Friday, May 1, 2026

गुरु गीता

गुरु गीता


शाम को वे दूर तक टहलने गये। एक जगह मुर्गी के दड़बों के आगे से गुजरना पड़ा, एक विचित्र सी तेज गंध आ रही थी।घर आकर भी कुछ देर तक वह गंध जैसे साथ रह गई थी।आज ‘गुरु गीता’ सुनने का दूसरा सत्र है। भानु दीदी कह रही हैं, गुरु के नाम स्मरण मात्र से अनेक आशीर्वाद मिल सकते हैं।ईश्वर या गुरु से कुछ माँगना ऐसा ही है जैसे हाथ में मक्खन रखा है और कोई घी माँग रहा हो।शांति का सागर भीतर है, बस अपने मन का ध्यान रखना है। गुरु तत्त्व कण-कण में समाया है। व्यास मुनि ने स्कन्द पुराण में शिव-पार्वती के संवाद के रूप में गुरु गीता की रचना की है। जिसमें गुरु और ईश्वर में कोई भेद नहीं है, ऐसा कहकर शिष्य की गुरु के प्रति निष्ठा को दृढ़ किया गया है। छोटी बहन को आश्रम में टीटीपी के लिए अनुमति मिल गई है। अगले महीने वह यहाँ आएगी।आज गुरु जी के बारे में लिखे एक लेख का अनुवाद किया।


आज गुरुजी का जन्मदिन है। इस विशेष दिन पर उनका संदेश है- 


कुछ भी आकर्षक नहीं है।

सब कुछ प्रकाशमान है क्योंकि सब कुछ आत्मा का है, और आत्मा से बना है।

ब्रह्मांड में आत्मा सबसे आकर्षक है। 


गुरुजी ने विशेष ध्यान भी कराया। सुंदर भजन गाये गये। आज मृणाल ज्योति स्कूल की एक पुरानी सदस्या का फ़ोन आया। अगले वर्ष स्कूल का रजत समारोह मनाया जाएगा। उसने पत्रिका के लिए एक लेख लिखने के लिए कहा है। नूना ने स्कूल की अध्यक्षा से भी बात की। उनके साथ बिताये कितने ही पल तथा कई घटनाएँ याद आने लगीं। 


आज सुबह उठने से पूर्व सुंदर स्वप्न देखे - सुंदर गायें, श्वेत बाघ और बुद्ध की प्रकाशित मूर्ति !परमात्मा से वार्तालाप और ध्यान का अनुभव ! पापाजी से बात हुई, वह ‘शांडिल्य भक्ति सूत्र’ पढ़ रहे हैं। जिसकी व्याख्या ओशो ने की है। उन्होंने बताया, प्रीति के कई रूप हैं, अपने से छोटों के प्रति प्रेम को स्नेह कहते हैं। समान उम्र के प्रति प्रेम को प्रीति तथा बड़ों के प्रति प्रेम को श्रद्धा या सम्मान कहते हैं। परमात्मा के प्रति प्रेम को भक्ति !! घर पर भतीजी और उसकी नन्ही बिटिया आये हुए हैं।शिशु बालिका की भी कई बातें उन्होंने बतायीं। आज भी दिन भर बादल बने रहे। मानसून इस बार यहाँ जल्दी आ गया है। सारे भारत में गर्मी का मौसम क़हर ढा रहा है, यहाँ अधिकतम तापमान २४ डिग्री रहता है। मई के महीने में ऐसा ही मौसम असम में मिलता था। उनके दायीं तरफ़ बनने वाला विशाल घर बनकर तैयार हो गया है, कल गृह प्रवेश की पूजा में जाना है। नन्हा और सोनू भी आयेंगे।  

उन्होंने अपनी दिनचर्या व ख़ान-पान में कुछ बदलाव किए हैं।शाम को सूप व आम का डिनर लिया। जून को सात्विक व हल्का भोजन लेने से शरीर में हल्कापन महसूस हो रहा है। दिन में दो बार ध्यान का अभ्यास, पुस्तक पढ़ने के साथ-साथ वह डायरी लेखन भी शुरू करने वाले हैं। आज बुद्ध पूर्णिमा है, भगवान बुद्ध के विषय में लिखी कविता उसने बहुत लोगों को भेजी। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है। कल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। एक अच्छी बायोपिक देखी, ‘रश्मि राकेट’ !


दिन भर वर्षा का मौसम ही बना रहा। असम में बाढ़ का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। बैंगलुरु में भी सड़कों पर पानी जमा हो गया है। पानी की समस्या पर आधारित ‘टर्टल’ फ़िल्म में देखा था, रेगिस्तान में लोग पानी के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। यह जीवन ऐसा ही विरोधाभासी है। आर्ट ऑफ़ लिविंग से अनुवाद को-ऑर्डिनेटर का फ़ोन आया। कल रात को नौ बजे ज़ूम पर एक मीटिंग है, जिसमें नूना को अपने गुरु स्टोरी रखनी है। शाम को उन सभी बातों को याद किया और लिखा। एक शिक्षिका की कहानी सुनी थी, कितने आराम से वह सुना रही थी, उतनी ही सहजता से उसे भी अपनी बात रखनी होगी। 


शाम को गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान गहरा हुआ। ज़ूम मीटिंग में एबीसी(आश्रम की प्रकाशन संस्था)की ‘हेड टू हार्ट’ सीरीज़ में पहली बार भाग लिया। आजकल गुरु स्टोरी सुनना भी शुरू किया है। अच्छा लग रहा है। गुरुजी अपने भक्तों की नज़रों में ईश्वर से कम नहीं। जिन्होंने उनका सान्निध्य पाया है, वह यह जानते हैं। उनके बार में सुनकर कितना रोमांच होता है। वाक़ई वे एक अवतार ही जान पड़ते हैं। कैसे लोगों के मन की बात जान लेते हैं, उनका ख़्याल रखते हैं। इतना प्रेम देते हैं कि लोग उनके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। वह उनके जीवन में वरदान बनकर आये हैं। वह कहते हैं, “साधकों को सेवा करनी चाहिए, ताकि वे अपने कर्मों को काट सकें। उन्हें पुण्य मिले और उनका मन शुद्ध हो, वे ध्यान के अधिकारी बनें, उन्हें समाधि का अनुभव हो। उनका जीवन सार्थक हो।जो दूसरों के कष्ट दूर करने की चाह रखता है, जो संसार के लिए जीता है, उसके योग-क्षेम का भर स्वयं परमात्मा उठाते हैं। वे स्वार्थ को त्याग कर यदि जगत के हित में काम करते हैं तो इसका परिणाम अंतर की शुद्धि के रूप में उन्हें ही मिलता है। जब कोई अपना सुख-दुख भूलकर अन्यों के सुख-दुख में शामिल होता है तब भीतर मुक्ति का अहसास होता है। जीवन वही जीवन है जो औरों के काम आये। उनके वचन, कर्म व विचार सदा हितकारी हों।” गुरुजी की बातें सुनने से मन नहीं भरता। वह उसे भी जानते हैं, ऐसा संयोजिका ने कहा। असम में एक शिक्षिका ने भी कहा था, गुरुजी को ज्ञात है कि सहज समाधि उनके यहाँ हो रहा है ! उसने गुरुजी के प्रति अपनी निष्ठा को पूर्ववत् नहीं बनाये रखा, ऐसा मानना भी उचित नहीं। वह उनमें और स्वयं में कोई भेद नहीं देखती, वह उन्हीं का भाग है ! ‘ईश्वर अंश जीव अविनाशी’ अथवा तो एक ही सत्ता से यह सारा जगत बना है !  


आज सुबह उन्होंने पूरे सत्तर मिनट भ्रमण किया; नये व सुंदर, हरे-भरे रास्ते पर! तस्वीरें भी खींचीं। आज दो बालिकाएँ हिन्दी पढ़ने आयीं। दोपहर बाद बाज़ार गये, आगामी यात्रा में जिनसे मिलेंगे, उनके लिए कुछ उपहार ख़रीदे। ‘पंचायत’ धारावाहिक का अंतिम अंक देखा।   



Tuesday, April 28, 2026

झुंड - एक अलग सा सिनेमा

झुंड - एक अलग सा सिनेमा


मई का महीना शुरू हो गया, यानी मौसम का सबसे गर्म महीना ! लेकिन सुबह शीतल थी, उन्होंने सूर्योदय के चित्र उतारे, कुछ देर साइकिल चलायी।गुरुजी का जन्मदिन और बुद्ध पूर्णिमा इसी महीने में आती है।कल ईद है, जून ने नूना की ईद की कविता का एक कार्ड बना दिया है कैनवा पर। शब्दों का एक तोहफ़ा, उसे उम्मीद है बहुतों को अच्छा लगेगा, विशेष तौर पर पापाजी को, वह उसकी कविताएँ अवश्य पढ़ते हैं।कल सोसाइटी के चुनाव हो गये, पुरानी कमेटी लौट आयी है, यही वे चाहते थे।जून ने उनके ख़ाली पड़े फ़्लैट में कबूतरों को आने से रोकने के लिए जाल लगवा दिया है। शाम को पापाजी से प्रतिदिन की तरह अध्यात्म पर चर्चा हुई, पिछले दिनों उनका स्वास्थ्य इतना अच्छा नहीं रहा, पर आज ठीक हैं। दिसंबर में उन्हें दो पारिवारिक विवाहों में सम्मिलित होने की खबर मिल गई है। आख़िर विवाह की तैयारी महीनों पहले से ही करनी पड़ती है।  


आज शाम को वर्षा हुई, बल्कि दोपहर बाद से बूँदे झरने लगी थीं।मौसम सुहावना हो गया है।लेकिन वे संध्या और रात्रि दोनों बार भ्रमण के लिए नहीं जा पाये। जून को छाता लेकर टहलना नहीं भाता, सो नूना गैरेज में ही कुछ देर टहलते हुए पंचदशी सुनती रही।एक नयी कविता आज फ़ेसबुक पर प्रकाशित की।दीदी ने बताया, वह बहुत पहले से मोबाइल पर सुडोकू हल करती हैं, जून को भी करने को कहा।आज दो-तीन लोगों ने कल की कविता की तारीफ़ की। दिल से कही बात दिल को छू जाती है। कल शाम वे घर के सामने वाली लेन में रहने वाली एक महिला से छह किताबें लाए, उन्होंने अपने घर में सेल लगायी थी। नूना ने ऐन रैंड की एक किताब पढ़नी शुरू की है, वर्षों पहले ‘फ़ाउंटेन हेड’ पढ़ी थी तो उसे बहुत भायी थी। जून भी चि वॉकिंग पर एक किताब पढ़ रहे हैं।आज महात्मा बुद्ध पर एक फ़िल्म भी देखी, उन्हें निर्वाण का मार्ग मिल गया, संसार को दुखों से छुटकारा दिलाने का मार्ग। तृष्णा ही जन्म का कारण है और उससे छूटने का मार्ग बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग है। कितने महान थे वह, और कितना महान है उनका ज्ञान ! मानव जीवन में ही यह ज्ञान पाना संभव है। आज सुबह उठने से पूर्व भी कोई उड़ीसा शब्द कहा रहा था, उसकी उड़िया सखी की बेटी का विवाह कल संपन्न हो गया, उसी की याद दिला रहा था। दिन में उसे बधाई दी।  


आज शाम वे बोटेनिका गये तो आकाश पर बादल थे, पापाजी को वहीं से वीडियो कॉल किया, उन्हें हरियाली के सुंदर दृश्य बहुत अच्छे लगे।एक चिड़िया की तस्वीर उतारी। आज उसने ‘सिंहासन बत्तीसी’ का पहला अंक देखा, मूलत: संस्कृत में लिखी गई यह पुस्तक विक्रमादित्य के बारे में है। शाम को इस्लाम के बारे में एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है। अगले हफ़्ते से गुरु जी की छोटी बहन भानु दीदी के साथ ऑन लाइन गुरु गीता कार्यक्रम आरंभ हो रहा है। आज उसी के अन्तर्गत आश्रम से दो किताबें मिली, ‘गुरुदेव’ तथा ‘इंटीमेट नोट्स फॉर ए सिंसियर सीकर’।  


आज शाम वर्षा के कारण पाँच मिनट में ही घर लौटना पड़ा, रात्रि भ्रमण में वह पहले से ही छाता लेकर गये। हल्की बूँदाबाँदी हुई। सावन के आने से पहले ही यहाँ वर्षा का मौसम शुरू हो गया है। छोटी भांजी व गुरुजी के जन्मदिन पर आज कविताएँ लिखीं।आज सुबह जून पहली बार इलेक्ट्रिक साइकिल से दूर गाँव तक गये, चालीस मिनट लगे आने-जाने में। 


आज सुबह नन्हा, सोनू और बड़ा भांजा आये, साथ ही उनकी एक मित्र भी थी।देखने में सीधी-सादी है, पर लगता है, बहुत लाड़-प्यार से पली है, भोजन के मामले में बहुत नख़रे हैं। अन्न का सम्मान करना नहीं जानती, या स्वाद का बहुत ज़्यादा ध्यान है उसे, पर शेष बातों में अच्छी लगी, आजकल बच्चे ऐसे ही होते हैं। शायद उसमें बचपना अभी तक गया नहीं है।वक्त बदल रहा है, अब बच्चों में पहले की तरह बड़ों का लिहाज़ नहीं है।  बाद में नन्हा सभी को लंच के लिए ताज ले गया। नूना को महँगे होटल में बाहर खाने का कोई आकर्षण नहीं है , उसे तो तरह-तरह की गंध आती है वहाँ, सो… ख़ैर कभी-कभी ऐसा हो तो कोई बात नहीं। शाम को छोटे भाई का फ़ोन आया, जीजाजी को हल्की चोट आयी है, पर वह ख़ुद गाड़ी चलाकर अस्पताल गये। उनमें हिम्मत और ख़ुद्दारी का जज़्बा कूट-कूट कर भरा है। 


सुबह उठी तो भीतर से कोई कह रहा था, ‘सेवा करो, एस सी शब्द सम्मुख आया। नींद में ही कोई लेख भी पढ़ा। उठते ही ध्यान में मन टिक गया। आज मातृ दिवस है। सुबह से ही संदेश, कवितायें आलेख पढ़े और भेजे। छोटी बहन कनाडा में बड़ी बिटिया के पास है। दोनों नन्दों से बात हुई, खुश थीं, बड़ी घर में हवन करवा रही थी। छोटी बेटे के विवाह की तैयारियों में लगी है। 


आज से ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ में जाँच आरम्भ हो गई है। सुबह जून ने आम उठाने को मना किया, पर कल रात की आँधी-तूफ़ान के बाद ढेर सारे आम गिरे हुए थे, उसने चार उठाये, कल चटनी बनाएगी। जून इस बात पर थोड़ा नाराज़ हो गये से लगे, पर उनकी उदासी का कारण कुछ और भी हो सकता है। आज पड़ोस की एक नन्ही बालिका हिन्दी पढ़ने आयी। उसकी लिखाई में कुछ सुधार करना होगा। दिन में एओएल का अनुवाद कार्य किया। 

    

आज उन्होंने एक अच्छी फ़िल्म देखी, ‘झुंड’ झोपड़-पट्टी के बच्चों व युवाओं में फुटबॉल के माध्यम से परिवर्तन लाया जा सकता है, इस पर एक वास्तविक प्रयोग हुआ था। विजय बारसे ने एक क्लब बनाया था, ‘स्लम सॉकर’ । अच्छी लगी फ़िल्म, पर इसे देखने के चक्कर में वे शाम को घर पर ही बैठे रहे। आज सुबह वे टहलने गये तो उसने जून को कुछ प्रेरणात्मक वाक्य कहे, शायद सुनकर या ऐसे ही उन्होंने कहा, चलो, ड्राइव पर चलते हैं। उसे उस गाँव तक ले गये, जहाँ वह कुछ दिन पहले साइकिल से गये थे। आज शाम को ‘गुरु गीता’ पर पहला सत्र है। जिसमें ध्यान के साथ मंत्रों का उच्चारण सिखाया जाएगा और उनका अर्थ भी बताया जाएगा। 


Monday, April 27, 2026

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

आज सुबह दस बजे वे नन्हे की नई गाड़ी में यालाहंका में कंपनी की ‘ओल्ड बॉयज़ मीट’ में शामिल होने गये।वे कई परिवारों से वर्षों बाद मिले, बहुत अच्छा अनुभव रहा।सभी लोगों ने अपनी यादों में असम को बसाया हुआ है। जब सभी असम में रहते थे, तब अक्सर ही मिलना होता था। एक ही कंपनी में काम करना व एक ही कैंपस में रहना, सबके पास साझा करने के लिए जैसे यादों का एक ख़ज़ाना था।कार्यक्रम एक अंध विद्यालय के हॉल में हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्य भी मिलीं। एक अतिथि ने ‘प्राणिक हीलिंग’ पर एक वक्तव्य भी दिया तथा प्रयोग द्वारा एक महिला के हाथ के दर्द का इलाज भी किया। केले के पत्ते पर पारंपरिक भोजन भी परोसा गया। लौटे तो शाम हो गई थी। कार्यक्रम के दौरान नन्हे ने कई तस्वीरें भी खींचीं। घर आकर कंपनी की कॉफी टेबल बुक ‘नॉस्टेलज़िया’ एक बार फिर उल्टी-पलटी, बहुत अच्छी लगी। कितनी ही नयी बातें पता चलीं, जो वास्तव में पुरानी हैं। 


नन्हे ने कल जो तस्वीरें खींचीं थीं, उनके लिए कई लोगों ने तारीफ़ की है। उसने पूरे दिल से यह काम किया था।आज शाम को गुरुजी का एक भाषण सुना, जो उन्होंने ‘वी स्टैंड फॉर पीस’ पर  संयुक्त राष्ट्र संघ में दिया। उन्होंने कहा, शान्तिप्रिय लोगों को एकजुट होना होगा। किसी को भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होना है।दोपहर को गुरुजी का कराया ध्यान ‘नीडिल’ किया और शाम को मन को ख़ाली करने वाला, दोनों ही विधियाँ प्रभावशाली हैं। आज पढ़ा, गुरु के आवाहन के बाद उसके ज्ञान स्वरूप में मन को विलीन करने से मन की शुद्धि होती है, रामकृष्ण परमहंस की पुस्तक तो अनमोल है। स्वामी विवेकानंद जब नरेन थे, कितना संदेह था उनके मन में, पर उनके गुरु उनकी किसी बात का विरोध नहीं करते थे। अनोखे लोग थे वे! आज उसने एक पोस्ट लिखी। जैसे कोई फूल खिलता है, कोई उसे सराहे या नहीं, इससे क्या अंतर पड़ता है फूल को ! शब्द जो किसी के मन से निकले, अंततः तो समष्टि मन से ही आये हैं ! 


दोपहर को उसने जून को एक बात पर टोका, पर आज उन्होंने बुरा नहीं माना। महादेव में पार्वती पुन: शिव से पृथक हो गई हैं, उन्हें एक और जन्म लेना होगा, फिर वे बाणासुर का वध करेंगी। कितनी अद्भुत कथा है शिव-पार्वती की। सृष्टि के आदि में देव तथा दानव दोनों ही हुए। इसलिए अच्छी व बुरी, शुभ व अशुभ दोनों शक्तियाँ इर्द-गिर्द होती हैं। चुनाव उन्हें करना है। देवता परम चेतना की उर्मियाँ हैं तो दानव उनसे बनने वाली छाया। अहंकार छाया ही तो है, आत्मा आलोक है। कुछ पाने की, कुछ बनने की, कुछ होने की लालसा जब तक बनी है, तब तक मन में पूर्ण तृप्ति कैसे हो सकती है ? जो मानव का मूल स्वभाव है, यदि वही उसका लक्ष्य है तो, वह तो मानव अभी है ही, फिर कैसी खोज? 


आज उन्होंने पहली बार सुबह-सुबह खीरे का रस पिया, अच्छा लगा और उसका परिणाम भी अच्छा रहा।आज स्वामी मधुसूदन सरस्वती के बारे में सुना, जो पन्द्रहवीं शताब्दी में हुए थे। वह वेदांती होने के साथ कृष्ण भक्त भी थे। भक्ति के बिना ज्ञान रूखा-सूखा ही रह जाता है, तभी तो ‘ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या’ कहने वाले शंकराचार्य भी ‘भज गोविन्द गाते हैं। आजकल उसका लेखन कार्य, विशेषतया कविता लेखन का कार्य पहले की भाँति नहीं हो रहा है। मन की धारा शांत हो गई है, और लेखन तो भीतरी उहापोह को दिखाने का ही एक माध्यम है शायद ! 


आजकल नूना पॉल ब्रंटन की पुस्तक ‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’ पढ़ रही है। यह एक ऐसी यात्रा पर आधारित है, जिसमें  लेखक सच्चे ऋषियों की खोज में लगा है। ऐसे ऋषि जिनके पास आत्मा का ज्ञान है, जिन्होंने अपने भीतर उस सच्ची शांति का अनुभव कर लिया है, जिसे भौतकितावादी लोग मानने से भी इंकार कर देते हैं।इसी किताब में एक यहूदी व्यक्ति का ज़िक्र है जिसने कुछ अच्छे जिन्नों को वश में कर लिया था, जो दूसरों के विचारों को भी पढ़ सकते हैं और बिना किसी को दिखे कहीं भी जा सकते हैं। नूना को कई बार लगता है, देवदूत उसके भी आसपास हैं। कभी दिव्य गंध का अनुभव होता है, कभी संगीत का, कभी सुंदर दृश्यों का, शायद उन्हीं के कारण ! शाम के भ्रमण के समय बादल थे, तेज हवा उन्हें उड़ा ले गई। थोड़ी सी जमैका चेरी तोड़ी। विपासना ध्यान किया पर अब उस तरह का ध्यान उसे नहीं भाता, केवल संवेदनाओं के प्रति जागरूक रहने से राग-द्वेष तो मिट सकते हैं, पर देह भाव से मुक्ति नहीं मिलती। कोई आत्म अनुभव नहीं होता, जहाँ पूर्ण शांति हो, कोई भाव, विचार या संवेदना भी न रहे ऐसी विश्रांति ही उसे भाती है। पंचदशी को आगे सुना। यह भी चौदहवीं शताब्दी का स्वामी विद्यारण्य का लिखा वेदान्त का एक ग्रंथ है। साथ ही इसमें त्रिपुर सुंदरी की उपासना का मंत्र भी दिया गया है, यानि भक्ति और ज्ञान दोनों ! 


आज सुबह बगीचे में काम करने के बाद वे आश्रम गये। समूह में सुदर्शन क्रिया का अभ्यास किया। बाद में महादेव में गणेशजी की पत्नी सिद्धि के पुत्र क्षेम तथा ऋद्धि के पुत्र लाभ की कथा सुनी। महादेव उन्हें गोद में लेकर अति प्रसन्न हैं।दोपहर बाद नन्हा आया, उस समय तेज वर्षा हो रही थी। रह-रह कर बिजली चमक रही थी। श्वेत बींस की सब्ज़ी बनायी थी उसने। रिलायंस ट्रेंड्स होते हुए वे नन्हे के साथ उसके घर गये। सबके लिए उपहार ख़रीदे। डिनर के बाद वे वापस लौटे तो घर के बाहर ही मात्र दो हफ़्ते पुरानी, नयी कार का टायर पंक्चर हो गया। नन्हे ने भीगते हुए यू ट्यूब से सीखकर टायर निकाला तथा स्टेपनी लगायी। जून ने तब तक एक मकैनिक को भी बुला लिया था।उसके बाद बच्चे वापस चले गये, अभी तक उनके घर पहुँच जाने का संदेश नहीं आया है।  


Thursday, April 23, 2026

माँ की बातें

 
माँ की बातें 


आज नूना ने डायरी उठायी तो कन्नड़ा भाषा का गृहकार्य याद आ गया। सोचा, आज की दिनचर्या को ही छोटे वाक्यों में लिखेगी, फिर उनका अनुवाद! 

“आज सुबह वे चार बजे उठे। उसके बाद टहलने गये। रास्ते में नीला आकाश देखा।घर आकर उन्होंने योग किया। उसके बाद सुबह की चाय पी। स्नान करके पूजा की। नौ बजे नाश्ता किया। फिर जून से कुछ लोग मिलने आये। नूना ने एक कन्नड़ फ़िल्म देखी।अब वह लंच तैयार करेगी। बारह बजे वे ध्यान करेंगे। एक बजे लंच खाएँगे। उसके बाद कुछ देर विश्राम करेंगे। तीन बजे कन्नड़ा कक्षा है। शाम को वे साइकिल चलायेंगे। वापस आकर ध्यान और पूजा करेंगे। आठ बजे रात्रि भोजन लेंगे। सोने से पहले कोई किताब पढ़ेंगे।”  


इवत्तू बेलिगे अवरु नाल्कू घंटेगे एक्करवादारू। अदारा नंतरा अवरु नादेयालु होदारू।दरियाल्ली अवरु नीलीआकाशवन्नु नोडीदारू।मनेगे हिंदीरुगिदा नंतरा अवरु योगाभ्यास माड़ीदारु।नंतरा अवरु बेलिगे साह सेविसदारु। स्नाना माड़ीदा नंतरा अवरु तम्मा प्रार्थनेगलनु माड़ी दारू।ऑम्बटू घंटेगे अवरु उपहारा सेविसदारु। नंतरा केलावारू  जुनिंदा भेटियागलु बंदारू।नूना कन्नड़ा सिनिमा नोडीदारू।ईगा अवलु उटावन्नू सिद्धापड़ीसुत्ताले।  हन्नेरेआदु घंटेगे अवरु ध्यान माड़ूत्तारे।ओंदू घंटेगे उटा माड़ूत्तारे।नंतरा स्वल्प समया विश्रांति पादेयुत्तारे।मुरु घंटेगे कन्नड़ा तरागति  इरुत्तादे। संजे अवरु साइकलिंग होगुत्तारे।हिन्दीरुगिदा नंतरा अवरु ध्यान माड़ी तम्मा प्रार्थनगलानु  माड़ूत्तारे।अवरु एंटू घंटेगे भोजना माड़ूत्तारे।मालगुवा मोदालू अवरु पुस्तकवन्नू ओदूत्तारे।


वर्डल खेल उसे अब बहुत रोचक लग रहा है। शिक्षिका की तबियत ठीक नहीं है, इसलिए आज कन्नड़ा कक्षा नहीं हुई। महादेव की कहानी बहुत रोचक हो गई है। नारायण को निघस ने निगल लिया है और महादेव धरती के मध्य भाग में तपस्या के लिए चले गये हैं। आज उनकी नई कार के लिए शेष राशि का भुगतान कर दिया गया।शीघ्र मिल जाएगी।जून को इंटरनेट बैंकिंग में दिक्क्त हो रही थी, इसलिए आज सुबह वे एसबीआई बैंक गये थे।वहाँ से लौटे तो जैसे मन की ऊर्जा जैसे घट गई थी, वहाँ के वातावरण के असर से अथवा पिछले दिनों हुए घटनाक्रम के कारण।लेकिन ध्यान करने के बाद मन सामान्य हो गया। शाम को संतों के वचन पढ़े, अनमोल है एक-एक शब्द ! संत न हों तो यह धरती रहने लायक़ ही न बचे। 


समाचारों में सुना, रुस और यूक्रेन का युद्ध चलता ही जा रहा है, इतना विनाश झेलने के बाद भी यूक्रेन को समझ नहीं आ रहा।देवघर में रोपवे के हादसे में फँसे लोगों को बचा लिया गया है। पाकिस्तान में नये प्रधानमंत्री शाहनवाज शरीफ बने हैं, पर कश्मीर का राग वह भी आलाप रहे हैं। रामनवमी के अवसर पर कई जगह हिंसा हुई है, कट्टरवादी लोगों के कारण ही देश का माहौल बिगड़ रहा है। 


नन्हे को आज सुबह व्हाट्सएप पर संदेश भेजा, अभी उसने देखा नहीं है, बहुत ज़्यादा व्यस्त है या चिंतित। ख़ैर ! ईश्वर उसे शक्ति देगा। नूना आजकल शारदा माँ के जीवन पर आधारित 'माँ की बातें’ पुस्तक पढ़ रही है। कितनी महिमावान थीं वह ! शिष्यों के दिल का हाल पहले ही जान जाती थीं। ऐसी दिव्य आत्माएँ अमर हो जाती हैं। आज भी कल्याण में संतों के वाक्य पढ़े, देह भाव से मुक्त होकर सूक्ष्म शरीर में स्थित होना है, फिर कारण शरीर में और अंत में आत्मा में। आत्मभाव में स्थित हुए बिना दुखों की आत्यंतिक निवृत्ति नहीं हो सकती। परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण हुए बिना यह संभव नहीं है। 


शाम होते-होते वर्षा होने लगी है, जैसे सावन ही आ गया हो। आज नन्हे का संदेश आया।सोनू की मॉम की आँख में कुछ समस्या हो गई है, वह अगले हफ़्ते यहाँ आ रही हैं। सुबह ‘जिन सूत्र’ की व्याख्या सुनी। आज महावीर जयंती है और अंबेडकर जयंती भी। महादेव में शिव की अपार करुणा के दर्शन हुए, पुत्र लोहितांग के लिए अभी भी उनके मन में आशा शेष है।   


आज दोपहर वे पहली बार नन्हे के दफ़्तर गये। उसने फ़ोन पर बताया था कि शनि - रविवार को वह बाहर जा रहा है, इस बार नहीं आ पाएगा। उसके बाद घर जाकर सोनू के साथ भोजन किया। शाम को उसे व मौसेरे भाई-बहन को लेकर वे घर आ गये।


आज भी शाम से वर्षा होने लगी। रात्रि भ्रमण छूट गया। शाम को सोनू व दोनों बच्चों को उनके घर छोड़कर वे आश्रम गये। सुबह समय पर उठे, छत पर सभी ने मिलकर योग साधना की। नाश्ते में जून स्थानीय शेफ़ के यहाँ से इडली ले आये थे। लंच में कढ़ी-चावल बनाये। नन्हे से व्हाट्सएप पर बात हुई। शाम को एक सखी का फ़ोन आया, वह करेले का चोखा बनाने की विधि पूछ रही थी। छोटी बहन आर्ट ऑफ़ लिविंग की पत्रिका ‘ऋषिमुख’ के बारे में, वह टीटीसी करना चाहती है, आर्ट ऑफ़ लिविंग का टीचर ट्रेनिंग कोर्स। 


आज सुबह उसने जून को ध्यान का महत्व एक बार फिर बताया, दिन में दो बार ध्यान भी किया।मन कितना शांत है, ध्यान जीवन की अनमोल निधि है। वे स्वयं शांति के स्रोत होते हुए भी अशांत रहें, इससे ज़्यादा मूर्खता क्या होगी ! आने वाला सप्ताह उनके लिए शुभ हो और देश के लिए भी। कल रात दिल्ली में हनुमान जयंती के जुलूस में हिंसा हुई, जैसे रामनवमी के अवसर पर कई राज्यों में हुई थी। 


आज सुबह नन्हा यात्रा से लौट आया है, वजन घटा कर आया है, सोनू ने बताया।आज सुबह वे टहल कर आये तो सफ़ेद पेठे का रस पीया। अच्छा लगा, हल्का मीठा व ठंडा। 


आज नयी एक्सयूवी ७०० आ गई है। नीलिमा लिए हुए काले रंग की है। जून ने एक बार चलायी, पर उन्हें इतनी बड़ी गाड़ी चलाने का अभ्यास नहीं है। नन्हा और सोनू गाड़ी लेकर यहाँ आये, काफ़ी देर बैठे पर किसी न किसी काम ने व्यस्त रहे। नन्हा डाइटिंग पर है, वह आजकल दिन में एक बार ही भोजन करता है। मिठाई के दो डिब्बे लाये, अगले हफ़्ते उसे गुरुपूजा में जाना है, ले जाएगी। सुबह उठने से पूर्व एक स्वप्न देखा, जिसमें जून थे, ट्रेन भी थी, नन्हा भी था, छोटा सा, उसके पैरों में मिट्टी लगी है, और कंकड़ चुभे हैं, वह साफ़ कर रही है। सोनू ने कहा, कुछ बातों में नन्हे की सोच अलग है, जो स्वाभाविक भी है। हरेक अपना जीवन अपने आदर्शों और मूल्यों के अनुसार ही जीता है।


आज देवों के देव में लोहितांग की कथा समाप्त हो गयी। वह मंगल ग्रह के रूप में आज भी अंतरिक्ष में स्थित है। आज सुबह जून ने नयी  कार में सोसाइटी का एक चक्कर लगाया। नन्हे ने कहा है, परसों कार का डेमो देने कोई आएगा। 


सुबह अति सुंदर सूर्योदय की तस्वीर उतारी। खुली हवा में बैठकर साधना की। मन एक पल के लिए भी यदि परेशान होता है तो ज्ञान से संभल जाता है, ज्ञान जो मूर्त रूप होकर भीतर रहता है, गुरु, आत्मा और परमात्मा के रूप में ! जून भी आजकल शांत रहते हैं, उलझन उन्हें होती भी है तो समाधान मिल ही जाता है। दोपहर को अनुवाद कार्य किया। वे गुरुपूजा से लौटे तो नन्हा अपने मित्र के साथ गाड़ी लेने आया। उसे अगले दिन अपने मित्रों के साथ ड्राइव पर जाना था। 


Wednesday, April 22, 2026

वर्डल - शब्दों का एक खेल


वर्डल - शब्दों का एक खेल 


आज का दिन बहुत व्यस्त रहा, फ़िटबिट २४,५२३ कदम दिखा रहा है और ३३ फ़्लोर भी। उनके मित्रगण साढ़े बारह बजे तक आ गये थे। उनके आने से पूर्व सभी कमरों की चादरें बदलीं। भोजन बनाया, जो उन्हें पसंद आया। शाम को उन्हें सोसाइटी (नापा) दिखायी, निकट स्थित एक झील भी, फिर सभी आश्रम गये। गुरुजी यहाँ नहीं हैं, इसलिए सत्संग नहीं हुआ। दोपहर को हुई कन्नड़ा क्लास में १२ वाक्य बनाने को दिये, पता नहीं वह कर पाएगी या नहीं ।  


आज वे मेहमानों के साथ पिरामिड वैली देखने गये। नीचे स्वागत कक्ष में कुछ देर ध्यान सिखाया गे, फिर ऊपर पिरामिड में बैठकर ध्यान किया। शरीर में ऊर्जा का प्रवाह स्पष्ट प्रतीत हो रहा था। शाम को वर्षा हो गयी, मौसम सुहावना हो गया है। आज से सोसाइटी में नई एजेंसी ने काम करना शुरू कर दिया है, पर बहुत सारी दिक़्क़तें आ रही हैं। पुरानी टीम ने काम करने से मना कर दिया है। कुछ दिन तो लगेंगे, सब कुछ व्यवस्थित होने में। 


आज सुबह वे झील पर सूर्योदय देखने गये। मेहमानों को बहुत अच्छा लगा। दोपहर को नन्हा और सोनू आये थे, बाद में मित्र की बिटिया भी आयी। जून और उनकी टीम ने अति विरोध के कारण कमेटी भंग कर दी है।अब कल से उन्हें व्यर्थ के तनाव से नहीं गुजरना होगा।आज सोनू ने अपने दिल की बात कही। ईश्वर उसकी यह इच्छा पूर्ण करें। जीवन में कितनी भी उलझनें हों, आत्मा की निकटता से सब घुल जाती हैं। 


कल शाम वे नन्हे के घर गये थे। उसके एक मित्र के पिताजी से मिलने, उन्हें नूना ने अपनी लिखी पुस्तक व एक असमिया गमछा भेंट किया।दोनों बच्चे कुछ उदास लगे। उम्मीद है अब बादल छँट गये होंगे। 


आज सुबह दोनों से बात हुई, आपसी विश्वास और बातचीत से सब सुलझ जाता है। जून भी आजकल पुन: सामान्य हो गये हैं। उनसे मिलने हर दिन कोई न कोई आता है, शायद सभी को चिंता है कि इतना श्रम करने के बाद यह परिणाम नहीं आना चाहिए था। नूना को लगता है, जो भी हुआ, वैसा ही होना था, और उसी में सबकी भलाई है। आज निकट वाले गाँव से पहली बार कपड़े प्रेस करने वाला एक व्यक्ति घर से आकर कपड़े ले गया। सोसाइटी में आजकल शांति है। नई एजेंसी को शिकायत है, उन्हें काम करने न देकर अच्छा नहीं हुआ।कुछ लोग निहित स्वार्थ के कारण जरा सा भी परिवर्तन नहीं चाहते। पापा जी से बात हुई, यूक्रेन में चल रहे युद्ध में हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वह भी चिंता व्यक्त कर रहे थे, पता नहीं पुतिन को कब सद्बुद्धि आयेगी। आज सुबह उन्होंने एक घंटे से अधिक ही पैदल यात्रा की, घर से घर तक की यात्रा, जीवन भी तो यही है। अव्यक्त से चलकर अव्यक्त हो जाने की यात्रा ! कल से छोटी बहन की भारत यात्रा आरम्भ हो रही है। ईश्वर उसे शक्ति दे और उसकी यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो। आज नैनी ने दोनों सफ़ेद कार्पेट धो दिये हैं और अब सारे डोर मैट्स धोने वाली है। उसे काम करने में कोई कष्ट नहीं होता। दिन भर घर से बाहर ही रहती है, बहुत जीवट है उसमें। 


आज जून की इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार हो गयी। शाम को वे दोनों साइकलिंग के लिए गये। नन्हे को अब रोज़ ही दफ़्तर जाना है। घर से काम करने की छूट अब नहीं रही। सुबह वे टहल कर आये तो दो दुबले-पतले से कुत्ते दिखे, शाम को एक मोटा-तगड़ा कुत्ता दिखा अपने मालिक के साथ, जिसे व्यायाम की ज़रूरत है। आदमियों की तरह कुत्ते भी अमीरी व ग़रीबी में पलते हैं।आज उसने ‘द टाइगर पॉज’ पुस्तक समाप्त कर दी। बहुत रोचक किताब है। गुरुजी के काम करने का तरीक़ा भी पता चलता है। उनका यह कहना कि कोई व्यक्तिगत जीवन नहीं होता, सेवा करो। अपने शिष्यों पर कितना भरोसा है उन्हें। तमिलों ने श्रीलंका में बहुत कष्ट सहे हैं, लेकिन युद्ध से कभी किसी भी समस्या का हल नहीं निकला है। प्रभाकरण भी अंत में मारा गया, हज़ारों तमिलों को नर्क से भी भयानक स्थिति का अनुभव कराके।  


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण करके आये हैं, हवा चेहरे को छू रही थी, शीतलता लिए तेज हवा! जबकि गर्मियों का मौसम पूरे शबाब पर है, दिन में धूप काफ़ी तेज होती है। आज तिब्बतियन पुस्तक  में पढ़ा, नींद मृत्यु की झलक है, स्वप्न, मृत्यु के बाद की अवस्था की झलक और गहरी नींद समाधि की झलक है। यदि कोई नींद में प्रवेश करते समय स्वप्न में और गहरी नींद में भी सजग रह सके तो वह मृत्यु के क्षण में भी सजग रह सकता है। आजकल उसका ध्यान गहरा नहीं हो पा रहा है, भाव के ऊपर विचार हावी हो जाते हैं। रविवार को बच्चों से मिलने के बाद शायद मन ज़्यादा स्थिर हो।जून ने इतने दिनों की व्यस्तता के बाद अपने आपको अख़बार, शेयर आदि में व्यस्त रखना सीख लिया है। आज कन्नड़ा कक्षा हुई पर क्रिया के भेदों को याद रख पाना सरल नहीं है। जब तक वह बोलने का अभ्यास नहीं करेगी कठिनाई बनी ही रहेगी।


आज पहली बार ऑन लाइन शब्द पहेली खेल, ‘वर्डल’ खेला, कठिन लग रहा है, अभी अभ्यास नहीं है। इस खेल को पहली बार जॉश वार्डेल ने अपनी मित्र के लिए बनाया था, पर लोकप्रिय हो जाने के कारण न्यूयार्क टाइम्स ने इसे ख़रीद लिया है। शाम को दीदी से बात की, जब वे निकट के गाँव की सड़क पर घूमने गये थे। सड़क नयी बनी है। क्षितिज पर पहाड़ भी स्पष्ट दिख रहे थे, खेत ख़ाली थे। रास्ते में फूलों से लदे पेड़ भी देखे, बैंगनी व पीले, सफ़ेद बोगेनविलिया भी। गुरुजी को सुना, वह कल ही हरिद्वार से लौटे हैं। एक नया दिन उनकी प्रतीक्षा कर रहा है, परमात्मा हर घड़ी, हर जगह उनके साथ है ! उसे पाने के लिए कुछ करना नहीं है, केवल विश्राम करना है, मन की अतल गहराई में विश्राम ! छोटा भाई कोलकाता के पास मायापुर में है। कल अष्टमी है, नन्हा व सोनू आयेंगे, वह काले चने, हलवा व तवा रोटी बनाएगी। 

  



Tuesday, April 21, 2026

‘हेल्थ इन योर हैंड’

‘हेल्थ इन योर हैंड’


डाक्टर देवेंद्र वोरा की लोकप्रिय पुस्तक ‘हेल्थ इन योर हैंड’ में नूना ने आज पढ़ा, थायराइड ग्लैंड के कम या अधिक सक्रिय होने पर शरीर में क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं।अंगूठे के नीचे उसका एक्यूप्रेशर बिंदु है, जिसे दबाकर भी इस ग्रंथि को ठीक किया जा सकता है। जून ने ब्राज़ील नट्स भी लाकर दिये हैं।


’कश्मीर फ़ाइल्स’ से पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं, उस समय के मुख्यमंत्री ने ऐसे क़ानून बनाये थे कि विस्थापित वापस ही न आ सकें।दोपहर को दो हफ़्ते बाद कन्नड़ भाषा की कक्षा हुई।कल दो वाक्य लिखकर लाने हैं।छोटी बहन का फ़ोन आया, वह एक चित्र बना रही थी, जिसे बहनोई जी अपने रेस्तराँ में लगायेंगे।वह अपने जॉब से छह महीने का अवकाश ले रही है। मई में उसे अमेरिका भी जाना है। यूक्रेन युद्ध की व्यर्थता पर उससे कुछ बात हुई। आज वर्षों बाद रेडियो पर एक नाटक सुना।सुबह एक कविता को संवारा, फ़ेसबुक पर पोस्ट किया। इन दिनों रात की रानी अपने पूरे शबाब पर है, घर के आगे व पीछे दोनों जगह ही। आज सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक पानी नहीं था, टैंकर से तीन बाल्टी पानी लिया। सोसाइटी में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। 


अभी-अभी समाचारों में सुना पश्चिम बंगाल में हिंसा की वरदातें बढ़ती जा रही हैं। राजनीतिक हत्याएँ भी हो रही हैं। कश्मीर फ़ाइल्स पर विवाद बढ़ता जा रहा है, पर लोग इसे देख भी रहे हैं। उन्होंने सोचा है, विवेक अग्निहोत्री की अन्य फ़िल्में भी देखेंगे। छोटे भाई का फ़ोन आया, उसने बताया, सन् अट्ठासी में वह बैंक में ऑडिट करने कश्मीर गया था।एक अन्य सहकर्मी के साथ किश्तवाड़ में एक रात के लिए एक होटल में रुका था। रात को भीड़ चिल्लाती हुई आयी और उनके कमरे का दरवाज़ा पीटती रही। उन्होंने दरवाज़ा बंद करके उसके सामने बेड लगा दिया और उसके ऊपर मेज़-कुर्सी भी रख दी और बिल्कुल चुप होकर बैठे रहे। एक घंटा तक दरवाज़ा पीटने के बाद वे लोग चले गये। होटल का मालिक पैसे लेकर पहले ही चला गया था। सुबह साढ़े तीन बजे वे वहाँ से निकल पड़े और तीन-चार घंटे पैदल चलने के बाद उन्हें ऊधमपुर की बस मिली। उसके बाद वह तीन-चार दिन मँझले भाई के यहाँ बीमार होकर रहा था।मंझला भाई उस समय ऊधमपुर में पोस्टेड था।’कश्मीर फ़ाइल्स’ देखकर उसे सारी बातें याद आ गयीं। उस समय बैंक में हिंदू अधिक थे, मुस्लिम कम थे। अभी कुछ दिन पहले वह फिर ऑडिट के लिए गया तो इस बार हिंदू एक भी नहीं था, पर उन्होंने काफ़ी ख़ातिरदारी की।  

आज सुबह वे टहलकर आये तो नूना का एक पुराना संस्कार जगा, जून को एक बात के लिए टोका, पर थोड़ी ही देर में सब सामान्य हो गया। जैसे सागर में एक लहर उठी हो और फिर गिर गई हो। स्वामी विरूपाक्ष की लिखी पुस्तक द टाइगर पॉज़ आ गई है।कितनी हिंसा का सामना करना पड़ा तमिलों को भी, दुनिया में आज तक न जाने कितने लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, और आज भी हो रहे हैं ।शायद विस्थापन से बड़ा दुख कोई नहीं।


आज सुबह ‘अड्डा’ पर हिन्दी-कन्नड़ा भाषा को लेकर लोगों का विवाद चल रहा था। सोसाइटी में कुछ लोग नई एजेंसी के आने से भी सहमत नहीं हैं। भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता।जून ने आज सुबह छतों की सफ़ाई करवायी। वहाँ रखे बेंत के फ़र्नीचर की पॉलिश भी करवायी। गैरेज को भी एसिड से साफ़ करवाया। दोनों साइकिलों की सर्विसिंग भी हो गई। मेहमानों के स्वागत के लिए पूरा घर तैयार है। पहली तारीख़ को जून ने एक पुराने सहकर्मी अपनी पत्नी के साथ तीन दिनों के लिए आ रहे हैं। आज उन्होंने ‘बुद्धा इन ए ट्रैफ़िक जाम’ देखी, जो अर्बन नक्सल की बात करती है।  


कल रात बल्कि आज सुबह नूना ने अलार्म बजने से पहले एक अद्भुत स्वप्न देखा, जिसमें उसे  परम विश्राम की अनुभूति हुई। ऐसा विश्राम जो जागते, सोते, ध्यान करते या किसी भी समय आजतक अनुभव नहीं किया था। पूर्ण आश्वस्ति का भाव, पूर्ण सुरक्षा तथा पूर्ण तृप्ति तथा पूर्ण संतुष्टि सब को मिला दें तो जो भाव होगा, ऐसा ! । उसकी स्मृति ही दिन में कई बार मन को विश्रांति से भरती रही। परमात्मा के चरण कमलों पर उसका सिर है और इतनी आत्मीयता और इतना अपनापन है कि कोई लज्जा या कोई दूरी नहीं है। भक्ति का परम भाव या पराकाष्ठा का अनुभव था। सामीप्य, सायुज्य या सान्निध्य से भी ऊपर ! जैसे कोई शिशु माँ के पास सुरक्षित महसूस करता होगा। ऐसा प्रेम तो कभी किसी के प्रति अनुभव में नहीं आया। कल गुरुजी के प्रेम पर लिखे लेख का अनुवाद किया था। प्रेम तभी प्रकटता है जब उसे प्रकट होना चाहिए। शायद कल ही वह दिन था। ईश्वर के प्रति विश्वास तो पहले से ही दृढ़ था पर अब उसमें एक नया रस घुल गया है। अब वह निकटतम है। उससे जरा भी दूरी नहीं है। उसने नूना को वैसे ही स्वीकारा है जैसी वह है ! आज भी हो सकता है स्वप्न में उसका संग साथ मिले!     

 

कल रात दो स्वप्न देखे, एक में एक छोटा बच्चा था और दूसरे में एक संबंधी को देखा। अवचेतन में कितनी बातें होती हैं, जो स्वप्न के माध्यम से प्रकट होती हैं। इससे मन में निर्मलता आती है, स्पष्टता होती है।आत्मा की शक्ति जगाकर ही कोई लक्ष्य तक जा सकता है। आज राम नवमी के लिए लेख का अनुवाद किया। रामायण हरेक के भीतर प्रतिपल घट रही है। जून आज सुबह नौ बजे गये और एक बजे लौटे, पुरानी कमेटी के साथ लंबी बातचीत हुई। 


आज का दिन और आने वाला पूरा सप्ताह जून और उनकी टीम के लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।आज सुबह टहल कर आये तो अभी दिन नहीं निकला था, आकाश पर चंद्रमा उसी आकार में था जैसा शिवजी के मस्तक पर होता है। रात्रि भ्रमण के समय पार्क-५ के पास गुलाबी फूलों वाला पेड़ बहुत ही सुंदर लग रहा था। हज़ारों फूल खिले हैं और सैकड़ों नीचे गिरे हैं। नन्हा व सोनू आठ बजे आ गये थे। वे लोग जिस जिग्सा पजल को बना रहे थे, आज पूरा करके उसे फ़्रेम में लगाया और दीवार पर ड्रिलिंग करके लगा भी दिया। नन्हे की आँख में धूल का एक कण भी चला गया, डॉक्टर को दिखाने गया था। यू ट्यूब पर नूना ने आचार्य कुंद कुंद की पुस्तक ‘समय सार’ की व्याख्या सुनी। अद्भुत ग्रंथ है यह, व्याख्याकार उससे भी ज़्यादा अद्भुत हैं।इतने भाव से अपनी बात कहते हैं कि सीधे दिल तक उतर जाती है।  


Sunday, April 19, 2026

'द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन

"द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन

आज सुबह वे दोनों टहल कर आये तो नूना गुलाबी फूलों वाले पेड़ों के चित्र उतारने फिर से गई, जिन्हें “अमापा” कहते हैं। नन्हे का फ़ोन आया था, बातों-बातों में उसने बताया, उनका पालतू बिलाव ठीक सुबह छह बजे और शाम को सात बजे उससे भोजन माँगता है। सूर्योदय तथा सूर्यास्त से ही वह समय का अंदाज़ा लगाता होगा। उसने नौ बड़े गमले और भेज दिये हैं। इतवार को माली उनमें पौधे लगायेगा।आज पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आये हैं, यूपी, उत्तराखण्ड, मणिपुर व गोवा में बीजेपी और पंजाब में आप जीत रही है। 


आज सुबह-सुबह वे साराकी सब्ज़ी मंडी गये, काफ़ी सुना था इसके बारे में। सब्ज़ियाँ ख़रीद कर नन्हे के यहाँ पहुँचे तो उनके योग शिक्षक कक्षा ले रहे थे, नूना भी शामिल हो गई।घर लौटकर   उसे गुरुजी के होली पर दिये संदेश का अनुवाद करना था। कल सोने से पूर्व गीतांजलि की कुछ कवितायें पढ़ीं। कितनी प्यारी कविताएँ हैं उसमें, रवींद्र नाथ टैगोर के दिल का हाल बतातीं। भक्ति और प्रेम में डूबी हुईं।वर्षों पूर्व न जाने किस भाव दशा में डूबकर नूना ने गीतांजलि की अनेक कविताओं का भावानुवाद किया था, एक बार फिर उन्हें सजाने की बेला आ गई है।आज सुबह उसने दूरदर्शन का एक पुराना कार्यक्रम ‘शब्दों के रंग’ सुना।जिसमें गुलज़ार का इंटरव्यू, कहानियों की एक किताब का विवरण और एक धारावाहिक ‘अपना अपना आसमान’ का पहला अंक भी था।कल रात अचानक एसी बंद हो गया, कुछ देर नींद नहीं आयी।जब सारी खिड़कियाँ खोलनी पड़ीं, पता चला, कुछ लोग देर रात को टहलने जाते हैं।


आज इतवार है, बच्चे आये, नाश्ते में मैसूर दोसा और मैंगो शेक लेने के बाद सब मिलकर उनके एक ख़ाली पड़े फ़्लैट को भावी ख़रीदार को दिखाने गये। इस बार घर में कोई सीपेज नहीं था, कुछ जगह पेंट उखड़ा हुआ था। वापसी में नये बन रहे क्लब हाउस को देखते हुए आये, जो बहुत पहले ही बन जाना चाहिए था, फ़िलहाल तरणताल काफ़ी बन गया है।सुबह के भ्रमण के समय एक जगह संभवत: पाइप फट जाने के कारण पानी लीक होते हुए देखा था, जून ने अपनी देख-रेख में उसे ठीक करवा दिया है।      


आज उन्होंने ‘कश्मीर फ़ाइल्स’ देख ली। जिसमें कश्मीर में हुई सांप्रदायिक हिंसा और हिंदुओं के विस्थापन की हृदय विदारक कहानियों को दर्शाया गया है। विवेक अग्निहोत्री की यह फ़िल्म उस कड़वी सच्चाई को दिखा रही है, जिसे तीन दशकों से छुपाया गया था।सिनेमा हॉल पूरा भरा हुआ था। फ़िल्म में बहुत ही मार्मिक दृश्य हैं, जो भीतर तक कंपा देते हैं।१९९० की १९ जनवरी को कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से जाने के लिए कहा गया। उन्हें टेंटों में रहकर गुजारा करना पड़ा, अनेक कष्ट उठाने पड़े। उन सब को आज तक न्याय नहीं मिला है।आज वह समय आया है कि दोषियों को सजा मिले।शाम को पापाजी से भी फ़िल्म के बारे में बात हुई, उन्हें विभाजन के दिन याद आ गये। कितनी मुसीबतें झेलकर, दो रातें रास्ते में बिताकर, पैदल चलते हुए वे लोग भारत आये थे। उसके पूर्व भी उन्हें बहुत दहशत भरे दिन गुजारने पड़े थे। 


छोटा भाई परिवार सहित दुबई गया है, बड़े भाई पापाजी के पास रहने आये हैं।परसों होली का उत्सव है।आज यहाँ होलिका दहन का उत्सव पूरे-ज़ोर-शोर से मनाया गया।प्रसाद में सभी को काले चने व हलवा बाँटा गया। होली की ख़रीदारी भी होगई है।सोसाइटी में कल सुबह साढ़े नौ बजे एक पार्क में सामूहिक होली खेलने का कार्यक्रम है।  


आज सुबह होलिका उत्सव सबके साथ मनाया। बच्चे व बड़े सभी उत्साह में भरे थे, बाद में समोसा व जलेबी का वितरण भी किया गया।शाम को वे आश्रम गये, गुरुजी ने होली का उदाहरण देते हुए कई ज्ञान वर्धक बातें कहीं। दो-तीन लोगों ने अपनी कविताएँ भी सुनायीं। स्वामी विरूपाक्ष द्वारा लिखी गई एक पुस्तक "द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन हुआ,  जिसमें गुरुदेव द्वारा श्रीलंका में कराये गये शांति प्रयासों का वर्णन है। लेखक स्वयं श्रीलंका में नौ वर्षों तक रहे थे।यह पुस्तक वे ख़रीदने वाले हैं।आज छोटी भांजी के लिए एक कविता भेजी, कल उसकी मँगनी हो रही है। असम की एक परिचिता ने अपने लिए कुछ लिखने को कहा था, उसे भी अच्छी लगी कविता। 


आज सुबह वे नन्हे के यहाँ आ गये थे। नाश्ता बाहर ही खाया फिर सोनू के भाई व मौसेरी बहन के साथ सभी लोग ‘एंबेसी हॉर्स राइडिंग स्कूल’ पहुँचे। भारत में घुड़सवारी के खेल को विश्व स्तर तक पहुँचाने के लिए पीछे तीन दशकों से वहाँ घुड़सवारी सिखायी जाती है। वहाँ २४० एकड़ ज़मीन पर घोड़ों को रखने की व्यवस्था की गई है। उनकी अच्छी देखभाल की जाती है। सभी घोड़े चुस्त-दुरस्त थे। सभी ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। 


वहाँ से उनका छह लोगों का समूह ‘मिस्ट्री रूम्स’ गया। बैंगलुरु के इंदिरा नगर में ‘मिस्ट्री रूम्स’ एक रोमांचक लाइव एस्केप गेम है।सभी को एक घंटे के लिए एक कमरे में बंद कर दिया गया। और वहाँ दी गई पहेलियों को बूझकर उन्हें बाहर निकलना था। अत्यंत अनोखा अनुभव था। उनके पास बाहरी दुनिया से संपर्क करने के लिए कोई साधन नहीं था, कमरे की दीवारें ऊँची थीं, और ताला बंद था, जिसकी चाबी का सुराग लगाना था। सभी बाधाएँ पार करके वे अंतिम द्वार तक पहुँचने ही वाले थे, पर समय सीमा समाप्त हो गयी  और आयोजकों ने स्वयं ही दरवाज़ा खोल दिया। उसके बाद सभी ने राजस्थानी होटल में लंच खाया। शाम को घर लौटकर भांजी की माँगनी का लाइव टेलीकास्ट देखा। 


आज नूना ने ध्यान की एक नयी विधि ‘तिब्बतियन बुक ऑफ़ लिविंग एंड डाइंग’ में पढ़ी और प्रयोग किया। सर्वप्रथम कुछ देर के लिए आँखें किसी वस्तु या किसी चित्र पर टिकाएँ, उसके बाद कुछ देर तक अपने प्रिय मंत्र का उच्चारण करें, तथा फिर श्वासों पर ध्यान दें। अंत में शून्य में टिक जायें। मन जब शांत होकर ठहर जाता है तब उसे अपने स्वरूप का दर्शन होता है। अपना स्वरूप कैसा है, इसका पता तो किसी को अनुभव के बाद ही चल सकता है, उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता! जून आज अपनी कार को पेंट करवाने के लिए देकर आये हैं, चार दिन बाद मिलेगी, कहने लगे, वे बेकार (बिना कार के ) हो गये हैं !