Monday, December 26, 2022

होप और हम

सुबह उठे आकाश में तारे चमक रहे थे। दिन में धूप भी तेज थी। शाम को माली आया , एक सवा घंटे में सारे गमलों की निराई-कुड़ाई कर दी। बालसम में फूल आ रहे हैं। बगीचे में ही थे कि पड़ोसी छड़ी लेकर टहलते हुए दिखे, कहने लगे, पीछे की लाइन में एक व्यक्ति गिर गया, अस्पताल ले जाना पड़ा है, फ़ालिज का अटैक पड़ा है, उमर भी ज़्यादा नहीं है। सभी को स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना आवश्यक है। कोरोना काल में जीवन कितना क्षण-भंगुर हो गया है । सुबह देखा, गेस्ट रूम में कमांड टेप से लगायी पेंटिंग गिरी हुई थी, शायद तस्वीर वजन के हिसाब से टेप की शक्ति कम थी । शीशा टूट गया, नैनी ने बिना किसी भय के सफ़ाई कर दी। दीदी का फ़ोन आया दोपहर को, बच्चों की बातें बतायीं। बड़ी बिटिया अपनी वेबसाइट खोल रही है, छोटी ने बच्चे के पालन-पोषण के लिए जॉब छोड़ दी है। बड़ा भांजा अपनी कंपनी बंद कर के जॉब लेगा। छोटे की कम्पनी ठीक चल रही है। छोटी बहन और बहनोई आर्ट ऑफ़ लिविंग के स्वयंसेवक बन गए हैं। मृणालज्योति की एक अध्यापिका से फ़ोन पर बात की, स्कूल बंद है, ऑन लाइन क्लासेज़ हो रही हैं। आज एक नया स्थानीय गेम खेला, लकड़ी का बना आधार है और कौड़ियों से खेलते हैं, बहुत रोचक लगा। लाओत्से की पुस्तक भी बहुत ज्ञानवर्धक और रोचक है, उपनिषदों से कम नहीं था उनका ज्ञान। 


रात्रि के नौ बजने को हैं। आज का इतवार काफ़ी अलग था अन्य दिनों की अपेक्षा। नसीरूद्दीन शाह की फ़िल्म ‘होप और हम’ देखी। बहुत अच्छी फ़िल्म है, एक परिवार के सपनों की कहानी, जिसमें एक पुरानी जर्मन फ़ोटो कॉपी मशीन का भी रोल है। शाम को चौलाई, जिसे यहाँ अमरनाथ का साग कहते हैं, दक्षिण भारतीय तरीक़े से बनाया। बहुत अच्छा बना है। कल इसे फ़ोटो सहित छोटी भाभी के फ़ेसबुक पेज पर प्रकाशित करेगी। नन्हे ने एक नया की बोर्ड, माउस तथा पैड लाकर दिया है, अब लिखने का काम करना सरल हो गया है। गुरुजी के श्राद्ध के बारे में लिखे लेख का अनुवाद किया। जून नियमित ध्यान करने लगे हैं तो भीतर की हलचल समझ में आने लगी है। उनके पैरों के तलवों में जलन हो रही थी, शाम को वे हरी घास पर नंगे पैर चलते रहे। सूर्यास्त के बाद आकाश का रंग ग़हरा लाल हो गया था।   


आज शिव सूत्र में घोरा, महाघोरा और अघोरा शक्ति के बारे में पढ़ा। घोरा मातृका शक्ति के कारण व्यक्ति ज़्यादा वाचाल हो जाता है, वह दूसरों को सलाह देता है, क्रोध करता है। महा घोरा के कारण जगत का चिंतन और उन्हीं के बारे में जानने की इच्छा जगती है अघोरा के कारण स्वयं के भीतर प्रवेश होता है, स्वाध्याय तथा साधना की तरफ़ मन जाता है। यदि कोई मातृका शक्ति के स्रोत की तरफ़ जाता है तो अघोरा अपना काम कर रही है। उसकी वाणी में अभी भी कितने दोष हैं। दोष दृष्टि तथा स्वयं को सही मानना, कटाक्ष करना आदि दोषों को अब तो त्याग देना चाहिए। परमात्मा की इतनी महान कृपा के बाद भी यदि कोई अपने संस्कारों को दग्ध नहीं करता तो उसको क्या कहा जाएगा। प्रधानमंत्री ने कल ‘मन की बात’ में खिलौनों की बात की तो कुछ युवकों ने शिकायत की। नीट व ज़ेईई परीक्षाओं की तिथि अभी तक तय नहीं हुई है।कोरोना के मरीज़ों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। 


कल जून की सेवनिवृत्ति को पूरा एक साल हो जाएगा। तीन दशकों से भी अधिक समय उन्होंने असम में गुज़ारा पर ईश्वर की कृपा से उन्हें यहाँ भी हरियाली और वर्षा भरा माहौल मिल गया है। सुबह उठे तो तेज वर्षा हो रही थी, जब कुछ हल्की हुई तो वे छाता लेकर टहलने गए। 

गगन में वायु, 

वायु में अगन, 

अगन में नीर, 

नीर में धरा ! 

ओत-प्रोत हैं सब आपस में 

जैसे मन रहता है उसमें ! 

जो बसा सृष्टि में वैसे ही 

ज्यों गंध धरा में 

ज्योति अगन में 

स्वाद नीर में 

छुवन वायु में 

वह उसमें है जैसे कोई 

लहर सिंधु में !


Thursday, December 22, 2022

चौथ का चाँद


आज दोपहर पूर्व योग की सप्त क्रियाओं में से एक नेति क्रिया की थी, शाम से ही छींकें आ रही हैं, जब थोड़ा सा भी पानी भीतर नासिका में रह जाता है, तब ऐसा होता है।वर्षों पहले एक बार असम में विवेकानंद योग केंद्र में इसे सीखा था, तब से सप्ताह में एक बार तो कर ही लेती है। नेति के बाद ज़्यादातर कपालभाति करने से पानी निकल जाता है पर कभी-कभी कुछ रह जाता होगा। मंझले भाई ने घर में हुई गणेश पूजा का वीडियो  भेजा  है। गुरूजी ने गणेश चतुर्थी का महत्व व गणेश के जन्म की अनोखी कथा का अर्थ समझाया। जिनका अहंकार से भरा सिर शिव ने काटा तो ज्ञान युक्त सिर लगाया गया। कहते हैं चौथ का चाँद नहीं देखना चाहिए, पर रोज़ की तरह उसकी नज़र आकाश की ओर चली गयी और दर्शन  हो गए। 


आज सुबह नन्हा व सोनू आ गये थे। दोपहर को भोजन के बाद वे सभी एक स्टोर ‘लिव स्पेस’ गये, उन्हें अपने किचन व बेडरूम की अलमारी का दरवाज़ा ठीक करवाना है। सेल्स मैनेजर ने पावर पाईंट प्रस्तुति दी, नयी तकनीक आने से हर क्षेत्र में सब कुछ कितना बदल गया है । अमेजन से कमांड टेप आया है, मेहमानों के कमरे में चित्र लगाना है, अब दीवार पर कील ठोकने की ज़रूरत नहीं है।लगभग पाँच महीने बाद वे शहर की तरफ़ गये थे।हाथों में दस्ताने तथा चेहरे पर मास्क लगाकर। ट्रैफ़िक भी अब सामान्य हो गया है।वापसी में सोसाइटी में नयी खुली दुकान पर चाय पी तथा गणेश पूजा का कलात्मक पंडाल देखने भी गये। तीन दिन उनकी पूजा करने के बाद पूरी विधि से मुहूर्त देखकर कल विसर्जन का जुलूस भी निकलेगा। 


रात्रि के नौ बजे हैं, मन में सुबह सुने एक संत के वाक्य याद आ रहे हैं। कुछ लोग स्वयं को अणु मानते हैं, यह आणवीय मल है। अपूर्ण मानते हैं, यह मायीय मल है। अपूर्ण मानते हैं और उस अपूर्णता को दूर करने की इच्छा करते हैं, यह कार्मिक मल है। अविद्या, काम, कर्म यह तीनों ही बंधन के कारण हैं। वे अनंत हैं, सांत नहीं, वे पूर्ण हैं, अपूर्ण नहीं, वे सत्य हैं, ज्ञान हैं जब तक यह स्वयं का अनुभव नहीं बन जाएगा तब तक मानव को शांति का अनुभव नहीं होगा।नन्हे ने ‘मैजिक फ़्लावर्स पॉट सॉयल’ का दस किलो का एक पैकेट भिजवाया है। बड़े शहरों में मिट्टी भी ख़रीदनी होती है, उन्हें इसका भान नहीं था।  गमलों में भरकर बीज डाल दिए हैं, एक हफ़्ते में निकल जाएँगे। प्रधानमंत्री जी ने मोर का एक वीडियो पोस्ट किया है, कुछ लोगों को उस पर भी एतराज है।  


भारत ब्राज़ील से आगे निकल जाने वाला है, कोरोना के संक्रमण से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। शाम को वृद्ध पड़ोसी टहलते हुए मिले, कहने लगे, अब कोरोना से डरना छोड़ दिया है, जो पाना था पा लिया, अब क्या खोने को है ? एक पुरानी परिचिता से फ़ोन पर बात हुई। वह कोरोना के कारण अस्पताल में  हैं, शिकायत करती हुई सी कह रही थीं, मरीज़ों को देखने डाक्टर भी नहीं आता और घर के लोग भी दूर से देखकर खाना रखकर चले जाते हैं। नन्हे ने एक और गेम भेजा है। पिछले हफ़्ते वॉल एंड वॉरीअर भेजा था, जो जून रोज़ खेलते हैं। उसके बचपन में वे उसे खिलौने ख़रीदकर देते थे और अब वह उनका बचपन फिर से याद दिला रहा है। आज सुबह दुलियाजान की कम्पनी के हिंदी अनुभाग से भेजा गया पुरस्कार का ड्राफ़्ट मिला, वहाँ से आने से पूर्व कुछ रचनाएँ दी थीं पत्रिका के लिए। जून ने उसे बैंक में जमा कर दिया है। 


Monday, December 19, 2022

प्रकृति के सुकुमार कवि

मौसम आज भी बादलों भरा है. सुबह उठने पर पता चला बिजली ग़ायब है, तब से डीज़ल जेनरेटर से ही बिजली आ रही है। जून ने फ़ोन किया तो पता चला, कल शाम पाँच बजे तक विद्युत विभाग से बिजली बहाल होगी। मेट्रो का काम चल रहा है, शायद इस कारण कुछ समस्या हुई है। सुबह उठने से पूर्व एक स्वपन में कई परिजनों के साथ स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद लिया, आत्मा में सभी इंद्रियों की शक्ति समाहित है। स्वपन में तभी बिना आँखों के सुंदर दृश्यों का अवकोलन कर लेते हैं, बिना कानों के संगीत सुन  लेते हैं । काव्यालय में भाषा उत्सव होने वाला है, उसने सोचा है प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत के जीवन व काव्य के बारे में लिखेगी। नन्हे ने फ़ोटो भेजा है, अपनी बिल्लियों को हुड पहनाए हैं। उनके खेलने, पानी पीने, ऊपर चढ़ने, सोने आदि के लिए ढेर सारे उपकरण व खिलौने वह मँगवाता रहता है। बड़े भाग्यवान हैं दोनों। नन्हे ने उन दोनों के लिए एक नया गेम भी भेजा है, कल सीखेगी। बगीचे के लिए सोलर लाइट भी भिजवायी है। 


आज पापा जी से बात की, वह ठीक हैं, उत्साह से भरे हुए। नब्बे से एक वर्ष कम की उम्र  में भी वह उसकी कविताओं को फ़ेसबुक पर पढ़ते हैं। आज दोपहर बाद पंत का एक साक्षात्कार सुना। वह १९०० में जन्मे और १९७७ में उनकी मृत्यु हुई। २५ किताबें उन्होंने लिखीं। उनका व्यक्तित्तव अनोखा था, कोमलता का भाव भरे,  उनके केश लम्बे व घुंघराले थे।  आज दोपहर बाद वर्षा थम गयी, शाम को सूर्यास्त के चित्र उतारे। हर शाम अपने आप में बिलकुल नयी लगती है। विष्णु पुराण में दशरथ के मित्र जटायु की कथा सुनी, कितनी अद्भुत कथाएँ हैं ये, जिनमें मानव, देवता और प्राणी सबमें एक मैत्री का भाव है। अनेक वृक्षों व पौधों को भी पुराणों में कितना सम्मान मिला है। भारत की इसी संस्कृति से आकर्षित होकर तो युगों से अनेक लोग यहाँ आते रहे हैं। जून दोपहर को ‘लखनऊ सेंट्रल’ देख रहे थे।  जेल में कुछ संगीत प्रेमियों द्वारा एक बैंड बनाने पर आधारित है यह फ़िल्म। 


आज राजीव गांधी का जन्मदिन है, वह ज़िंदा होते तो ७६ वर्षों के होते। गणेश पूजा के उपलक्ष में उनकी सोसाईटी नापा में ‘पेंटालून’ का एक स्टाल लगा है, एक दिन बाद पूजा का पंडाल भी लग जाएगा। मोदक प्रतियोगिता भी होगी। असम में दुलियाजान में भी कोरोना के केस बढ़ गए हैं।पूरे भारत में ७०,००० केस मिले आज, जो एक दिन में दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं; पर रिकवरी रेट यहाँ काफ़ी अच्छा है।


Friday, November 11, 2022

कुंगफू पांडा

 
पिछले कई दिनों से आकाश में तारे नहीं दिखे, सदा बादल ही बने रहते हैं, पर बरसते नहीं  पर आज शाम को वे टहलने निकले थे कि रास्ते में तेज हवा के साथ वर्षा होने लगी. छाता भी उड़ने लगा, एक बार तो वह उल्टा ही हो गया. वे जल्दी ही घर लौट आये. कुछ देर ‘कुंगफू पांडा’ फिल्म देखी, मार्शल आर्ट पर बनी अच्छी एनिमेशन  फिल्म है. एओएल के एक साधक ने गुरु जी की गाय के बछड़ों को सहलाते हुए दो तस्वीरें भेजी हैं. वह कई दिनों से आश्रम में रह रहा है, वहाँ कई कोरोना संक्रमित लोग भी हैं. छोटा भाई नैनीताल में घूम रहा है, पहाड़ों पर गाड़ी चलाना भी उसने सीख लिया है. कोरोना काल में भी उसका टूर जारी है. अख़बार में पढ़ा, अमिताभ बच्चन कोरोना से स्वस्थ होकर आ गए हैं, पर घर पर भी कुछ दिन अकेले रहना होगा, जो उन्हें खल रहा है. महामारी का कहर लंबे समय तक रहने वाला है. भारत में बीस लाख लोग संक्रमित हैं. कई देशों में मृत्यु दर दिल दहला देने वाली है. किन्तु अब इसका भय काम हो गया है, वे सुबह-शाम  भ्रमण के लिए जाते समय मास्क पहन कर नहीं जाते. लोग भी सामान्य दिनों की तरह ही सड़क पर दिखाई देते हैं. जबकि एक दिन में पचास हजार से अधिक संक्रमित लोग मिलते हैं. अब तक सैंतालीस हजार लोग अपनी जान भी गँवा चुके हैं. आज ब्लॉग पर एक पोस्ट लिखी, मुख्य पृष्ठ का लुक बदल गया है, पहले ज्यादा अच्छा था, खैर, हर बदलाव शुरू में अखरता है, फिर उसी का अभ्यास हो जाता है. 

जून का जन्मदिन आने वाला है, उन्हें दक्षिण भारतीय भोजन पसंद है इसलिए नन्हा और सोनू उनके लिए ढेर सारे गिफ्ट्स लाये हैं. बड़ा दोसा तवा, उत्तपम पैन, पुत्तू बनाने का बर्तन और पनियप्पम बनाने की छोटी सी कड़ाही, मिठाई, कुछ एग्जॉटिक फल  और कॉफी की एक बोतल भी. पिछले हफ्ते वे एक टेलीस्कोप भी लाये थे. यह बात अलग है तब से चाँद के दर्शन ही नहीं हुए. जून ने इस अवसर पर शांति धाम में कुछ सामान भिजवाया है और स्वतंत्रता दिवस पर सोसाइटी के कर्मचारियों के लिए मिठाई मंगवाई है. 


आज जन्माष्टमी के अवसर पर गुरूजी का सुंदर उद्बोधन सुना. शाम को उन्होंने ‘सत्यं शिवं सुंदरं’ ध्यान कराया. बंगलूरू में एक एमएलए के घर पर भीड़ ने हमला कर दिया, हिंसा को फैलने में देर नहीं लगती. फेसबुक की एक पोस्ट के खिलाफ यह प्रतिक्रिया हुई थी. एक भारतीय होने के नाते उन्हें समाज में हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए. जाति के नाम पर हिन्दू समाज में काफी भेदभाव रहा है, ऐसे समाज में जहाँ एकता न हो बाहरी आक्रमण का सामना करना कठिन हो जाता है. वैसे भी हिन्दू स्वभाव से शांति प्रिय है, वह झगड़ा न हो इस भय के कारण अत्याचार सह लेता है. 


आज स्वतंत्रता दिवस है. एक नयी फिल्म देखी, ‘गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल’, जाह्नवी कपूर ने अच्छा अभिनय किया है. आज से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन आरम्भ हो रहा है. सभी भारतियों को एक हेल्थ आईडी दी जाएगी, जिसके कारण उनकी स्वास्थ्य संबन्धी सभी समस्याओं को निपटारा समय से हो पायेगा. सुबह  झंडा आरोहण के लिए गए. लन्च में पनिअप्पम बनाए. नन्हे ने चेट्टीनाड आलू बनाये, जो वे अपने मित्र के लिए भी ले गए. सोनू ने केक बनाया. आज दोपहर को माली ने सूरजमुखी के बीज गमले और जमीन में बोये, एक हफ्ते में अंकुर निकल आएंगे. 


Thursday, November 3, 2022

भूमि पूजन

 


आज अगस्त का पहला दिन है.  सुबह अगस्त का स्वागत करते हुए एक कविता लिखी. एओएल के उस स्वयंसेवक से,  जिसके माध्यम से वह हिंदी में अनुवाद का सेवा कार्य कर रही है, कहा, गुरूजी तक भिजवा दे. उसने हामी भर दी है पिताजी ने फोन पर कहा, उन्हें उसकी कवितायेँ और अनुच्छेद अच्छे लगते हैं, वह नियमित फेसबुक पर पढ़ते हैं. राखी मिल गयी है, यह भी बताया. उन्होंने मोटरोला का नया स्मार्ट फोन मंगवाया है, छोटी भाभी सामने वाले पड़ोसी अंकल के साथ जाकर ले आयी और उसने सेट भी कर दिया. 
आज सुबह ‘शकुंतला’ फिल्म देखी. जो भारत की प्रसिद्ध गणितज्ञ के जीवन पर बनी है, जिन्हें मानव कम्प्यूटर भी कहा जाता था. वह कठिन सवालों के हल कम्प्यूटर से पहले हल कर लेती थीं, कैसे करती थीं, कोई कभी जान नहीं पाया. नन्हा जून के जन्मदिन पर एक बड़ा सा टेलिस्कोप लाया है, उसे इंस्टॉल किया. आज आकाश में न चाँद है न तारे, मौसम साफ होगा तब वे आकाश निहारेंगे. 
आज रक्षा बंधन का पर्व है, सभी भाइयों से फोन पर बात हुई. परसों रामजन्मभूमि मंदिर के लिए भूमि पूजन होगा, तैयारियां चल रही हैं, प्रधानमंत्री भी जायेंगे. शाम को सरयू के तट पर हजारों दीप जलाये जायेंगे. कोरोना का भय भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर पा रहा है. गृहमंत्री को भी कोरोना हो गया है. छोटी ननद से बात हुई, नंदोई जी को भी बुखार व गले में खराश है. उनके बैंक में सबका टेस्ट करवाया गया, एक तिहाई लोगों का पॉजिटिव मिला है. पूरे विश्व में पौने दो करोड़ लोग कोरोना से पीड़ित हैं और सात लाख लोगों की मौत हो चुकी है.
आज शाम को गुरूजी का नया ध्यान किया, ‘संकल्प शक्ति के लिए ध्यान’, बहुत ही प्रभावशाली था. उनकी कृपा का कोई अंत ही नहीं है. वह मार्च के महीने से ही रोज ध्यान करा  रहे हैं. भगवान बुद्ध पर लिखी पुस्तक में पढ़ा, उन्हें कोई कामना नहीं थी, पर उनका हृदय अपार करुणा से भरा था, जहाँ कोई स्वार्थ सिद्धि शेष न हो, वहीँ करुणा और सजगता का वास होता है. वास्तविक समझदारी और जगत के प्रति आदर भी कह सकते हैं इसे ! 
आज अयोध्या में राम मन्दिर भूमि पूजन सम्पन्न हो गया. प्रधानमंत्री की उपस्थिति में कार्यक्रम बहुत ही गरिमापूर्ण बन गया. एक स्थान पर उन्होंने साष्टांग प्रणाम किया. वह सम्पूर्ण पूजा विधि में सम्मिलित हुए और प्रभावशाली वक्तव्य दिया. मोहन भागवत, योगी जी व नृत्य गोपालदास जी ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे. भारत भर से एक सौ पैंतीस विभिन्न धाराओं के सन्त आये थे. सजावट बहुत शानदार थी और दिन भर राम की महिमा गायी जाती रही. मर्यादा पुरुषोत्तम राम भारत की आत्मा हैं, उनका नाम हर बच्चे के मुख पर कभी न कभी आ ही जाता है. अगले तीन वर्षों में भव्य व दिव्य मंदिर का निर्माण हो जायेगा. 

Thursday, September 8, 2022

‘मुरुग़न रहस्य’


आज सुबह-सुबह रसोईघर में एक चूहा दिखा। काला, मोटा चूहा, सो सारी सुबह उसी को भगाने के उपायों को खोजते-खोजते बीती। इसी सिलसिले में फ़ेसबुक पर एक मज़ाक़िया पोस्ट भी  लिख डाली। शाम के भ्रमण के समय मंद पवन बह रही थी और घास के सफ़ेद, गुलाबी फूल झूमते हुए बहुत अच्छे लग रहे थे। छोटा सा वीडियो बनाया। आज सुना कि रात्रि भोजन में यदि केवल सूप व सलाद लिया जाए और अनाज दिन में केवल एक बार लें तो स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। बढ़ते हुए वजन को नियंत्रित रखने के लिए उन्होंने भी इसे प्रयोग के तौर पर आरम्भ करने का मन बनाया है। कल से शाम छह बजे से तीन दिनों का आर्ट ऑफ़ लिविंग का ‘मुरुग़न रहस्य’ पर दिया गुरू जी का प्रवचन आरम्भ हो रहा है। दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को मुरुग़न कहते हैं। आज लाओत्से के वचनों पर लिखी एक पुस्तक का एक पन्ना पढ़ा। उनकी बातें विरोधाभास से भरी लगती हैं, पर संभवतः सत्य इतना विशाल है कि उसमें दोनों पक्षों के लिए जगह होती है। 


आज ऑनलाइन प्रवचन का पहला दिन था। गुरूजी ने अद्भुत ज्ञान दिया और ध्यान भी कराया । उसने एक नोटबुक में मुख्य बिंदु लिख लिए, इन्हें टाइप करना है। सुबह टहलते समय उसने कार्तिकेय के बारे में सुना हुआ ज्ञान जून को बताया। मुरुग़न, वेल्ली और देवसेना से परिचय हुआ। जो इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति व ज्ञान शक्ति के प्रतीक हैं। अंतत: आज सुबह वह चूहा पकड़ा गया।नन्हा व सोनू आए थे कल रात डिनर पर, यहीं रुक गए, आज शाम वापस चले गए। घर में कितनी चहल-पहल हो गयी थी। छोटे भाई ने बताया, उसने सुना है; एक व्यक्ति ने, जो पिछले दस वर्षों से आत्माओं से बात करता रहा है, सुशांत राजपूत की आत्मा से सम्पर्क किया, जिसने कहा, अपनी इच्छा से बदलाव के लिए उसने यह कदम उठाया है। इसका अर्थ हुआ पुलिस की सारी तहक़ीक़ात व्यर्थ जाने वाली है।  


वे रात्रि भ्रमण के लिए गए तो हवा ठंडी थी। आकाश में आधा चाँद सुशोभित हो रहा था। लगभग एक महीने बाद वालीबाल कोर्ट फिर से खुल गया है। दोपहर को कंचन के वृक्ष की छँटाई करवायी। नैनी की लगायी कुम्हड़े की बेल हटानी पड़ी है, पीछे काफ़ी फैल गयी थी, जिससे दूसरे विला से शिकायत आ गयी थी। शाम को यहाँ आने के बाद पहली बार इंद्रधनुष दिखाई दिया। गुरूजी ने आज पीठ के दर्द के लिए ध्यान कराया, जून ने भी किया, उनके पीठ दर्द में लाभ भी हुआ।कोरोना के इस अनिश्चित वातावरण में उनका दिन में दो बार ध्यान कराना लाखों लोगों के लिये वरदान बन गया है। संत ज्ञानेश्वर पर आधारित एक फ़िल्म का कुछ भाग देखा, कितनी अनोखी कहानी है उनके जीवन की। उनकी लिखी ज्ञानेश्वरी गीता भी अवश्य पढ़ेगी ऐसा निश्चय किया है। ‘ द हिंदू’ पुस्तक में अकबर के बारे में पढ़ा, उसने  भी कम अत्याचार नहीं किए थे। 


आज सुबह अख़बार के पहले पन्ने पर नयी शिक्षा नीति के बारे में समाचार देखे। कई सार्थक बदलाव किया हैं मोदी सरकार ने, पर स्कूल खुलें तब तो यह लागू  हो। कोरोना के भय से स्कूल बंद हैं और अगस्त के अंत तक बंद रहेंगे अथवा तो उसके भी बाद तक। कई दिनों बाद रात को गेहूँ की रोटी खायी, आलू-गोभी के सब्ज़ी के साथ। शाम को गुरूजी का कराया ध्यान, ‘क्रीएटिविटी’किया, उससे पूर्व प्रकृति के सौंदर्य को कैमरे में क़ैद किया। कल रात सुंदर स्वप्न देखे। एक में भगवान कृष्ण की सुंदर तस्वीरें देखीं, बड़ी, माध्यम और छोटी। एक तस्वीर को कोई प्राणी ले गया, बंदर या कुत्ता, याद नहीं है, और वह तस्वीर के सामने कृष्ण का नाम लेने लगा पूरे भक्तिभाव से।संत ज्ञानेश्वर ने भैंसे से मंत्र पाठ करवा दिया था, शायद उसी तरह का चमत्कार दिखाने के लिए यह स्वप्न आया।  सुबह तक मन कितना शांत था। परमात्मा की इस सुंदर सृष्टि में वही सब कुछ होकर बैठा है। 


Friday, July 29, 2022

पैशन फ़्रूट के पौधे


रात्रि भ्रमण के वक्त हवा के साथ हल्की फुहार बरस रही थी, चेहरे को उसका शीतल स्पर्श भला लग रहा था। आज एक बाल फ़िल्म देखी, “मैं कलाम हूँ" राजस्थान के एक गाँव में फ़िल्मायी गयी है। एक बालक के संघर्ष की कहानी, अब्दुल कलाम आज़ाद से प्रेरित होकर अपना नाम जिसने कलाम रख लिया था। आज उन्होंने शयन कक्ष के बाहर जो बरामदा है, उसमें दो बड़े गमलों में पैशन फ़्रूट के दो पौधे लगाए। उसकी बेल रेलिंग से होती हुई वर्टिकल गार्डेन के फ़्रेम में चढ़ जाएगी।एक पौधा नीचे भूमि में लगाना है। इसी सोसाइटी में रहने वाले दो व्यक्तियों ने ये पौधे उन्हें दिए हैं। आज आम के बगीचे में ‘एटूबी’ ने फ़ूड स्टाल लगाया था, पर कोरोना के कारण कम लोग गए होंगे। कल पूरी दुनिया में ढाई लाख से अधिक कोरोना के केस मिले। बड़ा भांजा व उसके चचेरा भाई कल अपने-अपने घर जा रहे हैं। चार महीनों से वे अनेक युवाओं की तरह घर से ही काम कर रहे थे, आगे भी लगभग चार महीने तो और घर पर रहना होगा। इस आपदा ने यह तो अच्छा किया है कि बिछुड़े हुए परिवारों को मिला दिया है। आज सुबह अच्छी नींद लाने के उपायों पर चर्चा सुनी। कुछ उपाय उन्होंने अपनाए भी हैं। कमरे में पूर्ण अंधकार होना चाहिए। सोने से दो घंटे पूर्व ही  पानी पी लें व भोजन कर लें। टीवी या मोबाइल एक घंटा पहले से न देखें। सोने से पूर्व स्नान करें या पैरों को धो लें। तलवों की मालिश करें। कोई पुस्तक पढ़ें या भ्रामरी प्राणायाम कर लें। योग निद्रा भी कर सकते हैं। जून ने अगले हफ़्ते तीन दिनों के आर्त ऑफ़ लिविंग के एक कोर्स के लिए ऑन लाइन फ़ॉर्म भर दिया है। गुरूजी कार्तिकेय भगवान पर बोलेंगे व ध्यान भी कराएँगे। वह कहते हैं मानव जीवन का सबसे बड़ा उपहार है ध्यान ! सुबह छोटे भाई से बात हुई, वह बहुत खुश है, परमात्मा से जिसकी लगन लग जाए वह सदा ही प्रसन्न है। 


कल की तरह आज वर्षा नहीं हुई, बादल बने और बिखर गए।  आज सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों बादलों के अनूठे रंगों के कारण अति सुंदर थे। नींद के लिए कल जो उपाय किए थे, काम आए।कल से कर्नाटक में लॉक डाउन खुल रहा है। आज विष्णु पुराण में दिखाया गया कि रावण ने सत्ता के लिए अपनी बहन के पति को भी मार दिया था। कैसी मनोवृत्ति है रावण की, पता नहीं लोग उसे क्यों विद्वान कहते हैं; कभी रहा भी होगा तो उसने अपने ज्ञान का उपयोग तो नहीं किया। एक जापानी एनिमेशन फ़िल्म ‘इन दिस पार्ट ऑफ़ द वर्ल्ड’ का कुछ भाग देखा, द्वितीय विश्वयुद्ध की कहानी है। नायिका चित्रकला में निपुण है और विवाह के बाद ससुराल में घुलमिल जाती है। असम में जिस तेल कुँए में आग लगी थी, अभी तक बुझ नहीं पायी है। तीन विदेशी विशेषज्ञ बुझाते हुए थोड़ा सा जल भी गये। 


आज शाम को टहलते समय उन्हीं वृद्ध व्यक्ति से पुनः मुलाक़ात हुई, बगीचे में बैठे थे, कह रहे थे, उन्हें कोई चिंता नहीं है। उनका ड्राइवर चिंतित लग रहा था।उसका परिवार बिहार में है, यहाँ अकेला रहता है। वृद्ध ने बताया, दिल्ली में उनके यहाँ गुरू जी आए थे, मोहल्ले के पाँच सौ लोग पंक्ति बनकर खड़े हो गए थे, उनके दर्शन के लिए। रात के ग्यारह बज गये, खाना कब खाते। उनके पुत्र आर्ट ऑफ़ लिविंग के पूर्ण कालिक शिक्षक हैं।