Thursday, April 23, 2026

माँ की बातें

 
माँ की बातें 


आज नूना ने डायरी उठायी तो कन्नड़ा भाषा का गृहकार्य याद आ गया। सोचा, आज की दिनचर्या को ही छोटे वाक्यों में लिखेगी, फिर उनका अनुवाद! 

“आज सुबह वे चार बजे उठे। उसके बाद टहलने गये। रास्ते में नीला आकाश देखा।घर आकर उन्होंने योग किया। उसके बाद सुबह की चाय पी। स्नान करके पूजा की। नौ बजे नाश्ता किया। फिर जून से कुछ लोग मिलने आये। नूना ने एक कन्नड़ फ़िल्म देखी।अब वह लंच तैयार करेगी। बारह बजे वे ध्यान करेंगे। एक बजे लंच खाएँगे। उसके बाद कुछ देर विश्राम करेंगे। तीन बजे कन्नड़ा कक्षा है। शाम को वे साइकिल चलायेंगे। वापस आकर ध्यान और पूजा करेंगे। आठ बजे रात्रि भोजन लेंगे। सोने से पहले कोई किताब पढ़ेंगे।”  


इवत्तू बेलिगे अवरु नाल्कू घंटेगे एक्करवादारू। अदारा नंतरा अवरु नादेयालु होदारू।दरियाल्ली अवरु नीलीआकाशवन्नु नोडीदारू।मनेगे हिंदीरुगिदा नंतरा अवरु योगाभ्यास माड़ीदारु।नंतरा अवरु बेलिगे साह सेविसदारु। स्नाना माड़ीदा नंतरा अवरु तम्मा प्रार्थनेगलनु माड़ी दारू।ऑम्बटू घंटेगे अवरु उपहारा सेविसदारु। नंतरा केलावारू  जुनिंदा भेटियागलु बंदारू।नूना कन्नड़ा सिनिमा नोडीदारू।ईगा अवलु उटावन्नू सिद्धापड़ीसुत्ताले।  हन्नेरेआदु घंटेगे अवरु ध्यान माड़ूत्तारे।ओंदू घंटेगे उटा माड़ूत्तारे।नंतरा स्वल्प समया विश्रांति पादेयुत्तारे।मुरु घंटेगे कन्नड़ा तरागति  इरुत्तादे। संजे अवरु साइकलिंग होगुत्तारे।हिन्दीरुगिदा नंतरा अवरु ध्यान माड़ी तम्मा प्रार्थनगलानु  माड़ूत्तारे।अवरु एंटू घंटेगे भोजना माड़ूत्तारे।मालगुवा मोदालू अवरु पुस्तकवन्नू ओदूत्तारे।


वर्डल खेल उसे अब बहुत रोचक लग रहा है। शिक्षिका की तबियत ठीक नहीं है, इसलिए आज कन्नड़ा कक्षा नहीं हुई। महादेव की कहानी बहुत रोचक हो गई है। नारायण को निघस ने निगल लिया है और महादेव धरती के मध्य भाग में तपस्या के लिए चले गये हैं। आज उनकी नई कार के लिए शेष राशि का भुगतान कर दिया गया।शीघ्र मिल जाएगी।जून को इंटरनेट बैंकिंग में दिक्क्त हो रही थी, इसलिए आज सुबह वे एसबीआई बैंक गये थे।वहाँ से लौटे तो जैसे मन की ऊर्जा जैसे घट गई थी, वहाँ के वातावरण के असर से अथवा पिछले दिनों हुए घटनाक्रम के कारण।लेकिन ध्यान करने के बाद मन सामान्य हो गया। शाम को संतों के वचन पढ़े, अनमोल है एक-एक शब्द ! संत न हों तो यह धरती रहने लायक़ ही न बचे। 


समाचारों में सुना, रुस और यूक्रेन का युद्ध चलता ही जा रहा है, इतना विनाश झेलने के बाद भी यूक्रेन को समझ नहीं आ रहा।देवघर में रोपवे के हादसे में फँसे लोगों को बचा लिया गया है। पाकिस्तान में नये प्रधानमंत्री शाहनवाज शरीफ बने हैं, पर कश्मीर का राग वह भी आलाप रहे हैं। रामनवमी के अवसर पर कई जगह हिंसा हुई है, कट्टरवादी लोगों के कारण ही देश का माहौल बिगड़ रहा है। 


नन्हे को आज सुबह व्हाट्सएप पर संदेश भेजा, अभी उसने देखा नहीं है, बहुत ज़्यादा व्यस्त है या चिंतित। ख़ैर ! ईश्वर उसे शक्ति देगा। नूना आजकल शारदा माँ के जीवन पर आधारित 'माँ की बातें’ पुस्तक पढ़ रही है। कितनी महिमावान थीं वह ! शिष्यों के दिल का हाल पहले ही जान जाती थीं। ऐसी दिव्य आत्माएँ अमर हो जाती हैं। आज भी कल्याण में संतों के वाक्य पढ़े, देह भाव से मुक्त होकर सूक्ष्म शरीर में स्थित होना है, फिर कारण शरीर में और अंत में आत्मा में। आत्मभाव में स्थित हुए बिना दुखों की आत्यंतिक निवृत्ति नहीं हो सकती। परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण हुए बिना यह संभव नहीं है। 


शाम होते-होते वर्षा होने लगी है, जैसे सावन ही आ गया हो। आज नन्हे का संदेश आया।सोनू की मॉम की आँख में कुछ समस्या हो गई है, वह अगले हफ़्ते यहाँ आ रही हैं। सुबह ‘जिन सूत्र’ की व्याख्या सुनी। आज महावीर जयंती है और अंबेडकर जयंती भी। महादेव में शिव की अपार करुणा के दर्शन हुए, पुत्र लोहितांग के लिए अभी भी उनके मन में आशा शेष है।   


आज दोपहर वे पहली बार नन्हे के दफ़्तर गये। उसने फ़ोन पर बताया था कि शनि - रविवार को वह बाहर जा रहा है, इस बार नहीं आ पाएगा। उसके बाद घर जाकर सोनू के साथ भोजन किया। शाम को उसे व मौसेरे भाई-बहन को लेकर वे घर आ गये।


आज भी शाम से वर्षा होने लगी। रात्रि भ्रमण छूट गया। शाम को सोनू व दोनों बच्चों को उनके घर छोड़कर वे आश्रम गये। सुबह समय पर उठे, छत पर सभी ने मिलकर योग साधना की। नाश्ते में जून स्थानीय शेफ़ के यहाँ से इडली ले आये थे। लंच में कढ़ी-चावल बनाये। नन्हे से व्हाट्सएप पर बात हुई। शाम को एक सखी का फ़ोन आया, वह करेले का चोखा बनाने की विधि पूछ रही थी। छोटी बहन आर्ट ऑफ़ लिविंग की पत्रिका ‘ऋषिमुख’ के बारे में, वह टीटीसी करना चाहती है, आर्ट ऑफ़ लिविंग का टीचर ट्रेनिंग कोर्स। 


आज सुबह उसने जून को ध्यान का महत्व एक बार फिर बताया, दिन में दो बार ध्यान भी किया।मन कितना शांत है, ध्यान जीवन की अनमोल निधि है। वे स्वयं शांति के स्रोत होते हुए भी अशांत रहें, इससे ज़्यादा मूर्खता क्या होगी ! आने वाला सप्ताह उनके लिए शुभ हो और देश के लिए भी। कल रात दिल्ली में हनुमान जयंती के जुलूस में हिंसा हुई, जैसे रामनवमी के अवसर पर कई राज्यों में हुई थी। 


आज सुबह नन्हा यात्रा से लौट आया है, वजन घटा कर आया है, सोनू ने बताया।आज सुबह वे टहल कर आये तो सफ़ेद पेठे का रस पीया। अच्छा लगा, हल्का मीठा व ठंडा। 


आज नयी एक्सयूवी ७०० आ गई है। नीलिमा लिए हुए काले रंग की है। जून ने एक बार चलायी, पर उन्हें इतनी बड़ी गाड़ी चलाने का अभ्यास नहीं है। नन्हा और सोनू गाड़ी लेकर यहाँ आये, काफ़ी देर बैठे पर किसी न किसी काम ने व्यस्त रहे। नन्हा डाइटिंग पर है, वह आजकल दिन में एक बार ही भोजन करता है। मिठाई के दो डिब्बे लाये, अगले हफ़्ते उसे गुरुपूजा में जाना है, ले जाएगी। सुबह उठने से पूर्व एक स्वप्न देखा, जिसमें जून थे, ट्रेन भी थी, नन्हा भी था, छोटा सा, उसके पैरों में मिट्टी लगी है, और कंकड़ चुभे हैं, वह साफ़ कर रही है। सोनू ने कहा, कुछ बातों में नन्हे की सोच अलग है, जो स्वाभाविक भी है। हरेक अपना जीवन अपने आदर्शों और मूल्यों के अनुसार ही जीता है।


आज देवों के देव में लोहितांग की कथा समाप्त हो गयी। वह मंगल ग्रह के रूप में आज भी अंतरिक्ष में स्थित है। आज सुबह जून ने नयी  कार में सोसाइटी का एक चक्कर लगाया। नन्हे ने कहा है, परसों कार का डेमो देने कोई आएगा। 


सुबह अति सुंदर सूर्योदय की तस्वीर उतारी। खुली हवा में बैठकर साधना की। मन एक पल के लिए भी यदि परेशान होता है तो ज्ञान से संभल जाता है, ज्ञान जो मूर्त रूप होकर भीतर रहता है, गुरु, आत्मा और परमात्मा के रूप में ! जून भी आजकल शांत रहते हैं, उलझन उन्हें होती भी है तो समाधान मिल ही जाता है। दोपहर को अनुवाद कार्य किया। वे गुरुपूजा से लौटे तो नन्हा अपने मित्र के साथ गाड़ी लेने आया। उसे अगले दिन अपने मित्रों के साथ ड्राइव पर जाना था। 


Wednesday, April 22, 2026

वर्डल - शब्दों का एक खेल


वर्डल - शब्दों का एक खेल 


आज का दिन बहुत व्यस्त रहा, फ़िटबिट २४,५२३ कदम दिखा रहा है और ३३ फ़्लोर भी। उनके मित्रगण साढ़े बारह बजे तक आ गये थे। उनके आने से पूर्व सभी कमरों की चादरें बदलीं। भोजन बनाया, जो उन्हें पसंद आया। शाम को उन्हें सोसाइटी (नापा) दिखायी, निकट स्थित एक झील भी, फिर सभी आश्रम गये। गुरुजी यहाँ नहीं हैं, इसलिए सत्संग नहीं हुआ। दोपहर को हुई कन्नड़ा क्लास में १२ वाक्य बनाने को दिये, पता नहीं वह कर पाएगी या नहीं ।  


आज वे मेहमानों के साथ पिरामिड वैली देखने गये। नीचे स्वागत कक्ष में कुछ देर ध्यान सिखाया गे, फिर ऊपर पिरामिड में बैठकर ध्यान किया। शरीर में ऊर्जा का प्रवाह स्पष्ट प्रतीत हो रहा था। शाम को वर्षा हो गयी, मौसम सुहावना हो गया है। आज से सोसाइटी में नई एजेंसी ने काम करना शुरू कर दिया है, पर बहुत सारी दिक़्क़तें आ रही हैं। पुरानी टीम ने काम करने से मना कर दिया है। कुछ दिन तो लगेंगे, सब कुछ व्यवस्थित होने में। 


आज सुबह वे झील पर सूर्योदय देखने गये। मेहमानों को बहुत अच्छा लगा। दोपहर को नन्हा और सोनू आये थे, बाद में मित्र की बिटिया भी आयी। जून और उनकी टीम ने अति विरोध के कारण कमेटी भंग कर दी है।अब कल से उन्हें व्यर्थ के तनाव से नहीं गुजरना होगा।आज सोनू ने अपने दिल की बात कही। ईश्वर उसकी यह इच्छा पूर्ण करें। जीवन में कितनी भी उलझनें हों, आत्मा की निकटता से सब घुल जाती हैं। 


कल शाम वे नन्हे के घर गये थे। उसके एक मित्र के पिताजी से मिलने, उन्हें नूना ने अपनी लिखी पुस्तक व एक असमिया गमछा भेंट किया।दोनों बच्चे कुछ उदास लगे। उम्मीद है अब बादल छँट गये होंगे। 


आज सुबह दोनों से बात हुई, आपसी विश्वास और बातचीत से सब सुलझ जाता है। जून भी आजकल पुन: सामान्य हो गये हैं। उनसे मिलने हर दिन कोई न कोई आता है, शायद सभी को चिंता है कि इतना श्रम करने के बाद यह परिणाम नहीं आना चाहिए था। नूना को लगता है, जो भी हुआ, वैसा ही होना था, और उसी में सबकी भलाई है। आज निकट वाले गाँव से पहली बार कपड़े प्रेस करने वाला एक व्यक्ति घर से आकर कपड़े ले गया। सोसाइटी में आजकल शांति है। नई एजेंसी को शिकायत है, उन्हें काम करने न देकर अच्छा नहीं हुआ।कुछ लोग निहित स्वार्थ के कारण जरा सा भी परिवर्तन नहीं चाहते। पापा जी से बात हुई, यूक्रेन में चल रहे युद्ध में हज़ारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। वह भी चिंता व्यक्त कर रहे थे, पता नहीं पुतिन को कब सद्बुद्धि आयेगी। आज सुबह उन्होंने एक घंटे से अधिक ही पैदल यात्रा की, घर से घर तक की यात्रा, जीवन भी तो यही है। अव्यक्त से चलकर अव्यक्त हो जाने की यात्रा ! कल से छोटी बहन की भारत यात्रा आरम्भ हो रही है। ईश्वर उसे शक्ति दे और उसकी यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो। आज नैनी ने दोनों सफ़ेद कार्पेट धो दिये हैं और अब सारे डोर मैट्स धोने वाली है। उसे काम करने में कोई कष्ट नहीं होता। दिन भर घर से बाहर ही रहती है, बहुत जीवट है उसमें। 


आज जून की इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार हो गयी। शाम को वे दोनों साइकलिंग के लिए गये। नन्हे को अब रोज़ ही दफ़्तर जाना है। घर से काम करने की छूट अब नहीं रही। सुबह वे टहल कर आये तो दो दुबले-पतले से कुत्ते दिखे, शाम को एक मोटा-तगड़ा कुत्ता दिखा अपने मालिक के साथ, जिसे व्यायाम की ज़रूरत है। आदमियों की तरह कुत्ते भी अमीरी व ग़रीबी में पलते हैं।आज उसने ‘द टाइगर पॉज’ पुस्तक समाप्त कर दी। बहुत रोचक किताब है। गुरुजी के काम करने का तरीक़ा भी पता चलता है। उनका यह कहना कि कोई व्यक्तिगत जीवन नहीं होता, सेवा करो। अपने शिष्यों पर कितना भरोसा है उन्हें। तमिलों ने श्रीलंका में बहुत कष्ट सहे हैं, लेकिन युद्ध से कभी किसी भी समस्या का हल नहीं निकला है। प्रभाकरण भी अंत में मारा गया, हज़ारों तमिलों को नर्क से भी भयानक स्थिति का अनुभव कराके।  


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण करके आये हैं, हवा चेहरे को छू रही थी, शीतलता लिए तेज हवा! जबकि गर्मियों का मौसम पूरे शबाब पर है, दिन में धूप काफ़ी तेज होती है। आज तिब्बतियन पुस्तक  में पढ़ा, नींद मृत्यु की झलक है, स्वप्न, मृत्यु के बाद की अवस्था की झलक और गहरी नींद समाधि की झलक है। यदि कोई नींद में प्रवेश करते समय स्वप्न में और गहरी नींद में भी सजग रह सके तो वह मृत्यु के क्षण में भी सजग रह सकता है। आजकल उसका ध्यान गहरा नहीं हो पा रहा है, भाव के ऊपर विचार हावी हो जाते हैं। रविवार को बच्चों से मिलने के बाद शायद मन ज़्यादा स्थिर हो।जून ने इतने दिनों की व्यस्तता के बाद अपने आपको अख़बार, शेयर आदि में व्यस्त रखना सीख लिया है। आज कन्नड़ा कक्षा हुई पर क्रिया के भेदों को याद रख पाना सरल नहीं है। जब तक वह बोलने का अभ्यास नहीं करेगी कठिनाई बनी ही रहेगी।


आज पहली बार ऑन लाइन शब्द पहेली खेल, ‘वर्डल’ खेला, कठिन लग रहा है, अभी अभ्यास नहीं है। इस खेल को पहली बार जॉश वार्डेल ने अपनी मित्र के लिए बनाया था, पर लोकप्रिय हो जाने के कारण न्यूयार्क टाइम्स ने इसे ख़रीद लिया है। शाम को दीदी से बात की, जब वे निकट के गाँव की सड़क पर घूमने गये थे। सड़क नयी बनी है। क्षितिज पर पहाड़ भी स्पष्ट दिख रहे थे, खेत ख़ाली थे। रास्ते में फूलों से लदे पेड़ भी देखे, बैंगनी व पीले, सफ़ेद बोगेनविलिया भी। गुरुजी को सुना, वह कल ही हरिद्वार से लौटे हैं। एक नया दिन उनकी प्रतीक्षा कर रहा है, परमात्मा हर घड़ी, हर जगह उनके साथ है ! उसे पाने के लिए कुछ करना नहीं है, केवल विश्राम करना है, मन की अतल गहराई में विश्राम ! छोटा भाई कोलकाता के पास मायापुर में है। कल अष्टमी है, नन्हा व सोनू आयेंगे, वह काले चने, हलवा व तवा रोटी बनाएगी। 

  



Tuesday, April 21, 2026

‘हेल्थ इन योर हैंड’

‘हेल्थ इन योर हैंड’


डाक्टर देवेंद्र वोरा की लोकप्रिय पुस्तक ‘हेल्थ इन योर हैंड’ में नूना ने आज पढ़ा, थायराइड ग्लैंड के कम या अधिक सक्रिय होने पर शरीर में क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं।अंगूठे के नीचे उसका एक्यूप्रेशर बिंदु है, जिसे दबाकर भी इस ग्रंथि को ठीक किया जा सकता है। जून ने ब्राज़ील नट्स भी लाकर दिये हैं।


’कश्मीर फ़ाइल्स’ से पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं, उस समय के मुख्यमंत्री ने ऐसे क़ानून बनाये थे कि विस्थापित वापस ही न आ सकें।दोपहर को दो हफ़्ते बाद कन्नड़ भाषा की कक्षा हुई।कल दो वाक्य लिखकर लाने हैं।छोटी बहन का फ़ोन आया, वह एक चित्र बना रही थी, जिसे बहनोई जी अपने रेस्तराँ में लगायेंगे।वह अपने जॉब से छह महीने का अवकाश ले रही है। मई में उसे अमेरिका भी जाना है। यूक्रेन युद्ध की व्यर्थता पर उससे कुछ बात हुई। आज वर्षों बाद रेडियो पर एक नाटक सुना।सुबह एक कविता को संवारा, फ़ेसबुक पर पोस्ट किया। इन दिनों रात की रानी अपने पूरे शबाब पर है, घर के आगे व पीछे दोनों जगह ही। आज सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक पानी नहीं था, टैंकर से तीन बाल्टी पानी लिया। सोसाइटी में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। 


अभी-अभी समाचारों में सुना पश्चिम बंगाल में हिंसा की वरदातें बढ़ती जा रही हैं। राजनीतिक हत्याएँ भी हो रही हैं। कश्मीर फ़ाइल्स पर विवाद बढ़ता जा रहा है, पर लोग इसे देख भी रहे हैं। उन्होंने सोचा है, विवेक अग्निहोत्री की अन्य फ़िल्में भी देखेंगे। छोटे भाई का फ़ोन आया, उसने बताया, सन् अट्ठासी में वह बैंक में ऑडिट करने कश्मीर गया था।एक अन्य सहकर्मी के साथ किश्तवाड़ में एक रात के लिए एक होटल में रुका था। रात को भीड़ चिल्लाती हुई आयी और उनके कमरे का दरवाज़ा पीटती रही। उन्होंने दरवाज़ा बंद करके उसके सामने बेड लगा दिया और उसके ऊपर मेज़-कुर्सी भी रख दी और बिल्कुल चुप होकर बैठे रहे। एक घंटा तक दरवाज़ा पीटने के बाद वे लोग चले गये। होटल का मालिक पैसे लेकर पहले ही चला गया था। सुबह साढ़े तीन बजे वे वहाँ से निकल पड़े और तीन-चार घंटे पैदल चलने के बाद उन्हें ऊधमपुर की बस मिली। उसके बाद वह तीन-चार दिन मँझले भाई के यहाँ बीमार होकर रहा था।मंझला भाई उस समय ऊधमपुर में पोस्टेड था।’कश्मीर फ़ाइल्स’ देखकर उसे सारी बातें याद आ गयीं। उस समय बैंक में हिंदू अधिक थे, मुस्लिम कम थे। अभी कुछ दिन पहले वह फिर ऑडिट के लिए गया तो इस बार हिंदू एक भी नहीं था, पर उन्होंने काफ़ी ख़ातिरदारी की।  

आज सुबह वे टहलकर आये तो नूना का एक पुराना संस्कार जगा, जून को एक बात के लिए टोका, पर थोड़ी ही देर में सब सामान्य हो गया। जैसे सागर में एक लहर उठी हो और फिर गिर गई हो। स्वामी विरूपाक्ष की लिखी पुस्तक द टाइगर पॉज़ आ गई है।कितनी हिंसा का सामना करना पड़ा तमिलों को भी, दुनिया में आज तक न जाने कितने लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, और आज भी हो रहे हैं ।शायद विस्थापन से बड़ा दुख कोई नहीं।


आज सुबह ‘अड्डा’ पर हिन्दी-कन्नड़ा भाषा को लेकर लोगों का विवाद चल रहा था। सोसाइटी में कुछ लोग नई एजेंसी के आने से भी सहमत नहीं हैं। भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता।जून ने आज सुबह छतों की सफ़ाई करवायी। वहाँ रखे बेंत के फ़र्नीचर की पॉलिश भी करवायी। गैरेज को भी एसिड से साफ़ करवाया। दोनों साइकिलों की सर्विसिंग भी हो गई। मेहमानों के स्वागत के लिए पूरा घर तैयार है। पहली तारीख़ को जून ने एक पुराने सहकर्मी अपनी पत्नी के साथ तीन दिनों के लिए आ रहे हैं। आज उन्होंने ‘बुद्धा इन ए ट्रैफ़िक जाम’ देखी, जो अर्बन नक्सल की बात करती है।  


कल रात बल्कि आज सुबह नूना ने अलार्म बजने से पहले एक अद्भुत स्वप्न देखा, जिसमें उसे  परम विश्राम की अनुभूति हुई। ऐसा विश्राम जो जागते, सोते, ध्यान करते या किसी भी समय आजतक अनुभव नहीं किया था। पूर्ण आश्वस्ति का भाव, पूर्ण सुरक्षा तथा पूर्ण तृप्ति तथा पूर्ण संतुष्टि सब को मिला दें तो जो भाव होगा, ऐसा ! । उसकी स्मृति ही दिन में कई बार मन को विश्रांति से भरती रही। परमात्मा के चरण कमलों पर उसका सिर है और इतनी आत्मीयता और इतना अपनापन है कि कोई लज्जा या कोई दूरी नहीं है। भक्ति का परम भाव या पराकाष्ठा का अनुभव था। सामीप्य, सायुज्य या सान्निध्य से भी ऊपर ! जैसे कोई शिशु माँ के पास सुरक्षित महसूस करता होगा। ऐसा प्रेम तो कभी किसी के प्रति अनुभव में नहीं आया। कल गुरुजी के प्रेम पर लिखे लेख का अनुवाद किया था। प्रेम तभी प्रकटता है जब उसे प्रकट होना चाहिए। शायद कल ही वह दिन था। ईश्वर के प्रति विश्वास तो पहले से ही दृढ़ था पर अब उसमें एक नया रस घुल गया है। अब वह निकटतम है। उससे जरा भी दूरी नहीं है। उसने नूना को वैसे ही स्वीकारा है जैसी वह है ! आज भी हो सकता है स्वप्न में उसका संग साथ मिले!     

 

कल रात दो स्वप्न देखे, एक में एक छोटा बच्चा था और दूसरे में एक संबंधी को देखा। अवचेतन में कितनी बातें होती हैं, जो स्वप्न के माध्यम से प्रकट होती हैं। इससे मन में निर्मलता आती है, स्पष्टता होती है।आत्मा की शक्ति जगाकर ही कोई लक्ष्य तक जा सकता है। आज राम नवमी के लिए लेख का अनुवाद किया। रामायण हरेक के भीतर प्रतिपल घट रही है। जून आज सुबह नौ बजे गये और एक बजे लौटे, पुरानी कमेटी के साथ लंबी बातचीत हुई। 


आज का दिन और आने वाला पूरा सप्ताह जून और उनकी टीम के लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।आज सुबह टहल कर आये तो अभी दिन नहीं निकला था, आकाश पर चंद्रमा उसी आकार में था जैसा शिवजी के मस्तक पर होता है। रात्रि भ्रमण के समय पार्क-५ के पास गुलाबी फूलों वाला पेड़ बहुत ही सुंदर लग रहा था। हज़ारों फूल खिले हैं और सैकड़ों नीचे गिरे हैं। नन्हा व सोनू आठ बजे आ गये थे। वे लोग जिस जिग्सा पजल को बना रहे थे, आज पूरा करके उसे फ़्रेम में लगाया और दीवार पर ड्रिलिंग करके लगा भी दिया। नन्हे की आँख में धूल का एक कण भी चला गया, डॉक्टर को दिखाने गया था। यू ट्यूब पर नूना ने आचार्य कुंद कुंद की पुस्तक ‘समय सार’ की व्याख्या सुनी। अद्भुत ग्रंथ है यह, व्याख्याकार उससे भी ज़्यादा अद्भुत हैं।इतने भाव से अपनी बात कहते हैं कि सीधे दिल तक उतर जाती है।  


Sunday, April 19, 2026

'द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन

"द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन

आज सुबह वे दोनों टहल कर आये तो नूना गुलाबी फूलों वाले पेड़ों के चित्र उतारने फिर से गई, जिन्हें “अमापा” कहते हैं। नन्हे का फ़ोन आया था, बातों-बातों में उसने बताया, उनका पालतू बिलाव ठीक सुबह छह बजे और शाम को सात बजे उससे भोजन माँगता है। सूर्योदय तथा सूर्यास्त से ही वह समय का अंदाज़ा लगाता होगा। उसने नौ बड़े गमले और भेज दिये हैं। इतवार को माली उनमें पौधे लगायेगा।आज पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम आये हैं, यूपी, उत्तराखण्ड, मणिपुर व गोवा में बीजेपी और पंजाब में आप जीत रही है। 


आज सुबह-सुबह वे साराकी सब्ज़ी मंडी गये, काफ़ी सुना था इसके बारे में। सब्ज़ियाँ ख़रीद कर नन्हे के यहाँ पहुँचे तो उनके योग शिक्षक कक्षा ले रहे थे, नूना भी शामिल हो गई।घर लौटकर   उसे गुरुजी के होली पर दिये संदेश का अनुवाद करना था। कल सोने से पूर्व गीतांजलि की कुछ कवितायें पढ़ीं। कितनी प्यारी कविताएँ हैं उसमें, रवींद्र नाथ टैगोर के दिल का हाल बतातीं। भक्ति और प्रेम में डूबी हुईं।वर्षों पूर्व न जाने किस भाव दशा में डूबकर नूना ने गीतांजलि की अनेक कविताओं का भावानुवाद किया था, एक बार फिर उन्हें सजाने की बेला आ गई है।आज सुबह उसने दूरदर्शन का एक पुराना कार्यक्रम ‘शब्दों के रंग’ सुना।जिसमें गुलज़ार का इंटरव्यू, कहानियों की एक किताब का विवरण और एक धारावाहिक ‘अपना अपना आसमान’ का पहला अंक भी था।कल रात अचानक एसी बंद हो गया, कुछ देर नींद नहीं आयी।जब सारी खिड़कियाँ खोलनी पड़ीं, पता चला, कुछ लोग देर रात को टहलने जाते हैं।


आज इतवार है, बच्चे आये, नाश्ते में मैसूर दोसा और मैंगो शेक लेने के बाद सब मिलकर उनके एक ख़ाली पड़े फ़्लैट को भावी ख़रीदार को दिखाने गये। इस बार घर में कोई सीपेज नहीं था, कुछ जगह पेंट उखड़ा हुआ था। वापसी में नये बन रहे क्लब हाउस को देखते हुए आये, जो बहुत पहले ही बन जाना चाहिए था, फ़िलहाल तरणताल काफ़ी बन गया है।सुबह के भ्रमण के समय एक जगह संभवत: पाइप फट जाने के कारण पानी लीक होते हुए देखा था, जून ने अपनी देख-रेख में उसे ठीक करवा दिया है।      


आज उन्होंने ‘कश्मीर फ़ाइल्स’ देख ली। जिसमें कश्मीर में हुई सांप्रदायिक हिंसा और हिंदुओं के विस्थापन की हृदय विदारक कहानियों को दर्शाया गया है। विवेक अग्निहोत्री की यह फ़िल्म उस कड़वी सच्चाई को दिखा रही है, जिसे तीन दशकों से छुपाया गया था।सिनेमा हॉल पूरा भरा हुआ था। फ़िल्म में बहुत ही मार्मिक दृश्य हैं, जो भीतर तक कंपा देते हैं।१९९० की १९ जनवरी को कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से जाने के लिए कहा गया। उन्हें टेंटों में रहकर गुजारा करना पड़ा, अनेक कष्ट उठाने पड़े। उन सब को आज तक न्याय नहीं मिला है।आज वह समय आया है कि दोषियों को सजा मिले।शाम को पापाजी से भी फ़िल्म के बारे में बात हुई, उन्हें विभाजन के दिन याद आ गये। कितनी मुसीबतें झेलकर, दो रातें रास्ते में बिताकर, पैदल चलते हुए वे लोग भारत आये थे। उसके पूर्व भी उन्हें बहुत दहशत भरे दिन गुजारने पड़े थे। 


छोटा भाई परिवार सहित दुबई गया है, बड़े भाई पापाजी के पास रहने आये हैं।परसों होली का उत्सव है।आज यहाँ होलिका दहन का उत्सव पूरे-ज़ोर-शोर से मनाया गया।प्रसाद में सभी को काले चने व हलवा बाँटा गया। होली की ख़रीदारी भी होगई है।सोसाइटी में कल सुबह साढ़े नौ बजे एक पार्क में सामूहिक होली खेलने का कार्यक्रम है।  


आज सुबह होलिका उत्सव सबके साथ मनाया। बच्चे व बड़े सभी उत्साह में भरे थे, बाद में समोसा व जलेबी का वितरण भी किया गया।शाम को वे आश्रम गये, गुरुजी ने होली का उदाहरण देते हुए कई ज्ञान वर्धक बातें कहीं। दो-तीन लोगों ने अपनी कविताएँ भी सुनायीं। स्वामी विरूपाक्ष द्वारा लिखी गई एक पुस्तक "द टाइगर्स पॉज़’ का विमोचन हुआ,  जिसमें गुरुदेव द्वारा श्रीलंका में कराये गये शांति प्रयासों का वर्णन है। लेखक स्वयं श्रीलंका में नौ वर्षों तक रहे थे।यह पुस्तक वे ख़रीदने वाले हैं।आज छोटी भांजी के लिए एक कविता भेजी, कल उसकी मँगनी हो रही है। असम की एक परिचिता ने अपने लिए कुछ लिखने को कहा था, उसे भी अच्छी लगी कविता। 


आज सुबह वे नन्हे के यहाँ आ गये थे। नाश्ता बाहर ही खाया फिर सोनू के भाई व मौसेरी बहन के साथ सभी लोग ‘एंबेसी हॉर्स राइडिंग स्कूल’ पहुँचे। भारत में घुड़सवारी के खेल को विश्व स्तर तक पहुँचाने के लिए पीछे तीन दशकों से वहाँ घुड़सवारी सिखायी जाती है। वहाँ २४० एकड़ ज़मीन पर घोड़ों को रखने की व्यवस्था की गई है। उनकी अच्छी देखभाल की जाती है। सभी घोड़े चुस्त-दुरस्त थे। सभी ने घुड़सवारी का आनंद भी लिया। 


वहाँ से उनका छह लोगों का समूह ‘मिस्ट्री रूम्स’ गया। बैंगलुरु के इंदिरा नगर में ‘मिस्ट्री रूम्स’ एक रोमांचक लाइव एस्केप गेम है।सभी को एक घंटे के लिए एक कमरे में बंद कर दिया गया। और वहाँ दी गई पहेलियों को बूझकर उन्हें बाहर निकलना था। अत्यंत अनोखा अनुभव था। उनके पास बाहरी दुनिया से संपर्क करने के लिए कोई साधन नहीं था, कमरे की दीवारें ऊँची थीं, और ताला बंद था, जिसकी चाबी का सुराग लगाना था। सभी बाधाएँ पार करके वे अंतिम द्वार तक पहुँचने ही वाले थे, पर समय सीमा समाप्त हो गयी  और आयोजकों ने स्वयं ही दरवाज़ा खोल दिया। उसके बाद सभी ने राजस्थानी होटल में लंच खाया। शाम को घर लौटकर भांजी की माँगनी का लाइव टेलीकास्ट देखा। 


आज नूना ने ध्यान की एक नयी विधि ‘तिब्बतियन बुक ऑफ़ लिविंग एंड डाइंग’ में पढ़ी और प्रयोग किया। सर्वप्रथम कुछ देर के लिए आँखें किसी वस्तु या किसी चित्र पर टिकाएँ, उसके बाद कुछ देर तक अपने प्रिय मंत्र का उच्चारण करें, तथा फिर श्वासों पर ध्यान दें। अंत में शून्य में टिक जायें। मन जब शांत होकर ठहर जाता है तब उसे अपने स्वरूप का दर्शन होता है। अपना स्वरूप कैसा है, इसका पता तो किसी को अनुभव के बाद ही चल सकता है, उसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता! जून आज अपनी कार को पेंट करवाने के लिए देकर आये हैं, चार दिन बाद मिलेगी, कहने लगे, वे बेकार (बिना कार के ) हो गये हैं ! 

 


Saturday, April 18, 2026

शेक्सपियर के नाटक

शेक्सपियर के नाटक

रुस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ लड़ाई छेड़ दी है।संभवत: दुनिया विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है।जून सोसाइटी के लिए काम करने वाली वर्तमान एजेंसी की जगह दूसरी लाना चाहते हैं, विरोध होगा, पर वह सुनने के लिए तैयार हैं। आज सुबह सात बजे वह कमेटी के कुछ सदस्यों के साथ  किसी अन्य सोसाइटी में नयी एजेंसी का काम देखने गये थे, बारह बजे लौटे। नूना ने पौधों को बचाये रखने वाली एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है, जो असम की रहने वाली तृष्णा बोरा ने लिखी है। पापाजी से बात हुई, उन्हें ‘बाल्मीकि रामायण’ का काव्य रूपांतरण पढ़ने को कहा है। पता नहीं क्यों, ऐसा लग रहा है, कि यह सब कल लिखा था, पर डायरी का यह पन्ना ख़ाली है, शायद सपने में लिखा हो ! ज़िंदगी कितनी रहस्यमयी है ! छोटे भाई का फ़ोन आया, वह लेह में है। दीदी-जीजा जी अपना चंडीगढ़ वाला घर बेचना चाहते हैं।


सुबह उठने से पूर्व गुरुजी को सपने में देखा, वह उनके घर में ही हैं शायद, एक कुर्सी पर उन्हें बैठने के लिए कहती है, फिर पानी के लिए पूछती है। वह कहते हैं,  हाँ, पानी पियेंगे, गिलास में पानी भरकर ट्रे में रखा है, पर लगता है, गुरुजी हैं तो साथ में कुछ और भी तो हो, ख़ाली पानी कैसे देगी। तभी कुछ और लोग भी आ जाते हैं माला आदि लेकर, जून भी खड़े हैं। जब तक वह ट्रे लेकर जाती है, जून कहते हैं, वहाँ नो एंट्री है, स्वप्न टूट जाता है। सुबह के स्वप्न जगाने के लिए आते हैं। गुरुजी को अभी-अभी सुना, वह कितने शांत और सहज लग रहे थे। जून आज भी कई घंटे बाहर रहे, उनकी मीटिंग्स लंबी होती जा रही हैं। पापाजी ने रामायण पढ़ी, उन्हें अच्छी लगी। उन्होंने बताया, चचेरी बहन का कॉलेज में पढ़ने वाला बेटा सामाजिक कार्य करता है, देहरादून के विधायक से उसने अपने रेस्तराँ का उद्घाटन कराया, काफ़ी आगे जाएगा, बहुत होशियार है। उसे दादाजी का ध्यान हो आया, वह भी राजनीति में बहुत सक्रिय रहते थे, सम्भवत: उनका कुछ असर आया होगा।  


आज जून ने मतदान पहचान पत्र के लिए आवेदन पत्र भर दिया है, बनने में तीन-चार महीने लगेंगे। कल पहली बार वे एग्री मॉल गये।जहाँ हज़ारों की संख्या में पौधे और फूल थे। उससे पूर्व ‘पाकशाला’ में दोपहर के भोजन के बाद नन्हे के एक मित्र के घर जाना हुआ, वह भी पौधों के विशाल मॉल में साथ गया।उन्होंने कुछ विशेष पौधे भी लिए जो वर्षों तक उनके बगीचे की शोभा बनेंगे। शाम को शिवरात्रि के लिए गुरुजी द्वारा पूर्व में दिये गये एक  प्रवचन का हिन्दी अनुवाद किया। 


कल शिवरात्रि थी। पहली बार नूना ने आधी रात तक जागकर टीवी के बड़े से स्क्रीन पर शिव के भजन सुने और साथ ही नृत्य भी किया। बहुत अनोखा अनुभव था। आश्रम में हज़ारों की संख्या में लोग आये हैं, गुरुजी की कृपा दृष्टि पाने के लिए आतुर लोग, भजन की धुनों पर नाचते लोग ! ईशा फ़ाउंडेशन में भी हर वर्ष की तरह भव्य कार्यक्रम हुआ। पहले एक अफ़्रीकी गायक आया, फिर हिमाचल का हंसराज रघुवंशी, जिसने शिव भजन गाकर समां ही बाँध दिया।सुबह समय से नींद खुल गई, कुछ देर स्वामी सुखबोधानन्द जी द्वारा करवाया त्राटक ध्यान किया। बहुत ही प्रभावशाली ध्यान है यह।भगवद् गीता के अध्याय दो का अध्ययन भी चल रहा है। श्लोक संख्या ४,५,६ पर उनकी व्याख्या सुनी। वैसे वह कहते हैं, वह एक्सप्लेन नहीं करते, रेस्पोंड करते हैं।अर्जुन ने जब कहा कि युद्ध करने की बजाय वह भिक्षा माँगकर गुजारा करना सही समझेगा, तब वह संन्यास की तरफ़ इशारा कर रहा था। जिसका लक्ष्य मोक्ष है, इसलिए वह ज्ञान पाने का अधिकारी भी बन गया।उन्होंने कृष्ण की मुस्कान का अर्थ भी बताया। smile के पाँच वर्णों के भाव हैं - एस-स्प्रिचुअल, एम-मनी, आई-इंटेलिजेंस, एल-लोंगेविटी और इ-इमोशनल कोशेंट।जीवन की किसी भी परिस्थिति का सामना ‘स्माइल’ से करना चाहिए। आध्यात्मिक धन पास में हो तो बुद्धि, आयु और भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है।     


छत पर सूर्योदय दर्शन करते हुए सूर्य नमस्कार करने का अपना ही आनंद है। दोपहर को ऑनलाइन कन्नड़ा क्लास हुई, एक अन्य महिला भी शामिल हुई।शाम को नन्हा आया था, उनकी एक परिचिता ने अपना कुछ सामान उनके स्टोर रूम में रखवाया है। कोरोना की वजह से कितने ही लोग अपने घर जा रहे हैं। शेक्सपियर की ‘हैमलेट’ पढ़ी आज, जूलियस सीज़र और ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम पहले पढ़ी थी, कमाल के लेखक हैं शेक्सपियर! एक से एक प्लॉट्स हैं, भूत, प्रेत, परियाँ सभी हैं उनमें। 


आज बायीं नासिका से एक गंध आ रही है। संभवत: इसका संबंध पाचन क्रिया से है। सुबह चार बजे से पूर्व नींद खुल गई, मन में ईश्वर स्मरण के बजाए, कल दिन में हुई किसी घटना पर विचार चल रहा था। यूक्रेन में तबाही बढ़ती जा रही है, पर युद्ध समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा। भारत ने अभी तक किसी भी पक्ष की तरफ़ होने की बात नहीं कही है।दोपहर को वे एक स्थानीय मित्र के यहाँ गये, उनकी बेटी डॉक्टर है, एमडी में दाख़िला ले रही है। 


आज का इतवार विशेष रहा, नन्हा और सोनू कल शाम को ही आ गये थे। सुबह सोसाइटी के बहु उद्देश्यीय मैदान में असोसिएशन की तरफ़ से बच्चों के लिए खेलकूद का आयोजन किया गया था। ढेर सारे बच्चे आये, बाद में पुरस्कार भी दिये गये। सभी को आनंद आया।साढ़े दस बजे कुछ महिलाओं के साथ नूना पंचायत के दफ़्तर पहुँच गई थी। अध्य्क्षा लगभग सवा ग्यारह बजे आयीं। सब मिलकर निकट के एक गाँव में गये, उसके पहले दो झीलें भी देखीं। गाँव में बच्चों व महिलाओं से मिले। एक महिला ने सभी को पीने के लिए शरबत दिया, जो गाँव वालों के अतिथि सत्कार का एक सुंदर उदाहरण था। 


आज सोसाइटी की कमेटी ने नयी एजेंसी नियुक्त करने की बात सबको बता दी है। अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है, अर्थात लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं। आज जून यहाँ पहली बार गन्ने का रस लाये। यूक्रेन से हज़ारों विद्यार्थी वापस आ गये हैं, पर अभी भी कई शेष रह गये हैं। पुतिन ने कुछ शहरों में युद्ध विराम कर दिया है। 


आज ‘विश्व महिला दिवस’ है, पूरी दुनिया में कई तरह से मनाया गया, नापा में अस्थायी क्लब में महिलाओं के लिए एक प्रसिद्ध अस्पताल की तरफ़ से निःशुल्क मेडिकल कैंप लगाया गया। नाश्ते के बाद नूना यहाँ आ गई थी, डॉक्टर्स की टीम पहले ही वहाँ आ चुकी थी। उसने चेकअप कराया। दस दिनों का दवा का एक कोर्स दिया है, इसके बाद पूरे शरीर की जाँच के लिए अस्पताल जाना है। कल जून वहाँ आने वाली सभी महिलाओं के लिए चॉकलेट्स मँगवाने वाले थे, पर स्टोर में खत्म हो गयीं, ओरियन बिस्किट्स मँगवाये। शाम को प्रधानमंत्री ने महिला संतों को वर्चुअली संबोधित किया, वे सब कच्छके धोरदो में एकत्रित हुई थीं। महिला संतों के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, कच्छ में महिलाओं ने कठोर प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है।


Friday, April 17, 2026

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२

इसरो का पीएसएलवी-सी ५२


आज नूना को एक मज़ेदार स्वप्न ने उठाया।एक महाशय अपने डॉग(शी) से बातें करते हैं। वह उन्हें कुछ परेशान कर रही थी तो उसे कुछ सबक़ सिखाना चाहते हैं। उसके मुख के पास जाकर कहते हैं, हेलो मिस, वह भी दाँत निपोरती हुई कहती है, हेलो मिस्टर, अगली बार उनके हाथ में कोईं कठोर वस्तु है और नूना जानती है कि वह इसे कहाँ रखने वाले हैं, जैसे कि यह घटना पहले भी हो चुकी हो। वह फिर बड़े ही अच्छे अन्दाज़ से कहते हैं, हेलो मिस, और जैसे ही वह हेलो कहने के लिए मुँह खोलती है, जबड़ों के मध्य वह वस्तु रख देते हैं। वह मुँह बंद करती है तो ज़ोर की आवाज़ होती है। सब हँसने लगते हैं और नींद खुल जाती है। यह स्वप्न जगाने के लिए आया था, क्योंकि अलार्म बंद किए काफ़ी वक्त बीत गया था। परमात्मा को मज़ाक़ बहुत पसंद है, गुरुजी की यह बात एक बार फिर सत्य सिद्ध हो गई।परमात्मा के द्वार जाना हो तो हँसते-हँसते ही जाया जा सकता है। एक अन्य स्वप्न में उनकी सोसाइटी नापा की एक परिचित महिला को वह सनातन धर्म  के बारे में बता रही है। सपने में वह ईसाई धर्म को मानती हैं।नूना उन्हें गहन श्रद्धा तथा ईश्वर के विभिन्न रूपों के बारे में बता रही है। सुंदर स्वप्न था यह !!   


आज इतवार को नन्हे और सोनू के लिए नाश्ते में बेदमी पूरी बनायी, जून ने यू ट्यूब पर उसकी विधि देखी थी।नाश्ते के बाद वे सब बेंगलुरु के चर्च स्ट्रीट में स्थित किताबों की एक दुकान पर गये।ब्लॉज़म बुक हाउस नाम है उसका, २००१ में मयि गौड़ा नाम के व्यक्ति ने उसे खोला था। यहाँ पुरानी, नयी हर तरह की किताबें मिलती हैं। वीडियो कॉल करके पापाजी को भी दिखायी वह दुकान। सबने मिलाकर कुल बीस किताबें खरीदीं। उसके बाद ‘गो नेटिव’ गये। जहाँ परंपरागत शाकाहारी भोजन मिलता है।वापस आते-आते सवा पाँच हो गये थे, उसे अनुवाद कार्य करना था। शाम को बच्चे वापस चले गये। जून सोने चले गये हैं, वह कुछ देर नयी लायी पुस्तक ‘माइंड ऑफ़ गॉड’ पढ़ने वाली है। 


आज सुबह योग साधना करते समय अचानक आकाश पर नज़र पड़ी तो एक सुंदर दृश्य दिखा। एक प्रकाश का स्रोत, जिसके पीछे प्रकाश की तिकोनी छाया थी, लगा कोई धूमकेतु होगा। दूसरी तरफ़ भी बादलों को चीरती हुई सी प्रकाश की एक तरंग थी। कुछ समझ नहीं आया, यह क्या था।बाद में ज्ञात हुआ इसरो ने पीएसएलवी-सी ५२ लांच किया था।दोपहर की वही गॉड वाली पुस्तक पढ़ती रही। मस्तिष्क अरबों, खरबों न्यूरॉन से बना है। कितनी जटिल है इसकी रचना, जिसके द्वारा शरीर के सब कार्य होते हैं। शाम को वे लोग एक परिचित के विशाल और सुंदर घर की गृह प्रवेश की पूजा में गये।वापसी में एक मित्र दंपत्ति घर आये। पापाजी से बात हुई, आज वह वोट देने गये थे, इस उम्र में भी उनका इतना उत्साह देखकर एक पत्रकार ने उनसे बातचीत की। 


आज सुबह योग-प्राणायाम के बाद, सुखबोधानन्द जी की ताई चि क्रिया की।उन्होंने बहुत अच्छी बातें बतायीं तथा नृत्य भी कराया। कह रहे थे, वह योग निद्रा नहीं प्रेम निद्रा कराते हैं, आनंद लहरी के साथ-साथ प्रेम लहरी जगाते हैं। जून ने वर्षों बाद नृत्य किया होगा। वह चाहें तो कर सकते हैं। भजन व नृत्य उनके मन को तनाव से मुक्त रखने में सहायक होगा। नाश्ते में जून नापा के प्रसिद्ध शेफ़ शेट्टी जी से दोसा लाए, चटनी तथा सब्ज़ी में मिर्च बहुत थी।नूना ने एक व्हाट्सेप समूह बनाया है, जिसमें पंचायत की अध्यक्षा तथा नापा की कुछ महिलाएँ हैं, मंगलवार को पहली मीटिंग है। गाँव से जुड़कर महिलाएँ बहुत कुछ कर सकती हैं, ऑर्गेनिक खेती, पेपर बैग्स बनाना , सफ़ाई अभियान, योग-ध्यान सिखा सकती हैं। सेवा के अतिरिक्त अब करने को कुछ है भी कहाँ। शाम को जून कमेटी की मीटिंग में व्यस्त थे और उसने ज्ञानेशावरी गीता का पाँचवाँ व अंतिम भाग सुना।नन्हे ने एक किताब भेजी है, ‘लोकतंत्र के टूटे स्तंभ’, वह यू ट्यूब पर इसे सुनता है।शाम को पापाजी से बात हुई, वह टीवी पर प्राइम वीडियो नहीं देख पा रहे थे।जून ने उन्हें उपाय बताया, शायद बाद में देख पाये हों।  


जून आज सुबह जल्दी चले गये।शनि व रविवार को उन्हें असोसिएशन के काम में और अधिक समय देना होगा।वह अपने कार्य में बहुत रुचि ले रहे हैं, और उन्हें अपने काम में बहुत आनंद आ रहा है। उसने काव्यालय में एक कविता प्रकाशित की। छोटी ननद ने बताया छोटे पुत्र का कॉलेज दो वर्ष के बाद खुल रहा है। 


आज एक परिचित दंपत्ति की शादी की सालगिरह है।उनकी जीवन यात्रा में एक मात्र ऐसा परिवार, जो उनसे ऐसा नाराज़ हुआ कि माना ही नहीं। ख़ैर ! आज सुबह शिव सूत्र पर चर्चा सुनी।वक्ता के अनुसार शिव रात्रि का अर्थ है, अज्ञान की रात्रि में प्रकाश का अवतरण और ज्ञान में जागरण ! उन्होंने पाणिनि तथा पतंजलि व्याकरण के बारे में बताया, जो शिव के डमरू से निकली ध्वनियों के आधार पर बनाया गया था। दोपहर एओएल के अनुवाद कार्य में बीती ।पापाजी ने कहा, आत्मा में रहने से मन में शांति बनी रहती है, शरीर में तो कुछ न कुछ लगा ही रहता है।आज एक महिला ब्लॉगर से बात हुई, उनके तीन पुत्र हैं, एक सिडनी में दो बैंगलोर में हैं। वह मध्य प्रदेश आती-जाती रहती हैं, पर अब ज़्यादातर यहीं रहेंगी। वह बहुत अच्छी लेखिका हैं। कभी न कभी उनसे मुलाक़ात भी हो ही जाएगी। 


आज सुबह पहली मीटिंग में कुल छह महिलाएँ आयी थीं। पंचायत की अध्य्क्षा कुछ देर से आयीं, पर उन्होंने काफ़ी ध्यान से चर्चा में भाग लिया। काफ़ी विषयों पर बात हुई। नये लोगों से परिचय हुआ। जून ने मीटिंग का सार लिखने में मदद की। कल वह एक नयी सोसाइटी देखने जा रहे हैं। आज सुबह नन्हा आया था, कंप्यूटर का एक पार्ट खोल कर ले गया। बिटकॉइन माइनिंग का उसका स्वप्न बीच में ही बिखर गया है।  


Thursday, April 16, 2026

ज्ञानेश्वरी

ज्ञानेश्वरी 

नन्हे ने समारोह की सुंदर तस्वीरें भेजी हैं। जून का स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। सुबह नूना उठी तो वह पहले ही उठ चुके थे। घर का काम बिना नैनी के ठीक-ठाक चल रहा है। आज वसंत पंचमी पर कविता प्रकाशित की। छोटा भाई सिक्किम में काफ़ी स्थान देख रहा है, उसमें जोश और उत्साह बहुत है। छोटी बहन परीक्षा की तैयारी में लगी है। 


अभी कुछ देर पूर्व एक विचित्र स्वप्न देखकर नूना की आँख खुली। वह और माँ एक कमरे में सोये हैं। थोड़ी दूर पर दूसरा कमरा है, जहाँ छोटी बहन सोयी है, उसका बिस्तर इस कमरे से दिखायी पड़ता है। माँ कहती हैं, बिटिया क्या हुआ, मैं आ जाऊँ ? नूना उसकी तरफ़ देखती है तो तकिये के ऊपर टहनियों की भाँति हाथ हिल रहे हैं, जैसे कोई डूबता हुआ व्यक्ति जल के ऊपर हाथ निकालता है। कुछ देर देखने के बाद नूना उसके पास जाती है, अब वह टहनियाँ कहीं ग़ायब हो गयीं। किसी के बोलने की आवाज़ आ रही है।वह उसे हिलाती है, उसका चेहरा नीले रंग से रंगा है, माथे पर सफ़ेद रंग है और गले पर भी हरा या कोई अन्य रंग। नूना उसे आवाज़ देती है, पर वह गहन निद्रा में है। वह माँ को आवाज़ देती है, वह आती हैं पर उसकी यह हालत देखकर भयभीत नहीं होतीं, बल्कि हँसने लगती हैं, ज़ोर से नहीं, पर हल्की सी मुस्कान छा जाती है उनके मुख पर, तभी नींद खुल जाती है। क्या अर्थ हो सकता है इस स्वप्न का? उसके पहले गुरुजी के आश्रम के दो व्यक्तियों को उनके काम के सिलसिले में आये तथा काम करते हुए देखा था। गुरुजी की चर्चा भी हुई।   


आज सुबह स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर पंच तत्वों में विलीन हो गयीं। दो दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है और राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में किया गया है। नन्हा व सोनू भी बैंगलुरु पहुँचने वाले हैं। आज लता जी पर एक पोस्ट प्रकाशित की, उनको चाहने वाले करोड़ों की संख्या में हैं। ईश्वर भी उन्हें अपने पास बुलाकर आनंदित हो रहे होंगे। नूना ने आज रामकृष्ण परमहंस के बारे में पढ़ा और सुना।अद्भुत संत थे वह, ईश्वर के साक्षात रूप उन्हें दिखते थे, उनकी साधना अतुलनीय थी। उन्होंने ध्यान का महत्व बताया, वह स्वयं भी घंटों ध्यान में लीन रहते थे। 


आज जून ने कहा, कल से सुबह टहलने जाएँगे।लेकिन दो दिन बाद ही एकांत वास से बाहर आयेंगे। सभी से फ़ोन पर बात कर लेते हैं।आज अमर संत ज्ञानदेव द्वारा लिखी ‘ज्ञानेश्वरी’ पहली बार सुनी। जिसने भी उसे रिकॉर्ड किया है, धन्य है वह ! बहुत ही रोचक ढंग से लिखी गई है। जिसे सुनते-सुनते ही समाधि का अनुभव होने लगता है।भारत में अनोखे योगी व संत हुए हैं, जिनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। वह कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। परमात्मा की शक्तियाँ अनंत हैं, जो उनसे जुड़ जाता है, वह उन शक्तियों कि स्वामी बन जाता है। एक ही चेतना से यह सारा जगत बना है, उसी में स्थित है, उसी से भरा हुआ है। मानव जन्म का एकमात्र उद्देश्य है, अपने सत्य स्वरूप को जानकर स्वयं को परमात्मा के प्रति समर्पित कर देना। यदि आत्मा का अनुभव होने के बाद भी कोई संसार की कमाना करे तो उससे बड़ा अभागा कौन होगा ? 


जून आज आठ दिन बाद असोसिएशन के दफ़्तर गये। कल से ऊपर के कमरे में शिफ्ट हो जाएँगे। कोरोना का अनुभव अंततः उन्होंने भी कर लिया।सुबह आकाश में चंद्रमा को ढूँढा, नहीं दिखा, रात्रि भ्रमण के समय दिखा। चंद्रमा भी तो धरती के घूमने के कारण प्रतिदिन पूर्व से उगता है और पश्चिम में अस्त होता है। जो हर दिन लगभग 50 मिनट की देरी से होता है। पूर्णिमा के दिन चाँद सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में उगता है और सूर्योदय के समय पश्चिम में अस्त होता है।अमावस के दिन यह सूर्योदय के साथ उदय होता है और सूर्यास्त के समय अस्त होता है। रात की रानी में भी कलियाँ आयी हैं। पापा जी ने आज ‘आरती संग्रह’ की बात बतायी, वह भी धर्म व अध्यात्म में पूरी तरह डूब गये हैं। 


आज सुबह जून किन्हीं लक्ष्मी नायक जी से दोसा-इडली ले आये थे। वह अपनी आज़ादी का उत्सव मना रहे थे। उसके बाद बाज़ार गये, वापसी में थलगतपुरा झील देखने गये, जहाँ जाकर बहुत निराशा हुई। झील का अधिकांश पानी सूख गया है, कुछ पौधों और काई ने शेष पानी को ढक लिया है। रास्ते में एक अन्य झील देखने के लिए रुके, वहाँ भी आधी से अधिक झील शैवाल से ढकी थी। वे घर लौटे तो नैनी प्रतीक्षा कर रही थी, उसे बच्चों के स्कूल जाना था, सो जल्दी आयी थी। शाम को पुन: ज्ञानेश्वरी सुनी। इस समय जून कॉलेज के दिनों को याद कर रहे हैं।जो बीत गया वह सपना ही तो है। 


आज बहुत दिनों बाद वे आश्रम गये। गुरुजी हैदराबाद गये हैं, उनकी अनुपस्थिति में भी आश्रम में एक शांति और आनंद की छाया फैली हुई थी।फूल खिले थे, कोयल की कूक सुनायी दे रही थी और मंद पवन बह रही थी।उन्होंने विशालाक्षी मंडप में ध्यान किया, पंचामृत में अल्पाहार लिया और सुंदर रास्तों पर भ्रमण करते रहे। सूर्यास्त के बाद वे घर लौट आये। एक कुर्ती भी ख़रीदी जो नूना को परसों किताबों की दुकान में पहन कर जानी है।