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Tuesday, October 21, 2014

अमराई की छाँव



आज असम बंद है, आसू की मांग है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की जगह सेना की नियुक्ति की जाये. जून साइकिल से ऑफिस गये पर थोड़ी ही देर में वापस लौट आये. इस वक्त टीवी पर एक पुरानी फिल्म देख रहे हैं. सुबह-सुबह समाचारों में सुना कि डिब्रूगढ़ से बीजेपी के प्रत्याशी तथा कुछ अन्य राजनितिक कार्यकर्ताओं की उल्फा ने गोली मारकर हत्या कर दी है. वे लोग राज्य में शांति के पक्षधर नहीं लगते, चुनाव का बहिष्कार करने का कितना भयंकर मार्ग उन्होंने अपनाया है. नन्हा आज पहली बार एक आंटी से विज्ञान विषय पढने गया है, वह काफी उत्साहित है. आज लंच में वह दक्षिण भारतीय भोजन बना रही है. शाम के टिफिन के लिए जून तरबूज लाये हैं. इस समय नौ बजे हैं, धूप बहुत तेज है जैसे हजारों वाट के बल्ब लगा दिए गये हों. ऐसा ही ज्ञान का प्रकाश उनके दिलों में उदित हो ऐसी ईश्वर से उसकी प्रार्थना है.

धर्म को जीवन में उतारना होगा तभी क्रोध, मोह, अहंकार और लोभ से स्वयं को मुक्त किया जा सकता है. अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए सदा अपने आप में स्थित रहना होगा. जीवन की कहानी का पटाक्षेप हो जब वे एक मुट्ठी राख में बदल जायें इसके पूर्व ही स्वयं को जानना होगा. यदि पुकार भीतर से फूटी हो तो कभी खाली नहीं जाती. आज भी बंद के कारण नन्हे का स्कूल बंद है. मौसम कल की तरह है. जून भी एक बार वापस आकर दुबारा दफ्तर चले गये हैं. कल शाम दो मित्र परिवार आये, दिन भर बंद के कारण शाम को बाहर निकलना चाहते थे. उसने बाद में अनुभव किया वह भी दिन भर चुपचाप अपना काम करते रहने के कारण शाम को कुछ ज्यादा मुखर हो गयी थी. आज आकाश में बादल हैं. संगीताभ्यास की जगह नन्हे को आज नरोत्तमदास की एक कविता पढ़ाई. कुछ नया लिखा भी नहीं, उसके लिए भी एक खास मूड की जरूरत होती है जो नितांत एकांत चाहता है. कहीं से कोई व्यवधान न हो मन कल्पना तथा विचारों के धरातल पर विचरने के लिए मुक्त हो, तभी कुछ सृजन सम्भव है. कल रात छोटी बहन का फोन फिर आया, अब वह ठीक है. इतना तो स्पष्ट है कि वे उसकी समस्या को हल करने के विषय में कुछ भी नहीं कर सकते. हर कोई अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है और इस बात के लिए भी कि कोई अन्य उस उस पर कितना और किस तरह का प्रभाव डाल रहा है.

‘बड़ा होने की दौड़ में ही लोग अपने जीवन में द्वंद्व पैदा करते हैं. भौतिक उपलब्धियों को अपनी उपलब्धि मानकर उसके सहारे बड़ा होने का प्रयास कितना बचकाना है. मनों के बीच दीवारें तब खिंचती चली जाती हैं जब सभी स्वयं को एक दूसरे से आगे दिखाना चाहते हैं.’ आज जागरण में उपरोक्त विचार सुने. नन्हा अंततः आज स्कूल जा सका. मौसम कल की अपेक्षा ठंडा है. कल शाम माली ने नींबू का एक पेड़ बगीचे में लगाया. जीनिया की पौध भी लगा दी है. कल पेड़ से गिरी अम्बियाँ भी लायी, छोटी-छोटी अम्बियाँ देखकर बचपन के दिनों की याद हो आयी. अल्फ़ा की हिंसा का शिकार कुछ और लोग भी हुए हैं, उन लोगों के घरों में भी शोक का माहौल होगा. मृत्यु किस रूप में और कब मिलेगी कोई नहीं जानता पर असम के राजनीतिज्ञों को चुनाव से पहले बंदूक की गोली से मिलेगी इतना तो कोई भी कह सकता है.