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Thursday, August 6, 2026

‘विचार चंद्रोदय’


विचार चंद्रोदय


आज सुबह गुरूमाँ को सुना, कितना अच्छा बोलती हैं। पंडित पीतांबर जी द्वारा लिखे गये अद्वैत वेदान्त के ग्रंथ ‘विचार चंद्रोदय’ पर उनकी व्याख्या अनुपम है। इस पुस्तक में वेदान्त का शुद्ध ज्ञान सरल ढंग से समझाया गया है। जगत की सत्यता, मैं कौन हूँ, पाँच कोष, तीन ताप, कर्म सिद्धांत और मुक्ति का स्वरूप सभी कुछ प्रश्न-उत्तर शैली में समझाया गया है।अभी कुछ देर पहले उसने गुरुजी से जुड़ा एओएल का एक अनुवाद कार्य किया।अमेरिका के एलेघेनी शहर ने २२ जून को ‘श्री श्री रविशंकर दिवस’ घोषित करके गुरुजी को सम्मानित किया है। अमेरिका की आठ यूनिवर्सिटीज़ में श्री श्री योग और सुदर्शन क्रिया सिखाई जाती है। दशकों से गुरुदेव पूरे विश्व में विभिन्न समुदायों के मध्य आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित करते आ रहे हैं। मोदीजी भी अमेरिका में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं, पर सारा विपक्ष उनके कामों का पूरी तरह से विरोध कर रहा है। शाम को पापाजी से बात हुई, उन्होंने भी मोदीजी की तारीफ़ की, पर विपक्ष को और मज़बूत होना चाहिए, ऐसा भी कहा। कल रात उन्होंने बिना एसी के सोने का प्रयास किया पर आधी रात को ही चलाना पड़ा। सड़क पर लगे बल्ब की, खिड़की से आती रोशनी आँखों को चुभ रही थी।खिड़की बंद करने या पर्दा लगाने से हवा नहीं आती, सो बिना एसी के सोना अब सर्दियों में ही संभव होगा। 

दिन भर मौसम बदली वाला बना रहा, शाम को बादल कुछ देर को बरस भी गये। रात्रि भ्रमण के लिए गये तो सड़कें गीली थीं और ख़ाली भी। सन्नाटा पसरा था जैसे सर्दियों की कोई शाम हो और लोग घरों में दुबक गये हों। आज उन्होंने देवानंद-नूतन की एक पुरानी फ़िल्म देखी, ‘बारिश’। उस समय के नायक में वीरोचित और नैतिक गुण होते थे। पुलिस भी कार्य में दक्ष और ईमानदार थी। अब न नायक वैसे हैं न पुलिस। समय के साथ समाज में विकृतियाँ बढ़ने लगती हैं।लेकिन कई मामलों में चतुर्मुखी विकास भी हुआ है बल्कि अनेक मामलों में चीजें बेहतर हुई हैं। 

आज सुबह पौधों के साथ बितायी। हरे-भरे पौधे और लॉन में हज़ारों हरसिंगार के फूल, बरसात के मौसम में चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है। इतवार है आज, नन्हा और सोनू आये। पिछले दिनों सोनू ने बहत सारे केक बनाये, काफ़ी थक गई है, लेकिन बहुत खुश है। अभी भी उसके पास केक के ऑर्डर हैं, मंगल को देने हैं।हरेक को अपने काम के अलावा एक न एक शौक़ रखना ही चाहिए। ऐसा शौक़ जिसे पूरा करने से ही ख़ुशी मिलती हो, जिसका कोई फल उसे नहीं चाहिए। फल तो मिलेगा ही पर फल की आशा में वह कार्य न किया गया हो। सोनू कह रही है, अगले हफ़्ते वह श्यामक चावल की ब्रेड बनाकर लाएगी। 

आज महीनों बाद उसने हर ब्लॉग पर एक-एक पोस्ट प्रकाशित की। अब यही प्रयास रहेगा कि नियमित रूप से लेखन कार्य चलता रहे। यदि मन में किसी काम को करने का इरादा हो तो समय निकल ही आता है। मौसम आजकल अच्छा है, पर इस वर्ष वर्षा अपेक्षाकृत कम हो रही है।आकाश बादलों से घिरा रहता है, हवा भी चलती है, पर बूँदें बरसती नहीं हैं। कुछ देर पहले छोटी ननद की सखी, एक पूर्व परिचिता का फ़ोन आया, वह परसों अपनी एक सखी के साथ उनके घर आ रही हैं। दोनों आश्रम जाना चाहती हैं। वे उन्हें आश्रम तो ले ही जाएँगे, हो सका तो इस्कॉन मंदिर भी ले जाएँगे। जून ने कहा है, अंत में घर भी छोड़ देंगे। 

कल छोटी बहन का फ़ोन आया। आज उसे अपने क्लिनिक में गुरु पूजा करवानी थी।भांजी अपने मित्र को घर लायी है, उन दोनों ने मिलकर भोजन बनाया, पर अभी तक भविष्य के बार में कोई विचार नहीं किया है।आज पाकिस्तानी लेखक हारून ख़ालिद की लिखी पुस्तक “वॉकिंग विद  नानक” आ गई है। उसने पढ़नी शुरू कर दी है, अच्छी लग रही  है। गुरु नानकदेव की माँ तृप्ता आज से पाँच सौ वर्ष पहले भी कितनी निर्भीक थी और कितने स्वतंत्र विचारों की महिला थी।गुरु नानक के जीवन के कितने अनजाने पहलू जानने को मिल रहे हैं। पुस्तक में इतिहास, यात्रा वृत्तांत और अध्यात्म सभी का मिश्रण है।लेखक ने इक़बाल कैसर के साथ घूमकर पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थलों के बारे में सही जानकारी पाने की कोशिश की है। 

आज सुबह वे निकट की एक झील पर जाने के लिए निकले तो पड़ोसी भी उसी वक्त प्रातः भ्रमण के लिए निकल रहे थे, उनसे पूछा तो वह भी साथ चलने के लिए तैयार हो गये। उन्होंने इतने वर्षों में आसपास की कोई झील कभी नहीं देखी थी। कुछ तस्वीरें उतारीं। आज की पुरानी फ़िल्म में आशा पारिख थी, वह आँखों से कितना कुछ कह जाती है। नन्हे ने आज काँच के दो बड़े गिलास और छह गिलासों का एक सेट भेजा है। जून ने उसके लिए ‘नागराज’ कॉमिक के आठ अंक मँगवाये हैं। बचपन में वह इन्हें पढ़ता था। अगले महीने उसका जन्मदिन है। उन्होंने बिना पॉलिश की हुई दालें भी मँगवायी हैं, यकीनन उनका स्वाद अच्छा होगा। आज उनके फ़्लैट का काम पूरा हो गया। अगले महीने से किराए पर चढ़ सकता है। 

आज दोपहर वे दोनों महिलाएँ आ गई थीं। उत्साह से भरी और छोटी लड़कियों की तरह बात-बात पर खिलखिलाने वालीं। दोनों आपस में पुरानी मित्र हैं।नूना और जून ने चार-पाँच घंटे उनके साथ बिताये। दक्षिण भारतीय अल्पाहार के बाद शाम को वे उन्हें आश्रम ले गये। आश्रम के अनेक मुख्य स्थल दिखाये, राधा कुंज के निकट कई तस्वीरें उतारीं। विशालाक्षी मंडप में भजन संध्या में सम्मिलित हुए।अन्नपूर्णा में प्रसाद ग्रहण किया। उनके घर छोड़ने गये तब काफ़ी देर हो गई थी, वापसी में वे नन्हे के यहाँ ही सो गये। सुबह की चाय के बाद घर लौट आये। रात को सोते समय भी उसके भीतर जैसे भीतर एक जागरण बना हुआ था, पर बाहर का कुछ बोध नहीं हो रहा था। नींद कुछ बदल सी गई है। कभी-कभी आँख बंद करने पर कुछ रूप दिखायी पड़ते हैं। 

आज पापाजी से बात हुई, आजकल वह अकेले रह रहे हैं। पढ़ने से उनकी आँख में दर्द होता है, पर वे पढ़ना छोड़ते नहीं। कहते हैं, किताबों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है, और अख़बार से समाज व देश की आम जानकारी होती है।आज उसने श्रावण में होने वाली रुद्र पूजा के बारे में एक आलेख का अनुवाद किया।भगवान शिव सबसे शक्तिशाली और कल्याणकारी रूपों में से एक भगवान रुद्र के लिए की जाने वाली एक सुंदर पूजा ! रुद्र का अर्थ है,  जो सभी दुखों का नाश करते हैं ! मन के भीतर एक जागरण बना रहे, वे बेहोशी में कोई कार्य न करें, सारी पूजाएँ और कर्मकांड इसी बात को सिखाने के लिए ही तो किए जाते हैं। जीवन में सजगता के साथ  पवित्रता भी बढ़े, जब किसी वस्तु को पावन कहकर देखते हैं, तो उसके प्रति हाव-भाव कितना बदल जाता है। उनकी नींद भी पावन हो और जागरण भी !  इस रविवार को उनके यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।अभी से उसके मन में उत्साह भर गया है। पिछले वर्ष भी उन्होंने एक बार गुरु पूजा का आयोजन किया था। असम में तो हर वर्ष एक बार करवाते थे, उनके पड़ोसी, जो आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक थे, वही किया करते थे। कल उनकी गली में भी एक शिक्षक के यहाँ गुरुपूजा का आयोजन होगा।जिसमें वे जाने वाले हैं।  

Tuesday, June 23, 2026

कोर्ट मार्शल


कोर्ट मार्शल 


आज का इतवार भी काफ़ी अलग रहा, सोनू और नन्हे के साथ उसके तीन मित्र भी आये थे। उनमें से एक उबर में काम करता है, शेष दो उसी की कंपनी में। वे सब नन्हे के दफ़्तर में हो रही एक पूजा में भाग लेकर आये थे। लंच के बाद सब लोग निकट के एक गाँव में ख़ाली पड़े खेत व मैदान में गये, वहाँ ड्रोन उड़ाया, एक चील काफ़ी देर तक उसके साथ-साथ उड़ रही थी।दोपहर को एक हज़ार टुकड़ों वाली जिग्सा पज़ल आगे बढ़ायी। शाम के विशेष जलपान के बाद, रात होने से पूर्व वे सब चले गये। 

आज घर की बाहरी दीवारों पर रंगाई का काम समाप्त हो गया। अब किचन के बाहर की लॉबी के ऊपर छज्जा लगाना शेष है। घर किराये का न हो तो उसमें कोई न कोई काम निकलता ही रहता है।सुबह उन्होंने फूलों के पेड़ों की तस्वीरें उतारीं, आजकल सोसाइटी में चेरी ब्लॉज़म के गुलाबी-श्वेत फूलों की बहार है। कल शाम की आँधी के बाद कुछ आम भी गिरे हुए थे। जिनसे मीठी व खट्टी दोनों तरह की चटनी बनायी। आज भी उसने देवी की कथा सुनी, असुरों का विनाश करने वाली देवी उनकी प्रार्थना सुनकर विकार रूपी असुरों को हराने के लिए शक्ति प्रदान करती हैं। आज एमआई का ट्रक पूरा बन गया, नन्हे ने कहा, उन्होंने बहुत जल्दी बना लिया।

आज आश्रम में सत्संग हुआ। गुरुजी ने कहा, पूजा में भाव सबसे ज़्यादा आवश्यक हैं। दुख साधक के मन को गहराई देता है, सुख मन को विस्तार देता है। लेकिन कोई कब तक सुख-दुख के फेर में पड़ा रहेगा, ज्ञान में वह सुख-दुख के परे चला जाता है। साधक को अपना कर्त्तव्य निभाना है और स्वयं को ठीक से अभिव्यक्त करना है। त्याग ही रिश्तों को दृढ़ बनाता है। अहंकार को इतना बड़ा बनाना है कि उसमें सब समा जायें।कुछ सीमा तक उन्हें अपने कर्मों को समाप्त करना है। ध्यान होश का दूसरा नाम है, ऐसा होश जो विश्राम दिलाता है। जैसे कार पहले रिज़र्व में आती है, फिर उसमें ईंधन भरते हैं। उन्हें कभी भी इस बात के लिए स्वयं को कम नहीं आंकना चाहिए कि उन्होंने कुछ बड़ा नहीं किया। पुण्यों का हिसाब नहीं रखना चाहिए। शुभ काम करना उनका स्वभाव ही है, यह कोई बड़ी बात नहीं है।कोई भक्ति करता है तो यह उसका स्वभाव ही है। यही अध्यात्म है, दो के परे जाना ही अध्यात्म है। गुरुवाणी का मनन करने से निदिध्यासन अपने आप हो जाता है।

आज सुबह भी वे टहलने गये, छत पर साधना करते समय हवा ठंडी थी और सूर्योदय का सुंदर दृश्य दिखाई दे रहा था। कई लोगों से फ़ोन पर बात की, कइयों को संदेश भेजे। दो को छोड़कर शेष सभी ने जवाब दिये। शाम को इस्कॉन मंदिर गये। बहुत विशाल और भव्य मंदिर है। आरती में सम्मिलित हुए, कृष्ण की उपस्थिति का अहसास भी हुआ। बहुत सुंदर व्यवस्था है वहाँ हर चीज की। वहाँ की ऊर्जा अति सकारात्मक थी। वापसी में उन्हें महामंत्र का जप करने के लिए भी कहा गया। प्रसाद भी मिला। नन्हे ने कहा है, हो सका तो वह शनिवार को आएगा, पापा को जीसी रोड ले जाएगा। 

आज गुरुजी ने कितने सुंदर वचन कहे, धरती में बीज बोते हैं तो अन्न की फसल उगती है। आकाश में मंत्र के रूप में बीज बोते हैं तो ख़ुशी की फसल उगती है। जैसे धरा अन्न का, वैसे ही आकाश ख़ुशी का स्रोत है। कल से उनके बगीचे में लैंड स्केपिंग का कार्य शुरू होगा। आज एक नयी पुस्तक पढ़नी आरंभ की, जो हिंदू धर्म के प्रतीकों के अर्थ के बारे में है। पहला अध्याय पढ़ा, एक देवता व उनकी पत्नियों के नाम पहली बार पढ़ने को मिले। अर्धनारीश्वर व शिव के प्रतीक के बारे में पढ़ते-पढ़ते ही मन कैसा स्थिर हो गया था।नेट पर मिली एक कवयित्री के कहने से उसकी पुस्तक “मात्र मात्राओं का खेल है” मँगवायी है, उसकी समीक्षा लिखनी है। 

आज रामनवमी का उत्सव है। सुबह प्रसाद बनाया। नापा का एकमात्र मंदिर सजाया गया है, सुबह वे गये थे। उठने से पूर्व कोई कह रहा था, मन को ख़ाली करो, कोई स्वप्न चल रहा था शायद उसके पूर्व ! अब स्वप्न याद नहीं रहते पहले की तरह, अब ज़्यादा नहीं आते। मन कृतज्ञता का अनुभव कर रहा था। परमात्मा की कृपा ही तो है जो वे इस सुंदर सृष्टि का आनंद ले रहे हैं। बल्कि वही उनके द्वारा ले रहा है। उसने उन्हें अपना साथी बनाया है, सहयोगी बनाया है। कल उन्हें व्हाइट फील्ड में स्वदेश दीपक का लिखा नाटक ‘कोर्ट मार्शल’ देखने जाना है। 

कल उन्होंने ‘कोर्ट मार्शल’ देखा।पात्रों  का अभिनय शानदार था, कथा भी प्रभावशाली थी। भारतीय समाज में दलितों के प्रति जो असमानता व अन्याय सदियों से व्याप्त है, उस पर प्रहार किया गया है। भारतीय सेना की पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक एक दलित सिपाही पर चल रहे कोर्ट मार्शल के इर्द-गिर्द घूमता है। उस पर अपने दो अधिकारियों की हत्या करने का आरोप है। जैसे -जैसे मुक़दमे की कार्यवाही आगे बढ़ती है, पता चलता है दलित सिपाही को किस प्रकार उन अधिकारियों द्वारा मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उसे आश्चर्य होता है आज भी समाज में दलितों के प्रति बराबरी का व्यवहार नहीं किया जाता।आज का इतवार भी अनोखा था। वे पहली बार फ़ोरम मॉल गये। कुछ ख़रीदारी की, कुछ जलपान किया। उससे पहले ख़ाली पड़े फ़्लैट और नर्सरी भी गये, जहाँ उनके गमलों में पौधे लगाये जा रहे थे। शायद चार दिनों में कार्य पूरा हो जाएगा। नर्सरी के मालिक से भी बात हुई, उसे पौधों को समय-समय पर दी जाने वाली खाद, दवा आदि का बहुत ज्ञान है।वह बाग़वानी के नये-नये प्रोजेक्ट्स लेता रहता है। उसने बताया गर्मी के मौसम में पौधों को एक दिन छोड़कर पानी डालना चाहिए। जिन पौधों की पत्तियाँ मोटी हैं, उन्हें दो दिन बाद पानी देना चाहिए। बोगनवेलिया का पेड़ जो उन्हें कटवाना पड़ा था, उसमें अभी तक एक भी हरी पत्ती नहीं आयी है।  

आज का दिन भी ख़राम-ख़रामा बीत गया। कल रात देर तक वे दोनों बातें करते रहे। जून ने बताया बरसों पहले वह उसके बनारस शहर से जाने के बाद बहुत दुखी हुए थे।परीक्षा परिणाम देने के बहाने एक दिन मिर्ज़ापुर मिलने आये थे।उसे जून को जानते हुए चार दशकों से ज़्यादा समय हो गया है, पर अभी भी लगता है, मन के किसी न किसी स्तर पर उनकी दुनियाएँ अलग-अलग हैं। एक साथ होते हुए भी हरेक का जीवन उसका निजी होता है।  दुनिया में हर किसी का, राम व सीता का भी, शिव व पार्वती का भी ! परमात्मा मौलिक है, इसलिए वह हर किसी को बस उसके जैसा ही बनाता है।शाम को वे दूर तक टहलने गये, एक टर्की दिखा, अनोखा पक्षी है, सुंदर रूप है उसका! उसने पुस्तक की समीक्षा लिखनी शुरू की है, कुछ कविताएँ दिल को छू जाती हैं। जून के पूर्व सहकर्मी ने अपने पुत्र के पचासवें जन्मदिन पर एक कविता लिखने के लिए कहा है।एओएल का अनुवाद कार्य भी बीच-बीच में आता रहता है। 


Friday, June 19, 2026

दस महाविद्याएँ


दस महाविद्याएँ  

आज सुबह से जून थोड़ा सा परेशान हैं, बात वही पुरानी है, एक पैटर्न ही तो बन गया है शायद, वह इससे बाहर निकलना नहीं चाहते। शायद नाराज़गी से अहंकार को तृप्ति मिलती है। रात को उनकी नींद खुल गई थी, शायद कोई स्वप्न देख रहे थे।वर्षों पहले नूना की भी यही स्थिति थी, पर अब तो यह अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा लगता है। अनुभवानंद जी कहते हैं, उन्हें शब्दों के अर्थ की तरफ़ ध्यान नहीं देना है, केवल शब्द के स्रोत तक जाना है, जो अनहद नाद है। इससे वे प्रतिक्रिया करने से बचे रहेंगे और कर्मों के बंधन से भी। शब्दों को अनावश्यक महत्व देने से ही सारे द्वन्द्व होते हैं। सुबह उसने एक छोटी सी कविता लिखी, या उससे लिखवा ली गयी !! जो लिखवाता है वही तो वह ख़ुद है ! कुछ देर पहले मोदी जी को सुना, उनके शब्द सभी के दिलों को छूते हैं, पर विपक्षी पार्टियों को वे नहीं सुहाते। कुर्सियाँ बनकर आ गई हैं, कल नन्हा व सोनू देखकर प्रसन्न होंगे। 

रविवार सहज रूप से बीता, बच्चे सुबह साढ़े नौ बजे तक आ गये थे। दोपहर को नन्हे के साथ  उन्होंने छोटे-छोटे पार्ट्स जोड़कर एमआई की एक कार बनाने की शुरुआत की। सोनू जिग्सा पज़ल हल कर रही थी। शाम को जाने से पूर्व नन्हे ने मल्टी पर्पेस कोर्ट में रिमोट से चलने वाली एक नयी कार चलायी, अभी तक उसके भीतर के बालक का मन खिलौनों से भरा नहीं है। पापाजी से बात हुई, वे अपेक्षाकृत स्वस्थ थे, ठीक से सुन भी पा रहे थे।

आज वे बहुत दिनों बाद आश्रम गये, हवा सुहानी थी और आकाश में पश्चिम दिशा रक्तिम हो रही थी। भजन गायकों ने समाँ बाँध दिया। गुरुजी आये तो सभी लोग उनके सम्मान में सहज ही खड़े हो गये थे। उन्होंने प्रश्नों के जवाब सरल भाषा में लोगों को हँसाते हुए दिये, उनकी हाज़िर जवाबी की कोई मिसाल नहीं। उनकी बातों में एक आत्मीयता झलकती है। आज छत पर बने शेड में कबूतरों से बचने के लिए एक जाली लगा गई, कल ही जून ने इसकी चर्चा की थी।  घर में चल रहा काम अभी आधा ही समाप्त हुआ है। कल उन्हें कार पर तीसरी कोटिंग लगवाने के लिए जाना है, खरोंच से बचने के लिए ३एमएम की कोटिंग लगवायी है, इन सब मामलों में जून का जवाब नहीं। आज एओएल का अनुवाद कार्य किया, पढ़ने के लिए लेख पापाजी को भी भेजा। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के बारे में नन्हे को बताया तो उसने एक वीडियो भेजा है, जिसमें ख़ालिस्तान की माँग के पीछे की कहानी बतायी गई है। 

आज उन्होंने सामने वाले बगीचे में लगा कंचन का पेड़ निकलवा कर प्लूमेरिया का एक पेड़ लगवा दिया है। एक बार कंचन के वृक्ष को संबोधित करते हुए उसने एक कविता लिखी थी, जिसमें उसके फूल न खिलने की स्थिति में उसके कट जाने की आशंका व्यक्त की थी। उसने उस वृक्ष के जीव से मन ही मन क्षमा माँगी। आज दोपहर भी कल की तरह उसने कुछ देर एमआई की कार बनायी। कल उगादि पर्व है, दोनों मेड्स काम पर नहीं आयेंगी, अपने-अपने घर पर परिवार के साथ उत्सव मनायेंगी।आज उसने बट्रेंड रसल की एक पुस्तक को ऑडिबल पर सुनना आरंभ किया है। उन्हें आत्मा का कोई ज्ञान नहीं है, वह चेतना को मस्तिष्क से पैदा हुई मानते हैं। शाम को उसने पड़ोसी के यहाँ जाकर घर की दीवार को देखा,रंग-रोगन के बाद काफ़ी अच्छी लग रही है। सामने से भी घर सुंदर लग रहा है। 

आज भी वे आश्रम गये थे, गुरुजी को सुनना एक अद्भुत अनुभव है। सभी प्रश्नों का उत्तर वह जिस सहजता से देते हैं, पूछने वाले को शांति प्राप्त होती है। आज वासंतिक नवरात्र का प्रथम दिन है, उन्होंने नये वर्ष की शुभकामना भी दी। आज सुबह टहलते समय प्रीतिदिन की तरह जून से विभिन्न विषयों पर वार्तालाप हुआ, वातावरण शीतल व सुखकारक था, लगा, जिसे उन्होंने इधर-उधर की बातों से ढक दिया पर मात्र एक पल को ही ! अब मन उस मौन में ठहरने लगा है जहाँ उसे कुछ भी नहीं छूता ! आश्रम में भजन सुनते समय भी मन जैसे समाधि में ही था। पापाजी से हुई अध्यात्म चर्चा को आज भी रिकॉर्ड किया।उन्हें नवनीत का मार्च का अंक मिल गया है। वह खुश थे, एक साहित्यिक पत्रिका पढ़ने में उनका समय अच्छा बीतेगा।  

आज छत का काम पूरा हो गया, कल से वे वहाँ सुबह की योग-साधना कर सकते हैं।जून उनके बगीचे व छत की लैंड-स्केपिंग के लिए बात करके आये हैं। आज सुबह यू ट्यूब पर उसने दस महाविद्याओं के बारे में सुना, कल गुरुजी ने भी उनका ज़िक्र किया था। दिन में ऑडिबल पर भी उनके बारे में सुना।महाकाली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी व कमला के रूपों में उनके भीतर ही सत्य के मार्ग पर ले जाने वाली शक्तियाँ भी है और माया-मोह में फँसाने वाली अविद्या शक्ति थी। वे सोते-सोते भी जीवन गुज़ार सकते हैं और जागकर अपने जीवन को धन्य भी कर सकते हैं। देह व मन आपस में जुड़े हैं। सोया हुआ मन कब कैसा व्यवहार करेगा, इसका अनुमान ब्रह्मा भी नहीं लगा सकते। आत्मा सदा साक्षी है। गुरुजी कहते हैं, पानी पर खींची लकीर को जुड़ने में जितना समय लगता है, उतनी देर के लिए क्रोध जगा तो कोई बात नहीं। आत्मा में स्थित होने के लिए मन को पलक झपकने जितना समय ही लगता है। आज उन्होंने “रॉकेट्री” का दूसरा भाग देख लिया। डॉ होमी भाभा और विक्रम साराभाई के कारण भारत का परमाणु कार्यक्रम तथा अंतरिक्ष कार्यक्रम आगे बढ़ा, बल्कि वे दोनों उसके जनक थे। दोनों की असमय मृत्यु हो गई, पर दोनों ने अपने साथियों को तैयार कर दिया था।कल से रमज़ान का महीना शुरू हो गया है। घर का काम अगले हफ़्ते तक खिंचने वाला है।  

   


Saturday, May 23, 2026

ऑडिबल-श्रवण योग्य

ऑडिबल-श्रवण योग्य



शाम को वे दोनों नन्हे व सोनू को लेने उनके घर गये थे। वापस आकर पहले सबने सूप पिया, फिर केक काटा, वे लोग फूल भी लाए थे, गुलाब के ढेर सारे सुंदर फूल ! उनके घर के लिए एक वैक्यूम क्लीनर भी लाए हैं और रिजार्ट में नूना के लट्टू चलाने के शौक़ को देखकर दो लट्टू भी लाए। रात्रि भोजन के बाद नन्हे ने छत पर टेलीस्कोप लगाया, एक-एक कर सबने चाँद-तारों को देखा।पूर्णिमा के एक दिन बाद का घटता हुआ चाँद बहुत मनमोहक था।चमकता हुआ वीनस, ज्यूपिटर और मंगल के साथ आकाश में शनि भी दिखायी दिया।  


आज सुबह नाश्ते के बाद बच्चे वापस चले गये। उन्हें एक मित्र के गृहप्रवेश में शामिल होने मदागी जाना था। नन्हे ने उसके मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड कर दिया है, ‘ऑडिबल’ जिसमें वह मनपसंद किताबें अंग्रेज़ी या हिंदी में सुन सकती है।मेंबरशिप लेने से हर महीने एक किताब क्रेडिट पर ख़रीद सकती है।दोपहर बाद एक अच्छी साहसिक फ़िल्म ‘ऊँचाई’ देखी, जिसमें चार बूढ़े दोस्तों की कहानी है, जो अपने एक मित्र की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक चढ़ाई करते हैं।हिमालय और एवरेस्ट के बहुत सुंदर दृश्य हैं फ़िल्म में।शायद इसी कारण शाम को वे निकट के गाँव में स्थित झील तक पैदल चलते गये, कुछ देर वहाँ रुके, दूसरे रास्ते से घूमकर वापस आये तो उमंग और उत्साह से भरा पूरा डेढ़ घंटा बीत चुका था। 


आज सुबह गुरुजी को सुना, उनके सीधे-सरल उपदेश मन को हल्का कर देते हैं। कल वाणी का जो दोष हुआ था, उसका मन पर थोड़ा सा प्रभाव शेष था, जो गुरुजी की प्रेम भारी वाणी सुनकर दूर हो गया। स्वतः ही कुछ पंक्तियाँ भी काग़ज़ पर उतर आयीं, हर संघर्ष सृजन को संभव होने का अवसर देता है। घिसकर ही पत्थर में चमक आती है। दुख मन को माँजता है। परमात्मा की स्मृति हर दुख को वैसे ही हर लेती है, जैसे सूर्य की किरण ओस की बूँद को हर लेती है। जून ने आज दो श्रमिकों को बुलवाया था, सिटआउट की शीशे की छत को धुलवाना था और बेंत के फ़र्नीचर पर पेंट करवाना था।नैनी साप्ताहिक सफ़ाई में लगी थी, थोड़ी देर बाद उसने आकर मज़दूरों की शिकायत की, उसके हावभाव से ऐसा लगा, तेज-तेज कन्नड़ा में कुछ बोली। फ़ेसबुक पर सुबह लिखा उसका छोटा सा आलेख पढ़कर पापाजी ने कहा, मन को ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहिए। उनकी चिंता उसे समझ में आती है, नन्हे की हल्की सी उदासी भी उसे भीतर तक छू जाती है। माता-पिता बच्चों से ऐसे ही जुड़े रहते हैं। आज शाम को भी वे सोसाइटी के पीछे वाली झील पर गये, पिछले गेट से निकल कर, नये बन रहे ले आउट में से सीमेंट की नई सड़क से होते हुए सीधे वहाँ पहुँच गये।शाम के समय दूर तक टहलने  के दो फ़ायदे हैं, एक तो वजन नियंत्रण में रहता है, दूसरा नये-नये स्थान देखने को मिलते हैं। दोपहर बाद समाचारों में सुना, ब्राज़ील में चुनी गयी सरकार के विरुद्ध विपक्ष आंदोलन पर उतर आया है। यूक्रेन में युद्ध जारी है, चीन ताइवान के पास युद्ध अभ्यास कर रहा है। जोशीमठ में ज़मीन धंस रही है, मकानों में दरारें पड़ रही हैं। इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हो रहा है, जहाँ कुछ लोगों को प्रवेश नहीं मिल पाया, शायद लोग अधिक संख्या में आ गये हैं। 


आज सुबह स्वामी श्री परमानंद जी का आत्मा पर सुंदर प्रवचन सुना।मुक्ति की कामना करने वाला मन है, आत्मा सदा मुक्त है, सुख स्वरूप आत्मा स्वयं को न पहचानकर सुख की कामना करती हुई सी लगती है। उन्होंने कहा, वास्तव में चिदाभास अर्थात बुद्धि में पड़ा चेतन का प्रतिबिंब ही स्वयं को बद्ध जानकर मुक्ति की कामना करता है।अज्ञान दशा में ही भीतर सुख-दुख, इच्छा-द्वेष आदि प्रकट होते हैं। अज्ञान के कारण ही चिदाभास स्वयं को कर्ता मानता है। चिदाभास के कारण ही निर्गुण आत्मा व्यवहार में ‘मैं’ (अहंकार) का अनुभव करती है। साधक को अमनी भाव में रहने का अभ्यास करना है, केवल आत्मसुख में ही टिकना है और अपने अनंत स्वरूप का स्मरण करना है।


आज वे साढ़े दस बजे घर से निकले थे और शाम सवा छह बजे वापस लौटे। एसबीआई की दो शाखाओं में जाना था, एक जगह काम हो गया, एक जगह परसों होगा। नन्हा दफ़्तर से एक बैंक में हस्ताक्षर करने आया था, फिर चला गया। सोनू को लेकर डेंटिस्ट के पास गये। आज उसने बहुत ख़्याल रखा।दोपहर का भोजन उसके साथ खाया। आजकल वह भी अपने स्वास्थ्य और वजन का भी ध्यान रख रही है। जून ने आज लगभग १०० किमी गाड़ी चलायी, वह शहर की भीड़भाड़ में कार चलाने में दक्ष हो गये हैं। 


आज सिटआउट की सफ़ाई का काम पूरा हो गया। जून ने यहाँ के पते के पर उनके नये पैनकार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन भर दिया है।सुबह 'अष्टावक्र गीता' सुनी, पूरा रास्ता कैसे कट गया, पता ही नहीं चला। मकान के लोन के चुकता होने के बाद सब रजिस्ट्रार के दफ़्तर में जाकर कुछ कार्यवाही करनी होती है, उसके लिए अगले गुरुवार को जाना है। कल डेंटिस्ट के पास जाना है। बैंक भी जाना है, लॉकर को रिन्यू करना है, आरबीआई गाइडलाइंस के अनुसार नया एग्रीमेंट साइन करना है। एओएल के दो अनुवाद कार्य किये, दोपहर को कुछ देर के लिए धूप में सिटआउट पर सोयी, गाड़ियों का शोर आ रहा था। आज भानु दीदी (गुरुजी की बहन) के जन्मदिन का कार्यक्रम देखा, आश्रम के बच्चों ने गीत गाये और श्लोक सुनाये। मिट्टी के जो बर्तन रिज़ौर्ट में बनाये थे, उन पर रंग करना शुरू किया है। पहले बेस कलर लगाया है। गमलों में मेथी, पालक व सरसों के बीज बोए थे, उनमें पानी दिया। 


Friday, May 1, 2026

गुरु गीता

गुरु गीता


शाम को वे दूर तक टहलने गये। एक जगह मुर्गी के दड़बों के आगे से गुजरना पड़ा, एक विचित्र सी तेज गंध आ रही थी।घर आकर भी कुछ देर तक वह गंध जैसे साथ रह गई थी।आज ‘गुरु गीता’ सुनने का दूसरा सत्र है। भानु दीदी कह रही हैं, गुरु के नाम स्मरण मात्र से अनेक आशीर्वाद मिल सकते हैं।ईश्वर या गुरु से कुछ माँगना ऐसा ही है जैसे हाथ में मक्खन रखा है और कोई घी माँग रहा हो।शांति का सागर भीतर है, बस अपने मन का ध्यान रखना है। गुरु तत्त्व कण-कण में समाया है। व्यास मुनि ने स्कन्द पुराण में शिव-पार्वती के संवाद के रूप में गुरु गीता की रचना की है। जिसमें गुरु और ईश्वर में कोई भेद नहीं है, ऐसा कहकर शिष्य की गुरु के प्रति निष्ठा को दृढ़ किया गया है। छोटी बहन को आश्रम में टीटीपी के लिए अनुमति मिल गई है। अगले महीने वह यहाँ आएगी।आज गुरु जी के बारे में लिखे एक लेख का अनुवाद किया।


आज गुरुजी का जन्मदिन है। इस विशेष दिन पर उनका संदेश है- 


कुछ भी आकर्षक नहीं है।

सब कुछ प्रकाशमान है क्योंकि सब कुछ आत्मा का है, और आत्मा से बना है।

ब्रह्मांड में आत्मा सबसे आकर्षक है। 


गुरुजी ने विशेष ध्यान भी कराया। सुंदर भजन गाये गये। आज मृणाल ज्योति स्कूल की एक पुरानी सदस्या का फ़ोन आया। अगले वर्ष स्कूल का रजत समारोह मनाया जाएगा। उसने पत्रिका के लिए एक लेख लिखने के लिए कहा है। नूना ने स्कूल की अध्यक्षा से भी बात की। उनके साथ बिताये कितने ही पल तथा कई घटनाएँ याद आने लगीं। 


आज सुबह उठने से पूर्व सुंदर स्वप्न देखे - सुंदर गायें, श्वेत बाघ और बुद्ध की प्रकाशित मूर्ति !परमात्मा से वार्तालाप और ध्यान का अनुभव ! पापाजी से बात हुई, वह ‘शांडिल्य भक्ति सूत्र’ पढ़ रहे हैं। जिसकी व्याख्या ओशो ने की है। उन्होंने बताया, प्रीति के कई रूप हैं, अपने से छोटों के प्रति प्रेम को स्नेह कहते हैं। समान उम्र के प्रति प्रेम को प्रीति तथा बड़ों के प्रति प्रेम को श्रद्धा या सम्मान कहते हैं। परमात्मा के प्रति प्रेम को भक्ति !! घर पर भतीजी और उसकी नन्ही बिटिया आये हुए हैं।शिशु बालिका की भी कई बातें उन्होंने बतायीं। आज भी दिन भर बादल बने रहे। मानसून इस बार यहाँ जल्दी आ गया है। सारे भारत में गर्मी का मौसम क़हर ढा रहा है, यहाँ अधिकतम तापमान २४ डिग्री रहता है। मई के महीने में ऐसा ही मौसम असम में मिलता था। उनके दायीं तरफ़ बनने वाला विशाल घर बनकर तैयार हो गया है, कल गृह प्रवेश की पूजा में जाना है। नन्हा और सोनू भी आयेंगे।  

उन्होंने अपनी दिनचर्या व ख़ान-पान में कुछ बदलाव किए हैं।शाम को सूप व आम का डिनर लिया। जून को सात्विक व हल्का भोजन लेने से शरीर में हल्कापन महसूस हो रहा है। दिन में दो बार ध्यान का अभ्यास, पुस्तक पढ़ने के साथ-साथ वह डायरी लेखन भी शुरू करने वाले हैं। आज बुद्ध पूर्णिमा है, भगवान बुद्ध के विषय में लिखी कविता उसने बहुत लोगों को भेजी। वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है। कल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। एक अच्छी बायोपिक देखी, ‘रश्मि राकेट’ !


दिन भर वर्षा का मौसम ही बना रहा। असम में बाढ़ का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। बैंगलुरु में भी सड़कों पर पानी जमा हो गया है। पानी की समस्या पर आधारित ‘टर्टल’ फ़िल्म में देखा था, रेगिस्तान में लोग पानी के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। यह जीवन ऐसा ही विरोधाभासी है। आर्ट ऑफ़ लिविंग से अनुवाद को-ऑर्डिनेटर का फ़ोन आया। कल रात को नौ बजे ज़ूम पर एक मीटिंग है, जिसमें नूना को अपने गुरु स्टोरी रखनी है। शाम को उन सभी बातों को याद किया और लिखा। एक शिक्षिका की कहानी सुनी थी, कितने आराम से वह सुना रही थी, उतनी ही सहजता से उसे भी अपनी बात रखनी होगी। 


शाम को गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान गहरा हुआ। ज़ूम मीटिंग में एबीसी(आश्रम की प्रकाशन संस्था)की ‘हेड टू हार्ट’ सीरीज़ में पहली बार भाग लिया। आजकल गुरु स्टोरी सुनना भी शुरू किया है। अच्छा लग रहा है। गुरुजी अपने भक्तों की नज़रों में ईश्वर से कम नहीं। जिन्होंने उनका सान्निध्य पाया है, वह यह जानते हैं। उनके बार में सुनकर कितना रोमांच होता है। वाक़ई वे एक अवतार ही जान पड़ते हैं। कैसे लोगों के मन की बात जान लेते हैं, उनका ख़्याल रखते हैं। इतना प्रेम देते हैं कि लोग उनके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। वह उनके जीवन में वरदान बनकर आये हैं। वह कहते हैं, “साधकों को सेवा करनी चाहिए, ताकि वे अपने कर्मों को काट सकें। उन्हें पुण्य मिले और उनका मन शुद्ध हो, वे ध्यान के अधिकारी बनें, उन्हें समाधि का अनुभव हो। उनका जीवन सार्थक हो।जो दूसरों के कष्ट दूर करने की चाह रखता है, जो संसार के लिए जीता है, उसके योग-क्षेम का भर स्वयं परमात्मा उठाते हैं। वे स्वार्थ को त्याग कर यदि जगत के हित में काम करते हैं तो इसका परिणाम अंतर की शुद्धि के रूप में उन्हें ही मिलता है। जब कोई अपना सुख-दुख भूलकर अन्यों के सुख-दुख में शामिल होता है तब भीतर मुक्ति का अहसास होता है। जीवन वही जीवन है जो औरों के काम आये। उनके वचन, कर्म व विचार सदा हितकारी हों।” गुरुजी की बातें सुनने से मन नहीं भरता। वह उसे भी जानते हैं, ऐसा संयोजिका ने कहा। असम में एक शिक्षिका ने भी कहा था, गुरुजी को ज्ञात है कि सहज समाधि उनके यहाँ हो रहा है ! उसने गुरुजी के प्रति अपनी निष्ठा को पूर्ववत् नहीं बनाये रखा, ऐसा मानना भी उचित नहीं। वह उनमें और स्वयं में कोई भेद नहीं देखती, वह उन्हीं का भाग है ! ‘ईश्वर अंश जीव अविनाशी’ अथवा तो एक ही सत्ता से यह सारा जगत बना है !  


आज सुबह उन्होंने पूरे सत्तर मिनट भ्रमण किया; नये व सुंदर, हरे-भरे रास्ते पर! तस्वीरें भी खींचीं। आज दो बालिकाएँ हिन्दी पढ़ने आयीं। दोपहर बाद बाज़ार गये, आगामी यात्रा में जिनसे मिलेंगे, उनके लिए कुछ उपहार ख़रीदे। ‘पंचायत’ धारावाहिक का अंतिम अंक देखा।   



Saturday, April 18, 2026

शेक्सपियर के नाटक

शेक्सपियर के नाटक

रुस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ लड़ाई छेड़ दी है।संभवत: दुनिया विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है।जून सोसाइटी के लिए काम करने वाली वर्तमान एजेंसी की जगह दूसरी लाना चाहते हैं, विरोध होगा, पर वह सुनने के लिए तैयार हैं। आज सुबह सात बजे वह कमेटी के कुछ सदस्यों के साथ  किसी अन्य सोसाइटी में नयी एजेंसी का काम देखने गये थे, बारह बजे लौटे। नूना ने पौधों को बचाये रखने वाली एक पुस्तक पढ़नी शुरू की है, जो असम की रहने वाली तृष्णा बोरा ने लिखी है। पापाजी से बात हुई, उन्हें ‘बाल्मीकि रामायण’ का काव्य रूपांतरण पढ़ने को कहा है। पता नहीं क्यों, ऐसा लग रहा है, कि यह सब कल लिखा था, पर डायरी का यह पन्ना ख़ाली है, शायद सपने में लिखा हो ! ज़िंदगी कितनी रहस्यमयी है ! छोटे भाई का फ़ोन आया, वह लेह में है। दीदी-जीजा जी अपना चंडीगढ़ वाला घर बेचना चाहते हैं।


सुबह उठने से पूर्व गुरुजी को सपने में देखा, वह उनके घर में ही हैं शायद, एक कुर्सी पर उन्हें बैठने के लिए कहती है, फिर पानी के लिए पूछती है। वह कहते हैं,  हाँ, पानी पियेंगे, गिलास में पानी भरकर ट्रे में रखा है, पर लगता है, गुरुजी हैं तो साथ में कुछ और भी तो हो, ख़ाली पानी कैसे देगी। तभी कुछ और लोग भी आ जाते हैं माला आदि लेकर, जून भी खड़े हैं। जब तक वह ट्रे लेकर जाती है, जून कहते हैं, वहाँ नो एंट्री है, स्वप्न टूट जाता है। सुबह के स्वप्न जगाने के लिए आते हैं। गुरुजी को अभी-अभी सुना, वह कितने शांत और सहज लग रहे थे। जून आज भी कई घंटे बाहर रहे, उनकी मीटिंग्स लंबी होती जा रही हैं। पापाजी ने रामायण पढ़ी, उन्हें अच्छी लगी। उन्होंने बताया, चचेरी बहन का कॉलेज में पढ़ने वाला बेटा सामाजिक कार्य करता है, देहरादून के विधायक से उसने अपने रेस्तराँ का उद्घाटन कराया, काफ़ी आगे जाएगा, बहुत होशियार है। उसे दादाजी का ध्यान हो आया, वह भी राजनीति में बहुत सक्रिय रहते थे, सम्भवत: उनका कुछ असर आया होगा।  


आज जून ने मतदान पहचान पत्र के लिए आवेदन पत्र भर दिया है, बनने में तीन-चार महीने लगेंगे। कल पहली बार वे एग्री मॉल गये।जहाँ हज़ारों की संख्या में पौधे और फूल थे। उससे पूर्व ‘पाकशाला’ में दोपहर के भोजन के बाद नन्हे के एक मित्र के घर जाना हुआ, वह भी पौधों के विशाल मॉल में साथ गया।उन्होंने कुछ विशेष पौधे भी लिए जो वर्षों तक उनके बगीचे की शोभा बनेंगे। शाम को शिवरात्रि के लिए गुरुजी द्वारा पूर्व में दिये गये एक  प्रवचन का हिन्दी अनुवाद किया। 


कल शिवरात्रि थी। पहली बार नूना ने आधी रात तक जागकर टीवी के बड़े से स्क्रीन पर शिव के भजन सुने और साथ ही नृत्य भी किया। बहुत अनोखा अनुभव था। आश्रम में हज़ारों की संख्या में लोग आये हैं, गुरुजी की कृपा दृष्टि पाने के लिए आतुर लोग, भजन की धुनों पर नाचते लोग ! ईशा फ़ाउंडेशन में भी हर वर्ष की तरह भव्य कार्यक्रम हुआ। पहले एक अफ़्रीकी गायक आया, फिर हिमाचल का हंसराज रघुवंशी, जिसने शिव भजन गाकर समां ही बाँध दिया।सुबह समय से नींद खुल गई, कुछ देर स्वामी सुखबोधानन्द जी द्वारा करवाया त्राटक ध्यान किया। बहुत ही प्रभावशाली ध्यान है यह।भगवद् गीता के अध्याय दो का अध्ययन भी चल रहा है। श्लोक संख्या ४,५,६ पर उनकी व्याख्या सुनी। वैसे वह कहते हैं, वह एक्सप्लेन नहीं करते, रेस्पोंड करते हैं।अर्जुन ने जब कहा कि युद्ध करने की बजाय वह भिक्षा माँगकर गुजारा करना सही समझेगा, तब वह संन्यास की तरफ़ इशारा कर रहा था। जिसका लक्ष्य मोक्ष है, इसलिए वह ज्ञान पाने का अधिकारी भी बन गया।उन्होंने कृष्ण की मुस्कान का अर्थ भी बताया। smile के पाँच वर्णों के भाव हैं - एस-स्प्रिचुअल, एम-मनी, आई-इंटेलिजेंस, एल-लोंगेविटी और इ-इमोशनल कोशेंट।जीवन की किसी भी परिस्थिति का सामना ‘स्माइल’ से करना चाहिए। आध्यात्मिक धन पास में हो तो बुद्धि, आयु और भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है।     


छत पर सूर्योदय दर्शन करते हुए सूर्य नमस्कार करने का अपना ही आनंद है। दोपहर को ऑनलाइन कन्नड़ा क्लास हुई, एक अन्य महिला भी शामिल हुई।शाम को नन्हा आया था, उनकी एक परिचिता ने अपना कुछ सामान उनके स्टोर रूम में रखवाया है। कोरोना की वजह से कितने ही लोग अपने घर जा रहे हैं। शेक्सपियर की ‘हैमलेट’ पढ़ी आज, जूलियस सीज़र और ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम पहले पढ़ी थी, कमाल के लेखक हैं शेक्सपियर! एक से एक प्लॉट्स हैं, भूत, प्रेत, परियाँ सभी हैं उनमें। 


आज बायीं नासिका से एक गंध आ रही है। संभवत: इसका संबंध पाचन क्रिया से है। सुबह चार बजे से पूर्व नींद खुल गई, मन में ईश्वर स्मरण के बजाए, कल दिन में हुई किसी घटना पर विचार चल रहा था। यूक्रेन में तबाही बढ़ती जा रही है, पर युद्ध समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा। भारत ने अभी तक किसी भी पक्ष की तरफ़ होने की बात नहीं कही है।दोपहर को वे एक स्थानीय मित्र के यहाँ गये, उनकी बेटी डॉक्टर है, एमडी में दाख़िला ले रही है। 


आज का इतवार विशेष रहा, नन्हा और सोनू कल शाम को ही आ गये थे। सुबह सोसाइटी के बहु उद्देश्यीय मैदान में असोसिएशन की तरफ़ से बच्चों के लिए खेलकूद का आयोजन किया गया था। ढेर सारे बच्चे आये, बाद में पुरस्कार भी दिये गये। सभी को आनंद आया।साढ़े दस बजे कुछ महिलाओं के साथ नूना पंचायत के दफ़्तर पहुँच गई थी। अध्य्क्षा लगभग सवा ग्यारह बजे आयीं। सब मिलकर निकट के एक गाँव में गये, उसके पहले दो झीलें भी देखीं। गाँव में बच्चों व महिलाओं से मिले। एक महिला ने सभी को पीने के लिए शरबत दिया, जो गाँव वालों के अतिथि सत्कार का एक सुंदर उदाहरण था। 


आज सोसाइटी की कमेटी ने नयी एजेंसी नियुक्त करने की बात सबको बता दी है। अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है, अर्थात लोग इसे स्वीकार कर रहे हैं। आज जून यहाँ पहली बार गन्ने का रस लाये। यूक्रेन से हज़ारों विद्यार्थी वापस आ गये हैं, पर अभी भी कई शेष रह गये हैं। पुतिन ने कुछ शहरों में युद्ध विराम कर दिया है। 


आज ‘विश्व महिला दिवस’ है, पूरी दुनिया में कई तरह से मनाया गया, नापा में अस्थायी क्लब में महिलाओं के लिए एक प्रसिद्ध अस्पताल की तरफ़ से निःशुल्क मेडिकल कैंप लगाया गया। नाश्ते के बाद नूना यहाँ आ गई थी, डॉक्टर्स की टीम पहले ही वहाँ आ चुकी थी। उसने चेकअप कराया। दस दिनों का दवा का एक कोर्स दिया है, इसके बाद पूरे शरीर की जाँच के लिए अस्पताल जाना है। कल जून वहाँ आने वाली सभी महिलाओं के लिए चॉकलेट्स मँगवाने वाले थे, पर स्टोर में खत्म हो गयीं, ओरियन बिस्किट्स मँगवाये। शाम को प्रधानमंत्री ने महिला संतों को वर्चुअली संबोधित किया, वे सब कच्छके धोरदो में एकत्रित हुई थीं। महिला संतों के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, कच्छ में महिलाओं ने कठोर प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है।


Tuesday, August 27, 2024

ड्रोन की उड़ान


ड्रोन की उड़ान 

आज रविवार था, सामान्य दिनों से काफ़ी अलग रहा। सुबह वे जल्दी उठकर टहलने गए, सब तरफ़ सन्नाटा था, हवा ठंडी थी और आकाश में नारंगी रंग का चाँद चमक रहा था।अनादि काल से  चंद्रमा मानव को आकर्षित करता आया है, इसे मन का देवता भी कहा गया है। वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि सोम के रूप में यह वनस्पति जगत को रस प्रदान करता है, जो उनके विकास के लिए अति आवश्यक है।घर आकर प्राणायाम और कुछ आसन किए, ये भी तो मानव को हज़ारों वर्ष पूर्व ऋषि मुनियों ने प्रदान किए थे, समय के साथ मानव ने उसमें कुछ परिवर्तन किए हैं पर मूल स्रोत तो प्राचीन ग्रंथ हैं। नूना ने नाश्ते में मेथी के पराँठे बनाये और जून ने सोनू के प्रमोशन की ख़ुशी में खीर बनायी।दोनों ही बच्चों को पसंद आयी। नन्हा ड्रोन उड़ाने के लिए जाने वाला था, सभी को साथ ले गया, सब ठीक चल रहा था कि उसका एक पंख टूटकर गिर गया और बहुत खोजने पर भी नहीं मिला। उसके अधरों पर मुस्कान तैर गई, लगभग हर बार ड्रोन उड़ाने पर कुछ न कुछ खो जाता है, और फिर काफ़ी समय उसे ढूँढने में लगता है।एक बार तो पूरा ड्रोन ही किसी की बगिया में और दूसरी बार किसी की छत पर जाकर गिर गया था। बगिया वाला महीनों बाद उन्हें मिला और छत के लिए सीढ़ी मँगवानी पड़ी थी। मकान मालिक शहर से बाहर गये हुए थे। वापस आये तो देखा, सोसाइटी के क्लब हाउस में बाटा के जूतों की सेल लगी थी। कुछ ख़रीदारी की, नन्हे ने अपने पैर की स्कैनिंग करवायी, फ़्लैट फ़ीट का पता चला, अब वह जूते में लगाने के लिए एक डिवाइस ख़रीद सकता है, जिससे पैर को आराम मिलेगा।उसने एड़ी के लिए एक सपोर्ट लिया। इन सब की पहले उन्हें जरा भी जानकारी नहीं थी।


आज से घर में सिविल का काम शुरू हुआ है, नन्हे ने बताया उनके यहाँ भी कुछ काम होना है। मज़दूर सुबह ग्यारह बजे आये और शाम को गये।अगले दो हफ़्ते ऐसे ही चलेगा। लीकेज की समस्या से बचने के लिए छत व उसकी दीवारों पर एक जलरोधी पेपर चिपका कर उस पर पेंट भी करवाना है। आज बायीं तरफ़ के पड़ोसी परिवार सहित उनकी छत से अपने घर की छत की ढुलाई देखने आये थे।इसके पहले उन्होंने न जाने  कितने ही घर बनते हुए देखे होंगे पर अपने घर की हर बात अनोखी लगती है।आज से कोरोना वैक्सीन लगनी शुरू हो गई हैं। दिल्ली में बड़े भाई ने लगवा ली है ।


रात्रि के नौ बजने को हैं, जून बिस्तर पर लेट चुके हैं। दिन भर घर में चल रहे काम की निगरानी रखते-रखते भी थोड़ी थकान स्वाभाविक है। आज शाम को टहलते समय फूलों की सुंदर तस्वीरें उतारीं। आजकल बोगेनविलिया अपने पूरे शबाब पर है। सुबह एक ऐप के ज़रिए सूर्योदय का वीडियो बनाया था। कल संभव हुआ तो सूर्यास्त का वीडियो बनाएगी।शाम को असमिया सखी का फ़ोन आया, वे लोग कल आ रहे हैं, बेटी की परीक्षा है, परसों चले जाएँगे। जून मेहमानों के लिए बेकरी शॉप से  दो केक और एक गार्लिक ब्रेड लाए हैं।


कल रात एक अनोखा स्वप्न देखा। गुरुजी आश्रम में भ्रमण कर रहे हैं। असम की एक पुरानी मराठी सखी भी वहाँ है जून और वह दूर से देखते हैं। सखी उसे बुलाती है और गुरुजी से परिचय कराती है। वह उनके चरणों का स्पर्श करने के लिए झुकती है, पहले अपने हाथों से उनके दोनों पैरों का, फिर मस्तक से बारी-बारी पहले बायें फिर दायें पैर का। फिर वह उस उठने को कहते हैं। उस क्षण में जैसे मन बहुत हल्का हो गया था और समर्पण के बाद की एक निश्चिंतता का अनुभव हुआ।वर्षों पहले गुरुजी से मिलकर केवल हाथ जोड़कर नमस्कार ही किया था, कभी पैरों को स्पर्श करने का भाव ही नहीं जगा, अहंकार तब मिटा ही नहीं था, अब लगता है वह घड़ी निकट आ गई है। 


आज शाम को आश्रम से प्रसारित हो रहा सत्संग देखा-सुना। दिन में एओएल से आया एक अनुवाद कार्य किया, आलेख का शीर्षक था ‘शिव तत्व’। इस आलेख में गुरु जी ने एक जगह कहा है , शिव अविनाशी शून्य तत्व है, वह ऐसा अंधकार है जो अपने भीतर सृजन की क्षमता छिपाए है, हर मन की गहराई में वही सो रहा है, साधना के द्वारा उसको  जगाना है।शिव ही बाहर सदगुरु बन कर आता है, जिसके आने से जीवन में नया मोड़ आता है, वह सदा नयी राह दिखाता है। शिव ही ज्योति पुंज सम आत्म तत्व है जो अंधकार को भेद कर प्रकटना चाहता है। अभी कुछ देर पहले ‘देवों के देव-महादेव' धारावहिक में देखा, शिव तांडव स्रोत की रचना रावण ने किस घटना के कारण की थी। सचमुच रावण कितना बड़ा विद्वान था और कवि भी, लेकिन उसके अहंकार ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा।  वैक्सीन लगने के बाद वे भी आश्रम जाना शुरू करेंगे। 


आज शाम को वृद्ध अंकल ने, जो उन्हें अक्सर संध्या भ्रमण के समय मिल जाते हैं,  अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी, वह उनके घर भी आना चाहते थे, पर ड्राइवर ने उनके बेटे का हवाला देकर मना कर दिया। अंकल की आँखों की विवशता देखकर अच्छा नहीं लग रहा था पर कुछ भी किया नहीं जा सकता था। ड्राइवर की बात वे कैसे टालते, जो रोज़ शाम को उन्हें गाड़ी में बिठाकर बगीचे के पास उतार देता है और जब छड़ी के सहारे वे टहलते हैं तो उनके साथ-साथ चलता है।मेहमान नहीं आ पाये, सखी के पतिदेव की पीठ में दर्द हो गया था। अब गार्लिक ब्रेड के सैंडविच उन्हें अकेले ही खाने होंगे।मौसम आजकल दिन में गर्म रहता है पर सुबह ठंडी रहती है अभी भी। अभी-अभी एक दुखद समाचार सुना, असम की एक परिचिता का, जो उसके पास एक बार योग सीखने भी आयी थी, हृदय की सर्जरी के बाद देहांत हो गया।जीवन क्षण भंगुर है, वह बार-बार याद दिलाता है, पर वे रोज़ की आपा-धापी में इसे भूले रहते हैं। 



Thursday, May 2, 2024

गट्टे की सब्ज़ी

गट्टे की सब्ज़ी 


आज सुबह टहलने गये तो तापमान १६ डिग्री था, जैकेट पहनने का दिन, कभी-कभी २० या इक्कीस रहता है तो वे नहीं पहनते। समाचारों में सुना, दिल्ली का तापमान १ डिग्री हो गया है, यहाँ उसकी कल्पना करना भी कठिन है। इतनी ठंड में उन लोगों का क्या होता हिगा, जिनके पास पक्के घर नहीं है या घर ही नहीं हैं। आश्रम में अगले महीने एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए छोटी बहन ने फ़ेसबुक पर संदेश पोस्ट किया है। वहाँ प्रतिदिन सत्संग हो रहा है। गुरुजी ने विश्व में लाखों लोगों को योग के पथ से जोड़ा है, ऐसा कार्य ईश्वरीय कृपा  के बिना नहीं हो सकता। अभी-अभी जे कृष्णामूर्ति द्वारा ध्यान की सुंदर परिभाषा सुनते-सुनते ही मन ध्यानस्थ होने लगा। ‘देवों के देव’ में आज दधीचि मुनि के त्याग की गाथा सुनी। उसे लगता है, वे लोग समाज के लिए कुछ विशेष नहीं कर पा रहे हैं। परमात्मा ही उन्हें राह दिखाएगा, अर्थात उनका शुद्ध ‘मैं’, यानि वे ‘स्वयं’ ! हर किसी को अपना मार्ग स्वयं ही तो चुनना होता है। परमात्मा हर किसी के द्वारा स्वयं को ही अभिव्यक्त कर रहा है ! कोई कितना उसे प्रकट होने देगा, उतना ही उसका जीवन सुंदर होगा !! 


आज सुबह मौसम सुहावना था। अपने निर्धारित स्थान पर चौकीदार को छोड़ कर पूरे रास्ते भर कोई नहीं मिला। रात की रानी की सुगंध दूर से ही आने लगी थी, सम्पूर्ण क्यारी  छोटे-छोटे श्वेत फूलों से भर गई है।जो बल्ब के प्रकाश में दिखायी दे रही थी। सड़क पर अंधेरा था। नैनी आज जल्दी आ गई, कन्नड़ सिखाने में उसे आनंद आता है, वह धीरे-धीरे कुछ शब्द सीख रही है।नाश्ते के बाद वे सब्ज़ी ख़रीदने गये, बेबी कॉर्न, कुंदरू, अरबी, आँवले आदि कुछ नयी सब्ज़ियाँ मिलीं, जो पास की दुकान में नहीं मिलतीं। जून को अब ईवी चलाने में दिक्क्त नहीं होती। इतवार को ईवी कार रैली है, नन्हा उसमें जाने को कह रहा है। यह भी बताया, उसका पैथोलॉजिस्ट मित्र असम जाने वाला है, उसे मेडिकल कॉलेज में जॉब मिला गया है, वहाँ वह आगे पढ़ाई भी कर सकता है।ऐसे ही लोग अपने शोध कार्य और श्रम के द्वारा समाज के लिए नयी खोज कर पाते हैं, उनके परिश्रम का लाभ मानवता को मिलता है। असम की एक हिन्दी लेखिका पूनम पांडेय की किताब में कुछ कहानियाँ पढ़ी, जो असम के लोक जीवन पर आधारित हैं।कल किसानों से एक बार फिर सरकार की बात होने वाली है, शायद कुछ हल निकल आये। 


आज मॉर्निंग ग्लोरी का पहला फूल खिला रानी कलर का सुंदर फूल ! धीरे-धीरे सभी गमलों में फूल आयेंगे, और जब बेलें ऊपर चढ़ जायेंगी तब और भी सुंदर लगेंगे। भीतर कैसी गुनगुन सुनायी दे रही है। जब मन शांत हो तभी यह अखंड गूंज सुनायी देती है। छोटी ननद का फ़ोन आया, वह गट्टे की सब्ज़ी बना रही थी। ख़ुद उसे बनाये हुए बरसों हो गये हैं। बचपन में माँ के हाथों की बनी पकौड़े की सब्ज़ी भी खायी थी। उसके बाद कभी मौक़ा नहीं मिला, सोचती है, क्यों न एक दिन उसी तरह बनाकर बच्चों को खिलाए। शाम को गुरुजी को सुना, वह प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे, कितने सटीक और प्रभावशाली ढंग से वह प्रश्नों के उत्तर देते हैं। आज वे उन्हीं वृद्ध व्यक्ति से मिले, कह रहे थे, अगले हफ़्ते घर भी आयेंगे।सौ बरस के हो गये हैं, कहने लगे, “आदमी थक जाता है एक उम्र में, जीवन और मृत्यु अपने हाथ में तो है नहीं।” पता नहीं कुछ लोग लंबा क्यों जीते हैं और कुछ अल्पायु में ही कालग्रसित हो जाते हैं। सुबह छोटे भाई से बात हुई, कह रहा था, मृत्यु के रहस्य को छोड़कर जगत में कुछ जानने को नहीं रह गया है। वह ध्यान में गहरा उतरने लगा है। बहुत मस्त रहता है। दीदी ने उसके लिखे एक भजन के बारे में कहा है, वह अवश्य प्रसिद्ध होगा। उसकी एक सखी ने अपनी मधुर आवाज़ में उसे गाया था, जो व्हाट्सेप पर पोस्ट कर दिया था; सब को अच्छा लगा, भाई ने कहा है उसे अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करे।    


नौ बजने वाले हैं, जून ठीक नौ बजे बत्ती बंद करने को कहेंगे। उसके पूर्व ही आज का लेखा-जोखा लिख लेना है। सुबह आकाश पर बदली थी। आर्ट ऑफ़ लिविंग के फिटनेस चैलेंज का अंतिम दिन था। जून ने मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की तस्वीरें उतारीं। बाद में वे ढेर सारे फल लाए। काव्यालय की संस्थापिका ने एक अंग्रेज़ी कविता का अनुवाद पोस्ट किया, उसे अखरा तो उसने भी एक अनुवाद किया और उन्हें भेजा। जिसे उन्होंने फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दिया। एक चित्र बनाना आरम्भ किया है। ‘ध्यान’ पर एक पुस्तक का  अध्ययन भी शुरू किया है। जीवन एक लय में आगे बढ़ रहा है, जैसे सुबह और शाम, वसंत और पतझड़ आते-जाते हैं, वैसे ही उनके दिन और रात कुछ नये-नये अनुभव देकर बीत जाते हैं।  इसी मधुर भाव में जीने का नाम जीवन है शायद !