Monday, August 17, 2026

ब्रह्मकमल की कलियाँ

ब्रह्मकमल की कलियाँ

आज दिन भर मौसम ठंडा बना रहा। बीच-बीच में होने वाली वर्षा के कारण तापमान पच्चीस डिग्री से ऊपर गया ही नहीं।सितम्बर में ओबीए की मीटिंग के लिए उन्हें कोयंबटूर जाना है। जून ने लोगों से होटल की बुकिंग के लिए एडवांस लेना शुरू कर दिया है। कल वे नन्हे का जन्मदिन मनायेंगे। सोनू श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी, जून ने केक का ऑर्डर दे दिया है। उनके फ़्लैट में काम पूरा हो गया है, वे देखने गये थे। घर पूरी तरह साफ़ था, सभी कुछ ठीक था। अब उसमें रहने वाले लोगों का इंतज़ार है। किरायेदार आयेंगे या ख़रीदार, यह तो समय ही बतायेगा। कल दो लोग घर देखने आने वाले हैं। 

आज सुबह नाश्ते में जून ने दोसा बनाया। सोनू ने साँवा चावल के साथ अलसी के बीज भी ब्रेड में डाले थे। लंच में पालक का सूप, कॉर्न और सैंडविचेज खाकर वे सरजापुर रोड पर स्थित ‘अरुआनी ग्रिड’ गये। जो बहुत बड़े इलाक़े में फैला एक गो कार्टिंग स्थल है। नन्हे ने वहाँ रेस कार चलायी। बहुत तेज गति से दौड़ती हुई कारें रोमांच उत्पन्न कर रही थीं। सूर्यास्त का समय हो रहा था, जब वे वहाँ से निकले। वापसी में हस्कर झील पर रुके। इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास स्थित इस विशाल, शांत और सुंदर झील के किनारे बगीचे और भ्रमण पथ बने हैं; मानो यह एक पिकनिक स्थल हो।भविष्य में वे सभी फिर एक साथ वहाँ जाएँगे। नन्हे ने बताया जब उसकी कंपनी का आईपीओ आ जाएगा तब वह कुछ अन्य कार्य करने की सोच सकता है।उसे ‘एक जीवन एक कहानी’ का पिछला अंक पढ़कर अच्छा लगा। उन्होंने सोचा है, नन्हे के चालीसवें जन्मदिन पर वे सभी लक्ष्यद्वीप जाएँगे। पापाजी से बात हुई, उन्हें इस महीने का ‘नवनीत’ का अंक मिल गया है।उन्होंने गूगल से हुई बातचीत का विवरण बताया, नन्हे को आशीर्वाद भी दिया। उनकी बातें सुनकर बहुत आनंद होता है। आज सोनू ने उसे इंस्टाग्राम के बारे में कुछ जानकारी दी। 

आज उन्होंने ‘बहत्तर हूरें’ देख ली, दिल को छूती है यह फ़िल्म, इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं है, पर उस सोच के ख़िलाफ़ है, जो युवकों को दहशतगर्द बना रही है। शाम को नन्हे का फ़ोन आया था, वह खुश लग रहा था, अच्छी तरह से तैयार भी था। आज उन्होंने ‘तरला दलाल’ पर बनी एक फ़िल्म देखनी शुरू की है, अच्छी है। भारत की  होम शेफ़ और कुकिंग पुस्तकों की प्रसिद्ध लेखिका तरला दलाल की पहली पुस्तक उसने वर्षों पहले ख़रीदी थी, और कितनी ही स्वादिष्ट डिशेज़ उसे पढ़कर बनायी थीं। उनकी एक पुस्तक उसे उपहार में मिली थी, उसे फिर से खंगाला। नन्हे को भी अवश्य याद होगा, उसकी पसंद के ब्लैक फारेस्ट केक बनाना भी नूना ने उसी पुस्तक से सीखा था। उनकी संघर्ष भरी जीवनी पर आधारित है यह फ़िल्म।

आज सुबह व शाम को बहुत दिनों बाद ‘योग साधना’ में अद्भुत अनुभव हुए। उनके भीतर चिदाकाश है और अनेक रहस्य छिपे हैं। ‘यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे’ ! पर वे थमकर देखते ही कहाँ हैं ? आज जून ने शाम को स्वयं कहा कि वह उसे कार चलाने का अभ्यास करायेंगे। उन्हें अवश्य ही तरला फ़िल्म से प्रेरणा मिली होगी। उनके भीतर भी पत्नी को आगे बढ़ाने में योगदान देने के लिए तरला दलाल के पति नलिन दलाल पर गर्व हुआ होगा। 

कल की तरह आज भी वे ड्राइविंग के अभ्यास के लिए गये। आज कई दिनों बाद हारून ख़ालिद की पुस्तक ‘वॉकिंग विद नानक’ आगे पढ़ी। धर्म के नाम पर कितने सिखों और हिंदुओं को मुस्लिमों ने मारा, इसका ज़िक्र भी वह करते हैं। आज भी यह हिंसा कम नहीं हुई है। आज सुबह वे पब्लिक हेल्थ सेंटर भी गये थे।ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराना था। उसके लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र चाहिए। वहाँ पता चला, डाक्टर राधा मीटिंग में हैं, शाम तक मिलेंगी। वे वहाँ से फ़ोरम मॉल चले गये। नयी-नयी सब्ज़ियाँ मिल गयीं, शलजम, भिस, टिंडा और परवल, जो स्थानीय बाज़ार में नहीं मिलतीं। 

दीदी का फ़ोन आया। उत्तराखण्ड में कल उनके घर में बाढ़ का पानी भर गया था। विदेश से उनके दोनों पुत्र आये हुए हैं।सबने मिलकर पानी बाहर निकाला।पूरे उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति भयानक हो गई है। प्रधानमंत्री कल फ़्रांस जा रहे हैं , वहाँ पिछले दो हफ़्तों से हिंसा हो रही है। भारतीय सेना की टुकड़ियाँ फ़्रांस के राष्ट्रीय दिवस में भाग लेंगी। 

आज महीनों बाद दीर्घ सुदर्शन क्रिया की। इतवार को नाड़ी परीक्षा है। शुक्रवार से ‘हैप्पीनेस कोर्स’ भी होने वाला है। आज सुबह वे देर से उठे। एक बार उठने के बाद दुबारा सोने पर एक स्वप्न देखा। कितना विचित्र था वह स्वप्न, अनोखे फूल तथा जीवंत पंछी-पशु देखे। कैसे मन स्वयं ही सभी आकार ग्रहण कर लेता है स्वप्न में। 

आज वे असम में जून के अधिकारी रह चुके मित्र व उनके परिवार से मिलने गये। उन्होंने सदा की तरह स्वागत किया। गृह स्वामिनी ने दक्षिण भारतीय भोजन खिलाया। मूँगफली का लड्डू और गुड़ वाली काफ़ी भी स्वादिष्ट बनी थी। बाद में इस्तेमाल करने के लिए घर का बना इडली मिश्रण भी उसे दिया। वहाँ से वे कंपनी के एक स्वर्गीय वरिष्ठ अधिकारी की वृद्धा पत्नी से मिलने गये। उन्होंने अपने पुराने दिनों के अनेक किस्से सुनाये। मनीपाल व नारायण दोनों अस्पतालों में उनके पति का इलाज हुआ था। उन्हें काफ़ी प्रयत्न करना पड़ा था ताकि कंपनी से मिलने वाली सहायता प्राप्त कर सकें। अगले हफ़्ते से वह महाजोंग सिखाने वाली हैं। अपनी सोसाइटी में होने वाले कार्यक्रमों में भी वह भाग लेती हैं। वह नौवें दशक में हैं, पर इस उम्र में भी बहुत सक्रिय हैं।

पापाजी ने भी ओशो की किताब का कुछ भाग सुनाया।वह मानवों के मध्य होने वाले हर तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ थे, सारे संत होते हैं, जैसे गुरु नानक थे।अपने समय से बहुत आगे। हिंदू-मुस्लिम दोनों को आपसी भेदभाव भूलकर मेल-मिलाप से रहना सिखाते थे। ब्रह्म कमल में फिर से कलियाँ आयी हैं, शायद एक-दो दिन में खिलेंगीं।  


Tuesday, August 11, 2026

मडीवाला झील के किनारे

मडीवाला झील के किनारे

आज वे बहुत दिनों के बाद ‘गुरु पूजा’ में सम्मिलित हुए, बहुत अच्छा लगा। जैसा कि आर्ट ऑफ़ लिविंग में होता है, पहली बार मिलने पर भी सभी अपने परिवार की तरह मिले। एक बंगाली परिवार से मिलकर कुछ बातें कीं, उनका नन्हा पुत्र और सासुमाँ भी आयी थीं। कुछ अन्य बंगाली व हिन्दी भाषी परिवार भी थे।परसों शाम उनके यहाँ पूजा है, नन्हा व सोनू भी आयेंगे। पूजा के लिए आवश्यक सामान की लिस्ट उसे याद हो गई है। पाँच तरह के फल, नारियल, पान, सुपारी, एक नया रूमाल, थोड़े से अक्षत, अगरबत्ती आदि। लेकिन गुरु पूजा का अर्थ केवल गुरु का आभार प्रकट करना ही नहीं है, बल्कि उनकी उपस्थिति को महसूस करना है। प्रार्थना के क्षणों में कई बार उसने मानसिक गुरु पूजा की है, जहाँ कोई सामग्री नहीं होती, किंतु फिर भी सब कुछ होता है। वहाँ चरण भी वास्तविक होते हैं यदि भावना वास्तविक है; अंततः सभी कुछ तो वे मन के माध्यम से ही देखते हैं, जाग्रत हो या स्वप्न, मन ही सब कुछ दिखाता है। ध्यान में भी जो चित्र दिखते हैं, मन ही उनका सृजन करता है। आज भी ब्लॉग्स पर नई पोस्ट प्रकाशित की। पिछले कुछ महीनों में आँख के इलाज के कारण लेखन में जो ढीलापन आ गया था, अब वह दूर हो रहा है। लेखन का अभ्यास बना रहेगा तभी काम आगे बढ़ेगा। ‘बाल्मीकि रामायण’ में अभी तक अयोध्या कांड ही चल रहा है। जीवन रहते उसे इस कार्य को पूरा करना है। शाम को पापाजी से बात हुई, वह कुछ अकेलेपन का अनुभव कर रहे थे, ऐसा उन्होंने कहा, पर बातचीत में सामान्य दिखे। 

आज सुबह उठी तो नूना एक स्वप्न देख रही थी, विचित्र सा स्वप्न, फिर ध्यान किया तो समाधान मिला। आनन्दमय कोष के बारे में सुना, सुनते-सुनते ही मन ध्यानस्थ हो गया था। दोपहर को कुछ देर नवनीत पढ़ा।शाम को  भांजे ने उन्हें भोजन के लिए बुलाया था। वहाँ उसकी नव विवाहिता पत्नी की छोटी बहन व माँ भी आ गयीं; उसके चचेरा भाई भी,  जो इसी शहर में नौकरी करता है। नन्हा व सोनू भी कुछ देर के लिए आये। ढोकला व गोलगप्पे खाकर वे चले गये। सोनू की मौसेरी बहन ने उन्हें डिनर के लिए बुला रखा था। सभी ने अपने अपने कार्य तथा शौक़ के बारे में बताया। चाहे वे कई दिन बाद मिलें पर मिलने पर कोई न कोई पुराना सिरा हाथ में आ जाता है और लगने लगता है, जैसे कल ही मिले थे। बच्चों से मिलकर एक ऊर्जा का अहसास तो होता ही है, उनकी नयी गृहस्थी देखकर उसे अपना अतीत भी एक पल के लिए याद आ गया था। 

आज सुबह से मन भक्ति रस में सराबोर था। नन्हा व सोनू ग्यारह बजे आ गये थे। शाम को घर का वातावरण संगीतमय हो गया था। नन्हे और सोनू ने चने, पूरी व रायता बनाया, एक परिचिता सूजी का हलवा बनाकर लायी थीं। पूजा करने के लिए आश्रम से एक शिक्षक आये थे, उनके साथ एक असमिया सत्संगी भी, जिनकी छोटी सी बेटी ने कई अच्छे-अच्छे भजन गाये। उनका मित्र परिवार भी आया था, पहली बार उनके नाती को देखा। गुरु पूजा के बाद हुए भजन गायन के बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। कल दोपहर को फिर एक विला में गुरु पूजा का आयोजन है। वे जाएँगे, कुछ और लोगों से परिचय बढ़ेगा। 

दोपहर को वे उनकी लेन में में एक शिक्षक के यहाँ गुरु पूजा में गये। गुरु पूर्णिमा पर मन-प्राण बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं। एक युवा साधिका से मिले, जिसने गुरु पूर्णिमा से पूर्व एक निश्चित संख्या में इन पूजाओं के आयोजन की ज़िम्मेदारी उठायी थी। उसी की प्रेरणा से यह काम हुआ है, गुरुजी ने उसे यह काम सौंपा है। शाम को आश्रम में भी गुरु पूजा उत्सव में शामिल होने का अवसर मिला। वर्षा के बावजूद अनेक लोग आये थे। एक सौ आठ शिक्षकों ने एक साथ पूजा में भाग लिया। उसके बाद वहीं प्रसाद ग्रहण किया। अन्नपूर्णा में आज विशेष भोजन बना था। पापाजी से बात हुई, छोटी भाभी लौट आयी है। उन्होंने ओशो द्वारा दिये प्रवचन ‘मौन की महत्ता’ के आधार पर कुछ बातें बतायीं। उनके अनुसार जैसे-जैसे भीतर का मौन बढ़ता जाता है, अहंकार व भय गिरने लगता है। सृजनात्मकता बढ़ती है और नयी संभावनाएँ पता चलती हैं। गुरु के शब्दों का काम भीतर के मौन को जगाना ही तो है। 

आज सुबह वे नन्हे यहाँ गये थे, उसके गेस्ट रूम  के लिए गीज़र पहुँचाना था। नन्हे ने मिलेट दोसा मँगवाया उनके नाश्ते के लिए, उनका रसोइया थोड़ा देर से आता है। वहाँ से वे बीटीएम स्थित मडीवाला झील तक गये, जो बैंगलुरु की बड़ी झीलों में से एक है। हवा ठंडी थी, सुबह की सैर के लिए अनेक लोग आये हुए थे। वे कुछ देर उसके किनारे टहलते रहे, पक्षियों की उड़ान भली लग रही थी, जो झील में स्थित एक द्वीप से उड़ते थे। उसके बाद बैंक का काम करना था। जून का हर कार्य योजना बद्ध तरीक़े से होता है, सुबह जल्दी निकलने के पीछे कारण था, ट्रैफ़िक नहीं मिलेगा, और क्योंकि सुबह टहलना नहीं हो पाया था, सो बैंक खुलने की प्रतीक्षा में वह काम भी हो गया। उन्होंने पड़ोसी की सहायता से, जो सीए हैं, इस बार का टैक्स भी जमा कर दिया है। शाम को फलों वाले बगीचे में कुछ तस्वीरें उतारीं, करौंदे के पेड़ लाल फलों से भर गये हैं, बहुत सुंदर लग रहे थे। दशकों पूर्व बचपन में सीतापुर में इसका पेड़ देखा था, तब के बाद यहीं आकर उसने करौंदे देखे हैं।  

आज दोपहर उसने छोटी बहन को फ़ोन किया तो वह क्लिनिक से घर आकर विश्राम कर रही थी।बड़ी भांजी ने फ़ोन उठाया। उससे बहुत सी बातें हुईं। वह अगले हफ़्ते  आस्ट्रेलिया जा रही है। कुछ महीनों में उसे कनाडा का पासपोर्ट मिल जाएगा। नूना को आश्चर्य होता है, कि कोई भारतीय कैसे अपना देश छोड़कर बाहर की नागरिकता ले लेता है। शायद उनके पास दोनों देशों की नागरिकता होती हो। आज सुबह वह उठी एक स्वप्न की याद बनी हुई थी, नन्हे को लेकर एक स्वप्न देखा था, लगा, जैसे वह कुछ उदास है। पर सब ठीक होगा, मन की तो आदत ही है तिल का ताड़ बनाने की।


Thursday, August 6, 2026

‘विचार चंद्रोदय’


विचार चंद्रोदय


आज सुबह गुरूमाँ को सुना, कितना अच्छा बोलती हैं। पंडित पीतांबर जी द्वारा लिखे गये अद्वैत वेदान्त के ग्रंथ ‘विचार चंद्रोदय’ पर उनकी व्याख्या अनुपम है। इस पुस्तक में वेदान्त का शुद्ध ज्ञान सरल ढंग से समझाया गया है। जगत की सत्यता, मैं कौन हूँ, पाँच कोष, तीन ताप, कर्म सिद्धांत और मुक्ति का स्वरूप सभी कुछ प्रश्न-उत्तर शैली में समझाया गया है।अभी कुछ देर पहले उसने गुरुजी से जुड़ा एओएल का एक अनुवाद कार्य किया।अमेरिका के एलेघेनी शहर ने २२ जून को ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित करके गुरुजी को सम्मानित किया है। अमेरिका की आठ यूनिवर्सिटीज़ में श्री श्री योग और सुदर्शन क्रिया सिखाई जाती है। दशकों से गुरुदेव पूरे विश्व में विभिन्न समुदायों के मध्य आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं। मोदीजी भी अमेरिका में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं, पर सारा विपक्ष उनके कामों का पूरी तरह से विरोध कर रहा है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने भी मोदीजी की तारीफ़ की, पर विपक्ष को और मज़बूत होना चाहिए, ऐसा भी कहा। कल रात उन्होंने बिना एसी के सोने का प्रयास किया पर आधी रात को ही चलाना पड़ा। सड़क पर लगे बल्ब की, खिड़की से आती रोशनी आँखों को चुभ रही थी।खिड़की बंद करने या पर्दा लगाने से हवा नहीं आती, सो बिना एसी के सोना अब सर्दियों में ही संभव होगा। 

दिन भर मौसम बदली वाला बना रहा, शाम को बादल कुछ देर को बरस भी गये। रात्रि भ्रमण के लिए गये तो सड़कें गीली थीं और ख़ाली भी। सन्नाटा पसरा था जैसे सर्दियों की कोई शाम हो और लोग घरों में दुबक गये हों। आज उन्होंने देवानंद-नूतन की एक पुरानी फ़िल्म देखी, ‘बारिश’। उस समय के नायक में वीरोचित और नैतिक गुण होते थे। पुलिस भी कार्य में दक्ष और ईमानदार थी। अब न नायक वैसे हैं न पुलिस। समय के साथ समाज में विकृतियाँ बढ़ने लगती हैं।लेकिन कई मामलों में चतुर्मुखी विकास भी हुआ है बल्कि अनेक मामलों में चीजें बेहतर हुई हैं। 

आज सुबह पौधों के साथ बितायी। हरे-भरे पौधे और लॉन में हज़ारों हरसिंगार के फूल, बरसात के मौसम में चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है। इतवार है आज, नन्हा और सोनू आये। पिछले दिनों सोनू ने बहत सारे केक बनाये, काफ़ी थक गई है, लेकिन बहुत खुश है। अभी भी उसके पास केक के ऑर्डर हैं, मंगल को देने हैं।हरेक को अपने काम के अलावा एक न एक शौक़ रखना ही चाहिए। ऐसा शौक़ जिसे पूरा करने से ही ख़ुशी मिलती हो, जिसका कोई फल उसे नहीं चाहिए। फल तो मिलेगा ही पर फल की आशा में वह कार्य न किया गया हो। सोनू कह रही है, अगले हफ़्ते वह श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी। 

आज महीनों बाद उसने हर ब्लॉग पर एक-एक पोस्ट प्रकाशित की। अब यही प्रयास रहेगा कि नियमित रूप से लेखन कार्य चलता रहे। यदि मन में किसी काम को करने का इरादा हो तो समय निकल ही आता है। मौसम आजकल अच्छा है, पर इस वर्ष वर्षा अपेक्षाकृत कम हो रही है।आकाश बादलों से घिरा रहता है, हवा भी चलती है, पर बूँदें बरसती नहीं हैं। कुछ देर पहले छोटी ननद की सखी, एक पूर्व परिचिता का फ़ोन आया, वह परसों अपनी एक सखी के साथ उनके घर आ रही हैं। दोनों आश्रम जाना चाहती हैं। वे उन्हें आश्रम तो ले ही जाएँगे, हो सका तो इस्कॉन मंदिर भी ले जाएँगे। जून ने कहा है, अंत में घर भी छोड़ देंगे। 

कल छोटी बहन का फ़ोन आया। आज उसे अपने क्लिनिक में गुरु पूजा करवानी थी।भांजी अपने मित्र को घर लायी है, उन दोनों ने मिलकर भोजन बनाया, पर अभी तक भविष्य के बार में कोई विचार नहीं किया है।आज पाकिस्तानी लेखक हारून ख़ालिद की लिखी पुस्तक “वॉकिंग विद  नानक” आ गई है। उसने पढ़नी शुरू कर दी है, अच्छी लग रही  है। गुरु नानकदेव की माँ तृप्ता आज से पाँच सौ वर्ष पहले भी कितनी निर्भीक थी और कितने स्वतंत्र विचारों की महिला थी।गुरु नानक के जीवन के कितने अनजाने पहलू जानने को मिल रहे हैं। पुस्तक में इतिहास, यात्रा वृत्तांत और अध्यात्म सभी का मिश्रण है।लेखक ने इक़बाल कैसर के साथ घूमकर पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों के बारे में सही जानकारी पाने की कोशिश की है। 

आज सुबह वे निकट की एक झील पर जाने के लिए निकले तो पड़ोसी भी उसी वक्त प्रातः भ्रमण के लिए निकल रहे थे, उनसे पूछा तो वह भी साथ चलने के लिए तैयार हो गये। उन्होंने इतने वर्षों में आसपास की कोई झील कभी नहीं देखी थी। कुछ तस्वीरें उतारीं। आज की पुरानी फ़िल्म में आशा पारिख थी, वह आँखों से कितना कुछ कह जाती है। नन्हे ने आज काँच के दो बड़े गिलास और छह गिलासों का एक सेट भेजा है। जून ने उसके लिए ‘नागराज’ कॉमिक के आठ अंक मँगवाये हैं। बचपन में वह इन्हें पढ़ता था। अगले महीने उसका जन्मदिन है। उन्होंने बिना पॉलिश की हुई दालें भी मँगवायी हैं, यकीनन उनका स्वाद अच्छा होगा। आज उनके फ़्लैट का काम पूरा हो गया। अगले महीने से किराए पर चढ़ सकता है। 

आज दोपहर वे दोनों महिलाएँ आ गई थीं। उत्साह से भरी और छोटी लड़कियों की तरह बात-बात पर खिलखिलाने वालीं। दोनों आपस में पुरानी मित्र हैं।नूना और जून ने चार-पाँच घंटे उनके साथ बिताये। दक्षिण भारतीय अल्पाहार के बाद शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये। आश्रम के अनेक मुख्य स्थल दिखाये, राधा कुंज के निकट कई तस्वीरें उतारीं। विशालाक्षी मंडप में भजन संध्या में सम्मिलित हुए।अन्नपूर्णा में प्रसाद ग्रहण किया। उनके घर छोड़ने गये तब काफ़ी देर हो गई थी, वापसी में वे नन्हे के यहाँ ही सो गये। सुबह की चाय के बाद घर लौट आये। रात को सोते समय भी उसके भीतर जैसे भीतर एक जागरण बना हुआ था, पर बाहर का कुछ बोध नहीं हो रहा था। नींद कुछ बदल सी गई है। कभी-कभी आँख बंद करने पर कुछ रूप दिखायी पड़ते हैं। 

आज पापाजी से बात हुई, आजकल वह अकेले रह रहे हैं। पढ़ने से उनकी आँख में दर्द होता है, पर वे पढ़ना छोड़ते नहीं। कहते हैं, किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, और अख़बार से समाज व देश की आम जानकारी होती है।आज उसने श्रावण में होने वाली रुद्र पूजा के बारे में एक आलेख का अनुवाद किया।भगवान शिव सबसे शक्तिशाली और कल्याणकारी रूपों में से एक भगवान रुद्र के लिए की जाने वाली एक सुंदर पूजा ! रुद्र का अर्थ है,  जो सभी दुखों का नाश करते हैं ! मन के भीतर एक जागरण बना रहे, वे बेहोशी में कोई कार्य न करें, सारी पूजाएँ और कर्मकांड इसी बात को सिखाने के लिए ही तो किए जाते हैं। जीवन में सजगता के साथ  पवित्रता भी बढ़े, जब किसी वस्तु को पावन कहकर देखते हैं, तो उसके प्रति हाव-भाव कितना बदल जाता है। उनकी नींद भी पावन हो और जागरण भी !  इस रविवार को उनके यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।अभी से उसके मन में उत्साह भर गया है। पिछले वर्ष भी उन्होंने एक बार गुरु पूजा का आयोजन किया था। असम में तो हर वर्ष एक बार करवाते थे, उनके पड़ोसी, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक थे, वही किया करते थे। कल उनकी गली में भी एक शिक्षक के यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।जिसमें वे जाने वाले हैं।  

Friday, July 31, 2026

गीत गतिरूप

गीत गतिरूप

आज सुबह कुछ पुरानी कविताओं को दुरस्त किया। उस समय मात्राओं की गणना के लिए ‘गीत गतिरूप’ नहीं था। काव्यालय की वाणी जी द्वारा निर्मित यह एक उपयोगी डिजिटल सॉफ़्टवेयर है जो काव्य में छंद बद्ध कविताओं की मात्राओं की सटीक गणना करता है। इसमें शब्दों के पर्यायवाची भी दिये गये हैं, जिससे उचित शब्द ढूँढने में समय बचता है।  शाम को टहलने के लिए उन्होंने जैसे ही घर से बाहर कदम बढ़ाया, वर्षा आरंभ हो गई। इस समय थम गई है। समय की धारा मंथर गति से बहती जा रही है, अब लगता है, जैसे न कुछ पाना है, न कुछ जानना है, एक ठहराव सा आ गया है मन में। कल बच्चों के साथ “आदिपुरुष” देखने जाना है। फ़िल्म के बारे में एक विशेष व रोचक बात का ज्ञान हुआ, जहाँ कहीं भी यह फ़िल्म दिखायी जा रही है, एक सीट हनुमान जी के लिए ख़ाली रखी जाती है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी चिंरजीवी हैं और जहाँ राम कथा होती है, वह उपस्थित रहते हैं। अगले हफ़्ते उन्हीं मित्र दंपत्ति ने अपनी बिटिया के यहाँ बुलाया है। बिटिया बाहर गई है, उसका पालतू कुत्ता घर पर है, जिसकी देखभाल के लिए वे दोनों गये हुए हैं। वह इलाक़ा दो घंटे दूर है, बैंगलोर में दूरी किलोमीटर में नहीं बल्कि समय में नापी जाती है। वहाँ उन्हें यात्रा के लिए कुछ ख़रीदारी भी करनी है। गुजरात के कच्छ में आया विनाशकारी चक्रवाती तूफ़ान बिपरजॉय अब कमजोर हो गया है। कच्छ के अलावा और भी कई तटीय ज़िलों पर इसका असर पड़ा। इसके कारण बहुत मात्रा में आर्थिक नुक़सान हुआ। अब यह राजस्थान की ओर बढ़ गया है। जहाँ इसका प्रभाव दिखायी दे रहा है। 

उन्होंने ‘आदिपुरुष’ देख ली है।फ़िल्म में अंधेरे के दृश्य अधिक हैं। कई बार किसी विदेशी फ़िल्म जैसी लग रही थी। फ़िल्म की भाषा भी कुछ और संयत हो सकती थी। हिन्दी के किसी जानकार को संवादों के हिन्दी में अनुवाद दिखा लेने चाहिए थे। फिर भी कुल मिलाकर फ़िल्म अच्छी ही कही जाएगी। वैसे बहुत लोग इसकी आलोचना भी कर रहे हैं। वे सुबह नाश्ते के बाद घर से निकले थे और रात को नौ बजे लौटे। नूना ने यात्रा के लिए जूते ख़रीदे।जून ने घर के लिए सामान ख़रीदा। घर में क्या ख़त्म हो रहा है, क्या लेना है, इसका उन्हें बहुत ध्यान रहता है। 

कल रात सोने में देर हुई सो सुबह भी देर से शुरू हुई। टहलने गये तो प्रतिदिन की तरह धुंधलका नहीं था। दिन निकल आया था।पीले चंपा के फूल, रोज़ जिनकी सुगंध ही आती थी, आज साफ़ दिखायी दे रहे थे। मधु मालती की एक बेल भी एक दीवार पर चढ़ी हुई थी, बहुत सुंदर तस्वीर आयी है उसकी। जून के बनाये नाश्ते में दोसा था और मूँगफली की चटनी, कल छोटी बहन ने उसकी विधि बतायी थी। नन्हे ने उसके लिए लकड़ी का एक और कैनवास भेजा है रंग भरने के लिए, ‘पट्टचित्र’ नाम है उसका, दोपहर को एक घंटा उसमें रंग भरे। ऑडिबल पर हिन्दी के एक प्रसिद्ध लेखक ‘स्वयंप्रकाश’ की आत्मकथा ‘धूप में नंगे पाँव’ का कुछ अंश सुना। बहुत रोचक है। संस्मरण के साथ इसमें यात्रा वृत्तांत भी है और डायरी लेखन भी। शाम को नूतन की एक पुरानी फ़िल्म ‘गौरी’ देखी। जिसमें एक दृष्टिहीन लड़की की दुख भरी कहानी है।आज भी कुछ पुरानी कविताओं की वर्तनी सुधारी। सांध्य भ्रमण के समय छोटे-छोटे गुलाबी फूलों के चित्र उतारे, फूलों का संसार कितना अद्भुत है। ऐसे ही तितलियों और मछलियों का भी। नये घर में लकड़ी का काम अभी भी चल रहा है। यह महीना समाप्त होते-होते पूरा हो जाएगा। चिमनी को छोड़कर, जिसका आना अभी शेष है। 

आज शाम को आकाश में काले घने बादल छाये थे। कितने आकार नज़र आ रहे थे उनमें, लेटे हुए बच्चे का, योगासन करते हुए एक व्यक्ति का भी, चित्र उतारे। कंचन के पेड़ आजकल फूलों से भर गये हैं। जून के महीने में ऐसा होना केवल बैंगलोर में ही संभव है, जहाँ साल भर फूल खिलते हैं। हर सिंगार के फूलों से रोज़ सुबह उनका लॉन भर जाता है। दोपहर को चित्रकला का काम आगे बढ़ाया। आज से बेनजीर भुट्टो की आत्मकथा ‘मेरी आपबीती’ सुननी शुरू की है। कितना संघर्ष भरा जीवन रहा उनका, बच्चों को उनसे दूर रहना पड़ा, क्योंकि पाकिस्तान में उनकी सुरक्षा को ख़तरा था। जून आज सुबह कुछ परेशान थे। लिवस्पेस से उन्होंने चिमनी के लिए कहा था, पर वे पूरा खर्च उठाने को तैयार नहीं हैं, जबकि पहले इसके लिए वे तैयार थे। अब दोनों को आधा-आधा ख़र्चा करना होगा।  

आज ‘विश्व योग दिवस’ है। मोदी जी ने यूएन में एक सौ पैंतीस देशों के लोगों के साथ ‘योग अभ्यास का नेतृत्व किया। जो गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इस बार की थीम है, वसुधैव कुटुंबकम् के लिए योग। यह थीम भारत के ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना को सुदृढ़ करती है। नूना ने सुबह-सुबह एक कविता लिखी, उसे टाइप किया फिर रिकॉर्ड किया। पर योग दिवस के दिन ही योग साधना नहीं कर पायी। सोसाइटी के ‘खेल स्टेडियम’ में जाकर पता चला, योग दिवस के उपलक्ष्य में सुबह साढ़े छह बजे ही वहाँ एक घंटे का सत्र हो चुका है। आज उन्हें मित्र परिवार से मिलने जाना था। दोपहर के भोजन में सखी ने रसम-चावल, भिंडी व रायता परोसा। नन्हे ने ड्राइवर सहित गाड़ी भेज दी थी, वही ले गया। कुछ देर विश्राम करने के बाद सब लोग कमर्शियल स्ट्रीट गये। जहाँ एक दुकान से आगामी कश्मीर यात्रा के लिए सभी ने कुछ न कुछ गर्म वस्त्र ख़रीदे। 

आज वे फिर नेत्रालय गये थे। जून को डेंटिस्ट के पास भी जाना था।कल शाम को घर लौटने के बाद बायीं आँख के बायीं तरफ़ हल्की सी चमक आ रही थी। आँख के सामने एक फ़्लोटर भी था। डाक्टर ने कहा, कैट्रैक्ट के बाद ऐसा होना स्वाभाविक है, कुछ दिनों बाद अपने आप ठीक हो जाएगा। लौटते समय वे फ़्लैट का काम देखने भी गये। कल शाम तक सफ़ाई का काम हो जाएगा और परसों बिजली के बल्ब व पंखे आदि लग जाएँगे। इतवार को बच्चों के साथ वे पुनः जाएँगे। 


Monday, July 27, 2026

सूरज के अठारह पौधे

सूरज के अठारह पौधे


आज भी वे आयुर्वेदिक अस्पताल गये थे। पंचकर्म के अगले अंग ‘अभ्यंग’ का आज प्रथम दिन है। वैद्य ने उन्हें इसके बारे में आवश्यक जानकारी दी। ग़लत आहार-विहार, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, व्यायाम की कमी आदि कारणों से शरीर में त्रिदोष इकट्ठा हो जाते हैं, औषधि युक्त गर्म तेल से मालिश करने से अर्थात अभ्यंग से शरीर को स्वस्थ किया जाता है। इससे तन और मन की ऊर्जा में संतुलन आता है। वात के कारण शरीर में आये रूखेपन को यह दूर करता है। रक्त प्रवाह व अन्य द्रवों के प्रवाह में सुधार आता है। जोड़ों और मांसपेशियों की अकड़न-जकड़न दूर होती है। त्वचा की सारी अशुद्धियाँ दूर होती हैं और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। पाचन तंत्र ठीक होता है।  शिरोधारा के लाभ भी बताये, इससे तंत्रिका तंत्र शांत होता है। नींद की गुणवत्ता बढ़ती है। इसमें जड़ीबूटियों से युक्त गुनगुने तेल को मस्तक पर धारा के रूप में डाला गया। तन कितना हल्का लग रहा है। अभी और तीन दिन स्नेहन व स्वेदन क्रिया होगी। उसके बाद विरेचन क्रिया करायी जाएगी। 

आज अभ्यंग का दूसरा दिन था। शरीर और हल्का हो गया है। शाम को लगभग बीस मिनट तक नूना घर पर ही टहलती रही, जब जून नन्हे और सोनू को लेने गये थे। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने आज भी फ़ेसबुक पर उसकी कविता पर कमेंट लिखा। वह आज अकेले हैं, भाभी अपनी माँ-पिताजी से मिलने गई हैं।कल लौट आयेंगी। वह बहुत साहसी महिला हैं।नूना ने मृणाल ज्योति की पत्रिका में लिखने के लिए पहले कई लोगों को लिखा था, सभी को स्मरण-पत्र भेजे, देखें, कितने लोग अपनी रचनाएँ भेजते हैं। 

आज सुबह वे उठे तो स्वास्थ्य ठीक था, कल की क्रिया के बाद दुर्बलता महसूस हो रही थी। धीरे-धीरे वे सामान्य भोजन करने लगेंगे। लेकिन अब इस बात का ध्यान रखना है कि पुनः शरीर में भारीपन न होने पाये। संतुलित आहार, समुचित व्यायाम, नियमित प्राणायाम और ध्यान, किसी भी व्यक्ति की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अति आवश्यक हैं। आज वे सुबह-शाम थोड़ी देर टहलने भी गये। जीवन जैसे ठहर सा गया है, पर समय बदलते देर नहीं लगती। आज शाम को तेज वर्षा हुई, तब उनके मित्र दंपत्ति यहीं बैठे थे। कश्मीर जाने के लिए थॉमस कुक को बुक करने की बात हुई। पापाजी ने नवनीत में पढ़े एक लेख पर चर्चा की, जो दलित समस्या पर है। उन्हें जैसे पूरा लेख याद ही था, वह बहुत ध्यान से और गहराई से पढ़ते हैं। नूना ने भी पर्यावरण पर कई आलेख पढ़े, समस्या बहुत बड़ी है और जो लोग विकास में समाधान ढूँढ रहे हैं, वे असफल ही होंगे। आज नन्हे ने जून के एक मित्र के पुत्र के लिए किताबों का एक सेट भेजा है, अवश्य उसे पसंद आयेंगी। कल उसके उपनयन संस्कार में उन्हें जाना है। 

आज वे बहुत दिनों बाद आश्रम गये। गुरुजी को भी आमने-सामने बहुत दिनों बाद सुना। वही सादगी, वही सरलता और सवालों के सटीक जवाब। आयुर्वेदिक चिकित्सा के बाद शरीर व मन जैसे नये हो गये हैं। जीवन को हर ओर से गुरुकृपा ही सम्भालती है। गुरुजी के कारण ही यह घर मिला, आश्रम तथा अस्पताल मिला। उन्हीं के कारण ज्ञान मिला, प्रेम शांति और आस्था का वरदान मिला। आज सुबह सवा दस बजे वे जनेऊ संस्कार में शामिल होने भी गये थे, डेढ़-दो घंटे रहे। पूजा काफ़ी देर तक चलती रही। बहुत लोग आये थे। आज वर्षों बाद फ़ेसबुक पर तस्वीर बदली, वर्षों से वही चल रही थी। अब अगले दस वर्ष यही रहने वाली है। बहुत लोगों ने कमेंट किया है। 

आज सुबह वे दो हफ़्ते बाद दूर तक तथा देर तक टहलने गेय। शरीर में हल्कापन आ गया है और मन में भी।संभवत: ऊर्जा व शक्ति लेने के कारण भी, एक टेबलेट फ़ार्म में एक ड्राप फॉर्म में। ! अभी रात्रि के आठ भी नहीं बजे हैं और वे रात्रि भोजन के बाद भ्रमण करके भी आ गये हैं। पढ़ाई-लिखाई के लिए पूरा एक घंटा है। आज शाम को दो छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं। अगले हफ़्ते उनके यूनिट टेस्ट हैं। लगता है, आजकल बच्चे केवल परीक्षा देने के लिए ही पढ़ते हैं, ज्ञान पाने के लिए या पढ़ने का आनंद लेने के लिए नहीं। कल फिर आयेंगी, ऐसा कहकर गयी हैं। आज हफ़्तों बाद जून ढेर सारे फल व सब्ज़ियाँ लाए हैं। पिछले दिनों आहार कितना सीमित था। 

आज उन्होंने अवतार कृष्ण कौल द्वारा निर्देशित उनकी पहली और अंतिम, एक पुरानी श्वेत-श्याम फ़िल्म देखी ‘२७ डाउन’। रमेश बख्शी के उपन्यास ‘अठारह सूरज के पौधे’ पर आधारित है यह फ़िल्म। नायक संजय बचपन से ही पिता के ख़ौफ़ में जीता आया है, उसके जीवन के निर्णय वही लेते हैं और वह उनके परिणामों से भागता रहता है। कितने ही डर मानव के मन में समाये रहते हैं, जिनसे बचने के लिए वह अपने ही ख़िलाफ़ खड़ा हो जाता है। इस फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। शाम को पापाजी से बात हुई। सुबह दीदी-जीजाजी, बड़े भाई, मंझले भाई-भाभी सभी से। भीतर आनंद हो तो वह बाँटना चाहता है। जून ने भी छोटी बहन, अपने एक मित्र व सोनू से बात की। नन्हे ने इतवार के लिए ‘आदिपुरुष’ की टिकट बुक कर दी है। नई फ़िल्म है। 

आज का दिन चन्दर और सुधा के नाम रहा। यू-ट्यूब पर उसका पाठ सुना, फिर हॉट स्टार पर उस पर बना धारावाहिक देखा, कितनी मार्मिक कथा है दोनों की। धर्मवीर भारती का यह उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ वर्षों पहले पढ़ा था। ऐसे ही शेखर - एक जीवनी भी याद है। कभी न कभी पढ़ने या सुनने को मिल जाएगा। पापाजी व छोटी भाभी से बात की। छोटे भाई से बात किये बहुत दिन हो गये हैं। इस इतवार को अवश्य करेंगे। जून आजकल ख़ुश रहते हैं। उनकी कश्मीर यात्रा के लिए टिकट बुक हो चुके हैं।


Friday, July 24, 2026

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

आज शाम को वे एक मित्र दंपत्ति के घर गये, अमेरिका से आयी उनकी बहन से मिलने, जिसका ज़िक्र उन्होंने कुछ दिन पहले किया था। नौ वर्ष पहले वह दिल्ली में रहती थीं, उनके पति व वह स्वयं सरकारी नौकरी में उच्च पदों पर कार्यरत थे। कुछ समय हैदराबाद में भी रह चुकी हैं। जब उनके पति नहीं रहे, तब बड़ी पुत्री उन्हें अपने साथ अमेरिका ले गई। इस बार कई वर्षों के बाद भारत आयी हैं, जयपुर, दिल्ली, बैंगलुरु और मुंबई घूमते हुए वापस जायेंगी। तमिल भाषी होते हुए भी हिन्दी अच्छी बोल लेती हैं, कन्नड़ भाषा भी जानती हैं।  

नूना और जून की पंचकर्म की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। अगले दो हफ़्ते चाय-काफ़ी नहीं लेनी है। हल्का भोजन लेना है। उदर हल्का रहे तो मन भी हल्का रहता है। सुबह वे सूर्योदय की तस्वीर लेने सोसाइटी के गेट से बाहर निकल कर गाँव की तरफ़ गये पर बादलों के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। वापस आकर साधना करते समय देवदत्त पटनायक की आवाज़ में उनकी पुस्तक ‘मेरी गीता’ का कुछ अंश सुना। न जाने कितने कितने अनुवाद और व्याख्याएँ हुई हैं आज तक भगवद् गीता की, कृष्ण ने तो अर्जुन को एक ही बात कही होगी, पर हर लेखक अपने अनुवाद को वास्तविक बताता है, इसी लिए कहा गया है, “हरि अनंत हरि कथा अनंता”। जून आजकल मुग़ल बादशाह अकबर की कहानी पर बना एक टीवी शो देख रहे हैं। नवनीत का जून अंक पर्यावरण पर आधारित है, जिसके बार में जितनी जानकारी लोगों को दी जाये कम है। कर्नाटक जैसे विकसित राज्य में, बैंगलोर जैसे जागरूक शहर में, सड़कों पर अभी भी  कूड़े के ढेर दिखायी पड़ते हैं।ट्रैफ़िक का जो हाल है, वह तो जगत प्रसिद्ध है, हर दिन सैकड़ों नये वाहन आ जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। झीलें सूखती जा रही हैं, उन्हें साफ़-सफ़ाई की भी ज़रूरत है और वर्षा के जल को रोककर रखने के उपायों की भी। एओएल का एक अनुवाद कार्य भी उसने किया, जो पूरे दिन को एक पावन भाव से भर देता है। 

पंचकर्म में आयुर्वेदिक दवा लेते हुए आज दूसरा दिन है। सिर के पिछले हिस्से व दाहिनी आँख में हल्का दर्द है। शरीर के भीतर जो भी फेर-बदल हो रहे हैं, उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप यह स्वाभाविक है। अवश्य ही उनका वजन भी कुछ कम होगा। नूना ने अमेरिका से आयी नयी परिचिता के लिए एक कविता लिख भेजी, उन्हें अच्छी लगी। घुटने के दर्द के लिए व्यायाम पर बनाया जून का वीडियो भी उन्होंने देखा, जिसका लिंक उसने भेजा था। हो सकता है, घुटने के दर्द में उन्हें आराम मिले। शरीर में भारीपन होने से अर्थात वजन बढ़ जाने से उनका दर्द अधिक बढ़ गया है। आज ऑडिबल पर एक नई पुस्तक सुनना आरंभ की। नवनीत में एक-दो अच्छी कहानियाँ पढ़ीं। दीदी के जन्मदिन पर एक कविता उन्हें भेजी। 

आज सुबह नैनी को नहीं आना था, सो वे आराम से उठे। छह बजे टहलते हुए सुबह के समाचार सुने। उड़ीसा में हुई भयंकर रेल दुर्घटना के बारे में सुना, पर इसकी भीषणता का पता तब चला, जब शाम को छह बजे टीवी पर समाचारों में ह्रदय विदारक दृश्य देखे। बालासोर ज़िले में तिहरे रेल हादसे में लगभग तीन सौ लोग मारे गये सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। कोरोमंडल एक्सप्रेस, ग़लत सिग्नल के कारण मुख्य लाइन की बजे लूप लाइन में चली गई, जहाँ एक मालगाड़ी खड़ी थी, टक्कर के कारण उसके कई डिब्बे पटरी से उतर गये और साथ वाले ट्रैक पर आ रही बैंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस से टकरा गये। किसी की छोटी सी भूल की कितनी बड़ी सजा सैकड़ों परिवारों को भुगतनी पड़ी है। उसकी आँखें अभी भी पूर्ववत् नहीं हुई हैं, कुछ और समय लगेगा। इस समय बायीं आँख में हल्की सी जलन है, दायीं आँख में हल्का भारीपन आज भी था, जून ने डाक्टर को दिखाने की बात कही। उसने अगले एक महीने के लिए, डालने वाली दवा दे दी है। अब ईश्वर का ही आश्रय है, जो भी होगा अच्छा ही होगा। 

आज नन्हा और सोनू आये थे। सब मिलकर लंबी ड्राइव पर गये। उन्हें नया बन रहा ले आउट ‘विशुद्ध प्रकृति’ भी दिखाया। नन्हे ने ड्रोन उड़ाया। फ़ार्म हाउस, हरे-भरे मैदानों और झील के सुंदर चित्र भी लिए, कई वीडियो भी बनाये।आज ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा है, चंद्र दर्शन के बाद जून ने तस्वीरें उतारीं। 

आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ है। असम से एक सखी ने बच्चों की योग कक्षा की तस्वीरें माँगी हैं। उस समय हर वर्ष वे लोग बच्चों के साथ पौधे लगाते थे व आसपास सफ़ाई का काम करते थे। दोपहर को पर्यावरण दिवस पर एक पोस्ट लिखी। कुछ देर पहले आयुर्वेदिक अस्पताल की डाक्टर से बात हुई। कल सुबह वहाँ जाना है, स्नेह पान करना होगा। विरेचन  का अगला भाग कल से शुरू हो रहा है।  

आज सुबह ख़ालीपेट वे ‘स्नेहपान’ के लिए अस्पताल गये थे।पहले औषधि युक्त तीस मिली घी पिलाया गया फिर थोड़ा सा गरम पानी भी।जून ने दस बजे ढेर सारे पानी में उबाल कर थोड़े से चावल खाये, उसे दोपहर साढ़े बारह बजे तक जरा भी भूख नहीं लग रही थी। आज एसी नहीं चलाना है, शरीर को गर्म रखना है। अभी दो दिन यही दिनचर्या रहेगी। उसके बाद दो दिन  अस्पताल में रहना होगा।ईश्वर ही इस प्रक्रिया से (शरीर शुद्धि के साथ मन भी जुड़ा है) बाहर ले जाएँगे। सुबह उठी तो ध्यान स्वतः ही होने लगा था, ब्रह्म मुहूर्त में कितनी शांति होती है, वह पवित्र समय है, देवताओं के जागने का समय ! आज शरत चन्द्र की कहानियों पर बनी दो फ़िल्में देखीं, ‘अनुराधा’ व ‘विराज बहू’। पुरानी फ़िल्में कितनी सारगर्भित होती थीं, भावपूर्ण और संगीतमय भी। 

आज सुबह भी वे स्नेहपान के लिए गये थे। आज पचहत्तर मिली घी पिलाया गया। दोपहर के दो बजे तक भूख का नाम नहीं था। आज दिन में एक अच्छी पुरानी फ़िल्म देखी, ‘सरस्वती चन्द्र’। शाम को कुछ देर टहलने भी गये।पापाजी से बात की, उन्हें नवनीत के लेख बहुत अच्छे लग रहे हैं। उसके  लेखन कार्य में एक विराम लग गया है, पहले आँख के कारण अब पंच कर्म के कारण। लेकिन शरीर्व की शुद्धि के लिए यह आवश्यक है। वे भोजन पर कितने अधिक आश्रित हो गये थे। ऐसे भोजन पर भी जो उनके लिए हानिप्रद था। पिछले एक हफ़्ते से चाय के बिना जरा भी दिक्क्त नहीं हो रही है। उसे पूरी उम्मीद है इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर उनका स्वास्थ्य पहले से कहीं अधिक अच्छा होगा। 

आज स्नेहपान का तीसरा दिन है। सुबह साढ़े छह बजे ही वे अस्पताल पहुँच गये थे। नब्बे मिली घी उसे व जून को सौ मिली घी पीना था। वापसी में गुलमोहर के वृक्षों के चित्र खींचे। शाम के चार बजे तक मुँह में घी का स्वाद बना हुआ था। भोजन के बार में सोचने का भी मन नहीं था। शाम को उबली हुई खिचड़ी खायी, जिसे पतीले में बनाना था, कुकर में नहीं। शाम को उनके मित्र दंपत्ति मिलने आये थे, अक्तूबर में होने वाली उनकी कश्मीर यात्रा के बारे में बात करने।उन्होंने कुछ वीडियोज़ देखे और टूर ऑपरेटर से बात की। नन्हे का फ़ोन भी आया। वह घर जा रहा था, रास्ते में ट्रैफ़िक के कारण एक जगह रुका हुआ था।


Monday, July 20, 2026

पंचकर्म का अभ्यास

पंचकर्म का अभ्यास

शाम को हुई वर्षा के कारण मौसम अति सुहावना हो गया है।आज नूना ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ की एक पाकिस्तानी शिक्षिका का इंटरव्यू मोबाइल पर सुन रही है, जो पहले बांग्लादेश में एक चाय बाग़ान में भी रह चुकी हैं। वह कह रही हैं, किन्हीं हज़रत रहमतकार की परंपरा में वह सातवीं पीढ़ी की हैं। जब गुरुजी २००४ में पाकिस्तान गये थे, उन्हीं के यहाँ ठहरे थे। वह बहुत उत्साह से बेसिक कोर्स के बारे में बता रही हैं। सुदर्शन क्रिया से उन्हें जो लाभ हुआ, वह उसे लोगों में बाँटना चाहती हैं। क्रिया से मन की उलझनें समाप्त हो जाती है, अंतर्ज्ञान बढ़ जाता है। कोई चीज़ कठिन नहीं लगती। उनके अनुसार, हरेक को जीवन में कोई न कोई मक़सद चाहिए। जिसका मक़सद जितना बड़ा होगा, रुकावटें भी उतनी आयेंगी, पर कायनात ऐसे लोगों की मदद करती है।वह कहती हैं, दिन में एक समय ऐसा होना चाहिए जब आपकी ऊर्जा चरम पर हो। वह स्वयं दोपहर एक बजे तक बहुत काम करती हैं। उसके बाद साधना में लग जाती हैं। उन्होंने लाहौर में कोर्स भी कराये हैं, जिनमें अनेक लोग शामिल होते हैं। वह बहुत शिद्दत से यह काम कर रही हैं।उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है।उनके अनुसार, गुरुजी जीवन के शिक्षक हैं, वह पहले इंसान हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य और तनाव में कोई संबंध बताया है। तनाव से ही सारी बीमारियाँ होती हैं। गुरुजी के प्रति उनके मन में गहरी श्रद्धा है। यह सब सुनकर नूना को आश्चर्य मिश्रित हर्ष हुआ, संभवत: समाज में आज योग के प्रति पहले का सा विरोध नहीं रह गया है। कई मुस्लिम देशों के प्रतिभागी आश्रम में भी आते हैं। वैसे देखा जाये तो योग एक चिकित्सा प्रणाली है, जो देह और मन दोनों की चिकित्सा करती है। 

आज सुबह उन्होंने निर्धारित समय तक प्रातः भ्रमण किया, योग अभ्यास का भी शुभारंभ हो चुका है। लेखन कार्य भी आरंभ हुआ है, पर अभी भी आँखों को प्रकाश थोड़ा सा प्रभावित करता है। एक सप्ताह और शेष है, जब दवा पूरी तरह से बंद हो जाएगी। आज एक फ़िल्म देखी, ‘एक ही बंदा काफ़ी है’। जिसमें अंततः सत्य की जीत होती है।पापाजी से भी बात हुई, उन्होंने फ़ेसबुक पर पढ़ी उसकी कविता से आनंद मिलने का ज़िक्र किया। शब्दों के माध्यम से ही यदि किसी के ह्रदय में आनंद या उत्साह का लेशमात्र भी पहुँचता है तो लेखन कार्य सार्थक है और इस अर्थ में जीवन भी अर्थवान है। 

आज उसने ‘वैष्णो देवी’ की कथा आगे सुनी। त्रिकूट पर्वत वासिनी माँ की कथा बहुत ही मनोरम है। वह अपना नाम त्रिकुटा बताकर गाँव में जाती हैं। भारती नामकी कन्या को उनमें देवी के दर्शन होते हैं। दैवीय गुणों से युक्त बालक हो या बालिका, युवा हो या वृद्ध सभी के भीतर एक ही तरह के गुण होते हैं। वे प्रसन्नचित्त, धैर्यवान और सबका मंगल चाहने वाले होते हैं। वे साहसी होते हैं और सत्यवान भी। इस कथा में देवताओं का राजा असुरों का अंत भी चाहता है और उनके साथ भी मिला हुआ है। वह उनके द्वारा वैष्णवी देवी को हराना चाहता है ताकि शिव प्रलयंकारी हों और अंततः असुरों का नाश हो। वह मात्र अपना सर्वस्व बचाना चाहता है। वे सब भी तो केवल अपने ही बारे में सोचते हैं। 

आज शाम को वे आश्रम गये थे। कल आने वाले मेहमानों के लिए उपहार ख़रीदे।इस वर्ष ओबीए की मीटिंग सितंबर महीने में कोयम्बटूर में होगी। उसकी तैयारी के संबंध में कमेटी की मीटिंग कल उनके घर पर होने वाली है। आज असमिया पड़ोसी के पोते का जन्मदिन है। वे शाम को गये थे। गैराज में चाट का स्टाल लगा था। केक और चाट खिलाकर उन्होंने स्वागत किया।  

आज दिन भर मौसम अच्छा रहा।दोपहर के विशेष भोज की पूरी ज़िम्मेदारी नन्हे ने ली, उसने स्वादिष्ट पराँठे बनाये। उसने चावल रखने का एक सुंदर डिब्बा भी मँगवाया है। शाम को वे मेहमानों को लेकर आश्रम गये, उन्हें पंचकर्मा केंद्र भी दिखाया। कल नूना का जन्मदिन है। बच्चों ने कहा है, वे सुबह ही आ जाएँगे। कुछ देर देवदत्त पटनायक की ‘मेरी गीता’ सुनी। वह बहुत गहराई से चीजों का विश्लेषण करते हैं। ब्लॉग पर नयी कविता पोस्ट की।  

आज पूरा दिन अच्छी तरह बीता। सुबह बच्चों व जून के साथ केक व नाश्ते का आनंद लिया। मिठाई-फल आदि कुछ सामान लेकर वे शांति धाम गये, जहाँ वृद्धजनों के साथ कुछ समय बिताया।दोपहर को वैष्णवी के साथ ध्यान साधना का। कथा में लक्ष्मी नारायण से विलग हो जाती हैं, जब छह रिपुओं में से एक ‘लोभ’ का प्रकोप हो जाता है। सरल शब्दों में ध्यान की व्याख्या भी की गई थी। माँ काली ने कर्म के महत्व के बारे में भी बताया, धर्मयुद्ध के लिए हरेक को सदा तत्पर रहना चाहिए। षट् रिपुओं का नाश करना है न कि उस आत्मा से कोई द्वेष रखना है, जिसके भीतर ये अवगुण हैं। शाम को वे आश्रम गये थे,  सत्संग में भाग लिया, गुरुजी का सुंदर प्रवचन सुना।असम में जिन महिलाओं व बच्चों को वह योग सिखाती थी। उनमें से एक ने उसके लिए बच्चों द्वारा गाया गया बधाई संदेश भेजा है। उसने भी एक संदेश उन्हें लिखकर भेजा जिसमें गुरुजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी थी, और उस सखी के लिए भी, जो सदा उसके साथ इस काम में सहयोग करती रही थी।  

मौसम आजकल अधिक गर्म नहीं है। दोपहर बाद लॉन में नीचे घास पर बैठकर नवनीत पत्रिका पढ़ी।पौधों को पानी दिया, बेगोनिया का दूसरा गमला भी शिकायत कर रहा है कि उसे धूप की कमी महसूस हो रही है। कल उसे ऊपर छत पर ले आयेंगे। कल से उनका पंचकर्म का विरेचन अभ्यास आरम्भ हो रहा है। जो दस-ग्यारह दिन चलेगा। उम्मीद है, वे इसे भली-प्रकार पूर्ण कर पायेंगे। जन्मदिन पर बच्चों ने उसे नई स्मार्ट घड़ी दी है, जो कई तरह से फिट रहने को प्रेरित करती है। आज भी कई पुरानी परिचितों के बधाई संदेश मिले, जन्मदिन का सर्वोत्तम लाभ यह है कि सबका हाल मिल जाता है। एक पुरानी सखी का फ़ोन भी आया, बहुत दिनों बाद दिल से दिल की  कुछ बातें हुईं।