Tuesday, March 8, 2022

बदलियों के रंग

 

आज नौ बजे उन्होंने ग्यारह दीपक जलाए। आज के रामायण के अंक में राम का हनुमान से प्रथम मिलन दर्शाया गया है। रामायण और महाभारत देखने से दिन काफी भरा-भरा लगता है. मन में राम और कृष्ण का स्मरण बना रहता है. शाम को मास्क पाहन कर टहलने गयी तो शुरू में थोड़ी दिक़्क़त हुई पर बाद में अभ्यास हो गय। अभी आगे कई महीनों तक ऐसे ही चलेगी ज़िंदगी। कोरोना के ख़िलाफ़ इस युद्ध में हर भारतीय को अपना योगदान देना है। अमेरिका ने भारत से कोरोना के लिए दवा की मांग की है, जो भारत अवश्य ही भेज देगा. लगता है सरकार को लॉक डाउन की अवधि बढ़ानी पड़ेगी. आज जून ने भी एओएल को कुछ आर्थिक सहयोग दिया, वे लोग दिहाड़ी मज़दूरों को भोजन आदि बांट रहे हैं। 

 


इस समय यहाँ मूसलाधार वर्षा हो रही है, गर्जन-तर्जन के साथ, रह-रह कर बिजली चमकती है और बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनायी देती है। बंगलूरू में इस नए घर में यह उनकी पहली बारिश है, लगभग एक घंटा पहले आरंभ हुई। एक-एक करके सारी खिड़कियाँ बंद कीं। छत पर लकड़ी के झूले को बचाने के लिए जो शेड बनाया है, वह भी तेज बौछार से उसकी रक्षा  नहीं कर सका। दोपहर बाद ‘इंगलिश मीडियम’ देखी, सिनेमा हाल बंद हैं सो हॉट स्पॉट पर इसे रिलीज़ कर दिया गया है। शाम को पार्क में फूलों के सूखते हुए पौधों को देखा था, इंद्र देवता ने इतना पानी बरसा दिया कि धरती-पौधे सब तृप्त हो गये हैं। 


आज सुबह गैराज में एक कौए ने कबूतर पर हमला कर दिया। घर के अंदर से देखा तो उसे भगाया। कबूतर घायल था, कौए  ने उसके पंख नोच दिए थे। वह एक कोने में छिपने गया, उड़ नहीं पा रहा था, रास्ते में रक्त की बूँदें गिरती जा रही थीं, उसे पानी दिया पर पी नहीं सका। एक चौकीदार के द्वारा उसे डिस्पेंसरी भेजा। पता नहीं उसका क्या हुआ होगा. 


वर्षा के कारण बालकनी पर बनी शीशे की छत और सोलर पैनल अपने आप धुल गए हैं.  मौसम भी ठंडा हो गया है.आज शाम टहलने गए तो आकाश पर गुलाबी बादल थे, बिलकुल मसूर की दाल के रंग के बादल, जो नीले पृष्ठभूमि में बहुत आकर्षक लग रहे थे. रंगों का यह खेल प्रकृति के हर क्षेत्र में खेला जा रहा है. अनगिनत रंगों की तितलियाँ, मछलियां, पंछी, फूल और कीट, सर्प यहाँ तक कि जड़ पत्थरों को भी अनोखे रंगों से सजाया है प्रकृति ने, मानव इनकी ओर देखे तो सारा कष्ट भूल जाये पर उसके पास चाँद -तारों को निहारने का समय नहीं है, कुछ लोग बन्द कमरों में टीवी पर हिंसा और नफरत के खेल देखने में ही व्यस्त हैं. आज सुबह हरसिंगार के ढेर सारे फूल उठाये.  


रात्रि के नौ बजे हैं. हनुमान जी को जाम्बवान उनकी भूली हुई शक्तियों को याद दिला रहे हैं, बचपन में एक ऋषि ने उन्हें शाप दे दिया था, जिससे वे उन्हें भूल ही गए हैं. बाल्यावस्था में उन्हीं ने एक बार सूर्य का भक्षण किया था, यह भी उन्हें याद नहीं है. वे भी पूर्वकाल में कितनी ही बाधाओं को पार करके आएये हैं पर कोई नयी विपत्ति आने पर यह भूल जाते हैं. आज भी छिटपुट वर्षा हुई, शाम को आकाश सलेटी-काले बादलों से भरा था. हनुमान जी को अपना बल याद आ गया है और वे सागर पर जाने के लिए तैयार हो गए हैं. उन्हें राह में मैनाक पर्वत मिलता है, जिसे समुद्र देव ने कुछ देर विश्राम के लिए भेजा है. सागर भी राम के कुल का ऋणी है और मैनाक की रक्षा हनुमान के पिता ने  की थी. पहले लोग अपने प्रति की गयी भलाई को कितना याद रखते थे. 



Wednesday, March 2, 2022

दीया -बाती

आज इतवार है। वे प्रातः भ्रमण के लिए गए तो हवा में ठंडक थी, तापमान १८ डिग्री रहा होगा। सुबह का टहलना अभी तक तो चल रहा है लेकिन कब रोकना पड़े, कह नहीं सकते, टहलते समय बार-बार ऐसा लग रहा था जैसे क़ानून का उल्लंघन कर रहे हैं। कल शाम ही एक नोटिस आया था कि टहलना आवश्यक कार्यों में नहीं आता, छह महीने की सजा हो सकती है। भगवान ही जानता है स्थिति कब सामान्य होगी। अभी लॉक डाउन ख़त्म होने में दो हफ़्ते शेष हैं। इसके बाद भी क्या होने वाला है यह भविष्य के गर्भ में छिपा है। आज एक पुरानी सखी से महीनों बाद बात हुई, सभी भाई-बहनों से भी फ़ोन पर बात हुई। आजकल सभी लोग घर में हैं और सभी के पास समय है। फुफेरे भाई ने पुरानी तस्वीरें भेजीं, चाची के परिवार में सबसे बात हो गयी। विपदा में सब जैसे किसी एक तल पर बहुत क़रीब आ गये हैं। वापस आकर समाचार सुने, कोरोना पीड़ितों की संख्या  भारत में एक हज़ार हो गयी है। नौ बजे रामायण का तीसरा अंक देखा, अनेक बार देखने पर भी रामायण की कहानी नई जैसी लगती है। मोदी जी की “मन की बात’ सुनी। धीरे-धीरे दिल्ली में दिहाड़ी मज़दूरों व अशक्त लोगों के लिए जग-जगह रहने व खाने के इंतज़ाम हो रहे हैं। पहले वे लोग अपने-अपने गावों में जा रहे थे। पर वहाँ भी उनके लिए कौन स्वागत में बैठा होगा ? किसी भी तरह की विपदा हो उसका सबसे ज़्यादा और सबसे पहला असर मज़दूरों पर ही पड़ता है। जून ने पीएम केयर्स फंड में पैसे भेजे हैं। उन्होंने ग्रामीण लोगों की सहायता के लिए भी कुछ मदद की, दुकान तक भी गए। आर एसएस के कुछ लोग राशन ख़रीद कर निर्धन लोगों में बांट रहे हैं। इस समय सभी को सहायता के लिए आगे आना होगा। समाज के हर वर्ग को देश के लिए कुछ करने का अवसर मिला है। नन्हे से बात हुई, उसने कहा अभी काफ़ी समय लग जाएगा दुनिया को कोरोना से मुक्त होने में। न्यूयार्क में तीन से चार हज़ार लोग महामारी से पीड़ित हैं। 


रात्रि के नौ बजे हैं। कुछ देर पूर्व छत पर टहलने गये तो अष्टमी का सुनहला पीला  चाँद चमकीले सितारों के मध्य जगमगा रहा था। जैसे उसे कोई खबर ही नहीं है कि जिस धरती के वह चक्कर काट रहा है, उसे क्या हो रहा है? अर्थात उस पर रहने वाले मानव नाम के जीव पर क्या बीत रही है ?  शाम को सूर्यास्त भी देखा था। प्रकृति अपने कर्म में कभी नहीं चूकती, न जाने कितने युगों से रोज़ यह क्रम चल रहा है। आज दोपहर को अचानक तेज अंधड़ चला, मुश्किल से दो-तीन मिनट के लिए, पर ढेर सारे सूखे पत्ते छत पर, लॉन में और गैराज में फैल गए। शाम को झाड़ू लगाया। आजकल सफ़ाई कर्मचारी भी नहीं आ रहे हैं। 


आज रामनवमी है, गुरूजी ने राम ध्यान करवाया। सुबह क्रिया के दौरान सोहम का अर्थ स्पष्ट हुआ, अद्भुत थे वे क्षण ! प्रधान मंत्री ने अगले इतवार को देशवासियों को रात्रि नौ बजे नौ मिनट के  लिए दीपक, टार्च या मोमबत्ती जलाकर घर के द्वार या बालकनी में खड़े होने को कहा है। घर की बत्तियाँ बंद कर देनी हैं ताकि दीपकों का प्रकाश ज़्यादा प्रज्ज्वलित हो सके। कोरोना के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए सभी भारतवासियों को एकजुटता की शक्ति को महसूस करना है। सभी की चेतना जब एक होकर इस विपत्ति का सामना करने का निश्चय करेगी तभी उन्हें सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। 


Tuesday, February 22, 2022

सम्पूर्ण लॉक डाउन


सम्पूर्ण लॉक डाउन 

रात्रि के पौने नौ बजे हैं। आज जनता कर्फ़्यू सुबह सात बजे शुरू हुआ और  शाम को पाँच बजे सभी ने ताली, थाली और घंटी बजाकर डाक्टर्स को धन्यवाद दिया। भारत में कोरोना के मरीज़ों की संख्या छह सौ सत्तर हो गयी है। दो दिन बाद  उगादि का उत्सव है।

आज शाम को लोग सड़क पर आते-जाते दिखे। कोरोना के ख़िलाफ़ युद्ध में प्रधान मंत्री का अगला कदम है इक्कीस दिनों का पूरा लॉक डाउन। अगले तीन हफ़्तों तक सभी कुछ बंद रहेगा, स्कूल, कालेज, रेल, बस, दफ़्तर सभी कुछ। हवाई यात्रा भी। कोरोना वायरस जिस तेज़ी से फैल रहा है, उससे बचने का यही एक उपाय बचा है। उन्होंने कहा, यह वायरस जंगली आग की तरह फैलता है, हमें इस आग को बढ़ने से रोकना है। देशवासियों को प्रधानमंत्री के इस आह्वान का पालन करना है। जून ने अपने पुराने सहकर्मियों को शुभकामना संदेश भेजा। इस महामारी ने भौतिक दूरी बढ़ा दी है पर दिलों को जैसे नज़दीक ला दिया है। गुरु जी दिन में दो बार नियमित ऑन लाइन ध्यान करवा रहे हैं। कल से वे केवल प्रातः काल ही टहलने जाएँगे, शाम के वक्त लोगों से बचना कठिन है। कोरोना के मरीज़ को पहचानना बहुत मुश्किल है। यह पता ही नहीं चलने देता है और वह आदमी उसी तरह लोगों से मिलता है और दूसरों को वायरस दे देता है। प्रलय  के आने का यह काफ़ी वैज्ञानिक तरीक़ा है। यह प्रलय से कम नहीं है पूरी दुनिया के लिए। 


आज लॉक डाउन का पहला दिन था और पहला नवरात्र भी। दिन भर वे घर से नहीं निकले। नवरात्रि का उत्सव सभी अपने-अपने घरों में ही मना रहे हैं। नन्हे से बात हुई उनकी कम्पनी सरकार को सहयोग करते हुए डाक्टर्स को ऑन लाइन सलाह व इलाज के लिए प्रशिक्षित कर रही है।  


आज दूसरा दिन है। सुबह जब सड़क पर कोई नहीं था, लगभग अंधेरे में ही वे टहलने गये। उसने लौट कर ध्यान किया, शरीर के भीतर के अंगों पर धारणा की और धीरे-धीरे सब स्पष्ट होने लगा। मांस पेशियाँ, हड्डियाँ, रक्त वाहिनी और भीतरी अंग। कुछ सखियों से बात की। नन्हे और सोनू ने तय किया है कि वे बारी-बारी से भोजन बनाएँगे। उनका कुक नहीं आ रहा है न ही कामवाली दीदी। यहाँ भी मेड नहीं आयी। उसने सफ़ाई की, जून ने नाश्ता बनाया। ऐसे ही तीन हफ़्ते बीत जाएँगे। समाचारों में देखा, मज़दूर अपनी गठरियाँ सिर पर उठाए दिल्ली तथा अन्य बड़े शहरों से पैदल ही घर जाने के लिए निकल पड़े हैं। उनके पास काम नहीं है न ही घर। सरकार ने उनके लिए सहायता की घोषणा की है पर उन तक कैसे पहुँचेगी, जब सब कुछ बंद है। वे लोग जो इतने आराम से घरों में बैठे हैं, उनके कष्ट का अनुमान नहीं कर सकते। लेकिन जब से यह दृश्य देखा है हृदय में कैसी कचोट उठ रही है। फ़ोन पर जिससे भी बात करें कोरोना के सिवा कोई विषय ही नहीं बचा है बात का। आज से डीडी नेशनल व डीडी भारती पर रामायण व महाभारत दिखाए जाने शुरू हुए हैं। पिटूनिया के पौधे जो गोहाटी से लाए थे आज हैंगिंग गमलों में टांग दिये हैं। महीनों पहले ये गमले जून ने मँगवाए थे। रामायण में आज अरुंधती, वशिष्ठ मुनि के आश्रम में राम आदि छात्रों को सामवेद का गायन सिखा रही थीं। जीवन में भावना की कोमलता भी हो और कर्त्तव्य की कठोरता भी, तभी जीवन पूर्ण बनता है। अन्य छात्रों के साथ चारों राजकुमार भी श्रम करते हैं और योगासन करते हैं। वे सरस्वती की वंदना कर रहे हैं; मानव देह में जो आध्यात्मिक शक्तियाँ हैं वे किसी अन्य योनि में नहीं !  


Tuesday, February 15, 2022

ताली और थाली


सुबह पाँच बजे ही वे उठ गये थे, होटल के कमरे से ही सूर्योदय का दृश्य दिखायी दे रहा था। झील तक गये तो सूर्य का नारंगी गोला नीले आकाश के साथ झील के पानी में भी सुशोभित हो रहा था। उन्होंने सुंदर तस्वीरें उतारीं और नाश्ते के बाद वापसी की यात्रा आरंभ की। रात्रि ग्यारह बजे घर पहुँचे तो नन्हा और सोनू प्रतीक्षा रत थे। पौधों का कार्टन रात्रि को ही खोल दिया था, सुबह पिटूनिया के पौधे रोप दिए। शेष बचे पौधों के लिए नन्हे ने नए गमले आर्डर कर दिये हैं। गुरूजी आश्रम से लाइव टेलीकास्ट के द्वारा संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा, कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं है, पर सावधान रहना है; कम से कम दिन में दो बार ध्यान करना चाहिए। घर में रहकर समय का सदुपयोग हो इसलिए नई भाषा सीखनी चाहिए, नई किताबें पढ़नी चाहिए। कल नन्हे ने एक नयी किताब दी है, बैटल बियोंड कुरुक्षेत्र: ए महाभारत नॉवल, जो द्रौपदी को केंद्र में रखकर लिखे गए मलयालम उपन्यास का अंग्रेज़ी अनुवाद है। कल से पढ़ना आरंभ करेगी।  कोरोना के  कारण छोटा भाई केरल नहीं जा रहा है। उसने कुछ पंक्तियाँ लिखीं इसी महामारी पर। आर्ट ऑफ़ लिविंग  के हिंदी सेक्शन ने कुछ अनुवाद कार्य उसे दिया है। गुरु जी के भाषणों से कुछ अंश लेकर ‘हिम्मत ना हारिये’ इस पर एक लेख भी  लिखना है। देश भर में भी काफ़ी कदम उठाए गये हैं इस सिलसिले में। कई देशों में तो सब कुछ ही बंद हो गया है, केवल ज़रूरी सामानों की दुकानें खुली हैं। सुबह भागवद में सृष्टि रचना के बारे में सुंदर विवरण पढ़ा। देवताओं की सहायता से परमात्मा इस सृष्टि को चलाते हैं पर वह हर जगह स्वयं रहते हैं। उनकी उपस्थिति के बिना देवता भी कुछ नहीं कर सकते। 


आज शाम छोटी बहन से बात हुई। उसे शारजाह जाना है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए डाक्टर्स को  विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। यह वायरस जानवर से मानव में पहुँचा फिर मानव से अन्य मानवों में और अब तो पूरे विश्व में एक सौ पैंतालीस देशों में पहुँच गया है। कुछ देर पहले मोदी जी का देश के नाम संदेश सुना। उन्होंने महामारी से बचने व औरों को बचने के उपाय सुझाए। बाइस मार्च को जनता कर्फ़्यू के लिए कहा जो सुबह सात बजे से रात्रि नौ बजे तक होगा, और शाम को पाँच बजे, दिन-रात बचाव के लिए लगे डाक्टर्स तथा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ताली या थाली बजाकर धन्यवाद देने को कहा। उनका भाषण आत्मीयता से भरा हुआ था और देशवासियों को सही समय पर सचेत करने का बहुतर प्रशंसनीय प्रयास था। गुरूजी ने भी सुंदर संदेश दिया। कुछ दिनों के लिए सभी को अवसर मिला है कि अपने साथ रहें, विश्राम में रहें और बुद्धि को भी विश्राम करने दें। उन्होंने सेवा भाव को जगाने का सुंदर संदेश भी दिया।जो निर्धन हैं, जो रोज़ काम करके  अपना गुज़ारा करते हैं, इस विपदा को कैसे उनकी मदद करने के अवसर में बदला जा सकता है । नन्हे ने बताया, उसकी टीम ने चायनीज टीम के साथ बात की, वहाँ कई लोग इसलिए मर गए क्योंकि उनका इलाज ही नहीं हो पाया, वहाँ अस्पताल कोरोना मरीज़ों से भर गये थे। आज वे टहलने गए तो पूरी सड़क ख़ाली थी। अगले दो हफ़्तों तक काफ़ी सजग रहना होगा। भारत में कोरोना मरीज़ों की संख्या दो सौ बयालीस हो गयी है और पाँच की मृत्यु हो गयी है। सारा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। अमेरिका में एशियन के ख़िलाफ़ क्रोध भर गया है। चायना के प्रति भी कई लोग क्रोधित हैं। इसकी शुरुआत वुहान से हुई थी जो चीन में है।  ‘लॉक एंड की’ का अगला अंक देखा, काफ़ी प्रभावशाली है यह धारावाहिक। 


Tuesday, February 8, 2022

उमियम झील के किनारे



परसों वे ‘होलिका दहन’ का आयोजन  देखने गए थे, जो नापा में बड़े ही शानदार तरीक़े से मनाया गया। अगले वर्ष वे भी कुछ मिठाई आदि लेकर जाएँगे। जल्दी आना पड़ा क्योंकि सुबह फ़्लाइट पकड़नी थी असम के लिए। कल सुबह दस बजे होटल पहुँच गये। दोपहर को जूरन में शामिल हुए। असम में विवाह से एक दिन पहले यह रीति होती है। शाम की काकटेल पार्टी भी अच्छी थी, पुराने-नए फ़िल्मी गानों की धुन पर सभी नाच रहे थे। शाम को विवाह है, फिर विशेष भोज। आज दोपहर को सोनू के घर जाना है। जून यहाँ स्थित कम्पनी के दफ़्तर चले गए हैं, जहाँ वे पहले सेवाकाल में कई बार आ चुके हैं। टीवी चल रहा है, मध्यप्रदेश में सरकार गिरने वाली है।ज्योतिराव सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये हैं, उनके साथ कई एमएलए भी आ गये हैं।, पिछले कई वर्षों से कांग्रेस में उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा नहीं मिल रहा था, ऐसा उनका कहना है। मानव स्वभाव हर जगह एक सा ही होता है, जहाँ सम्मान न मिले तो व्यक्ति वहाँ रहना नहीं चाहता। 


‘लोभ से भरा मन साधक नहीं हो सकता। इस जगत में पकड़ने जैसा कुछ भी नहीं है, दर्शक की तरह यहाँ से गुजर जाना है।’ टीवी पर ये सुंदर वाक्य सुने अब आकाशवाणी पर समाचार आ रहे हैं। कोरोना अब महामारी बनता जा रहा है। प्रकृति में संतुलन के लिए समय-समय पर अतीत में भी महामारी फैलती रही है। आज सुबह वे जल्दी उठ गये। टहलने गए तो हवा में हल्की ठंडक थी। कम से कम सौ लोग और भी थे उस सड़क पर, जिसे सुबह के समय ट्रैफ़िक के लिए दोनों ओर से बंद कर दिया गया था। कई बड़े शहरों में प्रातः भ्रमण के लिए ऐसा ही प्रबंध होता है आजकल। कुछ लोग खेल रहे थे, कुछ साइकिल चला रहे थे और कुछ व्यायाम भी कर रहे थे। कल शाम विवाह का सुंदर आयोजन सम्पन्न हो गया। अहोम तथा कश्मीरी दोनों तरह की रीति से विवाह हुआ। कई पुराने परिचित लोगों से मुलाक़ात हुई। 


आज वे उमियम झील यानि ‘बड़ा पानी’ में आ गये हैं। गोहाटी से शिलांग पहुँचने से लगभग बारह किमी पहले मीठे पानी की यह एक बड़ी सी झील है, जिसके किनारे सुंदर विश्राम स्थल बन गए हैं। एक रात वहाँ  गुजरने का इरादा है। हिमालय की अचल पर्वत शृंखला के सान्निध्य में स्थित यह शांत झील एक आकर्षक पर्यटक स्थल है। सब कुछ कितना स्थिर लग रहा है। यह पर्वत न जाने कितने काल से ऐसे ही खड़े हैं। दोपहरी का समय है। झील का हरे रंग का पानी भी जैसे विश्राम कर रहा है। किनारों पर उगे चीड़ के वृक्ष भी मौन हैं, जिन पर लगे कोन धूप में चमक रहे हैं । कुदरत का यह सुंदर दृश्य जैसे उन्हें अपने भीतर की स्थिरता को महसूस करने के लिए आमंत्रण दे रहा है। कभी-कभी पंछियों  की आवाज़ें निस्तब्धता को भंग कर देती हैं, झींगुर की आवाज़ भी वातावरण को और अर्थवान बना रही है।  एक श्वेत तितली काफ़ी ऊँचाई पर उड़ रही है। वह प्रकृति की इस लीला को निहार ही रही थी कि अचानक हवा बहने लगी, कुछ वृक्ष मस्ती में झूम रहे हैं।


Tuesday, February 1, 2022

बादामी गुफ़ाएँ

बादामी गुफ़ाएँ

रात्रि के दस बजकर दस मिनट हुए हैं। सुबह छह बजे वे उत्तरी कर्नाटक स्थित बादामी गुफ़ाओं की यात्रा के लिए रवाना हुए। छठी  शताब्दी में बने ये गुफा मंदिर देखने वाले को चकित कर देते हैं। तत्पश्चात बनशंकरी मंदिर में नींबू की माला पहने हुए देवी की भव्य मूर्ति के दर्शन किए। अगला पड़ाव था पट्टकदलु, जहाँ मंदिर के अवशेष मात्र ही थे। कुडल संगम, आईहोले, बसवा तीर्थ (बसवन्ना ) अनुभव मंटप तथा संग्रहालय के प्रांगण में स्थित सुंदर मूर्तियाँ भी देखीं।बसन्ना भगवान की जीवन कथा सुनी, उनके वचनों की पुस्तक मंगायी है। बारहवीं शताब्दी का यह संत अपने समय से बहुत आगे था। उनके मन में किसी भी प्रकार का  कोई भेदभाव नहीं था।  लौटे तब अँधेरा हो गया था । कल हम्पी जाना है, जहाँ विजयनगर साम्राज्य के अवशेष आज भी हज़ारों दर्शकों के आकर्षण के केंद्र बने हैं।   


आज वे घर लौट आए हैं। कल रात नौ बजे चली हम्पी एक्सप्रेस सुबह समय से पूर्व ही आ गयी थी । कल दिन भर कड़ी धूप में छाता व टोपी लगाकर मीलों पैदल चलते हुए वास्तुकला के सुंदर नमूने देखे, जो भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। सुबह का नाश्ता नन्हे के घर पर किया। बड़ी ननद का फ़ोन आया। वे लोग बिटिया का रिश्ता टूटने से, बल्कि तोड़ने से खुश हैं। समाज बदल रहा है। लड़कियों को अपना सम्मान करना आ रहा है। वे विवाह करके ग़ुलामी का जीवन नहीं बिता सकतीं। उनका आत्मसम्मान उन्हें औरों के आगे बेवजह निरीह बनकर रहने  नहीं देगा। जितना अधिकार अपनी बात कहने का किसी लड़के या पुरुष को है, उतना ही अधिकार स्त्री या बालिका को भी है। हर आत्मा की पहली पुकार है स्वाधीनता। साथ-साथ रहते हुए भी एक-दूसरे का सम्मान करते हुए उन्हें विकसित होने देना किसी भी रिश्ते को गहराई प्रदान करता है। आज महिला क्रिकेट टीम फ़ाइनल में पहुँच गयी है। एक वक्त ऐसा भी था जब महिला क्रिकेट को सम्मान नहीं मिलता था। अब महिला खिलाड़ियों के नाम भी लोगों को याद होने लगे हैं। महिलाएँ वे सभी कार्य कर रही हैं, जो कभी पुरुषों के एकाधिकार में थे। 


रात्रि के आठ बजे हैं, गुरूजी श्री श्री यूनिवर्सिटी से ध्यान साधना करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, जो आंदोलन देश में चल रहा है, वह सीएए के ख़िलाफ़ नहीं है, क्योंकि ऐसे क़ानून अन्य देशों में भी हैं। कुछ ऐसे लोग जो खुद को कटा हुआ मानते हैं, इसमें शामिल हैं, और कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी इसका लाभ उठा रही हैं। सरकार भी झुकने को तैयार नहीं है। गुरूजी ने यह भी कहा, वकीलों को काले कोट की जगह कोई और रंग पहनना चाहिए। उनके सत्संग में एक अन्य साधक प्रसानी जी भी आए हैं, जिन्हें उड़िया में कविता सुनाने को कहा है।  उन्होंने गुरूजी के नाम की श्रेष्ठता बतायी। नाम सुमिरन से ज्ञान की वृद्धि होती है और चेतना की शुद्धता से शांति का प्रसरण होता है।परमात्मा के सिवा आत्मा का कौन निकटस्थ है। 


आजकल हर जगह एक नयी बीमारी कोरोना का भय है इसलिए होली खेलने का उत्सव इस बार नहीं मनाया जाएगा, ऐसा प्रधानमंत्री ने भी कहा। कोरोना के कारण छोटे भाई की विदेश यात्रा भी स्थगित हो गयी है। नन्हा और सोनू एक मित्र के विवाह में कोचीन गये हैं, सुबह मोबाइल पर उन्होंने अपना कमरा दिखाया, नदी के किनारे स्थित है उनका होटल। मौसम गर्म हो गया है।  





Thursday, October 7, 2021

तुंगभद्रा के किनारे

तुंगभद्रा के किनारे 


रात्रि के नौ बजे हैं, रात्रि भोजन के बाद टहलते समय पिताजी से बात की। वह आज व कल अकेले रहेंगे, नवासी वर्ष की उमर में भी वह अकेले रह सकते हैं, यह क़ाबिलेतारीफ़ है। उन्होंने बताया, एक नयी किताब पढ़ी, ‘गॉड डेल्यूजन’, जो छोटी पोती ने दी है। उसे भी आध्यात्मिक किताबें पढ़ने का शौक़ है, पर नूना ने इस किताब के बारे में पढ़ा तो आश्चर्य हुआ, इसमें ईश्वर के अस्तित्त्व को नकारा गया है। लेखक नास्तिक है और उसे धर्म की कोई आवश्यकता नज़र नहीं आती। शायद आस्तिक होने के लिए नास्तिकता के पुल को पार करके ही आना होता है। शाम को वे निकट स्थित एक नर्सरी में माली ढूँढने गये, कल एक माली छत देखने आएगा, जहाँ टैरेस गार्डन उगाना है, शायद अगले वर्ष तक उनके सपनों का बगीचा तैयार हो जाए।आज लॉन में नयी घास भी लगवायी। जून ने बताया सोलर पैनल के द्वारा आज बिजली का अधिकतम उत्पादन हुआ, सुबह ठंड थी पर दिन में तापमान बत्तीस डिग्री था। आज अचानक शयनकक्ष के स्नानघर में पानी रिसने लगा, शायद दीवार में कोई पाइप ब्लॉक हो गयी है।


कल शाम एक पुराने परिचित के पुत्र के विवाह समारोह में सम्मिलित हुए, जहाँ कई पुराने परिचित  मिले। पुराने मित्रों से मिलना कितना सुखद अनुभव होता है। आज दिन में एओएल का ट्रांसक्रिप्शन का कार्य पहली बार किया। शाम को शिवरात्रि उत्सव के कार्यक्रम में आश्रम गये। हज़ारों की भीड़ थी। ‘मैं’ को पीछे रखकर किया गया कार्य ही सेवा है, गुरूजी ने अपने प्रवचन में कहा। सुबह जून के एक मित्र परिवार सहित आए थे,  उनकी डाक्टरी पास पुत्री अगले पाँच दिन यहीं रहेगी। वह सहयोगी प्रवृत्ति रखने वाली बहुत शांत स्वभाव की है और समझदार भी। मृदुभाषी है, सहज और धीरे बोलती है। उसे एमडी की परीक्षा की तैयारी करनी है।  अगले हफ़्ते दोनों परिवारों को मिलकर हम्पी और हौस्पेट की यात्रा पर जाना है।  बहुत दिनों बाद रेलयात्रा का आनंद मिलेगा। 


सुबह-शाम बगीचों में भ्रमण करते, सूर्योदय व सूर्यास्त की तस्वीरें उतारते दिन बीत रहे हैं। शाम को बैडमिंटन खेला। नन्हे ने बगीचे के लिए सौर ऊर्जा से जलने वाली दो मशालें भेजी हैं, दिन भर में ऊर्जित हो जाती हैं, रात भर जलती हैं, उनकी रोशनी दूर से ही दिखती है। कल छोटी डाक्टर अपने घर चली जाएगी। 


आज सुबह सात बजे वे एक मित्र परिवार के साथ हौस्पेट पहुँच गये थे। समाचारों में सुना, कोलकाता में गृह मंत्री ने बयान दिया है कि सीएए का व्यर्थ ही विरोध किया जा रहा है। आस्था पर संत संचित, क्रियमाण व प्रारब्ध कर्म के बारे में बता रहे हैं। यह यात्रा क्रियमाण कर्म है, इसमें होने वाले अनुभव प्रारब्ध कहे जा सकते हैं। संचित कर्म में से कुछ कर्मों के कारण ही वे इस दुनिया में आए हैं। आज तुंगभद्रा नदी पर बना बांध देखने जाना है। कर्नाटक में कई सुंदर प्राकृतिक स्थल हैं तथा मानव की अपरिमित क्षमता से बनाए गए कई दर्शनीय स्थान भी। यहाँ लोहे का बड़ा भंडार है जिस कारण स्टील की कई फ़ैक्टरियाँ भी हैं। ज्वर,

कल सुबह यात्रा का आरंभ एक ऐसे स्थान से किया जहाँ बच्चों और युवाओं के लिए रोमांचक खेल थे, वहाँ कुछ झूले, रस्सी के पुल आदि बने थे। उन्होंने उस स्थान का भरपूर लाभ उठाया और अपनी क्षमता को पहचाना। दोपहर को एक सहकारी बैंक में गए। जिसकी स्थापना मित्र के पिता जी ने की है। शाम तक तुंगभद्रा के किनारे पहुँचे। सूर्यास्त का अनुपम दृश्य देखने बहुत सारे दर्शक आए थे। पार्क में संगीतमय फ़ौवारे लगे थे। पूरा वातावरण एक मोहक स्वप्नलोक की रचना कर रहा था। उसके बाद मित्र अपने चचेरे भाई के यहाँ ले गये। जहाँ ज्वार की रोटी के साथ मूली-टमाटर का रायता, मूँगफली व लाल मिर्च की चटनी, मेथी-पालक वाली दाल तथा अंकुरित सलाद था, सभी व्यंजन स्थानीय थे और अति स्वादिष्ट भी।मित्र की चाचीजी से  ज्वार की रोटी बनाना भी सीखा। लगभग उबलते हुए पानी में इसका आटा गूँथा जाता है। घर में दो बच्चे भी थे जो काफ़ी समय तक मोबाइल पर ही खेल रहे थे।एक ही दिन में कितने सारे अनुभव हो गये, यात्रा कितना कुछ नया सिखाती भी है। कल उन्हें बादामी गुफ़ाएँ देखने जाना है।