Friday, July 24, 2026

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

स्नेह पान-आयुर्वेद की एक चिकित्सा

आज शाम को वे एक मित्र दंपत्ति के घर गये, अमेरिका से आयी उनकी बहन से मिलने, जिसका ज़िक्र उन्होंने कुछ दिन पहले किया था। नौ वर्ष पहले वह दिल्ली में रहती थीं, उनके पति व वह स्वयं सरकारी नौकरी में उच्च पदों पर कार्यरत थे। कुछ समय हैदराबाद में भी रह चुकी हैं। जब उनके पति नहीं रहे, तब बड़ी पुत्री उन्हें अपने साथ अमेरिका ले गई। इस बार कई वर्षों के बाद भारत आयी हैं, जयपुर, दिल्ली, बैंगलुरु और मुंबई घूमते हुए वापस जायेंगी। तमिल भाषी होते हुए भी हिन्दी अच्छी बोल लेती हैं, कन्नड़ भाषा भी जानती हैं।  

नूना और जून की पंचकर्म की प्रक्रिया आरंभ हो गई है। अगले दो हफ़्ते चाय-काफ़ी नहीं लेनी है। हल्का भोजन लेना है। उदर हल्का रहे तो मन भी हल्का रहता है। सुबह वे सूर्योदय की तस्वीर लेने सोसाइटी के गेट से बाहर निकल कर गाँव की तरफ़ गये पर बादलों के कारण सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। वापस आकर साधना करते समय देवदत्त पटनायक की आवाज़ में उनकी पुस्तक ‘मेरी गीता’ का कुछ अंश सुना। न जाने कितने कितने अनुवाद और व्याख्याएँ हुई हैं आज तक भगवद् गीता की, कृष्ण ने तो अर्जुन को एक ही बात कही होगी, पर हर लेखक अपने अनुवाद को वास्तविक बताता है, इसी लिए कहा गया है, “हरि अनंत हरि कथा अनंता”। जून आजकल मुग़ल बादशाह अकबर की कहानी पर बना एक टीवी शो देख रहे हैं। नवनीत का जून अंक पर्यावरण पर आधारित है, जिसके बार में जितनी जानकारी लोगों को दी जाये कम है। कर्नाटक जैसे विकसित राज्य में, बैंगलोर जैसे जागरूक शहर में, सड़कों पर अभी भी  कूड़े के ढेर दिखायी पड़ते हैं।ट्रैफ़िक का जो हाल है, वह तो जगत प्रसिद्ध है, हर दिन सैकड़ों नये वाहन आ जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। झीलें सूखती जा रही हैं, उन्हें साफ़-सफ़ाई की भी ज़रूरत है और वर्षा के जल को रोककर रखने के उपायों की भी। एओएल का एक अनुवाद कार्य भी उसने किया, जो पूरे दिन को एक पावन भाव से भर देता है। 

पंचकर्म में आयुर्वेदिक दवा लेते हुए आज दूसरा दिन है। सिर के पिछले हिस्से व दाहिनी आँख में हल्का दर्द है। शरीर के भीतर जो भी फेर-बदल हो रहे हैं, उसकी प्रतिक्रिया स्वरूप यह स्वाभाविक है। अवश्य ही उनका वजन भी कुछ कम होगा। नूना ने अमेरिका से आयी नयी परिचिता के लिए एक कविता लिख भेजी, उन्हें अच्छी लगी। घुटने के दर्द के लिए व्यायाम पर बनाया जून का वीडियो भी उन्होंने देखा, जिसका लिंक उसने भेजा था। हो सकता है, घुटने के दर्द में उन्हें आराम मिले। शरीर में भारीपन होने से अर्थात वजन बढ़ जाने से उनका दर्द अधिक बढ़ गया है। आज ऑडिबल पर एक नई पुस्तक सुनना आरंभ की। नवनीत में एक-दो अच्छी कहानियाँ पढ़ीं। दीदी के जन्मदिन पर एक कविता उन्हें भेजी। 

आज सुबह नैनी को नहीं आना था, सो वे आराम से उठे। छह बजे टहलते हुए सुबह के समाचार सुने। उड़ीसा में हुई भयंकर रेल दुर्घटना के बारे में सुना, पर इसकी भीषणता का पता तब चला, जब शाम को छह बजे टीवी पर समाचारों में ह्रदय विदारक दृश्य देखे। बालासोर ज़िले में तिहरे रेल हादसे में लगभग तीन सौ लोग मारे गये सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। कोरोमंडल एक्सप्रेस, ग़लत सिग्नल के कारण मुख्य लाइन की बजे लूप लाइन में चली गई, जहाँ एक मालगाड़ी खड़ी थी, टक्कर के कारण उसके कई डिब्बे पटरी से उतर गये और साथ वाले ट्रैक पर आ रही बैंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस से टकरा गये। किसी की छोटी सी भूल की कितनी बड़ी सजा सैकड़ों परिवारों को भुगतनी पड़ी है। उसकी आँखें अभी भी पूर्ववत् नहीं हुई हैं, कुछ और समय लगेगा। इस समय बायीं आँख में हल्की सी जलन है, दायीं आँख में हल्का भारीपन आज भी था, जून ने डाक्टर को दिखाने की बात कही। उसने अगले एक महीने के लिए, डालने वाली दवा दे दी है। अब ईश्वर का ही आश्रय है, जो भी होगा अच्छा ही होगा। 

आज नन्हा और सोनू आये थे। सब मिलकर लंबी ड्राइव पर गये। उन्हें नया बन रहा ले आउट ‘विशुद्ध प्रकृति’ भी दिखाया। नन्हे ने ड्रोन उड़ाया। फ़ार्म हाउस, हरे-भरे मैदानों और झील के सुंदर चित्र भी लिए, कई वीडियो भी बनाये।आज ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा है, चंद्र दर्शन के बाद जून ने तस्वीरें उतारीं। 

आज ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ है। असम से एक सखी ने बच्चों की योग कक्षा की तस्वीरें माँगी हैं। उस समय हर वर्ष वे लोग बच्चों के साथ पौधे लगाते थे व आसपास सफ़ाई का काम करते थे। दोपहर को पर्यावरण दिवस पर एक पोस्ट लिखी। कुछ देर पहले आयुर्वेदिक अस्पताल की डाक्टर से बात हुई। कल सुबह वहाँ जाना है, स्नेह पान करना होगा। विरेचन  का अगला भाग कल से शुरू हो रहा है।  

आज सुबह ख़ालीपेट वे ‘स्नेहपान’ के लिए अस्पताल गये थे।पहले औषधि युक्त तीस मिली घी पिलाया गया फिर थोड़ा सा गरम पानी भी।जून ने दस बजे ढेर सारे पानी में उबाल कर थोड़े से चावल खाये, उसे दोपहर साढ़े बारह बजे तक जरा भी भूख नहीं लग रही थी। आज एसी नहीं चलाना है, शरीर को गर्म रखना है। अभी दो दिन यही दिनचर्या रहेगी। उसके बाद दो दिन  अस्पताल में रहना होगा।ईश्वर ही इस प्रक्रिया से (शरीर शुद्धि के साथ मन भी जुड़ा है) बाहर ले जाएँगे। सुबह उठी तो ध्यान स्वतः ही होने लगा था, ब्रह्म मुहूर्त में कितनी शांति होती है, वह पवित्र समय है, देवताओं के जागने का समय ! आज शरत चन्द्र की कहानियों पर बनी दो फ़िल्में देखीं, ‘अनुराधा’ व ‘विराज बहू’। पुरानी फ़िल्में कितनी सारगर्भित होती थीं, भावपूर्ण और संगीतमय भी। 

आज सुबह भी वे स्नेहपान के लिए गये थे। आज पचहत्तर मिली घी पिलाया गया। दोपहर के दो बजे तक भूख का नाम नहीं था। आज दिन में एक अच्छी पुरानी फ़िल्म देखी, ‘सरस्वती चन्द्र’। शाम को कुछ देर टहलने भी गये।पापाजी से बात की, उन्हें नवनीत के लेख बहुत अच्छे लग रहे हैं। उसके  लेखन कार्य में एक विराम लग गया है, पहले आँख के कारण अब पंच कर्म के कारण। लेकिन शरीर्व की शुद्धि के लिए यह आवश्यक है। वे भोजन पर कितने अधिक आश्रित हो गये थे। ऐसे भोजन पर भी जो उनके लिए हानिप्रद था। पिछले एक हफ़्ते से चाय के बिना जरा भी दिक्क्त नहीं हो रही है। उसे पूरी उम्मीद है इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर उनका स्वास्थ्य पहले से कहीं अधिक अच्छा होगा। 

आज स्नेहपान का तीसरा दिन है। सुबह साढ़े छह बजे ही वे अस्पताल पहुँच गये थे। नब्बे मिली घी उसे व जून को सौ मिली घी पीना था। वापसी में गुलमोहर के वृक्षों के चित्र खींचे। शाम के चार बजे तक मुँह में घी का स्वाद बना हुआ था। भोजन के बार में सोचने का भी मन नहीं था। शाम को उबली हुई खिचड़ी खायी, जिसे पतीले में बनाना था, कुकर में नहीं। शाम को उनके मित्र दंपत्ति मिलने आये थे, अक्तूबर में होने वाली उनकी कश्मीर यात्रा के बारे में बात करने।उन्होंने कुछ वीडियोज़ देखे और टूर ऑपरेटर से बात की। नन्हे का फ़ोन भी आया। वह घर जा रहा था, रास्ते में ट्रैफ़िक के कारण एक जगह रुका हुआ था।


Monday, July 20, 2026

पंचकर्म का अभ्यास

पंचकर्म का अभ्यास

शाम को हुई वर्षा के कारण मौसम अति सुहावना हो गया है।आज नूना ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ की एक पाकिस्तानी शिक्षिका का इंटरव्यू मोबाइल पर सुन रही है, जो पहले बांग्लादेश में एक चाय बाग़ान में भी रह चुकी हैं। वह कह रही हैं, किन्हीं हज़रत रहमतकार की परंपरा में वह सातवीं पीढ़ी की हैं। जब गुरुजी २००४ में पाकिस्तान गये थे, उन्हीं के यहाँ ठहरे थे। वह बहुत उत्साह से बेसिक कोर्स के बारे में बता रही हैं। सुदर्शन क्रिया से उन्हें जो लाभ हुआ, वह उसे लोगों में बाँटना चाहती हैं। क्रिया से मन की उलझनें समाप्त हो जाती है, अंतर्ज्ञान बढ़ जाता है। कोई चीज़ कठिन नहीं लगती। उनके अनुसार, हरेक को जीवन में कोई न कोई मक़सद चाहिए। जिसका मक़सद जितना बड़ा होगा, रुकावटें भी उतनी आयेंगी, पर कायनात ऐसे लोगों की मदद करती है।वह कहती हैं, दिन में एक समय ऐसा होना चाहिए जब आपकी ऊर्जा चरम पर हो। वह स्वयं दोपहर एक बजे तक बहुत काम करती हैं। उसके बाद साधना में लग जाती हैं। उन्होंने लाहौर में कोर्स भी कराये हैं, जिनमें अनेक लोग शामिल होते हैं। वह बहुत शिद्दत से यह काम कर रही हैं।उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है।उनके अनुसार, गुरुजी जीवन के शिक्षक हैं, वह पहले इंसान हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य और तनाव में कोई संबंध बताया है। तनाव से ही सारी बीमारियाँ होती हैं। गुरुजी के प्रति उनके मन में गहरी श्रद्धा है। यह सब सुनकर नूना को आश्चर्य मिश्रित हर्ष हुआ, संभवत: समाज में आज योग के प्रति पहले का सा विरोध नहीं रह गया है। कई मुस्लिम देशों के प्रतिभागी आश्रम में भी आते हैं। वैसे देखा जाये तो योग एक चिकित्सा प्रणाली है, जो देह और मन दोनों की चिकित्सा करती है। 

आज सुबह उन्होंने निर्धारित समय तक प्रातः भ्रमण किया, योग अभ्यास का भी शुभारंभ हो चुका है। लेखन कार्य भी आरंभ हुआ है, पर अभी भी आँखों को प्रकाश थोड़ा सा प्रभावित करता है। एक सप्ताह और शेष है, जब दवा पूरी तरह से बंद हो जाएगी। आज एक फ़िल्म देखी, ‘एक ही बंदा काफ़ी है’। जिसमें अंततः सत्य की जीत होती है।पापाजी से भी बात हुई, उन्होंने फ़ेसबुक पर पढ़ी उसकी कविता से आनंद मिलने का ज़िक्र किया। शब्दों के माध्यम से ही यदि किसी के ह्रदय में आनंद या उत्साह का लेशमात्र भी पहुँचता है तो लेखन कार्य सार्थक है और इस अर्थ में जीवन भी अर्थवान है। 

आज उसने ‘वैष्णो देवी’ की कथा आगे सुनी। त्रिकूट पर्वत वासिनी माँ की कथा बहुत ही मनोरम है। वह अपना नाम त्रिकुटा बताकर गाँव में जाती हैं। भारती नामकी कन्या को उनमें देवी के दर्शन होते हैं। दैवीय गुणों से युक्त बालक हो या बालिका, युवा हो या वृद्ध सभी के भीतर एक ही तरह के गुण होते हैं। वे प्रसन्नचित्त, धैर्यवान और सबका मंगल चाहने वाले होते हैं। वे साहसी होते हैं और सत्यवान भी। इस कथा में देवताओं का राजा असुरों का अंत भी चाहता है और उनके साथ भी मिला हुआ है। वह उनके द्वारा वैष्णवी देवी को हराना चाहता है ताकि शिव प्रलयंकारी हों और अंततः असुरों का नाश हो। वह मात्र अपना सर्वस्व बचाना चाहता है। वे सब भी तो केवल अपने ही बारे में सोचते हैं। 

आज शाम को वे आश्रम गये थे। कल आने वाले मेहमानों के लिए उपहार ख़रीदे।इस वर्ष ओबीए की मीटिंग सितंबर महीने में कोयम्बटूर में होगी। उसकी तैयारी के संबंध में कमेटी की मीटिंग कल उनके घर पर होने वाली है। आज असमिया पड़ोसी के पोते का जन्मदिन है। वे शाम को गये थे। गैराज में चाट का स्टाल लगा था। केक और चाट खिलाकर उन्होंने स्वागत किया।  

आज दिन भर मौसम अच्छा रहा।दोपहर के विशेष भोज की पूरी ज़िम्मेदारी नन्हे ने ली, उसने स्वादिष्ट पराँठे बनाये। उसने चावल रखने का एक सुंदर डिब्बा भी मँगवाया है। शाम को वे मेहमानों को लेकर आश्रम गये, उन्हें पंचकर्मा केंद्र भी दिखाया। कल नूना का जन्मदिन है। बच्चों ने कहा है, वे सुबह ही आ जाएँगे। कुछ देर देवदत्त पटनायक की ‘मेरी गीता’ सुनी। वह बहुत गहराई से चीजों का विश्लेषण करते हैं। ब्लॉग पर नयी कविता पोस्ट की।  

आज पूरा दिन अच्छी तरह बीता। सुबह बच्चों व जून के साथ केक व नाश्ते का आनंद लिया। मिठाई-फल आदि कुछ सामान लेकर वे शांति धाम गये, जहाँ वृद्धजनों के साथ कुछ समय बिताया।दोपहर को वैष्णवी के साथ ध्यान साधना का। कथा में लक्ष्मी नारायण से विलग हो जाती हैं, जब छह रिपुओं में से एक ‘लोभ’ का प्रकोप हो जाता है। सरल शब्दों में ध्यान की व्याख्या भी की गई थी। माँ काली ने कर्म के महत्व के बारे में भी बताया, धर्मयुद्ध के लिए हरेक को सदा तत्पर रहना चाहिए। षट् रिपुओं का नाश करना है न कि उस आत्मा से कोई द्वेष रखना है, जिसके भीतर ये अवगुण हैं। शाम को वे आश्रम गये थे,  सत्संग में भाग लिया, गुरुजी का सुंदर प्रवचन सुना।असम में जिन महिलाओं व बच्चों को वह योग सिखाती थी। उनमें से एक ने उसके लिए बच्चों द्वारा गाया गया बधाई संदेश भेजा है। उसने भी एक संदेश उन्हें लिखकर भेजा जिसमें गुरुजी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गयी थी, और उस सखी के लिए भी, जो सदा उसके साथ इस काम में सहयोग करती रही थी।  

मौसम आजकल अधिक गर्म नहीं है। दोपहर बाद लॉन में नीचे घास पर बैठकर नवनीत पत्रिका पढ़ी।पौधों को पानी दिया, बेगोनिया का दूसरा गमला भी शिकायत कर रहा है कि उसे धूप की कमी महसूस हो रही है। कल उसे ऊपर छत पर ले आयेंगे। कल से उनका पंचकर्म का विरेचन अभ्यास आरम्भ हो रहा है। जो दस-ग्यारह दिन चलेगा। उम्मीद है, वे इसे भली-प्रकार पूर्ण कर पायेंगे। जन्मदिन पर बच्चों ने उसे नई स्मार्ट घड़ी दी है, जो कई तरह से फिट रहने को प्रेरित करती है। आज भी कई पुरानी परिचितों के बधाई संदेश मिले, जन्मदिन का सर्वोत्तम लाभ यह है कि सबका हाल मिल जाता है। एक पुरानी सखी का फ़ोन भी आया, बहुत दिनों बाद दिल से दिल की  कुछ बातें हुईं। 


Tuesday, July 14, 2026

शरत् चन्द्र का उपन्यास "दत्ता'

शरत् चन्द्र का उपन्यास "दत्ता'

अभी-अभी नन्हे से बात हुई, वे लोग अस्पताल से वापस घर जा रहे थे, सोनू का आपरेशन ठीक हो गया है। आज सुबह ही वे लोग अस्पताल गये थे, छोटा सा ही ऑपरेशन था।परसों वे लोग आयेंगे और कल नूना और जून उनसे मिलने जाएँगे। शाम को एक स्थानीय मित्र दम्पत्ति मिलने आये, उनके साथ ‘केरल स्टोरी’ देखने का कार्यक्रम बन गया।इस फ़िल्म के पक्ष और विपक्ष में कितनी ही बातें पिछले दिनों उन्होंने सुनी हैं, अब देखकर स्वयं ही निर्णय लेना उचित होगा। बातों-बातों में उन्होंने बताया,विदेश से उनकी बहन आने वाली हैं, जिन्हें बहुत अच्छी हिंदी आती है, उनसे भेंट करायेंगे।पापाजी से आध्यात्मिक चर्चा हुई। सुबह जून डेंटिस्ट के पास गये थे, वापसी में नर्सरी से वही हरे पुष्प वाला सुंदर पौधा लाए, जिसने उस दिन मन मोह लिया था। 

सुबह वे सोनू से मिलने गये थे।वह बहुत हिम्मती है, काफ़ी ठीक लग रही थी।आज शाम का भोजन जल्दी हो गया, सो सोने से पूर्व पर्याप्त समय मिल गया है, वह ऑडिबल पर बंगला भाषा के सुप्रसिद्ध लेखक शरत चन्द्र चटर्जी की पुस्तक ‘दत्ता’ का हिंदी अनुवाद सुन रही है। बहुत प्रभावशाली पुस्तक है।अभी-अभी व्ह्टासऐप पर आये एक संदेश से पता चला, मृणाल ज्योति की अध्यक्षा को असम के एक छोटे क़स्बे में स्कूल की शाखा खुलने के उपलक्ष्य में हुए कार्यक्रम में कंधे में चोट लग गई है। उसने फ़ोन करके उनका हाल पूछा, डाक्टर ने कुछ दिन आराम करने के लिए कहा है।  

आज शाम को बड़ा भांजा आया, साथ में उसकी पत्नी, छोटी साली और सासु माँ भी थीं। शाम की चाय सबने साथ पी फिर रात्रि भोजन भी। नन्हा अपने कुक से पालक-पनीर व राजमा बनवाकर लाया था, शेष भोजन नूना ने बनाया। लच्छेदार पराँठे भी नन्हे ने बनाये, उसके लिए आटे के घी लगे विशेष पेड़े बनाकर लाया था।कुल मिलाकर पार्टी बहुत अच्छी रही। रात को ही वे सब लौट गये। जून ने उसके साथ मिलकर रसोईघर पूरी तरह साफ़ करवा दिया। सुबह की चाय बनाते समय उन्हें किचन स्वच्छ चाहिए। दही लगाने व बादाम भिगोने का काम भी उन्होंने अपने ज़िम्मे ले लिया है। 

आज सुबह नाश्ते के बाद वे नन्हे के घर गये और शाम सात बजे घर लौटे। लंच के बाद नन्हा उन्हें एक विशाल, सुंदर थियेटर में ‘माउस ट्रैप’ नाटक दिखाने ले गया, जिसकी टिकटें उसने पहले ही ख़रीद ली थीं।अगाथा क्रिस्टी के सत्तर साल पुराने मर्डर-मिस्ट्री नाटक का हिन्दी रूपातंरण ! बहुत अच्छा था।कहानी पूरे समय बाँधे रखती है।नाटक के पात्र हैं, बर्फ में घिरे एक गेस्टहाउस में सात अजनबी व्यक्ति और एक जासूस, जिसे एक हत्यारे का पता लगाना है।  आज पापाजी से बात नहीं हो पायी। छोटा भाई आया हुआ है, इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही होगी, भाभी एक हफ़्ते के लिए बिटिया के साथ एडिनबर्ग गई है। 

आज सुबह मौसम अति अनुकूल था, वे टहलने गये तो हल्की सुवास हवा में भरी थी। आम के बगीचे में एक व्यक्ति रात को हुई वर्षा के कारण नीचे गिरे आम उठा रहा था। बहुत दिनों बाद नाश्ते में जून ने दलिया बनाने को कहा।आज दिन में मई महीने का नवनीत का अंक पढ़ना आरंभ किया है। इस बार गावों की बदलती हुई तस्वीर को मुख्य विषय बनाया गया है। गाँव जो शहर बनाना चाहते हैं, पर बन नहीं पाते। किसानों को श्रम करने का अभ्यास नहीं रह गया है, बैलों का भी कोई सम्मान नहीं रह गया है। संध्या के समय सोमनहल्ली की तरफ़ गये, पर रास्ता कीचड़ से भरा था, वे पास वाले लेआउट में ही टहलते रहे। गुलमोहर व अजार के अनेक वृक्ष लाल व बैंगनी फूलों से भरे हुए थे। इस समय रात्रि के आठ बजे हैं। पिछले आधे घंटे से वर्षा हो रही है।आँधी-तूफ़ान व तेज वर्षा के साथ कुछ ओले भी गिरे। वह कुछ देर बालकनी में टहलते हुए ‘हॉट स्टार’ पर वैष्णो देवी की कथा सुनती रही। त्रिकूट पर्वत की गुफा में रहकर उनकी तपस्या और उनके अनेक कृत्यों पर आधारित कथा बहुत रोचक और अच्छी लगी। वर्षा अब थम गई है। मोदी जी जी-७ की बैठक में भाग लेने जापान गये हैं। आस्ट्रेलिया में क्वार्ड मीटिंग है, वह फ़िजी भी जाएँगे, पापुआगिनी जहाँ की राजधानी है। बाईडेन कहते हैं, उन्हें मोदी जी की लोकप्रियता से रश्क होता है। 

कल रात वह वैष्णो देवी की कथा सुनकर सोयी थी। रात को स्वप्न में देवी का नन्हा रूप अपनी हथेली में देखा। जो पहले प्रकट होती हैं फिर कुछ समय बाद स्वयं ही अंतर्ध्यान हो जाती हैं। उनके बचपन की कथा बहुत सुंदर है। सुबह देखा, रात की आँधी-वर्षा के कारण कुछ गमले गिरे हुए थे। छत पर रखी कुर्सियों के कुशन भी भीग गये थे। आज दोपहर “यह मेरी फ़ैमिली’ का एक अंक देखा।इसमें नब्बे के दशक की रोचक कहानी है। शाम को वे टहलने गये तो आकाश पर बादलों के सुंदर रूप व आकार बन गये थे, मन विस्मय से भर गया, अनायास ही कुछ तस्वीरें उतारीं।आज मोदी जी द्वारा आस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों को दिया जाना वाला संबोधन सुना, भारत के प्रति कितना गौरव है उनके मन में। 

आज उन्होंने ‘द केरला स्टोरी’ देख ली। तीन लड़कियों का धर्म  परिवर्तन करके आईएसआईएस में जाने के लिए प्रेरित करने के हथकंडों के बारे में यह फ़िल्म बनायी गई है। कट्टर पंथियों की हिंसात्मक प्रवृत्तियों को दर्शाती यह फ़िल्म इस्लाम के एक भयानक रूप को दिखाती है। पता नहीं इसमें कितनी कल्पना है और कितनी हक़ीक़त। एक परिचित मित्र दंपत्ति भी उनके साथ गये थे। उसके बाद दोपहर का भोजन भी बाहर हुआ, सांते रेस्तराँ में। वापस आकर कुछ देर और बैठकर उन्होंने बातचीत की, कभी भविष्य में वे साथ-साथ कश्मीर जा सकते हैं, ऐसा भी विचार हुआ। शाम को नन्हे के यहाँ गये, उनके सोफ़े के लिए नये कुशन बनवाये थे, उन्हें देने और सोनू का हालचाल भी लेना था। पापा जी से बात हुई, बड़े भाई उनके पास आये हुए हैं। पता चला, कल रात आँधी-तूफ़ान के बाद बिजली चली गयी थी, जो आज दोपहर बाद तीन बजे आयी। मौसम की मार गाँव हो या शहर, अतीत हो या वर्तमान, हर जगह, हर काल में झेलनी पड़ती है।


Saturday, July 11, 2026

घड़ियों का घर

घड़ियों का घर 


आज नन्हे ने उनके लिए सुंदर सा एक घड़ी केस भेजा है, जैसे पहले एक बार आभूषण रखने का गुलाबी केस भेजा था। जैसे-तैसे किसी भी डब्बे में वे अपना समान रखें, यह उसे व सोनू को पसंद नहीं। शाम को उससे बात हुई तो तो वे लोग सोनू के माँ-पिता के लिए घर देखने की बात कर रहे थे। असम वाला उनका घर काफ़ी पुराना हो गया है। उस तीन मंज़िल घर में वे सबसे ऊपर रहते हैं, मंझले भाई बीच में। छोटे भाई के न रहने पर उनके पुत्र ने नीचे वाले घर को नया रूप दे दिया है।

कल जून के साथ उन्हें अपने फ़्लैट की इंटीरियर सज्जा के लिए लकड़ी के काम के डिज़ाइन देखने काफ़ी दूर जाना है। वे पूरी तरह से दुनियादारी में उलझते जा रहे हैं। इसी हफ़्ते शनिवार को आँख का आपरेशन है, और आजकल इसमें आधे घंटे से भी कम समय लगता है। कुल तीन घंटों में वे घर वापस आ सकते हैं। शाम को नापा में फूलों की तस्वीरें उतारीं, आजकल चारों ओर फूलों की बहार है।पहली बार क्लब के जाकुज़ी का प्रयोग किया। उसका क्या महत्व है, पता नहीं, पर अच्छा लगा। अब क्लब का काफ़ी भाग बन गया है और उसका बाहरी रूप लॉन आदि भी बहुत सुंदर लग रहा है। जून आज उस सोसाइटी में भी एक तीन कमरों वाले घर की अंतर सज्जा देख कर आये, जहाँ उनका फ़्लैट है। 

आज का दिन ‘लिव-स्पेस’ के नाम रहा। वे सुबह टहलकर जल्दी लौट आये ताकि सब काम ख़त्म करके साढ़े नौ बजे तक घर से रवाना हो जायें। दोपहर का भोजन बनाकर साथ ले गये थे। एक युवा महिला ने उन्हें डिजाइन व मेटीरियल आदि दिखाये, लगभग पौने चार घंटे वे वहाँ रहे, आने-जाने में तीन घंटे लग गये। कुल मिलकर सौदा अच्छा रहा, कुछ पैसे देकर उन्हें बुक कर दिया है। अब उनकी टीम साइट पर जाकर देखेगी व डिज़ाइन फ़ाइनल करेगी। यह कंपनी २०१४ में ही बनी है, पर बहुत प्रसिद्ध हो गई है। नन्हे को भी उनका काम पसंद आया, वह आज दिल्ली गया है।आज उनके नये पड़ोसी आये थे, अपने पुत्र के उपनयन संस्कार का निमंत्रण देने, पहली मई को है, जून जाएँगे। 

आज गुरुजी को सुना। कर्मों के बारे में किसी ने पूछा तो उन्होंने कहा, आज के भोजन के साथ पहले का बना अचार व दही भी तो खाया जाता है। आगे वह कहते हैं, जो पथ पर आ गये हैं, उनके पिछले कर्म धुल ही गये हैं। जब तक प्रभु नहीं मिले तभी तक माँग है और जब तक माँग है तब तक प्रभु नहीं मिलते। परसों से एओएल का पाँच दिनों का योगपर्व आरंभ हो रहा है। 

आज वह महीनों या वर्षों बाद तरण ताल में उतरी। अच्छा लगा, पानी ज़्यादा गहरा नहीं है, न ही ठंडा था। बहुत सारे बच्चे थे। जून बड़े आराम से तैर रहे थे। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, गुरुजी दुबई जा रहे हैं, परसों वह उनसे मिलने जाएगी, वह सभी शिक्षकों से मिलेंगे। जून आज ढेर सारे फल लाए, ढाई हज़ार के, आम, ख़रबूज़ा, सेब, अंगूर आदि। सुबह गुरुजी का एक पुराना वीडियो देखा-सुना, उस समय कितना अच्छा लगा था पर इस समय कुछ याद नहीं आ रहा। 

सुबह वाणी के दोष को अनुभव किया, पर अभी-अभी किसी ने कहा, पुनः वह मत दोहराओ। जैसे आकाश पर बादल आकर चले जाते हैं वैसे ही दोष आत्मा पर चिपकते नहीं हैं, आकर चले जाते हैं, यदि उनको साक्षी भाव से देखा जाये। आज एक पुरानी सखी को उसकी शादी की सालगिरह पर शुभकामना देने के लिए फ़ोन किया, पता चला दो दिन पहले उसकी सासु माँ का देहांत हो गया है।

आज दो बार ध्यान किया, कितनी अनोखी स्तब्धता का अनुभव होता है ध्यान में, जो बाक़ी समय वे भूल जाते हैं। कल सुबह अस्पताल जाना है। दायीं आँख में कैट्रेक का ऑपरेशन होना है। अभी-अभी नन्हे से बात हुई, उसने बताया, एक जोड़ी धुले कपड़े लेकर जाना है।उन्हें पहनकर ऑपरेशन थियेटर में जाना होगा।

आज पूरे अठारह दिनों के बाद नूना ने डायरी खोली है। उस दिन वे अस्पताल गये। नन्हा भी वहाँ आ गया था। सर्जरी के बाद उसके घर चले गये। शाम को अपने घर लौटे। कई सावधानियाँ बरतनी थीं और समय-समय पर आँख में दवा डालनी थी। तब से रसोई का काम जून सँभाल रहे हैं। एक हफ़्ते बाद दूसरी आँख की सर्जरी हुई। धीरे-धीरे दृष्टि सामान्य हो रही है। इस बीच ऑडिबल पर काफ़ी कुछ सुना, रेडियो पर गीत व ग़ज़लें भी सुनीं। ध्यान किया। कुल मिलाकर समय का सदुपयोग किया। अभी सोलह दिन दवा और डालनी है, उसके बाद ही दिनचर्या पूरी तरह से सामान्य मानी जाएगी। आज फ़ेसबुक पर एक हरे रंग के पुष्प की तस्वीर डाली। इतने दिनों से ब्लॉग पर भी कुछ नहीं लिखा। कल से आरम्भ करना है। इस बीच कर्नाटक में विधान सभा के चुनाव हो गये, वे वोट डालने भी गये। अभी तक यह तय नहीं हुआ है मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? 

आज रात्रि भोजन के बाद  वे टहलने गये तो आकाश में संध्या की अंतिम लालिमा छायी थी। उसने झट एक चित्र में क़ैद कर लिया, मोबाइल पास में हो तो अनायास ही सुंदर दृश्य कैमरे में अंकित हो जाते हैं। एक जगह दो बिल्लियाँ स्कूटर की सीट पर बैठी थीं, उनका चित्र वे जब भी कभी देखेंगे, वह शाम याद हो आएगी। वापस आकर स्वास्थ्य संबंधी एक रोचक टेड टॉक सुना।अब वह एओएल का अनुवाद कार्य भी ले सकती है। पापाजी ने बहुत दिन बाद फ़ेसबुक पर उसकी कविता पढ़कर ख़ुशी ज़ाहिर की। सुबह वे चेकअप के लिए नेत्रालय भी गये थे, अब तीन महीने बाद जाना है।


Wednesday, July 8, 2026

माई

माई 


आज सुबह भी नूना ने सूर्योदय की सुंदर तस्वीरें उतारीं। वापस आकर वे प्रतिदिन की तरह छत पर गये, हवा ठंडी थी, पर एक घंटे बाद धूप निकल आयी थी। दरवाज़े पर नयी घंटी लगी है, उसकी आवाज़ ऊपर तक नहीं गई, नीचे आये तो देखा, नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी।उसने ध्यान दिया, आजकल नाश्ता, लंच, डिनर सब कुछ गाय के दूध से बने मक्खन या घी से ही बन जाता है, नंदिनी दूध इस हिसाब से बहुत शुद्ध है।शाम को टहलते समय इसरो के एक भूतपूर्व अधिकारी व उनकी पत्नी से मिले, कुछ देर बातचीत होती रही।उन्होंने जून को सोसाइटी के नये बने तरणताल में तैरने आने के लिये कहा है। कल उन्हें ख़ाली पड़े उस फ़्लैट में भी जाना है, इंटीरियर कराने की बात करने के लिए दो बढ़ई बुलाये हैं। घर बिक नहीं रहा है, इसलिए किराए पर देने की बात मन में आई है। जून को व्यस्त रहने के लिए एक रोचक काम भी मिल जाएगा। आजकल वह उत्साह से भरे रहते हैं । असम के एक पुराने परिचित यहाँ आये हुए हैं, उनसे मिलने के लिए वेगा मॉल जाने को भी तैयार हैं। जीवन ऐसे ही रंग बदलता रहता है। पापाजी से बात हुई, वह अपनी बात कहते रहे, सुनने में अब उन्हें थोड़ी मुश्किल होने लगी है। असमिया सखी से बात हुई, वह अपना घर बनवा रही है, आने वाली बाधाओं को ख़ुशी-ख़ुशी झेलते हुए।

अभी कुछ देर पहले नन्हे का फ़ोन आया।वह कल सुबह आएगा। जून की कार आज उस सोसाइटी के गैराज में खड़ी करते समय ख़ंबे से टकरा गई थी, जहाँ वह बढ़ई से मिलने गये थे। नन्हा उनकी गाड़ी ले जाएगा व अपनी छोड़ जाएगा। उसमें तीन सौ साठ डिग्री देखने वाला कैमरा लगवाना है जो चारों तरफ़ किसी भी वस्तु के निकट आने पर अलार्म बजा देगा। उसके बाद कार का डेंट भी ठीक करवाना है। नन्हे ने एक बार भी सीख नहीं दी कि गाड़ी ठीक से पार्क करनी चाहिए थी। दुर्घटना तो किसी से भी हो सकती है। दोनों बढ़ई अपना कोटेशन देंगे, जून उसमें से एक का चुनाव करेंगे। रात्रि भ्रमण के समय उन्होंने एक बच्चे के साथ कुछ देर बैडमिंटन खेला, वह अकेला ही खेल रहा था। पापा-माँ दोनों जॉब में व्यस्त रहे होंगे। कामकाजी महिला के बच्चे (यदि अकेला बच्चा हो तो और भी )कितना अकेलापन महसूस करते होंगे। आज एओएल का एक अनुवाद कार्य आया है। अक्षय तृतीया के दिन बृहस्पति मेश राशि से मीन राशि में जा रहे हैं, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसी के बारे में है। आज उसने नैनी से ज्वार की रोटी बेलना सीखा। इतना कठिन भी नहीं है, उसे लगातार घुमाते रहना है, वरना बिना टूटे हाथ पर उठा नहीं सकते। 

अभी कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। आज एक नये रास्ते पर गये, कुछ नये घर देखे। हर घर अपनी तरह से बेहद सुंदर लग रहा था, अलग-अलग डिजाइन और अलग-अलग पौधों से सजा। श्वेत-श्याम रंग का एक बड़ा सा चितकबरा कुत्ता मिला, छोटी गाय के आकार का, उसका नाम उस दिन किसी ने बताया था, शायद डालमेटियन, या डालमेशियन । आज श्री अरविंद की पुस्तक ‘ऐस्से ऑन गीता’ पर एक व्याख्यान सुना, श्री अरविंद ने गीता को समझने की एक नयी दृष्टि दी है। शाम को पापाजी से काफ़ी देर तक बात हुई, वह ठीक से सुन भी पा रहे थे। उन्होंने कनाडा से आये छोटे नाती से हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया। जब वह छोटे थे और पाकिस्तान से भारत आये थे, वह उनकी उस समय की कहानी सुन रहा था।उनके दादाजी का मकान गाँव में था, वह खेती करते थे। चार भाइयों में बँटवारा हो गया। उनके पिताजी को खेती में रुचि नहीं थी, अपना थोड़ा-बहुत हिस्सा लेकर वह परिवार के साथ शहर आ गये। हकीम का काम सीखकर उसी को आजीविका का साधन बनाया। बाद में विभाजन हुआ और भारत आकर नये सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। आज वह आज दोपहर उसने कुछ देर ध्यान किया, उसे लगता है, प्रगति नहीं हो रही है, पर यह भी तो अहंकार को बढ़ाना ही होगा। ईश्वर ने जहाँ रखा है, वहीं रहकर मन को शुद्ध करना है। नन्हा आज सुबह नहीं आ पाया था, जून अपनी कार गैराज में दे आये हैं। परसों मिलेगी। 

आज ईद है। जून ने चार किलो इमाम पसंद आम मँगवाये हैं। दुकानदार अपनी गाड़ी से घर आकर दे गया, साथ में उसका छोटा सा बेटा भी बैठा था। निकट ही क़स्बे के बाज़ार में उसकी फलों की दुकान है, शायद एक से अधिक। पूरे मौसम वे उसी से आम लेते हैं। आज सुबह वाली नैनी नहीं आयी, उसके ससुर का देहांत हो गया, शायद हफ़्ता भर न आये।शाम वाली भी अगले हफ़्ते छुट्टी पर जा रही है।    

आज सुबह वह छत पर योग साधना करने गयी तो सोलर पैनल के नीचे पड़े बोगनवेलिया के फूलों को देखा, जो झर कर उड़ते हुए वहाँ इकट्ठे हो जाते हैं। प्रेरणा हुई कि दायीं आँख से देखे, उठने के बाद से कुछ भारी लग रही थी। फूलों का रंग मटमैला दिखा, फिर बायीं आँख से देखा तो हल्का गुलाबी। मोबाइल पर मोतियाबिंद के बारे में पढ़ा, सुना, जून को बताया तो उन्होंने नन्हे को बता दिया। नन्हे ने डाक्टर से मिलने का समय ले लिया और वे फल खाकर आँख के अस्पताल चले गये। नन्हा वहीं आ गया था। अगले शनिवार को सर्जरी होगी। मल्टी फ़ोकल लेंस लगाया जाएगा। परमात्मा की असीम कृपा है कि समस्या का पता चलते ही समाधान सम्मुख आ गया। नूना, नन्हे व जून का जितना शुक्रिया अदा करे वह कम है। दोनों उसका बहुत ख़्याल रखते हैं। शाम को पापाजी ने पूछा, आज फ़ेसबुक पर कुछ पोस्ट नहीं किया। सर्जरी के बाद तो कुछ दिन कंप्यूटर व मोबाइल से दूर रहना होगा, तब उन्हें बताना पड़ेगा। टीवी पर पहली बार आशा भोंसले द्वारा अभिनीत एक मार्मिक फ़िल्म देखी, ‘माई’ बहुत दिनों बाद पद्मिनी कोल्हापुरे को भी देखा। सासु माँ की कितनी बातें याद आ गयीं, जब उन्हें भी भूलने की बीमारी हो गई थी। 

आज सुबह लगभग दस बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। सोनू के माँ-पापा भी आये थे। दोपहर को बच्चों ने स्वादिष्ट ‘थाई भोजन’ बनाया। सभी को पसंद आया। सभी ने एक साथ बैठकर कुछ देर एक फ़िल्म देखी, फिर निकट की एक झील पर ड्रोन उड़ाने गये। वहाँ बहुत भीड़ थी, कुछ बच्चे और महिलाएँ झील के पानी में उतर गये थे। शायद वे पहली बार वहाँ आये थे। वे लोग एक दूसरी झील पर गये, जहाँ अपेक्षाकृत कम लोग थे, वातावरण में शांति थी। वहीं चटाई बिठाकर कुछ देर सब बैठे और साथ लायी चाय का आनंद लिया। शाम को लौटने में सवा छह बज गये थे। 


Wednesday, July 1, 2026

बालकनी में हरियाली

बालकनी में हरियाली


आज
वे सोसाइटी के एक प्रमुख व्यक्ति के घर गये थे, कल उनकी माँ का देहांत हो गया था। जाकर पता चला, हाल में ही उनके पिता की ओपन हार्ट सर्जरी हुई है, इसलिए उन्हें अभी तक यह समाचार नहीं दिया गया है।जीवन कितना विचित्र है ! नूना ने कविता की पुस्तक की समीक्षा लिख भेजी, उन्हें अच्छी लगी। उसकी तस्वीर सहित वह समीक्षा कवयित्री ने पोस्ट कर दी है, पापाजी ने भी पढ़ी। 

आज सुबह छह बजे वे एक मित्र दंपत्ति के साथ बैंगलुरु की एक प्रसिद्ध झील देखने गये। जहाँ पक्षियों के लिए एक विहार भी बनाया गया है। निकट स्थित एक अन्य झील  देखने के बाद ‘पूर्ण ब्रह्म महाराष्ट्रीयन रेस्तराँ’ में स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया। उसके बाद वे राजशाही युग का प्रतीक ‘बैंगलोर पैलेस’ देखने गये।जहाँ मैसूर के राज-परिवार के चित्र व उनका इतिहास दर्शाया गया है। 

सुबह वे टहलने गये तो आकाश में पूर्णिमा का चंद्रमा चमक रहा था। उसकी तस्वीरें बहुत सुंदर आयी हैं।आज शाम आश्रम में भीड़ बहुत थी, वे जल्दी लौट आये।एमटीआर में थट्टे इडली व अक्की रोटी खायी, अच्छी बनी थी।नयी मिट्टी व खाद और नये पौधे लगने के बाद आज नर्सरी से उनके अधिकतर गमले आ गये हैं। कल वे लोग बगीचे में शेष काम करने आयेंगे। आज एक शुभ समाचार मिला, बड़े भाई की बिटिया का रोका हो गया। ईश्वर से प्रार्थना है, उसके जीवन में सदा ख़ुशियाँ बनी रहें।   

जिस सागर से भाप बनकर बादल उड़ा था, बरस कर उसी में लौट जाता है। संस्कार मन पर छाते हैं, फिर बादलों की तरह विलीन हो जाते हैं, वे भी एक ऊर्जा ही हैं, ऊर्जा-ऊर्जा में विलीन हो जाती है।मन के भीतर ही वह ईश्वर मिलता है। गुरुजी की सुंदर वाणी मोबाइल पर सुनी। किसी ने उनसे कांवड़ियों के बारे में पूछा। वे मीलों पैदल चलते हैं, देह का श्रम होता है, मन में श्रद्धा के कारण प्रफ्फुलता होती है। उनके संकल्प पूर्ण होते हैं। आरक्षण के बारे में उन्होंने कहा, यह सदा के लिए नहीं रहना चाहिए। कल रात देर से सोये थे, सो सुबह भी देर हुई उठने में, साधना में केवल प्राणायाम किया, जिससे शरीर में तीनों दोष संतुलित होते हैं। 

आज नन्हे ने धातु के बने नये काले रंग के सुंदर गमले भेजे हैं। जून बालकनी में लगाने के लिए कृत्रिम घास भी ले आये हैं। दोनों जगहें बहुत सुंदर लग रही हैं। घर हरा-भरा हो गया है। वे एक नयी नर्सरी में गये, लकी माली ने नये गमलों में बिगुनिया, पितुनिया, जरेनियम, नाइन ओ क्लॉक के साथ और भी कई तरह के व कई रंगों के  फूलों के पौधे लगा दिये हैं, अब उनको बचाना उनका काम है।सुबह जून साइकिल से दूर तक चले गये, नूना सोसाइटी में ही घूमती रही। नन्हे से बात हुई, वह दो दिनों के लिए ऑफ साईट जा रहा है, कंपनी का भविष्य निर्धारित करने। वे लोग अब अपना अस्पताल ले रहे हैं, फ़िलहाल पाँच साल के लिए लीज पर लिया है।

आज सुबह गुरुजी की ‘; पर दी व्याख्या सुनी।चेतना सदा है, जानना उसका स्वभाव है, जब जानना समाप्त हो जाता है, तब संसार शुरू हो जाता है। जानना विचार है, यदि कोई उसमें उलझ गया तो वह विकार बन जाता है।शाम को एक मित्र दंपत्ति मिलने आया, बातों-बातों में अगले हफ़्ते किसी दिन नये बने इस्कॉन मंदिर जाने का कार्यक्रम बन गया। सुबह बालकनी की घास पर नीचे बैठकर उन्होंने फलों का रस पीते हुए पापा जी को फ़ोन मिलाया, आज वह अकेले हैं, पर हैं आराम से। छोटी भाभी कल वापस आ रही है। वीडियो कॉल पर दिखाया तो कहने लगे, आपने अपने घर को जन्नत बना लिया है।शाम को वहीं बैठकर ऑडिबल पर आयुर्वेद पर लिखी एक पुस्तक सुनती रही।वाक़ई घर अब पहले से कहीं सुंदर लग रहा है, जून ने बहुत श्रम व धन लगाया है।   

आज शाम को वे पहली बार बैंगलुरु मेट्रो में सवार हुए। रोज़ हज़ारों लोग मेट्रो में यात्रा करते हैं।उन्हें इतनी भीड़ में यात्रा करने का अनुभव कई दिन बाद मिला है, पर फ़िलहाल दुबारा जाने का मन नहीं है।ऐसे ही एक बार ‘वन्दे भारत ट्रेन’ में सफ़र करने का अनुभव लेना है।आज उनका पड़ाव था राजाजीनगर में हरे कृष्ण हिल पर स्थित बैंगलोर का पुराना इस्कॉन मंदिर। श्रीकृष्ण, बलराम व राधा के विग्रहों के दर्शन किए। महामंत्र का जाप किया। प्रसाद लेकर वे मेट्रो से ही वापस आये। सुबह के भ्रमण के लिए वे नापा से बाहर गये, मोर, कोयल व अन्य पंछियों का कलरव भोर की शोभा में चार चाँद लगा रहा था। पुस्तक आगे सुनी, कई नयी जानकारियाँ मिलीं। भाभी वापस आ गई है।अगले महीने वह अपनी डाक्टर बिटिया के साथ स्कॉटलैंड जाने वाली है।कोई सेमिनार है। आज तापमान चौतींस डिग्री पहुँच गया है, गर्मियों का मौसम पूरे शबाब पर है। 

एक और दिन बीत गया ख़रामा-ख़रामा सुबह सुहानी थी, सूर्योदय के सुंदर दर्शन हुए। दोपहर को बाल्मीकि रामायण का कुछ अंश लिखा। आज लॉन में घास लगायी जा रही है। कल शाम तक कम चलेगा। रविवार को नन्हे और सोनू को बहुत अच्छा लगेगा।नन्हे ने घर के नाम के साथ उनके नाम लिखवाकर नेमप्लेट भेजी है, पर उन्हें केवल घर का नाम ‘निर्वाण’ लिखी हुई नेम प्लेट ही चाहिए। वह उसे वापस कर देगा। कल साप्ताहिक साफ़-सफ़ाई का दिन है, नैनी भी सुबह जल्दी आएगी। सो, जल्दी यानि समय पर सो जाना बेहतर है। 

आज इतवार है। सुबह दो घंटे बगीचे में माली को कम बताते, करवाते बीते।ग्यारह बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। नाश्ते के बाद पहले नर्सरी फिर फ़ोरम मॉल गये। रात्रि भोजन करने के बाद घर लौटे तो दस बज गये थे। सभी के लिए  उपहार लेना आज का मुख्य कार्यक्रम था। नन्हे ने उसके लिए डेनिम की जैकेट लेकर दी है। नये गमलों में पौधे लग गये हैं।


Tuesday, June 23, 2026

कोर्ट मार्शल


कोर्ट मार्शल 


आज का इतवार भी काफ़ी अलग रहा, सोनू और नन्हे के साथ उसके तीन मित्र भी आये थे। उनमें से एक उबर में काम करता है, शेष दो उसी की कंपनी में। वे सब नन्हे के दफ़्तर में हो रही एक पूजा में भाग लेकर आये थे। लंच के बाद सब लोग निकट के एक गाँव में ख़ाली पड़े खेत व मैदान में गये, वहाँ ड्रोन उड़ाया, एक चील काफ़ी देर तक उसके साथ-साथ उड़ रही थी।दोपहर को एक हज़ार टुकड़ों वाली जिग्सा पज़ल आगे बढ़ायी। शाम के विशेष जलपान के बाद, रात होने से पूर्व वे सब चले गये। 

आज घर की बाहरी दीवारों पर रंगाई का काम समाप्त हो गया। अब किचन के बाहर की लॉबी के ऊपर छज्जा लगाना शेष है। घर किराये का न हो तो उसमें कोई न कोई काम निकलता ही रहता है।सुबह उन्होंने फूलों के पेड़ों की तस्वीरें उतारीं, आजकल सोसाइटी में चेरी ब्लॉज़म के गुलाबी-श्वेत फूलों की बहार है। कल शाम की आँधी के बाद कुछ आम भी गिरे हुए थे। जिनसे मीठी व खट्टी दोनों तरह की चटनी बनायी। आज भी उसने देवी की कथा सुनी, असुरों का विनाश करने वाली देवी उनकी प्रार्थना सुनकर विकार रूपी असुरों को हराने के लिए शक्ति प्रदान करती हैं। आज एमआई का ट्रक पूरा बन गया, नन्हे ने कहा, उन्होंने बहुत जल्दी बना लिया।

आज आश्रम में सत्संग हुआ। गुरुजी ने कहा, पूजा में भाव सबसे ज़्यादा आवश्यक हैं। दुख साधक के मन को गहराई देता है, सुख मन को विस्तार देता है। लेकिन कोई कब तक सुख-दुख के फेर में पड़ा रहेगा, ज्ञान में वह सुख-दुख के परे चला जाता है। साधक को अपना कर्त्तव्य निभाना है और स्वयं को ठीक से अभिव्यक्त करना है। त्याग ही रिश्तों को दृढ़ बनाता है। अहंकार को इतना बड़ा बनाना है कि उसमें सब समा जायें।कुछ सीमा तक उन्हें अपने कर्मों को समाप्त करना है। ध्यान होश का दूसरा नाम है, ऐसा होश जो विश्राम दिलाता है। जैसे कार पहले रिज़र्व में आती है, फिर उसमें ईंधन भरते हैं। उन्हें कभी भी इस बात के लिए स्वयं को कम नहीं आंकना चाहिए कि उन्होंने कुछ बड़ा नहीं किया। पुण्यों का हिसाब नहीं रखना चाहिए। शुभ काम करना उनका स्वभाव ही है, यह कोई बड़ी बात नहीं है।कोई भक्ति करता है तो यह उसका स्वभाव ही है। यही अध्यात्म है, दो के परे जाना ही अध्यात्म है। गुरुवाणी का मनन करने से निदिध्यासन अपने आप हो जाता है।

आज सुबह भी वे टहलने गये, छत पर साधना करते समय हवा ठंडी थी और सूर्योदय का सुंदर दृश्य दिखाई दे रहा था। कई लोगों से फ़ोन पर बात की, कइयों को संदेश भेजे। दो को छोड़कर शेष सभी ने जवाब दिये। शाम को इस्कॉन मंदिर गये। बहुत विशाल और भव्य मंदिर है। आरती में सम्मिलित हुए, कृष्ण की उपस्थिति का अहसास भी हुआ। बहुत सुंदर व्यवस्था है वहाँ हर चीज की। वहाँ की ऊर्जा अति सकारात्मक थी। वापसी में उन्हें महामंत्र का जप करने के लिए भी कहा गया। प्रसाद भी मिला। नन्हे ने कहा है, हो सका तो वह शनिवार को आएगा, पापा को जीसी रोड ले जाएगा। 

आज गुरुजी ने कितने सुंदर वचन कहे, धरती में बीज बोते हैं तो अन्न की फसल उगती है। आकाश में मंत्र के रूप में बीज बोते हैं तो ख़ुशी की फसल उगती है। जैसे धरा अन्न का, वैसे ही आकाश ख़ुशी का स्रोत है। कल से उनके बगीचे में लैंड स्केपिंग का कार्य शुरू होगा। आज एक नयी पुस्तक पढ़नी आरंभ की, जो हिंदू धर्म के प्रतीकों के अर्थ के बारे में है। पहला अध्याय पढ़ा, एक देवता व उनकी पत्नियों के नाम पहली बार पढ़ने को मिले। अर्धनारीश्वर व शिव के प्रतीक के बारे में पढ़ते-पढ़ते ही मन कैसा स्थिर हो गया था।नेट पर मिली एक कवयित्री के कहने से उसकी पुस्तक “मात्र मात्राओं का खेल है” मँगवायी है, उसकी समीक्षा लिखनी है। 

आज रामनवमी का उत्सव है। सुबह प्रसाद बनाया। नापा का एकमात्र मंदिर सजाया गया है, सुबह वे गये थे। उठने से पूर्व कोई कह रहा था, मन को ख़ाली करो, कोई स्वप्न चल रहा था शायद उसके पूर्व ! अब स्वप्न याद नहीं रहते पहले की तरह, अब ज़्यादा नहीं आते। मन कृतज्ञता का अनुभव कर रहा था। परमात्मा की कृपा ही तो है जो वे इस सुंदर सृष्टि का आनंद ले रहे हैं। बल्कि वही उनके द्वारा ले रहा है। उसने उन्हें अपना साथी बनाया है, सहयोगी बनाया है। कल उन्हें व्हाइट फील्ड में स्वदेश दीपक का लिखा नाटक ‘कोर्ट मार्शल’ देखने जाना है। 

कल उन्होंने ‘कोर्ट मार्शल’ देखा।पात्रों  का अभिनय शानदार था, कथा भी प्रभावशाली थी। भारतीय समाज में दलितों के प्रति जो असमानता व अन्याय सदियों से व्याप्त है, उस पर प्रहार किया गया है। भारतीय सेना की पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक एक दलित सिपाही पर चल रहे कोर्ट मार्शल के इर्द-गिर्द घूमता है। उस पर अपने दो अधिकारियों की हत्या करने का आरोप है। जैसे -जैसे मुक़दमे की कार्यवाही आगे बढ़ती है, पता चलता है दलित सिपाही को किस प्रकार उन अधिकारियों द्वारा मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उसे आश्चर्य होता है आज भी समाज में दलितों के प्रति बराबरी का व्यवहार नहीं किया जाता।आज का इतवार भी अनोखा था। वे पहली बार फ़ोरम मॉल गये। कुछ ख़रीदारी की, कुछ जलपान किया। उससे पहले ख़ाली पड़े फ़्लैट और नर्सरी भी गये, जहाँ उनके गमलों में पौधे लगाये जा रहे थे। शायद चार दिनों में कार्य पूरा हो जाएगा। नर्सरी के मालिक से भी बात हुई, उसे पौधों को समय-समय पर दी जाने वाली खाद, दवा आदि का बहुत ज्ञान है।वह बाग़वानी के नये-नये प्रोजेक्ट्स लेता रहता है। उसने बताया गर्मी के मौसम में पौधों को एक दिन छोड़कर पानी डालना चाहिए। जिन पौधों की पत्तियाँ मोटी हैं, उन्हें दो दिन बाद पानी देना चाहिए। बोगनवेलिया का पेड़ जो उन्हें कटवाना पड़ा था, उसमें अभी तक एक भी हरी पत्ती नहीं आयी है।  

आज का दिन भी ख़राम-ख़रामा बीत गया। कल रात देर तक वे दोनों बातें करते रहे। जून ने बताया बरसों पहले वह उसके बनारस शहर से जाने के बाद बहुत दुखी हुए थे।परीक्षा परिणाम देने के बहाने एक दिन मिर्ज़ापुर मिलने आये थे।उसे जून को जानते हुए चार दशकों से ज़्यादा समय हो गया है, पर अभी भी लगता है, मन के किसी न किसी स्तर पर उनकी दुनियाएँ अलग-अलग हैं। एक साथ होते हुए भी हरेक का जीवन उसका निजी होता है।  दुनिया में हर किसी का, राम व सीता का भी, शिव व पार्वती का भी ! परमात्मा मौलिक है, इसलिए वह हर किसी को बस उसके जैसा ही बनाता है।शाम को वे दूर तक टहलने गये, एक टर्की दिखा, अनोखा पक्षी है, सुंदर रूप है उसका! उसने पुस्तक की समीक्षा लिखनी शुरू की है, कुछ कविताएँ दिल को छू जाती हैं। जून के पूर्व सहकर्मी ने अपने पुत्र के पचासवें जन्मदिन पर एक कविता लिखने के लिए कहा है।एओएल का अनुवाद कार्य भी बीच-बीच में आता रहता है।