Wednesday, September 16, 2026

मेरी माटी मेरा देश

मेरी माटी मेरा देश

आज सुबह का आरंभ ‘ध्यान’ से हुआ।देह से बाहर अनंत आकाश में विचरने का अनुभव! आत्मा रूपी हंस देह रूपी पिंजरे से ध्यान में ऊपर उड़ जाता है। संभवत: इसी को संतों ने गाया है, “चल हंसा उस पार”। उसके बाद वे टहलने गये। रास्ते में ही समाचार सुने, फिर कल के “मन की बात” की रिकार्डिंग। मोदी जी ने कई जानकारियाँ दीं, पंद्रह अगस्त की तैयारी के लिए, प्रेरित किया। ‘मेरी माटी मेरा देश' अभियान में भाग लेने को कहा। जिसका उद्देश्य वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देना है। आज़ादी के अमृत महोत्सव के समापन कार्यक्रम के रूप में इसमें देश के कोने-कोने से सात हज़ार पाँच सौ कलशों में मिट्टी और पौधे लाये गये हैं।हर ग्राम पंचायत में अमृत वाटिका भी लगाई गई है। लोकसभा में अभी भी गतिरोध बना हुआ है। इतना अवश्य हुआ है कि जो अविश्वास प्रस्ताव आने वाला था, वापस ले लिया गया है। 

जून ने सुबह के नाश्ते में आज बिना किसी तरह की मदद लिए अकेले ‘दोसा’ बनाया, नारियल की चटनी व सांबर भी !  उन्हें दक्षिण भारतीय भोजन खाना और बनाना दोनों समान रूप से पसंद है। दोपहर को उसने मानव कौल की एक पुस्तक पढ़ी, जिसका नाम भी “तुम्हारे बारे में” है।अच्छी है, छोटी-छोटी यादें हैं, विचार हैं, जो विभिन्न यात्राओं के दौरान लेखक की कलम से उतरे। वह सच को कितनी आसानी से व्यक्त कर देते हैं।लेखक ने एक अन्य लेखक विनोद शुक्ला की तारीफ़ की है, मौक़ा मिलने पर उन्हें पढ़ेगी। पापा जी से बात हुई, उन्होंने भी गुरुजी की तरह कहा, ध्यान में कुछ करना नहीं है, बस चुप होकर बैठ जाना है। वह ओशो को सुनते हैं और सुनते-सुनते आत्मभाव में दृढ़ होते जा रहे हैं।उन्हें अपने वृद्ध होने का जरा भी अहसास नहीं होता।बानवे वर्ष की उम्र में वह स्वस्थ हैं और मानसिक रूप से सबल भी। उसकी कविता की तारीफ़ की उन्होंने। 

कल उसकी एक लंबी-चौड़ी, अच्छे-ख़ासे डील-डौल वाली महिला से मुलाक़ात हुई, जो पहले पार्लर चलाती थी। कोविड के दौरान बंद कर दिया। अब बुलाने पर लोगों के घर जाती है। दो भारी बैग उसके पास थे, एक हाथ में दूसरा पीठ पर। घर बैठे सैलून जैसी सुविधा देनी हो तो सारा सामान चाहिए। उसने बड़े गर्व से बताया, बेटे का नाम संमित विहान है, जो पढ़ाई में होशियार है। वह भक्तिभाव से भरी हुई थी। हनुमान जी पर गहरी श्रद्धा है और देवी को भी मानती है। उसकी बातें सुनकर अच्छा लगा। प्रभु की कृपा ही माननी चाहिए यदि किसी के अंदर भक्ति का भाव जगा है।  

आज पूर्णिमा है, अभी-अभी आकाश में चन्द्र दर्शन हुए, तस्वीरें भी उतारीं। शाम को वे आश्रम गये थे, राधा कुंज में बैठे, जहाँ बहुत सी नयी वस्तुएँ आ गई हैं। कुछ नये फ़व्वारे, नयी बेंच और नयी  मूर्तियाँ भी। हवा शीतल व तेज थी। झील में कुछ पक्षी बैठे थे, जो उनके जाते ही उड़ गये। वहाँ से वे शिव मंदिर गये। कुछ देर बैठकर ध्यान किया, गुरुजी की आवाज़ में शिव मंत्र का जाप चल रहा था। शिव की उपस्थिति चाहे अदृश्य हो पर आश्रम में हर पल गुरुजी की उपस्थिति का अहसास हो रहा था।वह हर पत्ते, हर सरंचना पर, हर कहीं मौजूद थे।लग रहा था, जैसे उनके क्षेत्र में वे अनाधिकार तो प्रवेश नहीं कर रहे। उन्होंने ऐसे कौन से पुण्य कर्म किए थे, जो इस पवित्र आश्रम में जब चाहें जा सकते हैं। 

सुबह टहलते समय जून के साथ ध्यान पर कुछ बात हुई। सांसारिक वस्तुओं के अतिरिक्त कोई सुख का स्रोत है तो वह “ध्यान” है। जब एक बार भीतर इसका अनुभव हो जाता है, तब अपने आप ही मन जगत से उपराम होकर भीतर ठहरना सीख जाता है। आज शाम वे इस्कॉन मंदिर गये, राजाधिराज मंदिर, या राधाकृष्ण मंदिर, जो एक पहाड़ी पर बना, एक विशाल भव्य मंदिर है। बड़े लंबे-लंबे गलियारे और और सुंदर मंडप। ऊपर से दूर-दूर तक के नज़ारे और इमारतें दिखायी देती हैं। आरती का समय हो रहा था, सो उन्होंने उसमें भाग लिया, बाद में प्रसाद भी ग्रहण किया। आज नूना ने ओबीए की वरिष्ठ सदस्या के लिए एक कविता लिखी, जो उन्हें लंच पर ले गई थीं। सभी को अच्छी लगी, उनकी बेटी ने अपने पारिवारिक समूह में भी भेज दी है। कुछ पुरानी कविताओं की मात्राएँ दुरस्त कीं। कुछ देर ‘सावित्री’ का अनुवाद सुना।इस महाकाव्य को लिखने के पीछे कितना महान उद्देश्य था श्री अरविंद का। परमशक्ति को धरा पर उतार लाने की कल्पना ही कितनी महान है। मानव तो भगवान को दूर बैठाकर ही प्रसन्न हो जाता है।उपनिषदों में लिखा है, परमात्मा एक था और उसने बहुत होने की इच्छा प्रकट की। मानव जीवन का उद्देश्य है, परमात्मा को अपने माध्यम से व्यक्त होने देना, सदा सजग होकर जीना तथा भगवद् संकल्प को सत्य सिद्ध करना। उसने श्रीमाँ के वचनों पर आधारित एक चर्चा भी सुनी थी। जिसमें बताया गया था, आत्मा किस तरह शरीर और मन से जुड़ती है। कभी-कभी तो मन ही प्रधान होता है, आत्मा जैसी कोई चीज नहीं होती भीतर ! कितनी अनोखी बातें हैं ये। यदि कोई ध्यान से देखे, मन की सारी इच्छाएँ दूसरों को लेकर होती हैं। कभी उन्हें स्वयं को सिद्ध करना है, कभी कुछ दिखाना है अथवा कुछ देना है। गुरुजी कहते हैं, एक क्षण के लिए यदि कोई सोचे, दूसरा कोई है ही नहीं, तो उसे कितनी शांति अनुभव होगी। मन की सारी दौड़ ख़त्म हो जाएगी।  

आज सुबह वे मुख्य सड़क पार करके एक नयी बन रही सोसाइटी में टहलने गये, प्लॉट्स कटे हुए थे और सुंदर बगीचे भी तैयार हो गये हैं। ‘एलिमेंट ऑफ़ अर्थ’ नामकी यह जगह भी उसी समूह की है जिस समूह की उनकी यह सोसाइटी है। शाम को वे पहले एक मित्र दंपत्ति के घर गये, फिर वहाँ से थरालू स्टेट लेक से होते हुए पूरे दो घंटे चलकर वापस आये। रास्ते में कुछ तस्वीरें भी उतारीं। उनके लिए यह रास्ता देखा हुआ था, पर मित्रों के लिए रास्ता बहुत लंबा था। रास्ते में बाइक पर जाते हुए एक-दो परिचित मिले, जो उन्हें घर से इतनी दूर देखकर आश्चर्य व्यक्त कर रहे थे। कल उन्हीं मित्रों के साथ इस्कॉन मंदिर भी जाना है। जून को गाड़ी चलाने में अब जरा भी दिक़्क़त नहीं होती। आज सुबह एक महिला ने उनका फ़्लैट किराए पर लेने के लिए कुछ अग्रिम धनराशि दी, पर शाम को उनका फ़ोन आया, पति का तबादला मुंबई हो गया है, सो वे लोग शीघ्र ही यहाँ से चले जाएँगे। वाक़ई जीवन कितना अनिश्चित है !  

कल शाम वे मंदिर गये थे।उनके मित्रों को भी मंदिर की विशालता तथा भव्यता ने मोह लिया। उन्होंने राधा-कृष्ण के साथ अन्य देवी-देवताओं के विग्रहों के दर्शन किए, दान किया, प्रसाद लिया, लड्डू-पेड़े ख़रीदे और सूर्यास्त के चित्र उतारे।आज शाम एक बिलकुल ही नये रास्ते पर गये। अगरबत्ती फ़ैक्ट्री से होते हुए प्रकृति फार्म पर पहुँचे, एक घंटे में घर वापस आ गये। रास्ता अच्छा था, दो झीलें मिलीं। आजकल उन्हें नये-नये रास्तों पर टहलना अच्छा लगता है। शाम को नन्हे का फ़ोन आया, कल दस बजे तक पहुँच जाएगा। संभवत: वे सब बैंगलोर के प्रसिद्ध विशाल उद्यान लाल बाग जायें।  

Tuesday, September 8, 2026

तुम्हारे बारे में


तुम्हारे बारे में

आज सुबह एक बार फिर वे दूर तक टहलने गये, एक घंटे से भी अधिक चले होंगे।भोर की स्वच्छ हवा में पंछियों की आवाज़ें और फूलों की सुगंध वातावरण में तैर रही थीं। दोपहर को उसने गणेशजी का चित्र पूर्ण किया और निर्णय लिया अब कुछ चित्र स्वयं भी बनाने चाहिए।एओएल के एक अनुवाद कार्य को छोड़कर कोई लेखन कार्य नहीं हुआ, पापाजी से बात हुई तो जून ने अख़बार में पढ़ी कुछ रोचक ख़बरें उन्हें बतायीं। सांध्य भ्रमण के लिए वे निर्माणाधीन सोसाइटी बोटेनिका गये तो इंद्रधनुष की सुंदर तस्वीरें उतारीं। घर से निकले थे तो वर्षा के आसार नहीं थे। सुबह से धूप खिली थी, पर चार कदम चलते ही बूँदाबाँदी शुरू हो गई। लौटकर छाता लिया फिर चंद कदम चले थे कि सूरज चमकने लगा। बूँदें  भी पड़ रही थीं, सोचा, ऐसे में ही तो इंद्रधनुष बनता है, वाक़ई एक पूर्ण इंद्रधनुष एक कोने में शुरू होकर अर्धवृत्त बनाता हुआ दूसरी तरफ़ समाप्त हो रहा था। 

आज का दिन शेष दिनों से काफ़ी अलग रहा। सुबह टहलने गई तो मनोमय कोष की साधना के बारे में सुंदर विचार सुने। वापस आकर साधना फिर साप्ताहिक सफ़ाई। दस बजे वे ओबीए के सदस्यों के लिए वरिष्ठ महिला द्वारा आयोजित प्रीतिभोज के लिए पड़ोसी दंपत्ति को साथ लेकर  उनके घर जाने के लिए निकले।दो परिवार वहाँ पहले पहुँच चुके थे। पाकशाला पहुँचे तो दोपहर के एक बजने वाले थे।सभी ने सूप, सिजलर व स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया। वापसी में एक परिवार उनके साथ आया, घर तथा यह सोसाइटी उन्हें अच्छी लगी। सुबह वाटर फ़िल्टर काम नहीं कर रहा था, शाम को वे वापस गये तो मकैनिक आया, उसने फ़िल्टर बदल दिये। सवा छह बजे वे एक नाटक देखने के लिए रवाना हुए। ‘श्री हरि खोड़े’ प्रेस्टीज के नये थियेटर में ‘सआदत हसन मंटो’ का एक नाटक ‘एक हाँ’ खेला जाने वाला था। इसमें शेखर सुमन ने मंटो की भूमिका निभायी है, उनका अभिनय कमाल का था। इसमें सुचित्रा कृष्णामूर्ति पत्रकार की भूमिका में थीं। नाटक में मंटो के जीवन के उतार-चढ़ाव, उनकी विचार प्रक्रिया को उनकी कुछ कहानियों द्वारा दर्शाया गया है। नन्हा व सोनू भी आये थे। नाटक के बाद सबने ‘आनंद’ में स्वादिष्ट उत्तर भारतीय भोजन ग्रहण किया। नन्हे ने कल शाम के लिए भी एक नाटक की टिकट बुक कर दी हैं। मानव कौल का नाटक है, जिसका ‘शक्कर के पाँच दाने’ पहले देखा था। 

आज सुबह नौ बजे वे नन्हे के घर जाने के लिए रवाना हुए। शाम को साढ़े छह बजे घर लौटे। एक अनुवाद कार्य किया। कल छोटी बहन का जन्मदिन है, एक पुरानी कविता को आज के परिप्रेक्ष्य में दुबारा लिखा। दिन में दोपहर बाद एक दूसरा हिन्दी नाटक देखा, ‘तुम्हारे बारे में’ मानव कौल द्वारा लिखित और निर्देशित भी।आधुनिक काल में स्त्री-पुरुषों के संबंधों पर आधारित है। सोनू को लेखक से मिलने का बहुत मन था, उसने मानव कौल के साथ तस्वीर भी खिंचवाई। 

अगले दिन तक नाटक का असर उसके मन पर था। जिसने कुछ लिखने को प्रेरित किया। जीवन अनेक-अनेक रूपों में उनके सम्मुख आता है। हर दिन कुछ न कुछ नया अनुभव दे जाता है। हर दिन समाज में कुछ न कुछ अच्छा या बुरा घट जाता है, जो अख़बार के पहले पन्ने की खबर बन जाता है। उनकी दृष्टि जहाँ जाकर ठहरती है, जीवन उनके लिये उसके द्वार खोल देता है। एक लेखक को मिलने-जुलने वाले लोगों में कई कहानियाँ नज़र आती हैं। एक वैद्य या चिकित्सक की नज़र लोगों में किसी न किसी तत्व की कमी भाँप लेती है। बच्चों को आइसक्रीम और चॉकलेट में आनंद मिल जाता है तो किसी भक्त को दूर से आती भजन की एक पंक्ति भी सुकून से भर जाती है। जब इतनी विचित्रता है यहाँ तो आश्चर्य होता है कि कैसे कुछ लोग जीवन से ऊब जाते हैं, बोर हो जाते हैं, या उदासी मिटाने के लिए नशे या ड्रग्स का सहारा लेने लगते हैं। जीवन इतना रसपूर्ण पहले से ही है और संगीत, साहित्य, नाटक तथा अन्य विभिन्न कलाएँ इसमें चार चाँद लगा देती हैं। वरिष्ठ साहित्यकार व कलाकार अपने में इतने सघन होते जाते हैं कि सारे जग का दर्द मिटाने की भावना उन्हें चैन से बैठने नहीं देती। उनका अपना स्वार्थ नहीं होता फिर भी कुछ लोग समाज के लिए दिन-रात प्रयत्न करते हैं। ऐसे ही लोगों के बल पर यह दुनिया और खूबसूरत बन जाती है। वे थके हारे लोगों के दर्द भी महसूस करते हैं और महिलाओं की पीड़ा को भी शब्द देते हैं। मानव कौल एक ऐसा ही नाम ही है, उनका लिखा व निर्देशित किया नाटक ‘तुम्हारे बारे में’ देखना एक सुखद अनुभव था। यह एक प्रायोगिक नाटक है, जिसमें हास्य और व्यंग्य भी है और असफल रिश्तों के पीछे छिपी हुई पीड़ा का दंश भी। छह पात्रों द्वारा अभिनीत किया यह नाटक समाज में आज के समय में स्त्री-पुरुष संबंधों में आते हुए बदलावों के बारे में बात करता है। यहाँ दिखाया गया है कि आज स्त्रियाँ रिश्तों में पहले की सी सुरक्षा व स्थिरता पाने के लिए घर में बँधना नहीं चाहतीं। वे स्वतंत्रता का अनुभव करने के लिए आकाश में उड़ना चाहती हैं; जबकि पुरुष पात्र पेंग्विन बनना चाहते हैं, अर्थात उनके पास पंख तो हों पर उनसे उड़ा न जा सके। नाटक में तीन महिला और तीन पुरुष पात्र हैं, एक जोड़ा सात वर्ष बाद मिला है और उन कारणों को ज्ञात करना चाहता है जिनकी वजह से वे अलग हुए थे। एक जोड़े की आमने-सामने यह पहली मुलाक़ात है, सोशल मीडिया पर वे मिल चुके हैं और तीसरा जोड़ा अलग होने की कगार पर आ चुका है। किसी कैफ़े में वे मिल रहे हैं और ठंडी व गरम काफ़ी को पसंद करने के प्रतीक से समय के साथ पात्रों में आये बदलावों को चिन्हित किया गया है। कैफ़े में पूरे फ़र्श पर कविताओं के पन्ने बिखरे हुए हैं, जिन्हें पढ़कर महिलाएँ उड़ने की कला सीखना चाहती हैं; शायद लेखक कहना चाहता है, बंधनों से भरे जीवन में कविता ही हमें मुक्ति का अहसास दे सकती है। बीच-बीच में टैगोर का एक मधुर गीत बजता है जो रिश्तों में आयी टूटन के इस दर्द को और गहराई देता है। एक दृश्य में दिखाया है कि मोबाइल का बढ़ता हुआ प्रयोग कैसे व्यक्ति को आत्म केंद्रित कर रहा है।कहीं न कहीं एक-दूसरे के प्रति एकनिष्ठता की कमी तथा उसके कारण पनपा अपराध बोध रिश्तों के बिखरने का मुख्य कारण है।


Wednesday, September 2, 2026

नटखट बकरी

नटखट बकरी

आज शाम वे दोनों पूरा डेढ़ घंटे तक कभी बातें करते, कभी मौन पेड़-पौधों को निहारते चलते रहे। ‘प्रकृति फार्म हाउस’ से होते हुए ‘थरालू स्टेट झील’ तक पहुँचे, कुछ पल वहाँ रुककर ‘थतगुप्पे झील’ पर रुके, जहां से ‘ट्यूज़डे फ़ार्म स्टे’ होते हुए घर पहुँचे। वापसी में सड़क पर बकरियों और भेड़ों का एक झुंड आगे-आगे जा रहा था। एक महिला उन्हें हाँक रही थी। एक छोटी बकरी बहुत नटखट थी, उसी को सँभालने में महिला का अधिक समय व श्रम लग रहा था। रास्ते में नन्हे से बात हुई, उन्हें आश्चर्य हो रहा था, कि वे लोग इतनी पैदल यात्रा कैसे कर सके। नूना ने कुछ तस्वीरें भी उतारीं। सुबह भी जून कार से दूर तक ले गये। दोनों तरफ़ घनी हरियाली और सुबह का सन्नाटा ! अधिकतर रास्ता बहुत अच्छा था, कहीं-कहीं सड़क टूट गई थी।

कल की लंबी पैदल यात्रा के कारण आज सुबह उठने में थोड़ी देर हुई, पर उसके बाद दिनचर्या नियमित हो गई।जब तक योग साधना आरंभ की, दिन शुरू हो गया था। स्कूल बसें आनी शुरू हो गयीं, इसलिए सिट आउट पर काफ़ी शोर आ रहा था, बहुत दिनों बाद योग कक्ष में ध्यान किया। शरीर से बाहर आकाश में ध्यान टिकाने से शरीर में कितना हल्कापन महसूस होता है। इसीलिए गुरुजी सदा सिर से एक फुट ऊपर ध्यान ले जाने को कहते हैं। देह और मन रेत और चीनी की तरह कभी मिल ही नहीं सकते। चेतना सदा पदार्थ से अलग है पर उसका अनुभव पदार्थ में जाकर ही हो सकता है। यदि पानी ही पानी हो तो पानी को अपनी खबर नहीं होगी, थोड़ी सी भूमि आ जाये तो जल स्वयं को भूमि से पृथक मानेगा और अपने पर भी नज़र जाएगी। उनका भी यही हाल है, वे जो नहीं हैं, जब वह देखते हैं तो ख़ुद पर भी नज़र जाती है। आज छोटी बहन से बात हुई। वह अब प्रसन्न है। उसका क्लिनिक खुल गया है और एओएल के शिक्षक का कार्य भी कर रही है। आज उसका ऑनलाइन इंट्रो है, शनिवार को दोपहर के भोजन के साथ इंट्रो है। छोटा भाई घर आया हुआ है, अगले महीने उसकी सेवा निवृत्ति हो जाएगी, पापाजी ने बताया। उसके बाद वह घर पर रहेगा तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा।अगले महीने वह लखनऊ जा रहा है, छोटी बिटिया की डाक्टरी की पढ़ाई समाप्त हो रही है, उसे घर लाना है। 

आज लिखने के लिए पर्याप्त समय है, पर नूना का पेन रीफ़िल बदलने के कारण ठीक नहीं चल रहा। शायद रीफ़िल छोटी है। जब तक चीजों की नाप ठीक न हो , जैसे चप्पलों या वस्त्रों की तो वे भी खलते हैं। आज ओबीए की एक वरिष्ठ सदस्या का फ़ोन आया, इस माह के अंत में वे उन्हें तथा दो अन्य परिवारों को दोपहर के भोजन के लिए ले जायेंगी। जून ओबीए के काम में उनकी बहुत सहायता करते हैं। जून ने उससे पूछा, उन्होंने ‘आदमी और इंसान’ फ़िल्म देखी है ? कुछ याद नहीं आया तो उसने कहा, इस फ़िल्म में अवश्य ही एक आदमी होगा और दूसरा इंसान, आदमी यदि इंसान नहीं बन पाया तो हैवान बन जाएगा। आज महर्षि अरविंद की ‘सावित्री’ पुस्तक के अंश की व्याख्या सुनी। वह अंग्रेज़ी में पढ़ रही है, पर उसकी भाषा अति क्लिष्ट है और भाव भी अति दुरूह। दोपहर को चैत्य सत्ता पर आलोक पांडे का प्रवचन सुना। चैत्य सत्ता को जागृत करना अध्यात्म में पहला कदम है, उसके बाद ही साधना का आरम्भ होता है। जैसे नरसी मेहता ने भी कहा है, आत्मज्ञान के बिना भक्ति अधूरी है। शाम को गुरुजी द्वारा निर्देशित चक्रों पर ध्यान किया, हवा इतनी तेज चलने लगी थी पर तब भी मन टिका हुआ था।उसने कहीं पढ़ा था, गुरुजी घंटों ध्यान में बैठे रहते थे।उन्होंने वर्षों पूर्व महर्षि महेश योगी के साथ रहते हुए दिल्ली में (नक़ली) पंडितों के क्रोध को शांत किया था। उनके अंदर समझौता कराने की कला पहले से ही थी। गुरुनानक की पुस्तक आगे बढ़ रही है, कैसे चौथे-पाँचवे गुरु के आते-आते सिख धर्म के रूप में परिवर्तित होता गया।नानक की यात्राओं का वर्णन लेखक ने बहुत सुंदर ढंग से किया है। आज सुबह कुछ देर पार्क आठ में प्राणायाम किया, हवा शीतल थी और वातावरण शांत, तब छह भी नहीं बजे थे। जून कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में  एक वीडियो देख रहे हैं संभवत: वे भी कभी भविष्य में यह यात्रा कर सकते हैं। यह पर्वत पंद्रह हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित हैं, यात्रा अत्यंत कठिन है, पर हज़ारों लोग हर वर्ष यहाँ जाते हैं।  

आज सुबह चार बजे नन्हा अपने एक सहकर्मी के साथ चेन्नई गया है। उसका फ़ोन आया, तब काम ख़त्म करके होटल जा रहा था। उसे कल भी आज की तरह तीन-चार मीटिंग्स करनी हैं। अस्पतालों में जाकर उनके सीईओ से मिलना है, ताकि उन्हें प्रैक्टो के बारे में बता सके।उसने बताया, सोनू के माँ-पापा बांग्लादेश गये हुए हैं। नूना को रुद्र पूजा के बारे में एक लेख का अनुवाद करना है। सावन के महीने में हर सोमवार को आश्रम में रुद्र पूजा होती है। 

आज दिन भर बादली और वर्षा का साम्राज्य छाया रहा। हवा ठंडी हो गई है और तापमान २०-२१  डिग्री। आज मणिरत्नम द्वारा निर्देशित एक तमिल फ़िल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन’ का पहला भाग देखना शुरू किया है। इसमें दसवीं शताब्दी के चोल वंश के राजाओं की कहानी दर्शायी गयी है। दोपहर को पेंटिंग का काम थोड़ा सा आगे बढ़ाया। सुबह का ध्यान गहरा था। सूक्ष्म शरीर को कितना स्पष्ट अनुभव किया। बिना कान के सुना, बिना वस्तु के वस्तु का होना महसूस किया। कितना विचित्र था सब कुछ। दिन भर मन एक विचित्र से आनंद में डूबा रहा। मानव देह के भीतर कितने महान रहस्य छिपे हैं। शाम को गुरु जी की आवाज़ में रुद्रम की व्याख्या सुनी। जून ने सुबह स्वादिष्ट पोहा तथा दोपहर को स्वादिष्ट कढ़ी बनायी। आजकला वह भी बहुत प्रसन्न रहते हैं। नन्हे का फ़ोन आज नहीं आया, कल सुबह वह वापसी की यात्रा पर निकलेगा। 

अभी कुछ देर पहले मन फिर अहंकार के बहकावे में आ गया। जब वे स्वयं को देह मानते हैं तभी तो अहंकार के शिकार होते हैं। यदि स्वयं को आत्मा ही मानें तो कैसा अपमान और कैसा सम्मान, ऐसा लगता है जैसे किसी बाह्य शक्ति ने विचारों को भ्रमित कर दिया हो। जहां केवल ज्ञान और प्रेम का वास होना चाहिए, वहाँ क्रोध, शिकायत, उलाहना और अलगाव का क्या काम? मन का स्वभाव ही ऐसा है, वह संस्कारों के वश होकर ही ऐसा करता है। पर यह तो तय है कि पल भर के लिए वाणी कठोर हो सकती है पर दिल जरा भी नहीं ! आज नन्हा चेन्नई से वापस आ गया, सीधा ऑफिस चला गया, जैसे जून किया करते थे। अभी-अभी यह ख़्याल मन में आया, कहीं यह वाद-विवाद किसी अन्य बात की तरफ़ इशारा तो नहीं कर रहा ? सुबह से ही मन में हल्की सी बेचैनी थी, जिसकी परिणति हुई। आश्चर्य होता है कि अब किसी बात का इतना असर होने का क्या कारण है? जबकि पहले इससे बड़ी बात को भी नज़रंदाज़ किया है। इसका कारण ईश्वर ही जानते हैं, अब उसके साथ जो भी होता है, उससे जो भी होता है, उसके पीछे एक वही कारण है। उसकी इच्छा के बिना कुछ भी नहीं होता, जब यह जीवन भी उसी का दिया है, तो हर पीड़ा और हर ख़ुशी भी उसी की दी हुई है। आज सुबह एक कविता लिखी थी, यदि उसे कविता कहा जा सकता है तो….


Monday, August 24, 2026

टैगोर का निबंध


टैगोर का निबंध 



आज का दिन व्यस्तता भरा बीता। ऐसी व्यस्तता, जो उन्हें आनंद से भर देती है, जैसे कोई नाव धीरे-धीरे नदी पर तिरती जा रही हो। सुबह उठे तो नित्य की भाँति दूर तक टहलने गये। चारों ओर निस्तबधता और हल्का धुँधलका ! पवन शीतल थी, उस समय कदम जैसे अपने आप ही आगे बढ़ते जाते हैं, उसने जून से कहा, वह नहीं चल रही, मात्र देह चल रही है, वह भीतर स्थिर है। उसे भीतर भी नहीं कहा जा सकता, एक ऐसी ऊर्जा है जिसका केंद्र कहीं नहीं है। आकाश में द्वादशी का चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा था। चंद्रमा को देखकर सहज ही मन में आनंद की एक लहर डोल जाती है, इसीलिए चंद्रमा की तुलना मन से की गयी है, आत्मा की सूरज से और देह की धरती से ! वापस आकर छत पर लगे पौधों के सान्निध्य में साधना की। कहते हैं न, भोर सँवर जाये तो दिन अपने आप सार्थक हो जाता है। नैनी जल्दी आ गयी। उसके साथ मिलकर वे घर की साप्ताहिक सफ़ाई में जुट गये। वैक्यूम क्लीनर्स का इस्तेमाल सप्ताह में एक ही बार होता है।लगभग दो घंटे के स्वच्छता अभियान के बाद घर कैसा सुंदर लग रहा था। नूना को एओएल का अनुवाद कार्य करके भेजना था। तभी पड़ोसी परिवार मिलने आ गया, वे लोग अधिक देर नहीं रुके, शाम को उनके साथ भ्रमण के लिए जाना है, यह कहकर वे चले गये। कल जो इडली मिश्रण मिला था, उसमें कुछ हरी सब्ज़ियाँ डालकर नाश्ते के लिए अप्पम बनाये। काफ़ी पीकर वे बैंगलुरु के एक  प्रसिद्ध और व्यस्त बाज़ार ‘कमर्शियल स्ट्रीट’ जाने के लिए निकले। जून को अब व्यस्त सड़कों पर ड्राइविंग करने में दिक़्क़त नहीं होती, जैसे शुरू में होती थी। सवा घंटे में वे वहाँ पहुँच गये थे। देवेनगेरे सिल्क स्टोर से सोनू के और अपने लिए उसने कुछ वस्त्र लिए। दीवाली की तैयारी के अन्तर्गत सफ़ीना प्लाजा से कॉफ़ी टेबल कवर, एक अन्य दुकान से कुशन कवर लिए। वापस आकर झटपट लौकी, मटर व मसूर दाल डालकर तहरी बनाई।कुछ देर ऑडिबल सुनते-सुनते विश्राम किया, योग निद्रा जैसा, जिसमें देह सो जाता है, पर चेतना सजग रहती है। सुबह भी उसने कुछ देर ‘जे कृष्णामूर्ति’ को सुना था। ध्यान पर उनके विचार मन को सचेत कर देते हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शाम को मित्रों के साथ टहलने निकले तो कुछ दूर जाते ही वर्षा आरंभ हो गई, वापस आकर एक रोचक बोर्ड गेम ‘सीक्वेंस’ खेला, जो नन्हा बहुत पहले उनके लिए लाया था। कार्ड्स से खेले जाने वाले इस खेल में पाँच टोकन की एक पंक्ति बनानी होती है, जो पहले बना लेगा, वह विजेता होगा। उन्हें भी अच्छा लगा यह खेल। जून ने ‘फ़ूडी बडी’ व्हॉट्स ऐप ग्रुप में देखकर एक सदस्या से समोसे मँगवा  लिए थे। वैसे तो वर्षा के मौसम में पकौड़े खाये जाते हैं, पर समोसे भी अच्छे लगे।    

आज इतवार की सुबह बच्चे ग्यारह बजे के लगभग आ गये थे। दोपहर के भोजन के बाद वे सब फ़ोरम मॉल गये। प्रेस्टीज समूह का यह मॉल बैंगलुरु के सबसे बड़े और शानदार मॉल्स में से एक है। उनके घर से बहुत दूर भी नहीं है। सोनू ने कहा, जॉब में अपने नये रोल के लिए अगले हफ़्ते इंटरव्यू देना है। उसके बाद उसे हफ़्ते में दो-तीन बार ऑफिस जाना पड़ेगा। उसे फॉर्मल ड्रेसेज़ लेनी थीं। उसके बाद ‘मोंटेज’ गये, जो पेंटिंग्स की एक दुकान है और शिफ्ट होने वाली है। वे लोग चालीस प्रतिशत छूट दे रहे हैं। नन्हे ने अपने घर के लिए फूलों वाली एक पेंटिंग ख़रीदी।बाद में ‘चायोज’ में शाम की चाय पी।यहाँ गुड़ की चाय भी मिलती है और कुल्हड़ वाली चाय भी, इसके अलावा हर्बल टी, ग्रीन टी आदि के साथ अनेक प्रकार की चाय मिलतीं हैं।चाय के साथ स्नैक्स की भी कोई सीमा नहीं है, अलग-अलग तरह के व्यंजन लोग यहाँ चाय के साथ मंगाते हैं। 

परसों जो लंबी सैर वर्षा के कारण नहीं हो पायी थी, आज शाम को उन्होंने मित्र दंपति के साथ की। वापसी में कुछ देर घर आकर बतकही भी चली।उनकी बड़ी बेटी के घर के पास एक झील है, कन्नामंगला झील, भविष्य में कभी वहाँ जाने की बात भी हुई। इसी हफ़्ते वे लोग बेटी के घर जा रहे हैं, जिसे कुछ दिनों के लिए विदेश जाना है, उसके कुत्ते की देखभाल के लिए उन्हें कुछ दिन वहाँ रहना होगा। वे लोग वापस आने के बाद उनके साथ योग अभ्यास करने भी आना चाहते हैं। आज नूना ने नवनीत में रवीन्द्रनाथ टैगोर का एक लेख पढ़ा, जो अद्भुत है। मानवता, प्रकृति और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम उनके विचारों में मिलता है। संकीर्ण राष्ट्रीयता से ऊपर उनके विचार पूरे विश्व को अपना परिवार मानने की भारतीय परंपरा को पोषित करते हैं। वह कहते हैं, साहित्य का उद्देश्य आनंद की प्राप्ति और आत्मज्ञान पाना है। इस महीने के अंतिम सप्ताह में एक दिन उन्हें हिंदी नाटक देखने जाना है। नन्हे ने अगले महीने वायनाड में ताज में बुकिंग कर दी है। सितंबर के आख़िर में कोयंबटूर और ऊटी जाना है। वर्षा के बाद मौसम साफ़ होता है तो लोग यात्रा पर निकलते हैं। इस समय तो देश के कई राज्यों में बाढ़ एक कारण हालात बहुत ख़राब हैं। पापाजी ने फ़ोन पर अच्छी बातें बतायीं। उनका विश्वास दृढ़ है और परमात्मा के प्रति मन में असीम श्रद्धा है। वह आजकल आध्यात्मिक मस्ती में रहते हैं। ओशो की किताबें पढ़कर उन्हें बहुत आनंद मिलता है।

आज शाम वे पैदल ही सोमनहल्ली लेक तक गये। सूर्यास्त होने वाला था, जल में आकाश के रंगों का प्रतिबिंब बन रहा था। अनेक छोटे-बड़े श्वेत-श्याम व नीले रंग के पक्षी भी पानी में कलोल कर रहे थे। वापसी में चर्च के सामने से आये, वहाँ सांध्य प्रार्थना हो रही थी। एक विशाल मंदिर भी मार्ग में पड़ता है। दोपहर बाद ‘बेटी-बेटे’ फ़िल्म देखी, कितने सुंदर गीत हैं इसमें, सुनील दत्त का अभिनय भी अच्छा है। तीन भाई-बहन जो बचपन में एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं, कैसे बड़े होकर मिलते हैं ।आज जून बहुत खुश हैं, कल थोड़े से चुप थे। मन के मौसम का भी पता नहीं चलता, कब बदल जाएगा, इसलिए उसने मन के पार अपना ठिकाना खोज लिया है, जहाँ सदा बसंती  मौसम रहता है। सुबह उठते ही उसने नित्य की भाँति कुछ पंक्तियाँ लिखीं, जिन्हें बाद में टाइप किया।  


Monday, August 17, 2026

ब्रह्मकमल की कलियाँ

ब्रह्मकमल की कलियाँ

आज दिन भर मौसम ठंडा बना रहा। बीच-बीच में होने वाली वर्षा के कारण तापमान पच्चीस डिग्री से ऊपर गया ही नहीं।सितम्बर में ओबीए की मीटिंग के लिए उन्हें कोयंबटूर जाना है। जून ने लोगों से होटल की बुकिंग के लिए एडवांस लेना शुरू कर दिया है। कल वे नन्हे का जन्मदिन मनायेंगे। सोनू श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी, जून ने केक का ऑर्डर दे दिया है। उनके फ़्लैट में काम पूरा हो गया है, वे देखने गये थे। घर पूरी तरह साफ़ था, सभी कुछ ठीक था। अब उसमें रहने वाले लोगों का इंतज़ार है। किरायेदार आयेंगे या ख़रीदार, यह तो समय ही बतायेगा। कल दो लोग घर देखने आने वाले हैं। 

आज सुबह नाश्ते में जून ने दोसा बनाया। सोनू ने साँवा चावल के साथ अलसी के बीज भी ब्रेड में डाले थे। लंच में पालक का सूप, कॉर्न और सैंडविचेज खाकर वे सरजापुर रोड पर स्थित ‘अरुआनी ग्रिड’ गये। जो बहुत बड़े इलाक़े में फैला एक गो कार्टिंग स्थल है। नन्हे ने वहाँ रेस कार चलायी। बहुत तेज गति से दौड़ती हुई कारें रोमांच उत्पन्न कर रही थीं। सूर्यास्त का समय हो रहा था, जब वे वहाँ से निकले। वापसी में हस्कर झील पर रुके। इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास स्थित इस विशाल, शांत और सुंदर झील के किनारे बगीचे और भ्रमण पथ बने हैं; मानो यह एक पिकनिक स्थल हो।भविष्य में वे सभी फिर एक साथ वहाँ जाएँगे। नन्हे ने बताया जब उसकी कंपनी का आईपीओ आ जाएगा तब वह कुछ अन्य कार्य करने की सोच सकता है।उसे ‘एक जीवन एक कहानी’ का पिछला अंक पढ़कर अच्छा लगा। उन्होंने सोचा है, नन्हे के चालीसवें जन्मदिन पर वे सभी लक्ष्यद्वीप जाएँगे। पापाजी से बात हुई, उन्हें इस महीने का ‘नवनीत’ का अंक मिल गया है।उन्होंने गूगल से हुई बातचीत का विवरण बताया, नन्हे को आशीर्वाद भी दिया। उनकी बातें सुनकर बहुत आनंद होता है। आज सोनू ने उसे इंस्टाग्राम के बारे में कुछ जानकारी दी। 

आज उन्होंने ‘बहत्तर हूरें’ देख ली, दिल को छूती है यह फ़िल्म, इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं है, पर उस सोच के ख़िलाफ़ है, जो युवकों को दहशतगर्द बना रही है। शाम को नन्हे का फ़ोन आया था, वह खुश लग रहा था, अच्छी तरह से तैयार भी था। आज उन्होंने ‘तरला दलाल’ पर बनी एक फ़िल्म देखनी शुरू की है, अच्छी है। भारत की  होम शेफ़ और कुकिंग पुस्तकों की प्रसिद्ध लेखिका तरला दलाल की पहली पुस्तक उसने वर्षों पहले ख़रीदी थी, और कितनी ही स्वादिष्ट डिशेज़ उसे पढ़कर बनायी थीं। उनकी एक पुस्तक उसे उपहार में मिली थी, उसे फिर से खंगाला। नन्हे को भी अवश्य याद होगा, उसकी पसंद के ब्लैक फारेस्ट केक बनाना भी नूना ने उसी पुस्तक से सीखा था। उनकी संघर्ष भरी जीवनी पर आधारित है यह फ़िल्म।

आज सुबह व शाम को बहुत दिनों बाद ‘योग साधना’ में अद्भुत अनुभव हुए। उनके भीतर चिदाकाश है और अनेक रहस्य छिपे हैं। ‘यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे’ ! पर वे थमकर देखते ही कहाँ हैं ? आज जून ने शाम को स्वयं कहा कि वह उसे कार चलाने का अभ्यास करायेंगे। उन्हें अवश्य ही तरला फ़िल्म से प्रेरणा मिली होगी। उनके भीतर भी पत्नी को आगे बढ़ाने में योगदान देने के लिए तरला दलाल के पति नलिन दलाल पर गर्व हुआ होगा। 

कल की तरह आज भी वे ड्राइविंग के अभ्यास के लिए गये। आज कई दिनों बाद हारून ख़ालिद की पुस्तक ‘वॉकिंग विद नानक’ आगे पढ़ी। धर्म के नाम पर कितने सिखों और हिंदुओं को मुस्लिमों ने मारा, इसका ज़िक्र भी वह करते हैं। आज भी यह हिंसा कम नहीं हुई है। आज सुबह वे पब्लिक हेल्थ सेंटर भी गये थे।ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराना था। उसके लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र चाहिए। वहाँ पता चला, डाक्टर राधा मीटिंग में हैं, शाम तक मिलेंगी। वे वहाँ से फ़ोरम मॉल चले गये। नयी-नयी सब्ज़ियाँ मिल गयीं, शलजम, भिस, टिंडा और परवल, जो स्थानीय बाज़ार में नहीं मिलतीं। 

दीदी का फ़ोन आया। उत्तराखण्ड में कल उनके घर में बाढ़ का पानी भर गया था। विदेश से उनके दोनों पुत्र आये हुए हैं।सबने मिलकर पानी बाहर निकाला।पूरे उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति भयानक हो गई है। प्रधानमंत्री कल फ़्रांस जा रहे हैं , वहाँ पिछले दो हफ़्तों से हिंसा हो रही है। भारतीय सेना की टुकड़ियाँ फ़्रांस के राष्ट्रीय दिवस में भाग लेंगी। 

आज महीनों बाद दीर्घ सुदर्शन क्रिया की। इतवार को नाड़ी परीक्षा है। शुक्रवार से ‘हैप्पीनेस कोर्स’ भी होने वाला है। आज सुबह वे देर से उठे। एक बार उठने के बाद दुबारा सोने पर एक स्वप्न देखा। कितना विचित्र था वह स्वप्न, अनोखे फूल तथा जीवंत पंछी-पशु देखे। कैसे मन स्वयं ही सभी आकार ग्रहण कर लेता है स्वप्न में। 

आज वे असम में जून के अधिकारी रह चुके मित्र व उनके परिवार से मिलने गये। उन्होंने सदा की तरह स्वागत किया। गृह स्वामिनी ने दक्षिण भारतीय भोजन खिलाया। मूँगफली का लड्डू और गुड़ वाली काफ़ी भी स्वादिष्ट बनी थी। बाद में इस्तेमाल करने के लिए घर का बना इडली मिश्रण भी उसे दिया। वहाँ से वे कंपनी के एक स्वर्गीय वरिष्ठ अधिकारी की वृद्धा पत्नी से मिलने गये। उन्होंने अपने पुराने दिनों के अनेक किस्से सुनाये। मनीपाल व नारायण दोनों अस्पतालों में उनके पति का इलाज हुआ था। उन्हें काफ़ी प्रयत्न करना पड़ा था ताकि कंपनी से मिलने वाली सहायता प्राप्त कर सकें। अगले हफ़्ते से वह महाजोंग सिखाने वाली हैं। अपनी सोसाइटी में होने वाले कार्यक्रमों में भी वह भाग लेती हैं। वह नौवें दशक में हैं, पर इस उम्र में भी बहुत सक्रिय हैं।

पापाजी ने भी ओशो की किताब का कुछ भाग सुनाया।वह मानवों के मध्य होने वाले हर तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ थे, सारे संत होते हैं, जैसे गुरु नानक थे।अपने समय से बहुत आगे। हिंदू-मुस्लिम दोनों को आपसी भेदभाव भूलकर मेल-मिलाप से रहना सिखाते थे। ब्रह्म कमल में फिर से कलियाँ आयी हैं, शायद एक-दो दिन में खिलेंगीं।  


Tuesday, August 11, 2026

मडीवाला झील के किनारे

मडीवाला झील के किनारे

आज वे बहुत दिनों के बाद ‘गुरु पूजा’ में सम्मिलित हुए, बहुत अच्छा लगा। जैसा कि आर्ट ऑफ़ लिविंग में होता है, पहली बार मिलने पर भी सभी अपने परिवार की तरह मिले। एक बंगाली परिवार से मिलकर कुछ बातें कीं, उनका नन्हा पुत्र और सासुमाँ भी आयी थीं। कुछ अन्य बंगाली व हिन्दी भाषी परिवार भी थे।परसों शाम उनके यहाँ पूजा है, नन्हा व सोनू भी आयेंगे। पूजा के लिए आवश्यक सामान की लिस्ट उसे याद हो गई है। पाँच तरह के फल, नारियल, पान, सुपारी, एक नया रूमाल, थोड़े से अक्षत, अगरबत्ती आदि। लेकिन गुरु पूजा का अर्थ केवल गुरु का आभार प्रकट करना ही नहीं है, बल्कि उनकी उपस्थिति को महसूस करना है। प्रार्थना के क्षणों में कई बार उसने मानसिक गुरु पूजा की है, जहाँ कोई सामग्री नहीं होती, किंतु फिर भी सब कुछ होता है। वहाँ चरण भी वास्तविक होते हैं यदि भावना वास्तविक है; अंततः सभी कुछ तो वे मन के माध्यम से ही देखते हैं, जाग्रत हो या स्वप्न, मन ही सब कुछ दिखाता है। ध्यान में भी जो चित्र दिखते हैं, मन ही उनका सृजन करता है। आज भी ब्लॉग्स पर नई पोस्ट प्रकाशित की। पिछले कुछ महीनों में आँख के इलाज के कारण लेखन में जो ढीलापन आ गया था, अब वह दूर हो रहा है। लेखन का अभ्यास बना रहेगा तभी काम आगे बढ़ेगा। ‘बाल्मीकि रामायण’ में अभी तक अयोध्या कांड ही चल रहा है। जीवन रहते उसे इस कार्य को पूरा करना है। शाम को पापाजी से बात हुई, वह कुछ अकेलेपन का अनुभव कर रहे थे, ऐसा उन्होंने कहा, पर बातचीत में सामान्य दिखे। 

आज सुबह उठी तो नूना एक स्वप्न देख रही थी, विचित्र सा स्वप्न, फिर ध्यान किया तो समाधान मिला। आनन्दमय कोष के बारे में सुना, सुनते-सुनते ही मन ध्यानस्थ हो गया था। दोपहर को कुछ देर नवनीत पढ़ा।शाम को  भांजे ने उन्हें भोजन के लिए बुलाया था। वहाँ उसकी नव विवाहिता पत्नी की छोटी बहन व माँ भी आ गयीं; उसके चचेरा भाई भी,  जो इसी शहर में नौकरी करता है। नन्हा व सोनू भी कुछ देर के लिए आये। ढोकला व गोलगप्पे खाकर वे चले गये। सोनू की मौसेरी बहन ने उन्हें डिनर के लिए बुला रखा था। सभी ने अपने अपने कार्य तथा शौक़ के बारे में बताया। चाहे वे कई दिन बाद मिलें पर मिलने पर कोई न कोई पुराना सिरा हाथ में आ जाता है और लगने लगता है, जैसे कल ही मिले थे। बच्चों से मिलकर एक ऊर्जा का अहसास तो होता ही है, उनकी नयी गृहस्थी देखकर उसे अपना अतीत भी एक पल के लिए याद आ गया था। 

आज सुबह से मन भक्ति रस में सराबोर था। नन्हा व सोनू ग्यारह बजे आ गये थे। शाम को घर का वातावरण संगीतमय हो गया था। नन्हे और सोनू ने चने, पूरी व रायता बनाया, एक परिचिता सूजी का हलवा बनाकर लायी थीं। पूजा करने के लिए आश्रम से एक शिक्षक आये थे, उनके साथ एक असमिया सत्संगी भी, जिनकी छोटी सी बेटी ने कई अच्छे-अच्छे भजन गाये। उनका मित्र परिवार भी आया था, पहली बार उनके नाती को देखा। गुरु पूजा के बाद हुए भजन गायन के बाद सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। कल दोपहर को फिर एक विला में गुरु पूजा का आयोजन है। वे जाएँगे, कुछ और लोगों से परिचय बढ़ेगा। 

दोपहर को वे उनकी लेन में में एक शिक्षक के यहाँ गुरु पूजा में गये। गुरु पूर्णिमा पर मन-प्राण बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं। एक युवा साधिका से मिले, जिसने गुरु पूर्णिमा से पूर्व एक निश्चित संख्या में इन पूजाओं के आयोजन की ज़िम्मेदारी उठायी थी। उसी की प्रेरणा से यह काम हुआ है, गुरुजी ने उसे यह काम सौंपा है। शाम को आश्रम में भी गुरु पूजा उत्सव में शामिल होने का अवसर मिला। वर्षा के बावजूद अनेक लोग आये थे। एक सौ आठ शिक्षकों ने एक साथ पूजा में भाग लिया। उसके बाद वहीं प्रसाद ग्रहण किया। अन्नपूर्णा में आज विशेष भोजन बना था। पापाजी से बात हुई, छोटी भाभी लौट आयी है। उन्होंने ओशो द्वारा दिये प्रवचन ‘मौन की महत्ता’ के आधार पर कुछ बातें बतायीं। उनके अनुसार जैसे-जैसे भीतर का मौन बढ़ता जाता है, अहंकार व भय गिरने लगता है। सृजनात्मकता बढ़ती है और नयी संभावनाएँ पता चलती हैं। गुरु के शब्दों का काम भीतर के मौन को जगाना ही तो है। 

आज सुबह वे नन्हे यहाँ गये थे, उसके गेस्ट रूम  के लिए गीज़र पहुँचाना था। नन्हे ने मिलेट दोसा मँगवाया उनके नाश्ते के लिए, उनका रसोइया थोड़ा देर से आता है। वहाँ से वे बीटीएम स्थित मडीवाला झील तक गये, जो बैंगलुरु की बड़ी झीलों में से एक है। हवा ठंडी थी, सुबह की सैर के लिए अनेक लोग आये हुए थे। वे कुछ देर उसके किनारे टहलते रहे, पक्षियों की उड़ान भली लग रही थी, जो झील में स्थित एक द्वीप से उड़ते थे। उसके बाद बैंक का काम करना था। जून का हर कार्य योजना बद्ध तरीक़े से होता है, सुबह जल्दी निकलने के पीछे कारण था, ट्रैफ़िक नहीं मिलेगा, और क्योंकि सुबह टहलना नहीं हो पाया था, सो बैंक खुलने की प्रतीक्षा में वह काम भी हो गया। उन्होंने पड़ोसी की सहायता से, जो सीए हैं, इस बार का टैक्स भी जमा कर दिया है। शाम को फलों वाले बगीचे में कुछ तस्वीरें उतारीं, करौंदे के पेड़ लाल फलों से भर गये हैं, बहुत सुंदर लग रहे थे। दशकों पूर्व बचपन में सीतापुर में इसका पेड़ देखा था, तब के बाद यहीं आकर उसने करौंदे देखे हैं।  

आज दोपहर उसने छोटी बहन को फ़ोन किया तो वह क्लिनिक से घर आकर विश्राम कर रही थी।बड़ी भांजी ने फ़ोन उठाया। उससे बहुत सी बातें हुईं। वह अगले हफ़्ते  आस्ट्रेलिया जा रही है। कुछ महीनों में उसे कनाडा का पासपोर्ट मिल जाएगा। नूना को आश्चर्य होता है, कि कोई भारतीय कैसे अपना देश छोड़कर बाहर की नागरिकता ले लेता है। शायद उनके पास दोनों देशों की नागरिकता होती हो। आज सुबह वह उठी एक स्वप्न की याद बनी हुई थी, नन्हे को लेकर एक स्वप्न देखा था, लगा, जैसे वह कुछ उदास है। पर सब ठीक होगा, मन की तो आदत ही है तिल का ताड़ बनाने की।


Thursday, August 6, 2026

‘विचार चंद्रोदय’


विचार चंद्रोदय


आज सुबह गुरूमाँ को सुना, कितना अच्छा बोलती हैं। पंडित पीतांबर जी द्वारा लिखे गये अद्वैत वेदान्त के ग्रंथ ‘विचार चंद्रोदय’ पर उनकी व्याख्या अनुपम है। इस पुस्तक में वेदान्त का शुद्ध ज्ञान सरल ढंग से समझाया गया है। जगत की सत्यता, मैं कौन हूँ, पाँच कोष, तीन ताप, कर्म सिद्धांत और मुक्ति का स्वरूप सभी कुछ प्रश्न-उत्तर शैली में समझाया गया है।अभी कुछ देर पहले उसने गुरुजी से जुड़ा एओएल का एक अनुवाद कार्य किया।अमेरिका के एलेघेनी शहर ने २२ जून को ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित करके गुरुजी को सम्मानित किया है। अमेरिका की आठ यूनिवर्सिटीज़ में श्री श्री योग और सुदर्शन क्रिया सिखाई जाती है। दशकों से गुरुदेव पूरे विश्व में विभिन्न समुदायों के मध्य आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं। मोदीजी भी अमेरिका में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं, पर सारा विपक्ष उनके कामों का पूरी तरह से विरोध कर रहा है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने भी मोदीजी की तारीफ़ की, पर विपक्ष को और मज़बूत होना चाहिए, ऐसा भी कहा। कल रात उन्होंने बिना एसी के सोने का प्रयास किया पर आधी रात को ही चलाना पड़ा। सड़क पर लगे बल्ब की, खिड़की से आती रोशनी आँखों को चुभ रही थी।खिड़की बंद करने या पर्दा लगाने से हवा नहीं आती, सो बिना एसी के सोना अब सर्दियों में ही संभव होगा। 

दिन भर मौसम बदली वाला बना रहा, शाम को बादल कुछ देर को बरस भी गये। रात्रि भ्रमण के लिए गये तो सड़कें गीली थीं और ख़ाली भी। सन्नाटा पसरा था जैसे सर्दियों की कोई शाम हो और लोग घरों में दुबक गये हों। आज उन्होंने देवानंद-नूतन की एक पुरानी फ़िल्म देखी, ‘बारिश’। उस समय के नायक में वीरोचित और नैतिक गुण होते थे। पुलिस भी कार्य में दक्ष और ईमानदार थी। अब न नायक वैसे हैं न पुलिस। समय के साथ समाज में विकृतियाँ बढ़ने लगती हैं।लेकिन कई मामलों में चतुर्मुखी विकास भी हुआ है बल्कि अनेक मामलों में चीजें बेहतर हुई हैं। 

आज सुबह पौधों के साथ बितायी। हरे-भरे पौधे और लॉन में हज़ारों हरसिंगार के फूल, बरसात के मौसम में चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है। इतवार है आज, नन्हा और सोनू आये। पिछले दिनों सोनू ने बहत सारे केक बनाये, काफ़ी थक गई है, लेकिन बहुत खुश है। अभी भी उसके पास केक के ऑर्डर हैं, मंगल को देने हैं।हरेक को अपने काम के अलावा एक न एक शौक़ रखना ही चाहिए। ऐसा शौक़ जिसे पूरा करने से ही ख़ुशी मिलती हो, जिसका कोई फल उसे नहीं चाहिए। फल तो मिलेगा ही पर फल की आशा में वह कार्य न किया गया हो। सोनू कह रही है, अगले हफ़्ते वह श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी। 

आज महीनों बाद उसने हर ब्लॉग पर एक-एक पोस्ट प्रकाशित की। अब यही प्रयास रहेगा कि नियमित रूप से लेखन कार्य चलता रहे। यदि मन में किसी काम को करने का इरादा हो तो समय निकल ही आता है। मौसम आजकल अच्छा है, पर इस वर्ष वर्षा अपेक्षाकृत कम हो रही है।आकाश बादलों से घिरा रहता है, हवा भी चलती है, पर बूँदें बरसती नहीं हैं। कुछ देर पहले छोटी ननद की सखी, एक पूर्व परिचिता का फ़ोन आया, वह परसों अपनी एक सखी के साथ उनके घर आ रही हैं। दोनों आश्रम जाना चाहती हैं। वे उन्हें आश्रम तो ले ही जाएँगे, हो सका तो इस्कॉन मंदिर भी ले जाएँगे। जून ने कहा है, अंत में घर भी छोड़ देंगे। 

कल छोटी बहन का फ़ोन आया। आज उसे अपने क्लिनिक में गुरु पूजा करवानी थी।भांजी अपने मित्र को घर लायी है, उन दोनों ने मिलकर भोजन बनाया, पर अभी तक भविष्य के बार में कोई विचार नहीं किया है।आज पाकिस्तानी लेखक हारून ख़ालिद की लिखी पुस्तक “वॉकिंग विद  नानक” आ गई है। उसने पढ़नी शुरू कर दी है, अच्छी लग रही  है। गुरु नानकदेव की माँ तृप्ता आज से पाँच सौ वर्ष पहले भी कितनी निर्भीक थी और कितने स्वतंत्र विचारों की महिला थी।गुरु नानक के जीवन के कितने अनजाने पहलू जानने को मिल रहे हैं। पुस्तक में इतिहास, यात्रा वृत्तांत और अध्यात्म सभी का मिश्रण है।लेखक ने इक़बाल कैसर के साथ घूमकर पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों के बारे में सही जानकारी पाने की कोशिश की है। 

आज सुबह वे निकट की एक झील पर जाने के लिए निकले तो पड़ोसी भी उसी वक्त प्रातः भ्रमण के लिए निकल रहे थे, उनसे पूछा तो वह भी साथ चलने के लिए तैयार हो गये। उन्होंने इतने वर्षों में आसपास की कोई झील कभी नहीं देखी थी। कुछ तस्वीरें उतारीं। आज की पुरानी फ़िल्म में आशा पारिख थी, वह आँखों से कितना कुछ कह जाती है। नन्हे ने आज काँच के दो बड़े गिलास और छह गिलासों का एक सेट भेजा है। जून ने उसके लिए ‘नागराज’ कॉमिक के आठ अंक मँगवाये हैं। बचपन में वह इन्हें पढ़ता था। अगले महीने उसका जन्मदिन है। उन्होंने बिना पॉलिश की हुई दालें भी मँगवायी हैं, यकीनन उनका स्वाद अच्छा होगा। आज उनके फ़्लैट का काम पूरा हो गया। अगले महीने से किराए पर चढ़ सकता है। 

आज दोपहर वे दोनों महिलाएँ आ गई थीं। उत्साह से भरी और छोटी लड़कियों की तरह बात-बात पर खिलखिलाने वालीं। दोनों आपस में पुरानी मित्र हैं।नूना और जून ने चार-पाँच घंटे उनके साथ बिताये। दक्षिण भारतीय अल्पाहार के बाद शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये। आश्रम के अनेक मुख्य स्थल दिखाये, राधा कुंज के निकट कई तस्वीरें उतारीं। विशालाक्षी मंडप में भजन संध्या में सम्मिलित हुए।अन्नपूर्णा में प्रसाद ग्रहण किया। उनके घर छोड़ने गये तब काफ़ी देर हो गई थी, वापसी में वे नन्हे के यहाँ ही सो गये। सुबह की चाय के बाद घर लौट आये। रात को सोते समय भी उसके भीतर जैसे भीतर एक जागरण बना हुआ था, पर बाहर का कुछ बोध नहीं हो रहा था। नींद कुछ बदल सी गई है। कभी-कभी आँख बंद करने पर कुछ रूप दिखायी पड़ते हैं। 

आज पापाजी से बात हुई, आजकल वह अकेले रह रहे हैं। पढ़ने से उनकी आँख में दर्द होता है, पर वे पढ़ना छोड़ते नहीं। कहते हैं, किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, और अख़बार से समाज व देश की आम जानकारी होती है।आज उसने श्रावण में होने वाली रुद्र पूजा के बारे में एक आलेख का अनुवाद किया।भगवान शिव सबसे शक्तिशाली और कल्याणकारी रूपों में से एक भगवान रुद्र के लिए की जाने वाली एक सुंदर पूजा ! रुद्र का अर्थ है,  जो सभी दुखों का नाश करते हैं ! मन के भीतर एक जागरण बना रहे, वे बेहोशी में कोई कार्य न करें, सारी पूजाएँ और कर्मकांड इसी बात को सिखाने के लिए ही तो किए जाते हैं। जीवन में सजगता के साथ  पवित्रता भी बढ़े, जब किसी वस्तु को पावन कहकर देखते हैं, तो उसके प्रति हाव-भाव कितना बदल जाता है। उनकी नींद भी पावन हो और जागरण भी !  इस रविवार को उनके यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।अभी से उसके मन में उत्साह भर गया है। पिछले वर्ष भी उन्होंने एक बार गुरु पूजा का आयोजन किया था। असम में तो हर वर्ष एक बार करवाते थे, उनके पड़ोसी, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक थे, वही किया करते थे। कल उनकी गली में भी एक शिक्षक के यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।जिसमें वे जाने वाले हैं।