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Tuesday, April 12, 2022

सपनों की दुनिया

आज देश के नाम प्रधानमंत्री का सम्बोधन था, कहा, चौथा लॉक डाउन होगा पर नए नियमों के साथ। उन्होंने देश को आत्म निर्भर बनाने की बात भी कही। सुबह उठी तो भीतर मौन था, एक शांति भरा मौन ! गुरूजी के लिए दोपहर को एक कविता लिखी, कल उनका जन्मदिन है, एओएल के हिंदी विभाग में काम करने वाले एक साधक ने उसे सजा दिया है। उसे भविष्य में अन्य कविताएँ भी भेजेगी। चाहे तो फ़ेसबुक पर एक पेज बना सकती है, जहाँ उनके लिए लिखी कविताएँ पोस्ट कर सके। जून छोटी भांजी के लिए लिखी कविता को सुंदर बना रहे हैं, जो अपना जन्मदिन गुरूजी के जन्मदिन के साथ साझा करती है। आज महाभारत में दुर्योधन भी मारा गया। अश्वत्थामा की मणि छिन गयी और उसे उसी पीड़ा के साथ अमर रहने का शाप मिल गया, इतना कठोर दंड ! 


शाम को टहलने गए तो मास्क लगाया था, जून को कठिनाई होती है; पर अभी कोरोना का डर गया नहीं है, न ही कोई दवा आयी है इसके इलाज के लिए। आज काव्यालय के संस्थापक कवि का मेल आया, उनकी एक पुस्तक आयी है, उनकी कविताओं को पढ़कर वह कुछ पंक्तियाँ उन्हें नियमित भेज रही है, उन्हें अच्छा लगा। वाक़ई उनकी हर कविता में एक नया अन्दाज़ है। आज शाम से पूर्व उन्होंने आधा घंटा योग व पुस्तकालय कक्ष में बैठकर पढ़ने के लिए और रात्रि में सोने से पूर्व कुछ समय बालकनी में  बैठने के लिए निकाला है , ताकि उनके घर का हर कोना आबाद रहे। कहीं सुना था कि घर के वे कोने जहाँ कोई नहीं जाता, नकारात्मक ऊर्जा से भर जाते हैं। आज सुबह नींद खुली उससे पूर्व एक स्वप्न में मृणाल ज्योति में खुद को पाया, उसका फ़ोन कहीं छूट गया है, जून से कहा फ़ोन करें, तब विचार आया यह स्वप्न है और नींद खुल गयी। दो दिन पहले एक विचित्र स्वप्न देखा था, जिसमें बहुत सारे हाथी हैं, जीवित भी और चारों तरफ़ आलमारी में उनके छोटे-बड़े चित्र भी। एक हाथी उसे कुचलने के लिए बढ़ता है पर ज़रा भी भय नहीं लग रहा, वह उसके पैरों के नीचे है पर कोई दर्द नहीं हो रहा फिर एक बच्चे के साथ उड़ जाती है, उड़ते समय देह में नहीं है पर साथ में जो बच्चा है उसका गोरा चेहरा और काले बाल स्पष्ट दिखे।


सुबह उपनिषद गंगा में ‘सत्यकाम’ की कहानी देखी, शाम को विष्णु पुराण में ‘ध्रुव’ की। दोपहर को जून ने ‘रजनीगंधा; लगायी यू ट्यूब पर, अमोल पालेकर की फ़िल्म। शिव सूत्र सुना, पढ़ा भी। शाम से मन की समता हटी नहीं है, पहले जून की थोड़ी सी नाराज़गी से मन कैसा व्याकुल हो जाता था, अब वह पुरानी बात हो गयी है। हर कोई अपने सुख-दुःख का निर्माता है, यदि वे नहीं चाहते कि दुखी हों तो संसार की कोई भी बात उन्हें दुखी नहीं कर सकती और यदि उन्होंने तय ही कर लिया है कि उन्हें दुखी रहना है तो छोटी से बात को भी कारण बना सकते हैं। मई आधा बीत गया है, कोरोना संकट कम नहीं हो रहा है। 


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं, वह सिट आउट में बैठकर लिख रही है। हवा बंद है, कुछ देर पूर्व हल्की बूँदा-बाँदी हुई पर गर्मी कम नहीं हुई। कुछ देर पूर्व रात्रि भोजन के बाद वह टहलने गये तो एक घर से गुरूजी की आवाज़ में निर्देशित ध्यान की आवाज़ आ रही थी; कदम वहीं थम गए। एक घर से बाँसुरी की आवाज़ रोज़ आती है, कोई रात को अभ्यास करता है । सभी लोग घर में हैं तो ध्यान, संगीत आदि में समय बिता रहे हैं; इतना तो शुभ हुआ है लॉक डाउन के कारण। कल रात उसने जून से कहा, उसकी बातों को गंभीरता से न लें, आगे आने वाले सोलह वर्षों में ( उसे लगता है इतना ही जीवन शेष है) उसकी किसी भी बात को उन्हें सत्य मानने की ज़रूरत नहीं है, क्यंकि सत्य क्या है यह जिसको पता चल जाता है उसके लिए शेष सब असत्य हो जाता है। ‘ब्रह्म सत्यं जगत मिथ्या’ उक्ति तब हक़ीक़त नज़र आती है।  


Wednesday, December 25, 2013

चॉकलेट केक वाली पार्टी


Something has to be done, it is the one feeling which is with her since morning. Got up at 4.30, taught Hindi but was not satisfied, asked jun to bring some help book. Could not eat breakfast also, there was some odd feeling in the stomach. Talked to friends. Yesterday finished “ A suitable boy”. It was a great experience of pure bliss and happiness through black and white after so many months. She liked the story, the language, the characters and every thing about it. ! she thought, should note down some good lines from the book. Lata got Haresh and vice verse and she got some beautiful thoughts and memories. Naini’s son asked that he wanted one pair of shoes and one school bag instead of money in return of doing the work in garden, smart boy !

जुलाई आरम्भ हो चुका है, नन्हे के जन्मदिन का महीना..आजकल वह अपने निर्णय खुद लेने लगा है. सुबह जब वे उठे तो मूसलाधार वर्ष हो रही थी, रात को देखा एक अजीब और डरावना सा स्वप्न बार-बार याद आ रहा था. एक बड़ा सा हाथी और शकरकंदी....शायद कल हिंदी कक्षा में भूषण की कविता में तलवार से हाथियों के काटे जाने की बात का असर हो... स्वप्न भयानक भी हो सकते हैं और आनन्द प्रद भी, जैसे कल वह हवा में उड़ रही थी, कहीं पढ़ा था, शरीर में वायु होने से ऐसे स्वप्न आते हैं. नन्हा आज किचन में टीवी पर देखे एक कार्टून प्रोग्राम की कहानी बड़े उत्साह से बता रहा था, उसने न समझते हुए भी हाँ, हाँ किया. इसी तरह कभी-कभी जून के साथ भी करती है. प्यार का यह भी एक रूप है शायद, उन्हें इससे क्या फर्क पड़ता है कि उसे कितना समझ में आया या कितना महसूस किया, पर उन्हें इस बात का अहसास तो हो जाता है कि she cares for them कि वह सुन रही है या महसूस कर रही है.. क्या गाँधी जी के असत्य भाषण में यह भी आता है ? अगर ऐसा है तो जाने कितने झूठ उसने बोले हैं.

अभी-अभी उसने अपने एक स्वप्न को साकार बनाने की दिशा में पहला कदम उठाया, music teacher से music सीखने जाने के लिए दिन व समय तय किया. सोमवार से शुरुआत करनी है, हर तरह से यह दिन शुभ है. कल इसी तरह spoken English के लिए भी मन ही मन कुछ सोचा. She should learn through TV  programs, newspapers, novels and poems and most of all should practice it . she reads but do not tries to remember the new words. She admires thoughts not words ie why she has so poor vocabulary and even poorer pronunciation.

Today in the morning she talked to mother, got so many news of brothers and sisters. Meditation was not successful even sleep was also full of meaningless dreams. Mind does not remain calm for a single moment. Why is this war ? this confrontation?

कल दोपहर आखिर वह संगीत सीखने जा पाई, घर में बढ़ई का काम चल रहा था, समय से पूरा हो भी पायेगा सुबह से यही आशंका थी मन में, पर कारीगर ने समय पर काम निपटाया. जल्दी-जल्दी घर से निकल टीचर के सुंदर घर में दाखिल हुई, बिना यह देखे, जाने कि वह सीख भी सकती है या नहीं, उन्होंने ‘सरगम’ सिखानी शुरू की, शुरू में तो हाथ set नहीं हो पा रहा था हारमोनियम पर अंगुलियाँ क्रम में नहीं बैठ रही थीं पर बाद में हाथ तो बैठ गया, गले से आवाज ही नहीं निकल रही थी, लेकिन रियाज और अभ्यास से वह एक दिन गा सकेगी ऐसा विश्वास है. पिछले दो हफ्तों से खतों के जवाब देने का काम जून कर रहे हैं, शायद धीरे-धीरे उसकी भी खत लिखने की आदत छूट जाएगी.

अभी तक एसी फिट करने वाले नहीं आये हैं, नन्हे का कमरा बिखरा-बिखरा सा है. जून आज फील्ड गये हैं, मौसम वही भीगा-भीगा. कल सुबह से जो वर्षा शुरू हुई है इस समय सुबह के दस बजे तक भी नहीं रुकी है. फोन भी शायद इसी कारण खराब हो गया है. कल क्लब से गांधीजी की लिखी तीन किताबें लायी है, नन्हा उनकी ‘आत्मकथा’ में थोड़ी रूचि ले रहा है अब.

मौसम आज अच्छा है बादल बरस कर थम चुके हैं. आज नन्हे का जन्मदिन है पहले उसने सोचा कि स्कूल नहीं जायेगा फिर नूना से पूछा, उसने खुश रहने को कहा तो बोला, स्कूल में घर से भी ज्यादा खुश और रिलैक्स रहता है सो चला गया. सुबह-सुबह दादाजी का फोन आया, छोटे मामा का कार्ड आ चुका है, शाम को वे एक छोटी सी पार्टी दे रहे हैं. उसने चाकलेट केक बनाया है, दोपहर को एक सखी के साथ मिलकर आइसिंग करेगी. नन्हे को ‘बार्डर’ फिल्म देखनी है, उसे planes, tanks और rifles में बहुत रूचि है जैसी कि उसकी उम्र के हर बच्चे को आमतौर पर होती है.


Wednesday, August 29, 2012

स्वप्नों सा संसार



दो सप्ताह बाद उसे कुछ लिखने का समय और सुविधा मिली है. यहाँ आये इतने दिन बीत गए, जून वापस असम चले गए. सभी रिश्तेदार भी एक-एक करके चले गए. अब घर खाली हो गया है. आज छोटी ननद भी कॉलेज गयी है. नन्हा ऊपर खेल रहा है अपने दादाजी के साथ. दादी-दादा दोनों का मन स्नेह का असीम सागर है, कितना गहरा दुःख मन में छिपाए ऊपर से खुश रहने का प्रयत्न करते हैं. सासूजी तो दिन में रोने के कई बहाने निकाल लेती हैं पर पिता शांत ही रहते हैं. एक दिन उसने देवर के खत पढ़े न जाने कितने मित्रों के खत आते थे उसके नाम. उसकी एक दीदी नीला को उसने पत्र लिखा था, मिल गया होगा. मन होता है उसकी उस मौसेरी बहन को पत्र लिखे जो अंतिम घड़ी में उसके साथ थी, पर माँ को पसंद नहीं है. आज जून का पत्र भी आना चाहिए, कल उसका फोन आया था पर उनके पहुंचने के पूर्व ही कट गया, कल शाम वे उसके एक मित्र के घर गए कि वहाँ उसका फोन आयेगा पर उनका फोन ही खराब था. उसका ध्यान अपने लम्बे नाखूनों पर गया, इतने दिन काटने का समय ही नहीं निकाल पायी.

कल रात वे सभी भोजन कर रहे थे कि जून का टेलीग्राम मिला. पहले तो टेलीग्राम का नाम सुनकर ही सब चौंक गए, फिर वह यह सुनते ही कि उसके नाम है, वह घबरा गयी, पर जून की कुशलता का तार था और उसने जानना चाहा था कि वे कैसे हैं, लगता है उसे उसका पत्र नहीं मिला है. परसों तक नहीं मिला होगा, उन्हें भी कल मिले उसके तीन पत्र एक साथ, अब तो जरूर मिल गए होंगे चार-पांच खत जो उसने इतने दिनों में पोस्ट किये. आज उसने कहा, वह छोटे भाई की शादी में जाना नहीं चाहती पर वे लोग जाने के लए बहुत जोर दे रहे हैं. सोनू के लिये एक जूता खरीदना है, कल अपनी  पैंट सिलवाने दादाजी के साथ गया, पहली बार उसकी नाप दिलवाई गयी. देवर के एक मित्र ने लद्दाख के तीन फोटो भेजे हैं. उसके अन्य मित्रों के भी चार-पांच पत्र आ चुके हैं, वह सोचने लगी कि सभी को जवाब दे या एक को लिख दे, वह अन्य सबको सूचित कर दे.

पिता का दुःख माँ के दुःख से बड़ा लगता है. दोनों दुखी हैं. दोनों को दुखी होने का अधिकार है. दोनों का युवा पुत्र दुनिया छोड़कर चला गया है. कहाँ गया है क्यों गया है यह भी कोई नहीं जानता. दुर्घटना तो दुर्घटना होती है इसमें कौन, कब, क्यों, कहाँ जा रहा है इसका हिसाब नहीं रखती. पर उनका दुःख कौन बांटेगा, कौन समझायेगा उन्हें और समझाने से क्या वह समझ जायेंगे. जगे हुए को जगाना कितना मुश्किल होता है वैसे ही दुखी व्यक्ति को समझाना भी. पता नहीं क्यों, पर उसे ऐसा लगता है.
कल रात दो स्वप्न देखे एक शुभ और एक अशुभ. वह और जून किसी पर्वतीय स्थल पर शायद गोवा असम, दार्जलिंग तीनों में से किसी एक जगह पर घूम रहे हैं, सीधी सड़क है, दोनों ओर ऊँचे-ऊँचे घने वृक्ष हैं, वे चलते ही जा रहे है, सड़क खत्म होती है, दायीं तरफ नीचे घाटी है और बाएं किनारे ऊँचा टीला, जिस पर बहुत सारे हाथी हैं. पहले तो वे प्रकृति की सुंदरता निहारते रहते हैं, फिर जैसे ही उसकी नजर जाती है, वह कहती है हाथी, और एक हाथी जून के पीछे लग जाता है. वह आगे दौड़ता है वह पीछे है. तभी हाथियों के बच्चे भी नीचे उतर आते हैं एक बच्चा उसके पीछे पड़ता है पर उसे चोट नहीं आती. तभी एक जीप आती है, दरवाजा खुलते ही वह बैठ जाती है. ड्राइवर कहता है, your husband is in hospital . उसके बाद जून की मेडिकल रिपोर्ट देखती है औए सपना टूट जाता है.
दूसरे स्वप्न में देखा कि ननद माँ से कह रही है, भाभी का स्वप्न पूरा हुआ, यानि वह माँ बनने वाली है. पता नहीं क्यों आजकल उसे भी ऐसा लगता है. मगर ऐसा होने का कोई कारण नहीं. कितु कभी-कभी चमत्कार भी तो होता है.