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Monday, May 18, 2026

रात की रानी


रात की रानी

आज का इतवार बच्चों के साथ बिताया। सोनू का भाई आया था, उसकी मॉम भी, नन्हे का मित्र आया, सभी मिलकर पहले ‘उडुपी’ गये, फिर एक कैंपिग साईट ‘कैंप मोंक’ देखने, लंच के लिए एमटीआर। शाम को वे लोग मैच देखकर वापस चले गये। भारत विश्वकप के सेमी फ़ाइनल में पहुँच गया है, उधर पाकिस्तान भी। शायद फ़ाइनल में दोनों के मध्य मुकाबला हो। पापाजी से बात हुई, उन्हें तीनों उपहार मिल गये हैं। 

आज शाम टहलने गये तो स्वच्छ नीले आकाश पर चाँदी सा चमकता चंद्रमा शोभित हो रहा था। कल पूर्णिमा है, देव दिवाली और गुरुपर्व भी। पापाजी का जन्मदिन भी, उनके लिए कविता लिखी है। कल चन्द्र ग्रहण भी है। सुबह नाश्ते में उसने साबूदाने की उपमा बनायी थी। नयी खुली सब्ज़ी की दुकान से पपीता ख़रीदा। शाम को हिंदी की कक्षा में साहिर-लुधियानवी का लिखा गीत “साथी, हाथ बढ़ाना” पढ़ाया। साहिर का नाम आते ही अमृता प्रीतम का ख़्याल भी आ जाता है अपने आप।   


आज सांध्य भ्रमण के समय चन्द्र ग्रहण देखा। सुबह उगते हुए सूरज का एक सुंदर चित्र उतारा था। जून आज दो बार साइकिल से बाज़ार गये। तीन तरह के साग लाए। वह आजकल पुन: जीवन में गहरी रुचि लेने लगे हैं, प्रेम का रंग चढ़ा है शायद। किसी कोरियन धारावाहिक का अंतिम एपिसोड देख रहे हैं वे, उसमें सच्चे प्रेम को बहुत श्रेष्ठता से दर्शाया गया है।वह आजकल घर के काम में बहुत मदद करने लगे हैं, उसे पढ़ने-लिखने का समय ज़्यादा मिल जाता है, यह भी ईश्वर की कृपा है ! उस दिन महर्षि अरविंद के एक अनुयायी से सुना था, जो लोग नियमित ध्यान करते हैं, उनकी शारीरिक उम्र भले ही बढ़ जाये पर उनकी कोशिकाएँ देर तक युवा रहती हैं। मन जिस बात को स्वीकार कर लेता है, वैसा ही प्रभाव शरीर पर पड़ता है। नन्हा शनिवार को गोवा जा रहा है, अपने मित्र की बैचलर पार्टी में। 


अभी कुछ देर पहले ही वे रात्रि भ्रमण से आये हैं, मौसम सुहावना था, हवा शीतल और सुवास भरी , जो गुलाबी ठंड पड़ने की खबर दे रही थी। दूर आकाश में धुएँ के बादल  थे, जो वहाँ रहने वालों के लिए मुश्किल पैदा कर रहे होंगे, और हो सकता है थोड़ी देर में हवा उन्हें यहाँ तक ले आये,  वहाँ कोई सीमा तो है नहीं। जो लोग यह धुआँ पैदा कर रहे हैं, खुद वे भी भुगत ही रहे होंगे, पर वे इस बात को समझते नहीं, महसूस नहीं करते। आज भी महर्षि अरविंद व श्रीमाँ के बारे में सुना, उनका विजन कितना विशाल था, गुरुजी की तरह वे भी सारे विश्व के लिए सोचते थे। गुरुजी आजकल अमेरिका में हैं, करोड़ों लोगों के जीवन को उन्होंने छुआ है। उसे भी अपनी शक्ति व सामर्थ्य के अनुसार सेवा कार्य में लगना चाहिए। पापाजी ने भी देश और दुनिया के लिए बहुत मंगलकामनाएँ ज़ाहिर किन। छोटे भाई का भुज से फ़ोन आया, कह रहा था, यहाँ  चालीस लाख में ज़मीन सहित डुप्लेक्स घर मिल जाता है, कितना खुला-खुला है वह इलाक़ा! उसने ‘भारत’ के बारे में एक पोस्ट प्रकाशित की; भारत, जो दुनिया को जोड़ने का प्रयास कर रहा है। 


आज महाकवि दिनकर की पुस्तक में महर्षि अरविंद के कविता के बारे में कहे गये विचार पढ़े। वह अपने जैसे एक ही हुए हैं, उनके पूर्व किसी ने पूरी मानव जाति के आध्यात्मिक होने की बात नहीं कही है। उनका ज्ञान अथाह है, कोई एक व्यक्ति उसे पूरा समझ नहीं सकता। छोटी भांजी का जन्मदिन था, कल उसे बहुत आश्चर्य हुआ जब शाम को उसके दफ़्तर के लोग घर पर मिले, माँ ने बिना उसे बताये, एक पार्टी का आयोजन किया था, अगले महीने उसका विवाह होने वाला है। ईश्वर उसे सारी ख़ुशियाँ दे। कुछ देर पहले बायें तरफ़ के पड़ोसी का पुत्र आया था जन्मदिन का केक लेकर, उसका व उसकी माँ का जन्मदिन भी आज है। उन्हें भी फ़ोन करके बधाई दी। परमात्मा ही यह सारे काम करवा रहा है, उसकी कुछ मीठा खाने की इच्छा भर हुई और केक हाज़िर था। सुबह ठीक छह बजे किसी ने कहा, छह बज गये।सुबह उठने से पहले अक्सर ठीक तीन बजकर अट्ठाईस मिनट पर वही नींद खोल देता है। वह उनके इतने क़रीब है पर वे उससे मुँह मोड रहते हैं। उस मन से काम लेते रहते हैं, जो अस्थायी है, जो सदा बदलता रहता है। भक्ति, प्रेम, ज्ञान, शांति, समरसता, आनंद जो भी उन्हें चाहिए, वह सब परमात्मा से ही मिलता है। उसे पहचानना और उसके प्रति स्वयं को खोल देना यही असली योग है ! सुबह एक नयी कविता लिखी। पापाजी से बात हुई उन्होंने ‘इस्मत चुगताई’ का एक नाटक विविधभारती पर सुना, उसकी कहानी बता रहे थे।वह उसका लेख पढ़कर भी आश्वस्त हुए कि मानव सब कुछ नहीं जान सकता। नन्हा गोवा में है, आज वे लोग क्रूज़ में हैं, कल वह वापस आयेगा। 


आज नेहरू जी का जन्मदिन है, भारत के पहले प्रधानमंत्री, जो हिंदू होते हुए भी स्वयं को हिदुओं की तरफ़ से बोलने वाले नहीं कहलाना चाहते थे। वह धर्म निरपेक्ष थे पर अन्य पंथों के लिए अति उदार।भारत को इतने वर्ष और तपस्या करनी थी और फिर अपने मूल स्वभाव की ओर लौटना था। शायद वक्त का यही तक़ाज़ा था। बचपन में चाचा नेहरू के लिए उन्होंने कितने नग़मे गाये थे, उनके भीतर अनेक अच्छाइयाँ थी, विज्ञान के बल पर वह देश को आगे ले जाना चाहते थे।बाल्मीकि रामायण पर लिखी उसकी पोस्ट पर कुछ लोगों ने प्रतिक्रिया की है, रामायण के प्रति लोगों में कितनी श्रद्धा है ! 


आज शाम मृणाल ज्योति की रजत जयंती पर निकलने वाली पत्रिका के लिए एक ऑन लाइन मीटिंग में भाग लिया। मीटिंग अच्छी रही, जैसे कि सब कुछ अच्छा है, यह दुनिया अच्छी है और वह इसलिए कि इस दुनिया को बनाने वाला अच्छा है ! आज रात की रानी पूरे शबाब पर है, मदहोश कर देने वाली ख़ुशबू है उसकी ! राहगीरों को अपनी सुवास से आकर्षित करती हुई सी।सुगंधित पौधे कितने जीवंत होते हैं, ऊर्जावान और परहित कारक । दोपहर को इंडोनेशिया के बार में एक वीडियो देखा, मोदी जी ने वहाँ रहने वाले भारतीयों को शानदार भाषण दिया। इस्लामिक देश होने के बावजूद वे रामायण और महाभारत को अब तक अपनाए हुए हैं। आज एक अफ़ग़ानी व्यक्ति का वीडियो देखा जो अपने ही मज़हब का सताया हुआ है। पूरे विश्व में धर्म के नाम हज़ारों लोग प्रताड़ित किये गये हैं, किए जा रहे हैं। आज सुबह जून गन्ने का रस पिलाने ले गये, दुकानदार ने पुदीना और नींबू का रस डालकर ताजा और स्वादिष्ट रस दिया। रुस और यूक्रेन का युद्ध अभी भी चल रहा है, शायद इसी वर्ष इसका अंत हो जाये और नया वर्ष नयी उम्मीदें लेकर आये। लाखों लोग पहले ही मारे जा चुके हैं इसमें !


Tuesday, July 14, 2020

तेनाली रामा में कौए



दोपहर बाद के चार बजे हैं. जून पिताजी से बात कर रहे हैं. उनके यहाँ भी ग्यारह अप्रैल को चुनाव होने हैं. कल रात को गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई. पिछले एक-दो दिन से बाएं कान में भारीपन लग रहा है, व सांय-सांय की आवाज आ रही है. नाक-कान के विशेषज्ञ को फोन किया पर वह शहर से बाहर गए हैं. सम्भव है उनके लौटने तक कान ठीक-ठाक ही हो जाये. पिछले दिनों होली पर गहमा-गहमी रही. उस दिन तीन परिवार आये , सभी को गुझिया खिलाईं. असम में यह उनकी अंतिम होली थी. आज दोपहर को कम्पनी  के भूतपूर्व उच्च अधिकारी के परिवार को लंच पर बुलाया था, उन्हें एक स्टोल दिया जो बड़ी भांजी विदेश से लायी थी, उन्हें अच्छा लगा. वे भी उनके नए घर के लिये कांच का एक कछुआ लाये हैं. कहते हैं, शुभ होता है. जीवन इसी आदान-प्रदान का नाम है. नैनी ने उनसे कहा है, उसके पति को गेस्टहाउस में नौकरी दिला दें, पर अब जब वह यहाँ से जा रहे हैं, शायद ही कुछ कर पाएं. कल सुबह स्कूल गयी थी. नई अध्यक्षा ने स्कुल के अकाउंट में काफी रूचि दिखाई. वह स्वयं एक कम्पनी में सीएसआर प्रोजेक्ट देखती हैं. पिछले दिनों कई अनोखे स्वप्न देखे, जिन्हें लिखा नहीं सो अब याद नहीं हैं , पर उनसे पिछले जन्मों के कई राज पता चले जिनका असर वर्तमान तक चला आया है. वे  जिन विकारों का अनुभव अपने भीतर करते हैं उनकी गाठें उन्होंने पिछले जन्मों में बाँधी होती हैं या कहना चाहिए कि उनके जीवन में जो भी घटता है वह पूर्व का फल होता है, उसके प्रति उनकी प्रतिक्रिया वर्तमान में किया उनका कर्म होता है. उन्हें अपने भीतर की गाँठों को पहले देखना है, फिर उन्हें खोलना है. बंधी हुई चेतना से विकार ही जन्म लेते हैं. मुक्त चेतना के साथ जीना सीखना है, जिसमें पूर्व के संस्कार के कारण कोई यन्त्रवत प्रतिक्रिया नहीं होती, बल्कि सजग होकर नए कर्म बढ़ने से रोकने भी हैं. 

तेनालीराम में आज कौओं का प्रकोप दिखाया गया, कम्प्यूटर ग्राफी का कमाल था. आज योग कक्षा में एक साधिका ने कहा, उसे आज क्रोध आया. जो भीतर भरा है वह बाहर तो आएगा ही, पर इसके लिए प्रतिक्रमण करना होगा. आगे उसने कहा, पिछले दो वर्षों से जब से वह योग साधना करने आ रही है, उसने अपने को अतीत के बंधनों से मुक्त किया है. इंसान कितनी जंजीरों में जकड़ा रहता है. गुरूजी के वाक्य उसे शीतलता से भर देते हैं. कल उसकी बहने आ रही हैं, उन्हें भी साथ लेकर आएगी एक दिन. आज दोपहर कई दिन बाद ‘डायरी के पन्नों पर’ ब्लॉग में  लिखा, मन में उत्साह जगा और सद प्रेरणा मिली एक पुरानी डायरी से, और उस समय भी परमात्मा के प्रति श्रद्धा थी, पर अनुभव नहीं था. एक लंबी यात्रा रही है उसके जीवन में अध्यात्म की, जो अभी तक चल रही है. सुबह देर से उठे वे आज, कल शाम एक विदाई समारोह में गए थे, सोने में देर हुई. कल दोपहर तिनसुकिया में डॉ को कान दिखाया, पहली बार सिरिंज से साफ़ भी करवाया. अभी भी टिंगलिंग की आवाज आ रही है. उसकी देखा-देखी अचानक जून भी अपने कान में कुछ आवाज सुनने का प्रयत्न करने लगे हैं. 

आज भारत सेटेलाइट को मार गिराने वाली क्षमता को हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है, प्रधानमंत्री ने इस बात को देश के सम्मुख रखा तो विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. चुनाव आने वाले  हैं, मात्र तरह दिन रह गए हैं, सो सभी पार्टियां  वोटरों को रिझाना चाहती हैं. बीजेपी ही चुनाव जीतेगी इसमें दो राय नहीं हैं. प्रधानमंत्री का चुनावी दौरा आरंभ हो गया है. सुबह आजकल सुहानी होती है अब स्वेटर की आवश्यकता नहीं है. 

और अब उन पुराने दिनों की बात.. दादाजी के यहाँ रहते दो दिन हो गए, परसों उसे घर वापस जाना है. घर जाना भी कितना सुखद अवसर है, उसका कमरा, मेज.. उसका बेड, किताबें, माँ-पिताजी, बहन, भाई, भाभी, दीदी, भांजे, भांजी.. सबसे मिलना. कमलकुंड, मधुवन या फिर वह मैदान, उसका प्रिय वृक्ष.. सब ही तो उसकी कमी महसूस करते होंगे, सूरज निकलता होगा वहाँ पर उसे उसकी तरह देखने वाला कौन होगा ! उसके पत्थर मेज पर रखे होंगे. फिर परीक्षा की तैयारी. यहाँ रहकर कुछ लाभ हुआ है तो यही कि दादी-दादा जी का आशीर्वाद मिला. लग रहा है कितने दिन बाद जा रही है ! 

क्या लिखे ? उसके बचपन की सखी के पिताजी नहीं रहे. कल शाम वह उससे मिली थी, वह खुश थी, क्या मालूम था कि तीसरा दिल का दौरा कल रात को ही पड़ना है. वह उससे मिलने नहीं गयी, क्या कहेगी मिकलर, समझ नहीं आता... उसका मन आज ही जाने को हो रहा है, अच्छा नहीं लग रहा कुछ भी. आज शिवरात्रि है, पिछली शिवरात्रि कैसे मनायी उसे याद नहीं, [अर उससे पिछली अच्छी तरह याद है, तब वे दूसरे शहर में थे. तब भी उसने व्रत रखा था. कल जाने से पहले कहना बनकर जाएगी, दिन का भी और शाम का भी. 

उस सखी को देखा आज, उसके घर गयी थी, बेहद उदास, सूजी आँखें, रूखे बाल, उसकी दीदी उससे भी ज्यादा उदास थीं. 

Sunday, July 5, 2020

समर स्मारक

पिछले तीन दिन पता नहीं कैसी व्यस्तता बनी रही. देश में तनाव का वातावरण है. कल सुबह भारतीय मिराज विमानों ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ठिकानों पर बम बरसाए. आज सुबह उनका जहाज भारत में घुस आया. युद्ध जैसे हालात हो गए हैं. पता नहीं कल का सूरज क्या लेकर आएगा. प्रधानमंत्री की रात कैसे बीत रही होगी, पता नहीं. देशवासियों की शुभकामनायें उनके साथ हैं. जून कल गोहाटी गए हैं, आज एक सहकर्मी के पुत्र के विवाह में जायेंगे. अभी कुछ देर पूर्व नन्हे से बात हुई, देश के हालात ही चर्चा का मुख्य विषय थे. उसने बताया, कल या परसों से नए घर में पेंटिंग का कार्य आरंभ हो जायेगा. वे अप्रैल या मई में वहाँ जायेंगे. आज सुबह पिताजी से बात हुई, मुख्यतः वही बात थी.  ईश्वर सभी को सदबुद्धि दे और युद्ध टले.  
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विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तान में फंस गए हैं. 
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विंग कमांडर अभिनंदन आज पाकिस्तान से लौट रहे हैं. 
भारत पाकिस्तान सीमा पर गोली-बारी जारी है. कल विंग कमांडर के वापस आने पर पूरे भारत में जश्न का माहौल था. लोग शहीदों की मृत्यु का दुःख कुछ भुला पाए हैं. आज नयी प्रेसीडेंट की अध्यक्षता में महिला क्लब की पहली मीटिंग हुई. एक वर्ष के अंदर वह और नई प्रेसीडेंट भी चली जायेंगी, फिर कोई और कमान संभालेगा। पिताजी से बात हुई, वह घर पर अकेले थे, भाई परिवार सहित घूमने गया है, उसके दामाद का जन्मदिन है. 

टीवी पर दिल्ली में बने समर स्मारक को दिखाया जा रहा है. जहाँ आजादी के बाद से अब तक शहीद हुए 26000 सैनिकों के नाम लिखे हैं. पाकिस्तान से भारत का अनेक बार युद्ध हो चुका है, वह कश्मीर को लेना चाहता है और भारत कश्मीर को अपना अटूट अंग मानता है. संभव है आने वाली पीढ़ियाँ इस बात को समझें और एक दिन वहाँ शांति हो जाये. 

जियें तो सदा उसी के लिए यही अभिमान रहे यह हर्ष 
निछावर कर दें हम सर्वस्व हमारा प्यारा भारतवर्ष 

आज वर्षों के बाद ‘हम लोग’ देखा. दोपहर को बच्चों को शिव का चित्र बनाना सिखाया, कल शिवरात्रि है वे आर्ट ऑफ़ लिविंग सेंटर जायेंगे. 

उस डायरी में उस दिन की सूक्ति थी - संघर्षों से भागना ही कायरता है. जब पढ़ा तो लगा जैसे सारा माहौल ही बदल गया हो. दिन भर वह खुश रही पर एक हल्की सी कसक रही इस बात की, कि इस ख़ुशी के पीछे क्या बात है ! कल अंतिम बार कालेज जाना है, फिर तो फीस जमा करने या प्रवेश पत्र लेने ही जाना होगा उसके बाद परीक्षा देने. कल दादाजी से मिलने भी जाना है, चचेरी बहन प्रतीक्षा करती होगी. सुबह जल्दी उठी, घूमने भी गयी, सबसे अच्छे पल होते हैं वे सुबह की उजली-उजली हवा में सूरज के आगमन की प्रतीक्षा करना और फूलों से गुफ्तगू करना. न कोई चिंता न फ़िक्र. हर रोज सुबह आती है उसे मालूम कहाँ था ! 

Tuesday, September 24, 2019

भारत की बात सबके साथ



तीन बजने वाले हैं दोपहर के, आज महिलाओं के योगाभ्यास का दिन है. उन महिलाओं का जो घरों में काम करती हैं और अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं. जिन्हें घर के कामों से समय निकालना मुश्किल लगता है पर योग करने में आनंद आता है. 'योग' कितना अनोखा शब्द है, इसके अनेक अर्थ हैं. हर साधक के लिए उसका अपना अर्थ ! परमात्मा से मिलन का नाम भी योग है और खुद को जानने के अभ्यास का नाम भी योग है. वह लिख ही रही थी कि एक महिला आयीं, उन्हें अकेले करने में झिझक हो रही थी, सो सभी बच्चों ने उनका साथ दिया और तभी और भी आ गयीं. एक घंटा साथ मिलकर व्यायाम, आसन, प्राणायाम तथा भजन किये. प्रेसिडेंट का फोन आया, तीन दिन बाद वार्षिक सभा है क्लब की. अभी तक मुख्य नये पदाधिकारीगण का चुनाव नहीं हो पाया है. आज सुबह समय पर उठे वे, पूरे दो सप्ताह बाद इस तेल नगरी की जानी-पहचानी डगर पर टहलने गये. जून के दफ्तर में आज समारोह था, कम्पनी को पहली बार एक पेटेंट मिला है, इसलिए दोपहर का भोजन वहीं था. रात को भी उन्हें बाहर जाना है. दोपहर को काफ़ी भोजन बच गया. बंगलूरू से एक नई तरह का राजमा लाये थे वही बनाया है. आज सुबह से ही बिजली आँख-मिचौनी खेल रही है, नया ट्रांसफार्मर लगा है या नया सबस्टेशन आरम्भ हुआ है इसलिए. जून को चश्मे का एक सुंदर केस मिला था बंगलूरू में, वह उसे दे दिया. घर काफी व्यवस्थित हो गया है. बहुत दिनों बाद स्वामी रामदेव पर आधारित धारावाहिक देखा, अब बालकृष्ण जी भी आ गये हैं इसमें. देश में महिलाओं और लडकियों पर अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं, समाज में इतनी बेचैनी, इतनी असंवेदनशीलता कहाँ से आ रही है. लोगों के मन जैसे अपने नियन्त्रण में नहीं रह गये हैं.

आज का दिन मिला-जुला आरम्भ हुआ पर अंत सुखद है. कल रात्रि जून ग्यारह बजे लौटे. वह साहित्य अमृत पढ़ती रही. महीनों बाद उसका अप्रैल अंक आया था. उसके पूर्व कुछ देर टीवी देखा, उसके भी पूर्व अँधेरे में ध्यान किया, बिजली काफी देर तक गुल रही. योग कक्षा के बाद साधिकाओं को बंगलूरू से लाये सुगंधित द्रव्य के पैकेट उपहार में दिए. शाम को बगीचे में टहलते हुए आयुर्वेद पर एक पुस्तक पढ़ी. भारत की चिकित्सा व्यवस्था कितनी समृद्ध थी प्राचीन काल में. कल रात से नेट  नहीं चल रहा है. एक दिन यदि सुबह-सुबह फोन काम न करे तो..कितनी उलझन महसूस हो रही थी, ज्ञात हुआ कि फेसबुक और व्हाट्स एप किस तरह जीवन के अंग बन गये हैं. सवा नौ बजे मृणाल ज्योति गयी, बच्चों को योग-व्यायाम कराया. लौटकर कुछ देर पुस्तक पढ़ी, मन अपेक्षाकृत स्वीकार कर चुका था कि आज नेट नहीं चलेगा. दोपहर को जून ने कोई शिकायत भरा वाक्य कह दिया तो मन कुम्हला गया. परमात्मा ऐसी परिस्थति जानबूझ कर रचते हैं ताकि साधक को अपने अहंकार का बोध हो सके. मन यदि परेशान होता है तो इसका अर्थ ही है, अहंकार बना हुआ है. अहम् के रहते कोई सहज रह ही नहीं सकता. शाम को क्लब में टेक्निकल फोरम में एक भाषण सुनने जाना है.

कल शाम न्यूरोलोजिस्ट डाक्टर उपाध्याय का भाषण सुनने गये. लौटने में साढ़े नौ बज गये. लौटकर रात्रि भोजन किया, सोने से पूर्व प्रधानमन्त्री का कार्यक्रम देखा, 'भारत की बात सबके साथ'. उनका जोश, जज्बा और बातचीत बहुत प्रभावशाली है. देश को उन पर भरोसा है और देश के पास उनके सिवा कोई विकल्प भी तो नहीं है. साढ़े दस बजे टीवी बंद किया, सोने से पूर्व कुछ देर सद्वचन सुने. रात्रि को स्वप्न में डाक्टर साहब को पुनः बोलते देखा. वह कह रहे थे, दो तरह के लोग होते हैं एक सूर्य की तरह दूसरे चाँद की तरह. जून कह रहे हैं वह चाँद की तरह हैं. कल लौटते समय उपाध्याय जी ने कहा था, जो कुछ उन्होंने कहा है, कोई उसे ठीक से सुने, फिर पुनर्स्मरण करे तो वह धारण कर सकता है. कल भाषण सुना तो ध्यान से था, उसने सोचा अब रिकाल करती है फिर डायरी में रिटेन कर लेगी. उन्होंने वृद्धावस्था में होने वाली सामान्य बिमारियों का जिक्र किया था, जैसे रक्तचाप, शर्करा, भूलने की बीमारी, कंपवात, गठिया आदि. चालीस के बाद से ही व्यक्ति को अपना ध्यान रखना होगा, नियमित व्यायाम, टहलना आवश्यक है और फिर योग को पूरा अपनाना होगा. यम, नियम से समाधि तक, न कि केवल दो भाग-आसन व प्राणायाम ! वृद्धावस्था के लाभ गिनाते हुए कहा, उस समय व्यक्ति अपने समय का मालिक होता है. उसे समाज में सम्मान मिलता है, वह अपने पोते-पोती, नतिनी-नातियों के साथ अच्छा रिश्ता बना सकता है. यह भी बताया की वृद्धावस्था में देह में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं. मस्तिष्क की कोशिकाएं अर्थात न्यूरोन कम होने लगते हैं. आँखों का लेंस धुधंला पड़ जाता है. उन्होंने बताया, वैज्ञानिक अनुसन्धान कर रहे हैं कि कोशिकाएं सदा जीवित रह सकें, कोशिकाओं के मृत होने पर ही देह वृद्ध होने लगती है. अंत में कहा, प्रार्थना और ध्यान का बहुत महत्व है शरीर व मन को स्वस्थ रखने में.

Wednesday, April 10, 2019

स्वच्छ भारत



सवा ग्यारह बजने को हैं. आज जून की मनपसन्द पकौड़ों वाली कढ़ी बनायी है. दो सप्ताह तक गाय के दूध की एकत्र की हुई मलाई से ‘घी’ बनाया और बचे हुए अंश में आता भूनकर गेहूँ का चूर्ण भी. सारी सुबह रसोईघर में ही बीत गयी जैसे. अभी-अभी एक परिचिता का फोन आया, स्व्च्छता पर कम्पनी की तरफ से आयोजित ‘स्लोगन प्रतियोगिता’ के बारे में बताया, उसने हिंदी में कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं, भाषा शुद्ध है या नहीं, पूछ रही थी. परसों यहाँ कम्पनी की तरफ से स्वच्छता पखवाड़ा मनाने के कार्यक्रम में ‘वाकाथन’ है यानि कुछ दूर तक बैनर लिए पैदल चलना है. रास्ते में गंदगी भी दिखेगी, उसे साफ नहीं करना है बस लोग साफ करें इसका प्रचार करना है. पता नहीं मनुष्य अपने आप को कब तक धोखा देता रहेगा. अचानक तेज वर्षा होने लगी है. घर के बाहर नाले में पानी भर जाता है जो वर्षा समाप्त होने के घंटों बाद तक भी बना रहता है, बड़े नाले से उसका सम्पर्क शायद टूट गया है. आज सिविल विभाग से कोई कर्मचारी देखने के लिए आया है. सुबह तरणताल गयी पर बहुत भीड़ थी, ठीक से अभ्यास नहीं हो पाया. कल से वह समय चुनेगी जब कम से कम लोग हों. कल मृणाल ज्योति की वार्षिक सभा है.

आज जुलाई का अंतिम दिन है. टीवी पर प्रधानमन्त्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम आ रहा है. वह कह रहे हैं, वर्षा मनोहारी है पर बाढ़ की विभीषिका भयंकर होती है. बरसात में हर वर्ष देश के कितने ही भागों में बाढ़ आती है. वह जीएसटी की बात भी कर रहे हैं. उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन तथा अगस्त क्रांति की बात भी कही. साथ ही कहा, इस वर्ष को संकल्प वर्ष के रूप में मनाएं तो पांच वर्ष में भारत का चित्र बदल जायेगा. संकल्प को सिद्धि में बदलना है. गणेश पूजा का जिक्र करते हुए कहा कि इस पूजा को मनाते हुए इस वर्ष सवा सौ वर्ष हो जायेंगे. प्रधान मंत्री कुछ ही देर में इतने सारे विषयों को लेते हुए इतना सार गर्भित भाषण देते हैं. महिलाओं के सशक्तिकरण की बात की तो साथ ही राखी बनाने वाले कारीगरों की भी.

अगले हफ्ते रक्षाबन्धन का त्यौहार है. अभी अभी मृणाल ज्योति से फोन आया, पूछ रही थी, क्या वह और कुछ अन्य महिलाएं उस दिन स्कूल आएँगी. राखियाँ अभी तक बन नहीं पाई हैं, पर तब तक बन जाएँगी, अन्यथा वे बाजार से भी खरीद सकते हैं. आज तैराकी में हाथ चलाना सिखाया, दांया हाथ उठाकर श्वास लेना है. अब लगता है कुछ आगे बढ़ रही है. आजकल योग दर्शन पर नियमित व्याख्यान सुन रही है, काफी कुछ स्पष्ट हो रहा है. आज शाम को योग कक्षा में ‘क्रिया’ के बारे में ठीक से बताना है. सुना कि अन्तरायों का अभाव होने लगता है जब आत्मदर्शन होता है. कोई कहता है अंतराय खत्म होने पर आत्मदर्शन होता है ! ‘व्याधि’ और ‘उपाधि’ आदि अंतराय ही उन्हें समाधि से दूर रखते हैं. योग के प्रभाव से ही वे स्वस्थ रहते हैं, यानि ‘स्व’ में स्थित रहते हैं. ‘स्व’ में प्रतिष्ठित होने पर ही वे जगत में अभय को प्राप्त होते हैं. चित्त की शुद्धि होने पर ही ‘स्व’ का दर्शन होता है. इन्द्रियों पर जय होने पर ही चित्त शुद्ध होता है. एकाग्रता में ही इन्द्रियों पर जय होती है और चित्त में आत्मा की झलक मिलती है.

Thursday, July 14, 2016

लिटिल इंडिया - सिंगापुर


एक सुबह पैदल चलते हुए वे होटल से कुछ ही दूर स्थित ‘लिटिल इंडिया’ इलाके में पँहुच गए, जहाँ बड़ी संख्या में तमिल रहते है I अगरबत्ती तथा फूलोँ की सुगंध ने उन्हें मोह लिया I बंदनवार सजे थे, एक विशाल वैन में सीढ़ी पर सवार हो एक व्यक्ति सड़क पर बने द्वार पर तोरण सजा रहा था I भक्ति संगीत हवा में गूंज रहा था, पोंगल की तैयारी जोरशोर से हो रही थी I यहाँ के बाजार बिलकुल भारतीय बाजारों की तरह लग रहे थे I रविवार की संध्या को देखा, लिटिल इंडिया के पार्क तथा सडकों के किनारे के स्थान लोंगो से खचाखच भर गए हैं, पता चला कि सप्ताह में एक बार वे आपस में मिलकर सुख-दुःख बांटते है, तथा भारत आने-जाने वाले लोगों से धन या सामान मंगवाते-भेजते हैं I इसी तरह की भीड़ चाइनाटाउन में चीनी लोगों की होती है I चाइनाटाउन में प्राचीन बौद्ध व चीनी मंदिरों के साथ एक हिंदू मंदिर व मस्जिद भी है, यहाँ पुराने और नए का अद्भुत संगम है. १८२० में यहाँ पहला चीनी व्यापारी आया था, आज यह सिंगापुर का बड़ा व्यापारिक केन्द्र है I

उनकी यात्रा की अंतिम संध्या चायनीज तथा जापानीज़ गार्डन में बीती I यहाँ दो आकर्षक पगोडा तथा एक विशाल झील के चित्र उतारे I पश्चिमी सिंगापुर में स्थित ये विशाल बगीचे बोन्साई तथा सीमेंट के लैम्पों के लिये जाने जाते हैं I ‘चीनी नए वर्ष’ पर चायनीज गार्डन फूलोँ से सजाया जाता है तथा ‘मिड ऑटम फेस्टिवल’ पर सितम्बर में जापानीज़ गार्डन लैम्पों के प्रकाश से जगमगा उठता है I

दुनिया के हर कोने से सिंगापुर आने वाले यात्रियों के साथ गुजारे ये दिन एक सुखद स्मृति बनकर उन्हें जीवन भर गुदगुदाते रहेंगे ! यह शहर जैसे पर्यटकों को ध्यान में रख कर बनाया गया है I वे लौट आये हैं यादों का एक खजाना लेकर और एक सपना लेकर भी कि एक दिन भारत भी अपनी स्वच्छता, पारदर्शिता, ईमानदारी पर गर्व कर सकेगा I

भैया-भाभी के आने में तेरह दिन शेष हैं. वर्षा के कारण सफाई का कार्य रुक गया है, धूप की प्रतीक्षा है. उनका जीवन प्रतीक्षा में ही बीत जाता है. काम ज्यादा वे कर ही नहीं पाते. कल आइन्स्टीन पर लिखी किताब पढ़ी, आज भी पढ़ेगी. ईश्वर ने उसके मस्तिष्क को किसी खास काम के लिए गढ़ा था. ईश्वर हर एक को इस दुनिया में कुछ बनने के लिए भेजता है, उनके भीतर प्रतिभा का बीज छिपा होता है, उसे उगाना उनका काम होता है. वे छोटे-मोटे कामों में ही जीवन गंवा देते हैं, तब किसी काबिल का हाथ उनके सिर पर रुकता है और वे स्वयं को पहचान कर अपने समय का अधिक से अधिक सदुपयोग होने देते हैं, निखारते हैं बुद्धि को, शांत रखते हैं मन को तथा निर्भार होकर सहज कर्म करते हैं. यहाँ सिवाय आत्मा के कुछ भी अपना नहीं है. ये हाथ, पांव, मन, बुद्धि भी साधन  ही हैं तो इनके द्वारा काम भी तभी अच्छे होंगे जब भीतर आत्मा उनकी मालिक बन जाये. मन यदि पवित्र है तो आनंद का अनुभव होता है, यदि अपवित्र है तो दुःख का अनुभव होता है.

Wednesday, July 13, 2016

सिंह का पुर - सिंगापुर


भारत में जब लोग सुबह की चाय पी रहे होंगे वे नहा धो कर सिंगापुर का डेढ़ सौ साल पुराना प्रसिद्द बोटैनिकल गार्डन देखने निकल पड़े I होटल से कुछ दूर ही MRT(Mass Rapid Transit)  स्टेशन था, जहाँ से एक मददगार स्थानीय महिला की सहायता से स्वचालित मशीन से जुरोंग ईस्ट की टिकट ली, वहाँ से बस द्वारा अपने गंतव्य पर पहुँचे I यूँ तो ६४ हेक्टेयर में फैला २००० ट्रॉपिकल पौधों का घर, झीलों में तैरते हंसों तथा मूर्तियों से सजा पूरा बगीचा ही दर्शनीय है, उन्हें सबसे अधिक आकर्षित किया ‘नेशनल ऑर्किड गार्डन’ ने, जहाँ रंगों की अनोखी छटा बिखरी हुई थी I कई दशकों से यहाँ ऑर्किड्स की हाइब्रिड किस्में उगायी जाती रही हैं I पीले रंग के हर शेड में, बैंगनी, लाल, गुलाबी, सफ़ेद, यानि कि सभी शोख रंगों में ऑर्किड्स का मानो एक खजाना था, जो मंत्रमुग्ध कर रहा था I यहाँ बच्चों के लिये भी एक आकर्षक पार्क है I जब घूमते-घूमते पैरों ने जवाब दे दिया तो वापस लौटे I उसी दिन कुछ विश्राम के बाद साइंस सिटी देखने निकले, जहाँ विज्ञान के आधुनिकतम विषयों को सैकड़ों नमूनों के द्वारा रोचक ढंग से दर्शाया गया है. जीनोम प्रदर्शनी, माइंड’स आई तथा काइनेटिक गार्डन दर्शनीय हैं I ओमनी थिएटर में सागरीय जीवों पर एक IMAX फिल्म देखी, जिसमें नाचते हुए सर्पों का दृश्य अनोखा था I


इतिहास बताता है कि युरोपियन सिंगापुर में आये इससे पूर्व यह मलय प्रायद्वीप का भाग था I १८१९ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने ‘सर स्टैमफोर्ड रैफल्स’ (जिन्हें आधुनिक सिंगापुर का संस्थापक कहा जाता है व जिनकी श्वेत संगमरमर की प्रतिमा उन्होंने सिंगापुर रिवर के तट पर सिटी टूर के दौरान देखी) के नेतृत्व में एक व्यापारिक केन्द्र स्थापित किया, जो बाद में ब्रिटिश हुकूमत का एक प्रमुख आर्थिक तथा सामरिक केन्द्र बन गया I द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कुछ समय के लिये जापानियों के अधिकार में चले जाने के अलावा सिंगापुर १९६३ तक ब्रिटेन का भाग रहा, तब यह मलेशिया में शामिल हो गया, किन्तु दो वर्षों के बाद १९६५ में स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में कॉमनवेल्थ तथा UNO में दाखिल हुआ I आज अमीर देशों की सूची में सिंगापुर का स्थान विश्व में पाचवां तथा एशिया में तीसरा है I दिल्ली की आबादी से तिहाई आबादी वाला तथा क्षेत्रफल में आधे से भी कम वाला यह शहर-राष्ट्र दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है I यह ६३ छोटे-छोटे द्वीपों से मिल के  बना है, जुरोंग तथा सेंटोसा द्वीप अपेक्षाकृत बड़े हैं I एक वर्ष में यहाँ लगभग १० मिलियन पर्यटक आते हैं I यहाँ का मुख्य आकर्षण है सुंदरता तथा मेहमाननवाजी I यह पर्यटकों के लिये पूर्णतया सुरक्षित स्थान है I यहाँ चीनी, भारतीय, मलय तथा युरेशियन लोग रहते है, मंडारिन, तमिल, मलय तथा अंगरेजी यहाँ की राष्ट्रीय भाषाएँ है I सिंगापुर में वाहनों की संख्या बहुत अधिक है, इसके बावजूद यहाँ प्रदूषण नहीं है I सारा शहर एक बगीचा नजर आता है, हरा-भरा तथा साफ-सुथरा I

अगले दिन वे सिटी टूर पर निकले I आर्ट हाउस, पार्लियामेंट हाउस, विक्टोरिया थिएटर, फुलर्टन होटल देखते हुए वे मर्लिन पार्क में रुके, जहां अर्धमत्स्य तथा अर्धसिंह के रूप में ८.६ मीटर ऊँचा श्वेत मर्लिन का बुत है I सिंगापुर का अर्थ ही है सिंह का पुर या नगर, सिंह की एक विशाल मूर्ति सेंटोसा द्वीप में भी है I नेशनल म्यूजियम, एस्प्लेनेड पार्क, वार मेमोरियल पार्क, चाइना टाउन, जेम फैक्ट्री अदि दिखाने के बाद फ्रांसिस उन्हें सिंगापुर फ्लायर ले गया, १६५ मीटर ऊँचा यह व्हील लन्दन के व्हील से भी ऊँचा है I ऊँचाई से सागर में लंगर डाले अनेकों जहाज देखे I सिंगापुर पोर्ट दुनिया के व्यस्ततम पोर्ट्स में से एक है I यह विश्व का चौथा विदेशी मुद्रा विनिमय केंद्र है I सिंगापुर रिवर ‘मरीना बे’ में सागर से मिलती है, यहाँ स्थित है आधुनिक वास्तुकला का बेजोड़ नमूना एस्प्लेनेड थिएटर, जिसके विशाल कंसर्ट हॉल में एक शाम पश्चिमी शास्त्रीय संगीत सुना, वह एक अविस्मरणीय अनुभव था I

Wednesday, August 26, 2015

हवा चली..


धन्य है भारतवर्ष और धन्य हैं वे कि उनके पास ज्ञान का अतुल भंडार शास्त्रों के रूप में विद्यमान है. वे इसकी महिमा को समझें और इसके अनुसार चलें. अपने से बड़ों की सेवा करना तथा उनका सम्मान करना तथा छोटों को स्नेह देना..आज पुनः उसने बेवजह शब्द मुँह से निकाले, फिर भी स्थिति पहले से बेहतर हुई है. कल रात जून ग्यारह बजे आए. नन्हे से बहुत दिनों के बाद अध्यात्म पर चर्चा की. ध्यान किया. इस समय वह किताब पढ़ रहा है, शेष सभी सो रहे हैं, बाहर तेज धूप है, भीतर एसी के कारण ठंडक है, इस बार वर्षा कम हो रही है वर्ष के इस हिस्से में. दोनों भांजे अपेक्षकृत शांत तथा सुधरे हुए बच्चे हैं, बात मानते हैं तथा खाने-पीने में भी ज्यादा नखरे नहीं करते हैं. शाम को सत्संग में जाना है, निकट ही एक परिचित के यहाँ है. सुमिरन बना रहता है आजकल, अनुभव यदि एक बार हो जाये तो विस्मृत हो भी कैसे सकता है. जैसे किसी को अपने होने का अहसास हर क्षण रहता है, वैसे ही उसके होने का ज्ञान भी सदा रहता है. उसका प्रेम भीतर रिसता रहता है और वही भीतर से उदित होकर बाहर बिखरता है. उन्हें सजग होकर उसके रूप को अशुद्ध होने से बचाना है. मन उसमें कुछ जोड़ने या घटाने लगता है तो वह प्रेम दूषित हो जाता है.

कल रात को गर्मी बहुत थी और थोड़ी देर के लिए बिजली गुल हो गयी, सभी परेशान थे, पर वह इसका लुत्फ़ उठा रही थी. गर्मी का असर नहीं हो रहा था भीतर की जीवंतता और मुखर हो उठी थी. जून आज फ़ील्ड गये हैं शाम को छह बजे तक आयेंगे. कल सुबह उसे दो सखियों के साथ बच्चों से मिलने जाना है, वे भी उतने ही उत्सुक होंगे जितनी उत्सुकता उन्हें है. बाहर सम्भवतः तेज हवा चल रही है, दरवाजे की आवाज से उसने अनुमान लगाया है, पिछले कई दिनों से हवा जैसे बंद थी. सुबह सद्गुरु को सुना था, अब कुछ याद नहीं है, आजकल वह धर्म को सुन नहीं पा रही पर जी रही है. हर समय भीतर एक ऊर्जा के प्रवाह को अनुभव करती है. ‘उसकी’ उपस्थिति का अहसास हर क्षण होता है. वह है तो वे हैं. अब लगता है जैसे मन की समता पहले से कहीं देर तक टिकी रहती है और यदि मन कभी एक क्षण के लिए विचलित होता भी है तो कोई भीतर है जो उसका साक्षी रहता है अर्थात होश तब भी कायम रह पाता है. इसी महीने उसका जन्मदिन भी आ रहा है, इस वर्ष उसने जाना यदि कभी कोई उसके बारे में लिखे तो लिख सकता है. सद्गुरु कहते हैं जो जानता है वह कहता नहीं किन्तु वह जिस जानने की बात कह रही है वह तो निज स्वभाव है.


फिर एक अन्तराल..कभी प्रमाद तो कभी व्यस्तता..आज नये महीने का पहला दिन है. पुनः संगीत का अभ्यास भी शुरू किया है और लिखना भी. परसों जन्मदिन था, अच्छा रहा. मौसम पिछले हफ्ते से ही सुहावना हो गया है. वर्षा दिन-रात नहीं देखती कभी भी शुरू हो जाती है, इस समय थमी है. पिछले हफ्ते सत्संग में उसने ‘अंकुर बाल योजना’ के लिए सभी को निमंत्रित किया. उसने इस प्रोजेक्ट का नाम अंकुर रखा है, इसमें वे छोटे-छोटे बच्चों को, जो अभी अंकुर हैं और भविष्य में वृक्ष बनेंगे, अध्यात्म के मार्ग पर प्रेरित कर रहे हैं. जिनके माता-पिता के पास उन्हें देने को संस्कार नहीं हैं, घरों का माहौल दूषित है, नशा आदि जहाँ रोज की बात है. प्राणायाम, ध्यान, सत्संग तथा योगासन के माध्यम से उन्हें एक सन्मार्ग पर ले जाने को प्रेरित कर रहे हैं.   

Friday, July 18, 2014

तुलसी और सूर



आज कितने सुंदर वचन उसने सुने, “बुद्धि रूपी मछली जब आत्मा रूपी सागर से बिछड़ कर मन व इन्द्रियों के सीमित जल में आ जाती है तो छटपटाने लगती है” सागर की मछली को सागर के बिना चैन आ ही नहीं सकता. जीव का सम्बन्ध ईश्वर से वैसा ही है जैसा बूंद का सागर से, उसे याद आया बचपन में एक कविता पढ़ी थी, एक बूंद निकल पड़ती है यात्रा पर और मरुथल में गिर कर खो जाती है, कभी कोई बूंद नदी में गिर जाये तो पुनः सागर से मिल सकती है. आज भी धूप बहुत तेज है, सुबह के आठ बजे ही दोपहर का भास हो रहा है. कल जून ने उन दिनों को याद किया जब वे यहाँ नये-नये आये थे, वे कुछ देर के लिए पुराने वक्तों में लौट गये और अच्छा लगा सारी बातों को मन के पट पर फिर से घटित होते हुए देखना. कल एक सखी परिवार सहित यात्रा पर जा रही थी पर ‘भारत बंद’ के कारण ट्रेन  नहीं चली सो स्टेशन से वापस लौट आयी, शाम को उन्हें भोजन के लिए बुलाया, इस बंद से सबका नुकसान ही नुकसान होता है कोई लाभ तो नजर नहीं आता. अगले हफ्ते उन्हें भी जाना है, यात्रा से पहले जो आशंका पहले होती थी अब बिलकुल नहीं होती. कल उसके पैर में दर्द हुआ था, पर उसने स्वयं से कहा, दुःख-दर्द तो शरीर को है, वह तो इससे अलग है, और मुस्करा दी. थोड़ी ही देर में दर्द महसूस होना ही बंद हो गया. भगवद् कथा का असर लगता है, हो रहा है, ईश्वर हर क्षण उसके साथ है. जून को आज फील्ड जाना है, उसे लंच अकेले ही करना पड़ेगा.   

परसों सुबह ‘जागरण’ नहीं सुन पायी, ‘केबल’ नहीं आ रहा था, कल सुना पर इतवार की सुबह बेहद व्यस्त होती है, डायरी लिखने का समय नहीं मिलता. आज भी धूप तेज है, मौसम का ताप प्रकृति कैसे चुपचाप सह लेती है, मानव ही हैं जो शिकायत करते रहते हैं. गीता में सुख-दुःख, मान-अपमान के साथ-साथ ग्रीष्म-शीत का जिक्र भी किया गया है. मौसम भी आया है तो जायेगा ही. आज गोयनका जी ने धर्म की परिभाषा बताते हुए कहा, “जिसे धारण किया जा सके, जो कर्म से जाना जाये न कि कर्मकांडों से, वही धर्म है”. बाबाजी ने भागवद की कई कहानियाँ सुनायीं, सुनकर भागवद् का अध्ययन करने की प्रेरणा होती है. नन्हे का स्कूल गर्मी के अवकाश के लिए बंद हो चुका है. वह केक बनाने के लिए कह रहा है, बच्चों की फरमाइश भी बच्चों जैसी ही होती हैं.
“नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है इससे ज्यादा चिंता की बात यह है कि नैतिकता के प्रति आस्था ही खत्म हो रही है. यदि चेतना का स्तर ऊंचा हो जाये तो मूल्यों की स्थापन अपने आप हो जाएगी.” आज किन्हीं जैन मुनि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा. आज साढ़े सात बजे बिजली गुल हो गयी, सो बाबाजी से आज भेंट नहीं हुई. कल रात भी तीन बजे के लगभग बिजली गायब हुई थी कुछ देर के लिए. काफी देर तक नींद नहीं आयी, फिर आयी भी तो स्वप्नों भरी. गहरी शांत नींद उसे एसी में सोने से अक्सर नहीं आती, एक तो शोर दूसरे ताजी हवा नहीं आती, आज इस क्षण कैसी शीतल मंद बयार बह रही है.

आज भी कल सुबह की तरह मौसम शीतल है, पवन चेहरे को छूकर जाती है तो ठंडक का अहसास होता है. कल तक यदि ऐसा ही रहे तो उनकी यात्रा की सुखद शुरुआत होगी वरना तो...झुलसा देने वाली धूप में पसीना पोंछते वे रेलवे स्टेशन पहुंचेंगे. अभी बाबाजी आने वाले हैं, अब संभवतः उनसे जून के दूसरे सप्ताह में ही मिलना हो, सो आज की पूरी बात वह ध्यान से सुनेगी. आज उन्होंने नारद की वह कथा सुनाई जिसमें उनका अहंकार तोड़ने के लिए भगवान विष्णु ने उन्हें वानर का चेहरा प्रदान किया था. साथ ही उन्होंने मन, बुद्धि आदि के विकारों को अपना न मानकर उन्हें दूर करने की बात कही, जब कोई उनसे एकाकार हो जाता है तो इलाज मुश्किल हो जाता है जैसे कोई डाक्टर या वकील अपना केस खुद नहीं देखते. ईश्वर से आग्रह करते हुए कि हृदय तो तुम्हारा घर है और तुम्हारे रहते हुए इसमें विकार रूपी चोर घुस जाएँ तो इसमें तुम्हारा भी अपयश होगा. तुलसी और सूर की भांति, “अब लौं नसानी अब न नसैहों”, अपने को शुद्ध करते जाना है. ईश्वर का नाम स्मरण आते ही मन कैसी करुणा से भर जाता है.

Thursday, July 17, 2014

मुकेश के गीत


आज बाबाजी ने भारत के मनीषियों के मनोविज्ञान की चर्चा करते हुए कहा, मन की यह विशेषता है कि वह एक साथ दो स्थितियों में नहीं रह सकता, जिस क्षण वह संतुष्ट है, दुखी नहीं है और जिस क्षण वह तृप्ति का अनुभव नहीं कर रहा, सुखी नहीं है. इस विशेषता का लाभ उठाते हुए यदि कोई दुःख में एक क्षण के लिए भी मुस्कुरा दे तो सुख बरस जायेगा, और मुस्कुराना बेवजह मुस्कुराना उसकी आदत में शामिल हो गया है. आज सुबह ऐसा लगा कि उसकी वाणी में रुक्षता आ गयी है पर सचेत थी सो संभल गयी. जून भी कल रात को थोड़ा सा उद्ग्विन दिखे, यात्रा से आने के बाद पहली बार, शायद गर्मी के कारण या नन्हे के देर तक क्लब में रह जाने के कारण. आज सुबह नन्हे के पेट में दर्द था, वह ठीक से नाश्ता भी खाकर नहीं गया, लेकिन वह जानती थी, बहादुर लड़का है, इस बात से छुट्टी नहीं लेगा. जून के साथ कल माँ के लिए साड़ी और कुछ अन्य उपहार खरीदे.

सुबह पांच बजे उठ कर बाहर आयी तो पूसी अकेली दिखी, उसने बच्चों को शायद कहीं शिफ्ट कर दिया है. आज भी विद्वान् वक्ता ने अच्छी बातें कहीं, वह भाषाएँ भी कई जानते हैं. क्लब में children meet होने वाली है, उसकी संगीत अध्यापिका बच्चों के साथ व्यस्त हैं. सो आज क्लास नहीं होगी. अस्पताल जाने के लिए उसने जून को फोन किया, कई दिनों से ऊपरी अधर के पास छोटा सा दाना उभर आया है, जो कितने उपाय करने से भी ठीक नहीं हुआ, अब डाक्टर की राय लेना ही ठीक रहेगा. संभल-संभल के चलना है, व्यर्थ ही कल्पनाओं में भ्रमित रहेंगे तो वर्तमान को कटु बना लेंगे. बीमारी का आगमन तभी होता है जब स्वास्थ्य के नियमों का पालन नहीं करते.

आज सुबह नन्हा उठ नहीं रहा था पर क्रोध नहीं आया, अच्छा लगा कि सहज शब्दों में उसे समझा सकी. जून का हृदय भी उसके प्रति स्नेह से भरा है, उसकी हर छोटी-बड़ी आवश्यकता का ध्यान रखते हैं, ऐसे ही ईश्वर भी उनकी हर तरह से सहायता करता है, उन्हें इतना कुछ दिया है, उसकी हर छोटी-बड़ी मुश्किल में साथ देता है. और तब भी कृतज्ञता स्वरूप वह उसे अपना एकनिष्ठ प्रेम नहीं दे पाती.

आज बाबाजी ने फटकार लगायी, बारह साल कोल्हू के बैल की तरह एक ही जगह चक्कर लगाते रहें ऐसे भक्त उन्हें नहीं चाहिए, जो सातत्य भक्ति कर सकें, यात्रा पूरी करने का सामर्थ्य रखते हों वही इस क्षेत्र में आयें. कल रात को वह बेचैन थी, मन को एकाग्र रखने का प्रयास व्यर्थ हुआ, शायद उसमें श्रद्धा की कमी है, या वह कई मार्गों पर एक साथ चलने का प्रयास करती है तभी भटक जाती है. आज से वह निश्चित कर लेती है, ‘भगवद् गीता’ उसका इष्ट ग्रन्थ है, इसके अतिरिक्त वह किसी ग्रन्थ का अध्ययन फ़िलहाल अभी नहीं करेगी. कृष्ण ही उसके प्रेम का केंद्र होंगे. रास्ता एक हो उसका ज्ञान हो तो मंजिल शीघ्र मिल सकती है. गीता में भगवान ने स्वयं कहा है, एकनिष्ठ व संशय रहित होकर जो उन्हें भजता है उनके कुशल क्षेम का ध्यान वह स्वयं रखते हैं. प्रभु  जिसके राखनहार हों उसे अन्य किसी से प्रयोजन भी क्या हो सकता है. कल क्लब में छोटे-छोटे बच्चों को इतनी मधुरता से गाते देखकर अच्छा लगा, संगीत में जादू है और फिर संगीत से कोई आराधना भी कर सकता है. कल अध्यापिका ने ‘तीसरी कसम’ फिल्म का एक गीत सिखाया. सजन रे झूठ मत बोलो...मुकेश का गाया यह गीत उसने बचपन में कई बार सुना था.

आज ‘भारत बंद’ के कारण नन्हे का स्कूल बंद है, नूना ने उसे गृह कार्य करने को कहा, पर वह दूसरे-दूसरे कार्यों में व्यस्त है. कभी कभी बच्चे माता-पिता के धैर्य की परीक्षा लेने के लिए ही जैसे उनका कहा नहीं सुनते.




Tuesday, September 10, 2013

अनाम दास का पोथा


टीवी पर भारत और अर्जेंटीना के बीच हॉकी मैच चल रहा है और लगता है भारत यह मैच हार जायेगा, फाइनल में पहुंचने का उसका स्वप्न अधूरा ही रह जायेगा. जैसे कि किसी व्यक्ति का स्वप्न एक निस्वार्थ औए सच्चा मित्र पाने का होता है, जो उसे, वह जैसा है, स्वीकार कर सके, इसी तरह वह खुद भी उसे जैसा वह है स्वीकारे, क्योंकि उनके मध्य केवल प्रेम हो. इस समय भारतीय खिलाडियों की जो हालत हो रही है वह  उसे अच्छी तरह महसूस कर सकती है, पूरे देश में लाखों लोगों के दिल इसी तरह धडक रहे होंगे, लेकिन अगर भारत हार जाता है तो भी उन्हें उदास नहीं होना चाहिए, क्योंकि इन्सान का बस कभी-कभी नहीं भी चलता है.

आज सोमवार है, अभी-अभी उसकी एक सखी का फोन आया और पीड़ा जो परसों शाम  महसूस की थी, कल दोपहर से लग रहा था खत्म हो गयी थी, फिर उभर आई है. उस दिन की सारी घटनाएँ एक-एक कर सम्मुख आ रही हैं, एक बार फिर उसकी मित्रता का अपमान हुआ, फिर भी जाने क्यों उसके भीतर का स्नेह कभी खत्म नहीं होता. कल वे तिनसुकिया गये थे, उसका नया चश्मा बन कर आया, नन्हे के लिए स्केट्स और जून की नई हवाई चप्पल.

आज उसका मस्तिष्क बहुत उर्वर हो गया है, भावों के बीज हैं कि फूटते जा रहे हैं और विचारों की नई-नई कोंपलें स्वतः ही उग रही हैं. सब कुछ जैसे व्यवस्थित हो गया है, संसार कोई अजनबी स्थान नहीं रह गया बल्कि एक सुंदर मैत्री पूर्ण स्थल बन गया है जहाँ लोग एकदूसरे की कद्र करते हैं, हृदय कृतज्ञता से भरे होते हैं. आज एक अजनबी ने कहा, आपका बगीचा बहुत सुंदर है, और लो, उसका बगीचा इतना सुंदर हो गया है कि वह उसके बारे में एक कविता लिखने की सोच रही है. जून अभी तक नहीं आए हैं, आजकल वह ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ पर एक कोर्स अटेंड कर रहे हैं एक ट्रेनिंग प्रोग्राम, कल उन्होंने बहुत रोचक बातें बतायीं, वह कुछ बहुत अच्छा सीख रहे हैं.

कल रात से ही उसकी पीठ में दर्द है, इतने वर्षों में पहली बार इस तरह का दर्द महसूस कर रही है, उठने-बैठने यहाँ तक की हल्का सा खांसने या उबासी लेने में भी दर्द बढ़ जाता है. दोपहर को गाने की प्रैक्टिस के लिए जाना है, जून के आने का समय हो रहा है, पर फुल्के बनाने का उसमें सामर्थ्य नहीं है, जून आकर सहायता करेंगे. पीठ का दर्द इतना तकलीफदेह होता है पहले उसे पता नहीं था.

आज पीठ में दर्द नहीं है पर पूरी तरह से स्वस्थ अनुभव नहीं कर रही है, अभी गरारे करते समय याद आ रही थी परसों सुबह की ख़ुशी, हर ख़ुशी की कीमत चुकानी पडती है न. आज टीवी पर एक अच्छी फिल्म देखी, ‘एक फूल चार कांटे’, वहीदा रहमान इतनी सुंदर है और उतनी ही अच्छी अदाकारा है, इस फिल्म में उसका चरित्र बहुत जानदार है.

आज कल से बेहतर है. सुबह सारे कार्य किये, सिर्फ योगासन छोड़कर. दोपहर पढ़ाई भी की. कल शाम को ‘अनाम दास का पोथा’ पढ़ना शुरू किया, उसे भी काफी पढ़ चुकी है और यह एक ऐसी पुस्तक है जिसे बार-बार पढ़ते रहना चाहिए. मन, बुद्धि, आत्मा के रहस्यों को खोलती हुई वह जीवन का सीधा-सच्चा मार्ग दिखलाती है. फेमिना में एक ब्रह्मकुमारी का आत्मकथ्य पढ़ा और एक लेख, quality in death भी, दोनों ही लेख अच्छे लगे. सुबह-सवेरे जागरण में life after death सुनकर मृत्यु उसके लिए पहले जैसी रहस्यमयी और क्रूर नहीं रह गयी है. मृत्यु स्वाभाविक है और उसे इसी रूप में ग्रहण करना चाहिए. there must be quality in death like in life. आज रिहर्सल में शाम को जाना है.

थोड़ा सा वक्त है, सोचा क्यों न इसका उपयोग कर ले. अभी नन्हे के लिए टिफिन बनाना है, उसकी पसंद के भरवां आलू बन रहे हैं. सुबह-सुबह ‘रैक्य आख्यान’ का अंतिम भाग पढ़ा था सो अंतरात्मा की निकटता महसूस कर पा रही है. वह उसे गाइड ही नहीं कर रही, एक अनोखे सुख से उसका अंतर भर गया है. असीम सम्भावनाओं के द्वार खुल गये हों जैसे, कहीं कोई भय नहीं कोई उहापोह नहीं. परसों क्लब में वह कार्यक्रम है जिसकी तैयारी इतने दिनों से चल रही है, उन्हें वहाँ इडली खिलानी है, उम्मीद है सब ठीक होगा. खाने की जिम्मेदारी उसकी सहयोगिनी की है और कोरस की उस पर. उसे ईश्वर पर विश्वास है, वह उसकी सहायता करेगा, वह जो उसके दिल में रहता है और दिल की हर बात जानता है, यह भी कि उसे उसी की लगन है. वह जो सारी उलझनों को सुलझा देता है.

तुम ! मात्र तुम शाश्वत हो
हे अखिलेश्वर ! और तुम्हारा अंश जो समाया है मुझमें
ब्रह्मांड की विशालता
आकाश की निस्सीमता
और धरा की दृढ़ता में मात्र तुम जाग्रत हो !
सूर्य, चन्द्र और कोटि तारागण के प्रकाश में
अन्तरिक्ष के शून्य में
सागर के विस्तृत फैलाव में
मात्र तुम दृष्टिगोचर हो
जो बीत गया, होने वाला है जो
उन सबमें
मात्र तुम गतिमान हो !



Monday, March 11, 2013

भोज के वृक्ष



भारत छोडो आन्दोलन की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष में आज अवकाश है, वे तिनसुकिया गए, एक और परिचिता व उसके छोटे से बेटे के साथ. शाम को एक परिवार मिलने आया, दिन भरा-भरा सा रहा. शाम को जून को थकावट हो गई, धूप में ड्राइविंग करने के कारण ही शायद.
अभी-अभी कल्याण में उसने पढ़ा, जिसके हृदय में भगवान रहते हैं वहाँ भय, विषाद, शोक, व्याकुलता, उद्वेग, निराशा, क्षोभ, संदेह, अश्रद्धा, ईर्ष्या, कायरता, द्वेष आदि का स्थान कहाँ है ? वहाँ तो निर्भयता, शक्ति, तेज, प्रकाश, प्रेम, निष्कामता, संतोष और परम आनंद का निवास होता है. जब ईश्वर अपना लेते हैं, तब वही जो कुछ विधान करेंगे, कल्याण के लिए करेंगे. दुःख हम अपनी ही भूल से अनुभव करते हैं, उस भूल को मिटाने की देर है कि चित्त स्थिर रह सकता है. जैसे स्वप्न में वह तरह-तरह की आपदाओं को झेलती है मगर यह भान होते ही कि यह तो स्वप्न है, मन शांत हो जाता है उसी तरह जीवन में कोई परेशानी हो तो उसे स्वप्न वत मानकर झेल लेना चाहिए क्योंकि उसके बाद तो सुदिन आएंगे ही.

  आज जन्माष्टमी है, सुबह से जो मन शांत था अभी कुछ देर पूर्व नन्हे पर झुंझला ही गया, बच्चे तो आखिर बच्चे ही हैं, काम धीरे-धीरे ही करेंगे न. आज उसने व्रत रखा है, नन्हे और उसने मिलकर मंदिर सजाया है, अच्छा लगता है ईश्वर के करीब रहना लेकिन मन फिर कहीं  और चला जाता है. कल दीदी का छब्बीस का लिखा पत्र आया और कैसा संयोग है उसी दिन उसने भी उन्हें लिखा था. कल छोटे भाई के लिए जन्मदिन का कार्ड लायी थी. नन्हे का स्कूल खुला है, जून आज किसी से लिफ्ट लेकर ऑफिस गए हैं, ‘स्टूडेंट्स यूनियन’ ने चौबीस घंटे का बंद घोषित किया है, कार ले जाना ठीक नहीं था. कल शाम एक सखी के बुलाने पर वे लोग उसके यहाँ गए. लेकिन आज उसे इन दुनियादारी की बातों से मन हटाकर पूर्णता की ओर ले जाना है, जहाँ कोई उलझन नहीं..अद्भुत प्रकाश है, जिसके आगे कुछ पाना शेष नहीं रहता न ही कुछ जानना. दीदी ने लिखा है, “कहीं कुछ ऐसा पढ़ो जिसके आगे लगे कि अब और कुछ नहीं, फ़िलहाल कुछ भी नहीं, तो लिखना”. उसने सोचा अभी पढ़ेगी विवेकानंद की दूसरी पुस्तक उसमें अवश्य ही ऐसा कुछ मिलेगा.

  कल का उपवास अच्छी तरह से सम्पन्न हो गया. जून को कल दोपहर दांत में दर्द था, आज तिनसुकिया गए हैं डेंटिस्ट के पास. आज उसने लंच अकेले ही खाया, जून अभी एक घंटे बाद आएंगे. शायद उन्हें रूट कैनाल ट्रीटमेंट करना पड़ेगा. कई बार जाना होगा. सुबह अलमारी की सफाई के काम में लगी रही. पढ़ने की कोशिश की पर मन नहीं लगा, रात को फिर स्वप्न देखे, इधर-उधर के, अभी उस दिन ही मरते-मरते बची थी एक स्वप्न में. शाम को उन्हें एक परिवार के साथ बैठकर “हम हैं राही प्यार के” देखनी है, कल जून का जन्म दिन है, उसने अभी-अभी एक कार्ड बनाया है. कुछ देर पहले जून को विवाह से पूर्व लिखे कुछ खत पढ़े, कितन प्रगाढ़ था उनका रिश्ता, प्यार के रिश्ते सचमुच कितने मजबूत होते हैं.

  जून का जन्मदिन अच्छा रहा, उसने केक बनाया था. घर पर ही भुजिया भी बनाई थी. पन्द्रह अगस्त पर वे तीनों नेहरु मैदान गए, झंडा आरोहण में सम्मिलित होने. कल रात को एक मधुर स्वप्न देखा, वर्षों बाद भी वह सब उसके अवचेतन में उतना ही सजीव है जितना उस क्षण था, सोलह-सत्रह वर्ष पहले की बात है जब वे पहाड़ों में रहे थे, लेकिन अब भी स्मृति पटल पर सब कुछ कितना स्पष्ट है. वर्षों से स्वप्नों में ही मिलती रही है, लगता है हर साल एक बार मिलना हो जाता है उन वादियों से. यूँ फूट-फूट कर रोना...एक अनजानी तृषा..एक अधूरा वादा लिए ही लगता है इस जग से जाना होगा...वे झरने.. वे रास्ते..वे पहाड़ कभी मिलेंगे उसे? अभी तक जैसे पोर-पोर महसूस कर रहा है वह सब कुछ..स्वप्न इतने मधुर भी हो सकते हैं ? अभी तक उसके मन का एक कोना सुरक्षित है उन यादों के लिए यह उसे स्वयं भी मालूम नहीं था, इतनी शिद्धत से महसूस कर सकती है उस छुअन को इस पल जो वर्षों पहले भी अनजानी थी और आज भी है पर स्वप्न सारे बांध तोड़ देते हैं..नदियाँ मिल जाती हैं..तट तोड़कर...और स्वप्न क्या सिर्फ उसके हिस्से में ही हैं ? और यह भी कि प्रेम सिर्फ बचपना नहीं है..प्रेम उम्र की सीमाओं से परे है. जैसे उसका मन इस समय एक अनोखे प्रेम से लबरेज है..कसक भरा प्यार उन भोज वृक्षों के लिए और फूलों की घाटी में बहती उस चांदी के समान जल धार के लिए..