आज सुबह कोहरा बेहद घना था, पचास मीटर से आगे कुछ दिखायी नहीं दे रहा था। दिन भर ठंड बनी रही। पापाजी को ‘वर्ड्स ऑफ़ वंडर’ गेम का लिंक भेजा है, शायद उन्हें पसंद आये। आज स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की एक पुस्तक ‘हिंदुत्व’ के कुछ पृष्ठ पड़े, बहुत प्रभावशाली लेखन कला है उनकी।उनके अनुसार जो व्यक्ति सिंधु नदी से लेकर समुद्र तक फैली इस विशाल भूमि को अपनी पुण्यभूमि मानता है, वही हिंदू है।हिंदुत्व केवल एक धार्मिक आस्था नहीं है, यह व्यक्ति की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय पहचान है। नूना ने सोचा, वे अपने छोटे-छोटे कार्यों में ही लगे हुए हैं कि समाज और देश के प्रति भी उनका कुछ कर्त्तव्य है, इसका चिंतन नहीं करते।
आज रविवार है, बच्चे नहीं आये।शनिवार की सुबह वे आ गये थे, मिलकर व नाश्ता करके चले गये। आज अपने किसी मित्र के साथ ‘कॉमिक कॉन’ गये हैं। इस आयोजन में कॉमिक्स की नयी व पुरानी किताबें ख़रीदने, पढ़ने और भारतीय व विदेशी कलाकारों व कॉमिक रचनाकारों से मिलने का मौक़ा मिलता है। यहाँ कुछ लोग कॉमिक किरदारों की वेशभूषा भी पहन कर आते हैं। नन्हे ने वहाँ से फ़ोटो भेजे हैं।आज पापाजी को फ़ेसबुक पर लिखते देखकर अच्छा लगा, वह वहाँ शेरों-शायरी लिख सकते हैं। उन्होंने शब्दों का खेल भी खेला, कह रहे थे, बहुत रोचक है।
आज सुबह वे टहलने गये तो आकाश पर हल्के बादल थे पर नूना ने जरा आँख गड़ाकर देखा तो तारे भी दिखाई दिये। वह तारामंडल भौतिक जगत का था या किसी दूसरे आयाम का, यह एक रहस्य है। भीतर भी एक आकाश है, चित्ताकाश तथा चिदाकाश, जिसमें चाँद-तारे भी होते हैं; वैसे ही जैसे सूक्ष्म शरीर की भी सूक्ष्म इंद्रियाँ होती हैं। दिव्य गंध, ध्वनि, दृश्य तथा स्पर्श उन्हीं के द्वारा अनुभव में आते हैं।मन से कई परतें खुल रही हैं, परमात्मा ही जैसे निर्देशित करता है या गुरुजी स्वयं ! आज सुबह वे असमिया पड़ोसियों से मिलने गये, उन्होंने न्यूजर्सी में अपनी पुत्री के यहाँ किए अपने प्रवास की बहुत सी बातें बतायीं। वे व्हाइट हाउस देखने भी गये और ग्रेट कैनियन भी, न्यूयार्क भी गये। उन्होंने एक फ्रिज मैगनेट और एक कैंडल स्टैंड उपहार में दिये।
आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, शाम को कुछ देर थमी, वे छाता लेकर टहलने गये। सड़क पर बहुत कम लोग थे। इस समय भी बारिश हो रही है। मौसम काफ़ी ठंडा हो गया है।आज पहली बार ‘ब्रिज’ खेल का पहला पाठ सीखा। असमिया पड़ोसी, जो कभी ब्रिज के चैंपियन रह चुके हैं, एक मित्र को अपने साथ लाए थे, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग में काम करते हैं। यह रणनीतिक और मस्तिष्क का खेल है। इसमें दो काम करने होते हैं, पहला, बोली लगाना, दूसरा खेलना। जो सबसे बड़ी बोली लगाता है, उसका साथी कार्ड खोल देता है।उसे खेल कुछ-कुछ ही समझ में आया। आज भी पापाजी ने फ़ेसबुक पर उसकी कविताओं पर कमेंट किया, वह नियमित रूप से पढ़ते हैं।
आज भी दिन भर वर्षा होती रही। सुबह देर तक योग अभ्यास किया, क्योंकि बाहर जा ही नहीं सकते थे।आपदा को अवसर में बदलना चाहिए न। मन में तीव्र भाव था कि अब जो कुछ भी होगा, ईश्वर के लिए होगा, ईश्वर के द्वारा होगा।परमात्मा के सिवा जब कोई दूसरा है ही नहीं तो उनके होने में भी तो वही झलकता है। शाम को गुरुजी द्वारा ‘नारद भक्ति सूत्रों’ की व्याख्या सुनी। बहुत संक्षिप्त तथा सरल शब्दों में उन्होंने बताया, भक्ति के मर्म को बताते ये सूत्र अनमोल हैं। सुबह उन्हीं के मुख से ‘रुद्रम’ सुना था। परमात्मा के सिवा इस जग में जानने योग्य कुछ भी तो नहीं है, उसे जानकर सब जान लिया जाता है।वह तो ऊर्जा के रूप में हर जगह मौजूद है, उन्हें ही स्वयं को उसकी ओर उन्मुख करना है।शेष काम उनके ऊपर छोड़ देना है।
सुबह वे चार बजे से भी पहले उठ गये थे। नहा-धोकर तैयार होकर सात बजे नन्हे के यहाँ पहुँच गये। उनके विवाह की वर्षगाँठ मनाने। केक, मिठाई व फूल लेकर गये थे, उनके कुक ने दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया था। दस बजे नन्हा ऑफिस गया और वे घर लौट आये। सोनू को दिन में भाई के साथ आइकिया जाना था।
सुबह ऑन लाइन योग अभ्यास किया, गुरुजी की आवाज़ सुनकर सुदर्शन क्रिया भी। एक घंटा पलक झपकते बीत गया। आज बड़ा भांजा आया था, वह अपने विवाह की तैयारियों की बातें बता रहा था।पापा जी से बात हुई, नन्हे की भेजी रज़ाई और गर्म कपड़ों के बारे में बता रहे थे।
आज दिन भर बादल बने रहे पर बरसे नहीं। नन्हे-सोनू का फ़ोन आया, वे इंदौर से पाँच बजे निकले थे, उज्जैन में साढ़े आठ बजे उनकी उड़ान थी। दो घंटे का रास्ता है, पर राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के कारण यातायात में फँस गये। किसी तरह एक अन्य रास्ते को तलाश कर अंततः फ्लाइट पकड़ ली। छोटी भांजी के विवाह में शामिल होने के लिए परसों उन्हें भी यात्रा पर निकलना है।
यात्रा की तैयारी हो गई है। आज रास्तृपति मूर्मू का भाषण सुना, उनके मन में जेल में बंद व्यक्तियों के प्रति बहुत सहानुभूति है, वह चाहती हैं कि जेलों की संख्या न बढ़ायी जाये बल्कि जो क़ैदी वर्षों से बिना मुक़दमा चले बंद हैं, उन्हें निकाला जाये।जितना समय कोई इस दुनिया में है, यदि किसी के काम आ रहा है तो अच्छा है। उसका होना किसी के दुख का कारण न बने, परमात्मा के सान्निध्य को महसूस करके वह उसकी शक्तियों का वाहक बने, उसकी प्रकृति के साथ एकत्व का अनुभव करके भीतरी आनंद को जगत में बिखराये।
कल रात तीन दिन बाद वे घर वापस आ गये थे।विवाह अच्छी प्रकार से संपन्न हो गया। आज सुबह चार दिनों बाद प्रात: भ्रमण के लिए गये। शाम को पापाजी से बात हुई। कहने लगे, सुबह-सुबह ठंड के कारण वह अपने काम ठीक से नहीं कर पाते हैं, समय लगता है।यात्रा से आने के बाद उसे भी ठंड लग गई है।इतने सारे लोगों से मिलना, बाहर का खाना, नींद पूरी न होना, कितने ही कारण हो सकते हैं। आज की तरह अगले कुछ दिन भी मौसम बदली भरा रहेगा। आज अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है। उनका देहांत ६ दिसंबर १९५६ को दिल्ली में हुआ था, पर मुख्य कार्यक्रम चैत्य भूमि मुंबई में होता है। उसनकी अस्थियाँ इसी स्थान पर विसर्जित की गई थीं। यह दिन सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के लिए उनके अतुलनीय योगदान को याद करने का प्रतीक है।
