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Tuesday, February 15, 2022

ताली और थाली


सुबह पाँच बजे ही वे उठ गये थे, होटल के कमरे से ही सूर्योदय का दृश्य दिखायी दे रहा था। झील तक गये तो सूर्य का नारंगी गोला नीले आकाश के साथ झील के पानी में भी सुशोभित हो रहा था। उन्होंने सुंदर तस्वीरें उतारीं और नाश्ते के बाद वापसी की यात्रा आरंभ की। रात्रि ग्यारह बजे घर पहुँचे तो नन्हा और सोनू प्रतीक्षा रत थे। पौधों का कार्टन रात्रि को ही खोल दिया था, सुबह पिटूनिया के पौधे रोप दिए। शेष बचे पौधों के लिए नन्हे ने नए गमले आर्डर कर दिये हैं। गुरूजी आश्रम से लाइव टेलीकास्ट के द्वारा संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा, कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं है, पर सावधान रहना है; कम से कम दिन में दो बार ध्यान करना चाहिए। घर में रहकर समय का सदुपयोग हो इसलिए नई भाषा सीखनी चाहिए, नई किताबें पढ़नी चाहिए। कल नन्हे ने एक नयी किताब दी है, बैटल बियोंड कुरुक्षेत्र: ए महाभारत नॉवल, जो द्रौपदी को केंद्र में रखकर लिखे गए मलयालम उपन्यास का अंग्रेज़ी अनुवाद है। कल से पढ़ना आरंभ करेगी।  कोरोना के  कारण छोटा भाई केरल नहीं जा रहा है। उसने कुछ पंक्तियाँ लिखीं इसी महामारी पर। आर्ट ऑफ़ लिविंग  के हिंदी सेक्शन ने कुछ अनुवाद कार्य उसे दिया है। गुरु जी के भाषणों से कुछ अंश लेकर ‘हिम्मत ना हारिये’ इस पर एक लेख भी  लिखना है। देश भर में भी काफ़ी कदम उठाए गये हैं इस सिलसिले में। कई देशों में तो सब कुछ ही बंद हो गया है, केवल ज़रूरी सामानों की दुकानें खुली हैं। सुबह भागवद में सृष्टि रचना के बारे में सुंदर विवरण पढ़ा। देवताओं की सहायता से परमात्मा इस सृष्टि को चलाते हैं पर वह हर जगह स्वयं रहते हैं। उनकी उपस्थिति के बिना देवता भी कुछ नहीं कर सकते। 


आज शाम छोटी बहन से बात हुई। उसे शारजाह जाना है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए डाक्टर्स को  विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। यह वायरस जानवर से मानव में पहुँचा फिर मानव से अन्य मानवों में और अब तो पूरे विश्व में एक सौ पैंतालीस देशों में पहुँच गया है। कुछ देर पहले मोदी जी का देश के नाम संदेश सुना। उन्होंने महामारी से बचने व औरों को बचने के उपाय सुझाए। बाइस मार्च को जनता कर्फ़्यू के लिए कहा जो सुबह सात बजे से रात्रि नौ बजे तक होगा, और शाम को पाँच बजे, दिन-रात बचाव के लिए लगे डाक्टर्स तथा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ताली या थाली बजाकर धन्यवाद देने को कहा। उनका भाषण आत्मीयता से भरा हुआ था और देशवासियों को सही समय पर सचेत करने का बहुतर प्रशंसनीय प्रयास था। गुरूजी ने भी सुंदर संदेश दिया। कुछ दिनों के लिए सभी को अवसर मिला है कि अपने साथ रहें, विश्राम में रहें और बुद्धि को भी विश्राम करने दें। उन्होंने सेवा भाव को जगाने का सुंदर संदेश भी दिया।जो निर्धन हैं, जो रोज़ काम करके  अपना गुज़ारा करते हैं, इस विपदा को कैसे उनकी मदद करने के अवसर में बदला जा सकता है । नन्हे ने बताया, उसकी टीम ने चायनीज टीम के साथ बात की, वहाँ कई लोग इसलिए मर गए क्योंकि उनका इलाज ही नहीं हो पाया, वहाँ अस्पताल कोरोना मरीज़ों से भर गये थे। आज वे टहलने गए तो पूरी सड़क ख़ाली थी। अगले दो हफ़्तों तक काफ़ी सजग रहना होगा। भारत में कोरोना मरीज़ों की संख्या दो सौ बयालीस हो गयी है और पाँच की मृत्यु हो गयी है। सारा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। अमेरिका में एशियन के ख़िलाफ़ क्रोध भर गया है। चायना के प्रति भी कई लोग क्रोधित हैं। इसकी शुरुआत वुहान से हुई थी जो चीन में है।  ‘लॉक एंड की’ का अगला अंक देखा, काफ़ी प्रभावशाली है यह धारावाहिक।