन किया वह गैराज जाने के कारण देर से आएंगे. धूप बहुत तेज है सो वह खिड़की के पास वाली कुर्सी पर कमरे में ही बैठी है. जैसा कि संदेह था वह आंवले वाला बूढ़ा आज नहीं आया और अभी-अभी उसने पड़ोसिन से उसके माली से बात करने के लिए कहा है. परसों दीदी का पत्र आया था, उन्होंने लिखा है घर में चोरी की बात सुनकर उन्हें अपना आत्मनिर्भर न होना खल रहा था. वह लिख रही थी कि अचानक कानों को चुभने वाला तेज शोर शुरू हुआ और लगभग ५-७ मिनट तक जारी रहा, एक अजीब सी कैफियत थी, और अब वह शोर थम गया है, नन्हा गेट तक देखने गया आकर बताया, गैस को लीक किया जा रहा था. कुछ देर बाद फिर से शोर आने लगा.
 आज उसने लाहौर रेडियो से गजलें सुनी, तो.. टीवी पर रेडियो का भी आनन्द लिया जा सकता है. इस वक्त धूप में बैठे हुए जब बीच-बीच में ठंडी हवा का झोंका आकर सहला जाता है तो हल्की ठंडक का अहसास होता है. कल इतवार था, दोपहर को थोड़ी देर फिल्म देखी, शाम को ब्यूटी पार्लर गयी, एक मोटी सी लडकी थी वहाँ, उसके चेहरे पर एक अच्छा सा भाव था जैसे पुरानी जान-पहचान हो, पार्लर वाली सभी लडकियों के चेहरे पर एक अलग ही भाव होता है, जैसे देखते ही सब जानना चाहती हों. वहाँ से वे एक मित्र के यहाँ गये जहाँ उनके एक मित्र मिले, बता रहे थे, सुबह पांच बजे उठ जाते हैं, ७ बजे तक बेटा पढ़ाई करता है, नन्हा सुबह उठकर पढ़ाई नहीं कर पाता, पर आज समझाने पर थोड़ी देर की. अचानक वह पंछियों की आवाजें सुनने लगी और दस मिनट तक वही सुनती तरही, लॉन में झाडू लगाती नैनी की बेटियों की आवाज भी आ रही थी, वे दोनों कल रात भर अपनी सहेली के यहाँ रहकर आई हैं, कल शाम से उनकी माँ परेशान थी.

अभी कुछ देर पहले सुबह के काम खत्म हुए थे कि ध्यान आया, एक सखी से बात कर ली जाये, उसने कल शाम अपने बगीचे से पत्ता गोभी भिजवाई थी. वह एक सुलझी हुई पढ़ी-लिखी अच्छी मित्र है, उसके साथ कभी नाराजगी या गलतफहमी होने का डर नहीं है. कल शाम बहुत दिनों बाद असमिया सखी से भी मिली, लेकिन जैसी उम्मीद थी, वह इतने दिन न मिलने पर नाराज होगी, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, शायद उसने भी यह मूलमंत्र समझ लिया है कि अपेक्षा ही दुःख देती है. कल सुबह खत लिखने बैठी ही थी, जून आ गये वह छोटी बहन का पत्र लाये थे, पढ़कर अच्छा नहीं लगा, रिश्तों के कारण कितना खिंचाव हो सकता है इस जगत में. जून भी थोड़ा परेशान हो गये. मार्च में उनके घूमने जाने के कार्यक्रम के बारे में सोचकर, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे उन्हें अपनी ओर से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए और अपने कार्यक्रम को दर्शनीय स्थानों को देखने तक ज्यादा केन्द्रित रखना चाहिए न कि रिश्तेदारों से मिलने तक. एक तटस्थता बनाये रखकर अपने उन स्वप्नों को सच होते देखना चाहिए जो ताजमहल और मसूरी की कल्पना में उन्होंने देखे हैं. माँ-पापा तो यकीनन उन्हें देखकर प्रसन्न होंगे ही...इतना ही पर्याप्त है.






Monday, July 22, 2013

जंगल का फूल


आज सुबह पता नहीं किस ख्याल में वह सब्जी में नमक डालना ही भूल गयी, नन्हे को टिफिन में वही सब्जी दी है, पर जून के आने पर उसे नमक वाली सब्जी भेजनी होगी, अन्यथा वह भोजन नहीं कर पायेगा. उसने माली को डहेलिया की क्यारी साफ करने को कहा, उसमें पहला फूल अगले हफ्ते खिल जायेगा, चन्द्र मल्लिका पहले ही खिल चुकी है., सफेद, बैंगनी, पीले, गुलाबी और मैरून फूल ! जून कल शाम खेल न पा सकने के कारण बेहद परेशान लग रहे थे, उनके बैडमिन्टन के पार्टनर के पैर में चोट लग गयी है, अभी कुछ दिन और वह नहीं खेल पाएंगे, क्विज में भी वह उनकी सहायता नहीं कर पा रहे हैं.

आज सुबह जून से जब उसने होमियोपैथी डॉक्टर को दिखाने की बात कही तो उनका रेस्पॉंस वही था उदासीनता भरा, कल रात भी यही हुआ, हो सकता है वह भी उनकी परेशानियों के प्रति उदासीनता का प्रदर्शन करती रही हो. उसकी समस्या तो समझ से बाहर है, इस बार बैंडेज करने पर शायद ठीक हो जाये. यूँ उसके कारण उसे फ़िलहाल तो कोई परेशानी नहीं है पर भविष्य में क्या होगा कहना मुश्किल है, लगता है धोबी आया है, कैसा भी मौसम हो वह नियमित रूप से अपने निर्धारित समय पर आता है. कल दोपहर वह एक परिचित के यहाँ गयी, जो असमिया में लिखती हैं, साहित्य के बारे में कुछ चर्चा हुई, आते-आते पौने तीन बज गये. जून ने कुछ देर पूर्व फोन करके हिंदी सप्ताह के लिए स्वागत भाषण लिखने को कहा था उसने ड्राफ्ट लिखा तो है उन्हें दिखाकर फिर से लिखना ठीक रहेगा. आज उनके यहाँ क्विज है, उसने मन ही न उन्हें शुभकामनायें दीं. आज नन्हे के स्कूल में भी इंस्पेक्शन है, कब्स की ड्रेस पहन कर गया है, आज सुबह जल्दी उठ गया था, सारे काम भी समय पर कर लिये जबकि परसों इतवार को आर्ट स्कूल के लिए तैयार होने में पूरे दो घंटे लगाये. उस दिन पहली बार इतना रोया था बाथरूम में नहाते हुए, और कल शाम को उसके इतना कहने पर कि उसका रजिस्टर किसी को दे दिया, आँखें भर लाया, शायद उसकी drawings थीं उसमें, लेकिन जल्दी ही संभल गया. he is growing up fast.

माह का अंतिम दिन, कल जून ने उसे दो अच्छे समाचार दिए, पहला था उसकी कविता के लिए पुरस्कार और दूसरा उसकी बंगाली सखी का भेजा पत्र और उपहार. आज नन्हे का स्कूल बंद है, उसकी पड़ोसिन अपने पति के साथ कोलकाता जा रही है, हृदय रोग का परिक्षण कराने.

आज उसके भीतर का कवि जाग उठा है...
अनगिनत अफसाने, हजारों कविताएँ लिखी जा चुकी हैं कबीर के जिस ढाई आखर वाले प्रेम पर और जो आज भी उतना ही अछूता है उतना ही कोमल और  नई दुल्हन सा सजीला, उसी को शब्दों में बाँधने का प्रयास है यह रचना-

दूर कहीं उजाला फैलाता
एक नन्हा सा दिया माटी का
जैसे दिल के आंगन में प्यार की लौ
जो आस्था, विश्वास और श्रद्धा के अमृत से जलती है
लौ जो चिरन्तन है, जिसे आंधी, पानियों का कोई खौफ नहीं

दूर कहीं जंगल में खिला एक अकेला फूल
जैसे दिल के आंगन में प्यार की खुशबू
जो युगों से कस्तूरी सी बिखेर रही है सुगंध
जिसे बन्धनों और दीवारों का कोई भय नहीं

सुदूर पहाड़ी से उतरती जलधार
जैसे दिल के रास्तों पर प्यार की ठंडक
जो युगों से प्रवाहित है अविरत
जिसे जंगलों और बीहड़ों दोनों को खिलाना है






Tuesday, July 2, 2013

डिश एंटीना- स्वप्नों का संसार


सोमवार के बाद आज शनिवार को डायरी खोलने का समय मिला है, यूँ दोपहर को समय होता है पर उस वक्त मन नहीं होता, सुबह ही लिखने का अभ्यास हो गया है और वह है कुछ नियम-कायदों पर चलने वाली, हाँ, यह बात और है कि सारे नियम-कायदे अपनी सुविधा के अनुसार बनाये हैं, और हो भी क्यों न, आखिर वही तो उन्हें बना रही है और उनका उपयोग कर रही है ! तो पिछला पूरा हफ्ता इतनी व्यस्तता में गुजरा कि कल आखिर उसने जून से बात कर ही डाली कि साधू माली को हटाकर जो आजकल उनके आया रूम में रह रहा है, एक नैनी ही रख लेते हैं, बाहर से आकर काम करने वाली नैनी के साथ खुद भी लगना ही पड़ता है. उसने अपनी पड़ोसिन से बात की है, उसकी नौकरानी यदि आने को तैयार हो जाती है तो अच्छा रहेगा तब वह साफ-सफाई और सब्जी काटने के कामों के अलावा कुछ रोचक काम कर सकती है.
 बुधवार की शाम को बिजली चली गयी तो वे अपने एक मित्र के यहाँ चले गये, कल भी बिजली सुबह चार बजे से ही गायब थी, जो शाम को तीन बजे आई, दोपहर को जून भी नहीं आये, उसका मन कुछ अस्त-व्यस्त सा था, पहले दो घंटे एक किताब पढ़ती रही फिर साइकिल चला कर बिना फोन किये असमिया सखी के यहाँ गयी, उसे शायद उम्मीद नहीं थी, खैर, उसे साइकिल चलाना अच्छा लगा. नन्हे को उसकी कक्षा का कैप्टन बनाया गया है, उसने ध्यान दिया कि वह भी उसकी तरह एक ही बात को बार-बार पूछने पर नाराज हो जाता है. उसकी बैक डोर पड़ोसिन गढ़वाली है, उसकी तबियत का हाल पूछने वह उसके घर गयी थी बातों-बातों में उसने बताया कि उसके पति भी उसी वर्ष गढ़वाल के उसी शहर में थे जब वे लोग वहाँ थे.

आज भी अभी तक जून नहीं आए हैं, उसने मेज पर खाना लगा दिया और इंतजार के क्षणों को काटने के लिए पत्र लिखने लगी, तीन पत्र पूरे भी हो गये और उनका पता नहीं था तो उसने डायरी उठा ली है. कल रात लगभग ग्यारह बजे उन्हें कमरे में कुछ आवाज सुनाई दी, पर जगकर देखने के बाद कहीं उसका स्रोत नजर नहीं आया, वह कुछ देर सो नहीं सकी, रात को मन कितनी जल्दी  आशंकित हो जाता है. अचानक उसे याद आया एक खत और लिखना है, जो वह लंच के बाद लिखेगी. बीते हुए कल उसने डिश एंटीना के बारे में जून से बात की और आने वाले कल उनके बगीचे के पिछवाड़े में वह लग भी जायेगा, उसने सोचा कितना अच्छा होगा जब वे जी टीवी के सभी कार्यक्रम देख पाएंगे.

आज फिर जून लंच पर नहीं आएंगे, वे अपने साथ टिफिन ले गये हैं और उसके पास हैं किताबें और ढेर सारा समय, जो चाहे करने के लिए या कहीं जाने के लिए, लेकिन वह तय नहीं कर पाई, कहाँ जाना चाहिए, फिर उसने सोचा, वह स्वयं को कुछ नये कामों में व्यस्त रखेगी, पर वह जानती है ज्यादा समय तो पढ़ने में ही बीतेगा. वह कुछ लिखने का प्रयास भी कर सकती है जैसे कोई भूली हुई कविता या कोई अच्छी सी बात उस किताब से नोट कर सकती है बाद में पढ़ने के लिए. उसे अभी अखबार भी पढ़ना है इतवार का स्पेशल एडिशन भी और नन्हे का लाया बच्चों का जासूसी उपन्यास भी है ‘हार्डी बॉयज’, जो उसे अच्छा लग रहा है, अपने बचपन में उसने ऐसी कोई किताब कभी नहीं पढ़ी. कल जून ने माली की सहायता से डिश के लिए पोल लगवा दिया, नन्हा बहुत खुश है और वे दोनों भी,किसी ने सही कहा है, हर चीज का एक वक्त होता है, कुछ दिन पहले तक वे सोचते थे कि डिश एंटीना लगवाना व्यर्थ है और किसी हद तक हानिकारक भी, पर आज लग रहा है, घर में डिश एंटीना होना तो बिलकुल सामान्य सी बात है. नन्हे को पिछले कुछ दिन से हल्की खांसी है उसे होमियोपैथी दवा दिलवाने शाम को ले जायेंगे.

जून आज दोपहर को खाने पर आएंगे, अभी अभी फोन पर कहा है और वह उत्साह से भर गयी है, सुबह वह ‘लंच पैक’ अपने साथ ले गये थे पर शायद उन्हें फील्ड से जल्दी आना पड़ा है. Nanha made her cry in the morning, she told him to gargle and he became irritated, she doesn't know why did she feel pain, pain of losing him, he is grownup and and doesn't listens as before. She cried that one day he will go so far from her that her presence will make no difference for him, but after 10-11 minutes he saw her red eyes and asked the reason, when she told him, he himself brought tear in eyes, He is so sensitive too and she thinks she is not going to lose him ever. All morning chores is done and after writing few more lines she will read that book of positive thinking and health. Yesterday they got one cute letter from her cousin brother. He seems much mature through his letters. They all will reply him. Raksha bandhan is also in next month, she has to bring rakhis for all of them, sending them is must for her, Rakhies  at least binds them together.  

   



Friday, August 10, 2012

ब्रेड रोल और मैंगो शेक





आज जवाहरलाल नेहरु की पुण्यतिथि है. उनका माली छुट्टी पर गया है, दोपहर को आकाश में बदली थी, उसकी छांह में वह कुछ देर बगीची में काम करती रही, थोड़ी सफाई वगैरह. कल रात भर वर्षा होती रही, हर वर्ष की तरह कुछ जिलों में बाढ़ आ गयी है. रेल व बसें भी नहीं चल रही हैं.

आज सुबह जून को सामने वाले बंगाली मित्र ने अपनी लाल मारुती में लिफ्ट दी, पूरी लेन में सिर्फ उन्हीं के पास कार है, और वह सबको उसमें बिठाने के लिये तैयार रहते हैं. उनके जाने के बाद उसने स्नान-ध्यान करके डायरी उठायी कि नन्हा उठ गया. इस समय वह तकिये उठाकर इस कमरे में चटाई पर रख रहा है दोपहर को पापा के सोने के लिये, बेडरूम में दोपहर बाद धूप से ज्यादा गर्मी हो जाती है, सो वे बैठक में नीचे सोते हैं. कल उसने दीदी को एक बड़ा सा पत्र लिखा. कपड़े ठीक किये और  vocubulary exercise करने का प्रयत्न, कितने ही नए शब्द और पुराने शब्दों की root मालूम हुई. कल उड़िया पड़ोसिन घर से लाए हुए पकवान दे गयी, उसका छोटा भाई व ससुर आये हैं, सदा की तरह उससे एक कौर भी नहीं खाया गया. कल घर से पत्र आया, पिता चिंतित हैं कि वह बी.एड करने के लिए जून के बिना एक वर्ष तक कैसे रहेगी.

आज वह अपने जीवन के एक नए वर्ष में प्रवेश कर रही है, मन में कितने ही अनूठे, सुंदर, पवित्र भाव उठ रहे हैं, आज सुबह जून ने उसे जन्मदिन की शुभकामनायें दीं. किसी का जन्मदिन का कार्ड अभी तक तो नहीं आया है, उसने सोचा, देखें परसों पहले किसका आता है. जीवन में इतने वर्ष उसने कैसे गुजारे हैं यह सोचने का वक्त अभी नहीं है, आने वाला वर्ष कैसा हो यह कल्पना में है. जिन बातों को वह रोज पढ़ती है, गीता में जो भाव सात्विक हैं, उन्हें प्राप्त कर सके और कठिनाइयों से जूझना सीखे. नन्हे के साथ आगे की पढ़ाई नहीं कर पायेगी, ऐसा नहीं, बल्कि कर सकेगी, यही सोचना ठीक है. समय सबको सिखाता है, नन्हा भी सीख जायेगा कुछ देर के लिये उससे दूर रहना. शाम को जून वेल साईट गए थे, दो घंटे में लौट आये. उनकी प्रेस खराब हो गयी है, सो कपड़े इकट्ठे होते जा रहे हैं. कल जून बनवाने ले जायेंगे.

कल जून को पे स्लिप मिल गयी और उन्होंने अच्छा सा जन्मदिन मनाया. उसने ब्रेड रोल बनाये थे और मैंगो शेक. उनके एक परिचित दम्पती आये थे, उसकी कविता के पहले प्रशंसक, अब वह रोज ही कुछ न कुछ ही लिखेगी दोपहर को. कितना अच्छा लगता होगा अपने पाठकों से अपनी कहानी, कविता की प्रशंसा सुनकर लेखक-लेखिकाओं को.. आजकल वह सुबह नन्हे को जल्दी उठा देती है नहीं तो दोपहर को सोने में आनाकानी करता है.  



Tuesday, July 10, 2012

कहाँ से आये शक्कर पारे


पिछले तीन दिन वह व्यस्त रही, जून का दफ्तर बंद था, परसों शनिवार था फिर इतवार और सोमवार को गणतन्त्र दिवस. शनि की शाम वे किन्हीं परिचित के यहाँ गए, बहुत सुंदर लगा उनका घर, सजा-सजाया घर था, एक-दो माह बाद वह भी अपने घर के लिये कुछ कलात्मक वस्तुएं खरीदेगी उसने सोचा. इस समय वही पहले की सी शाम है, नन्हा सोया है और जून घूमते हुए लाइब्रेरी गया है. उसी दिन उन्होंने आलू चिप्स बनाये थे, अब तो पूरी तरह सूख गए हैं. सोनू उठकर नीचे कालीन पर बैठ गया है, ठंड कुछ बढ़ गयी सी लगती है, उसको मोज़े पहनाने हैं, टोपी वह पसंद नहीं करता. मुँह से कैसी-कैसी आवाजें निकलता है, बहुत तरह की आवाजें, बच्चे जाने किस मस्ती में रहते हैं. जून ने आज उसे चार बेर लाकर दिए, पहले खट्टे फिर कसैले लगते हैं.

संध्या के सवा पांच बजे हैं, जून रोज की तरह टहलने गए हैं और नन्हा भी किसी स्वप्नलोक में विचरण कर रहा होगा. वह लिखने बैठी है दिन भर की कुछ घटनाएँ. सुबह सामान्य थी, उनके किचन गार्डन में गाजर की फसल बहुत अच्छी हुई है इस बार, पड़ोसन को देने गयी, वह कुकिंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाली थी पर देर से पहुंचने के कारण भाग नहीं ले पायी. दोपहर को जून के जाने के बाद उसने कुछ देर स्वेटर बनाया नन्हें के साथ खेला, फिर वह अपना भोजन करके सो गया तो किचन साफ किया, फिर कुछ देर को सो गयी. दोनों उठे तो सवा दो बजे थे, तैयार होकर बाहर घूमने निकले, सोचा टैटिंग का कोई नया डिजाइन लेगी अपनी मित्र से, पर धागा खत्म हो गया था. असमिया मित्र के यहाँ गयी जिसका बेटा नन्हें से मात्र एक माह बड़ा है. वापस आयी तो देखा एक पैकेट पड़ा है, सोचा कोई सब्जी रख गया होगा शायद उनका ही माली. पर आये हैं शक्करपारे और नमकीन, पता नहीं कौन रख गया है. जून और वह अपने सभी परिचितों के नाम गिन चुके हैं. किसी के भी इस तरह का पैकेट रख जाने की सम्भावना नहीं दिखती. 
क्रमशः