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Wednesday, March 30, 2016

हंस का विवेक


आज वर्षा रुकी है पर मौसम सुहाना है. कल शाम को हुए सत्संग में उसने गाइडेड मैडिटेशन कराया. जब तक सोच-सोच कर बोल रही थी, अंग्रेजी थोड़ी अटपटी थी पर बाद में जब सहज होकर बोलने लगी तो अपने आप ही जैसे शब्द निकलते गये. कल हयूस्टन में लिखी डायरी पढ़ी, अच्छी रचना हो सकती है कितना कुछ लिखा हुआ है जो टाइप करना है. ईश्वर ने उसे शब्दों से प्रेम सिखाया है पर वह उस कला की उतनी कद्र नहीं कर रही, इच्छा शक्ति की कमी, आत्मविश्वास की कमी, प्रमाद तथा ऐसे ही किसी दुर्गुण के कारण ही तो, संकल्प करती है पर पूरे नहीं कर पाती. अज टीवी पर सुना, स्वामी रामदेव जी कह रहे थे वह कुत्ते की तरह होता है जो अपने संकल्पों का पालन नहीं करता. हंस की तरह उन्हें बनना है. हंस जो नीर-क्षीर का विवेक कर सकता है. अगले महीने रक्षाबन्धन का त्यौहार है. जून के हाथ राखियाँ भिजवा सकती है, पत्र लिखने होंगे. कल शाम एक नयी फिल्म देखी, ‘जाने तू या जाने ना’.

आज एकादशी है. गुरु माँ गा रही हैं. ‘करां सजदा ते सिर न उठावां कि दिल विच रब दिसदा’ जब बुद्ध को ज्ञान हुआ तो वृक्षों में असमय फूल आ गये, वे जो अपनी संवेदनशीलता खो चुके हैं, खिले हुए फूल भी नहीं देख पाते. उस पर राम कृपा हुई है तभी सत्संग में रूचि है. जून से इस विषय पर थोड़ी बातचीत भी हो गयी. वह इतने व्यस्त हैं अपने रोजमर्रा के जीवन में कि उससे निकालकर कुछ और सोचने की उनके पास फुर्सत ही नहीं है. आज वह छोटी बहन के लिए एक बहुत सुंदर कार्ड लाये. कल सभी को राखी के पत्र लिखे. इस समय दोपहर की कड़ी धूप है, पंखे की हवा पसीना सुखाने में असमर्थ है. सुबह सवा चार पर उठी, प्राणायाम आदि किया, ध्यान भी आज घटा. देह में पित्त का प्रकोप शायद बढ़ गया है. पीठ पर घमौरी निकल आयी है, वर्षों बाद ऐसा हुआ है शायद दशकों बाद, बचपन मे घमौरी से उसका चेहरा लाल हो जाता था. परमात्मा उसे किसी भी अनुभव से अछूता नहीं रखना चाहते. पहले दांत, फिर गला फिर पीठ और आगे जाने क्या-क्या, पर हर अनुभव कुछ न कुछ सिखा जाता है. संवेदनशील होना भी और नम्र होना भी. कल पुस्तकालय की मीटिंग हो गयी अब कला प्रतियोगिता अगले महीने होगी. दो बजने को हैं, उसे कई सारी कविताएँ टाइप करनी हैं.

वे सदा इस इंतजार में रहते हैं कि कब वे शाश्वत सुख पा सकते हैं, वे यदि विवेक का उपयोग करें तथा स्वयं को आत्मा जानें तो इसी क्षण उस परमात्मा को पा सकते हैं, क्यों कि वह उनका अपना आप है, वह कभी उनसे अलग ही नहीं हुआ, वह है तो वे हैं, वे ही नहीं सभी उसी से हैं. जड़-चेतन सब उसी की लीला है. अभी कुछ देर पूर्व एक औरत गोदी में छोटे बच्चे को लेकर आई. कहने लगी कि उस व्यक्ति ने उसे इन घरों से पैसे मांगने के लिए भेजा है. पति का परसों ब्रेन का आपरेशन होने वाला है, उसने जब कहा उनका नम्बर दो, फोन करके पता करेंगे तो उलटे पावों लौट गयी. लोभ की प्रवृत्ति उसके भीतर है, शायद इसी कारण मदद करने को तुरंत मन नहीं हुआ. गुरु माँ कहती हैं जो लोभी होगा उसे रोग होंगे ही. लेकिन यह लोभ नहीं है बल्कि सजगता है, खैर ! आज मौसम पुनः ठंडा है. कल शाम पांच बजे से रात दस बजे तक बिजली गायब थी, वे तारों की छाँव में बैठे थे, पहली बार उन्होंने रात का भोजन बाहर खाया. नैनी की नन्ही बेटी पढ़ने आई थी पर उसका मन पढ़ने में जरा भी नहीं लगता है, कुछ ही देर बाद उसकी बनी ड्राइंग लेकर घर चली गयी है. अगले महीने स्कूल खुलने पर ही शायद उसमें पढ़ाई के प्रति रूचि जगेगी.   

Sunday, November 30, 2014

तुलसी की रामायण


आज की सुबह बेहद व्यस्त थी, नन्हे को स्कूल भेजा, उससे पहले जून का फोन आया, उन्होंने उसके लिए ड्रेस तो खरीद ली है पर महंगा होने के कारण दूसरी फरमाइश पूरी नहीं की, अब चाँदी का होगा तो महंगा तो होगा ही...खैर ! नाश्ता कर रही थी कि टीचर का फोन आया, आने को कह रही थीं. नैनी, स्वीपर दोनों का पता नहीं था सो घर बंद करके गयी. एक घंटे बाद लौटी तो दोनों आये, सब मैनेज हो गया और अभी कपड़े प्रेस करके ‘पाठ’ किया, ‘ध्यान’ अभी शेष है. इसी बीच दो फोन आये. एक में पता चला असम के मुख्यमंत्री ‘श्री तरुण गोगोई’ शनिवार को आ रहे हैं सो इस हफ्ते उन्हें विशेष पुष्प सज्जा भी करनी होगी, आज शाम पांच बजे वह एक और महिला के साथ जाएगी, एक नया अनुभव होगा उस दिन भी, क्लब में कितनी ही बार कितने कलात्मक ढंग से पुष्प सज्जा देखी है, पर इस बार स्वयं करने का अनुभव होगा. जून ने कहा है वहाँ रोज शाम को छह बजे से रात दस बजे तक बिजली गायब रहती है, जब सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत होती है. परसों वह चल रहे हैं और सोमवार सुबह उनके साथ होंगे !

Jun called in the morning, he was so loving and caring on phone as always. Last evening they went to club and then to book exhibition. She bought “Tulsi Ramayan” it is nine a.m., two friends called then she talked to two friends, could not concentrate what Guru ma and babaji were saying in today’s discourse but she knows they were talking about God, values and love. She loves this world and its maker, she loves all around her, her friends, relatives, country and its citizen, her son and husband and also she loves herself. She is grateful to God and all which bear her, she is grateful that this beautiful world has been the source of inspiration, joy and love.


पिछले दो दिन डायरी नहीं खोल सकी, शनिवार को सुबह संगीत कक्षा में गयी वहाँ से लौटकर क्लब. शाम को एक सखी के यहाँ. कल सुबह इतवार की विशेष सफाई करने में बीती, दोपहर को ‘यादें’ देखी, शनि की दोपहर भी एक फिल्म चल रही थी. आज सुबह जून आ गये, उसकी नींद चार बजे से भी पहले खुल गयी थी, बाहर के गेट का ताला खोलकर पुनः सोने की कोशिश की, वह ठीक पांच बजे आ गये, उनके वस्त्रों से ट्रेन की गंध आ रही थी, जो दो-तीन दिन की यात्रा के बाद भर जाती है. फिर उन्होंने उसके लिए लाये वस्त्र दिखाने शुरू किये, पहले गुलाबी, फिर नीला और फिर पीला - बेहद सुंदर और बेहद भव्य ! गुलाबी पर सफेद से कढ़ाई है, उसने उन्हें कहा यह उसे पसंद नहीं है पर जब बाकी दो देखे तो वह भी भा गया. उसके मन की वह इच्छा जो उस दिन डायरी के पन्नों पर जाहिर की थी अपने आप ही पूरी हो गयी. ईश्वर हर क्षण उनके साथ है यह विश्वास और भी पक्का होता जाता है. जून समय से दफ्तर भी चले गये पर थोड़ा पहले आ गये, खाना जरा कम खाया, सफर से आकर एकाध दिन तो एडजस्ट होने में लगेगा ही. आज नन्हा अपनी क्लास-सिस्टर्स के लिए चाकलेट्स ले गया है, कल नौ लडकियों ने उसे राखी बाँधी थी. आज सुबह ढेर सारे कपड़े प्रेस करने थे सो अभ्यास नहीं हुआ. अभी करेगी, दो बजे हैं, नन्हा तीन बजे तक आता है, पर जून हिंदी की दो पत्रिकाएँ भी लाये हैं, ‘हंस’ और ‘उदय जागरण’, एक साहित्यिक है तो दूसरी राजनीतिक. छोटी ननद की राखी आ गयी है, अच्छा सा पत्र भी लिखा है.