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Monday, August 24, 2026

टैगोर का निबंध


टैगोर का निबंध 



आज का दिन व्यस्तता भरा बीता। ऐसी व्यस्तता, जो उन्हें आनंद से भर देती है, जैसे कोई नाव धीरे-धीरे नदी पर तिरती जा रही हो। सुबह उठे तो नित्य की भाँति दूर तक टहलने गये। चारों ओर निस्तबधता और हल्का धुँधलका ! पवन शीतल थी, उस समय कदम जैसे अपने आप ही आगे बढ़ते जाते हैं, उसने जून से कहा, वह नहीं चल रही, मात्र देह चल रही है, वह भीतर स्थिर है। उसे भीतर भी नहीं कहा जा सकता, एक ऐसी ऊर्जा है जिसका केंद्र कहीं नहीं है। आकाश में द्वादशी का चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा था। चंद्रमा को देखकर सहज ही मन में आनंद की एक लहर डोल जाती है, इसीलिए चंद्रमा की तुलना मन से की गयी है, आत्मा की सूरज से और देह की धरती से ! वापस आकर छत पर लगे पौधों के सान्निध्य में साधना की। कहते हैं न, भोर सँवर जाये तो दिन अपने आप सार्थक हो जाता है। नैनी जल्दी आ गयी। उसके साथ मिलकर वे घर की साप्ताहिक सफ़ाई में जुट गये। वैक्यूम क्लीनर्स का इस्तेमाल सप्ताह में एक ही बार होता है।लगभग दो घंटे के स्वच्छता अभियान के बाद घर कैसा सुंदर लग रहा था। नूना को एओएल का अनुवाद कार्य करके भेजना था। तभी पड़ोसी परिवार मिलने आ गया, वे लोग अधिक देर नहीं रुके, शाम को उनके साथ भ्रमण के लिए जाना है, यह कहकर वे चले गये। कल जो इडली मिश्रण मिला था, उसमें कुछ हरी सब्ज़ियाँ डालकर नाश्ते के लिए अप्पम बनाये। काफ़ी पीकर वे बैंगलुरु के एक  प्रसिद्ध और व्यस्त बाज़ार ‘कमर्शियल स्ट्रीट’ जाने के लिए निकले। जून को अब व्यस्त सड़कों पर ड्राइविंग करने में दिक़्क़त नहीं होती, जैसे शुरू में होती थी। सवा घंटे में वे वहाँ पहुँच गये थे। देवेनगेरे सिल्क स्टोर से सोनू के और अपने लिए उसने कुछ वस्त्र लिए। दीवाली की तैयारी के अन्तर्गत सफ़ीना प्लाजा से कॉफ़ी टेबल कवर, एक अन्य दुकान से कुशन कवर लिए। वापस आकर झटपट लौकी, मटर व मसूर दाल डालकर तहरी बनाई।कुछ देर ऑडिबल सुनते-सुनते विश्राम किया, योग निद्रा जैसा, जिसमें देह सो जाता है, पर चेतना सजग रहती है। सुबह भी उसने कुछ देर ‘जे कृष्णामूर्ति’ को सुना था। ध्यान पर उनके विचार मन को सचेत कर देते हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शाम को मित्रों के साथ टहलने निकले तो कुछ दूर जाते ही वर्षा आरंभ हो गई, वापस आकर एक रोचक बोर्ड गेम ‘सीक्वेंस’ खेला, जो नन्हा बहुत पहले उनके लिए लाया था। कार्ड्स से खेले जाने वाले इस खेल में पाँच टोकन की एक पंक्ति बनानी होती है, जो पहले बना लेगा, वह विजेता होगा। उन्हें भी अच्छा लगा यह खेल। जून ने ‘फ़ूडी बडी’ व्हॉट्स ऐप ग्रुप में देखकर एक सदस्या से समोसे मँगवा  लिए थे। वैसे तो वर्षा के मौसम में पकौड़े खाये जाते हैं, पर समोसे भी अच्छे लगे।    

आज इतवार की सुबह बच्चे ग्यारह बजे के लगभग आ गये थे। दोपहर के भोजन के बाद वे सब फ़ोरम मॉल गये। प्रेस्टीज समूह का यह मॉल बैंगलुरु के सबसे बड़े और शानदार मॉल्स में से एक है। उनके घर से बहुत दूर भी नहीं है। सोनू ने कहा, जॉब में अपने नये रोल के लिए अगले हफ़्ते इंटरव्यू देना है। उसके बाद उसे हफ़्ते में दो-तीन बार ऑफिस जाना पड़ेगा। उसे फॉर्मल ड्रेसेज़ लेनी थीं। उसके बाद ‘मोंटेज’ गये, जो पेंटिंग्स की एक दुकान है और शिफ्ट होने वाली है। वे लोग चालीस प्रतिशत छूट दे रहे हैं। नन्हे ने अपने घर के लिए फूलों वाली एक पेंटिंग ख़रीदी।बाद में ‘चायोज’ में शाम की चाय पी।यहाँ गुड़ की चाय भी मिलती है और कुल्हड़ वाली चाय भी, इसके अलावा हर्बल टी, ग्रीन टी आदि के साथ अनेक प्रकार की चाय मिलतीं हैं।चाय के साथ स्नैक्स की भी कोई सीमा नहीं है, अलग-अलग तरह के व्यंजन लोग यहाँ चाय के साथ मंगाते हैं। 

परसों जो लंबी सैर वर्षा के कारण नहीं हो पायी थी, आज शाम को उन्होंने मित्र दंपति के साथ की। वापसी में कुछ देर घर आकर बतकही भी चली।उनकी बड़ी बेटी के घर के पास एक झील है, कन्नामंगला झील, भविष्य में कभी वहाँ जाने की बात भी हुई। इसी हफ़्ते वे लोग बेटी के घर जा रहे हैं, जिसे कुछ दिनों के लिए विदेश जाना है, उसके कुत्ते की देखभाल के लिए उन्हें कुछ दिन वहाँ रहना होगा। वे लोग वापस आने के बाद उनके साथ योग अभ्यास करने भी आना चाहते हैं। आज नूना ने नवनीत में रवीन्द्रनाथ टैगोर का एक लेख पढ़ा, जो अद्भुत है। मानवता, प्रकृति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम उनके विचारों में मिलता है। संकीर्ण राष्ट्रीयता से ऊपर उनके विचार पूरे विश्व को अपना परिवार मानने की भारतीय परंपरा को पोषित करते हैं। वह कहते हैं, साहित्य का उद्देश्य आनंद की प्राप्ति और आत्मज्ञान पाना है। इस महीने के अंतिम सप्ताह में एक दिन उन्हें हिंदी नाटक देखने जाना है। नन्हे ने अगले महीने वायनाड में ताज में बुकिंग कर दी है। सितंबर के आख़िर में कोयंबटूर और ऊटी जाना है। वर्षा के बाद मौसम साफ़ होता है तो लोग यात्रा पर निकलते हैं। इस समय तो देश के कई राज्यों में बाढ़ एक कारण हालात बहुत ख़राब हैं। पापाजी ने फ़ोन पर अच्छी बातें बतायीं। उनका विश्वास दृढ़ है और परमात्मा के प्रति मन में असीम श्रद्धा है। वह आजकल आध्यात्मिक मस्ती में रहते हैं। ओशो की किताबें पढ़कर उन्हें बहुत आनंद मिलता है।

आज शाम वे पैदल ही सोमनहल्ली लेक तक गये। सूर्यास्त होने वाला था, जल में आकाश के रंगों का प्रतिबिंब बन रहा था। अनेक छोटे-बड़े श्वेत-श्याम व नीले रंग के पक्षी भी पानी में कलोल कर रहे थे। वापसी में चर्च के सामने से आये, वहाँ सांध्य प्रार्थना हो रही थी। एक विशाल मंदिर भी मार्ग में पड़ता है। दोपहर बाद ‘बेटी-बेटे’ फ़िल्म देखी, कितने सुंदर गीत हैं इसमें, सुनील दत्त का अभिनय भी अच्छा है। तीन भाई-बहन जो बचपन में एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं, कैसे बड़े होकर मिलते हैं ।आज जून बहुत खुश हैं, कल थोड़े से चुप थे। मन के मौसम का भी पता नहीं चलता, कब बदल जाएगा, इसलिए उसने मन के पार अपना ठिकाना खोज लिया है, जहाँ सदा बसंती  मौसम रहता है। सुबह उठते ही उसने नित्य की भाँति कुछ पंक्तियाँ लिखीं, जिन्हें बाद में टाइप किया।  


Friday, June 5, 2026

मिट्टी के कप


मिट्टी के कप 


आज से वर्ष का दूसरा महीना शुरू हो गया। समय जैसे पंख लगाकर उड़ रहा है। सुबह उसने फिर भीतर समाधान(समाधि) पाने के लिए ध्यान किया। नाश्ते के बाद वे टहलने गये, वापसी में उस भयानक हादसे के बारे में पता चला, जिसमें उनकी सोसाइटी के एक निवासी की पत्नी व पुत्री की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। पूरा नापा ही शोकग्रस्त है। जीवन की क्षणभंगुरता का सबूत ऐसे क्षणों में मिलता है। प्रतिदिन न जाने कितने लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। आज छोटी ननद के यहाँ ‘माता की चौकी’ का आयोजन किया जा रहा है। आज शाम को दो छात्राएँ पढ़ने आयी थीं, तुलसीदास का एक सवैया और महादेवी वर्मा का एक संस्मरण पढ़ाया। हिन्दी साहित्य के पास एक विशाल भंडार है। 


आज सुबह ध्यानस्थ थी, कितना सुकून और कितना सरल लग रहा था परमात्मा से गुफ़्तगू करना, वैसे वह कोई दूसरा तो है नहीं, अपने आप से मिलना भी कह सकते हैं ! मन की कल्पना यदि बीच में न आये तो वे हर वक्त उसकी यानि अपनी सोहबत में रह सकते हैं। मन के होते हुए भी पीछे तो वही रहता है। जैसे इस वक्त पीछे गुनगुन की सी आवाज गूँज रही है। सुबह छत पर सूर्योदय के दर्शन किए। दोपहर को नयी कविता टाइप की, पुरानी को दूरस्त किया। बड़े भांजे के विवाह में सम्मिलित होने के लिए परसों उन्हें यात्रा पर निकलना है।


आज सुबह भी सुंदर थी, यह शांति कहीं जाती हुई प्रतीत नहीं होती। यह टिकने के लिए आयी है। अब इसकी असली परीक्षा तो लोगों के बीच होगी। वाणी में कंपन न हो, मन में हल्का सा भी विक्षोभ न  आये और स्वार्थ कभी भी मन को सजल बनाने से न रोके। परमात्मा कितना सुलभ है और वे उसे भूलकर स्वयं को तथा अन्यों को पीड़ा पहुँचाते रहते हैं। कितना व्यर्थ है अपनी ऊर्जा को ऐसे कामों में लगाना, मन को ऐसे चिंतन में लगाना जो कहीं भी नहीं ले जाता, परमात्मा में मन टिका रहे तो अपने आप ही ऊपर उठता है। आज पहली बार घर में उगायी सरसों का साग बनाया। एक नयी कविता लिखी। पापा जी से बात हुई, छोटी बहन भारत आ रही है। 


आज पाँच दिनों के बाद यह डायरी सम्मुख है, अपना घर और अपना समय !!  पिछले पाँच दिन विवाह की गहमा-गहमी में बीते। सोने-जागने का समय भी बदल गया था। विवाह सोल्लास संपन्न हो गया। कुछ देर पहले ननद से बात हुई, आज विवाह का रजिस्ट्रेशन भी हो गया, कोर्ट में पाँच घंटे लग गये। सुबह नव दंपत्ति को लेकर वे लोग मंदिर भी गये थे।


आज सुबह वे चार बजे उठे, वातावरण कितना शांत और शीतल था। सुबह का वक्त दिन का सबसे अच्छा वक्त होता है। पड़ोस में बन रहे मकान के कारण उनके यहाँ लगी पॉलीकार्बोनेट की एक शीट ख़राब हो गई थी, उन्होंने बदलवा दी है, उस तरफ़ की दीवार पर पेंट भी करवा देंगे। छह फ़रवरी को तुर्की और सीरिया में आये भूकंप में मरने वालों की संख्या ५५००० से अधिक हो गई है। एक लाख से अधिक लोग घायल हुए हैं। भारत सरकार ने सहायता का हाथ बढ़ाया है। प्राकृतिक आपदाओं के सम्मुख मानव आज भी कितना बेबस है।  


सुबह उन्होंने सोसाइटी के एक किसान के यहाँ से ताजी मूली और साग ख़रीदे, वह उनके सामने तोड़ रहा था। नन्हे ने कुछ नये क़िस्म के फल और सब्ज़ियाँ भी भेजी हैं। सुबह उसे भिस की सब्ज़ी बनानी है। शाम को सहजन के फूल की।कल सुबह उन्हें नन्हे के घर जाना है, वहीं से ‘कस्तूरबा’ नाटक देखने जाएँगे, जिसमें जीनत अमान ने काम किया है। नन्हा व सोनू बड़े भांजे के घर की सफ़ाई करवाने जाएँगे, वे लोग विवाह के बाद वापस आ रहे हैं।  आज मंझले भाई के साथ छोटी बहन, पापाजी से के पास गयी है, कल वे लोग दीदी के पास भी जाएँगे। रिश्तों की यह डोर कितनी अटूट है, पुरातन भी और नित नूतन ! 


आज वे डेढ़ घंटे की कार यात्रा के बाद ‘चौघड़िया मेमोरियल हॉल’ में जीनत अमान व अभिजीत जकारिया द्वारा अभिनीत नाटक देखने गये, वहाँ जाकर पता चला, किसी कारण से नाटक का मंचन स्थगित हो गया है। लौटकर नन्हे के यहाँ आराम किया, शाम को घर आ गये। नन्हे और सोनू ने डेकोरेटर बुलवा कर भांजे के घर को फूलों से सजवाया, केक भी मँगवाया। नव जोड़े को बहुत अच्छा लगा। 


आज वे नापा के उन निवासी के यहाँ मिलने व शोक प्रकट करने गये, पहली फ़रवरी को जिनकी पत्नी व बेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उन्होंने बताया, सामने से आ रहे कंकरीट मिक्सर ने उनकी हुण्डाई की कार (एवेन्यू) को टक्कर मार दी। ड्राइवर को भी चोट आयी। उनकी वृद्धा माँ व दत्तक पुत्री से मिले।पुत्री दस महीने की है। अप्रैल में उसका जन्म हुआ था, अड़तीस दिनों की थी, जब वे लोग उसे घर लाये थे। कह रहे थे, माँ और दीदी से खूब हिली हुई थी। रोज़ शाम को उनका इंतज़ार करती है। एक नैनी बच्ची को सँभाल रही थी। वृद्धा माँ को छोड़ दें तो एक तरह से वह नन्ही बच्ची ही अब उनका परिवार है।   


आज सुबह वे उठे तो घर में धुँआ भरा हुआ था, शायद किसी ने रात को लकड़ियाँ जलायी हों। प्रातः भ्रमण के बाद आम के बगीचे में ही प्राणायाम किया। कल सुबह वे योगा मैट्स भी ले जायेंगे। छोटी ननद का फ़ोन आया। बड़े भांजे की नव विवाहिता पत्नी की दादी जी का देहांत हो गया। वे डेंटिस्ट के पास जाने से पूर्व वहाँ गये थे। पंडित जी अंतिम क्रिया कर रहे थे, फिर उन्हें शवदाह गृह ले जाया गया। डेंटिस्ट ने नाप ले लिया, सोमवार को नया दाँत लग जाएगा।


आज सुबह उसी ‘अनाम’ की आवाज़ सुनकर आरंभ हुई, फिर उन्हीं की प्रेरणा से कुछ पंक्तियाँ कविता वाली डायरी में लिखी जाने लगीं। पापाजी ने जिन्हें पढ़कर सुंदर प्रतिक्रिया भी दी। ईश्वर व गुरु निरंतर उनकें आश्वस्त करते हैं कि वे उनके साथ हैं, उनका ध्यान रखा जा रहा है। वे उन्हें प्रेम करते हैं, नितांत बेशर्त प्रेम ! प्रेम करना उनका स्वभाव है। प्रेम के बिना यह जीवन मरुस्थल के समान ही तो है। आज दोपहर, बनारस के एक घाट पर जिनमें चाय पी थी, और जिन्हें वह साथ ले आयी थी, उन मिट्टी के कप्स पर रंग भरना शुरू किया, दो-तीन दिनों में रंग जाएँगे। जून अगली यात्रा की तैयारी में लगे हैं । वे ढेर सारे फल भी लाये, आजकल फलों का रस उनके आहार का मुख्य अंग बन गया है। आश्रम में शिवरात्रि का कार्यक्रम अगले सप्ताह है, वे जाने वाले हैं। 


आज वे भांजे की ससुराल पुन: गये। नन्हा भी आ गया था। घर की शुद्धि के लिए आर्यसमाज के एक पंडित ने हवन किया।सभी ने मंत्रोच्चार किया व आहुतियाँ दीं। दोपहर को एक कोरियन धारावाहिक का एक अंश देखा। संगीत, कला, किताबें और कहानी क्लब, ये सारी बातें उसे ख़ास बनाती हैं। वहाँ बर्फ गिरती है और घरों में पानी की पाइप्स जम जाती हैं। ऐसे कठोर मौसम में भी उनके भीतर की उष्मा कम नहीं होती। 

Tuesday, May 5, 2026

स्पंद कारिका


स्पंद कारिका 


आज समाचारों में सुना राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी हैं। पहली आदिवासी महिला, जो इतने बड़े पद तक पहुँचेंगीं। वह झारखंड की राज्यपाल रहा चुकी हैं और उड़ीसा विधान सभा में कई बार मंत्री पद भी संभाल चुकी हैं।छोटी बहन ने वापस जाकर आर्ट ऑफ़ लिविंग का पहला बेसिक कोर्स करवाने के लिए काम करना अभी से शुरू कर दिया है। पहले वह सहायक शिक्षिका के रूप में कोर्स करवाएगी, फिर कोड मिल जाने के बाद स्वतंत्र रूप से। दोपहर को उन्होंने यू ट्यूब पर एक आध्यात्मिक फ़िल्म देखी, जो अनोखे जीवों व प्राणियों से परिचय करवाती है। देह में आत्मा की उपस्थिति को सिद्ध करने के लिए बहुत अच्छी दलीलें देती है।शाम को वे सब एपिक रॉक गये, कुछ देर वहाँ बैठे जहाँ एक झरना बह रहा था। वर्षा के मौसम में झरनों में एकाएक पानी बढ़ जाता है।कल नन्हा सभी को मैसूर ले जाने वाला है।जहाँ छोटी बहन दो दिन अपने जेठ-जेठानी के पास रहकर वापस आएगी। 


आज बहुत दिनों के बाद अपने पुराने समय पर डायरी उठायी है। परसों की रात मैसूर के निकट स्थित एक हरे-भरे फ़ार्म हाउस ‘कैरिस ब्रुक’ में बिताकर, कल दोपहर का लंच मैसूर में करने के बाद वे शाम तक घर लौट आये।पापाजी से बात हुई, उसकी एक कविता पढ़कर कह रहे थे, दुनिया में सभी अपने-अपने काम में लगे हैं, भक्त व कवि भी इसी तरह अपने काम में लगे हैं। परमात्मा अनंत रूपों में स्वयं को प्रकट कर रहा है। मन संदेह करता है पर आत्मा सदा एक रस साक्षी मौजूद है, वह प्रेम, शांति व करुणा का सागर है, वही सत्य है।आज भी छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं, जिनकी मातृ भाषा हिन्दी नहीं है, उन्हें कितनी परेशानी होती है बोलने में, जैसे उसे कन्नड़ बोलने में होती है। 


आज का दिन कुछ अलग बीता, सुबह सब सामान्य था, टहलने गई तो पैरों में भारीपन लगा, शरीर में स्फूर्ति नहीं थी। योगासन भी पूरे नहीं हो पाये। नाश्ते के बाद टाइप करने बैठी तो शरीर अलसा रहा था। भोजन बनाया तो किसी छोटी सी बात पर मन झुंझला गया, कटु तो नहीं एक-दो शब्द तेज आवाज़ में निकले, जैसे कोई भीतर से स्वयं ही निकाल रहा हो। दिन भर कुछ नहीं खाया, रात्रि के समय कुछ भूख का अहसास हुआ। कर्मों के फल के रूप में भी कर्म होते हैं, यह आज जैसे स्पष्ट हो रहा था।जून शांति से सब देख-सुन रहे थे, उन्होंने कुछ प्रतिवाद नहीं किया।


आज दोपहर बारह बजे वे केंगरी रेलवे स्टेशन जाकर छोटी बहन को ले आये।उसने साड़ियाँ, सूट व कुर्ते दिखाये, जो मैसूर से लायी है। शाम को उन्होंने मिलकर बड़ी स्क्रीन पर वे सारे फ़ोटोज  देखे, जो पिछले कई दिनों से खींच रहे थे।उसके बाद सोने से पहले साधना, भजन, भोजन और रात्रि भ्रमण।  


आज जुलाई का प्रथम दिन है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की नयी-नयी बनी शिक्षिका मोबाइल पर हैप्पीनेस कोर्स का मैनुअल पढ़ रही है। जून भी मोबाइल पर कुछ देख रहे हैं। शाम को वे नापा के पीछे वाली सड़क पर टहलने गये, जगह-जगह निर्माण कार्य शुरू हो गया है। पहले की सी शांति भी नहीं थी और न ही सफ़ाई! जून ढेर सारे फल लाए थे, ड्रैगन फ़्रूट, लंगड़ा आम और जामुन बहुत मीठे थे। पापा जी ने बताया, छोटा भाई बहरीन से लौट आया है। सुबह वे आश्रम गये थे। हर्बल टी लेने के प्रकरण में जून से उसकी बहस हो गयी, पर जल्दी ही स्मरण आ गया, आश्चर्य हुआ कि अभी भी आग्रह शेष है भीतर ! मन की हज़ार परते हैं, जिन्हें शायद भगवान भी नहीं जानते ! 


आज सुबह टहलने गये तो हवा ठंडी थी और आकाश पर चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा था।जुलाई का महीना बैंगलोर का सबसे ठंडा महीना कहा जाता है। इसी महीने की तेरह तारीख़ को गुरु पूर्णिमा है।गुरुजी ‘स्पन्द कारिका’ पर बोलने वाले हैं। सोसाइटी में गणेशोत्सव का उद्घाटन समारोह है। दो माह तक ये कार्यक्रम चलेंगे। छोटी बहन को कल वापस जाना है।सुबह उसने साइकिल चलाने का अभ्यास किया।वर्षों पूर्व सेना में काम करते समय उसने साइकिल चलायी थी। पिछले दो हफ़्ते उन्होंने साथ बिताये। अच्छा लगा। शाम को वे नन्हे के यहाँ गये। 


आज से नूना स्वामी रामानन्द जी द्वारा पर दिया गया प्रवचन सुनना शुरू किया है। कुछ-कुछ समझ में आ रहा है।गुरु पूर्णिमा से पहले कुछ भूमिका तो तैयार हो जानी चाहिये मन में।यह नौवीं शताब्दी के कश्मीर शैव दर्शन का एक ग्रंथ है,जो वासुगुप्त द्वारा रचित शिव सूत्रों पर आधारित है । स्पंद का अर्थ है भगवान शिव की शक्ति के दिव्य कंपन, जिससे इस सृष्टि का उदय और विलय होता है। 


इस महीने चार रिश्तेदारों के जन्मदिन पड़ते हैं, वह सभी के लिए कविता लिखेगी। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य भी आया। पापाजी आज गर्मी या उम्र के कारण थोड़ा सा परेशान थे, जो स्वाभाविक है। मधुमालती में पहली बार फूल लगे देखे। सहजन का पेड़ तेज हवा में गिर गया था, नापा का माली आकर उसे सहारा देकर सीधा कर गया है, पता नहीं बचेगा यह नहीं।जड़ें मज़बूत होंगी तो शायद बच जाये। सुबह छोटी बहन का फ़ोन आया, वह घर पहुँच गई है।वहाँ उसे गर्मी का अहसास हो रहा है, एक महीना वह बैंगलुरु के सुहाने मौसम में रहकर जो गई है। 


कल नन्हे ने बूस्टर वैक्सीन लगवा ली। थोड़ा बहुत साइड इफ़ेक्ट भी हुआ। आज भी ‘स्पन्द  कारिका’ सुना, मन में जैसी भावना होती है, परिणाम भी वैसा ही आता है। आत्मा तो सागर की तरह है, वे अपने मन को चम्मच जितना रखेंगे तो उतना ही समायेगा। यदि विशाल बनाएँगे तो उतना अधिक मिलेगा। यदि क्षीर सागर के साथ एक रूप हो जाएँगे तो वही बन जाएँगे। मानव अपने अनंत स्वरूप को भुलाकर स्वयं को उपाधि से जोड़कर व्यर्थ ही सुखी-दुखी होते रहते हैं। आनंद उनका स्वभाव है  और सत्य उनका स्वरूप ! 


आज भी कल की तरह दिन भर वर्षा होती रही। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य पूरा हो गया। गुरु पूर्णिमा पर लिए भी एक लेख का अनुवाद करना है। लेखन कार्य में कुछ कमी आई है, पर जीवन जो रंग दिखाए, स्वीकार है। जन्मदिन की दो कविताएँ टाइप कीं।आज पतंजलि योग सूत्र पढ़ते समय कितनी सरलता से स्पष्ट हुआ कि ‘योग’ चित्त वृत्ति का निरोध कैसे है ? और जब ऐसा होता है तब द्रष्टा अपने स्वरूप में कैसे ठहर जाता है। यदि ऐसा नहीं होता अर्थात वृत्ति बनी रहती है तो द्रष्टा उसी वृत्ति का आकार ग्रहण कर लेता है।जैसे ब्रह्मा कुमारी कहती है आत्मा जब सोचती है तब मन बन जाती है। अब मन्त्र जाप का महत्व भी ज्ञात हो रहा है। मन जब एक मन्त्र का आकार ले लेता है, तब दो जाप के मध्य में द्रष्टा का अनुभव होता है। इसीलिए ॐ को परमात्मा का नाम कहा गया है। सारे शब्द ॐ में समा जाते हैं। ॐ के बाद जो मौन है, वही आत्मा का स्वरूप है। उसमें टिक जाना ही योग है। भीतर जितने भी विचार चलते हैं, वे आत्मा से ही उपजे हैं, पर उससे दूर ले जाते हैं। जैसे लहर सागर से ही उपजी है, पर उससे ऊपर उठती है तो दूर चली जाती है। 


आज जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की नारा शहर में चुनावी भाषण देते समय मृत्यु हो गयी, उन पर एक व्यक्ति ने गोली चलायी थी। चीन में इस बात की ख़ुशी मनायी गई। गुरुजी ने भी ट्वीट किया, वह उनसे जुड़े हुए थे।  


Friday, April 10, 2026

टैको और बुरीटो

टैको और बुरीटो


आज दोपहर बाद जून उसे रिलाइंस ट्रेंड्स ले गये। पहली बार पाँच कुर्ते एक साथ ख़रीदे। पापाजी के लिए एक स्वेटर भी लिया। दिन भर वर्षा होती रही। सोलर पैनल में बिजली का न्यूनतम उत्पादन हुआ, मात्र पाँच यूनिट, धूप वाले दिन बीस यूनिट तक हो जाता है। तीन दिन बाद उन्हें यात्रा पर निकलना है। पापाजी उनके आने की राह देख रहे हैं। जून ने छोटी बहन के नये फ़ैमिली ट्री के लिए फ़ोटो प्रिंट कर लिए हैं।


आज शाम जून कगली पूरा थाने में सर्कल इंस्पेक्टर से मिले, साथ ही बेसकॉम के एक अधिकारी से भी। वे लोग कल सोसाइटी में आयेंगे। असोसिएशन के काम के सिलसिले में उन्हें नये-नये लोगों से जान-पहचान के साथ, नये अनुभव भी हो रहे हैं। 


आज वे दोनों एक नये परिचित परिवार से मिलने गये। संयोग वश उनका जन्मदिन था, केक, बोंडा व मिठाई से स्वागत किया। वापसी में एक रिटर्न गिफ्ट भी। सुबह घर पर मीटिंग थी, परसों जून को सोसाइटी के बिल्डर के दफ़्तर भी जाना है। विशेष सभा की सूचना दे दी गई है। 


आज बहुत दिनों बाद नूना ने डायरी उठाई है। यात्रा से आने के बाद से सर्दी लगी हुई थी, गला चुभ रहा था। आज कोरोना टेस्ट कराया है, रिपोर्ट दो-तीन दिनों में आएगी। सुबह टहलने गई तो कुछ तस्वीरें खींचीं, एक फ़ोटो ‘प्रतिबिंब’ कई लोगों को अच्छा लगा।जून अपने काम में फिर पूरी तरह जुट गये हैं। 


सुबह पाँच बजे नींद खुली। घर से आने के बाद ‘साधना’ पूरी तरह से आरम्भ नहीं हुई है। रिपोर्ट आनी बाक़ी है, नेगेटिव ही होगी। उसे याद है, वहाँ खुले में प्राणायाम, ध्यान आदि करती थी, तभी सर्दी लगी होगी।पापाजी ने उससे लेखन के बारे में पूछा।कविता लिखना जैसे छूट ही गया है, फिर किसी दिन अपने आप ही रस बरसेगा काव्य का। छोटे भाई की नातिन के लिए उसके पहले जन्मदिन पर एक कविता लिखी है। भतीजी व भांजी के छोटे पुत्र के लिए भी।


आज भी रिपोर्ट नहीं आयी। सोनू की रिपोर्ट निगेटिव आयी है। पापा जी से बात हुई, कह रहे थे, बहुत सी बातें भूल जाते हैं, अब अकेले रहने में थोड़ी दिक़्क़त होने लगी है। परमात्मा उनकी सहायता करेंगे। नन्हा व सोनू आये थे, चायनीज सब्ज़ी व चावल बनाये दोनों ने, शाम को कॉफ़ी। दोपहर को सबने जुरासिक वर्ल्ड देखी, बहुत रोमांचक फ़िल्म है। 


आज सुबह पक्षी विहार से शुरू हुई और शाम विलेज ड्राइव पर समाप्त हुई। दोपहर को पहली बार दम बिरयानी बनायी। शाम को सूर्यास्त के चित्र उतारे। बाइबिल में आये विरोधाभासों पर एक चर्चा सुनी।चर्चाकार ने अलग-अलग पुस्तकों में सुसमाचारों के विवरण और वंशावलियों में आये अंतर का ज़िक्र किया। बाइबिल में उत्पत्ति के दो वृत्तांत हैं और ईसामसीह की मृत्यु के विवरण भी अलग-अलग हैं। शायद इसलिए कि इसे कई लोगों ने लिखा था और बाद में संकलित कर दिया गया। लेकिन इसके मूल संदेश में इन विरोधी बातों के कारण कोई अंतर नहीं आता। 


शाम को पापाजी का फ़ोन आया, उन्होंने नूना की कविताएँ पढ़ीं, लेख भी। कह रहे थे, संभवत: उसके पिछले जन्म के संस्कार जागृत हुए हैं। उसने उन्हें बचपन में घर पर मिले संस्कारों की बात कही। उन्हीं से उसे प्रेरणा मिली है कि अपना समय व ऊर्जा परमात्मा को समर्पित रचनाओं को लिखने में लगानी हैं। 


आज वे सोसाइटी में रहने वाली एक परिचिता की बिटिया के विवाह समारोह में होटल ललित अशोक गये।वापसी में यहाँ की प्रसिद्ध कृत्रिम झील सैंकी टैंक देखने के लिए रुके, जो वहाँ से नज़दीक थी, किंतु उसका प्रवेश द्वार बंद था। यह टैंक बहुत पुराना है और सैंतीस एकड़ भूमि में फैला है, इसकी अधिकतम चौड़ाई आठ सौ मीटर है। जून किसी काम के सिलसिले में आज नापा के एक अन्य निवासी के यहाँ गये, उनकी पत्नी हिन्दी धारावाहिक “घर घर की कहानी” को कन्नड़ में डब करने का काम कर रही हैं।


आज घर पर असोसिएशन की विशेष सभा हुई। कमेटी ने दो प्रस्ताव रखे थे, पर पास नहीं हो पाये। अगली मीटिंग मार्च में होगी। दोपहर को नन्हे ने मेक्सिकन खाना बनाया था, “टैको और बुरीटो” बहुत स्वादिष्ट लगा। लगभग एक महीने बाद शाम को वे आश्रम गये। वहाँ जाते ही एक अनोखी ऊर्जा का अहसास होता है। गुरुजी शाम को एक बार नित्य दर्शन देते हैं, पर तब तक वह जा चुके थे, ऐसा चौकीदार ने बताया। वे सूचना केंद्र भी गये, मुख्य द्वार पर जो होर्डिंग लगी है, उसका प्रिंट पुराना हो गया है। उसे बदलवाने के लिए जून ने बात की। अगले महीने दो दिन तक सुबह एक घंटे के लिए गुरुजी का भगवद् गीता का कार्यक्रम है, जून ने कहा है, वह उसे छोड़ आयेंगे।बहुत दिनों के बाद आश्रम में गुरुजी को सुनने का अवसर मिलेगा।  


आज दिन भर सुबह देर से उठने का असर बना रहा। रात्रि की नींद से जो शक्ति शरीर व मन एकत्र करता है, यदि सुबह, समय से न उठकर तंद्रा में व्यतीत हो, तो सारी ऊर्जा व्यर्थ ही चली जाती है।भगवद् गीता के लिए रजिस्ट्रेशन हो गया, परसों पहचान पत्र लेना है।


आज कुन्नूर में भारतीय वायुसेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल विपिन रावत तथा उनकी पत्नी का देहांत हो गया। उनके साथ बारह जवान और थे। वे कोयंबटूर के सुलूर एयरबेस से वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज जा रहे थे।घने बादलों और धुंध के कारण शायद पायलट सामने ठीक से देख नहीं पाया, जिससे हेलीकॉप्टर पहाड़ों या पेड़ों से टकरा गया।


आज सुबह वे दोनों आश्रम गये, फिर शेखर नेत्रालय। लगभग दो वर्ष बाद आँखों की जाँच करवायी।एक नया चश्मा बनने दिया है।वहाँ से नन्हे के घर चले गये। सोनू ने बहुत अच्छी तरह से स्वागत किया। उसने अपने ऑफिस के मज़ेदार किस्से भी सुनाये। नूना ने छोटे भांजे के जन्मदिन पर कविता लिखी।


आज दो वर्षों के बाद पहली बार आश्रम में किसी कोर्स में गुरुजी को सुना।कल भी जाना है।भगवद् गीता के आठवें अध्याय की व्याख्या अति सरल लग रही थी। इसमें अर्जुन श्रीकृष्ण से ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के बारे में प्रश्न पूछते हैं।श्रीकृष्ण ने कहा, परम अविनाशी तत्व ही 'ब्रह्म' है और प्रत्येक शरीर में जीवात्मा का रूप 'अध्यात्म' है।जीवों के उन भावों का मिट जाना कर्म कहलाता है, जो उनके भीतर अच्छे या बुरे संकल्प पैदा करते हैं।पाँच भूत अधिभूत हैं और परमात्मा का विराट स्वरूप अधिदैव है, जिसमें सूर्य, चन्द्र, वरुण आदि सभी देवता स्थित हैं। कृष्ण स्वयं सभी देहधारियों में अंतर्यामी रूप से रहते हैं। आज नन्हा व सोनू कर्नाटक के हसन जिले में पश्चिमी घाट पर स्थित एक पहाड़ी स्थान सकलेशपुर गये हैं। यहाँ अति प्राचीन सकलेश्वर शिव मंदिर है। टीपू सुल्तान का एक क़िला भी है।  

Tuesday, November 18, 2025

जिंदल नेचर क्योर


जिंदल नेचर क्योर


आज सुबह भी वर्षा हो रही थी। छत पर अंधेरा था, बल्ब जलाकर प्राणायाम किया। हवा शीतल थी और ब्रह्म मुहूर्त का प्रभाव भी मन को शांति प्रदान कर रहा था। उजाला होने पर वे बाहर निकले। मन अब शून्य में टिकने लगा है। उसे शांति ही रूचती है। ज़्यादा बोलना भी अच्छा नहीं लगता। आत्मा, गुरु और परमात्मा तीनों एक चैतन्य सत्ता हैं, यह बात अनुभव में आती है । एक कविता भी प्रकाशित की शब्दों की सीमा पर, मौन जितना प्रभावशाली होता है, शब्द उतने नहीं हैं। कल पड़ोस वाले घर के दुमंज़िले की छत पड़ेगी। पड़ोसन अपने माता-पिता के साथ आकर उनकी छत से इसे देखना चाहती है। आज शाम से लगातार वर्षा हो रही है। नन्हा और सोनू माँ-पापा को लाने एयरपोर्ट गये हैं। पड़ोसी परिवार आया था, पूरण पोली, पेड़े, और मैसूर पाक भी लाए थे वे। पापा जी से बात की, आज उन्होंने जुग सुरैया का एक लेख टाइम्स ऑफ़ इंडिया में पढ़ा, कविता क्या है ? उसी के बारे में बताया।मौन पर लिखी उसकी कविता पर कमेंट्स आये हैं। जिसने भीतर के मौन को महसूस नहीं किया है, उसके लिए इसे पाना असंभव ही जान पड़ेगा। नन्हे ने एक नया बोर्ड गेम भेजा है, पिन-बॉल नाम है उसका। बचपन में वे खेला करते थे। आज सुबह तीन दिनों के बाद वर्षा नहीं हो रही थी। पूरे चालीस मिनट वह तेज गति से चली और दस मिनट दौड़ लगायी।जून को दौड़ना पसंद नहीं है, पर वजन कम करने के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा। वापस आकर योग-साधना।आज नाश्ता नहीं बनाना था। कल समधिन जी के लाए दही-बड़े और हलवा ही पर्याप्त था। दोपहर को नैनी नहीं आयी, शायद उसने भी वैक्सीन लगवायी है। पापा जी से बात हुई, भक्ति और ज्ञान की बात। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है।उन्हें समधी जी द्वारा भेजी चाय के बारे में बताया, तो वह खुश हुए। छोटा भाई ड्यूटी पर वापस गुजरात चला गया, अब डेढ़ महीने बाद आयेगा। वह बड़ी ननद के घर भी जाएगा। शाम को वे पहली बार सोसाइटी में स्थित एक आवास में गये, जिनके अमरूद के बगीचे से ढेर सारे अमरूद ख़रीदे और पपीते भी।हरसिंगार पर एक नयी कविता लिखी, वर्षों पहले एक लिखी थी। जून ने नन्हे के लिए पैडिक्योर मशीन भेजी है। कल उसका ‘फूटरेस्ट’ भी बनकर आ गया।जून ने आज गर्म पानी का टैंक साफ़ करवाया। आज गुरु पूर्णिमा है। सुबह गुरुजी का एओएल शिक्षकों के साथ वार्तालाप सुना। बहुत अच्छे सवाल-जवाब थे।शाम को भी एक कार्यक्रम था। पहले गुरुजी ने गुरुपूर्णिमा का महत्व बताया। दक्षिणामूर्ति का वर्णन किया। संगीत व नृत्य के एक कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई, जिसमें ३५० बच्चे तथा बड़े शामिल थे। नृत्य भिन्न-भिन्न स्थानों पर किया गया था, फिर उसे एक जगह प्रस्तुत किया गया। अंत में सुरीले भजन गाये गये। दूर से आश्रम स्थित विशालाक्षी मंडप का शिखर देखा, जब वे रात्रि भ्रमण के लिए गये। शाम को मृणाल ज्योति की एक शिक्षिका से शिक्षक दिवस पर उन्हें उपहार भेजने के सिलसिले में बात हुई। ‘इस दिन तृप्ति की एक अज्ञात राशि का अनुभव होगा’। आज सुबह उठते ही सबसे पहले यह विचार नूना से किसी ने कहा। रात को एक स्वप्न देखा, किसी उपकरण को बनाने की प्रक्रिया में जून सहायता करते हैं, पर उनका शुक्रिया अदा करने की बजाय वह कहती है कि यह काम वह पहले भी कर चुकी है। यह सत्य भी था, पर जब वह इसका अनुमोदन नहीं करते तो वह ज़ोर देकर पुन: कहती है। स्वयं को महत्व देने के इस संस्कार से छुटकारा पाना होगा। यही तो अहंकार है। उनके कर्म स्वयं उनकी कहानी कहें, तब तो ठीक है पर अपने शब्दों में अपना महत्व रखना ही अहंकार है। कर्ताभाव से मुक्त हुए बिना सहज कर्म नहीं होते, ऐसे कर्म जो अस्तित्त्व उनसे करवाना चाहता है। आदमी स्वयं जो भी करता है, वह सीमित होता है। अज्ञात असीम है। उसे लगा, उसके संस्कार अवश्य ही मिट रहे हैं। परमात्मा और गुरु उसके साथ हैं, यह कहना भी ठीक नहीं है, वही करेंगे अब जो भी इस देह और मन से होना है। आज का इतवार कुछ अलग था। सुबह टहल कर आते समय रॉक गार्डन में ही चट्टान पर बैठकर प्राणायाम किया। खुली हवा, शांत और शीतल वातावरण में केवल मोर व पंछियों की आवाज़ें आ रही थीं। वापस आकर जून साइकिल चलाने गये और उसने माली से काम करवाया। नाश्ते के बाद जून ने कहा, असम से एक परिचित डाक्टर आये हैं, दोपहर को भोजन पर बुलाया है। वह जिंदल नेचर केयर में स्वास्थ्य कारणों से तीसरी बार आये हैं। लंच के बाद उन्होंने बताया, यहाँ आकर उनका वजन घटता है, पर कुछ समय बाद भोजन व जीवन शैली के कारण फिर बढ़ जाता है। मज़ाक़ में यह भी कहा, यहाँ आकर वे इस बात का पैसा देते हैं कि उन्हें कम खिलाया जाये। वह असमिया पड़ोसी से मिलने भी गये। शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये।


Tuesday, March 26, 2024

गुलाबी आकाश

गुलाबी आकाश 

आज ब्लॉग पर एक भी पोस्ट प्रकाशित नहीं की। पिछले कई वर्षों से ब्लॉगिंग जैसे जीवन का अंग बन गई है। कोई पढ़ता है या नहीं, इसकी परवाह किए बिना अपने दिल की बात कहने का यह एक मंच जो विज्ञान ने साधारण से साधारण व्यक्ति को प्रदान किया है, अतुलनीय है। इसके माध्यम से वह कितने ही लेखक-लेखिकाओं की रचनाओं का आस्वादन घर बैठे कर पाती है। डायरी में बंद शब्दों को एक नया आकाश मिल गया है जैसे। कुछ लोग पढ़ते भी हैं और टिप्पणी भी करते हैं, ऊर्जा का एक आदान-प्रदान जो इंटरनेट पर आजकल होता है, उसकी तुलना इतिहास की किसी भी घटना से नहीं की जा सकती। आज सुबह बड़े भाई ने नेट पर भाभीजी की पीली साड़ी वाली फ़ोटो ढूँढ कर देने को  कहा। कुछ समय उसमें गया। फिर छोटी बहन ने अध्यात्म से जुड़ा एक वीडियो भेजा और देखने का आग्रह किया, देखा, कुछ समझ में आया, कुछ नहीं। एक पहले की लिखी कविता टाइप की। परसों बहनोई जी का जन्मदिन है, उनके लिए कविता लिखनी है। आज सुबह टहलते समय पाँच तत्वों और शरीर के चक्रों के आपसी संबंध पर कितने विचार आ रहे थे। लिखने का समय नहीं निकाला, सो अब कुछ भी स्मरण नहीं है। परमात्मा स्वयं ही भीतर से पढ़ाते हैं, संत ऐसा कहते हैं, कितना सही है यह !


एक दिन और बीत गया। सुबह नींद समय पर खुली, कल रात नींद भी ठीक आयी। सुबह भ्रमण ध्यान किया। कितने सुंदर विचार आते हैं ब्रह्म मुहूर्त में। आकाश भी गुलाबी था। तस्वीरें उतारीं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के ऐप के सहयोग से योग साधना की।नन्हे के भेजे तवे पर बने आलू पराँठों का नाश्ता ! एओएल के प्रकाशन विभाग के कोऑर्डिनेटर का फ़ोन आया, एक लेख में कुछ और जोड़ा गया है, अनुवाद पुन: लिखना है। शाम को पापा जी से बात हुई। पोती घर आयी हुई है नन्ही बिटिया के साथ, उसके रोने की आवाज़ उन्हें कभी-कभी आती है। पुत्र घर के काम में हाथ बँटाता है, जब बहू नातिन की देखभाल में लगी होती है, जिसकी पहली लोहड़ी मनाने की तैयारियाँ चल रही हैं। 


आज लोहड़ी है। वे शकरकंदी व कच्ची मूँगफली लाये निकट के बाज़ार से, जहाँ सड़क किनारे मकर संक्रांति पर बिकने वाले सामानों की ढेर सारी दुकानें लगी हुई थीं। सुबह नापा में भी यह पर्व मनाया गया। यहाँ इस दिन तिल और गुड़ से बनी मीठी वस्तुएँ खाने और खिलाने का रिवाज है। पूरे कर्नाटक में संक्रांति का उत्सव बड़े उत्साह से मनाते हैं। कल खिचड़ी का पर्व है। छिलके वाली उड़द दाल जून ने बिग बास्केट से मंगायी है।उनका  पतंग उड़ाने का ख़्वाब अभी पूरा नहीं हुआ है। पतंग नन्हे ने मंगाकर रखी है पर उसकी डोर नहीं मिली निकट के बाज़ार में। अलबत्ता मंदिर की भव्य सजावट देखने का अवसर मिल गया । आज सुबह भ्रमण के समय ‘स्पंद कारिका’ पर व्याख्या सुनी।जिसे आत्म-अनुभव न हुआ हो उसे अध्यात्म में रुचि कैसे सकती है ? वह इसे जाग्रत करे भी तो कैसे ? इसके लिए तो कृपा ही एकमात्र कारण कहा जा सकता है। परमात्मा की कृपा से ही उसके प्रति आस्था का जन्म होता है। 


आर्ट ऑफ़ लिविंग की तरफ़ से कुछ दिनों के लिए ऑन लाइन स्टे फिट कार्यक्रम चलाया जा रहा है। सुबह-सुबह उनके साथ व्यायाम और योगासन करने से शरीर हल्का लग रहा है। अब दो दिन ही शेष हैं। एक सखी ने दुलियाजान में बीहू उत्सव की तस्वीरें फ़ेसबुक पर पोस्ट की हैं। कितनी यादें मन में कौंध गयीं। वहाँ क्लब में बीहू बहुत उत्साह से मनाया जाता है। साज-सज्जा नृत्य-संगीत और पारंपरिक पकवान, सभी की तैयारी पहले से शुरू हो जाती है। पड़ोस वाले घर में दीवार उठनी शुरू हो गई है। आज पड़ोसिन अपनी कक्षा एक में पढ़ने वाली बिटिया को लेकर आयी थी, मकर संक्रांति का प्रसाद देने। तिल के लड्डू, छोटे वाले दो केले, पान, सुपारी, सिंदूर का छोटा सा पैकेट और दस रुपये का नोट। ऐसे ही एक तमिल सखी असम में दिया करती थी। नूतन पांडेय की लिखी हिन्दी किताब में असम की पृष्ठभूमि पर लिखी एक कहानी पढ़ी, यह पुस्तक असम से आते समय मृणाल ज्योति की प्रिंसिपल ने दी थी।टीवी पर वेदान्त की पाँच बोध कथाएँ सुनीं, पहली गधे की, दूसरी दसवाँ कौन, तीसरी शेर के बच्चे की, चौथी राजकुमार की और पाँचवीं राजा जनक की। सभी कहानियाँ बताती हैं कि सत्य क्या है, और लोगों द्वारा उसे क्या समझा जाता है।


Tuesday, January 2, 2024

जूलियस सीज़र का कैलेंडर

रात्रि के पौने नौ बजे हैं। वैसे तो चारों ओर शांति है, पर कहीं दूर से किसी के घर कोई मशीन चलने की आवाज़ आ रही है। यहाँ दाँये-बायें, आगे-पीछे कोई न कोई घर बनता ही रहता है, फिर उसमें इंटीरियर का काम शुरू हो जाता है। यह तो अच्छा है कि शाम को छह बजे के बाद शोर नहीं कर सकते, शायद किसी ने विशेष अनुमति ली होगी। मौसम आज ज़्यादा ठंडा नहीं है। बहुत दिनों बाद पंखा चलाया है। रात्रि भ्रमण के समय देखा, आकाश पर चाँद खिला था, कल पूर्णिमा है, आकाश निर्मल था और हवा सुखदायी। उधर उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, और हो भी क्यों न, दिसंबर का अंतिम सप्ताह है।आज हज़रत यूसुफ़ के बारे में एक वीडियो देखा, मिस्र की पुरानी सभ्यता के बारे में रोचक जानकारी मिलती है। उन्हें कितनी तकलीफ़ें सहनी पड़ीं, पर ईश्वर पर उनका भरोसा अटूट था। परमात्मा सभी के भीतर चेतना और संकल्प शक्ति के रूप में मौजूद है। इच्छा, क्रिया व ज्ञान की शक्तियाँ जो मानव के भीतर हैं, परमात्मा की देन हैं। मन जो भी सोचता है, बुद्धि उसे साकार करके दिखाती है। 


नन्हे ने कहा है नये वर्ष के दिन वे सभी पिकनिक के लिए पिरामिड वैली जाएँगे। आज किसानों की सरकार से हुई बातचीत का क्या नतीजा निकाला, पता नहीं है। ईश्वर करे, नया साल शुरू होने से पहले ही किसान अपना आंदोलन वापस ले लें। आज जून एक पेंटर को लाये थे, बेंत व लकड़ी के फ़र्नीचर पर उसने टचवुड लगाया। लगभग हर साल दिसम्बर में वह ऐसा करवाते हैं, इसीलिए वर्षों बाद भी फ़र्नीचर चमकता रहता है। आज सोसाइटी की तरफ़ से पानी डालने वाला आदमी आया तो धनिये की नन्ही पौध पर तेज बौछार कर उसे छितरा दिया। उसने ग़ुस्से का अभिनय किया ताकि वह आगे ऐसा न करे। नाटक ही करना है तो पूरे जज्बे के साथ करना चाहिए, वरना ज़िंदगी एक ख़्वाब से ज़्यादा तो नहीं ! 


वर्ष का अंतिम दिन ! बाहर बच्चों के खेलने की आवाज़ें आ रही हैं। आज संभवतः देर तक जागकर वे नव वर्ष का स्वागत करेंगे। उन दोनों का तो वही प्रतिदिन का सा कार्यक्रम है। यह समय कुछ लिखने-पढ़ने का है। वर्षों पहले टीवी पर ढेर सारे कार्यक्रम देखते थे, अब इच्छा नहीं होती। उसे याद आया, हज़रत यूसुफ़ की कहानी में देखा था, अब्राहम को जब अपने पुत्र इस्माइल को बलिदान करने को कहा गया तो वह राज़ी हो गये। उन्हें अपना पुत्र वापस मिल गया जब वे उसे छोड़ने को राज़ी थे। जब कोई जगत से चिपका रहता है तो जगत उसे नहीं मिलता। जब त्याग देता है तो वह पीछे-पीछे आता है। ‘तेन त्यक्तेन भुंजीथा’ का यही तत्पर्य है। वे श्वास छोड़ते हैं तो अगली श्वास भीतर भर जाती है। जब रिश्तों पर पकड़ ढीली हो तो वे अपने आप ही क़रीब होने का अहसास करा देते हैं। नन्हे ने बताया, सोनू को दो दिन से सर्दी लगी हुई थी। उसकी माँ को भी आँख में कुछ समस्या का पता चला है, डाक्टर ने आँख का व्यायाम करने को कहा है। वे लोग कल सुबह आयेंगे और सब मिलकर घूमने जाएँगे। आज जून के पुराने अधिकारी का फ़ोन आया, उन्हें कोरोना हो गया था, उनके पुत्र को भी।उन्होंने अपने दो अन्य मित्रों से भी बात की, नये साल में कुछ दिनों तक यह आदान-प्रदान चलता रहेगा। उसने नेट पर पढ़ा, चार हज़ार साल पहले भी नया साल मनाने की प्रथा बेबीलोन में थी। पर उस समय यह वसंत के आगमन पर २१ मार्च को मनाया जाता था। जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व पैंतालीसवें वर्ष में पहली बार प्रथम जनवरी को नया वर्ष मनाने की प्रथा की शुरुआत की। 


Wednesday, June 2, 2021

पके केले के पकोड़े


 आज वे खादी की दुकान में गये, मल्लेश्वर स्थित यह दुकान बहुत बड़ी थी और वस्त्रों के अलावा कई कलात्मक वस्तुएं भी वहाँ थीं। नन्हा और सोनू सवा दस बजे ही आ गये थे जब वह और जून पड़ोसी के यहाँ बीहू का विशेष जलपान करने गये थे। आर्ट ऑफ़ लिविंग के लिए उनका रिज्यूमे ठीक करने में सोनू ने सहायता की , फिर उसे भेज भी दिया। गुरुजी के लिए कुछ सेवा कार्य करने का उनका स्वप्न संभवतः निकट भविष्य में पूर्ण होगा। गुरु जी का लगाया प्रेम का बीज अब फूल बनने की ओर कदम रख रहा है। उन्हें इस कार्य को करके ख़ुशी होगी, परमात्मा की इस दुनिया में परमात्मा के कुछ काम आ सकें वह भी तो उसकी इच्छा से ही होना संभव है। कल दीदी का फ़ोन आया, वह विटामिन डी तथा कैल्शियम लेने के कारण अब काफ़ी ठीक हैं। जून को सर्दी लग गयी है, पिछले दो-तीन दिनों से ठंड बढ़ गयी है। उन्हें गले में हल्का दर्द है। कल हो सका तो वे धूप निकलने के बाद ही टहलने जाएँगे। नन्हे ने एक बिजली से चलने वाला लाइटर भिजवाया है, जिससे मोमबत्ती या अगरबत्ती जला सकते हैं।  

आज सुबह पौने चार बजे ही उसकी नींद खुल गयी, चारो तरफ शांति थी। जून साढ़े पाँच बजे उठे, जब वे टहलने गये तो दिन अभी निकला नहीं था, मौसम ठंडा था।नाश्ते के बाद कुछ देर धूप में भी निकले। जून को बाल कटवाने थे सो पैदल ही सोसाइटी के मुख्य द्वार तक बढ़ते गये। सड़क के दोनों ओर बोगेनवेलिया के रंग-बिरंगे सुंदर फूल खिले थे, कई तस्वीरें उतारीं। असम में जून के ड्राइवर का काम कर चुके एक जन का फ़ोन आया, उसने बताया अगले हफ़्ते सीएए के ख़िलाफ़ कोर्ट में सुनवायी है, अब तक जो शांति बनी हुई है, वह उसके बाद बनी रहेगी, कहा नहीं जा सकता। कई दिनों बाद आज घर में सिविल का काम नहीं हुआ, ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखी। शाम को वे निकट स्थित गाँव के मंदिर में गये। जो दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अनुसार बना हुआ हनुमान जी का सुंदर मंदिर है। वापसी में यहाँ के एकमात्र छोटे से नए खुले रेस्तराँ में एक कप कॉफी के लिए रुके, पके हुए केले के पकोड़े पहली बार चखे।बुद्ध की पुस्तक समाप्त होने वाली है। बुद्ध अमर हैं, युगों बीत जाएँगे और लोग उनसे ज्ञान प्राप्त रहेंगे। बुद्धम शरणम गच्छामि ! संघम शरणम गच्छामि ! धम्मम शरणम गच्छामि !


आज वे लालबाग गये थे, जहां गणतंत्र दिवस पुष्प प्रदर्शनी चल रही थी।  कल से आरम्भ हुई है और छब्बीस जनवरी तक रहेगी। ग्लास हाउस में स्वामी विवेकानंद की स्मृति में सुंदर पुष्प सज्जा की गयी है। बड़े भाई, भतीजी, नन्हा, सोनू, उनके एक मित्र दम्पति तथा वे दोनों, सभी ने फूलों का आनंद लिया। उन्होंने फूलों के गमले लिए, पिटूनिया, पोइनसेटिया और गुलदाउदी के फूलों के गमले । लाल बाग का इतिहास बहुत पुराना है, हैदर अली ने इसकी नींव रखी थी। कई एकड़ में फैले इस बाग में दूर तक फैले लॉन हैं, हज़ारों क़िस्म के वृक्ष हैं, सुंदर बगीचे हैं, बंगलूरू की शान यह वनस्पति उद्यान साल भर किसी न किस प्रकार के फूलों से भरा रहता है। उससे पूर्व जून अपना सूट सिलने देने गये। बड़ी ननद का फ़ोन आया था, छोटी बिटिया का विवाह तय हो गया है। दो माह के बाद होगा।  


आज सुबह वे आश्रम गये, ‘अतिरुद्र होम’ चल रहा था। हजारों की भीड़ थी। शाम को नन्हा आया था, उसे बुखार हो गया है। लालबाग में उस दिन फूलों को ताजा रखने के लिए अथवा किसी कारण से पानी की फुहार छोड़ी जा रही थी, शायद वह ज्यादा भीग गया। बाग में पुस्तकों की एक प्रदर्शनी भी लगी हुई थी, उसने पड़ोस में रहने वाले बच्चों के लिए बाल पुस्तकें ख़रीदीं थीं आज उन्हें दीं। आज शाम को योग कक्षा में आने वाली एक साधिका उनके घर आयी थीं, अब से वह नियमित यहाँ आकर उसके साथ ही शाम को एक घंटा योग साधना करेंगी। इस माह के अंतिम सप्ताह में गुरुजी भगवत गीता के अठारहवें अध्याय पर प्रवचन देंगे। जिसमें अर्जुन कृष्ण से पूछते हैं, सन्यास क्या है? और त्याग क्या है? सन्यास और त्याग दोनों का ही अर्थ कुछ छोड़ना है , पर उनमें अंतर क्या है और उनका मर्म क्या है । 


आज सुबह देर से उठे, ठंड कुछ ज्यादा थी, अब जैकेट पहननी पड़ती है सुबह के वक्त। ‘ओल्ड पाथ वाइट क्लाउड्ज़’ आज पूरी पढ़ ली, बुद्ध ने अपनी मृत्यु की घोषणा पहले ही कर दी थी । मशरूम की सब्ज़ी खाने के बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ा और वह उनका अंतिम भोजन था। जैसे उनका जीवन भव्य था वैसे ही उनकी मृत्यु भी ! साल के वृक्षों ने उन पर फूल बरसाए और कुशीनारा के जन-जन ने उनके लिए अश्रु बहाए। आज भी ब्लॉग पर लिखा, लिखने का क्रम कुछ आरम्भ हुआ है। 


आज वे पुनः आश्रम गये, वहाँ बहुत भीड़ थी , हजारों की भीड़ । कल से संयम कोर्स शुरू हुआ है, शायद उसी में भाग लेने पूरे भारत से साधक यहाँ आए हैं। सदा की तरह गुरुजी ने सरल ढंग से हर प्रश्न का उत्तर दिया। बुद्ध पुरुषों से ही इस धरा की शोभा है। जून आज दोपहर को नन्हे के लिए आयुर्वेदिक दवा देकर आए, सितोप्लादि नाम है दवा का, सर्दी जुकाम में काम करती है। औषधि यदि समय पर ले ली जाए तो रोग जड़ नहीं पकड़ पाता। ‘ऐन विद एन ई’ का अंतिम भाग भी देख लिया, अंत भला तो सब भला ! आज माँ-पापा का स्मरण हो रहा है, उनके कारण ही उसका इस जगत में अस्तित्व है अर्थात इस देह व मन का, जिसके माध्यम से वह व्यक्त हो रही है। उसकी असली पहचान तो अब मिली है, एक शांत, अनंत प्रेम, जो चेतन है, जो मन और बुद्धि  के माध्यम से व्यक्त हो सकता है। जो इस देह के माध्यम से सत्कर्म  कर सकता है। जो इस जगत में अच्छाई का संदेश दे सकता है। जो किसी का निर्णायक नहीं है। जो प्रेम बदले में कुछ नहीं चाहता क्योंकि अनंत में कुछ भी मिलाओ अनंत ही रहेगा। अनंत से कुछ भी निकलो अनंत ही रहेगा। ऐसा प्रेम नित नूतन है। 


Wednesday, February 17, 2021

छोटी दीवाली

 

कल का पूरा दिन घर को व्यवस्थित करने में ही निकल गया। मेहमानों का कमरा अभी भी  शेष है। आज आखिरी कार्टन भी खोल दिए। योग कक्ष में किताबें लगा दी हैं, कमरा अच्छा लग रहा है। अब शाम को यहाँ बैठकर स्वाध्याय व साधना दोनों किए जा सकते हैं। आज सुबह सिट आउट यानि शयनकक्ष के बाहर बड़ी बालकनी या बरामदे में आसन किए। चार-पाँच दिनों के बाद दीवाली है, इस नए घर में उनकी पहली दीवाली ! नन्हा कुछ लोगों को बुलाने वाला है। आजकल यहाँ शाम होते ही काले बादल छा जाते हैं और मूसलाधार वर्षा आरंभ हो जाती है। इस समय सिर में हल्का दर्द हो रहा है, नया शहर, नई दिनचर्या एडजस्ट होते-होते कुछ समय तो लगेगा। 


आज सुबह पाँच बजे से कुछ पहले ही उठे। एक नए इलाके की तरफ टहलने गए। पार्क नंबर छह व सात देखा। पूरे नापा में चौदह पार्क हैं, सभी सुंदर हैं। एक-एक करके वे सभी में जाएंगे और सुंदर तस्वीरें उतारेंगे। इस समय उसकी आँखें अश्रुओं से भरी हैं, पता नहीं कौन सी पीड़ा है, क्या दुख है, साथ ही एक मुस्कुराहट भी रह-रह कर आ रही है अधरों पर, कौन है जो यह क्रीड़ा कर रहा है ? सुबह टहलने गई तो दोनों पैर जैसे  अकड़े हुए थे, चलने में श्रम प्रतीत हो रहा था, गति भी कम हो गई थी। वापस आकर योगासन किए। नन्हा व सोनू उठ गए थे। हरसिंगार के फूल चुने। जून इडली का नाश्ता  ले आए। नौ बजे वे बच्चों को उनके घर छोड़ते हुए डेन्टिस्ट के पास गए। बाएं गाल में अंतिम दांत पर मसूढ़ा चढ़ गया था, उसने थोड़ी सी सर्जरी की, टांके लगाए। अगले हफ्ते फिर जाना है। दोपहर का भोजन सोनू ने अच्छी तरह से मेज पर लगाया था। आज सुबह असम से नैनी ने फोन किया, एक-एक करके घर के सभी सदस्यों ने बात की। उसके ससुर की तबीयत ठीक नहीं है।  दो दिन बाद दीवाली है, कल बिजली की लड़ी लगाने इलेक्ट्रिशियन आएगा। शाम को टहलते समय जून को पैरों की जकड़न के बारे में बताया तो उन्होंने कहा यह मन की उदासी के कारण है, और कोई बात  नहीं, कोई इंसान दूसरे की पीड़ा का अनुभव कैसे कर सकता है ? हर कोई स्वयं से ही पूरा भरा होता है ! परमात्मा सब जानता है, उससे कुछ भी छिपा नहीं है, कोई कर्म उदय हुआ है। 


आज दोपहर से ही बाहर बिजली की झालर आदि लगाने का काम चल रहा है। कल छोटी दीवाली है, सोनू की चचेरी बहन व भाई-भाभी आए हैं, वे लोग भी परसों आएंगे। नन्हे ने पार्टी की पूरी तैयारी कर ली है। भोजन बाहर से ही बनकर आएगा, पूरी व रोटी यहाँ बनेगी।सुबह भी पैरों में जकड़न महसूस हो रही थी। शायद हार्मोन्स की समस्या हो, जरूरत से ज्यादा भावुक होना और जल्दी थकान होना इसके लक्षण हैं। जून ने आज पैरों व हाथों में तेल लगाया, उनमें सेवा भाव बहुत है पर उसे जगाना पड़ता है, वरना उन्हें उसकी बात सुनने की भी फुरसत नहीं रहती कभी-कभी। 


वे धीरे-धीरे नए घर में रहने के अभ्यस्त हो रहे हैं। लगभग रोज शाम को भोजन के बाद सोसाइटी में स्थित छोटे से सुपर मार्केट जाकर एक-दो जरूरी समान ले आते हैं। एक महिला उसे चलाती हैं, हिंदी बोल लेती हैं। शाम को टहलने गए तो तेज वर्षा होने लगी, दस मिनट का ही रास्ता था पर घर आते-आते काफी भीग गए, आकर देखा, एक व्यक्ति उनके गैरेज में बारिश से बचने के लिए खड़े हैं। जून ने कुछ देर उनसे बात की, कह रहे थे तीन करोड़ में आपका घर बिक सकता है। आज सुबह सूर्योदय देखते हुए छत पर योगाभ्यास किया। अंग्रेजी अखबार के साथ हिंदी का एक अखबार राजस्थान पत्रिका भी लेना शुरू किया है, कुछ देर पढ़ा। दोपहर बाद डाइनिंग हॉल में बिजली की दो लड़ियाँ लगाईं। शाम को ग्यारह दीपक जलाए, कल्याण के पर्व अंक में दीपावली उत्सव के बारे में  विस्तृत जानकारी पढ़ी। इस बार पूजा का समान नहीं ला पाये हैं अभी तक। रंगोली के लिए रंग भी नहीं हैं। यहाँ वे बाजार से काफी दूर हैं। उत्तर भारत में जिस उत्साह से दीवाली मनाते हैं वैसा यहाँ नहीं है। आज सुबह वे पड़ोसियों को शाम के भोज के लिए निमंत्रित करने गए। उनके पुत्र सैकड़ों के पटाखे जलाता है ऐसा उन्होंने बताया। 


उस पुरानी डायरी के पन्ने पर उसने कहीं से एक सूक्ति लिखी थी, “स्वप्न से भागना नहीं, जागना है। स्वप्न में भागकर भी तो स्वप्न में ही रहेंगे; किन्तु स्वप्न से जागकर स्वप्न ही नहीं रह जाएगा। आज लगता है, जीवन भी तो एक स्वप्न ही है जो वे देखे ही जा रहे हैं, जाग कर पुन: सोने का अभिनय करते हुए। 


Tuesday, January 19, 2021

कभी अलविदा न कहना

 

आज की दोपहर कितनी अलग थी. बारह बजे के थोड़ी देर बाद ही सभी एक-एक करके आने लगे. पूरी डाइनिंग टेबल खाद्य पदार्थों से भर गयी. सुंदर साड़ी का उपहार दिया सबने मिलकर, अच्छी-अच्छी बातें कीं, परमात्मा की कृपा का अनुभव अब कइयों को होने लगा है. एक साधिका ने अपनी भावनाओं को कविता के माध्यम से व्यक्त किया. एक अन्य ने परमात्मा का स्मरण किया, तीसरी ने आशीष माँगा, परमात्मा के प्रति आत्मा का प्रेम ऐसा ही होता है, आत्मा पर जब परमात्मा के इश्क का रंग चढ़ता है तो वह भावविभोर हो जाती है. एक सखी ने कहा, उसका पुत्र ग्याहरवीं में आ गया है, आजकल पढ़ने में उसका मन नहीं लग रहा है. उसे कहा है, बेटे को लेकर आये एक बार. कुछ वर्ष पूर्व उससे योग सीखने आया करता था, शायद अपने दिल की बात कहे. आज इनमें से चार साधिकाओं के लिए लिखी कविताएं उन्हें भेज दीं. शेष सभी के लिए भी हो सका तो कुछ पंक्तियाँ लिखेगी. 


रात्रि के नौ बजने वाले हैं, आज सुबह से ही टीवी चैनलों पर हाऊडी मोदी के बारे में चर्चा चल रही थी. यह कार्यक्रम अब आरम्भ हो गया है. पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं. भारतीय संस्कृति का सुंदर  चित्रण अमेरिकन इंडियन कर रहे हैं. वे भी वर्षों पूर्व ह्यूस्टन गए थे, जहाँ यह कार्यक्रम हो रहा है. थोड़ी देर में मोदीजी  भाषण देंगे, बाद में ट्रम्प भी आएंगे. आज दोपहर सन्डे योग क्लास में बच्चों को सब सामान बाँट दिया, जो हर हफ्ते वे इस्तेमाल करते आ रहे थे. भविष्य में उन्हें घर पर ही योग करना है, यह बताया पर वह जानती है, कुछ ही दिनों में वे भूल जायेंगे. शाम को एक सखी अपनी बिटिया के साथ आयी, उसे कुछ किताबें दीं. एक अन्य सखी को तीन गमले. नन्हे से बात हुई, सोनू की मौसी व उनकी बेटी उनके  यहाँ कुछ दिनों के लिए आये हैं.


आज स्कूल में विदाई समारोह था, टीचर्स, बच्चों सभी ने गीत गाए, उपहार दिया. प्रिंसिपल ने मानपत्र पढ़ा, अच्छा लगा इतनी भावनाओं को उमड़ते देखकर, आँखों में अश्रु भी छलक आये दो एक बार... पिछले छह वर्षों से वहाँ जा रही थी. स्कूल से वापस आकर कुछ देर कश्मीर पर खबरें सुनीं. पाकिस्तान वहाँ मानवाधिकारों के लिए बेवजह ही इतना शोर मचा रहा है, जबकि उसके अपने देश में कितने राज्यों में लोग पीड़ित हैं. राजनीतिज्ञ जब तक संवेदनशील न हो वह आम जनता का दर्द समझ नहीं पाता और संवेदनशील लोग राजनीति में जाते ही नहीं, जाएँ भी तो टिक नहीं पाते. भारत का सौभाग्य है कि उसे मोदी जी जैसे नेता मिले हैं  आज के दौर में. यदि भारत और अमेरिका मिल जाएँ तो आतंकवाद का मुकाबला किया जा सकता है. कल शाम क्लब में विदाई कार्यक्रम है, आज पैकिंग का कोई भी कार्य नहीं हुआ, एक कमरे को छोड़कर सभी कमरे अभी भी पूर्ववत हैं, लगता ही नहीं कि एक महीने से भी कम समय में घर पूरी तरह खाली हो जायेगा. अगले महीने के तीसरे सप्ताह में वे बैंगलोर में होंगे. 


शाम के सवा चार बजे हैं. परसों शाम भाई पांच बजे के बाद ही आया. ढेर सारी मिठाई लाया है. कल योग साधिकाएं आयीं थीं, उन्हें उसका पटना से लाया ‘खाजा’ खिलाया और पेड़े भी. परसों क्लब में हुआ विदाई कार्यक्रम यादगार रहा. अनेक सदस्याओं ने अपने विचार और भाव प्रस्तुत किये. कविताएं पढ़ीं, कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये. योग ग्रुप की महिलाओं का कार्यक्रम ‘योग नृत्य’ सबसे अनोखा था, अंत में वे सभी भावविभोर हो गयीं, आँखें नम हो गयीं, दर्शकों की भी और कलाकारों की भी. घर लौटने में नौ बज गए थे, कितनी तस्वीरें खींचीं सबके साथ, एक सुखद स्मृति बन गया है वह दिन. कल शाम को सीएमडी की पत्नी का विदाई समारोह है, उनके लिए कविता लिखी है, सुबह पूर्व प्रेसीडेंट का फोन आया,  उन्होंने बतायीं कई बातें, सम्भवतः वह उन्हें कालेज के वक्त से जानती हैं। आज सुबह पिताजी के लिए रॉकिंग चेयर की जानकारी ली, जो वे उनके अठ्ठासीवें जन्मदिन पर भेजना चाहते हैं. फुफेरे भाई से बात हुई, भाभी का अपेंडिक्स का आपरेशन हुआ है कल, फुफेरी बहन के बारे में बताया, एक जगह उसका रिश्ता होते-होते रह गया. जीवन में जो वे चाहते हैं सब तो नहीं होता, पर उसके साथ तो ऐसा ही है. परमात्मा उसके साथ है हर पल, जो भी होता है वही होना होता है., वही होना ठीक भी होता है. जीवन कितना सरल हो जाता है यदि कोई सदगुरू राह दिखाने वाला मिल जाये ! 


... और आश्चर्य हुआ कि वर्षों पूर्व भी उसने उस दिन यही लिखा था, “गॉड इज विथ हर ! आज ही हुआ वह जैसा उसने सोचा था... ईश्वर उसका कितना ख्याल रखता है. उसका रखवाला अपनी नन्ही मित्र का कितना ख्याल रखता है ! थैंक गॉड ! रात्रि के ग्यारह बजे हैं, नींद भी आ जाएगी कुछ ही देर में पर सोने से पहले अगर मन में सपने सोच ले जो रात को देख सकेगी तो ... दिन भर ठीक रहा.. कल इतवार है और उसकी परछाई जो बिस्तर पर पड़ रही है अच्छी लग रही है”.


Tuesday, July 21, 2020

विनोबा भावे के विचार


शाम के पौने पांच बजे हैं. बाहर धूप है, पंखे के बिना बैठना नहीं भा रहा है. आज नवरात्रि की सप्तमी तिथि है. कल कन्या पूजन करेंगे. सुबह नैनी व माली की बेटियां बीहू नृत्य की ड्रेस पहनकर आयीं, स्कूल के कार्यक्रम में जा रही थीं. उसने उनकी तस्वीरें उतारीं. अभी कुछ देर पहले मालिन आयी आशीर्वाद लेने, किसी ने उसे कह दिया है कि आज के दिन बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए. उसने मन ही मन प्रार्थना की परमात्मा इन सबको ढेर सारी खुशियाँ दे. सुबह उठने से पूर्व जैसे कोई भीतर कह रहा था, उन्हें किसी को बदलने की आवश्यकता नहीं है, वे जैसे हैं अति प्रिय हैं. सभी अपने-अपने संस्कारों के अनुसार कर्म करते हैं , यदि उन्हें वे संस्कार कष्ट देते हैं तो वे खुद ही उन्हें बदलने का प्रयास कर सकते हैं परमात्मा भी आकर यह काम नहीं कर सकता. बगीचे में जैसे बैंगन, आलू, भिंडी सभी कुछ जैसे बीज हों वैसे ही उगते हैं. वे यदि किसी को दोषी  देखते हैं तो वह दोष उनमें भी होता है. यदि वे स्वयं को आत्मा देखते हैं तो अन्यों को भी निर्दोष ही देखेंगे. परमात्मा के सिवा जब इस जगत में कुछ है ही नहीं तो कौन दोषी और कौन निर्दोष ! 

कुछ देर पहले नन्हे से बात की वह नए घर में था, काफी काम हो गया है पर काफी कुछ बाकी भी है. दो सप्ताह बाद वे वहाँ जा रहे हैं, शेष कार्य उनके जाने के बाद होगा. आज रामनवमी भी है और बैसाखी भी, बीहू का अवकाश भी शुरू हो गया है. उन्हें इस समय का अच्छा उपयोग करना है. सुबह अष्टमी की पूजा का कार्यक्रम ठीक रहा. मौसम आज भी गर्म है. पीछेवाली सब्जी बाड़ी में मजदूर काम कर रहे हैं, सीवर की पाइप बदलनी है जो इलेक्ट्रिकल विभाग के लोग जब खुदाई करने आये थे टूट गयी थी. छोटा भाई बहुत दिन बाद घर गया है. पिताजी के साथ तस्वीर भेजी है, वह बहुत शांत लग रहे हैं. सामने वाले लॉन में माली सफाई कर रहा है. कल रात आंधी बारिश के बाद ढेर सारे पत्ते गिरे. सुबह टहलते समय देखा, बस स्टैंड के पास एक फूलों वाले पेड़ की बड़ी सी डाल टूटकर गिरी हुई थी. बाद में नैनी ने बहुत से फूल लाकर सजा दिए. दोनों ननदों से बात की, दोनों का स्वास्थ्य नासाज था, नियमित दिनचर्या व व्यायाम कितने जरूरी हैं स्वस्थ रहने के लिए ! 

आज बाबा रामदेव का दीक्षा दिवस है, छोटे-छोटे बच्चों को अष्टाध्यायी के सूत्र सुनाते हुए देखा टीवी पर. उनके गुरुकुल में सैकड़ों बच्चे संस्कृत सीख रहे हैं. लता मंगेशकर ने पीएम के द्वारा गायी पंक्तियों को गीत बनाकर रिकार्ड किया है. प्रधानमंत्री के रूप में वह उनके सम्मान के पात्र हैं, उन्हें रशिया का एक पुरस्कार भी मिला है. 

उसने विनोबा भावे का यह विचार पढ़ा- दूसरों को प्रेम करने से ही प्रेम मिलता है. वर्षों पहले लिखा  था इसे पढ़कर, कल शाम पिताजी की टाई ढूंढते समय वह बिलकुल यही बात सोच रही थी. यह दुनिया एक दर्पण है कोई जो कुछ करता है वही उन्हें दिखाई देता है. सब लोग एक जैसे होते हैं, थोड़ा बहुत अंतर हो तो हो, नीचे गहराई में सबका मन भरा हुआ है लबरेज प्याले की तरह छलक पड़ने को आतुर ! वैली ऑफ़ फ्लावर का सुंदर पोस्टकार्ड मिल गया टाई ढूंढते- ढूंढते उसके लिए ! उसे लगा, यह किसी और की बात है, पिताजी कभी टाई भी बांधते थे, यह तो जरा भी याद नहीं आता. 

Thursday, July 9, 2020

भोर का आकाश


कल शाम बच्चों के स्कूल में अध्यापिकाओं का साक्षात्कार था। उसे भी बुलाया गया था, इंटरव्यू लेने का पहला और एक बिलकुल नया अनुभव था और स्वयं को परखने का एक स्थल भी. मेज के इस तरफ बैठी है, यह भाव आया तो भीतर के सूक्ष्म अहंकार का बोध हुआ. प्रश्न पूछते समय खुद को ही लगा, वाणी में अभी भी मधुरता नहीं आयी है. एक क्षण के लिए भीतर हलचल भी हुई, जो बाद में व्यर्थ ही प्रतीत हुई. परमात्मा उन्हें उनसे बेहतर जानते हैं. वह उन-उन परिस्थितियों में भेजते हैं जहाँ से वे चाहें तो सीखकर आगे बढ़ सकते हैं. यह सृष्टि उसी परमात्मा का विस्तार है, वह सर्वज्ञ है और यदि कोई आत्मा उसकी ओर कदम बढ़ाती है तो वह उसे स्वीकार करता है. जैसे धूल से सन हुआ शिशु माँ की तरफ हाथ बढ़ाता है तो माँ उसे झट गोद में उठा लेती है, वह अपने वस्त्रों की परवाह नहीं करती. शिशु को साफ-सुथरा करती है, वैसे ही परमात्मा उन्हें निखारता है. वह प्रेरणाएं भेजता है  जिन्हें वे सुनी-अनसुनी कर देते हैं, पर वह असीम धैर्यशील है. वह बार-बार अपनी ओर खींचता है, क्योंकि उनकी अभीप्सा उसने भांप ली है. संस्कारों के कारण या पूर्व कर्मफल के कारण वे उस पथ से विमुख हो जाते हैं ,पर उसका हाथ उन्हें कभी नहीं छोड़ता. कल एक स्वप्न में स्वयं को कहते सुना कि  जून के जीवन में सच्चाई बढ़ रही है. वह भोजन के प्रति भी पहले के जैसे आग्रही नहीं रहे. परमात्मा उनके हृदय पर भी अपना अधिकार कर रहा है. आज दोपहर मृणाल ज्योति जाना है, सेवाभाव से बच्चों को पढ़ाना है. संध्या को श्लोक उच्चारण का अभ्यास करना है. शेष समय में लिखना-पढ़ना. व्यर्थ अपने आप छूट जाता है जब वे सार्थक  को पकड़ लेते हैं. 

घर के बायीं तरफ वाले मैदान में बीहू नृत्य की शूटिंग चल रही है. कभी संगीत की आवाज आती है कभी ‘कट’ की और सब थम जाता है. छोटी लड़कियाँ भी हैं और बड़ी भी. अप्रैल में तो यहाँ चारों ओर ढोल की थापें सुनाई देती हैं, इस बार मार्च से ही बीहू आरंभ हो गया है. जून दो दिन के लिए आज टूर पर गए हैं. दोपहर को क्लब गयी थी,  शाम के आयोजन की तैयारी चल रही थी, एक अन्य सदस्या भी आयी थी, जो पहले बहुत बीमार रहा करती थी, एक वर्ष पूर्व योग करना आरंभ किया और अब पूर्ण स्वस्थ है. उसने ज्ञान के पथ पर कदम रख दिया है और तेजी से आगे बढ़ रही है.  नैनी भी ढेर सारे फूल लेकर वहाँ आयी और चार गुलदान सजा दिए, वह इस कार्य में दक्ष हो गयी है. घर पर भी शाम के लिए उसने कुछ व्यंजन बनाये हैं.अगले हफ्ते महिला क्लब की तरफ से कम्पनी की एक महिला उच्च अधिकारी का विदाई समारोह है. वह उनसे वर्षों पहले एक बार विदेश में मिली थी. उसके बाद दो-तीन बार क्लब की मीटिंग में. नई प्रेसीडेंट ने कहा, उनके लिए कुछ लिखना है. 

और अब उस पुरानी डायरी का एक पन्ना - रात्रि के ग्यारह बजने वाले हैं. सुचना और प्रसारण मंत्रालय के ‘नाटक व गीत विभाग’ के ‘दुर्गे कला केंद्र’ के कलाकारों का नृत्य-गीत देखकर बहुत अच्छा लगा. सचमुच नृत्य और संगीत में जादू है, लोक नृत्य का तो कहना ही क्या, उसके पाँव थिरकने लगते हैं धुन सुनते ही, अफ़सोस कि उसने कक्षा सात के बाद कभी नृत्य नहीं किया. कल उसे दादाजी के घर जाना है. किताबें और एक ड्रेस लेकर जाएगी. फिर उसके कमरे में छोटी बहन रहेगी. परीक्षाएं इतनी नजदीक हैं और उसकी पढ़ाई अभी तक गति नहीं पकड़ पायी है. खैर ! अब वह क्या कर सकती है, ऐन वक्त पर उसका पागल मन धोखा दे जाता है. उसे तो केवल नीला आसमान, फूल, नदी, छोटे बच्चों की मुस्कान... देखकर ही ख़ुशी मिलती है. 

बिलकुल वही अनुभूति, बल्कि उससे भी अच्छी ! इस समय वह दादी जी के घर पर है. आस पड़ोस की छोटी-छोटी बच्चियाँ मिलने आयीं, ये सब बहुत अच्छी हैं, भोली.. मगर दुनिया इन्हें ऐसा रहने कहाँ देगी. वह सबसे छोटी रेणु उसने कैसा चुटकुला सुनाया.. एक ने कहा, आप क्यों आजकल हर वक्त सपने बुनती हैं ! ...और दादाजी ने भी एक चुटुकुला सुनाया, कहा, वे वैष्णव हैं सो एक अंडा खाएंगे और फूफा जी यदि आएं तो उन्हें दो खिला देना. कल सम्भवतः बुआ जी आएं. शाम को उसकी घड़ी खो गयी, सारा कमरा ढूंढ लिया तो मिली बड़े सन्दूक के पीछे. चचेरे भाई ने कहा, एक दिन पता चल जाये कि सुबह पांच बजे आकाश में तारों की स्थिति या प्रकाश कितना है तो रोज समय पर उठने में आसानी होगी. उसने सोचा, वह भी कल जल्दी उठेगी और आकाश दर्शन करेगी. 

Sunday, June 28, 2020

श्री श्री और बाबा


आज बापू की पुण्यतिथि है, टीवी पर सर्वधर्म प्रार्थना का प्रसारण किया जा रहा है. बापू का जीवन भी पुण्यशाली था और मृत्यु भी, शहीद दिवस के रूप में उनकी पुण्यतिथि मनायी जाती है. स्कूलों के बच्चे मधुर स्वरों में गीत व भजन गा रहे हैं, गीत अत्यंत भक्तिभाव जगाने वाले हैं. आज सुबह गांधीजी की आवाज में उनके भाषण सुने. दूरदर्शन के अभिलेखागार में उनके वीडियो सुरक्षित रखे गए हैं. उनके हृदय में हर व्यक्ति के लिए प्रेम था, चाहे वह किसी जाति, किसी धर्म का हो. इस समय बहाई प्रार्थना कही जा रही है. परमात्मा से की गयी कोई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती. अब कुरान का पाठ किया जा रहा है. कल रात तारिक अहमद को सुना, जो पाकिस्तानी हैं पर उसके सबसे बड़े आलोचक भी हैं. हिंदुस्तान की तारीफ करते हैं. कल शाम को अचानक तेज वर्षा व आंधी आयी. एक योग साधिका ने कहा, गुरूजी का कोई सन्देश दे वह उन्हें घर जाने से पूर्व, वह साधिका हिंदी में कविता लिखती है और गाती भी अच्छा है. आज धोबी अपने बगीचे से नारियल और ढेर सारा हरा  धनिया लाया था, उसने भी दो पत्ता गोभी तोड़ कर दीं.

आज नए वर्ष के प्रथम माह का अंतिम दिन है. अब जून को सात माह का समय और यहाँ अपने विभाग प्रमुख के रूप में व्यतीत करना है. आज शाम को एक योग साधिका को विदाई दी, वह सूजी का हलवा बना कर लायी थी, शेष सभी लोग भी कुछ न कुछ बनाकर लाये थे. नूना ने उसके लिए लिखी कविता पढ़ी. दोपहर की कक्षा में दस लोग थे, दो नई लड़कियों ने आना शुरू किया है जो बहुत मन से योग अभ्यास करती हैं. सुबह आसन किये, कुछ ही दिनों में शरीर हल्का लगने लगा है. पिछले दिनों यात्रा आदि के कारण नियमित व्यायाम न करने से वजन भी बढ़ गया है. 

दोपहर के साढ़े चार बजे हैं, आज टीवी पर कुछ नए चैनल देखे. यूट्यूब पर एक वीडियो देखा जिसमें स्वस्थ रहने के लिए कुछ काम की बातें थीं. सुबह उठकर गर्म पानी पीना है, कुछ देर टहलना है. शंख प्रक्षालन के आसन नियमित करने हैं. भोजन के डेढ़ घण्टे बाद पानी पीना है . नमक कम, सफेद चीनी व मैदा नहीं खाना है. भोजन चबाकर खाना है. रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना है. नाभि व छाती के मध्य की दूरी को बढ़ाकर रखना है. भोजन करते समय नीचे बैठना है अथवा सीधे बैठना है. भोजन स्वयं से ऊपर रखना है. दिन में सोना भी ठीक नहीं है.  रामदेव बाबा पर एक कार्यक्रम भी देखा. आज सुबह श्री श्री व रामदेव बाबा को संगम तट पर एक साथ योग करते हुए देखना एक अभूतपूर्व अनुभव था. दोपहर को लॉन की धूप में विश्राम किया, पैरों पर धूप पड़ रही थी और सिर छाया में था. इसी तरह जीवन में भले संघर्ष हो पर मन में विश्राम हो वह जीवन सार्थक है. बड़ी भांजी के लिए आज सुबह कविता लिखी, अपनेआप ही भीतर उतर आयी हो जैसे, सोचा नहीं था कि लिखनी है. 

Saturday, June 20, 2020

पासीघाट के सन्तरे


आज इतवार था, सुबह के सभी कार्य, प्रातः भ्रमण, योग आदि बड़े इत्मीनान से किये, बिना किसी जल्दबाजी के. नाश्ते में अप्पम बनाये ढेर सारी हरी सब्जियां डालकर. बगिया में हरे प्याज, गाजर, गोभी आदि हो रही हैं. यह अंतिम वर्ष है जब वे सब्जियां उगा रहे हैं, अगले वर्ष से महानगर में सम्भवतः फूल ही उगा पाएंगे या सजाने के लिए गमलों में कुछ हरे पौधे. दोपहर को बच्चों को योग सिखाया साथ ही गणित भी, उन्हें बहुत आनंद आया. एक लड़का बहुत उदास था, अगली कक्षा में उसका दाखिला अभी तक नहीं हुआ है, बच्चों के लिए स्कूल जाना कितना जरूरी है , उससे बात करके लगा. एक बच्चे का पैर सूजा हुआ था, उसे अभी तक इलाज नहीं मिला, माता-पिता को सन्तान के प्रति ज्यादा सजग होना चाहिए पर... शाम को एक बाल फिल्म का एक अंश देखा. एक किशोरी अपनी सखियों के साथ सागर तट पर जाती है पर घर पर बताकर नहीं आयी है, सबके माँ-पिता कुशंकाएँ करने लगते हैं. मन कितनी जल्दी भयभीत हो जाता है, आत्मा अभय है सदा एक सी ! 

अभी वे रात्रि भ्रमण से लौटे, पिटूनिया के फूलों  का लाल रंग हल्के प्रकाश में सुंदर लग रहा था. आज दोपहर छोटी बहन से वीडियो कॉल पर बात हुई. वह मेथी काट रही थी, वीडियो कॉल पर बात करो तो लगता ही नहीं कि हजारों मील की दूरी है, उसका घर जैसे पड़ोस में आ गया हो. बताया, उसकी छोटी बिटिया विदेश पहुँच गयी है. बहनोई विदेश जाने वाले हैं, उनके लिए लिखी कविता का अंतिम भाग समझ में नन्हीं आया, ऐसा बताया. परमात्मा को भीतर या बाहर अनुभव किये बिना समर्पण का गीत गाया नहीं जाता. शाम को भगवद्गीता के एक श्लोक का भावार्थ सुना, आचार्य प्रद्युम्न कितनी अच्छी तरह भक्ति भाव में डूबकर गीता की व्याख्या करते हैं. कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग को बहुत सरलता से परिभाषित कर देते हैं. उसके पहले प्रेसीडेंट से मिलने गयी, उनका गला खराब है, पर क्लब का काम करने का उनका उत्साह देखते ही बनता है. उनके लिए विदाई कविता लिखनी है. दोपहर को पावर ऑफ़ नाउ का एक और अध्याय पढ़ा.उनके भीतर एक छाया शरीर भी होता है जो पीड़ा से ही पोषित होता है. पुराने नकारात्मक संस्कार तथा घटनाएं जब कभी जागृत हो जाती हैं तब वह शरीर मुखर हो जाता है और वे स्वयं को भूल जाते हैं, अपने स्वरूप से डिग जाते हैं. उसके भीतर भी हीन भावना, ईर्ष्या, अहंकार तथा दम्भ के रूप में पुराने संस्कार हैं, जो अचेत होने पर उभर आते हैं. दुबई से वापसी की यात्रा में कुछ पलों के लिए कैसी विवेकहीनता छा गयी थी, जैसे वह वह नहीं थी, कोई अन्य ही था. चाय के प्रति आसक्ति भी इसी छाया शरीर की मांग पर टिकी है, आत्मा को कोई अभाव नहीं है . उसे किसी सुख के लिए किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर निर्भर होने की जरा भी आवश्यकता नहीं है. आज मकर संक्रांति है, कल वे पासीघाट जा रहे हैं, अरुणाचल प्रदेश में स्थित यह स्थान सेंटरों के लिए प्रसिद्ध है. कल से कुम्भ भी आरम्भ हो रहा है. 

उसने फिर उस वर्षों पूर्व की डायरी का अगला पन्ना खोला, कुछ कविताएं कालेज की पत्रिका में छपने के लिए दीं थीं उसी दिन. एक कविता तो अवश्य छपेगी उनमें से ऐसा भी लिखा था.  अगले पन्नों पर वे कविताएं थी जो रेडियो पर सुने कवि सम्मेलन से लिखी थीं, 

जिंदगी जैसे शिकन रुमाल की 
एक नन्हीं सी लहर है ताल की 
जिंदगी है एक चिड़िया डाल की  
देखते ही देखते उड़ जाएगी 

बादलों में छिप गयी वह धूप है 
घूँघटों में कैद गोरा रूप है 
एक गिरते फूल का मकरन्द है 
एक झूठे प्यार की सौगन्ध है 
आंसुओं के नीर में बस जाएगी 
कुंवर बेचैन 

जीना  हो तो मरना सीखो गूँज उठे यह नारा
हर आँधी का उत्तर हो तुम, तुमने नहीं विचारा 
.............

सोचो तुमने इतने दिन में कितनी बार हुंकारा 

बाल कवि बैरागी  

है महानगर में शोर शोर में महानगर 
नागरिक नहीं रहती है भीड़ यहाँ, 

ये पंक्तियाँ किसकी हैं, नहीं लिखा है. 


Friday, April 17, 2020

कैटरी-बिल्लियों का घर


सुबह के साढ़े नौ बजे हैं. आज वर्षा नहीं हो रही है, न ही अभी तक धूप तेज हुई है. बाहर का मौसम अच्छा है वैसे ही मन का मौसम भी ! सुबह उठी तो भीतर ध्यान का प्रयास चल रहा था, अर्थात नींद में भी कोई धारा लगातार चलती रही थी. रात को ध्यान करते-करते ही सोयी थी, शिव सूत्र पर प्रवचन चल रहा था, शायद रात भर मोबाइल ऑन ही रह गया, बैटरी खत्म हो गयी. मन में वृत्ति का प्रवाह अब भी चलता है लेकिन उसे देखते ही विलीन हो जाता है और रह जाती है एक अखण्ड शांति ! उन्हें सदा उसी अपने निराकार स्वरूप में रहना सीखना है, व्यर्थ के संकल्प उनकी ऊर्जा को व्यर्थ करते हैं. एकाग्र मन ही शुद्ध मन है. स्थिर बुद्धि ही विवेक है. परमात्मा की शक्ति है चिति शक्ति और उसका विस्तार है आनंद !  जो प्रकृति के रूप में प्रकट हो रहा है. शिव सूत्र में सोलह कला का एक नया सरल अर्थ सुना, तीनों अवस्थाओं के पन्द्रह भेद और सोलहवां मन. उनके भीतर ही सारे प्रश्नों का अर्थ छिपा है, यदि वे अंतर्मुख होकर स्वयं के सारे आयामों से परिचित होना आरंभ कर देते हैं तो परमात्मा की शक्ति सारे रहस्यों को खोलने लगती है. उनका जीवन एक सहज बहती नदी की धारा की तरह है जिसमें समय के अनुसार परिवर्तन स्वाभाविक है, लेकिन इस जीवन का आधार सदा एक रस है, जैसे वह आकाश जिसमें सब कुछ स्थित है. 

सुबह उठी तो सवा पांच हो गए थे. प्रातः कालीन  भ्रमण  पर जाते समय और लौटते समय भी भगवद्गीता का पाठ सुना. अद्भुत वचन हैं कृष्ण के, गीता एक ऐसा ग्रन्थ है जितनी बार भी पढ़ें या सुनें, नया ही लगता है. मन कृष्णमय हो गया है. जून का वीडियो कॉल आया, वह भुवनेश्वर के उस होटल में ठहरे हैं जहाँ लैगून है, जहाँ वे दोनों कुछ समय पहले ही गए थे. कल वह आ रहे हैं. आज एक पुराने मित्र परिवार से मिलने आएंगे. शनिवार की साप्ताहिक सफाई का कार्य चल रहा है. नैनी को बुखार है, उसकी देवरानी आयी है. कल रात आयी थी तो उसकी आवाज बदली हुई थी, कल दोपहर वह बच्चों को लेकर पैदल ही गणेश पूजा देखने गयी थी वह, खिचड़ी खाने का मन था, पर भीड़ बहुत ज्यादा थी, शरारती भतीजे के कारण भी बहुत परेशानी हुई. अभी उसे देखने गयी तो उसके पति ने कहा, नाश्ता बना रही है, यानि बुखार में भी आराम नहीं है. कल मृणाल ज्योति गयी, मूक-बधिर बच्चों को हिंदी भाषा का ज्ञान देना है, उन्हें चित्रों और इशारों के माध्यम से ही पढ़ाया जा सकता है. वहाँ एक अध्यापिका ने बताया, ट्यूबवेल लगाने के लिए स्थान देखने कम्पनी से कुछ लोग आये थे. स्कूल से लौटकर एक कप कॉफी पीने एक सखी के यहाँ गयी, उसका पुत्र लंदन लेस्टर युनिवर्सिटी पढ़ने जा रहा है, तीन साल का कोर्स है. उससे भी मुलाकात हुई, वह खुस था और समझदार भी बहुत है. इंजीनियरिंग कर चुका है, किन्तु पुनः डिग्री कोर्स करने ही जा रहा है. ज्ञान का कोई अंत नहीं है. अभी-अभी नन्हे और सोनू से बात हुई, उन्होंने अपनी बिल्लियों को दो दिन के लिए कैटरी में रखा है, वहां अन्य दस-बारह बिल्लियां रहती हैं और चिड़िया व तोता भी. सोनू एक पजल बना रही थी जो उसके भाई ने जापान से भेजा था. कल वे दोनों नापा वैली जायेंगे, जहाँ उनके भावी नये घर में आंतरिक सज्जा का काम चल रहा है. 

दोपहर के साढ़े बारह बजने को हैं. इतवार के सारे कार्य हो चुके हैं. पिताजी व बड़ी ननद से फोन पर बात भी हो गयी, छोटी का फोन नहीं लगा. वापसी की यात्रा के लिए जून अब हवाई जहाज में बैठ चुके होंगे.