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Wednesday, April 8, 2026

गोलू का आयोजन


गोलू का आयोजन


आज गांधी जी का जन्मदिन है और शास्त्रीजी का भी। नूना ने सुबह उनकी आवाज़ में एक संदेश सुना, फिर उन पर बनी एक फ़िल्म (वृत्त चित्र) का कुछ भाग देखा। गांधी जी के बारे में फ़ेसबुक पर एक पोस्ट भी प्रकाशित की।उसने हिंदी में अनुवाद का काम पूरा करके बहुत दिनों बाद एक चित्र बनाया।सुबह-सवेरे एक कविता लिखी थी।रात को एक विचित्र स्वप्न देखा, जिसमें कई लोग हैं, एक काली सी लड़की है, जो उससे किसी बात के लिए बार-बार आश्वासन चाहती है, नूना चुप है, पर अंत में मुस्कुरा देती है तो वह खुश हो जाती है। अवश्य यह किसी पिछले जन्म की बात होगी। मन के भीतर कितने भाव, कितने दर्द छुपे रहते हैं, सभी को निकाल कर देख लेना है। आत्मा को भीतर रहने का स्थान भी तो चाहिए। यदि वहाँ राग-द्वेष का वास हो तो आनंद कहाँ वास करेगा? गुरुजी का सुमिरन अब बना रहता है और मन में एक शीतलता का अनुभव भी। कबीरदास ने इसीलिए कहा है, बलिहाररी गुरु आपने, जिन गोविंद दियो बताय। परमात्मा स्वयं तो आ नहीं सकता, वह अपनी जगह गुरु को भेजता है, उसे कोई तन तो चाहिए न, गुरु साक्षात ईश्वर होते हैं ! जून दोपहर बाद मीटिंग के लिए गये, तीन घंटे बाद लौटे। एक किरायेदार व मकान मालिक का झगड़ा हुआ, उन्हें अच्छा नहीं लगा।कल नन्हा और सोनू आयेंगे, माली आज ही आकर चला गया, सो कल उनका स्वागत वे ठीक से कर पायेंगे।  


इतवार के दोपहर के भोजन के बाद वे बच्चों के साथ उनके घर चले गये। घर बहुत सुंदर लग रहा था, सभी कमरों में नये पर्दे लगे हैं, दीवारों पर नया पेंट और नयी तरह की, कई रंगों वाली बत्तियाँ भी लगायी हैं। शाम से कुछ पहले अति विशाल बीटीएम झील देखने गये, अनेक पंछियों का बसेरा है वहाँ, अनेक पक्षी बाहर से भी आते हैं। अन्य कई लोग झील किनारे घूमने आये थे।शाम को नन्हा और जून ‘महेंद्रा एक्सयूवी ७००’ गाड़ी बुक करने गये, मिड नाईट ब्लैक रंग की है।एक दिन पहले सोनू अपनी उदयपुर वाली सखी के गृह प्रवेश में कुछ खाकर आयी थी, उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं था।आज दो पोस्ट लिखीं। किसान आंदोलन हिंसक होता जा रहा है, विपक्षी पार्टियाँ किसी भी तरह इस मुद्दे को बनाये रखना चाहती हैं। नवरात्रि का उत्सव आने वाला है, इस महीने दो जन्मदिन और दो विवाह की सालगिरह आती हैं, देवी माँ की स्तुति के साथ, सभी के लिए कुछ नूना कुछ लिखेगी।देवी पुराण भी पढ़ने का विचार है। राजनीतिक चर्चा सुनने से बेहतर होगा वह कन्नड़ भाषा सीखना पुन: आरंभ करे। 


सुबह वे सोमनहल्ली तक घूमने गये, बादलों के कारण सात बजे भी आकाश सुबह पाँच बजे जैसा लग रहा था।दिन भर प्रतीक्षा कराने के बाद शाम से ही हल्की बूँदाबाँदी हो रही है।जून आज भी दफ़्तर गये थे, कल सुबह उन्हें फिर साढ़े आठ बजे जाना है, उनकी व्यस्तता बढ़ती जा रही है। घर पर एक महिला मिलने आयीं, वह भी असोसिएशन की कमेटी में हैं। उनके पतिदेव पहले इसरो में काम करते थे। एक बिहारी प्रोफ़ेसर भी आये। फंड जमा करने के सिलसिले में मीटिंग हुई। 


आज नवरात्र पर गुरुजी का एक वीडियो देखा, कितनी सुंदर व सरल भाषा में वह देवी की महिमा का गान कर रहे थे। मंदिर की विशेष सज्जा के लिए जून ढेर सारे फूल लाए हैं।आज से फलाहार भी शुरू किया है। घुटने में हल्का दर्द था, जून ने दो बार घुटने के व्यायाम करवाये।काफ़ी आराम मिला। असम में एक पारिवारिक मित्र के पुत्र का विवाह है, आज संगीत का कार्यक्रम है, उन्होंने उपहार में गूगल होम भेजा है, आज के बच्चों की पहली पसंद तो यही है। पापाजी से बात हुई, वृद्धावस्था के कारण अब उनका कष्ट बढ़ने लगा है। लंबी उम्र वरदान भी है और अभिशाप भी, परमात्मा ही जाने, अब कोई कम तो कोई ज़्यादा क्यों जीता है। उनके यहाँ एक बिल्ली आती है, जिसे वह दूध आदि देते हैं, नन्हे ने उसके लिए कैट फ़ूड भेजा है।   


आज सोसाइटी में वार्षिक सामान्य सभा संपन्न हो गयी। नन्हा व सोनू जल्दी आ गये थे, वे भी शामिल हुए और बाद में कुछ लोगों को विशेष नाश्ता भी कराया। शाम को उनके जाने के बाद वे आश्रम गये। बादल दिन भर बने रहे थे, बाद में बरसने भी लगे। आश्विन आ गया है, पर यहाँ तो जैसे सावन-भादों ही चल रहा है। नैनी ने पेड़ से ढेर सारे पपीते तोड़कर दिये।


आज पहली बार वे एक विला में स्थित सोसाइटी का अस्थायी क्लब देखने गये, जहां कैरम, बिलियर्ड, कार्ड रूम तथा जिम भी है। सुबह नींद खुलने से पूर्व मन में दो शब्द तेज़ी से आये, बासी दही और गिफ्ट्स ! लगा, पहला पदार्थ नहीं खाना है और दूसरा अधिक से अधिक बाँटना है। 


भावी पड़ोसन ने अपने यहाँ नवरात्र की सज्जा देखने के लिए बुलाया, जिसे यहाँ ‘गोलू’ कहते हैं।जून उसे वहाँ छोड़ते हुए दफ़्तर चले गये, पहले आयुध पूजा हुई फिर प्रसाद मिला। उनके यहाँ  मूर्तियों का खजाना है।


आज सुबह नूना असोसिएशन कमेटी में जून के सहयोगी की पत्नी से मिलने उनके घर गई। उनका टैरेस गार्डन देखा, छोटे-बड़े गमलों में लगे बीसियों पौधे पूरी छत को भरे हुए थे, चलने की जगह भी नहीं है।उनकी लाइब्रेरी भी देखी, दीवारों में बनी लंबी आलमारियों में किताबें भरी हुई हैं। ऊपर वाली पुस्तकें निकालने के लिए एक सीढ़ी भी रखी है। बाग़वानी व किताबें पढ़ना, दोनों में केवल उनके पतिदेव को ही रुचि है।


आज सोनू का जन्मदिन उन्होंने सोल्लास मनाया। सुबह भांजा आ गया था, बाद में नन्हा, सोनू, उसकी मौसेरी बहन व ममेरा भाई और उसकी पत्नी। शाम को छोटे भाई से बात हुई, उसकी नातिन का जन्मदिन अगले महीने है, निमंत्रण दे रहा था। पिछले दिनों सोसाइटी में कुछ साइकिलें चोरी हो गई थीं, जो अब मिल गई हैं। पता चला, एक बारह वर्ष का लड़का उन्हें ले गया था और दो हज़ार में बेच चुका था। पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड्स को जब कड़े शब्दों में समझाया, तो वे इस केस को सुलझा पाये। अब सभी चैन की सांस ले रहे होंगे। पापाजी ने बताया, कैट फ़ूड मिल गया है।वह अगले हफ़्ते अपने पुराने मित्र व सहकर्मी की तेरहवीं में जाएँगे।कहने लगे, फल जब पक जाता है, तब गिरता है। पुरानी फसल कटती है तो नये बीज बोए जाते हैं। वह अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट हैं और मृत्यु के लिए भी तैयार हैं। 


 


Tuesday, November 18, 2025

जिंदल नेचर क्योर


जिंदल नेचर क्योर


आज सुबह भी वर्षा हो रही थी। छत पर अंधेरा था, बल्ब जलाकर प्राणायाम किया। हवा शीतल थी और ब्रह्म मुहूर्त का प्रभाव भी मन को शांति प्रदान कर रहा था। उजाला होने पर वे बाहर निकले। मन अब शून्य में टिकने लगा है। उसे शांति ही रूचती है। ज़्यादा बोलना भी अच्छा नहीं लगता। आत्मा, गुरु और परमात्मा तीनों एक चैतन्य सत्ता हैं, यह बात अनुभव में आती है । एक कविता भी प्रकाशित की शब्दों की सीमा पर, मौन जितना प्रभावशाली होता है, शब्द उतने नहीं हैं। कल पड़ोस वाले घर के दुमंज़िले की छत पड़ेगी। पड़ोसन अपने माता-पिता के साथ आकर उनकी छत से इसे देखना चाहती है। आज शाम से लगातार वर्षा हो रही है। नन्हा और सोनू माँ-पापा को लाने एयरपोर्ट गये हैं। पड़ोसी परिवार आया था, पूरण पोली, पेड़े, और मैसूर पाक भी लाए थे वे। पापा जी से बात की, आज उन्होंने जुग सुरैया का एक लेख टाइम्स ऑफ़ इंडिया में पढ़ा, कविता क्या है ? उसी के बारे में बताया।मौन पर लिखी उसकी कविता पर कमेंट्स आये हैं। जिसने भीतर के मौन को महसूस नहीं किया है, उसके लिए इसे पाना असंभव ही जान पड़ेगा। नन्हे ने एक नया बोर्ड गेम भेजा है, पिन-बॉल नाम है उसका। बचपन में वे खेला करते थे। आज सुबह तीन दिनों के बाद वर्षा नहीं हो रही थी। पूरे चालीस मिनट वह तेज गति से चली और दस मिनट दौड़ लगायी।जून को दौड़ना पसंद नहीं है, पर वजन कम करने के लिए इतना तो करना ही पड़ेगा। वापस आकर योग-साधना।आज नाश्ता नहीं बनाना था। कल समधिन जी के लाए दही-बड़े और हलवा ही पर्याप्त था। दोपहर को नैनी नहीं आयी, शायद उसने भी वैक्सीन लगवायी है। पापा जी से बात हुई, भक्ति और ज्ञान की बात। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है।उन्हें समधी जी द्वारा भेजी चाय के बारे में बताया, तो वह खुश हुए। छोटा भाई ड्यूटी पर वापस गुजरात चला गया, अब डेढ़ महीने बाद आयेगा। वह बड़ी ननद के घर भी जाएगा। शाम को वे पहली बार सोसाइटी में स्थित एक आवास में गये, जिनके अमरूद के बगीचे से ढेर सारे अमरूद ख़रीदे और पपीते भी।हरसिंगार पर एक नयी कविता लिखी, वर्षों पहले एक लिखी थी। जून ने नन्हे के लिए पैडिक्योर मशीन भेजी है। कल उसका ‘फूटरेस्ट’ भी बनकर आ गया।जून ने आज गर्म पानी का टैंक साफ़ करवाया। आज गुरु पूर्णिमा है। सुबह गुरुजी का एओएल शिक्षकों के साथ वार्तालाप सुना। बहुत अच्छे सवाल-जवाब थे।शाम को भी एक कार्यक्रम था। पहले गुरुजी ने गुरुपूर्णिमा का महत्व बताया। दक्षिणामूर्ति का वर्णन किया। संगीत व नृत्य के एक कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई, जिसमें ३५० बच्चे तथा बड़े शामिल थे। नृत्य भिन्न-भिन्न स्थानों पर किया गया था, फिर उसे एक जगह प्रस्तुत किया गया। अंत में सुरीले भजन गाये गये। दूर से आश्रम स्थित विशालाक्षी मंडप का शिखर देखा, जब वे रात्रि भ्रमण के लिए गये। शाम को मृणाल ज्योति की एक शिक्षिका से शिक्षक दिवस पर उन्हें उपहार भेजने के सिलसिले में बात हुई। ‘इस दिन तृप्ति की एक अज्ञात राशि का अनुभव होगा’। आज सुबह उठते ही सबसे पहले यह विचार नूना से किसी ने कहा। रात को एक स्वप्न देखा, किसी उपकरण को बनाने की प्रक्रिया में जून सहायता करते हैं, पर उनका शुक्रिया अदा करने की बजाय वह कहती है कि यह काम वह पहले भी कर चुकी है। यह सत्य भी था, पर जब वह इसका अनुमोदन नहीं करते तो वह ज़ोर देकर पुन: कहती है। स्वयं को महत्व देने के इस संस्कार से छुटकारा पाना होगा। यही तो अहंकार है। उनके कर्म स्वयं उनकी कहानी कहें, तब तो ठीक है पर अपने शब्दों में अपना महत्व रखना ही अहंकार है। कर्ताभाव से मुक्त हुए बिना सहज कर्म नहीं होते, ऐसे कर्म जो अस्तित्त्व उनसे करवाना चाहता है। आदमी स्वयं जो भी करता है, वह सीमित होता है। अज्ञात असीम है। उसे लगा, उसके संस्कार अवश्य ही मिट रहे हैं। परमात्मा और गुरु उसके साथ हैं, यह कहना भी ठीक नहीं है, वही करेंगे अब जो भी इस देह और मन से होना है। आज का इतवार कुछ अलग था। सुबह टहल कर आते समय रॉक गार्डन में ही चट्टान पर बैठकर प्राणायाम किया। खुली हवा, शांत और शीतल वातावरण में केवल मोर व पंछियों की आवाज़ें आ रही थीं। वापस आकर जून साइकिल चलाने गये और उसने माली से काम करवाया। नाश्ते के बाद जून ने कहा, असम से एक परिचित डाक्टर आये हैं, दोपहर को भोजन पर बुलाया है। वह जिंदल नेचर केयर में स्वास्थ्य कारणों से तीसरी बार आये हैं। लंच के बाद उन्होंने बताया, यहाँ आकर उनका वजन घटता है, पर कुछ समय बाद भोजन व जीवन शैली के कारण फिर बढ़ जाता है। मज़ाक़ में यह भी कहा, यहाँ आकर वे इस बात का पैसा देते हैं कि उन्हें कम खिलाया जाये। वह असमिया पड़ोसी से मिलने भी गये। शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये।


Sunday, October 9, 2016

जाप साहिब का पाठ


सूर्य की किरणें इस डायरी को छू रही हैं और उसके भीतर भी भर रही हैं ऊष्मा, ताप और सृजन करने की क्षमता ! इस क्षण और आज सुबह से हर क्षण अपनी अनंत क्षमता का अहसास उसे अनुप्राणित किये हुए है, उनके भीतर अपार सम्भावनाएं हैं. उनमें से हरेक ब्रह्म का अधिकारी है, तृप्त है, आनन्द से भरा है और अपने भीतर का प्रेम व शांति इस जगत के लिए बाँट सकता है. दोनों हाथों से उलीचे तो भी खत्म न हो इतना वह अपने भीतर भरे है ! आज वर्षों पूर्व लिखी एक कविता हिन्दयुग्म में भेजी. सुबह उठी तो एक स्वप्न चल रहा था, जागते ही तिरोहित हो गया. ऐसे ही तो जीवन में आने वाली हर परिस्थिति एक स्वप्न ही है, जागकर देखें तो एक खेल ही लगता है सब कुछ. परसों मृणाल ज्योति में बीहू का उत्सव है, जून और उसे बुलाया है. सूर्य धीरे-धीरे अस्ताचल को जा रहा है, शाम के सत्संग की तयारी उसने कर ली है. एक फोन की उसे प्रतीक्षा थी, नहीं आया, एक बच्ची का फोन, हिंदी का कक्षा कार्य करने में उसे सहायता चाहिए थी. परसों एक संबंधी का जन्मदिन है, फेसबुक ने याद दिलाया, उसने एक कविता लिखी. आज उसने गुरु माँ द्वारा ‘गुरू गोविन्द सिंह जी’ के प्रकाशपर्व पर जाप साहिब का पहला भाग सुना. उन्होंने कहा ‘मानव मन यदि समाधि का अनुभव कर ले तो भी उसके भीतर अदृश्य इच्छाएं रहती हैं, जो समाज के हित में लगने के लिए प्रेरित करती हैं. सारी कामनाओं का त्याग कर ऋषि जंगल में जाता है पर पूर्ण सत्य का साक्षात्कार कर पुनः समाज में लौटता है. समाज को कुछ देने के लिए, ऊर्जा तो उसके भीतर पहले की तरह ही है बल्कि कहीं ज्यादा’. उससे भी परमात्मा कुछ कराए इसके लिए वह तैयार है. उसकी शक्ति व्यर्थ न जाये, उसकी श्वासें इस जगत के लिए हों. उसने सद्गुरु से प्रार्थना की, जो सदा ही उसकी प्रार्थना का उत्तर देते आये थे, उसके पास जो कुछ भी, उस पर सबका अधिकार हो..प्रकृति जिस तरह लुटाती है, संत जिस तरह लुटाता है, उसके अंतर का प्रेम भी सहज ही प्रवाहित होता रहे !    

आज सुबह समाधि के लिए मन को पंच क्लेशों से मुक्त करने की बात सुनी. अविद्या, अस्मिता, राग-द्वेष व अभिनिवेष ये पांच क्लेश उनके मन को पंचवृत्तियों में भटकाते रहते हैं. पंच वृत्तियाँ (अनुमान, आगम, प्रत्यक्ष), स्वप्न, निद्रा, निरुद्द्ध और एकाग्र ! इस क्षण उसका मन समाहित है, फोन आ गया सो ध्यान से उठना पड़ा. कल लोहड़ी है. तैयारियां हो रही हैं. उत्सव उनके एकरस जीवन में नया रंग भरते हैं. शाम को वे आग जलाएंगे और स्वयं तथा मेहमानों के लिए खिचड़ी, आलू, खट्टी-मीठी चटनी बनायेंगे. जून ढेर सारा सामान जो अहमदाबाद से लाये थे, वह भी रहेगा तथा गाजर का हलवा. वही लेकर वह मृणाल ज्योति भी जाएगी. दीदी, तथा छोटी बहन भी अपने-अपने घरों में यह उत्सव मना रहे हैं. मकर संक्रांति पर लिखी कविता भी उसने सभी को भेजी.

आज कितने सुंदर शब्द सुने –
केसर, कस्तूरी, पुष्प और स्वर्ण सभी को भाते हैं, वैसे ही संतों की ज्योति भी सभी को भाती है.
घी और रेशमी वस्त्र सभी को भाते हैं, भक्त भी सभी को प्रिय होते हैं.
मन प्याला है और परमात्मा के नाम का रस उसमें भरा है.
मृत देह की चषक बनी ज्यों मृत मन का बनता प्याला !

तन में रंग लगा माया का, प्रेम का रंग चढ़े फिर क्योंकर ?
चेतनता आरूढ़ जीव पर, जीव चढ़ा अहंकार पर.
अहंकार है बुद्धि ऊपर, बुद्धि मन पर रही विराजे.
मन चलता है प्राण रथों पर, प्राण इंद्रियरूपी रथ पर.
इन्द्रियां देह पर करें सवारी, देह भूतों से बनी हुई है.

कभी गगन में चमके दिनकर, कभी घोर अँधेरा छाता.
कभी धुआं, कोहरा धुंधलका, कभी चमकती बिजली पल-पल.
रिमझिम बादल बरसा करते, कभी बर्फ के पत्थर पड़ते.
तरह-तरह के शब्द गरजते किन्तु नभ ज्यों का त्यों रहता.
बाढ़ की विभिषका आये, भूचाल भूमि थर्राए.
कितनी उथल-पुथल हो जाये पर वह निर्विकार सदा सम.

ऐसे ही उस परम सत्ता में कुछ भी अंतर आ नहीं सकता.