रस मलाई केक
आज रक्षा बंधन का त्योहार है; जो तिथि के अनुसार कल सुबह तक मनाया जाएगा।भौतिक रूप से वे भी कल ही मनाने वाले हैं।मानसिक और शाब्दिक रूप से तो मना ही लिया, सभी भाई-बहनों से बात हुई। आज शाम भी गुरुजी को सुना। वह कह रहे थे, लेने में जो ख़ुशी है, वह तो बच्चों को भी होती है पर देने की ख़ुशी प्रौढ़ होती है। लोग स्वयं ही प्रसन्नता हैं, यदि वे किसी कारण से खुश होते हैं तो वह ख़ुशी स्थायी नहीं है। किसी ने भयमुक्त होने का उपाय पूछा तो उन्होंने कहा, यदि अभय प्राप्त करना है तो किसी बड़े कार्य के प्रति समर्पित हों या ह्रदय में प्रेम और भक्ति जग जाये। मन में स्पष्टता हो, बुद्धि में शुद्धता हो, कर्म में सच्चाई हो तो जीवन शांत धारा की तरह प्रवाहमान रहता है। जो अकाल को याद करता है, हर काल उसके लिए सुकाल होता है। ध्यान में वे उसी अकाल पुरुष में स्थित होते हैं। भक्तिभाव से भरी एक बंगाली महिला का बाउल नृत्य भी देखा। वह गा रही थी व बजा भी रही थी।ओस्टियोपैथी के बारे में भी बताया गया, जो एक चिकित्सा विहीन इलाज है।
आज भी आश्रम से सत्संग प्रसारित हो रहा है, कोई मीका सिंह आये हैं। कुमार शानू का पुत्र भी आया है। गुरुजी ने सदा की तरह प्रश्नों के सटीक उत्तर दिये। आर्ट ऑफ़ लिविंग सेवा के कई प्रकल्प चलाता है, अब विद्या मंदिर के पुरस्कार दिये जा रहे हैं। कुछ पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।शाम को वे दूर तक टहलने गये। नूना ने छोटे भाई के जन्मदिन पर कविता लिखी। एओएल की तरफ़ से ‘रुद्रम जप का महत्व’’ पर एक आलेख का अनुवाद कार्य किया। पापाजी ने ओशो की एक पुस्तक की बात बतायी। उन्होंने कहा, सबके भीतर एक ही आत्मा है।मन यदि प्रसन्न हो तो सारी प्रकृति अच्छी लगती है।
आज जून का जन्मदिन उन्होंने अच्छी तरह मनाया, नन्हा व सोनू ‘रस मलाई केक’ लेकर आये थे। सोनू के मौसेरे भाई-बहन भी।दोपहर के लंच में आलू टुक, सिंधी कढ़ी व पनीर बनाया। शाम को सबने मिलकर एक नया बोर्ड गेम ‘आईपीओ’खेला।मौसेरी बहन ने साइकिल चलायी, नन्हे ने स्केट बोर्ड पर अभ्यास किया। छोटी बहन ने यूएई से फ़ोन पर बताया, बहनोई ने बाइक रैली में भाग लिया, भारत-पाकिस्तान की संयुक्त रैली।इधर देश का माहौल उत्सव मय है, आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है !
आज सोसाइटी के मैदान में स्वतंत्रता दिवस का अमृत महोत्सव बहुत उत्साह से मनाया गया। उसके बाद वे पंचायत के दफ़्तर जाकर बच्चों का स्लाइड दे आये। गाँव की सड़क पर तिरंगा रैली भी चल रही थी। माली ने असम से लाया एक पौधा लगाया। मोदी जी का भाषण भी लाजवाब था, उन्होंने नागरिक के कर्त्तव्यों की तरफ़ ध्यान दिलाया। देश आगे बढ़ रहा है। नूना ने झंडे के साथ एक तस्वीर खिंचवाई।
पिछले दो-तीन दिनों से हो रही वर्षा के कारण मौसम अधिक गर्म नहीं है। आज राजधानी में रहने वाली एक सखी से बात की, उसके पुत्र को डेंगू हो गया है, हर साल इस मौसम में डेंगू का प्रकोप होता है। असमिया सखी कुछ महीनों के लिए गोहाटी जा रही है।वे जीवन के अंतिम वर्ष बिताने के लिए अपने पुश्तैनी स्थान पर एक घर बनवाने जा रहे हैं।पता नहीं उन्होंने अपनी वृद्धावस्था की कैसी कल्पना की है। पुत्र विदेश में है, बिटिया विवाह के बाद उनका कितना ध्यान रख पाएगी, यह सोचकर वे अपने भाई-बहनों के पास जा रहे हैं। जून का मन फिर थोड़ा सा नासाज़ है, उनके स्वभाव में ही आ गया है यह। उन्हें भय है कि उन दिनों अकेले कैसे रहेंगे, जब नूना आश्रम में कोर्स करने के लिए जाएगी। शाम को नन्हे से भी बात हुई, वह उन्हें शनिवार को अपने घर आने के लिए कह रहा है।
आज पहली बार वे अपनी लेन के एक परिचित आर्ट ऑफ़ लिविंग शिक्षक के यहाँ रुद्र पूजा के आयोजन में शामिल होने गये।बहुत अच्छा अनुभव रहा। आश्रम में बिताये चार दिन एक याद बनकर रह गये हैं।
आज शाम से ही वर्षा हो रही है। मध्य प्रदेश व राजस्थान में बाढ़ आ गई है। ईश्वर उनकी रक्षा करे जो पानी में फँस गये हैं।अति वृष्टि या सूखा दोनों ही स्थितियाँ भयावह हैं। आज जून का मन ठीक है। वे व्यर्थ ही इतने सुंदर जीवन को दुखों का घर बना लेते हैं।सुबह टहलने गये तो मौसम सुहावना था। आश्रम में बिताये दिनों की स्मृति बीच-बीच में आती रहती है। डीएसएन कोर्स का इतना बड़ा लाभ उसे मिला है कि भीतर सब ख़ाली हो गया है। जैसे अब कोई संस्कार नहीं बचा। मन नीले गगन की तरह मुक्ति का अनुभव कर रहा है। आज सुबह मुक्ति का गीत भी लिखा। दोपहर को वे बाज़ार गये। नूना कुछ बच्चों से मिली, संकेत, अभिषेक और सात्विक, जिनकी माँओं ने बताया बाक़ी स्कूल गये हैं। उन्हें कुछ समान दिया। देने में कितना सुख मिलता है, गुरुजी सारी दुनिया में घूमकर ख़ुशियाँ बाँटते हैं। उनके जीवन का एक ही लक्ष्य है हर चेहरे पर मुस्कान लाना ! वह यदि एक भी व्यक्ति के मुखड़े पर मुस्कान लाने में सफल रही तो उसका सौभाग्य होगा!
आज शाम को कुछ देर के लिए वर्षा रुकी तो वे टहलने गये, आकाश पर बादलों से बनी एक सुंदर आकृति देखी। एक जंगली कौआ भी देखा। एक परिचित दंपत्ति अपने नाती को प्रैम में घुमाने ले जा रहे थे। दो मिनट रुककर उनसे बात की।बड़ी बहन से दस मिनट अंग्रेज़ी में बात की, छोटी बहन ने दोहा व कतर के बेसिक कोर्स प्रतिभागियों की बात बतायी, जिन्होंने उसका नाम देखकर स्वयं आगे आकर कोर्स में नाम लिखवाया। अफ़्रीका में दी गुरुजी की वार्ता सुनी, आज भी वह उतने ही उत्साह से लोगों को आर्ट ऑफ़ लिविंग सिखाते हैं, उनका जोश देखने लायक़ था। टीचर्स में इतना जोश उन्होंने ही तो भरा है। डीएसएन का एक नया ग्रुप बन गया है, जिसमें आसपास रहने वाले लोग हैं।जून आजकल खुश हैं, उन्होंने एक पुरानी फ़िल्म देखी साथ-साथ, नूना ने सुबह ज़ूम पर साधना की, शाम को गणेश पर गुरुजी की व्याख्यान माला सुनी। गणेश पूजा आने वाली है।
आज वे महीनों तक सड़क पर मिलकर एकदूसरे का हालचाल लेने वाले एक परिचित परिवार के घर गये। उन्होंने स्वागत किया, अपना बगीचा दिखाया। उन्हें अवसाद है, यह बात घर की महिला ऐसे कह रही थीं, जैसे कोई कहे घुटने में दर्द है। पिछले बीस साल से दवा ले रही हैं पर कभी योग नहीं किया। लोग कितना अज्ञान में जिये चले जाते हैं।उनके पिता पचानवे वर्ष के हैं पर अभी भी स्वस्थ हैं। नैनी के लाए पैशन फ्रूट्स का जूस बनाया।

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