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Tuesday, July 14, 2026

शरत् चन्द्र का उपन्यास "दत्ता'

शरत् चन्द्र का उपन्यास "दत्ता'

अभी-अभी नन्हे से बात हुई, वे लोग अस्पताल से वापस घर जा रहे थे, सोनू का आपरेशन ठीक हो गया है। आज सुबह ही वे लोग अस्पताल गये थे, छोटा सा ही ऑपरेशन था।परसों वे लोग आयेंगे और कल नूना और जून उनसे मिलने जाएँगे। शाम को एक स्थानीय मित्र दम्पत्ति मिलने आये, उनके साथ ‘केरल स्टोरी’ देखने का कार्यक्रम बन गया।इस फ़िल्म के पक्ष और विपक्ष में कितनी ही बातें पिछले दिनों उन्होंने सुनी हैं, अब देखकर स्वयं ही निर्णय लेना उचित होगा। बातों-बातों में उन्होंने बताया,विदेश से उनकी बहन आने वाली हैं, जिन्हें बहुत अच्छी हिंदी आती है, उनसे भेंट करायेंगे।पापाजी से आध्यात्मिक चर्चा हुई। सुबह जून डेंटिस्ट के पास गये थे, वापसी में नर्सरी से वही हरे पुष्प वाला सुंदर पौधा लाए, जिसने उस दिन मन मोह लिया था। 

सुबह वे सोनू से मिलने गये थे।वह बहुत हिम्मती है, काफ़ी ठीक लग रही थी।आज शाम का भोजन जल्दी हो गया, सो सोने से पूर्व पर्याप्त समय मिल गया है, वह ऑडिबल पर बंगला भाषा के सुप्रसिद्ध लेखक शरत चन्द्र चटर्जी की पुस्तक ‘दत्ता’ का हिंदी अनुवाद सुन रही है। बहुत प्रभावशाली पुस्तक है।अभी-अभी व्ह्टासऐप पर आये एक संदेश से पता चला, मृणाल ज्योति की अध्यक्षा को असम के एक छोटे क़स्बे में स्कूल की शाखा खुलने के उपलक्ष्य में हुए कार्यक्रम में कंधे में चोट लग गई है। उसने फ़ोन करके उनका हाल पूछा, डाक्टर ने कुछ दिन आराम करने के लिए कहा है।  

आज शाम को बड़ा भांजा आया, साथ में उसकी पत्नी, छोटी साली और सासु माँ भी थीं। शाम की चाय सबने साथ पी फिर रात्रि भोजन भी। नन्हा अपने कुक से पालक-पनीर व राजमा बनवाकर लाया था, शेष भोजन नूना ने बनाया। लच्छेदार पराँठे भी नन्हे ने बनाये, उसके लिए आटे के घी लगे विशेष पेड़े बनाकर लाया था।कुल मिलाकर पार्टी बहुत अच्छी रही। रात को ही वे सब लौट गये। जून ने उसके साथ मिलकर रसोईघर पूरी तरह साफ़ करवा दिया। सुबह की चाय बनाते समय उन्हें किचन स्वच्छ चाहिए। दही लगाने व बादाम भिगोने का काम भी उन्होंने अपने ज़िम्मे ले लिया है। 

आज सुबह नाश्ते के बाद वे नन्हे के घर गये और शाम सात बजे घर लौटे। लंच के बाद नन्हा उन्हें एक विशाल, सुंदर थियेटर में ‘माउस ट्रैप’ नाटक दिखाने ले गया, जिसकी टिकटें उसने पहले ही ख़रीद ली थीं।अगाथा क्रिस्टी के सत्तर साल पुराने मर्डर-मिस्ट्री नाटक का हिन्दी रूपातंरण ! बहुत अच्छा था।कहानी पूरे समय बाँधे रखती है।नाटक के पात्र हैं, बर्फ में घिरे एक गेस्टहाउस में सात अजनबी व्यक्ति और एक जासूस, जिसे एक हत्यारे का पता लगाना है।  आज पापाजी से बात नहीं हो पायी। छोटा भाई आया हुआ है, इसलिए उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही होगी, भाभी एक हफ़्ते के लिए बिटिया के साथ एडिनबर्ग गई है। 

आज सुबह मौसम अति अनुकूल था, वे टहलने गये तो हल्की सुवास हवा में भरी थी। आम के बगीचे में एक व्यक्ति रात को हुई वर्षा के कारण नीचे गिरे आम उठा रहा था। बहुत दिनों बाद नाश्ते में जून ने दलिया बनाने को कहा।आज दिन में मई महीने का नवनीत का अंक पढ़ना आरंभ किया है। इस बार गावों की बदलती हुई तस्वीर को मुख्य विषय बनाया गया है। गाँव जो शहर बनाना चाहते हैं, पर बन नहीं पाते। किसानों को श्रम करने का अभ्यास नहीं रह गया है, बैलों का भी कोई सम्मान नहीं रह गया है। संध्या के समय सोमनहल्ली की तरफ़ गये, पर रास्ता कीचड़ से भरा था, वे पास वाले लेआउट में ही टहलते रहे। गुलमोहर व अजार के अनेक वृक्ष लाल व बैंगनी फूलों से भरे हुए थे। इस समय रात्रि के आठ बजे हैं। पिछले आधे घंटे से वर्षा हो रही है।आँधी-तूफ़ान व तेज वर्षा के साथ कुछ ओले भी गिरे। वह कुछ देर बालकनी में टहलते हुए ‘हॉट स्टार’ पर वैष्णो देवी की कथा सुनती रही। त्रिकूट पर्वत की गुफा में रहकर उनकी तपस्या और उनके अनेक कृत्यों पर आधारित कथा बहुत रोचक और अच्छी लगी। वर्षा अब थम गई है। मोदी जी जी-७ की बैठक में भाग लेने जापान गये हैं। आस्ट्रेलिया में क्वार्ड मीटिंग है, वह फ़िजी भी जाएँगे, पापुआगिनी जहाँ की राजधानी है। बाईडेन कहते हैं, उन्हें मोदी जी की लोकप्रियता से रश्क होता है। 

कल रात वह वैष्णो देवी की कथा सुनकर सोयी थी। रात को स्वप्न में देवी का नन्हा रूप अपनी हथेली में देखा। जो पहले प्रकट होती हैं फिर कुछ समय बाद स्वयं ही अंतर्ध्यान हो जाती हैं। उनके बचपन की कथा बहुत सुंदर है। सुबह देखा, रात की आँधी-वर्षा के कारण कुछ गमले गिरे हुए थे। छत पर रखी कुर्सियों के कुशन भी भीग गये थे। आज दोपहर “यह मेरी फ़ैमिली’ का एक अंक देखा।इसमें नब्बे के दशक की रोचक कहानी है। शाम को वे टहलने गये तो आकाश पर बादलों के सुंदर रूप व आकार बन गये थे, मन विस्मय से भर गया, अनायास ही कुछ तस्वीरें उतारीं।आज मोदी जी द्वारा आस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों को दिया जाना वाला संबोधन सुना, भारत के प्रति कितना गौरव है उनके मन में। 

आज उन्होंने ‘द केरला स्टोरी’ देख ली। तीन लड़कियों का धर्म  परिवर्तन करके आईएसआईएस में जाने के लिए प्रेरित करने के हथकंडों के बारे में यह फ़िल्म बनायी गई है। कट्टर पंथियों की हिंसात्मक प्रवृत्तियों को दर्शाती यह फ़िल्म इस्लाम के एक भयानक रूप को दिखाती है। पता नहीं इसमें कितनी कल्पना है और कितनी हक़ीक़त। एक परिचित मित्र दंपत्ति भी उनके साथ गये थे। उसके बाद दोपहर का भोजन भी बाहर हुआ, सांते रेस्तराँ में। वापस आकर कुछ देर और बैठकर उन्होंने बातचीत की, कभी भविष्य में वे साथ-साथ कश्मीर जा सकते हैं, ऐसा भी विचार हुआ। शाम को नन्हे के यहाँ गये, उनके सोफ़े के लिए नये कुशन बनवाये थे, उन्हें देने और सोनू का हालचाल भी लेना था। पापा जी से बात हुई, बड़े भाई उनके पास आये हुए हैं। पता चला, कल रात आँधी-तूफ़ान के बाद बिजली चली गयी थी, जो आज दोपहर बाद तीन बजे आयी। मौसम की मार गाँव हो या शहर, अतीत हो या वर्तमान, हर जगह, हर काल में झेलनी पड़ती है।


Thursday, May 14, 2026

पिनोकियो

पिनोकियो 


आज असम में ‘विश्वकर्मा पूजा’ मनायी जा रही होगी, उन्होंने ऑनलाइन ही मना ली, नूना ने कविता पोस्ट की, जून ने व्हाट्सएप पर सभी को शुभकामनाएँ भेजीं।।आज पहली बार वे दोनों पिछली लेन के केरल वासी एक पड़ोसी परिवार के यहाँ गये।वे लोग हिन्दी अच्छी तरह जानते हैं। इसी वर्ष वे मेघालय जाने वाले हैं, कई बातें जानना चाहते थे, जून ने उन्हें उपयोगी जानकारी दी।आज मोदी जी का जन्मदिन है, देश भर में कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। वह देश के प्रथम सेवक हैं, देश के कल्याण के लिए पूर्ण समर्पित नेता ! आज उसने आई पैड पर जर्मन विद्वान फ़्रेडेरिक मैक्स मुलर की एक अति प्राचीन पुस्तक पढ़नी शुरू की है, ‘व्हाट वी कैन लर्न फ्रॉम इंडिया’। जो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में भारतीय सिविल सेवा के उम्मीदवारों को दिये गये उनके भाषणों का संकलन है। ब्रिटिशर्स के मनों से भारत के प्रति पूर्वाग्रहों को दूर करना और भारत की प्राचीन संस्कृति को उजागर करना ही संभवत: उनका उद्देश्य था। 


आज बच्चे साढ़े ग्यारह बजे आ गये और शाम को सात बजे गये।नूना ने ‘कैनवा’ पर कार्ड बनाना सीखा, जो बहुत ही रोचक ग्राफ़िक डिजाइनिंग प्लेटफ़ार्म है, यहाँ कोई आसानी से पोस्टर, कार्ड आदि बना सकता है। कल उसे डेंटिस्ट के पास जाना है।छोटी भांजी से बात हुई, वह बैंगलोर आ रही है, उसके तीन नन्हे दुलारों से मिलकर बहुत अच्छा लगेगा।


डेंटिस्ट ने कहा, नया दाँत इंप्लांट करना पड़ेगा, काफ़ी खर्च होगा व समय भी लगेगा।आज इंग्लैंड की महारानी का अंतिम संस्कार हो गया। 


आज सुबह वे रक्त जाँच के लिए गये, कल दोपहर को रिपोर्ट मिल जाएगी, अगले सोमवार को डेंटिस्ट के पास जाना है। उडिपी में नाश्ता किया, कुछ देर आश्रम में धूप में बैठे और ध्यान किया। वापस आकर उसने दाँतों पर एक कविता लिखी, जो सुबह से ही मन में आ रही थी। हिंदी में दाँतों पर अनेक मुहावरे हैं, एक से बढ़कर एक। बहुत दिनों बाद शाम को ‘विष्णु सहस्त्रनाम जप’ में सम्मिलित होने गई। एक नन्हा सा बच्चा पूरे समय बैठा रहा, शांति से सुनता रहा और बाद में प्रसाद भी लेकर आया। दो हिंदी भाषी महिलाएँ भी मिलीं। शुक्रवार को ‘ललिता सहस्त्रनाम’ का जप होगा।

 

आज रक्त जाँच की रिपोर्ट आ गई है।प्रिडायबिटीज़ के लक्षण हैं। विटमिन डी भी कम है। पहले तो मन कुछ विचलित हुआ, फिर पढ़ा भारत में लगभग २५-३० प्रतिशत लोगों को मधुमेह है, वह भी उनमें एक से एक हो सकती है, यदि समय पर कदम नहीं उठाये। भोजन के बाद या फ़ास्टिंग शुगर टेस्ट नहीं करवाया था, बल्कि HbA1c टेस्ट करवाया था, जो पिछले तीन महीनों के शुगर लेवल को बताता है। कल से खाने में कुछ परिवर्तन करने हैं। दोपहर को सोना भी बंद करना होगा। व्यायाम अधिक करना होगा। आज सुबह समय से उठे थे, प्रातः भ्रमण के बाद छत पर आसन भी किए, हवा शीतल थी। सूर्योदय देखते हुए सूर्य नमस्कार करना तथा धूप की चमक चेहरे पर महसूस करते हुए प्राणायाम करना बहुत ही आनंददायक था।जून को आज दस दिनों  बाद अपनी गाड़ी वापस मिल गई। सुबह वे सब्ज़ी लेने गये थे, अब अधिक महँगी हो गयीं, ऐसा उन्हें लगा।


आज शाम को पाँच बजे भांजी आयी थी अपने तीनों बेटों के साथ, उसके सास-ससुर भी साथ थे। नौ बजे से कुछ पहले वे लोग चले गये, बच्चों को नींद आ रही थी। उनका छोटा सा साथ अच्छा लगा, नाश्ते के बाद उन्हें मैंगो पार्क घुमाने ले गये, झूला पार्क भी। आम के बगीचे में बच्चे बहुत ही सहजता से पेड़ों पर चढ़ गये।झूलों पर भी बहुत मज़ा किया। घर लौटे तो नन्हा उन्हें कंप्यूटर गेम खिलाता रहा। नन्हा और सोनू, बच्चों की पसंद के बहुत से व्यंजन बनाकर लाए थे। 


आज महीनों बाद दीर्घ सुदर्शन क्रिया करने का अवसर मिला। अच्छा लगा। दोपहर को भांजी के आगमन पर एक कविता लिखी और भेजी। उन्हें यकीनन अच्छा लगा होगा पढ़कर, पापाजी को भी पसंद आयी। कल से नवरात्रि का उत्सव आरम्भ हो रहा है।


मोह व आसक्ति आदमी को बहुत दुख देते हैं। आज सुबह से इसका अनुभव हो रहा है, हुआ है। अहम् और ममता दोनों ही आत्मा को अनुभव करने में बहुत बड़ी बाधा हैं। परमात्मा की अखंड समीपता का अनुभव करने के लिए मन को राग-द्वेष से मुक्त रहना होगा। जिस वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति से वे जितना अधिक सुख चाहते हैं, वह उतना ही दुख का कारण भी बनता है। आज शाम को मृणाल ज्योति की  एक मीटिंग में भाग लिया। उससे पूर्व अनुवाद कार्य।


आज शाम वे आश्रम गये थे। ‘कला अर्पण’ के अन्तर्गत कुछ कार्यक्रम देखे। गायन व नृत्य दोनों ही बहुत उच्च कोटि के थे, पर सबसे अच्छा लगा सूर्यास्त का दर्शन,  झुंड में उड़ते हुए पक्षी अपने  नीड़ों की ओर जा रहे थे। हवा शीतल थी और आकाश सिंदूरी ! रुद्र पूजा अभी शुरू नहीं हुई थी, गुरुजी नहीं आये थे, पर जून को घर आने की जल्दी थी, सो वे सात बजे तक घर आ गये। शेष कार्यक्रम यू ट्यूब पर देखा। 


सुबह दस बजे वे डेंटिस्ट के पास जाने के लिए निकले, ग्यारह बजे पहुँच गये। अनुभव अच्छा रहा। ओटी में जाने से पूर्व पीने के लिये ग्लूकोज़ दिया गया। पूरी प्रक्रिया में लगभग दो घंटे लगे।पहले एक दाँत निकाला, फिर दो प्रत्यारोपण किए। अड़तालीस घंटे तक सावधानी बरतने को कहा है। अभी तक तो कोई दर्द नहीं है। डेंटिस्ट के यहाँ से वे नन्हे के घर चले गये, वही खिचड़ी व सब्ज़ी खायी।सोनू ने रात के लिए भी कुछ दे दिया है। उसने बहुत ध्यान रखा। 


आज गुजरात में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन हुआ। सात साल के बाद ये खेल हो रहे हैं, जिसमें सात हज़ार से अधिक खिलाड़ी छत्तीस अलग-अलग खेलों में भाग लेंगे।उसके दाँत में दर्द नहीं है, सूजन अभी भी है। दिन भर घर में ही रहे, विश्राम किया, कल भी ज़्यादातर आराम करना है, परसों से सामान्य दिनचर्या शुरू हो जाएगी।  


सितम्बर का अंतिम दिन ! इस समय दायें गाल में सूजन कम है। आज शाम को टहलने भी गये। पापाजी से बात हुई, बड़े भाई उनके पास आये हुए हैं, उन्होंने ‘पिनाकियो’ फ़िल्म दिखायी पापाजी को। जिसमें एक लड़का पिनाकियो, जब भी झूठ बोलता है, उसकी नाक लंबी हो जाती है। इस चरित्र को लिखा था इटली कार्लो कोल्लोडी ने।उसने आज सुबह-सुबह लिखी अपनी एक कविता प्रकाशित की। जिसका भाव था, वे जीवन का सत्य जानते हैं, पर अपना समय व ऊर्जा व्यर्थ ही नष्ट करते हैं। बहुत दिनों से उनके पांडिचेरी जाने की बात चल रही थी, आख़िर तय हो गया, चार दिन बाद वे जा रहे हैं। आज वहाँ के दो-तीन वीडियो देखे। वहाँ के दर्शनीय स्थलों में बहुत सुंदर समुद्री तट हैं, जो इसे पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाते हैं। फ़्रेंच कालोनी, ऐरोविल आश्रम, महर्षि अरविंद आश्रम तथा कई चर्च भी हैं।  प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक जंगल भी है। अवश्य ही उन्हें वहाँ बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। 


इतने दिनों से नूना इतनी सारी दवाइयाँ ले रही है। उनका असर आज पता चल रहा है, पेट में हलचल है। टहलना, व्यायाम कुछ भी तो नहीं हो रहा है। दो दिन बाद या फिर परसों से ही व्यायाम शुरू किया जा सकता है। सुबह छोटे भाई का फ़ोन आया, छोटी भतीजी का आज ‘रोका’ होने वाला है। कल बापू का जन्मदिन है शास्त्री जी का भी, एक कविता लिखी है। 


Saturday, May 2, 2026

इचिगो इची

इचिगो इची

आज भी नूना ने गुरु स्टोरीज़ सुनीं। जितना सुनो, उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती जाती है, उनके शिष्यों के प्रति भी; जो उनके प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। गुरुजी एक माँ की तरह उनका ध्यान रखते हैं। उसका मन भी उनके प्रति भक्ति से भर गया है। अहंकार गल रहा है, निःस्वार्थ होने का, अपने से अधिक औरों को महत्व देने का भाव जग रहा है। मानव होने का अर्थ यही है कि वे अपने स्वरूप को जानें और एक बार जान लेंगे तो औरों को भी उस आनंद के मार्ग पर लायें। परमात्मा उनके लिए इतना आयोजन कर रहा है, नाना प्रकार के फल, फूल, सूरज, चाँद, हवा, जीवन, श्वासें उसने दी हैं। उसके प्रति कृतज्ञता का भाव जगाते हुए उन्हें पूर्ण आनंद का अनुभव करना है। पूर्ण आनंद में होने पर वे नम्र हो जाते हैं। इस दुनिया में उनके छोटे मन के सिवा सभी तो परमात्मा का रूप हैं, जब  वे किसी का ध्यान रखते हैं तो एक तरह से अपनी आत्मा का ही विस्तार करते हैं। वे स्वयं का ही फैलाव तो इस जगत में देखते हैं। वे जो स्वयं ही हैं, उसका ध्यान क्या रखना, क्योंकि जिस विशाल मन से वे अन्यों का ध्यान रखते हैं, वही उनकी भी देख-रेख करता है। 


अभी कुछ देर पहले नन्हा वापस गया है।आज सुबह उन्होंने नयी मिक्सी लगायी थी। बॉश की मिक्सी वह ले गया है। नन्हे की मिक्सी उसका कुक ले जायेगा, जैसे उनकी पुरानी मिक्सी नैनी ले गई थी।जून ने छोटी बहन का किट तैयार करने में मदद की, जो वह आश्रम ले जाएगी। आजकल गुरु स्टोरीज़ सुनते रहने से मन कैसा हल्का-हल्का सा बना रहता है। संसार का मालिक जब उनका अपना है तो कैसी चिंता और कैसा भय ! गुरुजी के साथ रहने वाले लोग कितने समर्पित हैं। शाम को पाँच बजे पापाजी जून के फ़ोन की प्रतीक्षा करते हैं, आज भी उनसे ‘शांडिल्य भक्ति सूत्रों’ पर चर्चा हुई।  


आज एक वरिष्ठ ब्लॉगर ने उसके ब्लॉग के बारे में उससे कुछ जानकारी माँगी है। ब्लॉग का लिंक, कब बना, उद्देश्य क्या है, विधा और किसी एक पोस्ट का लिंक भेजने को कहा है। उसे लगता है, ब्लॉग बनाने का उद्देश्य रचनाओं को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करना व अनुभवों को सबके साथ बाँटना है। ब्लॉग का नाम “मन पाये विश्राम जहाँ” ही इसकी गवाही देता है। उसकी आध्यात्मिक यात्रा ही उसके लेखन की कहानी है। शेष तीनों ब्लॉग्स में भी वही है और ‘कुछ रिश्ते मीठे से में’ जो कविताएँ हैं, वे प्रेम का प्रस्फुटन ही तो हैं ! इसलिए उद्देश्य तो यही हुआ, भीतर जो आनंद पाया है, जो उल्लास, उमंग है, उसे फैलाना है। कविता इसका सशक्त माध्यम है। जब गुरु जीवन में आते हैं, जीवन को एक दिशा मिलती है। वर्षों पहले नन्हे ने ही उसका ब्लॉग से परिचय कराया, उसने ही ब्लॉग बना दिया था। धीरे-धीरे पाठक मिले, अन्य रचनाकारों से परिचय हुआ। कल सुबह सात बजे उसे सुदर्शन क्रिया के लिए जाना है। 


उसने ये सारी बातें लिखकर भेज दी हैं। आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षकों की कहानी सुनकर ही यह प्रेरणा मन में जगी कि उन अनुभवों को कागज पर लिख ले। ‘काव्यालय’ के संपादक को गुरुजी के दो वीडियो भेजे हैं, अवश्य ही उन्हें पसंद आयेंगे। मृणाल ज्योति की एक शिक्षिका से बात हुई, उसने कहा, संस्था के साथ अपने संबंध को याद करते हुए उसे लेख लिखना चाहिए।स्कूल का फ़ेसबुक पेज देखा, अच्छ लगा की वहाँ बहुत सी नई गतिविधियाँ चल रही हैं। आज मँझले भाई ने मेस में सभी को विदाई भोज में बुलाया, दो दिन बाद वह सेवा निवृत्त हो रहा है।   


सुबह वे टहलने गये तो हवा शीतल थी, आभामय भोर का तारा दूर से दिखाई दे रहा था। नौ बजे नन्हा व सोनू आ गये, समधी-समधिन भी आये थे। उसे आई-पैड व दो किताबें जन्मदिन के लिए उपहार स्वरूप मिलीं। दोनों प्रसिद्ध जापानी किताबों का हिंदी में अनुवाद है। दो घंटे ड्राइव करके नन्हा सभी को ‘मुरूगन इडली’ की एक शाखा में ले गया।यह तमिलनाडु के एक प्रसिद्ध रेस्तराँ का नाम है, जहाँ स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय भोजन मिलता है। 


आज सुबह वे पैदल ही निकट स्थित एक गाँव की झील देखने गये। गाँव की भोर की एक झलक मिल गई। मुर्ग़े, बत्तख़ें, कुत्ते, गायें तो देखी हीं, एक ऊँघती हुई महिला घर से निकली। झील में तैरती हुई मुर्ग़ाबियाँ और कई अन्य पक्षी थे।उसके बाद वे आगे बढ़ते गये, झील के साफ़ पानी की तस्वीरें उतारीं। घर लौटे तो एक-एक कर सभी के, जन्मदिन की बधाई के फ़ोन आने शुरू हुए। नाश्ते के बाद मिठाई देने वृद्धाश्रम गये। वहाँ के संचालक व एक निवासी से कुछ देर बात की।उसके बाद आश्रम में राधा कुंज, झील व शिव मंदिर के दर्शन किए। अन्नपूर्णा में बहुत दिनों बाद प्रसाद ग्रहण किया। झील के निकट एक मंडप में दोपहर का ध्यान किया। शाम को पड़ोसी परिवार को बुलाया था। 


कल मई का अंतिम दिन था। आज शाम वे आम के बगीचे में टहलने गये। हरे-भरे वृक्षों पर कई आकारों व रंगों के आम लगे हैं। प्रकृति में कितनी जातियाँ, प्रजातियाँ हैं, सभी साथ रहती हैं। जापानी पुस्तक ‘इचिगो इगी’ का हिंदी अनुवाद अच्छा लग रहा है। इसका अर्थ है, “एक बार-एक मुलाक़ात’, अर्थात हर किसी से हम एक तरह से एक ही बार मिलते हैं। किसी भी पल को जीने का अवसर जीवन में एक बार ही मिलता है, इसलिए वर्तमान में जीना चाहिए। पापाजी को भी इन जापानी किताबों के बारे में बताया। 


आज दीदी का जन्मदिन है, उनके लिए कविता भेजी, सदा की तरह तरबूज़ काट कर मनाया उन्होंने।शाम से ही बादल बनाने शुरू हो गये थे, वे रात्रि भ्रमण के लिए जायें, उससे पहले ही बरसने भी शुरू हो गये। आज “रेत समाधि” किताब आ गई। 


शाम को एओएल का अनुवाद कार्य किया। नन्हा कल बाहर खाने के लिए कह रहा है, पर उसने उन्हें घर आने के लिए कहा है। मीनू भी लिखा है, रेत समाधि से प्रेरित होकर, बहुत ही रोचक पुस्तक है, अपने आप में अनोखी !कल सुबह सात बजे उनके यहाँ पहली बार आर्ट ऑफ़ लिविंग का फ़ॉलो अप होने वाला है। गुरुजी की कृपा का एक और प्रसाद ! वह अभी भी अमेरिका में हैं, जुलाई में आयेंगे। तब वह एक कोर्स करेगी उनके साथ पार्ट २ कोर्स। आज सुबह कुछ देर के लिए मन कैसा तो उखड़ गया था, शायद वर्षों बाद ऐसा अनुभव हुआ, फिर दीदी से बात की और मन बदल गया।कल क्लब में एओएल की तरफ़ से नेचुरोपैथी कैंप लग रहा है।    


आज पूरा दिन व्यस्तता बनी रही। सुबह सवा चार बजे नींद खुली। टहल कर आये तो छह बज चुके थे। पौने सात बजे आर्ट ऑफ़ लिविंग की शिक्षिका आ गयीं।दो और लोग आये। क्रिया के बाद मन अपूर्व शांति का अनुभव कर रहा था, जिससे बाहर आने का जरा भी मन नहीं था। नाश्ते के बाद लंच की तैयारी की। नन्हा-सोनू और समधी-समधिन बारह बजे तक आ गये थे। उससे पहले वह प्राकृतिक चिकित्सा शिविर में गई। पैर के तलुओं में रिफलेक्सोलॉजी करवायी। कान में कुछ बीज लगाये हैं, उनका क्या असर होगा, पता नहीं। शेष चिकित्सा अस्पताल जाकर होगी। नन्हा आज आई पैड के लिए की बोर्ड और पेंसिल भी ले आया है। उसने ‘प्रोक्रिएट’ पर चित्र बनाना सिखाया, अभ्यास तो उसे ही करना है। शाम को छह बजे वे आश्रम पहुँचे। सात बजे छोटी बहन पहुँची। उसे जो कमरा मिला है उसमें तीन अन्य महिलाएँ भी रहेंगी। आश्रम में उसके साथ रात्रि भोजन करके नौ बजे वे वापस आये। 


Tuesday, April 21, 2026

‘हेल्थ इन योर हैंड’

‘हेल्थ इन योर हैंड’


डाक्टर देवेंद्र वोरा की लोकप्रिय पुस्तक ‘हेल्थ इन योर हैंड’ में नूना ने आज पढ़ा, थायराइड ग्लैंड के कम या अधिक सक्रिय होने पर शरीर में क्या-क्या लक्षण हो सकते हैं।अंगूठे के नीचे उसका एक्यूप्रेशर बिंदु है, जिसे दबाकर भी इस ग्रंथि को ठीक किया जा सकता है। जून ने ब्राज़ील नट्स भी लाकर दिये हैं।


’कश्मीर फ़ाइल्स’ से पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं, उस समय के मुख्यमंत्री ने ऐसे क़ानून बनाये थे कि विस्थापित वापस ही न आ सकें।दोपहर को दो हफ़्ते बाद कन्नड़ भाषा की कक्षा हुई।कल दो वाक्य लिखकर लाने हैं।छोटी बहन का फ़ोन आया, वह एक चित्र बना रही थी, जिसे बहनोई जी अपने रेस्तराँ में लगायेंगे।वह अपने जॉब से छह महीने का अवकाश ले रही है। मई में उसे अमेरिका भी जाना है। यूक्रेन युद्ध की व्यर्थता पर उससे कुछ बात हुई। आज वर्षों बाद रेडियो पर एक नाटक सुना।सुबह एक कविता को संवारा, फ़ेसबुक पर पोस्ट किया। इन दिनों रात की रानी अपने पूरे शबाब पर है, घर के आगे व पीछे दोनों जगह ही। आज सुबह दस बजे से शाम पाँच बजे तक पानी नहीं था, टैंकर से तीन बाल्टी पानी लिया। सोसाइटी में पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। 


अभी-अभी समाचारों में सुना पश्चिम बंगाल में हिंसा की वरदातें बढ़ती जा रही हैं। राजनीतिक हत्याएँ भी हो रही हैं। कश्मीर फ़ाइल्स पर विवाद बढ़ता जा रहा है, पर लोग इसे देख भी रहे हैं। उन्होंने सोचा है, विवेक अग्निहोत्री की अन्य फ़िल्में भी देखेंगे। छोटे भाई का फ़ोन आया, उसने बताया, सन् अट्ठासी में वह बैंक में ऑडिट करने कश्मीर गया था।एक अन्य सहकर्मी के साथ किश्तवाड़ में एक रात के लिए एक होटल में रुका था। रात को भीड़ चिल्लाती हुई आयी और उनके कमरे का दरवाज़ा पीटती रही। उन्होंने दरवाज़ा बंद करके उसके सामने बेड लगा दिया और उसके ऊपर मेज़-कुर्सी भी रख दी और बिल्कुल चुप होकर बैठे रहे। एक घंटा तक दरवाज़ा पीटने के बाद वे लोग चले गये। होटल का मालिक पैसे लेकर पहले ही चला गया था। सुबह साढ़े तीन बजे वे वहाँ से निकल पड़े और तीन-चार घंटे पैदल चलने के बाद उन्हें ऊधमपुर की बस मिली। उसके बाद वह तीन-चार दिन मँझले भाई के यहाँ बीमार होकर रहा था।मंझला भाई उस समय ऊधमपुर में पोस्टेड था।’कश्मीर फ़ाइल्स’ देखकर उसे सारी बातें याद आ गयीं। उस समय बैंक में हिंदू अधिक थे, मुस्लिम कम थे। अभी कुछ दिन पहले वह फिर ऑडिट के लिए गया तो इस बार हिंदू एक भी नहीं था, पर उन्होंने काफ़ी ख़ातिरदारी की।  

आज सुबह वे टहलकर आये तो नूना का एक पुराना संस्कार जगा, जून को एक बात के लिए टोका, पर थोड़ी ही देर में सब सामान्य हो गया। जैसे सागर में एक लहर उठी हो और फिर गिर गई हो। स्वामी विरूपाक्ष की लिखी पुस्तक द टाइगर पॉज़ आ गई है।कितनी हिंसा का सामना करना पड़ा तमिलों को भी, दुनिया में आज तक न जाने कितने लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, और आज भी हो रहे हैं ।शायद विस्थापन से बड़ा दुख कोई नहीं।


आज सुबह ‘अड्डा’ पर हिन्दी-कन्नड़ा भाषा को लेकर लोगों का विवाद चल रहा था। सोसाइटी में कुछ लोग नई एजेंसी के आने से भी सहमत नहीं हैं। भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता।जून ने आज सुबह छतों की सफ़ाई करवायी। वहाँ रखे बेंत के फ़र्नीचर की पॉलिश भी करवायी। गैरेज को भी एसिड से साफ़ करवाया। दोनों साइकिलों की सर्विसिंग भी हो गई। मेहमानों के स्वागत के लिए पूरा घर तैयार है। पहली तारीख़ को जून ने एक पुराने सहकर्मी अपनी पत्नी के साथ तीन दिनों के लिए आ रहे हैं। आज उन्होंने ‘बुद्धा इन ए ट्रैफ़िक जाम’ देखी, जो अर्बन नक्सल की बात करती है।  


कल रात बल्कि आज सुबह नूना ने अलार्म बजने से पहले एक अद्भुत स्वप्न देखा, जिसमें उसे  परम विश्राम की अनुभूति हुई। ऐसा विश्राम जो जागते, सोते, ध्यान करते या किसी भी समय आजतक अनुभव नहीं किया था। पूर्ण आश्वस्ति का भाव, पूर्ण सुरक्षा तथा पूर्ण तृप्ति तथा पूर्ण संतुष्टि सब को मिला दें तो जो भाव होगा, ऐसा ! । उसकी स्मृति ही दिन में कई बार मन को विश्रांति से भरती रही। परमात्मा के चरण कमलों पर उसका सिर है और इतनी आत्मीयता और इतना अपनापन है कि कोई लज्जा या कोई दूरी नहीं है। भक्ति का परम भाव या पराकाष्ठा का अनुभव था। सामीप्य, सायुज्य या सान्निध्य से भी ऊपर ! जैसे कोई शिशु माँ के पास सुरक्षित महसूस करता होगा। ऐसा प्रेम तो कभी किसी के प्रति अनुभव में नहीं आया। कल गुरुजी के प्रेम पर लिखे लेख का अनुवाद किया था। प्रेम तभी प्रकटता है जब उसे प्रकट होना चाहिए। शायद कल ही वह दिन था। ईश्वर के प्रति विश्वास तो पहले से ही दृढ़ था पर अब उसमें एक नया रस घुल गया है। अब वह निकटतम है। उससे जरा भी दूरी नहीं है। उसने नूना को वैसे ही स्वीकारा है जैसी वह है ! आज भी हो सकता है स्वप्न में उसका संग साथ मिले!     

 

कल रात दो स्वप्न देखे, एक में एक छोटा बच्चा था और दूसरे में एक संबंधी को देखा। अवचेतन में कितनी बातें होती हैं, जो स्वप्न के माध्यम से प्रकट होती हैं। इससे मन में निर्मलता आती है, स्पष्टता होती है।आत्मा की शक्ति जगाकर ही कोई लक्ष्य तक जा सकता है। आज राम नवमी के लिए लेख का अनुवाद किया। रामायण हरेक के भीतर प्रतिपल घट रही है। जून आज सुबह नौ बजे गये और एक बजे लौटे, पुरानी कमेटी के साथ लंबी बातचीत हुई। 


आज का दिन और आने वाला पूरा सप्ताह जून और उनकी टीम के लिए काफ़ी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।आज सुबह टहल कर आये तो अभी दिन नहीं निकला था, आकाश पर चंद्रमा उसी आकार में था जैसा शिवजी के मस्तक पर होता है। रात्रि भ्रमण के समय पार्क-५ के पास गुलाबी फूलों वाला पेड़ बहुत ही सुंदर लग रहा था। हज़ारों फूल खिले हैं और सैकड़ों नीचे गिरे हैं। नन्हा व सोनू आठ बजे आ गये थे। वे लोग जिस जिग्सा पजल को बना रहे थे, आज पूरा करके उसे फ़्रेम में लगाया और दीवार पर ड्रिलिंग करके लगा भी दिया। नन्हे की आँख में धूल का एक कण भी चला गया, डॉक्टर को दिखाने गया था। यू ट्यूब पर नूना ने आचार्य कुंद कुंद की पुस्तक ‘समय सार’ की व्याख्या सुनी। अद्भुत ग्रंथ है यह, व्याख्याकार उससे भी ज़्यादा अद्भुत हैं।इतने भाव से अपनी बात कहते हैं कि सीधे दिल तक उतर जाती है।  


Thursday, January 19, 2023

एज लेस बॉडी टाइम लेस माइंड


रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं। सोने से पूर्व के अंतिम कार्यों का आरंभ हो चुका है। टहलने गए तो हल्की बूंदा-बांदी होने लगी, पर अब उन्हें इसका अभ्यास हो गया है। सुहानी हवा और बेहद हल्की झींसी को चेहरे पर महसूस करते घर के सामने वाली सड़क के अंत तक जाकर लौट आए। उसके आगे ही फ़ौवारे वाला पार्क है। दो दिन से पड़ोसी नहीं दिखे थे जबकि वह सुबह नियमित दो घंटे पैदल चलते हैं, आज दिखे तो बताया, खाने की मेज़ से कुछ लेते समय गिर गये थे, घुटने पर हल्की चोट थी। एक तरह से वृद्धावस्था भी दूसरा बचपन ले आती है, पर बचपन में चोट का पता नहीं चलता, इस समय बात विपरीत है।  आज से ‘देवों का देव महादेव’ पुनः देखना आरम्भ किया है। कुछ वर्षों पूर्व इसका कुछ भाग देखा था। शाम को ‘हिंदी कविता के हज़ार वर्ष’ पुस्तक में कविता के इतिहास के बारे में पढ़ा। काव्य और मानव का नाता बहुत पुराना है। पुरानी पुस्तकों में कविता के अतिरिक्त भी कितने विषयों को गद्य की अपेक्षा पद्य में लिखा गया है, जिसे याद रखना भी सरल है। 


नन्हे ने नेक्सन ईवी की टेस्ट ड्राइव बुक कर दी है। कम्पनी के लोग गाड़ी लेकर आएँगे। सुबह बिग बास्केट से सूखे मेवे आए, जून को खुद जाकर ख़रीदने का शौक़ पूरा करने में अभी समय लगेगा। भावनगर से सौंठ पाउडर आया, अमेजन उन्हें घर बैठ-बैठे पूरे भारत से समान लाकर दे देता है। 


अभी-अभी छोटे भाई से बात की। आजकल काम के सिलसिले में केरल में है। आज धोती पहनकर त्रिवेंद्रम के पद्मनाभ मंदिर गया था। उसे कभी-कभी ध्यान के अनोखे अनुभव होते हैं। बचपन से ही वह पूजा आदि  की तरफ़ आकर्षित था। उसने बताया कक्षा चार में उसके मस्तक में भौहों के मध्य एक कील चुभ गयी थी, जिसे मित्रों ने खींच कर निकाला, खून भी बहा पर बजाय रोने के वह ज़ोर से हँसने लगा था। शायद उसे पहला अतींद्रिय अनुभव तब हुआ था। उसके बाद वह कक्षा में सबसे पीछे बैठता था पर उसे कुछ सुनायी नहीं  देता था, तब निकट बैठा छात्र ज़ोर से हिलाकर कहता तब कुछ समझ में आता। अब वह ओशो के प्रवचन सुनकर और उनकी बतायी साधना से भीतर ऊर्जा का प्रवाह अनुभव करता है। अनंत ऊर्जा के स्रोत से तो सब जुड़े हैं पर उसका अनुभव कोई-कोई ही कर पाता है। 


आज भी घर के दाँयी तरफ़ का गोदाम तोड़ने की आवाज़ें आती रहीं। अब जेसीबी लगाया जाएगा। उसके बाद वहाँ निर्माण कार्य आरम्भ होगा अर्थात लम्बे समय तक इस शोर को सुनने का अभ्यास करना होगा। आज असम की एक पुरानी परिचिता से बात हुई , परसों उनकी माँ का देहांत हो गया। वह शाम को परिवार के साथ बैठकर चाय पी रही थीं, अचानक दिल का दौरा पड़ा; जबकि उन्हें कभी दिल का रोग नहीं हुआ था। जीवन क्षण भंगुर है कितनी बार वे यह बात सुनते हैं पर मानते नहीं, ऐसी घटनाएँ इसकी सत्यता सिद्ध करने आ जाती हैं। आज सुबह दीपक चोपड़ा की पुस्तक ‘सफलता के सात  आध्यात्मिक नियम’, मोबाइल पर सुनी। कल शाम उनकी एक अन्य पुस्तक ‘एज लेस बॉडी टाइम लेस माइंड’ पढ़नी आरंभ की है। उनके अनुसार चेतना में स्थित रहकर कोई भी अपने शरीर को स्वस्थ रख सकता है। व्यक्ति के सकारात्मक या नकारात्मक विचार अच्छे या बुरे हार्मोंस का निर्माण करते हैं। इस सृष्टि में पदार्थ ऊर्जा में व ऊर्जा पदार्थ में निरंतर बदल रही है।देह जो ठोस जान पड़ती है, वास्तव में तरंगों से ही बनी है। अणु या परमाणु तक आते आते पदार्थ खोने लगता है और अति सूक्ष्म ऊर्जा ही शेष रहती है।  यह ऊर्जा विचारों से नए-नए रूप धारण कर लेती है, वह जब भी दिखेगी, प्रकृति के रूप में ही दिखेगी।वह स्वयं ज्ञाता है और ज्ञेय नहीं हो सकती। उसका अनुभव ध्यान में ही किया जा सकता है। आज उनके साथ एक अठानवे वर्षीय एक वृद्ध महिला का साक्षात्कार सुना। उनकी बातें प्रेरणदायक थीं, वह अभी तक योग सिखाती हैं, नृत्य भी करती हैं। शाम को पापा जी से फ़ोन पर बात की, तो पहली बार उन्हें रिकार्ड भी कर लिया। उनकी बातों में भी जीवन के लम्बे अनुभवों का सार होता है। भक्ति और ज्ञान की चर्चा भी होती है।  


Thursday, June 18, 2020

पावर ऑफ़ नाउ


आज ठंड अपेक्षाकृत अधिक है. सुबह वे उठे तो कोहरा बहुत घना था. प्रातः भ्रमण के लिए देर से निकले पर उतनी ठंड में भी एक व्यक्ति को सामान्य कमीज पहने दौड़ लगाते देखा. मानव की सर्दी-गर्मी सहने की क्षमता व्यक्ति सापेक्ष है. नेहरू मैदान में तेज बत्तियां जल रही थीं, दिन-रात वाले फुटबॉल मैच चल रहे हैं वहाँ तीन दिनों के लिये. एक युवा संस्था करवा रही है कम्पनी की सहायता से. आज भी किसी ‘बंद’ की बात थी पर कम्पनी खुली है. एनआरसी और सिटीजनशिप बिल को लेकर उत्तर-पूर्व में वातावरण काफी अस्थिर बना हुआ है. इस समय कमरे में धूप आ रही है और धूप की गर्माहट भली लग रही है. कल दोपहर मृणाल ज्योति गयी, उसकी संस्थापिका कह रही थीं भविष्य में उनके न रहने पर उनकी दिव्यांग पुत्री अकेली न रह जाये इसलिए वह कुछ वर्षों बाद अपने रिश्तेदारों के पास रहेंगी. माँ का दिल कितनी दूर की सोच रखता है. उनके बाद स्कूल कौन सम्भालेगा इसकी भी चिंता उन्हें होती होगी. कल शाम भजन से पूर्व गले में खराश हुई और ॐ का उच्चारण नहीं कर सकी, देह एक मशीन की तरह ही है, कहीं कुछ फंस गया और मशीन ठप ! एक छोटा सा खाकी रंग का कुत्ते का बच्चा बरामदे में आकर बैठा था कल, उसे कुछ खाने को दिया तो दूर तक छोड़ आने के बावजूद थोड़ी ही देर में वापस आ जाता था, उसका दिशा बोध कितना प्रबल रहा होगा. वे उसे घर में नहीं आने दे रहे थे, शायद रोग का भय था, उसे कोई टीका भी नहीं लगा होगा. परमात्मा ही उसकी रक्षा करते रहे हैं आजतक, आगे भी करेंगे. बाहर मैदान से बच्चों के खेलने की आवाजें आ रही हैं, ये बिना थके शाम तक खेलते रह सकते हैं. 

टीवी पर प्रधानमंत्री का भाषण आ रहा है जो वह बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में दे रहे हैं. महिला सशक्तिकरण की बात की, फिर किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया. उनकी आवाज में बल है और भारत को आगे ले जाने का दृढ संकल्प भी. ‘पावर ऑफ़ नाउ’ वर्षों पहले पढ़ी थी, कल से दुबारा पढ़ रही है, पढ़ते-पढ़ते ही अनुभव घटने लगता है. वर्तमान में रहने का जो मन्त्र ज्ञानी देते आए हैं उसका सर्वोत्तम चित्रण इस पुस्तक में हुआ है. अगले सप्ताह वे अरुणाचल प्रदेश जा रहे हैं एक रात के लिए. शाम को क्लब में एक विज्ञान फिल्म दिखाई जाएगी, रजनीकान्त की हिंदी में डब की गयी फिल्म.  

उस दिन यानि वर्षों पूर्व सुबह साढ़े छह बजे पिताजी द्वारा आवाज लगाने पर नींद खुली तो एक स्वप्न टूट गया. स्वप्न, जो काफी देर से चल रहा था. स्वप्न जो सुंदर था... सुखद था. पता नहीं किस खेत में काम कर रहे थे वे लोग, साथ-साथ बातें भी. फिर घर आये. सबको पता चल गया. मिटटी से सने हाथ, हल चलाते हुए लगी होगी या .. कुछ याद नहीं. फिर स्वप्न में ही एक पत्र मिला और ‘मेरे संसार; ऋषियों की बातों से भरी किताब, श्लोकों और आख्यानों को उसमें देख वह चकित थी फिर दक्षिण भारत का भ्रमण  और सुंदर दृश्य... बस सब बातों की एक बात कि स्वप्न अच्छा था. कालेज में ‘फिलॉसफी ऑफ़ हार्डी’ पर एक सेमिनार था, मध्य में एक गजल की प्रस्तुति... मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता.. ऐसी ही कुछ. कल भारत बन्द का आयोजन है विपक्षी दलों द्वारा. बस में एक वृद्ध ने पेन्सिल खरीदी,  लिखने के लिए सिगरेट की डिब्बी का ढक्कन, उसने उसे एक कागज अपनी कापी का दिया, वह खुश हुआ होगा पर उसने ऐसा जाहिर नहीं किया. बस ड्राइवर ने बस गेट से काफी आगे रोकी, वह क्रोध में भी था.अब से वह सबसे आगे वाली सीट पर बैठेगी, या फिर खड़े होना भी ठीक है ताकि उसे पहले से बता सके. 

Saturday, April 11, 2020

श्वेत गुलाब


पौने ग्यारह बजे हैं. आज का दिन कुछ भारी है शायद या फिर अभी वह अनाड़ी है. आज सुबह कार लेकर गयी, कालोनी में ही एक चक्कर लगाया, वापस आयी तब तक भी ड्राइवर नहीं आया था , सो अकेले ही बाजार चली गयी, ट्रैक्टर को ओवरटेक करते हुए गाड़ी का बायां भाग लग गया. कार को गैराज में ले जाना पड़ेगा. कल रात को नींद खुलती रही, फिटबिट सब खबर रखता है. बहुत दिनों बाद सब्जी में प्याज डाला, कैसी अजीब सी लग रही थी उसकी गंध. सात्विक भोजन खाकर  तन-मन दोनों ही हल्के रहते हैं. एक सीनियर महिला ब्लॉगर ने उसकी तीन पोस्ट्स को ब्लॉग बुलेटिन में जगह दी, इसका अर्थ है उन्होंने अवश्य ही उन्हें ध्यान से पढ़ा भी होगा. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं, जून अपने मोबाइल पर व्यस्त हैं. दोपहर को वे गाड़ी बनने के लिए दे आये, दो हफ्तों बाद मिलेगी. अब भविष्य में बहुत सतर्क होकर गाडी को हाथ लगाना होगा, फ़िलहाल कालोनी में चलाना ही ठीक रहेगा. उसके बाद तिनसुकिया गए, छाता बन गया, सब्जियां-फल आदि खरीदे. जून को भी गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने का ज्यादा बुरा नहीं लगा, उन्होंने पहली बार इंश्योरेंस क्लेम किया है. कल स्कूल में मीटिंग ठीक रही, अब कुछ महीने बाद स्टेज बनने का कार्य आरम्भ हो जायेगा. समय का सदुपयोग करना हो तो पुस्तक पढ़ने से अच्छा कौन सा काम हो सकता है, कल वी एस नायपॉल की अच्छी सी पुस्तक लायी थी, पढ़ना आरम्भ किया है. नन्हे व सोनू के चश्मे गाड़ी से सामान निकालते समय मिले, उन्हें याद ही नहीं था कि वहां रखे थे.  

‘इंसान जिसके बारे में सोचता है, वैसा ही बन जाता है’. वे वही बन जाते हैं, जैसा वे बनना चाहते हैं, जैसा वे सोचते हैं. मन की गहराई में जो आकांक्षा बलवती होती है, वह एक न एक दिन मूर्तरूप अवश्य लेती है. वह बचपन से ही अध्यापिका बनना चाहती थी, पढ़ना और पढ़ाना, ये दो ही उसके प्रिय कार्य रहे हैं. परमात्मा ने उसे इस योग्य बनाया है कि वह अन्य लोगों को ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे सकती है. आज यदि वह अपने भीतर जाये तो वहां कोई आकांक्षा नहीं मिलेगी, एक मौन और सन्नाटा ! पर वह मौन रसपूर्ण है, एक सहज शांति उसमें से पल-पल रिसती रहती है. खिड़की से बाहर हरियाली नजर आ रही है, पौधे, वृक्ष कैसे शांत खड़े हैं. हवा का एक कण भी नहीं है, आकाश भी थिर है, वर्षा के बाद का खुला, स्वच्छ आकाश ! दूर से पंछियों की आवाजें आ रही हैं और घास काटने की मशीन की भी. अचानक हवा बहने लगी है और अब श्वेत गुलाब की टहनी हिलकर स्थिर हो गयी है. वह जिस आकाश में स्थित है वह तो सदा ही स्थिर है. मन का आकाश भी सदा अडोल है. उसमें विचारों का स्पंदन होता है, जो साक्षी है वही मन बन जाता है और वही स्वयं में ठहर जाता है. नैनी किचन में काम कर रही है, उसने कहा, शरीर में दर्द है, उसे क्रोसिन की दो टेबलेट दी हैं. आजकल उसके पास सिलाई का काम आ रहा है, शायद झुक कर, देर तक सिलाई करने से ही ऐसा हुआ हो. दो दिन बाद गणेश पूजा है. उसी दिन वे बच्चों को नए वस्त्र देंगे. 

Thursday, April 9, 2020

चिड़िया की कूजन


दोपहर के ढाई बजे हैं, कुछ ही देर में दोपहर की योग कक्षा के लिए महिलाएं आएँगी. कुछ देर पहले दो ब्लॉग्स पर लिखा. कमरे में एसी चल रहा है पर उसकी आवाज को भी चीरते हुए बाहर से चिड़िया की मधुर चहकार आ रही है, भले ही तेज धूप हो पर इसके बावजूद पंछी दोपहर भर  कूजते हैं, विश्राम वे रात को ही करते हैं सूर्यास्त के बाद. कल शिक्षक दिवस सोल्लास मनाया, सुबह मृणाल ज्योति में, दोपहर को बाहर बरामदे में बच्चों के साथ और शाम को गायत्री समूह की योग साधिकाओं के साथ ! गुरूजी के प्रेम का जादू उन पर भी चलने लगा है, कल वे बहुत सुंदर दीपदान लायीं पूजा कक्ष के लिए, साथ ही ढेर सारी खाने की वस्तुएं, उनका उत्साह देखते ही बनता था. एक ने कबीर के दोहे गाए, दूसरी ने अपनी रची दो पंक्तियाँ और एक अन्य ने सुंदर बंगाली भजन गाया।  मन होता है उनके लिए एक कविता लिखे. दोपहर को भी बच्चों ने सुंदर सजावट की. समोसे, केक व कोल्डड्रिंक्स का इंतजाम किया, उन्होंने आपस में पैसे जमाकर के ये सामान खरीदा. उनका भी उत्साह बहुत था. स्कुल में सभी टीचर्स को उपहार अवश्य ही पसन्द आये होंगे. कल जाने पर फीडबैक मिलेगा. जीवन एक उत्सव है , यह गुरूजी का वाक्य सत्य सिद्ध हो रहा है. दोपहर बाद उसने लिखा 

दिलों में प्रेम और उत्साह भरे
चमकते हुए ख़ुशी से आपके चेहरे
चुपके-चुपके से उत्सव का आयोजन
मानो लौट आया हो फिर से बचपन

दीप स्तम्भ सजा थाल में
 भरा मिष्ठान और फूलों-फलों से
चहकते पंछियों से सुमधुर गान
याद आएंगे जब तक हैं प्राण

गुरु का ज्ञान जब फलता है
तभी जीवन में ऐसा फूल खिलता है
मिलन घटता है पावन आत्माओं का
जीवन एक सुवास बन झरता है

वैसे तो कभी न आएगा अब
पतझड़ दिल के मौसम में
यदि कभी भूले से आ भी जाये
तो इस शाम का वसन्त भर देगा उसे
जीवन पथ को प्रकाशित कर देगा
फूलों, दीपों और मिठास से

बनी रहे इसी तरह मुखड़े पर मुस्कान हर पल
भरी रहे जीवन सरिता छल छल
कोई आस न रहे अधूरी, हर साध हो पूरी
क्योंकि खुद को जानकर मिल जाती है
श्रद्धा और सबूरी !

सुबह के पौने आठ बजे हैं, ड्राइवर अभी आने वाला होगा, फिर कार निकालेगी, वैसे अकेले भी जा सकती है पर घर में सफाई का काम चल रहा है. पोहे का नाश्ता किया और केला, जून ने कहा केला खाने से वजन बढ़ता है. वह बंगलूरू में अपना मेडिकल चेकअप कराके आये हैं, उनका वजन ज्यादा है. उन्होंने टहलने का वक्त भी बढ़ा दिया है और लंबा रास्ता लिया है पहले से. वापस आकर भी देह में स्फूर्ति नहीं लग रही थी, तमस का अनुभव हुआ पर प्राणायाम से फर्क पड़ा. कल रात को नींद ठीक से नहीं आयी, जून को एओल के कोर्स में जाने के लिए दुबारा कहा तो वह नाराज हो गए और उनकी नकारात्मक ऊर्जा शायद उसे विचलित कर रही हो, सूक्ष्म स्तर पर ऐसा हो सकता है. कुछ वर्ष पूर्व किसी आवाज ने भीतर से बार -बार कहा था, दूसरे कमरे में सोने जाओ पर वह भीरु आजतक हिम्मत नहीं जुटा पायी, जून क्या सोचेंगे, उन्हें बुरा लगेगा. इसलिए विवाह को बन्धन कहा गया है, एक-दूसरे की भावनाओं का ख्याल रखना होगा. आँखों में नींद का सा अनुभव हो रहा है अब बाहर जाना चाहिए. कल दोपहर बाद मृणाल ज्योति की एक परिचारिका को देखने अस्पताल जा रही थी, एक अध्यापिका से पता चला वह दो दिन पूर्व ही रिलीज हो गयी है. सो पब्लिक लाइब्रेरी चली गयी, एक किताब ली, लाइब्रेरियन ने बताया, माह के अंत में बच्चों की कहानी प्रतियोगिता है, जिसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं भाग लेंगे. उसे हिंदी में निर्णायक के रूप में सहायता करनी है. कल मृणाल ज्योति में मीटिंग है, विधान परिषद के एक सदस्य ने पांच लाख की सहायता का वचन दिया है जिससे स्कूल में एक स्टेज बनेगा, जहां भविष्य में कई कार्यक्रम हो सकते हैं. 

Tuesday, October 10, 2017

लाल और काले शहतूत


कल सुबह एक स्वप्न देखा, वह गुलाम भारत के एक शहर में (वर्तमान पाकिस्तान) किसी शायर की बेटी है. एक कमरा है जिसका दरवाजा दाहिनी तरफ खुलता है तो घर के भीतर जाता है और बायीं तरफ का बाहर, जहाँ पिता खड़े हैं, उनके हाथ में कोई पुस्तक है. कमरे में पाँच-छह वर्ष का बालक( शायद उसका भाई) गेंद से खेल रहा है, तभी वह कमरे में आती है. उसके केश छोटे कटे हैं, चेहरा बिलकुल अबके जैसा ही है, लम्बी है, फ्रॉक पहने हुए है, आकर वह भी उस बच्चे के साथ खेलने लगती है. उम्र चौदह-पन्द्रह होगी. स्वप्न में देखते ही उसने खुद से कहा, अरे, यह तो वह है ! एक और स्वप्न में एक वृद्ध महिला किसी परिचिता के बारे में कुछ बता रही है, जो अशोभनीय है सो वह स्वयं से कहती है, क्या उसे गॉसिप करना भी भाता है  ! आज सुबह उठी तो फिर वही वाक्य याद आया, “उसके जीवन में सब झूठ है”. सत्य तो वही है जो सदा रहता है, जीवन तो प्रतिपल बदलता रहता है, फिर झूठ ही हुआ. आज बहुत दिनों बाद बगीचे में काम करवाया, एक वीडियो भी बनाया. बगिया में ठन्डक थी, सब कुछ धुला-धुला सा था, सफाई भी हो गयी और पौधों को सहारा भी मिल गया. शाम को स्कूल के वार्षिकोत्सव में जाना है, और कल देहली जाना है. फेसबुक पर आस्ट्रेलिया की तस्वीरें पोस्ट कीं आज भी. कोई नई कविता नहीं लिखी कई दिनों से, काव्य श्रंखला पर लिखने वाली कवयित्रियाँ रोज एक नयी कविता ले आ रही हैं. जीवन एक झूठ है एक भाव यह भी है कि उसने कई कविताएँ बाह्य आलम्बनों से प्रेरित होकर लिखी हैं, बहुत सी भीतरी से भी, पर बाहरी आलम्बन से रची कविता स्वतः स्फूर्त नहीं कही जा सकती. काव्य तो उसे ही कहा जा सकता है जो अंतर्मन की गहराई से स्वयं ही प्रकट हो. 

कल सुबह वे उठे तो वर्षा थमी हुई थी पर लॉन में व सड़क पर पिछली रात आये तूफान और ओलों की वर्षा के चिह्न स्पष्ट नजर आ रहे थे. वे सवा ग्यारह बजे दिल्ली जाने के लिए हवाईअड्डे के लिए रवाना हुए और शाम सवा सात बजे अस्पताल पहुँच गये. भाभी से पहले भाई से मिले, वह दुबले लग रहे थे. भाभी का चेहरा भी छोटा सा लग रहा था, अधर सफेद लग रहे थे, उन्हें देखकर मन रुआँसा हो गया. दिल की बीमारी के कारण उन्हें काफी दुःख झेलना पड़ा है. आज सुबह एंजियोग्राफी हो गयी है, सम्भवतः परसों आपरेशन होगा. यहाँ आज मौसम गर्म है. दोपहर दो बजे बड़ी भांजी अपनी बेटी को लेकर मिलने आएगी. उसकी बिटिया दुबली-पतली है, खूब गोरी और चंचल, बचपन में भांजी बिलकुल ऐसी लगती थी. छोटी बहन भी आई है, जो इस समय कहीं बाहर गयी है. जून अपने दफ्तर के काम से गये हैं, दोपहर तक लौटेंगे. परसों वापस लौटना है. कुछ देर पहले पिताजी व सभी भाई-बहनों, भाभियों से फोन पर बात की. शाम को फिर अस्पताल जाना है. वे मंझली भाभी के यहाँ ठहरे हैं, घर जैसी ही सुविधा है. मंझली भाभी के कंधों पर बहुत काम आ गया है, पर परिपक्वता का परिचय देते हुए वह सब संभाल रही है. बड़ी बहन के लिए पूरी तरह समर्पित. उसने उनके शीघ्र स्वास्थ्य के लिए भगवान से प्रार्थना की.


आज प्रातः भ्रमण के लिए गये तो पिछले गेट के बाहर ही शहतूत के पेड़ से पके हुए लाल व काले शहतूत गिरे देखे. कुछ वापसी में उठाये भी. कल शाम छोटा भाई भी अपनी बड़ी बेटी के साथ अस्पताल आया. मंझले भाई से अब उसकी खूब पटती है. भाभी पहले से ठीक लग रही थीं. सभी के भीतर सच्चा स्नेह देखकर मन संतुष्ट है. आज महरी नहीं आई तो किसी अन्य को बुलाया, नाम है मुस्कान, हंसमुख है. भाई ने कहा है वे लोग शाम को पाँच बजे के बाद ही अस्पताल आयें, वे जल्दी लौट भी आएंगे. भाभी जितना आराम करेंगी उतना ही अच्छा है.  

Friday, August 18, 2017

इ रिक्शा में यात्रा


कल से गले में खिचखिच है, आज ज्यादा बढ़ गयी है. तीन दिन बाद यात्रा पर निकलना है, स्वास्थ्य  ठीक हो जायेगा उससे पूर्व ऐसी उम्मीद है. दोपहर बाद साढ़े तीन होने को हैं, सूर्य की अंतिम धूप में बगीचे में कुरसी पर बैठी है वह, मुँह में मुलेठी है, जिसकी मिठास गले को राहत देती है. कुछ देर पूर्व रजाई ओढ़कर लेटी पर भीतर कोई जाग गया है जो बेवक्त सोने नहीं देता. एक दिन तो गहरी नींद सोना ही है. उसके पूर्व कुछ काम हो जाये तो ही अच्छा है. जीवन के पल व्यर्थ न जाएँ, परमात्मा की दी इस अपार क्षमता का उपयोग हो सके ऐसा प्रयत्न सदा ही चलना चाहिए. आज बहुत दिनों के बाद रीडर्स डाइजेस्ट का एक अंक पढ़ा. मलाला की पुस्तक कल खत्म हो गयी, उसका एक भाषण भी सुना. कल शाम को जून के दफ्तर में काम करने वाली एक महिला आई थी अपने पति के साथ. चाहती है उसका तबादला गोहाटी हो जाये, इसी सिलसिले में बात करने आये थे वे. पति का काम वहीं है, ससुराल भी वहीं है. यदि ऐसा न हो पाया तो दोनों के पास अलग होने के सिवा कोई उपाय नहीं है. महिलाओं ने भी पुरुषों की तरह काम करना तो आरम्भ कर दिया है पर इसके लिए कितनी क़ुरबानी देनी पडती है. सास-ससुर को तो अब बहू से कोई भी उम्मीद रखने का अधिकार नहीं रह गया, पति भी यह नहीं कह सकता कि महिला नौकरी छोड़ दे. बगीचे में पानी डालने माली अभी तक नहीं आया है, वैसे एक दिन छोड़कर भी पानी दिया जा सकता है, रात्रि को इतनी ओस गिरती है कि सब कुछ भीग जाता है.

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, ऐसा समाचारों में सुना. यहाँ भी मौसम अपेक्षकृत ठंडा है पर धूप भी खिली है. व्हाट्स एप पर दीदी का संदेश सुना. विदेश में रहने वाला बड़ा भांजा परिवार सहित आया है, उससे भी भेंट हो जाएगी. कल स्वप्न में किसी पिछले जन्म का दृश्य देखा, मोह भंग होता है जब पिछले जन्म की सच्चाई सामने आती है. जीवन एक खेल ही तो है, एक स्वप्न मात्र..इसे जो गम्भीरता पूर्वक लेते हैं, वे व्यर्थ ही दुखी होते हैं. मन कितना चंचल है, पल में तोला पल में माशा, इस मन को देखना भी एक मजेदार खेल है. यहाँ सब कुछ बदलने वाला है, सत्य एक है और वह सदा एक सा है अटल. उससे जुड़े रहकर जगत को देखना है, वहाँ न कोई चाह है न ही कोई अभाव ! नये वर्ष के लिए कविता लिखनी है जो वापस आकर पोस्ट करेगी अथवा तो वहीं से मोबाइल पर.


इस समय धूप तेज है, दोपहर के डेढ़ बजे हैं. सुबह ठीक चार बजे किसी ने जगा दिया, जैसे ही उठकर बाथरूम जाने लगी तो अलार्म बजा. तैयार होकर साढ़े पांच बजे ही वे रेलवे स्टेशन आ गये. नन्हे के साथ शताब्दी की तीन घंटे यात्रा का वक्त कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. कल जब वह दिल्ली पहुंची, नन्हा उसे लेने एयरपोर्ट आया था, उसे सुखद आश्चर्य हुआ. स्टेशन पर छोटी भाभी और भतीजी लेने आये थे. बैटरी वाली रिक्शा में बैठकर वे घर आ गये. ढोकला व लड्डुओं का नाश्ता किया. धूप में बैठकर फल खाए. दीदी व बुआजी से बात की, दीदी कल आ रही हैं और बुआजी परसों. पिताजी पहले से काफी दुबले हो गये हैं, भोजन भी पहले से कम हो गया है, वैसे अन्य सभी बातों में पूर्ववत हैं. वे उनके साथ दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं.

Tuesday, August 8, 2017

जीवन-चित्र-विचित्र


आज शाम को क्लब में मैजिक शो है. कल ‘गुरू पर्व’ है, ‘देव दीवाली भी’, दूरदर्शन पर वाराणसी से सीधा प्रसारण किया जायेगा, प्रधानमन्त्री भी जायेंगे. परसों वह दो अन्य महिलाओं के साथ दिगबोई व तिनसुकिया के स्कूलों में जायेगी. विकलांग दिवस के अवसर पर मृणाल ज्योति में एक चित्रकला व निबन्ध प्रतियोगिता के लिए निमन्त्रण देना है. सप्ताहांत में एक स्कूल में उसे वाद-विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में जाना है. लेडिज क्लब की पत्रिका के लिए लेख लिखना है. इस बार विषय क्लब से संबंधित होना चाहिए. बरसों से वह इसमें जा रही है. कितनी ही यादें हैं. लिखना शुरू करे तो कई पन्ने भर जायेंगे. जब इसकी सदस्या बनी थी, उस वक्त को याद करती है तो लगता है कल की ही बात है. आरम्भ में तो अधिक सक्रिय नहीं रही, केवल मीटिंग में सम्मिलित होना ही याद है. फिर एक दिन स्वरचित कविता का पाठ किया जिसके बाद सेक्रेटरी ने वार्षिक कार्यक्रम के लिए हिंदी में कुछ लिखने का काम दिया था. क्लब की पत्रिका में हिंदी लेखों के संपादन का कार्य भी कई बार किया. कितनी ही बार समूह गान में भाग लिया, जिनकी रिहर्सल में जाना एक यादगार अनुभव बन गया है. उन दिनों मीटिंग के बाद की चाय के लिए भोजन घरों पर ही बनाया जाता था. उसे याद है दोपहर को कुछ महिलाएं किसी एक घर में एकत्र होकर यह कार्य करती थीं. रात को भोजन बच जाने पर सभी के यहाँ पहुंचाया जाता था. तब से अब तक बहुत सा पानी गंगा में बह चुका है. अब लोग ज्यादा परिपक्व हो चुके हैं, अब भोजन कुक बनाते हैं परोसने का काम भी उन्हीं के लोग करते हैं. उस समय ज्यादा वक्त वेशभूषा तथा साज-सज्जा पर खर्च होता था, पर आज की महिला अपने को एक पूर्ण व्यक्तित्त्व मानती है. वह समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को पहचानती है, उन्हें निभाना चाहती है. क्लब द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न प्रोजेक्ट इसकी गवाही देते हैं.

आज मृणाल ज्योति के संस्थापक महोदय ने अपने जीवन के अनुभव बताये. बहुत रोचक और रोमांचभरी कहानी है उनकी. जीवन में उन्होंने इतने संघर्ष झेले हैं पर उनमें काम करने का जज्बा कूट-कूट कर भरा है. एक बार वह एक बस में यात्रा कर रहे थे. हाथ में रूसी लेखक बोरिस येल्स्तीव की पुस्तक थी. साथ बैठे व्यक्ति ने पूछा, यह पुस्तक कहाँ से मिली, तो उन्होंने कहा, खरीदी है, क्योंकि ऐसी किताबें पढने का शौक है’. उस व्यक्ति ने अपना पता दिया और मिलने को कहा. उन्हें एक सीक्रेट संस्था में काम मिल गया, मगर वह किसी को इस बारे में बता नहीं सकते थे, कोई पहचान पत्र नहीं था. पुलिस तक को पता नहीं था कि ऐसी कोई सरकारी संस्था है. उन्हें वैसी कई पुस्तकें पढने को दी गयीं. नक्सल आन्दोलन तथा गुरिल्ला युद्ध के बारे में जानकारी मिली. प्रशिक्षण दिया गया. उसी दौरान एक बार ऊँचाई से गिर गये, काफी चोट आई. छह महीने इलाज चला. जॉब जारी रहा पर बाद में तनाव बढ़ने लगा. गिरने के कारण सर में चोट आई थी, उसका भी असर था. नौकरी छोड़ दी. आगे पढ़ाई की और अध्यापक बने. उसी दौरान एक केस के सिलसिले में बड़ी बहन ने कहा, इस काम को ऐसे अंजाम दो, तब पता चला वह भी उसी संस्था में थी, अभी तक उसी क्षेत्र में है. घर में किसी भी पता नहीं था कि वह यह काम करती है. जीवन कितना विचित्र है, इतनी बड़ी धरती पर कब, कहाँ क्या हो रहा है, कौन जान सकता है.


कल जून वापस आ गये, घर जैसे भर गया है, पहले की दिनचर्या आरम्भ हो गयी है. आज एकादशी है, लंच में साबूदाने की खिचड़ी बना रही है. कल से ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ का कोर्स आरम्भ हो रहा है. आज सुबह एक दु:स्वप्न देखा. मेहमान के लिए भोजन बना रही है पर बन नहीं पा रहा है. कभी जल जाता है कभी कुछ और समस्या. मेहमान भी वही है जिसके बारे में एक व्यर्थ विचार मन में जागृत अवस्था में आया था, अर्थात उस स्वप्न का बीज तब बोया गया था. उनके हर भाव, विचार तथा कृत्य का फल मिलता है. कर्म पर ही उनका अधिकार है, फल पर नहीं, फल तो भोगना ही पड़ेगा. यदि उस समय जग जाती तो स्वप्न टूट जाता. सद्गुरू के अनुसार इसी तरह अज्ञान की नींद से जगने पर भी भीतर के सारे दुःख नष्ट हो जाते हैं. 

Tuesday, November 15, 2016

सूरज और बादल


अप्रैल का अंतिम दिन ! देखते-देखते नये वर्ष के चार माह गुजर गये और गुजर गया उनके जीवन का का भी एक और हिस्सा. एक दिन सारी सांसें गुजर जाएँगी और वे आकाश में स्थित होकर देखेंगे अपने ही तन को निस्पंद ! उससे पहले ही यदि संसार को कुछ देना है तो दे देना चाहिए कुछ और गीत कुछ और कविताएँ ! ! मार्च माह की कविताओं में भी उसकी कविता सातवें पायदान पर आयी हुई, ‘पिता’ नामकी कविता अभी अगले तीन हफ्ते तक कहीं प्रकाशित नहीं करनी है. आज जून ऑफिस में ही लंच लेने वाले हैं. मुख्य अधिकारी का विदाई समारोह है. उन्होंने काफी कलात्मक भाषा में विदाई भाषण लिखा है. नन्हा पिछली बार एक किताब लाया था जिसमें साईं बाबा के किसी भक्त ने उनके साथ घटे अपने अनुभवों को लिखा है, आज कुछ देर पढ़ी.

पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, गले में दर्द था परसों शाम से ही. आज काफी ठीक है, लेकिन नाक बंद है. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हुई है तभी जुकाम हुआ या फिर यह किसी कर्म का परिणाम है. यदि भीतर प्रश्न जिन्दा रहते हैं तो समय-समय पर नये विचार आते हैं. यदि समझा-बुझा कर मन को शांत कर दिया और भीतर तक पहुंचे नहीं तो मार्ग अवरुद्ध हो गया, उदासीन होकर बैठ जाने से रास्ता मिलता नहीं.

कल चार तारीख थी, बच्चों को पढ़ाते समय उसने तीन लिखी, उन्होंने भी नहीं बताया, जबकि वे स्कूल भी गये थे. सोये-सोये ही वे सारी उम्र गुजार देते हैं, आखिर कब होगा जागरण ? आज मौसम गर्म है. मई में यही स्वाभाविक ही है. गले में चुभन है सो चावल खाने का मन नहीं है. योग वशिष्ठ में पढ़ा कि जब भोजन पचता नहीं तब व्याधि होती है. तनाव होने से भोजन नहीं पचता. महीनों से भोजन के समय वातावरण बोझिल हो जाता है, माँ कुछ खाना नहीं चाहतीं तो कभी पिताजी झुंझला जाते हैं कभी जून. आत्मा है ऐसा भान हर समय बना नहीं रहता, रहे तो भी मन, बुद्धि, शरीर सब अपनी जगह हैं जो प्रकृति के अनुसार चलेंगे. आज उसे लग रहा है अवश्य ही साधना में कोई गहरी भूल हो रही है अभी तक परमात्मा की कृपा को पूर्ण रूप से अनुभव नहीं कर पायी है. अब भी लगता है कुछ नहीं जानती !

उस साधक की लिखी किताब पढ़कर काफी कुछ स्पष्ट होता जा रहा है, कितने सोये रहते हैं वे, आसक्ति, राग व द्वेष के शिकार होते हैं और सोचते हैं कि सब जानते हैं. अपने अज्ञान का ज्ञान होना ही वास्तव में ज्ञान की पहली सीढ़ी है. मन कैसा धुला-धुला सा लग रहा है, पर अभी भी कितनी परतें छुपी होंगी, दबी होंगी. सद्गुरू दूर रहकर भी शिष्य को सन्मार्ग पर लाने का कार्य करते रहते हैं. सद्गुरू का प्रेम अनंत है, वे उन्हें क्या प्रेम करेंगे, उनके पास एक बूंद भी नहीं जो है भी तो उसमें न जाने कितनी वासनाएं घुली-मिली हैं. परमात्मा को जो अर्पित होगा वह पावन होगा, पर परमात्मा कृपालु है, वह कोई भेद करना जनता ही नहीं, जो उसे पुकारे उसी पर कृपा लुटाता है !

तन स्वस्थ हो तो मन भी स्वस्थ रहता है. आज एक गर्मी भरा दिन है, बाहर धूप बहुत तेज है. चमचमाता हुआ सूर्य जैसे गुस्सा गया है, बादलों को चिढ़ा रहा है कि अब देखें वे उसे ढक के...उधर बादल भी जब मौका देखेंगे बदला लेगें ही. पिताजी बाहर बैठे हैं, अख़बार पढ़ चुके हैं, चुपचाप बैठे हैं, भीतर कमरे में अपनी कुर्सी पर माँ बैठी हैं जैसे उनकी दुनिया से बाकी दुनिया जुदा है, वैसे ही बाकी दुनिया से उनके बच्चों की दुनिया जुदा है. कल नन्हे को साईं बाबा की बात कही तो वह उन्हें जादूगर कह रहा था. भगवान से बड़ा कोई जादूगर है क्या ? परमात्मा की ओर जो ले जाये वह जादूगर कृष्ण भी तो था.. 


Wednesday, November 2, 2016

फटी हुई पुस्तक


दायें तरफ की पड़ोसिन ने फोन किया और पूछा क्या वह क्लब की कमेटी में है, उसने कहा, नहीं, और फिर कहा इस बार नहीं. वर्षों पहले एक ही बार वह कमेटी में थी, प्रोजेक्ट कन्वेनर तीन साल से है, लेकिन उसकी बात से लग रहा था जैसे वह हमेशा ही रहती है पर इस बार नहीं. मन कितना झूठ बोलता है, अपने आपको कुछ दिखाने के लिए, फिर यह भी कहा कि मीटिंग में देर से जाकर जल्दी आ गयी, जबकि सारा समय वह लाइब्रेरी में ही बैठी रही. मन को झूठ बोलने में सोचना भी नहीं पड़ता. अपनी इमेज बनाये रखने के लिए कितने झूठ बोलता चला जाता है. झूठी इमेज की रक्षा के लिए झूठ के सिवा और साधन हो भी क्या सकते हैं. आज सुबह का अंतिम स्वप्न बड़ा मजे का था. उसने एक पुस्तक नींद में फाड़ दी है पर जिसकी है उसे तो लौटानी होगी सो सेलो टेप लगाकर जोड़ने का प्रयास कर रही है, पर जुड़ना कठिन है सो परेशान होकर नींद खुल जाती है व ठीक अगले ही पल अलार्म बजता है, बल्कि उस क्षण मन में यह विचार आया अब अलार्म बजेगा और ऐसा ही हुआ. तभी बंद आँखों के आगे प्रकाश नृत्य करने लगा, यह परमात्मा के आने का ढंग है, सुबह सन्ध्याकाल में वह इसी तरह मिलने आता है. फिर उसने उससे बात भी की. सुबह उठते ही कुछ पंक्तियाँ उसने लिखीं क्योंकि बाद में वे भाव ओस की बूंदों की तरह उड़ जाते हैं ! कितनी देर तक तो वह भीतर अपनी उपस्थिति जाहिर किये रहा फिर मन पर पर्दे छाते चले गये और वह छुप गया, उनके पीछे, झूठ, अहंकार और अज्ञान के पर्दे ! शाम को सूप उसकी असावधानी से कुर्ती पर गिर गया पर मन ने झट कह दिया कि मैच देखते समय उसका ध्यान विकेट की तरफ था सो..कितना चालाक है उसका मन, एक क्षण में कैसे-कैसे बहाने गढ़ लेता है.पर उसे पता चल गया था, उसके भीतर कोई जाग रहा है जो सब जानता है !

आज सुबह फिर चमत्कार घटा, आज्ञा चक्र पर ज्योति जल रही थी, एक दीपक की लौ, नींद खुली और विचार आया, अब अलार्म बजेगा और वही हुआ, ठीक चार बजे कोई जगा देता है, वही जो भीतर जाग रहा है. परमात्मा उसे धीरे-धीरे अपने नजदीक ले रहा है, पहले वह उसे पुकारती थी अब वह खुद उसे बुलाता है, उसने अपने को प्रकट कर दिया है. उसके अहंकार को चूर करने के उसके प्रयास भी जारी हैं. उसे अपने भीतर सूक्ष्म से सूक्ष्म विकार भी स्पष्ट दिखाई देने लगे हैं. सभी के भीतर उसी की ज्योति भी दिखाई देती है, किसी को तिलमात्र भी चोट पहुँचाने पर भीतर कैसी पीड़ा जगती है जैसे खुद को ही सताया हो..वे सब एक ही हैं, इस बात का अनुभव भी हो रहा है. अब सारी कामनाएं एक ही केंद्र पर केन्द्रित हो गयी हैं. वह परमात्मा इसी जन्म में उसे मुक्त कर दे. इस में बाधा उसके पूर्व संस्कार हैं व प्रारब्ध कर्म, लेकिन सद्गुरू की कृपा का अक्षय भंडार भी तो साथ है. आज सत्संग है, वे भजन गायेंगे, ध्यान करेंगे और परमात्मा को अपने सारे गुण-अवगुण समर्पित कर देंगे, खाली होकर बैठ रहेंगे फिर वही वह रहेगा, वह एकछत्र साम्राज्य चाहता है..दो दिन बाद नन्हा आ रहा है, उससे भी अध्यात्म पर चर्चा होगी. मुरारी बापू बाबा रामदेव के पतंजलि आश्रम में कथा कर रहे हैं. वे पतंजलि के योग सूत्रों का रामचरित मानस के आधार पर वर्णन कर रहे हैं. यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि ! ये आठ अंग रामायण के सात कांडों में व्यक्त हुए हैं ! वह कह रहे हैं कृपा का पात्र बनना है, अंतर घट को पावन करना है, उसे सीधा करना है तथा उसके छिद्रों को पूरना है.

सुबह अलार्म बजा तो वह पहले से ही जगी थी, परमात्मा को जगाने नहीं आना पड़ा, वैसे भी वह कहीं दूर तो है नहीं जो उसे आना पड़े. वह उनकी आत्मा ही तो है, प्रकाश उसका स्वरूप है, शांति, आनंद, प्रेम, सुख, शक्ति, ज्ञान तथा पवित्रता उसके गुण हैं, जिनके अनंत प्रकार हैं. वह परमात्मा छिपा नहीं है पर उनकी दृष्टि पर ही मोटे-मोटे पर्दे पड़े हैं. उसे देखने के लिए अंतर की आँख चाहिए. कल दिन भर जून ठीक रहे पर शाम को नन्हे का फोन आ गया. वह बंगलूरू में एक घर खरीदने की सोच रहे हैं. उनको भी अपनी स्वतन्त्रता उतनी ही प्रिय है जितनी उसे. कल आभास हुआ कि किसी को जब वे सलाह देते हैं तो उसे कैसे चुभती है, कोई भी नहीं चाहता कि कोई और उसे बताये कि उसके लिए क्या ठीक है, उसे क्या करना चाहिए. अब जबकि वह तथाकथित साधना कर रही है, अहंकार को विसर्जित करना जिसकी पहली शर्त है, उसे कितना नागवार गुजरा चाहे पल भर को ही, क्योंकि तुरंत भीतर वाले ने सचेत कर दिया, लेकिन अब उसे कान पकड़ लेने हैं, किसी को भूल कर भी कोई सलाह नहीं देनी है, क्योंकि उन्हें दी गयी पीड़ा उसे ही मिलने वाली है, अंततः वे जुड़े हए हैं. जून का उसे सम्मान करना करना है और उनकी रजोगुणी प्रवृत्ति स्वत: ही सतोगुण में बदलेगी, वैसे ही नन्हे की भी, वह ऊपर उठ रहा है, उसे तो केवल खुद को देखना है, भीतर कोई दम्भ न रहे, पाखंड न रहे, भेद न रहे, खाली हो जाये मन..तभी तो उस परमात्मा को भरा जा सकता है..सारी इच्छाएं बस इसी एक में मिल गयी हैं..एक ही काम है लिखना, पढ़ना और सुनना..   


Tuesday, October 18, 2016

जला हुआ दूध


फिर एक अन्तराल ! सुबह चार बजे ही अलार्म सुनकर नींद खुल गयी, न बजे तो पता नहीं कितनी देर से खुले. दिन ऐसे बेहोशी में बीत रहे हैं. आज दूध देर से आया था, दोपहर को गैस पर रख कर भूल गयी. जून को लंच के बाद बाहर तक छोड़कर आई तो दूध चूल्हे से उतारने के बजाय कम्प्यूटर के सामने बैठ गयी और पतीला बुरी तरह से जल गया. देखें कितना साफ होता है, नैनी को कहा है कि रगड़-रगड़ कर साफ करे. सारे घर में जले हुए दूध की गंध फ़ैल गयी है. ब्लॉग पर ‘गंगा’ कविता डाली, तस्वीर नहीं आ पाई, स्पीड बहुत कम थी. जून ने दोपहर को पपीते के परांठे की तारीफ़ क्या कर दी, सब भूल गयी. दुःख में मानव सजग रहता है, सुख उसे बेहोश कर देता है, पर उन्हें तो दोनों का साक्षी होकर रहना है. सजग होकर रहना ही आत्मा में रहना है. विचार सदा भूत या भविष्य के होते हैं, वर्तमान में कोई विचार नहीं होता, वर्तमान का पल इतना सूक्ष्म होता है कि बस वह होता है. पिछले दिनों जो पुस्तक पढ़ती रही उसने भी मन पर जैसे पर्दा डाल दिया था. खैर, ठोकर लगकर ही इन्सान सुधरता है. भीतर जो साक्षी है, वह तो अब भी वैसा ही है, निर्विकार और स्थितप्रज्ञ, यह जो उथल-पुथल मची है, यह अहंकार को ही सता रही है.

कल से एक नई किताब पढ़नी शुरू की है, जो कोलकाता यात्रा के दौरान खरीदी थी पर अभी तक पढ़ी नहीं थी. इसके अनुसार सबसे अच्छा ध्यान है कुछ भी न किया जाये, साक्षी भाव में रहा जाये. जब जरूरत हो तभी मन से काम लेना है, अन्यथा उसे शांत रहने दें. अपने आप आकाश में बादलों की तरह कोई विचार आये तो उसे गुजर जाने दें, बिना कोई टिप्पणी किये क्योंकि टिप्पणी करके भी क्या होगा, व्यर्थ ऊर्जा नष्ट होगी. जीवन में भी इसी सिद्धांत को अपनाना होगा तथा ध्यान में भी. हर समय इसी को पक्का करना होगा तब न अहंकार रहेगा न दुःख ! साक्षी भाव इतना सूक्ष्म है कि मन, बुद्धि की पकड़ में नहीं आता, जब कुछ न करें तो बस वही होता है लेकिन जैसे ही भीतर कोई स्फुरणा हुई वह लोप हो जाता है, बड़ा शर्मीला है ! अंतर के आकाश में जब वर्तमान का सूरज खिलता है तो अतीत के बादल छंट जाते हैं.

आज विश्व महिला दिवस है, उसे अपने भीतर अनंत शक्ति का उदय होता दिखाई दे रहा है. कल शाम को क्लब में पहली बार बिलियर्ड खेला. q तथा v का भेद जाना, अच्छा लगा. कोच अच्छी तरह सिखा रहे हैं. कुछ न कुछ नया सीखते रहना चाहिए. होली का उत्सव आने वाला है. होली का उद्देश्य है सारे मतभेद भुलाकर मस्त हो जाना, अद्वैत का संदेश देती है होली..एकता का, प्रेम का, मिठास का, मधुरता का..जब आम पर बौर छा जाते हैं और पलाश के फूलों से वृक्ष सज जाते हैं. भंवरे और तितलियाँ गुंजन करती हैं, जब हवा में मदमस्त करने वाली सुगंध भर जाती है. जब महुआ फूलों से लद जाता है. गाँव-देहात में फागुनी बयार की मस्ती में लोग फागुन गाते हैं और जब बच्चों की परीक्षाएं होने वाली होती हैं, तब होली आती है. रंगों की बातें करे तो हर रंग सुंदर है. सतरंगी यह जगत और सुंदर बन जाता है, तो होली पर कविता लिखी जा सकती है..


Thursday, March 31, 2016

खोया हुआ सा कुछ - निदा फाजली


जब कोई मर्यादा को तोड़ देता है तब पतन निश्चित है. ज्ञान की अग्नि में मन रूपी सोने को उन्होंने तपाया है किन्तु ज्ञान की मर्यादा का भंग भी वे कर देते हैं. सत्य तो यह है कि स्वयं को मुक्त जानकर मर्यादा रखते ही नहीं, बड़ों के प्रति सम्मान भी एक मर्यादा है, वाणी की भी मर्यादा है. उनके भीतर की ग्रन्थियों को जो खोल दे वही तो मर्यादा है. मर्यादा भंग करते-करते वे इतने असंवेदनशील हो गये हैं कि जिनके प्रति व मर्यादाहीन हो रहे हैं उनकी भावनाओं का भी ध्यान उन्हें नहीं आता. आज जून दिल्ली गये हैं, दो दिन बाद आएंगे. उसे आराम से रामकथा सुनने का मौका मिला है. संत कह रहे हैं सोच को हृदय तक लाना आयास-प्रयास से नहीं होता, ज्ञान को प्रेम में बदलना सायास नहीं होता. हृदय में स्वतः आना ही ज्ञान की सफलता है. बुद्धि और हृदय जब एक हो जाते हैं तभी योग होता है. हृदयवान व्यक्ति जब बुद्धि के बहकावे में आ जाये तो घाटे का सौदा है पर बुद्धिमान व्यक्ति जब हृदय के क्षेत्र में आ जाये तो यह परमात्मा तक की यात्रा है. निरंतर उस तत्व से जुड़ जाना ही संतुष्टि है. ऐसा संतोष जब मिलता है तब सारी तृष्णायें छोटी हो जाती हैं. असंगता, समता, निरभिमानी होना, अक्षोभता तथा अनंतता ये सभी ज्ञान की मर्यादाएं हैं. प्रेम की प्रगाढ़ता में ये टूटती हैं पर तब ज्ञान सफल हो जाता है. प्रेमी असंग नहीं होता, वह समता भी नहीं रख पाता, विरह उसे सताता है. प्रेमी अभिमानी भी है, उसे प्रियतम का और अपने प्रेम का अभिमान है. हाँ, प्रेम भी अनंत होता है. इसलिए इसकी तो चिंता ही नहीं करनी चाहिए यदि वे सभी को प्रेम बांटते रहे तो उनके पास कम हो जायेगा और यदि कोई बदले में उन्हें प्रेम न दे तो वे खाली हो जायेंगे, बल्कि जब कोई किसी को प्रेम देगा तो वह अपने आप पुनः भर जायेगा. परमात्मा ही तो प्रेम है, वही तो आनन्द है, शांति है, तो जब कोई किसी को इनमें से कुछ भी देता है तत्क्षण वह जगह भर जाती है. आज पुस्तकालय में मीटिंग थी, मुख्य अतिथि को उसने आदरपूर्वक असमिया गमछा पहनाया. आज की कथा में यह शेर भी सुना था पता नहीं किसका लिखा है-
ये तुझसे किसने कहा कि दिल गम से तबाह नहीं
ये और बात है कि मेरे लब पे आह नहीं
एक मैं हूँ कि सरापा सवाल हूँ
एक तू है कि तुझे फुर्सते निगाह नहीं !

निदा फाजली की पुस्तक खोया हुआ सा कुछ उसने पढ़ी, कल से पढ़ रही है. एक आत्मकथात्मक उपन्यास भी पढ़ा था. हर लेखक/ कवि/ कलाकार के भीतर साझा दर्द होता है, साझी खुशियाँ होती हैं. प्रकृति के विभिन्न रूपों से प्रेम, ईश्वर की मौजूदगी का अहसास या तलाश और रिश्तों को गहराई से महसूसने की ताकत, भीतर उमड़ता ढेर सारा प्यार, जिसे बिखरने के लिए कोई रास्ता नहीं नजर आता. निदा फाजली से पाठक का एक रिश्ता बन जाता है, वह उसे अपना जैसा लगता है. उनके दोहे भी अच्छे लगे. सीधे-सादे शब्दों में दिल की बात, दिल की गहराई से निकली बात ही दिल को छू जाती है.

‘वो सूफी का कौल हो या पंडित का ज्ञान
जितनी बीते आप पर उतना ही सच जान

माटी से माटी मिले, खो के सभी निशान
किसमें कितना कौन है कैसे हो पहचान

युग-युग से हर बाग़ का ये ही एक उसूल
जिसको हँसना आ गया वो ही मिट्टी फूल

जीवन भर भटका किये खुली न मन की गाँठ
उसका रस्ता छोड़कर देखी उसकी बाट’

आज तीज है, सावन के शुक्ल पक्ष की तीज. उसने सुबह-सुबह मंझले व बड़े भाई तथा बड़ी बुआ से बात की. जून कहते हैं वह भावनाओं को ज्यादा महत्व देती है, बुद्धि को कम. भावना के साथ-साथ बुद्धि का होना भी कितना आवश्यक है, मात्र भावना के कारण वह कितनी बार मूर्ख बनी है. मुरारी बापू कहेंगे, कोई बात नहीं, मूर्ख बनी है न, किसी को बनाया तो नहीं. खैर, ओशो कहते हैं कि बेवकूफ ही परमात्मा के मार्ग पर चल सकते हैं, पर वह कहते हैं ऐसा बेवकूफ बुद्द्धि का अतिक्रमण कर जाता है, यहाँ तो बुद्धि के लाले पड़े हैं, लांघने की बात ही नहीं है. परमात्मा की कृपा तो हर क्षण बरस रही है, लूट मची है, इतनी ज्यादा है कि दोनों हाथों में नहीं समाती, अनवरत बरस रही है, लगातार उसकी कृपा हरेक पर बरस रही है. वे आँखें मूँदे बैठे रहें तो कोई क्या करे. वर्षा पुनः शुरू हो गयी है. दस बजे तक रुक जानी चाहिए. आज सुबह स्वीपर नहीं आया, अब आया है जो उसके ध्यान का समय है. दस बजे एक परिचिता के यहाँ जाना है, उसे समय दिया है. पूजा की छुट्टियों वे यात्रा पर जायेंगे. जून ने अभी से टिकटें कर दी हैं. उनके जीवन में पहले से कहीं अधिक क्रियाशीलता है, इसका पता कल बनाई लिस्ट देखकर लगता है. उसे भी अपनी ऊर्जा का पूरा उपयोग करना है. आजकल कितने अनोखे अनुभव होते हैं, जैसे वह है ही नहीं, बस वही है. उसके हाथों की जैसे कठपुतली है, वह जैसा कहे वैसा करती जाये. कितना असीम है वह और कैसे एक मानव के हृदय में समा जाता है. कितना असंग है पर लगता है उसका संग कभी छूटता ही नहीं ! वह जादूगर है !