Tuesday, July 14, 2026

शरत् चन्द्र का उपन्यास "दत्ता'

शरत् चन्द्र का उपन्यास "दत्ता'

अभी-अभी नन्हे से बात हुई, वे लोग अस्पताल से वापस घर जा रहे थे, सोनू का आपरेशन ठीक हो गया है। आज सुबह ही वे लोग अस्पताल गये थे, छोटा सा ही ऑपरेशन था।परसों वे लोग आयेंगे और कल नूना और जून उनसे मिलने जाएँगे। शाम को एक स्थानीय मित्र दम्पत्ति मिलने आये, उनके साथ ‘केरल स्टोरी’ देखने का कार्यक्रम बन गया।इस फ़िल्म के पक्ष और विपक्ष में कितनी ही बातें पिछले दिनों उन्होंने सुनी हैं, अब देखकर स्वयं ही निर्णय लेना उचित होगा। बातों-बातों में उन्होंने बताया,विदेश से उनकी बहन आने वाली हैं, जिन्हें बहुत अच्छी हिंदी आती है, उनसे भेंट करायेंगे।पापाजी से आध्यात्मिक चर्चा हुई। सुबह जून डेंटिस्ट के पास गये थे, वापसी में नर्सरी से वही हरे पुष्प वाला सुंदर पौधा लाए, जिसने उस दिन मन मोह लिया था। 

सुबह वे सोनू से मिलने गये थे।वह बहुत हिम्मती है, काफ़ी ठीक लग रही थी।आज शाम का भोजन जल्दी हो गया, सो सोने से पूर्व पर्याप्त समय मिल गया है, वह ऑडिबल पर बंगला भाषा के सुप्रसिद्ध लेखक शरत चन्द्र चटर्जी की पुस्तक ‘दत्ता’ का हिंदी अनुवाद सुन रही है। बहुत प्रभावशाली पुस्तक है।अभी-अभी व्ह्टासऐप पर आये एक संदेश से पता चला, मृणाल ज्योति की अध्यक्षा को असम के एक छोटे क़स्बे में स्कूल की शाखा खुलने के उपलक्ष्य में हुए कार्यक्रम में कंधे में चोट लग गई है। उसने फ़ोन करके उनका हाल पूछा, डाक्टर ने कुछ दिन आराम करने के लिए कहा है।  

आज शाम को बड़ा भांजा आया, साथ में उसकी पत्नी, छोटी साली और सासु माँ भी थीं। शाम की चाय सबने साथ पी फिर रात्रि भोजन भी। नन्हा अपने कुक से पालक-पनीर व राजमा बनवाकर लाया था, शेष भोजन नूना ने बनाया। लच्छेदार पराँठे भी नन्हे ने बनाये, उसके लिए आटे के घी लगे विशेष पेड़े बनाकर लाया था।कुल मिलाकर पार्टी बहुत अच्छी रही। रात को ही वे सब लौट गये। जून ने उसके साथ मिलकर रसोईघर पूरी तरह साफ़ करवा दिया। सुबह की चाय बनाते समय उन्हें किचन स्वच्छ चाहिए। दही लगाने व बादाम भिगोने का काम भी उन्होंने अपने ज़िम्मे ले लिया है। 

आज सुबह नाश्ते के बाद वे नन्हे के घर गये और शाम सात बजे घर लौटे। लंच के बाद नन्हा उन्हें एक विशाल, सुंदर थियेटर में ‘माउस ट्रैप’ नाटक दिखाने ले गया, जिसकी टिकटें उसने पहले ही ख़रीद ली थीं।अगाथा क्रिस्टी के सत्तर साल पुराने मर्डर-मिस्ट्री नाटक का हिन्दी रूपातंरण ! बहुत अच्छा था।कहानी पूरे समय बाँधे रखती है।नाटक के पात्र हैं, बर्फ में घिरे एक गेस्टहाउस में सात अजनबी व्यक्ति और एक जासूस, जिसे एक हत्यारे का पता लगाना है।  आज पापाजी से बात नहीं हो पायी। छोटा भाई आया हुआ है, इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही होगी, भाभी एक हफ़्ते के लिए बिटिया के साथ एडिनबर्ग गई है। 

आज सुबह मौसम अति अनुकूल था, वे टहलने गये तो हल्की सुवास हवा में भरी थी। आम के बगीचे में एक व्यक्ति रात को हुई वर्षा के कारण नीचे गिरे आम उठा रहा था। बहुत दिनों बाद नाश्ते में जून ने दलिया बनाने को कहा।आज दिन में मई महीने का नवनीत का अंक पढ़ना आरंभ किया है। इस बार गावों की बदलती हुई तस्वीर को मुख्य विषय बनाया गया है। गाँव जो शहर बनाना चाहते हैं, पर बन नहीं पाते। किसानों को श्रम करने का अभ्यास नहीं रह गया है, बैलों का भी कोई सम्मान नहीं रह गया है। संध्या के समय सोमनहल्ली की तरफ़ गये, पर रास्ता कीचड़ से भरा था, वे पास वाले लेआउट में ही टहलते रहे। गुलमोहर व अजार के अनेक वृक्ष लाल व बैंगनी फूलों से भरे हुए थे। इस समय रात्रि के आठ बजे हैं। पिछले आधे घंटे से वर्षा हो रही है।आँधी-तूफ़ान व तेज वर्षा के साथ कुछ ओले भी गिरे। वह कुछ देर बालकनी में टहलते हुए ‘हॉट स्टार’ पर वैष्णो देवी की कथा सुनती रही। त्रिकूट पर्वत की गुफा में रहकर उनकी तपस्या और उनके अनेक कृत्यों पर आधारित कथा बहुत रोचक और अच्छी लगी। वर्षा अब थम गई है। मोदी जी जी-७ की बैठक में भाग लेने जापान गये हैं। आस्ट्रेलिया में क्वार्ड मीटिंग है, वह फ़िजी भी जाएँगे, पापुआगिनी जहाँ की राजधानी है। बाईडेन कहते हैं, उन्हें मोदी जी की लोकप्रियता से रश्क होता है। 

कल रात वह वैष्णो देवी की कथा सुनकर सोयी थी। रात को स्वप्न में देवी का नन्हा रूप अपनी हथेली में देखा। जो पहले प्रकट होती हैं फिर कुछ समय बाद स्वयं ही अंतर्ध्यान हो जाती हैं। उनके बचपन की कथा बहुत सुंदर है। सुबह देखा, रात की आँधी-वर्षा के कारण कुछ गमले गिरे हुए थे। छत पर रखी कुर्सियों के कुशन भी भीग गये थे। आज दोपहर “यह मेरी फ़ैमिली’ का एक अंक देखा।इसमें नब्बे के दशक की रोचक कहानी है। शाम को वे टहलने गये तो आकाश पर बादलों के सुंदर रूप व आकार बन गये थे, मन विस्मय से भर गया, अनायास ही कुछ तस्वीरें उतारीं।आज मोदी जी द्वारा आस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों को दिया जाना वाला संबोधन सुना, भारत के प्रति कितना गौरव है उनके मन में। 

आज उन्होंने ‘द केरला स्टोरी’ देख ली। तीन लड़कियों का धर्म  परिवर्तन करके आईएसआईएस में जाने के लिए प्रेरित करने के हथकंडों के बारे में यह फ़िल्म बनायी गई है। कट्टर पंथियों की हिंसात्मक प्रवृत्तियों को दर्शाती यह फ़िल्म इस्लाम के एक भयानक रूप को दिखाती है। पता नहीं इसमें कितनी कल्पना है और कितनी हक़ीक़त। एक परिचित मित्र दंपत्ति भी उनके साथ गये थे। उसके बाद दोपहर का भोजन भी बाहर हुआ, सांते रेस्तराँ में। वापस आकर कुछ देर और बैठकर उन्होंने बातचीत की, कभी भविष्य में वे साथ-साथ कश्मीर जा सकते हैं, ऐसा भी विचार हुआ। शाम को नन्हे के यहाँ गये, उनके सोफ़े के लिए नये कुशन बनवाये थे, उन्हें देने और सोनू का हालचाल भी लेना था। पापा जी से बात हुई, बड़े भाई उनके पास आये हुए हैं। पता चला, कल रात आँधी-तूफ़ान के बाद बिजली चली गयी थी, जो आज दोपहर बाद तीन बजे आयी। मौसम की मार गाँव हो या शहर, अतीत हो या वर्तमान, हर जगह, हर काल में झेलनी पड़ती है।


Saturday, July 11, 2026

घड़ियों का घर

घड़ियों का घर 


आज नन्हे ने उनके लिए सुंदर सा एक घड़ी केस भेजा है, जैसे पहले एक बार आभूषण रखने का गुलाबी केस भेजा था। जैसे-तैसे किसी भी डब्बे में वे अपना समान रखें, यह उसे व सोनू को पसंद नहीं। शाम को उससे बात हुई तो तो वे लोग सोनू के माँ-पिता के लिए घर देखने की बात कर रहे थे। असम वाला उनका घर काफ़ी पुराना हो गया है। उस तीन मंज़िल घर में वे सबसे ऊपर रहते हैं, मंझले भाई बीच में। छोटे भाई के न रहने पर उनके पुत्र ने नीचे वाले घर को नया रूप दे दिया है।

कल जून के साथ उन्हें अपने फ़्लैट की इंटीरियर सज्जा के लिए लकड़ी के काम के डिज़ाइन देखने काफ़ी दूर जाना है। वे पूरी तरह से दुनियादारी में उलझते जा रहे हैं। इसी हफ़्ते शनिवार को आँख का आपरेशन है, और आजकल इसमें आधे घंटे से भी कम समय लगता है। कुल तीन घंटों में वे घर वापस आ सकते हैं। शाम को नापा में फूलों की तस्वीरें उतारीं, आजकल चारों ओर फूलों की बहार है।पहली बार क्लब के जाकुज़ी का प्रयोग किया। उसका क्या महत्व है, पता नहीं, पर अच्छा लगा। अब क्लब का काफ़ी भाग बन गया है और उसका बाहरी रूप लॉन आदि भी बहुत सुंदर लग रहा है। जून आज उस सोसाइटी में भी एक तीन कमरों वाले घर की अंतर सज्जा देख कर आये, जहाँ उनका फ़्लैट है। 

आज का दिन ‘लिव-स्पेस’ के नाम रहा। वे सुबह टहलकर जल्दी लौट आये ताकि सब काम ख़त्म करके साढ़े नौ बजे तक घर से रवाना हो जायें। दोपहर का भोजन बनाकर साथ ले गये थे। एक युवा महिला ने उन्हें डिजाइन व मेटीरियल आदि दिखाये, लगभग पौने चार घंटे वे वहाँ रहे, आने-जाने में तीन घंटे लग गये। कुल मिलकर सौदा अच्छा रहा, कुछ पैसे देकर उन्हें बुक कर दिया है। अब उनकी टीम साइट पर जाकर देखेगी व डिज़ाइन फ़ाइनल करेगी। यह कंपनी २०१४ में ही बनी है, पर बहुत प्रसिद्ध हो गई है। नन्हे को भी उनका काम पसंद आया, वह आज दिल्ली गया है।आज उनके नये पड़ोसी आये थे, अपने पुत्र के उपनयन संस्कार का निमंत्रण देने, पहली मई को है, जून जाएँगे। 

आज गुरुजी को सुना। कर्मों के बारे में किसी ने पूछा तो उन्होंने कहा, आज के भोजन के साथ पहले का बना अचार व दही भी तो खाया जाता है। आगे वह कहते हैं, जो पथ पर आ गये हैं, उनके पिछले कर्म धुल ही गये हैं। जब तक प्रभु नहीं मिले तभी तक माँग है और जब तक माँग है तब तक प्रभु नहीं मिलते। परसों से एओएल का पाँच दिनों का योगपर्व आरंभ हो रहा है। 

आज वह महीनों या वर्षों बाद तरण ताल में उतरी। अच्छा लगा, पानी ज़्यादा गहरा नहीं है, न ही ठंडा था। बहुत सारे बच्चे थे। जून बड़े आराम से तैर रहे थे। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, गुरुजी दुबई जा रहे हैं, परसों वह उनसे मिलने जाएगी, वह सभी शिक्षकों से मिलेंगे। जून आज ढेर सारे फल लाए, ढाई हज़ार के, आम, ख़रबूज़ा, सेब, अंगूर आदि। सुबह गुरुजी का एक पुराना वीडियो देखा-सुना, उस समय कितना अच्छा लगा था पर इस समय कुछ याद नहीं आ रहा। 

सुबह वाणी के दोष को अनुभव किया, पर अभी-अभी किसी ने कहा, पुनः वह मत दोहराओ। जैसे आकाश पर बादल आकर चले जाते हैं वैसे ही दोष आत्मा पर चिपकते नहीं हैं, आकर चले जाते हैं, यदि उनको साक्षी भाव से देखा जाये। आज एक पुरानी सखी को उसकी शादी की सालगिरह पर शुभकामना देने के लिए फ़ोन किया, पता चला दो दिन पहले उसकी सासु माँ का देहांत हो गया है।

आज दो बार ध्यान किया, कितनी अनोखी स्तब्धता का अनुभव होता है ध्यान में, जो बाक़ी समय वे भूल जाते हैं। कल सुबह अस्पताल जाना है। दायीं आँख में कैट्रेक का ऑपरेशन होना है। अभी-अभी नन्हे से बात हुई, उसने बताया, एक जोड़ी धुले कपड़े लेकर जाना है।उन्हें पहनकर ऑपरेशन थियेटर में जाना होगा।

आज पूरे अठारह दिनों के बाद नूना ने डायरी खोली है। उस दिन वे अस्पताल गये। नन्हा भी वहाँ आ गया था। सर्जरी के बाद उसके घर चले गये। शाम को अपने घर लौटे। कई सावधानियाँ बरतनी थीं और समय-समय पर आँख में दवा डालनी थी। तब से रसोई का काम जून सँभाल रहे हैं। एक हफ़्ते बाद दूसरी आँख की सर्जरी हुई। धीरे-धीरे दृष्टि सामान्य हो रही है। इस बीच ऑडिबल पर काफ़ी कुछ सुना, रेडियो पर गीत व ग़ज़लें भी सुनीं। ध्यान किया। कुल मिलाकर समय का सदुपयोग किया। अभी सोलह दिन दवा और डालनी है, उसके बाद ही दिनचर्या पूरी तरह से सामान्य मानी जाएगी। आज फ़ेसबुक पर एक हरे रंग के पुष्प की तस्वीर डाली। इतने दिनों से ब्लॉग पर भी कुछ नहीं लिखा। कल से आरम्भ करना है। इस बीच कर्नाटक में विधान सभा के चुनाव हो गये, वे वोट डालने भी गये। अभी तक यह तय नहीं हुआ है मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? 

आज रात्रि भोजन के बाद  वे टहलने गये तो आकाश में संध्या की अंतिम लालिमा छायी थी। उसने झट एक चित्र में क़ैद कर लिया, मोबाइल पास में हो तो अनायास ही सुंदर दृश्य कैमरे में अंकित हो जाते हैं। एक जगह दो बिल्लियाँ स्कूटर की सीट पर बैठी थीं, उनका चित्र वे जब भी कभी देखेंगे, वह शाम याद हो आएगी। वापस आकर स्वास्थ्य संबंधी एक रोचक टेड टॉक सुना।अब वह एओएल का अनुवाद कार्य भी ले सकती है। पापाजी ने बहुत दिन बाद फ़ेसबुक पर उसकी कविता पढ़कर ख़ुशी ज़ाहिर की। सुबह वे चेकअप के लिए नेत्रालय भी गये थे, अब तीन महीने बाद जाना है।


Wednesday, July 8, 2026

माई

माई 


आज सुबह भी नूना ने सूर्योदय की सुंदर तस्वीरें उतारीं। वापस आकर वे प्रतिदिन की तरह छत पर गये, हवा ठंडी थी, पर एक घंटे बाद धूप निकल आयी थी। दरवाज़े पर नयी घंटी लगी है, उसकी आवाज़ ऊपर तक नहीं गई, नीचे आये तो देखा, नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी।उसने ध्यान दिया, आजकल नाश्ता, लंच, डिनर सब कुछ गाय के दूध से बने मक्खन या घी से ही बन जाता है, नंदिनी दूध इस हिसाब से बहुत शुद्ध है।शाम को टहलते समय इसरो के एक भूतपूर्व अधिकारी व उनकी पत्नी से मिले, कुछ देर बातचीत होती रही।उन्होंने जून को सोसाइटी के नये बने तरणताल में तैरने आने के लिये कहा है। कल उन्हें ख़ाली पड़े उस फ़्लैट में भी जाना है, इंटीरियर कराने की बात करने के लिए दो बढ़ई बुलाये हैं। घर बिक नहीं रहा है, इसलिए किराए पर देने की बात मन में आई है। जून को व्यस्त रहने के लिए एक रोचक काम भी मिल जाएगा। आजकल वह उत्साह से भरे रहते हैं । असम के एक पुराने परिचित यहाँ आये हुए हैं, उनसे मिलने के लिए वेगा मॉल जाने को भी तैयार हैं। जीवन ऐसे ही रंग बदलता रहता है। पापाजी से बात हुई, वह अपनी बात कहते रहे, सुनने में अब उन्हें थोड़ी मुश्किल होने लगी है। असमिया सखी से बात हुई, वह अपना घर बनवा रही है, आने वाली बाधाओं को ख़ुशी-ख़ुशी झेलते हुए।

अभी कुछ देर पहले नन्हे का फ़ोन आया।वह कल सुबह आएगा। जून की कार आज उस सोसाइटी के गैराज में खड़ी करते समय ख़ंबे से टकरा गई थी, जहाँ वह बढ़ई से मिलने गये थे। नन्हा उनकी गाड़ी ले जाएगा व अपनी छोड़ जाएगा। उसमें तीन सौ साठ डिग्री देखने वाला कैमरा लगवाना है जो चारों तरफ़ किसी भी वस्तु के निकट आने पर अलार्म बजा देगा। उसके बाद कार का डेंट भी ठीक करवाना है। नन्हे ने एक बार भी सीख नहीं दी कि गाड़ी ठीक से पार्क करनी चाहिए थी। दुर्घटना तो किसी से भी हो सकती है। दोनों बढ़ई अपना कोटेशन देंगे, जून उसमें से एक का चुनाव करेंगे। रात्रि भ्रमण के समय उन्होंने एक बच्चे के साथ कुछ देर बैडमिंटन खेला, वह अकेला ही खेल रहा था। पापा-माँ दोनों जॉब में व्यस्त रहे होंगे। कामकाजी महिला के बच्चे (यदि अकेला बच्चा हो तो और भी )कितना अकेलापन महसूस करते होंगे। आज एओएल का एक अनुवाद कार्य आया है। अक्षय तृतीया के दिन बृहस्पति मेश राशि से मीन राशि में जा रहे हैं, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसी के बारे में है। आज उसने नैनी से ज्वार की रोटी बेलना सीखा। इतना कठिन भी नहीं है, उसे लगातार घुमाते रहना है, वरना बिना टूटे हाथ पर उठा नहीं सकते। 

अभी कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। आज एक नये रास्ते पर गये, कुछ नये घर देखे। हर घर अपनी तरह से बेहद सुंदर लग रहा था, अलग-अलग डिजाइन और अलग-अलग पौधों से सजा। श्वेत-श्याम रंग का एक बड़ा सा चितकबरा कुत्ता मिला, छोटी गाय के आकार का, उसका नाम उस दिन किसी ने बताया था, शायद डालमेटियन, या डालमेशियन । आज श्री अरविंद की पुस्तक ‘ऐस्से ऑन गीता’ पर एक व्याख्यान सुना, श्री अरविंद ने गीता को समझने की एक नयी दृष्टि दी है। शाम को पापाजी से काफ़ी देर तक बात हुई, वह ठीक से सुन भी पा रहे थे। उन्होंने कनाडा से आये छोटे नाती से हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया। जब वह छोटे थे और पाकिस्तान से भारत आये थे, वह उनकी उस समय की कहानी सुन रहा था।उनके दादाजी का मकान गाँव में था, वह खेती करते थे। चार भाइयों में बँटवारा हो गया। उनके पिताजी को खेती में रुचि नहीं थी, अपना थोड़ा-बहुत हिस्सा लेकर वह परिवार के साथ शहर आ गये। हकीम का काम सीखकर उसी को आजीविका का साधन बनाया। बाद में विभाजन हुआ और भारत आकर नये सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। आज वह आज दोपहर उसने कुछ देर ध्यान किया, उसे लगता है, प्रगति नहीं हो रही है, पर यह भी तो अहंकार को बढ़ाना ही होगा। ईश्वर ने जहाँ रखा है, वहीं रहकर मन को शुद्ध करना है। नन्हा आज सुबह नहीं आ पाया था, जून अपनी कार गैराज में दे आये हैं। परसों मिलेगी। 

आज ईद है। जून ने चार किलो इमाम पसंद आम मँगवाये हैं। दुकानदार अपनी गाड़ी से घर आकर दे गया, साथ में उसका छोटा सा बेटा भी बैठा था। निकट ही क़स्बे के बाज़ार में उसकी फलों की दुकान है, शायद एक से अधिक। पूरे मौसम वे उसी से आम लेते हैं। आज सुबह वाली नैनी नहीं आयी, उसके ससुर का देहांत हो गया, शायद हफ़्ता भर न आये।शाम वाली भी अगले हफ़्ते छुट्टी पर जा रही है।    

आज सुबह वह छत पर योग साधना करने गयी तो सोलर पैनल के नीचे पड़े बोगनवेलिया के फूलों को देखा, जो झर कर उड़ते हुए वहाँ इकट्ठे हो जाते हैं। प्रेरणा हुई कि दायीं आँख से देखे, उठने के बाद से कुछ भारी लग रही थी। फूलों का रंग मटमैला दिखा, फिर बायीं आँख से देखा तो हल्का गुलाबी। मोबाइल पर मोतियाबिंद के बारे में पढ़ा, सुना, जून को बताया तो उन्होंने नन्हे को बता दिया। नन्हे ने डाक्टर से मिलने का समय ले लिया और वे फल खाकर आँख के अस्पताल चले गये। नन्हा वहीं आ गया था। अगले शनिवार को सर्जरी होगी। मल्टी फ़ोकल लेंस लगाया जाएगा। परमात्मा की असीम कृपा है कि समस्या का पता चलते ही समाधान सम्मुख आ गया। नूना, नन्हे व जून का जितना शुक्रिया अदा करे वह कम है। दोनों उसका बहुत ख़्याल रखते हैं। शाम को पापाजी ने पूछा, आज फ़ेसबुक पर कुछ पोस्ट नहीं किया। सर्जरी के बाद तो कुछ दिन कंप्यूटर व मोबाइल से दूर रहना होगा, तब उन्हें बताना पड़ेगा। टीवी पर पहली बार आशा भोंसले द्वारा अभिनीत एक मार्मिक फ़िल्म देखी, ‘माई’ बहुत दिनों बाद पद्मिनी कोल्हापुरे को भी देखा। सासु माँ की कितनी बातें याद आ गयीं, जब उन्हें भी भूलने की बीमारी हो गई थी। 

आज सुबह लगभग दस बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। सोनू के माँ-पापा भी आये थे। दोपहर को बच्चों ने स्वादिष्ट ‘थाई भोजन’ बनाया। सभी को पसंद आया। सभी ने एक साथ बैठकर कुछ देर एक फ़िल्म देखी, फिर निकट की एक झील पर ड्रोन उड़ाने गये। वहाँ बहुत भीड़ थी, कुछ बच्चे और महिलाएँ झील के पानी में उतर गये थे। शायद वे पहली बार वहाँ आये थे। वे लोग एक दूसरी झील पर गये, जहाँ अपेक्षाकृत कम लोग थे, वातावरण में शांति थी। वहीं चटाई बिठाकर कुछ देर सब बैठे और साथ लायी चाय का आनंद लिया। शाम को लौटने में सवा छह बज गये थे। 


Wednesday, July 1, 2026

बालकनी में हरियाली

बालकनी में हरियाली


आज
वे सोसाइटी के एक प्रमुख व्यक्ति के घर गये थे, कल उनकी माँ का देहांत हो गया था। जाकर पता चला, हाल में ही उनके पिता की ओपन हार्ट सर्जरी हुई है, इसलिए उन्हें अभी तक यह समाचार नहीं दिया गया है।जीवन कितना विचित्र है ! नूना ने कविता की पुस्तक की समीक्षा लिख भेजी, उन्हें अच्छी लगी। उसकी तस्वीर सहित वह समीक्षा कवयित्री ने पोस्ट कर दी है, पापाजी ने भी पढ़ी। 

आज सुबह छह बजे वे एक मित्र दंपत्ति के साथ बैंगलुरु की एक प्रसिद्ध झील देखने गये। जहाँ पक्षियों के लिए एक विहार भी बनाया गया है। निकट स्थित एक अन्य झील  देखने के बाद ‘पूर्ण ब्रह्म महाराष्ट्रीयन रेस्तराँ’ में स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया। उसके बाद वे राजशाही युग का प्रतीक ‘बैंगलोर पैलेस’ देखने गये।जहाँ मैसूर के राज-परिवार के चित्र व उनका इतिहास दर्शाया गया है। 

सुबह वे टहलने गये तो आकाश में पूर्णिमा का चंद्रमा चमक रहा था। उसकी तस्वीरें बहुत सुंदर आयी हैं।आज शाम आश्रम में भीड़ बहुत थी, वे जल्दी लौट आये।एमटीआर में थट्टे इडली व अक्की रोटी खायी, अच्छी बनी थी।नयी मिट्टी व खाद और नये पौधे लगने के बाद आज नर्सरी से उनके अधिकतर गमले आ गये हैं। कल वे लोग बगीचे में शेष काम करने आयेंगे। आज एक शुभ समाचार मिला, बड़े भाई की बिटिया का रोका हो गया। ईश्वर से प्रार्थना है, उसके जीवन में सदा ख़ुशियाँ बनी रहें।   

जिस सागर से भाप बनकर बादल उड़ा था, बरस कर उसी में लौट जाता है। संस्कार मन पर छाते हैं, फिर बादलों की तरह विलीन हो जाते हैं, वे भी एक ऊर्जा ही हैं, ऊर्जा-ऊर्जा में विलीन हो जाती है।मन के भीतर ही वह ईश्वर मिलता है। गुरुजी की सुंदर वाणी मोबाइल पर सुनी। किसी ने उनसे कांवड़ियों के बारे में पूछा। वे मीलों पैदल चलते हैं, देह का श्रम होता है, मन में श्रद्धा के कारण प्रफ्फुलता होती है। उनके संकल्प पूर्ण होते हैं। आरक्षण के बारे में उन्होंने कहा, यह सदा के लिए नहीं रहना चाहिए। कल रात देर से सोये थे, सो सुबह भी देर हुई उठने में, साधना में केवल प्राणायाम किया, जिससे शरीर में तीनों दोष संतुलित होते हैं। 

आज नन्हे ने धातु के बने नये काले रंग के सुंदर गमले भेजे हैं। जून बालकनी में लगाने के लिए कृत्रिम घास भी ले आये हैं। दोनों जगहें बहुत सुंदर लग रही हैं। घर हरा-भरा हो गया है। वे एक नयी नर्सरी में गये, लकी माली ने नये गमलों में बिगुनिया, पितुनिया, जरेनियम, नाइन ओ क्लॉक के साथ और भी कई तरह के व कई रंगों के  फूलों के पौधे लगा दिये हैं, अब उनको बचाना उनका काम है।सुबह जून साइकिल से दूर तक चले गये, नूना सोसाइटी में ही घूमती रही। नन्हे से बात हुई, वह दो दिनों के लिए ऑफ साईट जा रहा है, कंपनी का भविष्य निर्धारित करने। वे लोग अब अपना अस्पताल ले रहे हैं, फ़िलहाल पाँच साल के लिए लीज पर लिया है।

आज सुबह गुरुजी की ‘; पर दी व्याख्या सुनी।चेतना सदा है, जानना उसका स्वभाव है, जब जानना समाप्त हो जाता है, तब संसार शुरू हो जाता है। जानना विचार है, यदि कोई उसमें उलझ गया तो वह विकार बन जाता है।शाम को एक मित्र दंपत्ति मिलने आया, बातों-बातों में अगले हफ़्ते किसी दिन नये बने इस्कॉन मंदिर जाने का कार्यक्रम बन गया। सुबह बालकनी की घास पर नीचे बैठकर उन्होंने फलों का रस पीते हुए पापा जी को फ़ोन मिलाया, आज वह अकेले हैं, पर हैं आराम से। छोटी भाभी कल वापस आ रही है। वीडियो कॉल पर दिखाया तो कहने लगे, आपने अपने घर को जन्नत बना लिया है।शाम को वहीं बैठकर ऑडिबल पर आयुर्वेद पर लिखी एक पुस्तक सुनती रही।वाक़ई घर अब पहले से कहीं सुंदर लग रहा है, जून ने बहुत श्रम व धन लगाया है।   

आज शाम को वे पहली बार बैंगलुरु मेट्रो में सवार हुए। रोज़ हज़ारों लोग मेट्रो में यात्रा करते हैं।उन्हें इतनी भीड़ में यात्रा करने का अनुभव कई दिन बाद मिला है, पर फ़िलहाल दुबारा जाने का मन नहीं है।ऐसे ही एक बार ‘वन्दे भारत ट्रेन’ में सफ़र करने का अनुभव लेना है।आज उनका पड़ाव था राजाजीनगर में हरे कृष्ण हिल पर स्थित बैंगलोर का पुराना इस्कॉन मंदिर। श्रीकृष्ण, बलराम व राधा के विग्रहों के दर्शन किए। महामंत्र का जाप किया। प्रसाद लेकर वे मेट्रो से ही वापस आये। सुबह के भ्रमण के लिए वे नापा से बाहर गये, मोर, कोयल व अन्य पंछियों का कलरव भोर की शोभा में चार चाँद लगा रहा था। पुस्तक आगे सुनी, कई नयी जानकारियाँ मिलीं। भाभी वापस आ गई है।अगले महीने वह अपनी डाक्टर बिटिया के साथ स्कॉटलैंड जाने वाली है।कोई सेमिनार है। आज तापमान चौतींस डिग्री पहुँच गया है, गर्मियों का मौसम पूरे शबाब पर है। 

एक और दिन बीत गया ख़रामा-ख़रामा सुबह सुहानी थी, सूर्योदय के सुंदर दर्शन हुए। दोपहर को बाल्मीकि रामायण का कुछ अंश लिखा। आज लॉन में घास लगायी जा रही है। कल शाम तक कम चलेगा। रविवार को नन्हे और सोनू को बहुत अच्छा लगेगा।नन्हे ने घर के नाम के साथ उनके नाम लिखवाकर नेमप्लेट भेजी है, पर उन्हें केवल घर का नाम ‘निर्वाण’ लिखी हुई नेम प्लेट ही चाहिए। वह उसे वापस कर देगा। कल साप्ताहिक साफ़-सफ़ाई का दिन है, नैनी भी सुबह जल्दी आएगी। सो, जल्दी यानि समय पर सो जाना बेहतर है। 

आज इतवार है। सुबह दो घंटे बगीचे में माली को कम बताते, करवाते बीते।ग्यारह बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। नाश्ते के बाद पहले नर्सरी फिर फ़ोरम मॉल गये। रात्रि भोजन करने के बाद घर लौटे तो दस बज गये थे। सभी के लिए  उपहार लेना आज का मुख्य कार्यक्रम था। नन्हे ने उसके लिए डेनिम की जैकेट लेकर दी है। नये गमलों में पौधे लग गये हैं।


Tuesday, June 23, 2026

कोर्ट मार्शल


कोर्ट मार्शल 


आज का इतवार भी काफ़ी अलग रहा, सोनू और नन्हे के साथ उसके तीन मित्र भी आये थे। उनमें से एक उबर में काम करता है, शेष दो उसी की कंपनी में। वे सब नन्हे के दफ़्तर में हो रही एक पूजा में भाग लेकर आये थे। लंच के बाद सब लोग निकट के एक गाँव में ख़ाली पड़े खेत व मैदान में गये, वहाँ ड्रोन उड़ाया, एक चील काफ़ी देर तक उसके साथ-साथ उड़ रही थी।दोपहर को एक हज़ार टुकड़ों वाली जिग्सा पज़ल आगे बढ़ायी। शाम के विशेष जलपान के बाद, रात होने से पूर्व वे सब चले गये। 

आज घर की बाहरी दीवारों पर रंगाई का काम समाप्त हो गया। अब किचन के बाहर की लॉबी के ऊपर छज्जा लगाना शेष है। घर किराये का न हो तो उसमें कोई न कोई काम निकलता ही रहता है।सुबह उन्होंने फूलों के पेड़ों की तस्वीरें उतारीं, आजकल सोसाइटी में चेरी ब्लॉज़म के गुलाबी-श्वेत फूलों की बहार है। कल शाम की आँधी के बाद कुछ आम भी गिरे हुए थे। जिनसे मीठी व खट्टी दोनों तरह की चटनी बनायी। आज भी उसने देवी की कथा सुनी, असुरों का विनाश करने वाली देवी उनकी प्रार्थना सुनकर विकार रूपी असुरों को हराने के लिए शक्ति प्रदान करती हैं। आज एमआई का ट्रक पूरा बन गया, नन्हे ने कहा, उन्होंने बहुत जल्दी बना लिया।

आज आश्रम में सत्संग हुआ। गुरुजी ने कहा, पूजा में भाव सबसे ज़्यादा आवश्यक हैं। दुख साधक के मन को गहराई देता है, सुख मन को विस्तार देता है। लेकिन कोई कब तक सुख-दुख के फेर में पड़ा रहेगा, ज्ञान में वह सुख-दुख के परे चला जाता है। साधक को अपना कर्त्तव्य निभाना है और स्वयं को ठीक से अभिव्यक्त करना है। त्याग ही रिश्तों को दृढ़ बनाता है। अहंकार को इतना बड़ा बनाना है कि उसमें सब समा जायें।कुछ सीमा तक उन्हें अपने कर्मों को समाप्त करना है। ध्यान होश का दूसरा नाम है, ऐसा होश जो विश्राम दिलाता है। जैसे कार पहले रिज़र्व में आती है, फिर उसमें ईंधन भरते हैं। उन्हें कभी भी इस बात के लिए स्वयं को कम नहीं आंकना चाहिए कि उन्होंने कुछ बड़ा नहीं किया। पुण्यों का हिसाब नहीं रखना चाहिए। शुभ काम करना उनका स्वभाव ही है, यह कोई बड़ी बात नहीं है।कोई भक्ति करता है तो यह उसका स्वभाव ही है। यही अध्यात्म है, दो के परे जाना ही अध्यात्म है। गुरुवाणी का मनन करने से निदिध्यासन अपने आप हो जाता है।

आज सुबह भी वे टहलने गये, छत पर साधना करते समय हवा ठंडी थी और सूर्योदय का सुंदर दृश्य दिखाई दे रहा था। कई लोगों से फ़ोन पर बात की, कइयों को संदेश भेजे। दो को छोड़कर शेष सभी ने जवाब दिये। शाम को इस्कॉन मंदिर गये। बहुत विशाल और भव्य मंदिर है। आरती में सम्मिलित हुए, कृष्ण की उपस्थिति का अहसास भी हुआ। बहुत सुंदर व्यवस्था है वहाँ हर चीज की। वहाँ की ऊर्जा अति सकारात्मक थी। वापसी में उन्हें महामंत्र का जप करने के लिए भी कहा गया। प्रसाद भी मिला। नन्हे ने कहा है, हो सका तो वह शनिवार को आएगा, पापा को जीसी रोड ले जाएगा। 

आज गुरुजी ने कितने सुंदर वचन कहे, धरती में बीज बोते हैं तो अन्न की फसल उगती है। आकाश में मंत्र के रूप में बीज बोते हैं तो ख़ुशी की फसल उगती है। जैसे धरा अन्न का, वैसे ही आकाश ख़ुशी का स्रोत है। कल से उनके बगीचे में लैंड स्केपिंग का कार्य शुरू होगा। आज एक नयी पुस्तक पढ़नी आरंभ की, जो हिंदू धर्म के प्रतीकों के अर्थ के बारे में है। पहला अध्याय पढ़ा, एक देवता व उनकी पत्नियों के नाम पहली बार पढ़ने को मिले। अर्धनारीश्वर व शिव के प्रतीक के बारे में पढ़ते-पढ़ते ही मन कैसा स्थिर हो गया था।नेट पर मिली एक कवयित्री के कहने से उसकी पुस्तक “मात्र मात्राओं का खेल है” मँगवायी है, उसकी समीक्षा लिखनी है। 

आज रामनवमी का उत्सव है। सुबह प्रसाद बनाया। नापा का एकमात्र मंदिर सजाया गया है, सुबह वे गये थे। उठने से पूर्व कोई कह रहा था, मन को ख़ाली करो, कोई स्वप्न चल रहा था शायद उसके पूर्व ! अब स्वप्न याद नहीं रहते पहले की तरह, अब ज़्यादा नहीं आते। मन कृतज्ञता का अनुभव कर रहा था। परमात्मा की कृपा ही तो है जो वे इस सुंदर सृष्टि का आनंद ले रहे हैं। बल्कि वही उनके द्वारा ले रहा है। उसने उन्हें अपना साथी बनाया है, सहयोगी बनाया है। कल उन्हें व्हाइट फील्ड में स्वदेश दीपक का लिखा नाटक ‘कोर्ट मार्शल’ देखने जाना है। 

कल उन्होंने ‘कोर्ट मार्शल’ देखा।पात्रों  का अभिनय शानदार था, कथा भी प्रभावशाली थी। भारतीय समाज में दलितों के प्रति जो असमानता व अन्याय सदियों से व्याप्त है, उस पर प्रहार किया गया है। भारतीय सेना की पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक एक दलित सिपाही पर चल रहे कोर्ट मार्शल के इर्द-गिर्द घूमता है। उस पर अपने दो अधिकारियों की हत्या करने का आरोप है। जैसे -जैसे मुक़दमे की कार्यवाही आगे बढ़ती है, पता चलता है दलित सिपाही को किस प्रकार उन अधिकारियों द्वारा मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उसे आश्चर्य होता है आज भी समाज में दलितों के प्रति बराबरी का व्यवहार नहीं किया जाता।आज का इतवार भी अनोखा था। वे पहली बार फ़ोरम मॉल गये। कुछ ख़रीदारी की, कुछ जलपान किया। उससे पहले ख़ाली पड़े फ़्लैट और नर्सरी भी गये, जहाँ उनके गमलों में पौधे लगाये जा रहे थे। शायद चार दिनों में कार्य पूरा हो जाएगा। नर्सरी के मालिक से भी बात हुई, उसे पौधों को समय-समय पर दी जाने वाली खाद, दवा आदि का बहुत ज्ञान है।वह बाग़वानी के नये-नये प्रोजेक्ट्स लेता रहता है। उसने बताया गर्मी के मौसम में पौधों को एक दिन छोड़कर पानी डालना चाहिए। जिन पौधों की पत्तियाँ मोटी हैं, उन्हें दो दिन बाद पानी देना चाहिए। बोगनवेलिया का पेड़ जो उन्हें कटवाना पड़ा था, उसमें अभी तक एक भी हरी पत्ती नहीं आयी है।  

आज का दिन भी ख़राम-ख़रामा बीत गया। कल रात देर तक वे दोनों बातें करते रहे। जून ने बताया बरसों पहले वह उसके बनारस शहर से जाने के बाद बहुत दुखी हुए थे।परीक्षा परिणाम देने के बहाने एक दिन मिर्ज़ापुर मिलने आये थे।उसे जून को जानते हुए चार दशकों से ज़्यादा समय हो गया है, पर अभी भी लगता है, मन के किसी न किसी स्तर पर उनकी दुनियाएँ अलग-अलग हैं। एक साथ होते हुए भी हरेक का जीवन उसका निजी होता है।  दुनिया में हर किसी का, राम व सीता का भी, शिव व पार्वती का भी ! परमात्मा मौलिक है, इसलिए वह हर किसी को बस उसके जैसा ही बनाता है।शाम को वे दूर तक टहलने गये, एक टर्की दिखा, अनोखा पक्षी है, सुंदर रूप है उसका! उसने पुस्तक की समीक्षा लिखनी शुरू की है, कुछ कविताएँ दिल को छू जाती हैं। जून के पूर्व सहकर्मी ने अपने पुत्र के पचासवें जन्मदिन पर एक कविता लिखने के लिए कहा है।एओएल का अनुवाद कार्य भी बीच-बीच में आता रहता है। 


Friday, June 19, 2026

दस महाविद्याएँ


दस महाविद्याएँ  

आज सुबह से जून थोड़ा सा परेशान हैं, बात वही पुरानी है, एक पैटर्न ही तो बन गया है शायद, वह इससे बाहर निकलना नहीं चाहते। शायद नाराज़गी से अहंकार को तृप्ति मिलती है। रात को उनकी नींद खुल गई थी, शायद कोई स्वप्न देख रहे थे।वर्षों पहले नूना की भी यही स्थिति थी, पर अब तो यह अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा लगता है। अनुभवानंद जी कहते हैं, उन्हें शब्दों के अर्थ की तरफ़ ध्यान नहीं देना है, केवल शब्द के स्रोत तक जाना है, जो अनहद नाद है। इससे वे प्रतिक्रिया करने से बचे रहेंगे और कर्मों के बंधन से भी। शब्दों को अनावश्यक महत्व देने से ही सारे द्वन्द्व होते हैं। सुबह उसने एक छोटी सी कविता लिखी, या उससे लिखवा ली गयी !! जो लिखवाता है वही तो वह ख़ुद है ! कुछ देर पहले मोदी जी को सुना, उनके शब्द सभी के दिलों को छूते हैं, पर विपक्षी पार्टियों को वे नहीं सुहाते। कुर्सियाँ बनकर आ गई हैं, कल नन्हा व सोनू देखकर प्रसन्न होंगे। 

रविवार सहज रूप से बीता, बच्चे सुबह साढ़े नौ बजे तक आ गये थे। दोपहर को नन्हे के साथ  उन्होंने छोटे-छोटे पार्ट्स जोड़कर एमआई की एक कार बनाने की शुरुआत की। सोनू जिग्सा पज़ल हल कर रही थी। शाम को जाने से पूर्व नन्हे ने मल्टी पर्पेस कोर्ट में रिमोट से चलने वाली एक नयी कार चलायी, अभी तक उसके भीतर के बालक का मन खिलौनों से भरा नहीं है। पापाजी से बात हुई, वे अपेक्षाकृत स्वस्थ थे, ठीक से सुन भी पा रहे थे।

आज वे बहुत दिनों बाद आश्रम गये, हवा सुहानी थी और आकाश में पश्चिम दिशा रक्तिम हो रही थी। भजन गायकों ने समाँ बाँध दिया। गुरुजी आये तो सभी लोग उनके सम्मान में सहज ही खड़े हो गये थे। उन्होंने प्रश्नों के जवाब सरल भाषा में लोगों को हँसाते हुए दिये, उनकी हाज़िर जवाबी की कोई मिसाल नहीं। उनकी बातों में एक आत्मीयता झलकती है। आज छत पर बने शेड में कबूतरों से बचने के लिए एक जाली लगा गई, कल ही जून ने इसकी चर्चा की थी।  घर में चल रहा काम अभी आधा ही समाप्त हुआ है। कल उन्हें कार पर तीसरी कोटिंग लगवाने के लिए जाना है, खरोंच से बचने के लिए ३एमएम की कोटिंग लगवायी है, इन सब मामलों में जून का जवाब नहीं। आज एओएल का अनुवाद कार्य किया, पढ़ने के लिए लेख पापाजी को भी भेजा। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के बारे में नन्हे को बताया तो उसने एक वीडियो भेजा है, जिसमें ख़ालिस्तान की माँग के पीछे की कहानी बतायी गई है। 

आज उन्होंने सामने वाले बगीचे में लगा कंचन का पेड़ निकलवा कर प्लूमेरिया का एक पेड़ लगवा दिया है। एक बार कंचन के वृक्ष को संबोधित करते हुए उसने एक कविता लिखी थी, जिसमें उसके फूल न खिलने की स्थिति में उसके कट जाने की आशंका व्यक्त की थी। उसने उस वृक्ष के जीव से मन ही मन क्षमा माँगी। आज दोपहर भी कल की तरह उसने कुछ देर एमआई की कार बनायी। कल उगादि पर्व है, दोनों मेड्स काम पर नहीं आयेंगी, अपने-अपने घर पर परिवार के साथ उत्सव मनायेंगी।आज उसने बट्रेंड रसल की एक पुस्तक को ऑडिबल पर सुनना आरंभ किया है। उन्हें आत्मा का कोई ज्ञान नहीं है, वह चेतना को मस्तिष्क से पैदा हुई मानते हैं। शाम को उसने पड़ोसी के यहाँ जाकर घर की दीवार को देखा,रंग-रोगन के बाद काफ़ी अच्छी लग रही है। सामने से भी घर सुंदर लग रहा है। 

आज भी वे आश्रम गये थे, गुरुजी को सुनना एक अद्भुत अनुभव है। सभी प्रश्नों का उत्तर वह जिस सहजता से देते हैं, पूछने वाले को शांति प्राप्त होती है। आज वासंतिक नवरात्र का प्रथम दिन है, उन्होंने नये वर्ष की शुभकामना भी दी। आज सुबह टहलते समय प्रीतिदिन की तरह जून से विभिन्न विषयों पर वार्तालाप हुआ, वातावरण शीतल व सुखकारक था, लगा, जिसे उन्होंने इधर-उधर की बातों से ढक दिया पर मात्र एक पल को ही ! अब मन उस मौन में ठहरने लगा है जहाँ उसे कुछ भी नहीं छूता ! आश्रम में भजन सुनते समय भी मन जैसे समाधि में ही था। पापाजी से हुई अध्यात्म चर्चा को आज भी रिकॉर्ड किया।उन्हें नवनीत का मार्च का अंक मिल गया है। वह खुश थे, एक साहित्यिक पत्रिका पढ़ने में उनका समय अच्छा बीतेगा।  

आज छत का काम पूरा हो गया, कल से वे वहाँ सुबह की योग-साधना कर सकते हैं।जून उनके बगीचे व छत की लैंड-स्केपिंग के लिए बात करके आये हैं। आज सुबह यू ट्यूब पर उसने दस महाविद्याओं के बारे में सुना, कल गुरुजी ने भी उनका ज़िक्र किया था। दिन में ऑडिबल पर भी उनके बारे में सुना।महाकाली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला के रूपों में उनके भीतर ही सत्य के मार्ग पर ले जाने वाली शक्तियाँ भी है और माया-मोह में फँसाने वाली अविद्या शक्ति थी। वे सोते-सोते भी जीवन गुज़ार सकते हैं और जागकर अपने जीवन को धन्य भी कर सकते हैं। देह व मन आपस में जुड़े हैं। सोया हुआ मन कब कैसा व्यवहार करेगा, इसका अनुमान ब्रह्मा भी नहीं लगा सकते। आत्मा सदा साक्षी है। गुरुजी कहते हैं, पानी पर खींची लकीर को जुड़ने में जितना समय लगता है, उतनी देर के लिए क्रोध जगा तो कोई बात नहीं। आत्मा में स्थित होने के लिए मन को पलक झपकने जितना समय ही लगता है। आज उन्होंने “रॉकेट्री” का दूसरा भाग देख लिया। डॉ होमी भाभा और विक्रम साराभाई के कारण भारत का परमाणु कार्यक्रम तथा अंतरिक्ष कार्यक्रम आगे बढ़ा, बल्कि वे दोनों उसके जनक थे। दोनों की असमय मृत्यु हो गई, पर दोनों ने अपने साथियों को तैयार कर दिया था।कल से रमज़ान का महीना शुरू हो गया है। घर का काम अगले हफ़्ते तक खिंचने वाला है।  

   


Friday, June 12, 2026

शिव-शक्ति संवाद


शिव-शक्ति संवाद 

आज सुबह भी नूना ने ‘विज्ञान भैरव’ आगे सुना, कितना अद्भुत ग्रंथ है यह, जिसमें परमात्मा स्वयं अपने बारे में बता रहे हैं। शिव और शक्ति के मध्य हुआ यह वार्तालाप अपने आप में एक महान घटना है। भारत को विश्व गुरु ऐसे ही नहीं कहा गया है। भारत के पास ही वह बात है, जो विश्व में कहीं और होना तो दूर, उसकी झलक भी नहीं है। पाँच हज़ार साल पुरानी परंपरा के अनुसार नियमित ध्यान-साधना करने से मन में कितनी शांति का अनुभव होता है। पापाजी ने आज भी नवनीत में पढ़ी एक रचना का ज़िक्र किया, उन्होंने फ़ेसबुक पर नूना की रचना भी पढ़ी। रात्रि भ्रमण के समय अचानक एक काले रंग के कुत्ते ने जून के हाथ को स्पर्श कर लिया, शायद वह अपनापन दिखाना या पाना चाहता था। दिन में उनकी असम के एक पुराने सहकर्मी से बात हुई, वहाँ उनके दफ़्तर के लोग अभी तक उन्हें याद करते हैं, वे चाहते हैं कि पुन: उनके जैसा अनुशासन प्रिय कोई अधिकारी आये। नूना को हँसी भी आयी, उस समय वे ही लोग कभी न कभी उनके अनुशासन की शिकायत भी करते रहे होंगे। जून ने बिग बास्केट से होली के विशेष भोज के लिए ढेर सारा सामान मँगवाया है। कुछ देर पहले समाचार मिला कि बड़े भाई की बिटिया को एमबीए में दाख़िला मिल गया है, वह चंडीगढ़ आईएसबी में पड़ेगी। परसों वह यहाँ आ रही है, तभी वे उसे बधाई देंगे। 


आज सुबह योग साधना के समय जून ने ‘जोड़ों के योग’ शीर्षक से एक वीडियो बनाया, लगभग पचास मिनट का है, उन्होंने बहुत अच्छी तरह से प्राणायाम व घुटने तथा अन्य जोड़ों के लिए आसन व व्यायाम आदि करवाए हैं। यू ट्यूब पर उसे डाल देने से कितने ही लोग उसे देखकर आसन कर सकते हैं।पापाजी से आज बात की तो उन्हें सुनने में थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी।कान में मशीन लगाने का अभी उन्हें अभ्यास नहीं हुआ है। कुछ दिनों में उन्हें इस महीने की नवनीत मिल जाएगी। अवश्य ही उन्हें अच्छा लगेगा। 


आज उन्होंने सोल्लास होली का उत्सव मनाया। नन्हा व सोनू सुबह नौ बजे आ गये थे, साथ में सोनू की मौसेरी बहन व नन्हे की ममेरी बहन भी। दोपहर को भांजा व उसकी नव विवाहिता भी आ गये। वे दोनों दो दिन उस रिज़ौर्ट में रहकर आये थे, जहाँ नन्हे का विवाह हुआ था। बहुत खुश  नज़र आ रहे थे। जून ने भिस की विशेष सब्ज़ी बनायी। पालक पनीर, रायता व पुलाव बच्चों ने आपसी सहयोग से बनाया। फूलों से बने हर्बल रंग पहले ही नन्हे ने मँगवा लिए थे। जिसमें ठंडाई की एक बोतल भी थी। लंच से पहले ही सबने एक-दूसरे को रंगा और बधाई दी। शाम को वे सब चले गये, उसने बहुत सारी तस्वीरें उतारी हैं उत्सव की, रंग-बिरंगी तस्वीरें ! 


आज से उनके घर की बाहरी दीवारों पर रंग-रोगन का काम शुरू हुआ है। दो हफ़्ते लग जाएँगे। डाइनिंग टेबल की कुर्सियों की रैगजीन भी पुरानी हो गई है, मात्र पौने चार वर्षों में, चाइना की बनी हैं शायद इसीलिए! जून का कहना है, उन्हें बैठक में भी एसी लगवा लेना चाहिए। उन्हें घर की देखभाल करने व घर चलाने में बहुत आनंद आता है, उनमें विष्णु शक्ति बहुत है। उसे ख़ुद सबसे अधिक आनंद ध्यान में आता है, परमात्मा से एकत्व में और संतों की वाणी सुनने में। विज्ञान भैरव सुनने से काफ़ी शंकाओं का निवारण हो जाता है। आज भी सुबह सुना, गुना और और भीतर तक उसके सूत्रों को अनुभव किया। न जाने कितनी पुरानी है यह पुस्तक और कितने संतों ने इसकी व्याख्या की है।आज सुबह ध्यान में अनोखा अनुभव हुआ, जागते हुए ही अनेक दृश्यों को बंद आँखों के पीछे देखा, तारों से भरा आकाश और जंगल, नदी आदि भी ! यह सारा जगत उनके भीतर भी है, वे परमात्मा की अभिव्यक्ति ही तो हैं ! जीव, जगत और ईश्वर तीनों परमात्मा की अभिव्यक्ति हैं ! 


आज कल वह ‘कितने पाकिस्तान’ पढ़ रही है। कितनी अनोखी पुस्तक है यह, इतिहास का कितना ज्ञान था लेखक को, और विश्व को हिंसा मुक्त बनाने की गहरी चाह ! मावन इतिहास से कुछ भी सीखना नहीं चाहता, बार-बार वही गलती दोहराता है।आज भी घर में रंग-रोगन का काम चलता रह, दिन भर मज़दूरों का आना-जाना चलता रहे तो कैसा बिखरा-बिखरा सा हो जाता है घर के साथ मन भी। जून ने आज तीन और एसी लाने की बात की और तुरंत उनका ऑर्डर भी कर दिया। नवनीत का मार्च अंक पूरा पढ़ लिया, कई व्यंग्य रचनायें हैं तथा विद्यानिवास मिश्र जी का एक ललित निबंध है, जो बहुत प्रभावित करता है। दादा धर्माधिकारी का लेख भी अच्छा है, स्त्री को आत्मनिर्भर होने के संदेश देता हुआ।   

आज भी सुबह जल्दी उठकर वे टहलने गये, सड़कें सूनी थीं, हवा शीतल और आकाश में आधा स्वर्णिम चंद्रमा !! विज्ञान भैरव सुनते-सुनते भीतर कैसा बोध हुआ, आनंद की जैसे एक वर्षा सी हो गयी। विश्व समाचारों में देखा, इज़राइल में जनता सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही है। यूक्रेन-रुस युद्ध चलता ही जा रहा है। ‘बाल्मीकि रामायण’ की अगली पोस्ट लिखी, अनोखा है राम और भरत का प्रेम ! पापाजी से बात हुई, उन्हें भी अध्यात्म के पथ पर शांति का अनुभव होता है, उन्हें इसका महत्व ज्ञात है।यही आस्था उनके दीर्घ और सुखमय जीवन का राज है।वह ‘कितने पाकिस्तान’ जितना-जितना पढ़ती है, लेखक के प्रति सम्मान बढ़ता जाता है। भारत का इतिहास कितनी साज़िशों से घिरा हुआ है। दारा शिकोह की हत्या एक ऐसा कलंक है, जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकता। जे कृष्णामूर्ति की एक पुस्तक ऑडिबल पर सुन रही है, कितना गहन ज्ञान था उनका और कितना अटल विश्वास ! वह चीजों को बहुत स्पष्ट देखते थे, उनकी किताबें पढ़ते-सुनते भीतर जैसे एक आकाश खुलता जाता है ! मन से मुक्ति मिलती है ! 

आज तीन नये एसी घर में लग गये। सारा घर धूल से भर गया था। रंग करने के लिए दीवार से सटे फूलों के दो पेड़ ऊपर से काटने पड़े, जड़ें हैं, इसलिए पुन: नये पत्ते और शाखाएँ आ जायेंगी। बोगनवेलिया का जो पेड़ उनके घर की शोभा बढ़ा रहा था, हटाना पड़ा, उसकी डालियों को  काटना भी पड़ा, और भी कई पेड़ कटवाने पड़े हैं, पर संभवत: कुछ ही महीनों में वे फिर से हरे-भरे हो जाएँगे। आज भी हिन्दी पढ़ने दोनों बालिकाएँ आयी थीं, कल उनकी परीक्षा है।