Saturday, July 11, 2026

घड़ियों का घर

घड़ियों का घर 


आज नन्हे ने उनके लिए सुंदर सा एक घड़ी केस भेजा है, जैसे पहले एक बार आभूषण रखने का गुलाबी केस भेजा था। जैसे-तैसे किसी भी डब्बे में वे अपना समान रखें, यह उसे व सोनू को पसंद नहीं। शाम को उससे बात हुई तो तो वे लोग सोनू के माँ-पिता के लिए घर देखने की बात कर रहे थे। असम वाला उनका घर काफ़ी पुराना हो गया है। उस तीन मंज़िल घर में वे सबसे ऊपर रहते हैं, मंझले भाई बीच में। छोटे भाई के न रहने पर उनके पुत्र ने नीचे वाले घर को नया रूप दे दिया है।

कल जून के साथ उन्हें अपने फ़्लैट की इंटीरियर सज्जा के लिए लकड़ी के काम के डिज़ाइन देखने काफ़ी दूर जाना है। वे पूरी तरह से दुनियादारी में उलझते जा रहे हैं। इसी हफ़्ते शनिवार को आँख का आपरेशन है, और आजकल इसमें आधे घंटे से भी कम समय लगता है। कुल तीन घंटों में वे घर वापस आ सकते हैं। शाम को नापा में फूलों की तस्वीरें उतारीं, आजकल चारों ओर फूलों की बहार है।पहली बार क्लब के जाकुज़ी का प्रयोग किया। उसका क्या महत्व है, पता नहीं, पर अच्छा लगा। अब क्लब का काफ़ी भाग बन गया है और उसका बाहरी रूप लॉन आदि भी बहुत सुंदर लग रहा है। जून आज उस सोसाइटी में भी एक तीन कमरों वाले घर की अंतर सज्जा देख कर आये, जहाँ उनका फ़्लैट है। 

आज का दिन ‘लिव-स्पेस’ के नाम रहा। वे सुबह टहलकर जल्दी लौट आये ताकि सब काम ख़त्म करके साढ़े नौ बजे तक घर से रवाना हो जायें। दोपहर का भोजन बनाकर साथ ले गये थे। एक युवा महिला ने उन्हें डिजाइन व मेटीरियल आदि दिखाये, लगभग पौने चार घंटे वे वहाँ रहे, आने-जाने में तीन घंटे लग गये। कुल मिलकर सौदा अच्छा रहा, कुछ पैसे देकर उन्हें बुक कर दिया है। अब उनकी टीम साइट पर जाकर देखेगी व डिज़ाइन फ़ाइनल करेगी। यह कंपनी २०१४ में ही बनी है, पर बहुत प्रसिद्ध हो गई है। नन्हे को भी उनका काम पसंद आया, वह आज दिल्ली गया है।आज उनके नये पड़ोसी आये थे, अपने पुत्र के उपनयन संस्कार का निमंत्रण देने, पहली मई को है, जून जाएँगे। 

आज गुरुजी को सुना। कर्मों के बारे में किसी ने पूछा तो उन्होंने कहा, आज के भोजन के साथ पहले का बना अचार व दही भी तो खाया जाता है। आगे वह कहते हैं, जो पथ पर आ गये हैं, उनके पिछले कर्म धुल ही गये हैं। जब तक प्रभु नहीं मिले तभी तक माँग है और जब तक माँग है तब तक प्रभु नहीं मिलते। परसों से एओएल का पाँच दिनों का योगपर्व आरंभ हो रहा है। 

आज वह महीनों या वर्षों बाद तरण ताल में उतरी। अच्छा लगा, पानी ज़्यादा गहरा नहीं है, न ही ठंडा था। बहुत सारे बच्चे थे। जून बड़े आराम से तैर रहे थे। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, गुरुजी दुबई जा रहे हैं, परसों वह उनसे मिलने जाएगी, वह सभी शिक्षकों से मिलेंगे। जून आज ढेर सारे फल लाए, ढाई हज़ार के, आम, ख़रबूज़ा, सेब, अंगूर आदि। सुबह गुरुजी का एक पुराना वीडियो देखा-सुना, उस समय कितना अच्छा लगा था पर इस समय कुछ याद नहीं आ रहा। 

सुबह वाणी के दोष को अनुभव किया, पर अभी-अभी किसी ने कहा, पुनः वह मत दोहराओ। जैसे आकाश पर बादल आकर चले जाते हैं वैसे ही दोष आत्मा पर चिपकते नहीं हैं, आकर चले जाते हैं, यदि उनको साक्षी भाव से देखा जाये। आज एक पुरानी सखी को उसकी शादी की सालगिरह पर शुभकामना देने के लिए फ़ोन किया, पता चला दो दिन पहले उसकी सासु माँ का देहांत हो गया है।

आज दो बार ध्यान किया, कितनी अनोखी स्तब्धता का अनुभव होता है ध्यान में, जो बाक़ी समय वे भूल जाते हैं। कल सुबह अस्पताल जाना है। दायीं आँख में कैट्रेक का ऑपरेशन होना है। अभी-अभी नन्हे से बात हुई, उसने बताया, एक जोड़ी धुले कपड़े लेकर जाना है।उन्हें पहनकर ऑपरेशन थियेटर में जाना होगा।

आज पूरे अठारह दिनों के बाद नूना ने डायरी खोली है। उस दिन वे अस्पताल गये। नन्हा भी वहाँ आ गया था। सर्जरी के बाद उसके घर चले गये। शाम को अपने घर लौटे। कई सावधानियाँ बरतनी थीं और समय-समय पर आँख में दवा डालनी थी। तब से रसोई का काम जून सँभाल रहे हैं। एक हफ़्ते बाद दूसरी आँख की सर्जरी हुई। धीरे-धीरे दृष्टि सामान्य हो रही है। इस बीच ऑडिबल पर काफ़ी कुछ सुना, रेडियो पर गीत व ग़ज़लें भी सुनीं। ध्यान किया। कुल मिलाकर समय का सदुपयोग किया। अभी सोलह दिन दवा और डालनी है, उसके बाद ही दिनचर्या पूरी तरह से सामान्य मानी जाएगी। आज फ़ेसबुक पर एक हरे रंग के पुष्प की तस्वीर डाली। इतने दिनों से ब्लॉग पर भी कुछ नहीं लिखा। कल से आरम्भ करना है। इस बीच कर्नाटक में विधान सभा के चुनाव हो गये, वे वोट डालने भी गये। अभी तक यह तय नहीं हुआ है मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? 

आज रात्रि भोजन के बाद  वे टहलने गये तो आकाश में संध्या की अंतिम लालिमा छायी थी। उसने झट एक चित्र में क़ैद कर लिया, मोबाइल पास में हो तो अनायास ही सुंदर दृश्य कैमरे में अंकित हो जाते हैं। एक जगह दो बिल्लियाँ स्कूटर की सीट पर बैठी थीं, उनका चित्र वे जब भी कभी देखेंगे, वह शाम याद हो आएगी। वापस आकर स्वास्थ्य संबंधी एक रोचक टेड टॉक सुना।अब वह एओएल का अनुवाद कार्य भी ले सकती है। पापाजी ने बहुत दिन बाद फ़ेसबुक पर उसकी कविता पढ़कर ख़ुशी ज़ाहिर की। सुबह वे चेकअप के लिए नेत्रालय भी गये थे, अब तीन महीने बाद जाना है।


Wednesday, July 8, 2026

माई

माई 


आज सुबह भी नूना ने सूर्योदय की सुंदर तस्वीरें उतारीं। वापस आकर वे प्रतिदिन की तरह छत पर गये, हवा ठंडी थी, पर एक घंटे बाद धूप निकल आयी थी। दरवाज़े पर नयी घंटी लगी है, उसकी आवाज़ ऊपर तक नहीं गई, नीचे आये तो देखा, नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी।उसने ध्यान दिया, आजकल नाश्ता, लंच, डिनर सब कुछ गाय के दूध से बने मक्खन या घी से ही बन जाता है, नंदिनी दूध इस हिसाब से बहुत शुद्ध है।शाम को टहलते समय इसरो के एक भूतपूर्व अधिकारी व उनकी पत्नी से मिले, कुछ देर बातचीत होती रही।उन्होंने जून को सोसाइटी के नये बने तरणताल में तैरने आने के लिये कहा है। कल उन्हें ख़ाली पड़े उस फ़्लैट में भी जाना है, इंटीरियर कराने की बात करने के लिए दो बढ़ई बुलाये हैं। घर बिक नहीं रहा है, इसलिए किराए पर देने की बात मन में आई है। जून को व्यस्त रहने के लिए एक रोचक काम भी मिल जाएगा। आजकल वह उत्साह से भरे रहते हैं । असम के एक पुराने परिचित यहाँ आये हुए हैं, उनसे मिलने के लिए वेगा मॉल जाने को भी तैयार हैं। जीवन ऐसे ही रंग बदलता रहता है। पापाजी से बात हुई, वह अपनी बात कहते रहे, सुनने में अब उन्हें थोड़ी मुश्किल होने लगी है। असमिया सखी से बात हुई, वह अपना घर बनवा रही है, आने वाली बाधाओं को ख़ुशी-ख़ुशी झेलते हुए।

अभी कुछ देर पहले नन्हे का फ़ोन आया।वह कल सुबह आएगा। जून की कार आज उस सोसाइटी के गैराज में खड़ी करते समय ख़ंबे से टकरा गई थी, जहाँ वह बढ़ई से मिलने गये थे। नन्हा उनकी गाड़ी ले जाएगा व अपनी छोड़ जाएगा। उसमें तीन सौ साठ डिग्री देखने वाला कैमरा लगवाना है जो चारों तरफ़ किसी भी वस्तु के निकट आने पर अलार्म बजा देगा। उसके बाद कार का डेंट भी ठीक करवाना है। नन्हे ने एक बार भी सीख नहीं दी कि गाड़ी ठीक से पार्क करनी चाहिए थी। दुर्घटना तो किसी से भी हो सकती है। दोनों बढ़ई अपना कोटेशन देंगे, जून उसमें से एक का चुनाव करेंगे। रात्रि भ्रमण के समय उन्होंने एक बच्चे के साथ कुछ देर बैडमिंटन खेला, वह अकेला ही खेल रहा था। पापा-माँ दोनों जॉब में व्यस्त रहे होंगे। कामकाजी महिला के बच्चे (यदि अकेला बच्चा हो तो और भी )कितना अकेलापन महसूस करते होंगे। आज एओएल का एक अनुवाद कार्य आया है। अक्षय तृतीया के दिन बृहस्पति मेश राशि से मीन राशि में जा रहे हैं, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसी के बारे में है। आज उसने नैनी से ज्वार की रोटी बेलना सीखा। इतना कठिन भी नहीं है, उसे लगातार घुमाते रहना है, वरना बिना टूटे हाथ पर उठा नहीं सकते। 

अभी कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। आज एक नये रास्ते पर गये, कुछ नये घर देखे। हर घर अपनी तरह से बेहद सुंदर लग रहा था, अलग-अलग डिजाइन और अलग-अलग पौधों से सजा। श्वेत-श्याम रंग का एक बड़ा सा चितकबरा कुत्ता मिला, छोटी गाय के आकार का, उसका नाम उस दिन किसी ने बताया था, शायद डालमेटियन, या डालमेशियन । आज श्री अरविंद की पुस्तक ‘ऐस्से ऑन गीता’ पर एक व्याख्यान सुना, श्री अरविंद ने गीता को समझने की एक नयी दृष्टि दी है। शाम को पापाजी से काफ़ी देर तक बात हुई, वह ठीक से सुन भी पा रहे थे। उन्होंने कनाडा से आये छोटे नाती से हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया। जब वह छोटे थे और पाकिस्तान से भारत आये थे, वह उनकी उस समय की कहानी सुन रहा था।उनके दादाजी का मकान गाँव में था, वह खेती करते थे। चार भाइयों में बँटवारा हो गया। उनके पिताजी को खेती में रुचि नहीं थी, अपना थोड़ा-बहुत हिस्सा लेकर वह परिवार के साथ शहर आ गये। हकीम का काम सीखकर उसी को आजीविका का साधन बनाया। बाद में विभाजन हुआ और भारत आकर नये सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। आज वह आज दोपहर उसने कुछ देर ध्यान किया, उसे लगता है, प्रगति नहीं हो रही है, पर यह भी तो अहंकार को बढ़ाना ही होगा। ईश्वर ने जहाँ रखा है, वहीं रहकर मन को शुद्ध करना है। नन्हा आज सुबह नहीं आ पाया था, जून अपनी कार गैराज में दे आये हैं। परसों मिलेगी। 

आज ईद है। जून ने चार किलो इमाम पसंद आम मँगवाये हैं। दुकानदार अपनी गाड़ी से घर आकर दे गया, साथ में उसका छोटा सा बेटा भी बैठा था। निकट ही क़स्बे के बाज़ार में उसकी फलों की दुकान है, शायद एक से अधिक। पूरे मौसम वे उसी से आम लेते हैं। आज सुबह वाली नैनी नहीं आयी, उसके ससुर का देहांत हो गया, शायद हफ़्ता भर न आये।शाम वाली भी अगले हफ़्ते छुट्टी पर जा रही है।    

आज सुबह वह छत पर योग साधना करने गयी तो सोलर पैनल के नीचे पड़े बोगनवेलिया के फूलों को देखा, जो झर कर उड़ते हुए वहाँ इकट्ठे हो जाते हैं। प्रेरणा हुई कि दायीं आँख से देखे, उठने के बाद से कुछ भारी लग रही थी। फूलों का रंग मटमैला दिखा, फिर बायीं आँख से देखा तो हल्का गुलाबी। मोबाइल पर मोतियाबिंद के बारे में पढ़ा, सुना, जून को बताया तो उन्होंने नन्हे को बता दिया। नन्हे ने डाक्टर से मिलने का समय ले लिया और वे फल खाकर आँख के अस्पताल चले गये। नन्हा वहीं आ गया था। अगले शनिवार को सर्जरी होगी। मल्टी फ़ोकल लेंस लगाया जाएगा। परमात्मा की असीम कृपा है कि समस्या का पता चलते ही समाधान सम्मुख आ गया। नूना, नन्हे व जून का जितना शुक्रिया अदा करे वह कम है। दोनों उसका बहुत ख़्याल रखते हैं। शाम को पापाजी ने पूछा, आज फ़ेसबुक पर कुछ पोस्ट नहीं किया। सर्जरी के बाद तो कुछ दिन कंप्यूटर व मोबाइल से दूर रहना होगा, तब उन्हें बताना पड़ेगा। टीवी पर पहली बार आशा भोंसले द्वारा अभिनीत एक मार्मिक फ़िल्म देखी, ‘माई’ बहुत दिनों बाद पद्मिनी कोल्हापुरे को भी देखा। सासु माँ की कितनी बातें याद आ गयीं, जब उन्हें भी भूलने की बीमारी हो गई थी। 

आज सुबह लगभग दस बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। सोनू के माँ-पापा भी आये थे। दोपहर को बच्चों ने स्वादिष्ट ‘थाई भोजन’ बनाया। सभी को पसंद आया। सभी ने एक साथ बैठकर कुछ देर एक फ़िल्म देखी, फिर निकट की एक झील पर ड्रोन उड़ाने गये। वहाँ बहुत भीड़ थी, कुछ बच्चे और महिलाएँ झील के पानी में उतर गये थे। शायद वे पहली बार वहाँ आये थे। वे लोग एक दूसरी झील पर गये, जहाँ अपेक्षाकृत कम लोग थे, वातावरण में शांति थी। वहीं चटाई बिठाकर कुछ देर सब बैठे और साथ लायी चाय का आनंद लिया। शाम को लौटने में सवा छह बज गये थे। 


Wednesday, July 1, 2026

बालकनी में हरियाली

बालकनी में हरियाली


आज
वे सोसाइटी के एक प्रमुख व्यक्ति के घर गये थे, कल उनकी माँ का देहांत हो गया था। जाकर पता चला, हाल में ही उनके पिता की ओपन हार्ट सर्जरी हुई है, इसलिए उन्हें अभी तक यह समाचार नहीं दिया गया है।जीवन कितना विचित्र है ! नूना ने कविता की पुस्तक की समीक्षा लिख भेजी, उन्हें अच्छी लगी। उसकी तस्वीर सहित वह समीक्षा कवयित्री ने पोस्ट कर दी है, पापाजी ने भी पढ़ी। 

आज सुबह छह बजे वे एक मित्र दंपत्ति के साथ बैंगलुरु की एक प्रसिद्ध झील देखने गये। जहाँ पक्षियों के लिए एक विहार भी बनाया गया है। निकट स्थित एक अन्य झील  देखने के बाद ‘पूर्ण ब्रह्म महाराष्ट्रीयन रेस्तराँ’ में स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया। उसके बाद वे राजशाही युग का प्रतीक ‘बैंगलोर पैलेस’ देखने गये।जहाँ मैसूर के राज-परिवार के चित्र व उनका इतिहास दर्शाया गया है। 

सुबह वे टहलने गये तो आकाश में पूर्णिमा का चंद्रमा चमक रहा था। उसकी तस्वीरें बहुत सुंदर आयी हैं।आज शाम आश्रम में भीड़ बहुत थी, वे जल्दी लौट आये।एमटीआर में थट्टे इडली व अक्की रोटी खायी, अच्छी बनी थी।नयी मिट्टी व खाद और नये पौधे लगने के बाद आज नर्सरी से उनके अधिकतर गमले आ गये हैं। कल वे लोग बगीचे में शेष काम करने आयेंगे। आज एक शुभ समाचार मिला, बड़े भाई की बिटिया का रोका हो गया। ईश्वर से प्रार्थना है, उसके जीवन में सदा ख़ुशियाँ बनी रहें।   

जिस सागर से भाप बनकर बादल उड़ा था, बरस कर उसी में लौट जाता है। संस्कार मन पर छाते हैं, फिर बादलों की तरह विलीन हो जाते हैं, वे भी एक ऊर्जा ही हैं, ऊर्जा-ऊर्जा में विलीन हो जाती है।मन के भीतर ही वह ईश्वर मिलता है। गुरुजी की सुंदर वाणी मोबाइल पर सुनी। किसी ने उनसे कांवड़ियों के बारे में पूछा। वे मीलों पैदल चलते हैं, देह का श्रम होता है, मन में श्रद्धा के कारण प्रफ्फुलता होती है। उनके संकल्प पूर्ण होते हैं। आरक्षण के बारे में उन्होंने कहा, यह सदा के लिए नहीं रहना चाहिए। कल रात देर से सोये थे, सो सुबह भी देर हुई उठने में, साधना में केवल प्राणायाम किया, जिससे शरीर में तीनों दोष संतुलित होते हैं। 

आज नन्हे ने धातु के बने नये काले रंग के सुंदर गमले भेजे हैं। जून बालकनी में लगाने के लिए कृत्रिम घास भी ले आये हैं। दोनों जगहें बहुत सुंदर लग रही हैं। घर हरा-भरा हो गया है। वे एक नयी नर्सरी में गये, लकी माली ने नये गमलों में बिगुनिया, पितुनिया, जरेनियम, नाइन ओ क्लॉक के साथ और भी कई तरह के व कई रंगों के  फूलों के पौधे लगा दिये हैं, अब उनको बचाना उनका काम है।सुबह जून साइकिल से दूर तक चले गये, नूना सोसाइटी में ही घूमती रही। नन्हे से बात हुई, वह दो दिनों के लिए ऑफ साईट जा रहा है, कंपनी का भविष्य निर्धारित करने। वे लोग अब अपना अस्पताल ले रहे हैं, फ़िलहाल पाँच साल के लिए लीज पर लिया है।

आज सुबह गुरुजी की ‘; पर दी व्याख्या सुनी।चेतना सदा है, जानना उसका स्वभाव है, जब जानना समाप्त हो जाता है, तब संसार शुरू हो जाता है। जानना विचार है, यदि कोई उसमें उलझ गया तो वह विकार बन जाता है।शाम को एक मित्र दंपत्ति मिलने आया, बातों-बातों में अगले हफ़्ते किसी दिन नये बने इस्कॉन मंदिर जाने का कार्यक्रम बन गया। सुबह बालकनी की घास पर नीचे बैठकर उन्होंने फलों का रस पीते हुए पापा जी को फ़ोन मिलाया, आज वह अकेले हैं, पर हैं आराम से। छोटी भाभी कल वापस आ रही है। वीडियो कॉल पर दिखाया तो कहने लगे, आपने अपने घर को जन्नत बना लिया है।शाम को वहीं बैठकर ऑडिबल पर आयुर्वेद पर लिखी एक पुस्तक सुनती रही।वाक़ई घर अब पहले से कहीं सुंदर लग रहा है, जून ने बहुत श्रम व धन लगाया है।   

आज शाम को वे पहली बार बैंगलुरु मेट्रो में सवार हुए। रोज़ हज़ारों लोग मेट्रो में यात्रा करते हैं।उन्हें इतनी भीड़ में यात्रा करने का अनुभव कई दिन बाद मिला है, पर फ़िलहाल दुबारा जाने का मन नहीं है।ऐसे ही एक बार ‘वन्दे भारत ट्रेन’ में सफ़र करने का अनुभव लेना है।आज उनका पड़ाव था राजाजीनगर में हरे कृष्ण हिल पर स्थित बैंगलोर का पुराना इस्कॉन मंदिर। श्रीकृष्ण, बलराम व राधा के विग्रहों के दर्शन किए। महामंत्र का जाप किया। प्रसाद लेकर वे मेट्रो से ही वापस आये। सुबह के भ्रमण के लिए वे नापा से बाहर गये, मोर, कोयल व अन्य पंछियों का कलरव भोर की शोभा में चार चाँद लगा रहा था। पुस्तक आगे सुनी, कई नयी जानकारियाँ मिलीं। भाभी वापस आ गई है।अगले महीने वह अपनी डाक्टर बिटिया के साथ स्कॉटलैंड जाने वाली है।कोई सेमिनार है। आज तापमान चौतींस डिग्री पहुँच गया है, गर्मियों का मौसम पूरे शबाब पर है। 

एक और दिन बीत गया ख़रामा-ख़रामा सुबह सुहानी थी, सूर्योदय के सुंदर दर्शन हुए। दोपहर को बाल्मीकि रामायण का कुछ अंश लिखा। आज लॉन में घास लगायी जा रही है। कल शाम तक कम चलेगा। रविवार को नन्हे और सोनू को बहुत अच्छा लगेगा।नन्हे ने घर के नाम के साथ उनके नाम लिखवाकर नेमप्लेट भेजी है, पर उन्हें केवल घर का नाम ‘निर्वाण’ लिखी हुई नेम प्लेट ही चाहिए। वह उसे वापस कर देगा। कल साप्ताहिक साफ़-सफ़ाई का दिन है, नैनी भी सुबह जल्दी आएगी। सो, जल्दी यानि समय पर सो जाना बेहतर है। 

आज इतवार है। सुबह दो घंटे बगीचे में माली को कम बताते, करवाते बीते।ग्यारह बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। नाश्ते के बाद पहले नर्सरी फिर फ़ोरम मॉल गये। रात्रि भोजन करने के बाद घर लौटे तो दस बज गये थे। सभी के लिए  उपहार लेना आज का मुख्य कार्यक्रम था। नन्हे ने उसके लिए डेनिम की जैकेट लेकर दी है। नये गमलों में पौधे लग गये हैं।