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Thursday, March 27, 2014

गोलगप्पों वाली चाट


रात को बिजली की कड़क और बादलों की गरज से जब नींद खुली तो पाया, मन अगले दिन के बारे में सोच रहा है, जन्मदिन के बारे में. सुबह-सुबह नन्हे ने चॉकलेट और जून ने सुंदर सा ग्रीटिंग कार्ड देकर शुभकामना की. फिर सखियों के फोन आए और दीदी का भी. मौसम सुहावना हो गया है. शाम को गोलगप्पे और मैंगो शेक के साथ चने और आलू की चाट यकीनन अच्छी रहेगी. आज वह बहुत अच्छा महसूस कर रही है, फूल सा हल्का और रुई के फाहों सा नर्म ! इस दिन में कोई बात होती जरूर है आम दिनों से काफी अलग, ख़ुशी जैसे छलकी जाती है. आज कोई भी बात उसे उदास नहीं कर पायेगी, टकराकर वापस लौट जाएगी यदि प्रतिकूल हुई तो और अनुकूल हुई तो उस आवरण को और घना कर देगी जो प्रियजनों ने उसके चारों ओर बना लिया है.

पड़ोसिन ने अपनी बहनों के लिए खरीदी असम सिल्क की साड़ियाँ दिखने के लिए बुलाया है. वह  भी पड़ोसिन से एक उड़िया सांबलपुरी साड़ी मंगा रही है बरसात फिर शुरू हो गयी है, पर वह छाता लेकर जा सकती है. सुबह बड़ी भाभी से बात करने का मन था फोन देखा तो खराब था. इस बार किसी भी भाई से जन्मदिन  पर बात नहीं हो सकी.

टीवी पर वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा बजट प्रस्तुत कर रहे हैं. Only 37% of our land is under direct irrigation. Water, houses, agriculture, roads, foreign investment, provident fund, small scale industries, education all have already been mentioned in his speech. 50% increase is done in education budget. It is a taxpayer friendly and gives proper attention to agriculture. Prices of some articles have increased but price of some have been reduced.

आज बड़ी बहन का जन्मदिन है, उनके साथ-साथ भाई भाभी से भी बात हुई, उस दिन की पार्टी भी अच्छी रही थी, सखी ने गोलगप्पों की तारीफ की, उसे लगा बात सिर्फ भावना की है, जहाँ अपनेपन की शुद्ध प्रेममयी भावना होगी तो वहीं सहजता व सरलता संबंधों में आएगी. कल जून और उसने साथ साथ बजट सुना, कुल मिलाकर बजट अच्छा रहा है. जून उसे मौका ही नहीं देते कि वस्तुओं के दामों में अंतर जान सके, सामान खत्म हो उसके पहले ही ले आते हैं, जैसा उन्होंने अपने घर में पिता को बचपन से करते देखा है. वैसे अब किसी भी परिस्थिति में वे एक-दूसरे के साथ हैं, भरोसा कर सकती है वह पूरी तरह उन पर और अब वह पहले की तरह चुप्पा भी नहीं रहते, उसकी बातें भी सुनते हैं और कभी कोई बात चर्चा के लायक हो चर्चा भी करते हैं, स्वस्थ चर्चा. नन्हा आजकल थका-थका सा रहता है, शायद कम्प्यूटर के सामने देर तक बैठने के कारण ऐसा हो रहा हो, पर उसे समझाना आसान नहीं लगता क्योंकि कम्प्यूटर के सामने बैठना, उस पर खेल खेलना उसे बहुत पसंद है.

दोपहर को DCH का तीसरा पेपर हल करने बैठी तो नहीं कर पायी, थोड़ी सी थकान, कुछ उलझन सी महसूस हो रही थी. उसे लगा, पहले की तरह शामों को या जब भी मन व दिमाग दोनों चुस्त-दुरस्त हों लिखना चाहिए बाद में फेयर कॉपी के लिए दोपहर का समय ठीक है. कल शाम उसने पुरानी कविताएँ छांटनी शुरू की जो लेखन परियोजना के लिए चाहिए, कुछ कविताएँ जो उस वक्त अच्छी लगती थीं काफी बचकानी सी लगीं पर कुछ ऐसी थीं जिन्हें तराशा जा सकता है. कविता की पहली पहचान है भाषा में विसंगति, जहाँ शब्दों के वे अर्थ न निकलते हों जो सामान्यतः होते हैं नहीं तो कविता के गद्य बनने में देर नहीं लगेगी. इस बार जो पुस्तकें लाइब्रेरी से लायी है वे ऐसी नहीं हैं जो Jane Austen की सेंस एंड सेंसिबिलिटी की तरह मन को बाँध कर रख सकें, एक तरह से ठीक ही है, वह ज्यादा समय DCH को दे पायेगी.

आज सुबह ही उसने लॉन की तरफ गहरी नजर से देखा और उन कामों की सूची बनाई जो अगले एक हफ्ते में करने हैं, माली ने आज से ही शुरू कर दिए हैं. बालसम के पौधे फूलों से भर गये हैं. पूसी उन्ही के पास बैठी है पर उसके मुंह से लार टपक रही है, शायद वह अस्वस्थ है. आज बहुत दिनों बाद असमिया सखी से बात हुई, उसने अपने यहाँ आने के लिए कहा और वह पिछले सारे अनुभव भूलकर उसकी छोटी सी बेटी को देखने की इच्छा से भर उठी.





Tuesday, January 15, 2013

हम दीवानों की क्या हस्ती



उल्फा लीडर भारत सरकार से बात करने के पक्ष में नहीं हैं, भगवान जाने असम का भविष्य क्या होगा. कल सूजी व नारियल के लड्डुओं के कारण वह कुछ ज्यादा नहीं लिख सकी, सो दिन भर बेचैनी सी रही, अजीब सी बेचैनी, जैसे हरारत हो गयी हो. दोपहर को जून अभी घर पर ही थे, वह सो गयी, नन्हे ने सब कुछ अपने आप किया, वह अब सचमुच बड़ा हो गया है, बहुत समझदार और बहुत प्यारी बातें करता है. अपने आप होमवर्क करके खाना खाकर सोने चला गया.
कल शाम जून एक फिल्म का कैसेट लाए थे, Hook  इंडिया टुडे में सुबह ही पढ़ा था उसके बारे में, कल्पना की उड़ान है पूरी फिल्म, अजीब-अजीब से दृश्य जादू लोक में ले जाते हैं. अभी पूरी नहीं देखी उन्होंने, नन्हे को बहुत अच्छी लग रही थी, पर सुबह स्कूल जाने से पहले बोला, उसे अंग्रेजी फिल्मों में या तो कॉमेडी अच्छी लगती है या जेम्स बॉण्ड की फिल्म. बच्चे पिता को अपना आदर्श मानते हैं, उसका अच्छा उदाहरण आजकल देखने को मिल रहा है, जून ने कुछ दिन पूर्व कहा कि वह हर सब्जी में आलू क्यों डालती है, उसे आलू अच्छे नहीं लगते, और दो दिन बाद नन्हा भी वही बात कह रहा है, जबकि आलू उसे बहुत पसंद थे. घर से पत्र आया है सासु माँ ने ननद के लिए तकिये के गिलाफ, टीवी कवर, और मेजपोश बनाने के लिए कहा है, कल वे तिनसुकिया जाकर कपड़ा लायेंगे, कल ही बाजार से  वह लक्ष्मी, उनकी नौकरानी के लिए ऊन लायी थी, पर पता नहीं उसे स्वेटर बनाना आता भी है या नहीं.

आज पूरा दिन व्यवस्तता में बीता. सुबह उसकी मित्र का फोन आया उनकी कार का छोटा सा एक्सीडेंट हो गया है, तिनसुकिया जाकर विंड स्क्रीन बदलवानी पड़ेगी. दोपहर के भोजन के बाद वे तिनसुकिया गए, लौट कर टीवी पर पहले बजट देखा, फिर शाम की फिल्म. डॉ मनमोहन सिंह ने कुशलता के साथ बजट पढ़ा बीच-बीच में हँसाते भी रहे, पीवी नरसिंहाराव को एक अच्छे वित्त मंत्री मिल गये हैं. उसने आज अपने केश भी कटवाए, जून को स्टाइल पसंद नहीं आया, चिढ़ाने लगे, कल फिर जाना होगा, टीवी देखते-देखते और दिन में जरा भी आराम न होने के कारण वह थकी हुई तो थी ही, उसे क्रोध  आ गया पर हमेशा की तरह उनका स्नेह, उनकी उदारता और मीठी-मीठी बातें..वह जल्दी ही हँसने लगी.
कल दोपहर उसकी असमिया सखी अपने बेटे को जो नन्हे का हमउम्र है, छोड़ गयी फिर शाम को वे लोग उसे लेने आये. दोनों बच्चों में बहुत दोस्ती है, मनोयोग से खेल खेलते हैं, कभी  कुछ योजनायें बनाते हैं. शाम को वे सब क्लब गए, टीटी खेला, पहले अभ्यास फिर दो गेम खेले.

आज भी आधा दिन टीवी के नाम, “चाणक्य” और विश्वकप श्रंखला में भारत और आस्ट्रेलिया के बीच मैच देखने में, भारत जीतते-जीतते... मात्र एक रन से हार गया. उसका मन उदासी से भर गया यह सोचकर कि पूरे भारत में कितने ही व्यक्ति जो मैच देख रहे होंगे बेहद उदास महसूस कर रहे होंगे. अब पाकिस्तान के साथ होगा अगला मैच उसे तो जीतना ही होगा. शाम को उन्हें पड़ोसी के बेटे के जन्मदिन की पार्टी में जाना था, वहाँ कई लोगो से मुलाकत हुई कुछ परिचित कुछ अपरिचित..रात को सोने की तैयारी करते-करते टीवी पर “मधुरिमा” देखा, भगवतीचरण वर्मा के गीत तो बहुत सुंदर थे पर छायांकन अच्छा नहीं लगा सिर्फ एक गीत छोड़कर...’वह एक छोटा सा विहग...अपनी उमंग में उमग’. ‘हम दीवानों की क्या हस्ती, मस्ती का आलम छोड़ चले’...भी बहुत अच्छा गीत है, बहुत पहले उनके स्वर्गवास पर धर्मयुग में पढा था उसने.
नन्हे का स्कूल शिवरात्रि के कारण बंद था, उसके साथ क्रिकेट खेला, पहले क्लब, फिर उसके मित्र के यहाँ ले गयी उसे. शाम को वे अपने एक परिचित परिवार में गए, शिवरात्रि का व्रत रखा था उन्होंने, छोटा सा आपरेशन होना है पेट का गृहणी का, वैसे तो जरा-जरा सी बात पर घबरा जाती है पर आज निर्भय लगी. घर आयी तो उसके पेट में हल्का दर्द हो रहा था, खाना बनाने का भी मन नहीं कर रहा था, खिचड़ी बना दी उसने जो नन्हे और जून दोनों को पसंद है. फिर चुपचाप बिस्तर में लेट कर ‘सरिता’ पढ़ती रही, सरिता के कुछ पुराने अंक पंजाबी दीदी ने दिए हैं.