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Monday, August 17, 2026

ब्रह्मकमल की कलियाँ

ब्रह्मकमल की कलियाँ

आज दिन भर मौसम ठंडा बना रहा। बीच-बीच में होने वाली वर्षा के कारण तापमान पच्चीस डिग्री से ऊपर गया ही नहीं।सितम्बर में ओबीए की मीटिंग के लिए उन्हें कोयंबटूर जाना है। जून ने लोगों से होटल की बुकिंग के लिए एडवांस लेना शुरू कर दिया है। कल वे नन्हे का जन्मदिन मनायेंगे। सोनू श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी, जून ने केक का ऑर्डर दे दिया है। उनके फ़्लैट में काम पूरा हो गया है, वे देखने गये थे। घर पूरी तरह साफ़ था, सभी कुछ ठीक था। अब उसमें रहने वाले लोगों का इंतज़ार है। किरायेदार आयेंगे या ख़रीदार, यह तो समय ही बतायेगा। कल दो लोग घर देखने आने वाले हैं। 

आज सुबह नाश्ते में जून ने दोसा बनाया। सोनू ने साँवा चावल के साथ अलसी के बीज भी ब्रेड में डाले थे। लंच में पालक का सूप, कॉर्न और सैंडविचेज खाकर वे सरजापुर रोड पर स्थित ‘अरुआनी ग्रिड’ गये। जो बहुत बड़े इलाक़े में फैला एक गो कार्टिंग स्थल है। नन्हे ने वहाँ रेस कार चलायी। बहुत तेज गति से दौड़ती हुई कारें रोमांच उत्पन्न कर रही थीं। सूर्यास्त का समय हो रहा था, जब वे वहाँ से निकले। वापसी में हस्कर झील पर रुके। इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास स्थित इस विशाल, शांत और सुंदर झील के किनारे बगीचे और भ्रमण पथ बने हैं; मानो यह एक पिकनिक स्थल हो।भविष्य में वे सभी फिर एक साथ वहाँ जाएँगे। नन्हे ने बताया जब उसकी कंपनी का आईपीओ आ जाएगा तब वह कुछ अन्य कार्य करने की सोच सकता है।उसे ‘एक जीवन एक कहानी’ का पिछला अंक पढ़कर अच्छा लगा। उन्होंने सोचा है, नन्हे के चालीसवें जन्मदिन पर वे सभी लक्ष्यद्वीप जाएँगे। पापाजी से बात हुई, उन्हें इस महीने का ‘नवनीत’ का अंक मिल गया है।उन्होंने गूगल से हुई बातचीत का विवरण बताया, नन्हे को आशीर्वाद भी दिया। उनकी बातें सुनकर बहुत आनंद होता है। आज सोनू ने उसे इंस्टाग्राम के बारे में कुछ जानकारी दी। 

आज उन्होंने ‘बहत्तर हूरें’ देख ली, दिल को छूती है यह फ़िल्म, इस्लाम के ख़िलाफ़ नहीं है, पर उस सोच के ख़िलाफ़ है, जो युवकों को दहशतगर्द बना रही है। शाम को नन्हे का फ़ोन आया था, वह खुश लग रहा था, अच्छी तरह से तैयार भी था। आज उन्होंने ‘तरला दलाल’ पर बनी एक फ़िल्म देखनी शुरू की है, अच्छी है। भारत की  होम शेफ़ और कुकिंग पुस्तकों की प्रसिद्ध लेखिका तरला दलाल की पहली पुस्तक उसने वर्षों पहले ख़रीदी थी, और कितनी ही स्वादिष्ट डिशेज़ उसे पढ़कर बनायी थीं। उनकी एक पुस्तक उसे उपहार में मिली थी, उसे फिर से खंगाला। नन्हे को भी अवश्य याद होगा, उसकी पसंद के ब्लैक फारेस्ट केक बनाना भी नूना ने उसी पुस्तक से सीखा था। उनकी संघर्ष भरी जीवनी पर आधारित है यह फ़िल्म।

आज सुबह व शाम को बहुत दिनों बाद ‘योग साधना’ में अद्भुत अनुभव हुए। उनके भीतर चिदाकाश है और अनेक रहस्य छिपे हैं। ‘यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे’ ! पर वे थमकर देखते ही कहाँ हैं ? आज जून ने शाम को स्वयं कहा कि वह उसे कार चलाने का अभ्यास करायेंगे। उन्हें अवश्य ही तरला फ़िल्म से प्रेरणा मिली होगी। उनके भीतर भी पत्नी को आगे बढ़ाने में योगदान देने के लिए तरला दलाल के पति नलिन दलाल पर गर्व हुआ होगा। 

कल की तरह आज भी वे ड्राइविंग के अभ्यास के लिए गये। आज कई दिनों बाद हारून ख़ालिद की पुस्तक ‘वॉकिंग विद नानक’ आगे पढ़ी। धर्म के नाम पर कितने सिखों और हिंदुओं को मुस्लिमों ने मारा, इसका ज़िक्र भी वह करते हैं। आज भी यह हिंसा कम नहीं हुई है। आज सुबह वे पब्लिक हेल्थ सेंटर भी गये थे।ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण कराना था। उसके लिए चिकित्सा प्रमाणपत्र चाहिए। वहाँ पता चला, डाक्टर राधा मीटिंग में हैं, शाम तक मिलेंगी। वे वहाँ से फ़ोरम मॉल चले गये। नयी-नयी सब्ज़ियाँ मिल गयीं, शलजम, भिस, टिंडा और परवल, जो स्थानीय बाज़ार में नहीं मिलतीं। 

दीदी का फ़ोन आया। उत्तराखण्ड में कल उनके घर में बाढ़ का पानी भर गया था। विदेश से उनके दोनों पुत्र आये हुए हैं।सबने मिलकर पानी बाहर निकाला।पूरे उत्तर भारत में बाढ़ की स्थिति भयानक हो गई है। प्रधानमंत्री कल फ़्रांस जा रहे हैं , वहाँ पिछले दो हफ़्तों से हिंसा हो रही है। भारतीय सेना की टुकड़ियाँ फ़्रांस के राष्ट्रीय दिवस में भाग लेंगी। 

आज महीनों बाद दीर्घ सुदर्शन क्रिया की। इतवार को नाड़ी परीक्षा है। शुक्रवार से ‘हैप्पीनेस कोर्स’ भी होने वाला है। आज सुबह वे देर से उठे। एक बार उठने के बाद दुबारा सोने पर एक स्वप्न देखा। कितना विचित्र था वह स्वप्न, अनोखे फूल तथा जीवंत पंछी-पशु देखे। कैसे मन स्वयं ही सभी आकार ग्रहण कर लेता है स्वप्न में। 

आज वे असम में जून के अधिकारी रह चुके मित्र व उनके परिवार से मिलने गये। उन्होंने सदा की तरह स्वागत किया। गृह स्वामिनी ने दक्षिण भारतीय भोजन खिलाया। मूँगफली का लड्डू और गुड़ वाली काफ़ी भी स्वादिष्ट बनी थी। बाद में इस्तेमाल करने के लिए घर का बना इडली मिश्रण भी उसे दिया। वहाँ से वे कंपनी के एक स्वर्गीय वरिष्ठ अधिकारी की वृद्धा पत्नी से मिलने गये। उन्होंने अपने पुराने दिनों के अनेक किस्से सुनाये। मनीपाल व नारायण दोनों अस्पतालों में उनके पति का इलाज हुआ था। उन्हें काफ़ी प्रयत्न करना पड़ा था ताकि कंपनी से मिलने वाली सहायता प्राप्त कर सकें। अगले हफ़्ते से वह महाजोंग सिखाने वाली हैं। अपनी सोसाइटी में होने वाले कार्यक्रमों में भी वह भाग लेती हैं। वह नौवें दशक में हैं, पर इस उम्र में भी बहुत सक्रिय हैं।

पापाजी ने भी ओशो की किताब का कुछ भाग सुनाया।वह मानवों के मध्य होने वाले हर तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ थे, सारे संत होते हैं, जैसे गुरु नानक थे।अपने समय से बहुत आगे। हिंदू-मुस्लिम दोनों को आपसी भेदभाव भूलकर मेल-मिलाप से रहना सिखाते थे। ब्रह्म कमल में फिर से कलियाँ आयी हैं, शायद एक-दो दिन में खिलेंगीं।  


Friday, July 31, 2026

गीत गतिरूप

गीत गतिरूप

आज सुबह कुछ पुरानी कविताओं को दुरस्त किया। उस समय मात्राओं की गणना के लिए ‘गीत गतिरूप’ नहीं था। काव्यालय की वाणी जी द्वारा निर्मित यह एक उपयोगी डिजिटल सॉफ़्टवेयर है जो काव्य में छंद बद्ध कविताओं की मात्राओं की सटीक गणना करता है। इसमें शब्दों के पर्यायवाची भी दिये गये हैं, जिससे उचित शब्द ढूँढने में समय बचता है।  शाम को टहलने के लिए उन्होंने जैसे ही घर से बाहर कदम बढ़ाया, वर्षा आरंभ हो गई। इस समय थम गई है। समय की धारा मंथर गति से बहती जा रही है, अब लगता है, जैसे न कुछ पाना है, न कुछ जानना है, एक ठहराव सा आ गया है मन में। कल बच्चों के साथ “आदिपुरुष” देखने जाना है। फ़िल्म के बारे में एक विशेष व रोचक बात का ज्ञान हुआ, जहाँ कहीं भी यह फ़िल्म दिखायी जा रही है, एक सीट हनुमान जी के लिए ख़ाली रखी जाती है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी चिंरजीवी हैं और जहाँ राम कथा होती है, वह उपस्थित रहते हैं। अगले हफ़्ते उन्हीं मित्र दंपत्ति ने अपनी बिटिया के यहाँ बुलाया है। बिटिया बाहर गई है, उसका पालतू कुत्ता घर पर है, जिसकी देखभाल के लिए वे दोनों गये हुए हैं। वह इलाक़ा दो घंटे दूर है, बैंगलोर में दूरी किलोमीटर में नहीं बल्कि समय में नापी जाती है। वहाँ उन्हें यात्रा के लिए कुछ ख़रीदारी भी करनी है। गुजरात के कच्छ में आया विनाशकारी चक्रवाती तूफ़ान बिपरजॉय अब कमजोर हो गया है। कच्छ के अलावा और भी कई तटीय ज़िलों पर इसका असर पड़ा। इसके कारण बहुत मात्रा में आर्थिक नुक़सान हुआ। अब यह राजस्थान की ओर बढ़ गया है। जहाँ इसका प्रभाव दिखायी दे रहा है। 

उन्होंने ‘आदिपुरुष’ देख ली है।फ़िल्म में अंधेरे के दृश्य अधिक हैं। कई बार किसी विदेशी फ़िल्म जैसी लग रही थी। फ़िल्म की भाषा भी कुछ और संयत हो सकती थी। हिन्दी के किसी जानकार को संवादों के हिन्दी में अनुवाद दिखा लेने चाहिए थे। फिर भी कुल मिलाकर फ़िल्म अच्छी ही कही जाएगी। वैसे बहुत लोग इसकी आलोचना भी कर रहे हैं। वे सुबह नाश्ते के बाद घर से निकले थे और रात को नौ बजे लौटे। नूना ने यात्रा के लिए जूते ख़रीदे।जून ने घर के लिए सामान ख़रीदा। घर में क्या ख़त्म हो रहा है, क्या लेना है, इसका उन्हें बहुत ध्यान रहता है। 

कल रात सोने में देर हुई सो सुबह भी देर से शुरू हुई। टहलने गये तो प्रतिदिन की तरह धुंधलका नहीं था। दिन निकल आया था।पीले चंपा के फूल, रोज़ जिनकी सुगंध ही आती थी, आज साफ़ दिखायी दे रहे थे। मधु मालती की एक बेल भी एक दीवार पर चढ़ी हुई थी, बहुत सुंदर तस्वीर आयी है उसकी। जून के बनाये नाश्ते में दोसा था और मूँगफली की चटनी, कल छोटी बहन ने उसकी विधि बतायी थी। नन्हे ने उसके लिए लकड़ी का एक और कैनवास भेजा है रंग भरने के लिए, ‘पट्टचित्र’ नाम है उसका, दोपहर को एक घंटा उसमें रंग भरे। ऑडिबल पर हिन्दी के एक प्रसिद्ध लेखक ‘स्वयंप्रकाश’ की आत्मकथा ‘धूप में नंगे पाँव’ का कुछ अंश सुना। बहुत रोचक है। संस्मरण के साथ इसमें यात्रा वृत्तांत भी है और डायरी लेखन भी। शाम को नूतन की एक पुरानी फ़िल्म ‘गौरी’ देखी। जिसमें एक दृष्टिहीन लड़की की दुख भरी कहानी है।आज भी कुछ पुरानी कविताओं की वर्तनी सुधारी। सांध्य भ्रमण के समय छोटे-छोटे गुलाबी फूलों के चित्र उतारे, फूलों का संसार कितना अद्भुत है। ऐसे ही तितलियों और मछलियों का भी। नये घर में लकड़ी का काम अभी भी चल रहा है। यह महीना समाप्त होते-होते पूरा हो जाएगा। चिमनी को छोड़कर, जिसका आना अभी शेष है। 

आज शाम को आकाश में काले घने बादल छाये थे। कितने आकार नज़र आ रहे थे उनमें, लेटे हुए बच्चे का, योगासन करते हुए एक व्यक्ति का भी, चित्र उतारे। कंचन के पेड़ आजकल फूलों से भर गये हैं। जून के महीने में ऐसा होना केवल बैंगलोर में ही संभव है, जहाँ साल भर फूल खिलते हैं। हर सिंगार के फूलों से रोज़ सुबह उनका लॉन भर जाता है। दोपहर को चित्रकला का काम आगे बढ़ाया। आज से बेनजीर भुट्टो की आत्मकथा ‘मेरी आपबीती’ सुननी शुरू की है। कितना संघर्ष भरा जीवन रहा उनका, बच्चों को उनसे दूर रहना पड़ा, क्योंकि पाकिस्तान में उनकी सुरक्षा को ख़तरा था। जून आज सुबह कुछ परेशान थे। लिवस्पेस से उन्होंने चिमनी के लिए कहा था, पर वे पूरा खर्च उठाने को तैयार नहीं हैं, जबकि पहले इसके लिए वे तैयार थे। अब दोनों को आधा-आधा ख़र्चा करना होगा।  

आज ‘विश्व योग दिवस’ है। मोदी जी ने यूएन में एक सौ पैंतीस देशों के लोगों के साथ ‘योग अभ्यास का नेतृत्व किया। जो गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। इस बार की थीम है, वसुधैव कुटुंबकम् के लिए योग। यह थीम भारत के ‘एक धरती, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना को सुदृढ़ करती है। नूना ने सुबह-सुबह एक कविता लिखी, उसे टाइप किया फिर रिकॉर्ड किया। पर योग दिवस के दिन ही योग साधना नहीं कर पायी। सोसाइटी के ‘खेल स्टेडियम’ में जाकर पता चला, योग दिवस के उपलक्ष्य में सुबह साढ़े छह बजे ही वहाँ एक घंटे का सत्र हो चुका है। आज उन्हें मित्र परिवार से मिलने जाना था। दोपहर के भोजन में सखी ने रसम-चावल, भिंडी व रायता परोसा। नन्हे ने ड्राइवर सहित गाड़ी भेज दी थी, वही ले गया। कुछ देर विश्राम करने के बाद सब लोग कमर्शियल स्ट्रीट गये। जहाँ एक दुकान से आगामी कश्मीर यात्रा के लिए सभी ने कुछ न कुछ गर्म वस्त्र ख़रीदे। 

आज वे फिर नेत्रालय गये थे। जून को डेंटिस्ट के पास भी जाना था।कल शाम को घर लौटने के बाद बायीं आँख के बायीं तरफ़ हल्की सी चमक आ रही थी। आँख के सामने एक फ़्लोटर भी था। डाक्टर ने कहा, कैट्रैक्ट के बाद ऐसा होना स्वाभाविक है, कुछ दिनों बाद अपने आप ठीक हो जाएगा। लौटते समय वे फ़्लैट का काम देखने भी गये। कल शाम तक सफ़ाई का काम हो जाएगा और परसों बिजली के बल्ब व पंखे आदि लग जाएँगे। इतवार को बच्चों के साथ वे पुनः जाएँगे। 


Monday, July 27, 2026

सूरज के अठारह पौधे

सूरज के अठारह पौधे


आज भी वे आयुर्वेदिक अस्पताल गये थे। पंचकर्म के अगले अंग ‘अभ्यंग’ का आज प्रथम दिन है। वैद्य ने उन्हें इसके बारे में आवश्यक जानकारी दी। ग़लत आहार-विहार, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, व्यायाम की कमी आदि कारणों से शरीर में त्रिदोष इकट्ठा हो जाते हैं, औषधि युक्त गर्म तेल से मालिश करने से अर्थात अभ्यंग से शरीर को स्वस्थ किया जाता है। इससे तन और मन की ऊर्जा में संतुलन आता है। वात के कारण शरीर में आये रूखेपन को यह दूर करता है। रक्त प्रवाह व अन्य द्रवों के प्रवाह में सुधार आता है। जोड़ों और मांसपेशियों की अकड़न-जकड़न दूर होती है। त्वचा की सारी अशुद्धियाँ दूर होती हैं और विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। पाचन तंत्र ठीक होता है।  शिरोधारा के लाभ भी बताये, इससे तंत्रिका तंत्र शांत होता है। नींद की गुणवत्ता बढ़ती है। इसमें जड़ीबूटियों से युक्त गुनगुने तेल को मस्तक पर धारा के रूप में डाला गया। तन कितना हल्का लग रहा है। अभी और तीन दिन स्नेहन व स्वेदन क्रिया होगी। उसके बाद विरेचन क्रिया करायी जाएगी। 

आज अभ्यंग का दूसरा दिन था। शरीर और हल्का हो गया है। शाम को लगभग बीस मिनट तक नूना घर पर ही टहलती रही, जब जून नन्हे और सोनू को लेने गये थे। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने आज भी फ़ेसबुक पर उसकी कविता पर कमेंट लिखा। वह आज अकेले हैं, भाभी अपनी माँ-पिताजी से मिलने गई हैं।कल लौट आयेंगी। वह बहुत साहसी महिला हैं।नूना ने मृणाल ज्योति की पत्रिका में लिखने के लिए पहले कई लोगों को लिखा था, सभी को स्मरण-पत्र भेजे, देखें, कितने लोग अपनी रचनाएँ भेजते हैं। 

आज सुबह वे उठे तो स्वास्थ्य ठीक था, कल की क्रिया के बाद दुर्बलता महसूस हो रही थी। धीरे-धीरे वे सामान्य भोजन करने लगेंगे। लेकिन अब इस बात का ध्यान रखना है कि पुनः शरीर में भारीपन न होने पाये। संतुलित आहार, समुचित व्यायाम, नियमित प्राणायाम और ध्यान, किसी भी व्यक्ति की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अति आवश्यक हैं। आज वे सुबह-शाम थोड़ी देर टहलने भी गये। जीवन जैसे ठहर सा गया है, पर समय बदलते देर नहीं लगती। आज शाम को तेज वर्षा हुई, तब उनके मित्र दंपत्ति यहीं बैठे थे। कश्मीर जाने के लिए थॉमस कुक को बुक करने की बात हुई। पापाजी ने नवनीत में पढ़े एक लेख पर चर्चा की, जो दलित समस्या पर है। उन्हें जैसे पूरा लेख याद ही था, वह बहुत ध्यान से और गहराई से पढ़ते हैं। नूना ने भी पर्यावरण पर कई आलेख पढ़े, समस्या बहुत बड़ी है और जो लोग विकास में समाधान ढूँढ रहे हैं, वे असफल ही होंगे। आज नन्हे ने जून के एक मित्र के पुत्र के लिए किताबों का एक सेट भेजा है, अवश्य उसे पसंद आयेंगी। कल उसके उपनयन संस्कार में उन्हें जाना है। 

आज वे बहुत दिनों बाद आश्रम गये। गुरुजी को भी आमने-सामने बहुत दिनों बाद सुना। वही सादगी, वही सरलता और सवालों के सटीक जवाब। आयुर्वेदिक चिकित्सा के बाद शरीर व मन जैसे नये हो गये हैं। जीवन को हर ओर से गुरुकृपा ही सम्भालती है। गुरुजी के कारण ही यह घर मिला, आश्रम तथा अस्पताल मिला। उन्हीं के कारण ज्ञान मिला, प्रेम शांति और आस्था का वरदान मिला। आज सुबह सवा दस बजे वे जनेऊ संस्कार में शामिल होने भी गये थे, डेढ़-दो घंटे रहे। पूजा काफ़ी देर तक चलती रही। बहुत लोग आये थे। आज वर्षों बाद फ़ेसबुक पर तस्वीर बदली, वर्षों से वही चल रही थी। अब अगले दस वर्ष यही रहने वाली है। बहुत लोगों ने कमेंट किया है। 

आज सुबह वे दो हफ़्ते बाद दूर तक तथा देर तक टहलने गेय। शरीर में हल्कापन आ गया है और मन में भी।संभवत: ऊर्जा व शक्ति लेने के कारण भी, एक टेबलेट फ़ार्म में एक ड्राप फॉर्म में। ! अभी रात्रि के आठ भी नहीं बजे हैं और वे रात्रि भोजन के बाद भ्रमण करके भी आ गये हैं। पढ़ाई-लिखाई के लिए पूरा एक घंटा है। आज शाम को दो छात्राएँ हिन्दी पढ़ने आयी थीं। अगले हफ़्ते उनके यूनिट टेस्ट हैं। लगता है, आजकल बच्चे केवल परीक्षा देने के लिए ही पढ़ते हैं, ज्ञान पाने के लिए या पढ़ने का आनंद लेने के लिए नहीं। कल फिर आयेंगी, ऐसा कहकर गयी हैं। आज हफ़्तों बाद जून ढेर सारे फल व सब्ज़ियाँ लाए हैं। पिछले दिनों आहार कितना सीमित था। 

आज उन्होंने अवतार कृष्ण कौल द्वारा निर्देशित उनकी पहली और अंतिम, एक पुरानी श्वेत-श्याम फ़िल्म देखी ‘२७ डाउन’। रमेश बख्शी के उपन्यास ‘अठारह सूरज के पौधे’ पर आधारित है यह फ़िल्म। नायक संजय बचपन से ही पिता के ख़ौफ़ में जीता आया है, उसके जीवन के निर्णय वही लेते हैं और वह उनके परिणामों से भागता रहता है। कितने ही डर मानव के मन में समाये रहते हैं, जिनसे बचने के लिए वह अपने ही ख़िलाफ़ खड़ा हो जाता है। इस फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। शाम को पापाजी से बात हुई। सुबह दीदी-जीजाजी, बड़े भाई, मंझले भाई-भाभी सभी से। भीतर आनंद हो तो वह बाँटना चाहता है। जून ने भी छोटी बहन, अपने एक मित्र व सोनू से बात की। नन्हे ने इतवार के लिए ‘आदिपुरुष’ की टिकट बुक कर दी है। नई फ़िल्म है। 

आज का दिन चन्दर और सुधा के नाम रहा। यू-ट्यूब पर उसका पाठ सुना, फिर हॉट स्टार पर उस पर बना धारावाहिक देखा, कितनी मार्मिक कथा है दोनों की। धर्मवीर भारती का यह उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ वर्षों पहले पढ़ा था। ऐसे ही शेखर - एक जीवनी भी याद है। कभी न कभी पढ़ने या सुनने को मिल जाएगा। पापाजी व छोटी भाभी से बात की। छोटे भाई से बात किये बहुत दिन हो गये हैं। इस इतवार को अवश्य करेंगे। जून आजकल ख़ुश रहते हैं। उनकी कश्मीर यात्रा के लिए टिकट बुक हो चुके हैं।


Wednesday, July 8, 2026

माई

माई 


आज सुबह भी नूना ने सूर्योदय की सुंदर तस्वीरें उतारीं। वापस आकर वे प्रतिदिन की तरह छत पर गये, हवा ठंडी थी, पर एक घंटे बाद धूप निकल आयी थी। दरवाज़े पर नयी घंटी लगी है, उसकी आवाज़ ऊपर तक नहीं गई, नीचे आये तो देखा, नैनी बाहर प्रतीक्षा कर रही थी।उसने ध्यान दिया, आजकल नाश्ता, लंच, डिनर सब कुछ गाय के दूध से बने मक्खन या घी से ही बन जाता है, नंदिनी दूध इस हिसाब से बहुत शुद्ध है।शाम को टहलते समय इसरो के एक भूतपूर्व अधिकारी व उनकी पत्नी से मिले, कुछ देर बातचीत होती रही।उन्होंने जून को सोसाइटी के नये बने तरणताल में तैरने आने के लिये कहा है। कल उन्हें ख़ाली पड़े उस फ़्लैट में भी जाना है, इंटीरियर कराने की बात करने के लिए दो बढ़ई बुलाये हैं। घर बिक नहीं रहा है, इसलिए किराए पर देने की बात मन में आई है। जून को व्यस्त रहने के लिए एक रोचक काम भी मिल जाएगा। आजकल वह उत्साह से भरे रहते हैं । असम के एक पुराने परिचित यहाँ आये हुए हैं, उनसे मिलने के लिए वेगा मॉल जाने को भी तैयार हैं। जीवन ऐसे ही रंग बदलता रहता है। पापाजी से बात हुई, वह अपनी बात कहते रहे, सुनने में अब उन्हें थोड़ी मुश्किल होने लगी है। असमिया सखी से बात हुई, वह अपना घर बनवा रही है, आने वाली बाधाओं को ख़ुशी-ख़ुशी झेलते हुए।

अभी कुछ देर पहले नन्हे का फ़ोन आया।वह कल सुबह आएगा। जून की कार आज उस सोसाइटी के गैराज में खड़ी करते समय ख़ंबे से टकरा गई थी, जहाँ वह बढ़ई से मिलने गये थे। नन्हा उनकी गाड़ी ले जाएगा व अपनी छोड़ जाएगा। उसमें तीन सौ साठ डिग्री देखने वाला कैमरा लगवाना है जो चारों तरफ़ किसी भी वस्तु के निकट आने पर अलार्म बजा देगा। उसके बाद कार का डेंट भी ठीक करवाना है। नन्हे ने एक बार भी सीख नहीं दी कि गाड़ी ठीक से पार्क करनी चाहिए थी। दुर्घटना तो किसी से भी हो सकती है। दोनों बढ़ई अपना कोटेशन देंगे, जून उसमें से एक का चुनाव करेंगे। रात्रि भ्रमण के समय उन्होंने एक बच्चे के साथ कुछ देर बैडमिंटन खेला, वह अकेला ही खेल रहा था। पापा-माँ दोनों जॉब में व्यस्त रहे होंगे। कामकाजी महिला के बच्चे (यदि अकेला बच्चा हो तो और भी )कितना अकेलापन महसूस करते होंगे। आज एओएल का एक अनुवाद कार्य आया है। अक्षय तृतीया के दिन बृहस्पति मेश राशि से मीन राशि में जा रहे हैं, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसी के बारे में है। आज उसने नैनी से ज्वार की रोटी बेलना सीखा। इतना कठिन भी नहीं है, उसे लगातार घुमाते रहना है, वरना बिना टूटे हाथ पर उठा नहीं सकते। 

अभी कुछ देर पहले वे रात्रि भ्रमण से लौटे हैं। आज एक नये रास्ते पर गये, कुछ नये घर देखे। हर घर अपनी तरह से बेहद सुंदर लग रहा था, अलग-अलग डिजाइन और अलग-अलग पौधों से सजा। श्वेत-श्याम रंग का एक बड़ा सा चितकबरा कुत्ता मिला, छोटी गाय के आकार का, उसका नाम उस दिन किसी ने बताया था, शायद डालमेटियन, या डालमेशियन । आज श्री अरविंद की पुस्तक ‘ऐस्से ऑन गीता’ पर एक व्याख्यान सुना, श्री अरविंद ने गीता को समझने की एक नयी दृष्टि दी है। शाम को पापाजी से काफ़ी देर तक बात हुई, वह ठीक से सुन भी पा रहे थे। उन्होंने कनाडा से आये छोटे नाती से हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया। जब वह छोटे थे और पाकिस्तान से भारत आये थे, वह उनकी उस समय की कहानी सुन रहा था।उनके दादाजी का मकान गाँव में था, वह खेती करते थे। चार भाइयों में बँटवारा हो गया। उनके पिताजी को खेती में रुचि नहीं थी, अपना थोड़ा-बहुत हिस्सा लेकर वह परिवार के साथ शहर आ गये। हकीम का काम सीखकर उसी को आजीविका का साधन बनाया। बाद में विभाजन हुआ और भारत आकर नये सिरे से शुरुआत करनी पड़ी। आज वह आज दोपहर उसने कुछ देर ध्यान किया, उसे लगता है, प्रगति नहीं हो रही है, पर यह भी तो अहंकार को बढ़ाना ही होगा। ईश्वर ने जहाँ रखा है, वहीं रहकर मन को शुद्ध करना है। नन्हा आज सुबह नहीं आ पाया था, जून अपनी कार गैराज में दे आये हैं। परसों मिलेगी। 

आज ईद है। जून ने चार किलो इमाम पसंद आम मँगवाये हैं। दुकानदार अपनी गाड़ी से घर आकर दे गया, साथ में उसका छोटा सा बेटा भी बैठा था। निकट ही क़स्बे के बाज़ार में उसकी फलों की दुकान है, शायद एक से अधिक। पूरे मौसम वे उसी से आम लेते हैं। आज सुबह वाली नैनी नहीं आयी, उसके ससुर का देहांत हो गया, शायद हफ़्ता भर न आये।शाम वाली भी अगले हफ़्ते छुट्टी पर जा रही है।    

आज सुबह वह छत पर योग साधना करने गयी तो सोलर पैनल के नीचे पड़े बोगनवेलिया के फूलों को देखा, जो झर कर उड़ते हुए वहाँ इकट्ठे हो जाते हैं। प्रेरणा हुई कि दायीं आँख से देखे, उठने के बाद से कुछ भारी लग रही थी। फूलों का रंग मटमैला दिखा, फिर बायीं आँख से देखा तो हल्का गुलाबी। मोबाइल पर मोतियाबिंद के बारे में पढ़ा, सुना, जून को बताया तो उन्होंने नन्हे को बता दिया। नन्हे ने डाक्टर से मिलने का समय ले लिया और वे फल खाकर आँख के अस्पताल चले गये। नन्हा वहीं आ गया था। अगले शनिवार को सर्जरी होगी। मल्टी फ़ोकल लेंस लगाया जाएगा। परमात्मा की असीम कृपा है कि समस्या का पता चलते ही समाधान सम्मुख आ गया। नूना, नन्हे व जून का जितना शुक्रिया अदा करे वह कम है। दोनों उसका बहुत ख़्याल रखते हैं। शाम को पापाजी ने पूछा, आज फ़ेसबुक पर कुछ पोस्ट नहीं किया। सर्जरी के बाद तो कुछ दिन कंप्यूटर व मोबाइल से दूर रहना होगा, तब उन्हें बताना पड़ेगा। टीवी पर पहली बार आशा भोंसले द्वारा अभिनीत एक मार्मिक फ़िल्म देखी, ‘माई’ बहुत दिनों बाद पद्मिनी कोल्हापुरे को भी देखा। सासु माँ की कितनी बातें याद आ गयीं, जब उन्हें भी भूलने की बीमारी हो गई थी। 

आज सुबह लगभग दस बजे नन्हा व सोनू आ गये थे। सोनू के माँ-पापा भी आये थे। दोपहर को बच्चों ने स्वादिष्ट ‘थाई भोजन’ बनाया। सभी को पसंद आया। सभी ने एक साथ बैठकर कुछ देर एक फ़िल्म देखी, फिर निकट की एक झील पर ड्रोन उड़ाने गये। वहाँ बहुत भीड़ थी, कुछ बच्चे और महिलाएँ झील के पानी में उतर गये थे। शायद वे पहली बार वहाँ आये थे। वे लोग एक दूसरी झील पर गये, जहाँ अपेक्षाकृत कम लोग थे, वातावरण में शांति थी। वहीं चटाई बिठाकर कुछ देर सब बैठे और साथ लायी चाय का आनंद लिया। शाम को लौटने में सवा छह बज गये थे। 


Thursday, May 14, 2026

पिनोकियो

पिनोकियो 


आज असम में ‘विश्वकर्मा पूजा’ मनायी जा रही होगी, उन्होंने ऑनलाइन ही मना ली, नूना ने कविता पोस्ट की, जून ने व्हाट्सएप पर सभी को शुभकामनाएँ भेजीं।।आज पहली बार वे दोनों पिछली लेन के केरल वासी एक पड़ोसी परिवार के यहाँ गये।वे लोग हिन्दी अच्छी तरह जानते हैं। इसी वर्ष वे मेघालय जाने वाले हैं, कई बातें जानना चाहते थे, जून ने उन्हें उपयोगी जानकारी दी।आज मोदी जी का जन्मदिन है, देश भर में कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। वह देश के प्रथम सेवक हैं, देश के कल्याण के लिए पूर्ण समर्पित नेता ! आज उसने आई पैड पर जर्मन विद्वान फ़्रेडेरिक मैक्स मुलर की एक अति प्राचीन पुस्तक पढ़नी शुरू की है, ‘व्हाट वी कैन लर्न फ्रॉम इंडिया’। जो कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में भारतीय सिविल सेवा के उम्मीदवारों को दिये गये उनके भाषणों का संकलन है। ब्रिटिशर्स के मनों से भारत के प्रति पूर्वाग्रहों को दूर करना और भारत की प्राचीन संस्कृति को उजागर करना ही संभवत: उनका उद्देश्य था। 


आज बच्चे साढ़े ग्यारह बजे आ गये और शाम को सात बजे गये।नूना ने ‘कैनवा’ पर कार्ड बनाना सीखा, जो बहुत ही रोचक ग्राफ़िक डिजाइनिंग प्लेटफ़ार्म है, यहाँ कोई आसानी से पोस्टर, कार्ड आदि बना सकता है। कल उसे डेंटिस्ट के पास जाना है।छोटी भांजी से बात हुई, वह बैंगलोर आ रही है, उसके तीन नन्हे दुलारों से मिलकर बहुत अच्छा लगेगा।


डेंटिस्ट ने कहा, नया दाँत इंप्लांट करना पड़ेगा, काफ़ी खर्च होगा व समय भी लगेगा।आज इंग्लैंड की महारानी का अंतिम संस्कार हो गया। 


आज सुबह वे रक्त जाँच के लिए गये, कल दोपहर को रिपोर्ट मिल जाएगी, अगले सोमवार को डेंटिस्ट के पास जाना है। उडिपी में नाश्ता किया, कुछ देर आश्रम में धूप में बैठे और ध्यान किया। वापस आकर उसने दाँतों पर एक कविता लिखी, जो सुबह से ही मन में आ रही थी। हिंदी में दाँतों पर अनेक मुहावरे हैं, एक से बढ़कर एक। बहुत दिनों बाद शाम को ‘विष्णु सहस्त्रनाम जप’ में सम्मिलित होने गई। एक नन्हा सा बच्चा पूरे समय बैठा रहा, शांति से सुनता रहा और बाद में प्रसाद भी लेकर आया। दो हिंदी भाषी महिलाएँ भी मिलीं। शुक्रवार को ‘ललिता सहस्त्रनाम’ का जप होगा।

 

आज रक्त जाँच की रिपोर्ट आ गई है।प्रिडायबिटीज़ के लक्षण हैं। विटमिन डी भी कम है। पहले तो मन कुछ विचलित हुआ, फिर पढ़ा भारत में लगभग २५-३० प्रतिशत लोगों को मधुमेह है, वह भी उनमें एक से एक हो सकती है, यदि समय पर कदम नहीं उठाये। भोजन के बाद या फ़ास्टिंग शुगर टेस्ट नहीं करवाया था, बल्कि HbA1c टेस्ट करवाया था, जो पिछले तीन महीनों के शुगर लेवल को बताता है। कल से खाने में कुछ परिवर्तन करने हैं। दोपहर को सोना भी बंद करना होगा। व्यायाम अधिक करना होगा। आज सुबह समय से उठे थे, प्रातः भ्रमण के बाद छत पर आसन भी किए, हवा शीतल थी। सूर्योदय देखते हुए सूर्य नमस्कार करना तथा धूप की चमक चेहरे पर महसूस करते हुए प्राणायाम करना बहुत ही आनंददायक था।जून को आज दस दिनों  बाद अपनी गाड़ी वापस मिल गई। सुबह वे सब्ज़ी लेने गये थे, अब अधिक महँगी हो गयीं, ऐसा उन्हें लगा।


आज शाम को पाँच बजे भांजी आयी थी अपने तीनों बेटों के साथ, उसके सास-ससुर भी साथ थे। नौ बजे से कुछ पहले वे लोग चले गये, बच्चों को नींद आ रही थी। उनका छोटा सा साथ अच्छा लगा, नाश्ते के बाद उन्हें मैंगो पार्क घुमाने ले गये, झूला पार्क भी। आम के बगीचे में बच्चे बहुत ही सहजता से पेड़ों पर चढ़ गये।झूलों पर भी बहुत मज़ा किया। घर लौटे तो नन्हा उन्हें कंप्यूटर गेम खिलाता रहा। नन्हा और सोनू, बच्चों की पसंद के बहुत से व्यंजन बनाकर लाए थे। 


आज महीनों बाद दीर्घ सुदर्शन क्रिया करने का अवसर मिला। अच्छा लगा। दोपहर को भांजी के आगमन पर एक कविता लिखी और भेजी। उन्हें यकीनन अच्छा लगा होगा पढ़कर, पापाजी को भी पसंद आयी। कल से नवरात्रि का उत्सव आरम्भ हो रहा है।


मोह व आसक्ति आदमी को बहुत दुख देते हैं। आज सुबह से इसका अनुभव हो रहा है, हुआ है। अहम् और ममता दोनों ही आत्मा को अनुभव करने में बहुत बड़ी बाधा हैं। परमात्मा की अखंड समीपता का अनुभव करने के लिए मन को राग-द्वेष से मुक्त रहना होगा। जिस वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति से वे जितना अधिक सुख चाहते हैं, वह उतना ही दुख का कारण भी बनता है। आज शाम को मृणाल ज्योति की  एक मीटिंग में भाग लिया। उससे पूर्व अनुवाद कार्य।


आज शाम वे आश्रम गये थे। ‘कला अर्पण’ के अन्तर्गत कुछ कार्यक्रम देखे। गायन व नृत्य दोनों ही बहुत उच्च कोटि के थे, पर सबसे अच्छा लगा सूर्यास्त का दर्शन,  झुंड में उड़ते हुए पक्षी अपने  नीड़ों की ओर जा रहे थे। हवा शीतल थी और आकाश सिंदूरी ! रुद्र पूजा अभी शुरू नहीं हुई थी, गुरुजी नहीं आये थे, पर जून को घर आने की जल्दी थी, सो वे सात बजे तक घर आ गये। शेष कार्यक्रम यू ट्यूब पर देखा। 


सुबह दस बजे वे डेंटिस्ट के पास जाने के लिए निकले, ग्यारह बजे पहुँच गये। अनुभव अच्छा रहा। ओटी में जाने से पूर्व पीने के लिये ग्लूकोज़ दिया गया। पूरी प्रक्रिया में लगभग दो घंटे लगे।पहले एक दाँत निकाला, फिर दो प्रत्यारोपण किए। अड़तालीस घंटे तक सावधानी बरतने को कहा है। अभी तक तो कोई दर्द नहीं है। डेंटिस्ट के यहाँ से वे नन्हे के घर चले गये, वही खिचड़ी व सब्ज़ी खायी।सोनू ने रात के लिए भी कुछ दे दिया है। उसने बहुत ध्यान रखा। 


आज गुजरात में पहली बार राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन हुआ। सात साल के बाद ये खेल हो रहे हैं, जिसमें सात हज़ार से अधिक खिलाड़ी छत्तीस अलग-अलग खेलों में भाग लेंगे।उसके दाँत में दर्द नहीं है, सूजन अभी भी है। दिन भर घर में ही रहे, विश्राम किया, कल भी ज़्यादातर आराम करना है, परसों से सामान्य दिनचर्या शुरू हो जाएगी।  


सितम्बर का अंतिम दिन ! इस समय दायें गाल में सूजन कम है। आज शाम को टहलने भी गये। पापाजी से बात हुई, बड़े भाई उनके पास आये हुए हैं, उन्होंने ‘पिनाकियो’ फ़िल्म दिखायी पापाजी को। जिसमें एक लड़का पिनाकियो, जब भी झूठ बोलता है, उसकी नाक लंबी हो जाती है। इस चरित्र को लिखा था इटली कार्लो कोल्लोडी ने।उसने आज सुबह-सुबह लिखी अपनी एक कविता प्रकाशित की। जिसका भाव था, वे जीवन का सत्य जानते हैं, पर अपना समय व ऊर्जा व्यर्थ ही नष्ट करते हैं। बहुत दिनों से उनके पांडिचेरी जाने की बात चल रही थी, आख़िर तय हो गया, चार दिन बाद वे जा रहे हैं। आज वहाँ के दो-तीन वीडियो देखे। वहाँ के दर्शनीय स्थलों में बहुत सुंदर समुद्री तट हैं, जो इसे पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाते हैं। फ़्रेंच कालोनी, ऐरोविल आश्रम, महर्षि अरविंद आश्रम तथा कई चर्च भी हैं।  प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक जंगल भी है। अवश्य ही उन्हें वहाँ बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। 


इतने दिनों से नूना इतनी सारी दवाइयाँ ले रही है। उनका असर आज पता चल रहा है, पेट में हलचल है। टहलना, व्यायाम कुछ भी तो नहीं हो रहा है। दो दिन बाद या फिर परसों से ही व्यायाम शुरू किया जा सकता है। सुबह छोटे भाई का फ़ोन आया, छोटी भतीजी का आज ‘रोका’ होने वाला है। कल बापू का जन्मदिन है शास्त्री जी का भी, एक कविता लिखी है। 


Monday, June 26, 2023

जे कृष्णामूर्ति की बातें

रात्रि के दस बजने वाले हैं। आज सोनू का जन्मदिन है, नन्हा और वह  शाम को आ गये थे। सोनू बटर स्कॉच केक, सेवईं और चाकलेट्स लायी थी। उसने कोफ़्ते और शाही पनीर बनाया। कुछ देर के लिए वे सब टहलने गये, हवा शीतल थी और वातावरण शांत था। आज वे यहीं रहेंगे, अभी तक किसी कार्य में लगे हैं। नूना ने दोपहर को एक छोटे से सुडौल, अंडाकार पत्थर पर रंगों से चित्रांकन किया, अन्य उपहारों के साथ सोनू को दिया। नन्हे ने अपनी एक पुरानी मोटर साइकिल यात्रा के बारे में रोचक और रोमांचकारी संस्मरण सुनाया। जब वह एक मित्र के साथ उसकी पुरानी बाइक पर चेन्नई से बैंगलुरु आ रहा था,  जिसकी हेडलाइट ने काम करना बंद कर दिया था । किस तरह एक ऑटो की लाइट के सहारे वे लोग अपनी यात्रा पूरी कर पाये थे। जून ने आज एक सलाहकार से बात की, उसने कुछ सुझाव दिये हैं। पिछले कुछ दिनों से वह कुछ परेशान रहने लगे हैं। वर्षों तक इतना व्यस्त रहने के बाद आराम का यह जीवन उन्हें रास न आये, यह स्वाभाविक भी है। रात को नींद नहीं आती। उन्हें अधिक व्यस्त रहना होगा। संभवत: उन्हें अपनी पसंद का कोई काम मिल जाये तो ही उनकी समस्या  का हल हो सकता है। 


आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, टीवी के सामने कार्पेट पर बाबा रामदेव को देखकर योग-प्राणायाम का नियमित अभ्यास किया, बाद में वर्षा थमी तो टहलने गये। पेड़ों और पौधों पर पानी की बूँदें अति मनहर लग रही थीं, मोबाइल से कुछ चित्र उतारे। दिन में ‘डाक्टर डूलिटिल’ फ़िल्म देखी, जो नन्हे ने दो दिनों के लिए किराए पर ली थी। बड़ी मज़ेदार फ़िल्म है, जिसमें एक दिन डाक्टर को जानवरों की भाषा समझ में आने लगती है। चूहा, उल्लू, कुत्ता, गिलहरी और न जाने कौन-कौन से प्राणी उससे बात करने  लगते हैं। शाम को वर्षों बाद एक बार फिर टाल्सटाय की ‘पुनरूत्थान; पढ़नी आरंभ की, कितना दुख व कितनी निर्धनता थी उस काल में, आज भी है पर आज लोगों को हर तरह की सूचना मिल रही है, जिससे वे अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं। जून ने सलाहकार की बात मानी तो रात को उन्हें अच्छी नींद आयी, दिन भर वे काफ़ी ऊर्जावान बने रहे। उन्होंने पिता जी को डॉ ऑर्थो तेल भेजा है, जोड़ों के दर्द के लिए लाभकारी है। नन्हे ने दो कैनवास बुक भिजवायीं हैं, कल से वे चित्रकला का अभ्यास करना भी आरंभ करेंगे। उसने फोटोग्राफी के लिए कुछ टिप्स वाले वीडियोज़ भी भेजे हैं। 


वे रात्रि भ्रमण से लौटे तो संध्या काल से आसमान में छितराये बादल अचानक बरसने लगे। शरद ऋतु आरम्भ हो चुकी है, पर  सावन अभी भी टिकने के मूड में है। मनमौजी मन की तरह मौसम कब क्या रुख़ लेगा, कहना मुश्किल है। शाम को नवरात्र के अवसर आश्रम से प्रसारित होने वाला  कार्यक्रम सुना, देखा, ‘त्रिपुरा रहस्य’ पर चर्चा सुनी और फिर गुरु जी का प्रभावशाली उद्बोधन। बाद में भजन भी हुए और शास्त्रीय कलाओं का प्रदर्शन भी। आर्ट ऑफ़ लिविंग कितने क्षेत्रों में कितनी तरह से अपना योगदान दे रहा है। जून के एक मित्र के पुत्र का विवाह अगले वर्ष अप्रैल में होना तय हुआ है, आज ही फ़ोन पर निमंत्रण मिला, ताकि समय रहते वे टिकट करवा लें। आज उसने नीले फूलों की एक पेंटिंग बनायी। दोपहर को जे कृष्णामूर्ति को सुना, वह कहते हैं, देखने वाला ही देखा जाता है। यानी मन ही मन को देखता है और मन ही मन के ख़िलाफ़ हो जाता है। मन ही जगत को देखता है, जो मन का ही हिस्सा है और जगत के ख़िलाफ़ हो जाता है, यानि अपने ही ख़िलाफ़ ! उनका हर विरोध अंततः अपने ही विरुद्ध होता है। इस जगत की दुर्दशा वास्तव में उनकी ही दुर्दशा है यानि उस मन की जो वास्तव में वे नहीं हैं। वे जो वास्तव में हैं उसे यह जगत छू भी नहीं सकता। वह सदा निर्विकार है। वे उसी में टिके रहें तो आनंदित हैं। उनकी सारी तुलना व्यर्थ है, उनकी सारी पीड़ा व्यर्थ है, क्योंकि उनके सिवा वहाँ कोई दूसरा है ही नहीं, एक खेल चल रहा है और अज्ञान वश उन्हें इसका भान ही नहीं होता ! 



Monday, December 26, 2022

होप और हम

सुबह उठे आकाश में तारे चमक रहे थे। दिन में धूप भी तेज थी। शाम को माली आया , एक सवा घंटे में सारे गमलों की निराई-कुड़ाई कर दी। बालसम में फूल आ रहे हैं। बगीचे में ही थे कि पड़ोसी छड़ी लेकर टहलते हुए दिखे, कहने लगे, पीछे की लाइन में एक व्यक्ति गिर गया, अस्पताल ले जाना पड़ा है, फ़ालिज का अटैक पड़ा है, उमर भी ज़्यादा नहीं है। सभी को स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना आवश्यक है। कोरोना काल में जीवन कितना क्षण-भंगुर हो गया है । सुबह देखा, गेस्ट रूम में कमांड टेप से लगायी पेंटिंग गिरी हुई थी, शायद तस्वीर वजन के हिसाब से टेप की शक्ति कम थी । शीशा टूट गया, नैनी ने बिना किसी भय के सफ़ाई कर दी। दीदी का फ़ोन आया दोपहर को, बच्चों की बातें बतायीं। बड़ी बिटिया अपनी वेबसाइट खोल रही है, छोटी ने बच्चे के पालन-पोषण के लिए जॉब छोड़ दी है। बड़ा भांजा अपनी कंपनी बंद कर के जॉब लेगा। छोटे की कम्पनी ठीक चल रही है। छोटी बहन और बहनोई आर्ट ऑफ़ लिविंग के स्वयंसेवक बन गए हैं। मृणालज्योति की एक अध्यापिका से फ़ोन पर बात की, स्कूल बंद है, ऑन लाइन क्लासेज़ हो रही हैं। आज एक नया स्थानीय गेम खेला, लकड़ी का बना आधार है और कौड़ियों से खेलते हैं, बहुत रोचक लगा। लाओत्से की पुस्तक भी बहुत ज्ञानवर्धक और रोचक है, उपनिषदों से कम नहीं था उनका ज्ञान। 


रात्रि के नौ बजने को हैं। आज का इतवार काफ़ी अलग था अन्य दिनों की अपेक्षा। नसीरूद्दीन शाह की फ़िल्म ‘होप और हम’ देखी। बहुत अच्छी फ़िल्म है, एक परिवार के सपनों की कहानी, जिसमें एक पुरानी जर्मन फ़ोटो कॉपी मशीन का भी रोल है। शाम को चौलाई, जिसे यहाँ अमरनाथ का साग कहते हैं, दक्षिण भारतीय तरीक़े से बनाया। बहुत अच्छा बना है। कल इसे फ़ोटो सहित छोटी भाभी के फ़ेसबुक पेज पर प्रकाशित करेगी। नन्हे ने एक नया की बोर्ड, माउस तथा पैड लाकर दिया है, अब लिखने का काम करना सरल हो गया है। गुरुजी के श्राद्ध के बारे में लिखे लेख का अनुवाद किया। जून नियमित ध्यान करने लगे हैं तो भीतर की हलचल समझ में आने लगी है। उनके पैरों के तलवों में जलन हो रही थी, शाम को वे हरी घास पर नंगे पैर चलते रहे। सूर्यास्त के बाद आकाश का रंग ग़हरा लाल हो गया था।   


आज शिव सूत्र में घोरा, महाघोरा और अघोरा शक्ति के बारे में पढ़ा। घोरा मातृका शक्ति के कारण व्यक्ति ज़्यादा वाचाल हो जाता है, वह दूसरों को सलाह देता है, क्रोध करता है। महा घोरा के कारण जगत का चिंतन और उन्हीं के बारे में जानने की इच्छा जगती है अघोरा के कारण स्वयं के भीतर प्रवेश होता है, स्वाध्याय तथा साधना की तरफ़ मन जाता है। यदि कोई मातृका शक्ति के स्रोत की तरफ़ जाता है तो अघोरा अपना काम कर रही है। उसकी वाणी में अभी भी कितने दोष हैं। दोष दृष्टि तथा स्वयं को सही मानना, कटाक्ष करना आदि दोषों को अब तो त्याग देना चाहिए। परमात्मा की इतनी महान कृपा के बाद भी यदि कोई अपने संस्कारों को दग्ध नहीं करता तो उसको क्या कहा जाएगा। प्रधानमंत्री ने कल ‘मन की बात’ में खिलौनों की बात की तो कुछ युवकों ने शिकायत की। नीट व ज़ेईई परीक्षाओं की तिथि अभी तक तय नहीं हुई है।कोरोना के मरीज़ों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। 


कल जून की सेवनिवृत्ति को पूरा एक साल हो जाएगा। तीन दशकों से भी अधिक समय उन्होंने असम में गुज़ारा पर ईश्वर की कृपा से उन्हें यहाँ भी हरियाली और वर्षा भरा माहौल मिल गया है। सुबह उठे तो तेज वर्षा हो रही थी, जब कुछ हल्की हुई तो वे छाता लेकर टहलने गए। 

गगन में वायु, 

वायु में अगन, 

अगन में नीर, 

नीर में धरा ! 

ओत-प्रोत हैं सब आपस में 

जैसे मन रहता है उसमें ! 

जो बसा सृष्टि में वैसे ही 

ज्यों गंध धरा में 

ज्योति अगन में 

स्वाद नीर में 

छुवन वायु में 

वह उसमें है जैसे कोई 

लहर सिंधु में !