आज सुबह गुरूमाँ को सुना, कितना अच्छा बोलती हैं। पंडित पीतांबर जी द्वारा लिखे गये अद्वैत वेदान्त के ग्रंथ ‘विचार चंद्रोदय’ पर उनकी व्याख्या अनुपम है। इस पुस्तक में वेदान्त का शुद्ध ज्ञान सरल ढंग से समझाया गया है। जगत की सत्यता, मैं कौन हूँ, पाँच कोष, तीन ताप, कर्म सिद्धांत और मुक्ति का स्वरूप सभी कुछ प्रश्न-उत्तर शैली में समझाया गया है।अभी कुछ देर पहले उसने गुरुजी से जुड़ा एओएल का एक अनुवाद कार्य किया।अमेरिका के एलेघेनी शहर ने २२ जून को ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित करके गुरुजी को सम्मानित किया है। अमेरिका की आठ यूनिवर्सिटीज़ में श्री श्री योग और सुदर्शन क्रिया सिखाई जाती है। दशकों से गुरुदेव पूरे विश्व में विभिन्न समुदायों के मध्य आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं। मोदीजी भी अमेरिका में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं, पर सारा विपक्ष उनके कामों का पूरी तरह से विरोध कर रहा है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने भी मोदीजी की तारीफ़ की, पर विपक्ष को और मज़बूत होना चाहिए, ऐसा भी कहा। कल रात उन्होंने बिना एसी के सोने का प्रयास किया पर आधी रात को ही चलाना पड़ा। सड़क पर लगे बल्ब की, खिड़की से आती रोशनी आँखों को चुभ रही थी।खिड़की बंद करने या पर्दा लगाने से हवा नहीं आती, सो बिना एसी के सोना अब सर्दियों में ही संभव होगा।
दिन भर मौसम बदली वाला बना रहा, शाम को बादल कुछ देर को बरस भी गये। रात्रि भ्रमण के लिए गये तो सड़कें गीली थीं और ख़ाली भी। सन्नाटा पसरा था जैसे सर्दियों की कोई शाम हो और लोग घरों में दुबक गये हों। आज उन्होंने देवानंद-नूतन की एक पुरानी फ़िल्म देखी, ‘बारिश’। उस समय के नायक में वीरोचित और नैतिक गुण होते थे। पुलिस भी कार्य में दक्ष और ईमानदार थी। अब न नायक वैसे हैं न पुलिस। समय के साथ समाज में विकृतियाँ बढ़ने लगती हैं।लेकिन कई मामलों में चतुर्मुखी विकास भी हुआ है बल्कि अनेक मामलों में चीजें बेहतर हुई हैं।
आज सुबह पौधों के साथ बितायी। हरे-भरे पौधे और लॉन में हज़ारों हरसिंगार के फूल, बरसात के मौसम में चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है। इतवार है आज, नन्हा और सोनू आये। पिछले दिनों सोनू ने बहत सारे केक बनाये, काफ़ी थक गई है, लेकिन बहुत खुश है। अभी भी उसके पास केक के ऑर्डर हैं, मंगल को देने हैं।हरेक को अपने काम के अलावा एक न एक शौक़ रखना ही चाहिए। ऐसा शौक़ जिसे पूरा करने से ही ख़ुशी मिलती हो, जिसका कोई फल उसे नहीं चाहिए। फल तो मिलेगा ही पर फल की आशा में वह कार्य न किया गया हो। सोनू कह रही है, अगले हफ़्ते वह श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी।
आज महीनों बाद उसने हर ब्लॉग पर एक-एक पोस्ट प्रकाशित की। अब यही प्रयास रहेगा कि नियमित रूप से लेखन कार्य चलता रहे। यदि मन में किसी काम को करने का इरादा हो तो समय निकल ही आता है। मौसम आजकल अच्छा है, पर इस वर्ष वर्षा अपेक्षाकृत कम हो रही है।आकाश बादलों से घिरा रहता है, हवा भी चलती है, पर बूँदें बरसती नहीं हैं। कुछ देर पहले छोटी ननद की सखी, एक पूर्व परिचिता का फ़ोन आया, वह परसों अपनी एक सखी के साथ उनके घर आ रही हैं। दोनों आश्रम जाना चाहती हैं। वे उन्हें आश्रम तो ले ही जाएँगे, हो सका तो इस्कॉन मंदिर भी ले जाएँगे। जून ने कहा है, अंत में घर भी छोड़ देंगे।
कल छोटी बहन का फ़ोन आया। आज उसे अपने क्लिनिक में गुरु पूजा करवानी थी।भांजी अपने मित्र को घर लायी है, उन दोनों ने मिलकर भोजन बनाया, पर अभी तक भविष्य के बार में कोई विचार नहीं किया है।आज पाकिस्तानी लेखक हारून ख़ालिद की लिखी पुस्तक “वॉकिंग विद नानक” आ गई है। उसने पढ़नी शुरू कर दी है, अच्छी लग रही है। गुरु नानकदेव की माँ तृप्ता आज से पाँच सौ वर्ष पहले भी कितनी निर्भीक थी और कितने स्वतंत्र विचारों की महिला थी।गुरु नानक के जीवन के कितने अनजाने पहलू जानने को मिल रहे हैं। पुस्तक में इतिहास, यात्रा वृत्तांत और अध्यात्म सभी का मिश्रण है।लेखक ने इक़बाल कैसर के साथ घूमकर पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों के बारे में सही जानकारी पाने की कोशिश की है।
आज सुबह वे निकट की एक झील पर जाने के लिए निकले तो पड़ोसी भी उसी वक्त प्रातः भ्रमण के लिए निकल रहे थे, उनसे पूछा तो वह भी साथ चलने के लिए तैयार हो गये। उन्होंने इतने वर्षों में आसपास की कोई झील कभी नहीं देखी थी। कुछ तस्वीरें उतारीं। आज की पुरानी फ़िल्म में आशा पारिख थी, वह आँखों से कितना कुछ कह जाती है। नन्हे ने आज काँच के दो बड़े गिलास और छह गिलासों का एक सेट भेजा है। जून ने उसके लिए ‘नागराज’ कॉमिक के आठ अंक मँगवाये हैं। बचपन में वह इन्हें पढ़ता था। अगले महीने उसका जन्मदिन है। उन्होंने बिना पॉलिश की हुई दालें भी मँगवायी हैं, यकीनन उनका स्वाद अच्छा होगा। आज उनके फ़्लैट का काम पूरा हो गया। अगले महीने से किराए पर चढ़ सकता है।
आज दोपहर वे दोनों महिलाएँ आ गई थीं। उत्साह से भरी और छोटी लड़कियों की तरह बात-बात पर खिलखिलाने वालीं। दोनों आपस में पुरानी मित्र हैं।नूना और जून ने चार-पाँच घंटे उनके साथ बिताये। दक्षिण भारतीय अल्पाहार के बाद शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये। आश्रम के अनेक मुख्य स्थल दिखाये, राधा कुंज के निकट कई तस्वीरें उतारीं। विशालाक्षी मंडप में भजन संध्या में सम्मिलित हुए।अन्नपूर्णा में प्रसाद ग्रहण किया। उनके घर छोड़ने गये तब काफ़ी देर हो गई थी, वापसी में वे नन्हे के यहाँ ही सो गये। सुबह की चाय के बाद घर लौट आये। रात को सोते समय भी उसके भीतर जैसे भीतर एक जागरण बना हुआ था, पर बाहर का कुछ बोध नहीं हो रहा था। नींद कुछ बदल सी गई है। कभी-कभी आँख बंद करने पर कुछ रूप दिखायी पड़ते हैं।
आज पापाजी से बात हुई, आजकल वह अकेले रह रहे हैं। पढ़ने से उनकी आँख में दर्द होता है, पर वे पढ़ना छोड़ते नहीं। कहते हैं, किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, और अख़बार से समाज व देश की आम जानकारी होती है।आज उसने श्रावण में होने वाली रुद्र पूजा के बारे में एक आलेख का अनुवाद किया।भगवान शिव सबसे शक्तिशाली और कल्याणकारी रूपों में से एक भगवान रुद्र के लिए की जाने वाली एक सुंदर पूजा ! रुद्र का अर्थ है, जो सभी दुखों का नाश करते हैं ! मन के भीतर एक जागरण बना रहे, वे बेहोशी में कोई कार्य न करें, सारी पूजाएँ और कर्मकांड इसी बात को सिखाने के लिए ही तो किए जाते हैं। जीवन में सजगता के साथ पवित्रता भी बढ़े, जब किसी वस्तु को पावन कहकर देखते हैं, तो उसके प्रति हाव-भाव कितना बदल जाता है। उनकी नींद भी पावन हो और जागरण भी ! इस रविवार को उनके यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।अभी से उसके मन में उत्साह भर गया है। पिछले वर्ष भी उन्होंने एक बार गुरु पूजा का आयोजन किया था। असम में तो हर वर्ष एक बार करवाते थे, उनके पड़ोसी, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक थे, वही किया करते थे। कल उनकी गली में भी एक शिक्षक के यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।जिसमें वे जाने वाले हैं।