Thursday, May 7, 2026

ग्रहों का प्रभाव



कल नन्हे का जन्मदिन था। दोपहर को साढ़े बजे वे लोग आये। सामूहिक लंच लाजवाब था। सोनू की मौसी भी आयी थीं।आज जीजा जी का पचहत्तरवाँ जन्मदिन है।दीदी व सभी बच्चों ने मिलकर शानदार उत्सव मनाया, कुछ देर पहले उनके वीडियो देखे। उन्हें जून के भेजे गुलाब मिल गये हैं। ईश्वर उन्हें दीर्घायु प्रदान करे।आज उसने गुरु पूर्णिमा पर लिखे एक लेख का हिन्दी में अनुवाद किया।पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सलाहकार सुधांशु त्रिवेदी को सुना। भारतीय संस्कृति के बारे में बहुत जानकारी है उन्हें।


आज गुरु पूर्णिमा है। गुरुजी द्वारा ‘स्पंद कारिका’ पर दी जाने वाली प्रवचन माला आज से शुरू हो रही है।उन्होंने बताया, स्पंदन एक दिव्य चेतन ऊर्जा है। यह ऊर्जा महसूस कर सकती है।ईश्वर उन्हें उनसे अधिक जानता है। जो इस सृष्टि का आधार है, उस शिव को महसूस किया जा सकता है। आत्मा बिना इंद्रियों के देख सकती है, सुन सकती है, छू सकती है। ये सभी शक्तियाँ निर्विशेष आत्मा में हैं।मन के भीतर जो विचार आते हैं, वे वहीं से आते हैं। जब विशेष ऊर्जा उस निर्विशेष ऊर्जा में समा जाती है, तो केवल वही शेष रहती है।यह चेतना सभी शक्तियों को धारण करती है। विषयों की स्मृति से इच्छाएँ उत्पन्न होती हैं। इच्छाएँ भविष्य की ओर ले जाती हैं।जब कोई वर्तमान में होता है, तब अपने सच्चे स्वभाव के निकट होता है। जब जाग्रत व स्वप्न अवस्था में इच्छायें जगती हैं, तो व्यक्ति चेतना से दूर चला जाता है। हर इच्छा पूर्ण होने के बाद उसे वहीं लाकर छोड़ देती है। इच्छा सीमित की हो सकती है। 


‘स्पंद कारिका’ का अगला सत्र आरंभ हो गया है। गुरु जी कह रहे हैं, स्वभाव में टिकना ही साधना का लक्ष्य है। नम्रता व सरलता आत्मा के स्वाभाविक गुण हैं।साधक को सबके साथ एकत्व का अनुभव करना है। जैसे तेल के साथ पानी नहीं मिलता, पर दूध के साथ पानी मिल जाता है; बच्चों के साथ सरलता से जुड़ा जा सकता है पर बड़े अपने चारों ओर एक दीवार खड़ी कर लेते हैं।जब कोई ध्यान की गहराई में जाता है, उसे रिक्तता का अनुभव होता है। जब इच्छा का त्याग करता है तब क्षणिक शून्यता का अनुभव होता है, लेकिन उसके बाद आनंद मिलता है। जब कोई सामान्य चेतना के साथ एक हो जाता है, भीतर आनंद का अनुभव होता है। इस अवस्था में कोई अभाव नहीं रहता। समाधि कोई नीरस अवस्था नहीं है। वहाँ जाकर ज्ञात होता है अज्ञान जैसा कुछ भी नहीं है। शून्य से पहले ध्वनि का निर्माण हुआ फिर सृष्टि का।अंतिम स्वतंत्रता का अनुभव तभी होता है, जब कोई ज्ञान का सम्मान करता है, तब वह सजग और सरल हो जाता है।निर्दोष चेतना ही शिव है। 


आज शाम को वे कुछ ही दूरी पर स्थित ‘प्रकृति फार्म’ देखने गये। प्राकृतिक खेती के साथ यह की एक विशेषता है पालतू जानवरों को रखने की सुविधा, हरियाली से भरा हुआ यहाँ का वातावरण लोगों को सप्ताहांत बिताने के लिए आकर्षित करता है।दोपहर को नूना ने एओएल का अनुवाद कार्य किया। इस समय गुरुजी ‘स्पंद कारिका’ पर आगे बोल रहे हैं। प्रकृति प्रेममयी है।सर्दी का अनुभव तभी होता है, जब गर्मी का अनुभव कर चुके हैं। सर्दियों में वृक्ष पत्ते गिरा देते हैं, ताकि धूप का आनंद ले सकें, गर्मियों में धर लेते हैं ताकि तेज धूप से बचे रहें।विरोधी भावनाएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। एक ही चेतना अनेक रूपों में प्रकट हो रही है। 


आज नन्हा व सोनू अकेले ही आये थे। इतवार की सुबह माली से बगीचे में काम कराते हुए बीती।दोपहर को लंच नन्हे और सोनू ने मिलकर बनाया। शाम की चाय के बाद वे चले गये। आज के सत्र में ध्यान करवाने के साथ गुरुजी ने नाड़ी विज्ञान, स्थान शुद्धि और ग्रहों के प्रभाव के बारे में भी कुछ जानकारी दी। यह भी कहा कि यदि कोई  किसी पूजा स्थल के पास जाये तो उसकी दोनों नाड़ियाँ चलने लगती हैं। उनके अनुसार किसी के मन के भाव उसकी श्वास में परिलक्षित होते हैं, इसी का आश्रय लेकर कुछ लोग दूसरों के मन के विचार पढ़ लेते हैं। सूर्य गेहूं से जुड़ा है और ह्रदय से, चंद्रमा मन से जुड़ा है और चावल से, मंगल मसूर दाल व रक्त से, बुध हरी मूँग और त्वचा से, बृहस्पति चना दाल और यकृत से, शुक्र चावल और किडनी से, शनि तिल, काली उड़द और दाँतों से, राहु सिर और तिल से, केतु निचले अंगों व जड़ वाली सब्ज़ियों से जुड़ा है।


गुरुजी ने आज कहा, पंछी हर दिन नया गीत नहीं गाते पर वे कभी ऊबते नहीं, उनके लिए हर दिन ही नहीं, हर पल नया है। आत्मा के बारे में बौद्धिक रूप से जानना पर्याप्त नहीं, अस्तित्त्वगत रूप से उसमें टिकना ध्यान है। अनुभव और अनुभवकर्ता जब एक हो जाते हैं, तभी ध्यान घटता है।द्रष्टा ही जब दृश्य बन जाये, तब जगत जैसा भी हो, भाता है। इस जगत में जो कुछ हो रहा है, वह परमात्मा की एक क्रीड़ा है।ज्ञानी ऐसे जीता है जैसे हो ही नहीं, जैसे सारी प्रकृति है, वह वैसे ही हो जाता है। जब किसी को पूर्ण तृप्ति का अनुभव होता है, तभी जीवनमुक्ति का अनुभव कर सकता है। प्रतिदिन की तरह आज भी गुरुजी ने ध्यान कराया। 


आज इस प्रवचन माला का अंतिम सत्र है। स्पंद का अर्थ है तरंग, यह सारा ब्रह्मांड तरंगों से भरा है। कुछ सामान्य तरंगें हैं, कुछ विशेष तरंगें हैं। वस्तुएँ और व्यक्ति विशेष तरंगें हैं। विशेष तरंगें, सामान्य तरंगों से  उत्पन्न होती हैं। अनंत जब सीमित होता है तब जीव बन जाता है। हरेक के भीतर सामान्य स्पंदन है, जो छिपा है।सामान्य स्पंदन न मुक्त है न बंधा है। प्रेम जीवन का स्रोत है।जब शिव अपना नेत्र खोलते हैं, तब सृष्टि का जन्म होता है। जब कोई सार्वभौम को सिर झुकाता है तो वह शिव से जुड़ता है। शिव और उसके मध्य कोई बाधा नहीं है। जो उसे अनुभव कर लेता है, वह समता को प्राप्त करता है। जगत में भिन्नता है पर सभी के भीतर जीवन शक्ति एक है, जो शिव है। पाँच इंद्रियों के द्वारा जीवन शक्ति ही जगत का अनुभव करती है। शिव एक होकर भी, सबका कारण होकर भी सबसे पृथक है। इसका अनुभव होते ही जीव स्थितप्रज्ञ हो जाता है।उस स्थिति में दो नहीं हैं, एक ही सत्ता है। जगत उस पर आरोपित अध्यास मात्र प्रतीत होता है। 


Tuesday, May 5, 2026

स्पंद कारिका


स्पंद कारिका 


आज समाचारों में सुना राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी हैं। पहली आदिवासी महिला, जो इतने बड़े पद तक पहुँचेंगीं। वह झारखंड की राज्यपाल रहा चुकी हैं और उड़ीसा विधान सभा में कई बार मंत्री पद भी संभाल चुकी हैं।छोटी बहन ने वापस जाकर आर्ट ऑफ़ लिविंग का पहला बेसिक कोर्स करवाने के लिए काम करना अभी से शुरू कर दिया है। पहले वह सहायक शिक्षिका के रूप में कोर्स करवाएगी, फिर कोड मिल जाने के बाद स्वतंत्र रूप से। दोपहर को उन्होंने यू ट्यूब पर एक आध्यात्मिक फ़िल्म देखी, जो अनोखे जीवों व प्राणियों से परिचय करवाती है। देह में आत्मा की उपस्थिति को सिद्ध करने के लिए बहुत अच्छी दलीलें देती है।शाम को वे सब एपिक रॉक गये, कुछ देर वहाँ बैठे जहाँ एक झरना बह रहा था। वर्षा के मौसम में झरनों में एकाएक पानी बढ़ जाता है।कल नन्हा सभी को मैसूर ले जाने वाला है।जहाँ छोटी बहन दो दिन अपने जेठ-जेठानी के पास रहकर वापस आएगी। 


आज बहुत दिनों के बाद अपने पुराने समय पर डायरी उठायी है। परसों की रात मैसूर के निकट स्थित एक हरे-भरे फ़ार्म हाउस ‘कैरिस ब्रुक’ में बिताकर, कल दोपहर का लंच मैसूर में करने के बाद वे शाम तक घर लौट आये।पापाजी से बात हुई, उसकी एक कविता पढ़कर कह रहे थे, दुनिया में सभी अपने-अपने काम में लगे हैं, भक्त व कवि भी इसी तरह अपने काम में लगे हैं। परमात्मा अनंत रूपों में स्वयं को प्रकट कर रहा है। मन संदेह करता है पर आत्मा सदा एक रस साक्षी मौजूद है, वह प्रेम, शांति व करुणा का सागर है, वही सत्य है।आज भी छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं, जिनकी मातृ भाषा हिन्दी नहीं है, उन्हें कितनी परेशानी होती है बोलने में, जैसे उसे कन्नड़ बोलने में होती है। 


आज का दिन कुछ अलग बीता, सुबह सब सामान्य था, टहलने गई तो पैरों में भारीपन लगा, शरीर में स्फूर्ति नहीं थी। योगासन भी पूरे नहीं हो पाये। नाश्ते के बाद टाइप करने बैठी तो शरीर अलसा रहा था। भोजन बनाया तो किसी छोटी सी बात पर मन झुंझला गया, कटु तो नहीं एक-दो शब्द तेज आवाज़ में निकले, जैसे कोई भीतर से स्वयं ही निकाल रहा हो। दिन भर कुछ नहीं खाया, रात्रि के समय कुछ भूख का अहसास हुआ। कर्मों के फल के रूप में भी कर्म होते हैं, यह आज जैसे स्पष्ट हो रहा था।जून शांति से सब देख-सुन रहे थे, उन्होंने कुछ प्रतिवाद नहीं किया।


आज दोपहर बारह बजे वे केंगरी रेलवे स्टेशन जाकर छोटी बहन को ले आये।उसने साड़ियाँ, सूट व कुर्ते दिखाये, जो मैसूर से लायी है। शाम को उन्होंने मिलकर बड़ी स्क्रीन पर वे सारे फ़ोटोज  देखे, जो पिछले कई दिनों से खींच रहे थे।उसके बाद सोने से पहले साधना, भजन, भोजन और रात्रि भ्रमण।  


आज जुलाई का प्रथम दिन है। आर्ट ऑफ़ लिविंग की नयी-नयी बनी शिक्षिका मोबाइल पर हैप्पीनेस कोर्स का मैनुअल पढ़ रही है। जून भी मोबाइल पर कुछ देख रहे हैं। शाम को वे नापा के पीछे वाली सड़क पर टहलने गये, जगह-जगह निर्माण कार्य शुरू हो गया है। पहले की सी शांति भी नहीं थी और न ही सफ़ाई! जून ढेर सारे फल लाए थे, ड्रैगन फ़्रूट, लंगड़ा आम और जामुन बहुत मीठे थे। पापा जी ने बताया, छोटा भाई बहरीन से लौट आया है। सुबह वे आश्रम गये थे। हर्बल टी लेने के प्रकरण में जून से उसकी बहस हो गयी, पर जल्दी ही स्मरण आ गया, आश्चर्य हुआ कि अभी भी आग्रह शेष है भीतर ! मन की हज़ार परते हैं, जिन्हें शायद भगवान भी नहीं जानते ! 


आज सुबह टहलने गये तो हवा ठंडी थी और आकाश पर चंद्रमा अपनी आभा बिखेर रहा था।जुलाई का महीना बैंगलोर का सबसे ठंडा महीना कहा जाता है। इसी महीने की तेरह तारीख़ को गुरु पूर्णिमा है।गुरुजी ‘स्पन्द कारिका’ पर बोलने वाले हैं। सोसाइटी में गणेशोत्सव का उद्घाटन समारोह है। दो माह तक ये कार्यक्रम चलेंगे। छोटी बहन को कल वापस जाना है।सुबह उसने साइकिल चलाने का अभ्यास किया।वर्षों पूर्व सेना में काम करते समय उसने साइकिल चलायी थी। पिछले दो हफ़्ते उन्होंने साथ बिताये। अच्छा लगा। शाम को वे नन्हे के यहाँ गये। 


आज से नूना स्वामी रामानन्द जी द्वारा पर दिया गया प्रवचन सुनना शुरू किया है। कुछ-कुछ समझ में आ रहा है।गुरु पूर्णिमा से पहले कुछ भूमिका तो तैयार हो जानी चाहिये मन में।यह नौवीं शताब्दी के कश्मीर शैव दर्शन का एक ग्रंथ है,जो वासुगुप्त द्वारा रचित शिव सूत्रों पर आधारित है । स्पंद का अर्थ है भगवान शिव की शक्ति के दिव्य कंपन, जिससे इस सृष्टि का उदय और विलय होता है। 


इस महीने चार रिश्तेदारों के जन्मदिन पड़ते हैं, वह सभी के लिए कविता लिखेगी। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य भी आया। पापाजी आज गर्मी या उम्र के कारण थोड़ा सा परेशान थे, जो स्वाभाविक है। मधुमालती में पहली बार फूल लगे देखे। सहजन का पेड़ तेज हवा में गिर गया था, नापा का माली आकर उसे सहारा देकर सीधा कर गया है, पता नहीं बचेगा यह नहीं।जड़ें मज़बूत होंगी तो शायद बच जाये। सुबह छोटी बहन का फ़ोन आया, वह घर पहुँच गई है।वहाँ उसे गर्मी का अहसास हो रहा है, एक महीना वह बैंगलुरु के सुहाने मौसम में रहकर जो गई है। 


कल नन्हे ने बूस्टर वैक्सीन लगवा ली। थोड़ा बहुत साइड इफ़ेक्ट भी हुआ। आज भी ‘स्पन्द  कारिका’ सुना, मन में जैसी भावना होती है, परिणाम भी वैसा ही आता है। आत्मा तो सागर की तरह है, वे अपने मन को चम्मच जितना रखेंगे तो उतना ही समायेगा। यदि विशाल बनाएँगे तो उतना अधिक मिलेगा। यदि क्षीर सागर के साथ एक रूप हो जाएँगे तो वही बन जाएँगे। मानव अपने अनंत स्वरूप को भुलाकर स्वयं को उपाधि से जोड़कर व्यर्थ ही सुखी-दुखी होते रहते हैं। आनंद उनका स्वभाव है  और सत्य उनका स्वरूप ! 


आज भी कल की तरह दिन भर वर्षा होती रही। आज ट्रांसक्रिप्शन का कार्य पूरा हो गया। गुरु पूर्णिमा पर लिए भी एक लेख का अनुवाद करना है। लेखन कार्य में कुछ कमी आई है, पर जीवन जो रंग दिखाए, स्वीकार है। जन्मदिन की दो कविताएँ टाइप कीं।आज पतंजलि योग सूत्र पढ़ते समय कितनी सरलता से स्पष्ट हुआ कि ‘योग’ चित्त वृत्ति का निरोध कैसे है ? और जब ऐसा होता है तब द्रष्टा अपने स्वरूप में कैसे ठहर जाता है। यदि ऐसा नहीं होता अर्थात वृत्ति बनी रहती है तो द्रष्टा उसी वृत्ति का आकार ग्रहण कर लेता है।जैसे ब्रह्मा कुमारी कहती है आत्मा जब सोचती है तब मन बन जाती है। अब मन्त्र जाप का महत्व भी ज्ञात हो रहा है। मन जब एक मन्त्र का आकार ले लेता है, तब दो जाप के मध्य में द्रष्टा का अनुभव होता है। इसीलिए ॐ को परमात्मा का नाम कहा गया है। सारे शब्द ॐ में समा जाते हैं। ॐ के बाद जो मौन है, वही आत्मा का स्वरूप है। उसमें टिक जाना ही योग है। भीतर जितने भी विचार चलते हैं, वे आत्मा से ही उपजे हैं, पर उससे दूर ले जाते हैं। जैसे लहर सागर से ही उपजी है, पर उससे ऊपर उठती है तो दूर चली जाती है। 


आज जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की नारा शहर में चुनावी भाषण देते समय मृत्यु हो गयी, उन पर एक व्यक्ति ने गोली चलायी थी। चीन में इस बात की ख़ुशी मनायी गई। गुरुजी ने भी ट्वीट किया, वह उनसे जुड़े हुए थे।  


Sunday, May 3, 2026

‘प्रोक्रिएट ऐप'



‘प्रोक्रिएट ऐप'

आज सुबह उठने से पूर्व मन में कितना अनोखा दृश्य क्रम चल रहा था। किताबें और उनमें लिखे शब्द स्पष्ट दिखायी दे रहे थे। जैसे सारा ज्ञान अपने ही भीतर हो, वैसा ही कुछ। आत्मा के रहस्य अपार हैं। जून को आजकल योगनिद्रा करना बहुत अच्छा लग रहा है।छोटी बहन का फ़ोन आया, आज से उसका फ़ोन रखवा लिया जाएगा, संभवतः अब उससे मिलना तभी संभव होगा, जब कोर्स समाप्त हो जाएगा। पापा जी से बात हुई, कह रहे थे, छोटी बहन बहुत बोल्ड है, वाक़ई वह ऐसी ही है।वह स्वयं बहुत शांत लग रहे थे, दिव्य ऊर्जा से युक्त!  


आज भी ऐप पर अभ्यास किया, बात धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। शाम को आर्ट ऑफ़ लिविंग के एक वरिष्ठ शिक्षक के साथ ऑन लाइन ‘पतंजलि योग सूत्रों’ का पाठ  किया। पाँच दिनों का कार्यक्रम है, जिसमें सुबह योग-साधना होगी। बड़ी भांजी की बिटिया का जन्मदिन है, उसने एक कविता लिखी, जिसे जून ने सुंदर चित्र से सजा दिया है।आज फ़ेसबुक पर असम वाले घर की एक तस्वीर पोस्ट की तो कितनी सखियों की यादें ताजा हो गयीं।

सुबह वह उठी तो अलार्म की आवाज़ ऐसे सुनायी दी जैसे कोई संगीत बज रहा हो।एक परिचित परिवार पहली बार घर आया, रास्ते में कई बार अभिवादन का आदान-प्रदान हो चुका है। बातों-बातों में उन्होंने बताया, मेट्रो से इस्कॉन मंदिर जाया जा सकता है। बैंगलुरु के ट्रैफ़िक की बात सोचकर वे अभी तक कार से जाने की बात टालते जा रहे थे। परसों छोटी ननद आ रही है। देश में धर्म के नाम पर दूरी बढ़ती जा रही है। कोई भी यदि स्वयं को विशेष मानेगा तो सामने वाले के मन में विरोध स्वाभाविक होने वाला है। सदियों से ईश्वर के नाम पर लड़े जा रहे इस झगड़े को ज्ञान के सिवा कौन सुलझा सकता है? ज्ञान का आश्रय लेना सीखना होगा। 


आज सुबह नन्हा व सोनू आ गये थे,  परिवार सहित ननद दोपहर को पहुँची। नन्हे ने पुलाव तथा पावभाजी बनाया। शाम तक खूब चहल-पहल रही। बच्चे चले गये, तो वे ननद-ननदोई को लेकर आश्रम गये। एक झील के किनारे भी कुछ समय बिताया। 


आज उन्हें एपिक रॉक ले गये। मौसम सुहाना था। आकाश में दो इंद्र धनुष बन गये थे। सूर्यास्त होने वाला था, बादलों के पीछे से सूर्य की किरणें अनोखा दृश्य उपस्थित कर रही थीं। अचानक आँधी चलने लगी। तेज हवा में धूल उड़ रही थी, बहुत तेज़ी से पेड़ झूम रहे थे। कुछ देर में सब थम गया, जैसे किसी ने स्विच बंद कर दिया हो।सभी ने बहुत आनंद लिया। वहाँ एक मुस्लिम लड़की मिली, जिसने हिंदू लड़के से ब्याह किया है, वह अच्छी हिन्दी बोल रही थी। उसकी बातें सुनकर प्रेम की शक्ति पर गर्व अनुभव हुआ। सृजन का फूल आज़ादी की हवा में ही खिलता है। 


जो भी जान लिया है, उसे जानने की ज़रूरत नहीं है। जो सदा से अनजाना है, उसे कोई कैसे ढूँढे? आज सुबह योग साधना स्वामी सूर्यपाद जी ने गुरुजी के ज्ञान सूत्रों की व्याख्या की।एक साधक के पाँच लक्षण हैं। श्रद्धा, समर्पण, निष्ठा, दृढ़ लगन और धैर्य। मन में किसी भी तरह की आकुलता न हो, पर प्रतीक्षा हो, यह सत्वगुण की निशानी है। थोड़ा सा रजोगुण प्रवेश करते ही वह मन को कहाँ ले जाएगा, कोई नहीं कह सकता। रजोगुण प्रवेश करता है अधैर्य से।मन एक क्षण में ही राग-द्वेष का शिकार हो जाता है। जिस क्षण भी कोई थम कर परमात्मा को पुकारता है, वह अपनी उपस्थिति ज़ाहिर कर देता है, बस धैर्य से प्रतीक्षा करनी है। अशांति को दूर करने के लिए सेवा है। साधक को ज्ञान होना चाहिए कि वह क्या खोज रहा है ? यदि उसे यह पता ही नहीं कि वह क्या खोज रहा है, तो उसे पाएगा कैसे? विरोधी बातों के मध्य समन्वय करने का एक ही तरीक़ा है, मध्य में रुक जाना। जब मन अपने केंद्र में रुक जाता है, दो इच्छाओं के मध्य ही सुख है। उन्होंने जागृत, स्वप्न व सुषुप्ति अवस्थाओं के बारे में भी बताया।गुरु के ज्ञान से साधक के ज्ञान का क्षितिज फैलने लगता है। कोई जगत को ढूँढता है तो हाथ में दुख आता है, दुख से बाहर निकलने का मार्ग ढूँढता है तो भगवान मिलते हैं। 


आज का विषय है, स्मृति: एक बाधा या वरदान। साधक पुरानी बातों को एक बोझ की तरह सिर पर लादे रहता है।मन में हज़ारों अनुभव व संस्कार भरे हैं, वह अपने स्वरूप में टिक नहीं पाता।अपने शुद्ध स्वरूप का विस्मरण ही समस्त समस्याओं का मूल कारण है। जन्म-मरण के चक्र से छूटना भी तभी संभव है। जन्म के साथ ही माया, एक छाया की तरह पीछे लग जाती है। उस ‘एक’ की स्मृति के अलावा सभी कुछ माया है। अविद्या, कामनाएँ तथा कर्म उन्हें अपने सच्चे स्वरूप में ठहरने नहीं देते।  


आज इतवार है, नन्हे और सोनू ने लंच में मोमोज़ और नूडल्स बनाये। बर्मा की एक डिश भी बहुत स्वादिष्ट बनी थी, बहुत मेहनत और प्रेम से बनायी गई। शाम को नन्हे ने कैमरा लगा कर ड्रोन उड़ाया। छोटी बहन से बात हुई, उसे फ़ोन वापस मिल गया है। वह कल सुबह छह बजे घर आने के लिए तैयार रहेगी। 


कल सुबह छोटी बहन को आश्रम से ले आये थे। दिन भर खूब बातें कीं।आज सुबह योग दिवस मनाया। शाम को बोटेनिका और रात को रात की रानी की क्यारी तक टहलने गये, बीस हज़ार से अधिक क़दम हो गये हैं आज। छोटी बहन टीटीपी कोर्स के बार में कुछ लेखन कार्य कर रही है।जून मोबाइल पर कुछ देख रहे हैं। मंझले भाई को बुख़ार हो गया है, उसने ईश्वर से उसके शीघ्र स्वास्थ्य की प्रार्थना की। 


आज सुबह वे टहलने गये तो दिन अभी निकला नहीं था। वापस आकर जून ने चाय बनायी, कई दिनों के बाद छोटी बहन ने चाय पी तो कहा, वाह !! अमृत है, सब हँसने लगे। आश्रम में कोर्स के दौरान चाय पीने की मनाही है। वाक़ई चाय ने सबके दिलों पर राज कर लिया है।दिन में बड़े भैया भी आ गये, सबने मिलकर कई बोर्ड गेम्स खेले। शाम को उन्हें आश्रम के गेट-१ तक छोड़ने गये, वहाँ से ओला मिल जाती है।     


Saturday, May 2, 2026

इचिगो इची

इचिगो इची

आज भी नूना ने गुरु स्टोरीज़ सुनीं। जितना सुनो, उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती जाती है, उनके शिष्यों के प्रति भी; जो उनके प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। गुरुजी एक माँ की तरह उनका ध्यान रखते हैं। उसका मन भी उनके प्रति भक्ति से भर गया है। अहंकार गल रहा है, निःस्वार्थ होने का, अपने से अधिक औरों को महत्व देने का भाव जग रहा है। मानव होने का अर्थ यही है कि वे अपने स्वरूप को जानें और एक बार जान लेंगे तो औरों को भी उस आनंद के मार्ग पर लायें। परमात्मा उनके लिए इतना आयोजन कर रहा है, नाना प्रकार के फल, फूल, सूरज, चाँद, हवा, जीवन, श्वासें उसने दी हैं। उसके प्रति कृतज्ञता का भाव जगाते हुए उन्हें पूर्ण आनंद का अनुभव करना है। पूर्ण आनंद में होने पर वे नम्र हो जाते हैं। इस दुनिया में उनके छोटे मन के सिवा सभी तो परमात्मा का रूप हैं, जब  वे किसी का ध्यान रखते हैं तो एक तरह से अपनी आत्मा का ही विस्तार करते हैं। वे स्वयं का ही फैलाव तो इस जगत में देखते हैं। वे जो स्वयं ही हैं, उसका ध्यान क्या रखना, क्योंकि जिस विशाल मन से वे अन्यों का ध्यान रखते हैं, वही उनकी भी देख-रेख करता है। 


अभी कुछ देर पहले नन्हा वापस गया है।आज सुबह उन्होंने नयी मिक्सी लगायी थी। बॉश की मिक्सी वह ले गया है। नन्हे की मिक्सी उसका कुक ले जायेगा, जैसे उनकी पुरानी मिक्सी नैनी ले गई थी।जून ने छोटी बहन का किट तैयार करने में मदद की, जो वह आश्रम ले जाएगी। आजकल गुरु स्टोरीज़ सुनते रहने से मन कैसा हल्का-हल्का सा बना रहता है। संसार का मालिक जब उनका अपना है तो कैसी चिंता और कैसा भय ! गुरुजी के साथ रहने वाले लोग कितने समर्पित हैं। शाम को पाँच बजे पापाजी जून के फ़ोन की प्रतीक्षा करते हैं, आज भी उनसे ‘शांडिल्य भक्ति सूत्रों’ पर चर्चा हुई।  


आज एक वरिष्ठ ब्लॉगर ने उसके ब्लॉग के बारे में उससे कुछ जानकारी माँगी है। ब्लॉग का लिंक, कब बना, उद्देश्य क्या है, विधा और किसी एक पोस्ट का लिंक भेजने को कहा है। उसे लगता है, ब्लॉग बनाने का उद्देश्य रचनाओं को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना व अनुभवों को सबके साथ बाँटना है। ब्लॉग का नाम “मन पाये विश्राम जहाँ” ही इसकी गवाही देता है। उसकी आध्यात्मिक यात्रा ही उसके लेखन की कहानी है। शेष तीनों ब्लॉग्स में भी वही है और ‘कुछ रिश्ते मीठे से में’ जो कविताएँ हैं, वे प्रेम का प्रस्फुटन ही तो हैं ! इसलिए उद्देश्य तो यही हुआ, भीतर जो आनंद पाया है, जो उल्लास, उमंग है, उसे फैलाना है। कविता इसका सशक्त माध्यम है। जब गुरु जीवन में आते हैं, जीवन को एक दिशा मिलती है। वर्षों पहले नन्हे ने ही उसका ब्लॉग से परिचय कराया, उसने ही ब्लॉग बना दिया था। धीरे-धीरे पाठक मिले, अन्य रचनाकारों से परिचय हुआ। कल सुबह सात बजे उसे सुदर्शन क्रिया के लिए जाना है। 


उसने ये सारी बातें लिखकर भेज दी हैं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षकों की कहानी सुनकर ही यह प्रेरणा मन में जगी कि उन अनुभवों को कागज पर लिख ले। ‘काव्यालय’ के संपादक को गुरुजी के दो वीडियो भेजे हैं, अवश्य ही उन्हें पसंद आयेंगे। मृणाल ज्योति की एक शिक्षिका से बात हुई, उसने कहा, संस्था के साथ अपने संबंध को याद करते हुए उसे लेख लिखना चाहिए।स्कूल का फ़ेसबुक पेज देखा, अच्छ लगा की वहाँ बहुत सी नई गतिविधियाँ चल रही हैं। आज मँझले भाई ने मेस में सभी को विदाई भोज में बुलाया, दो दिन बाद वह सेवा निवृत्त हो रहा है।   


सुबह वे टहलने गये तो हवा शीतल थी, आभामय भोर का तारा दूर से दिखाई दे रहा था। नौ बजे नन्हा व सोनू आ गये, समधी-समधिन भी आये थे। उसे आई-पैड व दो किताबें जन्मदिन के लिए उपहार स्वरूप मिलीं। दोनों प्रसिद्ध जापानी किताबों का हिंदी में अनुवाद है। दो घंटे ड्राइव करके नन्हा सभी को ‘मुरूगन इडली’ की एक शाखा में ले गया।यह तमिलनाडु के एक प्रसिद्ध रेस्तराँ का नाम है, जहाँ स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय भोजन मिलता है। 


आज सुबह वे पैदल ही निकट स्थित एक गाँव की झील देखने गये। गाँव की भोर की एक झलक मिल गई। मुर्ग़े, बत्तख़ें, कुत्ते, गायें तो देखी हीं, एक ऊँघती हुई महिला घर से निकली। झील में तैरती हुई मुर्ग़ाबियाँ और कई अन्य पक्षी थे।उसके बाद वे आगे बढ़ते गये, झील के साफ़ पानी की तस्वीरें उतारीं। घर लौटे तो एक-एक कर सभी के, जन्मदिन की बधाई के फ़ोन आने शुरू हुए। नाश्ते के बाद मिठाई देने वृद्धाश्रम गये। वहाँ के संचालक व एक निवासी से कुछ देर बात की।उसके बाद आश्रम में राधा कुंज, झील व शिव मंदिर के दर्शन किए। अन्नपूर्णा में बहुत दिनों बाद प्रसाद ग्रहण किया। झील के निकट एक मंडप में दोपहर का ध्यान किया। शाम को पड़ोसी परिवार को बुलाया था। 


कल मई का अंतिम दिन था। आज शाम वे आम के बगीचे में टहलने गये। हरे-भरे वृक्षों पर कई आकारों व रंगों के आम लगे हैं। प्रकृति में कितनी जातियाँ, प्रजातियाँ हैं, सभी साथ रहती हैं। जापानी पुस्तक ‘इचिगो इगी’ का हिंदी अनुवाद अच्छा लग रहा है। इसका अर्थ है, “एक बार-एक मुलाक़ात’, अर्थात हर किसी से हम एक तरह से एक ही बार मिलते हैं। किसी भी पल को जीने का अवसर जीवन में एक बार ही मिलता है, इसलिए वर्तमान में जीना चाहिए। पापाजी को भी इन जापानी किताबों के बारे में बताया। 


आज दीदी का जन्मदिन है, उनके लिए कविता भेजी, सदा की तरह तरबूज़ काट कर मनाया उन्होंने।शाम से ही बादल बनाने शुरू हो गये थे, वे रात्रि भ्रमण के लिए जायें, उससे पहले ही बरसने भी शुरू हो गये। आज “रेत समाधि” किताब आ गई। 


शाम को एओएल का अनुवाद कार्य किया। नन्हा कल बाहर खाने के लिए कह रहा है, पर उसने उन्हें घर आने के लिए कहा है। मीनू भी लिखा है, रेत समाधि से प्रेरित होकर, बहुत ही रोचक पुस्तक है, अपने आप में अनोखी !कल सुबह सात बजे उनके यहाँ पहली बार आर्ट ऑफ़ लिविंग का फ़ॉलो अप होने वाला है। गुरुजी की कृपा का एक और प्रसाद ! वह अभी भी अमेरिका में हैं, जुलाई में आयेंगे। तब वह एक कोर्स करेगी उनके साथ पार्ट २ कोर्स। आज सुबह कुछ देर के लिए मन कैसा तो उखड़ गया था, शायद वर्षों बाद ऐसा अनुभव हुआ, फिर दीदी से बात की और मन बदल गया।कल क्लब में एओएल की तरफ़ से नेचुरोपैथी कैंप लग रहा है।    


आज पूरा दिन व्यस्तता बनी रही। सुबह सवा चार बजे नींद खुली। टहल कर आये तो छह बज चुके थे। पौने सात बजे आर्ट ऑफ़ लिविंग की शिक्षिका आ गयीं।दो और लोग आये। क्रिया के बाद मन अपूर्व शांति का अनुभव कर रहा था, जिससे बाहर आने का जरा भी मन नहीं था। नाश्ते के बाद लंच की तैयारी की। नन्हा-सोनू और समधी-समधिन बारह बजे तक आ गये थे। उससे पहले वह प्राकृतिक चिकित्सा शिविर में गई। पैर के तलुओं में रिफलेक्सोलॉजी करवायी। कान में कुछ बीज लगाये हैं, उनका क्या असर होगा, पता नहीं। शेष चिकित्सा अस्पताल जाकर होगी। नन्हा आज आई पैड के लिए की बोर्ड और पेंसिल भी ले आया है। उसने ‘प्रोक्रिएट’ पर चित्र बनाना सिखाया, अभ्यास तो उसे ही करना है। शाम को छह बजे वे आश्रम पहुँचे। सात बजे छोटी बहन पहुँची। उसे जो कमरा मिला है उसमें तीन अन्य महिलाएँ भी रहेंगी। आश्रम में उसके साथ रात्रि भोजन करके नौ बजे वे वापस आये। 


Friday, May 1, 2026

गुरु गीता

गुरु गीता


शाम को वे दूर तक टहलने गये। एक जगह मुर्गी के दड़बों के आगे से गुजरना पड़ा, एक विचित्र सी तेज गंध आ रही थी।घर आकर भी कुछ देर तक वह गंध जैसे साथ रह गई थी।आज ‘गुरु गीता’ सुनने का दूसरा सत्र है। भानु दीदी कह रही हैं, गुरु के नाम स्मरण मात्र से अनेक आशीर्वाद मिल सकते हैं।ईश्वर या गुरु से कुछ माँगना ऐसा ही है जैसे हाथ में मक्खन रखा है और कोई घी माँग रहा हो।शांति का सागर भीतर है, बस अपने मन का ध्यान रखना है। गुरु तत्त्व कण-कण में समाया है। व्यास मुनि ने स्कन्द पुराण में शिव-पार्वती के संवाद के रूप में गुरु गीता की रचना की है। जिसमें गुरु और ईश्वर में कोई भेद नहीं है, ऐसा कहकर शिष्य की गुरु के प्रति निष्ठा को दृढ़ किया गया है। छोटी बहन को आश्रम में टीटीपी के लिए अनुमति मिल गई है। अगले महीने वह यहाँ आएगी।आज गुरु जी के बारे में लिखे एक लेख का अनुवाद किया।


आज गुरुजी का जन्मदिन है। इस विशेष दिन पर उनका संदेश है- 


कुछ भी आकर्षक नहीं है।

सब कुछ प्रकाशमान है क्योंकि सब कुछ आत्मा का है, और आत्मा से बना है।

ब्रह्मांड में आत्मा सबसे आकर्षक है। 


गुरुजी ने विशेष ध्यान भी कराया। सुंदर भजन गाये गये। आज मृणाल ज्योति स्कूल की एक पुरानी सदस्या का फ़ोन आया। अगले वर्ष स्कूल का रजत समारोह मनाया जाएगा। उसने पत्रिका के लिए एक लेख लिखने के लिए कहा है। नूना ने स्कूल की अध्यक्षा से भी बात की। उनके साथ बिताये कितने ही पल तथा कई घटनाएँ याद आने लगीं। 


आज सुबह उठने से पूर्व सुंदर स्वप्न देखे - सुंदर गायें, श्वेत बाघ और बुद्ध की प्रकाशित मूर्ति !परमात्मा से वार्तालाप और ध्यान का अनुभव ! पापाजी से बात हुई, वह ‘शांडिल्य भक्ति सूत्र’ पढ़ रहे हैं। जिसकी व्याख्या ओशो ने की है। उन्होंने बताया, प्रीति के कई रूप हैं, अपने से छोटों के प्रति प्रेम को स्नेह कहते हैं। समान उम्र के प्रति प्रेम को प्रीति तथा बड़ों के प्रति प्रेम को श्रद्धा या सम्मान कहते हैं। परमात्मा के प्रति प्रेम को भक्ति !! घर पर भतीजी और उसकी नन्ही बिटिया आये हुए हैं।शिशु बालिका की भी कई बातें उन्होंने बतायीं। आज भी दिन भर बादल बने रहे। मानसून इस बार यहाँ जल्दी आ गया है। सारे भारत में गर्मी का मौसम क़हर ढा रहा है, यहाँ अधिकतम तापमान २४ डिग्री रहता है। मई के महीने में ऐसा ही मौसम असम में मिलता था। उनके दायीं तरफ़ बनने वाला विशाल घर बनकर तैयार हो गया है, कल गृह प्रवेश की पूजा में जाना है। नन्हा और सोनू भी आयेंगे।  

उन्होंने अपनी दिनचर्या व ख़ान-पान में कुछ बदलाव किए हैं।शाम को सूप व आम का डिनर लिया। जून को सात्विक व हल्का भोजन लेने से शरीर में हल्कापन महसूस हो रहा है। दिन में दो बार ध्यान का अभ्यास, पुस्तक पढ़ने के साथ-साथ वह डायरी लेखन भी शुरू करने वाले हैं। आज बुद्ध पूर्णिमा है, भगवान बुद्ध के विषय में लिखी कविता उसने बहुत लोगों को भेजी। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है। कल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। एक अच्छी बायोपिक देखी, ‘रश्मि राकेट’ !


दिन भर वर्षा का मौसम ही बना रहा। असम में बाढ़ का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। बैंगलुरु में भी सड़कों पर पानी जमा हो गया है। पानी की समस्या पर आधारित ‘टर्टल’ फ़िल्म में देखा था, रेगिस्तान में लोग पानी के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। यह जीवन ऐसा ही विरोधाभासी है। आर्ट ऑफ़ लिविंग से अनुवाद को-ऑर्डिनेटर का फ़ोन आया। कल रात को नौ बजे ज़ूम पर एक मीटिंग है, जिसमें नूना को अपने गुरु स्टोरी रखनी है। शाम को उन सभी बातों को याद किया और लिखा। एक शिक्षिका की कहानी सुनी थी, कितने आराम से वह सुना रही थी, उतनी ही सहजता से उसे भी अपनी बात रखनी होगी। 


शाम को गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान गहरा हुआ। ज़ूम मीटिंग में एबीसी(आश्रम की प्रकाशन संस्था)की ‘हेड टू हार्ट’ सीरीज़ में पहली बार भाग लिया। आजकल गुरु स्टोरी सुनना भी शुरू किया है। अच्छा लग रहा है। गुरुजी अपने भक्तों की नज़रों में ईश्वर से कम नहीं। जिन्होंने उनका सान्निध्य पाया है, वह यह जानते हैं। उनके बार में सुनकर कितना रोमांच होता है। वाक़ई वे एक अवतार ही जान पड़ते हैं। कैसे लोगों के मन की बात जान लेते हैं, उनका ख़्याल रखते हैं। इतना प्रेम देते हैं कि लोग उनके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। वह उनके जीवन में वरदान बनकर आये हैं। वह कहते हैं, “साधकों को सेवा करनी चाहिए, ताकि वे अपने कर्मों को काट सकें। उन्हें पुण्य मिले और उनका मन शुद्ध हो, वे ध्यान के अधिकारी बनें, उन्हें समाधि का अनुभव हो। उनका जीवन सार्थक हो।जो दूसरों के कष्ट दूर करने की चाह रखता है, जो संसार के लिए जीता है, उसके योग-क्षेम का भर स्वयं परमात्मा उठाते हैं। वे स्वार्थ को त्याग कर यदि जगत के हित में काम करते हैं तो इसका परिणाम अंतर की शुद्धि के रूप में उन्हें ही मिलता है। जब कोई अपना सुख-दुख भूलकर अन्यों के सुख-दुख में शामिल होता है तब भीतर मुक्ति का अहसास होता है। जीवन वही जीवन है जो औरों के काम आये। उनके वचन, कर्म व विचार सदा हितकारी हों।” गुरुजी की बातें सुनने से मन नहीं भरता। वह उसे भी जानते हैं, ऐसा संयोजिका ने कहा। असम में एक शिक्षिका ने भी कहा था, गुरुजी को ज्ञात है कि सहज समाधि उनके यहाँ हो रहा है ! उसने गुरुजी के प्रति अपनी निष्ठा को पूर्ववत् नहीं बनाये रखा, ऐसा मानना भी उचित नहीं। वह उनमें और स्वयं में कोई भेद नहीं देखती, वह उन्हीं का भाग है ! ‘ईश्वर अंश जीव अविनाशी’ अथवा तो एक ही सत्ता से यह सारा जगत बना है !  


आज सुबह उन्होंने पूरे सत्तर मिनट भ्रमण किया; नये व सुंदर, हरे-भरे रास्ते पर! तस्वीरें भी खींचीं। आज दो बालिकाएँ हिन्दी पढ़ने आयीं। दोपहर बाद बाज़ार गये, आगामी यात्रा में जिनसे मिलेंगे, उनके लिए कुछ उपहार ख़रीदे। ‘पंचायत’ धारावाहिक का अंतिम अंक देखा।   



Tuesday, April 28, 2026

झुंड - एक अलग सा सिनेमा

झुंड - एक अलग सा सिनेमा


मई का महीना शुरू हो गया, यानी मौसम का सबसे गर्म महीना ! लेकिन सुबह शीतल थी, उन्होंने सूर्योदय के चित्र उतारे, कुछ देर साइकिल चलायी।गुरुजी का जन्मदिन और बुद्ध पूर्णिमा इसी महीने में आती है।कल ईद है, जून ने नूना की ईद की कविता का एक कार्ड बना दिया है कैनवा पर। शब्दों का एक तोहफ़ा, उसे उम्मीद है बहुतों को अच्छा लगेगा, विशेष तौर पर पापाजी को, वह उसकी कविताएँ अवश्य पढ़ते हैं।कल सोसाइटी के चुनाव हो गये, पुरानी कमेटी लौट आयी है, यही वे चाहते थे।जून ने उनके ख़ाली पड़े फ़्लैट में कबूतरों को आने से रोकने के लिए जाल लगवा दिया है। शाम को पापाजी से प्रतिदिन की तरह अध्यात्म पर चर्चा हुई, पिछले दिनों उनका स्वास्थ्य इतना अच्छा नहीं रहा, पर आज ठीक हैं। दिसंबर में उन्हें दो पारिवारिक विवाहों में सम्मिलित होने की खबर मिल गई है। आख़िर विवाह की तैयारी महीनों पहले से ही करनी पड़ती है।  


आज शाम को वर्षा हुई, बल्कि दोपहर बाद से बूँदे झरने लगी थीं।मौसम सुहावना हो गया है।लेकिन वे संध्या और रात्रि दोनों बार भ्रमण के लिए नहीं जा पाये। जून को छाता लेकर टहलना नहीं भाता, सो नूना गैरेज में ही कुछ देर टहलते हुए पंचदशी सुनती रही।एक नयी कविता आज फ़ेसबुक पर प्रकाशित की।दीदी ने बताया, वह बहुत पहले से मोबाइल पर सुडोकू हल करती हैं, जून को भी करने को कहा।आज दो-तीन लोगों ने कल की कविता की तारीफ़ की। दिल से कही बात दिल को छू जाती है। कल शाम वे घर के सामने वाली लेन में रहने वाली एक महिला से छह किताबें लाए, उन्होंने अपने घर में सेल लगायी थी। नूना ने ऐन रैंड की एक किताब पढ़नी शुरू की है, वर्षों पहले ‘फ़ाउंटेन हेड’ पढ़ी थी तो उसे बहुत भायी थी। जून भी चि वॉकिंग पर एक किताब पढ़ रहे हैं।आज महात्मा बुद्ध पर एक फ़िल्म भी देखी, उन्हें निर्वाण का मार्ग मिल गया, संसार को दुखों से छुटकारा दिलाने का मार्ग। तृष्णा ही जन्म का कारण है और उससे छूटने का मार्ग बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग है। कितने महान थे वह, और कितना महान है उनका ज्ञान ! मानव जीवन में ही यह ज्ञान पाना संभव है। आज सुबह उठने से पूर्व भी कोई उड़ीसा शब्द कहा रहा था, उसकी उड़िया सखी की बेटी का विवाह कल संपन्न हो गया, उसी की याद दिला रहा था। दिन में उसे बधाई दी।  


आज शाम वे बोटेनिका गये तो आकाश पर बादल थे, पापाजी को वहीं से वीडियो कॉल किया, उन्हें हरियाली के सुंदर दृश्य बहुत अच्छे लगे।एक चिड़िया की तस्वीर उतारी। आज उसने ‘सिंहासन बत्तीसी’ का पहला अंक देखा, मूलत: संस्कृत में लिखी गई यह पुस्तक विक्रमादित्य के बारे में है। शाम को इस्लाम के बारे में एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है। अगले हफ़्ते से गुरु जी की छोटी बहन भानु दीदी के साथ ऑन लाइन गुरु गीता कार्यक्रम आरंभ हो रहा है। आज उसी के अन्तर्गत आश्रम से दो किताबें मिली, ‘गुरुदेव’ तथा ‘इंटीमेट नोट्स फॉर ए सिंसियर सीकर’।  


आज शाम वर्षा के कारण पाँच मिनट में ही घर लौटना पड़ा, रात्रि भ्रमण में वह पहले से ही छाता लेकर गये। हल्की बूँदाबाँदी हुई। सावन के आने से पहले ही यहाँ वर्षा का मौसम शुरू हो गया है। छोटी भांजी व गुरुजी के जन्मदिन पर आज कविताएँ लिखीं।आज सुबह जून पहली बार इलेक्ट्रिक साइकिल से दूर गाँव तक गये, चालीस मिनट लगे आने-जाने में। 


आज सुबह नन्हा, सोनू और बड़ा भांजा आये, साथ ही उनकी एक मित्र भी थी।देखने में सीधी-सादी है, पर लगता है, बहुत लाड़-प्यार से पली है, भोजन के मामले में बहुत नख़रे हैं। अन्न का सम्मान करना नहीं जानती, या स्वाद का बहुत ज़्यादा ध्यान है उसे, पर शेष बातों में अच्छी लगी, आजकल बच्चे ऐसे ही होते हैं। शायद उसमें बचपना अभी तक गया नहीं है।वक्त बदल रहा है, अब बच्चों में पहले की तरह बड़ों का लिहाज़ नहीं है।  बाद में नन्हा सभी को लंच के लिए ताज ले गया। नूना को महँगे होटल में बाहर खाने का कोई आकर्षण नहीं है , उसे तो तरह-तरह की गंध आती है वहाँ, सो… ख़ैर कभी-कभी ऐसा हो तो कोई बात नहीं। शाम को छोटे भाई का फ़ोन आया, जीजाजी को हल्की चोट आयी है, पर वह ख़ुद गाड़ी चलाकर अस्पताल गये। उनमें हिम्मत और ख़ुद्दारी का जज़्बा कूट-कूट कर भरा है। 


सुबह उठी तो भीतर से कोई कह रहा था, ‘सेवा करो, एस सी शब्द सम्मुख आया। नींद में ही कोई लेख भी पढ़ा। उठते ही ध्यान में मन टिक गया। आज मातृ दिवस है। सुबह से ही संदेश, कवितायें आलेख पढ़े और भेजे। छोटी बहन कनाडा में बड़ी बिटिया के पास है। दोनों नन्दों से बात हुई, खुश थीं, बड़ी घर में हवन करवा रही थी। छोटी बेटे के विवाह की तैयारियों में लगी है। 


आज से ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ में जाँच आरम्भ हो गई है। सुबह जून ने आम उठाने को मना किया, पर कल रात की आँधी-तूफ़ान के बाद ढेर सारे आम गिरे हुए थे, उसने चार उठाये, कल चटनी बनाएगी। जून इस बात पर थोड़ा नाराज़ हो गये से लगे, पर उनकी उदासी का कारण कुछ और भी हो सकता है। आज पड़ोस की एक नन्ही बालिका हिन्दी पढ़ने आयी। उसकी लिखाई में कुछ सुधार करना होगा। दिन में एओएल का अनुवाद कार्य किया। 

    

आज उन्होंने एक अच्छी फ़िल्म देखी, ‘झुंड’ झोपड़-पट्टी के बच्चों व युवाओं में फुटबॉल के माध्यम से परिवर्तन लाया जा सकता है, इस पर एक वास्तविक प्रयोग हुआ था। विजय बारसे ने एक क्लब बनाया था, ‘स्लम सॉकर’ । अच्छी लगी फ़िल्म, पर इसे देखने के चक्कर में वे शाम को घर पर ही बैठे रहे। आज सुबह वे टहलने गये तो उसने जून को कुछ प्रेरणात्मक वाक्य कहे, शायद सुनकर या ऐसे ही उन्होंने कहा, चलो, ड्राइव पर चलते हैं। उसे उस गाँव तक ले गये, जहाँ वह कुछ दिन पहले साइकिल से गये थे। आज शाम को ‘गुरु गीता’ पर पहला सत्र है। जिसमें ध्यान के साथ मंत्रों का उच्चारण सिखाया जाएगा और उनका अर्थ भी बताया जाएगा। 


Monday, April 27, 2026

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

आज सुबह दस बजे वे नन्हे की नई गाड़ी में यालाहंका में कंपनी की ‘ओल्ड बॉयज़ मीट’ में शामिल होने गये।वे कई परिवारों से वर्षों बाद मिले, बहुत अच्छा अनुभव रहा।सभी लोगों ने अपनी यादों में असम को बसाया हुआ है। जब सभी असम में रहते थे, तब अक्सर ही मिलना होता था। एक ही कंपनी में काम करना व एक ही कैंपस में रहना, सबके पास साझा करने के लिए जैसे यादों का एक ख़ज़ाना था।कार्यक्रम एक अंध विद्यालय के हॉल में हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्य भी मिलीं। एक अतिथि ने ‘प्राणिक हीलिंग’ पर एक वक्तव्य भी दिया तथा प्रयोग द्वारा एक महिला के हाथ के दर्द का इलाज भी किया। केले के पत्ते पर पारंपरिक भोजन भी परोसा गया। लौटे तो शाम हो गई थी। कार्यक्रम के दौरान नन्हे ने कई तस्वीरें भी खींचीं। घर आकर कंपनी की कॉफी टेबल बुक ‘नॉस्टेलज़िया’ एक बार फिर उल्टी-पलटी, बहुत अच्छी लगी। कितनी ही नयी बातें पता चलीं, जो वास्तव में पुरानी हैं। 


नन्हे ने कल जो तस्वीरें खींचीं थीं, उनके लिए कई लोगों ने तारीफ़ की है। उसने पूरे दिल से यह काम किया था।आज शाम को गुरुजी का एक भाषण सुना, जो उन्होंने ‘वी स्टैंड फॉर पीस’ पर  संयुक्त राष्ट्र संघ में दिया। उन्होंने कहा, शान्तिप्रिय लोगों को एकजुट होना होगा। किसी को भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होना है।दोपहर को गुरुजी का कराया ध्यान ‘नीडिल’ किया और शाम को मन को ख़ाली करने वाला, दोनों ही विधियाँ प्रभावशाली हैं। आज पढ़ा, गुरु के आवाहन के बाद उसके ज्ञान स्वरूप में मन को विलीन करने से मन की शुद्धि होती है, रामकृष्ण परमहंस की पुस्तक तो अनमोल है। स्वामी विवेकानंद जब नरेन थे, कितना संदेह था उनके मन में, पर उनके गुरु उनकी किसी बात का विरोध नहीं करते थे। अनोखे लोग थे वे! आज उसने एक पोस्ट लिखी। जैसे कोई फूल खिलता है, कोई उसे सराहे या नहीं, इससे क्या अंतर पड़ता है फूल को ! शब्द जो किसी के मन से निकले, अंततः तो समष्टि मन से ही आये हैं ! 


दोपहर को उसने जून को एक बात पर टोका, पर आज उन्होंने बुरा नहीं माना। महादेव में पार्वती पुन: शिव से पृथक हो गई हैं, उन्हें एक और जन्म लेना होगा, फिर वे बाणासुर का वध करेंगी। कितनी अद्भुत कथा है शिव-पार्वती की। सृष्टि के आदि में देव तथा दानव दोनों ही हुए। इसलिए अच्छी व बुरी, शुभ व अशुभ दोनों शक्तियाँ इर्द-गिर्द होती हैं। चुनाव उन्हें करना है। देवता परम चेतना की उर्मियाँ हैं तो दानव उनसे बनने वाली छाया। अहंकार छाया ही तो है, आत्मा आलोक है। कुछ पाने की, कुछ बनने की, कुछ होने की लालसा जब तक बनी है, तब तक मन में पूर्ण तृप्ति कैसे हो सकती है ? जो मानव का मूल स्वभाव है, यदि वही उसका लक्ष्य है तो, वह तो मानव अभी है ही, फिर कैसी खोज? 


आज उन्होंने पहली बार सुबह-सुबह खीरे का रस पिया, अच्छा लगा और उसका परिणाम भी अच्छा रहा।आज स्वामी मधुसूदन सरस्वती के बारे में सुना, जो पन्द्रहवीं शताब्दी में हुए थे। वह वेदांती होने के साथ कृष्ण भक्त भी थे। भक्ति के बिना ज्ञान रूखा-सूखा ही रह जाता है, तभी तो ‘ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या’ कहने वाले शंकराचार्य भी ‘भज गोविन्द गाते हैं। आजकल उसका लेखन कार्य, विशेषतया कविता लेखन का कार्य पहले की भाँति नहीं हो रहा है। मन की धारा शांत हो गई है, और लेखन तो भीतरी उहापोह को दिखाने का ही एक माध्यम है शायद ! 


आजकल नूना पॉल ब्रंटन की पुस्तक ‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’ पढ़ रही है। यह एक ऐसी यात्रा पर आधारित है, जिसमें  लेखक सच्चे ऋषियों की खोज में लगा है। ऐसे ऋषि जिनके पास आत्मा का ज्ञान है, जिन्होंने अपने भीतर उस सच्ची शांति का अनुभव कर लिया है, जिसे भौतकितावादी लोग मानने से भी इंकार कर देते हैं।इसी किताब में एक यहूदी व्यक्ति का ज़िक्र है जिसने कुछ अच्छे जिन्नों को वश में कर लिया था, जो दूसरों के विचारों को भी पढ़ सकते हैं और बिना किसी को दिखे कहीं भी जा सकते हैं। नूना को कई बार लगता है, देवदूत उसके भी आसपास हैं। कभी दिव्य गंध का अनुभव होता है, कभी संगीत का, कभी सुंदर दृश्यों का, शायद उन्हीं के कारण ! शाम के भ्रमण के समय बादल थे, तेज हवा उन्हें उड़ा ले गई। थोड़ी सी जमैका चेरी तोड़ी। विपासना ध्यान किया पर अब उस तरह का ध्यान उसे नहीं भाता, केवल संवेदनाओं के प्रति जागरूक रहने से राग-द्वेष तो मिट सकते हैं, पर देह भाव से मुक्ति नहीं मिलती। कोई आत्म अनुभव नहीं होता, जहाँ पूर्ण शांति हो, कोई भाव, विचार या संवेदना भी न रहे ऐसी विश्रांति ही उसे भाती है। पंचदशी को आगे सुना। यह भी चौदहवीं शताब्दी का स्वामी विद्यारण्य का लिखा वेदान्त का एक ग्रंथ है। साथ ही इसमें त्रिपुर सुंदरी की उपासना का मंत्र भी दिया गया है, यानि भक्ति और ज्ञान दोनों ! 


आज सुबह बगीचे में काम करने के बाद वे आश्रम गये। समूह में सुदर्शन क्रिया का अभ्यास किया। बाद में महादेव में गणेशजी की पत्नी सिद्धि के पुत्र क्षेम तथा ऋद्धि के पुत्र लाभ की कथा सुनी। महादेव उन्हें गोद में लेकर अति प्रसन्न हैं।दोपहर बाद नन्हा आया, उस समय तेज वर्षा हो रही थी। रह-रह कर बिजली चमक रही थी। श्वेत बींस की सब्ज़ी बनायी थी उसने। रिलायंस ट्रेंड्स होते हुए वे नन्हे के साथ उसके घर गये। सबके लिए उपहार ख़रीदे। डिनर के बाद वे वापस लौटे तो घर के बाहर ही मात्र दो हफ़्ते पुरानी, नयी कार का टायर पंक्चर हो गया। नन्हे ने भीगते हुए यू ट्यूब से सीखकर टायर निकाला तथा स्टेपनी लगायी। जून ने तब तक एक मकैनिक को भी बुला लिया था।उसके बाद बच्चे वापस चले गये, अभी तक उनके घर पहुँच जाने का संदेश नहीं आया है।