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Saturday, May 4, 2013

पहली वाशिंग मशीन




 उसकी तमिल सखी ने एक दिन पूजा में बुलाया, उसकी सासु माँ ने नूना के माथे पर टीका लगाया और बालों में सिंदूर भी. सुपारी, पान व केले का प्रसाद दिया, उनकी आत्मीयता कहीं अंदर तक छू गयी. उनका मंदिर तथा नित्य संस्कृत के श्लोकों का जप करना सब अच्छा लगा. प्राचीन भारतीय विरासत को ऐसे ही लोगों ने संभाल कर रखा हुआ है. उसे याद आया कहीं पढ़ा था, “उत्सव और क्या होता है, सिवाय इसके कि निचुड़े हुए रस का भरना और भर कर उफनना, अपने भीतर उसे समो न पाना, उसको वितरित करने की हिलोर भीतर से पैदा होना, यह सब हो और आदमी सबमें समा जाने के लिए, सबमें अपनी पहचान पाने के लिए आकुल हो जाये, उत्सव अकेले का नहीं होता”.

परसों उनकी पहली सेमी आटोमेटिक वाशिंग मशीन बीपीएल बीई ४० भी आ गयी. कल शाम को उसमें कपड़े भी धोए, ज्यादा नहीं  आठ-दस कपड़े. आज असमिया कक्षा में जाना है, काफी दिनों से अभ्यास छूट गया था. पूरी वर्णमाला लिखने बैठी तो कुछ वर्ण भूल गयी. अभी कुछ देर पहले उसकी बंगाली सखी का फोन आया, उसे उसने क्रिसेंथमम में कलियों वाले सपने के बारे में बताया, कितनी सारी, कितनी बड़ी गोल-गोल कलियाँ थीं और पीले रंग के फूल झांक रहे थे. यकीनन इस बार पीले फूल ज्यादा खिलेंगे बस थोड़े दिनों में फूलों से भर जाएँगी क्यारियां. वह लिख रही थी कि जून का फोन आया उन्हें दफ्तर में बैठकर भी इस बात कि चिंता रहती है कि नन्हा स्कूल गया कि नहीं.

“हैप्पी सेवेंथ” आज सुबह जून ने कहा तो अच्छा लगा और याद आया कि उनके विवाह के दस वर्ष पूरे होने में मात्र तीन महीने और रह गए हैं, यकीनन वह दिन यादगार होगा. आज फिर सुबह से टिप-टिप बूंदाबांदी हो रही है, यह बेवक्त की वर्षा अब नहीं सुहाती, अक्तूबर का महीना तो यूँ ही इतना मोहक होता है. ईश्वर ने जाने क्या सोच रखा है मानव जाति के लिए, मानव तो आगे बस आगे ही बढ़ना चाहता है इसका परिणाम चाहे कितना ही बुरा क्यों न हो. नन्हे की आज पहली छुट्टी है, वह नहा धोकर अपने दोस्त के यहाँ गया है. आज सुबह उसकी उड़िया सखी ने “एग लेस केक” की विधि पूछी, उसे भी कल केक बनाना है, वह सोच रही है अपनी तेलगु सखी को चाय पर बुलाए. कल उसने यूजीसी कार्यक्रम में भाषा विज्ञान पर एक अच्छा कार्यक्रम देखा. एक अच्छा भाषा विद्यार्थी नई भाषा के उपयोग का कोई अवसर नहीं छोड़ता, पर उसे झिझक होती है.