प्रकाश- एक ऊर्जा
आज वे ‘रॉकेट्री-द नांबी इफ़ेक्ट’ देखने गये थे। नन्हे ने पीवीआर में टिकट बुक कर दी थी। रिक्लाइनर पर बैठकर आराम से फ़िल्म देखी।बहुत पहले सोनू अपनी एक सखी के साथ देखकर आयी थी, उसी ने देखने के लिए कहा था। नांबी नारायणन इसरो के एक वैज्ञानिक थे, जिन पर १९९४ में झूठा आरोप लगाया गया था। दो साल बाद केस वापस ले लिया गया पर उन्होंने अपने पर लगाये झूठे आरोपों के ख़िलाफ़ केस कर दिया और वर्षों बाद जाकर उन्हें न्याय मिला, क्षतिपूर्ति भी मिली। सभी भाइयों को राखी भेज दी है, मँझला भाई कनाडा में है, उसे कविता और शुभकामनाएँ भेजी हैं। शाम को वह पार्क नंबर ५ गई, गाँव के स्कूल के बच्चों की स्लाइड के लिए पैसे एकत्र किए, चार महिलाएँ आयी थीं।
छोटी बहन के लिए जन्मदिन की जो कविता उसने भेजी थी, उसे अच्छी लगी। ब्लॉग में ‘सत्य’ कविता प्रकाशित की, सत्य की राह पर चलना कितना सुखद होता है। सुबह बगीचे से करौंदे लाए थे, उसे धो-पोंछ और काटकर आम के अचार के बचे तेल में ही डाल दिये हैं जून ने।
कल रात तेज वर्षा हुई, बिजली चली गई। सुबह दस बजे नन्हा सोनू और उसकी मॉम को एयरपोर्ट छोड़कर आया तो उसने बताया, कल रात वे लोग बाहर खाना खाने गये थे; सड़क पर पानी भर गया था, उन्हें घर लौटने में काफ़ी देर हुई। आज बायीं तरफ़ के पड़ोसी के यहाँ बहुत शोर हो रहा था। शायद कोई पार्टी चल रही थी, उन्हें सारे खिड़की और दरवाज़े बंद करने पड़े। अभी कुछ देर पहले नापा की आर्ट ऑफ़ लिविंग की एक टीचर ने फ़ोन किया। वह डीएसएन कोर्स करने के लिए कह रही हैं, यदि जून यह कोर्स नहीं करते हैं तो उनके साथ ही आश्रम जा सकती है । पापाजी को नूना की आज की कविता पढ़कर लगा, वह अभी बहुत कुछ मात्र शब्दों के द्वारा ही कह रही है। अध्यात्म के पथ पर हर कोई अपने दिल का हाल बस ख़ुद ही जान सकता है।
कल शाम को शिक्षिका का फ़ोन आया और उनके कहने पर नूना ने आर्ट ऑफ़ लिविंग के ‘दिव्य समाज का निर्माण’ कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन कर लिया है। जून थोड़ा सा नाराज़ हैं पर जल्दी ही ठीक हो जायेंगे। आज सुबह से उसके सिर में हल्का दर्द था, जून ने तेल लगा दिया। छोटी बहन से बात हुई, वह चित्र बना रही थी, जन्मदिन अच्छा रहा, कुछ खट्टी-मीठी यादें दे गया। आज की कविता पापाजी को अच्छी लगी। उन्हें राखी भी मिल गई है। ‘इचिगो इची’ पुस्तक आगे पढ़ी। कुछ शब्द उतरने लगे-
एक बार ही आता हर पल
गुजर गया तो, गया हाथ से
बार-बार नहीं घटता इक पल
रोज़ रोज़ नहीं सच्चे होते
सपने दिल के
रोज रोज नहीं रस्ते मिलते
मंज़िल के
गुजर गया पल, था सपना
जो आएगा, अभी नहीं अपना
केवल यह पल हाथ लगा
इसमें जागे तो भाग्य जगा
नई बात हो नया मार्ग हो
नव पथ का निर्माण करें
नये द्वार खुलते जाते हैं
ख़ुद में जब थम कर बैठें
सजग रहें काल द्रष्टा बन
उत्सव हर क्षण बन जाएगा
निज कर्म अपने हाथों में
भाग्य स्वयं सँवर गाएगा।
कल रात फिर एक बार बिजली चली गई। एक बार नींद खुल जाने के बाद जून को जल्दी दुबारा नींद नहीं आती। सुबह नाश्ते के बाद नूना ने एक कविता लिखकर पोस्ट की, फिर अनुवाद कार्य किया, फिर भांजे और भतीजी के लिए जन्मदिन की कविताएँ लिखीं।सोनू का फ़ोन आया, भाई के विवाह की तैयारियाँ चल रही हैं, दोनों नन्दों से बात हुई, वहाँ भी विवाह योग्य बच्चों के विवाह की तैयारी हो रही हैं। आज एक मुस्लिम कलाकारा के भजन सुने, बहुत अच्छा गाती है। कला की कोई सीमा नहीं होती ऐसे ही कलाकार की भी। जून आज कल से भी ज़्यादा खुश लगे पर अभी भी पूरी तरह से सहज नहीं हुए हैं। उनका प्रेम शर्तिया है। आत्मा में गये बिना बेशर्त प्रेम कोई कर भी कैसे सकता है ?
आज दिन भर वर्षा होती रही। रात्रि भ्रमण के लिए निकले तब थम गई थी। सब तरफ़ भीगा-भीगा सा आलम था, सड़कें चमक रही थीं। नन्हा अकेला है पर इतना व्यस्त रहता है, फ़ोन करने का समय नहीं मिलता।आज से नूना ने ‘बौद्ध दर्शन प्रस्थान’ पढ़ना आरंभ किया है। नन्हे के एक तिब्बती मित्र ने भिजवाई थी यह पुस्तक। जून अब सहज स्वभाव में आ गये हैं। नाराज़ रहने का भी स्वभाव बन जाता है, जैसे किसी को प्रसन्न रहने की आदत हो जाती है।आज स्वतंत्रता दिवस पर एक नयी रचना लिखी, कल जन्माष्टमी पर लिखेगी।
कल ही उसने याद किया और आज नन्हे का फ़ोन आया, अगले साल उनका ऑफिस शायद इलेक्ट्रॉनिक सिटी में शिफ्ट हो सकता है। छोटी ननद ने होने वाली बहू की तस्वीर भेजी है, बहुत सुंदर है।गुरुजी का ‘रुद्रम’ पर तीन दिनों का एक कार्यक्रम आने वाला है। शाम को वह दायीं तरफ़ के पड़ोसी के यहाँ गई, वरलक्ष्मी की पूजा थी। आज के अनुवाद कार्य में गुरुजी द्वारा रक्षा बंधन का वास्तविक अर्थ समझाया गया था।
आज वर्षा के बावजूद वे तीनों बार टहलने जा पाये, बहुत दिनों बाद फ़िटबिट अठारह हज़ार कदम दिखा रहा है। आज भारत के नये उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ चुने गये हैं। मार्ग्रेट अल्वा को हार मिली। भारत कॉमन वेल्थ गेम्स में पाँचवें स्थान पर आ गया है, नौ स्वर्ण पदक जीते हैं। पापाजी को आज की कविता अच्छी लगी, दिल से निकली बात दिल तक जाती है। जून के जन्मदिन की कविता आज ही लिख दी है।आज भी गुरुजी को टीवी पर देखा, सुना।यदि कल मौसम अच्छा रहा तो वे आश्रम जाएँगे, वैसे आश्रम जाने के लिए जून को अब पहले जैसा उत्साह नहीं रहा है।
आज कृष्ण पर कविता लिखी। वर्ष के अंत में उन्हें गुजरात व असम में होने वाले दो विवाहों में सम्मिलित होने जाना है, जून ने टिकट बुक कर दी हैं।छोटी बहन ने ज़ूम पर बेसिक कोर्स के लिए एक मीटिंग में उसे भी बुलाया था, आयोजनअच्छा रहा।आज दोपहर को वाकिंग मैडिटेशन किया।आज भी आश्रम से प्रसारित होने वाला कार्यक्रम देखा, कोल्हापुर से आये एक कलाकार ने तलवार चलाने की अद्भुत कला का प्रदर्शन किया।
आज लगभग पाँच सप्ताह बाद वे आश्रम गये। हवा ठंडी थी, आकाश पर काले बादल थे और चौदहवीं का चंद्रमा झाँक रहा था। गुरुजी ने सदा की तरह प्रश्नों के सटीक उत्तर दिये।गायकों ने सुमधुर भजन गये, भीड़ बहुत थी, अधिकतर लोग बंगाल से आये थे। आज सुबह उसे प्रकाश के बारे में जानने की उत्सुकता जगी तो कुछ जानकारी हासिल की। कितना विचित्र है सब कुछ इस सृष्टि में ! यह एक प्रकार की ऊर्जा है जिसके कारण वस्तुएँ दिखती हैं। यह तरंग भी है और कण भी, फ़ोटान इसका मूल कण है। प्रकाश का रंग इसकी आवृत्ति पर निर्भर करता है। लाल रंग की आवृत्ति सबसे अधिक होती है।सुबह भानु दीदी का रक्षाबंधन पर एक साक्षात्कार सुना और दोपहर बाद ‘लॉक एंड की’ का एक अंक देखा। जादुई चाबियों वाला यह धारावाहिक बच्चों ने देखने को कहा था।