Friday, June 19, 2026

दस महाविद्याएँ


दस महाविद्याएँ  

आज सुबह से जून थोड़ा सा परेशान हैं, बात वही पुरानी है, एक पैटर्न ही तो बन गया है शायद, वह इससे बाहर निकलना नहीं चाहते। शायद नाराज़गी से अहंकार को तृप्ति मिलती है। रात को उनकी नींद खुल गई थी, शायद कोई स्वप्न देख रहे थे।वर्षों पहले नूना की भी यही स्थिति थी, पर अब तो यह अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा लगता है। अनुभवानंद जी कहते हैं, उन्हें शब्दों के अर्थ की तरफ़ ध्यान नहीं देना है, केवल शब्द के स्रोत तक जाना है, जो अनहद नाद है। इससे वे प्रतिक्रिया करने से बचे रहेंगे और कर्मों के बंधन से भी। शब्दों को अनावश्यक महत्व देने से ही सारे द्वन्द्व होते हैं। सुबह उसने एक छोटी सी कविता लिखी, या उससे लिखवा ली गयी !! जो लिखवाता है वही तो वह ख़ुद है ! कुछ देर पहले मोदी जी को सुना, उनके शब्द सभी के दिलों को छूते हैं, पर विपक्षी पार्टियों को वे नहीं सुहाते। कुर्सियाँ बनकर आ गई हैं, कल नन्हा व सोनू देखकर प्रसन्न होंगे। 

रविवार सहज रूप से बीता, बच्चे सुबह साढ़े नौ बजे तक आ गये थे। दोपहर को नन्हे के साथ  उन्होंने छोटे-छोटे पार्ट्स जोड़कर एमआई की एक कार बनाने की शुरुआत की। सोनू जिग्सा पज़ल हल कर रही थी। शाम को जाने से पूर्व नन्हे ने मल्टी पर्पेस कोर्ट में रिमोट से चलने वाली एक नयी कार चलायी, अभी तक उसके भीतर के बालक का मन खिलौनों से भरा नहीं है। पापाजी से बात हुई, वे अपेक्षाकृत स्वस्थ थे, ठीक से सुन भी पा रहे थे।

आज वे बहुत दिनों बाद आश्रम गये, हवा सुहानी थी और आकाश में पश्चिम दिशा रक्तिम हो रही थी। भजन गायकों ने समाँ बाँध दिया। गुरुजी आये तो सभी लोग उनके सम्मान में सहज ही खड़े हो गये थे। उन्होंने प्रश्नों के जवाब सरल भाषा में लोगों को हँसाते हुए दिये, उनकी हाज़िर जवाबी की कोई मिसाल नहीं। उनकी बातों में एक आत्मीयता झलकती है। आज छत पर बने शेड में कबूतरों से बचने के लिए एक जाली लगा गई, कल ही जून ने इसकी चर्चा की थी।  घर में चल रहा काम अभी आधा ही समाप्त हुआ है। कल उन्हें कार पर तीसरी कोटिंग लगवाने के लिए जाना है, खरोंच से बचने के लिए ३एमएम की कोटिंग लगवायी है, इन सब मामलों में जून का जवाब नहीं। आज एओएल का अनुवाद कार्य किया, पढ़ने के लिए लेख पापाजी को भी भेजा। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के बारे में नन्हे को बताया तो उसने एक वीडियो भेजा है, जिसमें ख़ालिस्तान की माँग के पीछे की कहानी बतायी गई है। 

आज उन्होंने सामने वाले बगीचे में लगा कंचन का पेड़ निकलवा कर प्लूमेरिया का एक पेड़ लगवा दिया है। एक बार कंचन के वृक्ष को संबोधित करते हुए उसने एक कविता लिखी थी, जिसमें उसके फूल न खिलने की स्थिति में उसके कट जाने की आशंका व्यक्त की थी। उसने उस वृक्ष के जीव से मन ही मन क्षमा माँगी। आज दोपहर भी कल की तरह उसने कुछ देर एमआई की कार बनायी। कल उगादि पर्व है, दोनों मेड्स काम पर नहीं आयेंगी, अपने-अपने घर पर परिवार के साथ उत्सव मनायेंगी।आज उसने बट्रेंड रसल की एक पुस्तक को ऑडिबल पर सुनना आरंभ किया है। उन्हें आत्मा का कोई ज्ञान नहीं है, वह चेतना को मस्तिष्क से पैदा हुई मानते हैं। शाम को उसने पड़ोसी के यहाँ जाकर घर की दीवार को देखा,रंग-रोगन के बाद काफ़ी अच्छी लग रही है। सामने से भी घर सुंदर लग रहा है। 

आज भी वे आश्रम गये थे, गुरुजी को सुनना एक अद्भुत अनुभव है। सभी प्रश्नों का उत्तर वह जिस सहजता से देते हैं, पूछने वाले को शांति प्राप्त होती है। आज वासंतिक नवरात्र का प्रथम दिन है, उन्होंने नये वर्ष की शुभकामना भी दी। आज सुबह टहलते समय प्रीतिदिन की तरह जून से विभिन्न विषयों पर वार्तालाप हुआ, वातावरण शीतल व सुखकारक था, लगा, जिसे उन्होंने इधर-उधर की बातों से ढक दिया पर मात्र एक पल को ही ! अब मन उस मौन में ठहरने लगा है जहाँ उसे कुछ भी नहीं छूता ! आश्रम में भजन सुनते समय भी मन जैसे समाधि में ही था। पापाजी से हुई अध्यात्म चर्चा को आज भी रिकॉर्ड किया।उन्हें नवनीत का मार्च का अंक मिल गया है। वह खुश थे, एक साहित्यिक पत्रिका पढ़ने में उनका समय अच्छा बीतेगा।  

आज छत का काम पूरा हो गया, कल से वे वहाँ सुबह की योग-साधना कर सकते हैं।जून उनके बगीचे व छत की लैंड-स्केपिंग के लिए बात करके आये हैं। आज सुबह यू ट्यूब पर उसने दस महाविद्याओं के बारे में सुना, कल गुरुजी ने भी उनका ज़िक्र किया था। दिन में ऑडिबल पर भी उनके बारे में सुना।महाकाली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला के रूपों में उनके भीतर ही सत्य के मार्ग पर ले जाने वाली शक्तियाँ भी है और माया-मोह में फँसाने वाली अविद्या शक्ति थी। वे सोते-सोते भी जीवन गुज़ार सकते हैं और जागकर अपने जीवन को धन्य भी कर सकते हैं। देह व मन आपस में जुड़े हैं। सोया हुआ मन कब कैसा व्यवहार करेगा, इसका अनुमान ब्रह्मा भी नहीं लगा सकते। आत्मा सदा साक्षी है। गुरुजी कहते हैं, पानी पर खींची लकीर को जुड़ने में जितना समय लगता है, उतनी देर के लिए क्रोध जगा तो कोई बात नहीं। आत्मा में स्थित होने के लिए मन को पलक झपकने जितना समय ही लगता है। आज उन्होंने “रॉकेट्री” का दूसरा भाग देख लिया। डॉ होमी भाभा और विक्रम साराभाई के कारण भारत का परमाणु कार्यक्रम तथा अंतरिक्ष कार्यक्रम आगे बढ़ा, बल्कि वे दोनों उसके जनक थे। दोनों की असमय मृत्यु हो गई, पर दोनों ने अपने साथियों को तैयार कर दिया था।कल से रमज़ान का महीना शुरू हो गया है। घर का काम अगले हफ़्ते तक खिंचने वाला है।  

   


Friday, June 12, 2026

शिव-शक्ति संवाद


शिव-शक्ति संवाद 

आज सुबह भी नूना ने ‘विज्ञान भैरव’ आगे सुना, कितना अद्भुत ग्रंथ है यह, जिसमें परमात्मा स्वयं अपने बारे में बता रहे हैं। शिव और शक्ति के मध्य हुआ यह वार्तालाप अपने आप में एक महान घटना है। भारत को विश्व गुरु ऐसे ही नहीं कहा गया है। भारत के पास ही वह बात है, जो विश्व में कहीं और होना तो दूर, उसकी झलक भी नहीं है। पाँच हज़ार साल पुरानी परंपरा के अनुसार नियमित ध्यान-साधना करने से मन में कितनी शांति का अनुभव होता है। पापाजी ने आज भी नवनीत में पढ़ी एक रचना का ज़िक्र किया, उन्होंने फ़ेसबुक पर नूना की रचना भी पढ़ी। रात्रि भ्रमण के समय अचानक एक काले रंग के कुत्ते ने जून के हाथ को स्पर्श कर लिया, शायद वह अपनापन दिखाना या पाना चाहता था। दिन में उनकी असम के एक पुराने सहकर्मी से बात हुई, वहाँ उनके दफ़्तर के लोग अभी तक उन्हें याद करते हैं, वे चाहते हैं कि पुन: उनके जैसा अनुशासन प्रिय कोई अधिकारी आये। नूना को हँसी भी आयी, उस समय वे ही लोग कभी न कभी उनके अनुशासन की शिकायत भी करते रहे होंगे। जून ने बिग बास्केट से होली के विशेष भोज के लिए ढेर सारा सामान मँगवाया है। कुछ देर पहले समाचार मिला कि बड़े भाई की बिटिया को एमबीए में दाख़िला मिल गया है, वह चंडीगढ़ आईएसबी में पड़ेगी। परसों वह यहाँ आ रही है, तभी वे उसे बधाई देंगे। 


आज सुबह योग साधना के समय जून ने ‘जोड़ों के योग’ शीर्षक से एक वीडियो बनाया, लगभग पचास मिनट का है, उन्होंने बहुत अच्छी तरह से प्राणायाम व घुटने तथा अन्य जोड़ों के लिए आसन व व्यायाम आदि करवाए हैं। यू ट्यूब पर उसे डाल देने से कितने ही लोग उसे देखकर आसन कर सकते हैं।पापाजी से आज बात की तो उन्हें सुनने में थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी।कान में मशीन लगाने का अभी उन्हें अभ्यास नहीं हुआ है। कुछ दिनों में उन्हें इस महीने की नवनीत मिल जाएगी। अवश्य ही उन्हें अच्छा लगेगा। 


आज उन्होंने सोल्लास होली का उत्सव मनाया। नन्हा व सोनू सुबह नौ बजे आ गये थे, साथ में सोनू की मौसेरी बहन व नन्हे की ममेरी बहन भी। दोपहर को भांजा व उसकी नव विवाहिता भी आ गये। वे दोनों दो दिन उस रिज़ौर्ट में रहकर आये थे, जहाँ नन्हे का विवाह हुआ था। बहुत खुश  नज़र आ रहे थे। जून ने भिस की विशेष सब्ज़ी बनायी। पालक पनीर, रायता व पुलाव बच्चों ने आपसी सहयोग से बनाया। फूलों से बने हर्बल रंग पहले ही नन्हे ने मँगवा लिए थे। जिसमें ठंडाई की एक बोतल भी थी। लंच से पहले ही सबने एक-दूसरे को रंगा और बधाई दी। शाम को वे सब चले गये, उसने बहुत सारी तस्वीरें उतारी हैं उत्सव की, रंग-बिरंगी तस्वीरें ! 


आज से उनके घर की बाहरी दीवारों पर रंग-रोगन का काम शुरू हुआ है। दो हफ़्ते लग जाएँगे। डाइनिंग टेबल की कुर्सियों की रैगजीन भी पुरानी हो गई है, मात्र पौने चार वर्षों में, चाइना की बनी हैं शायद इसीलिए! जून का कहना है, उन्हें बैठक में भी एसी लगवा लेना चाहिए। उन्हें घर की देखभाल करने व घर चलाने में बहुत आनंद आता है, उनमें विष्णु शक्ति बहुत है। उसे ख़ुद सबसे अधिक आनंद ध्यान में आता है, परमात्मा से एकत्व में और संतों की वाणी सुनने में। विज्ञान भैरव सुनने से काफ़ी शंकाओं का निवारण हो जाता है। आज भी सुबह सुना, गुना और और भीतर तक उसके सूत्रों को अनुभव किया। न जाने कितनी पुरानी है यह पुस्तक और कितने संतों ने इसकी व्याख्या की है।आज सुबह ध्यान में अनोखा अनुभव हुआ, जागते हुए ही अनेक दृश्यों को बंद आँखों के पीछे देखा, तारों से भरा आकाश और जंगल, नदी आदि भी ! यह सारा जगत उनके भीतर भी है, वे परमात्मा की अभिव्यक्ति ही तो हैं ! जीव, जगत और ईश्वर तीनों परमात्मा की अभिव्यक्ति हैं ! 


आज कल वह ‘कितने पाकिस्तान’ पढ़ रही है। कितनी अनोखी पुस्तक है यह, इतिहास का कितना ज्ञान था लेखक को, और विश्व को हिंसा मुक्त बनाने की गहरी चाह ! मावन इतिहास से कुछ भी सीखना नहीं चाहता, बार-बार वही गलती दोहराता है।आज भी घर में रंग-रोगन का काम चलता रह, दिन भर मज़दूरों का आना-जाना चलता रहे तो कैसा बिखरा-बिखरा सा हो जाता है घर के साथ मन भी। जून ने आज तीन और एसी लाने की बात की और तुरंत उनका ऑर्डर भी कर दिया। नवनीत का मार्च अंक पूरा पढ़ लिया, कई व्यंग्य रचनायें हैं तथा विद्यानिवास मिश्र जी का एक ललित निबंध है, जो बहुत प्रभावित करता है। दादा धर्माधिकारी का लेख भी अच्छा है, स्त्री को आत्मनिर्भर होने के संदेश देता हुआ।   

आज भी सुबह जल्दी उठकर वे टहलने गये, सड़कें सूनी थीं, हवा शीतल और आकाश में आधा स्वर्णिम चंद्रमा !! विज्ञान भैरव सुनते-सुनते भीतर कैसा बोध हुआ, आनंद की जैसे एक वर्षा सी हो गयी। विश्व समाचारों में देखा, इज़राइल में जनता सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही है। यूक्रेन-रुस युद्ध चलता ही जा रहा है। ‘बाल्मीकि रामायण’ की अगली पोस्ट लिखी, अनोखा है राम और भरत का प्रेम ! पापाजी से बात हुई, उन्हें भी अध्यात्म के पथ पर शांति का अनुभव होता है, उन्हें इसका महत्व ज्ञात है।यही आस्था उनके दीर्घ और सुखमय जीवन का राज है।वह ‘कितने पाकिस्तान’ जितना-जितना पढ़ती है, लेखक के प्रति सम्मान बढ़ता जाता है। भारत का इतिहास कितनी साज़िशों से घिरा हुआ है। दारा शिकोह की हत्या एक ऐसा कलंक है, जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। जे कृष्णामूर्ति की एक पुस्तक ऑडिबल पर सुन रही है, कितना गहन ज्ञान था उनका और कितना अटल विश्वास ! वह चीजों को बहुत स्पष्ट देखते थे, उनकी किताबें पढ़ते-सुनते भीतर जैसे एक आकाश खुलता जाता है ! मन से मुक्ति मिलती है ! 

आज तीन नये एसी घर में लग गये। सारा घर धूल से भर गया था। रंग करने के लिए दीवार से सटे फूलों के दो पेड़ ऊपर से काटने पड़े, जड़ें हैं, इसलिए पुन: नये पत्ते और शाखाएँ आ जायेंगी। बोगनवेलिया का जो पेड़ उनके घर की शोभा बढ़ा रहा था, हटाना पड़ा, उसकी डालियों को  काटना भी पड़ा, और भी कई पेड़ कटवाने पड़े हैं, पर संभवत: कुछ ही महीनों में वे फिर से हरे-भरे हो जाएँगे। आज भी हिन्दी पढ़ने दोनों बालिकाएँ आयी थीं, कल उनकी परीक्षा है।


Monday, June 8, 2026

‘व्हेन द वेदर इज फाइन’


‘व्हेन द वेदर इज फाइन’


शिवरात्रि का उत्सव उन्होंने आज आश्रम में मनाया। प्रकाशन विभाग के एक स्वयंसेवक ने अतिथि क्षेत्र में काफ़ी आगे जगह दिला दी थी। गुरुजी के दर्शन भी हो गये। सुबह एओएल का अनुवाद कार्य किया, जिसे करते समय उसे समय का भान ही नहीं रहता। दोपहर को मिट्टी के प्यालों पर रंग भरने का कार्य किया।शाम को पापाजी से बात हुई, दस दिनों के बाद वे उनसे मिलने जा रहे हैं। उन्होंने फ़ेसबुक पर उसकी कविता पढ़कर कमेंट भी किया। 


आज वे एक नयी झील पर गये, नीलगुली झील, यह सोमानहल्ली झील से थोड़ा आगे है। वे एक घर के आगे से गुजरकर कच्चे रास्ते से होते हुए झील के किनारे-किनारे चलते रहे। कुछ देर पानी में पैर डालकर बैठे, शायद बैंगलोर में पहली बार ऐसा अवसर मिला। नन्हा-सोनू और उसका भाई भी आये थे। पहले कुछ देर जिग्सा पज़ल हाल की, एक बोर्ड गेम खेला और सबने मिलकर लंच बनाया। नन्हे ने उसे एक लाइफ़ कैलेंडर लाकर दिया है, उसमें हर इतवार को मार्क करना है। एक जन्मदिन से अगले जन्मदिन तक के सारे इतवार! आज जे कृष्णामूर्ति के बारे में एक पुस्तक सुननी शुरू की है। 


आज वे डेंटिस्ट के पास गये थे, ट्रायल हो गया, अब दो दिन बाद दांत लग जाएगा सुबह सुहानी थी, एक घंटा वे प्रकृति के सान्निध्य में टहलते रहे। पीछे इतवार को नैनी ने बिना कहे अवकाश ले लिए था, जून ने थोड़ा क्रोध दिखाया, तो वह बहुत उदास हो गई, वह सदा ही उससे अच्छी तरह से बात करते आये हैं। वह बहुत भावुक है, जहाँ प्रेम होता है, वहाँ थोड़ी सी भी उपेक्षा सहन नहीं होती। दोपहर को कोरियन धारावाहिक, ‘व्हेन द वेदर इज फाइन’  का अगला भाग देखा, नायक व नायिका दोनों का जीवन एक सा रहा है, बचपन से ही वे एक-दूसरे से मिलते रहे हैं। नायिका सियोल में अपनी नौकरी छोड़ कर आयी है, नायक किताबों की दुकान चलाता है।साहित्य के प्रति उनका लगाव उन्हें एक बुक क्लब में ले जाता है। 


आज पाँच महीने बाद दाँत लग गया। हिन्दी कक्षा में आज पहली बार ठाकुर कुंवर सिंह के बारे में पढ़ा, व पढ़ाया। वह आज़ादी के पहले संग्राम में भाग लेने वाले एक देशभक्त थे, जिन्होंने अस्सी वर्ष की आयु में अंग्रेजों के विरुद्ध संग्राम का नेतृत्व किया। ब्रिटिश सेना को हराने का दम भरने वाले ठाकुर कुंवर सिंह को भारत के इतिहास में सदा याद किया जाएगा। 


आज सुबह एक मित्र दंपत्ति के साथ वे ३०० एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली विशाल येलाहांका झील देखने गये।यहाँ कई प्रजातियों के पक्षी रहते हैं।पंछियों के साथ कुछ समय वहाँ बिताने के बाद एक अन्य झील, पुत्तनहल्ली के दर्शन भी किए। नाश्ते के लिए निकट स्थित पूर्ण ब्रह्म महाराष्ट्रीयन रेस्तराँ गये, जहाँ स्वादिष्ट नाश्ता मिला, जिसकी मात्रा इतनी अधिक थी कि शेष भोजन पैक कराकर ले आये, जो दोपहर के भोजन में काम आया।उनका अगला पड़ाव था, पैलेस ग्राउंड, तब तक धूप तेज हो गई थी, पर जल्दी ही बैंगलूर पैलेस में प्रवेश किया और वहाँ के शीतल विशाल कमरों में गर्मी का अहसास जाता रहा।मैसूर के महाराजा के लिए बने, उन्नीसवीं शताब्दी के इस महल के अनेक कमरों में लगी तस्वीरें देखीं, कुछ कमरे बंद भी पड़े थे। यह महल लंदन के विंडसर कैसल पर आधारित है।बाहरी दीवारों के कुछ हिस्से पौधों से ढके  हैं। इस महल की शानोशौकत का ज़िक्र उस समय के लंदन के अख़बारों में भी होता था। उन दिनों राजा और उनके अंग्रेज मेहमान शिकार करते थे और हाथियों को पालतू बनाते थे। पैलेस ग्राउंड में संगीत समारोह, शादियाँ और प्रदर्शनी आदि लगायी जाती हैं। कल उन्हें यात्रा पर निकलना है।


दस दिनों की सुखमय यात्रा के बाद वे घर लौट आये हैं। कल सोसाइटी में ही होली का उत्सव मनाया जाएगा। आज होलिका दहन है, भारत की अनोखी सांस्कृतिक परंपरा का एक अनोखा उत्सव ! कुछ देर पहले ही वे क्लब के सामने बने ऐम्पिथियेटर में होलिका दहन देखकर आये। अनेक लोग आय थे, आकाश पर पूर्णिमा का चन्द्र बादलों के पीछे से झांक रहा था। आर्ट ऑफ़ लिविंग के एक परिचित मिलीं, अन्य कई महिलाएँ भी, एक दूसरे को रंग लगाकर उल्लास मनाया। कितना अनोखा पर्व है होली, उमंग में भरे जन रंग लगाकर एक सूत्र में बँध जाते हैं, सभी के चेहरे एक जैसे हो जाते हैं। कल सुबह संगीत का कार्यक्रम भी है, नाश्ते का इंतज़ाम भी और उसके बाद रंग खेलने की बारी। आज सुबह नींद खुली उसके पहले बच्चों को देखा, भोले-मासूम बच्चे, मन जब बच्चों की तरह निर्दोष हो जाता है, तब भीतर शांति की धारा बहने लगती है।आज होली पर लिखी एक पुरानी रचना को संवारा। अगले इतवार को होली की पार्टी रखी है। शाम को नवनीत पढ़ा, पापाजी से चर्चा भी हुई, उन्हें नवनीत का ‘वृद्ध विशेषांक’ देकर आयी थी।


आज होली है और महिला दिवस भी। सुबह रोज़ की तरह वे चार बजे उठे, साढ़े पाँच बजे तक प्रातः भ्रमण से लौट आये। डेंटिस्ट के पास जाना था, लौटते समय उत्सव का मान रखते हुए दोपहर का भोजन बाहर ही खाया ! शाम को छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं, इसी महीने उनकी वार्षिक परीक्षाएँ हैं। मौसम बदल रहा है पर हवा अभी भी ठंडी है। अभी-अभी नन्हे-सोनू का फ़ोन आया, दोनों सुबह से अपने काम में व्यस्त थे। जैसे होली की उन्हें ख़बर ही न हो। 


पिछले दो दिनों से रात को एक बार नींद खुल जाती है, कल कुछ देर बैठकर ध्यान किया। सुबह क्रिया के बाद अनोखा नीला रंग दिखा, जैसा बाहर कहीं नहीं दिखता। एक नयी कविता लिखी, निज के अनुभव से उपजी, पापाजी ने पढ़ी और कहा बहुत ज़ोरदार है, वह बहुत गहराई से पढ़ते हैं, उन्हें नवनीत भी अच्छा लग रहा है। आज बहुत दिनों बाद दोपहर को भी लेखन कार्य आगे बढ़ाया, कर्म करते हुए हाथ ही शोभते हैं। समय का पहिया तेज़ी से घूमता जा रहा है, कब ये आँखें मुँद जायेंगी, पता नहीं, विदेह होकर वे क्या कर पायेंगे ! वे रहेंगे, यह तो पूर्ण विश्वास है। जून आजकल शाम का ध्यान नहीं करते पर उनमें एक स्थिरता और गंभीरता तो बढ़ रही है। कुछ दिनों से सुबह टहलते समय वे ‘विज्ञान भैरव’ सुनते हैं, उसका प्रभाव भी पड़ता होगा।वक्ता ने बहुत ही स्पष्टता से शिव के वचनों को समझाया है, जो उन्होंने पार्वती से कहे हैं। आज शाम छोटी भांजी का फ़ोन आया, उसकी सासुमाँ की माँ के लिए कविता लिखने को कहा है, जो अठहत्तर वर्ष की हैं, उनके पति नहीं हैं, पाँच पुत्रियों और एक पुत्र की माँ हैं।  


Friday, June 5, 2026

मिट्टी के कप


मिट्टी के कप 


आज से वर्ष का दूसरा महीना शुरू हो गया। समय जैसे पंख लगाकर उड़ रहा है। सुबह उसने फिर भीतर समाधान(समाधि) पाने के लिए ध्यान किया। नाश्ते के बाद वे टहलने गये, वापसी में उस भयानक हादसे के बारे में पता चला, जिसमें उनकी सोसाइटी के एक निवासी की पत्नी व पुत्री की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। पूरा नापा ही शोकग्रस्त है। जीवन की क्षणभंगुरता का सबूत ऐसे क्षणों में मिलता है। प्रतिदिन न जाने कितने लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। आज छोटी ननद के यहाँ ‘माता की चौकी’ का आयोजन किया जा रहा है। आज शाम को दो छात्राएँ पढ़ने आयी थीं, तुलसीदास का एक सवैया और महादेवी वर्मा का एक संस्मरण पढ़ाया। हिन्दी साहित्य के पास एक विशाल भंडार है। 


आज सुबह ध्यानस्थ थी, कितना सुकून और कितना सरल लग रहा था परमात्मा से गुफ़्तगू करना, वैसे वह कोई दूसरा तो है नहीं, अपने आप से मिलना भी कह सकते हैं ! मन की कल्पना यदि बीच में न आये तो वे हर वक्त उसकी यानि अपनी सोहबत में रह सकते हैं। मन के होते हुए भी पीछे तो वही रहता है। जैसे इस वक्त पीछे गुनगुन की सी आवाज गूँज रही है। सुबह छत पर सूर्योदय के दर्शन किए। दोपहर को नयी कविता टाइप की, पुरानी को दूरस्त किया। बड़े भांजे के विवाह में सम्मिलित होने के लिए परसों उन्हें यात्रा पर निकलना है।


आज सुबह भी सुंदर थी, यह शांति कहीं जाती हुई प्रतीत नहीं होती। यह टिकने के लिए आयी है। अब इसकी असली परीक्षा तो लोगों के बीच होगी। वाणी में कंपन न हो, मन में हल्का सा भी विक्षोभ न  आये और स्वार्थ कभी भी मन को सजल बनाने से न रोके। परमात्मा कितना सुलभ है और वे उसे भूलकर स्वयं को तथा अन्यों को पीड़ा पहुँचाते रहते हैं। कितना व्यर्थ है अपनी ऊर्जा को ऐसे कामों में लगाना, मन को ऐसे चिंतन में लगाना जो कहीं भी नहीं ले जाता, परमात्मा में मन टिका रहे तो अपने आप ही ऊपर उठता है। आज पहली बार घर में उगायी सरसों का साग बनाया। एक नयी कविता लिखी। पापा जी से बात हुई, छोटी बहन भारत आ रही है। 


आज पाँच दिनों के बाद यह डायरी सम्मुख है, अपना घर और अपना समय !!  पिछले पाँच दिन विवाह की गहमा-गहमी में बीते। सोने-जागने का समय भी बदल गया था। विवाह सोल्लास संपन्न हो गया। कुछ देर पहले ननद से बात हुई, आज विवाह का रजिस्ट्रेशन भी हो गया, कोर्ट में पाँच घंटे लग गये। सुबह नव दंपत्ति को लेकर वे लोग मंदिर भी गये थे।


आज सुबह वे चार बजे उठे, वातावरण कितना शांत और शीतल था। सुबह का वक्त दिन का सबसे अच्छा वक्त होता है। पड़ोस में बन रहे मकान के कारण उनके यहाँ लगी पॉलीकार्बोनेट की एक शीट ख़राब हो गई थी, उन्होंने बदलवा दी है, उस तरफ़ की दीवार पर पेंट भी करवा देंगे। छह फ़रवरी को तुर्की और सीरिया में आये भूकंप में मरने वालों की संख्या ५५००० से अधिक हो गई है। एक लाख से अधिक लोग घायल हुए हैं। भारत सरकार ने सहायता का हाथ बढ़ाया है। प्राकृतिक आपदाओं के सम्मुख मानव आज भी कितना बेबस है।  


सुबह उन्होंने सोसाइटी के एक किसान के यहाँ से ताजी मूली और साग ख़रीदे, वह उनके सामने तोड़ रहा था। नन्हे ने कुछ नये क़िस्म के फल और सब्ज़ियाँ भी भेजी हैं। सुबह उसे भिस की सब्ज़ी बनानी है। शाम को सहजन के फूल की।कल सुबह उन्हें नन्हे के घर जाना है, वहीं से ‘कस्तूरबा’ नाटक देखने जाएँगे, जिसमें जीनत अमान ने काम किया है। नन्हा व सोनू बड़े भांजे के घर की सफ़ाई करवाने जाएँगे, वे लोग विवाह के बाद वापस आ रहे हैं।  आज मंझले भाई के साथ छोटी बहन, पापाजी से के पास गयी है, कल वे लोग दीदी के पास भी जाएँगे। रिश्तों की यह डोर कितनी अटूट है, पुरातन भी और नित नूतन ! 


आज वे डेढ़ घंटे की कार यात्रा के बाद ‘चौघड़िया मेमोरियल हॉल’ में जीनत अमान व अभिजीत जकारिया द्वारा अभिनीत नाटक देखने गये, वहाँ जाकर पता चला, किसी कारण से नाटक का मंचन स्थगित हो गया है। लौटकर नन्हे के यहाँ आराम किया, शाम को घर आ गये। नन्हे और सोनू ने डेकोरेटर बुलवा कर भांजे के घर को फूलों से सजवाया, केक भी मँगवाया। नव जोड़े को बहुत अच्छा लगा। 


आज वे नापा के उन निवासी के यहाँ मिलने व शोक प्रकट करने गये, पहली फ़रवरी को जिनकी पत्नी व बेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उन्होंने बताया, सामने से आ रहे कंकरीट मिक्सर ने उनकी हुण्डाई की कार (एवेन्यू) को टक्कर मार दी। ड्राइवर को भी चोट आयी। उनकी वृद्धा माँ व दत्तक पुत्री से मिले।पुत्री दस महीने की है। अप्रैल में उसका जन्म हुआ था, अड़तीस दिनों की थी, जब वे लोग उसे घर लाये थे। कह रहे थे, माँ और दीदी से खूब हिली हुई थी। रोज़ शाम को उनका इंतज़ार करती है। एक नैनी बच्ची को सँभाल रही थी। वृद्धा माँ को छोड़ दें तो एक तरह से वह नन्ही बच्ची ही अब उनका परिवार है।   


आज सुबह वे उठे तो घर में धुँआ भरा हुआ था, शायद किसी ने रात को लकड़ियाँ जलायी हों। प्रातः भ्रमण के बाद आम के बगीचे में ही प्राणायाम किया। कल सुबह वे योगा मैट्स भी ले जायेंगे। छोटी ननद का फ़ोन आया। बड़े भांजे की नव विवाहिता पत्नी की दादी जी का देहांत हो गया। वे डेंटिस्ट के पास जाने से पूर्व वहाँ गये थे। पंडित जी अंतिम क्रिया कर रहे थे, फिर उन्हें शवदाह गृह ले जाया गया। डेंटिस्ट ने नाप ले लिया, सोमवार को नया दाँत लग जाएगा।


आज सुबह उसी ‘अनाम’ की आवाज़ सुनकर आरंभ हुई, फिर उन्हीं की प्रेरणा से कुछ पंक्तियाँ कविता वाली डायरी में लिखी जाने लगीं। पापाजी ने जिन्हें पढ़कर सुंदर प्रतिक्रिया भी दी। ईश्वर व गुरु निरंतर उनकें आश्वस्त करते हैं कि वे उनके साथ हैं, उनका ध्यान रखा जा रहा है। वे उन्हें प्रेम करते हैं, नितांत बेशर्त प्रेम ! प्रेम करना उनका स्वभाव है। प्रेम के बिना यह जीवन मरुस्थल के समान ही तो है। आज दोपहर, बनारस के एक घाट पर जिनमें चाय पी थी, और जिन्हें वह साथ ले आयी थी, उन मिट्टी के कप्स पर रंग भरना शुरू किया, दो-तीन दिनों में रंग जाएँगे। जून अगली यात्रा की तैयारी में लगे हैं । वे ढेर सारे फल भी लाये, आजकल फलों का रस उनके आहार का मुख्य अंग बन गया है। आश्रम में शिवरात्रि का कार्यक्रम अगले सप्ताह है, वे जाने वाले हैं। 


आज वे भांजे की ससुराल पुन: गये। नन्हा भी आ गया था। घर की शुद्धि के लिए आर्यसमाज के एक पंडित ने हवन किया।सभी ने मंत्रोच्चार किया व आहुतियाँ दीं। दोपहर को एक कोरियन धारावाहिक का एक अंश देखा। संगीत, कला, किताबें और कहानी क्लब, ये सारी बातें उसे ख़ास बनाती हैं। वहाँ बर्फ गिरती है और घरों में पानी की पाइप्स जम जाती हैं। ऐसे कठोर मौसम में भी उनके भीतर की उष्मा कम नहीं होती।