Thursday, April 16, 2026

ज्ञानेश्वरी

ज्ञानेश्वरी 

नन्हे ने समारोह की सुंदर तस्वीरें भेजी हैं। जून का स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। सुबह नूना उठी तो वह पहले ही उठ चुके थे। घर का काम बिना नैनी के ठीक-ठाक चल रहा है। आज वसंत पंचमी पर कविता प्रकाशित की। छोटा भाई सिक्किम में काफ़ी स्थान देख रहा है, उसमें जोश और उत्साह बहुत है। छोटी बहन परीक्षा की तैयारी में लगी है। 


अभी कुछ देर पूर्व एक विचित्र स्वप्न देखकर नूना की आँख खुली। वह और माँ एक कमरे में सोये हैं। थोड़ी दूर पर दूसरा कमरा है, जहाँ छोटी बहन सोयी है, उसका बिस्तर इस कमरे से दिखायी पड़ता है। माँ कहती हैं, बिटिया क्या हुआ, मैं आ जाऊँ ? नूना उसकी तरफ़ देखती है तो तकिये के ऊपर टहनियों की भाँति हाथ हिल रहे हैं, जैसे कोई डूबता हुआ व्यक्ति जल के ऊपर हाथ निकालता है। कुछ देर देखने के बाद नूना उसके पास जाती है, अब वह टहनियाँ कहीं ग़ायब हो गयीं। किसी के बोलने की आवाज़ आ रही है।वह उसे हिलाती है, उसका चेहरा नीले रंग से रंगा है, माथे पर सफ़ेद रंग है और गले पर भी हरा या कोई अन्य रंग। नूना उसे आवाज़ देती है, पर वह गहन निद्रा में है। वह माँ को आवाज़ देती है, वह आती हैं पर उसकी यह हालत देखकर भयभीत नहीं होतीं, बल्कि हँसने लगती हैं, ज़ोर से नहीं, पर हल्की सी मुस्कान छा जाती है उनके मुख पर, तभी नींद खुल जाती है। क्या अर्थ हो सकता है इस स्वप्न का? उसके पहले गुरुजी के आश्रम के दो व्यक्तियों को उनके काम के सिलसिले में आये तथा काम करते हुए देखा था। गुरुजी की चर्चा भी हुई।   


आज सुबह स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर पंच तत्वों में विलीन हो गयीं। दो दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में किया गया है। नन्हा व सोनू भी बैंगलुरु पहुँचने वाले हैं। आज लता जी पर एक पोस्ट प्रकाशित की, उनको चाहने वाले करोड़ों की संख्या में हैं। ईश्वर भी उन्हें अपने पास बुलाकर आनंदित हो रहे होंगे। नूना ने आज रामकृष्ण परमहंस के बारे में पढ़ा और सुना।अद्भुत संत थे वह, ईश्वर के साक्षात रूप उन्हें दिखते थे, उनकी साधना अतुलनीय थी। उन्होंने ध्यान का महत्व बताया, वह स्वयं भी घंटों ध्यान में लीन रहते थे। 


आज जून ने कहा, कल से सुबह टहलने जाएँगे।लेकिन दो दिन बाद ही एकांत वास से बाहर आयेंगे। सभी से फ़ोन पर बात कर लेते हैं।आज अमर संत ज्ञानदेव द्वारा लिखी ‘ज्ञानेश्वरी’ पहली बार सुनी। जिसने भी उसे रिकॉर्ड किया है, धन्य है वह ! बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गई है। जिसे सुनते-सुनते ही समाधि का अनुभव होने लगता है।भारत में अनोखे योगी व संत हुए हैं, जिनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। वह कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। परमात्मा की शक्तियाँ अनंत हैं, जो उनसे जुड़ जाता है, वह उन शक्तियों कि स्वामी बन जाता है। एक ही चेतना से यह सारा जगत बना है, उसी में स्थित है, उसी से भरा हुआ है। मानव जन्म का एकमात्र उद्देश्य है, अपने सत्य स्वरूप को जानकर स्वयं को परमात्मा के प्रति समर्पित कर देना। यदि आत्मा का अनुभव होने के बाद भी कोई संसार की कमाना करे तो उससे बड़ा अभागा कौन होगा ? 


जून आज आठ दिन बाद असोसिएशन के दफ़्तर गये। कल से ऊपर के कमरे में शिफ्ट हो जाएँगे। कोरोना का अनुभव अंततः उन्होंने भी कर लिया।सुबह आकाश में चंद्रमा को ढूँढा, नहीं दिखा, रात्रि भ्रमण के समय दिखा। चंद्रमा भी तो धरती के घूमने के कारण प्रतिदिन पूर्व से उगता है और पश्चिम में अस्त होता है। जो हर दिन लगभग 50 मिनट की देरी से होता है। पूर्णिमा के दिन चाँद सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में उगता है और सूर्योदय के समय पश्चिम में अस्त होता है।अमावस के दिन यह सूर्योदय के साथ उदय होता है और सूर्यास्त के समय अस्त होता है। रात की रानी में भी कलियाँ आयी हैं। पापा जी ने आज ‘आरती संग्रह’ की बात बतायी, वह भी धर्म व अध्यात्म में पूरी तरह डूब गये हैं। 


आज सुबह जून किन्हीं लक्ष्मी नायक जी से दोसा-इडली ले आये थे। वह अपनी आज़ादी का उत्सव मना रहे थे। उसके बाद बाज़ार गये, वापसी में थलगतपुरा झील देखने गये, जहाँ जाकर बहुत निराशा हुई। झील का अधिकांश पानी सूख गया है, कुछ पौधों और काई ने शेष पानी को ढक लिया है। रास्ते में एक अन्य झील देखने के लिए रुके, वहाँ भी आधी से अधिक झील शैवाल से ढकी थी। वे घर लौटे तो नैनी प्रतीक्षा कर रही थी, उसे बच्चों के स्कूल जाना था, सो जल्दी आयी थी। शाम को पुन: ज्ञानेश्वरी सुनी। इस समय जून कॉलेज के दिनों को याद कर रहे हैं।जो बीत गया वह सपना ही तो है। 


आज बहुत दिनों बाद वे आश्रम गये। गुरुजी हैदराबाद गये हैं, उनकी अनुपस्थिति में भी आश्रम में एक शांति और आनंद की छाया फैली हुई थी।फूल खिले थे, कोयल की कूक सुनायी दे रही थी और मंद पवन बह रही थी।उन्होंने विशालाक्षी मंडप में ध्यान किया, पंचामृत में अल्पाहार लिया और सुंदर रास्तों पर भ्रमण करते रहे। सूर्यास्त के बाद वे घर लौट आये। एक कुर्ती भी ख़रीदी जो नूना को परसों किताबों की दुकान में पहन कर जानी है। 




Wednesday, April 15, 2026

नये नये ले-आउट


नये नये ले-आउट



सुबह साढ़े नौ बजे बच्चे आ गये थे। लंच उन्होंने ही बनाया, राजमा, मेथी आलू और बेक्ड वेज। दोपहर बाद जिग्सा पजल में कुछ टुकड़े जोड़े। शाम को सभी घूमने निकले, पहले दो नर्सरी देखीं, फिर दो झीलें। सूर्यास्त के समय वे झील किनारे थे, फ़ोटोग्राफ़ी की। दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


एक दिन और बीत गया, उपलब्धि के नाम पर, दोपहर को साहित्य रचना की, कुछ शब्द उतरने दिये कलम द्वारा। एक सखी से बात की, फूलों और  प्रकृति के चित्र उतारे। बगीचों की सैर की, आकाश को निहारा, चाँद-तारों से बातें कीं, हवा की ठंडक को महसूस किया। भोजन बनाया, खिलाया, खाया। चलते-फिरते राजनीति पर कुछ चर्चा सुनी। हिंदू-मुस्लिम, दलित, यादव, ब्राह्मण के जोड़-तोड़ चल रहे हैं। नापा में एक और व्यवसायिक इमारत बननी शुरू हुई है। पापाजी से बात की,उन्होंने उसकी कविताओं की तारीफ़ की, रोज़ की तरह। कल छोटी बहन के विवाह की वर्षगाँठ है, कविता भेजनी है उन्हें। 


आज शाम को एक महिला डॉक्टर आयीं, वह महिला दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित करना चाहती हैं। जून ने इस पर प्रसन्नता ज़ाहिर की। आज सुबह भी वह कमेटी के काम से बाहर गये थे। दोपहर को एक स्थानीय महिला ने ऑनलाइन कन्नड़ भाषा का पहला पाठ पढ़ाया।मार्च में छोटा भाई दुबई जाने वाला है और दीदी-जीजा चंडीगढ़। 


आज गणतंत्र दिवस है। नन्हा व सोनू कल रात को ही आ गये थे। रात्रि भोजन के बाद छत पर हवन वाली कड़ाही में अग्नि देव का आवाहन किया। इस बार लोहरी पर वे लोग आ नहीं पाये थे। आज बड़ा भांजा भी आ गया। असम का एक पुराना मित्र परिवार और नापा में नया बना एक मित्र परिवार भी। गाँव की पंचायत की अध्यक्षा भी आयी थीं, जिन्हें झंडा आरोहण के लिए बुलाया गया था। दोपहर को नेता जी पर एक अच्छी सी फ़िल्म देखी, गुमनामी।वह उनकी आत्मकथा भी मँगवा रही है, पिछले दिनों उनके बारे में इतना कुछ सुना और पढ़ा, कि और जानने की उत्सुकता हो रही है। 


नूना का स्वास्थ्य सौ प्रतिशत ठीक नहीं है। सिर में हल्का दर्द है और गले में हल्की ख़राश भी।आजकल हर दूसरे व्यक्ति को कोई न कोई समस्या हो रही है, कोरोना के वेरिएंट का वायरस हवा में है। सुबह टहलकर आये तो नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी, उसका फ़ोन ख़राब हो गया है। नन्हे को कहा, तो उसने नया फ़ोन ऑर्डर कर दिया है, कल आ जाएगा।उसने घर के लिए भी कुछ सामान भेजा है। उसे कुछ भी कमी दिखती है तो शीघ्र ही पूरा करने का प्रयास करता है। 


आज गाँधीजी की पुण्यतिथि है।कल शाम ‘बीटिंग रीट्रिट’ का शानदार  कार्यक्रम देखा, ड्रोन का प्रदर्शन बहुत अच्छा लगा। जून ने आज गाजर का हलवा बनाया है।नन्हा और सोनू केक लाये थे, आज उनके विवाह के रजिस्ट्रेशन को पाँच वर्ष हो गये।नूना ने नाश्ते में गोभी के पराँठे बनाये और लंच में लोभिया। शाम को वे सब ड्राइव पर गये, आसपास बन रहे कई ले-आउट देखे। बिल्डर खेतों को काटकर प्लॉट्स बना रहे हैं और संभवत: किसान भी इससे बहुत मुनाफ़ा कमा रहे हैं। बच्चों के जाने के बाद वे दोनों सोसाइटी के एक निवासी के यहाँ उनका तबला वादन सुनने गये। उनकी बेटी भी बहुत अच्छा गाती है। नन्हे ने छत के लिए एक बड़ी सी चाइम भेजी है और जून के बाथरूम के लिए नई फिटिंग्स। सोनू के भाई की मंगनी पर जून ने सूखे मेवों का एक डिब्बा भेजा है।     


फ़रवरी का आरम्भ ! पाँच तारीख़ को वसंत पंचमी है, पर उत्तर भारत में ठंड कम नहीं हुई है।आज बड़ी भांजी का जन्मदिन है, नूना ने कविता भेजी है। पापा जी ने बताया, छोटा भाई ड्यूटी पर सिक्किम पहुँच गया है।कल वे लोग नापा में रहने वाले इसरो के एक वैज्ञानिक पति-पत्नी से मिले, जो दुनिया के अनेक देशों की यात्रायें कर चुके हैं।दक्षिणी ध्रुव तक हो आये हैं। आने वाले कल उन्हें एक वृद्ध गांधीवादी व्यक्ति से मिलने जाना है। 


आज नूना पहली बार इस कमरे में अकेले सो रही है। जून सुबह उठे तो तबियत पूरी तरह ठीक नहीं लग रही थी, फिर भी कुछ देर टहलने गये। वापस आकर ध्यान भी किया, पर स्नान के बाद ज्वर महसूस हुआ, जो दिन में दवा लेने पर उतर गया। वह नीचे वाले कमरे में हैं। उसे लगता है मामूली सर्दी-जुकाम का असर है, पर जून कोरोना की संभावना बता रहे हैं। अगले सात दिन अब उन्हें अकेले ही रहना है और उन दोनों को ही घर से निकलना नहीं है। नैनी भी नहीं आएगी और न ही कोई और आ सकता है। बीत ही जाएँगे ये सात दिन, उसे एक फ़िल्म का नाम याद आया, वह सात दिन ! दिन आज गर्म है, शायद रात कुछ ठंडी होगी।नन्हे का फ़ोन दो बार आ चुका है , उसने फल-सब्ज़ियों का ऑर्डर कर दिया था।नेता जी की आत्मकथा आ गई है, बहुत रोचक ढंग से लिखी गई है। उन्हें बचपन से ही अध्यात्म में बहुत रुचि थी।पापाजी आजकल अंग्रेज़ी कविताओं की पुस्तक पढ़ रहे हैं।   


जून का बुख़ार उतर गया है, उन्होंने सुबह एक बार ही दवा ली।बड़ी ननद को भी कोविड हो गया है, जून ने दोनों बहनों से बात की। कुछ देर पहले सोनू की मॉम का फ़ोन आया, बेटे की मँगनी के लिए उनके यहाँ मेहमान आने शुरू हो गये हैं। कल नन्हा व सोनू भी पहुँच जाएँगे। आज असोसिएशन के पुराने प्रेसिडेंट की पत्नी का फ़ोन आया, जून के स्वास्थ्य के बारे में पूछ रही थी। यहाँ सभी लोग बहुत ध्यान रखते हैं। पड़ोसी भी किसी भी तरह की मदद के लिए फ़ोन करके कह चुके हैं। शाम को नन्हा व सोनू भी आ गये, उनसे रहा नहीं गया। नूना को लग रहा है, डायरी लेखन की कला जैसे भूल ही गई है, न ही लेख अच्छा आ रहा है, न ही विचार ठीक से व्यवस्थित हो रहे हैं। आज ध्यान भी नहीं किया, सारा दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


Tuesday, April 14, 2026

संविधान निर्माता-अंबेडकर

संविधान निर्माता-अंबेडकर



कल दोपहर नन्हा और सोनू असम की यात्रा समाप्त होने से तीन दिन पहले ही वापस आ गये। कल शाम सोनू की कोविड की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है, नन्हे को भी सिर में दर्द था। पूरी दुनिया में कोरोना का नया वेरियेंट ओमिक्रॉन बुरी तरह फैल रहा है। प्रतिदिन लाखों लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। अब दस दिन तक पुन: उन्हें बिना मेड और कुक के रहना होगा। आज सुबह नींद देर से खुली।सुबह पानी पीकर, तैयार होने के लिए जल्दी में सीढ़ियों से ऊपर आते समय नूना की चप्पल अटक गई और बायें घुटने में हल्की चोट लग गई। जून ने बहुत अच्छी तरह से देखभाल की। दवा लगाकर सेंक किया, पहले गरम, फिर ठंडा। हल्दी वाला दूध पीने को दिया। दस-ग्यारह बजे तक दर्द पूरी तरह चला गया। उसके बाद वे टहलने गये। नन्हे और सोनू से बात की। नन्हे को शिकायत है कि नूना हर (कर्म) बात को कर्म फल के रूप में देखती है। वह अलग तरह से सोचता है। उसके अनुसार जो भी किसके साथ होता है, वह किसी भी तरह से कर्मों का फल नहीं होता, वह स्वतंत्र होता है।इसका अर्थ है कि वह अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लेना नहीं चाहता, ख़ैर, सोच अपनी-अपनी, ख़्याल अपना अपना! शाम को वे सूप, फल, पॉपकॉर्न, गज़क आदि लेकर उनसे  मिलने गये। 

आज सुबह नन्हे को एक संदेश भेजा। जो घटित हो चुका है, उसे भाग्य मान लेना ही समझदारी है, कार्य-कारण का नियम वहाँ लगाकर सिवा पछतावे के और क्या हो सकता है। आगे जो करना है, उसके प्रति ही सचेत रहा जा सकता है। जीवन कितने पाठ किस तरह से पढ़ाता है, कोई नहीं जानता।उन्हें हर वक्त सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।आज सुबह नाश्ते में दही-चिवड़ा और गुड़ खाया। शाम को लंबी ड्राइव के बाद वे थित्ताहल्ली में सूर्यास्त देखने गये और वहीं कुछ देर टहलते रहे। नन्हा और सोनू अब काफ़ी ठीक हैं, बुख़ार भी नहीं है। सभी भाई-बहनों से बात की, सभी किसी न किसी रूप में मकर संक्रांति का उत्सव मना रहे हैं। 


प्रातः भ्रमण झील किनारे हुआ। वहाँ एक श्वेत श्वान ने उनका मन मोह लिया। देखते ही दौड़ कर आया, साथ-साथ चलता रहा और अंत में दूर तक छोड़ने भी आया। पहली बार मिलने पर भी कोई इस तरह कैसे परिचित बन जाता है, शायद वह कभी किसी का पालतू रहा होगा, उन्हीं की छवि उसे उनमें दिखाई दी होगी।दोपहर बाद वे नापा के एक निवासी के बगीचे से मीठे अमरूद लाए, वह बहुत ही सज्जन व्यक्ति प्रतीत होते हैं। आज सुबह जून कमेटी के कुछ सदस्यों के साथ उनके घर भी गये थे, यह जानने कि वह अभी तक असोसिएशन के सदस्य क्यों नहीं बने हैं। छोटे भाई ने बताया, मुंबई में मास्क न लगाने पर उसे दो सौ रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। नन्हे व सोनू के लिए नाश्ता व दोपहर का खाना पोर्टर से भेजा। छोटी भतीजी को भी कोविड संक्रमण हो गया है, वह ख़ुद डाक्टर है, पर डाक्टर बहुत संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। 


आज उन्हें कोविड की बूस्टर वैक्सीन लग गई। दिन भर सब कुछ ठीक रहा पर शाम से उसके पैरों में थोड़ा सा दर्द है। पाँच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। पापा जी आजकल हनुमान प्रसाद पोद्दार की पुस्तक पढ़ रहे हैं। 


आज भी वैक्सीन का थोड़ा-बहुत असर दिन भर बना रहा, मन में उत्साह नहीं था और न ही स्पष्टता, जो सदा ही उसके मन में रहती है। नन्हा और सोनू भी आजकल इतने उत्साहित नहीं दिखते। मंझले भाई से बात हुई। कल कनाडा में भीषण तूफ़ान आया। 


आज सुबह आकाश में पूर्णिमा के चंद्रमा की शोभा निहारी। नाश्ते में जून ने दोसा बनाया।नन्हे के यहाँ भी भिजवाया। सोनू से बात हुई, उसके भाई के विवाह की बात चल रही है। शाम को वे एक तमिलियन वरिष्ठ निवासी के यहाँ गये, जिनका बड़ा सा घर “मायोन कुटीर’ बहुत शानदार है। यह घर तमिलनाडु के कराईकुडी क्षेत्र में स्थित चेट्टियार समुदाय की 19वीं सदी की चेट्टिनाड की वास्तुकला का एक सुंदर नमूना है।यह घर आकार में विशाल है और दो मंजिला है।हवा और रोशनी के लिए मध्य में बड़ा सा आंगन (थिन्नई) है, जो पारंपरिक तमिल वास्तुकला का हिस्सा है।फ़र्श पर रंगीन अथांगुडी टाइल्स लगी हैं  और दीवारों पर सुंदर फूलों के डिजाइन वाला वाल पेपर लगा है। सीढ़ियाँ टीक वुड की बनी हैं। घर के केंद्र में बना मंदिर बहुत आकर्षक है। हरेक वस्तु बहुत ही शोभनीय है और चुन-चुन कर लगायी गई है। दीवार में फिट हो जाने वाली लकड़ी की एक मेज़ भी वहाँ था।मकान मालिक सीए हैं उनकी धर्मपत्नी संगीत शिक्षिका हैं। घर पर भी कर्नाटक संगीत सिखाती हैं। पहली मंज़िल पर एक बड़ा सा संगीत कक्ष है। उनकी एकमात्र पुत्री बॉस्टन में पढ़ रही है। 


आज दोपहर लेखन कार्य के लिए पर्याप्त समय मिला। भीमराव अंबेडकर के जीवन के बारे में सुना।उन्हें अपनी जाति के कारण कितने अपमान व कष्ट सहने पड़े थे।उन्होंने भारत के संविधान में सभी को समानता का अधिकार दिलाया।कितना आश्चर्य है कि सभी को अपने आश्रय में स्थान देने वाला भारत अपने ही कुछ नागरिकों को अपना नहीं मानता था। उत्तर प्रदेश का चुनाव बहुत रोचक होता जा रहा है। पापा जी से रोज़ की तरह आज भी अध्यात्म चर्चा हुई। 


Monday, April 13, 2026

टैगोर की आत्मकथा

टैगोर की आत्मकथा 

आज ही नूना को कत्थई रंग की यह डायरी मिली है।स्टेट बैंक के ब्रांच मैनेजर तथा एक मुख्य अधिकारी आये थे, उन्होंने जून को नयी डायरी तथा कैलेंडर दिये। सुबह सात बजे केक व उपहार लेकर नन्हा और सोनू भी आ गये। सभी के फ़ोन भी आये।आज वर्षों बाद गुरुजी के भक्तों के साथ गुरुपूजा का आयोजन किया। बहुत आनंद आया। गुरुजी आजकल अमेरिका में हैं, पर वह हर उस जगह हैं जहाँ लोग उन्हें याद करते हैं। ‘सौदमिनी’ सोसाइटी से एक वरिष्ठ शिक्षक आये थे, उनकी आवाज़ बहुत अच्छी है। उन्होंने पूजा करने के बाद अनेक सुंदर भजन गाये।जून ने प्रसाद में खिचड़ी, हलुआ तथा रायता बना दिया था। कुल मिलाकर उनके विवाह की सैंतीसवीं वर्षगाँठ बहुत अच्छी तरह से मनायी । छोटी बहन ने बताया, उनके यहाँ एओएल की संगीत की महफ़िल जमती है और फ़ॉलो अप भी होता है। जीवन एक उपहार है, गुरुजी की यह बात आज कितनी सत्य प्रतीत हो रही है। भीतर जो भी महसूस होता है, उसे कोई शब्दों में कह पाये तो काव्य का जन्म होता है। कविता पहले भीतर जन्मती है फिर बाहर प्रकटती है।नूना को एक कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिला। 

आज सुबह वह उठी तो मन गुरुजी के लिए कृतज्ञता से भरा था, एक कविता सहज ही मूर्त हो गयी। शाम को एक बार फिर उसे अहसास हुआ, कितना समय मोबाइल पर चला जाता है, इसका उसे भान  ही नहीं रहता।मोबाइल किनारे कर आज उसने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की आत्मकथा पढ़ने के लिए उठायी है। टैगोर एक भक्त कवि थे। वे कलाकार, समाजसेवी, शिक्षाविद् और भी न जाने क्या-क्या थे, पर सबसे पहले वह अपने को कवि मानते हैं। कवि होने का अर्थ है चीजों के पार जाकर कुछ ऐसा देख लेना जो सामान्य लोग नहीं देख पाते।आर्यसमाज के स्वामी परमानंद जी का एक व्याख्यान भी सुना, वह भी बहुत सरल शब्दों में गूढ़ बातें समझाते हैं। 
आज जून को जल्दी जाना था, उनकी कमेटी आज वृक्षारोपण कर रही है। बाद में नूना भी उसमें सम्मिलित हुई, उन्होंने हरसिंगार, अमलतास, प्लूमेरिया और भी कई तरह के फूलों के पेड़ लगाये।वहाँ एक सरदारनी से मुलाक़ात हुई, जो मैराथन दौड़ चुकी हैं। शाम को पापाजी से बात हुई, वह आजकल जे कृष्णामूर्ति की पुस्तक पढ़ रहे हैं।यह भी कहा, उन्हें संस्कृत पढ़ने में दिक्क्त होती है, क्योंकि कभी स्कूल में संस्कृत नहीं पढ़ी। नन्हा और सोनू असम गये हैं। कल वे लोग पासीघाट जाएँगे,जो सियांग नदी के किनारे बसा अरुणाचल प्रदेश का सबसे पुराना शहर है। नूना को वहाँ के हरे-भरे पहाड़, झूलते पुल और पहाड़ी नदियाँ याद आ गयीं, कुछ वर्ष पहले वे दो दिन के लिए वहाँ गये थे। 
सुबह वे दोनों गुलकमाले झील पर गये।आकाश पर बादल थे, हल्का धुँधलका था। वातावरण बहुत शांत था। उन्होंने देखा, दूर पानी में तैरती एक गोल नाव पर टॉर्च की रोशनी हो रही है, शायद नाविक मछली पकड़ रहे थे। लगभग सात बजे सूर्यदेव के दर्शन हुए। पंछी भी आकाश में उड़ान भरने लगे। दो नावें और आ गयीं और झील के उस पार मछली ख़रीदारों की भीड़ बढ़ने लगी। वे घर लौटे तो माली आ चुका था, नूना के अगले ढाई घंटे बगीचे में काम करवाते बीते। तब तक जून ने नाश्ता बना दिया। बोगनवेलिया के फूल अपने शबाब पर हैं और गुलाब का एक पौधा भी। रात की रानी फूलों से एक बार फिर भर गई है। दोपहर को गुरुनानक देव पर एक फ़िल्म देखी, उन्होंने अपने जीवन में २५ हज़ार मील की यात्रा पैदल की थी। उनके दो शिष्य थे, पर फ़िल्म में मरदाना को ही दिखाया गया है।  आज गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती है, उनके बारे में भी वे अधिक नहीं जानते।स्वामी रामकृष्ण और माँ शारदा के कुछ अनोखे वचन पढ़े, श्री श्री तथा ओशो के कुछ वाक्य भी। भगवद् गीता के चंद श्लोकों के साथ टैगोर की पुस्तक का एक पन्ना भी ! कितना अच्छा गद्य भी लिखते हैं वह, कविता उनकी श्वास-श्वास में बसी हुई थी। उनके लिखे ‘गोरा’ उपन्यास पर आधारित डी डी -१ का धारावाहिक देखना शुरू किया है मोबाइल पर। आज बहनोई के जन्मदिन पर शुभकामना के लिए एक कविता लिखी।अगले दो महीनों में वह एक रेस्तराँ खोलने जा रहे हैं।
आज सुबह का ध्यान गहरा था। बाद में पार्क-१ गयी, सफ़ाई चल रही थी। शाम को वे निकट के गाँव तक टहलने गये, भुट्टे और टमाटर के खेत देखे।इस बार मकर संक्रांति पर 'आजादी का अमृत महोत्सव' के अन्तर्गत आयुष मंत्रालय, ७५ लाख से अधिक लोगों के लिए सूर्य नमस्कार का वर्चुअल आयोजन करने वाला है। भारत का उनके लिए क्या अर्थ है, वे इसके लिए क्या कर  रहे हैं और क्या कर सकते हैं ? इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए उसे गणतंत्र दिवस के लिए एक कविता लिखनी है। नापा की पहली इ-पत्रिका कल या परसों प्रकाशित होने के लिए तैयार है। जून ने भी काफ़ी काम किया है इसके लिए, उनका विचार अब साकार होने जा रहा है। 

Friday, April 10, 2026

कार्तिकेय का मंदिर


कार्तिकेय का मंदिर

आज भगवद् गीता कोर्स का दूसरा दिन था। गुरुजी ने कितनी अच्छी तरह से, कितनी कुशलता से श्लोकों का अर्थ समझाया।यदि कोई अंत काल में भगवान का स्मरण करता है, तो वह मोक्ष को प्राप्त होता है।ब्रह्मा के दिन और रात की अवधि और सृष्टि के बार-बार प्रकट होने और विलीन होने की प्रक्रिया का वर्णन भी इस अध्याय में है।मृत्यु के बाद जीवात्मा की दो गतियों का वर्णन किया। प्रकाश का मार्ग, जिससे जाने वाले वापस नहीं लौटते, और अंधकार का मार्ग, जिससे जीवात्मा पुनः जन्म लेती है।प्रवचन देते हुए गुरु जी की प्रसन्नता छलकती रहती है।उनके हाव-भाव व चाल बिलकुल बच्चों जैसे है और उनका ज्ञान ऋषि-मुनियों जैसा। शाम को नूना और जून नापा से पन्द्रह-बीस मिनट की दूरी पर स्थित एक पहाड़ी ‘एपिक रॉक’ देखने गये, जहां एक छोटा सा झरना बह रहा था, जिसका जल सड़क को पार करता हुआ, नीचे चट्टानों से होता हुआ, घाटी व खेतों में जा रहा था। निकट ही हनुमान जी एक प्रसिद्ध मंदिर है। कहा जाता है, रावण के द्वारा ले जाते समय सीता जी ने इसी क्षेत्र में अपने आभूषण गिराये थे। उन्हें वह स्थान बहुत सुंदर प्रतीत हुआ। कुछ आयताकार, चारों ओर से खुली सरंचनाओं के साथ वहाँ एक जलकुण्ड भी है, ज्ञात हुआ कि लोग पिंडदान के लिए भी वहाँ आते हैं। आज सोसाइटी में किसी का टर्टल, कछुआ खो गया है।लोग बिल्ली-कुत्तों, मछलियों व पंछियों के साथ कछुए भी पालते हैं, नूना को आश्चर्य हुआ। 


आज सोमवार के दिन काशी में विश्वनाथ धाम का लोकार्पण किया गया। केवल तीन हज़ार वर्ग फ़ीट वाला परिसर अब पाँच लाख वर्ग फ़ीट में फैल गया है। अब यह कारिडोर मंदिर को सीधे गंगा नदी से जोड़ता है। ललिता घाट में स्नान के बाद भक्त यात्री सीधे मंदिर आ सकते हैं।यात्रियों के लिए यहाँ विश्राम गृह, संग्रहालय, पुस्तकालय और आध्यात्मिक केंद्र जैसी कई सिविधाओं का निर्माण किया गया है।मोदी जी ने इस अवसर पर ओजस्वी भाषण दिया। संतों का आगमन भी हुआ पर उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया, न ही उन्हें संबोधित किया गया। नूना को लगा, संत समाज का सम्मान होना चाहिए था, किंतु यह भी तो सच है, संत मान-अपमान से ऊपर उठ चुके होते हैं। जो भी मान-अपमान से ऊपर उठ सके, वही संत हो जाता है। कल रात नींद गहरी नहीं थी, आज भी उसे ऊर्जा का स्तर रोज़ से कुछ कम लग रहा है। 


आज सुबह सात बजे वे दोनों अपने पड़ोसी दंपत्ति के साथ उन्हीं मित्र के यहाँ गये, जो कुछ दिन पहले उनके घर आये थे। दो घंटे की यात्रा के बाद घर पहुँचे। मेज़बान सखी ने हार्दिक स्वागत किया। स्वादिष्ट नाश्ते के बाद सभी सोसाइटी के हरे-भरे बगीचों में टहलने गये। वहाँ व्यायाम करने के उपकरण था तथा सभी तरह की आधुनिक सुविधाएँ थीं। वापस आकर कार्ड्स का खेल ‘ब्रिज’ खेला और नूना ने पहली बार किसी को ‘पेशेंस’ गेम खेलते हुए देखा।दोपहर के भोजन के बाद कुछ देर विश्राम करके वे शाम तक घर लौट आये।शाम को पापा जी ने उसकी नयी कविता के बारे में बात की। 


जून ने शयन कक्ष के बाहर छज्जे में कृत्रिम घास लगवा दी है, हरियाली से आँखों को सुकून तो मिलता ही है, बगीचे की शोभा बढ़ गई है। नूना ने वहाँ बैठकर योगासन किये, अनुभव अच्छा रहा।आजकल सुबह वह नापा के किसी न किसी एक बगीचे का निरीक्षण करने भी जाती है, माली भी पहचान गये हैं और देखते ही काम शुरू कर देते हैं। चारों तरफ़ सफ़ाई का काम चल रहा है।नन्हे और सोनू ने उसे नेटफ़्लिक्स पर साइंस फ़िक्शन ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ देखने को कहा, एक एपिसोड देखा है, कितनी विचित्र संस्कृति है अमेरिका की, जिससे भारत की युवा पीढ़ी प्रभावित हो रही है। मोदी जी को इसीलिए भारत की संस्कृति के पुनर्जागरण की आवश्यकता महसूस हो रही है। 


अब ठंड बढ़ने लगी है, सुबह तापमान १८ डिग्री था। पापाजी ने कहा, वहाँ छह डिग्री पहुँच गया है, उन्हें बहुत ठंड लग रही थी। उनकी बिल्लियों ने घर में गंदा किया तो कल से वे उन्हें गली में ही कैट फ़ूड देने वाले हैं। कल रात वह बाहर बालकनी में नीचे घास पर दरी बिछाकर सोयी। सुबह उठी तो मन ध्यानस्थ था। रात को आकाश में चाँद दिख रहा था, उस पर त्राटक करते-करते नींद आ गयी, फिर पता ही नहीं चला कब सुबह हो गयी। जून आज असोसिएशन के काम के सिलसिले में काफ़ी समय बाहर रहे।बहुत दिनों बाद छोटी बहन से बात हुई, वह दुबई में एक्सपो देखने गई थी। भारत के मंडप में उसे मोदीजी की तस्वीरें देखकर कुछ अच्छा सा नहीं लगा। सरकार को अपना प्रचार इतना भी नहीं करना चाहिए, ऐसा उसका कहना था। भारतीय अपनी आलोचना करने में बहुत कुशल होते हैं। 


आज जून, नन्हे और सोनू को भी एपिक रॉक दिखाने ले गये। रास्ते बहुत अच्छे थे। खेतों और गाँवों को पार करते हुए, पर्वतों को निहारते वे गंतव्य तक पहुँचे। वापसी में सोमनहल्ली झील में सुंदर पक्षी भी देखे।नूना ने अहल्याबाई होलकर पर एक धारावाहिक देखना आरम्भ किया है, बहुत अच्छा लग रहा है।सभी ने अच्छा अभिनय किया है।इसमें राजमहलों की राजनीति को भी दर्शाया गया है। आज पहली बार नूना असोसिएशन की दो महिला सदस्याओं के साथ मेट्रो मॉल गयी, जो होलसेल मॉल है।वहाँ क्रिसमस की अनुपम सजावट की गई थी। 


आज सुबह उगता हुआ लाल सूरज देखते हुए छत पर सूर्य नमस्कार करने का अवसर मिला। परमात्मा के प्रति श्रद्धा को गहराई से महसूस करते हुए एक कविता अनायास ही लिखी गयी। आज क्रिसमस की पूर्व संध्या है, दोपहर बाद से ही कार्यक्रम शुरू हो गये थे। नन्हा और सोनू भी आ गये हैं।सोनू केक बनाकर लायी है। नापा के ही एक व्यक्ति सांता बने और परेड में शामिल हुए। जून ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में भाग लिया। 


आज वे राज राजेश्वरी नगर में एक पहाड़ी पर स्थित शृंगगिरि श्री शंमुख स्वामी मंदिर देखने गये, जो यहाँ से ज़्यादा दूर नहीं है। यह भगवान कार्तिकेय को समर्पित एक सुंदर मंदिर है। मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका 62 फीट ऊंचा गोपुरम है, जिस पर भगवान शंमुख के छह विशाल मुख बने हुए हैं।गोपुरम के ऊपर  स्फटिक का एक विशाल गुंबद है, जिसमें लगभग ढाई हज़ार क्रिस्टल लगे हैं। दिन के समय सूर्य की किरणें इन पर पड़ने से इंद्रधनुषी छटा बिखरती है, जबकि रात में यह एलईडी बत्तियों से जगमगाता है।मंदिर में गणेश की प्रतिमाओं का विशाल संग्रह है। अनेक प्रकार की मुद्राओं में, विभिन्न पदार्थों से बनी मूर्तियाँ वहाँ रखी गई हैं।यहाँ तक कि आधुनिक वेशभूषा में भी गणपति को दिखाया गया है।


इस मंदिर के निकट ही एक अन्य विशाल मंदिर भी देखा।माता पार्वती के त्रिपुर सुंदरी स्वरूप को समर्पित राज राजेश्वरी मंदिर बहुत विशाल है और इसका गोपुरम मीनाक्षी मंदिर की याद दिलाता है। देवी के विभिन्न रूपों को वहाँ दर्शाया गया है। नन्हा और सोनू भी साथ थे, बाद में उनका एक मित्र परिवार भी आ गया और सभी ने १९४७ नामक रेस्तराँ में दोपहर का भोजन किया।


वे सुबह चार बजे उठे, टहलते समय इसका ध्यान रखा कि श्वास नाभि तक जाये और मंत्र का यथा संभव अभ्यास किया, बाद में योग साधना। पापा जी से बात की, दो-तीन दिनों के लिए वह अकेले रहने वाले हैं। अपनी दिनचर्या बताते समय उनका उत्साह देखते ही बनता है।रोज़ की तरह परमात्म चर्चा भी हुई। जून आज काफ़ी व्यस्त थे, सुबह-शाम मिलाकर छह घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। नया वर्ष आने में मात्र दो दिन रह गये हैं। एक मीठी सी गंध का अनुभव आज हो रहा है, कोई जीवाणु है या कोई दिव्य गंध, कौन जानता है ? एक रहस्य ही तो है यह जगत! 


कल वर्ष का अंतिम दिन है। नये वर्ष का स्वागत नेचर कैंप में करने का उनका स्वप्न अब पूरा होने को है। कल सुबह नन्हा और सोनू के साथ उसकी भांजी भी आ रही है।उनका वही मित्र परिवार भी आएगा। कल की रात वे वहीं गुजारने वाले हैं; नये वर्ष की सुबह भी, दोपहर बाद घर लौटेंगे।   


टैको और बुरीटो

टैको और बुरीटो


आज दोपहर बाद जून उसे रिलाइंस ट्रेंड्स ले गये। पहली बार पाँच कुर्ते एक साथ ख़रीदे। पापाजी के लिए एक स्वेटर भी लिया। दिन भर वर्षा होती रही। सोलर पैनल में बिजली का न्यूनतम उत्पादन हुआ, मात्र पाँच यूनिट, धूप वाले दिन बीस यूनिट तक हो जाता है। तीन दिन बाद उन्हें यात्रा पर निकलना है। पापाजी उनके आने की राह देख रहे हैं। जून ने छोटी बहन के नये फ़ैमिली ट्री के लिए फ़ोटो प्रिंट कर लिए हैं।


आज शाम जून कगली पूरा थाने में सर्कल इंस्पेक्टर से मिले, साथ ही बेसकॉम के एक अधिकारी से भी। वे लोग कल सोसाइटी में आयेंगे। असोसिएशन के काम के सिलसिले में उन्हें नये-नये लोगों से जान-पहचान के साथ, नये अनुभव भी हो रहे हैं। 


आज वे दोनों एक नये परिचित परिवार से मिलने गये। संयोग वश उनका जन्मदिन था, केक, बोंडा व मिठाई से स्वागत किया। वापसी में एक रिटर्न गिफ्ट भी। सुबह घर पर मीटिंग थी, परसों जून को सोसाइटी के बिल्डर के दफ़्तर भी जाना है। विशेष सभा की सूचना दे दी गई है। 


आज बहुत दिनों बाद नूना ने डायरी उठाई है। यात्रा से आने के बाद से सर्दी लगी हुई थी, गला चुभ रहा था। आज कोरोना टेस्ट कराया है, रिपोर्ट दो-तीन दिनों में आएगी। सुबह टहलने गई तो कुछ तस्वीरें खींचीं, एक फ़ोटो ‘प्रतिबिंब’ कई लोगों को अच्छा लगा।जून अपने काम में फिर पूरी तरह जुट गये हैं। 


सुबह पाँच बजे नींद खुली। घर से आने के बाद ‘साधना’ पूरी तरह से आरम्भ नहीं हुई है। रिपोर्ट आनी बाक़ी है, नेगेटिव ही होगी। उसे याद है, वहाँ खुले में प्राणायाम, ध्यान आदि करती थी, तभी सर्दी लगी होगी।पापाजी ने उससे लेखन के बारे में पूछा।कविता लिखना जैसे छूट ही गया है, फिर किसी दिन अपने आप ही रस बरसेगा काव्य का। छोटे भाई की नातिन के लिए उसके पहले जन्मदिन पर एक कविता लिखी है। भतीजी व भांजी के छोटे पुत्र के लिए भी।


आज भी रिपोर्ट नहीं आयी। सोनू की रिपोर्ट निगेटिव आयी है। पापा जी से बात हुई, कह रहे थे, बहुत सी बातें भूल जाते हैं, अब अकेले रहने में थोड़ी दिक़्क़त होने लगी है। परमात्मा उनकी सहायता करेंगे। नन्हा व सोनू आये थे, चायनीज सब्ज़ी व चावल बनाये दोनों ने, शाम को कॉफ़ी। दोपहर को सबने जुरासिक वर्ल्ड देखी, बहुत रोमांचक फ़िल्म है। 


आज सुबह पक्षी विहार से शुरू हुई और शाम विलेज ड्राइव पर समाप्त हुई। दोपहर को पहली बार दम बिरयानी बनायी। शाम को सूर्यास्त के चित्र उतारे। बाइबिल में आये विरोधाभासों पर एक चर्चा सुनी।चर्चाकार ने अलग-अलग पुस्तकों में सुसमाचारों के विवरण और वंशावलियों में आये अंतर का ज़िक्र किया। बाइबिल में उत्पत्ति के दो वृत्तांत हैं और ईसामसीह की मृत्यु के विवरण भी अलग-अलग हैं। शायद इसलिए कि इसे कई लोगों ने लिखा था और बाद में संकलित कर दिया गया। लेकिन इसके मूल संदेश में इन विरोधी बातों के कारण कोई अंतर नहीं आता। 


शाम को पापाजी का फ़ोन आया, उन्होंने नूना की कविताएँ पढ़ीं, लेख भी। कह रहे थे, संभवत: उसके पिछले जन्म के संस्कार जागृत हुए हैं। उसने उन्हें बचपन में घर पर मिले संस्कारों की बात कही। उन्हीं से उसे प्रेरणा मिली है कि अपना समय व ऊर्जा परमात्मा को समर्पित रचनाओं को लिखने में लगानी हैं। 


आज वे सोसाइटी में रहने वाली एक परिचिता की बिटिया के विवाह समारोह में होटल ललित अशोक गये।वापसी में यहाँ की प्रसिद्ध कृत्रिम झील सैंकी टैंक देखने के लिए रुके, जो वहाँ से नज़दीक थी, किंतु उसका प्रवेश द्वार बंद था। यह टैंक बहुत पुराना है और सैंतीस एकड़ भूमि में फैला है, इसकी अधिकतम चौड़ाई आठ सौ मीटर है। जून किसी काम के सिलसिले में आज नापा के एक अन्य निवासी के यहाँ गये, उनकी पत्नी हिन्दी धारावाहिक “घर घर की कहानी” को कन्नड़ में डब करने का काम कर रही हैं।


आज घर पर असोसिएशन की विशेष सभा हुई। कमेटी ने दो प्रस्ताव रखे थे, पर पास नहीं हो पाये। अगली मीटिंग मार्च में होगी। दोपहर को नन्हे ने मेक्सिकन खाना बनाया था, “टैको और बुरीटो” बहुत स्वादिष्ट लगा। लगभग एक महीने बाद शाम को वे आश्रम गये। वहाँ जाते ही एक अनोखी ऊर्जा का अहसास होता है। गुरुजी शाम को एक बार नित्य दर्शन देते हैं, पर तब तक वह जा चुके थे, ऐसा चौकीदार ने बताया। वे सूचना केंद्र भी गये, मुख्य द्वार पर जो होर्डिंग लगी है, उसका प्रिंट पुराना हो गया है। उसे बदलवाने के लिए जून ने बात की। अगले महीने दो दिन तक सुबह एक घंटे के लिए गुरुजी का भगवद् गीता का कार्यक्रम है, जून ने कहा है, वह उसे छोड़ आयेंगे।बहुत दिनों के बाद आश्रम में गुरुजी को सुनने का अवसर मिलेगा।  


आज दिन भर सुबह देर से उठने का असर बना रहा। रात्रि की नींद से जो शक्ति शरीर व मन एकत्र करता है, यदि सुबह, समय से न उठकर तंद्रा में व्यतीत हो, तो सारी ऊर्जा व्यर्थ ही चली जाती है।भगवद् गीता के लिए रजिस्ट्रेशन हो गया, परसों पहचान पत्र लेना है।


आज कुन्नूर में भारतीय वायुसेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल विपिन रावत तथा उनकी पत्नी का देहांत हो गया। उनके साथ बारह जवान और थे। वे कोयंबटूर के सुलूर एयरबेस से वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज जा रहे थे।घने बादलों और धुंध के कारण शायद पायलट सामने ठीक से देख नहीं पाया, जिससे हेलीकॉप्टर पहाड़ों या पेड़ों से टकरा गया।


आज सुबह वे दोनों आश्रम गये, फिर शेखर नेत्रालय। लगभग दो वर्ष बाद आँखों की जाँच करवायी।एक नया चश्मा बनने दिया है।वहाँ से नन्हे के घर चले गये। सोनू ने बहुत अच्छी तरह से स्वागत किया। उसने अपने ऑफिस के मज़ेदार किस्से भी सुनाये। नूना ने छोटे भांजे के जन्मदिन पर कविता लिखी।


आज दो वर्षों के बाद पहली बार आश्रम में किसी कोर्स में गुरुजी को सुना।कल भी जाना है।भगवद् गीता के आठवें अध्याय की व्याख्या अति सरल लग रही थी। इसमें अर्जुन श्रीकृष्ण से ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के बारे में प्रश्न पूछते हैं।श्रीकृष्ण ने कहा, परम अविनाशी तत्व ही 'ब्रह्म' है और प्रत्येक शरीर में जीवात्मा का रूप 'अध्यात्म' है।जीवों के उन भावों का मिट जाना कर्म कहलाता है, जो उनके भीतर अच्छे या बुरे संकल्प पैदा करते हैं।पाँच भूत अधिभूत हैं और परमात्मा का विराट स्वरूप अधिदैव है, जिसमें सूर्य, चन्द्र, वरुण आदि सभी देवता स्थित हैं। कृष्ण स्वयं सभी देहधारियों में अंतर्यामी रूप से रहते हैं। आज नन्हा व सोनू कर्नाटक के हसन जिले में पश्चिमी घाट पर स्थित एक पहाड़ी स्थान सकलेशपुर गये हैं। यहाँ अति प्राचीन सकलेश्वर शिव मंदिर है। टीपू सुल्तान का एक क़िला भी है।  

Thursday, April 9, 2026

बैनरघट्टा नेचर कैंप’

बैनरघट्टा नेचर कैंप


आज शाम वे दोनों आश्रम गये थे। वहाँ संगीतमय फ़ौवारे चल रहे थे, और लड़ियों के प्रकाश से विशालाक्षी मंटप सजा हुआ था। वीडियो कॉल पर पापाजी को आश्रम के दर्शन कराये। जून ने अपने एक मित्र को भी आश्रम का सौंदर्य दिखाया। कुछ देर वहाँ के दिव्य वातावरण में बैठे रहे। स्टोर से कुछ किताबें और उपहार ख़रीदे। दिवाली के लिए घी के दीपक भी लिए। नूना दोपहर को तीन घंटे अनुलेखन कार्य करती रही। पिछवाड़े के बगीचे में पपीते का पेड़ जून ने कटवा दिया है, उसके स्थान पर दूसरा पेड़ लगा दिया है। सौ से अधिक फल दिये होंगे इस एक वृक्ष ने, उन्होंने कई लोगों को वितरित भी किए। भारत ने सौ करोड़ वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बना लिया है।


पापाजी से बात हुई तो उन्होंने कहा, दुनिया में कई लोग ठगने के लिए बैठे हैं, हरेक को सतर्क रहना होगा। साइबर अपराध की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। इस उम्र में भी वह नियम से दो अख़बार पढ़ते हैं, ये समाचार उन्हें वहीं से मिलते हैं। शाम को जून एक नयी झील दिखाने ले गये, जिसका नाम मरियापुरा झील है, थतगुप्पे नामक गाँव में स्थित है। गुरुजी पर बनी एक कॉमिक बुक पढ़ी, बहुत रोचक है।जून प्रतिदिन नौ बजे दफ़्तर जाते हैं, बारह बजे लौट आते हैं।आज उन्होंने सोसाइटी के लिए फ़ैसिलिटी मैनेजर का इंटरव्यू लिया।  


आज शाम जून का हाथ भाप से जल गया, वह मूँग दाल का हलवा बना रहे थे। दाल कुकर में भूनी थी, नूना ने पानी डाला तो भाप ऊपर आ गयी, दो सेकंड ही छुआ होगा भाप ने, पर बहुत ही दर्द हुआ। ठंडे पानी में हाथ रखने से लाभ हुआ।आज नन्हा अपने दो सहयोगियों के साथ किसी अन्य कंपनी के मर्जर की बात करने गया है। कल उसके यहाँ जाना है।


आज सुबह सवा छह बजे वे दोनों नन्हे के यहाँ से लौट आये, कल रात वहीं रुक गये थे।सुबह जून मीटिंग से देर से लौटे। काम आगे बढ़ रहा है, उन्हें यह काम अच्छा लग रहा है। कह रहे थे, दिल की जगह दिमाग़ से काम लेना उन्हें अच्छी तरह आता है।पापाजी से बात हुई, वह अपने मित्र की तेहरवीं में नहीं गये। वह कर्ता भाव से मुक्त होने की बात भी कह रहे थे। नूना से कहा, एक ग़ज़ल में कहीं पर लय टूट रही है, उसे ठीक कर ले। वह कल उसे दुरस्त करने के बाद दुबारा भेजेगी।कल एक मित्र परिवार आ रहा है, वे लोग एक-दो दिन उनके यहाँ रुकेंगे।


सुबह नौ बजे मेहमान आ गये थे। शाम की चाय के बाद जून उन्हें झील पर ले गये और उसके बाद सभी टीके फॉल अर्थात थॉटिकल्लू झरना देखने गये। यह मौसमी झरना अति विशाल और बेहद आकर्षक है, वहाँ तक जाने का रास्ता भी अति रोमांचक है।वे सब कभी बैठ कर कभी एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर फिसलन भरी चट्टानों पर बढ़ते हुए ऊपर पहुँचे, तो वहाँ का नजारा अतुलनीय था। अति वेग से श्वेत जल धाराएँ बहती हुई आ रही थीं। वापसी में जून एक अन्य झील दिखाने ले गये। सबने कई सुंदर तस्वीरें उतारीं। रात्रि भोजन में पनीर  की सब्ज़ी जून ने बनायी। उनकी बिटिया को यहाँ रहना अच्छा लग रहा है।अमेरिका में रहने वाले उनके पुत्र से भी बात की।


आज सुबह नाश्ते के बाद जून सभी को 40 एकड़ में फैले पिरामिड वैली स्थान दिखाने ले गये। जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा दस मंज़िल ऊँचा मैत्रेय बुद्ध ध्यान पिरामिड है।इसे ब्रह्मर्षि पत्रिजी ने 2003 में बनवाया था।स्वागत कक्ष में उन्हें ध्यान का महत्व बताया गया और छोटा सा ध्यान कराया भी गया, ताकि मुख्य हॉल में जाकर सभी को ध्यान का कुछ न कुछ अनुभव हो सके। दोपहर को लौटकर पहली बार नूना ने शेफ़ कॉर्नर से कुछ भोजन मंगाया, कुछ घर पर बनाया। कल सुबह मेहमान वापस जा रहे हैं। 


जून को कर्नाटक के राज्य दिवस पर एक छोटा सा भाषण देना है। जिसका कुछ अंश उन्हें कन्नड़ भाषा में बोलना होगा।उन्होंने तैयारी कर ली है। रविवार को जून के पूर्व अधिकारी के पूरे परिवार के लिए आयोजित विशेष भोज अच्छा रहा। नन्हा व सोनू अपने कुक से एक दो व्यंजन बनवा कर ले आये थे। जून ने उन्हें घर दिखाया तथा सोसाइटी का एक चक्कर लगवा कर लाए। शाम को असम के एक पुराने परिचित आये, वे आश्रम में एडवांस कोर्स करने आये थे, गुरुजी से भी मिले। उसी समय ‘हेलोवीन’ के लिए विचित्र पोशाकों में सजे बच्चे ट्रीट लेने आये।बड़े उत्साह में भरे वे बच्चे एक घर से दूसरे घर जा रहे थे, जैसे वे लोग बचपन में लोहड़ी माँगने घर-घर जाते थे। 

राज्योत्सव का कार्यक्रम अच्छा रहा।आज गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान किया। उन्होंने कहा, जब कोई प्रसन्न होता है, भीतर कुछ फैलता है, जब दुखी होता है, भीतर कुछ सिकुड़ता है। जो फैलता व सिकुड़ता है, वह अहंकार है। आत्मा न कभी फैलती है, न कभी सिकुड़ती है।यदि किसी के भीतर अहंकार बना हुआ है, तो यह घाव है, जिसे चोट लगेगी तो दर्द भी होगा। जब दर्द होगा तभी अहंकार का अहसास भी होगा। प्रकृति या परमात्मा चेताते हैं कि यदि दर्द से बचना है तो इस अहंकार से छुटकारा पा लो, यह सारे अनर्थों की जड़ है। इसे मिटाने का एक ही तरीक़ा है, प्रेम, वे प्रेम को प्रकट होने से रोकते हैं और स्वयं को अन्यों से काट लेते हैं। परमात्मा प्रेम है और वे परमात्मा का अंश होने से प्रेम ही हुए !   

     

दिवाली की तैयारी चल रही है।छत पर लाइट्स भी लग गई हैं। जून ढेर सारे फूल ले आये हैं। नन्हे ने दिये भेजे हैं। बड़ी ननद ने चिक्की भेजी है। कल सुबह डेंटिस्ट के पास भी जाना है, नूना को दायीं तरफ़ का ऊपर वाला एक विजडम टूथ निकलवाना है। इन्हें अक़्ल दाढ़ क्यों कहा जाता है, शायद इसलिए कि यह काफ़ी बड़े होने के बाद निकलते हैं।


आज शाम  नन्हा और सोनू आ गये थे, पूजा के बाद सबने दीपक जलाये। सभी परिवार जनों से बात की, विशेष भोज किया और पैदल व कार से घूम कर सोसाइटी के घरों में जल रहे दीपक और लड़ियाँ निहारीं। बाद में वे लोग वापस चले गये। 


आज गोवर्धन पूजा है, यानि छप्पन भोग बनाने का दिन। आज के दिन मंदिरों में विशेष प्रसाद बनाया जाता है। पापा जी ने बताया, उन सभी ने मंदिर में बना भोजन दोपहर को ग्रहण किया। छोटी बहन एक चित्र बना रही थी। कल भाईदूज पर वे लोग दीदी से मिलने जा रहे हैं। 


आज भाईदूज पर नूना ने सभी भाइयों से बात की। जून ने कहा है, इस बार नये साल का स्वागत वे लोग शहर की भीड़भाड़ से दूर जंगल में ‘बैनरघट्टा नेचर कैंप’ में रहकर करेंगे।आज ही वे लोग जिसे देखने गये थे।