बोटेनिका में फूलों के पेड़
परसों शाम वे नन्हे के घर गये, छोटे भाई की छोटी बिटिया से मिलने, जो दोपहर को आयी और उसी रात की बस से अपनी एक मित्र से मिलने चिकमगलूर जा रही है।कल जून का जन्मदिन था, नूना ने उनके लिए एक कविता लिखी।आज पंद्रह अगस्त के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस का उत्सव सोल्लास मनाया, वहाँ भी एक कविता उसने पढ़ी। उसके बाद सभी मिलकर पहली बार मेद्दूर के लिए रवाना हुए, पहली बार मेदु वड़ा खाया।
सुबह नींद खुलने से पूर्व स्वयं को देखा, अचानक एक चेहरा सम्मुख आया, और उसके भीतर किसी ने कहा, अरे, यह तो वह ख़ुद है ! गुरुजी कहते हैं, परमात्मा की भक्ति पहले अन्य पुरुष फिर मध्यम पुरुष तथा अंत में उत्तम पुरुष पर समाप्त होती है। ‘वह’ से ‘तुम’ और ‘तुम’ से ‘मैं’ पर, जब तक ऐसा न हो, दूरी बनी ही रहती है। भीतर जाना अब सहज हो गया है, जैसे कोई बाहर से घर के भीतर आये। प्रातः भ्रमण से आकर प्राणायाम किया और सूर्य नमस्कार के छह चक्र। नाश्ते में जून ने उत्तपम बनाया। दिन में नूना अनुवाद कार्य करती रही, जब जून पूरे घर में लकड़ी का फ़र्श लगवाने की बात करने शहर गये थे। दिवाली से पहले घर का रूप काफ़ी बदल जाएगा। इस इतवार को नन्हा घर में होम ऑटोमेशन लगाने वाला है। वर्टिकल गार्डन के लिए आटोमेटिक इरीगेशन सिस्टम भी लग जायेगा। लिए पापाजी ने फ़ोन पर ओशो की किताब में पढ़े एक प्रश्न और उसके उत्तर का ज़िक्र किया,जो उन्हें अच्छा लगा। बड़े भाई का फ़ोन आया, वह बिटिया का सामान ‘गति’ से मँगवाने की बात कह रहे थे, जो महीनों से यहाँ स्टोर में पड़ा है।
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की हुकूमत क़ायम हो गई है। दुनिया के लगभग सभी मुल्क चिंता कर रहे हैं कि वहाँ मानव अधिकारों का हनन होगा। कल बड़े भांजे का जन्मदिन है, अगले हफ़्ते छोटे भाई का, जो मेहसाना के ओशो आश्रम में रहा दो दिनों के लिए, वह दोनों के लिए कुछ पंक्तियाँ लिखेगी।जून खाद व मिट्टी के लेकर आज नन्हे के यहाँ गये हैं, वहाँ माली गमलों की मिट्टी बदलने वाला है। आज पूरे दक्षिण भारत में देवी लक्ष्मी को समर्पित ‘वरलक्ष्मी’ का विशेष उत्सव मनाया जा रहा है।नन्हा-सोनू और उसके माँ-पापा आये थे, उन्होंने पापा जी से भी बात की, उनके लिए असम की चाय भेजी है। सोनू अगले हफ़्ते गोहाटी जा रही है, ननिहाल का पुश्तैनी घर किराए पर चढ़ाना है।
आज सुबह उन्होंने रक्षा बंधन का उत्सव सोल्लास मनाया, सभी बहनों-भाइयों से भी बात हो गयी। सुबह पहली बार वे बोटेनिका में टहलने गये। वहाँ हरे-भरे खेतों व मैदानों की हरियाली देखते ही बनती है, ख़ाली सड़कें और उनके किनारों पर लगे गुड़हल, कंचन के फूलों के वृक्ष, नीला आसमान, दूर से पहाड़ भी नीले लगते हैं, सभी कुछ शोभायमान व सुंदर था। जून की पीठ में हल्का दर्द है, वे थोड़ी देर में ही लौट आये। घर में वुडेन फ़्लोरिंग का काम समाप्त होने वाला है। नन्हे ने डीजेआई ओस्मो मोबाइल सेल्फ़ी स्टिक लाकर दी है, जिसमें तस्वीरें ले सकते हैं और वीडियो बना सकते हैं।पापाजी से बात हुई, छोटी भाभी, छोटी बिटिया का घर सेट करने जा रही है।
आज नैनी नहीं आयी, उसके दामाद की भतीजी की मृत्यु हो गयी है, पाँच दिन पहले जिसने संतान को जन्म दिया था। मृत्यु किसी भी क्षण, किसी भी रूप में आ सकती है। पिछले कई दिनों से अफ़ग़ानिस्तान में लोग जान पर खेल रहे हैं। कल के बम ब्लास्ट में अमेरिकी सैनिक मारे गये। अतीत में की गई भूलों का फल आज की पीढ़ी को भोगना पड़ रहा है। आज सुबह यू ट्यूब पर गरुड़ पुराण का कुछ अंश सुना था, मृत्यु के बाद कुछ हफ़्तों तक आत्मा विचरती है। मृत्यु से पहले आवाज़ चली जाती है, फिर मानव को दिव्य दृष्टि मिलती है, वह अपने पूरे जीवन को एक साथ देख पाता है, फिर उसे ले ज़ाया जाता है, तथा दो दिन बाद वापस लाया जाता है, तब वह अपने शरीर की अंतिम क्रियाएँ होते हुए देखती है। तेहरवीं के बाद वह आगे की यात्रा पर जाती है और कर्मों के अनुसार सुख या दुख का अनुभव करती है। कल इतवार है, जून नाश्ते में पोहे की एक मीठी डिश बनाने वाले हैं, जो वर्षों पूर्व सिंगापुर में खायी थी। दोपहर को सब लोग आश्रम जाएँगे।
आज सुबह उठी तो एक ख़ुशनुमा स्वप्न देख रही थी। स्वप्न में क्या था, यह तो जरा भी याद नहीं, पर मन बहुत आनंद से भरा था, उठकर ऐसा लगा। दोपहर का लंच आश्रम के रेस्तराँ में खाया। आश्रम से दो किताबें भी ख़रीदीं, जो सोनू की मॉम ने उसे उपहार में दीं।आश्रम जाना सदा ही अच्छा लगता है, वहाँ की हवा में गुरुजी की उपस्थिति है।शाम को निकट स्थित मुनिरत्ना नर्सरी से वे मधु मालती का एक पौधा लाये हैं, कल सुबह माली लगा देगा, उस स्थान पर, जहाँ पैशन फ़्रूट लगा हुआ था।नैनी ने पपीते के पेड़ से दो पपीते तोड़कर दिये।कच्चे पपीते के पराँठे की बात सोचते ही उसे माँ की स्मृति हो आती है।
आज कृष्ण जन्माष्टमी है, नूना ने कृष्ण पर लिखी पुरानी कविताओं को पढ़ा और कुछ सुधार किया।सुबह उठी तो मन रात को देखे विचित्र स्वप्न की याद से भरा था।जून साइकिल लेकर फूल ख़रीदने गये, एक बड़ी सी माला भी लाए, जो उन्होंने कृष्ण की तस्वीर पर लगायी है। मंदिर बहुत सुंदर लग रहा है। दिन भर फलाहार किया। दोपहर को कुछ कविताएँ टाइप कीं, जो डायरी में इक्कठी हो गई थीं।
अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाने वालों के लिए आज अंतिम दिन है, कल से तालिबान का शासन चलेगा। कल रात कोई स्वप्न नहीं देखा, आज सुबह आत्मा का बोध दृढ़ हुआ। अब अचेतन, चेतन, अवचेतन मन जैसे कोई भी हिस्से अनजाने नहीं रह गये हैं, अतीत की कोई स्मृति, कोई भी कृत्य, कोई भी बात न ही दबाने लायक़ है, न ही छिपाने लायक़। अतीत आत्मा के अंतर में झलक भी जाता है तो कोई अंतर नहीं पड़ता। जैसे दर्पण में आग झलक जाये तो दर्पण नहीं जलता। आत्मा को कुछ भी छू नहीं सकता। होश में किए कृत्य अपने साथ फल नहीं लाते पर बेहोशी में किए कृत्यों का फल तो भोगना ही पड़ता है।
आज नाश्ते में पहली बार ज्वार का दोसा खाया। शाम को टहलने गये तो पार्क-सात के पास एक बड़ा सा सारस पक्षी देखा, जो शायद भटक कर आ गया था, या आहत था। छोटी बहन का फ़ोन आया, बहनोई की आँख में धुँधलापन आ गया है, जो कैट्रेक के बाद हो जाता है, जून उनकी रिपोर्ट लेकर शेखर नेत्रालय जाएँगे। कल नन्हे के साथ जून के एक पुराने अधिकारी के यहाँ नाश्ते पर जाना है। काव्यालय पर ‘भाषा उत्सव’ के लिए हिन्दी का एक लेख लिखना है।

