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Wednesday, September 2, 2026

नटखट बकरी

नटखट बकरी

आज शाम वे दोनों पूरा डेढ़ घंटे तक कभी बातें करते, कभी मौन पेड़-पौधों को निहारते चलते रहे। ‘प्रकृति फार्म हाउस’ से होते हुए ‘थरालू स्टेट झील’ तक पहुँचे, कुछ पल वहाँ रुककर ‘थतगुप्पे झील’ पर रुके, जहां से ‘ट्यूज़डे फ़ार्म स्टे’ होते हुए घर पहुँचे। वापसी में सड़क पर बकरियों और भेड़ों का एक झुंड आगे-आगे जा रहा था। एक महिला उन्हें हाँक रही थी। एक छोटी बकरी बहुत नटखट थी, उसी को सँभालने में महिला का अधिक समय व श्रम लग रहा था। रास्ते में नन्हे से बात हुई, उन्हें आश्चर्य हो रहा था, कि वे लोग इतनी पैदल यात्रा कैसे कर सके। नूना ने कुछ तस्वीरें भी उतारीं। सुबह भी जून कार से दूर तक ले गये। दोनों तरफ़ घनी हरियाली और सुबह का सन्नाटा ! अधिकतर रास्ता बहुत अच्छा था, कहीं-कहीं सड़क टूट गई थी।

कल की लंबी पैदल यात्रा के कारण आज सुबह उठने में थोड़ी देर हुई, पर उसके बाद दिनचर्या नियमित हो गई।जब तक योग साधना आरंभ की, दिन शुरू हो गया था। स्कूल बसें आनी शुरू हो गयीं, इसलिए सिट आउट पर काफ़ी शोर आ रहा था, बहुत दिनों बाद योग कक्ष में ध्यान किया। शरीर से बाहर आकाश में ध्यान टिकाने से शरीर में कितना हल्कापन महसूस होता है। इसीलिए गुरुजी सदा सिर से एक फुट ऊपर ध्यान ले जाने को कहते हैं। देह और मन रेत और चीनी की तरह कभी मिल ही नहीं सकते। चेतना सदा पदार्थ से अलग है पर उसका अनुभव पदार्थ में जाकर ही हो सकता है। यदि पानी ही पानी हो तो पानी को अपनी खबर नहीं होगी, थोड़ी सी भूमि आ जाये तो जल स्वयं को भूमि से पृथक मानेगा और अपने पर भी नज़र जाएगी। उनका भी यही हाल है, वे जो नहीं हैं, जब वह देखते हैं तो ख़ुद पर भी नज़र जाती है। आज छोटी बहन से बात हुई। वह अब प्रसन्न है। उसका क्लिनिक खुल गया है और एओएल के शिक्षक का कार्य भी कर रही है। आज उसका ऑनलाइन इंट्रो है, शनिवार को दोपहर के भोजन के साथ इंट्रो है। छोटा भाई घर आया हुआ है, अगले महीने उसकी सेवा निवृत्ति हो जाएगी, पापाजी ने बताया। उसके बाद वह घर पर रहेगा तो उन्हें बहुत अच्छा लगेगा।अगले महीने वह लखनऊ जा रहा है, छोटी बिटिया की डाक्टरी की पढ़ाई समाप्त हो रही है, उसे घर लाना है। 

आज लिखने के लिए पर्याप्त समय है, पर नूना का पेन रीफ़िल बदलने के कारण ठीक नहीं चल रहा। शायद रीफ़िल छोटी है। जब तक चीजों की नाप ठीक न हो , जैसे चप्पलों या वस्त्रों की तो वे भी खलते हैं। आज ओबीए की एक वरिष्ठ सदस्या का फ़ोन आया, इस माह के अंत में वे उन्हें तथा दो अन्य परिवारों को दोपहर के भोजन के लिए ले जायेंगी। जून ओबीए के काम में उनकी बहुत सहायता करते हैं। जून ने उससे पूछा, उन्होंने ‘आदमी और इंसान’ फ़िल्म देखी है ? कुछ याद नहीं आया तो उसने कहा, इस फ़िल्म में अवश्य ही एक आदमी होगा और दूसरा इंसान, आदमी यदि इंसान नहीं बन पाया तो हैवान बन जाएगा। आज महर्षि अरविंद की ‘सावित्री’ पुस्तक के अंश की व्याख्या सुनी। वह अंग्रेज़ी में पढ़ रही है, पर उसकी भाषा अति क्लिष्ट है और भाव भी अति दुरूह। दोपहर को चैत्य सत्ता पर आलोक पांडे का प्रवचन सुना। चैत्य सत्ता को जागृत करना अध्यात्म में पहला कदम है, उसके बाद ही साधना का आरम्भ होता है। जैसे नरसी मेहता ने भी कहा है, आत्मज्ञान के बिना भक्ति अधूरी है। शाम को गुरुजी द्वारा निर्देशित चक्रों पर ध्यान किया, हवा इतनी तेज चलने लगी थी पर तब भी मन टिका हुआ था।उसने कहीं पढ़ा था, गुरुजी घंटों ध्यान में बैठे रहते थे।उन्होंने वर्षों पूर्व महर्षि महेश योगी के साथ रहते हुए दिल्ली में (नक़ली) पंडितों के क्रोध को शांत किया था। उनके अंदर समझौता कराने की कला पहले से ही थी। गुरुनानक की पुस्तक आगे बढ़ रही है, कैसे चौथे-पाँचवे गुरु के आते-आते सिख धर्म के रूप में परिवर्तित होता गया।नानक की यात्राओं का वर्णन लेखक ने बहुत सुंदर ढंग से किया है। आज सुबह कुछ देर पार्क आठ में प्राणायाम किया, हवा शीतल थी और वातावरण शांत, तब छह भी नहीं बजे थे। जून कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में  एक वीडियो देख रहे हैं संभवत: वे भी कभी भविष्य में यह यात्रा कर सकते हैं। यह पर्वत पंद्रह हज़ार फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित हैं, यात्रा अत्यंत कठिन है, पर हज़ारों लोग हर वर्ष यहाँ जाते हैं।  

आज सुबह चार बजे नन्हा अपने एक सहकर्मी के साथ चेन्नई गया है। उसका फ़ोन आया, तब काम ख़त्म करके होटल जा रहा था। उसे कल भी आज की तरह तीन-चार मीटिंग्स करनी हैं। अस्पतालों में जाकर उनके सीईओ से मिलना है, ताकि उन्हें प्रैक्टो के बारे में बता सके।उसने बताया, सोनू के माँ-पापा बांग्लादेश गये हुए हैं। नूना को रुद्र पूजा के बारे में एक लेख का अनुवाद करना है। सावन के महीने में हर सोमवार को आश्रम में रुद्र पूजा होती है। 

आज दिन भर बादली और वर्षा का साम्राज्य छाया रहा। हवा ठंडी हो गई है और तापमान २०-२१  डिग्री। आज मणिरत्नम द्वारा निर्देशित एक तमिल फ़िल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन’ का पहला भाग देखना शुरू किया है। इसमें दसवीं शताब्दी के चोल वंश के राजाओं की कहानी दर्शायी गयी है। दोपहर को पेंटिंग का काम थोड़ा सा आगे बढ़ाया। सुबह का ध्यान गहरा था। सूक्ष्म शरीर को कितना स्पष्ट अनुभव किया। बिना कान के सुना, बिना वस्तु के वस्तु का होना महसूस किया। कितना विचित्र था सब कुछ। दिन भर मन एक विचित्र से आनंद में डूबा रहा। मानव देह के भीतर कितने महान रहस्य छिपे हैं। शाम को गुरु जी की आवाज़ में रुद्रम की व्याख्या सुनी। जून ने सुबह स्वादिष्ट पोहा तथा दोपहर को स्वादिष्ट कढ़ी बनायी। आजकला वह भी बहुत प्रसन्न रहते हैं। नन्हे का फ़ोन आज नहीं आया, कल सुबह वह वापसी की यात्रा पर निकलेगा। 

अभी कुछ देर पहले मन फिर अहंकार के बहकावे में आ गया। जब वे स्वयं को देह मानते हैं तभी तो अहंकार के शिकार होते हैं। यदि स्वयं को आत्मा ही मानें तो कैसा अपमान और कैसा सम्मान, ऐसा लगता है जैसे किसी बाह्य शक्ति ने विचारों को भ्रमित कर दिया हो। जहां केवल ज्ञान और प्रेम का वास होना चाहिए, वहाँ क्रोध, शिकायत, उलाहना और अलगाव का क्या काम? मन का स्वभाव ही ऐसा है, वह संस्कारों के वश होकर ही ऐसा करता है। पर यह तो तय है कि पल भर के लिए वाणी कठोर हो सकती है पर दिल जरा भी नहीं ! आज नन्हा चेन्नई से वापस आ गया, सीधा ऑफिस चला गया, जैसे जून किया करते थे। अभी-अभी यह ख़्याल मन में आया, कहीं यह वाद-विवाद किसी अन्य बात की तरफ़ इशारा तो नहीं कर रहा ? सुबह से ही मन में हल्की सी बेचैनी थी, जिसकी परिणति हुई। आश्चर्य होता है कि अब किसी बात का इतना असर होने का क्या कारण है? जबकि पहले इससे बड़ी बात को भी नज़रंदाज़ किया है। इसका कारण ईश्वर ही जानते हैं, अब उसके साथ जो भी होता है, उससे जो भी होता है, उसके पीछे एक वही कारण है। उसकी इच्छा के बिना कुछ भी नहीं होता, जब यह जीवन भी उसी का दिया है, तो हर पीड़ा और हर ख़ुशी भी उसी की दी हुई है। आज सुबह एक कविता लिखी थी, यदि उसे कविता कहा जा सकता है तो….


Wednesday, May 20, 2026

‘त्रिपुरा रहस्य’

‘त्रिपुरा रहस्य’


कल से संसद का सत्र शुरू हो रहा है।परसों गुजरात व हिमाचल प्रदेश में हुए चुनावों का परिणाम भी आ जाएगा। फुटबॉल का विश्व कप चल रहा है। आज वे जून के पूर्व उच्च अधिकारी के घर गये, जहां एक अन्य सहकर्मी भी मिले।मेज़बान महिला ने घर का बना ‘मुरक्कु’ खिलाया, जो दक्षिण भारत का एक कुरकुरा स्वादिष्ट पारंपरिक नाश्ता है, ‘मुरुक्कु’ का अर्थ है मुड़ा हुआ। उन्होंने साथ में ताजा निकाला संतरे का रस पीने को दिया। कुछ देर सब पुरानी यादें ताजा करते रहे,  इसके बाद सब लंच के लिए ‘पाकशाला’ गये। जहाँ सबकी पसंद थी, ‘उत्तर भारतीय भोजन’ दोपहर बाद वे घर लौटे। शाम को पुन: गले में दर्द महसूस हुआ। 


आज स्वास्थ्य कल से बेहतर है। कई बार नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे किए और भाप भी ली।कल रात को देखे अनोखे स्वप्न के कारण आज जीरा-धनिया का पानी पिया और उसकी सुगंध भी ग्रहण की। आज एक अच्छी हास्य फ़िल्म देखी, ‘नज़र अन्दाज़’, जिसमें एक उदार अंधे व्यक्ति की कहानी है। उनकी नौकरानी और एक चोर के बीच हुई रोचक प्रतिस्पर्धा की कहानी ! गुजरात में बीजेपी और हिमाचल में कांग्रेस को विजय हासिल हुई है।आज दोपहर छोटे भाई का फ़ोन आया, बिहार के मुज्ज़फ़रनगर के उस आश्रम से, जहाँ असम में रहने वाली  नूना की एक परिचिता रहने गयी थी, पर लौट आयी।आश्रम के संचालक ने उससे विवाह तो किया पर निर्वाह नहीं कर पाये, वैसे यह बेमेल विवाह था। आज उसने पहली बार आई पैड पर लिखा, आश्चर्य है, इतने दिनों से अभ्यास क्यों नहीं किया।बहुत आसान है उस पर लिखना और इसे यात्रा में साथ भी रखा जा सकता है। शाम को छोटी बहन का फ़ोन आया, पंजाब में उनके मकान को बेचने में आने वाली अड़चनें घटने का नाम ही नहीं ले रही हैं। उन्हें अदेयता प्रमाणपत्र नहीं मिला है। घर के लिए अठारह साल पहले ऋण लिया गया था, जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। 


आज नन्हा आया था, सोनू असम में है। परसों सुबह उन्हें एक और यात्रा पर निकलना है। सुबह साढ़े छह बजे नन्हा उन्हें एयरपोर्ट ले जाएगा।आज वे पहली बार आर्ट ऑफ़ लिविंग के श्रीश्री आयुर्वेदिक अस्पताल गये, आना-जाना मिलाकर तीन घंटे लग गये। वैद्य ने सर्दी के लिए एक हफ़्ते की दवा दी है और बाद में सामान्य आरोग्य के लिए एक महीने की। ‘मृणाल ज्योति’ की रजत जयंती का उत्सव संपन्न हो गया। अगले हफ़्ते उन सभी से नूना की भेंट होगी। 


आज पूरे एक हफ़्ते बाद इस डायरी में लिख रही है। दोनों यात्रायें अच्छी रहीं। पूरे विश्वास और धैर्य के साथ सफ़र का आनंद लिया, घर वापस आकर भी अच्छा लग रहा है। कल से घर की बायीं दीवार पर रंगरोगन होगा, जो दो साल से साथ वाले मकान के निर्माण के दौरान स्वच्छ नहीं रह पायी है। 


आज महीनों बाद उसने ब्लॉग्स पर पोस्ट प्रकाशित कीं, पूरी पाँच पोस्ट ! अच्छा लग रहा है।असम में जब थी तो कभी-कभी ही होता था कि कुछ न लिखे। जब कोई रचनात्मक होता है तो ईश्वर उसके साथ होते हैं। हर कर्म में देव का योगदान तो होता ही है। चेतना ही मन-देह के द्वारा अभिव्यक्त हो रही होती है। दीदी से बात हुई, उन्हें डाक्टर ने घुटने बदलवाने की बात कही है, यह भी कहा है, अभी कोई जल्दी नहीं है।कुछ दिन की दवा भी दी है। पापाजी ने कहा, मोबाइल पर जो गेम वह खेलते हैं, उसके पैसे भी देने चाहिये, आख़िर किसी ने इतनी मेहनत से बनाया है।वह अति आदर्शवादी हैं।


आज शाम उसने ‘त्रिपुरा रहस्य’ का कुछ अंश सुना, ‘ललितासहस्रनाम’ में  देवी त्रिपुर सुंदरी के स्वरूप, महत्व और रहस्य को बताया गया है। कितने सरल शब्दों में आत्मा का ज्ञान दिया है, और यह भी कहा है कि आत्मा का ज्ञान देना ऐसा ही है जैसे कोई कहे कि उसे उसकी आँखें दिखला दो।आज उसने गुरुजी के नये वर्ष के दो संदेशों का अनुवाद किया। गूगल की सहायता से काम बहुत सरल हो गया है। समाचारों में सुना, चीन में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, अन्य कई देशों में भी कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है। दोपहर को वे नन्हे के यहाँ गये थे, उसे लेकर एसबीआई होम लोन की दो शाखाओं में गये, अब उनके घर का कोई लोन बकाया नहीं है। अगले महीने मकान के कागज मिल जाएँगे। 


आज आँख है कि भर-भर आती है, प्रेम की इस तरह की तड़प का अनुभव बहुत दिनों बाद हुआ। यह भी परमात्मा की कृपा है, वह भावपूर्ण हृदय से ही ज़्यादा संतुष्ट होते हैं, उन्हें ज्ञानी भक्त ही प्रिय हैं, रूखा-सूखा ज्ञानी नहीं ! प्रीत के आँसुओं से भरकर जब कोई गोपी कृष्ण को याद करती होगी, तो वह रह ही नहीं पाते होंगे, आत्मिक रूप से उसके भीतर आकर उसे सांत्वना देते होंगे, प्रेम का अनुभव केवल प्रेम के लिए कैसा होता है, भक्ति यही सिखाती है, उसमें कोई चाह नहीं है, अपनी माँग नहीं है, बस यही भावना है कि सामने वाले को कोई दुख न हो, वह प्रसन्न रहे। जब अन्य का दुख देखा न जाये और उसे मिटाने का भाव भीतर प्रबल हो जाये तब समझना चाहिए कि प्रेम अपने शुद्ध स्वरूप में है। ईश्वर प्रतिपाल उसके साथ है, बल्कि वही है ! आज शाम को वे एक घंटा टहलते रहे, फिर ‘योग निद्रा’ की, पहले श्रम फिर विश्राम, बहुत अच्छा अनुभव था। आज भी अनुवाद कार्य किया, गुरुजी ने कितने ही विवादों का हल करने में विश्व की मदद की है। बहुत दिनों बाद उसने ‘चिदाकाश गीता’ पढ़ी। जो महान अवधूत संत भगवान नित्यानन्द के मुख से निकले आध्यात्मिक वचन हैं। जिनमें वह अहंकार का नाश करके, वैराग्य को साधकर, साक्षी भाव का अभ्यास करने की बात कहते हैं । गुरुजी की तरह वह भी कहते हैं एक ही सत्ता से, एक ही ब्रह्म चेतना से सब कुछ निर्मित हुआ है। यह अद्वैत बोध पहले समाधि में घटित होता है, फिर सहज हो जाता है ।   


आज क्रिसमस है, संदेश भेजे और संदेश आये। नन्हा सुबह आ गया था, शाम को गया, पहले गो- कार्टिंग फिर घर।कह रहा था, अगले हफ़्ते वे सब नये वर्ष का स्वागत करने कहीं बाहर जाएँगे, सोनू भी वर्ष के अंतिम दिन आ जाएगी। वे लोग अगले वर्ष मार्च में घर जा सकते हैं, पापाजी को आश्चर्य होगा, दीदी-जीजाजी को भी।


Monday, April 27, 2026

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’

आज सुबह दस बजे वे नन्हे की नई गाड़ी में यालाहंका में कंपनी की ‘ओल्ड बॉयज़ मीट’ में शामिल होने गये।वे कई परिवारों से वर्षों बाद मिले, बहुत अच्छा अनुभव रहा।सभी लोगों ने अपनी यादों में असम को बसाया हुआ है। जब सभी असम में रहते थे, तब अक्सर ही मिलना होता था। एक ही कंपनी में काम करना व एक ही कैंपस में रहना, सबके पास साझा करने के लिए जैसे यादों का एक ख़ज़ाना था।कार्यक्रम एक अंध विद्यालय के हॉल में हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्य भी मिलीं। एक अतिथि ने ‘प्राणिक हीलिंग’ पर एक वक्तव्य भी दिया तथा प्रयोग द्वारा एक महिला के हाथ के दर्द का इलाज भी किया। केले के पत्ते पर पारंपरिक भोजन भी परोसा गया। लौटे तो शाम हो गई थी। कार्यक्रम के दौरान नन्हे ने कई तस्वीरें भी खींचीं। घर आकर कंपनी की कॉफी टेबल बुक ‘नॉस्टेलज़िया’ एक बार फिर उल्टी-पलटी, बहुत अच्छी लगी। कितनी ही नयी बातें पता चलीं, जो वास्तव में पुरानी हैं। 


नन्हे ने कल जो तस्वीरें खींचीं थीं, उनके लिए कई लोगों ने तारीफ़ की है। उसने पूरे दिल से यह काम किया था।आज शाम को गुरुजी का एक भाषण सुना, जो उन्होंने ‘वी स्टैंड फॉर पीस’ पर  संयुक्त राष्ट्र संघ में दिया। उन्होंने कहा, शान्तिप्रिय लोगों को एकजुट होना होगा। किसी को भी अपने कर्त्तव्य से विमुख नहीं होना है।दोपहर को गुरुजी का कराया ध्यान ‘नीडिल’ किया और शाम को मन को ख़ाली करने वाला, दोनों ही विधियाँ प्रभावशाली हैं। आज पढ़ा, गुरु के आवाहन के बाद उसके ज्ञान स्वरूप में मन को विलीन करने से मन की शुद्धि होती है, रामकृष्ण परमहंस की पुस्तक तो अनमोल है। स्वामी विवेकानंद जब नरेन थे, कितना संदेह था उनके मन में, पर उनके गुरु उनकी किसी बात का विरोध नहीं करते थे। अनोखे लोग थे वे! आज उसने एक पोस्ट लिखी। जैसे कोई फूल खिलता है, कोई उसे सराहे या नहीं, इससे क्या अंतर पड़ता है फूल को ! शब्द जो किसी के मन से निकले, अंततः तो समष्टि मन से ही आये हैं ! 


दोपहर को उसने जून को एक बात पर टोका, पर आज उन्होंने बुरा नहीं माना। महादेव में पार्वती पुन: शिव से पृथक हो गई हैं, उन्हें एक और जन्म लेना होगा, फिर वे बाणासुर का वध करेंगी। कितनी अद्भुत कथा है शिव-पार्वती की। सृष्टि के आदि में देव तथा दानव दोनों ही हुए। इसलिए अच्छी व बुरी, शुभ व अशुभ दोनों शक्तियाँ इर्द-गिर्द होती हैं। चुनाव उन्हें करना है। देवता परम चेतना की उर्मियाँ हैं तो दानव उनसे बनने वाली छाया। अहंकार छाया ही तो है, आत्मा आलोक है। कुछ पाने की, कुछ बनने की, कुछ होने की लालसा जब तक बनी है, तब तक मन में पूर्ण तृप्ति कैसे हो सकती है ? जो मानव का मूल स्वभाव है, यदि वही उसका लक्ष्य है तो, वह तो मानव अभी है ही, फिर कैसी खोज? 


आज उन्होंने पहली बार सुबह-सुबह खीरे का रस पिया, अच्छा लगा और उसका परिणाम भी अच्छा रहा।आज स्वामी मधुसूदन सरस्वती के बारे में सुना, जो पन्द्रहवीं शताब्दी में हुए थे। वह वेदांती होने के साथ कृष्ण भक्त भी थे। भक्ति के बिना ज्ञान रूखा-सूखा ही रह जाता है, तभी तो ‘ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या’ कहने वाले शंकराचार्य भी ‘भज गोविन्द गाते हैं। आजकल उसका लेखन कार्य, विशेषतया कविता लेखन का कार्य पहले की भाँति नहीं हो रहा है। मन की धारा शांत हो गई है, और लेखन तो भीतरी उहापोह को दिखाने का ही एक माध्यम है शायद ! 


आजकल नूना पॉल ब्रंटन की पुस्तक ‘अ सर्च इन सीक्रेट इंडिया’ पढ़ रही है। यह एक ऐसी यात्रा पर आधारित है, जिसमें  लेखक सच्चे ऋषियों की खोज में लगा है। ऐसे ऋषि जिनके पास आत्मा का ज्ञान है, जिन्होंने अपने भीतर उस सच्ची शांति का अनुभव कर लिया है, जिसे भौतकितावादी लोग मानने से भी इंकार कर देते हैं।इसी किताब में एक यहूदी व्यक्ति का ज़िक्र है जिसने कुछ अच्छे जिन्नों को वश में कर लिया था, जो दूसरों के विचारों को भी पढ़ सकते हैं और बिना किसी को दिखे कहीं भी जा सकते हैं। नूना को कई बार लगता है, देवदूत उसके भी आसपास हैं। कभी दिव्य गंध का अनुभव होता है, कभी संगीत का, कभी सुंदर दृश्यों का, शायद उन्हीं के कारण ! शाम के भ्रमण के समय बादल थे, तेज हवा उन्हें उड़ा ले गई। थोड़ी सी जमैका चेरी तोड़ी। विपासना ध्यान किया पर अब उस तरह का ध्यान उसे नहीं भाता, केवल संवेदनाओं के प्रति जागरूक रहने से राग-द्वेष तो मिट सकते हैं, पर देह भाव से मुक्ति नहीं मिलती। कोई आत्म अनुभव नहीं होता, जहाँ पूर्ण शांति हो, कोई भाव, विचार या संवेदना भी न रहे ऐसी विश्रांति ही उसे भाती है। पंचदशी को आगे सुना। यह भी चौदहवीं शताब्दी का स्वामी विद्यारण्य का लिखा वेदान्त का एक ग्रंथ है। साथ ही इसमें त्रिपुर सुंदरी की उपासना का मंत्र भी दिया गया है, यानि भक्ति और ज्ञान दोनों ! 


आज सुबह बगीचे में काम करने के बाद वे आश्रम गये। समूह में सुदर्शन क्रिया का अभ्यास किया। बाद में महादेव में गणेशजी की पत्नी सिद्धि के पुत्र क्षेम तथा ऋद्धि के पुत्र लाभ की कथा सुनी। महादेव उन्हें गोद में लेकर अति प्रसन्न हैं।दोपहर बाद नन्हा आया, उस समय तेज वर्षा हो रही थी। रह-रह कर बिजली चमक रही थी। श्वेत बींस की सब्ज़ी बनायी थी उसने। रिलायंस ट्रेंड्स होते हुए वे नन्हे के साथ उसके घर गये। सबके लिए उपहार ख़रीदे। डिनर के बाद वे वापस लौटे तो घर के बाहर ही मात्र दो हफ़्ते पुरानी, नयी कार का टायर पंक्चर हो गया। नन्हे ने भीगते हुए यू ट्यूब से सीखकर टायर निकाला तथा स्टेपनी लगायी। जून ने तब तक एक मकैनिक को भी बुला लिया था।उसके बाद बच्चे वापस चले गये, अभी तक उनके घर पहुँच जाने का संदेश नहीं आया है।  


Monday, June 26, 2023

जे कृष्णामूर्ति की बातें

रात्रि के दस बजने वाले हैं। आज सोनू का जन्मदिन है, नन्हा और वह  शाम को आ गये थे। सोनू बटर स्कॉच केक, सेवईं और चाकलेट्स लायी थी। उसने कोफ़्ते और शाही पनीर बनाया। कुछ देर के लिए वे सब टहलने गये, हवा शीतल थी और वातावरण शांत था। आज वे यहीं रहेंगे, अभी तक किसी कार्य में लगे हैं। नूना ने दोपहर को एक छोटे से सुडौल, अंडाकार पत्थर पर रंगों से चित्रांकन किया, अन्य उपहारों के साथ सोनू को दिया। नन्हे ने अपनी एक पुरानी मोटर साइकिल यात्रा के बारे में रोचक और रोमांचकारी संस्मरण सुनाया। जब वह एक मित्र के साथ उसकी पुरानी बाइक पर चेन्नई से बैंगलुरु आ रहा था,  जिसकी हेडलाइट ने काम करना बंद कर दिया था । किस तरह एक ऑटो की लाइट के सहारे वे लोग अपनी यात्रा पूरी कर पाये थे। जून ने आज एक सलाहकार से बात की, उसने कुछ सुझाव दिये हैं। पिछले कुछ दिनों से वह कुछ परेशान रहने लगे हैं। वर्षों तक इतना व्यस्त रहने के बाद आराम का यह जीवन उन्हें रास न आये, यह स्वाभाविक भी है। रात को नींद नहीं आती। उन्हें अधिक व्यस्त रहना होगा। संभवत: उन्हें अपनी पसंद का कोई काम मिल जाये तो ही उनकी समस्या  का हल हो सकता है। 


आज सुबह उठे तो वर्षा हो रही थी, टीवी के सामने कार्पेट पर बाबा रामदेव को देखकर योग-प्राणायाम का नियमित अभ्यास किया, बाद में वर्षा थमी तो टहलने गये। पेड़ों और पौधों पर पानी की बूँदें अति मनहर लग रही थीं, मोबाइल से कुछ चित्र उतारे। दिन में ‘डाक्टर डूलिटिल’ फ़िल्म देखी, जो नन्हे ने दो दिनों के लिए किराए पर ली थी। बड़ी मज़ेदार फ़िल्म है, जिसमें एक दिन डाक्टर को जानवरों की भाषा समझ में आने लगती है। चूहा, उल्लू, कुत्ता, गिलहरी और न जाने कौन-कौन से प्राणी उससे बात करने  लगते हैं। शाम को वर्षों बाद एक बार फिर टाल्सटाय की ‘पुनरूत्थान; पढ़नी आरंभ की, कितना दुख व कितनी निर्धनता थी उस काल में, आज भी है पर आज लोगों को हर तरह की सूचना मिल रही है, जिससे वे अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं। जून ने सलाहकार की बात मानी तो रात को उन्हें अच्छी नींद आयी, दिन भर वे काफ़ी ऊर्जावान बने रहे। उन्होंने पिता जी को डॉ ऑर्थो तेल भेजा है, जोड़ों के दर्द के लिए लाभकारी है। नन्हे ने दो कैनवास बुक भिजवायीं हैं, कल से वे चित्रकला का अभ्यास करना भी आरंभ करेंगे। उसने फोटोग्राफी के लिए कुछ टिप्स वाले वीडियोज़ भी भेजे हैं। 


वे रात्रि भ्रमण से लौटे तो संध्या काल से आसमान में छितराये बादल अचानक बरसने लगे। शरद ऋतु आरम्भ हो चुकी है, पर  सावन अभी भी टिकने के मूड में है। मनमौजी मन की तरह मौसम कब क्या रुख़ लेगा, कहना मुश्किल है। शाम को नवरात्र के अवसर आश्रम से प्रसारित होने वाला  कार्यक्रम सुना, देखा, ‘त्रिपुरा रहस्य’ पर चर्चा सुनी और फिर गुरु जी का प्रभावशाली उद्बोधन। बाद में भजन भी हुए और शास्त्रीय कलाओं का प्रदर्शन भी। आर्ट ऑफ़ लिविंग कितने क्षेत्रों में कितनी तरह से अपना योगदान दे रहा है। जून के एक मित्र के पुत्र का विवाह अगले वर्ष अप्रैल में होना तय हुआ है, आज ही फ़ोन पर निमंत्रण मिला, ताकि समय रहते वे टिकट करवा लें। आज उसने नीले फूलों की एक पेंटिंग बनायी। दोपहर को जे कृष्णामूर्ति को सुना, वह कहते हैं, देखने वाला ही देखा जाता है। यानी मन ही मन को देखता है और मन ही मन के ख़िलाफ़ हो जाता है। मन ही जगत को देखता है, जो मन का ही हिस्सा है और जगत के ख़िलाफ़ हो जाता है, यानि अपने ही ख़िलाफ़ ! उनका हर विरोध अंततः अपने ही विरुद्ध होता है। इस जगत की दुर्दशा वास्तव में उनकी ही दुर्दशा है यानि उस मन की जो वास्तव में वे नहीं हैं। वे जो वास्तव में हैं उसे यह जगत छू भी नहीं सकता। वह सदा निर्विकार है। वे उसी में टिके रहें तो आनंदित हैं। उनकी सारी तुलना व्यर्थ है, उनकी सारी पीड़ा व्यर्थ है, क्योंकि उनके सिवा वहाँ कोई दूसरा है ही नहीं, एक खेल चल रहा है और अज्ञान वश उन्हें इसका भान ही नहीं होता ! 



Tuesday, February 1, 2022

बादामी गुफ़ाएँ

बादामी गुफ़ाएँ

रात्रि के दस बजकर दस मिनट हुए हैं। सुबह छह बजे वे उत्तरी कर्नाटक स्थित बादामी गुफ़ाओं की यात्रा के लिए रवाना हुए। छठी  शताब्दी में बने ये गुफा मंदिर देखने वाले को चकित कर देते हैं। तत्पश्चात बनशंकरी मंदिर में नींबू की माला पहने हुए देवी की भव्य मूर्ति के दर्शन किए। अगला पड़ाव था पट्टकदलु, जहाँ मंदिर के अवशेष मात्र ही थे। कुडल संगम, आईहोले, बसवा तीर्थ (बसवन्ना ) अनुभव मंटप तथा संग्रहालय के प्रांगण में स्थित सुंदर मूर्तियाँ भी देखीं।बसन्ना भगवान की जीवन कथा सुनी, उनके वचनों की पुस्तक मंगायी है। बारहवीं शताब्दी का यह संत अपने समय से बहुत आगे था। उनके मन में किसी भी प्रकार का  कोई भेदभाव नहीं था।  लौटे तब अँधेरा हो गया था । कल हम्पी जाना है, जहाँ विजयनगर साम्राज्य के अवशेष आज भी हज़ारों दर्शकों के आकर्षण के केंद्र बने हैं।   


आज वे घर लौट आए हैं। कल रात नौ बजे चली हम्पी एक्सप्रेस सुबह समय से पूर्व ही आ गयी थी । कल दिन भर कड़ी धूप में छाता व टोपी लगाकर मीलों पैदल चलते हुए वास्तुकला के सुंदर नमूने देखे, जो भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। सुबह का नाश्ता नन्हे के घर पर किया। बड़ी ननद का फ़ोन आया। वे लोग बिटिया का रिश्ता टूटने से, बल्कि तोड़ने से खुश हैं। समाज बदल रहा है। लड़कियों को अपना सम्मान करना आ रहा है। वे विवाह करके ग़ुलामी का जीवन नहीं बिता सकतीं। उनका आत्मसम्मान उन्हें औरों के आगे बेवजह निरीह बनकर रहने  नहीं देगा। जितना अधिकार अपनी बात कहने का किसी लड़के या पुरुष को है, उतना ही अधिकार स्त्री या बालिका को भी है। हर आत्मा की पहली पुकार है स्वाधीनता। साथ-साथ रहते हुए भी एक-दूसरे का सम्मान करते हुए उन्हें विकसित होने देना किसी भी रिश्ते को गहराई प्रदान करता है। आज महिला क्रिकेट टीम फ़ाइनल में पहुँच गयी है। एक वक्त ऐसा भी था जब महिला क्रिकेट को सम्मान नहीं मिलता था। अब महिला खिलाड़ियों के नाम भी लोगों को याद होने लगे हैं। महिलाएँ वे सभी कार्य कर रही हैं, जो कभी पुरुषों के एकाधिकार में थे। 


रात्रि के आठ बजे हैं, गुरूजी श्री श्री यूनिवर्सिटी से ध्यान साधना करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, जो आंदोलन देश में चल रहा है, वह सीएए के ख़िलाफ़ नहीं है, क्योंकि ऐसे क़ानून अन्य देशों में भी हैं। कुछ ऐसे लोग जो खुद को कटा हुआ मानते हैं, इसमें शामिल हैं, और कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी इसका लाभ उठा रही हैं। सरकार भी झुकने को तैयार नहीं है। गुरूजी ने यह भी कहा, वकीलों को काले कोट की जगह कोई और रंग पहनना चाहिए। उनके सत्संग में एक अन्य साधक प्रसानी जी भी आए हैं, जिन्हें उड़िया में कविता सुनाने को कहा है।  उन्होंने गुरूजी के नाम की श्रेष्ठता बतायी। नाम सुमिरन से ज्ञान की वृद्धि होती है और चेतना की शुद्धता से शांति का प्रसरण होता है।परमात्मा के सिवा आत्मा का कौन निकटस्थ है। 


आजकल हर जगह एक नयी बीमारी कोरोना का भय है इसलिए होली खेलने का उत्सव इस बार नहीं मनाया जाएगा, ऐसा प्रधानमंत्री ने भी कहा। कोरोना के कारण छोटे भाई की विदेश यात्रा भी स्थगित हो गयी है। नन्हा और सोनू एक मित्र के विवाह में कोचीन गये हैं, सुबह मोबाइल पर उन्होंने अपना कमरा दिखाया, नदी के किनारे स्थित है उनका होटल। मौसम गर्म हो गया है।  





Wednesday, April 14, 2021

लोनावला की पहाड़ियाँ

 

कल सुबह उन्हें एक विवाह में सम्मिलित होने के लिए यात्रा पर निकलना है. अमित शाह ने संसद में नागरिक संशोधन  सुधार बिल प्रस्तुत किया है, कई राज्यों में विशेषतः असम में इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं. आज सुबह नैनी काम पर नहीं आयी, किसी अन्य महिला ने फोन करके बताया, उसे बुखार है. दोपहर को वह आ गयी, कहने लगी पति ने उससे झगड़ा किया, नशा करके आया था. उसे चोट लगी थी. पिछड़ा हुआ राज्य हो या विकसित, महिलाओं की स्थिति सभी जगह एक सी है. बेहोशी में आदमी वहशी हो जाता है. देश भर में महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ रही है. हिंसा की प्रवृत्ति मानव में दबी होती है पर आज के वातावरण में खुली छूट मिल गयी है, हाथ में मोबाइल आ गया है, जिस पर सब कुछ देखा-सुना जा रहा है, जो नहीं देखा जाना चाहिए वह भी. आज कौन सुरक्षित है, भय का वातावरण बन गया है सभी ओर. समाज पतन की ओर जा रहा है. शायद अँधियारा जितना गहरा होगा उजाला तभी प्रकट होगा. 


आज सुबह पांच बजे ही वे एयरपोर्ट के लिए निकले थे. फ्लाइट लेट थी, नाश्ता भी वहीं किया. समाचार सुने, कर्नाटक में बीजेपी ने बारह सीट जीत ली हैं, पंद्रह पर उपचुनाव हुआ था. मुंबई में छत्रपति शिवाजी हवाई अड्डे पर पहुंचे तो तापमान अधिक था. जो ड्राइवर उन्हें लेने आया था उसने कार पांचवें फ्लोर पर पार्क की हुई थी. लिफ्ट से वहां पहुँचे तो देखा अनेकों गाड़ियाँ वहां पार्क की हुई थीं. नवी मुंबई को पार करके वे ‘पूना एक्सप्रेस वे’ पर आ गए, जिसके बारे में कई बार सुना था. पहले गंतव्य  लोनावला पहुँचने से पहले खन्ड़ाला की पहाड़ियां दिखीं, पर वे वहां रुके नहीं. पहला पड़ाव था, वैक्स म्यूजियम, जहां कई और भी आकर्षण थे, सभी एक से बढ़कर एक. उनके लिए नए-नए अनुभव थे सभी. ९-डी में अनुभव भयभीत करने वाला था. 


अभी-अभी वे क्लब हाउस से रात्रि भोजन करके आये हैं, ‘देराजो’ नाम था उस रेस्तरां का. उससे पहले लाइब्रेरी में एक किताब पढ़ी, ‘द विज़डम ऑफ़ लाओत्से बाय लिन युतांग’. किताब बहुत अच्छी है, पढ़ने के लिए वह कमरे में ले आयी है. हिल्टन का यह रिजॉर्ट काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, दूर-दूर तक छोटे-छोटे विला बने हैं. नन्हे को जब उनकी मुंबई यात्रा का पता चला था तो उसने एक दिन लोनावला में बिताने के लिए इसे बुक कर दिया था। वे रिसेप्शन से छोटी कैब में बैठकर कमरे तक आये, हाथ-मुँह धोकर ‘योग साधना’ के लिए क्लब हाउस गए. पूल के किनारे एक तरफ एक रेस्तरां है दूसरी तरफ एक बड़े चबूतरे जैसा  स्थान. तीन अतिथि और बैठे थे वहां होटल के, योग टीचर प्राणायाम करवा रहे थे. सूर्यास्त का सुंदर दृश्य निहारा, सामने पहाड़ था जिसकी परछाई पूल के पानी में पड़ रही थी. 


आज सुबह भी वे जल्दी उठ गए थे, रिज़ॉर्ट की तरफ से ट्रैकिंग पर गए. जंगल के बीच से चढ़ाई करते हुए ऊँचाई पर स्थित एक पुराने मंदिर तक जाना एक नया अनुभव था. लगभग साढ़े दस बजे वे वहाँ से रवाना हुए. रास्ते में नारायणी धाम में रुके जो अति विशाल एक नया मंदिर है, कई गुलाब के फूलों के बगीचों से सजा यह स्थान बेहद आकर्षक है, वहाँ कोई विवाह समारोह चल रहा था, इसलिए और भी सजाया गया था. उसके बाद खंडाला में कुछ मिनट रुके, जहाँ से नीचे पहाड़ों पर बना एक्सप्रेस वे दिखाई देता है. लगभग ढाई बजे विवाह स्थल पर पहुँचे। मेहँदी का कार्यक्रम चल रहा था, संगीत का शोर बहुत था और हृदय पर आघात कर रहा था. भोजन के बाद वे एक घन्टा पार्टी में रहे, फिर कमरे में आ गए. 



अभी कुछ देर पहले वे निकट स्थित राजीव गाँधी उद्यान में टहलकर आये हैं, नीचे सड़क पर कूड़े का ढेर लगा था. शादियों का सीजन है, कल ही दो विवाह हुए, उसके बाद जो भी कचरा इकठ्ठा हुआ होगा शाद वही था. पार्क की हालत भी खस्ता थी, लोग काफी थी, कहीं योग साधना चल रही थी, कहीं जिम, दो लोग पेड़ से उलटे लटके थे, शायद कोई साधना रही होगी।  कहीं महिलाएं आपस में बातें कर रही थीं. वृद्ध बेंच पर बैठ कर आराम फरमा रहे थे. घास बेतरतीब थी, जो भी सरंचना पहले सुंदर रही होगी, टूटी-फूटी थी. प्लास्टिक की बोतलें, कागज जहां-तहाँ बिखरे थे. जो पार्क बेहद आकर्षक बन सकता था, उदासीन व अपने में ही गुम लोगों के कारण उदास लग रहा था. उल्हासनगर जरा भी नहीं बदला है. बीस वर्ष पहले वे यहाँ आए थे, तब भी हालात ऐसे ही थे. जून नीचे से अख़बार लेकर आये हैं, जिसमें असम में हुई हिंसा की खबरें हैं. नागरिक संशोधन बिल संसद में पास हो गया है, उसी के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं. सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है, लोगों को समझना होगा, वे व्यर्थ ही इतनी तीव्र प्रतिक्रिया दे रहे हैं.  कल रात साढ़े बारह बजे होटल लौट आये थे. अंगूठी पहनाने का कार्यक्रम अभी हुआ ही नहीं था, डांस आदि हो रहे थे. उन्होंने जल्दी खाना खाया, साढ़े ग्यारह बजे जल्दी नहीं कहा जायेगा, पर यहाँ पर शादी में होने वाली पार्टियाँ रात भर चलती हैं. सुबह तीन-चार बजे  तक चली होगी यह पार्टी भी. 


राष्ट्रपति ने नागरिकता संशोधन बिल को पास कर दिया है, अब यह कानून बन गया है. गोहाटी व डिब्रूगढ़ में कर्फ्यू लगा हुआ है, हिंसा की वारदातों के बाद यह जरूरी हो गया था. महिलाओं पर हिंसा की सबसे भयानक वारदात जो कुछ वर्ष पहले हुई थी, उसका फैसला आने वाला है. इस समय साढ़े आठ बजे हैं, वे नहा-धोकर तैयार हैं। सुबह पाँच बजे अपने आप ही नींद खुल गई, उसके पूर्व स्वप्न में स्वयं को राम का एक भजन गाते सुना, फिर एक अन्य भजन और एक ज्योति दिखी। सबके भीतर एक ज्योति है जो बिन बाती और बिन तेल के जल रही है। मन कितने सुंदर रूप धर लेता है, जब क्षण होता है। साक्षी भाव में टिका मन ही मुक्त है। विवाह दिन में होना है, शाम को रिसेप्शन पार्टी है। कल उन्हें वापस घर जाना है। 


Tuesday, October 20, 2020

कोयल की कूक

 

शाम को बिजली चली गयी और एक लगभग पौन घण्टा वे मोमबत्ती के प्रकाश में बैठे रहे. एक मित्र परिवार आया था, उन्हें घर से लायी मिठाई खिलाई. चाय बनाना थोड़ा मुश्किल था अँधेरे में, रियल जूस पिलाया. बाद में एक जगह जाना था, विदाई भोज के लिए. कचौड़ी-पूरी, छोले, दही-बड़े यानि बहुत ही गरिष्ठ भोजन. दस बजे से थोड़ा पहले ही लौट आये. छोटे भाई ने फ़िल्मी गीतों का एक संग्रह पेन ड्राइव में दिया था, कुछ देर सुनती रही, बचपन में सुने थे उनमें से कितने ही गीत. दोपहर का लन्च अकेले ही खाया, जून के दफ्तर में प्रमोशन की ख़ुशी में पार्टी थी.  छोटी बहन कनाडा गयी है अपनी पुत्रियों से मिलने. वीडियो कॉल करके दिखाया बेहद खूबसूरत जगह है कनाडा. 

सुबह उठे तो झमाझम वर्षा हो रही थी, उसने सोचा जब तक वे पानी पीकर व नित्य क्रिया के बाद तैयार होते हैं तब तक रुक जाएगी, और ऐसा ही हुआ. यदि किसी कार्य को शिद्दत से कोई करना चाहता है तो प्रकृति पूरा साथ देती है. कितनी ही बार ऐसा हुआ है जब वे लौट कर घर आ गए हैं, तभी वर्षा आरम्भ होती है. अमलतास के पेड़ फूलों से लदे थे, उसने कुछ तस्वीरें भी उतारीं. दोपहर को बच्चों के साथ स्वच्छता अभियान में भाग लिया. बच्चे इतने उत्साह और ऊर्जा से भरे होते हैं, उनमें अहंकार जरा भी नहीं होता.  जून तिनसुकिया गए और ढेर सारे मौसमी फल लाये. फेसबुक पर स्वतःस्फूर्त एक कविता प्रकाशित की, काफी लोगों ने पढ़ी. भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट विश्वकप का मैच चल रहा है. भारत ने अच्छा स्कोर खड़ा किया है. अगले महीने छोटी ननद के आने की सम्भावना है, यदि उनके कालेज में पढ़ रहे पुत्र का परीक्षा परिणाम ठीक रहा, उसके कालेज में हड़ताल हो गयी थी, जिन छात्रों ने उसमें भाग लिया उन्हें डर है कि परिणाम उनके अनुकूल नहीं होगा. यहाँ से विदा होने के पहले एक बार असम की यात्रा करने का उनके लिए सुअवसर है. 


समाचारों में सुना, बारह भ्रष्ट आई टी अधिकारियों को  सरकार ने शीघ्र सेवा निवृत्त कर दिया है. पश्चिम बंगाल में हिंसा के विरुद्ध बीजेपी ने काला दिवस मनाया. कल के मैच में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया. ननद का फोन आया, वे लोग अभी नहीं आ रहे हैं, जैसी आशंका थी, भांजे को तीन विषयों की परीक्षा दुबारा देनी होगी. वे परीक्षा के बाद आएंगे. शाम को क्लब की कमेटी मीटिंग थी, कार्यक्रम तय हुआ, फैशन शो भी होगा, उसे भी भाग लेने को कहा गया है, यह उनके जाने से पूर्व का अंतिम कार्यक्रम होगा सो उसने हामी भर दी. इसी माह उन्हें क्लब में विश्व योग दिवस का आयोजन भी करना है. आज बहुत अल्प तेल में स्क्वैश की सब्जी बनायी, विशेष स्वाद आया. दोपहर को ब्लॉग पर लिखा, मृणालज्योति के उस अध्यापक की बात लिखी जिसे स्वतः देह त्यागे पौने दो वर्ष हो गये हैं, कौन जाने अब वह किस रूप में कहाँ होगा. सुबह स्कूल गयी, तो प्रिंसिपल ने कहा हो सके तो जाने से पूर्व स्कूल के लिए पुराना फर्नीचर देकर जाये.  टीवी पर लोभ से मुक्ति के लिए रामा का प्रयत्न दिखाया जा रहा है. वहाँ की जनता को भय दिखाकर लोभ से मुक्त करता है. लोभ मानव को अंधा कर देता है. राजा कृष्णदेव राय धन के लालच में एक वृद्धा से विवाह करने को तैयार हो जाते हैं. 


उस दिन... वह बहुत खुश थी, केवल दो पेपर शेष रह गए थे. उसके कमरे की खिड़की से लॉन दिखता था.आम के पेड़ पर कोयल कूक रही थी, जिसे और कोई काम नहीं बस उड़ते रहो और थक जाओ तो बैठ कर कूकने लगो. उस दिन वह आम के पेड़ से एक कच्ची अम्बी तोड़कर लायी थी. वह उम्र ऐसी थी जब इंसान सपनों को ही सत्य मान लेता है, और मन को ही संसार जान लेता है. लेकिन स्वप्न क्या कभी पूरे होते हैं और मन का अकेलापन भी दूर नहीं होता. जगत तो दूसरों के दुःख में दुखी होने का नाटक ही करता है, पर मन यह वास्तविकता समझ कर भी समझना नहीं चाहता. आत्मा का सत्य या मन का सत्य तो किसी-किसी पल में मुखर होता है. प्रकृति ही इस सत्य को जानती है फिर जगत की बेरुखी से परेशान होना व्यर्थ है. यहाँ हर सुख भी तो उतना ही क्षणिक है, केवल मन की गहराई में छिपा विश्वास ही अटल है जो आगे बढ़ने को प्रेरित करता है.


Sunday, October 4, 2020

जीन का इतिहास

 

आज ईद का अवकाश है. वे नाश्ते की मेज पर बैठे थे कि एक सखी का फोन आया, भूटान के बारे में जानकारी लेने के लिए, संयोग की बात है कि पिछले वर्ष आज ही के दिन वे भूटान गए थे. कितनी ही स्मृतियाँ लौट आयीं. जीवन की तरह यात्रा में भी हर तरह की बातें होती हैं, कुछ सुखद और कुछ दुखद भी.  एक ऐसी बात भी याद आयी जिसे अपने संस्कारों के कारण उसने शिकायत की थी. मन की प्रतिक्रिया से एक रचना का जन्म हुआ. इस जगत में सभी अपने-अपने संस्कार से बंधे हैं. जब तक वे मन से ऊपर उठकर जीना नहीं सीख जाते दुःख से छुटकारा नहीं है, अथवा तो उन्हें जीवन के वास्तविक दुखों का सामना नहीं करना पड़ा है सो काल्पनिक दुखों का निर्माण कर लेते हैं. जून भी वृक्षारोपण के कार्यक्रम में गए थे, पेड़ लगाने के बाद एक सुंदर रेशमी गमछा पहनाया गया उन्हें. हजारों बल्कि लाखों की संख्या में वृक्ष लगाए गए होंगे इस अवसर पर पूरे देश और विश्व में.शाम को योग कक्षा में एक साधिका ने वृक्षों को समर्पित एक व्यक्ति के अद्भुत कार्यों की बात बताई. उन्होंने भजन गाये और प्रसाद वितरण किया, सभी कुछ न कुछ लेकर आयी थीं.  समाचारों में सुना इस वर्ष के अंत तक जम्मू-कश्मीर व लेह में चुनाव कराये जायेंगे.   


सुबह के ध्यान में भगवान राम, सीता व लक्ष्मण के सुंदर विग्रहों का दर्शन हुआ, अद्भुत था वह दर्शन, मणि-माणिक से सजे सुंदर रंगीन चित्र के समान पल भर के लिए आये और विलीन हो गए . मन की गहराई में कितने खजाने छुपे हैं, जिनका उन्हें खुद ही भान नहीं है. इस समय टीवी पर तेनाली रामा आ रहा है, मानव के छह रिपु काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद व मत्सर राजा कृष्णदेवराय को पराजित करने के लिए तत्पर हैं. अब देखना है कि इस युद्ध में रामा कैसे राजा को बचाता है. जेनेटिक्स पर सिद्धार्थ मुखर्जी की लिखी किताब आगे पढ़ी, द जीन- एन इंटिमेट हिस्ट्री. बहुत रोचक ढंग से लिखी गयी है, जीन का विज्ञान भी बहुत पुराना है और इसमें नित नए अविष्कार हो रहे हैं. सौ वर्षों पूर्व कितना अन्धविश्वास था समाज में, इसकी जानकारी भी मिल रही है. विज्ञान ने या कहें समय ने मानव को ज्यादा संवेदनशील बनाया है. बहुत दिनों बाद फेसबुक पर नजर दौड़ाई, बड़ी भांजी का स्टेटस देखा तो उदासी की खबर दे रहा था, उससे व्हाट्सएप पर बात की. हमारे कर्मठ प्रधानमंत्री मालदीव और श्रीलंका की यात्रा पर गए हैं. वायुसेना का एक विमान ए एन 32 पिछले तीन दिनों से लापता है, उसमें 13 यात्री थे, उसने मन ही मन उनके सकुशल रहने की प्रार्थना की. 


आज शाम को अचानक तेज हवा चलने लगी, आकाश काला हो गया और देखते ही देखते मूसलाधार वर्षा होने लगी, पर एक घंटे बाद सब थम गया. प्रकृति की लीला को कौन समझ सकता है. आज ‘श्रद्धा सुम’न ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद लिखा. काव्यालय पर भवानी प्रसाद मिश्र की एक और कविता आयी है, उन्होंने मृत्यु का स्वागत सहजता से किया. आज सुबह ध्यान में एक दुबला -पतला बच्चा दिखा, मन भी विचित्रता से भरा है. कल रात स्वप्न में नन्हे को देखा, वह चाइना से असम आ गया है. 


और अब अतीत के पन्नों से - उस दिन की सूक्ति में लिखा था, गरीब लोग प्रेम और सहानुभूति के भूखे होते हैं. यह  पढ़कर ही सम्भवतः उसने लिखा था, यदि कोई जानता होगा तो उस दिन फिर एक दिव्य संदेश उसे प्राप्त होगा. जिस प्रकाश से आवृत होने की बात कुछ दिन पूर्व  लिखी थी, प्रकाश का वह पुंज छितरा गया था जब अगले दिन का पेपर अच्छा नहीं हुआ, किन्तु उसकी आवश्यकता तो सदा ही रहती है. आज इस क्षण से वह पुंज उसका मार्गदर्शक हो ऐसी प्रार्थना ईश्वर से करती है, उस ईश्वर से जिसके अस्तित्त्व पर उसे संदेह है. फिर क्यों कर वह उसकी बात सुनेगा, पर ईश्वर उसे अपनी प्रतीति स्वयं कराएगा. वह अज्ञानियों पर भी उतनी ही दया रखता है ऐसा सब कहते हैं. अज्ञानता में सार न हो पर उसमें पाप है ऐसा वह नहीं समझती. पाप और पुण्य की समझ उसे नहीं है, वह हर वक्त किसी का आश्रय चाहती है क्योंकि वह इतनी दुर्बल और क्षीण है कि अकेले चलना उसके बस का नहीं फिर वह एक कोई अपना हो या ईश्वर !  व्यक्ति है उसके सम्मुख जीता-जागता, उसकी बातों का जवाब देने वाला ! पर व्यक्ति कभी -कभी आपस में नहीं बोलते ऐसे पलों में उसे लगता है ईश्वर की मित्रता कभी अस्थायी नहीं होती. वह कभी उससे नाराज़ नहीं होगा, होगा भी तो मान जायेगा फिर ... किन्तु अपनों के साथ जुड़े होते हैं कितने अनोखे क्षण, स्मृतियाँ ! क्या स्मृतियाँ मृत होती हैं ? क्या उनमें कोई वस्तु स्पंदन नहीं कर रही होती. यदि वे मृत प्रायः हैं तो किसी के होने का मूल्य सिर्फ वर्तमान में है क्योंकि भविष्य में क्या छुपा है उन्हें नहीं ज्ञात. लेकिन ऐसा नहीं है वे जो ‘कुछ’ हैं, ‘वह’ कभी वे थे ! 


Wednesday, August 12, 2020

जामुन का वृक्ष



शाम के सवा चार बजे हैं. आज दोपहर उन्हें आगामी बंगलूरू यात्रा के लिए पैकिंग करनी थी पर नन्हे का फोन आया, अभी घर तैयार होने में दो हफ्ते लगेंगे. उसने कहा, फ़िलहाल वे अपनी यात्रा स्थगित करके आगे की टिकट ले लें. जून ने कॉल सेंटर में बात की, आधे पैसे कट जायेंगे जो हजारों में हैं, वे सोच रहे हैं कि जैसा कार्यक्रम है, वैसा ही रहने देते हैं. कुछ समय बैंगलोर आश्रम में बिताएंगे, गुरूजी भी वहीं हैं, सो भगवद्गीता के पन्द्रहवें अध्याय पर उनका प्रवचन भी सुन लेंगे और उनके जन्मदिन के उत्सव में भी भाग ले सकेंगे. आज सुबह गुलाबी पुष्पों के वृक्षों की तस्वीरें पुनः उतारीं। इस समय बाहर से कोकिल के कूकने की आवाज आ रही है. योग कक्षा में एक साधिका ने कहा, कल सुबह वह अपनी कालेज में पढ़ रही बेटी को लेकर आसन सीखने आएगी. अब उनका यहाँ से जाने का वक्त आ रहा है तो सीखने के लिए सभी के मन में योग के प्रति रूचि बढ़ रही है. दोपहर को बगीचे से तोड़े कटहल की सब्जी बनाई, अब जामुन के वृक्ष में भी फूल आ गए हैं, पूरा वृक्ष बौर से भर गया है. नैनी आज दाल के बने मीठे तले हुए पीठे लायी, उसका प्रेम ही है इसके पीछे, पर उन्होंने अब तले हुए पदार्थ खाना छोड़ दिया है. उन दोनों का वजन कुछ घटा है. 



जून ने अगले माह आश्रम में होने वाले कार्यक्रम में रजिस्ट्रेशन करा लिया है. हो सकता है उसे गुरूजी के जन्मदिन पर कविता पढ़ने का अवसर भी मिले. सुबह क्लब की एक सदस्य से मिलने गयी, बहुत भावुक है और संवेदनशील भी. दो बड़ी सर्जरी करा चुकी है. अच्छा लगा उसकी बातें सुनकर. कल तीसरे चरण का चुनाव है, अगले महीने आज के दिन तक सारे चरण पूरे हो चुके होंगे. राहुल गाँधी ने मोदी जी के खिलाफ जो अभद्र टिप्पणी की थी, उसके लिए खेद प्रकट किया है , उधर साध्वी प्रज्ञा ने भी एक अभद्र बयान दिया है. राजनीति में एक-दूसरे पर दोषारोपण चलता ही रहता है. कल श्रीलंका में सीरियल ब्लास्ट हुए जिसमें चर्च में ईस्टर प्रार्थना करने आये लोगों में दो सौ नब्बे  व्यक्ति मारे गए व पांच सौ घायल हो गए. धर्म के नाम पर हिंसा करने वाले आखिर कब समझेंगे कि दुनिया का कोई भी धर्म हिंसा करना नहीं सिखाता, पता नहीं धर्म के नाम पर अधर्म कब तक किया जाता रहेगा. 


आज सुबह गुरूजी का लन्दन में दिया एक प्रवचन सुना. कितने सुंदर व सरल शब्दों में उन्होंने पूरा बेसिक कोर्स ही जैसे करवा दिया. ऊर्जा के चार स्रोत, जीवन की सात परतें, ज्ञान की पाँच कुंजियाँ सभी कुछ ! आज दोपहर अक्षय कुमार द्वारा लिया गया प्रधानमंत्री का इंटरव्यू सुना, सबसे अचरज भरी बात लगी जब उन्होंने कहा कि ममता दीदी उन्हें साल में एक-दो कुर्ते भेजती हैं और मिठाई भी. राजनीतिज्ञ जब प्रचार करते हैं तो एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन लगते हैं. 


शाम के साढ़े सात बजे हैं. काशी की सड़कों पर प्रधानमंत्री की चुनावी यात्रा चल रही है. कुछ देर में ही वह दशाश्वमेधघाट पर पहुँच जायेंगे. वाराणसी की जनता उनके स्वागत में सड़कों पर उमड़ आयी है. आज सुबह गुरूजी से नारद भक्ति सूत्र सुना. सुबह-सवेरे गुरूजी के पावन वचन हृदय को सुंदर विचारों से भर देते हैं. दोपहर को घी बनाया, जून ने शाम को दफ्तर से आकर लड्डू बनवाये जो वे नन्हे व सोनू  के लिए ले जाने वाले हैं. कल रात स्वयं को विचार करते देखा, नींद में भी मन किस तरह उधेड़बुन में लगा रहता है, उसे देखकर आश्चर्य होता है, पता नहीं क्या चाहता है ? कोड़ी जी घाट पर पहुँच चुके हैं और आरती के साथ ताली बजाकर आनंद ले रहे हैं. 


और अब उन अतीत के पन्नों से - जितना खाओ उससे दुगना पानी पियो. जितना  पानी पियो उससे दुगना हँसो, जितना हँसो उससे दुगना टहलो. यही स्वास्थ्य का राज है. 

शायद उस दिन कुछ हुआ होगा, तभी लिखा- 


खिला चहकता घर ही भाये  

चुपचुप सा मन को चुभता है 

क्यों यह चुप्पी लगा गया है 

क्यों यह कुछ नहीं कहता है 

रहने वाले सब रहते हैं 

पर होंठ सभी के सिले हुए 

कोई बोले ना ही  चाले 

दिल क्यों नहीं हैं मिले हुए 

घर गूँजे खुशियों से गर तो 

तब ही तो घर कहलाता है 

सूना घर यह बे आवाजें 

यह कहाँ घर कहलाता है 

साथी आओ दीप जला दें 

बोल प्रेम के हम बिखरा दें 

चहक उठे यह घर दोबारा 

जैसे कोई बगिया चहके

मिल जाएँ सबके मन ऐसे 

फूलों में हो खुशबू जैसे  

 


Wednesday, June 24, 2020

गायत्री परिवार के मुखिया



दाहिनी आँख में हल्का दर्द है, सम्भवतः पित्त बढ़ने से हुआ है. कल रात को एक पार्टी में गए, भोजन गरिष्ठ था,थोड़ा सा गाजर का हलवा भी खाया. देह जब तक है तब तक कुछ न कुछ इसके साथ लगा ही रहेगा. आज ठंड ज्यादा है पहली बार फिरन पहना है. आज भी किसी ‘बंद’ की सम्भावना थी पर समझौता हो गया लगता है, इसी कारण जून दस मिनट लेट हुए दफ्तर जाने में. आज दोपहर से मन स्थिरता का अनुभव कर रहा है. भीतर कुछ करने को नहीं है, आजकल ऐसा लगता है. जैसे हाथ में दो कंगन हों तो बजते हैं, एक रह जाये तो कैसी आवाज, जब हृदय व बुद्धि एक हो जाएँ तो भीतर मौन का ही साम्राज्य शेष रहेगा. ऐसा मौन जो सहज है, पुलक से भरा है और पूर्ण तृप्त है. इस समय शाम के साढ़े सात बजे हैं, टीवी स्क्रीन पर यू ट्यूब में प्रणव पांड्या जी तनाव पर बोल रहे हैं, वह आर्ट ऑफ़ लिविंग के साथ आर्ट ऑफ़ थिंकिंग पर भी बल दे रहे हैं. कल वह क्लब में आने वाले हैं, वे उन्हें सुनने जायेंगे. सुबह प्रेसीडेंट के यहाँ गयी थी, उन्हीने पीठा खिलाया, अपने इकलौते पुत्र के बारे में बताया जो मुम्बई में रहता है. आज छोटी बहन से बात हुई, उसकी एक परिचिता सदा के लिए भारत वापस आ रही हैं, उसे बगीचे के लिए कृत्रिम घास व एक फौवारा देकर जा रही हैं. उसने आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक कोर्स भी किया पिछले दिनों. कहीं दूर से गाने की आवाज आ रही है, सर्दियों के मौसम में दूर की आवाज ज्यादा स्पष्ट सुनाई देती है. आज एक योग साधिका का फोन आया, उसका नन्हा पुत्र भी अपने जैसा एक ही है. वह एक जगह टिककर नहीं बैठता है और पढ़ने में उसका मन ज्यादा नहीं लगता है. 

आज सुबह बड़ी भांजी के लिए एक कविता लिखी, कल उसके विवाह की वर्षगाँठ है. वर्षों पहले दिल्ली में जब उसका विवाह हुआ था, घर में पहला विवाह था, वे एक सप्ताह के लिए गए थे. आज बगीचे से मेथी और हरे लहसुन तोड़े, मकई के आटे में मिलाकर ठेपला बनाया. नन्हा व सोनू भी सड़क यात्रा पर जा रहे हैं, एक रात एक फार्म हाउस में रुकेंगे. यात्रा करना सभी को भाता है, मन एक अलग ही स्थिति में रहता है यात्रा में, सजग पर विश्रामपूर्ण ! आज सुबह वे उठे तभी से गायत्री मन्त्र, भजन तथा हवन में बोले जाने वाले मन्त्रों की ध्वनि आ रही है. डेली बाजार के पीछे गायत्री शक्ति पीठ की स्थापना हो रही है. कल प्रणव पांड्या जी का भाषण सुना. उनकी टीम ने भजन भी गाए और शांति पाठ किया, गायत्री मन्त्र का अर्थ भी समझाया. भोजन में मसालों की तरह जीवन में थोड़ा सा तनाव आवश्यक है, पर जब यह अधिक हो जाता है तो कई रोगों को जन्म देता है, ऐसा भी कहा. इस समय शाम के पांच बजे हैं, जून मोबाइल पर ‘अँधा धुन’ देख रहे हैं. दोपहर को  लॉन में ही विश्राम किया, धूप भली लग रही थी, दो बजे धूप आगे खिसक गयी तो उठकर भीतर आ गए. कल मोदी जी को भारतीय सिनेमा के संग्रहालय के उद्घाटन पर बोलते सुनना एक सुखद अनुभव था. 

उस पुरानी डायरी में पढ़ा- आज साढ़े छह बजे उठी, इसलिए सारा दिन एक छाया से आवृत रहा मन, जल्दी उठने पर दिन-दिन भर खिला रहता है. बुआजी ने उस यात्री की कहानी सुनाई जो ट्रेन में सफर करते-करते अपनी जिंदगी का आखिरी सफर भी तय कर गया. एक अनाम यात्री, जिसके साथ उसके अंतिम सफर में सिर्फ गैर थे कोई अपना नहीं. अभी एक घण्टे बाद टीवी पर कवि सम्मेलन दिखाया जायेगा. कल भी सुना था. कल जो कविताएं सुनीं थीं उनकी कुछ पंक्तियाँ नोट की हैं. कन्हैयालाल नंदन की जो छवि उसने सोची थी वह उससे बिलकुल उलटे दिखे. उनकी कविता भी ज्यादा अच्छी नहीं लगी. इंदु कौशिक की आवाज व गीत के भाव दोनों भा गये. सूरज, उगते सूरज से मिले.. अभी कवि सम्मेलन देख कर आयी है. गिरिजा कुमार माथुर, बिसारिया, कैलाश वाजपेयी, कुमार शिव के गीत और कविताएं सुनीं. फिर आये भवानी प्रसाद मिश्र, जिनके साथ उसकी एक मधुर स्मृति भी जुड़ी है. उनकी कई एक कविताएं भी उसने पढ़ी हैं. आज की कविता को मात्र कविता नहीं कहा जा सकता, वह तो एक संदेश था, दैवीय संदेश, प्रेरणादायक, स्फूर्तिदायक और साथ ही यथार्थ का सही बोध कराने वाला सीधा-सादा, मन पर चोट करने वाला उनका आंसुओं से भीगा कथ्य !

Tuesday, May 26, 2020

नागालैंड फेस्टिवल



आज सुबह वे उठे तो बाहर गहन कोहरा था. इस वर्ष ठंड जल्दी शुरू हो गयी है और ज्यादा भी है. दो वर्ष पहले वे इस समय पंखा चलाते थे, आज ही पुरानी डायरी में कुछ देख रही तो पढ़ा. जून टीवी पर नागालैंड के बारे में यू ट्यूब का एक वीडियो देख रहे हैं, जिसमें ग्रीन विलेज खोनोमा पर एक डाक्यूमेंट्री दिखाई जा रही है. ‘खोनोमा’ एक गाँव है, जहाँ पहले जंगल काटे जा रहे थे तथा शिकार के द्वारा जंगली जानवरों को खत्म किया जा रहा था पर वहां की जनता सजग हो गयी और अब वह स्थान पुनः हरा-भरा हो गया है. इस माह के अंत में वे वहाँ जाने वाले हैं. नागालैंड की यात्रा में उन्हें अपने साथ कुछ रेडी टू ईट वाला भोजन भी ले जाना होगा. वहां शाकाहारी भोजन मिलने में कुछ परेशानी हो सकती है. आज से क्लब के वार्षिक कार्यक्रम के लिए रिहर्सल भी आरंभ हो गयी है. आज बंगाली सखी का जन्मदिन है, दो वर्ष पहले तक वे उनके घर जाकर बधाई देते थे पर आज व्हाट्सएप पर ही शुभकामनाएँ दे दीं. वक्त बदलता है तो लोग भी बदलते हैं और रिश्ते भी बदलते हैं. छोटी बहन के यहाँ दो दिन बाद सत्संग है, गुरूजी के यूएई आने की ख़ुशी में. 

फिर कुछ दिन का अंतराल ! दिन जैसे पंख लगाकर उड़ रहे हैं. इस समय रात्रि के आठ बजे हैं. जून आज देश की राजधानी गए हैं, नन्हा भी जाने वाला था पर अभी तक उसे उस अस्पताल के मैनजमेंट ने डेट नहीं दी जो उनके क्लाइंट हैं. जून ने उसे देने के लिए सामान भी खरीद लिया था, जो अब घर ले आएंगे. गुरूजी ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन लिखे उसके कमेंट पर कमेंट किया है यू ट्यूब पर, यह अवश्य ही उनकी टीम ने किया होगा, उनके पास इतना समय नहीं होता होगा, पर वह चाहें तो सब कर सकते हैं. उनकी कृपा का ही फल है कि आज विश्व में लाखों व्यक्ति अध्यात्म से जुड़ रहे हैं. वह कहते हैं, जीवन में जो भी दुःख आता है वह अज्ञान का फल है, उन्होंने कभी न कभी इस दुःख का बीज डाला था. वे जितना-जितना बाहर सुख खोजते हैं भीतर का सुख ढक जाता है. भीतर का सुख भुलाकर जब बाहर से लेने जाते हैं तो इसे ही मोह कहते हैं. सुख के लिए बाहर किसी को दुःख नहीं देना है, संसार की कोई वस्तु इतनी कीमती नहीं है जिसके लिए संसार को दुःख दिया जाये. भीतर का सुख खो न जाये इसके लिए भी सजग रहकर किसी को दुःख न हो जाये, इसका ध्यान रखना है.

नागालैंड की यात्रा से वे लौट आये हैं, यात्रा सुखद थी और यादगार भी. वर्ष का अंतिम महीना आ गया है. देखते ही देखते यह वर्ष भी विदा हो जायेगा. इस महीने कई कार्यक्रम हैं, पहले सप्ताह में घर में डिनर पार्टी है, जो चार परिवार एक साथ मिलकर नागालैंड गए थे, वे सभी एक साथ मिलकर उन तस्वीरों को देखेंगे और एक नागा परिवार को बुलाएँगे जिसने इस यात्रा में उन्हें सहयोग दिया. दूसरे सप्ताह में महिला क्लब का वार्षिक उत्सव है. जिसकी तैयारी में उसे भी काफी समय देना पड़ेगा. उसके अगले दिन ही जून के पूरे विभाग की पिकनिक पार्टी है. उसके तीन दिन बाद उन्हें दुबई की यात्रा पर निकलना है. जहाँ से नए वर्ष के आरंभ  होने के बाद ही लौटना होगा. आज छोटे भाई के विवाह की सालगिरह है. 

कल का पूरा दिन विभागीय पिकनिक के नाम था. वे लोग सुबह जल्दी ही निकल गए थे, नदी किनारे टैंट लगाया, एक मेज भी ले गए थे जिसपर सुबह का नाश्ता लगा दिया गया था. फुटबाल, बैडमिंटन, रस्साकशी आदि खेलने का भी प्रबंध था. नदी में उतरे वे लोग फिर धूप में रेत पर लेटे रहे, कुछ लोगों ने गाने गाये, कुछ ने अभिनय किया. कुछ यूँही टहलते रहे. दोपहर का भोजन एक रेस्तरां वाला लेकर आया, वह अपने साथ ही सब कुछ लाया था बड़ी सी वैन में. दो मेजें जोड़कर उसने लन्च सजा दिया. उसे वह पुराने दिन याद आये जब पूरा भोजन खुद बनाया जाता था, लकड़ी का चूल्हा जलाकर, दो-तीन पत्थर जोड़कर वे चूल्हा बनाते थे. घण्टों खाना बनाने में ही लग जाते थे, पर उस भोजन का स्वाद ही अलग होता था. अब कोई भी यह ज़िम्मेदारी उठाना नहीं चाहता सो बना-बनाया भोजन ही मंगवाना पड़ता है. 

Thursday, May 21, 2020

दीवाली की उजास


आज पूरे नौ दिन बाद डायरी उठायी है. पिछली बार की जो एंट्री है, उसी दिन नन्हा व सोनू आये थे. उसके बाद दिन कैसे बीतते गए, समय का जैसे पता ही नहीं चला. उसी दिन शाम को वे ही उसे महिला क्लब की मीटिंग के लिए छोड़ने गए. अगले दिन उसे स्कूल जाना था. अगले दो दिन जून ने छुट्टी ली थी, उसी दिन उन्होंने दीपावली के विशेष भोज का आयोजन किया था. नन्हे ने छोले बनाये, और उसने ढेर सारे व्यंजन, आखिरी दीवाली थी सो जून ने विभाग के सभी अधिकारीयों को बुलाया था. भाईदूज के दिन वे अरुणाचल प्रदेश में एक सुंदर स्थान नामसाई घूमने गए, एक मोनेस्ट्री, नदी तट सन्तरे के बगीचे और सुंदर पहाड़ी रास्तों पर की गयी वह यात्रा भी अच्छी रही .एक दिन रहकर अगले दिन शाम को लौटे. उसके एक दिन बाद बच्चे वापस चले गए. पटाखे, स्नैक्स, तथा रौशनी की झालरें व ढेर सारी मिठाई लाकर उन्होंने असम में उनकी इस दीवाली को यादगार बना दिया है. अगली दीवाली बंगलूरू में होगी. दीपावली के बाद आज छठ का त्यौहार भी सम्पन्न हो गया. लगभग एक महीने बाद आज एओल के टीचर ने फॉलोअप करवाया. आज उनका जन्मदिन भी था. योग अभ्यास  के बाद उन्होंने ही मिठाई खिलाई. वह बहुत अच्छी तरह से व्यायाम व क्रिया कराते हैं, उन्हें उनका कृतज्ञ होना चाहिए. कल बाल दिवस है, वह क्लब की कुछ अन्य सदस्याओं के साथ मृणाल ज्योति जाएगी. उससे पहले टाइनी टॉटस भी जाना है, उस स्कूल में भी बुलाया है जहाँ वह योग सिखाने जाती है, पर समय निकालना कठिन होगा. कल दोपहर बच्चों के लिए कविता लिखी, नन्हे और सोनू का स्वभाव एक-दूसरे से कितना मिलता है, दोनों का दिल बहुत बड़ा है. ईश्वर उन्हें सदा इसी तरह खुश रखे. दीदी ने भी कविता पढ़कर लिखा है, ‘इसी तरह प्यार बना रहे’. जून आज दोपहर दीदी के यहाँ गए थे, कल अपने काम के बाद पिताजी से मिलने जाएँगे. कल मंझली भाभी का फोन आया, बगीचे में निकले सांप का वीडियो देखकर उन्हें आश्चर्य हो रहा था. परसों शाम को सर्प देखा था. दोपहर को नैनी की बेटियाँ आयीं, कहने लगीं, उन्हें बाल दिवस पर स्कूल में डांस करना है, वह मोबाइल पर गाना बजाकर उन्हें अभ्यास करा दे। उसे आश्चर्य हुआ, आजकल बच्चे सेल्फी ले ले ... जैसे गानों पर स्कूल में नृत्य करते हैं. 

कल बालदिवस के कार्यक्रम दोनों स्कूलों में ठीक रहे. आज देहरादून से दिल्ली आते समय जून के सहयात्री थे, बाबा रामदेव. जून ने उनके साथ तस्वीर भी खिंचवाई और वह भी बाबा के कहने पर, क्योंकि वह संकोच कर रहे थे. एयरहोस्टेस ने खींची तस्वीर. सुबह वह दीदी के यहाँ नाश्ते पर गए थे. मूली व गोभी के परांठे खिलाये उन्होंने. कल वह वापस आ रहे हैं. आज मौसम काफी ठंडा है, तमिलनाडु में आए समुद्री तूफान का असर है शायद. धूप में तेजी नहीं थी. बाहर से नैनी के भतीजे के रोने की आवाज आ रही है, अपनी शैतानियों के कारण उसकी काफी पिटाई होती है, पर वह सुधर नहीं रहा है. शिव सूत्र पुस्तक दो-तीन दिनों से पढ़नी आरंभ की है, सरल शब्दों में गूढ़ विषय को समझाया गया है. वेदांत, योग व शिव सूत्र के अनुसार जगत व परमात्मा की व्याख्या में थोड़ा अंतर है पर मूल बात वही है. 

Thursday, October 3, 2019

नारियल स्ट्यू और अप्पम



नौ बजे हैं सुबह के, जून को आज पहली बार चेहरे पर एक हल्का सा लाल रैश दिखा, जिसका इलाज उन्होंने इस बार की बैंगलोर यात्रा में करवाना आरम्भ किया है, डाक्टर ने कहा, ये सूखे मेवों अथवा किसी दवा के कारण भी हो सकते हैं. कई वर्षों से कभी-कभी त्वचा पर रैशेस होते रहे हैं उन्हें  जो अपने आप ही कुछ देर में समाप्त हो जाते हैं. पिछले कई वर्षों से वह रक्तचाप की दवा ले रहे हैं. कल एक योग साधिका ने बताया उसके हाथ की उँगलियों के जोड़ों की त्वचा फट जाती है, एक अन्य को महीनों से जुकाम की शिकायत है, स्वस्थ रहना कितना कठिन हो जाता है उम्र बढ़ने के साथ-साथ. आज मौसम बादलों भरा है, हवा बंद होने से उमस भी है. कल दोपहर को कई दिनों बाद एक कविता लिखी. शाम को भजन गाये. उनका सुख भीतर है, किसी बाहरी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति का गुलाम नहीं है, इस बात को स्वयं को बार-बार याद दिलाने की जरूरत है.

आज वे तिनसुकिया गये थे, फल व सब्जियां खरीदीं. जून का गोहाटी से लाया असमिया सूती सूट सिलने दिया और वहीं से डिब्रूगढ़ में अस्पताल चले गये. एक योग साधिका का किशोर बेटा चार दिनों से वहाँ इलाज करा रहा है. उसके बारे में सुना था पर पहली बार देखा. पीछे से देखा तो अच्छा-ख़ासा बड़ा लग रहा था, कद भी लंबा है, पर उसे बचपन से ही एपिलेप्सी के दौरे पड़ते आये हैं. मानसिक रूप से थोड़ा कमजोर है. उसका मुख खुला था और पाइप लगा था, नाक में भी पाइप लगा था. शायद तकलीफ में होगा पर निकट जाते ही उसने हाथ पकड़ लिया और एकटक देखने लगा. चेतना जागृत थी भीतर. माता-पिता ने बताया ढाई वर्ष का था जब उन्हें पहली बार पता चला कि उनका पुत्र अन्य बच्चों से अलग है, तभी से भारत के कितने ही शहरों में उसे दिखा चुके हैं, आयुर्वैदिक इलाज भी करवाया पर विशेष लाभ नहीं हुआ. उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद घट गयी है सो जल्दी ही सर्दी-जुकाम पकड़ लेता है और जल्दी ठीक नहीं होता. पिछले वर्ष भी निमोनिया हो गया था. उन्होंने हालात से समझौता कर लिया है, और पूर्ण धैर्य के साथ उसके स्वस्थ होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. अस्पताल में ही रह रहे हैं, जहाँ खाना बाहर से मंगाना पड़ता है. ईश्वर ही उन्हें शक्ति दे रहा है. वापस आकर उसने भी भोजन बनाया, केरल की एक डिश पुदुअप्प्म या ऐसा ही कुछ नाम था, उसके साथ नारियल के दूध का हरी सब्जियों के साथ बना स्ट्यू. जून को नये-नये पकवान बनाने का शौक है. उसी समय एक परिचिता मिलने आई. वह इसी महीने के अंत में कम्पनी में नौकरी के लिए इंटरव्यू दे रही है. सम्भवतः जून भी जाएँ इंटरव्यू लेने, तब तो उनके लिए कठिनाई हो जाएगी.  

टीवी पर तेनाली राम आ रहा है. उनका दिन शुरू होता है 'संस्कार' से और समाप्त होता है 'सोनी' पर. आज जून ने भूटान जाने की टिकट बुक कर दी है. अगले महीने के अंतिम सप्ताह में वे कोलकाता होकर भूटान जाने वाले हैं. उसका जन्मदिन भी वहीं मनेगा इस बार. कल से 'आर्ट ऑफ़ लिविंग' का बेसिक कोर्स आरम्भ हो रहा है. शाम को योग कक्षा में एक साधिका ने कहा, एक घंटे के कार्यक्रम में उसे सबसे अच्छा उसे अंत का ज्ञान स्तर लगता है. ज्ञान मुक्त करता है. उनकी गलत धारणाएं जो बंधन में डालती हैं, उन्हें तोडना है. आजकल माली ठीक से काम नहीं कर रहा है, शाम को मालिन को समझाया, अवश्य ही इसका कुछ तो असर होगा. स्कूल में चार बच्चों को स्टेज पर बुलवाकर आसन करवाए, वे आत्मनिर्भर बन सकें यही उसका प्रयास है.

आज इस मौसम में पहली बार तैरने का अभ्यास किया, आरम्भ में पानी ठंडा लगा पर बाद में शरीर अभ्यस्त हो गया. जाने से पूर्व मन में संशय था, कि महीनों से अभ्यास छूट गया है, पता नहीं कर पाएगी या नहीं ? जून ने स्वयं कहा कि उसे ड्राइविंग भी सीखनी चाहिए. उस दिन वह परिचिता जब घर आयी थी इंटरव्यू की बात करने, तब उस से यह भी कहा कि उन्होंने ही उसे जॉब करने नहीं दिया, अच्छा जॉब मिला भी नहीं. समय के साथ इंसान की सोच बदलती है. आज माली आया था सुबह, बगीचे में कई काम हुए. उसे रोज सुबह एक घंटा आने के लिए कहा है, पर वह अक्सर सुबह देर तक सोता है, कोई न कोई बहाना बनाता है अथवा तो पीकर सोने के कारण उठने की हालत में ही नहीं होता. आज दोपहर को भी योग करवाया, शाम की कक्षा में एक साधिका ने कहा, उसे आये दिन साधु-संतों के बारे में नकारात्मक बातें सुनकर गुरूजी के प्रति भी श्रद्धा नहीं जन्मी थी. पहले-पहल, ऐसा होना स्वाभाविक है, पर पता नहीं क्यों ऐसा सुनकर मन प्रतिवाद करने लगा. बाद में स्वयं ही स्वयं को समझाया कि आवाज ऊँची करने से ही कोई बात को सही समझ लेगा यह जरूरी तो नहीं. आत्मा के प्रकाश में स्वयं की भूल तुरंत दिख जाती है, कितनी बड़ी कृपा है यह परमात्मा की ! नैनी ने गुरूजी की तस्वीर के लिए माला बनाकर दी थी, एक साधिका आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर में होने वाले बेसिक कोर्स में जाते समय ले गयी थी. कल पहला दिन था, आज सुदर्शन क्रिया होगी, वे लोग फ़ॉलोअप के लिए कल जा सकते हैं.

Wednesday, August 28, 2019

जोसेफ मर्फी की किताब



रात्रि के आठ बजे हैं. यात्रा की तैयारी लगभग हो गयी है. अभी थोड़ी बहुत पैकिंग शेष है, जैसे तैरने का सामान, डायरी, किताबें आदि. शाम को लाइब्रेरी गयी दो नई किताबें इश्यू करायीं, एक सुधा मूर्ति की दूसरी डाक्टर जोसेफ मर्फी की 'पॉवर ऑफ़ सबकॉनशियस माइंड' शाम को योग कक्षा में कोर्स में सीखे चक्र-ध्यान के बारे में बताया, उन्हें डिवाइन शॉप से खरीदीं किताबें पढने को दीं और सकारात्मक चिन्तन करने को भी कहा. उससे पूर्व एक सहप्रतिभागी आया था, उसे हरिओम ध्यान के बारे में बताया. कोर्स के बाद जब सुबह स्कूल गयी तो तन बिलकुल हल्का था. योग सिखाते समय फिर एक पतंगा आकर सम्मुख बैठ गया था, परमात्मा का संदेश वाहक..आज बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर लिखा. काव्यालय की संस्थापिका के ब्लॉग को सब्सक्राइब किया, हर मंगलवार को उस पर पोस्ट आती है. नैनी ने अपनी बेटी के स्कूल प्रोजेक्ट के लिए कमल का एक सुंदर फूल बनाया, उसके लिए नयी ट्यूटर भी खोज ली है. उसके माता-पिता नहीं रहे जब वह छोटी थी, नानी के यहाँ रहकर पली, ज्यादा पढ़ाई नहीं कर पायी पर अपने बच्चों को वह बहुत पढ़ाना चाहती है.

कल उन्हें यात्रा पर निकलना है. बड़ा सा सूटकेस जो वे ले जाने वाले हैं, काफी भारी हो गया है. कभी-कभी खुद भी उठाना पड़ सकता है, न भी पड़े तो जो भी उठाएगा उसकी कमर पर असर पड़ सकता है. आज विश्व ऑटिज्म डे है, शायद मृणाल ज्योति में कुछ आयोजन हुआ हो इस उपलक्ष में. बाहर बच्चों के झूला झूलने की आवाजें आ रही हैं, कल से उन्हें पूरा बगीचा मिल जायेगा. दीदी का फोन आया, दोपहर को वे दोनों सिडनी जा रहे हैं, एक डेढ़ महीना वहाँ रहेंगे. बेटी ने टिकट भेज दी है, पिछली बार तीन साल का वीजा मिल गया था, जिसमें हर वर्ष तीन महीने वे लोग सिडनी में बिता सकते हैं. बंगलूरू में उनके नये घर की चाबी मिल गयी है, वर्ष के अंत तक उसमें साज-सज्जा का कार्य हो जाना चाहिए. दोपहर की योग कक्षा में आज पहली बार छह महिलाएं आयीं, साथ में दस बच्चे.

आज सुबह चार से थोड़ा पहले उठे, और साढ़े पांच बजे तक तैयार थे. डिब्रूगढ़ से कोलकाता की उड़ान समय पर थी, जहाँ अगली फ्लाईट के लिए साढ़े पांच घंटे बिताने थे. डाक्टर जोसेफ मर्फी की पुस्तक पढ़ते हुए समय कैसे बीत गया पता ही नहीं चला. एक सखी बंगलूरू से वापस जा रही थी, कुछ देर उससे बात की. उसका पुत्र हैदराबाद में कानून पढ़ रहा है, जिसने आधुनिक कार्लमार्क्स कहे जाने वाले एक समाजविज्ञानी का इंटरव्यू लिया, बेटी बंगलूरू में जॉब करती है. रात्रि साढ़े आठ बजे घर पहुँचे तो नन्हा और सोनू घर आ गये थे. कुक खाना बना कर चला गया था. बड़े भाई की बिटिया और उसकी एक सखी भी आये थे, नन्हे का एक मित्र भी, सबने मिलकर रात्रि भोजन किया. मौसम गर्म था.

सुबह साढ़े पांच बजे उठे, साधना की फिर कुक के हाथ की बनी चाय पी. पोहा बनाया था उसने नाश्ते में, सोनू ने फल काट दिए. उसके बाद इंटीरियर डेकोरेटर से मिलने गये, जिसने ३डी डिज़ाइन दिखाए घर के, काफ़ी प्रभावित करने वाले थे. उसके बाद एक संबंधी के यहाँ लंच खाया, अगले महीने होने वाले उनकी बेटी के विवाह में आ नहीं पायेंगे, सो उसे उपहार दिया. एक सखी से बात की, उसकी देवरानी की बेटी जो बंगलूरू में रह कर पढ़ाई करती है, बुखार से पीड़ित है, वह उनके घर रहने आई है. जून ने बताया, उनके दफ्तर की वह महिला अधिकारी फिर अस्पताल पहुँच गयी है. जीवन कितना नाजुक है और क्षण भंगुर भी, बड़े जतन से इसकी देखभाल करनी पडती है. उसे स्मरण हो आया, घर पर महिलाएं योग करके वापस जा रही होंगी, वह चाबी देकर आई थी. यहाँ उसकी दिनचर्या बिलकुल बदल गयी है. नीचे पूल में बच्चों की आवाजें आ रही हैं.

Wednesday, March 13, 2019

गुलमोहर के वृक्ष



मौसम आज भी वर्षा का है, सुबह छाता लेकर टहलने गये, वापसी में वर्षा आरम्भ हो गयी थी. पौने ग्यारह बजने को हैं. भोजन तैयार है, जून के आने में पन्द्रह मिनट का समय है, उसने डायरी उठा ली है. केजरीवाल ने फिर ईवीएम की गड़बड़ी का राग अलापना शुरू कर दिया है. मोदी जी द्वारा किये काम उन्हें नजर ही नहीं आते. बंगाली सखी को संदेश भेजा है, अभी उसने देखा नहीं है, उसके लिए शुभकामनायें ! छोटी बहन ने एक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है, अभी दो शेष हैं, उसे जो नया जॉब लेना है उसके लिए, विदेश में नौकरी करना इतना भी सहज नहीं है. दीदी भी अपनी बिटिया के पास सुदूर महाद्वीप की यात्रा पर जा रही हैं. कल रात्रि जून ने अपने बचपन के बारे में पहली बार सहजता से बताया. प्राइमरी स्कूल की अपनी अध्यापिका सरोज मैम के बारे में तथा अन्य स्कूलों के बारे में भी. इंटर में उनका दाखिला काफी लेट हुआ था. उन्हें अपने उन स्कूलों में जाने का मन है. अगली यात्रा में वे उस कालेज में जा सकते हैं, जहाँ साथ पढ़ते थे.

परमात्मा की धुन, उसका भजन और उसकी शरण में जब मन को आनंद आने लगता है तो उसे दीन दुनिया की कोई खबर ही नहीं रह जाती ! वह ही पाने योग्य है और भजने योग्य है ! आत्मा कर्म फल को भोगने वाला है, पिछले दिनों जो स्वास्थ्य की समस्या से उसे दोचार होना पड़ा उसका कारण पूर्व में उसके द्वारा किये कौन से कर्म थे, उनका भी स्पष्ट अनुभव हुआ, इतनी तीव्रता से वह अनुभव उसे प्रकृति द्वारा कराया गया. वे वस्तुओं को वैसा नहीं देख पाते जैसी वे हैं, इसे ही निंदा कहते हैं. वे अपने दृष्टिकोण से ही वस्तुओं को परखते हैं, जबकि वास्तव में वे वैसी नहीं होतीं. उनके हर कर्म का फल परमात्मा से मिलने ही वाला है, उनकी जरा भी हानि नहीं होती. यदि वे प्रशंसा के रूप में अपने कर्म का फल पहले ही ले लेते हैं तो ईश्वर की व्यवस्था में इसका भी विधान है. उनके किसी कर्म से यदि अन्य का हित या अहित होता है तो यह उसके कर्मों का हिसाब है. अपेक्षा ही उन्हें आत्मा से नीचे ले आती है. कल पुस्तकालय से एक किताब लायी है, First thing First everyday  अच्छी है. कल उन्हें बंगलूरू की यात्रा पर निकलना है.

इस समय वे बंगलूरु शहर से दूर हवाई अड्डे के पास एक रिजोर्ट में हैं. कल सुबह दस बजे वे यहाँ आये थे. यहाँ का वातावरण सुंदर है. हरियाली है, पंछी हैं, फलों और फूलों के वृक्ष हैं, सुंदर रास्ते हैं. सुबह–सुबह बाहर तक टहल कर आये. गुलमोहर तथा ताड़ के वृक्ष सडक के दोनों ओर लगे थे और रिजॉर्ट के अंदर भी विभिन्न तरह के इंडोर व आउटडोर खेल का इंतजाम है. कमरे वातानुकूलित हैं, जिसमें आरामदेह फर्नीचर है. इसी वर्ष नवम्बर माह में यहीं पर नन्हे और सोनू  का सामाजिक रीति से विवाह तथा रिसेप्शन होने वाला है. कल उन्होंने मैनेजर और शेफ के साथ बैठकर भोजन की सूची के बारे में वार्तालाप किया. पंडित जी भी आकर मिल गये और विवाह नियोजक भी. टीवी पर सुरेश ओबेराय व शिवानी बहन संस्कारों पर बात कर रहे हैं. नन्हा अपने मित्र को हवाईअड्डे छोड़ने गया है. अभी-अभी सोनू ने एक दुखद समाचार सुनाया. कल उसका भतीजा मुंबई में जिस मित्र के यहाँ रुकने वाला था, उसे बचपन से जानता था, वह उनके पारिवारिक मित्र का पुत्र था. वह कल घर शिफ्ट कर रहा था. तीन मित्र और भी थे, सभी ने सहायता की. रात को जब भतीजा सो रहा था तो बाहर शोर सुनकर उठा, पता चला, उसके मित्र ने अठाहरवीं मंजिल से गिरकर जान दे दी है. दो मित्र चले गये, एक लड़का और वह खुद रह गये. सोनू की चचेरी बहन भी मुम्बई में रहती है, उसे फोन किया तो वह रात को दो बजे उसे अपने घर ले आई. मृतक के पिता तंजानिया में हैं तथा माँ कोलकाता में. आज की पीढ़ी की सहनशक्ति कितनी घटती जा रही है. उस आत्मा की शक्ति तो वास्तव में बहुत कम थी. अभी कुछ दिन पूर्व ही उनके एक संबंधी की पुत्री ने ऐसा कदम उठाया था पर वह बच गयी. वर्षों पूर्व कालेज में जल जाने पर एक बार उसने भी ऐसा ही सोचा था. मन की दुर्बलता ही इसके पीछे एकमात्र कारण है और अपने मन की बात किसी से न कह पाने की दुर्बलता भी. नाश्ते का समय हो रहा है, जून के आते ही वे नाश्ते के लिए जायेंगे.