Sunday, April 19, 2026

'द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन

"द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन

आज सुबह वे दोनों टहल कर आये तो नूना गुलाबी फूलों वाले पेड़ों के चित्र उतारने फिर से गई, जिन्हें “अमापा” कहते हैं। नन्हे का फ़ोन आया था, बातों-बातों में उसने बताया, उनका पालतू बिलाव ठीक सुबह छह बजे और शाम को सात बजे उससे भोजन माँगता है। सूर्योदय तथा सूर्यास्त से ही वह समय का अंदाज़ा लगाता होगा। उसने नौ बड़े गमले और भेज दिये हैं। इतवार को माली उनमें पौधे लगायेगा।आज पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आये हैं, यूपी, उत्तराखण्ड, मणिपुर व गोवा में बीजेपी और पंजाब में आप जीत रही है। 


आज सुबह-सुबह वे साराकी सब्ज़ी मंडी गये, काफ़ी सुना था इसके बारे में। सब्ज़ियाँ ख़रीद कर नन्हे के यहाँ पहुँचे तो उनके योग शिक्षक कक्षा ले रहे थे, नूना भी शामिल हो गई।घर लौटकर   उसे गुरुजी के होली पर दिये संदेश का अनुवाद करना था। कल सोने से पूर्व गीतांजलि की कुछ कवितायें पढ़ीं। कितनी प्यारी कविताएँ हैं उसमें, रवींद्र नाथ टैगोर के दिल का हाल बतातीं। भक्ति और प्रेम में डूबी हुईं।वर्षों पूर्व न जाने किस भाव दशा में डूबकर नूना ने गीतांजलि की अनेक कविताओं का भावानुवाद किया था, एक बार फिर उन्हें सजाने की बेला आ गई है।आज सुबह उसने दूरदर्शन का एक पुराना कार्यक्रम ‘शब्दों के रंग’ सुना।जिसमें गुलज़ार का इंटरव्यू, कहानियों की एक किताब का विवरण और एक धारावाहिक ‘अपना अपना आसमान’ का पहला अंक भी था।कल रात अचानक एसी बंद हो गया, कुछ देर नींद नहीं आयी।जब सारी खिड़कियाँ खोलनी पड़ीं, पता चला, कुछ लोग देर रात को टहलने जाते हैं।


आज इतवार है, बच्चे आये, नाश्ते में मैसूर दोसा और मैंगो शेक लेने के बाद सब मिलकर उनके एक ख़ाली पड़े फ़्लैट को भावी ख़रीदार को दिखाने गये। इस बार घर में कोई सीपेज नहीं था, कुछ जगह पेंट उखड़ा हुआ था। वापसी में नये बन रहे क्लब हाउस को देखते हुए आये, जो बहुत पहले ही बन जाना चाहिए था, फ़िलहाल तरणताल काफ़ी बन गया है।सुबह के भ्रमण के समय एक जगह संभवत: पाइप फट जाने के कारण पानी लीक होते हुए देखा था, जून ने अपनी देख-रेख में उसे ठीक करवा दिया है।      


आज उन्होंने ‘कश्मीर फ़ाइल्स’ देख ली। जिसमें कश्मीर में हुई सांप्रदायिक हिंसा और हिंदुओं के विस्थापन की हृदय विदारक कहानियों को दर्शाया गया है। विवेक अग्निहोत्री की यह फ़िल्म उस कड़वी सच्चाई को दिखा रही है, जिसे तीन दशकों से छुपाया गया था।सिनेमा हॉल पूरा भरा हुआ था। फ़िल्म में बहुत ही मार्मिक दृश्य हैं, जो भीतर तक कंपा देते हैं।१९९० की १९ जनवरी को कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से जाने के लिए कहा गया। उन्हें टेंटों में रहकर गुजारा करना पड़ा, अनेक कष्ट उठाने पड़े। उन सब को आज तक न्याय नहीं मिला है।आज वह समय आया है कि दोषियों को सजा मिले।शाम को पापाजी से भी फ़िल्म के बारे में बात हुई, उन्हें विभाजन के दिन याद आ गये। कितनी मुसीबतें झेलकर, दो रातें रास्ते में बिताकर, पैदल चलते हुए वे लोग भारत आये थे। उसके पूर्व भी उन्हें बहुत दहशत भरे दिन गुजारने पड़े थे। 


छोटा भाई परिवार सहित दुबई गया है, बड़े भाई पापाजी के पास रहने आये हैं।परसों होली का उत्सव है।आज यहाँ होलिका दहन का उत्सव पूरे-ज़ोर-शोर से मनाया गया।प्रसाद में सभी को काले चने व हलवा बाँटा गया। होली की ख़रीदारी भी होगई है।सोसाइटी में कल सुबह साढ़े नौ बजे एक पार्क में सामूहिक होली खेलने का कार्यक्रम है।  


आज सुबह होलिका उत्सव सबके साथ मनाया। बच्चे व बड़े सभी उत्साह में भरे थे, बाद में समोसा व जलेबी का वितरण भी किया गया।शाम को वे आश्रम गये, गुरुजी ने होली का उदाहरण देते हुए कई ज्ञान वर्धक बातें कहीं। दो-तीन लोगों ने अपनी कविताएँ भी सुनायीं। स्वामी विरूपाक्ष द्वारा लिखी गई एक पुस्तक "द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन हुआ,  जिसमें गुरुदेव द्वारा श्रीलंका में कराये गये शांति प्रयासों का वर्णन है। लेखक स्वयं श्रीलंका में नौ वर्षों तक रहे थे।यह पुस्तक वे ख़रीदने वाले हैं।आज छोटी भांजी के लिए एक कविता भेजी, कल उसकी मँगनी हो रही है। असम की एक परिचिता ने अपने लिए कुछ लिखने को कहा था, उसे भी अच्छी लगी कविता। 


आज सुबह वे नन्हे के यहाँ आ गये थे। नाश्ता बाहर ही खाया फिर सोनू के भाई व मौसेरी बहन के साथ सभी लोग ‘एंबेसी हॉर्स राइडिंग स्कूल’ पहुँचे। भारत में घुड़सवारी के खेल को विश्व स्तर तक पहुँचाने के लिए पीछे तीन दशकों से वहाँ घुड़सवारी सिखायी जाती है। वहाँ २४० एकड़ ज़मीन पर घोड़ों को रखने की व्यवस्था की गई है। उनकी अच्छी देखभाल की जाती है। सभी घोड़े चुस्त-दुरस्त थे। सभी ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। 


वहाँ से उनका छह लोगों का समूह ‘मिस्ट्री रूम्स’ गया। बैंगलुरु के इंदिरा नगर में ‘मिस्ट्री रूम्स’ एक रोमांचक लाइव एस्केप गेम है।सभी को एक घंटे के लिए एक कमरे में बंद कर दिया गया। और वहाँ दी गई पहेलियों को बूझकर उन्हें बाहर निकलना था। अत्यंत अनोखा अनुभव था। उनके पास बाहरी दुनिया से संपर्क करने के लिए कोई साधन नहीं था, कमरे की दीवारें ऊँची थीं, और ताला बंद था, जिसकी चाबी का सुराग लगाना था। सभी बाधाएँ पार करके वे अंतिम द्वार तक पहुँचने ही वाले थे, पर समय सीमा समाप्त हो गयी  और आयोजकों ने स्वयं ही दरवाज़ा खोल दिया। उसके बाद सभी ने राजस्थानी होटल में लंच खाया। शाम को घर लौटकर भांजी की माँगनी का लाइव टेलीकास्ट देखा। 


आज नूना ने ध्यान की एक नयी विधि ‘तिब्बतियन बुक ऑफ़ लिविंग एंड डाइंग’ में पढ़ी और प्रयोग किया। सर्वप्रथम कुछ देर के लिए आँखें किसी वस्तु या किसी चित्र पर टिकाएँ, उसके बाद कुछ देर तक अपने प्रिय मंत्र का उच्चारण करें, तथा फिर श्वासों पर ध्यान दें। अंत में शून्य में टिक जायें। मन जब शांत होकर ठहर जाता है तब उसे अपने स्वरूप का दर्शन होता है। अपना स्वरूप कैसा है, इसका पता तो किसी को अनुभव के बाद ही चल सकता है, उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता! जून आज अपनी कार को पेंट करवाने के लिए देकर आये हैं, चार दिन बाद मिलेगी, कहने लगे, वे बेकार (बिना कार के ) हो गये हैं ! 

 


Saturday, April 18, 2026

शेक्सपियर के नाटक

शेक्सपियर के नाटक

रुस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ लड़ाई छेड़ दी है।संभवत: दुनिया विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है।जून सोसाइटी के लिए काम करने वाली वर्तमान एजेंसी की जगह दूसरी लाना चाहते हैं, विरोध होगा, पर वह सुनने के लिए तैयार हैं। आज सुबह सात बजे वह कमेटी के कुछ सदस्यों के साथ  किसी अन्य सोसाइटी में नयी एजेंसी का काम देखने गये थे, बारह बजे लौटे। नूना ने पौधों को बचाये रखने वाली एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है, जो असम की रहने वाली तृष्णा बोरा ने लिखी है। पापाजी से बात हुई, उन्हें ‘बाल्मीकि रामायण’ का काव्य रूपांतरण पढ़ने को कहा है। पता नहीं क्यों, ऐसा लग रहा है, कि यह सब कल लिखा था, पर डायरी का यह पन्ना ख़ाली है, शायद सपने में लिखा हो ! ज़िंदगी कितनी रहस्यमयी है ! छोटे भाई का फ़ोन आया, वह लेह में है। दीदी-जीजा जी अपना चंडीगढ़ वाला घर बेचना चाहते हैं।


सुबह उठने से पूर्व गुरुजी को सपने में देखा, वह उनके घर में ही हैं शायद, एक कुर्सी पर उन्हें बैठने के लिए कहती है, फिर पानी के लिए पूछती है। वह कहते हैं,  हाँ, पानी पियेंगे, गिलास में पानी भरकर ट्रे में रखा है, पर लगता है, गुरुजी हैं तो साथ में कुछ और भी तो हो, ख़ाली पानी कैसे देगी। तभी कुछ और लोग भी आ जाते हैं माला आदि लेकर, जून भी खड़े हैं। जब तक वह ट्रे लेकर जाती है, जून कहते हैं, वहाँ नो एंट्री है, स्वप्न टूट जाता है। सुबह के स्वप्न जगाने के लिए आते हैं। गुरुजी को अभी-अभी सुना, वह कितने शांत और सहज लग रहे थे। जून आज भी कई घंटे बाहर रहे, उनकी मीटिंग्स लंबी होती जा रही हैं। पापाजी ने रामायण पढ़ी, उन्हें अच्छी लगी। उन्होंने बताया, चचेरी बहन का कॉलेज में पढ़ने वाला बेटा सामाजिक कार्य करता है, देहरादून के विधायक से उसने अपने रेस्तराँ का उद्घाटन कराया, काफ़ी आगे जाएगा, बहुत होशियार है। उसे दादाजी का ध्यान हो आया, वह भी राजनीति में बहुत सक्रिय रहते थे, सम्भवत: उनका कुछ असर आया होगा।  


आज जून ने मतदान पहचान पत्र के लिए आवेदन पत्र भर दिया है, बनने में तीन-चार महीने लगेंगे। कल पहली बार वे एग्री मॉल गये।जहाँ हज़ारों की संख्या में पौधे और फूल थे। उससे पूर्व ‘पाकशाला’ में दोपहर के भोजन के बाद नन्हे के एक मित्र के घर जाना हुआ, वह भी पौधों के विशाल मॉल में साथ गया।उन्होंने कुछ विशेष पौधे भी लिए जो वर्षों तक उनके बगीचे की शोभा बनेंगे। शाम को शिवरात्रि के लिए गुरुजी द्वारा पूर्व में दिये गये एक  प्रवचन का हिन्दी अनुवाद किया। 


कल शिवरात्रि थी। पहली बार नूना ने आधी रात तक जागकर टीवी के बड़े से स्क्रीन पर शिव के भजन सुने और साथ ही नृत्य भी किया। बहुत अनोखा अनुभव था। आश्रम में हज़ारों की संख्या में लोग आये हैं, गुरुजी की कृपा दृष्टि पाने के लिए आतुर लोग, भजन की धुनों पर नाचते लोग ! ईशा फ़ाउंडेशन में भी हर वर्ष की तरह भव्य कार्यक्रम हुआ। पहले एक अफ़्रीकी गायक आया, फिर हिमाचल का हंसराज रघुवंशी, जिसने शिव भजन गाकर समां ही बाँध दिया।सुबह समय से नींद खुल गई, कुछ देर स्वामी सुखबोधानन्द जी द्वारा करवाया त्राटक ध्यान किया। बहुत ही प्रभावशाली ध्यान है यह।भगवद् गीता के अध्याय दो का अध्ययन भी चल रहा है। श्लोक संख्या ४,५,६ पर उनकी व्याख्या सुनी। वैसे वह कहते हैं, वह एक्सप्लेन नहीं करते, रेस्पोंड करते हैं।अर्जुन ने जब कहा कि युद्ध करने की बजाय वह भिक्षा माँगकर गुजारा करना सही समझेगा, तब वह संन्यास की तरफ़ इशारा कर रहा था। जिसका लक्ष्य मोक्ष है, इसलिए वह ज्ञान पाने का अधिकारी भी बन गया।उन्होंने कृष्ण की मुस्कान का अर्थ भी बताया। smile के पाँच वर्णों के भाव हैं - एस-स्प्रिचुअल, एम-मनी, आई-इंटेलिजेंस, एल-लोंगेविटी और इ-इमोशनल कोशेंट।जीवन की किसी भी परिस्थिति का सामना ‘स्माइल’ से करना चाहिए। आध्यात्मिक धन पास में हो तो बुद्धि, आयु और भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है।     


छत पर सूर्योदय दर्शन करते हुए सूर्य नमस्कार करने का अपना ही आनंद है। दोपहर को ऑनलाइन कन्नड़ा क्लास हुई, एक अन्य महिला भी शामिल हुई।शाम को नन्हा आया था, उनकी एक परिचिता ने अपना कुछ सामान उनके स्टोर रूम में रखवाया है। कोरोना की वजह से कितने ही लोग अपने घर जा रहे हैं। शेक्सपियर की ‘हैमलेट’ पढ़ी आज, जूलियस सीज़र और ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम पहले पढ़ी थी, कमाल के लेखक हैं शेक्सपियर! एक से एक प्लॉट्स हैं, भूत, प्रेत, परियाँ सभी हैं उनमें। 


आज बायीं नासिका से एक गंध आ रही है। संभवत: इसका संबंध पाचन क्रिया से है। सुबह चार बजे से पूर्व नींद खुल गई, मन में ईश्वर स्मरण के बजाए, कल दिन में हुई किसी घटना पर विचार चल रहा था। यूक्रेन में तबाही बढ़ती जा रही है, पर युद्ध समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा। भारत ने अभी तक किसी भी पक्ष की तरफ़ होने की बात नहीं कही है।दोपहर को वे एक स्थानीय मित्र के यहाँ गये, उनकी बेटी डॉक्टर है, एमडी में दाख़िला ले रही है। 


आज का इतवार विशेष रहा, नन्हा और सोनू कल शाम को ही आ गये थे। सुबह सोसाइटी के बहु उद्देश्यीय मैदान में असोसिएशन की तरफ़ से बच्चों के लिए खेलकूद का आयोजन किया गया था। ढेर सारे बच्चे आये, बाद में पुरस्कार भी दिये गये। सभी को आनंद आया।साढ़े दस बजे कुछ महिलाओं के साथ नूना पंचायत के दफ़्तर पहुँच गई थी। अध्य्क्षा लगभग सवा ग्यारह बजे आयीं। सब मिलकर निकट के एक गाँव में गये, उसके पहले दो झीलें भी देखीं। गाँव में बच्चों व महिलाओं से मिले। एक महिला ने सभी को पीने के लिए शरबत दिया, जो गाँव वालों के अतिथि सत्कार का एक सुंदर उदाहरण था। 


आज सोसाइटी की कमेटी ने नयी एजेंसी नियुक्त करने की बात सबको बता दी है। अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है, अर्थात लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं। आज जून यहाँ पहली बार गन्ने का रस लाये। यूक्रेन से हज़ारों विद्यार्थी वापस आ गये हैं, पर अभी भी कई शेष रह गये हैं। पुतिन ने कुछ शहरों में युद्ध विराम कर दिया है। 


आज ‘विश्व महिला दिवस’ है, पूरी दुनिया में कई तरह से मनाया गया, नापा में अस्थायी क्लब में महिलाओं के लिए एक प्रसिद्ध अस्पताल की तरफ़ से निःशुल्क मेडिकल कैंप लगाया गया। नाश्ते के बाद नूना यहाँ आ गई थी, डॉक्टर्स की टीम पहले ही वहाँ आ चुकी थी। उसने चेकअप कराया। दस दिनों का दवा का एक कोर्स दिया है, इसके बाद पूरे शरीर की जाँच के लिए अस्पताल जाना है। कल जून वहाँ आने वाली सभी महिलाओं के लिए चॉकलेट्स मँगवाने वाले थे, पर स्टोर में खत्म हो गयीं, ओरियन बिस्किट्स मँगवाये। शाम को प्रधानमंत्री ने महिला संतों को वर्चुअली संबोधित किया, वे सब कच्छके धोरदो में एकत्रित हुई थीं। महिला संतों के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, कच्छ में महिलाओं ने कठोर प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है।


Friday, April 17, 2026

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२


आज नूना को एक मज़ेदार स्वप्न ने उठाया।एक महाशय अपने डॉग(शी) से बातें करते हैं। वह उन्हें कुछ परेशान कर रही थी तो उसे कुछ सबक़ सिखाना चाहते हैं। उसके मुख के पास जाकर कहते हैं, हेलो मिस, वह भी दाँत निपोरती हुई कहती है, हेलो मिस्टर, अगली बार उनके हाथ में कोईं कठोर वस्तु है और नूना जानती है कि वह इसे कहाँ रखने वाले हैं, जैसे कि यह घटना पहले भी हो चुकी हो। वह फिर बड़े ही अच्छे अन्दाज़ से कहते हैं, हेलो मिस, और जैसे ही वह हेलो कहने के लिए मुँह खोलती है, जबड़ों के मध्य वह वस्तु रख देते हैं। वह मुँह बंद करती है तो ज़ोर की आवाज़ होती है। सब हँसने लगते हैं और नींद खुल जाती है। यह स्वप्न जगाने के लिए आया था, क्योंकि अलार्म बंद किए काफ़ी वक्त बीत गया था। परमात्मा को मज़ाक़ बहुत पसंद है, गुरुजी की यह बात एक बार फिर सत्य सिद्ध हो गई।परमात्मा के द्वार जाना हो तो हँसते-हँसते ही जाया जा सकता है। एक अन्य स्वप्न में उनकी सोसाइटी नापा की एक परिचित महिला को वह सनातन धर्म  के बारे में बता रही है। सपने में वह ईसाई धर्म को मानती हैं।नूना उन्हें गहन श्रद्धा तथा ईश्वर के विभिन्न रूपों के बारे में बता रही है। सुंदर स्वप्न था यह !!   


आज इतवार को नन्हे और सोनू के लिए नाश्ते में बेदमी पूरी बनायी, जून ने यू ट्यूब पर उसकी विधि देखी थी।नाश्ते के बाद वे सब बेंगलुरु के चर्च स्ट्रीट में स्थित किताबों की एक दुकान पर गये।ब्लॉज़म बुक हाउस नाम है उसका, २००१ में मयि गौड़ा नाम के व्यक्ति ने उसे खोला था। यहाँ पुरानी, नयी हर तरह की किताबें मिलती हैं। वीडियो कॉल करके पापाजी को भी दिखायी वह दुकान। सबने मिलाकर कुल बीस किताबें खरीदीं। उसके बाद ‘गो नेटिव’ गये। जहाँ परंपरागत शाकाहारी भोजन मिलता है।वापस आते-आते सवा पाँच हो गये थे, उसे अनुवाद कार्य करना था। शाम को बच्चे वापस चले गये। जून सोने चले गये हैं, वह कुछ देर नयी लायी पुस्तक ‘माइंड ऑफ़ गॉड’ पढ़ने वाली है। 


आज सुबह योग साधना करते समय अचानक आकाश पर नज़र पड़ी तो एक सुंदर दृश्य दिखा। एक प्रकाश का स्रोत, जिसके पीछे प्रकाश की तिकोनी छाया थी, लगा कोई धूमकेतु होगा। दूसरी तरफ़ भी बादलों को चीरती हुई सी प्रकाश की एक तरंग थी। कुछ समझ नहीं आया, यह क्या था।बाद में ज्ञात हुआ इसरो ने पीएसएलवी-सी ५२ लांच किया था।दोपहर की वही गॉड वाली पुस्तक पढ़ती रही। मस्तिष्क अरबों, खरबों न्यूरॉन से बना है। कितनी जटिल है इसकी रचना, जिसके द्वारा शरीर के सब कार्य होते हैं। शाम को वे लोग एक परिचित के विशाल और सुंदर घर की गृह प्रवेश की पूजा में गये।वापसी में एक मित्र दंपत्ति घर आये। पापाजी से बात हुई, आज वह वोट देने गये थे, इस उम्र में भी उनका इतना उत्साह देखकर एक पत्रकार ने उनसे बातचीत की। 


आज सुबह योग-प्राणायाम के बाद, सुखबोधानन्द जी की ताई चि क्रिया की।उन्होंने बहुत अच्छी बातें बतायीं तथा नृत्य भी कराया। कह रहे थे, वह योग निद्रा नहीं प्रेम निद्रा कराते हैं, आनंद लहरी के साथ-साथ प्रेम लहरी जगाते हैं। जून ने वर्षों बाद नृत्य किया होगा। वह चाहें तो कर सकते हैं। भजन व नृत्य उनके मन को तनाव से मुक्त रखने में सहायक होगा। नाश्ते में जून नापा के प्रसिद्ध शेफ़ शेट्टी जी से दोसा लाए, चटनी तथा सब्ज़ी में मिर्च बहुत थी।नूना ने एक व्हाट्सेप समूह बनाया है, जिसमें पंचायत की अध्यक्षा तथा नापा की कुछ महिलाएँ हैं, मंगलवार को पहली मीटिंग है। गाँव से जुड़कर महिलाएँ बहुत कुछ कर सकती हैं, ऑर्गेनिक खेती, पेपर बैग्स बनाना , सफ़ाई अभियान, योग-ध्यान सिखा सकती हैं। सेवा के अतिरिक्त अब करने को कुछ है भी कहाँ। शाम को जून कमेटी की मीटिंग में व्यस्त थे और उसने ज्ञानेशावरी गीता का पाँचवाँ व अंतिम भाग सुना।नन्हे ने एक किताब भेजी है, ‘लोकतंत्र के टूटे स्तंभ’, वह यू ट्यूब पर इसे सुनता है।शाम को पापाजी से बात हुई, वह टीवी पर प्राइम वीडियो नहीं देख पा रहे थे।जून ने उन्हें उपाय बताया, शायद बाद में देख पाये हों।  


जून आज सुबह जल्दी चले गये।शनि व रविवार को उन्हें असोसिएशन के काम में और अधिक समय देना होगा।वह अपने कार्य में बहुत रुचि ले रहे हैं, और उन्हें अपने काम में बहुत आनंद आ रहा है। उसने काव्यालय में एक कविता प्रकाशित की। छोटी ननद ने बताया छोटे पुत्र का कॉलेज दो वर्ष के बाद खुल रहा है। 


आज एक परिचित दंपत्ति की शादी की सालगिरह है।उनकी जीवन यात्रा में एक मात्र ऐसा परिवार, जो उनसे ऐसा नाराज़ हुआ कि माना ही नहीं। ख़ैर ! आज सुबह शिव सूत्र पर चर्चा सुनी।वक्ता के अनुसार शिव रात्रि का अर्थ है, अज्ञान की रात्रि में प्रकाश का अवतरण और ज्ञान में जागरण ! उन्होंने पाणिनि तथा पतंजलि व्याकरण के बारे में बताया, जो शिव के डमरू से निकली ध्वनियों के आधार पर बनाया गया था। दोपहर एओएल के अनुवाद कार्य में बीती ।पापाजी ने कहा, आत्मा में रहने से मन में शांति बनी रहती है, शरीर में तो कुछ न कुछ लगा ही रहता है।आज एक महिला ब्लॉगर से बात हुई, उनके तीन पुत्र हैं, एक सिडनी में दो बैंगलोर में हैं। वह मध्य प्रदेश आती-जाती रहती हैं, पर अब ज़्यादातर यहीं रहेंगी। वह बहुत अच्छी लेखिका हैं। कभी न कभी उनसे मुलाक़ात भी हो ही जाएगी। 


आज सुबह पहली मीटिंग में कुल छह महिलाएँ आयी थीं। पंचायत की अध्य्क्षा कुछ देर से आयीं, पर उन्होंने काफ़ी ध्यान से चर्चा में भाग लिया। काफ़ी विषयों पर बात हुई। नये लोगों से परिचय हुआ। जून ने मीटिंग का सार लिखने में मदद की। कल वह एक नयी सोसाइटी देखने जा रहे हैं। आज सुबह नन्हा आया था, कंप्यूटर का एक पार्ट खोल कर ले गया। बिटकॉइन माइनिंग का उसका स्वप्न बीच में ही बिखर गया है।  


Thursday, April 16, 2026

ज्ञानेश्वरी

ज्ञानेश्वरी 

नन्हे ने समारोह की सुंदर तस्वीरें भेजी हैं। जून का स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। सुबह नूना उठी तो वह पहले ही उठ चुके थे। घर का काम बिना नैनी के ठीक-ठाक चल रहा है। आज वसंत पंचमी पर कविता प्रकाशित की। छोटा भाई सिक्किम में काफ़ी स्थान देख रहा है, उसमें जोश और उत्साह बहुत है। छोटी बहन परीक्षा की तैयारी में लगी है। 


अभी कुछ देर पूर्व एक विचित्र स्वप्न देखकर नूना की आँख खुली। वह और माँ एक कमरे में सोये हैं। थोड़ी दूर पर दूसरा कमरा है, जहाँ छोटी बहन सोयी है, उसका बिस्तर इस कमरे से दिखायी पड़ता है। माँ कहती हैं, बिटिया क्या हुआ, मैं आ जाऊँ ? नूना उसकी तरफ़ देखती है तो तकिये के ऊपर टहनियों की भाँति हाथ हिल रहे हैं, जैसे कोई डूबता हुआ व्यक्ति जल के ऊपर हाथ निकालता है। कुछ देर देखने के बाद नूना उसके पास जाती है, अब वह टहनियाँ कहीं ग़ायब हो गयीं। किसी के बोलने की आवाज़ आ रही है।वह उसे हिलाती है, उसका चेहरा नीले रंग से रंगा है, माथे पर सफ़ेद रंग है और गले पर भी हरा या कोई अन्य रंग। नूना उसे आवाज़ देती है, पर वह गहन निद्रा में है। वह माँ को आवाज़ देती है, वह आती हैं पर उसकी यह हालत देखकर भयभीत नहीं होतीं, बल्कि हँसने लगती हैं, ज़ोर से नहीं, पर हल्की सी मुस्कान छा जाती है उनके मुख पर, तभी नींद खुल जाती है। क्या अर्थ हो सकता है इस स्वप्न का? उसके पहले गुरुजी के आश्रम के दो व्यक्तियों को उनके काम के सिलसिले में आये तथा काम करते हुए देखा था। गुरुजी की चर्चा भी हुई।   


आज सुबह स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर पंच तत्वों में विलीन हो गयीं। दो दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में किया गया है। नन्हा व सोनू भी बैंगलुरु पहुँचने वाले हैं। आज लता जी पर एक पोस्ट प्रकाशित की, उनको चाहने वाले करोड़ों की संख्या में हैं। ईश्वर भी उन्हें अपने पास बुलाकर आनंदित हो रहे होंगे। नूना ने आज रामकृष्ण परमहंस के बारे में पढ़ा और सुना।अद्भुत संत थे वह, ईश्वर के साक्षात रूप उन्हें दिखते थे, उनकी साधना अतुलनीय थी। उन्होंने ध्यान का महत्व बताया, वह स्वयं भी घंटों ध्यान में लीन रहते थे। 


आज जून ने कहा, कल से सुबह टहलने जाएँगे।लेकिन दो दिन बाद ही एकांत वास से बाहर आयेंगे। सभी से फ़ोन पर बात कर लेते हैं।आज अमर संत ज्ञानदेव द्वारा लिखी ‘ज्ञानेश्वरी’ पहली बार सुनी। जिसने भी उसे रिकॉर्ड किया है, धन्य है वह ! बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गई है। जिसे सुनते-सुनते ही समाधि का अनुभव होने लगता है।भारत में अनोखे योगी व संत हुए हैं, जिनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। वह कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। परमात्मा की शक्तियाँ अनंत हैं, जो उनसे जुड़ जाता है, वह उन शक्तियों कि स्वामी बन जाता है। एक ही चेतना से यह सारा जगत बना है, उसी में स्थित है, उसी से भरा हुआ है। मानव जन्म का एकमात्र उद्देश्य है, अपने सत्य स्वरूप को जानकर स्वयं को परमात्मा के प्रति समर्पित कर देना। यदि आत्मा का अनुभव होने के बाद भी कोई संसार की कमाना करे तो उससे बड़ा अभागा कौन होगा ? 


जून आज आठ दिन बाद असोसिएशन के दफ़्तर गये। कल से ऊपर के कमरे में शिफ्ट हो जाएँगे। कोरोना का अनुभव अंततः उन्होंने भी कर लिया।सुबह आकाश में चंद्रमा को ढूँढा, नहीं दिखा, रात्रि भ्रमण के समय दिखा। चंद्रमा भी तो धरती के घूमने के कारण प्रतिदिन पूर्व से उगता है और पश्चिम में अस्त होता है। जो हर दिन लगभग 50 मिनट की देरी से होता है। पूर्णिमा के दिन चाँद सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में उगता है और सूर्योदय के समय पश्चिम में अस्त होता है।अमावस के दिन यह सूर्योदय के साथ उदय होता है और सूर्यास्त के समय अस्त होता है। रात की रानी में भी कलियाँ आयी हैं। पापा जी ने आज ‘आरती संग्रह’ की बात बतायी, वह भी धर्म व अध्यात्म में पूरी तरह डूब गये हैं। 


आज सुबह जून किन्हीं लक्ष्मी नायक जी से दोसा-इडली ले आये थे। वह अपनी आज़ादी का उत्सव मना रहे थे। उसके बाद बाज़ार गये, वापसी में थलगतपुरा झील देखने गये, जहाँ जाकर बहुत निराशा हुई। झील का अधिकांश पानी सूख गया है, कुछ पौधों और काई ने शेष पानी को ढक लिया है। रास्ते में एक अन्य झील देखने के लिए रुके, वहाँ भी आधी से अधिक झील शैवाल से ढकी थी। वे घर लौटे तो नैनी प्रतीक्षा कर रही थी, उसे बच्चों के स्कूल जाना था, सो जल्दी आयी थी। शाम को पुन: ज्ञानेश्वरी सुनी। इस समय जून कॉलेज के दिनों को याद कर रहे हैं।जो बीत गया वह सपना ही तो है। 


आज बहुत दिनों बाद वे आश्रम गये। गुरुजी हैदराबाद गये हैं, उनकी अनुपस्थिति में भी आश्रम में एक शांति और आनंद की छाया फैली हुई थी।फूल खिले थे, कोयल की कूक सुनायी दे रही थी और मंद पवन बह रही थी।उन्होंने विशालाक्षी मंडप में ध्यान किया, पंचामृत में अल्पाहार लिया और सुंदर रास्तों पर भ्रमण करते रहे। सूर्यास्त के बाद वे घर लौट आये। एक कुर्ती भी ख़रीदी जो नूना को परसों किताबों की दुकान में पहन कर जानी है। 




Wednesday, April 15, 2026

नये नये ले-आउट


नये नये ले-आउट



सुबह साढ़े नौ बजे बच्चे आ गये थे। लंच उन्होंने ही बनाया, राजमा, मेथी आलू और बेक्ड वेज। दोपहर बाद जिग्सा पजल में कुछ टुकड़े जोड़े। शाम को सभी घूमने निकले, पहले दो नर्सरी देखीं, फिर दो झीलें। सूर्यास्त के समय वे झील किनारे थे, फ़ोटोग्राफ़ी की। दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


एक दिन और बीत गया, उपलब्धि के नाम पर, दोपहर को साहित्य रचना की, कुछ शब्द उतरने दिये कलम द्वारा। एक सखी से बात की, फूलों और  प्रकृति के चित्र उतारे। बगीचों की सैर की, आकाश को निहारा, चाँद-तारों से बातें कीं, हवा की ठंडक को महसूस किया। भोजन बनाया, खिलाया, खाया। चलते-फिरते राजनीति पर कुछ चर्चा सुनी। हिंदू-मुस्लिम, दलित, यादव, ब्राह्मण के जोड़-तोड़ चल रहे हैं। नापा में एक और व्यवसायिक इमारत बननी शुरू हुई है। पापाजी से बात की,उन्होंने उसकी कविताओं की तारीफ़ की, रोज़ की तरह। कल छोटी बहन के विवाह की वर्षगाँठ है, कविता भेजनी है उन्हें। 


आज शाम को एक महिला डॉक्टर आयीं, वह महिला दिवस पर एक कार्यक्रम आयोजित करना चाहती हैं। जून ने इस पर प्रसन्नता ज़ाहिर की। आज सुबह भी वह कमेटी के काम से बाहर गये थे। दोपहर को एक स्थानीय महिला ने ऑनलाइन कन्नड़ भाषा का पहला पाठ पढ़ाया।मार्च में छोटा भाई दुबई जाने वाला है और दीदी-जीजा चंडीगढ़। 


आज गणतंत्र दिवस है। नन्हा व सोनू कल रात को ही आ गये थे। रात्रि भोजन के बाद छत पर हवन वाली कड़ाही में अग्नि देव का आवाहन किया। इस बार लोहरी पर वे लोग आ नहीं पाये थे। आज बड़ा भांजा भी आ गया। असम का एक पुराना मित्र परिवार और नापा में नया बना एक मित्र परिवार भी। गाँव की पंचायत की अध्यक्षा भी आयी थीं, जिन्हें झंडा आरोहण के लिए बुलाया गया था। दोपहर को नेता जी पर एक अच्छी सी फ़िल्म देखी, गुमनामी।वह उनकी आत्मकथा भी मँगवा रही है, पिछले दिनों उनके बारे में इतना कुछ सुना और पढ़ा, कि और जानने की उत्सुकता हो रही है। 


नूना का स्वास्थ्य सौ प्रतिशत ठीक नहीं है। सिर में हल्का दर्द है और गले में हल्की ख़राश भी।आजकल हर दूसरे व्यक्ति को कोई न कोई समस्या हो रही है, कोरोना के वेरिएंट का वायरस हवा में है। सुबह टहलकर आये तो नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी, उसका फ़ोन ख़राब हो गया है। नन्हे को कहा, तो उसने नया फ़ोन ऑर्डर कर दिया है, कल आ जाएगा।उसने घर के लिए भी कुछ सामान भेजा है। उसे कुछ भी कमी दिखती है तो शीघ्र ही पूरा करने का प्रयास करता है। 


आज गाँधीजी की पुण्यतिथि है।कल शाम ‘बीटिंग रीट्रिट’ का शानदार  कार्यक्रम देखा, ड्रोन का प्रदर्शन बहुत अच्छा लगा। जून ने आज गाजर का हलवा बनाया है।नन्हा और सोनू केक लाये थे, आज उनके विवाह के रजिस्ट्रेशन को पाँच वर्ष हो गये।नूना ने नाश्ते में गोभी के पराँठे बनाये और लंच में लोभिया। शाम को वे सब ड्राइव पर गये, आसपास बन रहे कई ले-आउट देखे। बिल्डर खेतों को काटकर प्लॉट्स बना रहे हैं और संभवत: किसान भी इससे बहुत मुनाफ़ा कमा रहे हैं। बच्चों के जाने के बाद वे दोनों सोसाइटी के एक निवासी के यहाँ उनका तबला वादन सुनने गये। उनकी बेटी भी बहुत अच्छा गाती है। नन्हे ने छत के लिए एक बड़ी सी चाइम भेजी है और जून के बाथरूम के लिए नई फिटिंग्स। सोनू के भाई की मंगनी पर जून ने सूखे मेवों का एक डिब्बा भेजा है।     


फ़रवरी का आरम्भ ! पाँच तारीख़ को वसंत पंचमी है, पर उत्तर भारत में ठंड कम नहीं हुई है।आज बड़ी भांजी का जन्मदिन है, नूना ने कविता भेजी है। पापा जी ने बताया, छोटा भाई ड्यूटी पर सिक्किम पहुँच गया है।कल वे लोग नापा में रहने वाले इसरो के एक वैज्ञानिक पति-पत्नी से मिले, जो दुनिया के अनेक देशों की यात्रायें कर चुके हैं।दक्षिणी ध्रुव तक हो आये हैं। आने वाले कल उन्हें एक वृद्ध गांधीवादी व्यक्ति से मिलने जाना है। 


आज नूना पहली बार इस कमरे में अकेले सो रही है। जून सुबह उठे तो तबियत पूरी तरह ठीक नहीं लग रही थी, फिर भी कुछ देर टहलने गये। वापस आकर ध्यान भी किया, पर स्नान के बाद ज्वर महसूस हुआ, जो दिन में दवा लेने पर उतर गया। वह नीचे वाले कमरे में हैं। उसे लगता है मामूली सर्दी-जुकाम का असर है, पर जून कोरोना की संभावना बता रहे हैं। अगले सात दिन अब उन्हें अकेले ही रहना है और उन दोनों को ही घर से निकलना नहीं है। नैनी भी नहीं आएगी और न ही कोई और आ सकता है। बीत ही जाएँगे ये सात दिन, उसे एक फ़िल्म का नाम याद आया, वह सात दिन ! दिन आज गर्म है, शायद रात कुछ ठंडी होगी।नन्हे का फ़ोन दो बार आ चुका है , उसने फल-सब्ज़ियों का ऑर्डर कर दिया था।नेता जी की आत्मकथा आ गई है, बहुत रोचक ढंग से लिखी गई है। उन्हें बचपन से ही अध्यात्म में बहुत रुचि थी।पापाजी आजकल अंग्रेज़ी कविताओं की पुस्तक पढ़ रहे हैं।   


जून का बुख़ार उतर गया है, उन्होंने सुबह एक बार ही दवा ली।बड़ी ननद को भी कोविड हो गया है, जून ने दोनों बहनों से बात की। कुछ देर पहले सोनू की मॉम का फ़ोन आया, बेटे की मँगनी के लिए उनके यहाँ मेहमान आने शुरू हो गये हैं। कल नन्हा व सोनू भी पहुँच जाएँगे। आज असोसिएशन के पुराने प्रेसिडेंट की पत्नी का फ़ोन आया, जून के स्वास्थ्य के बारे में पूछ रही थी। यहाँ सभी लोग बहुत ध्यान रखते हैं। पड़ोसी भी किसी भी तरह की मदद के लिए फ़ोन करके कह चुके हैं। शाम को नन्हा व सोनू भी आ गये, उनसे रहा नहीं गया। नूना को लग रहा है, डायरी लेखन की कला जैसे भूल ही गई है, न ही लेख अच्छा आ रहा है, न ही विचार ठीक से व्यवस्थित हो रहे हैं। आज ध्यान भी नहीं किया, सारा दिन कैसे बीत गया, पता ही नहीं चला। 


Tuesday, April 14, 2026

संविधान निर्माता-अंबेडकर

संविधान निर्माता-अंबेडकर



कल दोपहर नन्हा और सोनू असम की यात्रा समाप्त होने से तीन दिन पहले ही वापस आ गये। कल शाम सोनू की कोविड की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है, नन्हे को भी सिर में दर्द था। पूरी दुनिया में कोरोना का नया वेरियेंट ओमिक्रॉन बुरी तरह फैल रहा है। प्रतिदिन लाखों लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। अब दस दिन तक पुन: उन्हें बिना मेड और कुक के रहना होगा। आज सुबह नींद देर से खुली।सुबह पानी पीकर, तैयार होने के लिए जल्दी में सीढ़ियों से ऊपर आते समय नूना की चप्पल अटक गई और बायें घुटने में हल्की चोट लग गई। जून ने बहुत अच्छी तरह से देखभाल की। दवा लगाकर सेंक किया, पहले गरम, फिर ठंडा। हल्दी वाला दूध पीने को दिया। दस-ग्यारह बजे तक दर्द पूरी तरह चला गया। उसके बाद वे टहलने गये। नन्हे और सोनू से बात की। नन्हे को शिकायत है कि नूना हर (कर्म) बात को कर्म फल के रूप में देखती है। वह अलग तरह से सोचता है। उसके अनुसार जो भी किसके साथ होता है, वह किसी भी तरह से कर्मों का फल नहीं होता, वह स्वतंत्र होता है।इसका अर्थ है कि वह अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लेना नहीं चाहता, ख़ैर, सोच अपनी-अपनी, ख़्याल अपना अपना! शाम को वे सूप, फल, पॉपकॉर्न, गज़क आदि लेकर उनसे  मिलने गये। 

आज सुबह नन्हे को एक संदेश भेजा। जो घटित हो चुका है, उसे भाग्य मान लेना ही समझदारी है, कार्य-कारण का नियम वहाँ लगाकर सिवा पछतावे के और क्या हो सकता है। आगे जो करना है, उसके प्रति ही सचेत रहा जा सकता है। जीवन कितने पाठ किस तरह से पढ़ाता है, कोई नहीं जानता।उन्हें हर वक्त सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।आज सुबह नाश्ते में दही-चिवड़ा और गुड़ खाया। शाम को लंबी ड्राइव के बाद वे थित्ताहल्ली में सूर्यास्त देखने गये और वहीं कुछ देर टहलते रहे। नन्हा और सोनू अब काफ़ी ठीक हैं, बुख़ार भी नहीं है। सभी भाई-बहनों से बात की, सभी किसी न किसी रूप में मकर संक्रांति का उत्सव मना रहे हैं। 


प्रातः भ्रमण झील किनारे हुआ। वहाँ एक श्वेत श्वान ने उनका मन मोह लिया। देखते ही दौड़ कर आया, साथ-साथ चलता रहा और अंत में दूर तक छोड़ने भी आया। पहली बार मिलने पर भी कोई इस तरह कैसे परिचित बन जाता है, शायद वह कभी किसी का पालतू रहा होगा, उन्हीं की छवि उसे उनमें दिखाई दी होगी।दोपहर बाद वे नापा के एक निवासी के बगीचे से मीठे अमरूद लाए, वह बहुत ही सज्जन व्यक्ति प्रतीत होते हैं। आज सुबह जून कमेटी के कुछ सदस्यों के साथ उनके घर भी गये थे, यह जानने कि वह अभी तक असोसिएशन के सदस्य क्यों नहीं बने हैं। छोटे भाई ने बताया, मुंबई में मास्क न लगाने पर उसे दो सौ रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। नन्हे व सोनू के लिए नाश्ता व दोपहर का खाना पोर्टर से भेजा। छोटी भतीजी को भी कोविड संक्रमण हो गया है, वह ख़ुद डाक्टर है, पर डाक्टर बहुत संख्या में प्रभावित हो रहे हैं। 


आज उन्हें कोविड की बूस्टर वैक्सीन लग गई। दिन भर सब कुछ ठीक रहा पर शाम से उसके पैरों में थोड़ा सा दर्द है। पाँच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। पापा जी आजकल हनुमान प्रसाद पोद्दार की पुस्तक पढ़ रहे हैं। 


आज भी वैक्सीन का थोड़ा-बहुत असर दिन भर बना रहा, मन में उत्साह नहीं था और न ही स्पष्टता, जो सदा ही उसके मन में रहती है। नन्हा और सोनू भी आजकल इतने उत्साहित नहीं दिखते। मंझले भाई से बात हुई। कल कनाडा में भीषण तूफ़ान आया। 


आज सुबह आकाश में पूर्णिमा के चंद्रमा की शोभा निहारी। नाश्ते में जून ने दोसा बनाया।नन्हे के यहाँ भी भिजवाया। सोनू से बात हुई, उसके भाई के विवाह की बात चल रही है। शाम को वे एक तमिलियन वरिष्ठ निवासी के यहाँ गये, जिनका बड़ा सा घर “मायोन कुटीर’ बहुत शानदार है। यह घर तमिलनाडु के कराईकुडी क्षेत्र में स्थित चेट्टियार समुदाय की 19वीं सदी की चेट्टिनाड की वास्तुकला का एक सुंदर नमूना है।यह घर आकार में विशाल है और दो मंजिला है।हवा और रोशनी के लिए मध्य में बड़ा सा आंगन (थिन्नई) है, जो पारंपरिक तमिल वास्तुकला का हिस्सा है।फ़र्श पर रंगीन अथांगुडी टाइल्स लगी हैं  और दीवारों पर सुंदर फूलों के डिजाइन वाला वाल पेपर लगा है। सीढ़ियाँ टीक वुड की बनी हैं। घर के केंद्र में बना मंदिर बहुत आकर्षक है। हरेक वस्तु बहुत ही शोभनीय है और चुन-चुन कर लगायी गई है। दीवार में फिट हो जाने वाली लकड़ी की एक मेज़ भी वहाँ था।मकान मालिक सीए हैं उनकी धर्मपत्नी संगीत शिक्षिका हैं। घर पर भी कर्नाटक संगीत सिखाती हैं। पहली मंज़िल पर एक बड़ा सा संगीत कक्ष है। उनकी एकमात्र पुत्री बॉस्टन में पढ़ रही है। 


आज दोपहर लेखन कार्य के लिए पर्याप्त समय मिला। भीमराव अंबेडकर के जीवन के बारे में सुना।उन्हें अपनी जाति के कारण कितने अपमान व कष्ट सहने पड़े थे।उन्होंने भारत के संविधान में सभी को समानता का अधिकार दिलाया।कितना आश्चर्य है कि सभी को अपने आश्रय में स्थान देने वाला भारत अपने ही कुछ नागरिकों को अपना नहीं मानता था। उत्तर प्रदेश का चुनाव बहुत रोचक होता जा रहा है। पापा जी से रोज़ की तरह आज भी अध्यात्म चर्चा हुई। 


Monday, April 13, 2026

टैगोर की आत्मकथा

टैगोर की आत्मकथा 

आज ही नूना को कत्थई रंग की यह डायरी मिली है।स्टेट बैंक के ब्रांच मैनेजर तथा एक मुख्य अधिकारी आये थे, उन्होंने जून को नयी डायरी तथा कैलेंडर दिये। सुबह सात बजे केक व उपहार लेकर नन्हा और सोनू भी आ गये। सभी के फ़ोन भी आये।आज वर्षों बाद गुरुजी के भक्तों के साथ गुरुपूजा का आयोजन किया। बहुत आनंद आया। गुरुजी आजकल अमेरिका में हैं, पर वह हर उस जगह हैं जहाँ लोग उन्हें याद करते हैं। ‘सौदमिनी’ सोसाइटी से एक वरिष्ठ शिक्षक आये थे, उनकी आवाज़ बहुत अच्छी है। उन्होंने पूजा करने के बाद अनेक सुंदर भजन गाये।जून ने प्रसाद में खिचड़ी, हलुआ तथा रायता बना दिया था। कुल मिलाकर उनके विवाह की सैंतीसवीं वर्षगाँठ बहुत अच्छी तरह से मनायी । छोटी बहन ने बताया, उनके यहाँ एओएल की संगीत की महफ़िल जमती है और फ़ॉलो अप भी होता है। जीवन एक उपहार है, गुरुजी की यह बात आज कितनी सत्य प्रतीत हो रही है। भीतर जो भी महसूस होता है, उसे कोई शब्दों में कह पाये तो काव्य का जन्म होता है। कविता पहले भीतर जन्मती है फिर बाहर प्रकटती है।नूना को एक कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का अवसर मिला। 

आज सुबह वह उठी तो मन गुरुजी के लिए कृतज्ञता से भरा था, एक कविता सहज ही मूर्त हो गयी। शाम को एक बार फिर उसे अहसास हुआ, कितना समय मोबाइल पर चला जाता है, इसका उसे भान  ही नहीं रहता।मोबाइल किनारे कर आज उसने गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की आत्मकथा पढ़ने के लिए उठायी है। टैगोर एक भक्त कवि थे। वे कलाकार, समाजसेवी, शिक्षाविद् और भी न जाने क्या-क्या थे, पर सबसे पहले वह अपने को कवि मानते हैं। कवि होने का अर्थ है चीजों के पार जाकर कुछ ऐसा देख लेना जो सामान्य लोग नहीं देख पाते।आर्यसमाज के स्वामी परमानंद जी का एक व्याख्यान भी सुना, वह भी बहुत सरल शब्दों में गूढ़ बातें समझाते हैं। 
आज जून को जल्दी जाना था, उनकी कमेटी आज वृक्षारोपण कर रही है। बाद में नूना भी उसमें सम्मिलित हुई, उन्होंने हरसिंगार, अमलतास, प्लूमेरिया और भी कई तरह के फूलों के पेड़ लगाये।वहाँ एक सरदारनी से मुलाक़ात हुई, जो मैराथन दौड़ चुकी हैं। शाम को पापाजी से बात हुई, वह आजकल जे कृष्णामूर्ति की पुस्तक पढ़ रहे हैं।यह भी कहा, उन्हें संस्कृत पढ़ने में दिक्क्त होती है, क्योंकि कभी स्कूल में संस्कृत नहीं पढ़ी। नन्हा और सोनू असम गये हैं। कल वे लोग पासीघाट जाएँगे,जो सियांग नदी के किनारे बसा अरुणाचल प्रदेश का सबसे पुराना शहर है। नूना को वहाँ के हरे-भरे पहाड़, झूलते पुल और पहाड़ी नदियाँ याद आ गयीं, कुछ वर्ष पहले वे दो दिन के लिए वहाँ गये थे। 
सुबह वे दोनों गुलकमाले झील पर गये।आकाश पर बादल थे, हल्का धुँधलका था। वातावरण बहुत शांत था। उन्होंने देखा, दूर पानी में तैरती एक गोल नाव पर टॉर्च की रोशनी हो रही है, शायद नाविक मछली पकड़ रहे थे। लगभग सात बजे सूर्यदेव के दर्शन हुए। पंछी भी आकाश में उड़ान भरने लगे। दो नावें और आ गयीं और झील के उस पार मछली ख़रीदारों की भीड़ बढ़ने लगी। वे घर लौटे तो माली आ चुका था, नूना के अगले ढाई घंटे बगीचे में काम करवाते बीते। तब तक जून ने नाश्ता बना दिया। बोगनवेलिया के फूल अपने शबाब पर हैं और गुलाब का एक पौधा भी। रात की रानी फूलों से एक बार फिर भर गई है। दोपहर को गुरुनानक देव पर एक फ़िल्म देखी, उन्होंने अपने जीवन में २५ हज़ार मील की यात्रा पैदल की थी। उनके दो शिष्य थे, पर फ़िल्म में मरदाना को ही दिखाया गया है।  आज गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती है, उनके बारे में भी वे अधिक नहीं जानते।स्वामी रामकृष्ण और माँ शारदा के कुछ अनोखे वचन पढ़े, श्री श्री तथा ओशो के कुछ वाक्य भी। भगवद् गीता के चंद श्लोकों के साथ टैगोर की पुस्तक का एक पन्ना भी ! कितना अच्छा गद्य भी लिखते हैं वह, कविता उनकी श्वास-श्वास में बसी हुई थी। उनके लिखे ‘गोरा’ उपन्यास पर आधारित डी डी -१ का धारावाहिक देखना शुरू किया है मोबाइल पर। आज बहनोई के जन्मदिन पर शुभकामना के लिए एक कविता लिखी।अगले दो महीनों में वह एक रेस्तराँ खोलने जा रहे हैं।
आज सुबह का ध्यान गहरा था। बाद में पार्क-१ गयी, सफ़ाई चल रही थी। शाम को वे निकट के गाँव तक टहलने गये, भुट्टे और टमाटर के खेत देखे।इस बार मकर संक्रांति पर 'आजादी का अमृत महोत्सव' के अन्तर्गत आयुष मंत्रालय, ७५ लाख से अधिक लोगों के लिए सूर्य नमस्कार का वर्चुअल आयोजन करने वाला है। भारत का उनके लिए क्या अर्थ है, वे इसके लिए क्या कर  रहे हैं और क्या कर सकते हैं ? इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए उसे गणतंत्र दिवस के लिए एक कविता लिखनी है। नापा की पहली इ-पत्रिका कल या परसों प्रकाशित होने के लिए तैयार है। जून ने भी काफ़ी काम किया है इसके लिए, उनका विचार अब साकार होने जा रहा है।