बालकनी में हरियाली
आज सुबह छह बजे वे एक मित्र दंपत्ति के साथ बैंगलुरु की एक प्रसिद्ध झील देखने गये। जहाँ पक्षियों के लिए एक विहार भी बनाया गया है। निकट स्थित एक अन्य झील देखने के बाद ‘पूर्ण ब्रह्म महाराष्ट्रीयन रेस्तराँ’ में स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया। उसके बाद वे राजशाही युग का प्रतीक ‘बैंगलोर पैलेस’ देखने गये।जहाँ मैसूर के राज-परिवार के चित्र व उनका इतिहास दर्शाया गया है।
सुबह वे टहलने गये तो आकाश में पूर्णिमा का चंद्रमा चमक रहा था। उसकी तस्वीरें बहुत सुंदर आयी हैं।आज शाम आश्रम में भीड़ बहुत थी, वे जल्दी लौट आये।एमटीआर में थट्टे इडली व अक्की रोटी खायी, अच्छी बनी थी।नयी मिट्टी व खाद और नये पौधे लगने के बाद आज नर्सरी से उनके अधिकतर गमले आ गये हैं। कल वे लोग बगीचे में शेष काम करने आयेंगे। आज एक शुभ समाचार मिला, बड़े भाई की बिटिया का रोका हो गया। ईश्वर से प्रार्थना है, उसके जीवन में सदा ख़ुशियाँ बनी रहें।
जिस सागर से भाप बनकर बादल उड़ा था, बरस कर उसी में लौट जाता है। संस्कार मन पर छाते हैं, फिर बादलों की तरह विलीन हो जाते हैं, वे भी एक ऊर्जा ही हैं, ऊर्जा-ऊर्जा में विलीन हो जाती है।मन के भीतर ही वह ईश्वर मिलता है। गुरुजी की सुंदर वाणी मोबाइल पर सुनी। किसी ने उनसे कांवड़ियों के बारे में पूछा। वे मीलों पैदल चलते हैं, देह का श्रम होता है, मन में श्रद्धा के कारण प्रफ्फुलता होती है। उनके संकल्प पूर्ण होते हैं। आरक्षण के बारे में उन्होंने कहा, यह सदा के लिए नहीं रहना चाहिए। कल रात देर से सोये थे, सो सुबह भी देर हुई उठने में, साधना में केवल प्राणायाम किया, जिससे शरीर में तीनों दोष संतुलित होते हैं।
आज नन्हे ने धातु के बने नये काले रंग के सुंदर गमले भेजे हैं। जून बालकनी में लगाने के लिए कृत्रिम घास भी ले आये हैं। दोनों जगहें बहुत सुंदर लग रही हैं। घर हरा-भरा हो गया है। वे एक नयी नर्सरी में गये, लकी माली ने नये गमलों में बिगुनिया, पितुनिया, जरेनियम, नाइन ओ क्लॉक के साथ और भी कई तरह के व कई रंगों के फूलों के पौधे लगा दिये हैं, अब उनको बचाना उनका काम है।सुबह जून साइकिल से दूर तक चले गये, नूना सोसाइटी में ही घूमती रही। नन्हे से बात हुई, वह दो दिनों के लिए ऑफ साईट जा रहा है, कंपनी का भविष्य निर्धारित करने। वे लोग अब अपना अस्पताल ले रहे हैं, फ़िलहाल पाँच साल के लिए लीज पर लिया है।
आज सुबह गुरुजी की ‘; पर दी व्याख्या सुनी।चेतना सदा है, जानना उसका स्वभाव है, जब जानना समाप्त हो जाता है, तब संसार शुरू हो जाता है। जानना विचार है, यदि कोई उसमें उलझ गया तो वह विकार बन जाता है।शाम को एक मित्र दंपत्ति मिलने आया, बातों-बातों में अगले हफ़्ते किसी दिन नये बने इस्कॉन मंदिर जाने का कार्यक्रम बन गया। सुबह बालकनी की घास पर नीचे बैठकर उन्होंने फलों का रस पीते हुए पापा जी को फ़ोन मिलाया, आज वह अकेले हैं, पर हैं आराम से। छोटी भाभी कल वापस आ रही है। वीडियो कॉल पर दिखाया तो कहने लगे, आपने अपने घर को जन्नत बना लिया है।शाम को वहीं बैठकर ऑडिबल पर आयुर्वेद पर लिखी एक पुस्तक सुनती रही।वाक़ई घर अब पहले से कहीं सुंदर लग रहा है, जून ने बहुत श्रम व धन लगाया है।
आज शाम को वे पहली बार बैंगलुरु मेट्रो में सवार हुए। रोज़ हज़ारों लोग मेट्रो में यात्रा करते हैं।उन्हें इतनी भीड़ में यात्रा करने का अनुभव कई दिन बाद मिला है, पर फ़िलहाल दुबारा जाने का मन नहीं है।ऐसे ही एक बार ‘वन्दे भारत ट्रेन’ में सफ़र करने का अनुभव लेना है।आज उनका पड़ाव था राजाजीनगर में हरे कृष्ण हिल पर स्थित बैंगलोर का पुराना इस्कॉन मंदिर। श्रीकृष्ण, बलराम व राधा के विग्रहों के दर्शन किए। महामंत्र का जाप किया। प्रसाद लेकर वे मेट्रो से ही वापस आये। सुबह के भ्रमण के लिए वे नापा से बाहर गये, मोर, कोयल व अन्य पंछियों का कलरव भोर की शोभा में चार चाँद लगा रहा था। पुस्तक आगे सुनी, कई नयी जानकारियाँ मिलीं। भाभी वापस आ गई है।अगले महीने वह अपनी डाक्टर बिटिया के साथ स्कॉटलैंड जाने वाली है।कोई सेमिनार है। आज तापमान चौतींस डिग्री पहुँच गया है, गर्मियों का मौसम पूरे शबाब पर है।
एक और दिन बीत गया ख़रामा-ख़रामा सुबह सुहानी थी, सूर्योदय के सुंदर दर्शन हुए। दोपहर को बाल्मीकि रामायण का कुछ अंश लिखा। आज लॉन में घास लगायी जा रही है। कल शाम तक कम चलेगा। रविवार को नन्हे और सोनू को बहुत अच्छा लगेगा।नन्हे ने घर के नाम के साथ उनके नाम लिखवाकर नेमप्लेट भेजी है, पर उन्हें केवल घर का नाम ‘निर्वाण’ लिखी हुई नेम प्लेट ही चाहिए। वह उसे वापस कर देगा। कल साप्ताहिक साफ़-सफ़ाई का दिन है, नैनी भी सुबह जल्दी आएगी। सो, जल्दी यानि समय पर सो जाना बेहतर है।
आज इतवार है। सुबह दो घंटे बगीचे में माली को कम बताते, करवाते बीते।ग्यारह बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। नाश्ते के बाद पहले नर्सरी फिर फ़ोरम मॉल गये। रात्रि भोजन करने के बाद घर लौटे तो दस बज गये थे। सभी के लिए उपहार लेना आज का मुख्य कार्यक्रम था। नन्हे ने उसके लिए डेनिम की जैकेट लेकर दी है। नये गमलों में पौधे लग गये हैं।

