आज शाम को वे दायीं तरफ़ के पड़ोसी के यहाँ गये, उनका गोलू देखने, विभिन्न देवी-देवताओं और सामान्य जनों की भी बहुत सारी मूर्तियाँ सजायी हैं उन्होंने।अभी घर में काम चल रहा है, पूरा होने में दो-तीन महीने और लगेंगे। सुबह भांजा आ गया था, दोपहर तक नन्हा व सोनू भी मौसेरी बहन के साथ आ गये थे, जिसने प्रोक्रिएट पर सुंदर पेटिंग बनायी, वह एक कलाकारा है। आज नूना का स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। आश्रम में नवरात्रि का उत्सव मनाया जा रहा है, वे एक बार ही जा पाये हैं।
आज भी स्वास्थ्य कुछ विशेष अच्छा नहीं पर इस समय मन उत्साहित है, वे कई दिनों बाद दूर तक घूमने गये।परसों उन्हें यात्रा पर निकलना है; आज पैकिंग की। महर्षि अरविंद पर एक वृत्त चित्र देखा। यह केंद्र शासित प्रदेश कभी एक फ़्रेंच कालोनी हुआ करता था। इसका इतिहास बहुत पुराना है। पांडिचेरी में उनके आश्रम में जाना एक अद्भुत अनुभव होगा। उसने ‘सावित्री’ की कहानी भी सुनी तथा महर्षि अरविंद द्वारा उसका रूपक बनाकर लिखे गये महाकाव्य सावित्री के बारे में भी सुना। वहाँ जाकर कुछ किताबें भी मिलेंगी।
आज सुबह आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम से फ़ोन आया था, वे उसी समय मीडिया के एक कार्यक्रम में बुला रहे थे।पहले से कोई सूचना नहीं दी थी सो जाना नहीं हो पाया।गुरुजी की एक वार्ता के आधार पर उसे दिवाली पर एक आलेख लिखना है।शाम को पापाजी से बात हुई। पता चला, छोटा भाई छत्तीस गढ़ जाने वाला है।
वे यात्रा से लौट आये हैं, पांडिचेरी में बिताये पाँच दिन एक सुखद याद बनकर मन के किसी कोने में सुरक्षित हो गये हैं। उन्हें एरोविल में जगह नहीं मिली, उससे कुछ दूरी पर एक नये बने होटल में रुके। दिन भर आश्रम में ही रहते थे। नन्हा व सोनू अपने कमरे में रहकर काम में व्यस्त रहते थे। एक सुबह समुद्र तट व एक शाम बाज़ार घूमने गये। फ़्रेंच कालोनी भी देखी। दाँत का टाँका काट दिया गया है।
आज स्वास्थ्य ठीक है। सुबह का भ्रमण भी हुआ और दोपहर व संध्या का ध्यान भी जिससे ऊर्जा मिलती है। शाम को जाप में गई।अरविंद आश्रम में जाने के बाद से भीतर श्रद्धा का द्वार जैसे खुल गया है। श्रीमाँ और श्री अरविंद का जीवन कितना अनोखा था।उनके आश्रम के बारे में कुछ और सुना। श्री अरविंद के मन में भारत के लिए, उसकी संस्कृति के लिए तथा ईश्वर के लिए अगाध प्रेम था।देशभक्ति को वह परमात्मा की सेवा से जोड़ते थे।राष्ट्र के प्रति उनका प्रेम परमात्मा के प्रति प्रेम जितना ही पावन था।
आज उज्जैन में महाकाल मंदिर का उद्घाटन हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदीजी का भारत के सांस्कृतिक उत्थान, इतिहास और चेतना पर दिया गया ओजस्वी भाषण सुनने योग्य है।वह कह रहे हैं, ‘यहाँ की वास्तुकला उज्जैन के प्राचीन गौरव का बखान कर रही है।शिव ही ज्ञान है और शिव के दर्शन में ब्रह्मांड का दर्शन है। भारत का यह सांस्कृतिक दर्शन, शिखर पर पहुँच कर विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। भगवान शिव अनेक रूपों में भारत व जगत के हित में लगे हैं। उज्जैन भारत का भौगोलिक केंद्र बिंदु भी माना जाता है।नन्हे ने नया एयर फ़्रायर भेजा है, पुराना वह अपने कुक को देने वाला है।आज छोटी ननद के विवाह की तीसवीं वर्षगाँठ है, उसने कविता भेजी है।
आज सुबह एक पुरानी ‘कविता’ को सँवारा। सुबह वे उठे तो बदल बरस रहे थे, दोपहर बाद फिर से पानी बरसने लगा। कार्तिक आ गया है, पर लगता है जैसे सावन गया ही नहीं। आज नासिका के अग्र भाग पर कैसी ख़ुशबू आ रही है, जैसे कोई मिष्ठान बना रहा हो, सूजी का हलवा! पता नहीं यह कहाँ से आ रही है। अस्तित्त्व की कृपा भी हो सकती है, या श्रीमाँ, गुरुजी और ईश्वर की। दिल में एओएल का अनुवाद कार्य किया, हिंदी पढ़ायी और शाम को पापाजी से बात की। वह बहुत आशावादी और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित हैं।उन्होंने परमात्मा के प्रति भक्ति के बारे में अपने तथा ओशी के विचार बताये। नूना ने उन्हें मोदी जी के पुतिन को दिये उस संदेश के बारे में बताया, जो अहिंसा के बारे में है।
आज भी दिन भर वर्षा होती रही। सुबह वे देर से टहलने गये, वातावरण धुला-धुला था, हवा बहुत हल्की और ताजी थी।जून आज जल्दी सो गये हैं, वह दिन में कुछ परेशान से ही रहे, नूना को ज्ञात है, और यह उसका ख़ुद का अनुभव है, मन और देह से ऊपर न उठने पर ऐसा ही होता है, इससे अन्यथा कुछ हो ही नहीं सकता। देह को कुछ न कुछ तो लगा ही रहता है, ऊपर से मन अपनी चलाने लगता है।नन्हा और सोनू एक मित्र के यहाँ पार्टी में गये हैं, कल आयेंगे, सोनू का जन्मदिन मनाने।
आज नन्हा व सोनू आये। लंच के बाद वे सब कार लेकर निकले तो दोनों ने कहा, उसे भी कार चलानी चाहिए। असम से आने के बाद पहली बार कार चलायी, अच्छा लगा, ईवी चलाना आसान है।वापस आकर एयर फ्रायर में केक बनाया। सभी भाइयों को ऑनलाइन टीका भेजा। दीवाली की तैयारी धीरे-धीरे चल रही है। एक कविता लिखी, कैनवा पर कार्ड बनाया। नन्हा और सोनू शनिवार को आ जाएँगे, रविवार को दिवाली की पार्टी रखने का विचार है।
आज सुबह जून दिवाली पर देने के लिए मोमबत्ती, दिये, मिठाई आदि लाये।वह घर की सफ़ाई में व्यस्त है।कल रात तेज गर्जन के साथ वर्षा हुई, सुबह उठे तब भी जारी थी।आज दोपहर उत्तराखंड के एक स्थान ‘सारी गाँव’ की एक रोमांचक यात्रा का वीडियो देखा। जहां पंद्रह हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर धान की खेती होती है। वहाँ कई घरों में पीढ़ियों से आते हुए कुछ प्राचीन अनोखे हथियार भी रखे हुए हैं।
आज शाम वे टहल कर घर पहुँचे ही थे कि तेज बारिश शुरू हो गई।इस समय तारे निकल आये हैं।मौसम की यह लुकाछिपी रोज़ का ही ढंग हो गयी है। कार्तिक के महीने में अमूमन आकाश स्वच्छ होता है, पर इस वर्ष जैसे अभी तक सावन-भादों चल रहा है। अभी-अभी नन्हे से बात हुई, वे अपने पुराने पड़ोसी की बेटी के पहले जन्मदिन की पार्टी में गये हुए हैं। जून ने रंगोली के रंग मँगवाये हैं, कल फूल भी आ जाएँगे। शाम को गुरुजी का सत्संग सुना, जब असम में थे तो वह सोचती थी, रोज़ ही आश्रम जाएँगे, पर इतने ट्रैफ़िक में रोज़-रोज़ कार चलाना और पार्किंग करना इस उम्र में इतना सरल नहीं है।

