आज नन्हे ने उनके लिए सुंदर सा एक घड़ी केस भेजा है, जैसे पहले एक बार आभूषण रखने का गुलाबी केस भेजा था। जैसे-तैसे किसी भी डब्बे में वे अपना समान रखें, यह उसे व सोनू को पसंद नहीं। शाम को उससे बात हुई तो तो वे लोग सोनू के माँ-पिता के लिए घर देखने की बात कर रहे थे। असम वाला उनका घर काफ़ी पुराना हो गया है। उस तीन मंज़िल घर में वे सबसे ऊपर रहते हैं, मंझले भाई बीच में। छोटे भाई के न रहने पर उनके पुत्र ने नीचे वाले घर को नया रूप दे दिया है।
कल जून के साथ उन्हें अपने फ़्लैट की इंटीरियर सज्जा के लिए लकड़ी के काम के डिज़ाइन देखने काफ़ी दूर जाना है। वे पूरी तरह से दुनियादारी में उलझते जा रहे हैं। इसी हफ़्ते शनिवार को आँख का आपरेशन है, और आजकल इसमें आधे घंटे से भी कम समय लगता है। कुल तीन घंटों में वे घर वापस आ सकते हैं। शाम को नापा में फूलों की तस्वीरें उतारीं, आजकल चारों ओर फूलों की बहार है।पहली बार क्लब के जाकुज़ी का प्रयोग किया। उसका क्या महत्व है, पता नहीं, पर अच्छा लगा। अब क्लब का काफ़ी भाग बन गया है और उसका बाहरी रूप लॉन आदि भी बहुत सुंदर लग रहा है। जून आज उस सोसाइटी में भी एक तीन कमरों वाले घर की अंतर सज्जा देख कर आये, जहाँ उनका फ़्लैट है।
आज का दिन ‘लिव-स्पेस’ के नाम रहा। वे सुबह टहलकर जल्दी लौट आये ताकि सब काम ख़त्म करके साढ़े नौ बजे तक घर से रवाना हो जायें। दोपहर का भोजन बनाकर साथ ले गये थे। एक युवा महिला ने उन्हें डिजाइन व मेटीरियल आदि दिखाये, लगभग पौने चार घंटे वे वहाँ रहे, आने-जाने में तीन घंटे लग गये। कुल मिलकर सौदा अच्छा रहा, कुछ पैसे देकर उन्हें बुक कर दिया है। अब उनकी टीम साइट पर जाकर देखेगी व डिज़ाइन फ़ाइनल करेगी। यह कंपनी २०१४ में ही बनी है, पर बहुत प्रसिद्ध हो गई है। नन्हे को भी उनका काम पसंद आया, वह आज दिल्ली गया है।आज उनके नये पड़ोसी आये थे, अपने पुत्र के उपनयन संस्कार का निमंत्रण देने, पहली मई को है, जून जाएँगे।
आज गुरुजी को सुना। कर्मों के बारे में किसी ने पूछा तो उन्होंने कहा, आज के भोजन के साथ पहले का बना अचार व दही भी तो खाया जाता है। आगे वह कहते हैं, जो पथ पर आ गये हैं, उनके पिछले कर्म धुल ही गये हैं। जब तक प्रभु नहीं मिले तभी तक माँग है और जब तक माँग है तब तक प्रभु नहीं मिलते। परसों से एओएल का पाँच दिनों का योगपर्व आरंभ हो रहा है।
आज वह महीनों या वर्षों बाद तरण ताल में उतरी। अच्छा लगा, पानी ज़्यादा गहरा नहीं है, न ही ठंडा था। बहुत सारे बच्चे थे। जून बड़े आराम से तैर रहे थे। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, गुरुजी दुबई जा रहे हैं, परसों वह उनसे मिलने जाएगी, वह सभी शिक्षकों से मिलेंगे। जून आज ढेर सारे फल लाए, ढाई हज़ार के, आम, ख़रबूज़ा, सेब, अंगूर आदि। सुबह गुरुजी का एक पुराना वीडियो देखा-सुना, उस समय कितना अच्छा लगा था पर इस समय कुछ याद नहीं आ रहा।
सुबह वाणी के दोष को अनुभव किया, पर अभी-अभी किसी ने कहा, पुनः वह मत दोहराओ। जैसे आकाश पर बादल आकर चले जाते हैं वैसे ही दोष आत्मा पर चिपकते नहीं हैं, आकर चले जाते हैं, यदि उनको साक्षी भाव से देखा जाये। आज एक पुरानी सखी को उसकी शादी की सालगिरह पर शुभकामना देने के लिए फ़ोन किया, पता चला दो दिन पहले उसकी सासु माँ का देहांत हो गया है।
आज दो बार ध्यान किया, कितनी अनोखी स्तब्धता का अनुभव होता है ध्यान में, जो बाक़ी समय वे भूल जाते हैं। कल सुबह अस्पताल जाना है। दायीं आँख में कैट्रेक का ऑपरेशन होना है। अभी-अभी नन्हे से बात हुई, उसने बताया, एक जोड़ी धुले कपड़े लेकर जाना है।उन्हें पहनकर ऑपरेशन थियेटर में जाना होगा।
आज पूरे अठारह दिनों के बाद नूना ने डायरी खोली है। उस दिन वे अस्पताल गये। नन्हा भी वहाँ आ गया था। सर्जरी के बाद उसके घर चले गये। शाम को अपने घर लौटे। कई सावधानियाँ बरतनी थीं और समय-समय पर आँख में दवा डालनी थी। तब से रसोई का काम जून सँभाल रहे हैं। एक हफ़्ते बाद दूसरी आँख की सर्जरी हुई। धीरे-धीरे दृष्टि सामान्य हो रही है। इस बीच ऑडिबल पर काफ़ी कुछ सुना, रेडियो पर गीत व ग़ज़लें भी सुनीं। ध्यान किया। कुल मिलाकर समय का सदुपयोग किया। अभी सोलह दिन दवा और डालनी है, उसके बाद ही दिनचर्या पूरी तरह से सामान्य मानी जाएगी। आज फ़ेसबुक पर एक हरे रंग के पुष्प की तस्वीर डाली। इतने दिनों से ब्लॉग पर भी कुछ नहीं लिखा। कल से आरम्भ करना है। इस बीच कर्नाटक में विधान सभा के चुनाव हो गये, वे वोट डालने भी गये। अभी तक यह तय नहीं हुआ है मुख्यमंत्री कौन बनेगा ?
आज रात्रि भोजन के बाद वे टहलने गये तो आकाश में संध्या की अंतिम लालिमा छायी थी। उसने झट एक चित्र में क़ैद कर लिया, मोबाइल पास में हो तो अनायास ही सुंदर दृश्य कैमरे में अंकित हो जाते हैं। एक जगह दो बिल्लियाँ स्कूटर की सीट पर बैठी थीं, उनका चित्र वे जब भी कभी देखेंगे, वह शाम याद हो आएगी। वापस आकर स्वास्थ्य संबंधी एक रोचक टेड टॉक सुना।अब वह एओएल का अनुवाद कार्य भी ले सकती है। पापाजी ने बहुत दिन बाद फ़ेसबुक पर उसकी कविता पढ़कर ख़ुशी ज़ाहिर की। सुबह वे चेकअप के लिए नेत्रालय भी गये थे, अब तीन महीने बाद जाना है।

