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Thursday, September 8, 2022

‘मुरुग़न रहस्य’


आज सुबह-सुबह रसोईघर में एक चूहा दिखा। काला, मोटा चूहा, सो सारी सुबह उसी को भगाने के उपायों को खोजते-खोजते बीती। इसी सिलसिले में फ़ेसबुक पर एक मज़ाक़िया पोस्ट भी  लिख डाली। शाम के भ्रमण के समय मंद पवन बह रही थी और घास के सफ़ेद, गुलाबी फूल झूमते हुए बहुत अच्छे लग रहे थे। छोटा सा वीडियो बनाया। आज सुना कि रात्रि भोजन में यदि केवल सूप व सलाद लिया जाए और अनाज दिन में केवल एक बार लें तो स्वास्थ्य के लिए उत्तम है। बढ़ते हुए वजन को नियंत्रित रखने के लिए उन्होंने भी इसे प्रयोग के तौर पर आरम्भ करने का मन बनाया है। कल से शाम छह बजे से तीन दिनों का आर्ट ऑफ़ लिविंग का ‘मुरुग़न रहस्य’ पर दिया गुरू जी का प्रवचन आरम्भ हो रहा है। दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को मुरुग़न कहते हैं। आज लाओत्से के वचनों पर लिखी एक पुस्तक का एक पन्ना पढ़ा। उनकी बातें विरोधाभास से भरी लगती हैं, पर संभवतः सत्य इतना विशाल है कि उसमें दोनों पक्षों के लिए जगह होती है। 


आज ऑनलाइन प्रवचन का पहला दिन था। गुरूजी ने अद्भुत ज्ञान दिया और ध्यान भी कराया । उसने एक नोटबुक में मुख्य बिंदु लिख लिए, इन्हें टाइप करना है। सुबह टहलते समय उसने कार्तिकेय के बारे में सुना हुआ ज्ञान जून को बताया। मुरुग़न, वेल्ली और देवसेना से परिचय हुआ। जो इच्छा शक्ति, क्रिया शक्ति व ज्ञान शक्ति के प्रतीक हैं। अंतत: आज सुबह वह चूहा पकड़ा गया।नन्हा व सोनू आए थे कल रात डिनर पर, यहीं रुक गए, आज शाम वापस चले गए। घर में कितनी चहल-पहल हो गयी थी। छोटे भाई ने बताया, उसने सुना है; एक व्यक्ति ने, जो पिछले दस वर्षों से आत्माओं से बात करता रहा है, सुशांत राजपूत की आत्मा से सम्पर्क किया, जिसने कहा, अपनी इच्छा से बदलाव के लिए उसने यह कदम उठाया है। इसका अर्थ हुआ पुलिस की सारी तहक़ीक़ात व्यर्थ जाने वाली है।  


वे रात्रि भ्रमण के लिए गए तो हवा ठंडी थी। आकाश में आधा चाँद सुशोभित हो रहा था। लगभग एक महीने बाद वालीबाल कोर्ट फिर से खुल गया है। दोपहर को कंचन के वृक्ष की छँटाई करवायी। नैनी की लगायी कुम्हड़े की बेल हटानी पड़ी है, पीछे काफ़ी फैल गयी थी, जिससे दूसरे विला से शिकायत आ गयी थी। शाम को यहाँ आने के बाद पहली बार इंद्रधनुष दिखाई दिया। गुरूजी ने आज पीठ के दर्द के लिए ध्यान कराया, जून ने भी किया, उनके पीठ दर्द में लाभ भी हुआ।कोरोना के इस अनिश्चित वातावरण में उनका दिन में दो बार ध्यान कराना लाखों लोगों के लिये वरदान बन गया है। संत ज्ञानेश्वर पर आधारित एक फ़िल्म का कुछ भाग देखा, कितनी अनोखी कहानी है उनके जीवन की। उनकी लिखी ज्ञानेश्वरी गीता भी अवश्य पढ़ेगी ऐसा निश्चय किया है। ‘ द हिंदू’ पुस्तक में अकबर के बारे में पढ़ा, उसने  भी कम अत्याचार नहीं किए थे। 


आज सुबह अख़बार के पहले पन्ने पर नयी शिक्षा नीति के बारे में समाचार देखे। कई सार्थक बदलाव किया हैं मोदी सरकार ने, पर स्कूल खुलें तब तो यह लागू  हो। कोरोना के भय से स्कूल बंद हैं और अगस्त के अंत तक बंद रहेंगे अथवा तो उसके भी बाद तक। कई दिनों बाद रात को गेहूँ की रोटी खायी, आलू-गोभी के सब्ज़ी के साथ। शाम को गुरूजी का कराया ध्यान, ‘क्रीएटिविटी’किया, उससे पूर्व प्रकृति के सौंदर्य को कैमरे में क़ैद किया। कल रात सुंदर स्वप्न देखे। एक में भगवान कृष्ण की सुंदर तस्वीरें देखीं, बड़ी, माध्यम और छोटी। एक तस्वीर को कोई प्राणी ले गया, बंदर या कुत्ता, याद नहीं है, और वह तस्वीर के सामने कृष्ण का नाम लेने लगा पूरे भक्तिभाव से।संत ज्ञानेश्वर ने भैंसे से मंत्र पाठ करवा दिया था, शायद उसी तरह का चमत्कार दिखाने के लिए यह स्वप्न आया।  सुबह तक मन कितना शांत था। परमात्मा की इस सुंदर सृष्टि में वही सब कुछ होकर बैठा है।