Wednesday, May 13, 2026

श्री रुद्रम स्तोत्र

श्री रुद्रम स्तोत्र 




कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण के लिए गये तो बायीं तरफ़ के पड़ोसी की नयी कार देख कर ठिठक गये, सिल्वर XUS 700, उनकी कार जैसी है। अभी तक बादल बरसे नहीं, शायद आधी रात तक बरसेंगे। आज मोदीजी ने शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथन’ के अंतिम दिन भाग लेने वाले पंद्रह हज़ार विद्यार्थियों को संबोधित किया।इस आयोजन में दो हज़ार से अधिक संस्थानों के एक लाख साठ हज़ार छात्रों ने भाग लिया है। आज सुबह वे घर से पंद्रह किमी दूर वैकुण्ठ हिल-इस्कॉन मंदिर देखने गये थे।तिरुमाला मंदिर की तरह बनाया यह राजाधिराज गोविन्दा का अति विशाल और सुंदर मंदिर एक पहाड़ी पर बना है। आज ‘अथर्वशीर्ष’ के अंतिम भाग को भी लिखा, यह अथर्ववेद का ही एक अंश है, जिसे गणेश उपनिषद भी कहते हैं। इसमें भगवान गणेश को ही ब्रह्मांड का कर्ता, धर्ता और हर्ता माना गया है।अद्भुत हैं वेद और उनमें की गयी प्रार्थनाएँ !


आज कोर्स से आने के बाद पहली बार मोबाइल पर राजनीतिक चर्चा सुनी, अच्छी नहीं लगी। गुरुजी को सुनना कितना अच्छा लगता है, वह आज भी उतनी ही शिद्दत से बोलते हैं, जितना सन् बयासी में बोलते थे। वह दिल से बोलते हैं, वह कितना मीठा बोलते हैं। उनकी बात सीधे दिल को छूती है। ‘रुद्रम’ पर उनका पहला प्रवचन सुना, बहुत ही प्रभावशाली है, अनोखा है। रुद्र की परिभाषा दी है, वह कौन हैं? कहाँ रहते हैं ? कल दूसरा व्याख्यान आएगा। ‘श्री रुद्रम स्तोत्र’ कृष्ण यजुर्वेद से लिया गया है, इसमें दुख-पाप के नाश और कल्याण के लिए भगवान शिव की स्तुति की गयी है। वह ‘अथर्वशीर्ष’ की तरह इस पर भी लेख लिख सकती है।कोर्स में सभी को सेवा करने के लिए कहा गया था, साहित्य की जितनी सेवा हो सके, वही उसका प्राप्य है। सुबह टहलते समय एक शिशु चमगादड़ देखा, काले रंग का। वे तस्वीर लेते, उससे पहले ही उड़ गया। 


आज दोपहर को आगे ‘रुद्रम’ सुना, अनोखा स्तोत्र है यह। रुद्र को इस जगत की सब वस्तुओं में, हर कोने में, हर बात में शामिल किया गया है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की अध्यापिका का फ़ोन आया था, वरिष्ठ शिक्षक के यहाँ मीटिंग है, उसे न जा पाने का अफ़सोस हुआ पर बाद में पता चला, वह मीटिंग स्थगित हो गई थी।कुछ देर के लिए सोई तो एक खिचड़ी सपना देखा, पिछले दिनों घटी बातों का मिला-जुला एक सपना, जिस पर एक कहानी बन सकती है। कल पूरे पंद्रह दिनों के बाद बच्चे आने वाले हैं, मिलकर अच्छा लगेगा। जीवन में जैसे एक ठहराव आ गया है। गुरुजी की वाणी आश्वासन देती हुई प्रतीत होती है। बच्चे अपनी ज़िंदगी में व्यस्त हैं, वे उनकी प्रतीक्षा या उनके फ़ोन की प्रतीक्षा ही कर सकते हैं। यही जीवन है, यहाँ ईश्वर के सिवाय तथा अपनी आत्मा के सिवाय कोई भी सहायक नहीं है। प्रसन्न रहकर सदा सबके कल्याण की कामना करना ही जीवन का सर्वाधिक अच्छा सदुपयोग है। 


आज का इतवार अच्छा रहा। सुबह बगीचे में दो घंटे बिताये। दोनों बच्चे तो आये ही साथ में दोनों के कज़िन भी। सब मिलकर स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय नाश्ते के लिए नये खुले रेस्तराँ उडुपी गये। वापसी में निकट स्थित फ़ार्म हाउस की ज़मीन देखने। घर आकर आईपीओ गेम खेला, शेयर ख़रीदने व बेचने का खेल, रोचक है। दोपहर को भाप में चावल के आटे  और नारियल के पाउडर से पुड्डु बनाया, साथ में काले चने की सब्ज़ी, जिसे यहाँ ‘कदले काई’ कहते हैं। कुछ देर ‘सैंड मैन’ देखा, अनोखी कहानी है इसकी। शाम को सब लोग नया बन रहा क्लब हाउस देखने गये।कुछ बच्चे तरणताल में थे, कुछ कैरम खेल रहे थे।अंधेरा होने से पहले ही वे वापस चले गये। 


आज शेयर मार्केट के बारे में कुछ जानकारी हासिल ली, कल से और लेनी है। आज सुबह मूसलाधार वर्षा हुई, नदियों, झीलों आदि में पानी का स्तर बहुत बढ़ गया है। राम नगर में लोगों के घरों में पानी भर गया है। और हाईवे पर कारें पानी में बह रही हैं। प्रलय का ही दृश्य है। प्रकृति का विकराल रूप दिखायी दे रहा है। जीवन कितना अस्थिर है। पापाजी से बात हुई, उन्होंने कहा, शरीर का ध्यान रखना चाहिए, उनका स्वास्थ्य कभी-कभी ऊपर-नीचे होता है, जो स्वाभाविक भी है। उन्होंने बताया, छोटी बहन दो-तीन दिनों के लिए आ रही है। 


आज सुबह ‘गणेश चतुर्थी’ के उत्सव में शामिल होने वे नैनी के यहाँ गये और शाम को एक परिचित के यहाँ। मौसम अच्छा रहा, नाइट क्वीन का एक फूल कल की तरह आज रात भी नौ बजे खिलने वाला है। आज भी प्रांजल कामरा से शेयर मार्केट के बार में और जानकारी हासिल की, बीस दिन बाद पहला शेयर ख़रीदना है। आज एक पुरानी सखी का फ़ोन आया, वह आस्ट्रेलिया जाकर बेटे से मिलकर आयी है। 


एक और दिन बीत गया। कुछ नया सीखा, कुछ नया लिखा भी। आज ‘अष्टावक्र गीता’ भी आ गयी है।यह अद्वैत वेदान्त का अति महत्वपूर्ण ग्रंथ है। जिसमें ऋषि अष्टावक्र तथा मिथिला के राजा जनक के मध्य आध्यात्मिक संवाद है।सुबह वे टहलने गये तो कई जगह स्ट्रीट लाइट नहीं थी।एक नई सड़क पकड़ी तो कुत्ते भौंकने लगे। थोड़ा पहले ही वे घर लौट आये।सोसाइटी में गणेश पूजा की सजावट आरंभ हो गयी है। मुख्य स्टेडियम के बाहर  बत्तियों से गणेश जी का चित्र बनाया गया है। जून ने आज काफ़ी लोगों से फ़ोन पर बात की। वह आजकल अपने सहज स्वभाव में हैं, प्रसन्न तथा सक्रिय !


आज श्रील प्रभुपाद की आत्मकथा सुनी, उससे पहले अदानी की। प्रभुपाद इस्कॉन के संस्थापक थे। एक व्यक्ति कितना कुछ कर सकता है। परमात्मा सभी के भीतर है, सभी की संभावनाएँ अपार हैं। गुरुजी कितना काम कर रहे हैं, वे उनके शिष्य होकर भी यदि स्वयं को कमजोर मानें तो इसमें उनका ही दोष है। दोपहर को अनुवाद कार्य किया। नूना ने नज़र उठाकर देखा, सिटआउट में लगी सोलर से जलने वाली मशाल दिख रही थी, उसका प्रकाश एक मोहक वातावरण उत्पन्न कर रहा था। दिन भर वर्षा नहीं हुई, पर सुबह टहलने गये तो कोहरा छाया हुआ था, सब कुछ रहस्यमयी सा लग रहा था।    


Tuesday, May 12, 2026

रस मलाई केक

रस मलाई केक


आज रक्षा बंधन का त्योहार है; जो तिथि के अनुसार कल सुबह तक मनाया जाएगा।भौतिक रूप से वे भी कल ही मनाने वाले हैं।मानसिक और शाब्दिक रूप से तो मना ही लिया, सभी भाई-बहनों से बात हुई। आज शाम भी गुरुजी को सुना। वह कह रहे थे, लेने में जो ख़ुशी है, वह तो बच्चों को भी होती है पर देने की ख़ुशी प्रौढ़ होती है। लोग स्वयं ही प्रसन्नता हैं, यदि वे किसी कारण से खुश होते हैं तो वह ख़ुशी स्थायी नहीं है। किसी ने भयमुक्त होने का उपाय पूछा तो उन्होंने कहा, यदि अभय प्राप्त करना है तो  किसी बड़े कार्य के प्रति समर्पित हों या ह्रदय में प्रेम और भक्ति जग जाये। मन में स्पष्टता हो, बुद्धि में शुद्धता हो, कर्म में सच्चाई हो तो जीवन शांत धारा की तरह प्रवाहमान रहता है। जो अकाल को याद करता है, हर काल उसके लिए सुकाल होता है। ध्यान में वे उसी अकाल पुरुष में स्थित होते हैं। भक्तिभाव से भरी एक बंगाली महिला का बाउल नृत्य भी देखा। वह गा रही थी व बजा भी रही थी।ओस्टियोपैथी के बारे में भी बताया गया, जो एक चिकित्सा विहीन इलाज है। 


आज भी आश्रम से सत्संग प्रसारित हो रहा है, कोई मीका सिंह आये हैं। कुमार शानू का पुत्र भी आया है। गुरुजी ने सदा की तरह प्रश्नों के सटीक उत्तर दिये। आर्ट ऑफ़ लिविंग सेवा के कई प्रकल्प चलाता है, अब विद्या मंदिर के पुरस्कार दिये जा रहे हैं। कुछ पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।शाम को वे दूर तक टहलने गये। नूना ने छोटे भाई के जन्मदिन पर कविता लिखी। एओएल की तरफ़ से ‘रुद्रम जप का महत्व’’ पर एक आलेख का अनुवाद कार्य किया। पापाजी ने ओशो की एक पुस्तक की बात बतायी। उन्होंने कहा, सबके भीतर एक ही आत्मा है।मन यदि प्रसन्न हो तो सारी प्रकृति अच्छी लगती है। 


आज जून का जन्मदिन उन्होंने अच्छी तरह मनाया, नन्हा व सोनू ‘रस मलाई केक’ लेकर आये थे। सोनू के मौसेरे भाई-बहन भी।दोपहर के लंच में आलू टुक, सिंधी कढ़ी व पनीर बनाया। शाम को सबने मिलकर एक नया बोर्ड गेम ‘आईपीओ’खेला।मौसेरी बहन ने साइकिल चलायी, नन्हे ने स्केट बोर्ड पर अभ्यास किया। छोटी बहन ने यूएई से फ़ोन पर  बताया, बहनोई ने बाइक रैली में भाग लिया, भारत-पाकिस्तान की संयुक्त रैली।इधर देश का माहौल उत्सव मय है, आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है ! 


आज सोसाइटी के मैदान में स्वतंत्रता दिवस का अमृत महोत्सव बहुत उत्साह से मनाया गया। उसके बाद वे पंचायत के दफ़्तर जाकर बच्चों का स्लाइड दे आये। गाँव की सड़क पर तिरंगा रैली भी चल रही थी। माली ने असम से लाया एक पौधा लगाया। मोदी जी का भाषण भी लाजवाब था, उन्होंने नागरिक के कर्त्तव्यों की तरफ़ ध्यान दिलाया। देश आगे बढ़ रहा है। नूना ने झंडे के साथ एक तस्वीर खिंचवाई।  


पिछले दो-तीन दिनों से हो रही वर्षा के कारण मौसम अधिक गर्म नहीं है। आज राजधानी में रहने वाली एक सखी से बात की, उसके पुत्र को डेंगू हो गया है, हर साल इस मौसम में डेंगू का प्रकोप होता है। असमिया सखी कुछ महीनों के लिए गोहाटी जा रही है।वे जीवन के अंतिम वर्ष बिताने के लिए अपने पुश्तैनी स्थान पर एक घर बनवाने जा रहे हैं।पता नहीं उन्होंने अपनी वृद्धावस्था की कैसी कल्पना की है। पुत्र विदेश में है, बिटिया विवाह के बाद उनका कितना ध्यान रख पाएगी, यह सोचकर वे अपने भाई-बहनों के पास जा रहे हैं। जून का मन फिर थोड़ा सा नासाज़ है, उनके स्वभाव में ही आ गया है यह। उन्हें भय है कि उन दिनों अकेले कैसे रहेंगे, जब नूना आश्रम में कोर्स करने के लिए जाएगी। शाम को नन्हे से भी बात हुई, वह उन्हें शनिवार को अपने घर आने के लिए कह रहा है।

 

आज पहली बार वे अपनी लेन के एक परिचित आर्ट ऑफ़ लिविंग शिक्षक के यहाँ रुद्र पूजा के आयोजन में शामिल होने गये।बहुत अच्छा अनुभव रहा। आश्रम में बिताये चार दिन एक याद बनकर रह गये हैं। 


आज शाम से ही वर्षा हो रही है। मध्य प्रदेश व राजस्थान में बाढ़ आ गई है। ईश्वर उनकी रक्षा करे जो पानी में फँस गये हैं।अति वृष्टि या सूखा दोनों ही स्थितियाँ भयावह हैं। आज जून का मन ठीक है। वे व्यर्थ ही इतने सुंदर जीवन को दुखों का घर बना लेते हैं।सुबह टहलने गये तो मौसम सुहावना था। आश्रम में बिताये दिनों की स्मृति बीच-बीच में आती रहती है। डीएसएन कोर्स का इतना बड़ा लाभ उसे मिला है कि भीतर सब ख़ाली हो गया है। जैसे अब कोई संस्कार नहीं बचा। मन नीले गगन की तरह मुक्ति का अनुभव कर रहा है। आज सुबह मुक्ति का गीत भी लिखा। दोपहर को वे बाज़ार गये। नूना कुछ बच्चों से मिली, संकेत, अभिषेक और सात्विक, जिनकी माँओं ने बताया बाक़ी स्कूल गये हैं। उन्हें कुछ समान दिया। देने में कितना सुख मिलता है, गुरुजी सारी दुनिया में घूमकर ख़ुशियाँ बाँटते हैं। उनके जीवन का एक ही लक्ष्य है हर चेहरे पर मुस्कान लाना ! वह यदि एक भी व्यक्ति के मुखड़े पर मुस्कान लाने में सफल रही तो उसका सौभाग्य होगा!   


आज शाम को कुछ देर के लिए वर्षा रुकी तो वे टहलने गये, आकाश पर बादलों से बनी एक सुंदर आकृति देखी। एक जंगली कौआ भी देखा। एक परिचित दंपत्ति अपने नाती को प्रैम में घुमाने ले जा रहे थे। दो मिनट रुककर उनसे बात की।बड़ी बहन से दस मिनट अंग्रेज़ी में बात की, छोटी बहन ने दोहा व कतर के बेसिक कोर्स प्रतिभागियों की बात बतायी, जिन्होंने उसका नाम देखकर स्वयं आगे आकर कोर्स में नाम लिखवाया। अफ़्रीका में दी गुरुजी की वार्ता सुनी, आज भी वह उतने ही उत्साह से लोगों को आर्ट ऑफ़ लिविंग सिखाते हैं, उनका जोश देखने लायक़ था। टीचर्स में इतना जोश उन्होंने ही तो भरा है। डीएसएन का एक नया ग्रुप बन गया है, जिसमें आसपास रहने वाले लोग हैं।जून आजकल खुश हैं, उन्होंने एक पुरानी फ़िल्म देखी साथ-साथ, नूना ने सुबह ज़ूम पर साधना की, शाम को गणेश पर गुरुजी की व्याख्यान माला सुनी। गणेश पूजा आने वाली है। 


आज वे महीनों तक सड़क पर मिलकर एकदूसरे का हालचाल लेने वाले एक परिचित परिवार के घर गये। उन्होंने स्वागत किया, अपना बगीचा दिखाया। उन्हें अवसाद है, यह बात घर की महिला ऐसे कह रही थीं, जैसे कोई कहे घुटने में दर्द है। पिछले बीस साल से दवा ले रही हैं पर कभी योग नहीं किया। लोग कितना अज्ञान में जिये चले जाते हैं।उनके पिता पचानवे वर्ष के हैं पर अभी भी स्वस्थ हैं। नैनी के लाए पैशन फ्रूट्स का जूस बनाया।   


Monday, May 11, 2026

प्रकाश- एक ऊर्जा


प्रकाश- एक ऊर्जा


आज वे ‘रॉकेट्री-द नांबी इफ़ेक्ट’ देखने गये थे। नन्हे ने पीवीआर में टिकट बुक कर दी थी। रिक्लाइनर पर बैठकर आराम से फ़िल्म देखी।बहुत पहले सोनू अपनी एक सखी के साथ देखकर आयी थी, उसी ने देखने के लिए कहा था। नांबी नारायणन इसरो के एक वैज्ञानिक थे, जिन पर १९९४ में झूठा आरोप लगाया गया था। दो साल बाद केस वापस ले लिया गया पर उन्होंने अपने पर लगाये झूठे आरोपों के ख़िलाफ़ केस कर दिया और वर्षों बाद जाकर उन्हें न्याय मिला, क्षतिपूर्ति भी मिली। सभी भाइयों को राखी भेज दी है, मँझला भाई कनाडा में है, उसे कविता और शुभकामनाएँ भेजी हैं। शाम को वह पार्क नंबर ५ गई, गाँव के स्कूल के बच्चों की स्लाइड के लिए पैसे एकत्र किए, चार महिलाएँ आयी थीं। 


छोटी बहन के लिए जन्मदिन की जो कविता उसने भेजी थी, उसे अच्छी लगी। ब्लॉग में ‘सत्य’ कविता प्रकाशित की, सत्य की राह पर चलना कितना सुखद होता है। सुबह बगीचे से करौंदे लाए थे, उसे धो-पोंछ और काटकर आम के अचार के बचे तेल में ही डाल दिये हैं जून ने। 


कल रात तेज वर्षा हुई, बिजली चली गई। सुबह दस बजे नन्हा सोनू और उसकी मॉम को एयरपोर्ट छोड़कर आया तो उसने बताया, कल रात वे लोग बाहर खाना खाने गये थे; सड़क पर पानी भर गया था, उन्हें घर लौटने में काफ़ी देर हुई। आज बायीं तरफ़ के पड़ोसी के यहाँ बहुत शोर हो रहा था। शायद कोई पार्टी चल रही थी, उन्हें सारे खिड़की और दरवाज़े बंद करने पड़े। अभी कुछ देर पहले नापा की आर्ट ऑफ़ लिविंग की एक टीचर ने फ़ोन किया। वह डीएसएन कोर्स करने के लिए कह रही हैं, यदि जून यह कोर्स नहीं करते हैं तो उनके साथ ही आश्रम जा सकती है । पापाजी को नूना की आज की कविता पढ़कर लगा, वह अभी बहुत कुछ मात्र शब्दों के द्वारा ही कह रही है। अध्यात्म के पथ पर हर कोई अपने दिल का हाल बस ख़ुद ही जान सकता है। 


कल शाम को शिक्षिका का फ़ोन आया और उनके कहने पर नूना ने आर्ट ऑफ़ लिविंग के ‘दिव्य समाज का निर्माण’ कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन कर लिया है। जून थोड़ा सा नाराज़ हैं पर जल्दी ही ठीक हो जायेंगे। आज सुबह से उसके सिर में हल्का दर्द था, जून ने तेल लगा दिया। छोटी बहन से बात हुई, वह चित्र बना रही थी, जन्मदिन अच्छा रहा, कुछ खट्टी-मीठी यादें  दे गया। आज की कविता पापाजी को अच्छी लगी। उन्हें राखी भी मिल गई है। ‘इचिगो इची’ पुस्तक आगे पढ़ी। कुछ शब्द उतरने लगे- 

 एक बार ही आता हर पल  


गुजर गया तो, गया हाथ से 

बार-बार नहीं घटता इक पल 

रोज़ रोज़ नहीं सच्चे होते 

सपने दिल के 

रोज रोज नहीं रस्ते मिलते 

मंज़िल के 

गुजर गया पल, था सपना

 जो आएगा, अभी नहीं अपना 

केवल यह पल हाथ लगा

इसमें जागे तो भाग्य जगा 

नई बात हो नया मार्ग हो 

नव पथ का निर्माण करें 

नये द्वार खुलते जाते हैं  

ख़ुद में जब थम कर बैठें 

सजग रहें काल द्रष्टा बन 

 उत्सव हर क्षण बन जाएगा  

निज कर्म अपने हाथों में  

भाग्य स्वयं सँवर गाएगा।  


कल रात फिर एक बार बिजली चली गई। एक बार नींद खुल जाने के बाद जून को जल्दी दुबारा नींद नहीं आती। सुबह नाश्ते के बाद नूना ने एक कविता लिखकर पोस्ट की, फिर अनुवाद कार्य किया, फिर भांजे और भतीजी के लिए जन्मदिन की कविताएँ लिखीं।सोनू का फ़ोन आया, भाई के विवाह की तैयारियाँ चल रही हैं, दोनों नन्दों से बात हुई, वहाँ भी विवाह योग्य बच्चों के विवाह की तैयारी हो रही हैं। आज एक मुस्लिम कलाकारा के भजन सुने, बहुत अच्छा गाती है। कला की कोई सीमा नहीं होती ऐसे ही कलाकार की भी। जून आज कल से भी ज़्यादा खुश लगे पर अभी भी पूरी तरह से सहज नहीं हुए हैं। उनका प्रेम शर्तिया है। आत्मा में गये बिना बेशर्त प्रेम कोई कर भी कैसे सकता है ? 


आज दिन भर वर्षा होती रही। रात्रि भ्रमण के लिए निकले तब थम गई थी। सब तरफ़ भीगा-भीगा सा आलम था, सड़कें चमक रही थीं। नन्हा अकेला है पर इतना व्यस्त रहता है, फ़ोन करने का समय नहीं मिलता।आज से नूना ने ‘बौद्ध दर्शन प्रस्थान’ पढ़ना आरंभ किया है। नन्हे के एक तिब्बती मित्र ने भिजवाई थी यह पुस्तक। जून अब सहज स्वभाव में आ गये हैं। नाराज़ रहने का भी स्वभाव बन जाता है, जैसे किसी को प्रसन्न रहने की आदत हो जाती है।आज स्वतंत्रता दिवस पर एक नयी रचना लिखी, कल जन्माष्टमी पर लिखेगी। 


कल ही उसने याद किया और आज नन्हे का फ़ोन आया, अगले साल उनका ऑफिस शायद इलेक्ट्रॉनिक सिटी में शिफ्ट हो सकता है। छोटी ननद ने होने वाली बहू की तस्वीर भेजी है, बहुत सुंदर है।गुरुजी का ‘रुद्रम’ पर तीन दिनों का एक कार्यक्रम आने वाला है। शाम को वह दायीं तरफ़ के पड़ोसी के यहाँ गई, वरलक्ष्मी की पूजा थी। आज के अनुवाद कार्य में गुरुजी द्वारा रक्षा बंधन का वास्तविक अर्थ समझाया गया था।


आज वर्षा के बावजूद वे तीनों बार टहलने जा पाये, बहुत दिनों बाद फ़िटबिट अठारह हज़ार कदम दिखा रहा है। आज भारत के नये उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ चुने गये हैं। मार्ग्रेट अल्वा को हार मिली। भारत कॉमन वेल्थ गेम्स में पाँचवें स्थान पर आ गया है, नौ स्वर्ण पदक जीते हैं। पापाजी को आज की कविता अच्छी लगी, दिल से निकली बात दिल तक जाती है। जून के जन्मदिन की कविता आज ही लिख दी है।आज भी गुरुजी को टीवी पर देखा, सुना।यदि कल मौसम अच्छा रहा तो वे आश्रम जाएँगे, वैसे आश्रम जाने के लिए जून को अब पहले जैसा उत्साह नहीं रहा है।   


आज कृष्ण पर कविता लिखी। वर्ष के अंत में उन्हें गुजरात व असम में होने वाले दो विवाहों में सम्मिलित होने जाना है, जून ने टिकट बुक कर दी हैं।छोटी बहन ने ज़ूम पर बेसिक कोर्स के लिए एक मीटिंग में उसे भी बुलाया था, आयोजनअच्छा रहा।आज दोपहर को वाकिंग मैडिटेशन किया।आज भी आश्रम से प्रसारित होने वाला कार्यक्रम देखा, कोल्हापुर से आये एक कलाकार ने तलवार चलाने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया।


आज लगभग पाँच सप्ताह बाद वे आश्रम गये। हवा ठंडी थी, आकाश पर काले बादल थे और चौदहवीं का चंद्रमा झाँक रहा था। गुरुजी ने सदा की तरह प्रश्नों के सटीक उत्तर दिये।गायकों ने सुमधुर भजन गये, भीड़ बहुत थी, अधिकतर लोग बंगाल से आये थे। आज सुबह उसे प्रकाश के बारे में जानने की उत्सुकता जगी तो कुछ जानकारी हासिल की। कितना विचित्र है सब कुछ इस सृष्टि में ! यह एक प्रकार की ऊर्जा है जिसके कारण वस्तुएँ दिखती हैं। यह तरंग भी है और कण  भी, फ़ोटान इसका मूल कण है। प्रकाश का रंग इसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है। लाल रंग की आवृत्ति सबसे अधिक होती है।सुबह भानु दीदी का रक्षाबंधन पर एक साक्षात्कार सुना और दोपहर बाद ‘लॉक एंड की’ का एक अंक देखा। जादुई चाबियों वाला यह धारावाहिक बच्चों ने देखने को कहा था।         


Friday, May 8, 2026

रंग-बिरंगे फल


 
रंग-बिरंगे फल 




एक दिन और बीत गया। सुबह आकाश में बादलों के पीछे से झांकता चाँद देखा और सूरज का नारंगी प्रकाश भी सलेटी बादलों के पीछे से। 

प्रेम का द्वार 

इस पल से गुजर कर आता है 

आनंद झरता है 

वर्तमान में ही 

खिल रहा है

शांति का फूल 

बस ! इस क्षण सजग होने की ज़रूरत है 

हर मिलन अनोखा है 

हर मुलाक़ात संपूर्ण 

यदि कोई अतीत या भविष्य को न लाए मध्य में 

यह सुबह जो आज आयी है 

वह सृष्टि के आरंभ से आज तक 

कभी नहीं आयी पहले 

हर पल छिपाये है जीवन की चाभी 

अपने भीतर 

जीवन का सार यही है 

आज जो फूल खिलेंगे 

वे कल नज़र नहीं आयेंगे ! 

आज ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ का अगला भाग देखा। यह विज्ञान कथा बहुत रोचक है पर विचित्र और रोमांचक भी, किसी हद तक डरावनी, इलेवन की मासूमियत को देखते ही बरबस चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। पता नहीं कब तक इसमें रुचि बनी रहेगी। जून की पीठ में पिछले कुछ दिनों से हल्का दर्द है। वह नेट पर इसके बारे में जानकारी ले रहे हैं। वे दोनों अभी-अभी रात्रि भ्रमण से आये हैं, हवा ठंडी थी और दो बच्चे सड़क पर टेनिस खेल रहे थे, कौन जाने उनमें से कोई एक दिन टेनिस का बड़ा खिलाड़ी बन जाये। जून आज शाम ढेर सारे फल लाए, पपीता, आम, शरीफा, आलूबुख़ारा, तरबूज़, ख़रबूज़, केला और जामुन! कुल मिलकर आठ तरह के रंग-बिरंगे फल। पापाजी से बात हुई, वह निरंतर अभ्यास की बात कहते हैं। जब तक भीतर उस दिव्य चेतना का साक्षात्कार नहीं हो पाता, चाहे एक पल के लिए ही, तब तक निश्चय नहीं हो पाता है।


‘इचिगो इची’ ‘यह पल न आएगा दोबारा’, इस पल की ख़ूबसूरती को इसी पल में अनुभूत किया जा सकता है। एक ख़ज़ाने की तरह अनमोल है यह पल, इसे महत्व देना सीखना होगा, यही है ‘इचिगो इची’ का अर्थ ! उसके जन्मदिन पर दो किताबें मिली थीं, अभी तक पूरी नहीं पढ़ पायी है।दूसरी किताब इकिगाई का अर्थ भी महत्वपूर्ण है। इकिगाइ का अर्थ है जीवन का लक्ष्य, यदि कोई उसे पाने के लिए श्रम करता है तथा नियमित रूप से उसमें कुछ समय लगता है, तो सफलता अवश्य मिलती है। छोटी बहन को ‘स्पंद कारिका’ की रिकार्डिंग भेजी। वह आजकल चित्रकला सीख रही है। कल उसे हैप्पीनेस कोर्स का फ़ॉलोअप भी लेना है। 


आज का इतवार काफ़ी अलग था। सुबह आठ बजे से पहले ही नन्हा और सोनू आ गये थे,  उनके साथ ‘गो-नेटिव’ गये, जहाँ बड़े भाई व भतीजी भी आये, नाश्ता किया। उसके बाद नन्हा ‘गो कार्टिंग’ के लिए ले गया, पर वहाँ बहुत भीड़ थी। इसके बाद एचएएल, भारत का पहला एयरोस्पेस संग्रहालय देखने गये, बहुत सारे लड़ाकू विमानों के मॉडल्स वहाँ देखे। वहाँ का बगीचा भी बहुत शानदार था। इसके बाद पैलेस लीला में दोपहर का भोजन। होटल भी बहुत विशाल और हरियाली से युक्त है। बाग-बगीचे, झीलें झरने सभी कुछ आकर्षक है। 


गुरुजी कह रहे हैं, यही सृष्टि शिव से उपजी है, उसी में स्थित है और उसी में लीन हो जाती है।जैसे एक बालक के नृत्य का उद्देश्य केवल आनंद है, खेल का उद्देश्य भी आनंद है, जीवन का उद्देश्य भी अपने भीतर आनंद महसूस करना और उसे बहाना है। यहाँ हर घड़ी अपने आप में शुरुआत है और अंत भी ! जीवन का हर क्षण अपने आप में पूर्ण है।जब कोई अपने वास्तविक स्वरूप से दूर होता है, दुर्बल महसूस करता है। शक्ति का स्रोत भीतर है। वे  जगत में  कई भूमिकाएँ निभाते हैं, पर मात्र वही नहीं हैं। अपने शुद्ध रूप में वे अनंत से जुड़े हैं।भक्त वही है जो अस्तित्त्व से जुड़ा है, उसे न कुछ पाना है, न कहीं जाना है।जब मन तनावग्रस्त होता है, साधक साधना का भी त्याग कर देते हैं। प्रमाद तथा आलस्य भी तभी घेर लेते हैं। यदि कोई नियमित साधना करता है तो दुख उसे छू भी नहीं सकता। कई तरह की समाधि का वर्णन भी गुरुजी ने किया। सात्विक शक्तिपात में साधक धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। ज्ञान का कोई अंत नहीं है, ज्ञान व्यक्ति को विनम्र बनाता है, ज़्यादा जानकर भी वे क्या कर लेंगे।जैसे भौतिक ज्ञान का कोई अंत नहीं वैसे ही आध्यात्मिक ज्ञान का भी कोई अंत नहीं है। 


आज सुबह साढ़े दस बजे वे सब बड़े भांजे के परिवार से मिलने पुन: गो-नेटिव जाने के लिए निकले, जो नार्वे से आया हुआ है। दोनों बालिकाओं और बड़ों से मिलकर अच्छा लगा।भोजन अच्छा था पर कुछ गरिष्ठ भी। वह उन्हें तस्वीरें भेजेगी। वापस आकर वे टहलने गये। एक परिचिता का फ़ोन आया, पंचायत की अध्यक्षा ने गाँव के एक स्कूल में बच्चों के लिए एक झूला लगवाने के लिए कहा था, उसी सिलसिले में।जून को पिछले दिनों जो अनुभव हुआ उसके बाद वह उसे सामाजिक कार्यों से दूर ही रहने के लिए कह रहे हैं। यह स्वाभाविक भी है।कल उन्हें ‘रॉकेट्री’- द नांबी इफ़ेक्ट देखने जाना है, जो इसरो वैज्ञानिक नांबी नारायणन के जीवन पर आधारित है। तब तक अवश्य ही जून का मन ठीक हो जाएगा। पापाजी ने कहा, वह भी अध्यात्म को जीवन में सर्वोपरि मानते हैं, इसलिए उन्हें नूना का सृजन अच्छा लगता है। 


Thursday, May 7, 2026

ग्रहों का प्रभाव



कल नन्हे का जन्मदिन था। दोपहर को साढ़े बजे वे लोग आये। सामूहिक लंच लाजवाब था। सोनू की मौसी भी आयी थीं।आज जीजा जी का पचहत्तरवाँ जन्मदिन है।दीदी व सभी बच्चों ने मिलकर शानदार उत्सव मनाया, कुछ देर पहले उनके वीडियो देखे। उन्हें जून के भेजे गुलाब मिल गये हैं। ईश्वर उन्हें दीर्घायु प्रदान करे।आज उसने गुरु पूर्णिमा पर लिखे एक लेख का हिन्दी में अनुवाद किया।पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सलाहकार सुधांशु त्रिवेदी को सुना। भारतीय संस्कृति के बारे में बहुत जानकारी है उन्हें।


आज गुरु पूर्णिमा है। गुरुजी द्वारा ‘स्पंद कारिका’ पर दी जाने वाली प्रवचन माला आज से शुरू हो रही है।उन्होंने बताया, स्पंदन एक दिव्य चेतन ऊर्जा है। यह ऊर्जा महसूस कर सकती है।ईश्वर उन्हें उनसे अधिक जानता है। जो इस सृष्टि का आधार है, उस शिव को महसूस किया जा सकता है। आत्मा बिना इंद्रियों के देख सकती है, सुन सकती है, छू सकती है। ये सभी शक्तियाँ निर्विशेष आत्मा में हैं।मन के भीतर जो विचार आते हैं, वे वहीं से आते हैं। जब विशेष ऊर्जा उस निर्विशेष ऊर्जा में समा जाती है, तो केवल वही शेष रहती है।यह चेतना सभी शक्तियों को धारण करती है। विषयों की स्मृति से इच्छाएँ उत्पन्न होती हैं। इच्छाएँ भविष्य की ओर ले जाती हैं।जब कोई वर्तमान में होता है, तब अपने सच्चे स्वभाव के निकट होता है। जब जाग्रत व स्वप्न अवस्था में इच्छायें जगती हैं, तो व्यक्ति चेतना से दूर चला जाता है। हर इच्छा पूर्ण होने के बाद उसे वहीं लाकर छोड़ देती है। इच्छा सीमित की हो सकती है। 


‘स्पंद कारिका’ का अगला सत्र आरंभ हो गया है। गुरु जी कह रहे हैं, स्वभाव में टिकना ही साधना का लक्ष्य है। नम्रता व सरलता आत्मा के स्वाभाविक गुण हैं।साधक को सबके साथ एकत्व का अनुभव करना है। जैसे तेल के साथ पानी नहीं मिलता, पर दूध के साथ पानी मिल जाता है; बच्चों के साथ सरलता से जुड़ा जा सकता है पर बड़े अपने चारों ओर एक दीवार खड़ी कर लेते हैं।जब कोई ध्यान की गहराई में जाता है, उसे रिक्तता का अनुभव होता है। जब इच्छा का त्याग करता है तब क्षणिक शून्यता का अनुभव होता है, लेकिन उसके बाद आनंद मिलता है। जब कोई सामान्य चेतना के साथ एक हो जाता है, भीतर आनंद का अनुभव होता है। इस अवस्था में कोई अभाव नहीं रहता। समाधि कोई नीरस अवस्था नहीं है। वहाँ जाकर ज्ञात होता है अज्ञान जैसा कुछ भी नहीं है। शून्य से पहले ध्वनि का निर्माण हुआ फिर सृष्टि का।अंतिम स्वतंत्रता का अनुभव तभी होता है, जब कोई ज्ञान का सम्मान करता है, तब वह सजग और सरल हो जाता है।निर्दोष चेतना ही शिव है। 


आज शाम को वे कुछ ही दूरी पर स्थित ‘प्रकृति फार्म’ देखने गये। प्राकृतिक खेती के साथ यह की एक विशेषता है पालतू जानवरों को रखने की सुविधा, हरियाली से भरा हुआ यहाँ का वातावरण लोगों को सप्ताहांत बिताने के लिए आकर्षित करता है।दोपहर को नूना ने एओएल का अनुवाद कार्य किया। इस समय गुरुजी ‘स्पंद कारिका’ पर आगे बोल रहे हैं। प्रकृति प्रेममयी है।सर्दी का अनुभव तभी होता है, जब गर्मी का अनुभव कर चुके हैं। सर्दियों में वृक्ष पत्ते गिरा देते हैं, ताकि धूप का आनंद ले सकें, गर्मियों में धर लेते हैं ताकि तेज धूप से बचे रहें।विरोधी भावनाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। एक ही चेतना अनेक रूपों में प्रकट हो रही है। 


आज नन्हा व सोनू अकेले ही आये थे। इतवार की सुबह माली से बगीचे में काम कराते हुए बीती।दोपहर को लंच नन्हे और सोनू ने मिलकर बनाया। शाम की चाय के बाद वे चले गये। आज के सत्र में ध्यान करवाने के साथ गुरुजी ने नाड़ी विज्ञान, स्थान शुद्धि और ग्रहों के प्रभाव के बारे में भी कुछ जानकारी दी। यह भी कहा कि यदि कोई  किसी पूजा स्थल के पास जाये तो उसकी दोनों नाड़ियाँ चलने लगती हैं। उनके अनुसार किसी के मन के भाव उसकी श्वास में परिलक्षित होते हैं, इसी का आश्रय लेकर कुछ लोग दूसरों के मन के विचार पढ़ लेते हैं। सूर्य गेहूं से जुड़ा है और ह्रदय से, चंद्रमा मन से जुड़ा है और चावल से, मंगल मसूर दाल व रक्त से, बुध हरी मूँग और त्वचा से, बृहस्पति चना दाल और यकृत से, शुक्र चावल और किडनी से, शनि तिल, काली उड़द और दाँतों से, राहु सिर और तिल से, केतु निचले अंगों व जड़ वाली सब्ज़ियों से जुड़ा है।


गुरुजी ने आज कहा, पंछी हर दिन नया गीत नहीं गाते पर वे कभी ऊबते नहीं, उनके लिए हर दिन ही नहीं, हर पल नया है। आत्मा के बारे में बौद्धिक रूप से जानना पर्याप्त नहीं, अस्तित्त्वगत रूप से उसमें टिकना ध्यान है। अनुभव और अनुभवकर्ता जब एक हो जाते हैं, तभी ध्यान घटता है।द्रष्टा ही जब दृश्य बन जाये, तब जगत जैसा भी हो, भाता है। इस जगत में जो कुछ हो रहा है, वह परमात्मा की एक क्रीड़ा है।ज्ञानी ऐसे जीता है जैसे हो ही नहीं, जैसे सारी प्रकृति है, वह वैसे ही हो जाता है। जब किसी को पूर्ण तृप्ति का अनुभव होता है, तभी जीवनमुक्ति का अनुभव कर सकता है। प्रतिदिन की तरह आज भी गुरुजी ने ध्यान कराया। 


आज इस प्रवचन माला का अंतिम सत्र है। स्पंद का अर्थ है तरंग, यह सारा ब्रह्मांड तरंगों से भरा है। कुछ सामान्य तरंगें हैं, कुछ विशेष तरंगें हैं। वस्तुएँ और व्यक्ति विशेष तरंगें हैं। विशेष तरंगें, सामान्य तरंगों से  उत्पन्न होती हैं। अनंत जब सीमित होता है तब जीव बन जाता है। हरेक के भीतर सामान्य स्पंदन है, जो छिपा है।सामान्य स्पंदन न मुक्त है न बंधा है। प्रेम जीवन का स्रोत है।जब शिव अपना नेत्र खोलते हैं, तब सृष्टि का जन्म होता है। जब कोई सार्वभौम को सिर झुकाता है तो वह शिव से जुड़ता है। शिव और उसके मध्य कोई बाधा नहीं है। जो उसे अनुभव कर लेता है, वह समता को प्राप्त करता है। जगत में भिन्नता है पर सभी के भीतर जीवन शक्ति एक है, जो शिव है। पाँच इंद्रियों के द्वारा जीवन शक्ति ही जगत का अनुभव करती है। शिव एक होकर भी, सबका कारण होकर भी सबसे पृथक है। इसका अनुभव होते ही जीव स्थितप्रज्ञ हो जाता है।उस स्थिति में दो नहीं हैं, एक ही सत्ता है। जगत उस पर आरोपित अध्यास मात्र प्रतीत होता है। 


Tuesday, May 5, 2026

स्पंद कारिका


स्पंद कारिका 


आज समाचारों में सुना राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी हैं। पहली आदिवासी महिला, जो इतने बड़े पद तक पहुँचेंगीं। वह झारखंड की राज्यपाल रहा चुकी हैं और उड़ीसा विधान सभा में कई बार मंत्री पद भी संभाल चुकी हैं।छोटी बहन ने वापस जाकर आर्ट ऑफ़ लिविंग का पहला बेसिक कोर्स करवाने के लिए काम करना अभी से शुरू कर दिया है। पहले वह सहायक शिक्षिका के रूप में कोर्स करवाएगी, फिर कोड मिल जाने के बाद स्वतंत्र रूप से। दोपहर को उन्होंने यू ट्यूब पर एक आध्यात्मिक फ़िल्म देखी, जो अनोखे जीवों व प्राणियों से परिचय करवाती है। देह में आत्मा की उपस्थिति को सिद्ध करने के लिए बहुत अच्छी दलीलें देती है।शाम को वे सब एपिक रॉक गये, कुछ देर वहाँ बैठे जहाँ एक झरना बह रहा था। वर्षा के मौसम में झरनों में एकाएक पानी बढ़ जाता है।कल नन्हा सभी को मैसूर ले जाने वाला है।जहाँ छोटी बहन दो दिन अपने जेठ-जेठानी के पास रहकर वापस आएगी। 


आज बहुत दिनों के बाद अपने पुराने समय पर डायरी उठायी है। परसों की रात मैसूर के निकट स्थित एक हरे-भरे फ़ार्म हाउस ‘कैरिस ब्रुक’ में बिताकर, कल दोपहर का लंच मैसूर में करने के बाद वे शाम तक घर लौट आये।पापाजी से बात हुई, उसकी एक कविता पढ़कर कह रहे थे, दुनिया में सभी अपने-अपने काम में लगे हैं, भक्त व कवि भी इसी तरह अपने काम में लगे हैं। परमात्मा अनंत रूपों में स्वयं को प्रकट कर रहा है। मन संदेह करता है पर आत्मा सदा एक रस साक्षी मौजूद है, वह प्रेम, शांति व करुणा का सागर है, वही सत्य है।आज भी छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं, जिनकी मातृ भाषा हिन्दी नहीं है, उन्हें कितनी परेशानी होती है बोलने में, जैसे उसे कन्नड़ बोलने में होती है। 


आज का दिन कुछ अलग बीता, सुबह सब सामान्य था, टहलने गई तो पैरों में भारीपन लगा, शरीर में स्फूर्ति नहीं थी। योगासन भी पूरे नहीं हो पाये। नाश्ते के बाद टाइप करने बैठी तो शरीर अलसा रहा था। भोजन बनाया तो किसी छोटी सी बात पर मन झुंझला गया, कटु तो नहीं एक-दो शब्द तेज आवाज़ में निकले, जैसे कोई भीतर से स्वयं ही निकाल रहा हो। दिन भर कुछ नहीं खाया, रात्रि के समय कुछ भूख का अहसास हुआ। कर्मों के फल के रूप में भी कर्म होते हैं, यह आज जैसे स्पष्ट हो रहा था।जून शांति से सब देख-सुन रहे थे, उन्होंने कुछ प्रतिवाद नहीं किया।


आज दोपहर बारह बजे वे केंगरी रेलवे स्टेशन जाकर छोटी बहन को ले आये।उसने साड़ियाँ, सूट व कुर्ते दिखाये, जो मैसूर से लायी है। शाम को उन्होंने मिलकर बड़ी स्क्रीन पर वे सारे फ़ोटोज  देखे, जो पिछले कई दिनों से खींच रहे थे।उसके बाद सोने से पहले साधना, भजन, भोजन और रात्रि भ्रमण।  


आज जुलाई का प्रथम दिन है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की नयी-नयी बनी शिक्षिका मोबाइल पर हैप्पीनेस कोर्स का मैनुअल पढ़ रही है। जून भी मोबाइल पर कुछ देख रहे हैं। शाम को वे नापा के पीछे वाली सड़क पर टहलने गये, जगह-जगह निर्माण कार्य शुरू हो गया है। पहले की सी शांति भी नहीं थी और न ही सफ़ाई! जून ढेर सारे फल लाए थे, ड्रैगन फ़्रूट, लंगड़ा आम और जामुन बहुत मीठे थे। पापा जी ने बताया, छोटा भाई बहरीन से लौट आया है। सुबह वे आश्रम गये थे। हर्बल टी लेने के प्रकरण में जून से उसकी बहस हो गयी, पर जल्दी ही स्मरण आ गया, आश्चर्य हुआ कि अभी भी आग्रह शेष है भीतर ! मन की हज़ार परते हैं, जिन्हें शायद भगवान भी नहीं जानते ! 


आज सुबह टहलने गये तो हवा ठंडी थी और आकाश पर चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा था।जुलाई का महीना बैंगलोर का सबसे ठंडा महीना कहा जाता है। इसी महीने की तेरह तारीख़ को गुरु पूर्णिमा है।गुरुजी ‘स्पन्द कारिका’ पर बोलने वाले हैं। सोसाइटी में गणेशोत्सव का उद्घाटन समारोह है। दो माह तक ये कार्यक्रम चलेंगे। छोटी बहन को कल वापस जाना है।सुबह उसने साइकिल चलाने का अभ्यास किया।वर्षों पूर्व सेना में काम करते समय उसने साइकिल चलायी थी। पिछले दो हफ़्ते उन्होंने साथ बिताये। अच्छा लगा। शाम को वे नन्हे के यहाँ गये। 


आज से नूना स्वामी रामानन्द जी द्वारा पर दिया गया प्रवचन सुनना शुरू किया है। कुछ-कुछ समझ में आ रहा है।गुरु पूर्णिमा से पहले कुछ भूमिका तो तैयार हो जानी चाहिये मन में।यह नौवीं शताब्दी के कश्मीर शैव दर्शन का एक ग्रंथ है,जो वासुगुप्त द्वारा रचित शिव सूत्रों पर आधारित है । स्पंद का अर्थ है भगवान शिव की शक्ति के दिव्य कंपन, जिससे इस सृष्टि का उदय और विलय होता है। 


इस महीने चार रिश्तेदारों के जन्मदिन पड़ते हैं, वह सभी के लिए कविता लिखेगी। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य भी आया। पापाजी आज गर्मी या उम्र के कारण थोड़ा सा परेशान थे, जो स्वाभाविक है। मधुमालती में पहली बार फूल लगे देखे। सहजन का पेड़ तेज हवा में गिर गया था, नापा का माली आकर उसे सहारा देकर सीधा कर गया है, पता नहीं बचेगा यह नहीं।जड़ें मज़बूत होंगी तो शायद बच जाये। सुबह छोटी बहन का फ़ोन आया, वह घर पहुँच गई है।वहाँ उसे गर्मी का अहसास हो रहा है, एक महीना वह बैंगलुरु के सुहाने मौसम में रहकर जो गई है। 


कल नन्हे ने बूस्टर वैक्सीन लगवा ली। थोड़ा बहुत साइड इफ़ेक्ट भी हुआ। आज भी ‘स्पन्द  कारिका’ सुना, मन में जैसी भावना होती है, परिणाम भी वैसा ही आता है। आत्मा तो सागर की तरह है, वे अपने मन को चम्मच जितना रखेंगे तो उतना ही समायेगा। यदि विशाल बनाएँगे तो उतना अधिक मिलेगा। यदि क्षीर सागर के साथ एक रूप हो जाएँगे तो वही बन जाएँगे। मानव अपने अनंत स्वरूप को भुलाकर स्वयं को उपाधि से जोड़कर व्यर्थ ही सुखी-दुखी होते रहते हैं। आनंद उनका स्वभाव है  और सत्य उनका स्वरूप ! 


आज भी कल की तरह दिन भर वर्षा होती रही। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य पूरा हो गया। गुरु पूर्णिमा पर लिए भी एक लेख का अनुवाद करना है। लेखन कार्य में कुछ कमी आई है, पर जीवन जो रंग दिखाए, स्वीकार है। जन्मदिन की दो कविताएँ टाइप कीं।आज पतंजलि योग सूत्र पढ़ते समय कितनी सरलता से स्पष्ट हुआ कि ‘योग’ चित्त वृत्ति का निरोध कैसे है ? और जब ऐसा होता है तब द्रष्टा अपने स्वरूप में कैसे ठहर जाता है। यदि ऐसा नहीं होता अर्थात वृत्ति बनी रहती है तो द्रष्टा उसी वृत्ति का आकार ग्रहण कर लेता है।जैसे ब्रह्मा कुमारी कहती है आत्मा जब सोचती है तब मन बन जाती है। अब मन्त्र जाप का महत्व भी ज्ञात हो रहा है। मन जब एक मन्त्र का आकार ले लेता है, तब दो जाप के मध्य में द्रष्टा का अनुभव होता है। इसीलिए ॐ को परमात्मा का नाम कहा गया है। सारे शब्द ॐ में समा जाते हैं। ॐ के बाद जो मौन है, वही आत्मा का स्वरूप है। उसमें टिक जाना ही योग है। भीतर जितने भी विचार चलते हैं, वे आत्मा से ही उपजे हैं, पर उससे दूर ले जाते हैं। जैसे लहर सागर से ही उपजी है, पर उससे ऊपर उठती है तो दूर चली जाती है। 


आज जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की नारा शहर में चुनावी भाषण देते समय मृत्यु हो गयी, उन पर एक व्यक्ति ने गोली चलायी थी। चीन में इस बात की ख़ुशी मनायी गई। गुरुजी ने भी ट्वीट किया, वह उनसे जुड़े हुए थे।  


Sunday, May 3, 2026

‘प्रोक्रिएट ऐप'



‘प्रोक्रिएट ऐप'

आज सुबह उठने से पूर्व मन में कितना अनोखा दृश्य क्रम चल रहा था। किताबें और उनमें लिखे शब्द स्पष्ट दिखायी दे रहे थे। जैसे सारा ज्ञान अपने ही भीतर हो, वैसा ही कुछ। आत्मा के रहस्य अपार हैं। जून को आजकल योगनिद्रा करना बहुत अच्छा लग रहा है।छोटी बहन का फ़ोन आया, आज से उसका फ़ोन रखवा लिया जाएगा, संभवतः अब उससे मिलना तभी संभव होगा, जब कोर्स समाप्त हो जाएगा। पापा जी से बात हुई, कह रहे थे, छोटी बहन बहुत बोल्ड है, वाक़ई वह ऐसी ही है।वह स्वयं बहुत शांत लग रहे थे, दिव्य ऊर्जा से युक्त!  


आज भी ऐप पर अभ्यास किया, बात धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। शाम को आर्ट ऑफ़ लिविंग के एक वरिष्ठ शिक्षक के साथ ऑन लाइन ‘पतंजलि योग सूत्रों’ का पाठ  किया। पाँच दिनों का कार्यक्रम है, जिसमें सुबह योग-साधना होगी। बड़ी भांजी की बिटिया का जन्मदिन है, उसने एक कविता लिखी, जिसे जून ने सुंदर चित्र से सजा दिया है।आज फ़ेसबुक पर असम वाले घर की एक तस्वीर पोस्ट की तो कितनी सखियों की यादें ताजा हो गयीं।

सुबह वह उठी तो अलार्म की आवाज़ ऐसे सुनायी दी जैसे कोई संगीत बज रहा हो।एक परिचित परिवार पहली बार घर आया, रास्ते में कई बार अभिवादन का आदान-प्रदान हो चुका है। बातों-बातों में उन्होंने बताया, मेट्रो से इस्कॉन मंदिर जाया जा सकता है। बैंगलुरु के ट्रैफ़िक की बात सोचकर वे अभी तक कार से जाने की बात टालते जा रहे थे। परसों छोटी ननद आ रही है। देश में धर्म के नाम पर दूरी बढ़ती जा रही है। कोई भी यदि स्वयं को विशेष मानेगा तो सामने वाले के मन में विरोध स्वाभाविक होने वाला है। सदियों से ईश्वर के नाम पर लड़े जा रहे इस झगड़े को ज्ञान के सिवा कौन सुलझा सकता है? ज्ञान का आश्रय लेना सीखना होगा। 


आज सुबह नन्हा व सोनू आ गये थे,  परिवार सहित ननद दोपहर को पहुँची। नन्हे ने पुलाव तथा पावभाजी बनाया। शाम तक खूब चहल-पहल रही। बच्चे चले गये, तो वे ननद-ननदोई को लेकर आश्रम गये। एक झील के किनारे भी कुछ समय बिताया। 


आज उन्हें एपिक रॉक ले गये। मौसम सुहाना था। आकाश में दो इंद्र धनुष बन गये थे। सूर्यास्त होने वाला था, बादलों के पीछे से सूर्य की किरणें अनोखा दृश्य उपस्थित कर रही थीं। अचानक आँधी चलने लगी। तेज हवा में धूल उड़ रही थी, बहुत तेज़ी से पेड़ झूम रहे थे। कुछ देर में सब थम गया, जैसे किसी ने स्विच बंद कर दिया हो।सभी ने बहुत आनंद लिया। वहाँ एक मुस्लिम लड़की मिली, जिसने हिंदू लड़के से ब्याह किया है, वह अच्छी हिन्दी बोल रही थी। उसकी बातें सुनकर प्रेम की शक्ति पर गर्व अनुभव हुआ। सृजन का फूल आज़ादी की हवा में ही खिलता है। 


जो भी जान लिया है, उसे जानने की ज़रूरत नहीं है। जो सदा से अनजाना है, उसे कोई कैसे ढूँढे? आज सुबह योग साधना स्वामी सूर्यपाद जी ने गुरुजी के ज्ञान सूत्रों की व्याख्या की।एक साधक के पाँच लक्षण हैं। श्रद्धा, समर्पण, निष्ठा, दृढ़ लगन और धैर्य। मन में किसी भी तरह की आकुलता न हो, पर प्रतीक्षा हो, यह सत्वगुण की निशानी है। थोड़ा सा रजोगुण प्रवेश करते ही वह मन को कहाँ ले जाएगा, कोई नहीं कह सकता। रजोगुण प्रवेश करता है अधैर्य से।मन एक क्षण में ही राग-द्वेष का शिकार हो जाता है। जिस क्षण भी कोई थम कर परमात्मा को पुकारता है, वह अपनी उपस्थिति ज़ाहिर कर देता है, बस धैर्य से प्रतीक्षा करनी है। अशांति को दूर करने के लिए सेवा है। साधक को ज्ञान होना चाहिए कि वह क्या खोज रहा है ? यदि उसे यह पता ही नहीं कि वह क्या खोज रहा है, तो उसे पाएगा कैसे? विरोधी बातों के मध्य समन्वय करने का एक ही तरीक़ा है, मध्य में रुक जाना। जब मन अपने केंद्र में रुक जाता है, दो इच्छाओं के मध्य ही सुख है। उन्होंने जागृत, स्वप्न व सुषुप्ति अवस्थाओं के बारे में भी बताया।गुरु के ज्ञान से साधक के ज्ञान का क्षितिज फैलने लगता है। कोई जगत को ढूँढता है तो हाथ में दुख आता है, दुख से बाहर निकलने का मार्ग ढूँढता है तो भगवान मिलते हैं। 


आज का विषय है, स्मृति: एक बाधा या वरदान। साधक पुरानी बातों को एक बोझ की तरह सिर पर लादे रहता है।मन में हज़ारों अनुभव व संस्कार भरे हैं, वह अपने स्वरूप में टिक नहीं पाता।अपने शुद्ध स्वरूप का विस्मरण ही समस्त समस्याओं का मूल कारण है। जन्म-मरण के चक्र से छूटना भी तभी संभव है। जन्म के साथ ही माया, एक छाया की तरह पीछे लग जाती है। उस ‘एक’ की स्मृति के अलावा सभी कुछ माया है। अविद्या, कामनाएँ तथा कर्म उन्हें अपने सच्चे स्वरूप में ठहरने नहीं देते।  


आज इतवार है, नन्हे और सोनू ने लंच में मोमोज़ और नूडल्स बनाये। बर्मा की एक डिश भी बहुत स्वादिष्ट बनी थी, बहुत मेहनत और प्रेम से बनायी गई। शाम को नन्हे ने कैमरा लगा कर ड्रोन उड़ाया। छोटी बहन से बात हुई, उसे फ़ोन वापस मिल गया है। वह कल सुबह छह बजे घर आने के लिए तैयार रहेगी। 


कल सुबह छोटी बहन को आश्रम से ले आये थे। दिन भर खूब बातें कीं।आज सुबह योग दिवस मनाया। शाम को बोटेनिका और रात को रात की रानी की क्यारी तक टहलने गये, बीस हज़ार से अधिक क़दम हो गये हैं आज। छोटी बहन टीटीपी कोर्स के बार में कुछ लेखन कार्य कर रही है।जून मोबाइल पर कुछ देख रहे हैं। मंझले भाई को बुख़ार हो गया है, उसने ईश्वर से उसके शीघ्र स्वास्थ्य की प्रार्थना की। 


आज सुबह वे टहलने गये तो दिन अभी निकला नहीं था। वापस आकर जून ने चाय बनायी, कई दिनों के बाद छोटी बहन ने चाय पी तो कहा, वाह !! अमृत है, सब हँसने लगे। आश्रम में कोर्स के दौरान चाय पीने की मनाही है। वाक़ई चाय ने सबके दिलों पर राज कर लिया है।दिन में बड़े भैया भी आ गये, सबने मिलकर कई बोर्ड गेम्स खेले। शाम को उन्हें आश्रम के गेट-१ तक छोड़ने गये, वहाँ से ओला मिल जाती है।