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Friday, June 19, 2026

दस महाविद्याएँ


दस महाविद्याएँ  

आज सुबह से जून थोड़ा सा परेशान हैं, बात वही पुरानी है, एक पैटर्न ही तो बन गया है शायद, वह इससे बाहर निकलना नहीं चाहते। शायद नाराज़गी से अहंकार को तृप्ति मिलती है। रात को उनकी नींद खुल गई थी, शायद कोई स्वप्न देख रहे थे।वर्षों पहले नूना की भी यही स्थिति थी, पर अब तो यह अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा लगता है। अनुभवानंद जी कहते हैं, उन्हें शब्दों के अर्थ की तरफ़ ध्यान नहीं देना है, केवल शब्द के स्रोत तक जाना है, जो अनहद नाद है। इससे वे प्रतिक्रिया करने से बचे रहेंगे और कर्मों के बंधन से भी। शब्दों को अनावश्यक महत्व देने से ही सारे द्वन्द्व होते हैं। सुबह उसने एक छोटी सी कविता लिखी, या उससे लिखवा ली गयी !! जो लिखवाता है वही तो वह ख़ुद है ! कुछ देर पहले मोदी जी को सुना, उनके शब्द सभी के दिलों को छूते हैं, पर विपक्षी पार्टियों को वे नहीं सुहाते। कुर्सियाँ बनकर आ गई हैं, कल नन्हा व सोनू देखकर प्रसन्न होंगे। 

रविवार सहज रूप से बीता, बच्चे सुबह साढ़े नौ बजे तक आ गये थे। दोपहर को नन्हे के साथ  उन्होंने छोटे-छोटे पार्ट्स जोड़कर एमआई की एक कार बनाने की शुरुआत की। सोनू जिग्सा पज़ल हल कर रही थी। शाम को जाने से पूर्व नन्हे ने मल्टी पर्पेस कोर्ट में रिमोट से चलने वाली एक नयी कार चलायी, अभी तक उसके भीतर के बालक का मन खिलौनों से भरा नहीं है। पापाजी से बात हुई, वे अपेक्षाकृत स्वस्थ थे, ठीक से सुन भी पा रहे थे।

आज वे बहुत दिनों बाद आश्रम गये, हवा सुहानी थी और आकाश में पश्चिम दिशा रक्तिम हो रही थी। भजन गायकों ने समाँ बाँध दिया। गुरुजी आये तो सभी लोग उनके सम्मान में सहज ही खड़े हो गये थे। उन्होंने प्रश्नों के जवाब सरल भाषा में लोगों को हँसाते हुए दिये, उनकी हाज़िर जवाबी की कोई मिसाल नहीं। उनकी बातों में एक आत्मीयता झलकती है। आज छत पर बने शेड में कबूतरों से बचने के लिए एक जाली लगा गई, कल ही जून ने इसकी चर्चा की थी।  घर में चल रहा काम अभी आधा ही समाप्त हुआ है। कल उन्हें कार पर तीसरी कोटिंग लगवाने के लिए जाना है, खरोंच से बचने के लिए ३एमएम की कोटिंग लगवायी है, इन सब मामलों में जून का जवाब नहीं। आज एओएल का अनुवाद कार्य किया, पढ़ने के लिए लेख पापाजी को भी भेजा। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के बारे में नन्हे को बताया तो उसने एक वीडियो भेजा है, जिसमें ख़ालिस्तान की माँग के पीछे की कहानी बतायी गई है। 

आज उन्होंने सामने वाले बगीचे में लगा कंचन का पेड़ निकलवा कर प्लूमेरिया का एक पेड़ लगवा दिया है। एक बार कंचन के वृक्ष को संबोधित करते हुए उसने एक कविता लिखी थी, जिसमें उसके फूल न खिलने की स्थिति में उसके कट जाने की आशंका व्यक्त की थी। उसने उस वृक्ष के जीव से मन ही मन क्षमा माँगी। आज दोपहर भी कल की तरह उसने कुछ देर एमआई की कार बनायी। कल उगादि पर्व है, दोनों मेड्स काम पर नहीं आयेंगी, अपने-अपने घर पर परिवार के साथ उत्सव मनायेंगी।आज उसने बट्रेंड रसल की एक पुस्तक को ऑडिबल पर सुनना आरंभ किया है। उन्हें आत्मा का कोई ज्ञान नहीं है, वह चेतना को मस्तिष्क से पैदा हुई मानते हैं। शाम को उसने पड़ोसी के यहाँ जाकर घर की दीवार को देखा,रंग-रोगन के बाद काफ़ी अच्छी लग रही है। सामने से भी घर सुंदर लग रहा है। 

आज भी वे आश्रम गये थे, गुरुजी को सुनना एक अद्भुत अनुभव है। सभी प्रश्नों का उत्तर वह जिस सहजता से देते हैं, पूछने वाले को शांति प्राप्त होती है। आज वासंतिक नवरात्र का प्रथम दिन है, उन्होंने नये वर्ष की शुभकामना भी दी। आज सुबह टहलते समय प्रीतिदिन की तरह जून से विभिन्न विषयों पर वार्तालाप हुआ, वातावरण शीतल व सुखकारक था, लगा, जिसे उन्होंने इधर-उधर की बातों से ढक दिया पर मात्र एक पल को ही ! अब मन उस मौन में ठहरने लगा है जहाँ उसे कुछ भी नहीं छूता ! आश्रम में भजन सुनते समय भी मन जैसे समाधि में ही था। पापाजी से हुई अध्यात्म चर्चा को आज भी रिकॉर्ड किया।उन्हें नवनीत का मार्च का अंक मिल गया है। वह खुश थे, एक साहित्यिक पत्रिका पढ़ने में उनका समय अच्छा बीतेगा।  

आज छत का काम पूरा हो गया, कल से वे वहाँ सुबह की योग-साधना कर सकते हैं।जून उनके बगीचे व छत की लैंड-स्केपिंग के लिए बात करके आये हैं। आज सुबह यू ट्यूब पर उसने दस महाविद्याओं के बारे में सुना, कल गुरुजी ने भी उनका ज़िक्र किया था। दिन में ऑडिबल पर भी उनके बारे में सुना।महाकाली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला के रूपों में उनके भीतर ही सत्य के मार्ग पर ले जाने वाली शक्तियाँ भी है और माया-मोह में फँसाने वाली अविद्या शक्ति थी। वे सोते-सोते भी जीवन गुज़ार सकते हैं और जागकर अपने जीवन को धन्य भी कर सकते हैं। देह व मन आपस में जुड़े हैं। सोया हुआ मन कब कैसा व्यवहार करेगा, इसका अनुमान ब्रह्मा भी नहीं लगा सकते। आत्मा सदा साक्षी है। गुरुजी कहते हैं, पानी पर खींची लकीर को जुड़ने में जितना समय लगता है, उतनी देर के लिए क्रोध जगा तो कोई बात नहीं। आत्मा में स्थित होने के लिए मन को पलक झपकने जितना समय ही लगता है। आज उन्होंने “रॉकेट्री” का दूसरा भाग देख लिया। डॉ होमी भाभा और विक्रम साराभाई के कारण भारत का परमाणु कार्यक्रम तथा अंतरिक्ष कार्यक्रम आगे बढ़ा, बल्कि वे दोनों उसके जनक थे। दोनों की असमय मृत्यु हो गई, पर दोनों ने अपने साथियों को तैयार कर दिया था।कल से रमज़ान का महीना शुरू हो गया है। घर का काम अगले हफ़्ते तक खिंचने वाला है।  

   


Tuesday, May 26, 2026

‘शक्कर के पाँच दाने’

‘शक्कर के पाँच दाने’



आज सुबह मन शिकायती हुआ, इसका अर्थ है नीचे के केंद्रों में आ गया कुछ पलों के लिए, या कहें देह भाव में, आत्मा में रहे तो एकत्व भाव की अनुभूति सहज ही होती है। आज सुबह रजिस्ट्रार के दफ़्तर से घर के कागज मिल गये, नन्हा भी वहीं आ गया था। एओएल का अनुवाद कार्य किया, अगले आश्रम में कला-फ़ोरम ‘भाव’ का आयोजन होने वाला है। गुरुजी वापस आ रहे हैं। वे दोनों आश्रम जाएँगे। 


आज सुबह नूना उठी तो मन ध्यानस्थ था, उठकर भी काफ़ी देर बिस्तर पर बैठी रही। सुबह-सुबह मन कितना शांत होता है, सब कुछ स्पष्ट नज़र आता है। वे टहलने निकले तो एकादशी का चंद्रमा और तारे गगन को सजा रहे थे। वापस आकर प्राणायाम किया, पता नहीं कौन भीतर से करवा रहा था, प्राणमय कोष को सबल करने के लिए किस तरह गहरी श्वास लेनी है। उनके भीतर कितनी शक्तियाँ छिपी हैं, पर वे उनके प्रति आँखें मूँदे रहते हैं। उनकी सारी ऊर्जा केवल शरीर को बनाये रखने में ही खर्च हो जाती है। दोपहर को ‘ऑडिबल’ पर ‘एक योगी की आत्मकथा’ का कुछ अंश सुना। ओशो की किताब पढ़ी। गुरुजी की भगवद्गीता की व्याख्या का एक-एक पन्ना सुबह-शाम रोज़ पढ़ती है।नवनीत में कुछ कहानियाँ पढ़ीं, बहुत अच्छी हैं। वह भी कहानी लिख सकती है, यदि थोड़ा सा प्रयास करे। गीत चतुर्वेदी का एक साक्षात्कार सुना। आज नन्हे ने गुलेल भेजी है, जैसे उस दिन लट्टू लाया था, जो उन्होंने उस दिन के बाद चलाया ही नहीं। नन्हे के भीतर एक बच्चा अभी भी रहता है। वह कल शाम को वापस आएगा, कंपनी की ‘ऑफ साइट मीटिंग’ में गया है। आज फिर उसे डेंटिस्ट के पास जाना था, अब तीन हफ़्ते बाद जाना है, अगले महीने के अंत तक नया दाँत लग जायेगा।


आज वे बैंगलुरु में पहली बार ‘लाहे-लाहे’ नामक संस्था की ओर से प्रस्तुत किया एक नाटक देखने गये।मानव कौल द्वारा लिखित ‘शक्कर के पाँच दाने’ सोलो नाटक का मुख्य पात्र जे झा ने निभाया। नाटक में जिसका नाम राजकुमार था, रघु उसका ट्रक वाला दोस्त था, पुंडलीक व माँ के अलावा चार अन्य पात्र थे। नाटक अच्छा लगा। जिसमें मध्यवर्गीय जीवन के अंतर्द्वंद्व, अर्थहीनता और अस्तित्त्व की तलाश को दिखाया गया है। नायक अपने जीवन को शक्कर के पाँच दानों की तरह देखता है। सुबह वैक्यूम क्लीनर से सफ़ाई की तो नैनी ने कहा, नन्हा, माँ का बहुत ध्यान रखता है। आज से एक छात्र हिन्दी पढ़ने आने लगा है, उसे वर्णमाला से शुरुआत करनी होगी। 


इतवार की सुबह सुहानी थी। नन्हे और सोनू ने ‘थाई’ भोजन बनाया। शाम को वे सब एक झील पर गये, थर्मस में चाय बनाकर ले गये थे। पंछियों, हवा, धूप और पानी के सान्निध्य में कुछ समय बिताया।पापाजी को भी मोबाइल पर जंगल व झील दिखाए। वापस आकर बच्चों ने ‘सूशी’ बनायी। टेलीस्कोप से ज्यूपिटर देखा। उसके बाद वे अपने घर चले गये।नन्हे ने उसके लिए मानव कौल की कुछ किताबें दी हैं।


आज सुबह साढ़े नौ बजे वे लालबाग गये थे। जहाँ फूलों की प्रदर्शनी लगी है। अद्भुत नज़ारे थे, फूलों का रूप कितना सुंदर होता है और रंग कितने शोख़ ! गुलाब, जीनिया, पिटुनिया, डहेलिया, गुलदाउदी, गेंदा, जरबेरा, ऑर्किड्स और सैकड़ों तरह के रंगों वाले फूल ! कितने लोगों ने कितने दिनों, महीनों श्रम करके इन्हें उगाया होगा। उन्होंने फूलों की कई तस्वीरें उतारीं और कुछेक ख़रीदीं भी। वापस लौटे तो डेढ़ बजे थे।


आज वे बहुत दिनों बाद गुरुजी के सत्संग में शामिल होने आश्रम गये। काफ़ी भीड़ थी। वह हिन्दी, अंग्रेज़ी और कन्नड़ तीनों भाषाओं में बोल रहे थे।कुचिपुड़ी नृत्य की एक प्रस्तुति भी हुई।जून ने अगले महीने होने वाली उनकी यात्रा की टिकट्स बुक कर दी हैं। दीदी ने बताया, दोनों भांजियों ने फिर से जॉब शुरू कर दी है। बच्चों के जन्म के बाद कुछ वर्षों तक वे पूर्णकालिक माँ की भूमिका में थीं। 


आज वे एक वृद्ध महिला से मिलने गये, जिनके स्वर्गवासी पति जून की कंपनी में वर्षों पहले एक उच्च पद पर थे। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं। वृद्धा मैम इस उम्र में भी बहुत ऊर्जावान हैं, मिलनसार भी। उनको वर्तमान सोसाइटी में आये अधिक दिन नहीं हुए हैं, पर सबसे जान-पहचान कर ली है। जून के पूर्व अधिकारी भी अपनी पत्नी के साथ आये थे। वापसी में उन्हें उनके घर छोड़ते हुए वे वापस आये। रास्ते में  धीरेंद्र शास्त्री के बारे में एक वीडियो देखा, आजकल उनकी बहुत चर्चा है। कल सुबह नन्हा और सोनू एक मित्र के विवाह में सम्मिलित होने कोलकाता जा रहे हैं। 


आज गणतंत्र दिवस होने के कारण सुबह आठ बजे वे झंडा आरोहण के लिए मल्टी पर्पस कोर्ट गये। अधिक लोग नहीं आये थे, जून को ध्वज फहराने का अवसर मिला। वापस आकर टीवी पर शानदार परेड देखी, जिसमें संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किए गये विशेष नृत्य ‘वंदे भारतम:नारी शक्ति’ में पाँच तत्वों के माध्यम से महिलाओं की असीम ऊर्जा को दर्शाया गया था। देश भर से आये लगभग पाँच सौ शास्त्रीय और लोक कलाकारों ने इसमें भाग लिया। विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियाँ भी मनमोहक थीं, नूना के अनुसार गुजरात की झांकी  प्रथम और लोक निर्माण विभाग की झांकी दूसरे स्थान पर आने योग्य है। शाम को सवा पाँच बजे वे आश्रम गये। गायन, वादन तथा नृत्य के कार्यक्रम देखने के साथ हेमामालिनी और गुरुजी के उद्बोधन सुने।  


Tuesday, May 12, 2026

रस मलाई केक

रस मलाई केक


आज रक्षा बंधन का त्योहार है; जो तिथि के अनुसार कल सुबह तक मनाया जाएगा।भौतिक रूप से वे भी कल ही मनाने वाले हैं।मानसिक और शाब्दिक रूप से तो मना ही लिया, सभी भाई-बहनों से बात हुई। आज शाम भी गुरुजी को सुना। वह कह रहे थे, लेने में जो ख़ुशी है, वह तो बच्चों को भी होती है पर देने की ख़ुशी प्रौढ़ होती है। लोग स्वयं ही प्रसन्नता हैं, यदि वे किसी कारण से खुश होते हैं तो वह ख़ुशी स्थायी नहीं है। किसी ने भयमुक्त होने का उपाय पूछा तो उन्होंने कहा, यदि अभय प्राप्त करना है तो  किसी बड़े कार्य के प्रति समर्पित हों या ह्रदय में प्रेम और भक्ति जग जाये। मन में स्पष्टता हो, बुद्धि में शुद्धता हो, कर्म में सच्चाई हो तो जीवन शांत धारा की तरह प्रवाहमान रहता है। जो अकाल को याद करता है, हर काल उसके लिए सुकाल होता है। ध्यान में वे उसी अकाल पुरुष में स्थित होते हैं। भक्तिभाव से भरी एक बंगाली महिला का बाउल नृत्य भी देखा। वह गा रही थी व बजा भी रही थी।ओस्टियोपैथी के बारे में भी बताया गया, जो एक चिकित्सा विहीन इलाज है। 


आज भी आश्रम से सत्संग प्रसारित हो रहा है, कोई मीका सिंह आये हैं। कुमार शानू का पुत्र भी आया है। गुरुजी ने सदा की तरह प्रश्नों के सटीक उत्तर दिये। आर्ट ऑफ़ लिविंग सेवा के कई प्रकल्प चलाता है, अब विद्या मंदिर के पुरस्कार दिये जा रहे हैं। कुछ पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।शाम को वे दूर तक टहलने गये। नूना ने छोटे भाई के जन्मदिन पर कविता लिखी। एओएल की तरफ़ से ‘रुद्रम जप का महत्व’’ पर एक आलेख का अनुवाद कार्य किया। पापाजी ने ओशो की एक पुस्तक की बात बतायी। उन्होंने कहा, सबके भीतर एक ही आत्मा है।मन यदि प्रसन्न हो तो सारी प्रकृति अच्छी लगती है। 


आज जून का जन्मदिन उन्होंने अच्छी तरह मनाया, नन्हा व सोनू ‘रस मलाई केक’ लेकर आये थे। सोनू के मौसेरे भाई-बहन भी।दोपहर के लंच में आलू टुक, सिंधी कढ़ी व पनीर बनाया। शाम को सबने मिलकर एक नया बोर्ड गेम ‘आईपीओ’खेला।मौसेरी बहन ने साइकिल चलायी, नन्हे ने स्केट बोर्ड पर अभ्यास किया। छोटी बहन ने यूएई से फ़ोन पर  बताया, बहनोई ने बाइक रैली में भाग लिया, भारत-पाकिस्तान की संयुक्त रैली।इधर देश का माहौल उत्सव मय है, आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है ! 


आज सोसाइटी के मैदान में स्वतंत्रता दिवस का अमृत महोत्सव बहुत उत्साह से मनाया गया। उसके बाद वे पंचायत के दफ़्तर जाकर बच्चों का स्लाइड दे आये। गाँव की सड़क पर तिरंगा रैली भी चल रही थी। माली ने असम से लाया एक पौधा लगाया। मोदी जी का भाषण भी लाजवाब था, उन्होंने नागरिक के कर्त्तव्यों की तरफ़ ध्यान दिलाया। देश आगे बढ़ रहा है। नूना ने झंडे के साथ एक तस्वीर खिंचवाई।  


पिछले दो-तीन दिनों से हो रही वर्षा के कारण मौसम अधिक गर्म नहीं है। आज राजधानी में रहने वाली एक सखी से बात की, उसके पुत्र को डेंगू हो गया है, हर साल इस मौसम में डेंगू का प्रकोप होता है। असमिया सखी कुछ महीनों के लिए गोहाटी जा रही है।वे जीवन के अंतिम वर्ष बिताने के लिए अपने पुश्तैनी स्थान पर एक घर बनवाने जा रहे हैं।पता नहीं उन्होंने अपनी वृद्धावस्था की कैसी कल्पना की है। पुत्र विदेश में है, बिटिया विवाह के बाद उनका कितना ध्यान रख पाएगी, यह सोचकर वे अपने भाई-बहनों के पास जा रहे हैं। जून का मन फिर थोड़ा सा नासाज़ है, उनके स्वभाव में ही आ गया है यह। उन्हें भय है कि उन दिनों अकेले कैसे रहेंगे, जब नूना आश्रम में कोर्स करने के लिए जाएगी। शाम को नन्हे से भी बात हुई, वह उन्हें शनिवार को अपने घर आने के लिए कह रहा है।

 

आज पहली बार वे अपनी लेन के एक परिचित आर्ट ऑफ़ लिविंग शिक्षक के यहाँ रुद्र पूजा के आयोजन में शामिल होने गये।बहुत अच्छा अनुभव रहा। आश्रम में बिताये चार दिन एक याद बनकर रह गये हैं। 


आज शाम से ही वर्षा हो रही है। मध्य प्रदेश व राजस्थान में बाढ़ आ गई है। ईश्वर उनकी रक्षा करे जो पानी में फँस गये हैं।अति वृष्टि या सूखा दोनों ही स्थितियाँ भयावह हैं। आज जून का मन ठीक है। वे व्यर्थ ही इतने सुंदर जीवन को दुखों का घर बना लेते हैं।सुबह टहलने गये तो मौसम सुहावना था। आश्रम में बिताये दिनों की स्मृति बीच-बीच में आती रहती है। डीएसएन कोर्स का इतना बड़ा लाभ उसे मिला है कि भीतर सब ख़ाली हो गया है। जैसे अब कोई संस्कार नहीं बचा। मन नीले गगन की तरह मुक्ति का अनुभव कर रहा है। आज सुबह मुक्ति का गीत भी लिखा। दोपहर को वे बाज़ार गये। नूना कुछ बच्चों से मिली, संकेत, अभिषेक और सात्विक, जिनकी माँओं ने बताया बाक़ी स्कूल गये हैं। उन्हें कुछ समान दिया। देने में कितना सुख मिलता है, गुरुजी सारी दुनिया में घूमकर ख़ुशियाँ बाँटते हैं। उनके जीवन का एक ही लक्ष्य है हर चेहरे पर मुस्कान लाना ! वह यदि एक भी व्यक्ति के मुखड़े पर मुस्कान लाने में सफल रही तो उसका सौभाग्य होगा!   


आज शाम को कुछ देर के लिए वर्षा रुकी तो वे टहलने गये, आकाश पर बादलों से बनी एक सुंदर आकृति देखी। एक जंगली कौआ भी देखा। एक परिचित दंपत्ति अपने नाती को प्रैम में घुमाने ले जा रहे थे। दो मिनट रुककर उनसे बात की।बड़ी बहन से दस मिनट अंग्रेज़ी में बात की, छोटी बहन ने दोहा व कतर के बेसिक कोर्स प्रतिभागियों की बात बतायी, जिन्होंने उसका नाम देखकर स्वयं आगे आकर कोर्स में नाम लिखवाया। अफ़्रीका में दी गुरुजी की वार्ता सुनी, आज भी वह उतने ही उत्साह से लोगों को आर्ट ऑफ़ लिविंग सिखाते हैं, उनका जोश देखने लायक़ था। टीचर्स में इतना जोश उन्होंने ही तो भरा है। डीएसएन का एक नया ग्रुप बन गया है, जिसमें आसपास रहने वाले लोग हैं।जून आजकल खुश हैं, उन्होंने एक पुरानी फ़िल्म देखी साथ-साथ, नूना ने सुबह ज़ूम पर साधना की, शाम को गणेश पर गुरुजी की व्याख्यान माला सुनी। गणेश पूजा आने वाली है। 


आज वे महीनों तक सड़क पर मिलकर एकदूसरे का हालचाल लेने वाले एक परिचित परिवार के घर गये। उन्होंने स्वागत किया, अपना बगीचा दिखाया। उन्हें अवसाद है, यह बात घर की महिला ऐसे कह रही थीं, जैसे कोई कहे घुटने में दर्द है। पिछले बीस साल से दवा ले रही हैं पर कभी योग नहीं किया। लोग कितना अज्ञान में जिये चले जाते हैं।उनके पिता पचानवे वर्ष के हैं पर अभी भी स्वस्थ हैं। नैनी के लाए पैशन फ्रूट्स का जूस बनाया।   


Thursday, April 9, 2026

बैनरघट्टा नेचर कैंप’

बैनरघट्टा नेचर कैंप


आज शाम वे दोनों आश्रम गये थे। वहाँ संगीतमय फ़ौवारे चल रहे थे, और लड़ियों के प्रकाश से विशालाक्षी मंटप सजा हुआ था। वीडियो कॉल पर पापाजी को आश्रम के दर्शन कराये। जून ने अपने एक मित्र को भी आश्रम का सौंदर्य दिखाया। कुछ देर वहाँ के दिव्य वातावरण में बैठे रहे। स्टोर से कुछ किताबें और उपहार ख़रीदे। दिवाली के लिए घी के दीपक भी लिए। नूना दोपहर को तीन घंटे अनुलेखन कार्य करती रही। पिछवाड़े के बगीचे में पपीते का पेड़ जून ने कटवा दिया है, उसके स्थान पर दूसरा पेड़ लगा दिया है। सौ से अधिक फल दिये होंगे इस एक वृक्ष ने, उन्होंने कई लोगों को वितरित भी किए। भारत ने सौ करोड़ वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बना लिया है।


पापाजी से बात हुई तो उन्होंने कहा, दुनिया में कई लोग ठगने के लिए बैठे हैं, हरेक को सतर्क रहना होगा। साइबर अपराध की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। इस उम्र में भी वह नियम से दो अख़बार पढ़ते हैं, ये समाचार उन्हें वहीं से मिलते हैं। शाम को जून एक नयी झील दिखाने ले गये, जिसका नाम मरियापुरा झील है, थतगुप्पे नामक गाँव में स्थित है। गुरुजी पर बनी एक कॉमिक बुक पढ़ी, बहुत रोचक है।जून प्रतिदिन नौ बजे दफ़्तर जाते हैं, बारह बजे लौट आते हैं।आज उन्होंने सोसाइटी के लिए फ़ैसिलिटी मैनेजर का इंटरव्यू लिया।  


आज शाम जून का हाथ भाप से जल गया, वह मूँग दाल का हलवा बना रहे थे। दाल कुकर में भूनी थी, नूना ने पानी डाला तो भाप ऊपर आ गयी, दो सेकंड ही छुआ होगा भाप ने, पर बहुत ही दर्द हुआ। ठंडे पानी में हाथ रखने से लाभ हुआ।आज नन्हा अपने दो सहयोगियों के साथ किसी अन्य कंपनी के मर्जर की बात करने गया है। कल उसके यहाँ जाना है।


आज सुबह सवा छह बजे वे दोनों नन्हे के यहाँ से लौट आये, कल रात वहीं रुक गये थे।सुबह जून मीटिंग से देर से लौटे। काम आगे बढ़ रहा है, उन्हें यह काम अच्छा लग रहा है। कह रहे थे, दिल की जगह दिमाग़ से काम लेना उन्हें अच्छी तरह आता है।पापाजी से बात हुई, वह अपने मित्र की तेहरवीं में नहीं गये। वह कर्ता भाव से मुक्त होने की बात भी कह रहे थे। नूना से कहा, एक ग़ज़ल में कहीं पर लय टूट रही है, उसे ठीक कर ले। वह कल उसे दुरस्त करने के बाद दुबारा भेजेगी।कल एक मित्र परिवार आ रहा है, वे लोग एक-दो दिन उनके यहाँ रुकेंगे।


सुबह नौ बजे मेहमान आ गये थे। शाम की चाय के बाद जून उन्हें झील पर ले गये और उसके बाद सभी टीके फॉल अर्थात थॉटिकल्लू झरना देखने गये। यह मौसमी झरना अति विशाल और बेहद आकर्षक है, वहाँ तक जाने का रास्ता भी अति रोमांचक है।वे सब कभी बैठ कर कभी एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर फिसलन भरी चट्टानों पर बढ़ते हुए ऊपर पहुँचे, तो वहाँ का नजारा अतुलनीय था। अति वेग से श्वेत जल धाराएँ बहती हुई आ रही थीं। वापसी में जून एक अन्य झील दिखाने ले गये। सबने कई सुंदर तस्वीरें उतारीं। रात्रि भोजन में पनीर  की सब्ज़ी जून ने बनायी। उनकी बिटिया को यहाँ रहना अच्छा लग रहा है।अमेरिका में रहने वाले उनके पुत्र से भी बात की।


आज सुबह नाश्ते के बाद जून सभी को 40 एकड़ में फैले पिरामिड वैली स्थान दिखाने ले गये। जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा दस मंज़िल ऊँचा मैत्रेय बुद्ध ध्यान पिरामिड है।इसे ब्रह्मर्षि पत्रिजी ने 2003 में बनवाया था।स्वागत कक्ष में उन्हें ध्यान का महत्व बताया गया और छोटा सा ध्यान कराया भी गया, ताकि मुख्य हॉल में जाकर सभी को ध्यान का कुछ न कुछ अनुभव हो सके। दोपहर को लौटकर पहली बार नूना ने शेफ़ कॉर्नर से कुछ भोजन मंगाया, कुछ घर पर बनाया। कल सुबह मेहमान वापस जा रहे हैं। 


जून को कर्नाटक के राज्य दिवस पर एक छोटा सा भाषण देना है। जिसका कुछ अंश उन्हें कन्नड़ भाषा में बोलना होगा।उन्होंने तैयारी कर ली है। रविवार को जून के पूर्व अधिकारी के पूरे परिवार के लिए आयोजित विशेष भोज अच्छा रहा। नन्हा व सोनू अपने कुक से एक दो व्यंजन बनवा कर ले आये थे। जून ने उन्हें घर दिखाया तथा सोसाइटी का एक चक्कर लगवा कर लाए। शाम को असम के एक पुराने परिचित आये, वे आश्रम में एडवांस कोर्स करने आये थे, गुरुजी से भी मिले। उसी समय ‘हेलोवीन’ के लिए विचित्र पोशाकों में सजे बच्चे ट्रीट लेने आये।बड़े उत्साह में भरे वे बच्चे एक घर से दूसरे घर जा रहे थे, जैसे वे लोग बचपन में लोहड़ी माँगने घर-घर जाते थे। 

राज्योत्सव का कार्यक्रम अच्छा रहा।आज गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान किया। उन्होंने कहा, जब कोई प्रसन्न होता है, भीतर कुछ फैलता है, जब दुखी होता है, भीतर कुछ सिकुड़ता है। जो फैलता व सिकुड़ता है, वह अहंकार है। आत्मा न कभी फैलती है, न कभी सिकुड़ती है।यदि किसी के भीतर अहंकार बना हुआ है, तो यह घाव है, जिसे चोट लगेगी तो दर्द भी होगा। जब दर्द होगा तभी अहंकार का अहसास भी होगा। प्रकृति या परमात्मा चेताते हैं कि यदि दर्द से बचना है तो इस अहंकार से छुटकारा पा लो, यह सारे अनर्थों की जड़ है। इसे मिटाने का एक ही तरीक़ा है, प्रेम, वे प्रेम को प्रकट होने से रोकते हैं और स्वयं को अन्यों से काट लेते हैं। परमात्मा प्रेम है और वे परमात्मा का अंश होने से प्रेम ही हुए !   

     

दिवाली की तैयारी चल रही है।छत पर लाइट्स भी लग गई हैं। जून ढेर सारे फूल ले आये हैं। नन्हे ने दिये भेजे हैं। बड़ी ननद ने चिक्की भेजी है। कल सुबह डेंटिस्ट के पास भी जाना है, नूना को दायीं तरफ़ का ऊपर वाला एक विजडम टूथ निकलवाना है। इन्हें अक़्ल दाढ़ क्यों कहा जाता है, शायद इसलिए कि यह काफ़ी बड़े होने के बाद निकलते हैं।


आज शाम  नन्हा और सोनू आ गये थे, पूजा के बाद सबने दीपक जलाये। सभी परिवार जनों से बात की, विशेष भोज किया और पैदल व कार से घूम कर सोसाइटी के घरों में जल रहे दीपक और लड़ियाँ निहारीं। बाद में वे लोग वापस चले गये। 


आज गोवर्धन पूजा है, यानि छप्पन भोग बनाने का दिन। आज के दिन मंदिरों में विशेष प्रसाद बनाया जाता है। पापा जी ने बताया, उन सभी ने मंदिर में बना भोजन दोपहर को ग्रहण किया। छोटी बहन एक चित्र बना रही थी। कल भाईदूज पर वे लोग दीदी से मिलने जा रहे हैं। 


आज भाईदूज पर नूना ने सभी भाइयों से बात की। जून ने कहा है, इस बार नये साल का स्वागत वे लोग शहर की भीड़भाड़ से दूर जंगल में ‘बैनरघट्टा नेचर कैंप’ में रहकर करेंगे।आज ही वे लोग जिसे देखने गये थे। 


 


Thursday, December 14, 2023

लैवेंडर के बीज

आज ‘विजय दिवस’ मनाया जा रहा है। सन ७१ में आज ही के दिन बांग्ला देश का जन्म हुआ था। पाकिस्तानी सेना ने आत्म समर्पण कर दिया था। प्रधानमंत्री ने विजय चौक पर मशाल जलायी। उन्होंने ‘१९७१’ फ़िल्म देखी, भारत के कुछ सिपाही जो पाकिस्तान में रह जाते हैं, उनके दुखद प्रवास की कहानी। किसान आंदोलन अभी भी जारी है। आज कन्नड़ भाषा के कुछ और शब्द सीखे, बट्टा- वस्त्र, आदिगे- रसोई, चिक्का-छोटा।नये माली से कन्नड़ में बात की, एक वाक्य ही सही, इतवार से काम पर आएगा। नन्हे ने कुछ और गमले मँगवाये हैं, उनके टैरेस गार्डन के लिए।एक मून लाइट लैंप भी भेजा है, उसे चार्ज किया। रंग बदलती है उसकी सतह, बहुत सुंदर लगता है। 


आज पूरे नौ महीने बाद एक घंटे के लिए वे आश्रम गये, जो कोरोना के कारण इतने महीनों से बंद था। लोग बहुत कम थे। गुरुजी का सत्संग अभी एक महीने बाद ही आरम्भ होगा। ब्रिटेन में कोरोना का नया वेरियेंट मिला है, जो तेज़ी से फैलता है। वहाँ फिर से लॉक डाउन लग गया है। भतीजी को उसके जन्मदिन पर छोटी सी कविता भेजी, उसने छोटा सा थैंक्यू लिख कर जवाब दिया। कविता की कद्र कम को ही होती है शायद, कविता कोई क्यों लिखता है, शायद जब कोई खुश होता है तो ख़ुशी बाँटना चाहता है। नाश्ते में आज मूँगदाल के चीले बनाये। उसने सोचा है, शनिवार के दिन कोई न कोई चित्र बनाएगी। इतवार बच्चों के नाम रहता है। सोम से शुक्र हर दिन एक ब्लॉग को समर्पित रहेगा। इस तरह सभी पर बात धीरे-धीरे ही सही आगे बढ़ेगी। सुबह वे दोनों ननदों को याद कर रही थी, कि एक-एक करके उनके फ़ोन आ गये, टेलीपैथी इसी को कहते हैं शायद। सुबह नैनी आयी तो बहुत उदास थी। शायद घर में झगड़ा हुआ था। पीकर आये पति ने उसे चोट पहुँचायी थी। न जाने कितनी महिलाएँ इस तरह अत्याचार सहती हैं, जबकि वह कमाती है, छह घरों में काम करती है। बहुत खुश रहती है और मन लगाकर काम करती है।  


अभी नन्हे से बात हुई, कल इतवार है, वह दोपहर को पास्ता बनाने को कह रहा है। सोनू कुछ हफ़्तों के लिए माँ के घर गई है। आज सुबह सोलर पैनल की सफ़ाई की। नैनी आज पूर्ववत थी, उसे देखकर अच्छा लगा। बातों-बातों में जून ने कहा, वे बोर हो गये हैं। उसने सोचा, जो जगत से बोर हो जाएगा, वह यदि भीतर नहीं मुड़ा तो उसके जीवन में रस नहीं रहेगा। कोरोना ने न जाने कितने लोगों को बोर और उदास कर दिया है। 


नन्हा आया तो उनके भावी नये पड़ोसी बैठे थे। उन्होंने अपने घर के बारे में कई रोचक बातें बतायीं। उनका घर दुमंज़िला होगा, जिसमें स्वीमिंग पूल होगा और छत पर एक से अधिक बगीचे। होम थियेटर तथा एक बड़ा सा मंदिर। उनके सपनों का घर जब तक बन कर तैयार नहीं जाता, उन्हें शोर तथा अन्य असुविधाएं झेलनी पड़ेंगी, इसके लिए वह शुरू से ही क्षमा माँगने आये थे। 


सुबह सवा चार बजे नींद खुली। समय की धारा बहती जा रही है। वह नींद और सपनों में वक्त गुज़ार देते हैं अथवा तो इधर-उधर के कामों में। सुबह टहलते समय भ्रमण-ध्यान किया। शीतल पवन चेहरे को सहला रही थी, आकाश में तारे चमक रहे थे और वातावरण पूर्णतया शांत था। ऐसे में मन स्वतःही एकाग्र हो जाता है। आज उसने लैवेंडर के बीज बोए हैं। शायद एक हफ़्ते में पौध निकल आयें। नन्हे के भेजे हुए गमले आ गये हैं, इतवार को वह मिट्टी लेते हुए आएगा। जून ने कोकोपीट व खाद भी मँगवा दी है।नाश्ते के बाद वे वोटर कार्ड बनवाने पंचायत के दफ्तर गये, पर संबंधित महिला कर्मचारी नहीं मिली। शाम को पिताजी से बात हुई, वे तीन हफ़्तों बाद दिल्ली से घर लौट आये हैं। रास्ते का विवरण बताया, कैसे ढाबे पर रुके, पेट्रोल भरवाया, सब्ज़ियाँ ख़रीदीं। उन्हें मिले उपहारों के बारे में बताया। घर आकर वह बहुत खुश हैं। किसान आंदोलन ख़त्म होने का  नाम ही नहीं ले रहा है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी अगले चुनावों की तैयारी में अभी से लग गई है।       


Wednesday, June 9, 2021

वीर सावरकर पर फिल्म

 


आज श्री रामसुखदास जी की लिखी भगवद् गीता के अठारहवें अध्याय की व्याख्या पढ़ी। एक श्लोक में कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, जिस ज्ञान से मनुष्य पृथक-पृथक सब भूतों  में एक अविनाशी परमात्मा भाव को विभाग रहित समभाव से स्थित देखता है, उसी ज्ञान को तुझे सात्त्विक जानना चाहिए. ऐसे ही सात्विक ज्ञान को प्राप्त करना हर साधक के एकमात्र लक्ष्य होता है. जेन ऑस्टिन की पुस्तक “सेंस एंड सेंसिबिलिटी” पर बनी फ़िल्म का कुछ भाग देखा, वर्षों पहले यह पुस्तक पढ़ी थी। दोपहर को लेखन, शाम को योग, दिन इधर शुरू होता है उधर बीत जाता है। कल छोटी बहन के विवाह की वर्षगाँठ है, कुछ पंक्तियाँ लिखेगी उनके लिए। जून ने छत पर बने शेड के लिए चाइम मँगवाया है, कुछ देर में आने वाला है। 


आज छोटी बहन से बात की, कल शाम उसके यहाँ शानदार पाँच कोर्स पार्टी हुई। कुल बाइस लोग थे। दो दशक से दो वर्ष अधिक हो गये विवाह को। आज गणतंत्र दिवस पर एक कविता प्रकाशित की ब्लॉग पर। सुबह असम से एक सखी का फ़ोन आया, पुत्र का विवाह तय हो गया है, अक्तूबर में होगा। मार्च में ‘रोका’ है। परसों माँ की पुण्यतिथि है, उनके लिए भी मन में कुछ पंक्तियाँ उमड़ रही हैं।


यहाँ उनका पहला  गणतन्त्र दिवस बहुत अच्छा बीता। सुबह जल्दी उठे, आठ बजे ध्वजारोहण था। वे तैयार होकर समय से पूर्व ही पहुँच गये। सुबह ही एक छोटी सी कविता लिखी थी, उसे रिकार्ड करके व्हाट्सएप पर भेजा। पहली बार यहाँ के निवासियों से मिलना हुआ। उन्होंने अपना परिचय कराया। उसने एक कविता पढ़ी, जून को ध्वजारोहण करने का सौभाग्य मिला, उन्होंने सूट पहना था और तिरंगे का एक ब्रोच भी लगाया था कोट पर। कई लोग तो घर के वस्त्रों में ही उठकर आ गये थे। वहाँ मैसूर पाक भी बाँटा गया। लौटकर परेड देखने बैठे, पूरे मनोयोग से एक साथ पूरी परेड शायद वर्षों बाद देखी, झांकियाँ, नृत्य के कार्यक्रम, सेनानी, तथा सेना के उपकरण ! प्रधानमंत्री ने लोगों का स्वागत किया। दोपहर को नन्हा और सोनू आ गए, वे दोनों डाइटिंग कर रहे हैं, एक महीने का कोर्स है, दोनों का वजन घटा है. सबने मिलकर छत पर असम से लाया लकड़ी और बेंत का झूला लगवाया. फैमिली ट्री के लिए फोटो चुने. जून जिन्हें घर पर ही प्रिंट कर देंगे और फिर वे उन्हें फ्रेम में लगा देगें. शाम की चाय नन्हे ने बनाई, फिर सब  रॉक गार्डन में टहलने गए, घर में चल रहा सिविल का काम अगले दो हफ्ते और चलेगा. इसके बाद वे वर्टिकल गार्डन का शुभारम्भ करेंगे. कल गेस्टरूम में एसी लग रहा है, परसों बेड भी आ जायेगा, मेहमान आएं, उसके पूर्व ही उनका कमरा तैयार होना चाहिए. घर में वाटर सॉफ्टनर भी लग गया है, यहां का पानी खारा होने के कारण स्टील के नलों पर सफेद निशान बन जाते हैं. बहते हुए पानी वाली बुद्धा की जो मूर्ति पिछले हफ्ते नन्हे ने भिजवाई थी, बहुत आकर्षक है पर उसमें से पानी छलक जाता है और कमरे के फर्श भीग जाता है, उसे वापस भिजवाना पड़ेगा. 


आज शाम ‘वीर सावरकर’ पर बनी एक पुरानी फिल्म का पहला भाग देखा. देश को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारियों ने कितने कष्ट सहे हैं. आज मोदी जी व अमित शाह को कितने लोगों के अपशब्द सुनने पड़ते हैं, देश को चलाने का काम करना काँटों का ताज पहनना है. दिल्ली के चुनावों में कुछ ही समय शेष रह गया है. इस बार चुनावी मुद्दा सीएए ही है, यदि मोदी जी जीतते हैं तो उनकी साख बढ़ेगी अन्यथा भी उनका प्रभाव घट तो नहीं सकता है. भारत को उनके जैसा दृढ इच्छाशक्ति वाला प्रधानमंत्री चाहिए. योग शिक्षिका ऋषिकेश से वापस नहीं आयी है. उन्हें घर पर ही साधना का क्रम जारी रखना होगा. वह मंगल व गुरुवार को ललितासहस्रनाम व विष्णु सहस्रनाम के पाठ में वह जा सकती है, यहां महिलाओं का एक समूह उसे आयोजित करता  है. 


आज शाम को आश्रम से एक स्वयंसेवक का फोन आया और बाद में संपादक के नाम एक पत्र, जिसका हिंदी में अनुवाद करना था, शाम तक करके भेज दिया. अनुवाद का पहला सेवा कार्य करके उसे ख़ुशी हुई. अभी-अभी नन्हे का भेजा कुछ सामान आया, ऐसा सामान जिसका नाम भी नहीं सुना था, कोल्ड प्रेस जूस आदि. सावरकर की फिल्म का दूसरा भाग भी देख लिया, उनकी भविष्यवाणी सही सिद्ध हो रही है. 


आज शहर जाकर एक नई फिल्म देखी, पंगा, आजकल की लड़कियों के जीवन से जुड़ी हुई फिल्म. गुरुजी के एक ज्ञान पत्र का हिंदी अनुवाद किया.  शाम को आश्रम गए. वहीं स्थित एक भोजनालय में कल रात हुए किसी कार्यक्रम के बाद फूल बिखरे हुए थे. सजावट घर के लोग अपना सामान समेट रहे थे पर बासी फूलों की उनके लिए क्या कीमत होगी, गुलदाउदी व गेंदे के सैकड़ों फूल और मालाएं वहां बिखरी हुई थीं. गुरूजी को अष्टावक्र गीता पर बोलते हुए सुना. कितना अनोखा ज्ञान  है उनके पास, जीवन को धन्य करने वाले शब्द, ब्रह्म की सुंदर व्याख्या और उस तक पहुंचने के कितने सुंदर मार्ग ! अध्यात्म ही जीवन का सार है और परमात्मा ही जगत का सार ! 


पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, कल बच्चे आये थे, देर रात वापस गए, परसों की बात याद नहीं है, और वे पिछले जन्मों को याद करने का प्रयत्न करते हैं. आज वे सोसाइटी में स्थित एक घर से अक्की रोटी लाये, अक्की रोटी यानि चावल के आटे की रोटी ! जून कल सामान्य जाँच कराने अस्पताल जाने वाले हैं, दिन भर लग जायेगा. आज पहली बार श्लोक पाठ में सम्मिलित हुई. कई बार मन में यह विचार आया है कि सही उच्चारण करके श्लोक पाठ करना सीखे, ईश्वर ने यह इच्छा पूरी करने का सुअवसर भी दे दिया है. गुरूजी भी कहते हैं, संस्कृत के श्लोक, मन्त्र आदि का उच्चारण मात्र ही ऊर्जा को ऊपर उठा देता है. आज सासु माँ की सातवीं पुण्यतिथि है, वे ‘शांति धाम’ गए जो यहां से निकट ही स्थित एक वृद्धाश्रम है. जहां तीस महिलाएं और दस पुरुष आश्रमवासी हैं. वहां का वातावरण अच्छा था. हरियाली और साफ-सफाई थी, पर ऐसी जगहों पर एक अजीब सी उदासी भी रहती है. वह भी झाँक रही थी. न जाने किन परिस्थितियों में उन्हें घर से बाहर आश्रम में आना पड़ा हो. आश्रम के लिए कुछ सामग्री देकर व कुछ समय बिताकर वे लौट आये. 


Wednesday, May 26, 2021

पिरामिड वैली

 

नव वर्ष का नौवां दिन भी बीत गया। अभी तक  लेखन कार्य आरंभ नहीं हुआ है। भगवान बुद्ध की पुस्तक पढ़ने में ही सारा समय चला जाता है। वह ध्यान पर बहुत जोर देते हैं और शील के पालन पर भी। सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अलोभ और अक्रोध पर, साथ ही प्रज्ञा पर भी। अनुभव करके स्वयं जानने को कहते हैं न कि किसी की बात पर भरोसा करके ! जगत परिवर्तनशील है, सब कुछ नश्वर है, वस्तुओं के पीछे भागना व्यर्थ है और संबंधों के पीछे भी, भीतर की शांति और आनंद को यदि स्थिर रखना है तो अपने भीतर ही उसका अथाह स्रोत खोजना होगा। शांति और आनंद से मन को भरकर ही करुणा के पुष्प खिलाए जा सकते हैं ! किसीके पास यदि स्वयं ही प्रेम नहीं है तो वे किसी अन्य को दे कैसे सकते हैं ! पहले मन को सभी इच्छाओं, कामनाओं, लालसाओं से ऊपर ले जाकर खाली करना होगा। यशेषणा, वित्तेषणा, पुत्रेष्णा और जीवेषणा से ऊपर उठकर भीतर के आनंद को पहले स्वयं अनुभव करना होगा फिर उसे बाहर वितरित करना होगा। जगत में कितना दुख है, दुख का कारण अज्ञान है, अज्ञान को दूर करने का उपाय ध्यान है, ध्यान से ही दुख और शोक के पार जाया जा सकता है। अहंकार को मिटाकर ही कोई इस पथ का यात्री बनता है । धरती, पवन, अनल और जल की तरह धैर्यवान, सहनशील, परोपकारी और पावन बनकर ही बुद्ध ने अपने जीवनकाल में हजारों लोगों के जीवन को सुख की राह पर ला दिया था। उसे भी उसी पथ का राही बनना है। 


आज शाम आश्रम में गुरूजी को सुना, उन्होंने पहले कन्नड़ में बोला फिर अंग्रेजी व हिंदी में। उनके जवाब कितने सटीक होते हैंऔर कितने मजेदार भी, सभी को संतुष्ट करने वाले ! खुले प्रांगण में था कार्यक्रम, हजारों लोग रहे होंगे, जिन्हें गुरुजी के सान्निध्य ने आनंदित किया। । पहले भजनों का दौर चला फिर प्रश्नोत्तर का। अष्टावक्र गीता का एक श्लोक पढ़ा गया, जिसकी व्याख्या की गुरुजी ने। उन्होंने कहा, जब तक अहंकार है तब तक ही झिझक होती है, जब अहंकार नहीं रहता साधक बालवत बन जाता है। आराम बहुत हो गया, उसे अब ब्लॉग पर लिखना आरंभ करना ही होगा, भीतर से कोई बार-बार कह रहा है। नाश्ते के बाद का समय इसी काम के लिए रखा जा सकता है और दोपहर को भोजन के बाद के विश्राम के बाद का समय भी।  यदि जरूरत पड़ी तो समय और भी निकाला जा सकता है। जीवन जैसे दौड़ता ही जा रहा है, समय जो बीत गया वापस नहीं आता ! दोपहर को निकट स्थित खेत से वे सब्जी लाए व चीकू भी जिसे यहाँ सपोटा कहते हैं और बहुतायत में होता है। कल नन्हा व सोनू आए थे, व भांजा भी, वे सब पिरामिड वैली गए थे, जो बहुत सुंदर स्थान है। हरियाली और छोटी पहाड़ियों से घिरा यह विशाल स्थान सुकून से भर देने वाला है।यहाँ  दुनिया का सबसे बड़ा और दस मंजिल इमारत जितना ऊँचा पिरामिड नुमा ध्यान कक्ष है। जब वे कक्ष में पहुँचे तो कुछ लोग वहाँ पहले से ही बैठे थे, पर इतनी गहन शांति थी कि आपनी श्वास की आवाज भी सुनाई दे रही थी। कुछ देर सब उसी मौन में रहे फिर बाहर आकर फूलों के सुंदर बगीचों में।  यहाँ पर दूर-दूर से आकर लोग रहते हैं व ध्यान शिविरों में भाग लेते हैं। कल बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर एक कविता लिखी। 


आज भी वे आश्रम गए थे,आश्रम का वातावरण बहुत आनंददायक होता है। सफलता की परिभाषा बताते हुए गुरुजी ने कहा, जो व्यक्ति हर स्थिति में अपने मन की समता को बनाए रख सकता है वही सफल है।उन्होंने आज ध्यान भी कराया। कर्ताभाव जब खो जाता है तब ही ध्यान घटता है, ऐसा ध्यान जो अप्रयास घटता है। जब भीतर कोई इच्छा नहीं रहती तब ध्यान घटता है, ऐसा ध्यान जो सहज अवस्था का अनुभव कराए। जब न राग रहे न द्वेष, न कोई अपना न पराया, न भूत का पश्चाताप न भविष्य की आकांक्षा, तब ध्यान घटता है, ऐसा ध्यान जो मुक्ति का स्वाद देता है, जो शांति प्रदाता है। आर्जव, क्षमा, दया, संतोष और सत्य जब जीवन में घुलमिल जाते हैं तब ध्यान घटता है।  मुक्ति की चाह ही व्यक्ति को परमात्मा से मिलने की चाह की ओर ले जाती है। बंधन मन को दुख के सिवाय कुछ नहीं देता, आदतों का बंधन, कर्म का बंधन, अहंकार का बंधन, इच्छाओं का बंधन, अहंकार का बंधन, घृणा, क्रोध, ईर्ष्या, संदेह तथा दंभ जैसे विकारों का बंधन ! मानव के मन को कितनी बेड़ियों ने जकड़ रखा है, जो उसे दुख देती हैं पर सुख का भुलावा भी देती हैं। उसके पास आत्मा का अनंत सुख तो है नहीं, सो उसी छोटे से सुख से काम चलाना चाहता है, यह भुलाकर कि बड़ा सा दुख भी पीछे खड़ा है। स्वर्ग के लोभ में लोग नरक को चुन लेते हैं। फूलों के साथ काँटे भी मिल जाते हैं, मित्र ही शत्रु बन जाते हैं एक दिन और देह माटी बन जाती है। मृत्यु के द्वार से कोई नहीं बचता, एक दिन तो सभी को यहाँ से चले ही जाना है ! जहाँ जाना है वहाँ रहना जो सीख लेता है वह ध्यान में ही है ! आज आश्रम में रहने वाले  हाथी को भी देखा, सजा -सजाया हाथी बहुत अच्छा लग रहा था। मस्तक पर तिलक था, गले में घुंघरू थे और माला भी। कई बार गुरूजी उसे अपने हाथों से उसका आहार खिलाते हैं। वे आश्रम के मानव संसाधन विभाग की अध्यक्ष से भी मिले, अपनी रुचि बताते हुए एक ईमेल लिखने को कहा है। आश्रम के कैफे में पुस्तकों के रैक  को साफ करके किताबें ठीक से लगाईं, ऐसा ही लगा जैसे अपने घर को ही सहेज रहे हैं। आश्रम उनके घर जैसा ही है और आगे बनने भी वाला है, जब वे यहाँ नियमित काम करना शुरू कर देंगे। आज असमिया सखी का फोन आया वे लोग इसी माह आएंगे।


Wednesday, March 24, 2021

रागी की रोटी

 

आज का दिन भी सद्गुरू की वाणी के साथ प्रारंभ हुआ। गूढ ज्ञान को वह सरल शब्दों में समझाते हैं, बिल्कुल अपना मानकर। गुरू कितना महान होता है, यह कोई-कोई ही जान सकता है। शाम को वे आश्रम गए, सत्संग में भाग लिया। वहाँ भीड़ बहुत थी पर कई लोग इधर-उधर टहल रहे थे, कुछ खरीदारी कर रहे थे। ज्ञान के ग्राहक सब नहीं हो सकते, प्रेम के तो और भी कम ! जीवन का भेद जो जान लेता है वही गुरू की महिमा को जान सकता है। गुरू जीवन से परिचय कराता है ! परमात्मा ही जीवन है और परमात्मा ही गुरु के रूप में प्रकट होता है। उसने गुरू को कोटि-कोटि नमन किया ! रात्रि भोजन भी वहीं अन्नपूर्णा में ग्रहण किया, शुद्ध, सात्विक भोजन ! सुबह भांजा आ गया था, वह भी साथ गया। रास्ते में पौधों के लिए खाद व कुछ फल खरीदे। नन्हे ने फूलों की पौध लगाने के लिए एक किट भिजवाया, बीज डाल दिए हैं, आठ-दस दिनों में निकल आएंगे। बागवानी का काम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। आज पड़ोसिन ने भी एक पौधा दिया। दोपहर को एक कविता जैसा कुछ लिखा। अपने आप ही मात्रा आदि ठीक ठाक हो गई। एक अन्य लेखिका की कविता पढ़ी।  


आज पुन: आश्रम गए। वहाँ प्रवेश करते ही मन हल्का हो जाता है। गुरूजी नहीं थे आज, संभवत: अगली बार मिलें। सत्संग चल रहा था। एक स्वामी जी भजन गा रहे थे, सभी तन्मय होकर साथ दे रहे थे। कुछ विदेशी महिलाओं ने नृत्य करना भी आरंभ कर दिया। उसने दो भजनों का वीडियो बनाया, कल व्हाट्सएप पर योग साधिकाओं के ग्रुप में भेजेगी। आज लौटते समय इडली बनाने के लिए बड़ा कुकर खरीदा। आश्रम जाने से पूर्व योग कक्षा में कुछ नए आसन किए। एक घंटा कैसा बीत जाता है पता ही नहीं चलता। कल योग कक्षा में त्राटक ध्यान  किया, अच्छा लगा। उनके साथ एक और महिला आती हैं, वह भी पूरे मनोयोग से आसन करती हैं। आज घर बैठे ही साइकिल की सर्विसिंग करने वाला मकैनिक आ गया। जीवन की धारा मंथर गति से बह रही है। 


पिछले दो दिन रात को सोने में देर हुई, सो लिखने का समय नहीं मिला। आजकल सोने से पूर्व ही डायरी खोलती है वह। दिन भर का लेखा-जोखा लेकर मन जैसे खुल जाता है, खाली हो जाता है और रात्रि की नींद पहले की सी गहरी और विश्राम पूर्ण होती है। यह तमस की अधिकता है या मन का विश्राम में टिकने की कला सीख लेना, जो हो, सभी कुछ स्वीकार करना है। कल नन्हे व सोनू  के लिए साई-भाजी, ढोकला और खीर बनाकर ले गए थे, गुलदाउदी व गुलाब के दो पौधे भी। उनके विवाह की दूसरी सालगिरह थी। अपने काम में दोनों इतने व्यस्त हैं कि उन्हें भविष्य के बारे में या अपने बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता, परिवार बढ़ाने की बात का कोई जवाब नहीं दिया। वक्त को जो मंजूर होगा, वही होगा। अगले हफ्ते वह अपने एक मित्र की बैचलर पार्टी में जा रहा है, उसके बाद उसके विवाह में मध्य प्रदेश। 


पिछले दो दिन भी डायरी नहीं खोली। आजकल दिन, तिथि, महीने, समय आदि सब पहले की तरह याद नहीं रहते, शायद ध्यान हर समय उसी ‘एक’ की तरफ रहता है इसलिए ! आज का दिन कितने नए-नए अनुभवों से भरा हुआ है। सुबह वे टहलने गए, जून अक्सर यहाँ की तीन मुख्य समांतर सड़कों की बात करते हैं, उसने कहा, एक बार एक-एक करके वे उनपर जाएंगे ताकि ठीक से उसे रास्तों का ज्ञान हो जाए, जवाब में उन्होंने कहा, उसे दिशा बोध ही नहीं है। यह आलोचना वह पहले भी कर चुके हैं पर आज मन ने विद्रोह कर दिया, क्रोध किया, बाद में कुछ ही देर में सब शांत हो गया। क्रोध करते समय भीतर कोई देख रहा था कि अब क्या हो रहा है। जून शांत रहे, उनके धैर्य की परीक्षा हो गई। नाश्ते में यहाँ आकर पहली  बार ओट्स उपमा बनायी। अखबार पढ़ते समय जून ने कहा, दीदी-जीजा जी से बात नहीं हुई यात्रा से  वापस आकर, उसने फोन मिलाया तो वे कुछ नाराज लगे। उनका ही एक वाक्य याद आया, ‘जब जब जो-जो होता है, तब तब तब वह वह होना है, फिर किस बात का रोना है ? रात्रि भोजन के लिए वे यहीं की एक निवासी के यहाँ से ‘रागी’ की रोटी लाए, बहुत स्वादिष्ट थी, साथ में टमाटर वाली नारियल की चटनी भी उतनी ही स्वादु थी। महाराष्ट्र में तिकड़ी सरकार बन गई, कब तक चलेगी, कोई नहीं जानता। जीवन विविधरंगी है, शाम को आकाश के नीले रंग कैमरे में कैद किये। 


उस पुरानी डायरी में कुछ सुंदर वाक्य पढ़े -


थोड़ी सी  दर्शनिकता मनुष्य को नास्तिकता की ओर ले जाती है, गंभीर दर्शनिकता धर्म की ओर ले जाती है। 


सार्थक होती हैं वे जिंदगियाँ , जो दरिद्रता, कठिनाइयों और संघर्षों के बीच पलती हैं। ठोकरें और थपेड़े खाते हुए जो लोग मुसीबतों के पहाड़ों को तोड़कर अंतत: एक ऊंचाई पर पहुँच जाते हैं, दूसरों के लिए वे एक मशाल का काम देते हैं। 


हमें कोई देखता हो तो हम बुरा व्यवहार नहीं कर सकते। जब हम मन को अलग होकर देखते हैं तो मन कभी बुरा व्यवहार नहीं करता। 


मन से लड़ना नहीं, किन्तु मन को शुभ भावना से देखना चाहिए। 


Wednesday, March 10, 2021

मूंगफली मेला

 मूंगफली  मेला 

रात्रि के पौने दस बजे हैं। आज सुबह भी वे प्रतिदिन की तरह अंधेरे में ही टहलने गए। सुबह सोसाइटी की तरफ से बगीचे व गमलों में खाद डाली गई। ग्लैडियोली के बल्ब फूटने लगे हैं। जून को पिटुनिया लगाने का मन है। जिनके लिए  यहीं स्थित सुपर मार्केट में रेलिंग में लगाये जाने वाले दस गमलों का ऑर्डर दिया है, बालकनी में लगाएंगे।  नैनी सुबह सफाई करके नहीं गई, दोपहर को बेटी को साथ लाएगी, ऐसा कहकर। दोपहर को दोनों ने मिलकर सभी खिड़कियों के शीशे साफ किए।अब भाषा के कारण कोई समस्या नहीं होती, वह इशारों से सब समझ व समझा लेती है। 


शाम को वे एओल आश्रम जाने से पहले मैसूर रोड पर स्थित बालाजी नर्सरी गए, पर वहाँ फूलों की पौध नहीं मिली। आश्रम की नर्सरी से  फूल के दो पौधे लिए। वहाँ भीड़ बहुत थी। गुरूजी लगभग साढ़े छह बजे आए, उसके पहले भजन गाए जा रहे थे। आज गुरूजी ने डाक्टर्स तथा वैज्ञानिकों के प्रश्नों के सदा की तरह आनंदित करने वाले जवाब दिए। कुछ पुलिस अधिकारी भी उनसे मिलने आए थे।  जापान से आए एक व्यक्ति ने जल को शुद्ध करने का एक सस्ता व सरल तरीका बताया। उन्हें कुछ सर्दी भी लगी हुई थी, एक-दो बार छींक आयी। वहाँ से आकर मन कितना हल्का लग रहा है।आश्रम के कैफे में ही दोसा खाया।


रात्रि के नौ बजे हैं। नवंबर का महीना है,  कमरे में गर्मी का अहसास हो रहा है। यहाँ सर्दी का मौसम मात्र दिसंबर-जनवरी में ही होता है। दोपहर को टेलर से कपड़े ले आए, ठीक सिले हैं. लक्ष्मी नर्सरी से गुलदाउदी के पौधे लिए तथा एक स्नेक प्लांट, जो कमरे में रखा जा सकता है। आज लेखन का कोई कार्य नहीं हुआ, एक कविता पर एक प्रतिक्रिया लिखी। बड़े भाई ने पिताजी के लिए एक वीडियो बनाया है जिसमें उनकी अकेले तथा सबके साथ तस्वीरें हैं। आज मार्केट में पहली बार ‘रिलाइन्स ट्रेंड्स’ गए वे, घर ले जाने के लिए कुछ उपहार खरीदे, उनके साथ एक चादर मुफ़्त मिली, तथा कुछ कूपन भी, उन्हें आश्चर्य हुआ जितने का समान था उतना ही गिफ्ट, यह कैसा व्यापार है ! 


आज राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गये ऐतिहासिक फैसले का दिन था। सरकार ने बहुत सावधानी बरती और सबको बार-बार कहा कि फैसला किसी के भी पक्ष में हो, हिंसा नहीं होनी चाहिए; और ऐसा ही हुआ है। कई मुस्लिम संस्थाओं ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। पिताजी से बात हुई, उन्हें भी इस फैसले से खुशी हुई है। छोटा भाई आज छोटी ननद के घर गया है, वह बैंक के काम से पूरे भारत में घूमता है। शाम को एक सखी का फोन आया, अब वह उनके असम वाले कंपनी के घर में रहने वाली है। अच्छा है कि वह पुरानी नैनी को सर्वेन्ट रूम में रहने देगी। आज एओल के एक ऐप से योग साधना में सहायता ली। शाम को गुरूजी का एक सुंदर प्रवचन सुना, “फीलिंग द प्रजेन्स”, कितने सरल शब्दों में कितनी गहरी बात उन्होंने बता दी। 


आज वे मूंगफली मेला देखने गए, जिसे यहाँ पर ‘कंदले काई फरशे’ कहते हैं। बसवन गुड़ी में कार्तिक माह के अंतिम सोमवार को आयोजित होने वाला यह मेला चार सौ वर्ष पुराना है। लगभग दो किमी सड़क पर मूंगफली बेचने वाले किसान व व्यापारी अपने दुकानें लगाते हैं। मेले में अन्य दुकानें व झूले आदि भी होते  हैं। सात दिनों तक चलने वाले इस मेले में लगभग बारह से पंद्रह टन मूंगफली बेची जाएगी। ज्यादा भीड़ होने के कारण वे बीच से ही लौट आए, नन्हे का एक मित्र भी साथ था, पहले वे उसी के घर गए थे, जो उसी इलाके में रहता है। उसने बताया कि बचपन के बाद इतने वर्षों में वह आज पहली बार ही मेले देखने आया है। कभी बाद में देखेंगे यह सोचकर अपने ही शहर के दर्शनीय स्थल देखने लोग नहीं जा पाते हैं।  


उसने कालेज के दिनों की डायरी में पढ़ा, विनोबा के विचार उसने लिखे थे। ‘अध्यात्म-ज्ञान से बगावत की हिम्मत आएगी’ 


“हम देह से अलग अविनाशी, आत्मरूप हैं, परमेश्वर अंदर विराजमान है, इसी जन्म में उसका दर्शन सुलभ है, सारे जीव हमारे रूप हैं” इस अध्यात्म विचार में प्रवीण होना चाहिए। 

शिक्षण में सत्यनिष्ठा और जीवन में तपस्या की सख्त आवश्यकता है जिससे मौजूद समाज के खिलाफ बगावत करने की हिम्मत आए। जिसके अंदर अध्यात्म विद्या है उसे सारी दुनिया भी दबाना चाहे तो दबा नहीं सकती। मेरा विश्वास है कि अध्यात्म विद्या से हम जबरदस्त क्रांति कर सकते हैं। पुस्तकों से मदद अवश्य मिलती है, परंतु अगर मूल विचार मिलता है तब ही आगे की बात हो सकती है । आत्मजज्ञान ही सही ज्ञान है जिसकी सबको जरूरत है। मुख्य रूप से तीन प्रकार का ज्ञान हरेक को होना चाहिए - आरोग्य ज्ञान, नीति ज्ञान, आत्मज्ञान ! 


Wednesday, February 24, 2021

पराशक्ति


कल दीपावली का उत्सव सोल्लास सम्पन्न हो गया। नन्हे ने सदा की तरह दिल खोलकर कर उत्सव व विशेष भोज का आयोजन किया। लगभग बाईस लोग आए थे। सभी ने घर की तारीफ की। दोपहर को वह उन्हें गो-कार्ट ले गया। ड्राइविंग सीखी हुई थी सो ज्यादा परेशानी नहीं हुई। वैसे भी वह गाड़ी उलटती नहीं है। रात को सोने में देर हुई. नन्हा व सोनू भी अपने मेहमानों को लेकर बारह बजे घर पहुँचे थे । आज दोपहर वे दोनों फिर आ गए थे। घर से ही काम किया। कल भाईदूज है, उम्मीद है भाइयों को टीका मिल गया होगा। इस समय रात्रि के साढ़े नौ बजे हैं, बाहर से लगातार पटाखों की आवाजें आ  रही हैं। 


आज यहाँ  आने के बाद पहली बार वे आश्रम गए, जहाँ जाने मात्र से ही भीतर एक अनोखा सुकून मिलता है। विशालाक्षी मंडप में बैठकर कितनी ही पुरानी सुखद स्मृतियाँ भी सजीव हो उठीं। गुरूजी वहाँ नहीं थे पर उनकी मोहक तस्वीर भी उनकी उपस्थिति का अहसास करा रही थी। उनकी आँखें अपनी ओर खींचती हुई सी लग रही थीं। आश्रम के सुंदर वातावरण की कई तस्वीरें भी उन्होंने उतारीं। कुछ देर भजन में भाग लिया और कुछ खरीदारी की। गुरुजी की बहन भानु दीदी की लिखी एक पुस्तक ‘पराशक्ति’ ली, जिसमें पुराणों में वर्णित देवियों के बारे में जानकारी है, अवश्य ही पठनीय होगी।  कल एक मित्र परिवार आ रहा है, उन्हें लेकर कल फिर वे यहाँ आएंगे। कुछ देर पहले पड़ोस से पटाखे फोड़ने की आवाजें आ रही थीं, सड़क पर कागजों का ढेर लग गया है, इतना वायु प्रदूषण होता है सो अलग। यहाँ आने के बाद पहली बार ब्लॉग पर एक पोस्ट प्रकाशित की। बाहर वर्षा आरंभ हो गई है। इस कमरे के बाहर खुला बरामदा है। काफी खुला-खुला घर है यह, आकाश भी कमरे से दिखाई देता है और इस मौसम में सुबह की धूप सीधी कमरे में आती है। जीवन फिर से पटरी पर आता दीख रहा है। घर काफी व्यवस्थित हो गया है। कार्पेट अभी तक बिछाए नहीं हैं, उसके बाद यकीनन और अच्छा लगेगा। किचन में बर्तन धोने की मशीन काफी उपयोगी सिद्ध हो रही है, कपड़े धोने की मशीन भी। 


कल दोपहर मित्र परिवार आया, पति-पत्नी और कालेज में पढ़ने वाली बिटिया।  आज सुबह नाश्ते के बाद वे लोग चले गए। समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। शाम को आश्रम गए। संध्या के समय भजन का कार्यक्रम चल रहा था, वे सब भी कुछ देर के लिए वहाँ बैठ गए और सम्मिलित हुए। बिटिया ने माँ से धीरे से पूछा, वे यहाँ क्यों बैठे हैं ? उसने सुन लिया, और मुस्कुरा दी। मंदिर में बैठना या भजन गाना सबके बस की बात नहीं है और युवाओं के लिए यह बहुत मुश्किल है, जिन्हें कभी बचपन से इससे परिचित न कराया गया हो। पाँच मिनट और बैठकर वे उठ गए और आश्रम के सुंदर प्रांगण में घूमते रहे।  वापसी में खाद खरीदी, जो कल सभी गमलों में डालनी है। मौसम आज सुहावना है, दोपहर बाद वर्षा की भी भविष्यवाणी है। आज सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती है। आज से  लद्दाख व जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है। कश्मीर में हिंसा की घटनाएं बंद नहीं हो रही हैं।  भारत में आज से अठ्ठाइस राज्य व नौ केंद्र शासित प्रदेश हैं। 


आज सुबह वे इस सोसाइटी में अंगूर की खेती देखने गए फिर पिछले गेट से गाँव की तरफ निकल गए। अंगूर के बगीचे के पास तीन फ़ौवारे हैं, पानी में पड़ती हुई रोशनी के कारण सूर्यास्त का दृश्य अनुपम लग रहा था।  एक किंगफिशर देखा तथा एक अन्य लाल व काला बड़ा सा पक्षी। आज से शाम को एक घंटे की योग साधना भी आरंभ की है. उसके बाद जब संध्या भ्रमण के लिए निकले तो बच्चों की एक बड़ी सी टोली देखी, उन्होंने हालोइन की ड्रेसेज पहनी हुई थीं। वे इधर से उधर दौड़ रहे थे। 


उस पुरानी डायरी में कुछ सुंदर सूक्तियाँ उसने लिखी थीं, उस समय तो उनका क्या अर्थ समझा होगा उसे ज्ञात नहीं पर आज वे उस आश्चर्य से भर देती हैं -


स्वयं के ब्रहमत्व की अस्वीकृति अज्ञान है। 


स्वयं कभी स्वयं से अलग नहीं, किन्तु पर में दृष्टि रहने के कारण स्वयं में ध्यान नहीं रहता। 


मन में जब विकार और विचार भरे हैं, तब निराकार नहीं। 


Monday, August 31, 2020

एओल आश्रम

 आज सुबह ही वे नए घर आ गए थे. जून को दफ्तर का कुछ काम था, वह देर तक फोन पर ही रहे. नन्हा अपना दफ्तर का काम करता रहा, मजदूर अपना काम और वह योग वशिष्ठ पढ़ती रही और मोदी जी के पुराने भाषण सुने. उनका अति मोहक व्यक्तित्व था और अब भी है. उनका जैसा प्रतिभावान व्यक्ति कोई लाखों में एक होता है. शाम को वे पड़ोसी के यहाँ गए, बहुत मिलनसार हैं. जून को चाय पिलाई, उनके पुत्र ने आश्रम तक लिफ्ट दी. इस समय रात्रि के दस बजे हैं, वे एओल आश्रम में हैं. उसका कमरा नम्बर तीन सौ दो है और जून का एक सौ चौदह, पहले उन्हें कोई और कमरा  मिला था, फिर बदला और अंत में अब यह खाली कमरा  मिला है, शायद अब तक कोई आ गया हो. उसके कमरे में अभी तक और कोई नहीं है. उन्होंने सामूहिक भोजनालय में रात्रि भोजन किया, टमाटर सूप, दाल-चावल, रोटी तथा सब्जी, प्रसाद रूप में हजारों लोगों के लिए बना यह भोजन स्वादिष्ट होता है. सैकड़ों लोग इसे बनाने में अपनी सेवा देते होंगे. आश्रम में गुरूजी के जन्मदिन के उपलक्ष में कई कोर्स चल रहे हैं. बच्चों के लिए भी कोर्स है और सबके साथ वृद्धजनों के लिये भगवद गीता के प्रवचन का भी. प्लेट्स धोने का तरीका अच्छा नहीं लगा, लेकिन हजारों प्लेट्स को धोने का काम कितना कठिन होता होगा, अवश्य ही कोई साफ-सुथरा तरीका अपनाना होगा. पानी में हाथ डालकर प्लेट्स निकालते समय कैसा लगता होगा, सेवा भाव अपनी जगह है पर... जब वे अन्नपूर्णा जा रहे थे गुरूजी अपनी कार से रवाना हुए, लोगों ने उन्हें हाथ हिलाया, उन्होंने भी हाथ हिलाया. सत्संग के समय बड़े से स्क्रीन पर उनका निर्देशित ध्यान किया. कल सुबह दस बजे से कार्यक्रम है. अभी-अभी एक अन्य महिला इस कमरे में आ गयी हैं. हिंदी भाषी हैं. उनका नाम व हालचाल पूछा, उन्हें एसी उनतीस डिग्री  पर रखना है पर पंखा फुल पर, पसन्द अपनी-अपनी... नन्हे से बात की वह घर पहुँच गया है.  


रात्रि के सवा नौ बजे हैं, आश्रम के बसवा अतिथिगृह में उनका दूसरा दिन है. सुबह गुरूजी का प्रवचन सुना, गर्मी बहुत थी. टिन की छत वाला मण्टप काफी गर्म हो गया था. भगवद्गीता के पन्द्रहवें अध्याय का आधा भाग आज समाप्त हुआ, शेष भाग कल लिया जायेगा. कल प्रश्न भी पूछे जायेंगे. सुनकर कोई प्रश्न यदि सहज, स्वाभाविक रूप से उठता है मन में, तो उसका समाधान उसे भी पूछना चाहिए.  शाम के सत्संग में भी उन्होंने भाग लिया. गुरूजी ने कई प्रश्नों के उत्तर सरल शब्दों में  दिए. वे कुछ देर से पहुँचे सो बैठने के लिए कुर्सियां तब तक भर चुकी थीं. नीचे बैठना पड़ा, जून की पीठ में दर्द हो गया. उसे लगता है वह थोड़ी सी भी कठिनाई सहन करना नहीं चाहते, अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना नहीं चाहते. खैर.. सबकी अपनी-अपनी क्षमता होती है. सत्संग आरम्भ होने से पूर्व आश्रम की कैंटीन में हॉट चॉकलेट पी सीढ़ियों पर बैठकर, जैसे प्रातः भ्रमण व प्राणायाम के बाद कॉफी पी थी. अभी तीसरी महिला कमरे में नहीं आयी हैं, वह पंजाब से आयी हैं पूरे पन्द्रह दिनों के लिए. दोपहर तीन बजे वे नए घर गए, जो कार से यहाँ से दस मिनट की दूरी पर है. आज काफी काम हो गया. पूजा कक्ष में एक लकड़ी का एक सुंदर वृक्ष लगवाया, उसके पीछे प्रकाश भी है. डाइनिंग रूम में छोटी बहन की दी कुकू घड़ी लगायी, जिसमें हर घण्टे पर चिड़िया बाहर आकर बोलती है. धीरे-धीरे घर सामानों से भरता जा रहा है. 


उसने अतीत के पृष्ठ खंगाले, “ मिल गयी शांति  ! वह सोचती है उसने अच्छा किया पर उसने बुरा किया, बहुत बुरा ! जो जिसमें खुश रहे उसे वैसे ही रहने देना है. किसी के जाने से वह खुश रहेगी या उदास यह उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना यह कि उनके साथ वह कैसे रहती है. कोई कैसा भी हो उसके प्रति द्वेष भाव रखता हो या प्रेम का भाव, अपना ही तो है. फिर क्यों नहीं चुप रहती ! चुप रहना सबसे अच्छा है यदि उसके पास मधुर बोल नहीं हैं तो कड़वे बोल क्यों बिखेरती-फिरती है. ऐसे कड़वे बोल जो उसके होंठों से निकलते हैं जब उसका बदन काँप जाता है, उसके सिर में दर्द हो जाता है. 

वह सिर्फ अपने लिए जीते हैं ! दूसरों की जिंदगी में दखल देना उन्हें पसन्द नहीं, पर वे दूसरे कौन हैं ? उनका अपना परिवार ही तो. कितनी आसानी से उन्होंने कहा कि वे तो घर में मेहमान की तरह रहते हैं. ओह ! ईश्वर ! क्या फिर रिश्ते-नाते स्नेह आदि सब असत्य हैं ? 


नहीं ! नहीं ! नहीं ! यह यदि  असत्य है तो जीवन क्या है ? जीवन एक खोखली अनुभूति नहीं है फिर ! 

उस वक्त उम्र कच्ची थी, सो मेहमान की तरह रहने का अर्थ समझ में नहीं आया था. जीवन की समझ नहीं थी, आज पढ़कर हँसी आ रही है, अज्ञान के हाथों किस तरह छला जाता है मानव. 


Friday, March 8, 2019

चुनार का किला



सुबह-सुबह ही वे चार जन इनोवा से चुनार के लिए रवाना हुए. बनारस से चुनार के लिए कई रास्ते हैं पर उन्होंने वह चुना जो पाइप के पुल को पार करके किले तक ले जाता है. शहर से बाहर निकलते ही खेतों के मध्य से गुजरती हुई कार उन्हें मनमोहक दृश्य दिखाने लगी. आगे चलकर दुर्गा देवी का मन्दिर आया फिर शीतला माता का. पहले वे गाँव के भूतपूर्व सरपंच के घर पर रुके, आगे की यात्रा में वे साथ जाने वाले थे. उनके वृद्ध पिताजी बाहर ही बैठे थे. घर पक्का था तथा बैठक में सोफा आदि पड़ा था. उनके द्वारा परोसे मालपुए ग्रहण किये तथा नगरो बाँध की तरफ रवाना हुए. अब रास्ता रेतीला हो गया था. दोनों तरफ सूखी धरती और पत्तों से विहीन वृक्ष नजर आ रहे थे. वे सिद्धनाथ की दरी पर पहुंचे जहाँ पत्थरों की विशाल चट्टानों पर चढ़ते-उतरते मुख्य स्थान पर पहुँचे जहाँ गुफा में शिव का मन्दिर है. बरसात में यहाँ झरना बहता है पर इस वक्त सब सूखा हुआ था. गर्मी बहुत थी पर हवा चल रही थी. उन्होंने आधा घंटा वहाँ बिताया फिर स्वामी अड़गड़ानंद जी के आश्रम की ओर रवाना हुए. छोटे-बड़े वृक्षों से घिरा यह आश्रम अपनी गौशाला और बड़े हॉल के कारण प्रसिद्ध है. यहाँ हजारों की संख्या में एक साथ बैठने की व्यवस्था है. स्वामी जी इस वक्त आश्रम में नहीं थे, उनकी पुस्तक ‘यथार्थ गीता' पढ़ने की मन में आकांक्षा जगी, जिसे सरपंच जी ने पूरा करवाया. आश्रम में खिचड़ी व चूरा का प्रसाद मिला. वहाँ से चुनार के किले की तरफ रवाना हुए. रास्ते में गाँव की एक चाय की दुकान पर रुककर चाय पी तथा सरपंच जी को उनके घर उतारकर वे किले की और बढ़े. गंगा नदी पर पीपों का एक पुल बनाया गया है, जिस पर से पर जाना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव था. प्रवेश द्वार से अंदर आते ही एक वृक्ष के नीचे एक महिला रजिस्टर लेकर बैठी थीं, जिसमें उन्होंने अपने नाम लिखे. ननदोई जी पहले आ चुके थे, सो गाइड को नहीं लिया, उन्होंने सारा किला घुमाया और इसके इतिहास से भी परिचित कराया. इस किले का जिक्र ‘चन्द्रकान्ता’ में मिलता है. इसमें गहरी सुरंगें हैं, कुएं हैं, कैदियों को रखने के लिए भुतहा कैदखाने हैं. काफी डरावना इतिहास है यहाँ का. चमगादड़ों का बसेरा है. किले की हालत जर्जर हो रही है. कुछ समय पहले ही इसे पुरातत्व विभाग को सौंपा गया है. धूप तेज होती जा रही थी सो वे शीघ्र ही वापस लौट पड़े और मडुआडीह होते हुए चौकाघाट स्थित निवास पर पहुंच गये.   

कल शाम तैयार होते-होते उन्हें देर हो गयी थी और रात्रि साढ़े आठ बजे के लगभग विवाह के स्वागत स्थल पर पहुँचे. जून के एक पुराने मित्र के दो पुत्रों के विवाह का रिसेप्शन था. मित्र अब इस दुनिया में नहीं हैं पर उनकी पत्नी ने बड़े स्नेह से बुलाया है. द्वार पर सुंदर श्वेत पुष्पों की झालरें लगी हुई थीं. भीतर जाकर मंडप दो भागों में बंट जाता था. दांयी तरफ पुरुषों के लिए और बायी तरफ महिलाओं के लिए. हॉल के अंत में स्टेज बना था, सामने कुर्सियां रखी थीं. एक तरफ भोजन के स्टाल लगे थे. कुछ देर में दोनों दुल्हनें गुलाबी लहंगों में सजी हुई लायी गयीं. मित्र की पत्नी बेहद खुश थीं कि इतनी दूर से वे उनकी ख़ुशी में सम्मिलित होने आये थे. दावते वलीमा में शाकाहारी भोजन एक अलग स्थान पर परोसा गया था, जो उन्होंने ग्रहण किया. आज संध्या जून के एक अन्य पुराने प्रिय मित्र मिलने आ रहे हैं. वाराणसी की हवा में कुछ अलग बात है, यहाँ होटलों के नाम भी काफी आध्यात्मिक हैं, समर्पण होटल, अपना होटल, हनुमान चाय, कानूबाबू होटल आदि, मोदी सरकार के आने के बाद से सुबहे-बनारस कार्यक्रम आरम्भ हुआ है, जिसमें हर दिन कोई नया कलाकार अपनी कला की प्रस्तुति रखता है.

Tuesday, September 11, 2018

ब्रह्मपुत्र का पाट



पूरे पांच दिनों के बाद कलम उठायी है. परसों शाम इस समय वह गोहाटी के आर्ट ऑफ़ लिविंग आश्रम जा रही होगी, या हो सकता है पहुँच ही चुकी हो. तैयारी लगभग हो गयी है. आज ओडोमॉस भी मंगायी, जून ने कल याद दिलाया था. उनकी ट्रेनिंग अच्छी चल रही है. आश्रम का जीवन शांतिदायक होगा, चाहे आरामदायक न हो. अल्प साधनों में रहना सीखना हो तो आश्रम में ही सीखा जा सकता है. बंगलूरु में उनका घर सम्भवतः अगले तीन वर्षों में भी बनकर तैयार न हो सके तो वे आश्रम में ही रहेंगे, अवश्य वहाँ ऐसा कोई स्थान होता होगा, आखिर इतने बड़े आश्रम को चलाने के लिए कितने सारे लोग वहाँ रहते ही होंगे. अभी कुछ देर में सेक्रेटरी आएगी, क्लब का कुछ कार्य है. उसने एक सदस्या के बारे में बताया कि वह दुखी है, एक सीनियर सदस्या ने उसे कड़े शब्द कहे. इंसान का दिल बहुत कोमल होता है, फूल से भी नाजुक, जरा सी बात पर कुम्हला जाता है. आत्मा का अनुभव किये बिना मन को संभालना बहुत मुश्किल है, आत्मा के पास अपार शक्ति है. उस दुखी महिला को समझाना पर आसान नहीं है, वह भावुक है और ज्यादा सकारात्मक भी नहीं, काम बहुत मन से करती है. उसको फोन किया पर उसने उठाया नहीं. वह उसके लिए प्रार्थना ही कर सकती है.

आज दोपहर मृणाल ज्योति गयी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी की मीटिंग थी. वापस आकर क्लब की कुछ सदस्याओं को फोन किये नयी कमेटी के कार्यकर्ताओं के चुनाव के लिए, कुछ मान गयीं, कुछ ने मना कर दिया. सेक्रेटरी भी कल कुछ अन्यों को फोन करेगी. सुबह जगने से पहले विस्मित कर देने वाला अनुभव हुआ, वह जिस वस्तु या जीव की कल्पना करती थी, वह प्रकट हो जाता था जैसे बिलकुल सजीव हो. उनके मन में कितनी शक्ति छुपी है. यह अनुभव रोमांचकारी था, पिछले दिनों और भी कई विचित्र अनुभव हुए, पर लिखे नहीं और अब याद नहीं हैं. बड़े भाई का स्वास्थ्य अब ठीक है, पर उन्हें कमजोरी है. जून अपने प्रशिक्षण से प्रसन्न हैं, नन्हे ने भी एक ट्रेनिंग ली कि लोगों को कैसे नियुक्त किया जाये. बिना ट्रेनिंग के वह कितने ही कालेजों में कम्पनी के लिए छात्रों का इंटरव्यू लेने गया है. कह रहा था, इस ट्रेनिंग से काफी सुझाव मिले हैं. वह भी एक किताब पढ़ रही है जो एक ट्रेनर ने लिखी है, इस तरह वे तीनों ही कुछ नया सीख रहे हैं. अभी वह रसोईघर में गयी और नैनी को फ्रिज में बर्फ की ट्रे रखते देखा, इसका अर्थ हुआ उसने बिना कहे फ्रिज से बर्फ निकाली, अवश्य ही वह अपनापन महसूस करती होगी. उसने सोचा, अच्छा है.

इस आश्रम में यह पहली रात है. पिछले माह जब यहाँ के स्वामीजी उनके स्थान पर गये थे, तब इस कोर्स के बारे में पता चला था, पर अभी तक ज्ञात नहीं है कि कल सुबह कोर्स आरंभ भी हो पायेगा या नहीं. कम से कम बीस प्रतिभागियों के होने पर ही होगा और आज की तिथि में केवल ग्यारह ही हैं. टीचर भी कोलकाता से आई हैं. उसकी पीठ में शायद दिन भर में एक भी बार न लेटने के कारण दर्द हो रहा है. कुछ पंक्तियाँ लिखकर सोना ही अगला कार्य है. सुबह सवा नौ बजे वह घर से निकली थी, दोपहर सवा दो बजे गोहाटी में रहने वाली एक सखी के यहाँ पहुंच गयी, दोपहर का भोजन और कुछ देर विश्राम के बाद पौने चार बजे वहाँ से विदा लेकर इस आश्रम में पहुंची. यहाँ पर सब सुविधाएँ हैं पर गर्मी के कारण तथा उस समय बिजली न होने के कारण कुछ देर परेशानी हुई. आसपास का दृश्य बहुत सुंदर है. कल प्रातःकाल और तस्वीरें लेगी. ब्रह्मपुत्र का चौड़ा पाट सागर सा विस्तीर्ण लगता है. शाम को सभी ने मिलकर गुरूजी का जन्माष्टमी के अवसर पर सीधा प्रसारण देखा, फिर भोजन किया. बाद में मंदिर में कृष्ण पूजा हुई, प्रसाद भी मिला.

सुबह के सात बजे हैं. एक सुहावनी सुबह है. वह आश्रम के कमरे में है. बहर वर्षा हो रही है. सुबह पांच बजे ही नींद खुल गयी. स्नान किया, फिर कुछ देर टहलने गयी. तब वर्षा नहीं थी. कुछ देर नदी की तरफ मुख करके एक कुर्सी पर बैठकर ध्यान किया. बहुत अच्छा अनुभव था. जून से बात की, अब कुछ देर में रूद्र पूजा में भाग लेने मन्दिर जाना है.