संविधान निर्माता-अंबेडकर
कल दोपहर नन्हा और सोनू असम की यात्रा समाप्त होने से तीन दिन पहले ही वापस आ गये। कल शाम सोनू की कोविड की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है, नन्हे को भी सिर में दर्द था। पूरी दुनिया में कोरोना का नया वेरियेंट ओमिक्रॉन बुरी तरह फैल रहा है। प्रतिदिन लाखों लोग इससे संक्रमित हो रहे हैं। अब दस दिन तक पुन: उन्हें बिना मेड और कुक के रहना होगा। आज सुबह नींद देर से खुली।सुबह पानी पीकर, तैयार होने के लिए जल्दी में सीढ़ियों से ऊपर आते समय नूना की चप्पल अटक गई और बायें घुटने में हल्की चोट लग गई। जून ने बहुत अच्छी तरह से देखभाल की। दवा लगाकर सेंक किया, पहले गरम, फिर ठंडा। हल्दी वाला दूध पीने को दिया। दस-ग्यारह बजे तक दर्द पूरी तरह चला गया। उसके बाद वे टहलने गये। नन्हे और सोनू से बात की। नन्हे को शिकायत है कि नूना हर (कर्म) बात को कर्म फल के रूप में देखती है। वह अलग तरह से सोचता है। उसके अनुसार जो भी किसके साथ होता है, वह किसी भी तरह से कर्मों का फल नहीं होता, वह स्वतंत्र होता है।इसका अर्थ है कि वह अपने कर्मों की ज़िम्मेदारी लेना नहीं चाहता, ख़ैर, सोच अपनी-अपनी, ख़्याल अपना अपना! शाम को वे सूप, फल, पॉपकॉर्न, गज़क आदि लेकर उनसे मिलने गये।
आज सुबह नन्हे को एक संदेश भेजा। जो घटित हो चुका है, उसे भाग्य मान लेना ही समझदारी है, कार्य-कारण का नियम वहाँ लगाकर सिवा पछतावे के और क्या हो सकता है। आगे जो करना है, उसके प्रति ही सचेत रहा जा सकता है। जीवन कितने पाठ किस तरह से पढ़ाता है, कोई नहीं जानता।उन्हें हर वक्त सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए।आज सुबह नाश्ते में दही-चिवड़ा और गुड़ खाया। शाम को लंबी ड्राइव के बाद वे थित्ताहल्ली में सूर्यास्त देखने गये और वहीं कुछ देर टहलते रहे। नन्हा और सोनू अब काफ़ी ठीक हैं, बुख़ार भी नहीं है। सभी भाई-बहनों से बात की, सभी किसी न किसी रूप में मकर संक्रांति का उत्सव मना रहे हैं।
प्रातः भ्रमण झील किनारे हुआ। वहाँ एक श्वेत श्वान ने उनका मन मोह लिया। देखते ही दौड़ कर आया, साथ-साथ चलता रहा और अंत में दूर तक छोड़ने भी आया। पहली बार मिलने पर भी कोई इस तरह कैसे परिचित बन जाता है, शायद वह कभी किसी का पालतू रहा होगा, उन्हीं की छवि उसे उनमें दिखाई दी होगी।दोपहर बाद वे नापा के एक निवासी के बगीचे से मीठे अमरूद लाए, वह बहुत ही सज्जन व्यक्ति प्रतीत होते हैं। आज सुबह जून कमेटी के कुछ सदस्यों के साथ उनके घर भी गये थे, यह जानने कि वह अभी तक असोसिएशन के सदस्य क्यों नहीं बने हैं। छोटे भाई ने बताया, मुंबई में मास्क न लगाने पर उसे दो सौ रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। नन्हे व सोनू के लिए नाश्ता व दोपहर का खाना पोर्टर से भेजा। छोटी भतीजी को भी कोविड संक्रमण हो गया है, वह ख़ुद डाक्टर है, पर डाक्टर बहुत संख्या में प्रभावित हो रहे हैं।
आज उन्हें कोविड की बूस्टर वैक्सीन लग गई। दिन भर सब कुछ ठीक रहा पर शाम से उसके पैरों में थोड़ा सा दर्द है। पाँच राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, राजनीतिक उठापटक शुरू हो गई है। पापा जी आजकल हनुमान प्रसाद पोद्दार की पुस्तक पढ़ रहे हैं।
आज भी वैक्सीन का थोड़ा-बहुत असर दिन भर बना रहा, मन में उत्साह नहीं था और न ही स्पष्टता, जो सदा ही उसके मन में रहती है। नन्हा और सोनू भी आजकल इतने उत्साहित नहीं दिखते। मंझले भाई से बात हुई। कल कनाडा में भीषण तूफ़ान आया।
आज सुबह आकाश में पूर्णिमा के चंद्रमा की शोभा निहारी। नाश्ते में जून ने दोसा बनाया।नन्हे के यहाँ भी भिजवाया। सोनू से बात हुई, उसके भाई के विवाह की बात चल रही है। शाम को वे एक तमिलियन वरिष्ठ निवासी के यहाँ गये, जिनका बड़ा सा घर “मायोन कुटीर’ बहुत शानदार है। यह घर तमिलनाडु के कराईकुडी क्षेत्र में स्थित चेट्टियार समुदाय की 19वीं सदी की चेट्टिनाड की वास्तुकला का एक सुंदर नमूना है।यह घर आकार में विशाल है और दो मंजिला है।हवा और रोशनी के लिए मध्य में बड़ा सा आंगन (थिन्नई) है, जो पारंपरिक तमिल वास्तुकला का हिस्सा है।फ़र्श पर रंगीन अथांगुडी टाइल्स लगी हैं और दीवारों पर सुंदर फूलों के डिजाइन वाला वाल पेपर लगा है। सीढ़ियाँ टीक वुड की बनी हैं। घर के केंद्र में बना मंदिर बहुत आकर्षक है। हरेक वस्तु बहुत ही शोभनीय है और चुन-चुन कर लगायी गई है। दीवार में फिट हो जाने वाली लकड़ी की एक मेज़ भी वहाँ था।मकान मालिक सीए हैं उनकी धर्मपत्नी संगीत शिक्षिका हैं। घर पर भी कर्नाटक संगीत सिखाती हैं। पहली मंज़िल पर एक बड़ा सा संगीत कक्ष है। उनकी एकमात्र पुत्री बॉस्टन में पढ़ रही है।
आज दोपहर लेखन कार्य के लिए पर्याप्त समय मिला। भीमराव अंबेडकर के जीवन के बारे में सुना।उन्हें अपनी जाति के कारण कितने अपमान व कष्ट सहने पड़े थे।उन्होंने भारत के संविधान में सभी को समानता का अधिकार दिलाया।कितना आश्चर्य है कि सभी को अपने आश्रय में स्थान देने वाला भारत अपने ही कुछ नागरिकों को अपना नहीं मानता था। उत्तर प्रदेश का चुनाव बहुत रोचक होता जा रहा है। पापा जी से रोज़ की तरह आज भी अध्यात्म चर्चा हुई।

