Showing posts with label हीमैन. Show all posts
Showing posts with label हीमैन. Show all posts

Thursday, January 31, 2013

सपने में ही मैन



आज शनिवार है, यानि जून लंच के बाद घर पर रहेंगे, पर नन्हे का स्कूल खुला है. कल वे तिनसुकिया गए शाम चार बजे, सात बजे लौट तक आये. वहाँ इतना कीचड़ था. मुख्य सड़क पर ही पानी भरा था, गंदा बदबूदार पानी, कितनी बीमारियों के कीटाणु रहे होंगे, फैलते होंगे वहाँ. कोई कुछ करता क्यों नहीं, जैसे वे कुछ नहीं करते. अखबार में एक बूढ़े पिता की अपील पढ़ी, जिसका अंतिम बेटा अस्पताल में है, किडनी का आपरेशन होना है, दो लाख रूपये इक्कट्ठे करने हैं. पढकर सहानुभूति होती है, लेकिन मात्र सहानुभूति तो काफी नहीं. पैसे वैसे ही बहुत खर्च हो गए हैं इस बार, किताबों पर ही सात-आठ सौ रूपये. पैसे के बारे में उसे कभी कोई चिंता नहीं करनी पड़ी. जून ने कभी होने ही नहीं दी. इस मामले में वह बेहद भाग्यशाली है. यूँ तो और भी कई मामलों में है. आजकल रात को उसे स्वप्न बहुत आते हैं, खासतौर पर सुबह के वक्त, जो याद भी रह जाते हैं, नींद शायद ठीक से नहीं आती. दिन में सोना बिलकुल बंद करना होगा. जून भी आजकल सुबह जल्दी नहीं उठ पाते क्या उन्हें भी गहरी नींद नहीं आती, उनके बारे में कुछ न लिखे तो लगता है कुछ छूट गया है क्या यह कर्त्तव्य बोध के कारण है या...बाल्मीकि रामायण का अयोध्या कांड पढ़ रही है आजकल, राम का चरित्र कितना महान दर्शाया गया है, तभी तो आज हजारों साल बाद भी राम नाम इतना पवित्र है, सीता-राम संवाद बेहद सुंदर है.

कल शाम को एक परिचित परिवार आया, काफी देर तक रहे वे लोग, अच्छा लगा. आज बहुत दिनों बाद फिर से समय मिला है स्वयं के पास आने का पर माध्यम बाहरी है. कैसेट बज रहा है, ‘बच्चन की मधुशाला’ और किताब भी वही खुली है कविता की. उसे अपना आप कविता में ही मिलता है शायद. कल मोहन राकेश की कहानी पर बना धारावाहिक देखा, लगता है यह कहानी पढ़ी है उसने. आज मौसम कल से ठंडा है. अभी हवा में शीतलता है दोपहर तक जो गर्मी में बदल जायेगी. लक्ष्मी का स्वास्थ्य अभी भी ठीक नहीं हुआ है, आज अस्पताल गयी है, बहुत कमजोर लग रही थी आज सुबह. लम्बी बीमारी है, अब साल भर ऐसा ही चलेगा शायद.

जुलाई का महीना खत्म होने को है, सुबह टीवी पर देखा, आज श्रावण मास की दूसरी तिथि है. मालपुए बनाने का महीना. किसी दिन बनाएगी जब खूब तेज वर्षा हो रही होगी. आज दस बजे तक ही सब काम हो गया है, देर तक रामायण भी पढ़ सकी. आज धूप अपने पूरे शबाब पर है.. चमकदार.. झनझनाती हुई. नन्हा आज बड़ी बोतल ले गया है पानी की, उसे बहुत प्यास लगती है स्कूल में. कक्षा में पंखे भी तो ठीक से नहीं चलते. उसने आज सुबह एक सपना बताया. बड़ा मजेदार था ‘हीमैन’ का सपना. उसने भी कल किराये के मकान का एक सपना देखा. जून और वह कुछ दिनों पहले बात कर रहे थे कि उन्हें आसाम छोड़कर चले जाना चाहिए और किराये के मकान में रहना चाहिए जब तक अपना मकान  न बन जाये. इसी की परिणति थी यह सपना. लेकिन इतनी सुख-सुविधाओं को छोडकर चले जाना बुद्धिमानी नहीं कही जायेगी. बात जून के विभाग की समस्याओं को लेकर शुरू हुई थी जो हर जगह होती होगी.