Wednesday, May 18, 2022

एलिमेंट्स


 इस सोसाइटी से सटे गाँव में कोरोना के एक दो केस मिले हैं, सो उधर का रास्ता बंद कर दिया गया है. यहाँ भी कोरोना का पहला केस मिला है आज. देश में कोरोना संक्रमित की संख्या पचास हजार हो गयी है और विश्व में एक करोड़. आज का रविवार विशेष है ! आज योग दिवस, पितृ दिवस, संगीत दिवस, सेल्फी दिवस के साथ-साथ सूर्य ग्रहण भी लगा और वर्ष का बड़ा दिवस भी है आज.  सुबह जब टहलने गए तो आकाश में बादलों के पीछे से तारागण झाँक रहे थे. वापस आकर ‘सूर्य नमस्कार’ किया, जून ने वीडियो बनाया. दक्षिण भारतीय नाश्ता जब तक तैयार हुआ, बच्चे भी आ गये.  टीवी पर सूर्य ग्रहण के सुंदर चित्र देखे फिर  भारत व चीन की हाल की टकराहट पर एक वीडियो देखा. विशेष तौर पर जून के लिए नन्हे ने पालक की सब्जी बनायीं, कॉर्न व फूलगोभी के साथ, सोनू ओट्स व क्रेनबेरी की कुकीज़ बनाकर लायी थी.  शाम को वे चले गए. नैनी आयी तो उसके हाथ में चोट लगी थी, कहने लगी, सब्जी काटने में लग गयी, पर चोट देखकर ऐसा लगता नहीं था. हाथ सूज गया था, पता नहीं उसने इंजेक्शन भी लगवाया था या नहीं. उससे बिना पानी वाले काम ही करवाये. 

आज सुबह पतंजलि योग सूत्र पर गुरूजी का व्याख्यान सुना, बाद में ओशो का भी. इन सूत्रों में मन को कितनी अच्छी तरह समझाया गया है. रात तेज वर्षा हुई, एक बार नींद खुल गयी.याद आया. उस दिन स्वप्न में शालिग्राम पत्थर को हवा में उठते देखा था. उसी क्षण मन में विचार आया था, वे जीवित हैं ! परमात्मा हजार-हजार रूपों में अपने को प्रकट करता है, देखने वाली नजर चाहिए. कल बहुत दिनों बाद सहभोज होगा, कोरोना काल में यह विशेष घटना ही कही जाएगी, लन्च पर नंन्हे के कुछ मित्र भी आ रहे हैं, उसने कहा है वह अपने साथ कुक को भी ले आएगा. 


मौसम विभाग ने कल किसी तूफान की चेतावनी दी है. बाहर तेज हवा बह रही है. सुबह टहलने गए तो हल्की झींसी पड़ रही थी. कल एक पेड़ के नीचे गुड़हल की कलियाँ टूट कर गिरीं हुईं मिली थीं, उन्हें पानी में डाला कर रखा तो आज खिल गयीं. मंझली भाभी का जन्मदिन है आज, उनकी फरमाइश पर तुरन्त ताज़ी कविता लिखकर भेजी। आज एक हास्य फिल्म देखी, कोरोना के भय से बचने के लिए यह अच्छा उपाय है. परसों गुरू पूर्णिमा है, गुरूजी उसके बारे में एक कहानी सुना रहे हैं. गुरू जब जीवन में आते हैं तो सारे प्रश्न खो जाते हैं. कुछ चाहना या त्यागना मन से होता है, आंकना या निर्णय लेना बुद्धि से व ग्रहण करना या पकड़ना अहंकार से ! जब मन, बुद्धि और अहंकार के पीछे जा जाकर जब कोई थक जाता है तब स्वयं का ज्ञान होता है. जीवन में कृतज्ञता के क्षण भी आते हैं और शिकायत के भी, पर गुरू के पास आते ही ये सब गिर जाते हैं. गुरु एक अन्य ही आयाम से  परिचय करवाते हैं. 


Thursday, May 12, 2022

द लॉयन किंग

 

आज शाम को वे सोसाइटी के मुख्य द्वार की तरफ़ टहलने गए, जून जब तक बाहर से सब्ज़ी ख़रीद कर लाते, उसने फूलों की तस्वीरें उतारीं। घर पहुँचने के पाँच मिनट बाद ही मूसलाधार वर्षा आरंभ हो गयी, जाने कैसे कुदरत उन्हें हर बार सुरक्षित रखती आयी है। बालकनी में शीशे की छत के नीचे बैठ कर बारिश का एक वीडियो बनाया। आज स्वामी योगानंद जी पर एक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म देखी। वर्षों पूर्व जब पहली बार उनकी पुस्तक पढ़ी थी तो मन प्राण एक अनोखे आनंद से भर गये थे। हफ़्तों तक उस पुस्तक का असर बना रहा था। आजकल सुबह-सुबह अनोखे स्वप्न आते हैं, एक दिन पहले एक साथ अनेक सुंदर चौपाये दिखे, फिर कीट और फिर विष्णु की सुंदर मूर्ति. एक दिन एक सुंदर महिला का चेहरा दिखा था, बिलुकल सजीव ! एक अन्य स्वप्न में वह किसी को बाबा कहकर संबोधित कर रही है. छोटे भाई से बात हुई, जो ओशो का साहित्य पढ़ता है. उसे नए-नए आनंददायक अनुभव होते हैं, वह बहुत खुश लग रहा था; उसका मन पूरी तरह परमात्मा के रंग में रंग गया है. 


कल सुबह नौ बजे नन्हा व सोनू आ गये और दिन भर उनके साथ रहे।  एक अच्छी फ़िल्म देखी, एक एनिमेशन फिल्म ‘द लायन किंग’, जिसमें शाहरुख़ खान ने भी आवाज दी है, सिम्बा की यह कहानी दिल को छू जाती है. कुछ बोर्ड गेम भी खेले और शाम को दूर तक टहलने गये। आज बड़ी भांजी की बिटिया के जन्मदिन पर ज़ूम मीटिंग थी। परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्यों ने अपनी शुभकामनायें दीं, उसने जन्मदिन पर एक कविता भेजी थी जो बालिका के नाना जी ने पढ़ी. आश्रम से सत्संग भी आजकल जूम पर ही होता है, तकनीक का कितना अच्छा उपयोग हो रहा है इस विपद काल में. आजकल हरसिंगार के फूल अपनी अनुपम छवि बिखेर रहे हैं, सुबह-सुबह सलेटी सड़क पर बिछे हुए सफेद पुष्पों की उसने कई तस्वीरें खींचीं। समाचारों में सुना असम में एक तेल कुएं में आग लग गयी है, स्थानीय स्तर पर उसे बुझा नहीं पाए तो सिंगापुर से एक विशेष टीम आयी है. नन्हे ने बताया, उनकी सोसाइटी को कन्टेनमेंट जोन बनाया जा सकता है. भारत में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. एक अनुमान के अनुसार भविष्य में चालीस-पचास लाख लोग संक्रमित हो सकते हैं. भारत-चीन के मध्य सीमा पर हालात बिगड़ रहे हैं, देखा जाये तो इस समय सारी दुनिया में हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं. आज कुछ घर छोड़कर रहने वाले एक नब्बे वर्षीय बुजुर्ग से बात हुई, वह कॉमर्स मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी रह चुके हैं. उनकी स्मरण शक्ति बहुत अच्छी है. उनके पास यादों का जैसे एक खजाना है. 


इस बार भी इतवार के कारण बच्चे दिन भर साथ रहे. नन्हे ने ‘स्टार वार’ सीरीज  की एक फिल्म दिखाई. शंकर जी की बारात में जैसे भूत-पिचाश आते हैं, ऐसे अजीबोगरीब शक्लों वाले पात्र हैं इस फिल्म में. दोपहर को सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु का समाचार मिला था. आज भी दिन भर वही खबरें आती रहीं. अवसाद और तनाव के शिकार लोग कितने दुखी हैं भीतर. अभिनेताओं का जीवन कितना अकेलेपन से भरा होता है. मौसम आज बहुत अच्छा है, शीतल पवन बह रही है, न बादलों का शोर न ज्यादा गर्मी ही. विष्णु पुराण में प्रह्लाद की कहानी देखी, उसने कहा, स्वर्ग में देवता, धरती पर मानव व पाताल में असुर रहें और कोई किसी की सीमा में प्रवेश न करे और सब आनंद से रहें. एक और सुंदर बात सुनी, सुबह जब सत गुण बढ़ा हो, मानव देवता बनकर साधना करें, दोपहर को रजो गुण बढ़ने पर मानव बनकर काम करें और रात को तमस में असुर बनकर नींद में सो जाएँ. असुरों का सोना ही लाभकारी है. कल जून को श्री श्री की रिसर्च लैब में जाना है. स्लीप लैब पर वर्क शॉप है. जहाँ ईईजी का इंस्टालेशन भी होना है. 


कल जून ने बाबा की सातवीं बरसी पर निकट स्थित एक वृद्धाश्रम में कुछ सामान भिजवाया. शाम को नर्सरी से बारह पौधे भी लाये. उनकी स्मृति में लगाए इन पौधों को देखकर उनके स्मरण होता रहेगा. नैनी ने एक माली को बुलवाया है, जिसने बहुत ही कुशलता से पौधों को लगा दिया, वह बेला का एक पौधा भी लाया है, जिसे छोटे से लॉन में एक किनारे पर लगा दिया है. माली अच्छा है पर उसे पीने की आदत है, पता नहीं कितने दिन टिकेगा. टीवी पर आज विरोचन और सुंधवा की कहानी देखी जिसमें दोनों एक ही कन्या दीपावली के प्रति आकर्षित हैं. भगवान विष्णु और महादेवी को भी उनकी कथा में रस आ रहा है. प्रेम की नींव पर ही तो यह संसार खड़ा है. परसों इस वर्ष का पहला पूर्ण सूर्यग्रहण है, पिछले हफ्ते एओएल के एक स्वामी की एक वार्ता सुनकर सूर्य ग्रहण पर एक  लेख लिखा था, जो अमर उजाला में छपा है. सूर्य ग्रहण के कारण होने वाले प्रभावों का विस्तार से वर्णन है उसमें.                




Wednesday, May 4, 2022

रैटटौइल




आज ईद है, कल ब्लॉग में ईद पर एक कविता प्रकाशित की थी। जून आज एओएल सेंटर गये, सेंटर सामान्य जनता के लिए अक्तूबर से पहले नहीं खुलेगा। उन्होंने उसके जन्मदिन पर सफ़ाई कर्मचारियों को बाँटने के लिए फ़ूड पैकेट्स का ऑर्डर दे दिया है। कल शाम के आँधी-तूफ़ान के बाद आज भी यहाँ वर्षा हो रही है। असम की तरह यहाँ भी देखते-देखते बादल छा जाते हैं, और बूंदा बांदी शुरू हो जाती है। तापमान तीस डिग्री से कम ही रहता है, हवा बहती रहती है. दिल्ली व उत्तर भारत में गर्मी बहुत अधिक है। चुरूँ में तापमान पचास डिग्री पहुँच गया, कोरोना वायरस को इतनी गर्मी में समाप्त हो जाना चाहिए, पर वह अपने पैर पसारता ही जा रहा है। श्रमिकों की समस्या भी विकराल रूप ले रही है, वे सभी अपने गाँव-घर जाना चाहते हैं। आज अख़बार में पढ़ा कोरोना की वैक्सीन आने से भी ज्यादा लाभ होने वाला नहीं है, इसका खतरा किसी न किसी रूप में बना ही रहेगा. वैसे अब सुबह शाम पार्कों में लोग मास्क लगाकर टहलते हुए मिलने लगे हैं. सुबह आम के बगीचे से ढेर सारे गिरे हुए आम मिले। जून ने आम की मीठी चटनी बनायी है। अगले हफ़्ते वे गोंद के लड्डू भी बनाने वाले हैं। अगले महीने की पहली तारीख़ से गुरूजी का ‘नारद भक्ति सूत्र’ पर व्याख्यान आरंभ हो रहा है। जीवन की नींव कितने वर्षों पहले रख दी जाती है और बाद में उस पर इमारत बनती है। वर्षों पूर्व उसने डायरी में लिखा था, मन की गहराई में अथाह, असीम प्रेम है ! भक्ति सूत्रों में गुरूजी उसी का वर्णन करने वाले हैं। आज का दिन बहुत ख़ास रहा, सुबह वे टहलने गए तो मोबाइल हाथ में था, सूर्योदय से पूर्व आकाश गुलाबी हो गया था, आकाश पर बादलों में अनोखे रंग बिखर रहे थे, सुंदर तस्वीरें उतारीं। यहाँ स्थिर छोटे से मंदिर गये, प्रसाद के लिए लड्डू थे, मंदिर से बाहर निकलते ही एक वृद्ध महिला दिखीं, जो प्रसाद पाकर अति प्रसन्न हुईं। परमात्मा ही मानो उन्हें उस क्षण उन्हें वहाँ ले आया था। नौ बजे तक नन्हा व सोनू भी आ गये। ज़ूम पर सभी परिवार जनों से बात हुई, दीदी व अन्य सभी ने जन्मदिन पर शुभकामनाएँ दीं। दोपहर को ‘रैटटौइल’ फ़िल्म देखी, जिसमें एक चूहा अपने शेफ़ बनने के सपने को पूरा करता है, बहुत ही अनोखी और मज़ेदार फ़िल्म है यह। शाम को सोनू ने केक को सजाकर प्रस्तुत किया। आज एओएल के दिनेश गोखले द्वारा बनाया गया ‘नारद भक्ति सूत्र’ का परिचयात्मक वीडियो देखा। अगले पंद्रह दिन अवश्य ही काफ़ी भरे-पूरे होंगे, परमात्मा की भक्ति से भरपूर ! आज दोपहर वाली नैनी काम पर नहीं आयी, हर हफ़्ते वह किसी न किसी बहाने से छुट्टी ले लेती है। सुबह वाली ऐसा नहीं करती, आज उसके बेटे का फ़ोन आ गया, दोनों बहुत खुश थे। रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, अभी-अभी फ़ेसबुक पर देखा, दीदी अपने जन्मदिन का केक काट रही हैं, जिसके मध्य से एक रोशनी निकल रही है। उन्होंने गुलाबी साड़ी पहनी है और चेहरे पर सदा की तरह ख़ुशी झलक रही है। सुबह ज़ूम पर सबके साथ उनसे बात हुई थी। दोपहर को भक्ति सूत्रों पर गुरूजी की सुंदर व्याख्या सुनी. विष्णु पुराण में विष्णु को महादेवी को समझाते हुए सुनना बहुत अच्छा लगता है। वह किसी भी बात से प्रभावित नहीं होते। हिरण्यकश्यपु उन्हें अपना शत्रु मानता है पर वह जानते हैं कि वह उनका द्वारपाल है. श्रीकृष्णा में अक्रूर जी को कृष्ण के भगवान होने का प्रमाण मिलने वाला प्रसंग दर्शनीय होगा. अमेरिका में एक अश्वेत के प्रति पुलिस की बर्बरता के खिलाफ हिंसा बढ़ती जा रही है. श्वेत भी इसका विरोध कर रहे हैं, पर इसके लिए वे गाड़ियों में आग क्यों लगते हैं, यह समझ से बाहर है. केरल में एक हथिनी की दर्दनाक मृत्यु की खबर सुनी, लोग कितने हृदयहीन हो सकते हैं. कल एक और तूफान निसर्ग महाराष्ट्र में आया पर ज्यादा नुकसान नहीं हुआ इसके कारण. यहाँ का मौसम अवश्य बादलों भरा हो गया है.

Tuesday, April 26, 2022

मत्स्यावतार की कथा



वही कल का समय है, रातों को बादल बरसते हैं कुछ देर के लिए और सुबह से दोपहर तक बदली बनी रहती है। उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और बांग्ला देश में तूफ़ान ‘अंफन’ प्रवेश कर चुका है, कितनी हानि या तबाही हुई इसका पता तो कल ही चलेगा। ट्रंप ने चीन को कोरोना के लिए फिर ज़िम्मेदार ठहराया है, विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी उनके क्रोध का शिकार होना पड़ रहा है।  सारी दुनिया में करोड़ों लोग इस वायरस से प्रभावित हुए हैं, उनके रोज़गार छूटे हैं, घर छूटे हैं, प्रियजन भी छूटे हैं। इस महामारी का असर आने वाले कई वर्षों तक मानव को भोगना पड़ेगा।छोटी बहन से बात हुई, उसे यूएइ में कोरोना मरीज़ों की देखभाल करनी पड़ रही है, मरीज़ों की संख्या वहाँ भी बढ़ रही है। कहने लगी, यदि आइसीयू,में मरीज़ बढ़ गए तो उनके पास साधन नहीं हैं। आज ‘हिंदू’ पुस्तक को आगे पढ़ा, लेखिका विदेशी हैं पर संस्कृत का गहन अध्ययन उन्होंने किया है।उसमें सिंधु घाटी की सभ्यता की कहानी आरम्भ हो गयी है। पुस्तक के अनुसार बहुत महान थी वह सभ्यता जिसमें अन्य सभ्यताओं के साथ व्यापार होता था। इस सभ्यता का अंत कैसे हुआ और आर्य भारत में कहाँ से आए, यह रहस्य अभी तक सुलझा नहीं है । वेदों की रचना कब हुई, किसने की, यह भी ज्ञात नहीं है। सृष्टि रहस्यों से भरी है, वे थोड़े  वक्तों के लिए ही यहाँ आते हैं फिर कहाँ चले जाते हैं, कोई नहीं जानता। उस लोक और इस लोक में कोई एक साथ रह सके तभी वह बता सकता है पर यह राज है कि राज ही बना रहता है। कुछ लोग अपने समय व ऊर्जा का कितना अच्छा उपयोग कर लेते हैं। भगवान ने सभी को बुद्धि नामक यंत्र दिया है पर वे उसका उपयोग करना ही नहीं जानते। गुरूजी को कितनी सिद्धियाँ प्राप्त हैं पर वे कितने सरल और भोले बने रहते हैं, वह दुनिया में करोड़ों लोगों के दिलों में ज्ञान का प्रकाश फैला चुके हैं। आज एक पुरानी सखी से बीस मिनट बात की फ़ोन पर, पूरे अठारह मिनट वह बोलती रही, वह आर्ट ऑफ़ लिविंग के ऑन लाइन कोर्सेस भी कर रही है। जून ने शनिवार से एच आर के लिए होने वाले कोर्स के लिए एक घंटे के ऑन लाइन वर्कशॉप में भाग लिया। दोपहर को उन्होंने ‘पिंजर’ फ़िल्म देखी, अमृता प्रीतम की कहानी पर बनी यह फ़िल्म बहुत मार्मिक है। आज मंझली भाभी ने वहाट्सेप पर एक गीत गाया। कोरोना से लोगों की छिपी हुई प्रतिभाएँ बाहर निकल रही हैं। 


आज नापा की तरफ़ से सब घरों में बगीचे से तोड़े गए आम वितरित किए गए, अभी कच्चे हैं, कुछ दिनों में पक जाएँगे। कितनी ही  बार सुबह टहल कर लौटते समय चटनी आदि के लिए अमराई से आम मिलते रहे हैं, एक रात तेज हवा चली थी तो सुबह ढेर सारे आम गिरे हुए मिले। विष्णु पुराण में आज मत्स्यावतार की कथा आरंभ हुई है, कितनी अद्भुत कथा है यह भी। प्रलय का दृश्य देखा, जिसमें मनु सप्तर्षियों को लेकर नौका में बैठते हैं। ‘श्री कृष्णा’ में कृष्ण के माटी खाने के प्रसंग आया, यशोदा का आश्चर्य देखने लायक़ था पर कुछ ही देर में वह सब भूल गयीं। परमात्मा के द्वारा सबके जीवन में न जाने कितनी बार चमत्कार हुए हैं, होते रहते हैं, पर मानव की स्मरण शक्ति बहुत कम है, बड़ी से बड़ी कृपा भी वह कुछ दिनों में भुला देता है और फिर से ईश्वर के द्वार पर ख़ाली झोली लेकर खड़ा हो जाता है। उपनिषद गंगा में आश्रम व वर्ण व्यवस्था पर चाणक्य की सुंदर व्याख्या सुनी। नैनी ने आज कहा, उसके बेटे को ओप्पो का फ़ोन चाहिए, ताकि वह दफ़्तर का काम कर सके।उसने सोचा, कल नन्हा आ रहा है वही ऑन लाइन मँगा  देगा। वैसे कल इतवार को कर्नाटक सरकार ने पूर्ण  लॉक डाउन घोषित कर दिया है, उनका आना शायद संभव नहीं होगा। 


Thursday, April 21, 2022

ध्रुव के प्रश्न


आज दोपहर पूरे दो महीने और तीन दिनों के बाद नन्हा और सोनू घर आए, अभी कुछ देर पहले  वापस गए हैं। शाम को वे उन्हें पार्क में ले गये पर वर्षा होने लगी, जल्दी ही लौटना पड़ा। नन्हे  ने एक बात कही कि उन्हें किसी के साथ घटी किसी भी घटना के लिए किसी के प्रति निर्णायक नहीं बनना चाहिए। उसे लगा, बच्चे उनसे कितने आगे होते हैं बौद्धिक रूप से, कार्य-कारण सिद्धांत के ऊपर उन्हें जाना है, चीजें अपने आप होती हैं, जब होनी होती हैं, हर घटना के पीछे क्यों ?ढूँढने जाने की ज़रूरत नहीं है। जीवन में जो भी घटता है उसके पीछे कोई न कोई कारण होता है, पर कौन सा कारण किस घटना कि पीछे है, कौन बता सकता है ? वैसे भी उन्हें व्यक्तियों के बारे में कोई राय बनाने का क्या अधिकार है, जो जैसा है वैसा है ! आर्ट  ऑफ़ लिविंग का पहला ज्ञान सूत्र भी तो यही है, ‘लोगों को जैसे वे हैं वैसे ही स्वीकारें’ उन्हें किसी व्यक्ति के बारे में कुछ भी कहने से पूर्व दस बार सोचना चाहिए। किसी की निंदा करना तो ग़लत है ही किसी के निर्णायक बनना और भी ग़लत है। अनजाने में ही वे अपने संस्कार वश ऐसा करते हैं और अपनी ऊर्जा भी गँवाते हैं। बाहर तेज हवा के साथ वर्षा हो रही है, बच्चे अब तक घर पहुँच गए होंगे। 


एक विशिष्ट महिला ब्लॉगर ने अपने स्पष्ट और सरल शब्दों में कोरोना वायरस के ख़तरे को लेकर भारतवासियों द्वारा लापरवाही भरा रवैया अपनाने पर एक ध्वनि संदेश में खेद व्यक्त किया है। उनकी वाणी में शिकायत भी है और सलाह भी, ख़तरा बढ़ गया है पर लोग बड़े आराम से सड़कों पर निकल रहे हैं जैसे लॉक डाउन हटते ही सब सामान्य हो गया  हो। आज सुबह बाहर वर्षा का भ्रम  हुआ पर आवाज़ बिजली की तारों से आ रही थी। हवा ठंडी थी, कहीं कहीं सड़कें भीगी थीं। सूर्योदय या सूर्यास्त आज दोनों नहीं दिखे, भ्रमण के दोनों समय उन्हें देखना व चित्र लेना उसका प्रिय काम होता है। आज चक्रों के बार में व्याख्यान सुना। विशुद्धि चक्र से ऊपर अद्वैत की यात्रा आरम्भ हो जाती है। आज्ञा चक्र पर असीम स्वरूप का अनुभव होता है पर अंतिम चक्र पर जब ‘स्वयं’ भी मिट जाता है तब परमात्मा की प्राप्ति होती है। अहंकार मिट गया पर अस्मिता अभी शेष है, उसे भी जाना होगा। समाचारों में सुना उड़ीसा में एक तूफ़ान आने वाला है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। सोने से पूर्व का अंतिम कार्य है दिन भर का लेखा-जोखा लिखना, बरसों पुरानी आदत है सो डायरी और कलम जैसे अपने आप ही हाथ में आ जाते हैं। कर्नाटक में लॉक डाउन हटा लिया गया है पर शाम सात बजे से सुबह सात बजे तक आवागमन रुका रहेगा। एक ही दिन में आज डेढ़ सौ संक्रमित व्यक्ति मिले हैं। आज विष्णु पुराण में दिखाया गया कि ध्रुव को भगवान के दर्शन हो गए। छह वर्ष की आयु में इतना बड़ा संकल्प ! वह विष्णु भगवान से पूछता है, जीवन क्या है ? संसार क्या है ? परिवार क्या है ? आदि आदि। भगवान कहते हैं, जीवन एक वरदान है, एक उपहार, एक सौभाग्य भी ! संसार परमात्मा का साकार रूप है ! परिवार में वे लोग आते हैं जिनके प्रति हमारा मन आत्मीयता महसूस करे।  इस तरह तो सारा संसार  ही  उनका परिवार है।कम से कम एक भक्त के लिए तो ऐसा ही होना चाहिए।  जून को एओएल से नया काम मिला है, कल उनकी मीटिंग है।    


Tuesday, April 12, 2022

सपनों की दुनिया

आज देश के नाम प्रधानमंत्री का सम्बोधन था, कहा, चौथा लॉक डाउन होगा पर नए नियमों के साथ। उन्होंने देश को आत्म निर्भर बनाने की बात भी कही। सुबह उठी तो भीतर मौन था, एक शांति भरा मौन ! गुरूजी के लिए दोपहर को एक कविता लिखी, कल उनका जन्मदिन है, एओएल के हिंदी विभाग में काम करने वाले एक साधक ने उसे सजा दिया है। उसे भविष्य में अन्य कविताएँ भी भेजेगी। चाहे तो फ़ेसबुक पर एक पेज बना सकती है, जहाँ उनके लिए लिखी कविताएँ पोस्ट कर सके। जून छोटी भांजी के लिए लिखी कविता को सुंदर बना रहे हैं, जो अपना जन्मदिन गुरूजी के जन्मदिन के साथ साझा करती है। आज महाभारत में दुर्योधन भी मारा गया। अश्वत्थामा की मणि छिन गयी और उसे उसी पीड़ा के साथ अमर रहने का शाप मिल गया, इतना कठोर दंड ! 


शाम को टहलने गए तो मास्क लगाया था, जून को कठिनाई होती है; पर अभी कोरोना का डर गया नहीं है, न ही कोई दवा आयी है इसके इलाज के लिए। आज काव्यालय के संस्थापक कवि का मेल आया, उनकी एक पुस्तक आयी है, उनकी कविताओं को पढ़कर वह कुछ पंक्तियाँ उन्हें नियमित भेज रही है, उन्हें अच्छा लगा। वाक़ई उनकी हर कविता में एक नया अन्दाज़ है। आज शाम से पूर्व उन्होंने आधा घंटा योग व पुस्तकालय कक्ष में बैठकर पढ़ने के लिए और रात्रि में सोने से पूर्व कुछ समय बालकनी में  बैठने के लिए निकाला है , ताकि उनके घर का हर कोना आबाद रहे। कहीं सुना था कि घर के वे कोने जहाँ कोई नहीं जाता, नकारात्मक ऊर्जा से भर जाते हैं। आज सुबह नींद खुली उससे पूर्व एक स्वप्न में मृणाल ज्योति में खुद को पाया, उसका फ़ोन कहीं छूट गया है, जून से कहा फ़ोन करें, तब विचार आया यह स्वप्न है और नींद खुल गयी। दो दिन पहले एक विचित्र स्वप्न देखा था, जिसमें बहुत सारे हाथी हैं, जीवित भी और चारों तरफ़ आलमारी में उनके छोटे-बड़े चित्र भी। एक हाथी उसे कुचलने के लिए बढ़ता है पर ज़रा भी भय नहीं लग रहा, वह उसके पैरों के नीचे है पर कोई दर्द नहीं हो रहा फिर एक बच्चे के साथ उड़ जाती है, उड़ते समय देह में नहीं है पर साथ में जो बच्चा है उसका गोरा चेहरा और काले बाल स्पष्ट दिखे।


सुबह उपनिषद गंगा में ‘सत्यकाम’ की कहानी देखी, शाम को विष्णु पुराण में ‘ध्रुव’ की। दोपहर को जून ने ‘रजनीगंधा; लगायी यू ट्यूब पर, अमोल पालेकर की फ़िल्म। शिव सूत्र सुना, पढ़ा भी। शाम से मन की समता हटी नहीं है, पहले जून की थोड़ी सी नाराज़गी से मन कैसा व्याकुल हो जाता था, अब वह पुरानी बात हो गयी है। हर कोई अपने सुख-दुःख का निर्माता है, यदि वे नहीं चाहते कि दुखी हों तो संसार की कोई भी बात उन्हें दुखी नहीं कर सकती और यदि उन्होंने तय ही कर लिया है कि उन्हें दुखी रहना है तो छोटी से बात को भी कारण बना सकते हैं। मई आधा बीत गया है, कोरोना संकट कम नहीं हो रहा है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, वह सिट आउट में बैठकर लिख रही है। हवा बंद है, कुछ देर पूर्व हल्की बूँदा-बाँदी हुई पर गर्मी कम नहीं हुई। कुछ देर पूर्व रात्रि भोजन के बाद वह टहलने गये तो एक घर से गुरूजी की आवाज़ में निर्देशित ध्यान की आवाज़ आ रही थी; कदम वहीं थम गए। एक घर से बाँसुरी की आवाज़ रोज़ आती है, कोई रात को अभ्यास करता है । सभी लोग घर में हैं तो ध्यान, संगीत आदि में समय बिता रहे हैं; इतना तो शुभ हुआ है लॉक डाउन के कारण। कल रात उसने जून से कहा, उसकी बातों को गंभीरता से न लें, आगे आने वाले सोलह वर्षों में ( उसे लगता है इतना ही जीवन शेष है) उसकी किसी भी बात को उन्हें सत्य मानने की ज़रूरत नहीं है, क्यंकि सत्य क्या है यह जिसको पता चल जाता है उसके लिए शेष सब असत्य हो जाता है। ‘ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या’ उक्ति तब हक़ीक़त नज़र आती है।  


Wednesday, April 6, 2022

उपनिषद गंगा


लॉक डाउन का तीसरा दौर  प्रारम्भ हो गया है। अब संक्रमण की दर बढ़ गयी है, भारत में अड़तालीस हज़ार व्यक्ति संक्रमित हो चुके हैं। अमेरिका में यह संख्या भारत से कहीं ज़्यादा है। रात्रि के सवा नौ बजे हैं, नन्हे से बात हुई, खाना बनाने की आज उसकी बारी थी, कह रहा था अभी वे लोग मेड व कुक को नहीं बुलाएँगे। खुद काम करने की आदत हो गयी है। घर भी साफ़ रहता है। अच्छा है, अपन हाथ, जगन्नाथ ! सुबह टहलते समय कुछ सुंदर जंगली गुलाबी पुष्प देखे थे, शाम को देखने गए तो वे सो गए थे, फूलों में इतना संज्ञान होता है, प्रकाश का स्पर्श उन्हें जगाता और सुलाता है। आज महाभारत में देखा भीष्म पितामह तीरों की शैया पर हैं, द्रोणाचार्य उनके पास आकर कहते हैं, वह उनसे पहले जाएँगे, कैसे महावीर थे वे लोग, मृत्यु का ज़रा भी भय नहीं था उन्हें ! जून को आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुसंधान विभाग में सेवा का कुछ काम मिल गया है। 


आज बुद्ध पूर्णिमा है, उनके वचन पढ़े, उनके उपदेशों पर आधारित दो आलेख भी लिखे। कल भागवद में कपिल मुनि द्वारा अपनी माँ देवहूति को दिये गये सांख्य शास्त्र के ज्ञान के बारे में पढ़ा था। सुबह गहरे ध्यान का अनुभव हुआ। दोपहर को वाणी का दोष हुआ तो कितनी शीघ्रता से जगाया किसी ने भीतर से। सुबह उठने से पूर्व कोई वाणी भीतर से कह रही थी, तुम वही हो ! ज्ञान उन्हें मुक्त करता है और गुरू भी ज्ञान स्वरूप है। आज नैनी काम पर नहीं आयी, उसने पूर्णिमा का उपवास रखा है ! कल असम से उसकी पुरानी नैनी का फ़ोन आया था। उनके योग ग्रुप की एक महिला का फ़ोन भी आया, जिन्हें कोर्स करने के लिए उसने बहुत बार कहा था आख़िर उन्होंने ऑर्ट ऑफ़ लिविंग  का बेसिक कोर्स ऑन लाइन किया, बहुत खुश थीं। 


आज सुबह टहलने गए तो रात की वर्षा के बाद सड़कें भीगीं थीं। मधु मालती की एक बेल और कंचन का एक वृक्ष पूरे खिले थे, उनकी तस्वीरें उतारीं। टीवी कार्यक्रम ‘उपनिषद गंगा’ में आज का अंक दारा शिकोह पर था, जिसने उपनिषदों का अध्ययन किया था। उसकी मृत्यु का दृश्य देखा, वह आत्मा का ज्ञान पाकर भीतर से मुक्त हो गया था। ‘महाभारत’ में कर्ण ने अर्जुन को मारने का अवसर गँवा दिया क्योंकि सूर्यास्त हो गया था, वह नियमों के अनुसार युद्ध करना चाहता है, संभवतः वह अर्जुन को मारना नहीं चाहता, वह जान चुका है कि अर्जुन उसका सगा भाई है। उसका जीवन कितने विरोधाभासों से घिरा है।


आज का एक दिन एक तरह से उसके लिए बहुत ख़ास है। पूरे पचपन दिनों के बाद वह जून के साथ कार से सोसाइटी के मुख्य गेट से बाहर गयी। उन्होंने एक नर्सरी से गमलों के लिए पौधे ख़रीदे। वहाँ एक भोली-भाली सी लड़की मिली, भुवनशोम की नायिका जैसी। सुबह  छोटी भांजी के स्नातक होने पर पूरे परिवार की एक ज़ूम मीटिंग हुई, अच्छा लगा। शाम को दो पुराने मित्र परिवारों को भी ज़ूम पर देखा। गुरूजी की संजय दत्त से बातचीत का वीडियो देखा। मोबाइल और कम्प्यूटर सबके जीवन का अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं। 


आज नैनी एक फार्म हाउस से, जहाँ उसका पति काम करता है, ताज़ा हरा कुम्हड़ा, आँवला और कच्चे आम लायी। कुम्हड़े की सब्ज़ी, आम की मीठी चटनी और आँवले का अचार उसने बना लिया है। शाम को निकट स्थित खेत से कच्चा कटहल लाए, पहले तो माली तोड़ने को तैयार नहीं था, कहने लगा पकने पर यही दो सौ में बिकेगा, यहाँ सभी इसे पका हुआ खाते हैं। गाँव के निकट रहने के कितने लाभ हैं। 


Tuesday, March 29, 2022

उलूक शावक



आज सुबह तेज वर्षा हुई। दोपहर को मॉडेम बदलने मकैनिक आया, लगभग एक महीने बाद इंटर्नेट काम करने लगा है। जून ने नन्हे से घर के वाई फ़ाई सिस्टम के बारे में बात की, मॉडेम ख़राब होने के कारण घर की बत्तियाँ और फ़ैन आदि गूगल होम से नहीं चल रहे थे।इस  गूगल होम ने भी कितना आरम्पसंद बना दिया है लोगों को। आज दोपहर को नीतू सिंह के बचपन की ‘दो कलियाँ’ फ़िल्म देखी, वर्षों पूर्व  इसके बारे में सुना था, पर कभी देखने का मौक़ा नहीं मिला। उत्तर रामायण में दिखाया गया कि लव-कुश का जन्म हो चुका है और राम भी राज-काज में रुचि दिखा रहे हैं। शाम को वर्षा थमी तो टहलने गये, सड़कें  धुलीं हुई थीं और पेड़ कुछ ज़्यादा हरे लग रहे थे। प्रकृति का कुछ पलों का संग-साथ मन को सुकून से भर देता है, परमात्मा की पहली झलक साधक को कुदरत में ही मिलती है। 


आज सुबह समाचार मिला कि ऋषिकपूर का  देहांत हो गया है। उनके लिए श्रद्धांजलि  स्वरूप कुछ लिखा। दो वर्ष पूर्व हुए मस्तिष्क के एक असामान्य रोग के कारण प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता इरफ़ान का भी कल ही देहांत हुआ था। दोनों कलाकारों को चाहने वाले लाखों  की संख्या में होंगे, सभी उदास हैं।जीवन के साथ मरण भी जुड़ा है और हर किसी को एक न दिन विदा होना है, हर मृत्यु उसे इस बात को और गहराई से याद दिला जाती है।  विश्व भर में कोरोना के मरीज़ भी बत्तीस लाख हो गए हैं। दो लाख से अधिक लोग अपनी जान गँवा बैठे हैं। मरने वालों में अधिकतर या तो वृद्ध हैं या रोगी। पूरे विश्व में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो अनेक कष्टों का सामना करते हुए जीवन को किसी तरह बचा भर पा रहे हैं; जिनकी रोज़ी-रोटी छिन गयी है। यह प्रलय से कम विषम स्थिति नहीं है। आधुनिक काल की प्रलयंकारी स्थिति शायद वायरस ही ला सकते हैं। आज दो पुराने मित्र परिवारों से वीडियो कॉल पर देर तक बात हुई। ज़ाहिर है कोरोना की भी बातें हुईं, एक ने कहा बाहर से आने वाले किसी भी सामान के साथ वायरस घर में आ सकता है।अभी तक तो उनकी सोसाइटी में कोई केस नहीं आया है। 


आज मज़दूर दिवस पर एक रचना ब्लॉग पर प्रकाशित की। टीवी पर ‘सारा आकाश’ देखी, इसके बारे में भी काफ़ी सुना था दशकों पूर्व।सरकार ने लॉक डाउन की अवधि बढ़ा दी है। अमेरिका में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। भारत में कुल अड़तीस हज़ार मरीज़ हैं। अब मरीज़ों की संख्या में वृद्धि शीघ्रता से हो रही है। जून ने नन्हे से कहा कि शाम को वह उसके यहाँ जाने वाले थे, तो वह चुप ही रहा। कोरोना का भय इतना ज़्यादा है कि वह नहीं चाहता वे कहीं बाहर निकलें, सभी लोग न कहीं आना चाहते हैं न किसी को बुलाना ही चाहते हैं। आज प्रातः काल भ्रमण के समय छोटा सा उलूक शावक दिखा, कल उसकी माँ या पिता  यानि  एक बड़ा उलूक देखा था। ढेर सारे बगुले भी देखे, आदमी सड़कों पर नहीं निकल रहे हैं तो पक्षी निर्भीक होकर घूम रहे हैं। आज महाभारत में कृष्ण का अर्जुन को गीता उपदेश आरम्भ हो गया है और रामायण में लव-कुश राम को अपना परिचय दे देते हैं। कल रामायण का अंतिम एपिसोड आएगा। उसके बाद श्रीकृष्ण धारावाहिक प्रसारित किया जाएगा। राम और कृष्ण जैसे भारत के कण-कण  में बसे हैं, उन्हें याद किए बिना कोई दिन पूरा नहीं होता।  


जून को भी आर्ट ऑफ़  लिविंग में एक सेवा का काम मिल गया है। वह कम्प्यूटर पर ज़ूम इंस्टाल कर रहे हैं। विभिन्न परियोजनाओं के लिए फ़ंडिंग करने वाले संयोजकों को ढूँढना है। उसके पहले प्रोजेक्ट योजना बनानी हैं, उन्होंने काम शुरू कर दिया है। उसका अनुवाद कार्य भी चल रहा है, सेवा का छोटा सा कार्य भी संतुष्टि की भावना को दृढ़ करता है। आज सुबह गाँव से नैनी ढेर सारे आँवले लेकर आयी, हरे, ताजे, बड़े आकार के, कुछ का अचार बनाया है। कल भुट्टे व कुम्हड़ा लायी थी, गाँव के निकट रहने से ताजी सब्ज़ियाँ मिल जाती हैं। आज इसी सोसाइटी में उगे तीन नारियल भी ख़रीदे।   


रात्रि के नौ बजे हैं, आज शाम वे लगभग दो महीने बाद मुख्य  गेट से बाहर निकले। दायीं ओर कुछ दूरी पर सब्ज़ी की दो नयी दुकानें देखीं। लोग सामान्य दिनों की तरह आ-जा रहे थे। सड़कों पर चहल-पहल थी, पर पता नहीं इसका परिणाम पता नहीं क्या होगा। दिल्ली में भी दुकानें खुल गयी हैं , कुछ विशेष दुकानों के आगे लोगों को लम्बी-लम्बी क़तारें लगी हैं। आज सुबह गाड़ी धोने वाले के साथ एक माली आया, गमलों में निराई कराके सूखा गोबर डलवाया, बड़ी ख़ुशी-ख़ुशी कह रहा था आज से दुकानें खुल गयी हैं। शायद वह भी वहीं जाएगा, लोग पैसा देकर विष ख़रीदते हैं, आदत ही तो है। आज शाम से थोड़ा पहले भुवन शोम फ़िल्म देखी कुछ देर, बहुत अच्छी लगी, प्रिंट पुराना है पर अभिनय अनोखा। आज से दूरदर्शन पर ‘उपनिषद गंगा’ भी दिखाया जा रहा है।


Wednesday, March 23, 2022

प्लूमेरिया के फूल



आज रामायण का अंतिम अंक प्रसारित होगा, कल से उत्तर रामायण शुरू होगी। आज सुबह मोबाइल पर एक सखी के भेजे सुबह के संदेश की घंटी सुनकर नींद खुली, जो परमात्मा की याद दिला गयी। दोपहर बाद नन्हे से बात हुई, उनकी कम्पनी ने अगले छह महीनों के लिए कर्मचारियों का वेतन कम करने का निश्चय किया है। सीनियर्स का वेतन पचास प्रतिशत, उसके नीचे क्रम से तीस, बीस प्रतिशत तक कम करते जाएँगे। जिनका वेतन पहले ही  कम है उनका  नहीं कटेगा। कोरोना का असर अगले छह महीनों तक तो रहने ही वाला है, इसके भी आगे जाएगा, शायद आने वाले कई वर्षों तक। वैसे भारत में लॉक डाउन का अच्छा प्रभाव देखने को मिल रहा है। मोदी जी के प्रयास की प्रशंसा हो रही है। उनके लिए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। कोरोना के मामले पर अमेरिका और चीन का आमना-सामना हो रहा है। अमेरिका में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं जैविक हथियार की तरह इसका इस्तेमाल किया है चीन ने उसके ख़िलाफ़। एक न एक दिन चीन को इसका जवाब तो देना ही पड़ेगा। 


रात्रि  के नौ बजने वाले हैं। भ्रमण के लिए निकले तो रात की रानी के फूलों की गंध लिए ठंडी हवा बह रही थी। आजकल ढेर सारे फूल खिल रहे हैं  वसंत का मौसम है न, गुड़हल के पाँच रंग के फूल, लिली के दो ग्लोब के आकार के फूल और पारिजात तो रोज़ सुबह पूजा के लिए  मिल जाते हैं। शाम को आकाश में नारंगी सूर्यास्त देखा, प्लूमेरिया के फूलों से वृक्ष भरे हुए थे। सुबह पीछे वाले गेट से बाहर निकल कर खेतों की तरफ़ गये, तोरई के खेत देखे। वहाँ एक नई कालोनी भी बन रही है, धीरे-धीरे खेतों की ज़मीनें मकान बनाने के लिए बिकती जा रही हैं। वापस लौटते समय प्याज़ का एक खेत देखा। अचानक एक चील पक्षी ने सिर पर तेज़ी से प्रहार किया, पर न तो चोंच से न ही पंजे से, केवल पंखों से दबाव डाला और उड़ गया, फिर जाकर सामने  पेड़ पर बैठ गया। इतना सब होने में मात्र कुछ पल ही लगे होंगे। दूर से उसकी तस्वीर भी ली। संभवतः खेत के निकट ही उसका घोंसला रहा होगा, वह अपने बच्चों के लिए भयभीत हुआ होगा। सुबह उत्तर रामायण में कौशल्या और राम का अद्भुत संवाद सुना। 


आज शाम को नापा से सटे हुए खेत से तोरई, चीकू और नारियल ख़रीद कर लाए। माली ने उसी समय तोड़ कर दिए। आम के बगीचे से कच्चे आम भी कल मिले थे, उनका अचार बनाया है। आज पृथ्वी दिवस है, धरती माता ने अनगिनत उपहार मानव को दिए हैं। छोटी ननद से बात हुई, उसने बताया, बैंक खुलते हैं पर ग्राहक नहीं आते, लोग घरों से निकल कर संक्रमण का शिकार होना नहीं चाहते। जून ने पहली बार घर पर ही केश काटे। 

आज बहुत दिनों के बाद वर्षा हो रही है,  शाम से ही  बादल छाने लगे थे। उत्तर रामायण में  राम सीता का त्याग करके बहुत दुखी हैं, जनक उनसे मिलने आए हैं। लक्ष्मण भी भाई के दुःख से दुखी हैं। महाभारत में युद्ध का आरम्भ होने ही वाला है। आज दोपहर को गुरूजी द्वारा कराया ध्यान किया, जब से तालाबंदी हुई है, वह दोपहर व शाम दोनों वक्त ध्यान कराते हैं। आज से नैनी काम पर आने लगी है, घर काफ़ी साफ़ हो गया है और उनका काम कुछ आसान हुआ है। काफ़ी समय मिला तो कई मित्रों व सम्बन्धियों से देर तक फ़ोन पर बात की।  पिताजी ने उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ा।  


Friday, March 18, 2022

पीली मूँग



आज शाम साढ़े  पाँच बजे ही वर्षा आरंभ हो गयी। घर के दायीं तरफ़ बने गोदाम की टिन की छत पर बूँदों की बहुत तेज आवाज़ होती है, जैसे ओले गिर रहे हों। वर्षा रुकी तो वे जैकेट पहनकर टहलने गए, तेज हवा बह रही थी, हवा में ठंडक भी थी। बायीं तरफ़ की पड़ोसिन वर्षा में ही छाता लेकर टहलने निकल पड़ी थीं, उनका कहना है कि शाम को एक तय समय ही उन्हें मिलता है, यदि वह बीत गया तो बाद में व्यस्तता के कारण टहलना छूट जाता है। कल उसने ब्लॉग पर व फ़ेसबुक पर नींद पर एक कविता लिखी थी, कइयों को भायी है, शायद नींद ना आना सबकी समस्या है।संभवतः अवचेतन मन में कोरोना का भय परेशान कर रहा हो। आज जून ने सिंधी दाल बनायी पीली मूँग की, बनाते समय कितनी बार माँ को याद किया, बचपन सदा किसी न किसी रूप में हरेक के साथ चलता है। शायद सरकार लॉक डाउन की अवधि को बढ़ाने वाली है, कई राज्यों ने पहले ही ऐसा कर दिया है। सरकारें काफ़ी सहायता भी प्रदान कर रही हैं, ताकि काम न होने पर भी निर्धन, मज़दूर आदि अपना जीवन ठीक से चला सकें। कितने लोगों का व्यापार ठप्प हो गया है । टैक्सी ड्राइवर, होटल सभी जगह किसी की कमाई नहीं हो रही। सभी स्कूल शायद सितम्बर तक बंद रहेंगे। अमेरिका को भारत क्लोरोकविन भेज रहा है, इस समय सभी को सभी की मदद करनी है। 


आज हफ़्तों बाद वे रात्रि के भोजन के बाद बाहर टहलने निकले। चौकीदार के अलावा कोई नहीं था, जबकि शाम को इक्का-दुक्का लोग थे। यदि यह महामारी न हुई होती तो आजकल वे गुजरात में होते।इंडिगो ने कहा है कि अगले वर्ष तक वे कभी भी टिकट का इस्तेमाल कर सकते हैं। सुबह घर की साप्ताहिक सफ़ाई की, तीनों बरामदे, सभी कमरे, किचन, गैराज, सभी स्नानघर, पूरे तीन घंटे लग गए। बर्तन और कपड़े तो मशीन से धुल जाते हैं। महामारी ने एक काम तो अच्छा किया है, सभी को घर का काम करना सिखा दिया है। खाना बनाने से कपड़े धोना, झाड़ू-पोछा तक सब कुछ।सभी आत्मनिर्भर बनें यह तो अच्छा ही है। नाश्ते में कुछ देर हो गयी पर अब जून भी जल्दी नहीं मचाते, आराम से अख़बार पढ़ते रहते हैं। सभी जगह तालाबंदी है, सभी एक सी समस्या का सामना कर रहे हैं, इसलिए जैसे दुनिया एक अदृश्य सूत्र में बंधकर  कुछ निकट आ गयी है। मोदी जी ने अपने सम्बोधन में कहा, तीन मई तक तालाबंदी बढ़ा दी गयी है। ज़्यादातर राज्यों ने इसका स्वागत किया है। अभी भारत में कोरोना के ग्यारह हज़ार मरीज़ हैं। छोटी बहन से बात हुई, उनके अस्पताल को विशेष कोरोना अस्पताल में बदल दिया गया है, कल उसका कोरोना टेस्ट भी हुआ। 


शाम को एक दुखद घटना सुनने को मिली, इसी सोसाइटी में एक युवक की मृत्यु हो गयी, कहा गया कि उसने  आत्महत्या कर ली, पिता दुबई में रहते हैं, माँ से उसका किसी बात पर झगड़ा हुआ था, वह ऊपर के फ़्लोर पर रहता था और माँ नीचे।  कितना अजीब लगता है सुनकर कि इस आपद काल में भी लोग इतने नादान हो सकते हैं। शायद वह बीमार रहा हो, पता नहीं उसे दवा भी मिली हो या नहीं। नन्हे और सोनू से नियमित फ़ोन पर बात होती है, एक ही शहर में रहने के बावजूद पिछले एक महीने से मिलना नहीं हुआ है। आज सुबह नींद खुलने से पहले एक मधुर घंटी की ध्वनि सुनायी दी, कौन था जो इतने प्रेम से जगा रहा था। दो तीन दिन पहले भी एक आवाज़ सुनकर नींद खुली थी जिसका स्रोत नज़र नहीं आया। परमात्मा के पास हज़ार साधन हैं, वह कुछ भी कर सकता है ! रामायण में राम-रावण युद्ध आरम्भ हो गया है। आज दीदी ने फ़ोन किया उनके यहाँ महरी ने आना शुरू कर दिया है, अख़बार भी आने लगा है। 


Tuesday, March 8, 2022

बदलियों के रंग

 

आज नौ बजे उन्होंने ग्यारह दीपक जलाए। आज के रामायण के अंक में राम का हनुमान से प्रथम मिलन दर्शाया गया है। रामायण और महाभारत देखने से दिन काफी भरा-भरा लगता है. मन में राम और कृष्ण का स्मरण बना रहता है. शाम को मास्क पाहन कर टहलने गयी तो शुरू में थोड़ी दिक़्क़त हुई पर बाद में अभ्यास हो गय। अभी आगे कई महीनों तक ऐसे ही चलेगी ज़िंदगी। कोरोना के ख़िलाफ़ इस युद्ध में हर भारतीय को अपना योगदान देना है। अमेरिका ने भारत से कोरोना के लिए दवा की मांग की है, जो भारत अवश्य ही भेज देगा. लगता है सरकार को लॉक डाउन की अवधि बढ़ानी पड़ेगी. आज जून ने भी एओएल को कुछ आर्थिक सहयोग दिया, वे लोग दिहाड़ी मज़दूरों को भोजन आदि बांट रहे हैं। 

 


इस समय यहाँ मूसलाधार वर्षा हो रही है, गर्जन-तर्जन के साथ, रह-रह कर बिजली चमकती है और बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनायी देती है। बंगलूरू में इस नए घर में यह उनकी पहली बारिश है, लगभग एक घंटा पहले आरंभ हुई। एक-एक करके सारी खिड़कियाँ बंद कीं। छत पर लकड़ी के झूले को बचाने के लिए जो शेड बनाया है, वह भी तेज बौछार से उसकी रक्षा  नहीं कर सका। दोपहर बाद ‘इंगलिश मीडियम’ देखी, सिनेमा हाल बंद हैं सो हॉट स्पॉट पर इसे रिलीज़ कर दिया गया है। शाम को पार्क में फूलों के सूखते हुए पौधों को देखा था, इंद्र देवता ने इतना पानी बरसा दिया कि धरती-पौधे सब तृप्त हो गये हैं। 


आज सुबह गैराज में एक कौए ने कबूतर पर हमला कर दिया। घर के अंदर से देखा तो उसे भगाया। कबूतर घायल था, कौए  ने उसके पंख नोच दिए थे। वह एक कोने में छिपने गया, उड़ नहीं पा रहा था, रास्ते में रक्त की बूँदें गिरती जा रही थीं, उसे पानी दिया पर पी नहीं सका। एक चौकीदार के द्वारा उसे डिस्पेंसरी भेजा। पता नहीं उसका क्या हुआ होगा. 


वर्षा के कारण बालकनी पर बनी शीशे की छत और सोलर पैनल अपने आप धुल गए हैं.  मौसम भी ठंडा हो गया है.आज शाम टहलने गए तो आकाश पर गुलाबी बादल थे, बिलकुल मसूर की दाल के रंग के बादल, जो नीले पृष्ठभूमि में बहुत आकर्षक लग रहे थे. रंगों का यह खेल प्रकृति के हर क्षेत्र में खेला जा रहा है. अनगिनत रंगों की तितलियाँ, मछलियां, पंछी, फूल और कीट, सर्प यहाँ तक कि जड़ पत्थरों को भी अनोखे रंगों से सजाया है प्रकृति ने, मानव इनकी ओर देखे तो सारा कष्ट भूल जाये पर उसके पास चाँद -तारों को निहारने का समय नहीं है, कुछ लोग बन्द कमरों में टीवी पर हिंसा और नफरत के खेल देखने में ही व्यस्त हैं. आज सुबह हरसिंगार के ढेर सारे फूल उठाये.  


रात्रि के नौ बजे हैं. हनुमान जी को जाम्बवान उनकी भूली हुई शक्तियों को याद दिला रहे हैं, बचपन में एक ऋषि ने उन्हें शाप दे दिया था, जिससे वे उन्हें भूल ही गए हैं. बाल्यावस्था में उन्हीं ने एक बार सूर्य का भक्षण किया था, यह भी उन्हें याद नहीं है. वे भी पूर्वकाल में कितनी ही बाधाओं को पार करके आएये हैं पर कोई नयी विपत्ति आने पर यह भूल जाते हैं. आज भी छिटपुट वर्षा हुई, शाम को आकाश सलेटी-काले बादलों से भरा था. हनुमान जी को अपना बल याद आ गया है और वे सागर पर जाने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्हें राह में मैनाक पर्वत मिलता है, जिसे समुद्र देव ने कुछ देर विश्राम के लिए भेजा है. सागर भी राम के कुल का ऋणी है और मैनाक की रक्षा हनुमान के पिता ने  की थी. पहले लोग अपने प्रति की गयी भलाई को कितना याद रखते थे. 



Wednesday, March 2, 2022

दीया -बाती

आज इतवार है। वे प्रातः भ्रमण के लिए गए तो हवा में ठंडक थी, तापमान १८ डिग्री रहा होगा। सुबह का टहलना अभी तक तो चल रहा है लेकिन कब रोकना पड़े, कह नहीं सकते, टहलते समय बार-बार ऐसा लग रहा था जैसे क़ानून का उल्लंघन कर रहे हैं। कल शाम ही एक नोटिस आया था कि टहलना आवश्यक कार्यों में नहीं आता, छह महीने की सजा हो सकती है। भगवान ही जानता है स्थिति कब सामान्य होगी। अभी लॉक डाउन ख़त्म होने में दो हफ़्ते शेष हैं। इसके बाद भी क्या होने वाला है यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। आज एक पुरानी सखी से महीनों बाद बात हुई, सभी भाई-बहनों से भी फ़ोन पर बात हुई। आजकल सभी लोग घर में हैं और सभी के पास समय है। फुफेरे भाई ने पुरानी तस्वीरें भेजीं, चाची के परिवार में सबसे बात हो गयी। विपदा में सब जैसे किसी एक तल पर बहुत क़रीब आ गये हैं। वापस आकर समाचार सुने, कोरोना पीड़ितों की संख्या  भारत में एक हज़ार हो गयी है। नौ बजे रामायण का तीसरा अंक देखा, अनेक बार देखने पर भी रामायण की कहानी नई जैसी लगती है। मोदी जी की “मन की बात’ सुनी। धीरे-धीरे दिल्ली में दिहाड़ी मज़दूरों व अशक्त लोगों के लिए जग-जगह रहने व खाने के इंतज़ाम हो रहे हैं। पहले वे लोग अपने-अपने गावों में जा रहे थे। पर वहाँ भी उनके लिए कौन स्वागत में बैठा होगा ? किसी भी तरह की विपदा हो उसका सबसे ज़्यादा और सबसे पहला असर मज़दूरों पर ही पड़ता है। जून ने पीएम केयर्स फंड में पैसे भेजे हैं। उन्होंने ग्रामीण लोगों की सहायता के लिए भी कुछ मदद की, दुकान तक भी गए। आर एसएस के कुछ लोग राशन ख़रीद कर निर्धन लोगों में बांट रहे हैं। इस समय सभी को सहायता के लिए आगे आना होगा। समाज के हर वर्ग को देश के लिए कुछ करने का अवसर मिला है। नन्हे से बात हुई, उसने कहा अभी काफ़ी समय लग जाएगा दुनिया को कोरोना से मुक्त होने में। न्यूयार्क में तीन से चार हज़ार लोग महामारी से पीड़ित हैं। 


रात्रि के नौ बजे हैं। कुछ देर पूर्व छत पर टहलने गये तो अष्टमी का सुनहला पीला  चाँद चमकीले सितारों के मध्य जगमगा रहा था। जैसे उसे कोई खबर ही नहीं है कि जिस धरती के वह चक्कर काट रहा है, उसे क्या हो रहा है? अर्थात उस पर रहने वाले मानव नाम के जीव पर क्या बीत रही है ?  शाम को सूर्यास्त भी देखा था। प्रकृति अपने कर्म में कभी नहीं चूकती, न जाने कितने युगों से रोज़ यह क्रम चल रहा है। आज दोपहर को अचानक तेज अंधड़ चला, मुश्किल से दो-तीन मिनट के लिए, पर ढेर सारे सूखे पत्ते छत पर, लॉन में और गैराज में फैल गए। शाम को झाड़ू लगाया। आजकल सफ़ाई कर्मचारी भी नहीं आ रहे हैं। 


आज रामनवमी है, गुरूजी ने राम ध्यान करवाया। सुबह क्रिया के दौरान सोहम का अर्थ स्पष्ट हुआ, अद्भुत थे वे क्षण ! प्रधान मंत्री ने अगले इतवार को देशवासियों को रात्रि नौ बजे नौ मिनट के  लिए दीपक, टार्च या मोमबत्ती जलाकर घर के द्वार या बालकनी में खड़े होने को कहा है। घर की बत्तियाँ बंद कर देनी हैं ताकि दीपकों का प्रकाश ज़्यादा प्रज्ज्वलित हो सके। कोरोना के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए सभी भारतवासियों को एकजुटता की शक्ति को महसूस करना है। सभी की चेतना जब एक होकर इस विपत्ति का सामना करने का निश्चय करेगी तभी उन्हें सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। 


Tuesday, February 22, 2022

सम्पूर्ण लॉक डाउन


सम्पूर्ण लॉक डाउन 

रात्रि के पौने नौ बजे हैं। आज जनता कर्फ़्यू सुबह सात बजे शुरू हुआ और  शाम को पाँच बजे सभी ने ताली, थाली और घंटी बजाकर डाक्टर्स को धन्यवाद दिया। भारत में कोरोना के मरीज़ों की संख्या छह सौ सत्तर हो गयी है। दो दिन बाद  उगादि का उत्सव है।

आज शाम को लोग सड़क पर आते-जाते दिखे। कोरोना के ख़िलाफ़ युद्ध में प्रधान मंत्री का अगला कदम है इक्कीस दिनों का पूरा लॉक डाउन। अगले तीन हफ़्तों तक सभी कुछ बंद रहेगा, स्कूल, कालेज, रेल, बस, दफ़्तर सभी कुछ। हवाई यात्रा भी। कोरोना वायरस जिस तेज़ी से फैल रहा है, उससे बचने का यही एक उपाय बचा है। उन्होंने कहा, यह वायरस जंगली आग की तरह फैलता है, हमें इस आग को बढ़ने से रोकना है। देशवासियों को प्रधानमंत्री के इस आह्वान का पालन करना है। जून ने अपने पुराने सहकर्मियों को शुभकामना संदेश भेजा। इस महामारी ने भौतिक दूरी बढ़ा दी है पर दिलों को जैसे नज़दीक ला दिया है। गुरु जी दिन में दो बार नियमित ऑन लाइन ध्यान करवा रहे हैं। कल से वे केवल प्रातः काल ही टहलने जाएँगे, शाम के वक्त लोगों से बचना कठिन है। कोरोना के मरीज़ को पहचानना बहुत मुश्किल है। यह पता ही नहीं चलने देता है और वह आदमी उसी तरह लोगों से मिलता है और दूसरों को वायरस दे देता है। प्रलय  के आने का यह काफ़ी वैज्ञानिक तरीक़ा है। यह प्रलय से कम नहीं है पूरी दुनिया के लिए। 


आज लॉक डाउन का पहला दिन था और पहला नवरात्र भी। दिन भर वे घर से नहीं निकले। नवरात्रि का उत्सव सभी अपने-अपने घरों में ही मना रहे हैं। नन्हे से बात हुई उनकी कम्पनी सरकार को सहयोग करते हुए डाक्टर्स को ऑन लाइन सलाह व इलाज के लिए प्रशिक्षित कर रही है।  


आज दूसरा दिन है। सुबह जब सड़क पर कोई नहीं था, लगभग अंधेरे में ही वे टहलने गये। उसने लौट कर ध्यान किया, शरीर के भीतर के अंगों पर धारणा की और धीरे-धीरे सब स्पष्ट होने लगा। मांस पेशियाँ, हड्डियाँ, रक्त वाहिनी और भीतरी अंग। कुछ सखियों से बात की। नन्हे और सोनू ने तय किया है कि वे बारी-बारी से भोजन बनाएँगे। उनका कुक नहीं आ रहा है न ही कामवाली दीदी। यहाँ भी मेड नहीं आयी। उसने सफ़ाई की, जून ने नाश्ता बनाया। ऐसे ही तीन हफ़्ते बीत जाएँगे। समाचारों में देखा, मज़दूर अपनी गठरियाँ सिर पर उठाए दिल्ली तथा अन्य बड़े शहरों से पैदल ही घर जाने के लिए निकल पड़े हैं। उनके पास काम नहीं है न ही घर। सरकार ने उनके लिए सहायता की घोषणा की है पर उन तक कैसे पहुँचेगी, जब सब कुछ बंद है। वे लोग जो इतने आराम से घरों में बैठे हैं, उनके कष्ट का अनुमान नहीं कर सकते। लेकिन जब से यह दृश्य देखा है हृदय में कैसी कचोट उठ रही है। फ़ोन पर जिससे भी बात करें कोरोना के सिवा कोई विषय ही नहीं बचा है बात का। आज से डीडी नेशनल व डीडी भारती पर रामायण व महाभारत दिखाए जाने शुरू हुए हैं। पिटूनिया के पौधे जो गोहाटी से लाए थे आज हैंगिंग गमलों में टांग दिये हैं। महीनों पहले ये गमले जून ने मँगवाए थे। रामायण में आज अरुंधती, वशिष्ठ मुनि के आश्रम में राम आदि छात्रों को सामवेद का गायन सिखा रही थीं। जीवन में भावना की कोमलता भी हो और कर्त्तव्य की कठोरता भी, तभी जीवन पूर्ण बनता है। अन्य छात्रों के साथ चारों राजकुमार भी श्रम करते हैं और योगासन करते हैं। वे सरस्वती की वंदना कर रहे हैं; मानव देह में जो आध्यात्मिक शक्तियाँ हैं वे किसी अन्य योनि में नहीं !  


Tuesday, February 15, 2022

ताली और थाली


सुबह पाँच बजे ही वे उठ गये थे, होटल के कमरे से ही सूर्योदय का दृश्य दिखायी दे रहा था। झील तक गये तो सूर्य का नारंगी गोला नीले आकाश के साथ झील के पानी में भी सुशोभित हो रहा था। उन्होंने सुंदर तस्वीरें उतारीं और नाश्ते के बाद वापसी की यात्रा आरंभ की। रात्रि ग्यारह बजे घर पहुँचे तो नन्हा और सोनू प्रतीक्षा रत थे। पौधों का कार्टन रात्रि को ही खोल दिया था, सुबह पिटूनिया के पौधे रोप दिए। शेष बचे पौधों के लिए नन्हे ने नए गमले आर्डर कर दिये हैं। गुरूजी आश्रम से लाइव टेलीकास्ट के द्वारा संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा, कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं है, पर सावधान रहना है; कम से कम दिन में दो बार ध्यान करना चाहिए। घर में रहकर समय का सदुपयोग हो इसलिए नई भाषा सीखनी चाहिए, नई किताबें पढ़नी चाहिए। कल नन्हे ने एक नयी किताब दी है, बैटल बियोंड कुरुक्षेत्र: ए महाभारत नॉवल, जो द्रौपदी को केंद्र में रखकर लिखे गए मलयालम उपन्यास का अंग्रेज़ी अनुवाद है। कल से पढ़ना आरंभ करेगी।  कोरोना के  कारण छोटा भाई केरल नहीं जा रहा है। उसने कुछ पंक्तियाँ लिखीं इसी महामारी पर। आर्ट ऑफ़ लिविंग  के हिंदी सेक्शन ने कुछ अनुवाद कार्य उसे दिया है। गुरु जी के भाषणों से कुछ अंश लेकर ‘हिम्मत ना हारिये’ इस पर एक लेख भी  लिखना है। देश भर में भी काफ़ी कदम उठाए गये हैं इस सिलसिले में। कई देशों में तो सब कुछ ही बंद हो गया है, केवल ज़रूरी सामानों की दुकानें खुली हैं। सुबह भागवद में सृष्टि रचना के बारे में सुंदर विवरण पढ़ा। देवताओं की सहायता से परमात्मा इस सृष्टि को चलाते हैं पर वह हर जगह स्वयं रहते हैं। उनकी उपस्थिति के बिना देवता भी कुछ नहीं कर सकते। 


आज शाम छोटी बहन से बात हुई। उसे शारजाह जाना है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए डाक्टर्स को  विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। यह वायरस जानवर से मानव में पहुँचा फिर मानव से अन्य मानवों में और अब तो पूरे विश्व में एक सौ पैंतालीस देशों में पहुँच गया है। कुछ देर पहले मोदी जी का देश के नाम संदेश सुना। उन्होंने महामारी से बचने व औरों को बचने के उपाय सुझाए। बाइस मार्च को जनता कर्फ़्यू के लिए कहा जो सुबह सात बजे से रात्रि नौ बजे तक होगा, और शाम को पाँच बजे, दिन-रात बचाव के लिए लगे डाक्टर्स तथा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ताली या थाली बजाकर धन्यवाद देने को कहा। उनका भाषण आत्मीयता से भरा हुआ था और देशवासियों को सही समय पर सचेत करने का बहुतर प्रशंसनीय प्रयास था। गुरूजी ने भी सुंदर संदेश दिया। कुछ दिनों के लिए सभी को अवसर मिला है कि अपने साथ रहें, विश्राम में रहें और बुद्धि को भी विश्राम करने दें। उन्होंने सेवा भाव को जगाने का सुंदर संदेश भी दिया।जो निर्धन हैं, जो रोज़ काम करके  अपना गुज़ारा करते हैं, इस विपदा को कैसे उनकी मदद करने के अवसर में बदला जा सकता है । नन्हे ने बताया, उसकी टीम ने चायनीज टीम के साथ बात की, वहाँ कई लोग इसलिए मर गए क्योंकि उनका इलाज ही नहीं हो पाया, वहाँ अस्पताल कोरोना मरीज़ों से भर गये थे। आज वे टहलने गए तो पूरी सड़क ख़ाली थी। अगले दो हफ़्तों तक काफ़ी सजग रहना होगा। भारत में कोरोना मरीज़ों की संख्या दो सौ बयालीस हो गयी है और पाँच की मृत्यु हो गयी है। सारा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। अमेरिका में एशियन के ख़िलाफ़ क्रोध भर गया है। चायना के प्रति भी कई लोग क्रोधित हैं। इसकी शुरुआत वुहान से हुई थी जो चीन में है।  ‘लॉक एंड की’ का अगला अंक देखा, काफ़ी प्रभावशाली है यह धारावाहिक। 


Tuesday, February 8, 2022

उमियम झील के किनारे



परसों वे ‘होलिका दहन’ का आयोजन  देखने गए थे, जो नापा में बड़े ही शानदार तरीक़े से मनाया गया। अगले वर्ष वे भी कुछ मिठाई आदि लेकर जाएँगे। जल्दी आना पड़ा क्योंकि सुबह फ़्लाइट पकड़नी थी असम के लिए। कल सुबह दस बजे होटल पहुँच गये। दोपहर को जूरन में शामिल हुए। असम में विवाह से एक दिन पहले यह रीति होती है। शाम की काकटेल पार्टी भी अच्छी थी, पुराने-नए फ़िल्मी गानों की धुन पर सभी नाच रहे थे। शाम को विवाह है, फिर विशेष भोज। आज दोपहर को सोनू के घर जाना है। जून यहाँ स्थित कम्पनी के दफ़्तर चले गए हैं, जहाँ वे पहले सेवाकाल में कई बार आ चुके हैं। टीवी चल रहा है, मध्यप्रदेश में सरकार गिरने वाली है।ज्योतिराव सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये हैं, उनके साथ कई एमएलए भी आ गये हैं।, पिछले कई वर्षों से कांग्रेस में उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा नहीं मिल रहा था, ऐसा उनका कहना है। मानव स्वभाव हर जगह एक सा ही होता है, जहाँ सम्मान न मिले तो व्यक्ति वहाँ रहना नहीं चाहता। 


‘लोभ से भरा मन साधक नहीं हो सकता। इस जगत में पकड़ने जैसा कुछ भी नहीं है, दर्शक की तरह यहाँ से गुजर जाना है।’ टीवी पर ये सुंदर वाक्य सुने अब आकाशवाणी पर समाचार आ रहे हैं। कोरोना अब महामारी बनता जा रहा है। प्रकृति में संतुलन के लिए समय-समय पर अतीत में भी महामारी फैलती रही है। आज सुबह वे जल्दी उठ गये। टहलने गए तो हवा में हल्की ठंडक थी। कम से कम सौ लोग और भी थे उस सड़क पर, जिसे सुबह के समय ट्रैफ़िक के लिए दोनों ओर से बंद कर दिया गया था। कई बड़े शहरों में प्रातः भ्रमण के लिए ऐसा ही प्रबंध होता है आजकल। कुछ लोग खेल रहे थे, कुछ साइकिल चला रहे थे और कुछ व्यायाम भी कर रहे थे। कल शाम विवाह का सुंदर आयोजन सम्पन्न हो गया। अहोम तथा कश्मीरी दोनों तरह की रीति से विवाह हुआ। कई पुराने परिचित लोगों से मुलाक़ात हुई। 


आज वे उमियम झील यानि ‘बड़ा पानी’ में आ गये हैं। गोहाटी से शिलांग पहुँचने से लगभग बारह किमी पहले मीठे पानी की यह एक बड़ी सी झील है, जिसके किनारे सुंदर विश्राम स्थल बन गए हैं। एक रात वहाँ  गुजरने का इरादा है। हिमालय की अचल पर्वत शृंखला के सान्निध्य में स्थित यह शांत झील एक आकर्षक पर्यटक स्थल है। सब कुछ कितना स्थिर लग रहा है। यह पर्वत न जाने कितने काल से ऐसे ही खड़े हैं। दोपहरी का समय है। झील का हरे रंग का पानी भी जैसे विश्राम कर रहा है। किनारों पर उगे चीड़ के वृक्ष भी मौन हैं, जिन पर लगे कोन धूप में चमक रहे हैं । कुदरत का यह सुंदर दृश्य जैसे उन्हें अपने भीतर की स्थिरता को महसूस करने के लिए आमंत्रण दे रहा है। कभी-कभी पंछियों  की आवाज़ें निस्तब्धता को भंग कर देती हैं, झींगुर की आवाज़ भी वातावरण को और अर्थवान बना रही है।  एक श्वेत तितली काफ़ी ऊँचाई पर उड़ रही है। वह प्रकृति की इस लीला को निहार ही रही थी कि अचानक हवा बहने लगी, कुछ वृक्ष मस्ती में झूम रहे हैं।


Tuesday, February 1, 2022

बादामी गुफ़ाएँ

बादामी गुफ़ाएँ

रात्रि के दस बजकर दस मिनट हुए हैं। सुबह छह बजे वे उत्तरी कर्नाटक स्थित बादामी गुफ़ाओं की यात्रा के लिए रवाना हुए। छठी  शताब्दी में बने ये गुफा मंदिर देखने वाले को चकित कर देते हैं। तत्पश्चात बनशंकरी मंदिर में नींबू की माला पहने हुए देवी की भव्य मूर्ति के दर्शन किए। अगला पड़ाव था पट्टकदलु, जहाँ मंदिर के अवशेष मात्र ही थे। कुडल संगम, आईहोले, बसवा तीर्थ (बसवन्ना ) अनुभव मंटप तथा संग्रहालय के प्रांगण में स्थित सुंदर मूर्तियाँ भी देखीं।बसन्ना भगवान की जीवन कथा सुनी, उनके वचनों की पुस्तक मंगायी है। बारहवीं शताब्दी का यह संत अपने समय से बहुत आगे था। उनके मन में किसी भी प्रकार का  कोई भेदभाव नहीं था।  लौटे तब अँधेरा हो गया था । कल हम्पी जाना है, जहाँ विजयनगर साम्राज्य के अवशेष आज भी हज़ारों दर्शकों के आकर्षण के केंद्र बने हैं।   


आज वे घर लौट आए हैं। कल रात नौ बजे चली हम्पी एक्सप्रेस सुबह समय से पूर्व ही आ गयी थी । कल दिन भर कड़ी धूप में छाता व टोपी लगाकर मीलों पैदल चलते हुए वास्तुकला के सुंदर नमूने देखे, जो भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। सुबह का नाश्ता नन्हे के घर पर किया। बड़ी ननद का फ़ोन आया। वे लोग बिटिया का रिश्ता टूटने से, बल्कि तोड़ने से खुश हैं। समाज बदल रहा है। लड़कियों को अपना सम्मान करना आ रहा है। वे विवाह करके ग़ुलामी का जीवन नहीं बिता सकतीं। उनका आत्मसम्मान उन्हें औरों के आगे बेवजह निरीह बनकर रहने  नहीं देगा। जितना अधिकार अपनी बात कहने का किसी लड़के या पुरुष को है, उतना ही अधिकार स्त्री या बालिका को भी है। हर आत्मा की पहली पुकार है स्वाधीनता। साथ-साथ रहते हुए भी एक-दूसरे का सम्मान करते हुए उन्हें विकसित होने देना किसी भी रिश्ते को गहराई प्रदान करता है। आज महिला क्रिकेट टीम फ़ाइनल में पहुँच गयी है। एक वक्त ऐसा भी था जब महिला क्रिकेट को सम्मान नहीं मिलता था। अब महिला खिलाड़ियों के नाम भी लोगों को याद होने लगे हैं। महिलाएँ वे सभी कार्य कर रही हैं, जो कभी पुरुषों के एकाधिकार में थे। 


रात्रि के आठ बजे हैं, गुरूजी श्री श्री यूनिवर्सिटी से ध्यान साधना करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, जो आंदोलन देश में चल रहा है, वह सीएए के ख़िलाफ़ नहीं है, क्योंकि ऐसे क़ानून अन्य देशों में भी हैं। कुछ ऐसे लोग जो खुद को कटा हुआ मानते हैं, इसमें शामिल हैं, और कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी इसका लाभ उठा रही हैं। सरकार भी झुकने को तैयार नहीं है। गुरूजी ने यह भी कहा, वकीलों को काले कोट की जगह कोई और रंग पहनना चाहिए। उनके सत्संग में एक अन्य साधक प्रसानी जी भी आए हैं, जिन्हें उड़िया में कविता सुनाने को कहा है।  उन्होंने गुरूजी के नाम की श्रेष्ठता बतायी। नाम सुमिरन से ज्ञान की वृद्धि होती है और चेतना की शुद्धता से शांति का प्रसरण होता है।परमात्मा के सिवा आत्मा का कौन निकटस्थ है। 


आजकल हर जगह एक नयी बीमारी कोरोना का भय है इसलिए होली खेलने का उत्सव इस बार नहीं मनाया जाएगा, ऐसा प्रधानमंत्री ने भी कहा। कोरोना के कारण छोटे भाई की विदेश यात्रा भी स्थगित हो गयी है। नन्हा और सोनू एक मित्र के विवाह में कोचीन गये हैं, सुबह मोबाइल पर उन्होंने अपना कमरा दिखाया, नदी के किनारे स्थित है उनका होटल। मौसम गर्म हो गया है।