Showing posts with label आर्ट ऑफ़ लिविंग. Show all posts
Showing posts with label आर्ट ऑफ़ लिविंग. Show all posts

Thursday, October 3, 2019

नारियल स्ट्यू और अप्पम



नौ बजे हैं सुबह के, जून को आज पहली बार चेहरे पर एक हल्का सा लाल रैश दिखा, जिसका इलाज उन्होंने इस बार की बैंगलोर यात्रा में करवाना आरम्भ किया है, डाक्टर ने कहा, ये सूखे मेवों अथवा किसी दवा के कारण भी हो सकते हैं. कई वर्षों से कभी-कभी त्वचा पर रैशेस होते रहे हैं उन्हें  जो अपने आप ही कुछ देर में समाप्त हो जाते हैं. पिछले कई वर्षों से वह रक्तचाप की दवा ले रहे हैं. कल एक योग साधिका ने बताया उसके हाथ की उँगलियों के जोड़ों की त्वचा फट जाती है, एक अन्य को महीनों से जुकाम की शिकायत है, स्वस्थ रहना कितना कठिन हो जाता है उम्र बढ़ने के साथ-साथ. आज मौसम बादलों भरा है, हवा बंद होने से उमस भी है. कल दोपहर को कई दिनों बाद एक कविता लिखी. शाम को भजन गाये. उनका सुख भीतर है, किसी बाहरी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति का गुलाम नहीं है, इस बात को स्वयं को बार-बार याद दिलाने की जरूरत है.

आज वे तिनसुकिया गये थे, फल व सब्जियां खरीदीं. जून का गोहाटी से लाया असमिया सूती सूट सिलने दिया और वहीं से डिब्रूगढ़ में अस्पताल चले गये. एक योग साधिका का किशोर बेटा चार दिनों से वहाँ इलाज करा रहा है. उसके बारे में सुना था पर पहली बार देखा. पीछे से देखा तो अच्छा-ख़ासा बड़ा लग रहा था, कद भी लंबा है, पर उसे बचपन से ही एपिलेप्सी के दौरे पड़ते आये हैं. मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर है. उसका मुख खुला था और पाइप लगा था, नाक में भी पाइप लगा था. शायद तकलीफ में होगा पर निकट जाते ही उसने हाथ पकड़ लिया और एकटक देखने लगा. चेतना जागृत थी भीतर. माता-पिता ने बताया ढाई वर्ष का था जब उन्हें पहली बार पता चला कि उनका पुत्र अन्य बच्चों से अलग है, तभी से भारत के कितने ही शहरों में उसे दिखा चुके हैं, आयुर्वैदिक इलाज भी करवाया पर विशेष लाभ नहीं हुआ. उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद घट गयी है सो जल्दी ही सर्दी-जुकाम पकड़ लेता है और जल्दी ठीक नहीं होता. पिछले वर्ष भी निमोनिया हो गया था. उन्होंने हालात से समझौता कर लिया है, और पूर्ण धैर्य के साथ उसके स्वस्थ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. अस्पताल में ही रह रहे हैं, जहाँ खाना बाहर से मंगाना पड़ता है. ईश्वर ही उन्हें शक्ति दे रहा है. वापस आकर उसने भी भोजन बनाया, केरल की एक डिश पुदुअप्प्म या ऐसा ही कुछ नाम था, उसके साथ नारियल के दूध का हरी सब्जियों के साथ बना स्ट्यू. जून को नये-नये पकवान बनाने का शौक है. उसी समय एक परिचिता मिलने आई. वह इसी महीने के अंत में कम्पनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू दे रही है. सम्भवतः जून भी जाएँ इंटरव्यू लेने, तब तो उनके लिए कठिनाई हो जाएगी.  

टीवी पर तेनाली राम आ रहा है. उनका दिन शुरू होता है 'संस्कार' से और समाप्त होता है 'सोनी' पर. आज जून ने भूटान जाने की टिकट बुक कर दी है. अगले महीने के अंतिम सप्ताह में वे कोलकाता होकर भूटान जाने वाले हैं. उसका जन्मदिन भी वहीं मनेगा इस बार. कल से 'आर्ट ऑफ़ लिविंग' का बेसिक कोर्स आरम्भ हो रहा है. शाम को योग कक्षा में एक साधिका ने कहा, एक घंटे के कार्यक्रम में उसे सबसे अच्छा उसे अंत का ज्ञान स्तर लगता है. ज्ञान मुक्त करता है. उनकी गलत धारणाएं जो बंधन में डालती हैं, उन्हें तोडना है. आजकल माली ठीक से काम नहीं कर रहा है, शाम को मालिन को समझाया, अवश्य ही इसका कुछ तो असर होगा. स्कूल में चार बच्चों को स्टेज पर बुलवाकर आसन करवाए, वे आत्मनिर्भर बन सकें यही उसका प्रयास है.

आज इस मौसम में पहली बार तैरने का अभ्यास किया, आरम्भ में पानी ठंडा लगा पर बाद में शरीर अभ्यस्त हो गया. जाने से पूर्व मन में संशय था, कि महीनों से अभ्यास छूट गया है, पता नहीं कर पाएगी या नहीं ? जून ने स्वयं कहा कि उसे ड्राइविंग भी सीखनी चाहिए. उस दिन वह परिचिता जब घर आयी थी इंटरव्यू की बात करने, तब उस से यह भी कहा कि उन्होंने ही उसे जॉब करने नहीं दिया, अच्छा जॉब मिला भी नहीं. समय के साथ इंसान की सोच बदलती है. आज माली आया था सुबह, बगीचे में कई काम हुए. उसे रोज सुबह एक घंटा आने के लिए कहा है, पर वह अक्सर सुबह देर तक सोता है, कोई न कोई बहाना बनाता है अथवा तो पीकर सोने के कारण उठने की हालत में ही नहीं होता. आज दोपहर को भी योग करवाया, शाम की कक्षा में एक साधिका ने कहा, उसे आये दिन साधु-संतों के बारे में नकारात्मक बातें सुनकर गुरूजी के प्रति भी श्रद्धा नहीं जन्मी थी. पहले-पहल, ऐसा होना स्वाभाविक है, पर पता नहीं क्यों ऐसा सुनकर मन प्रतिवाद करने लगा. बाद में स्वयं ही स्वयं को समझाया कि आवाज ऊँची करने से ही कोई बात को सही समझ लेगा यह जरूरी तो नहीं. आत्मा के प्रकाश में स्वयं की भूल तुरंत दिख जाती है, कितनी बड़ी कृपा है यह परमात्मा की ! नैनी ने गुरूजी की तस्वीर के लिए माला बनाकर दी थी, एक साधिका आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर में होने वाले बेसिक कोर्स में जाते समय ले गयी थी. कल पहला दिन था, आज सुदर्शन क्रिया होगी, वे लोग फ़ॉलोअप के लिए कल जा सकते हैं.

Friday, June 15, 2018

विश्व सांस्कृतिक समारोह



सुबह आँख जल्दी खुल गयी थी, यहाँ छह बजे तक अँधेरा रहता है. कुछ देर ध्यान किया, ‘अपने’ घर तक यात्रा की जो उनका वास्तविक घर है. यह संसार तो कुछ पलों का ही खेल है. उस लोक में जाना अब पलों में घट जाता है. इस संसार से कोई मोह न रहे तभी ऐसा होता है, शास्त्रों में कितना सही लिखा है, वैराग्य में कौन सा सुख नहीं है. आज ही समारोह है, जिसके लिए वह आई है. एनजीटी  ने पांच करोड़ का जुरमाना लगाया है पर गुरूजी कहते हैं वे नहीं देंगे. असम का आर्ट ऑफ़ लिविंग का दल दिल्ली पहुंच गया है. उत्सव स्थल की तस्वीरें व्हाट्सअप ग्रुप पर डाल दी गयी हैं. एक घंटे बाद उन्हें यात्रा के लिए निकलना है.

दो बजे वे दिल्ली स्टेशन पहुंचे. दो मेट्रो बदल कर घर पहुंचे और भोजन किया जो भाभी ने साथ में दिया था पर ट्रेन में नहीं खा सके. तीन बजे घर से निकले, द्वारिका के सेक्टर बारह के मेट्रो स्टेशन पहुंचे, जहाँ लोगों की बहुत भीड़ थी. डेढ़ घंटे बाद ‘मयूर विहार एक्स्टेंशन’ पहुंचे, वहाँ भी भीड़ का वही आलम था, बाहर निकले तो वर्षा आरम्भ हो गयी. कुछ देर रुककर थमने की प्रतीक्षा की फिर चल पड़े. कीचड़ और फिसलन भरे रास्ते पर ढाई-तीन किमी भीड़ में धीरे-धीरे चलते हुए यमुना तट पर आर्मी द्वारा बनाया गया पुल पार किया. आयोजन स्थल पर आये तो कुर्सियां भीगी हुई थीं, उन्हीं पर बैठे पर स्टेज से काफी दूर बैठे थे सो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और सामने बैठे लोग खड़े हो गये थे. मंत्रोच्चार सुना, फिर कथक नृत्य हुआ, पर मन अधिक उत्साहित नहीं था, थके पैर, भीगे वस्त्र, ठंडी हवा चल बह रही थी, सो सोचा वापस ही चलते हैं. इतनी यत्नपूर्वक की गयी यात्रा के बाद फिर वैसी ही भीड़ में वापसी की यात्रा..कीचड़ भरे रास्ते पर नृत्य करके आते हुए कलाकार भी चल रहे थे. सुंदर वस्त्र पहने, घाघरा जरा सा टखनों से ऊपर कर नंगे पावों चलती छोटी-छोटी लडकियों को देखकर उन पर करुणा आ रही थी, पर वे सब उत्साह से परिपूर्ण थीं. गुरूजी ने सबको एक अनोखे जोश से भर दिया है. सारे कष्ट सहते हुए भी सभी हंसते रहते हैं. दुनिया के १५५ देशों के कलाकार और प्रतिनिधि आए हैं या इसे देख रहे हैं. अद्भुत कार्यक्रम है यह अपने आप में अनोखा. घर पहुंचे तो पौने दस बज चुके थे, भीगे वस्त्र बदले और गर्म-गर्म चॉकलेट वाला दूध पिया. चीज का परांठा खाने में बनाया, फिर एक घंटे बाद ही नींद आई. 

पौने तीन बजे हैं. वे विश्व सांस्कृतिक समारोह के लिए बनाये गये विशाल आयोजन स्थल पर आ चुके हैं. सामने विशाल स्टेज है, जिस पर रिहर्सल चल रही है. नेपाल का नृत्य हुआ, फिर घूमर नृत्य, इस समय जर्मनी की रिहर्सल चल रही है जो एक समूहगान गा रहे हैं. हजारों लोग अभी से आ चुके हैं. शाम होते-होते सभी कुर्सियां भर जाएँगी. साढ़े ग्यारह बजे वे घर से निकले थे, कल शाम भर वे सब मिलकर टीवी पर कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखते रहे. अभी-अभी जून का फोन आया, कह रहे थे छह बजे ही वापसी के लिए रवाना हो जाना चाहिए, पर वे आठ बजे वापस जायेंगे. आज वर्षा के आसार नहीं हैं. अभी कार्यक्रम शुरू होने में दो घंटे हैं, मोहक संगीत बज रहा है. पाकिस्तान से भी एक सूफी गायकी का समूह आया है. सीरिया के एक मुफ़्ती भी आये हैं. नरेंद्र मोदी, शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री तथा कई अन्य राजनेता भी उपस्थित हैं. श्री श्री ने कहा है यह उनका प्राइवेट कार्यक्रम है, सही है क्योंकि सारा विश्व ही उनका परिवार है. अध्यात्म अणु से विभु बना देता है. लोगों का ताँता लगातार लगा हुआ है. भारत के कोने-कोने से इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए लोग आए हैं. नृत्य और संगीत का आनन्द लेने तथा गुरूजी का दर्शन पाने. पुलिस के सिपाही भी जगह-जगह तैनात हैं, महिला पुलिस भी उतनी ही तत्परता से काम कर रही है. इस समय स्टेज पर सुंदर पीत वस्त्र पहने कलाकार बालाएं तैयार हैं. भाई सर पर छाता लगाये शांति से बैठे हैं, उन्हें भी उसके साथ धूप में बैठना पड़ रहा है. बड़े से घूमते हुए रॉड से कैमरा घूम-घूम कर तस्वीरें ले रहा है. कुछ स्वयंसेवक जगह-जगह से कूड़ा उठा रहे हैं, इस जगह को साफ करके ही वापस सौंपना है. आज के कार्यक्रम में श्रीखोल(एक प्रकार का ढोल) का वादन है तथा बीहू नृत्य भी. ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ की ग्रैंड सिम्फनी का तो कहना ही क्या जिसमें साढ़े आठ हजार कलाकार हैं जो पचास तरह के वाद्य यंत्र बजा रहे हैं. सात बजे तक लोगों की भीड़ इतनी अधिक हो गयी कि कुछ लोग सामने आकर खड़े हो गये, उन्होंने वापस जाने का मन बनाया. लौटते समय विशाल जनसमूह को देखकर, जो शांति से बैठकर कार्यक्रम का आनन्द ले रहे थे, मन में गर्व का अनुभव हुआ. लोगों की एक बड़ी भीड़ अभी भी आया रही थी, उतने ही लोग वापस भी जा रहे थे, पौने तीन घंटे की यात्रा के बाद घर पहुंचे.

आज सुबह साढ़े पांच बजे स्वतः ही नींद खुल गयी, नहा धोकर साढ़े छह बजे ही तैयार थी. मंझली भाभी के यहाँ चाय पी, उसने लंच पैक भी दिया. भाई एअरपोर्ट ले आए. उन्होंने इस सात-आठ दिनों में उसका बहुत ध्यान रखा. उनका स्वभाव बहुत कोमल है, हृदय सदा सभी की सहायता के लिए तत्पर रहता है. उनके हृदय में भाभी के प्रति एकनिष्ठ प्रेम की ज्योति जल रही है. एकमात्र पुत्री को भी वे बहुत स्नेह करते हैं. ध्यान की उनकी समझ भी गहरी है. ईश्वर उन्हें प्रसन्न रखे. जीवन के इस मोड़ पर पर उन्हें ईश्वरीय शांति ही आगे बढ़ते रहने का बल प्रदान कर सकती है.   


Thursday, August 10, 2017

एओल का आनंद उत्सव


आज शाम पांच बजे से उनका कोर्स शुरू हो रहा है. तेरह वर्ष पहले पहली बार ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ से जुड़ी थी, तब से अब तक जीवन में कितना परिवर्तन आया है, शब्दों में इसे कहना कठिन है. मन शांत है और बहुत से सवालों के जवाब भी मिल गये हैं. तन, मन दोनों की सफाई भी हुई है. आत्मा और श्वास के संबंध का ज्ञान हुआ है. प्राण ऊर्जा ही आत्मा को इस देह से बाँध आकर रखती है. मन ही खो गया है, पुराना वाला मन और परमात्मा से परिचय हुआ है..पर अभी भी बहुत दूर जाना है, क्योंकि वह अनंत है..उसकी ओर की जाने वाली यात्रा भी. कोर्स के अंतिम दिन का आयोजन भी कितना आनन्द दायक होता है सभी के लिए. आज मृणाल ज्योति के लिए वहाँ के एक कर्मचारी ने आंकड़े भेजे हैं. कुल डेढ़ सौ बच्चे हैं अब वहाँ, स्कूल आगे बढ़ रहा है. ‘विश्व विकलांग दिवस’ के लिए तिनसुकिया के एक स्कूल के बच्चों ने काफी अच्छे पोस्टर बनाये हैं. उन्हें कल धन्यवाद का पत्र लिखेगी. एक अन्य स्कूल के बच्चे और वहाँ की प्रधानाचार्या मृणाल ज्योति के बच्चों से मिलने आ रही हैं. सभी टीचर्स उत्साहित हैं.

‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ के टीचर एक सखी के यहाँ रुके हुए हैं. उसने आज सुबह का नाश्ता बनाकर भेजा उनके लिए, वह एक विदेशी गोरे व्यक्ति हैं पर हिंदी और संस्कृत पर अच्छी पकड़ है. सभी को कोर्स में आनन्द आ रहा है. अंतिम दिन एक प्रतियोगिता है और समूह में सेवा का एक कार्य भी करना है. गुरूजी की तस्वीर के लिए फूलों की एक माला भी उसने बनवाई है नैनी से, शाम को लेकर जाएगी.

कोर्स पूरा हो गया और अंतिम दिन का उत्सव भी. आज सुबह प्रसाद रूप में एक अनोखा अनुभव हुआ, सद्गुरू की कृपा का प्रसाद अनवरत बरस ही रहा है. अब ठंड बढ़ गयी है. आज से गर्म वस्त्र निकाल लिए हैं. आलमारी में उसने मंगनी व शादी की साड़ियाँ देखीं, किनारे से रेशमी धागे निकल आये थे, पीको के लिए दीं तथा पल्लू पर झालर बनाने के लिए भी, इतने वर्षों बाद भी पहले सी सुंदर लग रही थीं. बगीचे में सर्दियों के फूलों की पौध भी लग गयी है. बोगेनविलिया अपने शबाब पर है और जरबेरा के फूल भी खिल रहे हैं. सब्जी बाड़ी में भी लगभग सभी के बीज व पौध लगा दिए हैं. कल से प्रतिदिन एक घंटा बाड़ी में बिताएगी ऐसा निर्णय लिया है. कल कम्पोस्ट खाद भी मंगानी है.

अगले हफ्ते आज ही के दिन विश्व विकलांग दिवस है, उसे उद्घोषणा के लिए स्टेज पर रहना होगा और दोपहर को हॉल की सज्जा के लिए भी जाना है. नन्हे ने उस दिन के लिए कुछ सहायता राशि भेजी है. उसने बताया, उसका एक मित्र लंदन से आया हुआ है. स्कूल के प्रबन्धक ने अपने पुत्र के अन्न प्राशन का निमन्त्रण भेजा है. आज लेडीज क्लब की मीटिंग में एमवे के उत्पाद का प्रस्तुतिकरण भी था. काफी तारीफ की उन्होंने. वे सौन्दर्य उत्पादों के साथ साथ स्वास्थ्य के लिए भी उत्पाद बनाते हैं. आज जून ने उसका एक पासपोर्ट साइज फोटो खींचा, पर उसे पसंद नहीं आया. अब चेहरे पर उम्र का पता चलने लगा है, जो कि स्वाभाविक ही है, पर आत्मा तो कभी वृद्ध नहीं होती, वह तो सदा ही एकरस है, सत्यम.. शिवम.. सुन्दरम ! जून आज एक कांफ्रेंस के लिए दिल्ली से आगे जयपुर रोड पर स्थित नीमराना जा रहे हैं. डिब्रूगढ़ का रास्ता रोका जा रहा है, ऐसी खबर सुनकर वह तिनसुकिया होते हुए जाने वाले थे कि किसी ने गलत सूचना दी, रास्ता खुल गया है, पर उन्हें लौटकर पुनः दूसरे रास्ते से जाना पड़ा. एअरपोर्ट पर सूचना भिजवा दी थी, किसी तरह वे लोग समय पर पहुँच पाए. असम में बंद व रास्ता रोको एक सामान्य घटना है पर इसका खामियाजा जिसको भुगतना पड़ता है, वही जानता है. आज प्रधानमन्त्री भी गोहाटी आ रहे हैं.


Thursday, January 28, 2016

‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ का ‘एडवांस कोर्स’


उसे स्मरण हो रहा है पिछले वर्ष लगभग इन्हीं दिनों में वे ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ का ‘एडवांस कोर्स’ करने गये थे. उसने ढूँढ कर वह डायरी निकाली जिसमें उन तीन-चार दिनों का जिक्र था. वे संध्या के वक्त डिब्रूगढ़ के एक होटल पहुंचे थे. बाहर ही आयोजन कर्ता व एक टीचर खड़े थे, जो उन्हें अंदर ले गये, धीरे-धीरे और लोग भी आते गये. देर शाम तक सभी को कमरे मिल गये. ठंड बहुत थी सो वे सामान आदि सेट करके रजाई में बैठकर टीवी देख रहे थे कि फोन आया. एडवांस कोर्स के शिक्षक  आ गये हैं तथा सभी को संबोधित करेंगे.  होटल के सामने ही एक विवाह भवन था, वहाँ भी कुछ लोग ठहरे थे. उसी के प्रांगण में लोग कुर्सियों पर बैठे थे तथा ऋषि जी सभी को होने वाले कोर्स के बारे में कुछ समझा रहे थे.
अगले दिन सुबह पौने छह बजे वे उस मन्दिर के लिए निकले, जहाँ के विशाल प्रार्थना भवन में  कोर्स होना था. साढ़े चार बजे उठकर नहा-धोकर वे तैयार हो गये थे. छह बजे से ही कोर्स आरम्भ हो गया. दो महिला शिक्षिकाओं ने अगले चार दिनों तक छह से साढ़े आठ बजे तक जॉगिंग, आसन, व्यायाम तथा भारतीय ग्रामीण महिला के रोजमर्रा के कार्य, जानवरों की नकल, हॉकी, कबड्डी आदि खेल खिलाकर सभी को खूब हंसाया. उसके बाद नाश्ते के लिए निकट ही स्थित रोटरी क्लब के हॉल में जाते थे. पोहा या दलिया, हर्बल टी था एक फल का पौष्टिक नाश्ता बहुत स्वादिष्ट लगता था. इसके बाद सभी समूह (पांच समूह बना दिए गये थे ) सेवा के कार्य में लग जाते थे. उन्हें एक-दो बार बर्तन धोने का काम मिला. एक बार शौचालय की सफाई का तथा एक बार ध्यान कक्ष की सफाई का काम मिला, सभी मन से सेवा करते थे. दस से एक बजे तक साधना का पहला सत्र तथा तीन से छह तक दूसरा सत्र चलता था. दोपहर एक बजे भोजन मिलता था जिसमें बिना तेल-मसाले की सब्जी, दाल-चावल, सलाद तथा चुपड़ी हुई रोटी होती थी. भोजन हल्का व सत्विक था. शाम का भोजन छह बजे ही मिल जाता था, उसके बाद सांध्य भ्रमण तथा सात बजे सत्संग शुरू होता था, आठ बजे वे अपने होटल आ जाते थे.
अगले दिन शिक्षक ने उन्हें बताया कि उनके भीतर दस तरह के प्रेम हैं जो विकारों के कारण हैं. जब वे इन सभी तरह के प्रेम से आगे बढ़कर उसे ईश्वर, गुरु या आत्मा के प्रति समर्पित कर दें तो धीरे-धीरे ये विकार भी जीवन में नहीं रहते. ये दस प्रेम हैं-
अपने व्यक्तित्व से प्रेम – अहंकार
व्यक्ति विशेष से प्रेम – मोह
अपने परफेक्शन से प्रेम – क्रोध
दूसरों के परफेक्शन से प्रेम – जड़ता
अपने रूप से प्रेम – ईर्ष्या
अपनी कल्पना से प्रेम – कामना
वस्तुओं से प्रेम – लोभ
भूतकाल से प्रेम – नीरसता
भविष से प्रेम - डर  

उनका मूल स्वभाव तृप्ति, उत्सुकता, प्रेम तथा कृतज्ञता का है. ये सब भाव हैं लेकिन क्रोध, लोभ, मोह आदि भावनाएं हैं. ध्यान के लिए दो सुंदर सूत्र बताये-
१.      किसी की भावनाओं का तथा विचारों का बाहर की घटनाओं से कोई संबंध नहीं है. वे उन्हें घटनाओं से जोड़ देते हैं.
२.      मन के स्तर पर जो भावना है शरीर के स्तर पर वह तरंग या संवेदना है. यदि उन्हें भावना से मुक्त होना है तो साक्षी भाव से शरीर में हो रहे स्पंदनों को देखना चाहिए. साक्षी भाव से देखने पर नकारात्मक स्पंदन बदल कर सकारात्मक हो जाता है तथा सकारात्मक ऊपर उठ जाता है.
शिक्षक ने सारे चक्रों में रहने वाली भावनाओं तथा भावों की भी जानकारी दी.
सहस्रार चक्र – परमानन्द
आज्ञा चक्र – क्रोध, ज्ञान, सजगता
विशुद्धि – पश्चाताप, कृतज्ञता
अनहद – नफरत, डर, प्रेम
मणिपुर – ईर्ष्या, लोभ, उदारता, तृप्ति
स्वाधिष्ठान – वासना, सृजनात्मकता
मूलाधार – जड़ता, उत्साह

कोर्स के दौरान उन्होंने गुरूजी के वीडियो सीडी भी देखे. जिसमें ‘मौन की महत्ता’ तथा ‘साधन चतुष्ट्य’ प्रमुख थे. गुरूजी ने कहा साधक को न तो स्वयं पर, न समाज पर, न साधना की पद्धति पर तथा गुरु पर कभी संशय नहीं करना चाहिए, बल्कि स्वयं में ज्ञान को उतार कर पहले परखना चाहिए. साधक के पास साधना के चार सोपान हैं- विवेक, वैराग्य, षट् सम्पत्ति तथा मुमुक्षत्व.
विवेक के द्वारा वे स्थायी, अस्थायी, नित्य-अनित्य, सुख-दुःख का भेद करते हैं.
देखे हुए तथा सुने हुए विषयों के प्रति तृष्णा का शांत हो जाना वैराग्य है.
शम, दम, तितिक्षा, उपरति, श्रद्धा, समाधान षट् सम्पत्ति हैं.
शम – मन का नियन्त्रण
दम – इन्द्रियों का नियन्त्रण
तितिक्षा – सहन शक्ति
उपरति – कार्य में अंत तक उत्साह रखना
समाधान – वर्तमान में आनंदित रहना
मुमुक्षत्व है अपने जीवन में दुःख को देखकर उससे मुक्त होने की आकांक्षा. दुःख से मुक्ति उन्हें सुख की ओर और सुख प्रेम की ओर ले जाता है, तथा प्रेम अंत में भक्ति की ओर, भक्ति ऐसा प्रेम है जहाँ दूसरे की आवश्यकता नहीं है. 

अगले दिन सुबह छह बजे से ही मौन आरम्भ हो गया था जो चौथे दिन दोपहर तक चला. उन्होंने कई ध्यान तथा क्रियाएं कीं. एक ध्यान में आती-जाती श्वासों को ध्यान से देखना था तथा एक अन्य ध्यान में हर चक्र पर तीन मिनट ध्यान करना था. ज्ञान के दो सूत्र भी दिए गये.
१.      शिकायत करना दानवी प्रवृत्ति है.
२.      प्रशंसा करना दैवीय गुण है.
इस तरह मन को उत्साह से भरे और ज्ञान की सम्पदा को समेटे वे वापस लौटे.