Monday, May 25, 2026

बरगद का प्राचीन पेड़


बरगद का प्राचीन पेड़


आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन पर हुबली-धारवाड़, कर्नाटक में छब्बीसवाँ ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ मनाया गया, प्रधान मंत्री भी वहाँ पहुँचे हैं। इस बार का विषय था, ‘विकसित युवा, विकसित भारत’। सुबह  वे घर से सवा नौ बजे निकले। एसबीआई में लॉकर का काम हो गया। कुछ देर नन्हे की सोसाइटी की लाइब्रेरी से लेकर धूप में बैठकर ओशो की एक किताब पढ़ी, अच्छी किताब है।आज डेंटिस्ट ने उसके दातों में लगाये इंप्लांट्स में स्क्रू भी लगा दिये हैं। अब एक हफ़्ते बाद जाना है।आज उनका मंगाया हिन्दी की एक अत्यंत प्रतिष्ठित, सांस्कृतिक, संग्रह पत्रिका ‘नवनीत’ का पहला अंक आ गया। भारतीय विद्या भवन से प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका को इतने दिनों बाद फिर से पढ़ना एक सुंदर अनुभव होगा।उसे याद है, बचपन में पापाजी अपने दफ़्तर की लाइब्रेरी से हर महीने इसके अंक लाया करते थे। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, बहनोई के जन्मदिन पर कविता की फ़रमाइश थी, उसने लिखकर भेज दी है। उनका रेस्तराँ अच्छा चल रहा है, पर हिस्सेदार भारत आ गये हैं। इस बार बैंगलुरु में भी ठंड पड़ रही है, कल सुबह तापमान चौदह डिग्री होने की संभावना है। पापा जी ने कहा, आज वह धूप में बैठे, सर्दियों की धूप कितनी कीमती होती है।जून लोहड़ी के लिए कुछ सामान लाए हैं, कल वे आग जलायेंगे।  


आज बहुत दिनों बाद उसके सिर में हल्का दर्द है। कारण दो हो सकते हैं, पहला सुबह-सुबह दूध पीना और दूसरा नाश्ते में हरे चने और बेसन का चीला, ऊपर से जून ने लंच में भी हरे चने का पुलाव बनाया, उनके अनुसार उन्हें अधिक समय तक रखा नहीं जा सकता था। किसी का भोजन ही उसके लिए रोग का कारण बन जाता है, औषधि भी वही है। गरिष्ठ भोजन का असर उसे तुरंत महसूस होने लगता है, दोपहर के ध्यान में नेत्र कैसे उनींदे हो रहे थे और शाम को टहलते समय शुरू में पैर कितने भारी लग रहे थे। सुबह ‘काव्यालय’ में एक पोस्ट प्रकाशित की, एक कवि/पाठक ने कहा है, उसकी कविता में अध्यात्म के लक्षण हैं, प्रणाम भेजा है। स्वयं को जानना यदि अध्यात्म है तो सचमुच ‘मन’ अब स्वयं की हक़ीक़त जान गया है। यह एक साधन है, विचार, भाव तथा स्मृति को संजोने का साधन, यह प्राण ऊर्जा से चलता है, प्राण अपनी ऊर्जा आत्मा से ग्रहण करते हैं, भोजन तथा नींद से से भी। भोजन सात्विक और हल्का हो तो शरीर, मन, प्राण,तीनों हल्के रहते हैं। आत्मा अर्थात ‘मैं’ इनकी साक्षी हूँ तथा इनका आश्रय भी। आत्मा की उपस्थिति में ही ये काम करते हैं।आत्मा के लिए ही ये कार्य करते हैं। आत्मा आनंद स्वरूप है। आत्मा स्वयं को सीमित तन, मन तथा प्राण भी मान सकती है तथा स्वयं को जानकर अनंत परमात्मा का अंश भी, अथवा ब्रह्म स्वरूप भी। आज लोहरी का उत्सव मनाया, शाम को बाज़ार गये, शकरकंदी, मूँगफली तथा पेड़े आदि लाये। छत पर आग जलायी, लकड़ियाँ घर पर ही पड़ी थीं, नैनी ने काट दीं।ऐसा माना जाता है कि आज से ठंड घटने लगती है।पौष समाप्त होकर माघ शुरू हो जाता है। परसों मकर संक्रांति है, वे नन्हे और सोनू के साथ मनायेंगे।दीदी के यहाँ भी अग्नि पूजन हुआ, उनके समधी लोग आ गये थे।उन्होंने छोटे भांजे से बात करवायी, उसने बताया दो महीने बाद उसकी विदेशी पत्नी भी भारत आयेगी।छोटी बहन के यहाँ लोहड़ी के साथ बहनोई के जन्मदिन का उत्सव चल रहा है। नवनीत की अनेक कहानियों में से पहली कहानी पढ़नी शुरू की है।


आज दृश्यम-२ देखी, अच्छी फ़िल्म है, सुना है दृश्यम-३ भी आएगी। मकर संक्रांति पर एक रचना का सृजन किया। धूप में बैठकर थोड़ी देर ‘इंटिमेसी’ पढ़ी, ओशो की बातें सीधे दिल पर असर करती हैं। आज एक माली उनका बगीचा देखने आया था, उसने गिनकर बताया, कुल तिरसठ पौधे लगाएगा।छोटे भाई ने आज पोरबंदर से समुद्र का दृश्य दिखाया, अब वह ओशोधाम में है।कल असमिया पड़ोसी के यहाँ बीहू का जलपान करने जाना है। 


सुबह तापमान १७ डिग्री था। माली समय पर आ गया था।उसके जाने के बाद मकर संक्रांति के भोज के लिए एक विशेष सब्ज़ी बनायी। नन्हा और सोनू नौ बजे आ गये थे, उन्होंने चाय पी और वे सब पड़ोसी के यहाँ गये। जिन्होंने बड़े प्रेम से नाश्ता कराया, दही, चिवड़ा, गुड़, क्रीम,  नारियल व तिल के लड्डू व पीठा, नमकीन आदि। वहाँ से वे बैंगलुरु का प्रसिद्ध ‘बैनयान ट्री’ अर्थात अति प्राचीन व विशाल बरगद का वृक्ष देखने गये। जिसे कन्नड़ भाषा में ‘डोड्डा अलाडा मारा’ कहते हैं। यह वृक्ष चार सौ साल पुराना है और तीन एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका मुख्य तना नष्ट हो गया है, यह हज़ारों जटाओं कि सहारे टिका है। परिसर में पर्यटकों के लिए बेंचें हैं, अनेक बंदर वहाँ विचर रहे थे, जो किसी को नुक़सान नहीं पहुँचा रहे थे।  


वे घर लौटे तो सबने हरे चने का ‘बचका’, संक्रांति की विशेष आलू-गोभी की सब्ज़ी, जैसी जून बचपन से अपने घर में बनते देखा करते थे, और दही-चावल लंच में ग्रहण किए।उसके बाद मनायी पतंग उड़ाने की रस्म, नन्हे ने ड्रोन भी उड़ाया, रिमोट से चलने वाली कार चलायी, वापस आकर टेलिस्कोप से दूर के नज़ारे देखे। हल्का सा धुँधलका होने पर अग्नि देवता का आवाहन किया, उसके बाद जिग्सा पजल की शुरुआत की। इस तरह पूरा दिन ही कई गतिविधियों से भरा रहा। इसी बीच शाम को पापाजी से फ़ोन पर चर्चा भी की। 


आज सुबह नींद कुछ देर से खुली, शायद कल का असर था। प्रातः भ्रमण भी कम हुआ और आसन भी, शायद उम्र का तक़ाज़ा है या प्रमाद। ख़ैर, अब करके कुछ पाने का जज़्बा तो रहा नहीं, इसलिए जब जो होता है, उसे स्वीकार करके मन अपने आप में स्थित रहता है। उनका विरोध और उनकी चाह दोनों ही ऊर्जा को खोने का कारण हैं। अब न कुछ पाना है, न कुछ छोड़ना है ! इस अनंत जगत में कोई क्या तो पा सकता है और क्या छोड़ सकता है ?आत्मा को न कुछ चाहिए और न कुछ करना है, वह अपने आप में तृप्त है। जो भी चाहिए वह शरीर के लिए और जगत के लिए। आज एक नयी झील देखी, वदेराहल्ली नाम है उसका, सूर्यास्त के समय वे वहाँ गये थे, झील विशाल और सुंदर है, पर आसपास सफाई नहीं है, उसे देखभाल की ज़रूरत है। आज मिट्टी के दूसरे पात्र को भी रंग दिया, ‘नेटिव विलेज’ की एक स्मृति के रूप में ये उनके पास रहेंगे। 


जहाँ शांति है, वहाँ शब्द नहीं हैं। जहाँ शब्द हैं, वहाँ शांति हो सकती है और नहीं भी, यह उनके ऊपर है, पर अब उसे शांति के लिए बस एक हल्का सा स्मरण दिलाना पड़ता है मन को, इतना हल्का कि पलक झपकने से भी कम समय लगता है उसमें! आज भी दिन भर मौसम ठंडा रहा। आज सफ़ाई का काम पूरा हो गया, छत, गैराज, सिटआउट सभी जगह। जून ने आज घर बैठे ही बिगबास्केट से सब्ज़ियाँ व राशन मँगवा लिया। नन्हे का फ़ोन आया, कल उन्हें रजिस्ट्रार के दफ़्तर जाना है, मकान का लोन ख़त्म होने के बाद कुछ कार्यवाही होनी शेष है। 


Saturday, May 23, 2026

ऑडिबल-श्रवण योग्य

ऑडिबल-श्रवण योग्य



शाम को वे दोनों नन्हे व सोनू को लेने उनके घर गये थे। वापस आकर पहले सबने सूप पिया, फिर केक काटा, वे लोग फूल भी लाए थे, गुलाब के ढेर सारे सुंदर फूल ! उनके घर के लिए एक वैक्यूम क्लीनर भी लाए हैं और रिजार्ट में नूना के लट्टू चलाने के शौक़ को देखकर दो लट्टू भी लाए। रात्रि भोजन के बाद नन्हे ने छत पर टेलीस्कोप लगाया, एक-एक कर सबने चाँद-तारों को देखा।पूर्णिमा के एक दिन बाद का घटता हुआ चाँद बहुत मनमोहक था।चमकता हुआ वीनस, ज्यूपिटर और मंगल के साथ आकाश में शनि भी दिखायी दिया।  


आज सुबह नाश्ते के बाद बच्चे वापस चले गये। उन्हें एक मित्र के गृहप्रवेश में शामिल होने मदागी जाना था। नन्हे ने उसके मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड कर दिया है, ‘ऑडिबल’ जिसमें वह मनपसंद किताबें अंग्रेज़ी या हिंदी में सुन सकती है।मेंबरशिप लेने से हर महीने एक किताब क्रेडिट पर ख़रीद सकती है।दोपहर बाद एक अच्छी साहसिक फ़िल्म ‘ऊँचाई’ देखी, जिसमें चार बूढ़े दोस्तों की कहानी है, जो अपने एक मित्र की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक चढ़ाई करते हैं।हिमालय और एवरेस्ट के बहुत सुंदर दृश्य हैं फ़िल्म में।शायद इसी कारण शाम को वे निकट के गाँव में स्थित झील तक पैदल चलते गये, कुछ देर वहाँ रुके, दूसरे रास्ते से घूमकर वापस आये तो उमंग और उत्साह से भरा पूरा डेढ़ घंटा बीत चुका था। 


आज सुबह गुरुजी को सुना, उनके सीधे-सरल उपदेश मन को हल्का कर देते हैं। कल वाणी का जो दोष हुआ था, उसका मन पर थोड़ा सा प्रभाव शेष था, जो गुरुजी की प्रेम भारी वाणी सुनकर दूर हो गया। स्वतः ही कुछ पंक्तियाँ भी काग़ज़ पर उतर आयीं, हर संघर्ष सृजन को संभव होने का अवसर देता है। घिसकर ही पत्थर में चमक आती है। दुख मन को माँजता है। परमात्मा की स्मृति हर दुख को वैसे ही हर लेती है, जैसे सूर्य की किरण ओस की बूँद को हर लेती है। जून ने आज दो श्रमिकों को बुलवाया था, सिटआउट की शीशे की छत को धुलवाना था और बेंत के फ़र्नीचर पर पेंट करवाना था।नैनी साप्ताहिक सफ़ाई में लगी थी, थोड़ी देर बाद उसने आकर मज़दूरों की शिकायत की, उसके हावभाव से ऐसा लगा, तेज-तेज कन्नड़ा में कुछ बोली। फ़ेसबुक पर सुबह लिखा उसका छोटा सा आलेख पढ़कर पापाजी ने कहा, मन को ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहिए। उनकी चिंता उसे समझ में आती है, नन्हे की हल्की सी उदासी भी उसे भीतर तक छू जाती है। माता-पिता बच्चों से ऐसे ही जुड़े रहते हैं। आज शाम को भी वे सोसाइटी के पीछे वाली झील पर गये, पिछले गेट से निकल कर, नये बन रहे ले आउट में से सीमेंट की नई सड़क से होते हुए सीधे वहाँ पहुँच गये।शाम के समय दूर तक टहलने  के दो फ़ायदे हैं, एक तो वजन नियंत्रण में रहता है, दूसरा नये-नये स्थान देखने को मिलते हैं। दोपहर बाद समाचारों में सुना, ब्राज़ील में चुनी गयी सरकार के विरुद्ध विपक्ष आंदोलन पर उतर आया है। यूक्रेन में युद्ध जारी है, चीन ताइवान के पास युद्ध अभ्यास कर रहा है। जोशीमठ में ज़मीन धंस रही है, मकानों में दरारें पड़ रही हैं। इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हो रहा है, जहाँ कुछ लोगों को प्रवेश नहीं मिल पाया, शायद लोग अधिक संख्या में आ गये हैं। 


आज सुबह स्वामी श्री परमानंद जी का आत्मा पर सुंदर प्रवचन सुना।मुक्ति की कामना करने वाला मन है, आत्मा सदा मुक्त है, सुख स्वरूप आत्मा स्वयं को न पहचानकर सुख की कामना करती हुई सी लगती है। उन्होंने कहा, वास्तव में चिदाभास अर्थात बुद्धि में पड़ा चेतन का प्रतिबिंब ही स्वयं को बद्ध जानकर मुक्ति की कामना करता है।अज्ञान दशा में ही भीतर सुख-दुख, इच्छा-द्वेष आदि प्रकट होते हैं। अज्ञान के कारण ही चिदाभास स्वयं को कर्ता मानता है। चिदाभास के कारण ही निर्गुण आत्मा व्यवहार में ‘मैं’ (अहंकार) का अनुभव करती है। साधक को अमनी भाव में रहने का अभ्यास करना है, केवल आत्मसुख में ही टिकना है और अपने अनंत स्वरूप का स्मरण करना है।


आज वे साढ़े दस बजे घर से निकले थे और शाम सवा छह बजे वापस लौटे। एसबीआई की दो शाखाओं में जाना था, एक जगह काम हो गया, एक जगह परसों होगा। नन्हा दफ़्तर से एक बैंक में हस्ताक्षर करने आया था, फिर चला गया। सोनू को लेकर डेंटिस्ट के पास गये। आज उसने बहुत ख़्याल रखा।दोपहर का भोजन उसके साथ खाया। आजकल वह भी अपने स्वास्थ्य और वजन का भी ध्यान रख रही है। जून ने आज लगभग १०० किमी गाड़ी चलायी, वह शहर की भीड़भाड़ में कार चलाने में दक्ष हो गये हैं। 


आज सिटआउट की सफ़ाई का काम पूरा हो गया। जून ने यहाँ के पते के पर उनके नये पैनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन भर दिया है।सुबह 'अष्टावक्र गीता' सुनी, पूरा रास्ता कैसे कट गया, पता ही नहीं चला। मकान के लोन के चुकता होने के बाद सब रजिस्ट्रार के दफ़्तर में जाकर कुछ कार्यवाही करनी होती है, उसके लिए अगले गुरुवार को जाना है। कल डेंटिस्ट के पास जाना है। बैंक भी जाना है, लॉकर को रिन्यू करना है, आरबीआई गाइडलाइंस के अनुसार नया एग्रीमेंट साइन करना है। एओएल के दो अनुवाद कार्य किये, दोपहर को कुछ देर के लिए धूप में सिटआउट पर सोयी, गाड़ियों का शोर आ रहा था। आज भानु दीदी (गुरुजी की बहन) के जन्मदिन का कार्यक्रम देखा, आश्रम के बच्चों ने गीत गाये और श्लोक सुनाये। मिट्टी के जो बर्तन रिज़ौर्ट में बनाये थे, उन पर रंग करना शुरू किया है। पहले बेस कलर लगाया है। गमलों में मेथी, पालक व सरसों के बीज बोए थे, उनमें पानी दिया। 


Friday, May 22, 2026

कुम्हार का चाक


कुम्हार का चाक 

वर्ष का अंतिम दिन एक सुनहरी याद बनाकर उनके मनों में अंकित हो गया है। सुबह-सुबह नन्हा उन दोनों को लेकर एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ। सोनू की फ़्लाइट आने में समय था, पहले उसने कुछ देर गोकार्टिंग में समय बिताया। उसके बाद वे सभी रिज़ौर्ट गये। जहां का हरियाली से भरा वातावरण, बड़ा सा तरणताल, पारंपरिक आकृतियों से सजे झोपड़ी नुमा कमरे। एक जगह कुम्हार मिट्टी के बर्तन बना रहा था।सामान आदि रखकर वे उसी स्थान पर आ गये।जीवन में पहली बार मिट्टी के दो छोटे पात्र अपने हाथों से बनाये, लकड़ी से चाक घुमाता हुआ कुम्हार पूरी दक्षता से गिलास, कुल्हड़ बना रहा था। कुछ अन्य लोग भी उन्हें बर्तन बनाते देखकर वहाँ आ गये। इसके बाद कई पुराने बचपन के खेल खेले, जैसे लट्टू चलाना, गुलेल से निशाना लगाना। कुछ बच्चे बैडमिंटन आदि अन्य आधुनिक खेल खेल रहे थे। एक बड़ी सी मीनार थी, जिस पर चढ़कर सूर्यास्त का दृश्य देखा। रात को नये वर्ष स्वागत करने के लिए विशेष संगीत और भोज तो था ही। भोजन के बाद वे कुछ देर आकाश में चाँद-तारों को निहारते रहे। शहर से दूर अप्राकृतिक रोशनियों के न होने से तारे कुछ अधिक चमकदार प्रतीत हो रहे थे। लगभग साढ़े दस बजे वे अपने कमरों में आ गये। अवश्य ही कुछ लोग बारह बजे तक रुके रहे होंगे, जाने वाले को विदा और आने वाले का स्वागत करने की रस्म निभायी होगी।  


नये साल की पहली सुबह भी सुहानी थी।कच्चे रास्तों पर और बगीचों में चारों ओर घना कोहरा छाया हुआ था, पर ज़्यादा ठंड नहीं थी, सो वे दोनों रिज़ौर्ट से बाहर आकर सड़क पर टहलते हुए सूर्योदय की प्रतीक्षा करते रहे। कोहरे को भेदता हुआ सूरज पहले मद्धिम फिर शोख़ नारंगी रंग का हो गया।नन्हा व सोनू उठे तो वे सब इनडोर गेम्स वाले कमरे में आ गये, जहाँ कैरम का बोर्ड और शतरंज की बिसात बिछी थी।दिन में उन्हें अवतार-२ फ़िल्म देखनी थी। जो अपने आप में एक सुंदर अनुभव था।इस बार कहानी जैक और नियतिरी के बच्चों के इर्दगिर्द घूमती है।मानव सेना के आक्रमण से बचने के लिए वे लोग जंगलों को छोड़कर समुद्र तट पर स्थित एक कबीले मेटकायिना में शरण लेते हैं। पानी के अंदर के दृश्यों और आपसी रिश्तों को बहुत ही ख़ूबसूरती से फ़िल्माया गया है।शाम हो गई थी जब नन्हे ने उन्हें घर छोड़ा।


सुबह उठी तो मन में विचार आया, सुख=सु+ख, सु का अर्थ है शुभ, ख अर्थात आकाश, अपने आसपास का वातावरण जब सकारात्मक तरंगें लिए हो, उसमें कोई विकार न हो, तब जो अनुभव होता है, उसे सुख कहते हैं। लेकिन जहां शुभ है वहाँ अशुभ है, चाहे उस समय प्रकट न हो रहा हो।जहाँ सकारात्मकता है नकारात्मकता भी है। इसलिए सुख की कामना का त्याग ही ‘मुक्ति’ है। इस वर्ष उनका मूल मन्त्र सुख की जगह ‘मुक्ति’ होना चाहिए। मुक्ति का अर्थ है पूर्ण स्वतंत्रता, दो के द्वन्द्व से पूर्ण आज़ादी ! अब न सुख की तलाश है, न सुख-दुख का भय ! मुक्ति का अर्थ है, मन के पूर्वाग्रहों, धारणाओं, कल्पनाओं, आशंकाओं से मुक्ति ! एक ऐसे स्थान में रहने की कला, जहाँ पूर्ण रिक्तता है, जो इस जगत का स्रोत है। 


आज नूना को यह नई डायरी मिली है। एसबीआई की कगलीपुरा शाखा के अधिकारी घर आकर कैलंडर व डायरी दे गये। पिछले वर्ष भी वह आये थे। आज ही आर्ट ऑफ़ लिविंग की डायरी भी मिली कैलेंडर के साथ। शाम को बायीं तरफ़ की पड़ोसन से बात हुई, पीछे हफ़्ते उनकी सर्जरी हुई थी, स्वास्थ्य लाभ कर रही हैं। निराश लग रही थीं, उन्हें आशा भरे शब्द कहे, गुरुजी से सुने हुए, ऐसे ही शब्द दोपहर को जून के बचपन के मित्र की धर्मपत्नी से कहे, जब वह पति की बीमारी की बात से परेशान हो रही थीं। ईश्वर ही सद्प्रेरणा देता है। ईश्वर की कृपा ही तो थी टैगोर और गांधी पर, जो देश के लिए इतना काम कर पाये। आज भवन जर्नल में ‘चरखे’ के बारे में  उनके विचार पढ़कर आनंद आया। जहाँ गांधी जी के लिए चरखा आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का प्रतीक था, वही टैगोर का कहना था कि यांत्रिक और अनिवार्य श्रम से रचनात्मकता और बौद्धिक विकास बाधित होता है। गांधी जी के लिए चरखा करोड़ों लोगों को जोड़ने के लिए एक साधन और अहिंसक विरोध का प्रतीक था। टैगोर की दृष्टि में मनुष्य के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता से बढ़कर मानसिक व आध्यात्मिक स्वतंत्रता का महत्व है। इस मतभेद के बावजूद दोनों में आपसी प्रेम और सम्मान आजीवन बना रहा। 


आज भी ब्लॉग पर एक पोस्ट प्रकाशित की, अब ब्लॉग पढ़ने वाले पाठक बहुत घट गये हैं, फिर भी उसे लिखने का काम जारी रखना है, स्वांत: सुखाय ही सही ! राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में कई लोग जुड़ रहे हैं, कांग्रेस के दिन पलट रहे हैं, ऐसा लगता है। रुस-यूक्रेन युद्ध अभी भी चल रहा है, एक वर्ष होने को आया। झारखंड के गिरिडीह ज़िले में पार्श्वनाथ सम्मेद तीर्थस्थल को पर्यटन स्थल बनाने की योजना को वापस ले लिया गया है, जैन समाज ने इसके ख़िलाफ़ आंदोलन किया था। उसे लगता है, यही भावना अन्य तीर्थ स्थानों के लिए भी होनी  चाहिए, वरना ऐसे स्थानों की पवित्रता बनी हुई नहीं रह सकती। 


सुबह से ही ठंडी हवा बह रही है, पर उतनी ठंडी नहीं जिसे शीत लहर कहा जाता है और जो उत्तर भारत में क़हर बरपा रही है।पापाजी ने बताया, कल दिल्ली का तापमान तीन डिग्री तक पहुँच गया था। सुबह भी चंद्रमा के दर्शन हुए थे और रात्रि भ्रमणके समय भी, कल पौष पूर्णिमा है।परसों से माघ का महीना शुरू हो रहा है। इतनी ठंड में भी लोग पूरे महीने संगम तट पर रहते हैं।आस्था के आगे कोई बाधा टिक नहीं सकती। आज समाचारों में सुना पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू यदि चाहें तो अस्थियाँ बहाने भारत आ सकते हैं, उन्हें दस दिनों के लिए वीज़ा दिया जाएगा। नाश्ते के बाद वे घड़ी साज के पास गये, दो हाथ घड़ियाँ बंद पड़ी थीं, स्मार्ट वॉच आ जाने के बाद वे घड़ियाँ कभी-कभी पहनी जाती हैं, पर कुछ महीनों बाद बैटरी बदलवानी पड़ती है। इसके बाद बंद पड़े फ़्लैट को देखने गये, एक कमरे में कुछ सीलन की समस्या दिखी, शायद पानी ऊपर से आ रहा था।ऊपर वाले घर में जाकर पता किया, प्रांजल व सेवंती किराए पर रहते हैं वहाँ, दोनों घर से ही काम करते हैं, बहुत अच्छी से तरह रखा था घर, उन्होंने कहा, मकान मालिक से सीपेज की बात कहकर ठीक करवायेंगे। कल उनके विवाह की सालगिरह है, नन्हा व सोनू आयेंगे, शायद रात को रुक जायें। आज स्वामी विवकानंद जी का राजयोग पर दिया गया प्रवचन सुना, उनकी शैली अद्भुत है और उनका ज्ञान अपरिमित ! भारत के इतिहास में वह हज़ारों साल तक जीवित रहेंगे।  


Thursday, May 21, 2026

हर घर ध्यान

हर घर ध्यान


आज सुबह-सुबह वे एक परिचित दंपत्ति के साथ उनके घर से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित एक झील देखने गये, रास्ते में ढेर सारी बातें हुईं, इधर-उधर की।मौसम सुहाना था, सूर्योदय हो रहा था, अनेक तरह के पक्षी जल में क्रीड़ा कर रहे थे। निकट ही एक गाँव है, उसकी गलियों से गुजरते हुए, उनकी सरल जीवनशैली के कितने ही दृश्य दिखे। एक दो व्यक्तियों से उनके मित्रों की बातचीत भी हुई। वापसी में कुछ दूरी पर स्थित एक नयी झील भी देखी, जिसके बार में उन्हें जरा भी जानकारी नहीं थी, उसने झील के पानी में वृक्षों की छाया के सुंदर चित्र उतारे। आश्रम के सामने नये खुले रेस्तराँ ‘उडुपी’ में सुबह का नाश्ता किया।सबकी पसंद भिन्न थी, नूना ने इडली मंगायी, जून ने मसाला दोसा, उसकी सखी ने नीर दोसा और उनके पतिदेव ने पूरी सब्ज़ी। इस वर्ष की इस आख़िरी मुलाक़ात को वे यादगार बना लेना चाहते थे। वास्तव में उनकी दिनचर्या घर लौटकर शुरू हुई, जब नैनी आयी। घर की सफ़ाई, स्नान आदि। शाम को पापाजी से बात हुई, वहाँ ठंड काफ़ी बढ़ गई है, रात्रि का तापमान पाँच डिग्री तक चला जाता है। वह यह बताते हुए बहुत खुश हो रहे थे कि नार्वे से आये हुए दीदी के बच्चे उनसे मिलने गये थे। नूना के स्वास्थ्य के बारे में जानकर नन्हे ने कहा है, अगले हफ़्ते उन्हें सालाना मेडिकल टेस्ट करा कर उसकी रिपोर्ट डॉक्टर को दिखानी चाहिए। 


बैंगलुरु की एक प्रसिद्ध लैब में उन्होंने सभी आवश्यक टेस्ट कराये।रिपोर्ट दिखाने गये तो डाक्टर ने आश्वासन दिया, सब कुछ सामान्य है। बस ज़रूरत है, वे हल्का आहार लें, वजन कुछ कम करें और तेल-घी व चीनी का सेवन कम करें। नियम से व्यायाम करें।पानी अधिक पीना है और उसे नमक की मात्रा अधिक व जून को कम लेनी है। नये वर्ष में प्रवेश करने से पूर्व यह अच्छा ही है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति एक बार फिर जागरूक हो जायें। आज “रामसेतु” फ़िल्म देखनी शुरू की है। फ़िल्म की कहानी रोचक है। एक नास्तिक पुरातत्वविद् ‘सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट’ के लिए अपनी रिपोर्ट देता है, जिसमें रामसेतु को तोड़ा जाना है, पर अनेक लोग नाराज़ हो जाते हैं। वह असलियत का पता लगाने के लिए समुद्र के भीतर जाकर खोज करता है, तब उसे ज्ञात होता है, यह पुल प्राकृतिक नहीं आदमी द्वारा बनाया गया है। इसके बाद वह इसे बचाने के लिए लग जाता है। श्रीलंका में फ़िल्माये दृश्य बहुत सुंदर हैं। रामायण से जुड़े कितने ही स्थान श्रीलंका में भी हैं। राम के अस्तित्त्व को नकारना असंभव है। राम उसी तरह शाश्वत हैं जैसे भारत भूमि ! आज भी एओएल का अनुवाद कार्य किया। आज़ादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय, आर्ट ऑफ़ लिविंग के साथ एक राष्ट्रव्यापी जान-जागरूकता अभियान चला रहा है, “हर घर ध्यान”। गुरुजी हर व्यक्ति को, विशेषकर युवाओं को ध्यान से जोड़ना चाहते हैं।कल सुबह उनके नये वर्ष के संदेश का अनुवाद करना है।


सुबह शीतल थी, वे दूर तक पैदल चले। कल की यात्रा के लिए तैयारी की। कल वे सब एक ‘ईको रिजार्ट’ जा रहे हैं। नये वर्ष का आरंभ वहीं से करेंगे। वजन कम करने के लिए जो परहेज़ आवश्यक हैं, वे करने आरम्भ कर दिये हैं। नये वर्ष को वे जब तक नया रहने देंगे, उत्साह बना रहेगा। आने वाले वर्ष के अन्तिम दिन तक इसे नया जानना है, उसके बाद ही तो यह पुराना होगा। किंतु होता क्या है कि फ़रवरी आते-आते ही यह पुराना हो जाता है, और जीवन उसी पुराने क्रम में लौट जाता है। उसके मन में कितने ही भाव उमड़ रहे हैं, नया उत्साह, नये इरादे, नये ढंग से जीने की आस, नये रास्ते, नये को अपनाने में कोई भय न हो, पुराने को त्यागना नहीं है पर उसमें कुछ नयापन भी जोड़ना है। भूलें भी करें तो नये ढंग की, गुरुजी कहते हैं, वही भूलें एक चक्र में घुमाती हैं। 


परसों वे सब आई मैक्स में अवतार सीरीज़ की दूसरी फ़िल्म ‘अवतार- द वे ऑफ़ वाटर’ देखने जा रहे हैं, नये वर्ष की उनकी पहली फ़िल्म। नन्हे ने कहा पहले की कहानी पढ़ लें, तो यह समझ में अच्छी तरह आएगी।उसने कहानी पढ़ी और पापाजी को ‘अवतार’ की पहली फ़िल्म का लिंक भेजा है, शायद वह देखें।वर्षों पहले उन्होंने यह अनोखी फ़िल्म देखी थी। जेम्स कैमरून की थ्री डी फ़िल्म। सुदूर भविष्य की कहानी है, धरती पर काफ़ी कुछ ख़त्म हो चुका है, पैंडोरा नाम के एक ग्रह पर मानवों का प्रवेश होता है, जो वहाँ से एक बहुमूल्य खनिज लाना चाहते हैं। वहाँ के मूल निवास नावी, जो दस फ़ीट लंबे और नीले रंग के हैं, गहराई से प्रकृति से जुड़े हैं। नावी लोगों से संपर्क के लिए वैज्ञानिक,एक इंसानी दिमाग़ को प्रयोगशाला में तैयार किए गये नावी अवतार में लगा देते हैं।जेक सुली वह अवतार है, जो पैंडोरा पर जाता है, और एक नावी महिला नेयतिरी से मिलता है। बाद में वह मानवों के ख़िलाफ़ वहाँ के निवासियों की तरफ़ से लड़ता है।  

 

Wednesday, May 20, 2026

‘त्रिपुरा रहस्य’

‘त्रिपुरा रहस्य’


कल से संसद का सत्र शुरू हो रहा है।परसों गुजरात व हिमाचल प्रदेश में हुए चुनावों का परिणाम भी आ जाएगा। फुटबॉल का विश्व कप चल रहा है। आज वे जून के पूर्व उच्च अधिकारी के घर गये, जहां एक अन्य सहकर्मी भी मिले।मेज़बान महिला ने घर का बना ‘मुरक्कु’ खिलाया, जो दक्षिण भारत का एक कुरकुरा स्वादिष्ट पारंपरिक नाश्ता है, ‘मुरुक्कु’ का अर्थ है मुड़ा हुआ। उन्होंने साथ में ताजा निकाला संतरे का रस पीने को दिया। कुछ देर सब पुरानी यादें ताजा करते रहे,  इसके बाद सब लंच के लिए ‘पाकशाला’ गये। जहाँ सबकी पसंद थी, ‘उत्तर भारतीय भोजन’ दोपहर बाद वे घर लौटे। शाम को पुन: गले में दर्द महसूस हुआ। 


आज स्वास्थ्य कल से बेहतर है। कई बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे किए और भाप भी ली।कल रात को देखे अनोखे स्वप्न के कारण आज जीरा-धनिया का पानी पिया और उसकी सुगंध भी ग्रहण की। आज एक अच्छी हास्य फ़िल्म देखी, ‘नज़र अन्दाज़’, जिसमें एक उदार अंधे व्यक्ति की कहानी है। उनकी नौकरानी और एक चोर के बीच हुई रोचक प्रतिस्पर्धा की कहानी ! गुजरात में बीजेपी और हिमाचल में कांग्रेस को विजय हासिल हुई है।आज दोपहर छोटे भाई का फ़ोन आया, बिहार के मुज्ज़फ़रनगर के उस आश्रम से, जहाँ असम में रहने वाली  नूना की एक परिचिता रहने गयी थी, पर लौट आयी।आश्रम के संचालक ने उससे विवाह तो किया पर निर्वाह नहीं कर पाये, वैसे यह बेमेल विवाह था। आज उसने पहली बार आई पैड पर लिखा, आश्चर्य है, इतने दिनों से अभ्यास क्यों नहीं किया।बहुत आसान है उस पर लिखना और इसे यात्रा में साथ भी रखा जा सकता है। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, पंजाब में उनके मकान को बेचने में आने वाली अड़चनें घटने का नाम ही नहीं ले रही हैं। उन्हें अदेयता प्रमाणपत्र नहीं मिला है। घर के लिए अठारह साल पहले ऋण लिया गया था, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। 


आज नन्हा आया था, सोनू असम में है। परसों सुबह उन्हें एक और यात्रा पर निकलना है। सुबह साढ़े छह बजे नन्हा उन्हें एयरपोर्ट ले जाएगा।आज वे पहली बार आर्ट ऑफ़ लिविंग के श्रीश्री आयुर्वेदिक अस्पताल गये, आना-जाना मिलाकर तीन घंटे लग गये। वैद्य ने सर्दी के लिए एक हफ़्ते की दवा दी है और बाद में सामान्य आरोग्य के लिए एक महीने की। ‘मृणाल ज्योति’ की रजत जयंती का उत्सव संपन्न हो गया। अगले हफ़्ते उन सभी से नूना की भेंट होगी। 


आज पूरे एक हफ़्ते बाद इस डायरी में लिख रही है। दोनों यात्रायें अच्छी रहीं। पूरे विश्वास और धैर्य के साथ सफ़र का आनंद लिया, घर वापस आकर भी अच्छा लग रहा है। कल से घर की बायीं दीवार पर रंगरोगन होगा, जो दो साल से साथ वाले मकान के निर्माण के दौरान स्वच्छ नहीं रह पायी है। 


आज महीनों बाद उसने ब्लॉग्स पर पोस्ट प्रकाशित कीं, पूरी पाँच पोस्ट ! अच्छा लग रहा है।असम में जब थी तो कभी-कभी ही होता था कि कुछ न लिखे। जब कोई रचनात्मक होता है तो ईश्वर उसके साथ होते हैं। हर कर्म में देव का योगदान तो होता ही है। चेतना ही मन-देह के द्वारा अभिव्यक्त हो रही होती है। दीदी से बात हुई, उन्हें डाक्टर ने घुटने बदलवाने की बात कही है, यह भी कहा है, अभी कोई जल्दी नहीं है।कुछ दिन की दवा भी दी है। पापाजी ने कहा, मोबाइल पर जो गेम वह खेलते हैं, उसके पैसे भी देने चाहिये, आख़िर किसी ने इतनी मेहनत से बनाया है।वह अति आदर्शवादी हैं।


आज शाम उसने ‘त्रिपुरा रहस्य’ का कुछ अंश सुना, ‘ललितासहस्रनाम’ में  देवी त्रिपुर सुंदरी के स्वरूप, महत्व और रहस्य को बताया गया है। कितने सरल शब्दों में आत्मा का ज्ञान दिया है, और यह भी कहा है कि आत्मा का ज्ञान देना ऐसा ही है जैसे कोई कहे कि उसे उसकी आँखें दिखला दो।आज उसने गुरुजी के नये वर्ष के दो संदेशों का अनुवाद किया। गूगल की सहायता से काम बहुत सरल हो गया है। समाचारों में सुना, चीन में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, अन्य कई देशों में भी कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है। दोपहर को वे नन्हे के यहाँ गये थे, उसे लेकर एसबीआई होम लोन की दो शाखाओं में गये, अब उनके घर का कोई लोन बकाया नहीं है। अगले महीने मकान के कागज मिल जाएँगे। 


आज आँख है कि भर-भर आती है, प्रेम की इस तरह की तड़प का अनुभव बहुत दिनों बाद हुआ। यह भी परमात्मा की कृपा है, वह भावपूर्ण हृदय से ही ज़्यादा संतुष्ट होते हैं, उन्हें ज्ञानी भक्त ही प्रिय हैं, रूखा-सूखा ज्ञानी नहीं ! प्रीत के आँसुओं से भरकर जब कोई गोपी कृष्ण को याद करती होगी, तो वह रह ही नहीं पाते होंगे, आत्मिक रूप से उसके भीतर आकर उसे सांत्वना देते होंगे, प्रेम का अनुभव केवल प्रेम के लिए कैसा होता है, भक्ति यही सिखाती है, उसमें कोई चाह नहीं है, अपनी माँग नहीं है, बस यही भावना है कि सामने वाले को कोई दुख न हो, वह प्रसन्न रहे। जब अन्य का दुख देखा न जाये और उसे मिटाने का भाव भीतर प्रबल हो जाये तब समझना चाहिए कि प्रेम अपने शुद्ध स्वरूप में है। ईश्वर प्रतिपाल उसके साथ है, बल्कि वही है ! आज शाम को वे एक घंटा टहलते रहे, फिर ‘योग निद्रा’ की, पहले श्रम फिर विश्राम, बहुत अच्छा अनुभव था। आज भी अनुवाद कार्य किया, गुरुजी ने कितने ही विवादों का हल करने में विश्व की मदद की है। बहुत दिनों बाद उसने ‘चिदाकाश गीता’ पढ़ी। जो महान अवधूत संत भगवान नित्यानन्द के मुख से निकले आध्यात्मिक वचन हैं। जिनमें वह अहंकार का नाश करके, वैराग्य को साधकर, साक्षी भाव का अभ्यास करने की बात कहते हैं । गुरुजी की तरह वह भी कहते हैं एक ही सत्ता से, एक ही ब्रह्म चेतना से सब कुछ निर्मित हुआ है। यह अद्वैत बोध पहले समाधि में घटित होता है, फिर सहज हो जाता है ।   


आज क्रिसमस है, संदेश भेजे और संदेश आये। नन्हा सुबह आ गया था, शाम को गया, पहले गो- कार्टिंग फिर घर।कह रहा था, अगले हफ़्ते वे सब नये वर्ष का स्वागत करने कहीं बाहर जाएँगे, सोनू भी वर्ष के अंतिम दिन आ जाएगी। वे लोग अगले वर्ष मार्च में घर जा सकते हैं, पापाजी को आश्चर्य होगा, दीदी-जीजाजी को भी।


Tuesday, May 19, 2026

चैत्य भूमि मुंबई


चैत्य भूमि मुंबई 



आज सुबह कोहरा बेहद घना था, पचास मीटर से आगे कुछ दिखायी नहीं दे रहा था। दिन भर ठंड बनी रही। पापाजी को ‘वर्ड्स ऑफ़ वंडर’ गेम का लिंक भेजा है, शायद उन्हें पसंद आये। आज स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की एक पुस्तक ‘हिंदुत्व’ के कुछ पृष्ठ पड़े, बहुत प्रभावशाली लेखन कला है उनकी।उनके अनुसार जो व्यक्ति सिंधु नदी से लेकर समुद्र तक फैली इस विशाल भूमि को अपनी पुण्यभूमि मानता है, वही हिंदू है।हिंदुत्व केवल एक धार्मिक आस्था नहीं है, यह व्यक्ति की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय पहचान है। नूना ने सोचा, वे अपने छोटे-छोटे कार्यों में ही लगे हुए हैं कि समाज और देश के प्रति भी उनका कुछ कर्त्तव्य है, इसका चिंतन नहीं करते। 


आज रविवार है, बच्चे नहीं आये।शनिवार की सुबह वे आ गये थे, मिलकर व नाश्ता करके चले गये। आज अपने किसी मित्र के साथ ‘कॉमिक कॉन’ गये हैं। इस आयोजन में कॉमिक्स की नयी व पुरानी किताबें ख़रीदने, पढ़ने और भारतीय व विदेशी कलाकारों व कॉमिक रचनाकारों से  मिलने का मौक़ा मिलता है। यहाँ कुछ लोग कॉमिक  किरदारों की वेशभूषा भी पहन कर आते हैं।  नन्हे ने वहाँ से फ़ोटो भेजे हैं।आज पापाजी को फ़ेसबुक पर लिखते देखकर अच्छा लगा, वह वहाँ शेरों-शायरी लिख सकते हैं। उन्होंने शब्दों का खेल भी खेला, कह रहे थे, बहुत रोचक है।


आज सुबह वे टहलने गये तो आकाश पर हल्के बादल थे पर नूना ने जरा आँख गड़ाकर देखा तो तारे भी दिखाई दिये। वह तारामंडल भौतिक जगत का था या किसी दूसरे आयाम का, यह एक रहस्य है। भीतर भी एक आकाश है, चित्ताकाश तथा चिदाकाश, जिसमें चाँद-तारे भी होते हैं; वैसे ही जैसे सूक्ष्म शरीर की भी सूक्ष्म इंद्रियाँ होती हैं। दिव्य गंध, ध्वनि, दृश्य तथा स्पर्श उन्हीं के द्वारा अनुभव में आते हैं।मन से कई परतें खुल रही हैं, परमात्मा ही जैसे निर्देशित करता है या गुरुजी स्वयं ! आज सुबह वे असमिया पड़ोसियों से मिलने गये, उन्होंने न्यूजर्सी में अपनी पुत्री के यहाँ किए अपने प्रवास की बहुत सी बातें बतायीं। वे व्हाइट हाउस देखने भी गये और ग्रेट कैनियन भी, न्यूयार्क भी गये। उन्होंने एक फ्रिज मैगनेट और एक कैंडल स्टैंड उपहार में दिये। 


आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, शाम को कुछ देर थमी, वे छाता लेकर टहलने गये। सड़क पर बहुत कम लोग थे। इस समय भी बारिश हो रही है। मौसम काफ़ी ठंडा हो गया है।आज पहली बार ‘ब्रिज’ खेल का पहला पाठ सीखा। असमिया पड़ोसी, जो कभी ब्रिज के चैंपियन रह चुके हैं, एक मित्र को अपने साथ लाए थे, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग में काम करते हैं। यह रणनीतिक और मस्तिष्क का खेल है। इसमें दो काम करने होते हैं, पहला, बोली लगाना, दूसरा खेलना। जो सबसे बड़ी बोली लगाता है, उसका साथी कार्ड खोल देता है।उसे खेल कुछ-कुछ ही समझ में आया। आज भी पापाजी ने फ़ेसबुक पर उसकी कविताओं पर कमेंट किया, वह नियमित रूप से पढ़ते हैं। 


आज भी दिन भर वर्षा होती रही। सुबह देर तक योग अभ्यास किया, क्योंकि बाहर जा ही नहीं सकते थे।आपदा को अवसर में बदलना चाहिए न। मन में तीव्र भाव था कि अब जो कुछ भी होगा, ईश्वर के लिए होगा, ईश्वर के द्वारा होगा।परमात्मा के सिवा जब कोई दूसरा है ही नहीं तो उनके होने में भी तो वही झलकता है। शाम को गुरुजी द्वारा ‘नारद भक्ति सूत्रों’ की व्याख्या सुनी। बहुत संक्षिप्त तथा सरल शब्दों में उन्होंने बताया, भक्ति के मर्म को बताते ये सूत्र अनमोल हैं। सुबह उन्हीं के मुख से ‘रुद्रम’ सुना था। परमात्मा के सिवा इस जग में जानने योग्य कुछ भी तो नहीं है, उसे जानकर सब जान लिया जाता है।वह तो ऊर्जा के रूप में हर जगह मौजूद है, उन्हें ही स्वयं को उसकी ओर उन्मुख करना है।शेष काम उनके ऊपर छोड़ देना है।   

सुबह वे चार बजे से भी पहले उठ गये थे। नहा-धोकर तैयार होकर सात बजे नन्हे के यहाँ पहुँच गये। उनके विवाह की वर्षगाँठ मनाने। केक, मिठाई व फूल लेकर गये थे, उनके कुक ने दक्षिण भारतीय नाश्ता बनाया था। दस बजे नन्हा ऑफिस गया और वे घर लौट आये। सोनू को दिन में भाई के साथ आइकिया जाना था। 

सुबह ऑन लाइन योग अभ्यास किया, गुरुजी की आवाज़ सुनकर सुदर्शन क्रिया भी। एक घंटा पलक झपकते बीत गया। आज बड़ा भांजा आया था, वह अपने विवाह की तैयारियों की बातें बता रहा था।पापा जी से बात हुई, नन्हे की भेजी रज़ाई और गर्म कपड़ों के बारे में बता रहे थे। 


आज दिन भर बादल बने रहे पर बरसे नहीं। नन्हे-सोनू का फ़ोन आया, वे इंदौर से पाँच बजे निकले थे, उज्जैन में साढ़े आठ बजे उनकी उड़ान थी। दो घंटे का रास्ता है, पर राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के कारण यातायात में फँस गये। किसी तरह एक अन्य रास्ते को तलाश कर अंततः फ्लाइट पकड़ ली। छोटी भांजी के विवाह में शामिल होने के लिए परसों उन्हें भी यात्रा पर निकलना है।


यात्रा की तैयारी हो गई है। आज रास्तृपति मूर्मू का भाषण सुना, उनके मन में जेल में बंद व्यक्तियों के प्रति बहुत सहानुभूति है, वह चाहती हैं कि जेलों की संख्या न बढ़ायी जाये बल्कि जो क़ैदी वर्षों से  बिना मुक़दमा चले बंद हैं, उन्हें निकाला जाये।जितना समय कोई इस दुनिया में है, यदि किसी के काम आ रहा है तो अच्छा है। उसका होना किसी के दुख का कारण न बने, परमात्मा के सान्निध्य को महसूस करके वह उसकी शक्तियों का वाहक बने, उसकी प्रकृति के साथ एकत्व का अनुभव करके भीतरी आनंद को जगत में बिखराये।  

  

कल रात तीन दिन बाद वे घर वापस आ गये थे।विवाह अच्छी प्रकार से संपन्न हो गया। आज सुबह चार दिनों बाद प्रात: भ्रमण के लिए गये। शाम को पापाजी से बात हुई। कहने लगे, सुबह-सुबह ठंड के कारण वह अपने काम ठीक से नहीं कर पाते हैं, समय लगता है।यात्रा से आने के बाद उसे भी ठंड लग गई है।इतने सारे लोगों से मिलना, बाहर का खाना, नींद पूरी न होना, कितने ही कारण हो सकते हैं। आज की तरह अगले कुछ दिन भी मौसम बदली भरा रहेगा। आज अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस है। उनका देहांत ६ दिसंबर १९५६ को दिल्ली में हुआ था, पर मुख्य कार्यक्रम चैत्य भूमि मुंबई में होता है। उसनकी अस्थियाँ इसी स्थान पर विसर्जित की गई थीं। यह दिन सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों के लिए उनके अतुलनीय योगदान को याद करने का प्रतीक है।  


Monday, May 18, 2026

रात की रानी


रात की रानी

आज का इतवार बच्चों के साथ बिताया। सोनू का भाई आया था, उसकी मॉम भी, नन्हे का मित्र आया, सभी मिलकर पहले ‘उडुपी’ गये, फिर एक कैंपिग साईट ‘कैंप मोंक’ देखने, लंच के लिए एमटीआर। शाम को वे लोग मैच देखकर वापस चले गये। भारत विश्वकप के सेमी फ़ाइनल में पहुँच गया है, उधर पाकिस्तान भी। शायद फ़ाइनल में दोनों के मध्य मुकाबला हो। पापाजी से बात हुई, उन्हें तीनों उपहार मिल गये हैं। 

आज शाम टहलने गये तो स्वच्छ नीले आकाश पर चाँदी सा चमकता चंद्रमा शोभित हो रहा था। कल पूर्णिमा है, देव दिवाली और गुरुपर्व भी। पापाजी का जन्मदिन भी, उनके लिए कविता लिखी है। कल चन्द्र ग्रहण भी है। सुबह नाश्ते में उसने साबूदाने की उपमा बनायी थी। नयी खुली सब्ज़ी की दुकान से पपीता ख़रीदा। शाम को हिंदी की कक्षा में साहिर-लुधियानवी का लिखा गीत “साथी, हाथ बढ़ाना” पढ़ाया। साहिर का नाम आते ही अमृता प्रीतम का ख़्याल भी आ जाता है अपने आप।   


आज सांध्य भ्रमण के समय चन्द्र ग्रहण देखा। सुबह उगते हुए सूरज का एक सुंदर चित्र उतारा था। जून आज दो बार साइकिल से बाज़ार गये। तीन तरह के साग लाए। वह आजकल पुन: जीवन में गहरी रुचि लेने लगे हैं, प्रेम का रंग चढ़ा है शायद। किसी कोरियन धारावाहिक का अंतिम एपिसोड देख रहे हैं वे, उसमें सच्चे प्रेम को बहुत श्रेष्ठता से दर्शाया गया है।वह आजकल घर के काम में बहुत मदद करने लगे हैं, उसे पढ़ने-लिखने का समय ज़्यादा मिल जाता है, यह भी ईश्वर की कृपा है ! उस दिन महर्षि अरविंद के एक अनुयायी से सुना था, जो लोग नियमित ध्यान करते हैं, उनकी शारीरिक उम्र भले ही बढ़ जाये पर उनकी कोशिकाएँ देर तक युवा रहती हैं। मन जिस बात को स्वीकार कर लेता है, वैसा ही प्रभाव शरीर पर पड़ता है। नन्हा शनिवार को गोवा जा रहा है, अपने मित्र की बैचलर पार्टी में। 


अभी कुछ देर पहले ही वे रात्रि भ्रमण से आये हैं, मौसम सुहावना था, हवा शीतल और सुवास भरी , जो गुलाबी ठंड पड़ने की खबर दे रही थी। दूर आकाश में धुएँ के बादल  थे, जो वहाँ रहने वालों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे होंगे, और हो सकता है थोड़ी देर में हवा उन्हें यहाँ तक ले आये,  वहाँ कोई सीमा तो है नहीं। जो लोग यह धुआँ पैदा कर रहे हैं, खुद वे भी भुगत ही रहे होंगे, पर वे इस बात को समझते नहीं, महसूस नहीं करते। आज भी महर्षि अरविंद व श्रीमाँ के बारे में सुना, उनका विजन कितना विशाल था, गुरुजी की तरह वे भी सारे विश्व के लिए सोचते थे। गुरुजी आजकल अमेरिका में हैं, करोड़ों लोगों के जीवन को उन्होंने छुआ है। उसे भी अपनी शक्ति व सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य में लगना चाहिए। पापाजी ने भी देश और दुनिया के लिए बहुत मंगलकामनाएँ ज़ाहिर किन। छोटे भाई का भुज से फ़ोन आया, कह रहा था, यहाँ  चालीस लाख में ज़मीन सहित डुप्लेक्स घर मिल जाता है, कितना खुला-खुला है वह इलाक़ा! उसने ‘भारत’ के बारे में एक पोस्ट प्रकाशित की; भारत, जो दुनिया को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। 


आज महाकवि दिनकर की पुस्तक में महर्षि अरविंद के कविता के बारे में कहे गये विचार पढ़े। वह अपने जैसे एक ही हुए हैं, उनके पूर्व किसी ने पूरी मानव जाति के आध्यात्मिक होने की बात नहीं कही है। उनका ज्ञान अथाह है, कोई एक व्यक्ति उसे पूरा समझ नहीं सकता। छोटी भांजी का जन्मदिन था, कल उसे बहुत आश्चर्य हुआ जब शाम को उसके दफ़्तर के लोग घर पर मिले, माँ ने बिना उसे बताये, एक पार्टी का आयोजन किया था, अगले महीने उसका विवाह होने वाला है। ईश्वर उसे सारी ख़ुशियाँ दे। कुछ देर पहले बायें तरफ़ के पड़ोसी का पुत्र आया था जन्मदिन का केक लेकर, उसका व उसकी माँ का जन्मदिन भी आज है। उन्हें भी फ़ोन करके बधाई दी। परमात्मा ही यह सारे काम करवा रहा है, उसकी कुछ मीठा खाने की इच्छा भर हुई और केक हाज़िर था। सुबह ठीक छह बजे किसी ने कहा, छह बज गये।सुबह उठने से पहले अक्सर ठीक तीन बजकर अट्ठाईस मिनट पर वही नींद खोल देता है। वह उनके इतने क़रीब है पर वे उससे मुँह मोड रहते हैं। उस मन से काम लेते रहते हैं, जो अस्थायी है, जो सदा बदलता रहता है। भक्ति, प्रेम, ज्ञान, शांति, समरसता, आनंद जो भी उन्हें चाहिए, वह सब परमात्मा से ही मिलता है। उसे पहचानना और उसके प्रति स्वयं को खोल देना यही असली योग है ! सुबह एक नयी कविता लिखी। पापाजी से बात हुई उन्होंने ‘इस्मत चुगताई’ का एक नाटक विविधभारती पर सुना, उसकी कहानी बता रहे थे।वह उसका लेख पढ़कर भी आश्वस्त हुए कि मानव सब कुछ नहीं जान सकता। नन्हा गोवा में है, आज वे लोग क्रूज़ में हैं, कल वह वापस आयेगा। 


आज नेहरू जी का जन्मदिन है, भारत के पहले प्रधानमंत्री, जो हिंदू होते हुए भी स्वयं को हिदुओं की तरफ़ से बोलने वाले नहीं कहलाना चाहते थे। वह धर्म निरपेक्ष थे पर अन्य पंथों के लिए अति उदार।भारत को इतने वर्ष और तपस्या करनी थी और फिर अपने मूल स्वभाव की ओर लौटना था। शायद वक्त का यही तक़ाज़ा था। बचपन में चाचा नेहरू के लिए उन्होंने कितने नग़मे गाये थे, उनके भीतर अनेक अच्छाइयाँ थी, विज्ञान के बल पर वह देश को आगे ले जाना चाहते थे।बाल्मीकि रामायण पर लिखी उसकी पोस्ट पर कुछ लोगों ने प्रतिक्रिया की है, रामायण के प्रति लोगों में कितनी श्रद्धा है ! 


आज शाम मृणाल ज्योति की रजत जयंती पर निकलने वाली पत्रिका के लिए एक ऑन लाइन मीटिंग में भाग लिया। मीटिंग अच्छी रही, जैसे कि सब कुछ अच्छा है, यह दुनिया अच्छी है और वह इसलिए कि इस दुनिया को बनाने वाला अच्छा है ! आज रात की रानी पूरे शबाब पर है, मदहोश कर देने वाली ख़ुशबू है उसकी ! राहगीरों को अपनी सुवास से आकर्षित करती हुई सी।सुगंधित पौधे कितने जीवंत होते हैं, ऊर्जावान और परहित कारक । दोपहर को इंडोनेशिया के बार में एक वीडियो देखा, मोदी जी ने वहाँ रहने वाले भारतीयों को शानदार भाषण दिया। इस्लामिक देश होने के बावजूद वे रामायण और महाभारत को अब तक अपनाए हुए हैं। आज एक अफ़ग़ानी व्यक्ति का वीडियो देखा जो अपने ही मज़हब का सताया हुआ है। पूरे विश्व में धर्म के नाम हज़ारों लोग प्रताड़ित किये गये हैं, किए जा रहे हैं। आज सुबह जून गन्ने का रस पिलाने ले गये, दुकानदार ने पुदीना और नींबू का रस डालकर ताजा और स्वादिष्ट रस दिया। रुस और यूक्रेन का युद्ध अभी भी चल रहा है, शायद इसी वर्ष इसका अंत हो जाये और नया वर्ष नयी उम्मीदें लेकर आये। लाखों लोग पहले ही मारे जा चुके हैं इसमें !