Friday, April 10, 2026

टैको और बुरीटो

टैको और बुरीटो


आज दोपहर बाद जून उसे रिलाइंस ट्रेंड्स ले गये। पहली बार पाँच कुर्ते एक साथ ख़रीदे। पापाजी के लिए एक स्वेटर भी लिया। दिन भर वर्षा होती रही। सोलर पैनल में बिजली का न्यूनतम उत्पादन हुआ, मात्र पाँच यूनिट, धूप वाले दिन बीस यूनिट तक हो जाता है। तीन दिन बाद उन्हें यात्रा पर निकलना है। पापाजी उनके आने की राह देख रहे हैं। जून ने छोटी बहन के नये फ़ैमिली ट्री के लिए फ़ोटो प्रिंट कर लिए हैं।


आज शाम जून कगली पूरा थाने में सर्कल इंस्पेक्टर से मिले, साथ ही बेसकॉम के एक अधिकारी से भी। वे लोग कल सोसाइटी में आयेंगे। असोसिएशन के काम के सिलसिले में उन्हें नये-नये लोगों से जान-पहचान के साथ, नये अनुभव भी हो रहे हैं। 


आज वे दोनों एक नये परिचित परिवार से मिलने गये। संयोग वश उनका जन्मदिन था, केक, बोंडा व मिठाई से स्वागत किया। वापसी में एक रिटर्न गिफ्ट भी। सुबह घर पर मीटिंग थी, परसों जून को सोसाइटी के बिल्डर के दफ़्तर भी जाना है। विशेष सभा की सूचना दे दी गई है। 


आज बहुत दिनों बाद नूना ने डायरी उठाई है। यात्रा से आने के बाद से सर्दी लगी हुई थी, गला चुभ रहा था। आज कोरोना टेस्ट कराया है, रिपोर्ट दो-तीन दिनों में आएगी। सुबह टहलने गई तो कुछ तस्वीरें खींचीं, एक फ़ोटो ‘प्रतिबिंब’ कई लोगों को अच्छा लगा।जून अपने काम में फिर पूरी तरह जुट गये हैं। 


सुबह पाँच बजे नींद खुली। घर से आने के बाद ‘साधना’ पूरी तरह से आरम्भ नहीं हुई है। रिपोर्ट आनी बाक़ी है, नेगेटिव ही होगी। उसे याद है, वहाँ खुले में प्राणायाम, ध्यान आदि करती थी, तभी सर्दी लगी होगी।पापाजी ने उससे लेखन के बारे में पूछा।कविता लिखना जैसे छूट ही गया है, फिर किसी दिन अपने आप ही रस बरसेगा काव्य का। छोटे भाई की नातिन के लिए उसके पहले जन्मदिन पर एक कविता लिखी है। भतीजी व भांजी के छोटे पुत्र के लिए भी।


आज भी रिपोर्ट नहीं आयी। सोनू की रिपोर्ट निगेटिव आयी है। पापा जी से बात हुई, कह रहे थे, बहुत सी बातें भूल जाते हैं, अब अकेले रहने में थोड़ी दिक़्क़त होने लगी है। परमात्मा उनकी सहायता करेंगे। नन्हा व सोनू आये थे, चायनीज सब्ज़ी व चावल बनाये दोनों ने, शाम को कॉफ़ी। दोपहर को सबने जुरासिक वर्ल्ड देखी, बहुत रोमांचक फ़िल्म है। 


आज सुबह पक्षी विहार से शुरू हुई और शाम विलेज ड्राइव पर समाप्त हुई। दोपहर को पहली बार दम बिरयानी बनायी। शाम को सूर्यास्त के चित्र उतारे। बाइबिल में आये विरोधाभासों पर एक चर्चा सुनी।चर्चाकार ने अलग-अलग पुस्तकों में सुसमाचारों के विवरण और वंशावलियों में आये अंतर का ज़िक्र किया। बाइबिल में उत्पत्ति के दो वृत्तांत हैं और ईसामसीह की मृत्यु के विवरण भी अलग-अलग हैं। शायद इसलिए कि इसे कई लोगों ने लिखा था और बाद में संकलित कर दिया गया। लेकिन इसके मूल संदेश में इन विरोधी बातों के कारण कोई अंतर नहीं आता। 


शाम को पापाजी का फ़ोन आया, उन्होंने नूना की कविताएँ पढ़ीं, लेख भी। कह रहे थे, संभवत: उसके पिछले जन्म के संस्कार जागृत हुए हैं। उसने उन्हें बचपन में घर पर मिले संस्कारों की बात कही। उन्हीं से उसे प्रेरणा मिली है कि अपना समय व ऊर्जा परमात्मा को समर्पित रचनाओं को लिखने में लगानी हैं। 


आज वे सोसाइटी में रहने वाली एक परिचिता की बिटिया के विवाह समारोह में होटल ललित अशोक गये।वापसी में यहाँ की प्रसिद्ध कृत्रिम झील सैंकी टैंक देखने के लिए रुके, जो वहाँ से नज़दीक थी, किंतु उसका प्रवेश द्वार बंद था। यह टैंक बहुत पुराना है और सैंतीस एकड़ भूमि में फैला है, इसकी अधिकतम चौड़ाई आठ सौ मीटर है। जून किसी काम के सिलसिले में आज नापा के एक अन्य निवासी के यहाँ गये, उनकी पत्नी हिन्दी धारावाहिक “घर घर की कहानी” को कन्नड़ में डब करने का काम कर रही हैं।


आज घर पर असोसिएशन की विशेष सभा हुई। कमेटी ने दो प्रस्ताव रखे थे, पर पास नहीं हो पाये। अगली मीटिंग मार्च में होगी। दोपहर को नन्हे ने मेक्सिकन खाना बनाया था, “टैको और बुरीटो” बहुत स्वादिष्ट लगा। लगभग एक महीने बाद शाम को वे आश्रम गये। वहाँ जाते ही एक अनोखी ऊर्जा का अहसास होता है। गुरुजी शाम को एक बार नित्य दर्शन देते हैं, पर तब तक वह जा चुके थे, ऐसा चौकीदार ने बताया। वे सूचना केंद्र भी गये, मुख्य द्वार पर जो होर्डिंग लगी है, उसका प्रिंट पुराना हो गया है। उसे बदलवाने के लिए जून ने बात की। अगले महीने दो दिन तक सुबह एक घंटे के लिए गुरुजी का भगवद् गीता का कार्यक्रम है, जून ने कहा है, वह उसे छोड़ आयेंगे।बहुत दिनों के बाद आश्रम में गुरुजी को सुनने का अवसर मिलेगा।  


आज दिन भर सुबह देर से उठने का असर बना रहा। रात्रि की नींद से जो शक्ति शरीर व मन एकत्र करता है, यदि सुबह, समय से न उठकर तंद्रा में व्यतीत हो, तो सारी ऊर्जा व्यर्थ ही चली जाती है।भगवद् गीता के लिए रजिस्ट्रेशन हो गया, परसों पहचान पत्र लेना है।


आज कुन्नूर में भारतीय वायुसेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जनरल विपिन रावत तथा उनकी पत्नी का देहांत हो गया। उनके साथ बारह जवान और थे। वे कोयंबटूर के सुलूर एयरबेस से वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज जा रहे थे।घने बादलों और धुंध के कारण शायद पायलट सामने ठीक से देख नहीं पाया, जिससे हेलीकॉप्टर पहाड़ों या पेड़ों से टकरा गया।


आज सुबह वे दोनों आश्रम गये, फिर शेखर नेत्रालय। लगभग दो वर्ष बाद आँखों की जाँच करवायी।एक नया चश्मा बनने दिया है।वहाँ से नन्हे के घर चले गये। सोनू ने बहुत अच्छी तरह से स्वागत किया। उसने अपने ऑफिस के मज़ेदार किस्से भी सुनाये। नूना ने छोटे भांजे के जन्मदिन पर कविता लिखी।


आज दो वर्षों के बाद पहली बार आश्रम में किसी कोर्स में गुरुजी को सुना।कल भी जाना है।भगवद् गीता के आठवें अध्याय की व्याख्या अति सरल लग रही थी। इसमें अर्जुन श्रीकृष्ण से ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ के बारे में प्रश्न पूछते हैं।श्रीकृष्ण ने कहा, परम अविनाशी तत्व ही 'ब्रह्म' है और प्रत्येक शरीर में जीवात्मा का रूप 'अध्यात्म' है।जीवों के उन भावों का मिट जाना कर्म कहलाता है, जो उनके भीतर अच्छे या बुरे संकल्प पैदा करते हैं।पाँच भूत अधिभूत हैं और परमात्मा का विराट स्वरूप अधिदैव है, जिसमें सूर्य, चन्द्र, वरुण आदि सभी देवता स्थित हैं। कृष्ण स्वयं सभी देहधारियों में अंतर्यामी रूप से रहते हैं। आज नन्हा व सोनू कर्नाटक के हसन जिले में पश्चिमी घाट पर स्थित एक पहाड़ी स्थान सकलेशपुर गये हैं। यहाँ अति प्राचीन सकलेश्वर शिव मंदिर है। टीपू सुल्तान का एक क़िला भी है।  

Thursday, April 9, 2026

बैनरघट्टा नेचर कैंप’

बैनरघट्टा नेचर कैंप


आज शाम वे दोनों आश्रम गये थे। वहाँ संगीतमय फ़ौवारे चल रहे थे, और लड़ियों के प्रकाश से विशालाक्षी मंटप सजा हुआ था। वीडियो कॉल पर पापाजी को आश्रम के दर्शन कराये। जून ने अपने एक मित्र को भी आश्रम का सौंदर्य दिखाया। कुछ देर वहाँ के दिव्य वातावरण में बैठे रहे। स्टोर से कुछ किताबें और उपहार ख़रीदे। दिवाली के लिए घी के दीपक भी लिए। नूना दोपहर को तीन घंटे अनुलेखन कार्य करती रही। पिछवाड़े के बगीचे में पपीते का पेड़ जून ने कटवा दिया है, उसके स्थान पर दूसरा पेड़ लगा दिया है। सौ से अधिक फल दिये होंगे इस एक वृक्ष ने, उन्होंने कई लोगों को वितरित भी किए। भारत ने सौ करोड़ वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बना लिया है।


पापाजी से बात हुई तो उन्होंने कहा, दुनिया में कई लोग ठगने के लिए बैठे हैं, हरेक को सतर्क रहना होगा। साइबर अपराध की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। इस उम्र में भी वह नियम से दो अख़बार पढ़ते हैं, ये समाचार उन्हें वहीं से मिलते हैं। शाम को जून एक नयी झील दिखाने ले गये, जिसका नाम मरियापुरा झील है, थतगुप्पे नामक गाँव में स्थित है। गुरुजी पर बनी एक कॉमिक बुक पढ़ी, बहुत रोचक है।जून प्रतिदिन नौ बजे दफ़्तर जाते हैं, बारह बजे लौट आते हैं।आज उन्होंने सोसाइटी के लिए फ़ैसिलिटी मैनेजर का इंटरव्यू लिया।  


आज शाम जून का हाथ भाप से जल गया, वह मूँग दाल का हलवा बना रहे थे। दाल कुकर में भूनी थी, नूना ने पानी डाला तो भाप ऊपर आ गयी, दो सेकंड ही छुआ होगा भाप ने, पर बहुत ही दर्द हुआ। ठंडे पानी में हाथ रखने से लाभ हुआ।आज नन्हा अपने दो सहयोगियों के साथ किसी अन्य कंपनी के मर्जर की बात करने गया है। कल उसके यहाँ जाना है।


आज सुबह सवा छह बजे वे दोनों नन्हे के यहाँ से लौट आये, कल रात वहीं रुक गये थे।सुबह जून मीटिंग से देर से लौटे। काम आगे बढ़ रहा है, उन्हें यह काम अच्छा लग रहा है। कह रहे थे, दिल की जगह दिमाग़ से काम लेना उन्हें अच्छी तरह आता है।पापाजी से बात हुई, वह अपने मित्र की तेहरवीं में नहीं गये। वह कर्ता भाव से मुक्त होने की बात भी कह रहे थे। नूना से कहा, एक ग़ज़ल में कहीं पर लय टूट रही है, उसे ठीक कर ले। वह कल उसे दुरस्त करने के बाद दुबारा भेजेगी।कल एक मित्र परिवार आ रहा है, वे लोग एक-दो दिन उनके यहाँ रुकेंगे।


सुबह नौ बजे मेहमान आ गये थे। शाम की चाय के बाद जून उन्हें झील पर ले गये और उसके बाद सभी टीके फॉल अर्थात थॉटिकल्लू झरना देखने गये। यह मौसमी झरना अति विशाल और बेहद आकर्षक है, वहाँ तक जाने का रास्ता भी अति रोमांचक है।वे सब कभी बैठ कर कभी एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर फिसलन भरी चट्टानों पर बढ़ते हुए ऊपर पहुँचे, तो वहाँ का नजारा अतुलनीय था। अति वेग से श्वेत जल धाराएँ बहती हुई आ रही थीं। वापसी में जून एक अन्य झील दिखाने ले गये। सबने कई सुंदर तस्वीरें उतारीं। रात्रि भोजन में पनीर  की सब्ज़ी जून ने बनायी। उनकी बिटिया को यहाँ रहना अच्छा लग रहा है।अमेरिका में रहने वाले उनके पुत्र से भी बात की।


आज सुबह नाश्ते के बाद जून सभी को 40 एकड़ में फैले पिरामिड वैली स्थान दिखाने ले गये। जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा दस मंज़िल ऊँचा मैत्रेय बुद्ध ध्यान पिरामिड है।इसे ब्रह्मर्षि पत्रिजी ने 2003 में बनवाया था।स्वागत कक्ष में उन्हें ध्यान का महत्व बताया गया और छोटा सा ध्यान कराया भी गया, ताकि मुख्य हॉल में जाकर सभी को ध्यान का कुछ न कुछ अनुभव हो सके। दोपहर को लौटकर पहली बार नूना ने शेफ़ कॉर्नर से कुछ भोजन मंगाया, कुछ घर पर बनाया। कल सुबह मेहमान वापस जा रहे हैं। 


जून को कर्नाटक के राज्य दिवस पर एक छोटा सा भाषण देना है। जिसका कुछ अंश उन्हें कन्नड़ भाषा में बोलना होगा।उन्होंने तैयारी कर ली है। रविवार को जून के पूर्व अधिकारी के पूरे परिवार के लिए आयोजित विशेष भोज अच्छा रहा। नन्हा व सोनू अपने कुक से एक दो व्यंजन बनवा कर ले आये थे। जून ने उन्हें घर दिखाया तथा सोसाइटी का एक चक्कर लगवा कर लाए। शाम को असम के एक पुराने परिचित आये, वे आश्रम में एडवांस कोर्स करने आये थे, गुरुजी से भी मिले। उसी समय ‘हेलोवीन’ के लिए विचित्र पोशाकों में सजे बच्चे ट्रीट लेने आये।बड़े उत्साह में भरे वे बच्चे एक घर से दूसरे घर जा रहे थे, जैसे वे लोग बचपन में लोहड़ी माँगने घर-घर जाते थे। 

राज्योत्सव का कार्यक्रम अच्छा रहा।आज गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान किया। उन्होंने कहा, जब कोई प्रसन्न होता है, भीतर कुछ फैलता है, जब दुखी होता है, भीतर कुछ सिकुड़ता है। जो फैलता व सिकुड़ता है, वह अहंकार है। आत्मा न कभी फैलती है, न कभी सिकुड़ती है।यदि किसी के भीतर अहंकार बना हुआ है, तो यह घाव है, जिसे चोट लगेगी तो दर्द भी होगा। जब दर्द होगा तभी अहंकार का अहसास भी होगा। प्रकृति या परमात्मा चेताते हैं कि यदि दर्द से बचना है तो इस अहंकार से छुटकारा पा लो, यह सारे अनर्थों की जड़ है। इसे मिटाने का एक ही तरीक़ा है, प्रेम, वे प्रेम को प्रकट होने से रोकते हैं और स्वयं को अन्यों से काट लेते हैं। परमात्मा प्रेम है और वे परमात्मा का अंश होने से प्रेम ही हुए !   

     

दिवाली की तैयारी चल रही है।छत पर लाइट्स भी लग गई हैं। जून ढेर सारे फूल ले आये हैं। नन्हे ने दिये भेजे हैं। बड़ी ननद ने चिक्की भेजी है। कल सुबह डेंटिस्ट के पास भी जाना है, नूना को दायीं तरफ़ का ऊपर वाला एक विजडम टूथ निकलवाना है। इन्हें अक़्ल दाढ़ क्यों कहा जाता है, शायद इसलिए कि यह काफ़ी बड़े होने के बाद निकलते हैं।


आज शाम  नन्हा और सोनू आ गये थे, पूजा के बाद सबने दीपक जलाये। सभी परिवार जनों से बात की, विशेष भोज किया और पैदल व कार से घूम कर सोसाइटी के घरों में जल रहे दीपक और लड़ियाँ निहारीं। बाद में वे लोग वापस चले गये। 


आज गोवर्धन पूजा है, यानि छप्पन भोग बनाने का दिन। आज के दिन मंदिरों में विशेष प्रसाद बनाया जाता है। पापा जी ने बताया, उन सभी ने मंदिर में बना भोजन दोपहर को ग्रहण किया। छोटी बहन एक चित्र बना रही थी। कल भाईदूज पर वे लोग दीदी से मिलने जा रहे हैं। 


आज भाईदूज पर नूना ने सभी भाइयों से बात की। जून ने कहा है, इस बार नये साल का स्वागत वे लोग शहर की भीड़भाड़ से दूर जंगल में ‘बैनरघट्टा नेचर कैंप’ में रहकर करेंगे।आज ही वे लोग जिसे देखने गये थे। 


 


Wednesday, April 8, 2026

गोलू का आयोजन


गोलू का आयोजन


आज गांधी जी का जन्मदिन है और शास्त्रीजी का भी। नूना ने सुबह उनकी आवाज़ में एक संदेश सुना, फिर उन पर बनी एक फ़िल्म (वृत्त चित्र) का कुछ भाग देखा। गांधी जी के बारे में फ़ेसबुक पर एक पोस्ट भी प्रकाशित की।उसने हिंदी में अनुवाद का काम पूरा करके बहुत दिनों बाद एक चित्र बनाया।सुबह-सवेरे एक कविता लिखी थी।रात को एक विचित्र स्वप्न देखा, जिसमें कई लोग हैं, एक काली सी लड़की है, जो उससे किसी बात के लिए बार-बार आश्वासन चाहती है, नूना चुप है, पर अंत में मुस्कुरा देती है तो वह खुश हो जाती है। अवश्य यह किसी पिछले जन्म की बात होगी। मन के भीतर कितने भाव, कितने दर्द छुपे रहते हैं, सभी को निकाल कर देख लेना है। आत्मा को भीतर रहने का स्थान भी तो चाहिए। यदि वहाँ राग-द्वेष का वास हो तो आनंद कहाँ वास करेगा? गुरुजी का सुमिरन अब बना रहता है और मन में एक शीतलता का अनुभव भी। कबीरदास ने इसीलिए कहा है, बलिहाररी गुरु आपने, जिन गोविंद दियो बताय। परमात्मा स्वयं तो आ नहीं सकता, वह अपनी जगह गुरु को भेजता है, उसे कोई तन तो चाहिए न, गुरु साक्षात ईश्वर होते हैं ! जून दोपहर बाद मीटिंग के लिए गये, तीन घंटे बाद लौटे। एक किरायेदार व मकान मालिक का झगड़ा हुआ, उन्हें अच्छा नहीं लगा।कल नन्हा और सोनू आयेंगे, माली आज ही आकर चला गया, सो कल उनका स्वागत वे ठीक से कर पायेंगे।  


इतवार के दोपहर के भोजन के बाद वे बच्चों के साथ उनके घर चले गये। घर बहुत सुंदर लग रहा था, सभी कमरों में नये पर्दे लगे हैं, दीवारों पर नया पेंट और नयी तरह की, कई रंगों वाली बत्तियाँ भी लगायी हैं। शाम से कुछ पहले अति विशाल बीटीएम झील देखने गये, अनेक पंछियों का बसेरा है वहाँ, अनेक पक्षी बाहर से भी आते हैं। अन्य कई लोग झील किनारे घूमने आये थे।शाम को नन्हा और जून ‘महेंद्रा एक्सयूवी ७००’ गाड़ी बुक करने गये, मिड नाईट ब्लैक रंग की है।एक दिन पहले सोनू अपनी उदयपुर वाली सखी के गृह प्रवेश में कुछ खाकर आयी थी, उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं था।आज दो पोस्ट लिखीं। किसान आंदोलन हिंसक होता जा रहा है, विपक्षी पार्टियाँ किसी भी तरह इस मुद्दे को बनाये रखना चाहती हैं। नवरात्रि का उत्सव आने वाला है, इस महीने दो जन्मदिन और दो विवाह की सालगिरह आती हैं, देवी माँ की स्तुति के साथ, सभी के लिए कुछ नूना कुछ लिखेगी।देवी पुराण भी पढ़ने का विचार है। राजनीतिक चर्चा सुनने से बेहतर होगा वह कन्नड़ भाषा सीखना पुन: आरंभ करे। 


सुबह वे सोमनहल्ली तक घूमने गये, बादलों के कारण सात बजे भी आकाश सुबह पाँच बजे जैसा लग रहा था।दिन भर प्रतीक्षा कराने के बाद शाम से ही हल्की बूँदाबाँदी हो रही है।जून आज भी दफ़्तर गये थे, कल सुबह उन्हें फिर साढ़े आठ बजे जाना है, उनकी व्यस्तता बढ़ती जा रही है। घर पर एक महिला मिलने आयीं, वह भी असोसिएशन की कमेटी में हैं। उनके पतिदेव पहले इसरो में काम करते थे। एक बिहारी प्रोफ़ेसर भी आये। फंड जमा करने के सिलसिले में मीटिंग हुई। 


आज नवरात्र पर गुरुजी का एक वीडियो देखा, कितनी सुंदर व सरल भाषा में वह देवी की महिमा का गान कर रहे थे। मंदिर की विशेष सज्जा के लिए जून ढेर सारे फूल लाए हैं।आज से फलाहार भी शुरू किया है। घुटने में हल्का दर्द था, जून ने दो बार घुटने के व्यायाम करवाये।काफ़ी आराम मिला। असम में एक पारिवारिक मित्र के पुत्र का विवाह है, आज संगीत का कार्यक्रम है, उन्होंने उपहार में गूगल होम भेजा है, आज के बच्चों की पहली पसंद तो यही है। पापाजी से बात हुई, वृद्धावस्था के कारण अब उनका कष्ट बढ़ने लगा है। लंबी उम्र वरदान भी है और अभिशाप भी, परमात्मा ही जाने, अब कोई कम तो कोई ज़्यादा क्यों जीता है। उनके यहाँ एक बिल्ली आती है, जिसे वह दूध आदि देते हैं, नन्हे ने उसके लिए कैट फ़ूड भेजा है।   


आज सोसाइटी में वार्षिक सामान्य सभा संपन्न हो गयी। नन्हा व सोनू जल्दी आ गये थे, वे भी शामिल हुए और बाद में कुछ लोगों को विशेष नाश्ता भी कराया। शाम को उनके जाने के बाद वे आश्रम गये। बादल दिन भर बने रहे थे, बाद में बरसने भी लगे। आश्विन आ गया है, पर यहाँ तो जैसे सावन-भादों ही चल रहा है। नैनी ने पेड़ से ढेर सारे पपीते तोड़कर दिये।


आज पहली बार वे एक विला में स्थित सोसाइटी का अस्थायी क्लब देखने गये, जहां कैरम, बिलियर्ड, कार्ड रूम तथा जिम भी है। सुबह नींद खुलने से पूर्व मन में दो शब्द तेज़ी से आये, बासी दही और गिफ्ट्स ! लगा, पहला पदार्थ नहीं खाना है और दूसरा अधिक से अधिक बाँटना है। 


भावी पड़ोसन ने अपने यहाँ नवरात्र की सज्जा देखने के लिए बुलाया, जिसे यहाँ ‘गोलू’ कहते हैं।जून उसे वहाँ छोड़ते हुए दफ़्तर चले गये, पहले आयुध पूजा हुई फिर प्रसाद मिला। उनके यहाँ  मूर्तियों का खजाना है।


आज सुबह नूना असोसिएशन कमेटी में जून के सहयोगी की पत्नी से मिलने उनके घर गई। उनका टैरेस गार्डन देखा, छोटे-बड़े गमलों में लगे बीसियों पौधे पूरी छत को भरे हुए थे, चलने की जगह भी नहीं है।उनकी लाइब्रेरी भी देखी, दीवारों में बनी लंबी आलमारियों में किताबें भरी हुई हैं। ऊपर वाली पुस्तकें निकालने के लिए एक सीढ़ी भी रखी है। बाग़वानी व किताबें पढ़ना, दोनों में केवल उनके पतिदेव को ही रुचि है।


आज सोनू का जन्मदिन उन्होंने सोल्लास मनाया। सुबह भांजा आ गया था, बाद में नन्हा, सोनू, उसकी मौसेरी बहन व ममेरा भाई और उसकी पत्नी। शाम को छोटे भाई से बात हुई, उसकी नातिन का जन्मदिन अगले महीने है, निमंत्रण दे रहा था। पिछले दिनों सोसाइटी में कुछ साइकिलें चोरी हो गई थीं, जो अब मिल गई हैं। पता चला, एक बारह वर्ष का लड़का उन्हें ले गया था और दो हज़ार में बेच चुका था। पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड्स को जब कड़े शब्दों में समझाया, तो वे इस केस को सुलझा पाये। अब सभी चैन की सांस ले रहे होंगे। पापाजी ने बताया, कैट फ़ूड मिल गया है।वह अगले हफ़्ते अपने पुराने मित्र व सहकर्मी की तेरहवीं में जाएँगे।कहने लगे, फल जब पक जाता है, तब गिरता है। पुरानी फसल कटती है तो नये बीज बोए जाते हैं। वह अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हैं और मृत्यु के लिए भी तैयार हैं। 


 


Tuesday, April 7, 2026

अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब

  अनंत से टक्कर - माइकल फ़िशमैन की किताब 


आज मृणालज्योति में शिक्षक दिवस मनाया गया। एक शिक्षिका ने उनकी तरफ़ से उपहार ख़रीद कर बाँटे, तस्वीरें भेजी और शाम को एक अन्य शिक्षिका ने फ़ोन पर बात की।नूना के मन में  कितनी ही स्मृतियाँ सजीव हो उठीं। सुबह रामचंद शुक्ल का “कविता क्या है” निबंध सुना, कविता के बारे में कल रात को भी यू ट्यूब पर सुना था। सारे विचार और भाव गुनते-गुनते मन काव्यमय हो चुका था। दोपहर को एक लेख लिखा, काव्यालय में भेजा है, आगे हरि इच्छा! शाम को पापा जी से बात की, आत्मज्ञान पाने का ख़्याल वह संतों, महात्माओं के लिए छोड़ देना चाहते हैं, पर नूना को लगता है, ध्यान और समाधि का अभ्यास करना उनका काम है, शेष परमात्मा की कृपा! 


सुबह वे टहलने गये तो भीतर एक स्थिर तत्व की धारणा की। शरीर चल रहा था, पर भीतर कोई स्थिर था। बाद में प्राणायाम के बाद बाहर शोर था, भीतर मौन था। शाम को ध्यान के लिए बैठी तो मंत्रजाप के साथ अर्थ भी भासित हो रहा था। शाम को पापाजी को बताया, चेतना चारों ओर है, मन को उसकी ओर ट्यून करना है, अर्थात मन का सुर उसके साथ मिलाना है। दो दिन बाद यहाँ गणेश उत्सव आरम्भ हो रहा है, सुंदर पंडाल पहले ही लग गया है। एक दिन नैनी ने एक फ़ार्म हाउस में स्थापित गणपति को देखने को भी बुलाया है।


आज का दिन गणपति के नाम था, सुबह फार्म हाउस, दोपहर को पड़ोसी के यहाँ और शाम को सोसाइटी की सार्वजनिक पूजा में वे सम्मिलित हुए।ललिता सहस्रनाम का पाठ भी हुआ, कल दोपहर विष्णु सहस्रनाम का जाप है, पीत रंग के वस्त्र पहनकर जाना है, परसों हरे। 


आज ग्यारह सितम्बर की घटना को हुए बीस वर्ष हो गये, नूना को आर्ट ऑफ़ लिविंग कोर्स किए भी। गुरुजी ने आज मुरुगन मंजुल वाटिका का उद्घाटन किया।


आज गणेश पूजा का विसर्जन हो गया। उन्होंने शयन कक्ष के बाहर बने बड़े से छज्जे पर बैठकर एक ट्रैक्टर पर गणपति की सजी-धजी विशाल प्रतिमा को ले जाते हुए देखा।कुछ लोग नाच रहे थे, कुछ एक-दूसरे पर रंग लगा रहे थे, ढोल आदि बज रहे थे। 


आज छोटी ननद से एक परिचिता के बारे में बात हुई। इसी महीने कोर्ट में केस की अंतिम तारीख़ है, शायद तलाक़ का फ़ैसला हो जाये। परसों नूना से उसके पति ने बात की थी, कह रहा था, रिश्ते निभाना इतना सरल भी नहीं होता।पत्नी के ख़िलाफ़ तलाक़ का केस उसी ने दाखिल किया है और अब चाह रहा है, समझौता हो जाये, पर इसके लिए पहल भी ख़ुद नहीं करना चाहता। कोई और उसकी बात पत्नी को जाकर बताये और वह सब कुछ भुलाकर उसे माफ़ कर दे।कितना विचित्र है मानव का मन ! अपनी गलती देखना ही नहीं चाहता। अक्सर पति-पत्नी एक दूसरे से सदा परेशान रहते हैं। अब हर समय कोई किसी की जी-हजूरी तो नहीं कर सकता, हर आत्मा स्वतंत्र है। जीवन सभी को एक सा मिला है, ताली दोनों हाथ से बजती है। 

 

आज हिन्दी दिवस पर हिंदी भाषा पर पापाजी से चर्चा हुई, ध्यान के बारे में भी।सजगता ही ध्यान है, सजगता ही ज्ञान है, वही शांति है और वही प्रेम है। जब वह सजग होती है, भीतर एक शक्ति का अनुभव होता है। कल रात साढ़े ग्यारह बजे घर की सारी बत्तियाँ अपने आप जल गयीं, नींद खुल गई, फिर देर तक नहीं आयी। ऑटोमेशन में ही शायद कुछ गड़बड़ी हुई।


आज दोपहर वे कब्बन पार्क घूमने गये। यह पार्क १८७० में बनाया गया था, ३०० एकड़ में फैला है। वहाँ के राज्य पुस्तकालय के हिन्दी विभाग में कई किताबें देखीं। तेलगू कवि सी एन रेड्डी की किताब ‘कविता मेरी सांस’ की एक सुंदर कविता पढ़ी। डिजिटल फॉर्म में उसे यह पूरी किताब मिल गई है। 

आज मोदी जी का जन्मदिन है।नूना ने उनके लिए एक कविता लिखी। उन्होंने शंघाई में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता ग्रहण करने को मान्यता नहीं दी, बल्कि इसे ग़लत बताया है।उनके अनुसार यह समावेशी सरकार नहीं है। इंसानियत के नाते भारत फिर भी उनकी सहायता करना चाहता है। भांजी और भतीजी का जन्मदिन भी एक दिन पड़ता है, उनके लिए भी उसने कविताएँ लिखीं। आज सुबह नींद खुली तो एक स्वप्न में ड्राइवर एक गाड़ी को गोल-गोल घुमा रहा था, जैसे मन कल्पना के घोड़े दौड़ाता है, पर कहीं नहीं पहुँचता। वास्तव में आत्मा को कहीं पहुँचना ही नहीं है, थमकर ख़ुद को देखना भर है!  


कल सुबह वे एक पुराने मित्र के यहाँ गये थे, एक दिन व एक रात बिताकर आज लौट आये। कितनी ही पुरानी बातें की, उनका नया घर देखा और सोसाइटी में टहलते रहे। बातों-बातों में सखी ने कहा, वे लोग एक कमरे में सामान रखकर, घर किराए पर देकर असम चले जाएँगे, ऐसा विचार कर रहे हैं। 


सलारपुरिया सिलेस्टा का 

फ़्लैट नंबर चार सौ चार 

रहता है जहाँ दशकों पुराना 

एक मित्र परिवार 

घर जैसा मिला वहाँ आदर सत्कार 

अपनापन और सहज प्रेम प्यार 

झील किनारे बैठ कर 

गुजारी शाम 

लौटते पक्षियों को निहार 


आज नूना ने अमेजन से मँगवायी माइकल फ़िशमैन की पुस्तक ‘स्टमबलिंग इनटू इनफिनिटी’ पढ़नी आरम्भ की है। लेखक वर्षों से आर्ट ऑफ़ लिविंग से जुड़े रहे हैं ।उनकी आध्यात्मिक यात्रा व जीवन के संघर्ष के बारे में यह पुस्तक है। अवश्य ही उसे अच्छी लगेगी। पापा जी ने आज “एक ओंकार सतनाम…” का अर्थ बताया। शाम को आश्रम में स्वामी अलेक्ज़ेंडर मिले, वह “श्री श्री योग भाग-२”  सिखा रहे हैं। वर्षों पूर्व असम में वह उन्हें मिले थे और उनके साथ बेसिक कोर्स भी किया था।जून आज असोसिएशन की पहली मीटिंग में भी गये थे।


गुरुजी ने कुछ दिन पूर्व ‘मृत्यु’ पर कुछ प्रश्नों के उत्तर दिये थे, नूना को उन्हीं को आधार बनाकर एक लेख लिखना है। उसने सोचा, कल जून गाड़ी की सर्विसिंग के लिए जाएँगे, उस समय लिखेगी।रात को एक विचित्र स्वप्न देखा, कोई सामान ठीक कर रही है कि अचानक हाथ के ऊपर से छोटे-छोटे हाथी गुजरने लगते हैं, हल्के बैंगनी रंग के हाथी हैं, इतने स्पष्ट और सुंदर दिख रहे थे, उनके पैर व सूंड, सभी कुछ सुडौल थे, पर शीघ्र ही आँख खुल गई और जाना कि यह स्वप्न ही था। माइकल फ़िशमैन की किताब में कितने ही चमत्कारों का ज़िक्र है, गुरुजी के साथ जो भी जुड़ा है, उसके जीवन में चमत्कार होते ही रहते हैं। आज असोसिएशन की सभा उनके घर पर थी। 


आज पूरा दिन बहुत ही अलग बीता। कल रात स्वप्न में गुरुजी को देखा था, सुबह तो उसका असर था ही, शाम तक मन इतना हल्का हो गया, जैसे कोई पुराना बोझ उतर गया हो। यह बोझ भीतर था, इसका भी बोध नहीं था, यह जैसे अस्तित्त्व का भाग ही बन गया था, ह्रदय पर जैसे कोई चट्टान पड़ी थी, जो पहले हटी तो थी पर थोड़ा सा भाग वहीं रह गया था, उसे संभाल कर रखा हुआ था। भय, सहानुभूति पाने की आकांक्षा, स्वयं को पीड़ित समझने की भावना, और स्वयं के प्रति हुए अन्याय को सहेज कर रखने का प्रयास, अपने रोष को उचित ठहराने के तर्क ! इतना क्रोध तो स्वाभाविक है, आख़िर अपना भी तो कोई स्वाभिमान है, अपने को श्रेष्ठ मानने की भावना, ये सारे पत्थर ही थे, जो उस चट्टान को वहाँ रखे हुए थे। अच्छा है कि घर जाने से पहले यह बोध घटा है। मन हल्का है भीतर तक। स्वयं को पूरी तरह स्वीकार करने के बाद ही कोई इस जगत को पूरा स्वीकार कर पाता है। यह जगत परमात्मा की लीला है। हर पल यहाँ कितना कुछ घट रहा है। वह अनंत चैतन्य सब जानता है, क्योंकि जानने वाला वही है। मन सीमित है, बुद्धि एक पोखर के समान है, पर सागर विशाल है। उस विशाल के प्रति पूर्ण समर्पण ही मुक्त करता है। उसे अपने लिए कुछ नहीं करना है, उसी ने जन्म दिया है, वही कुशलक्षेम की रक्षा करेगा। आज की रात कितनी भिन्न होगी और स्वप्न कितने अनोखे ! आज वह भी असोसिएशन की मीटिंग में गई थी, जून को अध्यक्ष चुना गया है।     


  


Sunday, April 5, 2026

मेरे लेखन सफर की नई प्रस्तुति — ‘एक जीवन एक कहानी’ (खंड 1.0 और 2.0)

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मेरे लेखन सफर के एक खास पल को आप सभी के साथ साझा कर रही हूँ 🌿

मेरी हाल ही में प्रकाशित दो किताबें — एक जीवन एक कहानी (खंड 1.0) और एक जीवन एक कहानी (खंड 2.0) — मेरे दिल के बहुत करीब हैं। ये जीवन के अनुभवों, भावनाओं और कहानियों का एक सजीव प्रतिबिंब हैं, जो समय के साथ संजोए गए हैं।

आप सभी के प्यार और प्रोत्साहन के लिए हृदय से आभार। आगे भी ऐसे ही और कहानियाँ आप तक पहुँचाने की उम्मीद है।

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Friday, April 3, 2026

बोटेनिका में फूलों के पेड़

बोटेनिका में फूलों के पेड़


परसों शाम वे नन्हे के घर गये, छोटे भाई की छोटी बिटिया से मिलने, जो दोपहर को आयी और उसी रात की बस से अपनी एक मित्र से मिलने चिकमगलूर जा रही है।कल जून का जन्मदिन था, नूना ने उनके लिए एक कविता लिखी।आज पंद्रह अगस्त के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस का उत्सव सोल्लास मनाया, वहाँ भी एक कविता उसने पढ़ी। उसके बाद सभी मिलकर पहली बार मेद्दूर के लिए रवाना हुए, पहली बार मेदु वड़ा खाया। 


सुबह नींद खुलने से पूर्व स्वयं को देखा, अचानक एक चेहरा सम्मुख आया, और उसके भीतर किसी ने कहा, अरे, यह तो वह ख़ुद है ! गुरुजी कहते हैं, परमात्मा की भक्ति पहले अन्य पुरुष फिर मध्यम पुरुष तथा अंत में उत्तम पुरुष पर समाप्त होती है। ‘वह’ से ‘तुम’ और ‘तुम’ से ‘मैं’ पर, जब तक ऐसा न हो, दूरी बनी ही रहती है। भीतर जाना अब सहज हो गया है, जैसे कोई बाहर से घर के भीतर आये। प्रातः भ्रमण से आकर प्राणायाम किया और सूर्य नमस्कार के छह चक्र। नाश्ते में जून ने उत्तपम बनाया। दिन में नूना अनुवाद कार्य करती रही, जब जून पूरे घर में लकड़ी का फ़र्श लगवाने की बात करने शहर गये थे। दिवाली से पहले घर का रूप काफ़ी बदल जाएगा। इस इतवार को नन्हा घर में होम ऑटोमेशन लगाने वाला है। वर्टिकल गार्डन के लिए आटोमेटिक इरीगेशन सिस्टम भी लग जायेगा। लिए पापाजी ने फ़ोन पर ओशो की किताब में पढ़े एक प्रश्न और उसके उत्तर का ज़िक्र किया,जो उन्हें अच्छा लगा। बड़े भाई का फ़ोन आया, वह बिटिया का सामान ‘गति’ से मँगवाने की बात कह रहे थे, जो महीनों से यहाँ स्टोर में पड़ा है। 


अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की हुकूमत क़ायम हो गई है। दुनिया के लगभग सभी मुल्क चिंता कर रहे हैं कि वहाँ मानव अधिकारों का हनन होगा। कल बड़े भांजे का जन्मदिन है, अगले हफ़्ते छोटे भाई का, जो मेहसाना के ओशो आश्रम में रहा दो दिनों के लिए, वह दोनों के लिए कुछ पंक्तियाँ लिखेगी।जून खाद व मिट्टी के लेकर आज नन्हे के यहाँ गये हैं, वहाँ माली गमलों की मिट्टी बदलने वाला है। आज पूरे दक्षिण भारत में देवी लक्ष्मी को समर्पित ‘वरलक्ष्मी’ का विशेष उत्सव मनाया जा रहा है।नन्हा-सोनू और उसके माँ-पापा आये थे, उन्होंने पापा जी से भी बात की, उनके लिए असम की चाय भेजी है। सोनू अगले हफ़्ते गोहाटी जा रही है, ननिहाल का पुश्तैनी घर किराए पर चढ़ाना है।  


आज सुबह उन्होंने रक्षा बंधन का उत्सव सोल्लास मनाया, सभी बहनों-भाइयों से भी बात हो गयी। सुबह पहली बार वे बोटेनिका में टहलने गये। वहाँ हरे-भरे खेतों व मैदानों की हरियाली देखते ही बनती है, ख़ाली सड़कें और उनके किनारों पर लगे गुड़हल, कंचन के फूलों के वृक्ष, नीला आसमान, दूर से पहाड़ भी नीले लगते हैं, सभी कुछ शोभायमान व सुंदर था। जून की पीठ में हल्का दर्द है, वे थोड़ी देर में ही लौट आये। घर में वुडेन फ़्लोरिंग का काम समाप्त होने वाला है। नन्हे ने डीजेआई ओस्मो मोबाइल सेल्फ़ी स्टिक लाकर दी है, जिसमें तस्वीरें ले सकते हैं और वीडियो बना सकते हैं।पापाजी से बात हुई, छोटी भाभी, छोटी बिटिया का घर सेट करने जा रही है। 


आज नैनी नहीं आयी, उसके दामाद की भतीजी की मृत्यु हो गयी है, पाँच दिन पहले जिसने संतान को जन्म दिया था। मृत्यु किसी भी क्षण, किसी भी रूप में आ सकती है। पिछले कई दिनों से अफ़ग़ानिस्तान में लोग जान पर खेल रहे हैं। कल के बम ब्लास्ट में अमेरिकी सैनिक मारे गये। अतीत में की गई भूलों का फल आज की पीढ़ी को भोगना पड़ रहा है। आज सुबह यू ट्यूब पर गरुड़ पुराण का कुछ अंश सुना था, मृत्यु के बाद कुछ हफ़्तों तक आत्मा विचरती है। मृत्यु से पहले आवाज़ चली जाती है, फिर मानव को दिव्य दृष्टि मिलती है, वह अपने पूरे जीवन को एक साथ देख पाता है, फिर उसे ले ज़ाया जाता है, तथा दो दिन बाद वापस लाया जाता है, तब वह अपने शरीर की अंतिम क्रियाएँ होते हुए देखती है। तेहरवीं के बाद वह आगे की यात्रा पर जाती है और कर्मों के अनुसार सुख या दुख का अनुभव करती है। कल इतवार है, जून नाश्ते में पोहे की एक मीठी डिश बनाने वाले हैं, जो वर्षों पूर्व सिंगापुर में खायी थी। दोपहर को सब लोग आश्रम जाएँगे। 


आज सुबह उठी तो एक ख़ुशनुमा स्वप्न देख रही थी। स्वप्न में क्या था, यह तो जरा भी याद नहीं, पर मन बहुत आनंद से भरा था, उठकर ऐसा लगा। दोपहर का लंच आश्रम के रेस्तराँ में खाया। आश्रम से दो किताबें भी ख़रीदीं, जो सोनू की मॉम ने उसे उपहार में दीं।आश्रम जाना सदा ही अच्छा लगता है, वहाँ की हवा में गुरुजी की उपस्थिति है।शाम को निकट स्थित मुनिरत्ना नर्सरी से वे मधु मालती का एक पौधा लाये हैं, कल सुबह माली लगा देगा, उस स्थान पर, जहाँ पैशन फ़्रूट लगा हुआ था।नैनी ने पपीते के पेड़ से दो पपीते तोड़कर दिये।कच्चे पपीते के पराँठे की बात सोचते ही उसे माँ की स्मृति हो आती है।  

   

आज कृष्ण जन्माष्टमी है, नूना ने कृष्ण पर लिखी पुरानी कविताओं को पढ़ा और कुछ सुधार किया।सुबह उठी तो मन रात को देखे विचित्र स्वप्न की याद से भरा था।जून साइकिल लेकर फूल ख़रीदने गये, एक बड़ी सी माला भी लाए, जो उन्होंने कृष्ण की तस्वीर पर लगायी है। मंदिर बहुत सुंदर लग रहा है। दिन भर फलाहार किया। दोपहर को कुछ कविताएँ टाइप कीं, जो डायरी में इक्कठी हो गई थीं। 


अफ़ग़ानिस्तान से बाहर जाने वालों के लिए आज अंतिम दिन है, कल से तालिबान का शासन चलेगा। कल रात कोई स्वप्न नहीं देखा, आज सुबह आत्मा का बोध दृढ़ हुआ। अब अचेतन, चेतन, अवचेतन मन जैसे कोई भी हिस्से अनजाने नहीं रह गये हैं, अतीत की कोई स्मृति, कोई भी कृत्य, कोई भी बात न ही दबाने लायक़ है, न ही छिपाने लायक़। अतीत आत्मा के अंतर में झलक भी जाता है तो कोई अंतर नहीं पड़ता। जैसे दर्पण में आग झलक जाये तो दर्पण नहीं जलता। आत्मा को कुछ भी छू नहीं सकता। होश में किए कृत्य अपने साथ फल नहीं लाते पर बेहोशी में किए कृत्यों का फल तो भोगना ही पड़ता है। 


आज नाश्ते  में पहली बार ज्वार का दोसा खाया। शाम को टहलने गये तो पार्क-सात के पास एक बड़ा सा सारस पक्षी देखा, जो शायद भटक कर आ गया था, या आहत था। छोटी बहन का फ़ोन आया, बहनोई की आँख में धुँधलापन आ गया है, जो कैट्रेक के बाद हो जाता है, जून उनकी रिपोर्ट लेकर शेखर नेत्रालय जाएँगे। कल नन्हे के साथ जून के एक पुराने अधिकारी के यहाँ नाश्ते पर जाना है। काव्यालय पर ‘भाषा उत्सव’ के लिए हिन्दी का एक लेख लिखना है।

 

Monday, November 24, 2025

लुकिंग इनवर्ड


लुकिंग इनवर्ड 



आज सुबह उसकी नींद तीन बजे खुल गई थी। कुछ देर ध्यान किया, फिर गुरुजी की वाणी सुनी। अनमोल हैं उनके वचन ! सुबह बैंक जाना था, बहुत भीड़ थी, गर्मी भी थी। काफ़ी देर बैठना पड़ा। सड़क पर होते क्रिया कलापों को नूना साक्षी भाव से देखती रही। एक पुलिस वाले ने कितने ही स्कूटर्स व बाइक्स की चाबियाँ निकाल लीं, जो नो पार्किंग में खड़ी की थीं। सड़क पार सामने की दो दुकानों में कुछ मुर्ग़े पिंजरों में खेल रहे थे, अपनी मृत्यु से अनजान। आकाश पर श्वेत बादल हवा के साथ उड़ रहे थे। 


आज शाम नूना की पापाजी से फ़ोन पर बात हुई। उन्होंने ‘अष्टावक्र’ की कहानी बतायी। ब्रह्म और ब्रह्मा कैसे अलग हैं यह भी। जो कुछ भी उन्हें दिखायी दे रहा है, वह ब्रह्म का विवर्त है। इंद्रियों के माध्यम से जो अनुभव होता है, वह माया के कारण होता है।मिर्च उन्हें तीखी लगती है, लेकिन तोते को वह तीखी नहीं लगती।जिह्वा में ऐसा कुछ है जिससे स्वाद का अनुभव होता है। जैसे पानी का एक रूप बर्फ है, वैसे ही ब्रह्म का एक रूप जगत है।भावातीत है ब्रह्म, उसमें कोई विचार नहीं है, उसमें कोई भेद नहीं है, वह अद्वैत है। उसका सृष्टि भाव ब्रह्मा है। उसका स्थिति भाव विष्णु है, उसका संहारक भाव शिव है।उड़िया सखी का फ़ोन आया, वह एओएल के अंकुर संस्कार केंद्र की शिक्षिका बन गई है। नूना को जानकर बहुत अच्छा लगा।आज नूना और जून लाल बाग गये थे। बहुत बड़ा है और देखने योग्य है। 


आज वे महीनों बाद नन्हे के यहाँ गये। पिछली बार मार्च में गये थे। सोनू के पिताजी आपरेशन के बाद अब ठीक हो रहे हैं। आज से भोजन में ग्रीन टी, ब्राउन राइस व रागी की रोटी को शामिल किया है। शाम को सोमनहल्ली गाँव में टमाटर का एक खेत देखा, जिसमें क्यारी को प्लास्टिक की एक चादर से ढक दिया गया था, ताकि नमी भीतर बनी रहे, शायद इस तरह कीट भी नहीं लगते होंगे। आज स्वामी पूर्णचैतन्य की लिखी पुस्तक ‘लुकिंग इनवर्ड’ अमेजन पर ऑर्डर की है। उसे याद आया, असम में वह उनसे उड़िया सखी के घर पर मिली थी, बाद में वे दोनों उन्हें गोल्फ फ़ील्ड तक घुमाने भी ले गई थीं।स्वामी नीदरलैंड के वासी हैं। उन्होंने संस्कृत में श्लोक व मंत्र जाप करके रुद्र पूजा भी करवायी थी।उनकी पुस्तक अवश्य ही साधकों के लिए लाभप्रद सिद्ध होगी।  


अभी कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं, हवा ठंडी थी और पीज़ा वैन अभी तक खड़ी थी। आज शाम की चाय के साथ उन्होंने भी वर्षों बाद पीज़ा खाया। नन्हे ने ऑर्डर कर दिया था। शाम को वे सब मिलकर पास के गाँव तक घूमने गये थे। नन्हा और सोनू साइकिल पर थे। सोनू को घुटने पर थोड़ी सी चोट लग गई, जब वह साइकिल से गिर गई। घर लौटकर बाद में सबने मिलकर एक वृत्त चित्र देखा, जिसमें सोशल मीडिया के बढ़ते हुए प्रभाव के बारे में बताया गया था।यह भी कि किस तरह सोशल मीडिया लोगों की राय बदल देता है।  


कुछ देर पहले छोटे भाई का फ़ोन आया। उसने बताया, पापाजी घर की हर वस्तु का ख्याल रखते हैं। यदि कोई वस्तु ख़राब हो जाये तो उसे ठीक करवा के ही छोड़ते हैं। ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा को वे जगत के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी में आड़े नहीं आने देते। कर्मशील हैं, तथा ज्ञानी भी। ।जून सुबह घर से निकले थे, शाम को वापस आये। कई काम हो गये। सिट आउट के लिए घास, मुख्य दरवाज़े के बाहर  रखने के लिए हरा बड़ा सा डोरमैट। घर में लगाने के लिए वुडेन फ़्लोर का भी पता किया।बैंक तथा डाक्टर के पास भी जाना था। नूना ने सारा समय पढ़ने-लिखने और कुछ सुनने में लगाया। सूफ़ी धर्म पर एक चर्चा सुनी। सभी भाइयों को राखी भी भेज दी। भारत ने हाकी में कांस्य पदक प्राप्त किया है। पहला स्वर्ण पदक भाला फेंकने की प्रतियोगिता में  प्राप्त हुआ।


आज इतवार है। सुबह रोज़ से अलग, यानि माली से बगीचे में काम करवाना। गैराज में माली का समान रखने के लिए एक अलमारी भी बन कर आ गई है। नन्हा, उसका एक मित्र, सोनू व उसके माँ-पापा सभी लंच के समय आये। उसके बाद एक बोर्ड गेम खेलते रहे।सोसाइटी में एक छोटा सा मेला लगा था, सब मिलकर वहीं गये, निशाना लगाने का खेल खेला। 


आज भारत छोड़ो आंदोलन की ७९वीं जयंती है। आज वे बैंगलुरु का चिड़ियाघर देखने गये। कल शाम नन्हा यहाँ आ गया था। उसने अपने कमरे में बिट कॉइन्स के लिए एक सेटअप किया है। कहा रहा था, बिट कॉइन्स बनाएगा। सुबह नूना पूजा के लिए हरसिंगार के फूल लेने बगीचे में गयी  तो देखा, एक खिड़की के शीशे, घर की दीवार, पौधों तत्था घास पर सफ़ेद सीमेंट या चूने के छींटे पड़े हुए थे। पड़ोस वाले घर में अब सीमेंट लगाने का काम शुरू हुआ है, मज़दूर जब दीवार पर सीमेंट फेंकते हैं तो कुछ भाग उनके बगीचे में आ जाता है। मज़दूरों को कहने के बाद नूना ने पड़ोसियों को बुलाकर दिखाया तो उन्होंने दोनों घरों के मध्य तारपोलीन का पर्दा लगवाने को कहा है।