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Saturday, May 16, 2026

महर्षि अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’


महर्षि अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’

आज धनतेरस है, शाम को दिये जलाये। जून ने फूलों का ऑर्डर कर दिया और पूजा का नारियल ले आये। कल सुबह नन्हा-सोनू वे उनके मित्र आ जाएँगे। सुबह ही छत पर टेंट लगेगा। दोपहर को दिवाली भोज का आयोजन है। सुबह बड़ी ननद से बात की, जो क्लाउड किचन चलाती है। उसने बताया सत्तर प्लेट्स पाव-भाजी का ऑर्डर था।आज सुबह ध्यान में उसने अस्तित्त्व से कहा, अपनी उपस्थिति का कोई चिह्न दिखाये तो गुरुजी की आवाज़ भीतर से आयी। कुछ जान के चलो, कुछ मान के चलो, सबको प्रेम से गले लगा के चलो! जगत में सबको अपना ही अंश मानकर अपनी ओर से किसी से भी कोई दूरी नहीं माननी है। गुरुजी उनके कितने निकट हैं, हर बात का उत्तर देते हैं। 


आज छोटी दिवाली का उत्सव बहुत अच्छी तरह मनाया। सुबह आठ बजे बच्चे आ गये थे।वे भी ढेर सारे फूल लाए थे। घर को फूलों से सजाया। सोनू ने कंडीलें लाने को कहा। नूना की इच्छा थी कि इस बार एक कंडील लगायें, और नन्हा दसियों कंडीलें ले आया।वे सब छत पर टेंट में ही लगायीं। बहुत से लोग आये। भोज दोपहर बाद तक चला। शाम को बच्चे वापस चले गये। 


आज दिवाली का मुख्य उत्सव भी सोल्लास मनाया। नन्हा और सोनू शाम को आ गये थे।सबने एक साथ बैठकर पूजा की, दिये जलाये फिर पड़ोस में गये, सामने वाले घर से दो बच्चे आये। नन्हे ने फ़्राइड राइस बनाये।सोसाइटी में एक चक्कर लगाया, तस्वीरें उतारीं। 


आज अक्तूबर की पच्चीस तारीख़ है, चौंतीस वर्ष पहले आज ही के दिन जून का छोटा भाई उन्हें छोड़कर चला गया था। आज सुबह उत्सव के बाद की सफ़ाई में बीती। दस बजे कुछ कपड़े सिलने देने गई। एक कविता पोस्ट की। पापाजी से बात की। दूर तक टहलने गये,  धूप अब भली लगने लगी है। शाम को गुरुजी का सत्संग सुना, कितने धैर्य और सहजता से वह अपनी बात समझाते हैं। 

आज बहुत दिनों बाद वे आश्रम गये। सूर्यास्त के दर्शन किये। जहाँ राज्य के मुख्यमंत्री भी आये हुए थे। कर्नाटक राज्योत्सव के कारण यह कार्यक्रम हो रहा था, जो एक चुनाव रैली जैसा लग रहा था। सुदर्शन क्रिया होगी, यह सोचकर कई लोग चार बजे से ही वहाँ बैठे थे। आश्रम जाने से पूर्व वे वृद्ध आश्रम भी गये थे, दिवाली की मिठाई और कुछ नमकीन लेकर। कुछ महिलाएँ टहल रही थीं।सिंधी भाई भी मिले, कुछ देर उनसे बात की। दो घंटे आश्रम में बिताकर वापस लौटे तो दिये जलाये। कल भाईदूज के साथ दीपावली का अंतिम उत्सव मनाया जाएगा। 


आज शाम को वे टहलने गये तो हवा में ठंडक थी, लौटकर स्वेटर पहना। इस बार बैंगलुरु में ज़्यादा ठंड पड़ने वाली है। आज एक पोस्ट प्रकाशित की। तीनों भाइयों से बात हुई, उन्हें भाईदूज की कविता अच्छी लगी। ऋषि सुनक ब्रिटेन के नये प्रधान मंत्री बन गये हैं। उनके पिता गुजराँवाला, पंजाब के रहने वाले परिवार से आते हैं, जो १९३५ में अफ़्रीका जाकर बस गया था। १९८० में उनका जन्म ब्रिटेन में हुआ। एक तरह से वह वहीं के नागरिक हैं, पर उनका लालन-पालन हिंदू धर्म के अनुसार हुआ है। आज ‘कांतारा’ का ट्रेलर देखा, ज़रूर एक अच्छी फ़िल्म होगी। कश्मीर के इतिहास के बारे में एक वीडियो देखा, आज ही के दिन कश्मीर का भारत में विलय हुआ था। 


आज शाम नूना ‘ललिता सहस्त्रनाम’ पाठ में गई, भगवद्गीता में कृष्ण ‘जपयज्ञ’ संभवत: इसी को कहते हैं। आज बड़े भांजे से बात की, अगले हफ़्ते वे उसका नया घर देखने जाएँगे। मौसम ख़ुशनुमा हो गया है। गुलाबी ठंड पड़ने लगी है। 


आज यहाँ राज्योत्सव मनाया गया। शाम को ‘भूमिका’ देखी, पर्यावरण संरक्षण पर एक डरावनी फ़िल्म ! धरती का अपना जीता-जागता अस्तित्त्व है, मानव उसका दोहन कर रहा है, उसको कष्ट पहुँचा रहा है। धरती पर बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग एक लक्षण है कि मानव सब कुछ ठीक नहीं कर रहा है। विकास के नाम पर वह धरती को बहुत नुक़सान पहुँचा रहा है। 


सुबह उठने से पूर्व रोज़ की तरह मन में शुभ विचार प्रेषित किया गया, परमात्मा के सिवा और कौन कर सकता है यह, जिससे प्रातः काल का समय ब्रह्म मुहूर्त बन जाता है। एक कविता लिखी गई, सहज ही, न लिखने से पूर्व न ही लिखने के बाद उसका एक भी शब्द याद था, कोई है, जो लिखवा लेता है। वे टहलने गये तो श्री अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’ के बारे में सुना। दोपहर को भी कुछ देर सुना। शाम को उनकी एक पुस्तक पढ़ी। सावित्री व एक अन्य पुस्तक मँगवायी है जो राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने ‘सावित्री’ के बारे में लिखी है। आजकल सुबह छह बजे के समाचार कोरोना काल के पूर्व की तरह दस मिनट की जगह पाँच मिनट के हो गये हैं। मोरबी के पुल के गिरने से मरने वालों की संख्या १३५ हो गई। ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ वाली बात ही नज़र आती है। अख़बार में ऐसे भयंकर दुष्कर्मों की खबरें आती हैं कि ईश्वर सब जानता है, इसका भरोसा कोई नहीं कर पाता कभी-कभी। जीवन उसी के लिए वरदान है जो साक्षी भाव में टिकना जानता है, जहाँ भी आसक्ति है, वहीं दर्द है। 


शाम को टहलने गये तो अचानक हुई बारिश में भीग गये, वह तो अच्छा था, जैकेट पहना हुआ था, वही भीगा। नवम्बर आ गया है, पर वर्षा जाने का नाम ही नहीं ले रही। अगले महीने केरल में विंटर मानसून भी आ जाएगा। जून ने आज मीलों  दूर तक साइकिल चलायी। दस बजे वह डी-मार्ट गये, उनमें एक जोश झलक रहा था। आज सुबह वे महर्षि अरविंद का एक वीडियो सुन रहे थे, उसके कुछ प्रेरणादायी शब्द उसे भी याद हैं। जीवन में उत्साह न हो जीवन, जीवन नहीं रहता। परमात्मा उनके भीतर उत्साह, सृजनात्मकता, उदारता, प्रेम, कृतज्ञता, ज्ञान तथा आनंद के रूप में रहता है। वह जितना-जितना उनके जीवन से झलकेगा, उतना-उतना वे उसमें स्थित रहेंगे, उसके क़रीब जाएँगे। बहुत सी बातें स्पष्ट हो रही हैं। आत्मा का अस्तित्त्व उतना ही सत्य प्रतीत होता है जितना यह जगत !  


आज भी जून का उत्साह बरकरार रहा और वह जैन मंदिर तक साइकिल से चले गये। उनके आने के बाद वे टहलने गये तो एक परिचित दम्पति मिले, जिन्होंने एक नयी खुली सब्ज़ी की दुकान के बारह में बताया। आज हिंदी पढ़ने आयी छात्रा को ‘कंचा’ पाठ पढ़ाया तो असम की एक छात्रा की याद आ गई, यह पाठ उसे अच्छा लगा था। महर्षि अरविंद की ‘लाइफ डिवाइन’ के कुछ अंश सुने। उन्होंने साधना के पथ में आने वाली हर बाधा का, हर मार्ग का और हर लक्ष्य का इतना विस्तृत वर्णन किया है कि सारे संशय मिटने लगते हैं। वह जीवन को एक उच्च अर्थ प्रदान करते हैं, जब वह कहते हैं कि प्रकृति में विकास अभी भी हो रहा है।चेतना का विकास निरंतर जारी है।मन को दिव्य बनाना जिसका पहला कदम है। दिव्य मन और बुद्धि के माध्यम से ही चेतना अपनी पूरी क्षमता को व्यक्त कर सकती है। चेतना में अनंत संभावनाएँ हैं।