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Thursday, August 6, 2026

‘विचार चंद्रोदय’


विचार चंद्रोदय


आज सुबह गुरूमाँ को सुना, कितना अच्छा बोलती हैं। पंडित पीतांबर जी द्वारा लिखे गये अद्वैत वेदान्त के ग्रंथ ‘विचार चंद्रोदय’ पर उनकी व्याख्या अनुपम है। इस पुस्तक में वेदान्त का शुद्ध ज्ञान सरल ढंग से समझाया गया है। जगत की सत्यता, मैं कौन हूँ, पाँच कोष, तीन ताप, कर्म सिद्धांत और मुक्ति का स्वरूप सभी कुछ प्रश्न-उत्तर शैली में समझाया गया है।अभी कुछ देर पहले उसने गुरुजी से जुड़ा एओएल का एक अनुवाद कार्य किया।अमेरिका के एलेघेनी शहर ने २२ जून को ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित करके गुरुजी को सम्मानित किया है। अमेरिका की आठ यूनिवर्सिटीज़ में श्री श्री योग और सुदर्शन क्रिया सिखाई जाती है। दशकों से गुरुदेव पूरे विश्व में विभिन्न समुदायों के मध्य आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं। मोदीजी भी अमेरिका में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं, पर सारा विपक्ष उनके कामों का पूरी तरह से विरोध कर रहा है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने भी मोदीजी की तारीफ़ की, पर विपक्ष को और मज़बूत होना चाहिए, ऐसा भी कहा। कल रात उन्होंने बिना एसी के सोने का प्रयास किया पर आधी रात को ही चलाना पड़ा। सड़क पर लगे बल्ब की, खिड़की से आती रोशनी आँखों को चुभ रही थी।खिड़की बंद करने या पर्दा लगाने से हवा नहीं आती, सो बिना एसी के सोना अब सर्दियों में ही संभव होगा। 

दिन भर मौसम बदली वाला बना रहा, शाम को बादल कुछ देर को बरस भी गये। रात्रि भ्रमण के लिए गये तो सड़कें गीली थीं और ख़ाली भी। सन्नाटा पसरा था जैसे सर्दियों की कोई शाम हो और लोग घरों में दुबक गये हों। आज उन्होंने देवानंद-नूतन की एक पुरानी फ़िल्म देखी, ‘बारिश’। उस समय के नायक में वीरोचित और नैतिक गुण होते थे। पुलिस भी कार्य में दक्ष और ईमानदार थी। अब न नायक वैसे हैं न पुलिस। समय के साथ समाज में विकृतियाँ बढ़ने लगती हैं।लेकिन कई मामलों में चतुर्मुखी विकास भी हुआ है बल्कि अनेक मामलों में चीजें बेहतर हुई हैं। 

आज सुबह पौधों के साथ बितायी। हरे-भरे पौधे और लॉन में हज़ारों हरसिंगार के फूल, बरसात के मौसम में चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है। इतवार है आज, नन्हा और सोनू आये। पिछले दिनों सोनू ने बहत सारे केक बनाये, काफ़ी थक गई है, लेकिन बहुत खुश है। अभी भी उसके पास केक के ऑर्डर हैं, मंगल को देने हैं।हरेक को अपने काम के अलावा एक न एक शौक़ रखना ही चाहिए। ऐसा शौक़ जिसे पूरा करने से ही ख़ुशी मिलती हो, जिसका कोई फल उसे नहीं चाहिए। फल तो मिलेगा ही पर फल की आशा में वह कार्य न किया गया हो। सोनू कह रही है, अगले हफ़्ते वह श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी। 

आज महीनों बाद उसने हर ब्लॉग पर एक-एक पोस्ट प्रकाशित की। अब यही प्रयास रहेगा कि नियमित रूप से लेखन कार्य चलता रहे। यदि मन में किसी काम को करने का इरादा हो तो समय निकल ही आता है। मौसम आजकल अच्छा है, पर इस वर्ष वर्षा अपेक्षाकृत कम हो रही है।आकाश बादलों से घिरा रहता है, हवा भी चलती है, पर बूँदें बरसती नहीं हैं। कुछ देर पहले छोटी ननद की सखी, एक पूर्व परिचिता का फ़ोन आया, वह परसों अपनी एक सखी के साथ उनके घर आ रही हैं। दोनों आश्रम जाना चाहती हैं। वे उन्हें आश्रम तो ले ही जाएँगे, हो सका तो इस्कॉन मंदिर भी ले जाएँगे। जून ने कहा है, अंत में घर भी छोड़ देंगे। 

कल छोटी बहन का फ़ोन आया। आज उसे अपने क्लिनिक में गुरु पूजा करवानी थी।भांजी अपने मित्र को घर लायी है, उन दोनों ने मिलकर भोजन बनाया, पर अभी तक भविष्य के बार में कोई विचार नहीं किया है।आज पाकिस्तानी लेखक हारून ख़ालिद की लिखी पुस्तक “वॉकिंग विद  नानक” आ गई है। उसने पढ़नी शुरू कर दी है, अच्छी लग रही  है। गुरु नानकदेव की माँ तृप्ता आज से पाँच सौ वर्ष पहले भी कितनी निर्भीक थी और कितने स्वतंत्र विचारों की महिला थी।गुरु नानक के जीवन के कितने अनजाने पहलू जानने को मिल रहे हैं। पुस्तक में इतिहास, यात्रा वृत्तांत और अध्यात्म सभी का मिश्रण है।लेखक ने इक़बाल कैसर के साथ घूमकर पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों के बारे में सही जानकारी पाने की कोशिश की है। 

आज सुबह वे निकट की एक झील पर जाने के लिए निकले तो पड़ोसी भी उसी वक्त प्रातः भ्रमण के लिए निकल रहे थे, उनसे पूछा तो वह भी साथ चलने के लिए तैयार हो गये। उन्होंने इतने वर्षों में आसपास की कोई झील कभी नहीं देखी थी। कुछ तस्वीरें उतारीं। आज की पुरानी फ़िल्म में आशा पारिख थी, वह आँखों से कितना कुछ कह जाती है। नन्हे ने आज काँच के दो बड़े गिलास और छह गिलासों का एक सेट भेजा है। जून ने उसके लिए ‘नागराज’ कॉमिक के आठ अंक मँगवाये हैं। बचपन में वह इन्हें पढ़ता था। अगले महीने उसका जन्मदिन है। उन्होंने बिना पॉलिश की हुई दालें भी मँगवायी हैं, यकीनन उनका स्वाद अच्छा होगा। आज उनके फ़्लैट का काम पूरा हो गया। अगले महीने से किराए पर चढ़ सकता है। 

आज दोपहर वे दोनों महिलाएँ आ गई थीं। उत्साह से भरी और छोटी लड़कियों की तरह बात-बात पर खिलखिलाने वालीं। दोनों आपस में पुरानी मित्र हैं।नूना और जून ने चार-पाँच घंटे उनके साथ बिताये। दक्षिण भारतीय अल्पाहार के बाद शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये। आश्रम के अनेक मुख्य स्थल दिखाये, राधा कुंज के निकट कई तस्वीरें उतारीं। विशालाक्षी मंडप में भजन संध्या में सम्मिलित हुए।अन्नपूर्णा में प्रसाद ग्रहण किया। उनके घर छोड़ने गये तब काफ़ी देर हो गई थी, वापसी में वे नन्हे के यहाँ ही सो गये। सुबह की चाय के बाद घर लौट आये। रात को सोते समय भी उसके भीतर जैसे भीतर एक जागरण बना हुआ था, पर बाहर का कुछ बोध नहीं हो रहा था। नींद कुछ बदल सी गई है। कभी-कभी आँख बंद करने पर कुछ रूप दिखायी पड़ते हैं। 

आज पापाजी से बात हुई, आजकल वह अकेले रह रहे हैं। पढ़ने से उनकी आँख में दर्द होता है, पर वे पढ़ना छोड़ते नहीं। कहते हैं, किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, और अख़बार से समाज व देश की आम जानकारी होती है।आज उसने श्रावण में होने वाली रुद्र पूजा के बारे में एक आलेख का अनुवाद किया।भगवान शिव सबसे शक्तिशाली और कल्याणकारी रूपों में से एक भगवान रुद्र के लिए की जाने वाली एक सुंदर पूजा ! रुद्र का अर्थ है,  जो सभी दुखों का नाश करते हैं ! मन के भीतर एक जागरण बना रहे, वे बेहोशी में कोई कार्य न करें, सारी पूजाएँ और कर्मकांड इसी बात को सिखाने के लिए ही तो किए जाते हैं। जीवन में सजगता के साथ  पवित्रता भी बढ़े, जब किसी वस्तु को पावन कहकर देखते हैं, तो उसके प्रति हाव-भाव कितना बदल जाता है। उनकी नींद भी पावन हो और जागरण भी !  इस रविवार को उनके यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।अभी से उसके मन में उत्साह भर गया है। पिछले वर्ष भी उन्होंने एक बार गुरु पूजा का आयोजन किया था। असम में तो हर वर्ष एक बार करवाते थे, उनके पड़ोसी, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक थे, वही किया करते थे। कल उनकी गली में भी एक शिक्षक के यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।जिसमें वे जाने वाले हैं।  

Monday, August 4, 2025

योग दिवस

आज भी नूना ने एओएल का एक अनुवाद कार्य किया। योग के महत्व पर एक बहुत अच्छा लेख था किन्हीं कमलेश का, नाम से पता नहीं चलता वह लेखक है या लेखिका। इस इतवार को नन्हा और सोनू दोपहर डेढ़ बजे तक रह सकते हैं, कर्फ़्यू में २ बजे तक ढील दी जाएगी। सोमवार से शाम पाँच बजे तक बाज़ार खुला रहेगा। विशेषज्ञ कह रहे हैं, कोरोना की तीसरी लहर निकट भविष्य में आ सकती है। आज सुबह भी छत पर धुआँ था, जून ने पड़ोसी को लिखा, उनके मज़दूर लकड़ी पर खाना बनाते हैं, उसी का धुआँ आता है। उनका जवाब आया, क्षमा माँगी है और मज़दूरों को जगह बदलने को भी कहा है। इस समय भी कमरे में हल्की गंध है। जबकि शाम को सारे दरवाज़े, खिड़कियाँ बंद कर दिये थे।आज सुबह वे थित्ताहल्ली गये थे, एक नया स्थान देखा। फलवाले मुनिकुमार की दुकान के पास एक छोटी सी लड़की पेड़ से टँगे झूले पर झूल रही थी, बाजार के शोर से बेख़बर वह अपनी मस्ती में खोयी थी।


आज का पूरा दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा था। सुबह ठंडी हवा और घने बादलों के सान्निध्य में टहल कर आये।वापस आकर कार से पुन: गये, बगीचे की क्यारियों के चारों ओर लगाने के लिए पत्थर लाए, जो कल सुबह सड़क किनारे पड़े देखे थे। शायद ख़ाली पड़े प्लॉट्स में सफ़ाई के लिए ट्रैक्टर चलाते समय ज़मीन से निकले होंगे। उनका छोटा सा लॉन अब पहले से भी सुंदर लग रहा है। शाम को योग दिवस के लिए सूर्य नमस्कार का वीडियो बनाया।पापाजी से बात हुई, उन्होंने उसकी कविताएँ पढ़ीं और कहा, अधिकतर लोग अध्यात्म में रुचि नहीं लेते।               


आज पितृ दिवस है। सुबह साढ़े आठ बजे सोनू, नन्हा और उसका एक मित्र आ गये थे। जून के लिए जूते और प्रसाधन सामग्री लाए हैं, नूना के लिए भी एक लोशन है। नाश्ते में जून ने पनियप्पम बनाये। उसके बाद एक नया बोर्ड गेम खेला, पैंडेमिक, अच्छा खेल है।पापा जी से बात की, उन्हें पितृ दिवस पर उनके लिए लिखी कविताओं का संग्रह भेजा। शाम को छोटे भाई का फ़ोन आया, वह लखनऊ में होटल से गेस्टहाउस में शिफ्ट हो गया है, इस महीने के अंत तक वहीं रहेगा। 


आज योग दिवस है, सुबह डीडी पर मोदी जी का प्रभावशाली भाषण सुना, योगासन किए। शाम को भी प्राणायाम किया। पापाजी से योग का महत्व पर चर्चा हुई। एक सखी से बात हुई, उसकी नयी नवेली बहू ने भी उसके साथ योग किया, बताते हुए वह बहुत खुश थी। बड़े भाई, दीदी-जीजाजी को भी योग दिवस की बधाई दी, यानी कुल मिलाकर अच्छा रहा योग दिवस।


आज सुबह उठने में पंद्रह मिनट की देरी हुई, उसकी वजह से पंद्रह मिनट कम पाठ किया। नाश्ते के बाद जून ड्राइव पर ले गये। कल से उसने सोचा था, अस्तित्त्व जो कराये हो जाने देना चाहिए, कोई आनाकानी नहीं की। वापस आते आते सवा ग्यारह हो गये। यानी लिखने के लिए सुबह जो एक घंटा मिलता है, वह नहीं मिला। दोपहर को जून के एक व्यवहार से मन उदास हो गया, जिसका असर शाम तक रहा। आख़िर ध्यान के समय उनसे कहना ही पड़ा, परमात्मा ने ही कहलवाया। अब जो कुछ भी उसके साथ हो रहा है, या होगा, सब कुछ उस मालिक की मर्ज़ी से हो होगा। आज पापाजी से बात हुई, उन्होंने कहा, कविता बहुत उच्च स्तर की थी, वह दो पंछियों वाली, जो एक ही वृक्ष पर रहते हैं; एक साक्षी है, दूसरा जीवन के रस को भोगने को इच्छुक। एक आत्मा दूसरा परमात्मा। शाम को असमिया सखी का फ़ोन आया, सुबह साढ़े छह बजे योग नहीं कर पाएगी, आज सुबह ही उसने कहा था, वीडियो कॉल पर उसके साथ किया करेगी।अपने लिए समय निकालना कितना कठिन होता है कुछ लोगों के लिए। 


रात को स्वप्न में गुरुजी को देखा, वह उनके घर की पूजा में आये हैं पर वह तैयारी में लगी रहने के कारण पूजा में नहीं बैठ पायी। फिर कुछ देर बाद आवाज़ आयी, आप पूजा कर रही हैं? देखा, तो  दूसरे कमरे में बैठकर वह उसकी खिड़की से आवाज़ दे रहे थे; यानि वह भी पूजा में नहीं बैठे थे। कह रहे थे, वहाँ पूजाघर में बहुत उमस थी।कल बहुत गर्मी थी। कैसा विचित्र सा था स्वप्न!


आजकल बिजली आंखमिचौली खेलती रहती है दिन में कई बार जाती है, फिर जेनसेट से काम चलाना होता है, आ जाती है कुछ देर में। इस समय भी नदारद है। पंखा एक पर चल रहा है, एसी बंद हो गया है। खिड़की-दरवाज़ा सब बंद है, सो गर्मी हो गई है। पता नहीं कब आ जाएगी। सुबह समय से उठे थे, कल जो पत्थर एकत्र किए थे, आज कुछ और लाये, गुड़हल व रात की रानी के पौधों के चारों ओर रख दिये हैं। आज जून दशहरी, लंगड़ा और यहाँ के लोकल आम भी ले आये हैं। उन्हें लीची भी मिल गई। टीवीएफ़ पर ‘पंचायत’ देखा, अच्छा अभिनय किया है नायक ने। पापा जी आजकल ‘अथातो भक्ति जिज्ञासा’ पढ़ रहे हैं, ओशो के दिये हुए प्रवचनों पर आधारित पुस्तक है। शाम को टहलते समय मदार के फूलों व फलों की तस्वीरें उतारीं। दीदी-जीजाजी का फ़ोन आया, उन्हें जून का भेजा मोबाइल स्टैंड मिल गया है, अब उस पर वीडियो बनायेंगे। कन्नड़ भाषा का अभ्यास छूत गया है। ‘साईं’  के सारे एपिसोड समाप्त हो जाने के बाद पुन: आरंभ करेगी। सोने से पूर्व पुस्तक पढ़ने का क्रम भी आजकल छूट गया है।                                                                                              


   


Thursday, May 2, 2024

गट्टे की सब्ज़ी

गट्टे की सब्ज़ी 


आज सुबह टहलने गये तो तापमान १६ डिग्री था, जैकेट पहनने का दिन, कभी-कभी २० या इक्कीस रहता है तो वे नहीं पहनते। समाचारों में सुना, दिल्ली का तापमान १ डिग्री हो गया है, यहाँ उसकी कल्पना करना भी कठिन है। इतनी ठंड में उन लोगों का क्या होता हिगा, जिनके पास पक्के घर नहीं है या घर ही नहीं हैं। आश्रम में अगले महीने एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छोटी बहन ने फ़ेसबुक पर संदेश पोस्ट किया है। वहाँ प्रतिदिन सत्संग हो रहा है। गुरुजी ने विश्व में लाखों लोगों को योग के पथ से जोड़ा है, ऐसा कार्य ईश्वरीय कृपा  के बिना नहीं हो सकता। अभी-अभी जे कृष्णामूर्ति द्वारा ध्यान की सुंदर परिभाषा सुनते-सुनते ही मन ध्यानस्थ होने लगा। ‘देवों के देव’ में आज दधीचि मुनि के त्याग की गाथा सुनी। उसे लगता है, वे लोग समाज के लिए कुछ विशेष नहीं कर पा रहे हैं। परमात्मा ही उन्हें राह दिखाएगा, अर्थात उनका शुद्ध ‘मैं’, यानि वे ‘स्वयं’ ! हर किसी को अपना मार्ग स्वयं ही तो चुनना होता है। परमात्मा हर किसी के द्वारा स्वयं को ही अभिव्यक्त कर रहा है ! कोई कितना उसे प्रकट होने देगा, उतना ही उसका जीवन सुंदर होगा !! 


आज सुबह मौसम सुहावना था। अपने निर्धारित स्थान पर चौकीदार को छोड़ कर पूरे रास्ते भर कोई नहीं मिला। रात की रानी की सुगंध दूर से ही आने लगी थी, सम्पूर्ण क्यारी  छोटे-छोटे श्वेत फूलों से भर गई है।जो बल्ब के प्रकाश में दिखायी दे रही थी। सड़क पर अंधेरा था। नैनी आज जल्दी आ गई, कन्नड़ सिखाने में उसे आनंद आता है, वह धीरे-धीरे कुछ शब्द सीख रही है।नाश्ते के बाद वे सब्ज़ी ख़रीदने गये, बेबी कॉर्न, कुंदरू, अरबी, आँवले आदि कुछ नयी सब्ज़ियाँ मिलीं, जो पास की दुकान में नहीं मिलतीं। जून को अब ईवी चलाने में दिक्क्त नहीं होती। इतवार को ईवी कार रैली है, नन्हा उसमें जाने को कह रहा है। यह भी बताया, उसका पैथोलॉजिस्ट मित्र असम जाने वाला है, उसे मेडिकल कॉलेज में जॉब मिला गया है, वहाँ वह आगे पढ़ाई भी कर सकता है।ऐसे ही लोग अपने शोध कार्य और श्रम के द्वारा समाज के लिए नयी खोज कर पाते हैं, उनके परिश्रम का लाभ मानवता को मिलता है। असम की एक हिन्दी लेखिका पूनम पांडेय की किताब में कुछ कहानियाँ पढ़ी, जो असम के लोक जीवन पर आधारित हैं।कल किसानों से एक बार फिर सरकार की बात होने वाली है, शायद कुछ हल निकल आये। 


आज मॉर्निंग ग्लोरी का पहला फूल खिला रानी कलर का सुंदर फूल ! धीरे-धीरे सभी गमलों में फूल आयेंगे, और जब बेलें ऊपर चढ़ जायेंगी तब और भी सुंदर लगेंगे। भीतर कैसी गुनगुन सुनायी दे रही है। जब मन शांत हो तभी यह अखंड गूंज सुनायी देती है। छोटी ननद का फ़ोन आया, वह गट्टे की सब्ज़ी बना रही थी। ख़ुद उसे बनाये हुए बरसों हो गये हैं। बचपन में माँ के हाथों की बनी पकौड़े की सब्ज़ी भी खायी थी। उसके बाद कभी मौक़ा नहीं मिला, सोचती है, क्यों न एक दिन उसी तरह बनाकर बच्चों को खिलाए। शाम को गुरुजी को सुना, वह प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, कितने सटीक और प्रभावशाली ढंग से वह प्रश्नों के उत्तर देते हैं। आज वे उन्हीं वृद्ध व्यक्ति से मिले, कह रहे थे, अगले हफ़्ते घर भी आयेंगे।सौ बरस के हो गये हैं, कहने लगे, “आदमी थक जाता है एक उम्र में, जीवन और मृत्यु अपने हाथ में तो है नहीं।” पता नहीं कुछ लोग लंबा क्यों जीते हैं और कुछ अल्पायु में ही कालग्रसित हो जाते हैं। सुबह छोटे भाई से बात हुई, कह रहा था, मृत्यु के रहस्य को छोड़कर जगत में कुछ जानने को नहीं रह गया है। वह ध्यान में गहरा उतरने लगा है। बहुत मस्त रहता है। दीदी ने उसके लिखे एक भजन के बारे में कहा है, वह अवश्य प्रसिद्ध होगा। उसकी एक सखी ने अपनी मधुर आवाज़ में उसे गाया था, जो व्हाट्सेप पर पोस्ट कर दिया था; सब को अच्छा लगा, भाई ने कहा है उसे अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करे।    


नौ बजने वाले हैं, जून ठीक नौ बजे बत्ती बंद करने को कहेंगे। उसके पूर्व ही आज का लेखा-जोखा लिख लेना है। सुबह आकाश पर बदली थी। आर्ट ऑफ़ लिविंग के फिटनेस चैलेंज का अंतिम दिन था। जून ने मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की तस्वीरें उतारीं। बाद में वे ढेर सारे फल लाए। काव्यालय की संस्थापिका ने एक अंग्रेज़ी कविता का अनुवाद पोस्ट किया, उसे अखरा तो उसने भी एक अनुवाद किया और उन्हें भेजा। जिसे उन्होंने फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दिया। एक चित्र बनाना आरम्भ किया है। ‘ध्यान’ पर एक पुस्तक का  अध्ययन भी शुरू किया है। जीवन एक लय में आगे बढ़ रहा है, जैसे सुबह और शाम, वसंत और पतझड़ आते-जाते हैं, वैसे ही उनके दिन और रात कुछ नये-नये अनुभव देकर बीत जाते हैं।  इसी मधुर भाव में जीने का नाम जीवन है शायद !  


Thursday, June 29, 2023

गणपति की मूर्तियाँ

गणपति की मूर्तियाँ


आज पहली तारीख़ है, सभी को मासिक भत्ता दे दिया। कामवालियाँ, दूधवाला, फूलवाली, पेपरवाला, माली सभी को, पानी का बिल आना अभी शेष है। जून मोबाइल पर दिवाली पर देने के लिए मिठाई देख रहे हैं। ऑन लाइन के जमाने में दुकानें भी मोबाइल पर दिख जाती हैं। ‘देवों के देव’ में महादेव और कार्तिकेय के सुंदर संबंध के दृश्य देखे, बिना आसक्त हुए रिश्तों को निभाना आये तो इससे सुंदर कुछ भी नहीं ! पार्वती  को एक पुत्री की प्राप्ति हुई है, जिसका नाम अशोक सुंदरी है, यह बात पहले उसे ज्ञात नहीं थी। आज छोटी ननद से बात की, उन्होंने योग शिक्षक से योग सीखना आरंभ किया है, शाम को घर पर आकर एक घंटा अभ्यास कराता है। योग को जीवन का अंग बनाये बिना स्वस्थ रहना कठिन है। दोपहर को पिता जी से बात की। उन्हें बीच-बीच में बायें कूल्हे में दर्द होता है। छोटे भाई ने बताया, हफ़्ते में एक बार उन्हें इंजेक्शन लगाने नर्स आएगी। सुबह एक अजीब सा स्वप्न देखा। जिसमें ख़रगोश थे जो अपने बच्चों के पीछे भाग रहे थे और उनका अवशेष भक्षण कर रहे थे। पता नहीं क्या अर्थ है इसका, बाद में पढ़ा, ख़रगोश को स्वप्न में देखना शुभ माना जाता है। मन तो शंका करने में सिद्धहस्त है, नये विचार करने लगा, सो उठने में देर हो गई, जबकि हर स्वप्न जगाने के लिए आता है।  


दोपहर को एक उपहार मिला, सोनू ने भेजा है।जिसमें  गणपति की मूर्तियाँ बनाने के लिए सभी सामग्री दी गई है। प्लास्टर ऑफ़ पेरिस, मोल्ड और रंग ब्रश आदि भी। पहली बार वह गणेश की मूर्ति स्वयं बनाने वाली है। पिता जी का स्वास्थ्य अब बेहतर है, उन्होंने फ़ेसनुक पर उसकी एक कविता पर टिप्पणी की, इसी से पता चलता है। मंझले भाई का तबादला दिल्ली हो गया है, उसे डेढ़ वर्ष और जॉब में रहना है। इसके बाद वह भी सेवानिवृत्ति के विश्राम भरे सरल जीवन का आनंद लेगा, जैसा  वे आजकल ले रहे हैं। जून शाम को गरिष्ठ पराँठे खाना चाहते थे, उसने जरा सा टोका तो वह ख़फ़ा हो गये, बाद में उन्हें खिलाए पर एक बार मूड बिगड़े तो सही होने में थोड़ा समय तो लगता ही है। उसके पास अब मूड रहा ही नहीं, जो है भीतर सदा एकरस है ! 


सुबह नींद जल्दी खुली, जब वे टहलने गये, आकाश में तारे खिले थे, भोर का तारा बहुत चमकीला था और चंद्र दर्शन भी हुए। गुरुजी के प्रति मन कृतज्ञता से भर गया, भीतर समता स्थिर होती जा रही है, सब उन्हीं की कृपा है। शाम को उन्होंने शक्ति ड्राप तथा कबासुर औषधि व धन्य लक्ष्मी तरु के बारे में बताया। यह भी कि हर तरह के भय से मुक्ति ही साधना का परम लक्ष्य है। गायत्री परिवार के किन्हीं लालबिहारी जी से आनन्दमय कोष के बारे में सुना, बहुत अच्छा बोलते हैं। जे कृष्णामूर्ति को भी सुना, किसी ने उनसे पूछा, वह असंतुष्ट है, किसी भी तरह से उसे अपने भीतर की असंतुष्टि का जवाब नहीं मिला। जवाब में जे के ने  कहा, ज़्यादातर लोग असंतोष की इस भावना को पनपने ही नहीं देते, वे किसी न किसी उपाय से इसे दबा देते हैं। हम बहुत थोड़े से ही संतुष्ट हो जाते हैं पर यदि इसे जलती हुई ज्वाला बना लें तो एक दिन इसका उत्तर मिल ही जाता है। अब सवाल यह है कि क्या उसके भीतर की वह आग अब भी जल रही है या शांत हो गई है? वास्तव में एक बार यह आग किसी के भीतर जलती है तो सदा के लिए जलती रहती है। हाँ, इसे एक दिशा मिल जाती है। यह दुख का कारण नहीं रह जाती , एक गहरे संतोष का कारण बन जाती है। पर वह सन्तोष ऐसा नहीं है कि जिसे सदा के लिए अपने पास रख लिया जाये। यह तो फूल की तरह है, या प्रातः समीरण की तरह, यह अपने होने का अहसास भी देता है और सदा अप्राप्य भी बना रहता है। एक यात्रा है जो सदा ही चलती रहती है। 


Wednesday, April 21, 2021

झींके का खेत

 

कल रात्रि वे वापस लौट आये. घर पहुंचे तो कुछ ही देर में नन्हा व सोनू भी आ गये, वे रात्रि भोजन बनवा कर लाये थे. सुबह नींद थोड़ा देर से खुली, नूना अकेले ही टहलने गयी. सोनू उठ गयी थी जब वह लौटी, नन्हे ने सुबह का नाश्ता ऑर्डर कर दिया था.  दोपहर को बड़े भैया अपनी बिटिया के साथ आये, जो यहीं रहकर जॉब करती है, सबने साथ में भोजन किया. नन्हा और सोनू  ग्वालियर से कुछ उपहार भी लाये हैं, साड़ी, सूट, बेड कवर, गजक और उबली हुई मूंगफली. बड़े भाई को उन्होंने शादी में मिला पर्स दिया, भाई उनके लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां लाये हैं. जीवन इसी लेन-देन  का नाम है. दीदी छोटी बहन के पास विदेश जा रही हैं. वह अपने नए घर में शिफ्ट हो गयी है. उसने बताया अगले हफ्ते बड़ी बिटिया अपने पापा  के साथ भारत आ रही है, वे वैष्णव देवी की यात्रा पर भी जायेंगे.  छोटा भाई  अगले हफ्ते उनके पास आ रहा है, उसे पुट्टपर्थी में ड्यूटी मिली है, एक रात यहाँ रहकर जायेगा.  जीवन इसी तरह आने-जाने, मिलने-जुलने का भी नाम है. मौसम आज ठंडा है, पंखा चलाने की जरूरत नहीं है. दोनों नैनी समय पर आ गयीं, दूध वाला, पेपर वाला, फूलवाली भी, आज तो लॉन की सफाई व घास की कटिंग भी हुई, लॉन अच्छा लग रहा है. रात की रानी में फूल खिलने लगे हैं. शाम को वे टहलने गए तो देखा, क्रिसमस की ख़ुशी में लोगों ने यहां बिजली की झालरें लगा दी हैं. 


रात्रि के नौ बजे हैं, उसने दिन के अंतिम कार्य यानि लिखने के लिए कलम उठायी है. आज एक सप्ताह बाद योग कक्षा में बहुत अच्छा लगा. नए आसन किये शरीर को अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करने का अवसर मिला.  सुबह नाश्ते के वे बाद कुछ देर टहलने गए, शायद धूप के कारण सिर में थोड़ा सा दर्द हो गया. असम में स्थिति अब शांति की ओर बढ़ रही है. दिल्ली तथा देश के कुछ अन्य भागों से हिंसा की खबरें आयी हैं. यह सब कुछ अज्ञान का परिणाम है, नेता अपना लाभ देखते हैं और जनता को मोहरा बनाते हैं. हालात जिस तरह बिगड़ रहे हैं इसका परिणाम किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा. धर्म के नाम पर भेदभाव से कितने जीवन प्रभावित होते हैं, पर लोग जानते हुए भी यह बात समझना नहीं चाहते. तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के जीवन पर आधारित वेब सीरीज ‘क्वीन’ अच्छी  लग रही है, चार एपिसोड देख लिए हैं. आज पिता जी से बात की. उन्होंने बताया, जो किताब वे पढ़ रहे हैं, उसमें लिखा है, मनुष्य को शून्य में स्थित रहना चाहिए अर्थात पूर्ण शांति में. बाहरी शांति तो उन्हें सर्वथा उपलब्ध है पर भीतर की शांति भी चाहिए, मन की शांति, यानि विचारों से पूर्ण मुक्ति ! 


आज सुबह टहलते हुए वे गांव की तरफ गए एक खेत में झींका (तरोई) लगी थी, एक किसान फसल उतार  रहा था, बेचने को भी तैयार था, वे खरीद कर लाये. छत पर सोलर पैनल लग गए हैं. अब उनके घर इस्तेमाल होने वाली बिजली इन्हीं के द्वारा आएगी, जो बिजली बच जाएगी उसके बदले विद्युत विभाग से पैसे वापस मिल जायेंगे. आज असमिया सखी से बात हुई, वे लोग भी बंगलूरू में रहते हैं. उसने बुलाया है, पर उनका घर काफी दूर है, कार से जाने में दो घन्टे लगेंगे, असम में उनके घर जाने में दो मिनट लगते थे. उन्होंने सोचा है, शुक्रवार की सुबह  जायेंगे और एक रात रुककर शनि को नाश्ते के बाद लौट आएंगे. आज मौसम कल की अपेक्षा गर्म है, दिसम्बर में भी गर्मी हो सकती है, इसका अनुभव जीवन में पहली बार हो रहा है. दोपहर वाली नैनी आज अपने पुत्र को लेकर आयी, देखने में बुद्धिमान लग रहा था. आज कई दिनों बाद ब्लॉग पर लिखना आरम्भ किया, कुछ ब्लॉग्स पढ़े. जीवन को मुड़कर देखें तो अपनी ही बातों पर कितनी हँसी आती है, उन बातों पर भी जिनपर कभी हजार आँसू बहाये थे. शाम को नन्हे का फोन आया, ‘डिनर पर आ रहा है, उन्हें लगा, जैसे उसकी पसन्द का खाना ही बना था और उसे खबर लग गयी किसी तरह, साढ़े आठ बजे आया, दो घन्टे रहा. जीवन एक शांत धारा की तरह बहता जा रहा है, अब कोई दौड़ नहीं रही. ज्ञान, क्रिया और इच्छा शक्ति जो भीतर है, अपने आप में स्थिर हो गयी है. हजारों टन भोजन इस देह में जा चुका है, हजारों बोल यह जिव्हा बोल चुकी है, हजारों विचार यह मन सोच चुका है, हजारों गन्ध यह नासापुट ले चुके हैं. अब इस जगत में कुछ देखना, जानना, पाना शेष नहीं रह गया है. जीवन जैसा है वैसा ही श्रेष्ठ है. 


आज वे आश्रम गए थे, दोनों ननदों के लिए उपहार लिए। वैद्य से नाड़ी परीक्षण करवाया। आयुर्वैदिक दवा ली एक माह की। जून के ममेरे भाई की बिटिया का ब्याह है, उसके लिए भगवद्गीता का एक सुंदर प्रति ली और घर के लिए आटे के बिस्किट आदि। गुरुजी की उपनिषद पर टीका और आर्ट ऑफ लिविंग के हिंदी भजनों की एक किताब भी। एक घंटा वे ध्यान के लिए विशालाक्षी मंटप में बैठे। ध्यान करवाया गया पर रिकार्डिंग में गुरु जी की आवाज से अधिक लोगों के खाँसने की आवाजें आ रही थीं। भजन आरंभ हुए तो लोग नाचने और झूमने लगे। रात्रि भोजन भी वहीं कैफे में किया। रागी दोसा खाया। कल दोपहर फिर आना है, समूह में सुदर्शन क्रिया में भाग लेने के लिए। दीदी का फोन आया, दो मिनट से ज्यादा बात नहीं की। जीवन इतना सरल है जिसे लोग जटिल बना लेते हैं। 


आज मोबाइल पर गुरूजी का सत्संग देखा, सुना। वह बहुत दिनों के बाद आश्रम आए हैं। परमात्मा और उनमें जरा भी दूरी नहीं है, वह वहीं है फिर भी वे उससे विरह का अनुभव करते हैं ! कैसी अजब कहानी है यह .... । मौसम आज ठंडा है, शाम को स्वेटर पहनकर वे पड़ोसी के साथ सोसाइटी के पिछले गेट से बाहर निकल कर गाँव की तरफ गए. सँकरी सड़क से गुजरते समय सूर्यास्त के सुंदर दृश्य दिखे, खेतों से कुछ दूर आगे जाकर एक नयी कालोनी दिखी, जिसमें प्लॉट्स काट दिए गए हैं, सड़कें भी बन गयी हैं पर घर बनाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है.  शहर अपनी सीमाएं बढ़ा रहे हैं और खेत बिकते जा रहे हैं. कल वैद्य ने रात्रि भोजन हल्का लेने को कहा था सो आज खिचड़ी बनायी उसने.  और अब उस पुरानी डायरी के पन्नों से कुछ बात।



स्थूल जगत में सेवा कार्य का रूप धारण करती है, आंतरिक सृष्टि में सहानुभूति का स्वरूप लेती यही और मानसिक सृष्टि में बोध रूप में दर्शन देती है। 


तुम्हारा हृदय तुम्हारे सेवा कार्यों की जो कीमत आंकता है, उसके मुकाबले उन्हीं कार्यों की जगत द्वारा ठहराई कीमत कुछ नहीं के बराबर है. 


सच्चे मनन  के फलस्वरूप सेवा करने की शक्ति अधिकाधिक बढ़ती जाती है और फिर अपनी उन्नति के विचार बहुत कम सताते हैं. 


आतुरता से और स्नेह से कोई भी नन्हा सा सेवा का काम सबेरे उठकर करना उस दिन के तुम्हारे सुख के भंडार को खुला रखने का सर्वोत्तम उपाय है. 


मनुष्य जिस हद तक अपने स्वार्थ का कम चिंतन करता है, उस हद तक वह अवश्य ही अपनी आत्मोन्नति की ओर ध्यान लगा सकता है.सेवा के प्रत्येक छोटे से छोटे कार्य का बदला सेवा की बढ़ती हुई शक्ति के रूप में सेवक को मिलता है. 


उसे आश्चर्य होता है विद्यार्थी काल में उसका मन ऐसे विचारों के प्रति आकर्षित होता था, युवा मन कितना आदर्शवादी होता है. कई वर्षों बाद इन आदर्शों पर चलने का मौका भी मिला, जीवन में कोई जो चाहता है अवश्य ही पा लेता है , लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जा सकता है. 


Wednesday, April 7, 2021

वृक्ष और हवा

 

आज से दो वर्ष पूर्व बड़ी भतीजी का ब्याह हुआ था, पर उसने उसे ‘प्रथम वर्षगांठ पर बधाई’ का संदेश लिख दिया। मन अपने आप में नहीं रहता है जब, तब ऐसी गलतियाँ होती हैं। जिस मन में कोई उलझन न हो, लोभ न हो, चाह न हो, वह मन  ही स्थिर रह सकता है। आज सुबह वे बारी-बारी से घूमने गए क्योंकि उठने में देर हुई. नैनी समय पर  आ गयी, कल उसने छुट्टी ली है, विधान सभा का उपचुनाव है, कह  रही थी बीजेपी को वोट देगी। देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, सरकार प्रयास कर रही है पर हालात सुधर नहीं रहे हैं। आजकल समाचार सुनने का ज्यादा समय नहीं मिलता। वे टीवी कम ही खोलते हैं। दोपहर को थोड़ी देर एक फिल्म देखी ‘जोया फैक्टर’ अच्छी लगी। जून ज्यादातर समय मोबाइल पर कुछ देखते हैं। शाम को योग सत्र में टीचर ने हास्य आसन कराया, गरुड़ व वृक्ष आसन भी। एक घंटे के अभ्यास के बाद शरीर काफी हल्का हो जाता  है, और लचीला भी हो रहा है. कभी कभी वे बेल्ट, लकड़ी की ईंट और बड़ी सी गेंद का उपयोग करके कठिन आसन भी करते हैं। आज एक पूर्व परिचिता से बात की, उसने बहुत कोशिश करके अपना तबादला अपने गृह शहर में करवाया है। कह रही थी जिम जाने लगी है, वर्तमान पीढ़ी को योग की बजाय जिम अधिक रास आता है। आज भी छत पर सोलर पैनल लगाने का काम आगे बढ़ा. पूरा होने में लगभग दो महीने लगेंगे। 

जगत से सुख और प्रेम की आशा करना पानी को मथकर मक्खन निकालने जैसा ही है। यहाँ हृदय की बात सुनने का किसी के पास न ही धैर्य है न ही समय। स्वकेंद्रित मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति चाहता है और यदि कोई उसमें बाधक बनता है तो वह उस पर क्रोधित होता है। क्रोध का प्रभाव खुद पर ही होने वाला है वह यह भूल ही जाता है। आज सुबह टहलते समय भीतर कविता फूट रही थी। सारा अस्तित्व जैसे उसके भीतर सिमट आया हो। फेफड़ों के भीतर ताजी हवा वही तो थी जो चारों ओर बह रही थी।  सिर के ऊपर विस्तीर्ण आकाश था, अभी आकाश में चाँद था और तारे भी, भीतर का आकाश उसके साथ एक हो गया था। सुबह का समय कितना पावन होता है, मन भी खाली स्लेट की तरह, जिस पर जो चाहे लिखा जा सकता है। उसका प्रिय द्वादश मंत्र सुबह-सुबह हर श्वास-प्रश्वास में  स्वत: ही चलता है।  छत पर चल रहे काम के कारण काफी शोर था दोपहर को, गुरुनानक की कथा सुनते-सुनते सोयी। एक विचित्र स्वप्न देखा, एक बड़ा सा आदमी छोटा हो जाता है, कीट जितना छोटा। छोटे भाई के विवाह की वर्षगांठ है आज, बधाई दी। ननद से बात हुई, बिटिया के विवाह की बात चल रही है, पर वे लोग शाकाहारी नहीं हैं, और चाहते हैं, विवाह से पूर्व लड़की सब कुछ खाना व बनाना सीख जाए। भांजी ‘हाँ’ कहने से डर रही है। एक ब्लॉगर  की पुस्तक आयी है, उसने जून से कहा है अमेजन से खरीदने के लिए। कई दिनों से दीदी से बात नहीं हुई है, उसने व्हाट्सएप पर संदेश भेजा और  भगवान से दुआ मांगी, एक न एक दिन सब पूर्ववत हो ही जाएगा। 


रात्रि के नौ बजने वाले हैं। सोने से पूर्व का उसका डायरी लेखन का कार्य अब नियमित होता जा रहा है। कुछ देर पहले वे टहल कर आए, रात की रानी के पौधों की खुशबू अभी नासिका में भरी ही हुई थी कि मोड़ पर एक मीठी सी जानी-पहचानी खुशबू आयी, चम्पा की सुवास, और वाकई वहाँ तीन-चार पेड़ थे। चम्पा के फूल अभी ज्यादा नहीं थे, पर एक खिला फूल तोड़ा जो शायद कल  झरने ही वाला था, उसके सामने पड़ा है, श्वेत पंखुड़ियों वाला सुंदर पुष्प ! शाम को मृणाल ज्योति के डायरेक्टर का फोन आया, जो स्कूल की तरक्की की बातें बता रहे थे, अच्छा लगा सुनकर। अगले हफ्ते वे महाराष्ट्र की एक छोटी सी यात्रा के लिए जाने वाले हैं, दोपहर को पैकिंग की. आज सुबह गांव की तरफ टहलने गए थे वे, मन्दिर के पास वाला इमली का पेड़ फलों से भरा हुआ है, पर उन्हें तोड़ना नहीं आता. एलोवेरा का एक स्वस्थ पौधा रास्ते के किनारे पड़ा था, शायद किसी ने गमले से निकाल कर उसी समय वहां रखा था, वे उसे उठाकर लाये और घर के पीछे वाली क्यारी में लगा दिया है. आज छोटे भाई ने बताया शायद वह क्रिसमस पर यहाँ आये. 


उस कालेज की डायरी में एक कविता उसे दिखी, शायद हवा के बारे में किसी अंग्रेजी कविता को पढ़कर लिखी थीं ये पंक्तियाँ -


क्यों चाहे वह मुझ संग होना 

मेरे संग मेरे कमरे में 

उसके लिये संसार उपस्थित 

कितनी गलियां कितने गाँव 

लेकिन वह फिर-फिर आ जाये 

खोल के मेरी खिड़की के पट 

संग ले आये कुछ बौछारें 

मेरा दरवाजा खटकाये

बंद देख एक पल चुप हो 

क्षण बीते न फिर आ जाये 

पट खड़काये

नंगे पैर फर्श है ठंडा 

मैं घबरा कर द्वार खोलती 

वह तेजी से अंदर आये 

इक पल ठहरे फिर मुड़ जाये 

खुश हो जब दीपक बुझ जाये !


‘एक वृक्ष -एक गवाही नाम से’ अगले पन्ने पर लिखा था 


मैं गवाह हूँ 

मैं गवाह…

उस क्षण से लेकर आज तक 

जब प्रथम बार मेरे पत्तों ने आँखें खोली थीं 

और फिर जब मेरी डालियाँ भर गयी थीं फूलों से 

हर वर्ष, वर्षा, तूफान, भीषण शीत को सहते 

मेरे तन पर कुल्हाड़ी की धार सहते क्षण का भी 

परन्तु हर बार बसन्त की प्रतीक्षा में 

मेरे अंदर का साहस मृत नहीं हुआ.. 


Wednesday, March 17, 2021

रामदाने की खीर

 

वे घर लौट आए हैं। दस-ग्यारह दिनों के इस सफर में कितने ही अनुभव हुए। कितने ही लोगों से मिले, नए व पुराने परिचितों, दोनों ही से। इस समय कितना सन्नाटा है, झींगुर की आवाज आ रही है। मौसम ठंडा नहीं कहा जा सकता, दिन में गरम था। रात्रि के नौ बजे भी वे पंखा चलाकर बैठे हैं जबकि दिल्ली में कल इसी समय स्वेटर व शाल ओढ़कर बैठी थी वह। भतीजी का विवाह हो गया, ईश्वर उसे नए जीवन में सभी खुशियां दे। उसका ससुराल काफी अच्छा जान पड़ता है, काफी सारे बाराती आए थे। रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध हों तब ही पता चलता है कि परिवार में मेल है। भाई-भाभी ने बहुत अच्छी तरह सारी व्यवस्था की, बहुत ही शानदार प्रबंध था। पिताजी आए होते तो देखते पर हर कोई यहाँ अपनी ही दीवारों में कैद है।  छोटी बहन की सुंदर कंघी जो उसने उसके पर्स में रखवाई थी, साथ ही आ गई है, उसने संदेश भेज दिया है। अब उसकी बिटिया के विवाह में मिलेंगे। पिछले दिनों बाहर का खाना खाया, गरिष्ठ और तला हुआ, जरूर वजन बढ़ा होगा। पिछले दिनों न ही नियमित व्यायाम हुआ न योगासन। सृजन के नाम पर भी विशेष कुछ नहीं किया। उत्साह से भरा हल्का मन ही सृजन कर सकता है। ऐसा मन ही उदारवादी होता है और निर्भय भी। अस्तित्व के प्रति कृतज्ञता का अनुभव करके वह सहज ही ज्ञान में स्थित होता है और आनंदित भी ! जीवन में गुरू की उपस्थिति कितनी जरूरी है। कुछ लोग जीवन को संकुचित बना लेते हैं, उनके लिए जीवन असीम है, अनंत संभावनाओं से भरा। आज एक नए परिवार से मुलाकात हुई दुकान में, वह इलाहाबाद की हैं, कन्नड बोल रही थीं। 


आज सुबह उसे खुद पर आश्चर्य हुआ, यह भी याद  नहीं रहा कि आज कौन सा वार है, एक बार नहीं दो बार उसने गलत दिन बताया। हर कर्म का फल मिलता है इसका अनुभव कराती है यह बात, वर्षों पूर्व उसने सासु माँ की इस भूलने वाली बात पर उन्हें टोका था, यह कहकर कि इतनी सी बात उन्हें कैसे याद नहीं रहती।  आज से योग सेंटर में योग कक्षा में जाना आरंभ किया है। योग शिक्षिका मूलत: हिमाचल की है, पर उत्तराखंड में जन्मी है, ऋषिकेश से आई है। एक महीना पहले ही उसने यहाँ सिखाना शुरू किया है। अच्छा लगा पहला सत्र, सोमवार से वे नियमित जाएंगे। जून भी साथ गए, उन्हें भी शाम को नियमित योग करने का अवसर मिलेगा। लेखन का कार्य आज भी नहीं हुआ, समय जैसे भाग रहा है। दोपहर को भानु दीदी की पुस्तक का एक अंश पढ़ा, सुबह गुरूजी का एक बहुत ही ज्ञानवर्धक वीडियो देखा-सुना था, उनका ज्ञान अथाह है सागर जैसा ! छत पर सोलर पैनल लगाने का काम शुरू हो गया है। बालकनी व छत पर शेड का काम अभी शेष है। पिताजी से आज बात नहीं हुई, उनके मन में मोह-ममता नहीं है, वह संसार से निर्लिप्त हो गए हैं, ऐसा वह खुद ही कहते हैं। दीदी भी उसी राह पर हैं। जगत जैसे उनके लिए है ही नहीं। कौन जाने कौन सही है, जो खुश रहना जानता है वही सही है, जिसे न कोई शिकायत है न कोई अपेक्षा, वही सही है !  


आज शाम योग कक्षा में ‘वीरभद्रासन’ करते समय गायत्री ग्रुप का स्मरण हो आया उसे। वे लोग योग साधना ठीक से तो कर रहे होंगे। यहाँ की योग शिक्षिका बहुत अच्छी तरह सिखा रही है। जून आज सुबह साढ़े छह बजे ही डाक्टर के पास जाने के लिए निकले थे, त्वचा का इलाज हो गया है, एक सप्ताह तक धूप से बचना है। उसने गुरुजी की कठोपनिषद पर व्याख्या सुनी, वे तीन एषणाओं के बारे में बता रहे थे। पुत्र एषणा, वित्त एषणा तथा लोक एषणा के बारे में, जिनसे आत्मा पर आवरण आ जाता है। कोई जब तक स्वयं में टिका रहता है, सहज ही प्रसन्न रहता है, मन में इच्छा जगते ही कर्म का संसार शुरू हो जाता है। मन हर कामना के साथ डोलता रहता है। जगत का हल्का सा भी प्रभाव उसे कंपित कर देता है। मन सदा राग जगाता है अर्थात सुख चाहता है, दुख से बचना चाहता है पर स्वयं ही तुलना करके या किसी के शब्दों को सुनकर अथवा पुरानी स्मृति के कारण ही दुखी होता है। वह अपनी पहचान बनाना चाहता है पर अपूर्णता का दंश उसे चुभता रहता है। मन जब तक स्वयं को आत्मा में विलीन नहीं कर लेगा, दुख झेलता ही रहेगा। वह कौन है, जब तक यह नहीं जान लेगा तब तक दुख से मुक्ति नहीं है। मन अशान्ति का ही दूसरा नाम है। आत्मा शांति का सागर है। उसका ज्ञान ही मानव को वास्तविक प्रसन्नता का अनुभव कर सकता है। दोपहर को उसने नन्हे और सोनू के लिए एक कविता लिखी। कल वे उनके घर जाने वाले हैं, रामदाने की खीर बनाकर ले जाएंगे। यहाँ आने के बाद ब्लॉग पर कल पहली बार कुछ पोस्ट किया। 


उस पुरानी डायरी में पढ़े ये शब्द, किसी भी मनुष्य का सही मूल्यांकन करना हो तो उसकी त्रुटियों य कमजोरियों को उस समय अलग करके फेंक दो,, क्योंकि ये चीजें उसकी अपनी नहीं हैं। त्रुटियाँ तो मानव मात्र की सामान्य दुर्बलताएं हैं। महान सद्गुण ही मनुष्य की अपनी चीजें होती हैं। 


“दुनिया क्या कहेगी” ऐसा सोचना ही कमजोरी है, तुम्हें खुद को अच्छा जान पड़ता है, वही करो। जीवन का रहस्य यही है। 


हमारे अंदर का वह आध्यात्मिक जीव ही सत्य है, सक्षम है, अनंत है । चाहे हमारी वर्तमान स्थिति और वांछित स्थिति में कितना बड़ा अंतर हो, वह जीव यदि जागृत हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। 


सत्य इसलिए बोलना चाहिए क्योंकि कठिन से कठिन स्थितियों में भी अपने पूर्वाथों  को सोचना नहीं पड़ता; लेकिन कभी एक झूठ भस्मासुर बनकर सारी सच्चाईयों को पी सकता है।  


Tuesday, January 19, 2021

कभी अलविदा न कहना

 

आज की दोपहर कितनी अलग थी. बारह बजे के थोड़ी देर बाद ही सभी एक-एक करके आने लगे. पूरी डाइनिंग टेबल खाद्य पदार्थों से भर गयी. सुंदर साड़ी का उपहार दिया सबने मिलकर, अच्छी-अच्छी बातें कीं, परमात्मा की कृपा का अनुभव अब कइयों को होने लगा है. एक साधिका ने अपनी भावनाओं को कविता के माध्यम से व्यक्त किया. एक अन्य ने परमात्मा का स्मरण किया, तीसरी ने आशीष माँगा, परमात्मा के प्रति आत्मा का प्रेम ऐसा ही होता है, आत्मा पर जब परमात्मा के इश्क का रंग चढ़ता है तो वह भावविभोर हो जाती है. एक सखी ने कहा, उसका पुत्र ग्याहरवीं में आ गया है, आजकल पढ़ने में उसका मन नहीं लग रहा है. उसे कहा है, बेटे को लेकर आये एक बार. कुछ वर्ष पूर्व उससे योग सीखने आया करता था, शायद अपने दिल की बात कहे. आज इनमें से चार साधिकाओं के लिए लिखी कविताएं उन्हें भेज दीं. शेष सभी के लिए भी हो सका तो कुछ पंक्तियाँ लिखेगी. 


रात्रि के नौ बजने वाले हैं, आज सुबह से ही टीवी चैनलों पर हाऊडी मोदी के बारे में चर्चा चल रही थी. यह कार्यक्रम अब आरम्भ हो गया है. पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं. भारतीय संस्कृति का सुंदर  चित्रण अमेरिकन इंडियन कर रहे हैं. वे भी वर्षों पूर्व ह्यूस्टन गए थे, जहाँ यह कार्यक्रम हो रहा है. थोड़ी देर में मोदीजी  भाषण देंगे, बाद में ट्रम्प भी आएंगे. आज दोपहर सन्डे योग क्लास में बच्चों को सब सामान बाँट दिया, जो हर हफ्ते वे इस्तेमाल करते आ रहे थे. भविष्य में उन्हें घर पर ही योग करना है, यह बताया पर वह जानती है, कुछ ही दिनों में वे भूल जायेंगे. शाम को एक सखी अपनी बिटिया के साथ आयी, उसे कुछ किताबें दीं. एक अन्य सखी को तीन गमले. नन्हे से बात हुई, सोनू की मौसी व उनकी बेटी उनके  यहाँ कुछ दिनों के लिए आये हैं.


आज स्कूल में विदाई समारोह था, टीचर्स, बच्चों सभी ने गीत गाए, उपहार दिया. प्रिंसिपल ने मानपत्र पढ़ा, अच्छा लगा इतनी भावनाओं को उमड़ते देखकर, आँखों में अश्रु भी छलक आये दो एक बार... पिछले छह वर्षों से वहाँ जा रही थी. स्कूल से वापस आकर कुछ देर कश्मीर पर खबरें सुनीं. पाकिस्तान वहाँ मानवाधिकारों के लिए बेवजह ही इतना शोर मचा रहा है, जबकि उसके अपने देश में कितने राज्यों में लोग पीड़ित हैं. राजनीतिज्ञ जब तक संवेदनशील न हो वह आम जनता का दर्द समझ नहीं पाता और संवेदनशील लोग राजनीति में जाते ही नहीं, जाएँ भी तो टिक नहीं पाते. भारत का सौभाग्य है कि उसे मोदी जी जैसे नेता मिले हैं  आज के दौर में. यदि भारत और अमेरिका मिल जाएँ तो आतंकवाद का मुकाबला किया जा सकता है. कल शाम क्लब में विदाई कार्यक्रम है, आज पैकिंग का कोई भी कार्य नहीं हुआ, एक कमरे को छोड़कर सभी कमरे अभी भी पूर्ववत हैं, लगता ही नहीं कि एक महीने से भी कम समय में घर पूरी तरह खाली हो जायेगा. अगले महीने के तीसरे सप्ताह में वे बैंगलोर में होंगे. 


शाम के सवा चार बजे हैं. परसों शाम भाई पांच बजे के बाद ही आया. ढेर सारी मिठाई लाया है. कल योग साधिकाएं आयीं थीं, उन्हें उसका पटना से लाया ‘खाजा’ खिलाया और पेड़े भी. परसों क्लब में हुआ विदाई कार्यक्रम यादगार रहा. अनेक सदस्याओं ने अपने विचार और भाव प्रस्तुत किये. कविताएं पढ़ीं, कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये. योग ग्रुप की महिलाओं का कार्यक्रम ‘योग नृत्य’ सबसे अनोखा था, अंत में वे सभी भावविभोर हो गयीं, आँखें नम हो गयीं, दर्शकों की भी और कलाकारों की भी. घर लौटने में नौ बज गए थे, कितनी तस्वीरें खींचीं सबके साथ, एक सुखद स्मृति बन गया है वह दिन. कल शाम को सीएमडी की पत्नी का विदाई समारोह है, उनके लिए कविता लिखी है, सुबह पूर्व प्रेसीडेंट का फोन आया,  उन्होंने बतायीं कई बातें, सम्भवतः वह उन्हें कालेज के वक्त से जानती हैं। आज सुबह पिताजी के लिए रॉकिंग चेयर की जानकारी ली, जो वे उनके अठ्ठासीवें जन्मदिन पर भेजना चाहते हैं. फुफेरे भाई से बात हुई, भाभी का अपेंडिक्स का आपरेशन हुआ है कल, फुफेरी बहन के बारे में बताया, एक जगह उसका रिश्ता होते-होते रह गया. जीवन में जो वे चाहते हैं सब तो नहीं होता, पर उसके साथ तो ऐसा ही है. परमात्मा उसके साथ है हर पल, जो भी होता है वही होना होता है., वही होना ठीक भी होता है. जीवन कितना सरल हो जाता है यदि कोई सदगुरू राह दिखाने वाला मिल जाये ! 


... और आश्चर्य हुआ कि वर्षों पूर्व भी उसने उस दिन यही लिखा था, “गॉड इज विथ हर ! आज ही हुआ वह जैसा उसने सोचा था... ईश्वर उसका कितना ख्याल रखता है. उसका रखवाला अपनी नन्ही मित्र का कितना ख्याल रखता है ! थैंक गॉड ! रात्रि के ग्यारह बजे हैं, नींद भी आ जाएगी कुछ ही देर में पर सोने से पहले अगर मन में सपने सोच ले जो रात को देख सकेगी तो ... दिन भर ठीक रहा.. कल इतवार है और उसकी परछाई जो बिस्तर पर पड़ रही है अच्छी लग रही है”.


Thursday, October 29, 2020

नीला आकाश



आज मौसम काफी गरम है, पसीना सूखने का नाम ही नहीं ले रहा था दोपहर को, पर एसी चलाकर बैठे, एक बार भी ऐसा नहीं लगा, शायद इसे ही साक्षी भावमें टिकना कहते हैं। शाम को योग कक्षा में एसी में से काली चीटियाँ बरसने लगीं, गर्मी से बचने के लिए संभवत: वे वहाँ आयी होंगी। बाहर बरामदे में कार्पेट बिछाकर सबने साधना की. पश्चिम बंगाल में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। एक आतंकवादी हमले में कश्मीर में सीआर पी एफ के जवान मारे गए हैं। ‘’जीन  पर लिखी किताब अब कठिन होती जा रही है,  सोचा है फिर भी पूरा पढ़ेगी।  कितने वैज्ञानिकों की मेहनत का फल होती है एक खोज। जून ने रिटायरमेंट से पहले होने वाली तैयारी आरंभ कर दी है। 

 

आज भी गर्मी बहुत थी, शाम को अचानक वर्षा होने लगी, पर बूँदाबाँदी तक ही सीमित रही। आजकल लगभग रोज ही ऐसा होता है। योग कक्षा में एक साधिका पुदीने की शिकंजी बनाकर लाई, जो वे योग दिवस पर सबको पिलाने वाले हैं। आज उनकी कार बंगलूरू के लिए रवाना हो गई। उनसे पहले वही पहुँच जाएगी। एक मित्र परिवार को भोजन पर बुलाया था, वह  सेवा निवृत्त हो चुके हैं। उनके दातों का इलाज चल रहा है, खिचड़ी बनाने को कहा था उन्होंने स्वयं ही। हींग वाले आलू, बेक की हुई सब्जियां और घी के साथ खिचड़ी जब उन्होंने खाई तो बार-बार कह रहे थे, उनके लायक भोजन बना है, खाने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई। इस माह के अंत तक वे लोग चले जाएंगे। शाम को क्लब में रिहर्सल थी, अभी दो दिन और होगी, तीन दिन बाद कार्यक्रम है। फैशन परेड के लिए रैम्प पर चलना इतना भी कठिन नहीं होना चाहिए। 


आज सुबह जून टूर पर गए हैं, परसों आ जाएंगे। सुबह दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया था। योग कक्षा  में बच्चों को योग प्रोटोकाल के अनुसार योग कराया, बाद में योग पर एक प्रश्नोत्तरी और योग दिवस पर उन्हें एक चित्र बनाने को भी दिया। शाम को बगीचे में बैठकर ध्यान कर रही थी कि  पूनम का चाँद दिखा, तस्वीरें लीं, चाँद को देखकर सदा ही मन में उमंग की एक लहर दौड़ जाती है, ग्रहों का कितना प्रभाव पड़ता है जीवन पर। बचपन में आकाश के नीचे लेटकर वे बादलों को देखा करते थे, मन भी जैसे आकाश जितना फैल  जाता था। आज पहली बार यू जी कृष्णामूर्ति को सुना। गुरुजी को भी सुना, नींद और भोजन ऊर्जा को बढ़ाने वाले हों न कि सुस्त बनाने वाले, ऐसा उन्होंने कहा। 


आज का दिन कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। सुबह उठने में थोड़ी देर हुई। प्रात: भ्रमण से लौटी तो रोज गार्डन के सामने फूलों की चादर बिछी थी। पीले फूलों से गेट  से सड़क तक जैसे कालीन बिछ गया था। वापस लौटकर तस्वीरें उतारीं, एक वीडियो भी बनाया। स्कूल जाना था, बच्चों को संगीत के साथ योग कराया, प्रिंसिपल ने कहा, योग दिवस टीचर्स के साथ ही मनाएंगे। वापस आकर कुछ देर कंप्यूटर पर बैठी। दोपहर बाद मृणाल ज्योति, लौटकर, शाम की योग कक्षा फिर क्लब, वापस आकर कुछ देर ध्यान किया फिर रात्रि भोजन।  


और सुदूर अतीत में .. उस दिन के पन्ने पर विनोबा भावे की सूक्ति थी, “दूसरों को प्रेम करने से प्रेम मिलता है।” उसने लिखा.. और वह दुनिया से प्रेम करती है, सारी दुनिया से और ईश्वर से.. और उसके प्रिय जनों से भी। उस दिन एक और पेपर हो गया, कैसा हुआ यदि कोई पूछे तो कहना पड़ता, बुरा, फिर उसने स्वयं को सुधारा, इस दुनिया में ‘बुरा’ शब्द के अलावा कुछ भी बुरा नहीं है, उसे इस शब्द का प्रयोग कभी नहीं भाया। यदि कुछ पसंद न आए तो वह ‘अच्छा नहीं है’ ही  कहती थी। उसने सोचा पचास प्रतिशत अंक तो मिल ही जाएंगे, कुछ न से तो कुछ होना ही अच्छा है। अब चार दिन के बाद केवल एक ही पेपर शेष था। कालेज से लौटते समय जिस व्यक्ति ने उसे सीट दी, बुजुर्ग था,पढ़ा-लिखा था । शहर में आप किस मोहल्ले को बिलॉंग करती हैं ? यही प्रश्न था जो शायद वह पूछ रहा था, बस के शोर में उसे कुछ सुनाई नहीं दिया बाद में जोड़ने पर यह समझ में आया पर वह चुप बैठी रही। 


Tuesday, June 30, 2020

बसन्त में बौर

आज स्कूल में योग अभ्यास के बाद कक्षा तीन की एक छात्रा ने कहा, उसे योग करना अच्छा लगता है. उसने सामने आकर आसन भी किये. बाकी बच्चों को भी अवश्य ही इससे प्रेरणा मिलेगी. बच्चे ही नहीं बड़ों को भी आज के वक्त में योग सीखना ही पड़ेगा. उस दिन एक परिचिता आयी थी, जो बहुत परेशान थी. आज लड़कियाँ पढ़ लिख गयी हैं, अच्छा कमा रही हैं पर जीवन के सामान्य सुखों से वंचित हैं. वह यहाँ अकेली रहती है, ससुराल दूर है, तबादले की कोशिश कर रही है. आज दोपहर अस्पताल गयी जहाँ क्लब की वाइस प्रेसीडेंट इलाज करा रही हैं, वह कुछ दिन पहले गिर गयी थीं और घुटने में चोट लगी. वह उनके लिए फूल ले गयी और एक कविता भी, जो पढ़कर सुनाई. वापसी में क्लब में खिले फूलों की तस्वीरें उतारने कुछ देर के लिए रुकी. घर के सामने बने हैलीपैड कम वॉकिंग ट्रैक में  कोई टीम गिटार बजाकर शूटिंग कर रही है.

कल रात से ममता बनर्जी अपने ही राज्य में धरने पर बैठी हैं. कोलकाता के पुलिस कमिश्नर भी उनके साथ थे, जिनसे पूछताछ करने कल सीबीआई की टीम आयी थी और उन्होंने उसे ही गिरफ्तार कर लिया था. देश में चुनाव से इतनी हलचल होनी शायद स्वाभाविक ही है. मोदी जी की बढ़ती लोकप्रियता से विरोधी पक्ष घबराने लगा है. जनता समझ रही है कि ममता जी अब बौखलाहट में ऐसे कदम उठा रही हैं. रात्रि के आठ बजे हैं, जून अभी तक नहीं आये हैं, उनके दफ्तर में ऑडिटिंग चल रही है, अभी दो दिन और चलेगी. बसन्त पर एक कविता लिखी, उस दिन सुबह एक मधुर सुवास का अनुभव हुआ तो जून ने कहा था यह आम के बौर की सुगन्ध है, तभी  लिखने का विचार मन में आया था. उनके विचार बदल रहे हैं, यात्रा पर जाने के लिए अब वह पहले जैसे उत्सुक नहीं दीखते. सादा भोजन पसन्द करने लगे हैं. यूट्यूब पर  गुरूजी को सुना, सरल शब्दों में गूढ़ प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, कितने महान हैं वह, अपने आप में एक पूर्ण सत्ता ! कल रात्रि दो-तीन बार आँख खोलकर घड़ी देखी, सुबह की प्रतीक्षा थी. सुबह जगने से ठीक एक क्षण पूर्व आज्ञा चक्र पर सुंदर कलात्मक ॐ की आकृति दिखी. श्वेत प्रकाश पर काले रंग से बनी, कितना अद्भुत था वह दर्शन ! उसके बाद नीले प्रकाश में कोई चेहरा सा दिखा, सुबह से कई बार दिखा है, पहले भी दीखता है पर वह कौन है, कुछ ज्ञात नहीं. परमात्मा के सिवा जब यहाँ कुछ है ही नहीं तो वह उसकी का भेज देवदूत होगा. 

 नूना ने पुरानी डायरी पढ़ी - एक कविता, जो कालेज की लड़कियों के लिए लिखी थी. 

बड़ी समझदार, थोड़ी नादान
खुद से अनजान, करतीं पहचान 
वर्तमान और भविष्य की कड़ी लड़कियाँ
हवा सी तेज, पानी सा बहाव
आँखों को चुनौती देती 
घड़ी-घड़ी लड़कियाँ 
हँसती-खिलखिलाती 
सदा नए मोड़ पर खड़ी लड़कियाँ
जग की शान, परिवार का मान 
धरती की अंगूठी में जड़ी लड़कियाँ !

भगवद्गीता में कृष्ण कहते हैं, जो उन्हें हर जगह देखता है वह उसका नाश नहीं करते. उसे पूरा यकीन है कि एक दिन ऐसा आएगा जब सब यह तय कर लेंगे कि उन्हें एक साथ मिलकर अपनी अक्ल से आगे बढ़ना है. 
तुलसी यह जग आई के, सबसे मिलिए धाई
न जाने किस रूप में नारायण मिल जाई !

सुबह से वह मृत थी, स्पंदन का अनुभव हुआ अभी कुछ क्षण पूर्ण गेंदे के फूलों के मध्य; अब वह प्रसन्न है. उसके प्रिय वृक्ष के नीचे कितनी ही सूखी फलियाँ पड़ी थीं. उस जगह बैठते ही उसे विचित्र अहसास होता है जैसे वह धरती से दूर कहीं और पहुँच गयी है. उसे यकीन है कि चाहे किसी भी मूड में वहाँ जाये, जाते ही पोर-पोर अनजाने भय से, अनजाने सुख से सिहर उठेगा. अब वह स्वतन्त्र है, हर तरह के दुःख, परेशानियों से स्वतन्त्र, पढ़ने और लिखने के लिए स्वतन्त्र ! 

Sunday, June 28, 2020

श्री श्री और बाबा


आज बापू की पुण्यतिथि है, टीवी पर सर्वधर्म प्रार्थना का प्रसारण किया जा रहा है. बापू का जीवन भी पुण्यशाली था और मृत्यु भी, शहीद दिवस के रूप में उनकी पुण्यतिथि मनायी जाती है. स्कूलों के बच्चे मधुर स्वरों में गीत व भजन गा रहे हैं, गीत अत्यंत भक्तिभाव जगाने वाले हैं. आज सुबह गांधीजी की आवाज में उनके भाषण सुने. दूरदर्शन के अभिलेखागार में उनके वीडियो सुरक्षित रखे गए हैं. उनके हृदय में हर व्यक्ति के लिए प्रेम था, चाहे वह किसी जाति, किसी धर्म का हो. इस समय बहाई प्रार्थना कही जा रही है. परमात्मा से की गयी कोई प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती. अब कुरान का पाठ किया जा रहा है. कल रात तारिक अहमद को सुना, जो पाकिस्तानी हैं पर उसके सबसे बड़े आलोचक भी हैं. हिंदुस्तान की तारीफ करते हैं. कल शाम को अचानक तेज वर्षा व आंधी आयी. एक योग साधिका ने कहा, गुरूजी का कोई सन्देश दे वह उन्हें घर जाने से पूर्व, वह साधिका हिंदी में कविता लिखती है और गाती भी अच्छा है. आज धोबी अपने बगीचे से नारियल और ढेर सारा हरा  धनिया लाया था, उसने भी दो पत्ता गोभी तोड़ कर दीं.

आज नए वर्ष के प्रथम माह का अंतिम दिन है. अब जून को सात माह का समय और यहाँ अपने विभाग प्रमुख के रूप में व्यतीत करना है. आज शाम को एक योग साधिका को विदाई दी, वह सूजी का हलवा बना कर लायी थी, शेष सभी लोग भी कुछ न कुछ बनाकर लाये थे. नूना ने उसके लिए लिखी कविता पढ़ी. दोपहर की कक्षा में दस लोग थे, दो नई लड़कियों ने आना शुरू किया है जो बहुत मन से योग अभ्यास करती हैं. सुबह आसन किये, कुछ ही दिनों में शरीर हल्का लगने लगा है. पिछले दिनों यात्रा आदि के कारण नियमित व्यायाम न करने से वजन भी बढ़ गया है. 

दोपहर के साढ़े चार बजे हैं, आज टीवी पर कुछ नए चैनल देखे. यूट्यूब पर एक वीडियो देखा जिसमें स्वस्थ रहने के लिए कुछ काम की बातें थीं. सुबह उठकर गर्म पानी पीना है, कुछ देर टहलना है. शंख प्रक्षालन के आसन नियमित करने हैं. भोजन के डेढ़ घण्टे बाद पानी पीना है . नमक कम, सफेद चीनी व मैदा नहीं खाना है. भोजन चबाकर खाना है. रीढ़ की हड्डी को सीधा रखना है. नाभि व छाती के मध्य की दूरी को बढ़ाकर रखना है. भोजन करते समय नीचे बैठना है अथवा सीधे बैठना है. भोजन स्वयं से ऊपर रखना है. दिन में सोना भी ठीक नहीं है.  रामदेव बाबा पर एक कार्यक्रम भी देखा. आज सुबह श्री श्री व रामदेव बाबा को संगम तट पर एक साथ योग करते हुए देखना एक अभूतपूर्व अनुभव था. दोपहर को लॉन की धूप में विश्राम किया, पैरों पर धूप पड़ रही थी और सिर छाया में था. इसी तरह जीवन में भले संघर्ष हो पर मन में विश्राम हो वह जीवन सार्थक है. बड़ी भांजी के लिए आज सुबह कविता लिखी, अपनेआप ही भीतर उतर आयी हो जैसे, सोचा नहीं था कि लिखनी है. 

Monday, April 20, 2020

विश्वकर्मा पूजा


रात्रि के आठ बजने वाले हैं, आज विश्वकर्मा पूजा का उत्सव उन्होंने जून के दफ्तर में मनाया. सुबह साढ़े नौ बजे वह उनके एक सहकर्मी की पत्नी के साथ वहाँ पहुँच गयी थी. पूजा दस मिनट पहले ही समाप्त हो चुकी थी, प्रसाद वितरण की तैयारी थी. जाते ही नाश्ते का एक पैकेट मिला. एक मिठाई, एक नमकीन व एक केला. प्रसाद में नारियल व अदरक के टुकड़े मिश्रित अंकुरित मूंग व चने तथा चिनिया केला. पहले तंबोला और लॉटरी निकलने का मजेदार खेल हुआ फिर भोजन, जो बाहर से मंगवाया गया था. घर आकर कुछ देर आराम किया, पर नींद नहीं आ रही थी, मन में उत्सव के विचार आ रहे थे, फिर सुबह सुनी गुरु माँ की बात याद आयी. जप को गहरा करके पैर के अगूँठे तक स्पंदन को महसूस करना है, मन एकाग्र हो जाता है, ऐसा ही हुआ. दोपहर बाद उसी सखी के साथ एक अन्य सखी को देखने अस्पताल गयी. उसकी किडनी में स्टोन है छोटा सा. उसके पति दफ्तर के काम से विदेश  गए हैं, पुत्र भी यूरोप में जॉब के सिलसिले में हैं, तथा ससुर जी दूसरे अस्पताल में एडमिट हैं, उनका आपरेशन हुआ है शायद एक-दो दिनों में घर आ जायेंगे. भगवान सबकी सहायता के लिए किसी न किसी को भेज ही देता है, उनका माली ससुर की सेवा में है और उसकी पत्नी घर की देखभाल कर रही है, पुत्र ससुर जी के लिए भोजन लेकर गया है. शाम को योग कक्षा में एक साधिका ने पूछा, उसके बाएं पैर में दर्द है, क्या करे, तिल के तेल की मालिश से अवश्य ही लाभ होगा, ऐसा उसे बताया. 

रात्रि के आठ बजे हैं, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में गणेश पूजा का एपिसोड आ रहा है. जिसमें मूसलाधार वर्षा हो रही है. कुछ देर पहले क्लब की अध्यक्षा का फोन आया, कैंटीन में उनके द्वारा मंगाए गए उपहार आ गये हैं. पहली बार ऐसा हो रहा है कि सभी सदस्याओं को वार्षिकोत्सव के बाद उपहार दिए जायेंगे. शाम को बेसिक कोर्स का फॉलोअप था, सुदर्शन क्रिया करायी गयी. दोपहर को अगले महीने होने वाले क्लब के एक कार्यक्रम की तैयारी के लिए मीटिंग थी, परसों कुक को बुलाकर मेनू तय करना है. आज सुबह पीछे वाले घर से लड़कियों के रोने की आवाजें आयीं तो नैनी को भेजकर बुलवाया. दो किशोरी कन्याओं को उनके चाचा ने पिता के कहने पर डंडे से पीटा. उसे भी बुलाया, डांटा। लड़कियों को समझाया, वे दोनों रात भर गांव में कोई कार्यक्रम देखकर सुबह घर लौटी थीं. किशोरावस्था में दोनों ने कदम रखा ही है और मित्र बना लिए हैं. आज माली ने बांस का एक गोल ढाँचा बनाया, जिस पर पॉलीथिन लगाना है. क्यारी में बीज डालकर उसे ढकना होगा वर्षा जल से बचाने के लिए. आज फिर दो ठेले गोबर की खाद के खरीदे बगीचे के लिए. यह वर्ष उनकी खेती-बाड़ी के लिए अंतिम वर्ष है, इसलिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है. 

आज का दिन कुछ अलग था, सुबह-सुबह ही प्रेसीडेंट का फोन आया. साढ़े दस बजे वे उपहार में दिए जाने वाला सामान देखने कैंटीन गए, वहां के लोगों का व्यवहार बहुत शालीन था. एक घंटे के अंदर उन्होंने सामान भिजवा दिया.  दोपहर को मृणाल ज्योति गयी, जहां चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के अध्यक्ष तथा दो सदस्यों से मिलने का अवसर मिला. जिला बाल वेलफेयर अधिकारी भी आयीं थीं. मीटिंग काफी देर तक चली. वे साढ़े तीन बजे घर लौटे. जून सुबह नौ बजे ही दफ्तर चले गए थे और दोपहर को डिब्रूगढ़. विशेष बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकार कितनी सजग है, कई बातों की जानकारी हुई. 

मौसम काफी गर्म है आज, सितम्बर का तीसरा हफ्ता चल रहा है पर अभी तक जून का सा आभास हो रहा है धूप में. आज सुबह कुक आया था अक्टूबर में क्लब के कार्यक्रम में नाश्ते व भोजन का जिम्मा उसे दिया गया है. कुछ देर पूर्व टीवी पर राजस्थान सीकर से गुरूजी का ज्ञान सुना जो वे किसी कालेज के छात्र-छात्राओं को दे रहे थे. सीधी-सरल भाषा में उन्होंने ज्ञान के गहरे सूत्र समझा दिए. उनकी बातें इतनी सरल होते हुए भी कितना गहरा अर्थ लिए होती हैं. दोपहर को हिंदी की कक्षा के लिए मृणाल ज्योति गयी. एक से ग्यारह तक गिनती के साथ कुछ शब्द लिखवाये. मोबाइल पर साइन लेंग्वेज में हिंदी सिखाने का तरीका देखा, उसकी सहायता से पढना आसान हो गया है. 

Sunday, January 19, 2020

विश्व योग दिवस



आज का दिन काफी व्यस्त रहा और काफी अलग भी. प्रातः भ्रमण के समय फूलों से लदे वृक्षों की तस्वीरें उतारीं, बाकी दिन घर आने की जल्दी होती है सो वे कैमरा लेकर नहीं जाते. बड़े भाई से बात हुई वे एक प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में नौ दिन रहकर आये हैं, उन्हें काफी हल्कापन महसूस हो रहा है. देह में जहाँ कहीं भी दर्द आदि थे, चले गए हैं. दोपहर को सन्डे योगा क्लास के बच्चों के साथ स्वच्छता अभियान चलाया, घर के सामने तथा बायीं ओर की सड़कों से कई थैले भरकर कूड़ा उठाया, कुछ दिन ये सड़कें साफ रहेंगी फिर आते जाते लोग इन्हें बेहोशी में गन्दा कर देंगे. बच्चे बेहद खुश थे, जब वे वापस आये तो उन्हें पंक्ति में खड़ा कर हाथ धुलवाए, नैनी ने नाश्ता तैयार कर दिया था. श्रमदान के बाद भोजन का अलग ही स्वाद आता है. जून काफी दिन पहले अमूल लस्सी का क्रेट लाये थे, उन्होंने भी बांटने में सहयोग किया. सुबह वह दो सखियों के साथ को ऑपरेटिव से विश्व योग दिवस के लिए आवश्यक सामान लेने गयी, महिला क्लब में भी वे इस दिवस पर कार्यक्रम कर रहे हैं. कल से वे योग प्रोटोकाल के अनुसार अभ्यास भी आरंभ करने वाली हैं. उस दिन सुबह भी बीहू ताली में सामूहिक योग किया जायेगा. क्लब की एक सदस्या से फोन पर बात करके परिचय लिया, उनकी विदाई कविता लिखने के लिए. 

सुबह नींद खुलने से पूर्व स्वप्न में पशुओं की खाल की बात हो रही थी, कल शाम की मीटिंग में कुछ महिलाओं को भोजन का मीनू बनाते समय जो शब्द सुने थे, शायद उन्हीं का परिणाम था यह स्वप्न, या किसी पूर्व जन्म की स्मृति से उपजा था, कौन जाने !  सुबह की दिनचर्या अभी समाप्त हुई ही थी कि ड्राइवर आ गया, ड्राइविंग का अभ्यास किया, अब कुछ-कुछ समझ में आने लगा है. कल विश्व योग दिवस है. उसे चार कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिल रहा है. परमात्मा की कृपा है. 

आज इतवार है. जून थोड़ी देर के लिए दफ्तर गए हैं. लन्च में विशेष कुछ बनाना नहीं है, सलाद व फल. शाम को उनके पूर्व वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया है. वे लोग इसी महीने के अंत में सदा के लिए गोहाटी जा रहे हैं. आज सुबह एक्वा गार्ड का मकैनिक आया, कुछ दिन खराब रहने के बाद आज से मशीन ठीक हो गयी है. यहां पानी में आयरन ज्यादा है. परसों सुबह उन्हें उड़ीसा की यात्रा पर निकलना है. बगीचे में माली काम कर रहा है, उसका पूरा परिवार ही कुछ न कुछ सहयोग कर रहा है. दो दिन पहले नशा करके उसने बहुत उत्पात मचाया, जून ने तो उसे जाने को कह दिया था, पर वे लोग यहां रहना चाहते हैं. सुधरने का वादा पहले भी कई बार कर चूका है पर मन को जब किसी वस्तु की आदत पड़ जाती है, तो वह बिना सोचे-समझे उस कार्य को करना आरम्भ कर देता है, चाहे वह कार्य उसके या देह के लिए हानिकारक हो. मन जब स्वयं को बदलना आरम्भ करता  है तो पुराने संस्कार उसे रोकते हैं. वह छूटना चाहते हुए भी आदत का गुलाम होकर उसी कार्य को दोहराने लगता है. सजगता यदि एक क्षण के लिए भी न रहे तो मन दुर्बल हो जाता है. तमस की अधिकता के कारण भी मन सजग नहीं रह पाता। सजग मन ही सात्विक कर्मों में लगाता है. उसने सोचा, ये सब बातें उसे इस जन्म में कौन बताएगा, जिन्हें ज्ञात हैं वे भी मन को कहाँ साध पाते हैं ?

Tuesday, December 3, 2019

पंचदशी का ज्ञान



सुबह मौसम अच्छा था. स्कूल में एक छात्रा को योग कक्षा लेने को कहा, जब वह यहाँ नहीं रहेगी तो वह आराम से सिखा सकेगी. अभी-अभी छोटी बहन से बात की, पिछले एक महीने से वह बहुत व्यस्त थी. पहले उसकी बड़ी बिटिया आयी, जो विदेश में रहती है, वह व्यायाम करती है, फिट रहती है. एओल का एडवांस कोर्स भी उसने किया और डीएसएन भी करने वाली है. उसकी जीवन चर्या देखकर माँ खुश है, फिर उसकी ननद परिवार सहित आयी, उसके बाद छोटी बिटिया, जो कल लगभग तीन महीनों  के लिए इंटर्न बनकर दक्षिण अफ्रीका गयी है. कनाडा से केन्या के स्कूलों को पढ़ाया जाने वाला गणित उनके लिए कितना उपयोगी है, इस पर रिसर्च करेगी. आज सुबह पिताजी से बात की और छोटे भाई से भी, वह उन्हें एक बार फिर कम्प्यूटर पर वीडियो देखना सिखा रहा था. यू-ट्यूब पर अनुभवानन्द जी को डिब्रूगढ़ मेडिकल कालेज में बोलते सुना, रिकार्डिंग अच्छी नहीं हुई है, पर उनका वही अंदाज है. उन्होंने नब्बे किताबें लिखी हैं. बड़ी-बड़ी किताबें भी. उनकी बातें सुनकर मन झट प्रेरित हो जाता है, जैसे गुरूजी के वचन सुनकर मन शांत हो जाता है. सदगुरू जीवन को पंख देते हैं, वे सीमित दायरों से निकाल क्र एक बड़े फलक का दर्शन कराते हैं. उनका संकीर्ण मन पहले-पहल विरोध करता है, पर आकाश में उड़ना कौन नहीं चाहता. जून ने मुल्तानी मिट्टी मंगाई है, देह पर उसका लेप करने से पित्ती ठीक होती है.

कल दिन भर व्यस्तता बनी रही. सुबह रविवार के विशेष कार्य, दोपहर को बच्चों के साथ गुरूजी का जन्मदिन मनाया. शाम को एओल सेंटर गए वे. कार्यक्रम अच्छा रहा. साढ़े आठ तक वापस लौटे. नैनी ने सुंदर बड़ी सी माला बनाकर दी थी. पहले भी वह बड़ी और छोटी माला बनाकर दे चुकी है. गुरूजी का जन्मदिन सारे विश्व में मनाया गया. बंगलूरू आश्रम में भी कई धर्मों के पुरोहित आए थे. सभी ने उन्हें बधाई दी. युगों-युगों में कोई ऐसी महान आत्मा धरती पर जन्म लेती है. इस समय रात्रि के आठ बजने को हैं. बाहर वर्षा हो रही है. आज सुबह इस मौसम में पहली बार वे टहलकर आते समय भीग गए. पहले हल्की सी बूंदा-बूंदी थी, फिर तेज वर्षा होने लगी. जून ने दौड़ना शुरू किया, वह भी भागने लगी, फिर बच्चों के स्कूल के शेड में आकर रुके वे. कुछ देर बाद वर्षा की गति कम हुई तो घर लौटे. नाश्ते में मकई का दलिया बनाया जी बैंगलोर से लाये थे, सोनू ने दिया था. दोपहर को सहजन की सब्जी बनायी, मोटे वालर सहजन, जो उस दिन बगीचे से तोड़े थे. इससे पहले वह बिलकुल कोमल लगभग गुलाबी सहजन ही खाते थे, मोटे बाँट देते थे, पर इनका अलग स्वाद है. इंसान को अपनी सीमाएं बढ़ाते रहना चाहिए, वे ऐसा कुछ हर दिन करें जो पहले कभी न किया हो. वे देह को ठीक करने के लिए हजार उपाय करते हैं पर आत्मा या मन को अपने सहारे या भगवान के सहारे छोड़ देते हैं. कल से शाम की योग कक्षा में  श्री श्री की पुस्तक का एक पृष्ठ पढ़ना आरम्भ किया है. उन्हें हर दिन एक नोटबुक में कुछ न कुछ लिखने को भी कहा है. एक साधिका ने अपना लिखा भजन गया, धुन भी  मनहर थी.

आज सुबह निकले तो आकाश नीला था, वर्षा काफी पहले होकर रुक चुकी थी. आज सफाई कर्मचारी फिर नहीं आया. नैनी ने घर की सफाई की, उसे कुछ मेहनताना देना ठीक रहेगा. दुबली-पतली है और तीन बच्चों को संभालने व घर का काम करने में दिन भर लगी रहती है. बारह बजने वाले हैं, जून अभी तक नहीं आये हैं. आज उसने गोभी वाले चावल बनाये हैं, जो कल शाम वे लाये थे. शिलांग की गोभी, मई के महीने में. दस दिनों बाद उन्हें भूटान की यात्रा पर निकलना है. आज प्रतियोगिता के लिए कहानी लिखना आरंभ किया है. यू ट्यूब पर ‘पंचदशी’ सुना, अच्छा लगा. इस ग्रन्थ का नाम पहली बार सुन रही है. भारत का प्राचीन साहित्य इतना विशाल है कि कोई सामान्य जन एक जन्म में इसे पढ़ ही नहीं सकता. दोपहर को मृणाल ज्योति जाना है. चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी की मीटिंग है. विशेष बच्चों को होस्टल में रखकर स्कूल चलाना कोई आसान काम नहीं है. उन्हें साफ-सुथरा रहना सिखाना पड़ता है. उन्हें अपना काम खुद करना भी सिखाना पड़ता है. जो सहायक व अध्यापक वहाँ काम करते हैं, उनका वेतन भी अधिक नहीं है. कई समस्याओं पर चर्चा हो सकती है.

आज आडवाणी जी की लिखी किताब पढ़ी. बहुत रोचक है. उनके जीवन के साथ-साथ देश के इतिहास का भी ज्ञान हो रहा है. गुरूजी की पुस्तकें निकालकर योग साधिकाओं के सामने रखीं, पर किसी ने कोई पुस्तक नहीं ली, शायद उन्हें पढ़ने का शौक नहीं है. आजकल रमजान का महीना चल रहा है. पिताजी का फोन आया दोपहर को. जून ने व्हाट्सऐप का फैमिली ग्रुप कुछ दिनों के लिए छोड़ दिया है. वह यह बात समझ गए कि बड़े-बड़े वीडियो और पोस्ट देखने का समय नहीं है किसी के पास, साथ ही मोबाइल में स्पेस भी नहीं बचता। समाचारों में सुना कर्नाटक में बीजेपी सरकार बना रही है, उन्हें ग्यारह विधायक मिल गए हैं अर्थात उन्होंने खरीदे हैं ! 

Saturday, November 30, 2019

मुक्ति बोध



आज सुबह तेज वर्षा हुई, उसी वर्षा में वे मृणाल ज्योति गए. बच्चों को योग कराया और क्लब की सदस्याओं द्वारा दिया सामान सौंपा. एक अध्यापिका ने कुछ पैसे मांगे थे, वे भी उसे दिए, वर्ष के अंत तक धीरे-धीरे करके लौटा देगी, ऐसा उसने कहा है. पिछले चार दिनों से मन बुद्ध के साथ है. वह बुद्ध के जीवन पर आधारित धारावाहिक देख रही है, जो बुद्ध पूर्णिमा के दिन देखना आरम्भ किया था. उस दिन उनके निर्वाण का दृश्य देखा था. उनके उपदेश हृदय को छू गए थे, फिर जन्म से लेकर उनके बुद्ध बनने तक का संघर्ष देखा. कितने महान थे वे, कितने करुणावान और कितने बड़े तपस्वी किन्तु देवदत्त उन्हें कभी समझ नहीं पाया. उन्हें मरवाने के कितने षड्यन्त्र किये उसने. यशोधरा का त्याग भी अनुपम है, उसने बुद्ध के हृदय को समझ था. स्वयं में स्थित होकर ही कोई सुखों-दुखों के पार जा सकता है. मानव के शुभ कर्म एक दिन मुक्ति पथ पर ले जाते हैं और दुष्कर्म बन्धन की ओर. जिसे बुद्ध निर्वाण कहते हैं उसे ही ऋषि मोक्ष कहते हैं, जहां पूर्ण शांति है, जहां जाकर मन खो जाता है. जो सारे द्वंद्वों से अतीत है. जून आज पाँच दिनों के लिए बाहर गए हैं. अभी कुछ देर बाद नैनी व उसके साथ की महिलाएं आएँगी योग कक्षा के लिए, शाम के योग सत्र को एक घन्टा पहले खिसका दिया है क्योंकि शाम को मीटिंग है, फ्रिज को कल रात से बन्द किया है, भीतर की सारी बर्फ पिघल जाएगी तब वह अपना काम करना शुरू कर देगा. मानव का मन भी कभी कभी नकारात्मकता के कारण जम जाता है, फिर उसे साधना के द्वारा पिघलाया जाता है, पहले सा खुशनुमा हो जाता है, प्रेम की ऊष्मा जो भीतर दबी हुई थी, फिर झलकने लगती है. उसके सर के दाहिने भाग में ज्यादा देर तक स्क्रीन देखने के कारण तनाव महसूस हो रहा है, विश्राम देने से वह ठीक हो जायेगा. पिछले कई दिनों से नियमित लेखन नहीं हुआ. अब समझ-बुझ कर, जागकर लिखना होगा. इस समय मौसम सुहाना है, भीतर एक सहजता का अनुभव हो रहा है, ध्यान के बाद की सहजता ! भीतर के उस अछूते केंद्र का पता उसे भी मिल गया है, वर्षों पूर्व उसकी झलक मिली थी, पर उसमें हर पल स्थित रहने के लिए सजगता बहुत जरूरी है. 

शाम के साढ़े चार बजे हैं. मन बुद्धमय हो गया है. उनकी मंजुल मूर्ति तथा सुंदर देशना भीतर तक छू जाती है. उनके उपदेश सरल हैं और अनुभव से उपजे हैं. वे सिद्धांत की बात नहीं कहते, व्यावहारिक ज्ञान देते हैं वे कहते हैं, सन्देह अति विकट शत्रु है, वह मानव को पतन की ले जाता है. ईर्ष्या, घृणा, क्रोध, अग्नि के समान जलाते हैं और अहिंसा व करुणा आनंद को उपजाते हैं. बुद्ध शीलाचरण की बात करते हैं, फिर ध्यान का मन्त्र सिखाते हैं, जिससे विवेक का जन्म होता है, तथा शील का पालन सहज ही होने लगता है. ध्यान की गहराई में जो ज्ञान मिलता है, वही सच्चा ज्ञान है जिसके प्राप्त होने के बाद शील का पालन प्रयास पूर्वक नहीं करना पड़ता, लेकिन आरम्भ में तो पुरुषार्थ करना होगा, सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय तथा ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा. शम, दम, तप, सन्तोष व ईश्वर प्राणिधान का पालन भी करना होगा. आज सुबह उठी तो एक स्वप्न चल रहा था, दुःस्वप्न ही कह सकते हैं अथवा तो पूर्व के किये अशुद्ध कर्मों का फल देने वाला स्वप्न ! बुआ जी को देखा, उनका मुख बिलकुल अलग था. उनकी पुत्री का विवाह हो रहा है. वह रसोईघर में है पर शौच का पालन नहीं किया. अतीत के कितने ही विकर्मों का स्मरण हो आया. वह जगी तो भीतर प्रार्थना चल रही थी. उनका अवचेतन मन नींद में भी सक्रिय रहता है. उठकर टहलने गयी, वर्षा के बाद सब कुछ साफ-सुथरा था, मौसम शीतल था. सद्गुरु को सुना जो कह रहे थे, यदि अपने घर वापस लौटना है तो पहले पूरी तरह थक जाओ, जैसे बुद्ध कहते हैं, अपने भीतर सुख के केंद्र को खोजना है तो जीवन में दुःख है इसे अनुभव करना होगा. भीतर जाकर पता चलता है, परम् आनंद व प्रेम का स्रोत भीतर ही है . आज भी बुद्ध के जीवन की गाथा देखी-सुनी. अब कुछ ही अंक रह गए हैं. मगध, कपिलवस्तु, कौशल आदि राज्यों में ही बुद्ध विहार करते थे, पर उनका धर्म पूरे विश्व में फ़ैल गया जैसे सदगुरू का सन्देश पूरे विश्व में अपनाया जा रहा है. इसी महीने उनका जन्मदिन है, उस दिन वे दोपहर को श्रमदान करेंगे  और शाम को गुरुपूजा में सम्मिलित होंगे. जून आज तमिलनाडु जा रहे हैं, वह जो पौधे ले गए थे, नन्हे ने गमलों में लगा दिए हैं.