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Wednesday, April 21, 2021

झींके का खेत

 

कल रात्रि वे वापस लौट आये. घर पहुंचे तो कुछ ही देर में नन्हा व सोनू भी आ गये, वे रात्रि भोजन बनवा कर लाये थे. सुबह नींद थोड़ा देर से खुली, नूना अकेले ही टहलने गयी. सोनू उठ गयी थी जब वह लौटी, नन्हे ने सुबह का नाश्ता ऑर्डर कर दिया था.  दोपहर को बड़े भैया अपनी बिटिया के साथ आये, जो यहीं रहकर जॉब करती है, सबने साथ में भोजन किया. नन्हा और सोनू  ग्वालियर से कुछ उपहार भी लाये हैं, साड़ी, सूट, बेड कवर, गजक और उबली हुई मूंगफली. बड़े भाई को उन्होंने शादी में मिला पर्स दिया, भाई उनके लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां लाये हैं. जीवन इसी लेन-देन  का नाम है. दीदी छोटी बहन के पास विदेश जा रही हैं. वह अपने नए घर में शिफ्ट हो गयी है. उसने बताया अगले हफ्ते बड़ी बिटिया अपने पापा  के साथ भारत आ रही है, वे वैष्णव देवी की यात्रा पर भी जायेंगे.  छोटा भाई  अगले हफ्ते उनके पास आ रहा है, उसे पुट्टपर्थी में ड्यूटी मिली है, एक रात यहाँ रहकर जायेगा.  जीवन इसी तरह आने-जाने, मिलने-जुलने का भी नाम है. मौसम आज ठंडा है, पंखा चलाने की जरूरत नहीं है. दोनों नैनी समय पर आ गयीं, दूध वाला, पेपर वाला, फूलवाली भी, आज तो लॉन की सफाई व घास की कटिंग भी हुई, लॉन अच्छा लग रहा है. रात की रानी में फूल खिलने लगे हैं. शाम को वे टहलने गए तो देखा, क्रिसमस की ख़ुशी में लोगों ने यहां बिजली की झालरें लगा दी हैं. 


रात्रि के नौ बजे हैं, उसने दिन के अंतिम कार्य यानि लिखने के लिए कलम उठायी है. आज एक सप्ताह बाद योग कक्षा में बहुत अच्छा लगा. नए आसन किये शरीर को अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करने का अवसर मिला.  सुबह नाश्ते के वे बाद कुछ देर टहलने गए, शायद धूप के कारण सिर में थोड़ा सा दर्द हो गया. असम में स्थिति अब शांति की ओर बढ़ रही है. दिल्ली तथा देश के कुछ अन्य भागों से हिंसा की खबरें आयी हैं. यह सब कुछ अज्ञान का परिणाम है, नेता अपना लाभ देखते हैं और जनता को मोहरा बनाते हैं. हालात जिस तरह बिगड़ रहे हैं इसका परिणाम किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा. धर्म के नाम पर भेदभाव से कितने जीवन प्रभावित होते हैं, पर लोग जानते हुए भी यह बात समझना नहीं चाहते. तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन पर आधारित वेब सीरीज ‘क्वीन’ अच्छी  लग रही है, चार एपिसोड देख लिए हैं. आज पिता जी से बात की. उन्होंने बताया, जो किताब वे पढ़ रहे हैं, उसमें लिखा है, मनुष्य को शून्य में स्थित रहना चाहिए अर्थात पूर्ण शांति में. बाहरी शांति तो उन्हें सर्वथा उपलब्ध है पर भीतर की शांति भी चाहिए, मन की शांति, यानि विचारों से पूर्ण मुक्ति ! 


आज सुबह टहलते हुए वे गांव की तरफ गए एक खेत में झींका (तरोई) लगी थी, एक किसान फसल उतार  रहा था, बेचने को भी तैयार था, वे खरीद कर लाये. छत पर सोलर पैनल लग गए हैं. अब उनके घर इस्तेमाल होने वाली बिजली इन्हीं के द्वारा आएगी, जो बिजली बच जाएगी उसके बदले विद्युत विभाग से पैसे वापस मिल जायेंगे. आज असमिया सखी से बात हुई, वे लोग भी बंगलूरू में रहते हैं. उसने बुलाया है, पर उनका घर काफी दूर है, कार से जाने में दो घन्टे लगेंगे, असम में उनके घर जाने में दो मिनट लगते थे. उन्होंने सोचा है, शुक्रवार की सुबह  जायेंगे और एक रात रुककर शनि को नाश्ते के बाद लौट आएंगे. आज मौसम कल की अपेक्षा गर्म है, दिसम्बर में भी गर्मी हो सकती है, इसका अनुभव जीवन में पहली बार हो रहा है. दोपहर वाली नैनी आज अपने पुत्र को लेकर आयी, देखने में बुद्धिमान लग रहा था. आज कई दिनों बाद ब्लॉग पर लिखना आरम्भ किया, कुछ ब्लॉग्स पढ़े. जीवन को मुड़कर देखें तो अपनी ही बातों पर कितनी हँसी आती है, उन बातों पर भी जिनपर कभी हजार आँसू बहाये थे. शाम को नन्हे का फोन आया, ‘डिनर पर आ रहा है, उन्हें लगा, जैसे उसकी पसन्द का खाना ही बना था और उसे खबर लग गयी किसी तरह, साढ़े आठ बजे आया, दो घन्टे रहा. जीवन एक शांत धारा की तरह बहता जा रहा है, अब कोई दौड़ नहीं रही. ज्ञान, क्रिया और इच्छा शक्ति जो भीतर है, अपने आप में स्थिर हो गयी है. हजारों टन भोजन इस देह में जा चुका है, हजारों बोल यह जिव्हा बोल चुकी है, हजारों विचार यह मन सोच चुका है, हजारों गन्ध यह नासापुट ले चुके हैं. अब इस जगत में कुछ देखना, जानना, पाना शेष नहीं रह गया है. जीवन जैसा है वैसा ही श्रेष्ठ है. 


आज वे आश्रम गए थे, दोनों ननदों के लिए उपहार लिए। वैद्य से नाड़ी परीक्षण करवाया। आयुर्वैदिक दवा ली एक माह की। जून के ममेरे भाई की बिटिया का ब्याह है, उसके लिए भगवद्गीता का एक सुंदर प्रति ली और घर के लिए आटे के बिस्किट आदि। गुरुजी की उपनिषद पर टीका और आर्ट ऑफ लिविंग के हिंदी भजनों की एक किताब भी। एक घंटा वे ध्यान के लिए विशालाक्षी मंटप में बैठे। ध्यान करवाया गया पर रिकार्डिंग में गुरु जी की आवाज से अधिक लोगों के खाँसने की आवाजें आ रही थीं। भजन आरंभ हुए तो लोग नाचने और झूमने लगे। रात्रि भोजन भी वहीं कैफे में किया। रागी दोसा खाया। कल दोपहर फिर आना है, समूह में सुदर्शन क्रिया में भाग लेने के लिए। दीदी का फोन आया, दो मिनट से ज्यादा बात नहीं की। जीवन इतना सरल है जिसे लोग जटिल बना लेते हैं। 


आज मोबाइल पर गुरूजी का सत्संग देखा, सुना। वह बहुत दिनों के बाद आश्रम आए हैं। परमात्मा और उनमें जरा भी दूरी नहीं है, वह वहीं है फिर भी वे उससे विरह का अनुभव करते हैं ! कैसी अजब कहानी है यह .... । मौसम आज ठंडा है, शाम को स्वेटर पहनकर वे पड़ोसी के साथ सोसाइटी के पिछले गेट से बाहर निकल कर गाँव की तरफ गए. सँकरी सड़क से गुजरते समय सूर्यास्त के सुंदर दृश्य दिखे, खेतों से कुछ दूर आगे जाकर एक नयी कालोनी दिखी, जिसमें प्लॉट्स काट दिए गए हैं, सड़कें भी बन गयी हैं पर घर बनाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है.  शहर अपनी सीमाएं बढ़ा रहे हैं और खेत बिकते जा रहे हैं. कल वैद्य ने रात्रि भोजन हल्का लेने को कहा था सो आज खिचड़ी बनायी उसने.  और अब उस पुरानी डायरी के पन्नों से कुछ बात।



स्थूल जगत में सेवा कार्य का रूप धारण करती है, आंतरिक सृष्टि में सहानुभूति का स्वरूप लेती यही और मानसिक सृष्टि में बोध रूप में दर्शन देती है। 


तुम्हारा हृदय तुम्हारे सेवा कार्यों की जो कीमत आंकता है, उसके मुकाबले उन्हीं कार्यों की जगत द्वारा ठहराई कीमत कुछ नहीं के बराबर है. 


सच्चे मनन  के फलस्वरूप सेवा करने की शक्ति अधिकाधिक बढ़ती जाती है और फिर अपनी उन्नति के विचार बहुत कम सताते हैं. 


आतुरता से और स्नेह से कोई भी नन्हा सा सेवा का काम सबेरे उठकर करना उस दिन के तुम्हारे सुख के भंडार को खुला रखने का सर्वोत्तम उपाय है. 


मनुष्य जिस हद तक अपने स्वार्थ का कम चिंतन करता है, उस हद तक वह अवश्य ही अपनी आत्मोन्नति की ओर ध्यान लगा सकता है.सेवा के प्रत्येक छोटे से छोटे कार्य का बदला सेवा की बढ़ती हुई शक्ति के रूप में सेवक को मिलता है. 


उसे आश्चर्य होता है विद्यार्थी काल में उसका मन ऐसे विचारों के प्रति आकर्षित होता था, युवा मन कितना आदर्शवादी होता है. कई वर्षों बाद इन आदर्शों पर चलने का मौका भी मिला, जीवन में कोई जो चाहता है अवश्य ही पा लेता है , लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जा सकता है. 


Thursday, February 4, 2021

पके धान के खेत

दोपहर का समय है. कुछ देर पहले टीवी पर ‘वंदे भारत’ ट्रेन के बारे में सुना, जो दिल्ली से कटरा जाएगी, सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त है यह भारत में ही बनी रेल. आज रसोईघर व पैंट्री के सामान को अलग किया, जो बाँट देने हैं और जो ले जाने हैं. परसों नन्हा व सोनू आ रहे हैं, पांच-छह दिन रहेंगे. तब पुस्तकों को पैक करने का कार्य आरम्भ करेंगे. आज एक मित्र परिवार के यहाँ भोजन पर जाना है. उसके लिए एक कविता लिखेगी, विदाई का उपहार ! सुबह टहलने गए तो वापसी में बात  की कि कब वे घर कम्पनी को हैंडओवर करेंगे. एक दिन पहले उन लोगों को बुलाएँगे जिन्हें सामान देना है ताकि अगले दिन घर की चाबी जमा करके गेस्टहाउस में शिफ्ट हो जाएँ. वहाँ रहने के लिए सूटकेस भी पैक कर दिया. केवल एक सप्ताह ही शेष है इस घर में. आज नाश्ते में जौ का दलिया बनाया. मुक्तिबोध की कविता के बारे में एक आलेख पढ़ा. 


कल नवरात्रि के दौरान सप्तमी का व्रत रखना है, देवी के कालरात्रि के रूप की पूजा होती है इस दिन. परसों बच्चों को अंतिम बार प्रसाद खिलाना है. उसके बाद वे सब एक रात के लिए दिगबोई जायेंगे. आज शाम को एक दक्षिण भारतीय सखी के यहाँ गयी, उसने सुंदर मूर्तियों व वस्तुओं से अद्भुत मंदिर सजाया है, प्रसाद खिलाया, दिया और तस्वीरें भी उतारीं। उसके लिए लिखी कविता पढ़कर सुनाई. आज अंतिम बार घर पर घी बनाया, पता नहीं बंगलूरू में इतना अच्छा दूध मिलेगा या नहीं. 


पिछले पांच दिन व्यस्तता में बीते. नन्हा और सोनू शिलांग में एक रात बिताकर वापस अपने घर पहुँच गए हैं. आज वे गेस्टहाउस आ गए हैं. साढ़े दस बजे तिनसुकिया जाना है. कुछ सामान खरीदना है. यूट्यूब पर पुष्पेंद्र जी कश्मीर के इतिहास पर बात कर रहे हैं. कश्मीर को इस्लामिक राज्य बनाने के एजेंडे पर वह आजादी के बाद के दौर के नेताओं की अदूरदर्शिता की बात कर रहे हैं. आज सुबह गोल्फ फील्ड में टहलने गए, सूर्योदय हो चुका था, कुछ तस्वीरें उतारीं। आज शाम को दो जगह लक्ष्मी पूजा में जाना है. कल एक शादी में जाना है और परसों कम्पनी की तरफ से विदाई पार्टी है. गेस्टहाउस में सभी सुविधाएँ  हैं.  34 वर्ष पहले जब विवाह के बाद वह पहली बार वह असम आयी थी तो घर मिलने तक इसी गेस्टहाउस में दो-तीन दिन रुकी थी. 


आज दोपहर को मृणालज्योति से कुछ लोग मिलने आये. सुबह नाश्ते के बाद वे हाथियाली स्थित विल्टन चाय बागान देखने गए. मीलों तक फैले हरे-भरे बागान और बीच-बीच में धान के खेत, जिनमें से कुछ में धान पकने लगा है. सुनहरे रंग के खेत दूसरे हरे-धानी खेतों में विशेष रूप से चमक रहे थे. कमल के पोखर भी दिखे, पर उनमें कमल कम दिखे, कल लक्ष्मी पूजा के कारण सभी कमल सम्भवतः तोड़ लिए गए थे. कल सुबह उन्हें मागोरीबील जाना है, जहाँ प्रकृति का एक अन्य रूप उन्हें देखने को मिलेगा. प्रकृति से जुड़ना हृदय से होता है, तभी प्रकृति सभी को मोह लेती है. दोपहर को खाने में करेले और छोले थे. खाना यहाँ घर की तरह होता है, तेल-मसालों की अधिकता नहीं होती. शाम को टहलते हुए वे पब्लिक लाइब्रेरी जायेंगे और रात को एक अधिकारी के बेटी के विवाह में. परसों इस समय वे बंगलूरू पहुँचने वाले होंगे. असम एक खूबसूरत याद की तरह मन में बसा रहेगा. उसके सिर में कई दिनों से हल्का दर्द बना रहता है. यह उस दुःख की वजह से है जो यहां से जाने के कारण कई बार महसूस हुआ है. कितनी बार गला भर आया और आँखें भीगीं, अथवा तो दिनचर्या में व भोजन में आये बदलाव के कारण हुआ है. जीवन में परिवर्तन स्वाभाविक है. कल शाम पार्लर में मसाज से नसों को आराम मिला. टी गार्डन से लौटते समय एक सन्त के वचन सुने, सहज स्वीकार भाव मन में नहीं होता तभी तनाव का जन्म होता है. जो कुछ भी होता है वह उस महान अस्तित्त्व का ही भाग है, वह गलत हो ही नहीं सकता. नीरू माँ भी कहती हैं, इस जगत में सब जगह इंसाफ ही होता है. 


बरसों पुरानी उस डायरी के पन्ने पर उस दिन की सूक्ति थी, जो इंसान इच्छाओं से मुक्त है, वह सदा स्वतंत्र रहता है, उसने नीचे लिखा,  मगर स्वतंत्रता भी कभी-कभी अप्रिय लगती है, बंधने को जी चाहता है, मनचाहा बंधन हो तो ! उस वक्त कहाँ ज्ञात था हर बंधन बस बंधन ही होता है. 

अगले पन्ने पर था- सम्पूर्ण संसार की सार्थकता या निरर्थकता का दारोमदार सिर्फ उसके स्वयं के सार्थक या निरर्थक होने में है. उसके पास शक्ति है, आज है, जोश है, युवा जन उत्साह से भरे होते हैं और मुस्कुराहट से भी... वे बांटते हैं स्नेह, विश्वास और भरते हैं दूसरों में साहस ! नहीं डिगते.. उसने खुद से वायदा किया कि वह नहीं करेगी वंचित प्रकृति को अपने स्नेह से ! 


 

Thursday, February 15, 2018

तेल का रिसाव



शनिवार और इतवार फिर गुजर गये. वर्षा लगातार होती रही है पिछले दिनों. आज थमी है. सुबह वह स्कूल गयी, लौटते समय किसी गाँव के एक खेत में, जिसमें वर्षा का पानी भरा हुआ था, तेल का रिसाव हो रहा था. वहाँ सम्भवतः नाला भी रहा होगा. गाँव के लोग कम्पनी के वाहनों को रोक रहे थे. उनकी कार भी रोकी तो भीरु ड्राइवर झट बिना किसी प्रतिवाद के रुक गया और उसे भी बाहर निकलने से मना करने लगा, पर कुछ क्षणों के बाद उसने उनमें से एक व्यक्ति से इतना कहा, वह स्कूल से आ रही है, उसे जाने दें, तो उसने कहा, ठीक है जाइये. भला व्यक्ति था वह. उन्हें अधिकारियों तक अपनी बात पहुँचानी थी, ताकि जो नुकसान हो रहा है, उसे रोका जाये. तेल के नुकसान के साथ-साथ खेत का नुकसान भी हो रहा था. अब शायद अगले कुछ समय तक वहाँ कुछ भी नहीं उगेगा. पौने ग्यारह बजे हैं, जून आने वाले होंगे. आज सुबह उठते ही मोबाइल के प्रयोग पर उसने उन्हें टोका, शायद उन्हें अच्छा नहीं लगा होगा, पर हर चीज का एक वक्त होता है, यह वह खुद ही कहते हैं. जन्माष्टमी का उत्सव आने वाला है. उसे कृष्ण के लिए एक सुंदर कविता या गीत लिखना है.

कल वे हो जायेंगे विदा
और परसों भूल जायेंगे उन्हें लोग
इस तरह जैसे कि कभी था ही नहीं
उनका अस्तित्त्व इस दुनिया में
आज ही उनके हाथ में है
चाहे तो गीत गुनगुना लें
या अहंकार को सजा लें
जो है ही नहीं..
उसके कारण अपने पावों में
काँटों को चुभा लें
या दी है जिसने जिन्दगी की नेमत
उस रब को रिझा लें

आज सितम्बर की पहली तारीख है. दूधवाले का हिसाब कर लिया था, पर उसे पैसे देना भूल गयी, इसी तरह वे अनावश्यक कार्यों में स्वयं को उलझाकर सदा ही आवश्यक को भूल जाते हैं. कल दिन में एक-दो बार लगा जैसे मौसम में बदलाव आ रहा है. पर आज भी वर्षा की अनवरत झड़ी सुबह से लगी है. बरामदे में प्रातः भ्रमण किया, घर बड़ा होने का यह फायदा तो है ही. कल दोपहर को भागवद् व कल्याण का एक अंक पढ़ा. कृष्ण जन्माष्टमी के लिए कविता लिखनी आरम्भ की, कृष्ण की महिमा अनंत है और भक्तों से बढ़कर कौन उसका बखान कर सकता है. आज सुबह सद्गुरू ने विस्मय पर कितना अद्भुत प्रवचन दिया. इस जहाँ की हर शै उन्हें विस्मय से भर देती है. उस दिन, अरे, कल ही तो फिर वह बड़ी चमकीली मक्खी उसकी अंगुली पर आकर बैठी थी, उसने उसे उड़ा दिया. अस्तित्त्व उससे प्रेम करता है, वह यानि वही..फिर घनघोर वर्षा के बावजूद एक पीली तितली उडती नजर आई !

कल कुछ नहीं लिखा, ट्रेड यूनियन की हड़ताल के कारण जून का दफ्तर बंद था. तबियत भी उतनी ठीक नहीं थी, इस समय भी सिर की चोटी पर दर्द है, पर चाय से इसका कोई संबंध है, ऐसा तो नहीं होगा. मन भी आजकल कुछ का कुछ सोचता रहता है, ठीक ही कहा है स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है. वे वही होते हैं जो वे सोचते हैं, इन्सान चाहे तो आकाश की ऊंचाइयों को छू ले और न चाहे तो गहरी खाई भी कम होगी उसके लिए ! आश्चर्य होता है इतने वर्षों की साधना के बाद भी मन अपनी चाल से चलता है. आज सुबह स्कूल की उप प्रधानाचार्या ने कहा, कक्षा दस में गणित  पढ़ाना है कुछ दिनों के लिए, पिछले वर्ष भी पढ़ाया था शायद इन्हीं दिनों. इसका अर्थ है कुछ दिनों तक उसे रोज ही स्कूल जाना होगा. कल सांख्यकी का एक अध्याय पढ़ाना है. परसों मृणाल ज्योति भी जाना है, शिक्षक दिवस के उपलक्ष में.