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Wednesday, February 17, 2021

छोटी दीवाली

 

कल का पूरा दिन घर को व्यवस्थित करने में ही निकल गया। मेहमानों का कमरा अभी भी  शेष है। आज आखिरी कार्टन भी खोल दिए। योग कक्ष में किताबें लगा दी हैं, कमरा अच्छा लग रहा है। अब शाम को यहाँ बैठकर स्वाध्याय व साधना दोनों किए जा सकते हैं। आज सुबह सिट आउट यानि शयनकक्ष के बाहर बड़ी बालकनी या बरामदे में आसन किए। चार-पाँच दिनों के बाद दीवाली है, इस नए घर में उनकी पहली दीवाली ! नन्हा कुछ लोगों को बुलाने वाला है। आजकल यहाँ शाम होते ही काले बादल छा जाते हैं और मूसलाधार वर्षा आरंभ हो जाती है। इस समय सिर में हल्का दर्द हो रहा है, नया शहर, नई दिनचर्या एडजस्ट होते-होते कुछ समय तो लगेगा। 


आज सुबह पाँच बजे से कुछ पहले ही उठे। एक नए इलाके की तरफ टहलने गए। पार्क नंबर छह व सात देखा। पूरे नापा में चौदह पार्क हैं, सभी सुंदर हैं। एक-एक करके वे सभी में जाएंगे और सुंदर तस्वीरें उतारेंगे। इस समय उसकी आँखें अश्रुओं से भरी हैं, पता नहीं कौन सी पीड़ा है, क्या दुख है, साथ ही एक मुस्कुराहट भी रह-रह कर आ रही है अधरों पर, कौन है जो यह क्रीड़ा कर रहा है ? सुबह टहलने गई तो दोनों पैर जैसे  अकड़े हुए थे, चलने में श्रम प्रतीत हो रहा था, गति भी कम हो गई थी। वापस आकर योगासन किए। नन्हा व सोनू उठ गए थे। हरसिंगार के फूल चुने। जून इडली का नाश्ता  ले आए। नौ बजे वे बच्चों को उनके घर छोड़ते हुए डेन्टिस्ट के पास गए। बाएं गाल में अंतिम दांत पर मसूढ़ा चढ़ गया था, उसने थोड़ी सी सर्जरी की, टांके लगाए। अगले हफ्ते फिर जाना है। दोपहर का भोजन सोनू ने अच्छी तरह से मेज पर लगाया था। आज सुबह असम से नैनी ने फोन किया, एक-एक करके घर के सभी सदस्यों ने बात की। उसके ससुर की तबीयत ठीक नहीं है।  दो दिन बाद दीवाली है, कल बिजली की लड़ी लगाने इलेक्ट्रिशियन आएगा। शाम को टहलते समय जून को पैरों की जकड़न के बारे में बताया तो उन्होंने कहा यह मन की उदासी के कारण है, और कोई बात  नहीं, कोई इंसान दूसरे की पीड़ा का अनुभव कैसे कर सकता है ? हर कोई स्वयं से ही पूरा भरा होता है ! परमात्मा सब जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है, कोई कर्म उदय हुआ है। 


आज दोपहर से ही बाहर बिजली की झालर आदि लगाने का काम चल रहा है। कल छोटी दीवाली है, सोनू की चचेरी बहन व भाई-भाभी आए हैं, वे लोग भी परसों आएंगे। नन्हे ने पार्टी की पूरी तैयारी कर ली है। भोजन बाहर से ही बनकर आएगा, पूरी व रोटी यहाँ बनेगी।सुबह भी पैरों में जकड़न महसूस हो रही थी। शायद हार्मोन्स की समस्या हो, जरूरत से ज्यादा भावुक होना और जल्दी थकान होना इसके लक्षण हैं। जून ने आज पैरों व हाथों में तेल लगाया, उनमें सेवा भाव बहुत है पर उसे जगाना पड़ता है, वरना उन्हें उसकी बात सुनने की भी फुरसत नहीं रहती कभी-कभी। 


वे धीरे-धीरे नए घर में रहने के अभ्यस्त हो रहे हैं। लगभग रोज शाम को भोजन के बाद सोसाइटी में स्थित छोटे से सुपर मार्केट जाकर एक-दो जरूरी समान ले आते हैं। एक महिला उसे चलाती हैं, हिंदी बोल लेती हैं। शाम को टहलने गए तो तेज वर्षा होने लगी, दस मिनट का ही रास्ता था पर घर आते-आते काफी भीग गए, आकर देखा, एक व्यक्ति उनके गैरेज में बारिश से बचने के लिए खड़े हैं। जून ने कुछ देर उनसे बात की, कह रहे थे तीन करोड़ में आपका घर बिक सकता है। आज सुबह सूर्योदय देखते हुए छत पर योगाभ्यास किया। अंग्रेजी अखबार के साथ हिंदी का एक अखबार राजस्थान पत्रिका भी लेना शुरू किया है, कुछ देर पढ़ा। दोपहर बाद डाइनिंग हॉल में बिजली की दो लड़ियाँ लगाईं। शाम को ग्यारह दीपक जलाए, कल्याण के पर्व अंक में दीपावली उत्सव के बारे में  विस्तृत जानकारी पढ़ी। इस बार पूजा का समान नहीं ला पाये हैं अभी तक। रंगोली के लिए रंग भी नहीं हैं। यहाँ वे बाजार से काफी दूर हैं। उत्तर भारत में जिस उत्साह से दीवाली मनाते हैं वैसा यहाँ नहीं है। आज सुबह वे पड़ोसियों को शाम के भोज के लिए निमंत्रित करने गए। उनके पुत्र सैकड़ों के पटाखे जलाता है ऐसा उन्होंने बताया। 


उस पुरानी डायरी के पन्ने पर उसने कहीं से एक सूक्ति लिखी थी, “स्वप्न से भागना नहीं, जागना है। स्वप्न में भागकर भी तो स्वप्न में ही रहेंगे; किन्तु स्वप्न से जागकर स्वप्न ही नहीं रह जाएगा। आज लगता है, जीवन भी तो एक स्वप्न ही है जो वे देखे ही जा रहे हैं, जाग कर पुन: सोने का अभिनय करते हुए। 


Tuesday, May 19, 2020

फूलों की रंगोली


आज नवम्बर का प्रथम दिन है, उन्हें यहाँ से जाने में  मात्र दस महीने रह गए हैं. आज उसने चार नए फूल झाड़ू मंगवा लिए हैं, जबकि एक झाड़ू चार महीने तो चल ही जाता होगा, अब कुछ भी मंगाने से पहले सोचना होगा. शाम के साढ़े सात बजने को हैं. आज भजन में कम ही महिलाएं थीं, पर अच्छा लगा. गुरूजी कहते हैं मस्त होकर भजन गाना चाहिए. किसी को यह समझने में पल भर की देर नहीं लगती कि कौन केवल अधरों से गा रहा है और कौन दिल से ! उससे पूर्व बगीचे में मालिन से काम करवाया. माली आज काम पर नहीं आया, उसके हाथ में चोट लगी है, वह डॉक्टर के पास नहीं जा रहा है, रोग बढ़ता जा रहा है. बढ़ई काम कर रहा है, खिड़कियों की जाली कई जगह टूट-फूट गयी है, उसे ही ठीक कर रहे हैं. एक मिस्त्री ने नालियों को ठीक-ठाक किया, लगातार तंबाकू खाता रहा, उसकी क्षमता कम हो गयी है, चीजों को ठीक से नहीं कर पा रहा था. बढ़ई भी बहुत दुबला-पतला है. मजदूरों को इतना श्रम करना होता है पर उन्हें पूरी खुराक नहीं मिलती. 

दोपहर को महिलाओं को योग नहीं करवा पायी, बरामदे में पेंटिग का काम तभी खत्म हुआ था, अब दीवाली के बाद ही  अगला सत्र होगा. ब्लॉग्स पर लिखने बैठी तो ज्यादा नहीं लिख पायी, अब पहले की तरह घँटों कम्प्यूटर पर बैठना नहीं भाता, परिवर्तन स्वाभाविक है. नैनी ने कहा, उसे रंगोली के लिए रंग चाहिए, वह अपने पति से कहकर मंगवा सकती है, उसे पैसे देकर कहा, क्योंकि आज तक कभी भी उसने रंगोली के रंग नहीं खरीदे. वह फूलों से ही रंगोली बनाती है सदा. आज सुबह क्लब की एक सदस्या का फोन आया, वह बहुत प्यार से बात करती है, किसी की वाणी में इतनी मधुरता पता नहीं कहाँ से आ जाती है. किसी के भाव मधुर होते हैं यानि दिल का अच्छा होता है पर वाणी कठोर होती है. किसी के कर्म अच्छे होते हैं. जिसमें सभी कुछ अच्छे हों यानि भाव, वाणी और कर्म ऐसे तो कोई सद्गुरु जैसे बिरले ही होते हैं.  कल की प्रतियोगिता में उस मृदुभाषी महिला ने बहुत सुंदर रंगोली बनाई थी. सुबह छोटी बहन से बात हुई, वह दिसम्बर में उनके आने पर स्वागत की तैयारी कर रही है. 

शाम के साढ़े छह बजे हैं. कल सुबह नन्हा व सोनू आ रहे हैं. उन्हें आज ही आना था पर आज सुबह जब एयरपोर्ट के लिए निकलने से पूर्व वेब चेकिंग करते समय पता चला कि टिकट तो कल की है. कुछ पल के लिए तो निराशा हुई, क्योंकि कितने दिनों से इंतजार था इस दिन का, पर बाद में वे सब खूब हँसे। कल इस समय वे यहाँ होंगे. बाहर बरामदे में रंगोली बन गयी है और दीवाली की लाइट्स भी लग गयी हैं. आज दोपहर मृणाल ज्योति में मीटिंग थी, स्कुल में बाड़ लगानी है. स्कूल की दो शाखाओं में भी काम कैसे आगे बढ़े, इस पर चर्चा हुई. विकलांग दिवस की तैयारियां भी चल रही हैं. परसों उन्होंने चार स्कूलों में जाकर उस दिन पहनने के लिए बच्चों को बैज वितरित किये. अगले हफ्ते दीवाली के बाद कुछ अन्य स्कूलों में जाना होगा. 

बाहर वर्षा हो रही है, दीवाली दो दिन बाद है और मौसम यकायक बदल गया है. पिछले दिनों धूप खिली रही, ऐसे ही मन का मौसम भी बदलता रहता है. संशय के बादल छा जाते हैं तो ज्ञान का सूर्य ढक जाता है. कर्मों का बंधन आगे बढ़ने ही नहीं देता, वे चार कदम आगे बढ़ते हैं फिर छह कदम पीछे लौट आते हैं. जून कोऑपरेटिव गए हैं, वहां से दफ्तर जायेंगे, फिर तिनसुकिया होते हुए डिब्रूगढ़ पहुंच जायेंगे, नन्हा व सोनू दो बजे हवाई अड्डे उतरेंगे, उन्हें लेकर आना है. सुबह नींद खुली उसके पूर्व स्वप्न चल रहे थे, कितने जन्मों के कितने स्वप्न.. मन की गहराई को कोई नाप नहीं सकता. देहाभिमान या देहाध्यास छूटता नहीं या वे छोड़ना ही नहीं चाहते. ध्यान के पलों में लगता है अब सब मिल गया पर जगत में जाते ही सब बिखर जाता है. यह बिखरना भी एक स्वप्न मात्र ही है, यह भाव आ तो जाता है पर मन, बुद्धि पर उतनी देर में जो संस्कार पड़ जाता है, वह भविष्य में पुनः फल देगा, एक दुष्चक्र इस तरह चलता रहता है. सजगता और सजगता इसके शिव कोई साधना नहीं अथवा तो पूर्ण समर्पण .. जो भी हो सब उसी परमात्मा का प्रसाद समझकर स्वीकार करना होगा. मन को खाली रखना होगा

Thursday, May 14, 2020

एकता की मूर्ति

एकता की मूर्ति 


आज पूरे सात दिन बाद यह डायरी खोली है. सिक्किम में नोटपैड ले गयी थी, जिसमें यात्रा विवरण लिखा था. कल से टाइप करना आरंभ हो  सकता है. आज दोपहर छोटा सा एक आलेख लिखा,भाईदूज पर एक कविता भी, और सभी भाइयों को भेजने के लिए लिफाफे तैयार किए. कल रजिस्ट्री करवानी है. शाम को भजन संध्या थी, नैनी ने फूलों से मंदिर सजा दिया था. आज एक नयी साधिका आयी, उसने अपनी मधुर आवाज़ में तीन भजन गाये. सिक्किम से लाये उपहार उसने उन्हें दिए. नैनी को एक माला, वह बहुत खुश थी. शाम को बगीचे से तोड़ी पालक का सूप बनाया और सरसों का साग, इस मौसम की पहली फसल ! फूलों का बगीचा भी काफी साफ-सुथरा मिला जब आज सुबह राजधानी से वे घर लौटे. 

जून का फोन आया अभी, घर में काम करवाने के लिए सिविल डिपार्टमेंट को उन्होंने कहा है, शायद वे लोग देखने आएंगे. दीवाली से पूर्व कुछ टूट-फूट ठीक हो जाये तो घर और अच्छा लगेगा. उसे बंगाली सखी की बिटिया से मिलने जाना था पर अब घर पर ही रहना होगा, वे कभी भी आ सकते हैं. दोपहर को मृणाल ज्योति जाना है. सिर में हल्का दर्द है और गले में खराश... मगर आत्मा उसी तरह प्रसन्न है, अदरक व तुलसी का काढ़ा पीने से अवश्य ही कुछ राहत मिलेगी. 

आज इतवार है, टीवी पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम आरम्भ हो गया है. इस महीने के अंतिम दिन देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में देश भर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है, साथ ही इस अवसर पर एकता दौड़ का भी आयोजन होगा, उसी दिन स्टेचू ऑफ़ यूनिटी को देश को समर्पित किया जाएगा. गुजरात के केवाडिया में सरदार सरोवर बांध के पास स्थापित की गई लौहपुरुष की 182 मीटर की आदम कद प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को ! कल इन्फैंट्री दिवस भी मनाया गया, जिस दिन सन सैंतालीस में कश्मीर को बचाने के लिए सेना को भेजा गया था. खिलाडियों का जिक्र भी प्रधानमंत्री ने किया, सिक्किम व उत्तरपूर्व का भी. इंदिरा गांधी को उन्होंने याद किया. उसे ‘मन की बात’ सुनना अच्छा लगता है, प्रधानमंत्री जैसे इसके जरिये देशवासियों को देश के बारे में आवश्यक जानकरी देते हैं, ऐसी जानकारी जिसे जानकर देश के प्रति सम्मान और गर्व की भावना सभी भारतवासियों में जगे. 

अभी-अभी योग सत्र समाप्त हुआ, कल महिला क्लब की मीटिंग है, सो सत्र नहीं होगा और परसों क्लब में फिल्म दिखाई जाएगी, कम ही साधिकाएं आएँगी. जून आज हैदराबाद गए हैं, दो दिन बाद लौटेंगे. कल सुबह बाजार जाना है, शाम की मीटिंग के लिए कुछ सामान खरीदने. प्रेसीडेंट का फोन आया था, परसों वह आ रही हैं, तब वह उन्हें क्लब का चार्ज सौंप देगी. सप्ताहांत में नन्हा और सोनू आ रहे हैं. कल से घर पर सिविल का काम भी आरंभ होने वाला है. लकड़ी व् सीमेंट का काम. बाहर के बरामदे में एक दीवार पर माली ने आयल पेंट लगा दिया है, जो बच्चों द्वारा लगाए लाल दागों को छिपाने के लिए लगाया था, पर अब वही भद्दा लग रहा है. जून ने इस कार्य के लिए फोन किया था, शायद कल यह भी हो जाये. कल पिताजी ने पहली बार फेसबुक पर कमेंट किया तथा एक संदेश भी भेजा, उन्हें अब नए-नए कार्य सीखने में रूचि हो रही है. ईश्वर उन्हें सौ वर्ष की आयु दे. अभी तक वे अपना कार्य स्वयं करने में सक्षम हैं. यहाँ तक कि भोजन भी बना लेते हैं. 

Saturday, September 29, 2018

अंतर्दीप का प्रकाश



पिछले दो-तीन दिनों से कम्प्यूटर में कुछ दिक्कत आ रही थी. आज तो कोई भी फाइल खुल नहीं रही है. उसे यदि कम्प्यूटर पर काम करना है तो जून के आने की प्रतीक्षा करनी होगी. कुछ वर्ष पहले यदि ऐसा हुआ होता तो उसकी प्रतिक्रिया होती, भगवान ने ऐसा जानबूझ कर कराया है, ताकि वह अपने समय का और अच्छा उपयोग करने का तरीका सोच सके, किन्तु अब यह ज्ञात है कि भगवान कुछ नहीं कराते, वे ही प्रतिपल अपने भाग्य की रचना करते हैं. भगवान तो हर परिस्थिति का सामना करने की शक्ति देते हैं, ज्ञान देते हैं, वह प्रेम भी देते हैं. कभी आज हल्की बदली छायी है. स्कूल बंद है, अब पूजा के बाद खुलेगा. मृणाल ज्योति में टीचर्स ट्रेनिंग का कार्यक्रम होना वाला है. सम्भवतः तीसरे हफ्ते में होगा. आज एक सखी से इस बारे में बात की. उसे भी एक दिन की वर्कशॉप का आयोजन करना है. अच्छी तरह तैयारी करनी होगी. सबसे आवश्यक है उन सबके मध्य सहयोग की भावना को पैदा करना, वे अपनी कितनी ऊर्जा एक-दूसरे की कमियां बताने में ही खर्च कर देते हैं. अपने विचारों को बदलने से ही उनका जीवन बदल सकता है. सबके भीतर अंधकार व प्रकाश दोनों हैं, कभी-कभी गुणों का प्रकाश अहंकार के अंधकार से ढक जाता है, वे जिनसे भी मिलें उनके गुणों पर दृष्टि रहेगी तो उनका जीवन भी गुणों से भरता जायेगा ! उन्हें यह मानकर चलना होगा कि वे सभी एक ही धरती के वासी हैं, एक ही देश के, एक ही राज्य के, एक ही शहर के वासी हैं. उनकी एक ही पार्टी है, वे विरोधी पक्ष के नहीं हैं, जहाँ एक-दूसरे को बिना किसी कारण के ही गलत सिद्ध करना होता है. उनका एक ही लक्ष्य है, एक ही लक्ष्य के कारण एक-दूसरे के सहयोगी हैं. कल वे देवी दर्शन के लिए जायेंगे, आज शाम को प्राण प्रतिष्ठा होगी. आश्रम में भी नवरात्रि का कार्यक्रम हो रहा है, आज वह यू ट्यूब पर देख सकती है.

पूजा का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया. आज जून पुनः दिगबोई गये हैं. तीन दिन पूर्व वे एक रात्रि के लिए वहाँ गये थे, गेस्ट हॉउस में रुके. जिस दिन पहुंचे शाम को एक-एक कर सारे पूजा पंडाल देखे. अगले दिन नाश्ता करके वापस. मौसम आज भी बादलों भरा है. उसका गला परसों से थोड़ा सा खराब है, इतवार तक पूरी तरह ठीक हो जायेगा. अगले हफ्ते काजीरंगा जाना है. स्ट्रेस मैनेजमेंट पर किसी कार्यक्रम में जून को भाग लेना है. अगले माह होने वाली टीचर्स वर्कशॉप में उसे कुछ क्रियाएं करानी हैं, जिससे टीचर्स एक दूसरे को अच्छी तरह जानें, स्वयं को जानें. वे खुद को भी कहाँ जानते हैं. उनकी कमियां और खूबियाँ, दोनों से ही अपरिचित रह जाते हैं. उसने सोचा वह दो अध्यापकों को आमने–सामने बैठकर अपनी पांच-पांच कमियां और खूबियाँ बताने को कहेगी. सभी की पीठ पर एक पेपर पिन से लगा दिया जायेगा, सभी को उसकी खूबियाँ उस पर लिखनी हैं. कार्यक्रम आरम्भ होने पर सबसे पहले वह उन्हें एक कोरा कागज देगी जिस पर उन्हें कुछ भी अंकन करना है, एक चित्र कार्यक्रम की समाप्ति पर भी.  

दीवाली आने वाली है, साल भर वे इस उत्सव की प्रतीक्षा करते हैं. दशहरा आते ही दिन गिनने लगते हैं. घर की साफ-सफाई में जुट जाते हैं. पर्दे धुलवाए जाते हैं, पुराने सामान निकले जाते हैं. घर के कोने-कोने को चमकाया जाता है. दीवाली का उत्सव कितने संदेश अपने साथ लेकर आता है.  अहंकार रूपी रावण के मरने पर ही भक्ति रूपी सीता आत्मा रूपी राम को मिलती है, वैराग्य रूपी लक्ष्मण इसमें साथ देता है और प्राणायाम रूपी हनुमान परम सहायक होता है. भक्ति को लेकर आत्मा जब लौटती है तो भीतर प्रकाश ही प्रकाश भर जाता है.

Wednesday, March 14, 2018

यूनिवर्स के संदेश



दीवाली भी आकर चली गयी. घर फिर पहले का सा हो गया है, जो पहले जगमग-जगमग करने लगा था. जून के एक मित्र ने बहुत सुंदर तस्वीरें उतारी हैं दीवाली भोज के दिन की. आज भाई-दूज है. एक-एक करके सभी भाइयों से बात हुई. उत्सव एक पुल है जो परिवारों को जोड़ता है. उत्सव एक डोर है जो दिलों को जोड़ती है या फिर उत्सव एक बहाना है निकटता का अहसास दिलाने का, वरना आजकल किसी के पास फुर्सत नहीं है, दिल की बात कहने और सुनने के लिए. उत्सव एक मंच है एकदूसरे के होने को याद कराने का. कल उन्हें यात्रा पर निकलना है. आज सुबह कैसा अजीब सा स्वप्न देखा. कीचड़ और गोबर..इन्सान स्वयं ही अपने लिए स्वर्ग और नर्क का निर्माण करता है. कल रात सोने से पूर्व देह कुछ भारी लग रही थी शायद इसीलिए, इस समय भी तन हल्का नहीं है, शाम को योग करने से ही ठीक होगा. सुबह जब जून ने कहा, उनके दांत का दर्द ठीक नहीं हुआ है, तो भीतर से कोई प्रेरणात्मक शब्द बोलने लगा, वह स्वयं भी उन शब्दों को पहली बार सुन रही थी. ज्यादातर समय तो वे सुने हुए शब्दों को ही दोहराते हैं. कभी-कभी ही ऐसे क्षण आते हैं जब शब्द किसी गहरे स्रोत से आते हैं. इस समय शाम के चार बजने को हैं. बगीचे में मालिन काम कर रही है और पाकघर में नैनी, दोनों को दीवाली का विशेष उपहार देना है, कल जाने से पहले देगी. आज मृणाल ज्योति में बच्चों के लिए मिठाई व सूखे मेवे भिजवाये. कल उस स्कूल में ले गयी थी जहाँ हफ्ते में एक बार योग कक्षा लेने जाती है. दीवाली पर उन्हें जो उपहार मिले उन्हें बाँटने का इससे अच्छा उपाय और क्या हो सकता था. नन्हे के पुराने वस्त्र भी दिए एक अन्य महिला को, जो गाँव में एक चिकित्सा शिविर लगाने वाली हैं. आज ‘यूनिवर्स’ संस्था से संदेश भी आया जो वे बांटते हैं, वही उन्हें मिलता है. परमात्मा उन्हें वही लौटाता है जो वे भीतर से बाहर फैलाते हैं !  

कल रात साढ़े दस बजे वे बंगलूरू नन्हे के घर पहुंच गये. दोपहर बारह बजे असम से निकले थे. वह चश्मा घर पर ही भूल गयी सोचा था पढ़ने की जरूरत तो रास्ते में पड़ेगी ही, जाते समय पहन कर ही जाना है, पर अभी तक हर समय चश्मा पहनने की आदत नहीं पड़ी है, सो घर पर ही रह गया. यात्रा ठीक रही. ब्रह्मपुत्र को आकाश से देखने एक अनुपम अनुभव था, तस्वीरें उतारीं. सुबह साढ़े छह बजे वे उठे तो पता चला उसका फोन कार में ही छूट गया है. जून ने ड्राइवर को फोन किया, उसने दस मिनट बाद ही बताया, फोन कार में है और वह एयरपोर्ट पर है. कुछ देर बाद दे जायेगा, वाकई वह एक घंटे बाद दे गया, और एक पुराना चश्मा उसने रख लिया था, सो यह समस्या भी हल हो गयी. यानि एक बार फिर तीर टोपी लेकर गया, गर्दन बच गयी. नन्हा और जून इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि इस सोसायटी में उन्हें घर लेना है या नहीं. आज दोपहर को एक मकान मालिक उनसे मिलने आ रहे हैं, इसी सोसायटी में उनका घर दूसरे ब्लॉक में है, जिसे वह बेचना चाहते हैं. मौसम यहाँ ठंडा है. आज धूप भी नहीं निकली है. उसके मना करने के बावजूद नन्हे ने सुबह के नाश्ते का आर्डर दे दिया है. सुबह की चाय के साथ उसने लड्डू खिलाये जो वे बनाकर लाये थे.

मौसम आज भी ठंडा है, रुक-रुक कर वर्षा होती रही. दोपहर को एक बार तो एक तेज गंध आई, बाद में पता चला मधुमक्खियों को भगाने के लिए किसी ने बेगॉन स्प्रे करवाया था. काफी अधिक मात्रा में करवाया होगा, नीचे ढेर सारी मधुमक्खियाँ मरी हुई पड़ी थीं. जून की आंख का कैट्रेक आपरेशन कल ठीक से हो गया. वे नौ बजे घर से निकले थे. साढ़े दस बजे पहुंचे और साढ़े बारह बजे वापस घर आ गये थे. समय-समय पर दवा डालनी है तथा काला चश्मा पहने रखना है, पानी से बचना है. आज सुबह नाश्ते में उसने वेजरोल बनाये और राइस नूडल्स. कल सैंडविच बनाएगी. यहाँ कुछ ज्यादा काम तो है नहीं. कम्प्यूटर पर कुछ देर काम किया, अभी शेष है. आज नन्हा देर से आएगा शायद साढ़े नौ बजे तक.

रात्रि के नौ बजने वाले हैं. नन्हा आ गया है. मौसम आज भी फुहारों भरा है. दिन भर वे घर पर ही रहे. ‘बैटमैन’ की दूसरी फिल्म देखी, कल पहली देखी थी.

आज कोई फिल्म नहीं देखी, शाम को यहीं निकट ही मॉल गये थे, अब दो दिन यहाँ और रह गये हैं, फिर घर जाना है. दोपहर को रामकृष्ण परमहंस की किताब पढ़ी. नन्हे का एक मित्र और उसकी पत्नी भोजन पर आ रहे हैं. उसने दाल व सब्जी बना दी है. जून ने रायता बना दिया है. वे लोग आने वाले होंगे. इसी हफ्ते नन्हे की मित्र असम जा रही है. जून ने उससे कहा है, घर अवश्य आये, उनका दिल बहुत बड़ा है. दिन में दो-तीन बार वे लोग नीचे उतर कर टहलने जाते हैं, ताज़ी हवा के लिए. फ्लैट्स में हवा के आवागमन की सुविधा नहीं होती. हवा बंद ही रहती है, इसलिए उन्हें खुली हवा में जाने का मन सदा ही बना रहता है. भविष्य में वे जिस घर में रहेंगे, वहाँ शायद खुली हवा का आवागमन ज्यादा अच्छा होता हो !

Friday, March 9, 2018

छोटी दीवाली



कल रात्रि फिर एक अनोखा स्वप्न देखा..एक विशाल मैदान है. नीचे बालू है और एक बड़ी से मेज पड़ी है, खुले गगन के नीचे..लकड़ी की मेज है भूरे रंग की, रंग भी स्पष्ट दिख रहा था. उसे देखते ही मन में विचार आया, इस पर लेटकर आकाश को तकना कितना सुंदर ध्यान होगा..और अगले ही पल सामने आकाश में एक सुंदर मंदिर की आकृति स्पष्ट हो गयी..और क्षण-क्षण में उसके रंग बदलते जा रहे थे. तभी अचानक कृष्ण की विशाल आकृति भी दिखी..कि पीछे से एक सखी की आवाज सुनाई दी, उसे कहा, देखो सामने कितना सुंदर दृश्य है, पर अब वहाँ धुंध थी. सब लुप्त हो गया. उस सखी ने एक अन्य सखी का नाम लेकर कहा, कि उसे भी बताया गया है यहाँ कुछ है. पर अब स्वप्न टूट गया. कृष्ण कितने वास्तविक लग रहे थे...उनके भीतर न जाने कितने रहस्य छिपे हैं ! आज जून एक दिन के दिल्ली जा रहे हैं. शाम को योग कक्षा घर पर होगी. इसी महीने उन्हें बैंगलोर भी जाना है.

एक दिन का अन्तराल.. कल सुबह वह स्कूल गयी, फिर दोपहर को कुछ देर सो गयी, दिन भर कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. आज जून वापस आ गये हैं, ढेर सारा सामान भी लाये हैं. दीवाली की रोशनियाँ भी लगनी शुरू हो गयी हैं. दोनों माली मिलकर लगा रहे हैं. आज सुबह भी नींद देर से खुली, क्योंकि रात देर तक पढ़ती रही. अनुशासन जहाँ भंग हुआ आत्मा पर एक आवरण छा जाता है.

आज धनतेरस है. जून के गले में हल्की खराश है. वह सुबह के जॉब पर गये अभी वापस आये हैं. दोपहर का भोजन भी दिगबोई में था, कम्पनी के गेस्टहाउस में. उन्होंने अपने विभाग के सभी सहकर्मियों को परसों शाम सात बजे का समय दिया है, दीवाली के लिए. चार परिवार नहीं आ पाएंगे. एक अवकाश पर है, एक सरकारी दौरे पर, एक के परिवार में किसी की मृत्यु का शोक मनाया जा रहा है, एक की पत्नी मायके में है, सो वह भी गये हैं. सो परसों सुबह से ही उसका समय रसोईघर में गुजरेगा. पटाखों की आवाजें आनी शुरू हो गयी हैं. आज बड़ी बुआ को फोन किया तो पता चला गिरने से उन्हें कूल्हे में चोट लग गयी है. वह बहुत हिम्मत से बात कर रही थीं. ईश्वर उन्हें शक्ति दे, अभी काफी दिनों तक उन्हें अस्पताल में रहना पड़ सकता है.

आज छोटी दीवाली है. घर की सफाई का काम अब पूरा हो गया है. बाहर बरामदे में रंगोली बनानी है और स्टोर में पूजा घर सजाना है. आज दोपहर को ये कार्य करने हैं. मौसम आज सुहावना है. सुबह दीपावली के लिए एक नई कविता लिखी, कितना उमंग भरा त्यौहार है यह. छोटी बहन का फोन आया, वह परेशान थी. रिश्तेदारी निभाना इतना सरल तो नहीं है. जब तक स्वयं का स्वयं से रिश्ता नहीं बन जाता तब तक किसी और के साथ बन भी कैसे सकता है. दीवाली तो वह इस बार नहीं मना रही है, परसों उसकी परीक्षा भी है. जीवन में कितने ही क्षण ऐसे आते हैं जब वे अपने स्वभाव से हट जाते हैं, अभाव या प्रभाव में आ जाते हैं, पर जिस सदा के लिए हर पीड़ा से मुक्त होना हो उसे तो स्वभाव में टिकना सहज बनाना होगा. परमात्मा की निकटता का अनुभव उसे हर क्षण होता रहेगा तब. बंगलूरू में परसों से लगातार वर्षा हो रही है, चेन्नई में भी. इसी हफ्ते उन्हें भी वहाँ जाना है. शायद तब तक मौसम सुधर जाये.

Friday, August 4, 2017

धनतेरस और नर्क चतुर्दशी


परसों वे लौटे. उसने यात्रा विवरण लिखना शुरू कर दिया है. पिछले वर्ष वे गोवा गये थे, आस्ट्रेलिया भी, तब भी लिखा था, और अब वह सब एक स्वप्न ही तो लगता है, यह जीवन एक स्वप्न से अधिक कुछ नहीं है. आज का स्वप्न कल से बेहतर है और यकीनन कल आज से भी बेहतर होगा. सुबह भविष्य में हरे-भरे बगीचे का स्वप्न देखा, जो एक दिन साकार होगा. माली के पीछे लगना होगा और नर्सरी भी जाना होगा. एक सखी से भी सहायता मांगी है, उसने पिछले वर्ष बहुत सुंदर बगीचा बनाया था. सुबह दीदी-जीजाजी के लिए एक कविता लिखी, ननद-ननदोई को विवाह दिवस की बधाई दी और एक सखी को पिछले हफ्ते पड़ने वाले जन्मदिन की बधाई आज जाकर दी, खैर, देर आयद दुरस्त आयद ! ‘कावेरी के सान्निध्य में’ लेख पूरा हो गया है, अब तस्वीरें डालनी शेष हैं जो जून की सहायता से ही होगा. जीवन एक इस सुन्दर अवसर को सुंदर कार्यों में में ही लगाना होगा. यहाँ हर पल अनमोल है. मृत्यु का देवता द्वार पर खड़ा ही है, प्रतीक्षा रत है, बल्कि पल-पल मृत्यु के द्वार की ओर वे बढ़ ही रहे हैं. जीना है तो इसी पल में जीना होगा.

आज एक सप्ताह बाद पुनः कलम हाथ में पकड़ी है. उस दिन दीदी के लिए एक कविता लिखी थी, आज दीवाली पर कुछ पंक्तियाँ उतरी हैं. सचमुच दीवाली एक नहीं कई उत्सवों का मेला है. सफाई लगभग पूरी हो चुकी है, अभी विशेष सजावट करनी शेष है. कल धनतेरस है अथवा तो‘धन्वंतरी जयंती, शाम को बिजली की झालरें लगवानी हैं. अभी-अभी नैनी ने पूछा, आपने धनतेरस पर कुछ खरीदा है ? शाम को बाजार भी जाना है. आज से मौसम में हल्की ठंडक समा गयी है. बचपन में दादी जी कहती थीं दीवाली के बाद सर्दियां शुरू हो जाती हैं और होली के बाद गर्मियां आरंभ हो जाती हैं. सुबह स्कूल गयी, बच्चों को व्यायाम करने में जितना आनंद आता है उतना ही भजन गाने में भी. परमात्मा का नाम किसी भी तरह लिया जाये, शुभ ही करता है. पिछले दिनी बगीचे में काफी काम हुआ, नर्सरी से नये पौधे लाये गये. जून भी कोलकाता से फूलों व सब्जियों के बीज लाये हैं. ‘विश्व विकलांग दिवस’ के लिए कुछ सामान बनाना है, पुराने शादी कार्ड्स उपयोग करके नये छोटे लिफाफे बना सकती है. विभिन्न स्कूलों में जाकर उस दिन के लिए विशेष रूप से बनाये बैज भी देने हैं.

आज ‘नर्क चतुर्दशी’ है. क्लब में आज ही दीवाली उत्सव मनाया जायेगा. आज नेट नहीं चल रहा, सो ब्लॉग पर कुछ पोस्ट नहीं किया. परसों के विशेष भोज की तैयारी चल रही है. जून धीरे-धीरे सामान खरीद कर ला रहे हैं. वह सूरन के कोफ्ते की सब्जी बना रही है. इसके अलावा आलू-गोभी-मटर, बैंगन का भुर्ता, दाल माखनी, रायता, चटनी, पुलाव व पूरी बनाने की सोच रही है. कल अवकाश है, मिठाई बनाने का कुछ काम कल ही हो जायेगा. जून कोलकाता से स्नैक्स ले आये थे, कई तरह की चिक्की तथा नमकीन. बच्चों के लिए अनार व फुलझड़ी भी वे ले आये हैं, उसे शोर करने वाले पटाखे जरा भी पसंद नहीं आते. जून के दफ्तर से दीवाली के उपहार आने भी शुरू हो गए हैं. कल नन्हे से बात हुई, उसके यहाँ चार दिन का अवकाश है, पर उसे तो काम करना ही है. ईश्वर उसे सद्बुद्धि दे, उन सभी को सद्बुद्धि दे ! इससे बढ़कर कोई प्रार्थना नहीं हो सकती.


Monday, September 26, 2016

ओबामा की किताब


नवम्बर का आरम्भ हो चुका है. दो दिन बाद दीवाली है. आज सुबह एक सखी के साथ मृणाल ज्योति गयी, बच्चों के लिए मिठाई और नमकीन लेकर. प्रिंसिपल ने बताया उन्हें व्यावसायिक शिक्षा की योजना के अंतर्गत लड़कियों के लिए सिलाई स्कूल खोलना है, यदि मिल सकें तो पुरानी मशीनें चाहिए. वे लोग लेडीज क्लब में सूचित कर देगीं. इसी माह के अंत में नेशनल ट्रस्ट का एक कार्यक्रम भी है, जिसमें किसी हुनर को सिखाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी, इन बच्चों को भी तो बड़े होकर अपने पैरों पर खड़ा होना है. दीवाली के लिए सुंदर दीये भी बनाये हैं वहाँ के बच्चों और अध्यापिकाओं ने, जिन्हें को-ओपरेटिव स्टोर में बिक्री के लिए रखने कल वे आयेंगे. आज लेडीज क्लब की पत्रिका के लिए कोई नाम का सुझाव देने के लिए फोन आया. एकता में अनेकता, मेल, मित्रता, मिलन, सहयोग, भागेदारी, अपनापा, समन्वय, मिलाप, सहभागिता को व्यक्त करता हुआ कोई एक शब्द. वार्षिक उत्सव आने वाला है.

जून और पिताजी कोलकाता गये हैं, परसों आयेंगे. घर में माँ और वह है. उनका होना और न होना बराबर है, चुपचाप बैठी रहती हैं. वह एक सखी के आने की प्रतीक्षा कर रही है, उसने आने की बात कही थी. कल उसकी एक कविता पर काफी लम्बी टिप्पणी पढ़ने को मिली, ज्ञान बढ़ा और लगा कि दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो परमात्मा से उसी तरह मिले हुए हैं जैसे कभी-कभी वह मिलती है, जब केवल वही रहता है, तब दो नहीं होते, वैसे तो दो कभी भी नहीं होते, दो परिधि पर होते हैं, लहरें सतह पर ही तो हैं, वह सदा ही है, एक ही है, वह उनका मूल है, कितना आश्वस्त करती है यह बात...

पिछले कुछ हफ्तों से डायरी नहीं लिखी, पहले मेहमान फिर सभी के लिए उनके व्यक्तित्त्व को दर्शाती हुईं कविताएँ...समय इसी में गुजर गया. आज फुर्सत है. दोपहर के डेढ़ बजे हैं. मौसम ठंडा है बादलों के कारण, नवम्बर की सर्दी के कारण नहीं. वह ध्यान कक्ष में है. माँ-पिताजी अपने कमरे में सोये हैं. माँ उठकर बिस्तर के पास वाली कुर्सी पर बैठ गयी होंगी, वह वहीँ घंटों बैठी रहती हैं. बच्चों जैसी बातें करने लगी हैं, हँसी आती है उन सबको उनकी बातों पर, लेकिन बुढ़ापे में उनका भी क्या हाल होने वाला है यह तो भविष्य ही बतायेगा. जून को इसी हफ्ते मुम्बई जाना है. बड़ी ननद के ज्येष्ठ की अचानक मृत्यु हो गयी है. जब वह उन्हीं के घर में रात को भोजन के बाद सोये थे. जीवन कितना क्षणभंगुर है. नन्हा कल हस्पेट गया था मोटरसाईकिल से. आज वापस जा रहा है. उसका फोन अभी तक नहीं आया है, वह सकुशल होगा. जून छोटी बहन की किताब को आकार दे रहे हैं. वह वापस जाने वाली है आज ही. बड़ी बहन से कई दिनों से बात नहीं हुई है. परसों बड़े भाई का जन्मदिन है और दो दिन बाद उनकी बिटिया का, वह दोनों के लिए कविता लिख सकती है. सर्दियों के फूल खिलने लगे हैं, यहाँ उनके क्लब में भी वार्षिक उत्सव की तैयारी शुरू हो गयी है, उसने बहुत दिनों से कोई पुस्तक भी नहीं पढ़ी है. आज लाइब्रेरी जाकर ओबामा की किताब वापस करनी है. कल से वे सत्संग का समय शाम पांच बजे से कर रहे हैं, आजकल अँधेरा चार बजे के थोड़ा बाद ही शुरू होने लगता है. इस समय कितनी शांति है. नैनी के बेटी के रोने की आवाज आ रही है और कौए की कांव-कांव भी सुनाई दे रही है, घड़ी की टिक-टिक कितनी स्पष्ट सुनने में आ रही है. परसों विश्व विकलांग दिवस है, वह ब्लॉग पर मृणाल ज्योति के बारे में लिखेगी.


Thursday, September 22, 2016

दीवाली के कार्ड


कोई है जो हर क्षण जागता रहता है, उनके भीतर वह साक्षी ही उनका वास्तविक मित्र है. मन, इन्द्रियों से परे जो एक शांत अवस्था है उसी का नाम है साक्षी भाव ! कल रात ऐसा लगा कि सोते-सोते भी कोई भीतर जगा हुआ था ! कल सत्संग में दो भजन गाने वाली सखियाँ आयीं, गाने की बारी उसकी भी आयी. कल बहुत सी पत्रिकाएँ, किताबें तथा पेपर्स निकाले, घर में सामान जितना कम हो उतना अच्छा है, एक दिन सारे कार्ड्स भी निकाल देने हैं अथवा तो उन्हें रहने देते हैं कितनी यादें जुड़ी हैं उनसे..दीवाली पर सबको कार्ड्स भेजने का उत्साह जगा है, पिताजी, तीनों भाई, चचेरे व फुफेरे भाई सबको भेजेगी बहनों को भी..आज सुबह वेद ज्ञान सुना, कितने अद्भुत श्लोक हैं, आत्मा को बलशाली बनाने की ही सारी प्रार्थनाएं हैं. कल ओशो को सुना हरेक को अपने ईश्वर का निर्माण स्वयं करना है उसकी माँ बनना है. इसका भी अर्थ वही है कि उन्हें स्वयं को शक्ति से भरना है. आत्मा को जागृत करना है. मन, बुद्धि के पार जाकर एक ऐसी शून्यावस्था का अनुभव करना है जो प्रेम, शांति व ज्ञान से ओत-प्रोत है. उनका छोटा मन जब शांत हो जाता है तो आत्मा जो सदा से वहीँ है उजागर हो जाती है, वह आत्मा ही अपने शुद्धतम स्वरूप में परमात्मा है जब वह देह से परे होती है, वासना तथा तृष्णा से मुक्त होती है, उसे भी अपने भीतर उस आत्मशक्ति को परिपक्व करते जाना है, व्यर्थ विचारों से स्वयं को बचाना है, ऊर्जा बचानी है ताकि वह ऊर्जा ध्यान में सहायक हो. लेखन में, पठन में सहायक हो. ऊर्जा को व्यर्थ गंवाया तो भीतर नकारात्मकता छाएगी स्वयं को आत्मा रूप में अनुभव करने के बाद भी यदि कोई उदास रहे तो ...कहीं कुछ धोखा है..हँसी ही उनकी पहचान हो और शांति उनका घर..प्रेम उनका स्वभाव..कल छोटी बहन से बात हुई, वह भी खुद की तलाश में लगी है, यात्रा जारी है, एक दिन मंजिल भी मिल जाएगी. आज देखा, गीतांजलि के भावानुवाद पर कुछ कमेंट आये हैं तथा तीन महिलाएं फ़ॉलो भी कर रही हैं. अभी कितनी कविताएँ ब्लॉग पर डालनी हैं. कल लक्ष्मी पूजा का अवकाश है. जून नयी गाड़ी ले रहे हैं. अपने भोजन का खास ख्याल रखते हैं, दर्द भी कम हो गया है. अगले महीने मेहमान आ रहे हैं घर की सफाई का काम ठीक चल रहा है अब कुछ ही शेष है. बड़ी भांजी को निबन्ध के लिए कुछ जानकारी भेजनी थी, वही काम शेष रह गया है.


होश को कायम रखना तलवार की धार पर चलने जैसा है, बार-बार मन फिसल जाता है, पुराने संस्कारों का शिकार होकर वाद-विवाद में फंस जाता है. अहंकार अपना सिर उठाने लगता है, भीतर कोई देख रहा है, साक्षी है, यह भाव खो जाता है. जाग-जाग कर भी वे सो जाते हैं, लेकिन जैसा कि सद्गुरू कहते हैं पहले तो इतना भी होश नहीं था कि वे अज्ञानी हैं, कम से कम अब अपने अज्ञान का बोध तो होता है ! पांच एम्पीयर का एक स्विचबोर्ड लगाने दो लोग आये हैं, शोर हो रहा है पर बाहर का यह शोर भीतर की शांति को भंग नहीं करता, उसे तो भीतर का शोर ही भंग करता है. अभी एक सखी को फोन किया सुबह उनके यहाँ फूल भिजवाये थे, लगता है वह कुछ परेशान है या व्यस्त है. धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है कि सारे संबंध ओढ़े हुए होते हैं, वे अपनी सुविधा के अनुसार जब चाहे उन्हें उतार देते हैं, जब चाहे पहन लेते हैं ! यहाँ हर कोई अपने आप में एक द्वीप है. उन बुजुर्ग आंटी की शिकायत कम होने में नहीं आती, बढ़ती ही जाती है यहाँ माँ की भी. अभी-अभी उस सखी का फोन आया, उनके यहाँ भी बिजली नहीं है. उनका जीवन जितना सुविधाजनक होता जाता है उतने ही वे बेहोश होते जाते हैं. 

Friday, April 22, 2016

दीवाली - प्रकाश पर्व


कल दीवाली है, उसे एक संदेश लिखना है !
फैले चारों ओर उजाला
स्वच्छ बनें घर-आंगन अपने,
दीप मालिका के उत्सव पर
लक्ष्मी पूर्ण करें सब सपने !

आज दीपावली का उत्सव है, यूँ तो उन्होंने कल भी मनाया था, आज शाम को भी घर पर मेहमान आयेंगे, अच्छा लगता है दीपों का यह प्रकाश पर्व, यह परंपरा न जाने कितनी पुरानी है, लाखों वर्ष पुरानी ! वे भी न जाने कितनी बार इसे मना चुके हैं पर हर बार यह नया उत्साह भर जाता है. सभी से बात भी हुई, कुछ से फोन पर कुछ से sms द्वारा. अभी कुछ देर पूर्व जून की इक्कीस वर्ष पूर्व की डायरी पढ़ी, वह उन्हें पढ़ाती थी, ऐसा लिखा है !
आज सुबह वे छह बजे उठे, रात देर से सोये थे, दीवाली का भोज, पटाखे, दिए और मोमबत्तियां ! शाम को एक सखी के यहाँ जाना है. सुबह ध्यान में अद्भुत अनुभव हुआ. भीतर कितना सुख है, लूट मची है और वे हैं कि उस ओर देखते तक नहीं ! जीवन कितना अद्भुत है यह बात वही जान सकता है जिसने एक बार भी आत्मा का अनुभव किया हो, अन्यथा शेष सभी एक मोह की नींद में असत्य को ही सत्य मानकर दुःख-सुखी होते रहते हैं. आत्मदर्शी के लिए जगत में रहना कितना सहज हो जाता है जैसे कोई पंछी अप्रयास गगन में उड़ता है, जैसे कोई मीन अनायास ही जल में तैरती हो, जैसे कोई नवजात शिशु सहज ही अपने मुँह खोल अंगड़ाई लेता हो जैसे सुबह अपने आप हो जाती है और रात भी तारों व चाँद सहित आकाश में अपना साम्राज्य सजाती हो !
आज दोपहर पन्द्रह मिनट के अंदर-अंदर गोहाटी, बारपेटा, कोकराझार तथा बोगाईगाँव में ग्यारह बम विस्फोट हुए. आतंकवादियों का एक और हमला, कितने मरे कितने घायल कोई हिसाब नहीं. लोगों के मनों में डर भर गया है. हालात दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं. यह शांतिकाल तो नहीं कहा जा सकता, युद्ध की विभीषिका से भी भयानक है यह काल. लोग धरा पर बोझ हो गये हैं क्या जो..महाभारत के युद्ध में लाखों मरे थे, आज भी आये दिन लोग मर रहे हैं, कभी बम का शिकार होकर तो कभी भूकम्प या बाढ़ का.

आज घर जाना है, यूँ तो घर यहीं है पर वे हजारों साल परदेस में रहने पर भी परदेसी ही बने रहते हैं. कल पुस्तक मेले में किताबों का दुकानदार यही तो कह रहा था. कल गोहाटी में जो हादसा हुआ है, कितना भयानक था, आज न जाने कितने घरों में मातम मनाया जा रहा होगा, कितने घरों में मौत का सन्नाटा होगा, कुछ सिरफिरे आतंकवादियों ने लोगों का शांति से जीना मुश्किल कर दिया है. आज शाम को वे यात्रा पर निकलेंगे, मौसम खुला-खुला है, धूप में अब पहले की सी तेजी नहीं रह गयी है. उसने आवश्यकता से अधिक सामान रख लिया है, शायद अधिक दिन रुकना पड़े. एक व्यक्ति को जीने के लिए कितना चाहिए पर वे कितनी-कितनी वस्तुएं जुटा लेते हैं. वापस आकर वह अपने जीवन में परिवर्तन करने वाली है. ओशो कहते हैं मनुष्य कभी अपने वर्तमान से संतुष्ट नहीं होता, वह सदा एक सुखद कल की आशा में खोया रहता है.  

Wednesday, January 7, 2015

दीवाली का उजास


बाबाजी कहते हैं, साधक का परम लक्ष्य स्वयं के केंद्र तक पहुँचना है, बाहर के खेलों में उलझना नहीं, जितना-जितना वे ध्यानस्थ होते जाते हैं उतना-उतना ईश्वर के प्रेम के अधिकारी बनते जाते हैं. पंचभूतों से निर्मित देह धीरे-धीरे उन्हीं में विलीन होता जाता है पर जीवात्मा परमात्मा का अंश है, जो शाश्वत है, ज्ञान और प्रेम स्वरूप है. दीवाली हो या कोई अन्य त्योहार, सारे पर्व उसी शाश्वत स्वरूप की याद दिलाने आते हैं. एक रस जीवन जीते-जीते कभी-कभी उदासीनता का भाव आने लगता है, सत्, चित्, आनंद से उत्पन्न हुए वे त्याग के द्वारा पर्वों पर अपने आप से जुड़ते हैं. स्वच्छता, दीप जलाना, नई वस्तु लाना और सभी के साथ भोजन करने का अर्थ है अपने हृदय को स्वच्छ करना, ज्ञान का दीपक जलाना और प्रेम का प्रसाद बांटना ! मूल को पाने का संकल्प दिन-प्रतिदिन दृढ़ होता जाये यही प्रार्थना उत्सव पर करनी है ! छोटी ननद ने बताया उनके शहर में बाबाजी आये हैं. वे लोग गये थे, ननदोई जी ने चार दिन सेवा की. संत के दर्शन सदा हितकारी होते हैं. उस दिन गोहाटी में गुरूजी की वह प्रेमिल दृष्टि उसे कभी नहीं भूलेगी. उस दृष्टि में उनका आशीष था जो ईश्वर उसके अंतर में अपनी झलक दिखाते हैं ! कल ध्यान में एक नया अनुभव हुआ उसके सिर के ऊपरी भाग में अद्भुत शीतलता का अहसास हुआ, सिर में आवाजों का आना भी जारी है.

कल दीवाली का उत्सव सम्पन्न हो गया, उनके यहाँ बहुत लोग आये, भोजन साथ-साथ किया. तीनों सखियाँ कुछ बनाकर भी लायी थीं. आज मौसम खुशनुमा है. टीवी पर आत्मा आ रहा है, वाचक ईश्वर के अभय रहने के संदेश का वर्णन कर रहा है. आज म्यूजिक सर भी आयेंगे. उन्हें दिगबोई भी जाना है, नन्हे के अध्यापकों से मिलना है. उसकी पढ़ाई जिस जोश से चलनी चाहिए थी वह दीख नहीं रहा है. अभी कुछ देर पूर्व योग शिक्षक का फोन आया गेस्ट हॉउस से, वह तेजपुर की उन वृद्धा साधिका से बात करना चाहते थे. वे उन्हें माँ की तरह मानते हैं बल्कि माँ ही मानते हैं. आज वे उनके यहाँ आ रहे हैं दोपहर को. उसे चने की दाल, पालक पनीर, शिमला मिर्च, गोभी का परांठा और कुछ मीठा बनाना है.

बुद्धि का फल अनाग्रह है, कभी भी तर्क आदि के द्वारा अपनी बात को ऊपर करना स्वयं को साधना के पथ से विचलित करना है, यदि वह गलत है तो दूसरे का आभारी होना चाहिए और यदि वह सही भी है तो निंदा से दुखी नहीं होना होना चाहिए. कल दोपहर को योग शिक्षक उनके यहाँ आये, उन्हें भोजन पसंद भी आया, तारीफ़ करने में वह संकोच नहीं करते. कल शाम वे क्लब गये, योग का छोटा का कार्यक्रम था, उनकी बातें मन को छू लेती हैं. कल शाम से ही उसका मन भावातीत अवस्था में है. ईश्वर जैसे कहीं निकट ही हैं. अधर मुस्काते–मुस्काते थक गये हैं पर रुक नहीं रहे हैं, वैसे भी एक बार ईश्वर को मन में स्थान मिल जाये तो वह उसे छोड़ता नहीं है. वे ही इतर कार्यों में व्यस्त होकर उसे भूल जाते हैं. ईश्वर प्रेम, शांति और आनंद स्वरूप है, और इस वक्त प्रेम, शांति और आनंद की फुहार उसके अंतर में बरस रही है. ज्ञान से अभी दूर है लेकिन जब हृदय प्रेम से लबालब भरा हो तो और किसी के लिए स्थान कहाँ रह जाता है. बुद्धि यदि आत्मा से जुड़ी हो यानि धैर्ययुक्त हो तो मन अज्ञानी नहीं रह जाता. ‘नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात’ ! अभी-अभी एक सखी से बात की, उसके पति इस बात के खिलाफ हैं कि कोई उनके यहाँ कुछ बनाकर ले जाये, एक दूसरी सखी से उसकी इस बारे में बहस भी हो गयी. वे जीवन को कितना जटिल बना लेते हैं जबकि वह कितना सरल है. जीवन में ईश्वर का ज्ञान हो तो जीना आसान हो जाता है. अपने मन के विकारों को लम्बी छुट्टी पर भेजना होगा तब चित्त में कृष्ण होंगे, कृष्ण जो उनके नितांत अपने हैं !  




Friday, August 22, 2014

गोभी की पौध


आज फिर बादल छाये हैं आकाश पर, पिछले कुछ दिन धूप भरे थे, उनका बगीचा खिल रहा था. आज सुबह उसने एक पपीता तोडा, और सोच रही है उन परिचिता को दे आये या भिजवा दे कल जिनसे फोन पर बात हुई थी, उसे लगा शायद उन्हें बुरा लगा हो. नन्हा आजकल सुबह फिर देर से उठने लगा है, फिर जल्दी-जल्दी चुपचाप सारे काम करता है, एक किशोर के लिए ये लक्षण क्या ठीक हैं. आज बड़ी भाभी के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामना दी तो वह प्रसन्न हुईं, कहने लगीं, सबसे पहली बधाई उनकी ही है. रात एक स्वप्न में उसने बंगाली सखी को देखा, जून से कहेगी, इ-मेल से उन्हें  दीवाली की शुभकामनायें भेज दें. आज जे.कृष्णामूर्ति को सुना, वह कहते हैं, जो प्रतिकूलता को नहीं स्वीकारता वहीं संघर्ष पैदा होता है, सब कुछ अनुकूल होता रहे ऐसा तो सम्भव ही नहीं है, जीवन जिस रूप में सम्मुख आए उसे ही सच्चे दिल से स्वीकारना ईश्वर भक्ति है.
“बाहर के दीये तो बहुत जला लिए अब तो आत्मदीप जलाना है. मिठाई भी बहुत खा ली, अब तो अंतर की मधुरता चाहिए, बाहर की सफाई भी बहुत हो गयी अब तो अंतर्मन को स्वच्छ करना है. एहिक दीवाली तो बहुत मना ली अब प्रज्ञा दीवाली मनानी है”. आज बाबाजी ने दीवाली का तात्विक अर्थ बताया. नैनी का स्वास्थ्य आजकल ठीक नहीं है फिर भी वह काम पर आती है, विवशता कहें या कर्त्तव्य परायणता, अपने काम को वह महत्व देती है वरना घर में भी बैठ सकती थी. उससे भी नूना को कुछ सीखने को मिलता है. आज जून सम्भवतः गोभी की पौध लायेंगे. पालक, मेथी, गाजर, मटर, धनिया और प्याज के बीज पड़ चुके हैं पर गोभी की क्यारी खाली पड़ी है. आज सुबह एक और पपीता तोड़ा, उसने पड़ोसिन को दिया और कल के लिए उसे निमंत्रित भी किया. कल क्लब में दीवाली पर विशेष उत्सव है पर वे घर पर व्यस्त रहेंगे. सात परिवारों को उसने विशेष भोज के लिए आमंत्रित किया है. कल उसकी संगीत अध्यापिका ने आखिर कह ही दिया, अब वह नहीं सिखा पाएंगी, यह उसका अंतिम महीना होगा, इसके बाद नई शिक्षिका खोजनी होगी या घर पर ही अभ्यास जारी रखना होगा. संगीत तो एक वरदान है जिसकी जितनी संभाल की जाये उतनी कम है.

पिछले तीन दिन डायरी नहीं खोल सकी, उस दिन रात के आयोजन की तैयारी करनी थी, अगले दिन पार्टी के बाद की सार-संभाल तथा कल आराम करने के कारण. वे तीन जगह आमंत्रित थे, ज्यादा गरिष्ठ भोजन करने के बाद कल दिन भर उपवास करना पड़ा. कल शाम भी यहाँ दीवाली का ही माहौल था. सभी ओर दिए और रोशनियों की झालरें लगी थीं. पटाखों का शोर बढ़ता ही जा रहा था. आज दोपहर को जून के साथ बैंक जाना है, उसके अकाउंट को उन्हें जॉइंट अकाउंट बनाना है. कल जून ने उसे पैसे लाकर दिए, उसे कुछ भी रोमांचक नहीं लगा, बल्कि कुछ भी नहीं लगा, नये नोट देखकर भी कोई ललक नहीं उठी, लगता है मुक्ति की राह पर कदम तेजी से बढ़ रहे हैं. आज असमिया सखी ने ‘नीति वचन’ सुनने का फिर आग्रह किया, उसका मन भी अध्यात्म की ओर आकर्षित हो रहा है. जीवन अद्भुत है, यह नित नवीन रूपों में प्रकट होता है. कभी सुख और आनन्द की वर्षा कर उसे निहाल कर जाता है तो अगले ही पल अचानक विपत्ति बन प्रश्नचिह्न लगा जाता है. कभी सहज लगता है कभी अनबुझ पहेली की तरह प्रतीत होता है. साहित्य भी इन रसों व रंगों से अछूता नहीं रहता. वह सजग बनाता है, कठिन परिस्थितियों से पार पाने की प्रेरणा देता है.




Wednesday, August 20, 2014

स्टोर में चूहा


कल वे सारे कार्य कर सके जो विचारे थे. धूप तेज थी और मन में उत्साह था. कल शाम को एल मित्र परिवार अपनी यात्रा से वापस आ गया. परसों एक सखी ने  गुड़हल पर चार पंक्तियाँ लिखने की बात कही थी, पर वह भूल ही गयी, शाम को उसने फोन करके याद दिलाया. आज करवाचौथ का व्रत है, पर उसने सिर्फ एक बार विवाह के बाद मायके में यह व्रत रखा था, तब जून भी वहाँ नहीं थे. एक बार मंगनी के बाद भी. न ही जून को, न उसे व्रत आदि में विश्वास है. उसे विश्वास है अच्छाई में, नैतिकता में, सत्य और अहिंसा में, प्रतिपल निर्लोभी होकर जीने में, सम्यक जीवन दृष्टि में और स्वच्छता में, सो आज से हर दिन एक घंटा विशेष सफाई के लिए, दीवाली आने तक उनका घर दीयों के लिए तैयार हो जायेगा. आज गोयनका जी ने शिवजी , श्री राम, भगवान कृष्ण और गणेश देवता की भक्ति का वास्तविक अर्थ बताया. शिवजी प्रतिक्षण काल से घिरे रहने के बाद भी शीतलता धारण किये हैं, कामनाओं को भस्म कर चुके हैं. गणेश जी की मेधा इतनी ज्यादा है कि उन्हें हाथी का सिर चाहिए. राम त्याग की मूर्ति हैं, भाई के प्रति स्नेह का आदर्श रखते हैं. कृष्ण को वे भक्त प्रिय हैं जो अपेक्षा रहित हैं, राग-द्वेष से मुक्त हैं, निर्मल चित्त वाले हैं न कि वे जो उनके रूप का बखान तो करते हैं पर उनकी बातों को नहीं  मानते. उसे और सहनशील होना होगा और कर्मठ भी. स्वास्थ्य ( पूरे परिवार का ) के प्रति भी और सजग रहना होगा और सबसे बड़ी बात अपनी वाणी पर संयम रखना होगा. वाणी को जीतना पहली सीढी है.

पर्व प्रेरणा देते हैं. शुभ संकल्प जगाते हैं, उत्साह भरते हैं. जीवन जो एकरस प्रतीत होता है उसमें नवरस भरते हैं. अगले हफ्ते दीपावली का त्योहार आ रहा है वे सभी उत्सुक हैं. जीवन है ही क्या? कुछ पल ख़ुशी के कुछ पल उदासी के ! जीवन बहती धारा है, जो गुजर जाता है, लौटकर नहीं आता. सुख-सुविधा भी नहीं रहेगी और तप भी नहीं रहेगा, पर तप का लाभ बाद में मिलेगा. लोभवश किये कार्य और उनका त्याग दोनों ही नहीं रहेंगे पर त्याग अनासक्ति सिखाता है, मन निर्भार हो जाता है. मधुर शब्द और कटु शब्द दोनों ही नहीं रहने वाले हैं पर प्रेम, प्रेम को जन्म देता है, उसके सौदे में घाटे का कोई काम नहीं, लाभ ही लाभ है. आज बाबाजी ने उपरोक्त ज्ञान दिया. सुबह के कार्य हो चुके हैं, अभी ध्यान करेगी फिर कर्म. कई दिनों से कविताओं वाली डायरी नहीं खोली है मन में भाव तो उपजते हैं पर टिकते नहीं क्यों कि प्रयास ही नहीं किया. नन्हे ने डिबेट में भाग लिया था पर सलेक्ट नहीं हो पाया, उसने कहा लडकियाँ बहुत अच्छा बोलीं, वे लड़के समझ गये, उनका चुनाव नहीं होगा. जून कल दीवाली के लिए काफी कुछ लाए और अगले हफ्ते डिब्रूगढ़ जाकर फिर लायेंगे. वह चीजें खत्म होने ही नहीं देते पहले से ही और लाकर रख देते हैं. उसे इस बारे में कुछ सोचना नहीं पड़ता. वाकई वह बहुत भाग्यशालिनी है.

सामान्यत इस वक्त वह संगीत अभ्यास कर रही होती है, पर आज अभी तक न ही ‘ध्यान’ किया है न व्यायाम. सुबह फ्रिज की सफाई में कुछ वक्त चला गया, कुछ वक्त स्टोर से चूहा भगाने में. एक छोटा सा चूहा जाने कहाँ से घुस आया है जो छिप जाता है. फिर उन परिचित का फोन आया जो ससुराल के उनके घर गयीं थी. उनकी आवाज वह पहचान नहीं पाती, उन्हें परिचय देना पड़ता है. नैनी ने कुछ दिन उनके यहाँ काम किया पर उनके अनुसार ठीक से नहीं किया. पैसों के हिसाब को लेकर भी कुछ गलतफहमी थी, उसे वह समझाने लगीं. नैनी ने सुबह उससे हिसाब करवाया था, जो उसे ठीक से पता नहीं था, खैर वह न जाने क्या समझें और सोचें.. उसके मन में उनके लिए सहानुभति और पहले सा स्नेह ही है. वे उनके यहाँ जायेंगे दीवाली के दौरान. कल ‘वृदावन सारंग’ के दो गीत लिखाये टीचर ने. अब दोपहर को ही अभ्यास करेगी. आजकल न उसकी वाणी ही सौम्य, मधुर और अर्थपूर्ण रह गयी है न ही खान-पान में कोई परहेज, जैसा जब चाहा कह दिया, खा लिया और हृदयहीनता की तो हद ही नहीं है. जून को KBC का एडिक्शन हो गया है यह तक कह दिया. जून उसका इतना ख्याल रखते हैं और उसे उनकी छोटी सी ख़ुशी भी सहन नहीं होती. सिर्फ किताबें पढ़ लेने से या प्रवचन सुन लेने ही कोई ज्ञानी नहीं बन जाता. यह भी मन बहलाव ही है जब तक आचरण पूर्ववत् है तब तक कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह क्या पढ़ती है या सोचती है, सोच, व्यवहार में तो झलकनी चाहिए न.







Tuesday, May 6, 2014

नया सोफ़ा और लैम्प शेड


...और दीवाली का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया, आज सब ओर कैसी शांति है, जून दफ्तर गये हैं और नन्हा स्कूल, उसका दिन भी अपने पुराने क्रम में गुजर रहा है. पहले उसकी छात्रा आई फिर कपड़े धोने थे. संगीत, लंच और दोपहर को हिंदी क्लास. रात्रि स्वप्नों में रिश्तेदारों से मिलती रही, अभी अपने लोग, दीदी भी थीं, उनका गला खराब था, उस दिन फोन पर बात की तो थोड़ा खांस रही थीं. आज उसने आलू व कसूरी मेथी की सब्जी बनाई है, गुलाब जामुन अभी भी बचे हैं. बगीचे में जाकर देखा तो बीज अंकुरित हो गये हैं पर साथ ही खर-पतवार भी निकल आये हैं, जिन्हें साफ करना जरूरी है. उसने plumber को बुलाकर कहा जो उनके बेडरूम का फ्लश ठीक करके गया था और लौट रहा था कि पानी नहीं चढ़ रहा है, पर उसने आते ही चलाकर दिखाया and she felt like a fool and last evening when one family came late when they were least expecting them she could not talk properly, she thought she can not adjust in odd situations, she even does not try, finds easy always known things and situations, but life is full of new events, her music teacher gave syllabus, may be next year she should appear in exam.

अज टीवी पर एक शायर का इंटरव्यू सुना तो कुछ अधूरी कविताएँ पूरी कीं, लिखने वालों को शायरों, कवियों से काफी प्रेरणा मिलती है, लगता है कोई जाना-पहचाना मिल गया, दिल की कैफियत तो हर जगह एक सी होती है. शायर का दिल, चाहे वह कहीं का भी हो, एक सा धडकता है, उसे हर उस शै से प्यार होता है, जिसमें खलूस हो, जो दुनिया को बेहतर बनाने में मददगार हो. प्यार तो दुनिया को जोड़े रखने का बहुत बड़ा साधन है, कुदरत से भी और इंसानों से भी, जानवरों, पेड़ों से भी. कल लाइब्रेरी से नई किताबें लायी है, स्वामी योगानन्द जी की भी एक किताब है, ध्यान में मदद मिलेगी. उनके लम्बे बाल देखकर उसने भी बाल न कटवाना तय किया है, और धोने के लिए शैम्पू की जगह बेसन व दही से धोएगी. अभी जून का फोन आया, उन्हें दफ्तर में रहकर भी घर का ख्याल बना रहता है, उसने सोचा, वह यदि काम करे तो पूरा ध्यान बाहर ही रहेगा, उतने वक्त तक घर को भूली रहेगी, वह दो तरफ ध्यान नहीं बंटा सकती सिवाय उस वक्त के जब ध्यान कर रही हो, तब तो मन हजार दिशाओं  में जाता है.

अभी-अभी घर वापस आई है, कल music class नहीं जा पाई थी सो आज गयी थी, टीचर ने गाउन पहना हुआ था जैसे वह क्लास लेने के मूड में न हों, हमेशा वह साड़ी या सूट पहने होती हैं, उसने सोचा शायद वह आराम कर रही थीं, सुबह उन्होंने कहा था अपनी एक मित्र को खाना देने अस्पताल जाना है, शायद देर से आई हों, उसे दो बुलेटिन भी दिए जो उसके घर के पास ही भिजवाने थे. मौसम अच्छा था और वह जल्दी आ गयी थी सो खुद ही देने चली गयी. सभी के दरवाजे बंद थे, अपने-अपने घरों में बंद लोग आराम कर रहे थे, एक के लॉन में गुलाबों के इर्द-गिर्द गड्ढे खुदे हुए थे, सब्जी की क्यारी में पौधे काफी बड़े-बड़े थे और दूसरे का बगीचा बहुत सुंदर था, फूलों से लदे मुसन्डा के पेड़ और गुलदाउदी के ढेर सारे गमले और क्यारियां, उनका घर भी बहुत सुंदर हैं नूना को कुछ वैसी ही कैफियत हुई - भला उसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद कैसे ? पर एक पल के लिए. आज हल्की बूंदा-बांदी हो रही है इसलिए छत पर काम करने वाले मजदूर नहीं आए, जिन्होंने कल से काम करना शुरू किया है. कल नये सोफे, कारपेट, लैम्पशेड तथा डोर मैट बिछाने के बाद उनकी बैठक भी बहुत सुंदर लग रही है, उनके मन भी सुंदर बनें !





Monday, May 5, 2014

दीवाली का उजास


Just now she read some shlokas from sixth chapter of ‘Bhagvad Gita’ edited by Dr Radhakrishnan, he was a great scholar, earlier politicians used to be great philosophers  but nowadays they are ordinary people, not all, but most of them are dishonest. She learned, to be aware is most essential and meditation helps in this. Gita also teaches methods of meditation, concentrating our mind on a single object. The wandering unstable mind causes misery. June is practicing yoga regularly, he gets up as soon as the alarm rings, and says very sweet ‘good morning’, he is very calm and controlled these days. Every minute he is busy doing something or reading, understands the power of love and harms of anger. So there mornings have become very very pleasant and before going to office they sit for 15 minutes listening and meditating on the instructions given by that teacher. It soothes the nerves and calms the mind. Then she picks up her harmonium. She thought, should also improve herself and most of all, should accept all her weaknesses and drawbacks, then undo them. According to J Krishnamurti when one goes into her/his foolishness, it goes. Also, one should not be judgmental. Take the things as they come.   


Today, after so many days of hot sun, is wet. Since morning clouds were visible and then around 8, it started raining. Last night she made paper caps for dahlia saplings to protect them from intense rays of sun but today all plants are happy to feel water and cold breeze after weeks. She did some more cleaning, Deepawali is very near, and also talked to some friends.

They are planning to have a get together on Diwali eve, so she rang few of her friends to have special meal.  It will be good to gather and celebrate festival of light with all of them. Tomorrow they will go tnk for shopping and doing air tickets reserved  for dec trip to Bhuvneshvar and puri and then to her home place. Today evening there is a film in the club, and her days are always full of books, computer and writing. One of her friend says, to work is very essential for a woman,  to know herself, to express and to gain confidence but she does not have such intense desire in her, what she will prove, she is what she is and it is nobody’s concern, if she does her duties as a sensible member of society, keeps her surroundings clean, does not harm anyone then it is OK, she is happy in her small world !

Woods are lovely dark and deep
But I have promises to keep
Miles to go before I sleep
And miles to go before I sleep

These lines just came to her mind when she opened this page after cleaning and setting the things of last night party. They celebrated Diwali yesterday, house was looking beautiful, decorated with colored bulbs and candles. Food was also liked by all specially ‘Gulab Jamun’ and chhole, which were  same as they ate in highway . Jun and Nanha both helped her in cooking and arranging table etc. Today they will go to club for fireworks and then take a round trip of town to see the shining lighted homes. Nanha is busy in housekeeping, he dose it very well. Diwali is a festival of love and harmony. When one gives sweets to mali, dhobi, sweeper, dhudhvala, a new bond develops.  She prayed, Let the spirit of Deepwali always remain intact.






Thursday, July 18, 2013

सूर्य ग्रहण - अद्भुत घटना



दीवाली आई और चली भी गयी, इतने दिनों तक सुबह उसे डायरी खोलने का वक्त ही नहीं मिला, आज उसका काम जल्दी हो गया है, लंच भी लगभग तैयार है, सोच रही है लिखने के बाद पड़ोस में एक सखी के यहाँ भी हो आये. पिछले दिनों किसी बात को लेकर उसकी पुरानी पड़ोसिन से कुछ गलतफहमी भी हो गयी, उसे वह बात कहनी तो थी पर कहने का ढंग बेहतर हो सकता था, जो उसके लिए सदा मुश्किल काम रहा है. पर उसे यह विश्वास है, उसके मन का स्नेह और शुभकामनायें उस तक पहुंच ही जाएँगी. सूर्य ग्रहण के दिन उसने अपने घर से ग्रहण देखने के लिए बुलाया था, देखते-देखते सूर्य को एक छाया ने घेर लिया, उन्होंने एक्सरे फिल्म में से ग्रहण देखा. कल व परसों दोनों दिन क्लास अच्छी रही. पर आज प्राज्ञ के विषय में संदेह है, पर जाना तो है ही. आज सुबह जून भी झुंझला कर गये हैं, उसने उन्हें थोड़ा ‘लोभ’ कम करने को कहा था.

It is about 6 pm. Nanha is watching TV and she is here before her diary after some days. Today in the morning Jun went to see off  MaPapa and they are alone here for a couple of days. She was feeling a strange sense of freedom since morning. she did whatever she liked at whatever time and slept on their bed after  many days. Nanha is missing them but also not much. she liked their stay here and they were also happy. She was at ease with herself  except two or three occasion when she felt some irritation.Tomorrow she will get cleaned the house in the morning and write letters in the evening.and day after tomorrow jun will come to fill her days and nights.she felt some pain in heart, pain of missing him. After two hour her friend will come to have dinner with them and time will pass like any thing. so she said to herself, don’t waste time and start reading the book. “The Four Yoga".

Yesterday  they got a nice group photo of didi’s family and a divali card. This year they got many beautiful divali cards, also one letter from her home, ma wrote about Nanha’s sweater, she will send it in December. Day after tomorrow is ‘Husband Night’ in Ladies club, and then she will wear the new dress. She will do piko on duppatta before that. Last evening jun was upset for few minutes when she gave money to naini for TV, but after that he was normal. She felt sleepy and stopped writing.



Tuesday, July 16, 2013

रसभरे गुलाबजामुन


चुप-चुप रहना कुछ नहीं कहना  
अपनी धुन में खोये रहना...

पीटीवी पर यह सुंदर गीत अभी-अभी सुना, जाने क्यों पाकिस्तानी संगीत उसे अंदर तक छू जाता है, राहत देता है. Soothing to nerves

देखो हरसूं फूल खिले हैं
साजन बरसों बाद मिले हैं
उनको हमसे बहुत गिले हैं
कितनी कलियाँ महक रही हैं
जब से उनके होंठ हिले हैं...

आज सुबह फोन की घंटी सुनकर बेड से उठी, आँख पहले ही खुल गयी थी. जून का संदेश था उनके सहकर्मी के द्वारा, वे लोग आज शाम की जगह कल सुबह  आ रहे हैं. माँपापा की ट्रेन २० घंटे लेट है. कल रात को देर तक नींद नहीं आ रही थी, बाद में स्वप्न में असमिया सखी से मिली, और दीदी से भी, वह भी डॉक्टर है, वह अपनी स्वास्थ्य समस्या के बारे में उन्हें बता रही है. रात से ही कभी-कभी हल्का दर्द होता है, उसने सोचा, क्या एक बार फिर उसे उस सब से गुजरना होगा. ईश्वर उसकी परीक्षा ले रहे हैं ! लेकिन इस बार दर्द सहना आसान होगा. पर हो सकता है दवा लेने से ही ठीक हो जाये, उसे कल या परसों डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए, उसे विटामिन सी, जिंक और प्रोटीन की जरूरत है, क्योंकि उसका जख्म देर से भर रहा है. आज से नियम से चार आंवले खाने शुरू करेगी, हर रोज दो सुबह, दो शाम को.

परसों माँ पापा आये और घर जैसे फिर से स्पंदन युक्त हो गया है. इतने सालों तक अकेले-अकेले रहने के बाद उन तीनों को सभी के साथ रहना अच्छा लग रहा है. इस वक्त वे दोनों आँख टेस्ट करने अस्पताल गये हैं. उसका मन शांत है और आँखों में मुस्कुराहट की कलियाँ चटख रही हैं. जून भी बहुत खुश हैं और नन्हा भी, पर कभी-कभी वह शांत हो जाता है. दीवाली को मात्र चार दिन रह गये हैं. कल पटाखे और दीए भी आ गये हैं. गुलाब जामुन के लिए गिट्स का पैकेट भी. जून उसके लिए एक बहुत सुंदर ड्रेस लाये हैं, अभी तक पहन कर नहीं देखी है, इतनी सुंदर है कि पहनने से डर लगता है. उसने अपनी एक सखी को फोन पर बताया, उसे अच्छा लगा होगा पर कुछ लोग ख़ुशी जाहिर करने में भी कंजूसी करते हैं. माँपापा भी उन तीनों के लिए कपड़े लाये हैं. उन दोनों को पसंद आए पर नन्हे के कपड़े खरीदना उन्हें उतनी अच्छी तरह से नहीं आता. कल लेडीज क्लब की एक महिला सदस्या ने अपना लेख भेज दिया एक ने आज शाम तक भेजने को कहा है. कल तक टाईप भी हो जायेंगे और शाम तक वह भिजवा देगी. आज दोपहर को हिंदी कक्षा के लिए भी जाना है.

जान कहके जो बुलाया तो बुरा मान गये
और न जो उनको बिठाया तो बुरा मान गये
आईना उनको दिखाया तो बुरा मान गये
वह थे बेहोश मुझे होश में लाने के लिए
और जब होश में आया तो बुरा मान गये