Wednesday, July 16, 2025

नारियल के पेड़


आज उनके घर के पीछे वाली  ज़मीन की छोटी सी पट्टी पर और दायें-बायें दोनों तरफ़ के लॉन में कार्पेट घास लग गई है।पड़ोसियों के यहाँ भी घास लग गई है, अब हरियाली बढ़ गई है दोनों ओर।माली ने गुड़हल के पौधे भी लगा दिये हैं। जून नर्सरी से क्रोटन के भी चार पौधे  लाए हैं।शाम को वे पुन: बोटेनिका गये। भविष्य में यह बहुत सुंदर सोसाइटी बनेगी, अभी तो मात्र सड़कें बनीं हैं और दोनों तरफ़ फूलों की क्यारियाँ और वृक्ष लगे हैं। सूर्यास्त का सुंदर दृश्य भी दिखाई दे रहा था। दाहिनी तरफ़ की सड़क एक गाँव की तरफ़ जाती है। शाम को नन्हे ने फ़ोन किया, इतवार को वे लोग अपने एक मित्र परिवार से मिलने गये थे। श्रीमती जी का जन्मदिन था, उन्होंने फल खिलाए, बाद में चाय व टोस्ट। उसके दाँत में दर्द था, गाल फूला हुआ था, पर वह अपने पैतृक शहर में जाकर ही इलाज करवायेंगी, ऐसा तय किया था। सोनू ने उसे अपने डेंटिस्ट का नंबर दिया।पापाजी ने बताया, उन्होंने मोबाइल पर हिन्दी में टाइप करना सीख लिया है। आज अंततः दीदी-जीजाजी ने भी कोरोना का टीका लगवा लिया। अभी-अभी भांजी को उसकी बिटिया के लिए लिखी कविता भेजी, उसे अवश्य पसंद आएगी। सुबह वे टहलने गये तो हवा में ठंडक थी। मानसून का असर होने लगा है हवाओं में। 


एक और दिन काल के गर्त में समा गया।पूरा दिन कुछ न कुछ व्यस्तता बनी रही।नन्हा व सोनू सुबह-सुबह आ गये थे। कल उन्हें भी वैक्सीन लगनी है। नन्हे ने एक नया गेम भेजा था, उसे खोलकर सीखने का प्रयास किया, नया मॉडेम भी लगाना था।नाश्ते में जून ने दोसे के साथ केसरिया खीर भी बनायी थी।सवा नौ बजे वे चले गये, कोरोना की वजह से जीवन कितने बंधनों में बंध गया है।नूना ने लेखन कार्य आगे बढ़ाया। दोपहर को गुरुजी का गाइडेड ध्यान किया। शाम को अख़बार की पहेलियाँ हल कीं।पापा जी से रोज़ की बातचीत हुई। सांध्य भ्रमण, ध्यान, रात्रि भोजन और रात्रि भ्रमण। इस समय वह दिन का अंतिम कार्य कर रही है, डायरी लेखन। जीवन कितना सहज हो गया है, न ऊधो का लेना ना माधव का देना ! न टीवी पर समाचार सुने न ही अख़बार में हेडलाइन्स के अलावा कुछ ज़्यादा पढ़ा। कुछ किताबें मंदिर में रखी हैं, उनमें से एक-एक पन्ना सुबह-शाम पढ़ने के अलावा और कोई किताब भी नहीं पढ़ी।सेवा के नाम पर अनुवाद कार्य चल रहा है और ब्लॉग के माध्यम से थोड़ी बहुत साहित्य सेवा ! योग वसिष्ठ पढ़ते समय कैसी मस्ती का अनुभव होता है, गुरुजी के साथ ध्यान करते समय भी। वह कितना काम कर रहे हैं। उनकी पुस्तक पढ़ना भी एक सुखद अनुभव है। 


आज सुबह वे टहलकर आये तो जून ने कहा, ड्राइव पर चलते हैं। बादलों के कारण सूर्योदय के दर्शन नहीं हुए। ठंडी हवा का आनंद लिया, आम ख़रीदे, तस्वीरें उतारीं। शाम को जून ने एक जूम मीटिंग अटेंड की, जिसमें बताया गया, दुनिया को पूर्ववत होने में अभी काफ़ी समय लगेगा और स्थिति शायद कभी भी पूरी तरह नार्मल न हो।  भविष्य ही बताएगा कि आगे क्या होने वाला है।जून ने एक मित्र से बात की, उनके पुत्र का विवाह अगले महीने होने वाला है। 


आज सुबह नूना टहलकर आयी तो बिना किसी आलंबन के ध्यान किया। उस समय ऐसा लग रहा था जैसे ईश्वर ने ही यह सब तय किया है। हर आत्मा के लिए एक निर्धारित काल होता है जब उसे पूर्ण सत्य का बोध हो। उसके जीवन में भी वह दिन कभी न कभी आएगा, पर तभी न जब उसके लिए प्रयास जारी रहेगा। 


आज शाम को टहलने गये तो गाँव की तरफ़ निकल गये, कई मज़दूर एक छोटी सी पहाड़ी को काट कर मिट्टी निकाल रहे थे। पहाड़ी पर नारियल के कुछ वृक्ष बचे थे, वे भी कुछ दिनों में उखाड़ कर फेंक दिये जाएँगे, जैसे अब तक न जाने कितने पेड़ काट दिये गये होंगे। ज़मीन को इस तरह काट कर मिट्टी को बेचा जाता है, यह पहली बार ही देखा। आज बहुत दिनों बाद जून के पुराने मित्र व भाभी जी से बात हुई। उनकी बातें बहुत मज़ेदार होती हैं। बनारस की रीतियों, पूजापाठ, त्योहारों के बारे में बहुत जानकारी है उन्हें। दिवाली तक के कितने ही उत्सवों को गिना गयीं, बाद में सोचा रिकॉर्ड क्यों नहीं कर ली उनकी बातें। बनारसी लहजे के कारण कुछ समझ में आया कुछ नहीं। अगले महीने होने वाले बेटे के विवाह में बुला रही थीं। घर में बँटवारे की बात भी चल रही है, इसका भी तनाव है उन्हें, और बड़ा बेटा अपनी पत्नी व पुत्र से अलग रहता है, इसकी भी चिंता है। फिर भी बहुत आराम से सारी बातें करती रहनों। बनारस के लोगों की यह ख़ासियत है। सुबह छत पर प्राणायाम के समय धुआँ आने लगा था। पड़ोस में जो घर बन रहा है, मज़दूर खाना बनाना शुरू कर रहे थे शायद, अब वे झोपड़ी छोड़कर आधे बने घर में ही रहने लगे हैं। दूसरी मंज़िल बननी आरंभ हो गई है। अभी कुछ महीने और लगेंगे, तब तक शोर और यह परेशानी झेलनी पड़ेगी।  


Sunday, July 13, 2025

नारंगी बादल


नूना का जन्मदिन था, सबसे पहले पापाजी का फ़ोन आया। वे लोग तैयार होकर प्रातः भ्रमण के लिए निकले ही थे कि बच्चे आ गये।सोनू ब्लूबेरी केक बनाकर लायी थी। नन्हे ने उसे एप्पल का डेस्क टॉप दिया, जिसका कीबोर्ड बहुत स्लीक है और स्क्रीन साढ़े तेइस इंच है।जून ने मैंगो शेक बनाया, ब्रोकोली राइस और बूँदी का रायता। दस बजे वे लोग चले गये। दोपहर व शाम को भी सभी भाई-बहनों व सखियों के फ़ोन आते रहे। फ़ेसबुक पर भी सौ से अधिक लोगों ने शुभकामना दी। नूना के प्रकृति प्रेम और साहित्य से लगाव का ही यह परिणाम है। इन लोगों में से कितनों से तो वह मिली भी नहीं, अधिकतर असम के हैं। आज सुबह आकाश पर नारंगी रंग के बादल थे, छत पर सूर्य नमस्कार करते हुए बाल सूर्य की किरणों को अंतर में भरना कितना सुखद है। टहलने जाने से पूर्व वह कुछ न कुछ लिखती है, बाद में वैसा एकांत नहीं मिलता न बाहरी न आंतरिक। भोर का समय जब पिछले दिन के सब उहापोह साफ़ हो चुके होते हैं, मन बिलकुल ख़ाली होता है, तब ही कुछ नया कहा जा सकता है, सोचा जा सकता है। जून आजकल अपने मोबाइल में ज़्यादा व्यस्त रहते हैं, उन्हें नये-नये व्यंजन बनाने का भी शौक़ है, आज ज्वार के आटे में सहजन के पत्ते डालकर रखे हैं। छोटी बहन का फ़ोन आया, उसकी छोटी बिटिया पालतू पूसी के जाने का दुख भुला नहीं पायी है, वह घर में अकेले नहीं रह पाती, किसी मॉल या रेस्तराँ में जाकर काम करती है या पढ़ती है। पापा जी ने व्हाट्सएप पर पढ़कर घर, मकान, होम, बंगला, हवेली, फ्लैट आदि की परिभाषाएँ बतायीं, सभी अच्छी थीं। घर या होम जहाँ हवन होता है, मकान में दीवारों के कान होते हैं, बंगला यानी पड़ोसी से दूरी, हवेली यानी हवादार, फ्लैट जो लोन लेकर ख़रीदा गया हो। 


आज नूना ने अपनी लिखी एक पुरानी कविता पढ़ी तो लगा उसकी काव्य क्षमता पहले से कम हो गई है।आज दीदी का जन्मदिन है, उन्हें कविता भेजी। नये कंप्यूटर पर लिखना आरंभ किया। छोटा भाई हफ़्तों हैदराबाद के एक होटल में रहकर आज घर पहुँच गया।सुबह टहलने गये तो रास्ते में रेत दिखी थी, गुलदाउदी की पौध लगाने के लिए अच्छी है, जब नूना ने जून से कहा तो वह कार ले आये। रेत लेने के बाद उन्होंने कहा, कुछ दूर तक होकर आते हैं। वैक्सीन की दूसरी डोज़ लगाने के बाद से नूना कहीं भी नहीं गई थी।सोसाइटी के मुख्य द्वार से थोड़ा ही आगे गये होगें तो सूर्योदय के दर्शन हुए, उसके साथ ही लाल फूलों से लदे  हुए गुलमोहर के पेड़ आकर्षित कर रहे थे।नाइस रोड तक जाकर वे वापस लौट आये।   


अभी कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण से लौट कर आये हैं। आजकल सबसे पहले देखना होता है, कौन सी सड़क ख़ाली है, दायें, बायें या सामने वाली, कोरोना काल में लोगों से बचकर निकलना ही ठीक है। मास्क पहनने के बावजूद भी दूर से कोई दिख जाये तो सड़क बदल लेते हैं, ऐसा कई लोगों को करते भी देखा है। यह कैसा वक्त आया है कि आदमी, आदमी से डरने लगा है। आज अख़बार में एक चित्र देखा जिसमें सामूहिक अस्थि विसर्जन किया जा रहा है। लोग अपने मृत रिश्तेदारों की अस्थियाँ लेने आये ही नहीं तो सरकार को यह करना ही पड़ा। मन्त्रोच्चरण के साथ फूलों से उन्हे सजाकर यह रस्म की गई। 


नन्हे से बात हुई, इस बार वे लोग शनिवार को आयेंगे। सोनू ने बताया, उसे अपनी कंपनी में अब से ग्लोबल टीम में काम करना होगा।आज दोपहर तीन बजे से वर्षा शुरू हुई तो लगातार तीन घंटे होती रही। छह बजे वे टहलने गये, एक घर के सामने एंबुलेंस खड़ी देखी, शायद कोई मरीज़ घर लौटा हो या जाने वाला हो इलाज के लिए, उन्होंने रास्ता बदल लिया और कुछ पता नहीं किया। यदि सामान्य समय होता तो अवश्य ही वहाँ जाकर पूछ लेते। कर्नाटक में लॉक डाउन की अवधि और बढ़ा दी गई है। नन्हे ने लिखा, उसने सरेंडर का अभ्यास शुरू कर दिया है, ईश्वर उसे इस मार्ग पर आगे बढ़ने का साहस दे। नूना ने आज योग वशिष्ठ का कुछ अंश पढ़ा, उसमें चेतना का अद्भुत वर्णन है, पढ़ते-पढ़ते ही जैसे ध्यान लगने लगता है। 


विश्व पर्यावरण दिवस पर बच्चे आज गुड़हल के दो पौधे लाये, एक नारंगी व दूसरा गुलाबी रंग के फूलों का है। आज ही लॉन लगाने के लिए घास भी आ गई है। आज पड़ोसन ने निकट ही बनी एक नयी सोसाइटी बोटेनिका के बारे में बताया। वे देखने गये, हरियाली का एक सागर हो जैसे, साफ़-सुथरी सड़कें और फूलों के वृक्षों से सजी थी। उसी में से होकर एक सड़क निकट के एक गाँव में जाती है। वे दूर तक चलते गये, पहले कच्ची सड़क थी, फिर पक्की सड़क आ गई। शाम को पापा जी से बात हुई, उन्हें वृद्धावस्था में होने वाली परेशानियाँ हो रही हैं। वे बहुत नियम से रहते हैं पर तन-मन पर किसी का वश तो नहीं है। 


  


Friday, July 11, 2025

चीटियों की क़तार




आज संस्कार पर गुरु माँ को सुना,  कह रही थीं, मानव शरीर में अरबों कोशिकाएँ और जीवाणु रहते हैं। उन्हें कुल मिलाकर एक ‘मैं’ का निर्माण होता है, इसी प्रकार अरबों जीवों को मिलकर ईश्वर का। जैसे ‘मैं’ उन जीवाणुओं के जोड़ से कहीं अधिक है, ईश्वर भी सब जीवों के जोड़ से अधिक है। आज जून की, छोटी बहन से बात हुई, भांजे ने इन्फ़ोसिस का जॉब छोड़ दिया है और डेलॉयट में काम कर रहा है। उसे आश्चर्य होता है, आजकल बच्चे हर दो साल के बाद कंपनी बदल लेते हैं, उनमें कंपनी के प्रति अपनेपन का भाव पैदा भी नहीं होता होगा। शायद वे मोह-माया से ऊपर उठ चुके हैं अथवा तो अधिक माया का मोह उन्हें ऐसा करने पर विवश करता है। इस दुनिया में चमत्कार भी होते हैं। यदि इस शब्द का अस्तित्त्व है तो इसको अर्थवान भी होना होगा। कितने ही संत, महात्मा व अवतारी पुरुष चमत्कार करते हैं।आज एक स्वामी जी के मुख से सुना, एक महिला और उनकी पुत्री ने उन्हें आकर धन्यवाद दिया, यह कहकर कि उन्होंने पुत्री के एक असाध्य रोग का इलाज बताया था। स्वामी जी ने कहा, मैंने उन दोनों को पहली बार देखा था, पर उनकी श्रद्धा और विनम्रता देखकर उनपर अविश्वास नहीं कर सका, शायद परमात्मा ने ही कोई लीला रची होगी। शाम को पापा जी से बात हुई, वह आजकल ओशो का शांडिल्य सूत्र पढ़ रहे हैं।जून ने उनके लिए ग्रीन टी और बिस्किट भेजे हैं।नूना ने उनके लिए लिखी सारी कविताओं का एक संकलन बनाया है, ‘पितृ दिवस’ पर उन्हें भेजने का विचार है।  


शाम को भोजन के बाद नूना किचन में गई तो नन्हे का ध्यान आया, तभी फ़ोन की घंटी बजी।उसे पंद्रह मिनट का समय मिला था, सो फ़ोन कर लिया।काफ़ी व्यस्त चल रहा है, दिन भर कॉल्स चलती हैं। कह रहा था, सोनू और वह दोनों लंच पर मिलते हैं फिर सीधा रात्रि भोजन पर। घर से काम करने पर व्यस्तता अधिक बढ़ गई है। इतवार की सुबह छह बजे आयेंगे, नौ बजे वापिस चले जाएँगे, क्योंकि दस बजे के बाद बाहर नहीं रह सकते।


कर्नाटक में एक दिन में तीस से पैंतीस हज़ार कोरोना के केस मिल रहे हैं आजकल। कोरोना के साथ ब्लैक फ़ंगस का प्रकोप भी बढ़ रहा है। ताउते के साथ याम तूफ़ान भी आने वाला है। प्राकृतिक आपदाएँ अब जल्दी-जल्दी आने लगी हैं। इज़राइल और फ़िलस्तीन में युद्ध जारी है, शायद इस बार निर्णायक हो, पर यह भी एक कल्पना ही है।कोई भी युद्ध निर्णायक नहीं होता, भविष्य में इसके सुलगने के आसार बने ही रहते हैं। आज एक पोस्ट प्रकाशित की, एक कविता, जो दोपहर को घट रही अनुभूति के दौरान लिखी थी।ऐसा आजतक चार-पाँच बार हो चुका है या आठ-दस बार, इससे अधिक नहीं। कोई घेरे रहता है और भीतर कुछ महसूस होता है, जिसे शब्दों में ढालकर भी नहीं ढाला जा सकता। दीदी आजकल  स्पोकन अंग्रेज़ी का अभ्यास सीख रही हैं।आजकल हैरी पॉटर पढ़ रही हैं।पापा जी से आज अध्यात्म चर्चा हुई। उनकी बातचीत का कुछ अंश रिकॉर्ड भी किया।अहंकार का परित्याग करके ही मानव आत्मा का अनुभव कर सकता है, जो यह सुख पा लेता है उसे अहंकार सताये ऐसा होना संभव नहीं है। 


जून से एक ऑन लाइन कोर्स करने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया, जीवन की धारा जिस गति में चल रही है, वह उसी में संतुष्ट हैं। वे सभी अपने अपने कम्फ़र्ट जोन में सुरक्षित रहते हैं और सोचते हैं, यही जीवन है। नूना को जीवन से कोई शिकायत नहीं है, जो जैसा है, वैसा ही स्वीकार्य है। नन्हे और सोनू ने अगले महीने आने वाले उसके जन्मदिन के लिए एक सुंदर उपहार भेजा है, अल्मूनियम की एक केतली, जिसे रंगों से सजाना है, नूना ने सोचा, कल से ही रंगना आरंभ करेगी। छोटी बहन का फ़ोन आया, उसे आजकल कभी अठारह घंटे, कभी चौबीस घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। कोरोना के कारण मरीज़ अधिक हैं। तीन वर्ष पूरा होने के बाद प्रैक्टिस जारी रखने के लिए एक परीक्षा भी देनी है। उनकी पालतू बिल्ली भी बीमार हो गई है।उसके बचने के आसार नज़र नहीं आते।  


आज सुबह टहलते समय सड़क पर चीटियों की बहुत लंबी क़तार देखी, वीडियो बनाया, अनोखा दृश्य था। एक टिटहरी दीवार पर बैठकर अपना गीत गा रही थी। पेड़ों पर आम भी अब काफ़ी बड़े हो गये हैं, पकने को तैयार। 


आज का दिन भी पूर्णता को प्राप्त होने को है। सुबह सुहानी थी, वॉकिंग मैडिटेशन किया फिर छत पर साधना। जून आजकल गर्मी व मच्छर के डर से नीचे कमरे में योगासन करते हैं, पर वहाँ हवा भी चलती है और मच्छर भी नहीं होते, ख़ैर, पसंद अपनी अपनी ! जीवन के इतने वर्ष बीत जाने पर नूना को यह समझ में आया है कि हरेक आत्मा को अपनी तरह से जीने की स्वतंत्रता है और कोई किसी को बदलने का प्रयास न करे, क्योंकि संस्कारों का परिवर्तन अपने ही हाथों में होता है, किसी और के प्रभाव में आकर किया परिवर्तन स्थायी नहीं होता। 


बाहर किसी ने आग जलायी, धुआँ ही धुआँ हो गया है, एसी के द्वारा कमरे तक उसकी गंध आ गई है।देवों के देव में पार्वती के मन की अस्थिरता को दिखाया गया। प्रकृति में विक्षोभ होना स्वाभाविक है, सत, रज और तम से बनी है। यास तूफ़ान से कई राज्यों में नुक़सान हुआ है। 


Friday, January 17, 2025

काली सफ़ेद चिड़िया

काली सफ़ेद चिड़िया


आज शाम के बाद से ही तेज वर्षा हो रही है। रह-रह कर बिजली भी चमक रही है। ऐसे में घर से बाहर निकलना ठीक नहीं है, सुबह मौसम ठीक रहा तो वे भ्रमण के लिए जाएँगे। ‘मेरे साईं’ धारावाहिक में भी आज महामारी का चित्रण देखा, गाँव वालों में कितना भय फैल  जाता है महामारी के नाम से ही। कल गुरुजी का जन्मदिन है, शाम को वह ध्यान करायेंगे। अक्षय तृतीया पर लिखे एक लेख का अनुवाद किया। एक लेख का अनुवाद अभी शेष है, सेवा का यह छोटा सा कार्य उसके मन को आनंद से भर देता है। प्रातः भ्रमण से लौटते समय मुक्त गगन में उड़ते और कलरव करते सुंदर पक्षी देखे, चील, गिलहरी, लाली और छोटी सी काली सफ़ेद चिड़िया, जो फुदक फुदक कर चलती है। शाम को जमैका चेरी तोड़ीं और फूलों की तस्वीरें उतारीं। छोटी भांजी के लिए जन्मदिन पर एक छोटी सी कविता लिखी। परसों रात को रसोईघर में चूहे के आगमन के कुछ चिह्न मिले।प्लेटफ़ार्म पर काले दाग, डिश वॉशर के नीचे से खूबानी की गुठली मिली, पर उसके बाद से उसका कोई पता नहीं है। दोपहर को डेस्क टॉप चलना बंद हो गया, शायद कल कुछ हल निकले। संभवतः नया ख़रीदना होगा। बगीचे के लिए कार्पेट ग्रास और गमलों के लिए मिट्टी का भी ऑर्डर करना है। बड़े शहरों में घास और मिट्टी भी ख़रीदनी पड़ती है। 


आज सुबह शंख प्रक्षालन और धौति क्रिया की, दोपहर से सिर में हल्का दर्द है। कल शाम को वजन देखा था, और आज से मिशन ‘वजन घटाओ’ शुरू किया है, अब कुछ तो असर होना ही था। सुबह भांजी की कविता में कुछ पंक्तियाँ और जोड़ कर उसे भेजी तो उसका फ़ोन आ गया। बहुत सी बातें उसने बतायीं, बड़ा बेटा कराटे सीखता है और टेनिस भी खेलता है। बच्चे आपस में झगड़ते नहीं है, मिलजुल कर खेलते हैं। उसने जॉब छोड़ दी है और बच्चों की देखभाल में व्यस्त रहती है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने कहा, आत्मा-परमात्मा की बात अलग है और दुनियादारी अलग है, संभवतः वह कहना चाहते थे, व्यावहारिक सत्य और परमार्थक सत्य दो भिन्न बारे हैं। उनसे इज़राइल के बारे में भी बात की। चिर शत्रु इज़राइल और फ़िलस्तीन में युद्ध छिड़ गया है, हमास ने राकेट दागे और इज़राइल ने बम बरसाए।रात्रि भ्रमण के समय नापा के मंदिर में दीपम तेल रखा, शाम को कोई न कोई आकर वहाँ दिया जला देता है। 


आज सुबह से ही ठंडी हवा चल रही है जो ‘तौकते’ चक्रवाती तूफ़ान के कारण है। यह तूफ़ान अरब सागर की ओर बढ़ रहा है। चार दिन बाद गुजरात पहुँचेगा। कल भारी वर्षा होने की आशंका है। कल से महरी नहीं आएगी, उसके गाँव में कोरोना के कई केस हैं, न आना ही बेहतर है। कर्नाटक में स्थिति में सुधार नहीं आ रहा है। टाइम्स ग्रुप की प्रमुख  इन्दु जैन, जिनका देहांत दो दिन पहले कोरोना के कारण हो गया था, के बारे में गुरुजी का लेख आज अख़बार में पढ़ा, वह सन् ८० से उन्हें जानते हैं। अध्यात्म की राह पर चले बिना कोई सत्य को नहीं जान सकता और उसको अपनी उस क्षमता का आभास नहीं होता जो कर्म बंधन में नहीं बांधती। आज सब्ज़ी वाला गेट तक आकर फल आदि दे गया। 


अभी-अभी वे रात्रि भ्रमण के समय चन्द्र दर्शन करके आये हैं। कोरोना के केस सोसाइटी में कुछ घट गये हैं।शाम को पड़ोसिन मिलीं, उनकी बहू के परिवार में सभी इससे ग्रस्त हैं। दो व्यक्तियों (पति-पत्नी) की मृत्यु का समाचार भी उन्होंने बताया। न जाने कितने लोगों ने अपने प्राण गँवा दिये हैं इस महामारी में। कितने बच्चे अनाथ हो गये हैं और कितने माता-पिताओं ने अपनी संतानें खो दी हैं। शाम को पापाजी से बात हुई,  उन्होंने अध्यात्म को पूरी तरह आत्मसात कर लिया है। जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण बहुत सुलझा हुआ है। वह इज़राइल के बारे में बता रहे थे, छोटा सा देश है और उसने स्वयं को कोरोना मुक्त कर लिया है।भारत को ऐसा करने में कई साल लग जाएँगे।नन्हे से बात हुई, वे लोग अगले रविवार सुबह जल्दी आ सकते हैं, दस बजे से पहले घर वापस जाना होगा। ‘देवों के देव’ में आज महादेव ने भक्त और भगवान के संबंध के बारे में बताया। भक्त जिस क्षण भगवान का स्मरण करता है, भगवान उस वक्त तो उसके साथ होते ही हैं, पर जिस क्षण वह अपने मन में उनका अनुभव नहीं कर रहा होता, उस वक्त भी उनका हाथ उसके सिर पर होता है।उनके अनुसार भक्त और भगवान कहने को ही दो होते हैं, वास्तव में उनमें कोई भिन्नता नहीं होती।    



Wednesday, December 4, 2024

दूज का चाँद

दूज का चाँद 


आज शाम को भी वे कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए टहलने नहीं गये। अब तो लॉक डाउन की अवधि भी बढ़ा दी गई है। एक ही शहर में रहने के बावजूद नन्हे को घर आये एक महीना होने वाला है। अब शायद वे लोग  माह के अंत में उसके जन्मदिन पर ही आयेंगे। लोगों ने पूजास्थलों पर जाना बंद कर दिया है, त्योहारों पर मेहमानों को बुलाना भी। कोरोना ने सबको सीमाओं में बंधना सिखा दिया है। ननदोई जी से बात हुई, उन्होंने बताया, परिवार के चार लोग अपने-अपने कमरों में बैठकर अपने-अपने मोबाइल से एक साथ लूडो खेलते हैं। उनके एक मित्र के परिवार में गाँव में ब्याह हुआ था, सौ लोग एकत्र हुए थे, कई लोगों को संक्रमण हो गया। कई देशों ने भारत को सहायता सामग्री भेजनी आरम्भ की है।देश में पहली बार एक दिन में चार लाख केस मिले हैं। 


प्रातः भ्रमण के समय शिव के मस्तक पर सजे चंद्रमा सा सुंदर चाँदी का सा चाँद गगन में चमक रहा था। शाम को पापा जी से बात हुई, वह सदा की तरह उत्साह से भरे थे।ज्ञान से भरी बातों के अलावा उन्होंने और भी कुछ बातें बतायीं। कह रहे थे, विविध भारती के कार्यक्रम विविधा पर रवींद्र नाथ टैगोर की कहानी ‘मँझली बहू’ सुनी। उनकी गली में गैस का चूल्हा ठीक करने वाला आदमी आवाज़ लगा रहा था, उसे बुलाया और अपना ३९ वर्ष पुराना गैस का चूल्हा ठीक करवाया। कारीगर ने कहा चार-पाँच वर्ष पहले भी आपने ठीक करवाया था। उसने पाइप बदल दी और नोजल्स भी। उसे याद है, जब वह कॉलेज में थी तब यह चूल्हा घर में आया था, एशियाड गेम्स हुए थे उस साल। उनका नया कलर टीवी भी तब आया था।दस दिन के बाद आज से नैनी ने काम पर आना शुरू कर दिया है। बच्चों ने ‘मातृ दिवस’ पर उसके लिए पाँच किताबों का एक सेट भेजा है। कल है मदर’स डे ।आज एक लेखिका मनोरमा कल्पना को पहली बार पढ़ा, बहुत अच्छा लिखती हैं। प्रकृति से उन्हें बहुत प्रेम है। 


कुछ देर पहले बच्चों से बात हुई, अब वे दोनों ठीक हैं। नन्हे के एक पुराने सहकर्मी के पिता का कोरोना से देहांत हो गया। शुरू में पाँच-सात दिन वह घर पर ही थे, फिर मुश्किल से अस्पताल में बेड मिला।पर घर आकर दुबारा स्वस्थ जीवन जीना उनके भाग्य में नहीं था, हृदयाघात हो गया। यह आपदा प्रकृति द्वारा आयी है या मानवों द्वारा लायी गई है, यह कोई नहीं जानता।पापाजी ने आज राजदीपसर देसाई के एक वीडियो के बारे में बताया, वह मोदी जी की आलोचना कर रहे थे। लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। आज एक दुखद समाचार और मिला, उनकी सोसाइटी के फ़ैसिलिटी मैनेजर का देहांत हो गया, कुछ दिन पहले ही वह कोरोना से संक्रमित हुए थे। उनकी बेटी अभी एक वर्ष की है, पत्नी और माता-पिता भी उन पर आश्रित थे। भीतर तक हिला गया यह समाचार, तब समझ में आया जिनके प्रियजन जा रहे हैं, उन्हें कैसा लगता होगा। काफ़ी देर तक मन में पीड़ा बनी रही। स्कूटर पर आते-जाते सोसाइटी के सभी लोगों ने अक्सर उनको देखा था, अपने काम के प्रति बहुत समर्पित थे, सभी के साथ उनका अच्छा संबंध था। 


श्रद्धा और सबूरी का छोटा सा मंत्र साईं ने बरसों पूर्व बल्कि सौ वर्ष पूर्व दिया था। इस छोटे से मंत्र में कितना बड़ा ज्ञान छिपा है। धैर्य के साथ यदि कोई चले तो जीवन की कोई भी परिस्थिति उसे विचलित नहीं कर सकती, और श्रद्धावान को ही ज्ञान मिलता है, यह तो भगवद् गीता में भी कहा गया है। आज सुबह की साधना के बाद उसे भीतर चट्टान जैसी स्थिरता का अनुभव हो रहा है और एक शांति का भी। अब साधना सहज हो गई है, जैसे स्वभाव का ही एक अंग, और लेखन भी ऐसे ही है। लिखने के लिए भी कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता, कोई जैसे लिखवा लेता हो। वैसे जब यह सारी सृष्टि ही किसी व्यवस्था के द्वारा चलायी जा रही है तो चेतना भी पहले से ही मौजूद रही होगी। पाँच तत्व भी रहे होंगे। परमात्मा हर जीव के भीतर विद्यमान है। शिव कहते हैं, जब तक देह में प्राण हैं, वह जीव के साथ हैं, अर्थात उनमें हैं, और जब प्राण नहीं रहते तब जीव शिव में ही रहते हैं। एक शक्ति है जो देह व मन के माध्यम से व्यक्त हो रही है। जब वह स्वयं में टिक जाती है तो वही आत्मा है, और जब वह मन, बुद्धि के माध्यम से व्यक्त होती है, जीव कहलाती है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने बताया, कोरोना के कारण सरकार पर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी।सरकार ने उसका क्या जवाब दिया, यह भी बताया। जून ने कोरोना काल में ईवी की देखभाल पर एक वेबिनार में भाग लिया।जिसमें एक सुझाव यह भी दिया गया,  बीच-बीच में कार के इंजन को चलाना है, नहीं तो बैटरी ख़राब हो जाएगी।   


Monday, November 18, 2024

श्रमिक दिवस


श्रमिक दिवस 


आज मई दिवस है। पिछले वर्ष लिखी एक कविता फ़ेसबुक पर प्रकाशित की। शाम को पापाजी ने कहा, उन्होंने पढ़ी यह कविता और मज़दूर क्रांति की बात उन्हें याद आ गई। कार्ल मार्क्स को याद किया, जिसने कहा था, दुनिया के मज़दूरों एक हो जाओ। वार्तालाप में उन्होंने मज़दूरों के योगदान को सराहा, कि उनके बिना मानव के लिए निर्माण का कोई भी काम संभव नहीं है। कल जून के एक पुराने सहकर्मी के निधन का समाचार मिला, उन्हें कई वर्षों से किडनी का रोग था। जीवन और मृत्यु के आगे मानव का कोई ज़ोर नहीं चलता। चिकित्सा शास्त्र की इतनी प्रगति के बावजूद भी लोग असमय मृत्यु को प्राप्त होते हैं, तब भाग्य को मानने के अलावा कोई विकल्प नज़र नहीं आता।जीते जी कोई मृत्यु को प्राप्त न हो इतना तो उसके हाथ में है, यानी उसके उत्साह की, उसके प्रेम की और उसके आनंद की मृत्यु न हो ! जून के एक अन्य पुराने मित्र की पत्नी को कोरोना की वजह से शायद अस्पताल में जाना पड़ सकता है। नन्हे से बात हुई, अब वे लोग बेहतर हैं। उनके नीचे वाले फ़्लैट में एक वृद्धि व्यक्ति की मृत्यु  हो गई। दीदी ने फ़ोन पर बताया, उनकी पहचान की तीन महिलाएँ और एक पुरुष भी कोरोना की भेंट चढ़ गये हैं। नैनी ने बताया, सोसाइटी में कोरोना से एक व्यक्ति चला गया है, उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं। अख़बार में पढ़ा, कितने ही बच्चों के दोनों माता-पिता में से एक की मृत्यु हो गई।न जाने कितने जीवन अभी काल के गाल में समाने वाले हैं। महामारी का यह भीषण रूप अति भयानक है। 


आज सुबह वह उठी तो मन शांत था, शायद रात्रि स्वप्न में कोई अनुभव घटा हो। जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति व तुरिया चारों का अनुभव मानव करता है।सुबह टहल कर आये तो दिन निकल आया था, आजकल सूर्य के दर्शन नहीं  हो रहे हैं, बदली बनी रहती है। प्राणायाम करते-करते कभी आँखें खोलकर देखें तो सामने बादलों से झांकता सूर्य दिखाई देता है पर झट ही छुप जाता है। सुबह पड़ोसन से बात हुई, उन्होंने भी कहा, सोसाइटी में दो व्यक्ति जा चुके हैं और ग्यारह घरों में मरीज़ हैं।शाम को पापाजी से बात हुई, वह आशा और विश्वास से भरे थे। उनका ज्ञान बहुत गहरा है, उन्हें अब मृत्यु से जरा भी भय नहीं है। ओशो की लाओत्से पर लिखी किताब वह कई बार पढ़ चुके हैं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी जीत गई है और वे बीजेपी कार्यकर्ताओं को हिंसा का शिकार बना रहे हैं। सत्ता परिवर्तन का एक अच्छा अवसर पाकर भी वहाँ की जनता ने मोदी जी को नकार दिया। शाम को जून के मित्र का फ़ोन आया।उसकी पत्नी जिसे कुक के कारण कोरोना हुआ, अब ठीक हो रही है, ऑक्सीजन लेवल ९० हो गया है। अस्पताल से लौटते समय वह उसे पार्क होटल में खाना खिलाने ले गये। उसे आश्चर्य हुआ, कोरोना मरीज़ होते हुए इस तरह होटल जाना ठीक तो नहीं है न, यदि बाद में जाँच हुई तो सजा भी हो सकती है।


आज का दिन भी कोरोना की खबरों के साथ शुरू हुआ। दोपहर को नन्हे ने बताया,  कर्नाटक में अगस्त तक तो हालात सुधरने वाले नहीं हैं। उसके बाद तीसरी लहर आने की आशंका भी है। शायद पूरे प्रदेश में कड़ा लॉक डाउन लगाना पड़ेगा।समाचारों में बिहार के अस्पताल की दुदशा देखकर मन को बहुत पीड़ा हुई। ८०० करोड़ का एक अस्पताल बिना किसी सुविधा के भगवान भरोसे चल रहा है। अस्पतालों में भ्रष्टाचार भी बहुत बढ़ रहा है।नन्हे ने कहा, सीटी स्कैन के लिए उन्हें प्रति व्यक्ति १२००० लगे जबकि रेट २५०० का है। आज सुबह उन्हें उठने में थोड़ी देर हुई, टहल कर आये तो छत पर धूप बढ़ गई थी। टीवी के सामने कार्पेट पर बैठकर मुरारी बापू को सुनाते हुए योगासन किए। उन्होंने श्री कृष्ण के जीवन के अंतिम दिनों के बारे में बताया। श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब की पत्नी लक्ष्मणा थी, जो दुर्योधन की पुत्री थी, यह जानकर भी आश्चर्य हुआ।आज ब्लॉग पर तीन पोस्ट प्रकाशित कीं, कोई सहृदय पाठक या पाठिका मिल जाये तो लिखना सफल हो जाता है। 


आज सुबह साढ़े तीन बजे अपने-आप ही नींद खुल गई थी। ध्यान करने बैठी, परमात्मा के सिवा कोई आश्रय नहीं है, यह तो सुना था पर आजकल तो यह बात शत-प्रतिशत सही सिद्ध हो रही है। जगत जिस तरह एक वायरस से जूझ रहा है, कहाँ, कौन संक्रमित होगा और उसकी जान को कितना ख़तरा होगा, कुछ भी कहा नहीं जा सकता। ऐसे में परमात्मा के नाम का स्मरण ही मन को मुक्त रखता है। शाम को पापा जी से बात हुई। वह ठीक हैं, कभी-कभी उम्र के तक़ाज़े के अनुसार उनका शरीर कमजोरी की शिकायत करता है, पर एक नियमित दिनचर्या हैं उनकी। हर दिन दो पेज लिखने का वर्षों का क्रम है, जिसे पूरा करते हैं। अख़बार पढ़ना, संगीत सुनना और आजकल मोबाइल पर वीडियो देखना। नन्हे का फ़ोन आया, उनके डॉक्टर्स दिन में दस हज़ार कॉल्स ले रहे हैं आजकल, वे लोग सभी तरह के डॉक्टर्स को कोरोना के बारे में सलाह देने को कह रहे हैं। आज बैंगलुरु में साढ़े तीन लाख सक्रिय मामले हैं, पूरे देश में ३६ लाख, यह आँकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में छह गुना अधिक है। आज असमिया सखी का फ़ोन आया, अमेरिका में रहने वाली उसकी नन्ही पोती स्कूल जाने लगी है, कक्षा में चार ही विद्यार्थी हैं। कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाता है। पश्चिम बंगाल में हिंसा ख़त्म नहीं हो रही है। 

   


Tuesday, November 12, 2024

सफ़ाई वाला रोबॉट


 सफ़ाई वाला रोबॉट

आज देर शाम को मूसलाधार वर्षा हुई, वैसी ही जैसी असम में होती थी, अप्रैल के महीने में। बाहर नहीं जा सके, बालकनी में टहलते हुए प्रकृति के इस आनंद उत्सव का आनंद लिया।नन्हे का वीडियो कॉल आया, उनका घर अब पर्याप्त व्यवस्थित हो गया है। घर की सफ़ाई के लिए एक रोबोट डीबॉट लिया है, वह अपने आप ही एआई के द्वारा घर का नक़्शा बना लेता है और स्वयं को चार्ज भी कर लेता है। सफ़ाई में झाड़ू के साथ पोछा भी लगा लेता है। साथ ही उसने यह भी कहा, उसकी कंपनी द्वारा टेली मेडिसिन का उपयोग करने के लिए एक दिन में ग्यारह हज़ार लोगों ने डॉक्टर से सलाह लेने के लिए फ़ोन किया। डेढ़ हज़ार लोगों को उन्हें मना करना पड़ा, क्योकि इतने डॉक्टर्स ही नहीं हैं। पिछले वर्ष कोरोना की लहर आने पर छह हज़ार लोग एक दिन में फ़ोन करते थे, इस वर्ष सारे रिकॉर्ड टूट गये हैं। कल से दस मई तक लॉक डाउन घोषित कर दिया गया है।पिछले वर्ष भी इस समय देश में कोरोना बंद था। परमात्मा ही अब मददगार हो सकता है, हो ही रहा है। उसके सिवा कौन है जो दुनिया को इस आपदा से सुरक्षित निकाल कर ले जाये।कल साढ़े ग्यारह बजे उन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज के लिए श्री श्री आयुर्वैदिक अस्पताल जाना है।आज शाम को पार्क संख्या दो से लाल-लाल पकी हुई जमैका चेरी तोड़ीं।


सुबह-सुबह प्राणायाम का महत्व बढ़ गया है, क्योंकि प्राण ही औषधि है, आजकल यह बात सत्य सिद्ध हो रही है। आज अस्पताल आने-जाने में डेढ़ घंटा लगा।एक महिला मिली जो निकट की ही एक सोसाइटी में रहती हैं, कहने लगीं, आपको आश्रम में देखा है। ‘विपरीत मूल्य एकदूसरे के पूरक होते हैं’, कहकर उन्होंने ग्लोब अस्पताल में हुए अपनी पहली वैक्सीन के अनुभव को बताया। शाम को फिर तेज वर्षा हुई, पर रुकने के बाद सूर्यास्त का सुंदर दृश्य दिखाई दिया। पापाजी से बात हुई। यह अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है, वह नित्य फ़ेसबुक पर उसकी पोस्ट भी पढ़ते हैं। लॉक डाउन के कारण रविवार के बावजूद बच्चे नहीं आ पाये, वैसे भी सोनू का आक्सीजन लेवल अभी भी ९५ है,  छोटी बहन (डाक्टर) ने कुछ दवाएँ लिख दी हैं और कुछ टेस्ट भी, पर आजकल अस्पताल जाना तो मुश्किल है। आज ‘सायना नेहवाल’ पर बनी एक फ़िल्म देखी, अच्छी है।


आज सुबह भ्रमण के समय पंछियों की आवाज़ें पूरे वातावरण को गुंजा रही थीं। कोयल, बगुले, टिटहरी और छोटी काली-सफ़ेद चिड़ियाँ देखीं।बाद में लौटते हुए समाचार सुने, कोरोना के अलावा कोई और समाचार नहीं होता आजकल। पूरे देश में या कहें दुनिया में अफ़रा-तफ़री का माहौल बना हुआ है। लोगों के संक्रमित होने की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कितनी जानें भी जा रही हैं, और ये हालात कब सुधरेंगे, कोई नहीं जानता।सोनू की रिपोर्ट पॉज़िटिव आयी है पर सीटी वैल्यू के अनुसार संक्रमण कम है। नन्हे व सोनू ने सीटी स्कैन करवाया है चेस्ट का, कल रिपोर्ट आएगी। ननद का फ़ोन आया, ननदोई व भांजे को भी कोरोना हो गया है। समाचारों में असम में आये भूकंप के बारे में सुना। 


कल रात को नींद गहरी नहीं थी, फ़िटबिट में गहरी नींद का स्कोर केवल ग्यारह मिनट ही दिख रहा है।शायद इसलिए दिन में थकान सी बनी रही। सुबह जल्दी उठकर टहलने गये, आकाश पर गोल चंद्रमा खिला हुआ अपनी सुषमा बिखेर रहा था। चाँदनी पर न जाने कितनी कविताएँ लिखी गई हैं और सोम से झरते हुए रस से खीर में आने वाली मिठास की कल्पना की गई है। सागर की लहरें भी तो पूर्ण चंद्रमा से मिलने के लिए आकाश में छलांग लगा देती हैं। शाम को जून के एक पूर्व सहकर्मी के कोरोना से हुए देहांत की खबर मिली, वैसे वह कई वर्षों से उन्हें किडनी का रोग था।बच्चों की रिपोर्ट में माइल्ड संक्रमण है चेस्ट में। पापा जी ने विविधभारती के एक कार्यक्रम ‘विविधा’ के बारे में बताया, शुक्रवार को आता है। इसमें संगीतकार नौशाद का इंटरव्यू सुना उन्होंने, और भी देश-दुनिया की बातें कीं।