गुरु गीता
शाम को वे दूर तक टहलने गये। एक जगह मुर्गी के दड़बों के आगे से गुजरना पड़ा, एक विचित्र सी तेज गंध आ रही थी।घर आकर भी कुछ देर तक वह गंध जैसे साथ रह गई थी।आज ‘गुरु गीता’ सुनने का दूसरा सत्र है। भानु दीदी कह रही हैं, गुरु के नाम स्मरण मात्र से अनेक आशीर्वाद मिल सकते हैं।ईश्वर या गुरु से कुछ माँगना ऐसा ही है जैसे हाथ में मक्खन रखा है और कोई घी माँग रहा हो।शांति का सागर भीतर है, बस अपने मन का ध्यान रखना है। गुरु तत्त्व कण-कण में समाया है। व्यास मुनि ने स्कन्द पुराण में शिव-पार्वती के संवाद के रूप में गुरु गीता की रचना की है। जिसमें गुरु और ईश्वर में कोई भेद नहीं है, ऐसा कहकर शिष्य की गुरु के प्रति निष्ठा को दृढ़ किया गया है। छोटी बहन को आश्रम में टीटीपी के लिए अनुमति मिल गई है। अगले महीने वह यहाँ आएगी।आज गुरु जी के बारे में लिखे एक लेख का अनुवाद किया।
आज गुरुजी का जन्मदिन है। इस विशेष दिन पर उनका संदेश है-
कुछ भी आकर्षक नहीं है।
सब कुछ प्रकाशमान है क्योंकि सब कुछ आत्मा का है, और आत्मा से बना है।
ब्रह्मांड में आत्मा सबसे आकर्षक है।
गुरुजी ने विशेष ध्यान भी कराया। सुंदर भजन गाये गये। आज मृणाल ज्योति स्कूल की एक पुरानी सदस्या का फ़ोन आया। अगले वर्ष स्कूल का रजत समारोह मनाया जाएगा। उसने पत्रिका के लिए एक लेख लिखने के लिए कहा है। नूना ने स्कूल की अध्यक्षा से भी बात की। उनके साथ बिताये कितने ही पल तथा कई घटनाएँ याद आने लगीं।
आज सुबह उठने से पूर्व सुंदर स्वप्न देखे - सुंदर गायें, श्वेत बाघ और बुद्ध की प्रकाशित मूर्ति !परमात्मा से वार्तालाप और ध्यान का अनुभव ! पापाजी से बात हुई, वह ‘शांडिल्य भक्ति सूत्र’ पढ़ रहे हैं। जिसकी व्याख्या ओशो ने की है। उन्होंने बताया, प्रीति के कई रूप हैं, अपने से छोटों के प्रति प्रेम को स्नेह कहते हैं। समान उम्र के प्रति प्रेम को प्रीति तथा बड़ों के प्रति प्रेम को श्रद्धा या सम्मान कहते हैं। परमात्मा के प्रति प्रेम को भक्ति !! घर पर भतीजी और उसकी नन्ही बिटिया आये हुए हैं।शिशु बालिका की भी कई बातें उन्होंने बतायीं। आज भी दिन भर बादल बने रहे। मानसून इस बार यहाँ जल्दी आ गया है। सारे भारत में गर्मी का मौसम क़हर ढा रहा है, यहाँ अधिकतम तापमान २४ डिग्री रहता है। मई के महीने में ऐसा ही मौसम असम में मिलता था। उनके दायीं तरफ़ बनने वाला विशाल घर बनकर तैयार हो गया है, कल गृह प्रवेश की पूजा में जाना है। नन्हा और सोनू भी आयेंगे।
उन्होंने अपनी दिनचर्या व ख़ान-पान में कुछ बदलाव किए हैं।शाम को सूप व आम का डिनर लिया। जून को सात्विक व हल्का भोजन लेने से शरीर में हल्कापन महसूस हो रहा है। दिन में दो बार ध्यान का अभ्यास, पुस्तक पढ़ने के साथ-साथ वह डायरी लेखन भी शुरू करने वाले हैं। आज बुद्ध पूर्णिमा है, भगवान बुद्ध के विषय में लिखी कविता उसने बहुत लोगों को भेजी। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है। कल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। एक अच्छी बायोपिक देखी, ‘रश्मि राकेट’ !
दिन भर वर्षा का मौसम ही बना रहा। असम में बाढ़ का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। बैंगलुरु में भी सड़कों पर पानी जमा हो गया है। पानी की समस्या पर आधारित ‘टर्टल’ फ़िल्म में देखा था, रेगिस्तान में लोग पानी के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। यह जीवन ऐसा ही विरोधाभासी है। आर्ट ऑफ़ लिविंग से अनुवाद को-ऑर्डिनेटर का फ़ोन आया। कल रात को नौ बजे ज़ूम पर एक मीटिंग है, जिसमें नूना को अपने गुरु स्टोरी रखनी है। शाम को उन सभी बातों को याद किया और लिखा। एक शिक्षिका की कहानी सुनी थी, कितने आराम से वह सुना रही थी, उतनी ही सहजता से उसे भी अपनी बात रखनी होगी।
शाम को गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान गहरा हुआ। ज़ूम मीटिंग में एबीसी(आश्रम की प्रकाशन संस्था)की ‘हेड टू हार्ट’ सीरीज़ में पहली बार भाग लिया। आजकल गुरु स्टोरी सुनना भी शुरू किया है। अच्छा लग रहा है। गुरुजी अपने भक्तों की नज़रों में ईश्वर से कम नहीं। जिन्होंने उनका सान्निध्य पाया है, वह यह जानते हैं। उनके बार में सुनकर कितना रोमांच होता है। वाक़ई वे एक अवतार ही जान पड़ते हैं। कैसे लोगों के मन की बात जान लेते हैं, उनका ख़्याल रखते हैं। इतना प्रेम देते हैं कि लोग उनके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। वह उनके जीवन में वरदान बनकर आये हैं। वह कहते हैं, “साधकों को सेवा करनी चाहिए, ताकि वे अपने कर्मों को काट सकें। उन्हें पुण्य मिले और उनका मन शुद्ध हो, वे ध्यान के अधिकारी बनें, उन्हें समाधि का अनुभव हो। उनका जीवन सार्थक हो।जो दूसरों के कष्ट दूर करने की चाह रखता है, जो संसार के लिए जीता है, उसके योग-क्षेम का भर स्वयं परमात्मा उठाते हैं। वे स्वार्थ को त्याग कर यदि जगत के हित में काम करते हैं तो इसका परिणाम अंतर की शुद्धि के रूप में उन्हें ही मिलता है। जब कोई अपना सुख-दुख भूलकर अन्यों के सुख-दुख में शामिल होता है तब भीतर मुक्ति का अहसास होता है। जीवन वही जीवन है जो औरों के काम आये। उनके वचन, कर्म व विचार सदा हितकारी हों।” गुरुजी की बातें सुनने से मन नहीं भरता। वह उसे भी जानते हैं, ऐसा संयोजिका ने कहा। असम में एक शिक्षिका ने भी कहा था, गुरुजी को ज्ञात है कि सहज समाधि उनके यहाँ हो रहा है ! उसने गुरुजी के प्रति अपनी निष्ठा को पूर्ववत् नहीं बनाये रखा, ऐसा मानना भी उचित नहीं। वह उनमें और स्वयं में कोई भेद नहीं देखती, वह उन्हीं का भाग है ! ‘ईश्वर अंश जीव अविनाशी’ अथवा तो एक ही सत्ता से यह सारा जगत बना है !
आज सुबह उन्होंने पूरे सत्तर मिनट भ्रमण किया; नये व सुंदर, हरे-भरे रास्ते पर! तस्वीरें भी खींचीं। आज दो बालिकाएँ हिन्दी पढ़ने आयीं। दोपहर बाद बाज़ार गये, आगामी यात्रा में जिनसे मिलेंगे, उनके लिए कुछ उपहार ख़रीदे। ‘पंचायत’ धारावाहिक का अंतिम अंक देखा।