Tuesday, February 22, 2022

सम्पूर्ण लॉक डाउन


सम्पूर्ण लॉक डाउन 

रात्रि के पौने नौ बजे हैं। आज जनता कर्फ़्यू सुबह सात बजे शुरू हुआ और  शाम को पाँच बजे सभी ने ताली, थाली और घंटी बजाकर डाक्टर्स को धन्यवाद दिया। भारत में कोरोना के मरीज़ों की संख्या छह सौ सत्तर हो गयी है। दो दिन बाद  उगादि का उत्सव है।

आज शाम को लोग सड़क पर आते-जाते दिखे। कोरोना के ख़िलाफ़ युद्ध में प्रधान मंत्री का अगला कदम है इक्कीस दिनों का पूरा लॉक डाउन। अगले तीन हफ़्तों तक सभी कुछ बंद रहेगा, स्कूल, कालेज, रेल, बस, दफ़्तर सभी कुछ। हवाई यात्रा भी। कोरोना वायरस जिस तेज़ी से फैल रहा है, उससे बचने का यही एक उपाय बचा है। उन्होंने कहा, यह वायरस जंगली आग की तरह फैलता है, हमें इस आग को बढ़ने से रोकना है। देशवासियों को प्रधानमंत्री के इस आह्वान का पालन करना है। जून ने अपने पुराने सहकर्मियों को शुभकामना संदेश भेजा। इस महामारी ने भौतिक दूरी बढ़ा दी है पर दिलों को जैसे नज़दीक ला दिया है। गुरु जी दिन में दो बार नियमित ऑन लाइन ध्यान करवा रहे हैं। कल से वे केवल प्रातः काल ही टहलने जाएँगे, शाम के वक्त लोगों से बचना कठिन है। कोरोना के मरीज़ को पहचानना बहुत मुश्किल है। यह पता ही नहीं चलने देता है और वह आदमी उसी तरह लोगों से मिलता है और दूसरों को वायरस दे देता है। प्रलय  के आने का यह काफ़ी वैज्ञानिक तरीक़ा है। यह प्रलय से कम नहीं है पूरी दुनिया के लिए। 


आज लॉक डाउन का पहला दिन था और पहला नवरात्र भी। दिन भर वे घर से नहीं निकले। नवरात्रि का उत्सव सभी अपने-अपने घरों में ही मना रहे हैं। नन्हे से बात हुई उनकी कम्पनी सरकार को सहयोग करते हुए डाक्टर्स को ऑन लाइन सलाह व इलाज के लिए प्रशिक्षित कर रही है।  


आज दूसरा दिन है। सुबह जब सड़क पर कोई नहीं था, लगभग अंधेरे में ही वे टहलने गये। उसने लौट कर ध्यान किया, शरीर के भीतर के अंगों पर धारणा की और धीरे-धीरे सब स्पष्ट होने लगा। मांस पेशियाँ, हड्डियाँ, रक्त वाहिनी और भीतरी अंग। कुछ सखियों से बात की। नन्हे और सोनू ने तय किया है कि वे बारी-बारी से भोजन बनाएँगे। उनका कुक नहीं आ रहा है न ही कामवाली दीदी। यहाँ भी मेड नहीं आयी। उसने सफ़ाई की, जून ने नाश्ता बनाया। ऐसे ही तीन हफ़्ते बीत जाएँगे। समाचारों में देखा, मज़दूर अपनी गठरियाँ सिर पर उठाए दिल्ली तथा अन्य बड़े शहरों से पैदल ही घर जाने के लिए निकल पड़े हैं। उनके पास काम नहीं है न ही घर। सरकार ने उनके लिए सहायता की घोषणा की है पर उन तक कैसे पहुँचेगी, जब सब कुछ बंद है। वे लोग जो इतने आराम से घरों में बैठे हैं, उनके कष्ट का अनुमान नहीं कर सकते। लेकिन जब से यह दृश्य देखा है हृदय में कैसी कचोट उठ रही है। फ़ोन पर जिससे भी बात करें कोरोना के सिवा कोई विषय ही नहीं बचा है बात का। आज से डीडी नेशनल व डीडी भारती पर रामायण व महाभारत दिखाए जाने शुरू हुए हैं। पिटूनिया के पौधे जो गोहाटी से लाए थे आज हैंगिंग गमलों में टांग दिये हैं। महीनों पहले ये गमले जून ने मँगवाए थे। रामायण में आज अरुंधती, वशिष्ठ मुनि के आश्रम में राम आदि छात्रों को सामवेद का गायन सिखा रही थीं। जीवन में भावना की कोमलता भी हो और कर्त्तव्य की कठोरता भी, तभी जीवन पूर्ण बनता है। अन्य छात्रों के साथ चारों राजकुमार भी श्रम करते हैं और योगासन करते हैं। वे सरस्वती की वंदना कर रहे हैं; मानव देह में जो आध्यात्मिक शक्तियाँ हैं वे किसी अन्य योनि में नहीं !  


Tuesday, February 15, 2022

ताली और थाली


सुबह पाँच बजे ही वे उठ गये थे, होटल के कमरे से ही सूर्योदय का दृश्य दिखायी दे रहा था। झील तक गये तो सूर्य का नारंगी गोला नीले आकाश के साथ झील के पानी में भी सुशोभित हो रहा था। उन्होंने सुंदर तस्वीरें उतारीं और नाश्ते के बाद वापसी की यात्रा आरंभ की। रात्रि ग्यारह बजे घर पहुँचे तो नन्हा और सोनू प्रतीक्षा रत थे। पौधों का कार्टन रात्रि को ही खोल दिया था, सुबह पिटूनिया के पौधे रोप दिए। शेष बचे पौधों के लिए नन्हे ने नए गमले आर्डर कर दिये हैं। गुरूजी आश्रम से लाइव टेलीकास्ट के द्वारा संदेश दे रहे हैं। उन्होंने कहा, कोरोना से डरने की आवश्यकता नहीं है, पर सावधान रहना है; कम से कम दिन में दो बार ध्यान करना चाहिए। घर में रहकर समय का सदुपयोग हो इसलिए नई भाषा सीखनी चाहिए, नई किताबें पढ़नी चाहिए। कल नन्हे ने एक नयी किताब दी है, बैटल बियोंड कुरुक्षेत्र: ए महाभारत नॉवल, जो द्रौपदी को केंद्र में रखकर लिखे गए मलयालम उपन्यास का अंग्रेज़ी अनुवाद है। कल से पढ़ना आरंभ करेगी।  कोरोना के  कारण छोटा भाई केरल नहीं जा रहा है। उसने कुछ पंक्तियाँ लिखीं इसी महामारी पर। आर्ट ऑफ़ लिविंग  के हिंदी सेक्शन ने कुछ अनुवाद कार्य उसे दिया है। गुरु जी के भाषणों से कुछ अंश लेकर ‘हिम्मत ना हारिये’ इस पर एक लेख भी  लिखना है। देश भर में भी काफ़ी कदम उठाए गये हैं इस सिलसिले में। कई देशों में तो सब कुछ ही बंद हो गया है, केवल ज़रूरी सामानों की दुकानें खुली हैं। सुबह भागवद में सृष्टि रचना के बारे में सुंदर विवरण पढ़ा। देवताओं की सहायता से परमात्मा इस सृष्टि को चलाते हैं पर वह हर जगह स्वयं रहते हैं। उनकी उपस्थिति के बिना देवता भी कुछ नहीं कर सकते। 


आज शाम छोटी बहन से बात हुई। उसे शारजाह जाना है। कोरोना वायरस से बचाव के लिए डाक्टर्स को  विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। यह वायरस जानवर से मानव में पहुँचा फिर मानव से अन्य मानवों में और अब तो पूरे विश्व में एक सौ पैंतालीस देशों में पहुँच गया है। कुछ देर पहले मोदी जी का देश के नाम संदेश सुना। उन्होंने महामारी से बचने व औरों को बचने के उपाय सुझाए। बाइस मार्च को जनता कर्फ़्यू के लिए कहा जो सुबह सात बजे से रात्रि नौ बजे तक होगा, और शाम को पाँच बजे, दिन-रात बचाव के लिए लगे डाक्टर्स तथा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ताली या थाली बजाकर धन्यवाद देने को कहा। उनका भाषण आत्मीयता से भरा हुआ था और देशवासियों को सही समय पर सचेत करने का बहुतर प्रशंसनीय प्रयास था। गुरूजी ने भी सुंदर संदेश दिया। कुछ दिनों के लिए सभी को अवसर मिला है कि अपने साथ रहें, विश्राम में रहें और बुद्धि को भी विश्राम करने दें। उन्होंने सेवा भाव को जगाने का सुंदर संदेश भी दिया।जो निर्धन हैं, जो रोज़ काम करके  अपना गुज़ारा करते हैं, इस विपदा को कैसे उनकी मदद करने के अवसर में बदला जा सकता है । नन्हे ने बताया, उसकी टीम ने चायनीज टीम के साथ बात की, वहाँ कई लोग इसलिए मर गए क्योंकि उनका इलाज ही नहीं हो पाया, वहाँ अस्पताल कोरोना मरीज़ों से भर गये थे। आज वे टहलने गए तो पूरी सड़क ख़ाली थी। अगले दो हफ़्तों तक काफ़ी सजग रहना होगा। भारत में कोरोना मरीज़ों की संख्या दो सौ बयालीस हो गयी है और पाँच की मृत्यु हो गयी है। सारा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। अमेरिका में एशियन के ख़िलाफ़ क्रोध भर गया है। चायना के प्रति भी कई लोग क्रोधित हैं। इसकी शुरुआत वुहान से हुई थी जो चीन में है।  ‘लॉक एंड की’ का अगला अंक देखा, काफ़ी प्रभावशाली है यह धारावाहिक। 


Tuesday, February 8, 2022

उमियम झील के किनारे



परसों वे ‘होलिका दहन’ का आयोजन  देखने गए थे, जो नापा में बड़े ही शानदार तरीक़े से मनाया गया। अगले वर्ष वे भी कुछ मिठाई आदि लेकर जाएँगे। जल्दी आना पड़ा क्योंकि सुबह फ़्लाइट पकड़नी थी असम के लिए। कल सुबह दस बजे होटल पहुँच गये। दोपहर को जूरन में शामिल हुए। असम में विवाह से एक दिन पहले यह रीति होती है। शाम की काकटेल पार्टी भी अच्छी थी, पुराने-नए फ़िल्मी गानों की धुन पर सभी नाच रहे थे। शाम को विवाह है, फिर विशेष भोज। आज दोपहर को सोनू के घर जाना है। जून यहाँ स्थित कम्पनी के दफ़्तर चले गए हैं, जहाँ वे पहले सेवाकाल में कई बार आ चुके हैं। टीवी चल रहा है, मध्यप्रदेश में सरकार गिरने वाली है।ज्योतिराव सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये हैं, उनके साथ कई एमएलए भी आ गये हैं।, पिछले कई वर्षों से कांग्रेस में उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा नहीं मिल रहा था, ऐसा उनका कहना है। मानव स्वभाव हर जगह एक सा ही होता है, जहाँ सम्मान न मिले तो व्यक्ति वहाँ रहना नहीं चाहता। 


‘लोभ से भरा मन साधक नहीं हो सकता। इस जगत में पकड़ने जैसा कुछ भी नहीं है, दर्शक की तरह यहाँ से गुजर जाना है।’ टीवी पर ये सुंदर वाक्य सुने अब आकाशवाणी पर समाचार आ रहे हैं। कोरोना अब महामारी बनता जा रहा है। प्रकृति में संतुलन के लिए समय-समय पर अतीत में भी महामारी फैलती रही है। आज सुबह वे जल्दी उठ गये। टहलने गए तो हवा में हल्की ठंडक थी। कम से कम सौ लोग और भी थे उस सड़क पर, जिसे सुबह के समय ट्रैफ़िक के लिए दोनों ओर से बंद कर दिया गया था। कई बड़े शहरों में प्रातः भ्रमण के लिए ऐसा ही प्रबंध होता है आजकल। कुछ लोग खेल रहे थे, कुछ साइकिल चला रहे थे और कुछ व्यायाम भी कर रहे थे। कल शाम विवाह का सुंदर आयोजन सम्पन्न हो गया। अहोम तथा कश्मीरी दोनों तरह की रीति से विवाह हुआ। कई पुराने परिचित लोगों से मुलाक़ात हुई। 


आज वे उमियम झील यानि ‘बड़ा पानी’ में आ गये हैं। गोहाटी से शिलांग पहुँचने से लगभग बारह किमी पहले मीठे पानी की यह एक बड़ी सी झील है, जिसके किनारे सुंदर विश्राम स्थल बन गए हैं। एक रात वहाँ  गुजरने का इरादा है। हिमालय की अचल पर्वत शृंखला के सान्निध्य में स्थित यह शांत झील एक आकर्षक पर्यटक स्थल है। सब कुछ कितना स्थिर लग रहा है। यह पर्वत न जाने कितने काल से ऐसे ही खड़े हैं। दोपहरी का समय है। झील का हरे रंग का पानी भी जैसे विश्राम कर रहा है। किनारों पर उगे चीड़ के वृक्ष भी मौन हैं, जिन पर लगे कोन धूप में चमक रहे हैं । कुदरत का यह सुंदर दृश्य जैसे उन्हें अपने भीतर की स्थिरता को महसूस करने के लिए आमंत्रण दे रहा है। कभी-कभी पंछियों  की आवाज़ें निस्तब्धता को भंग कर देती हैं, झींगुर की आवाज़ भी वातावरण को और अर्थवान बना रही है।  एक श्वेत तितली काफ़ी ऊँचाई पर उड़ रही है। वह प्रकृति की इस लीला को निहार ही रही थी कि अचानक हवा बहने लगी, कुछ वृक्ष मस्ती में झूम रहे हैं।


Tuesday, February 1, 2022

बादामी गुफ़ाएँ

बादामी गुफ़ाएँ

रात्रि के दस बजकर दस मिनट हुए हैं। सुबह छह बजे वे उत्तरी कर्नाटक स्थित बादामी गुफ़ाओं की यात्रा के लिए रवाना हुए। छठी  शताब्दी में बने ये गुफा मंदिर देखने वाले को चकित कर देते हैं। तत्पश्चात बनशंकरी मंदिर में नींबू की माला पहने हुए देवी की भव्य मूर्ति के दर्शन किए। अगला पड़ाव था पट्टकदलु, जहाँ मंदिर के अवशेष मात्र ही थे। कुडल संगम, आईहोले, बसवा तीर्थ (बसवन्ना ) अनुभव मंटप तथा संग्रहालय के प्रांगण में स्थित सुंदर मूर्तियाँ भी देखीं।बसन्ना भगवान की जीवन कथा सुनी, उनके वचनों की पुस्तक मंगायी है। बारहवीं शताब्दी का यह संत अपने समय से बहुत आगे था। उनके मन में किसी भी प्रकार का  कोई भेदभाव नहीं था।  लौटे तब अँधेरा हो गया था । कल हम्पी जाना है, जहाँ विजयनगर साम्राज्य के अवशेष आज भी हज़ारों दर्शकों के आकर्षण के केंद्र बने हैं।   


आज वे घर लौट आए हैं। कल रात नौ बजे चली हम्पी एक्सप्रेस सुबह समय से पूर्व ही आ गयी थी । कल दिन भर कड़ी धूप में छाता व टोपी लगाकर मीलों पैदल चलते हुए वास्तुकला के सुंदर नमूने देखे, जो भारत के गौरवशाली अतीत की कहानी कहते हैं। सुबह का नाश्ता नन्हे के घर पर किया। बड़ी ननद का फ़ोन आया। वे लोग बिटिया का रिश्ता टूटने से, बल्कि तोड़ने से खुश हैं। समाज बदल रहा है। लड़कियों को अपना सम्मान करना आ रहा है। वे विवाह करके ग़ुलामी का जीवन नहीं बिता सकतीं। उनका आत्मसम्मान उन्हें औरों के आगे बेवजह निरीह बनकर रहने  नहीं देगा। जितना अधिकार अपनी बात कहने का किसी लड़के या पुरुष को है, उतना ही अधिकार स्त्री या बालिका को भी है। हर आत्मा की पहली पुकार है स्वाधीनता। साथ-साथ रहते हुए भी एक-दूसरे का सम्मान करते हुए उन्हें विकसित होने देना किसी भी रिश्ते को गहराई प्रदान करता है। आज महिला क्रिकेट टीम फ़ाइनल में पहुँच गयी है। एक वक्त ऐसा भी था जब महिला क्रिकेट को सम्मान नहीं मिलता था। अब महिला खिलाड़ियों के नाम भी लोगों को याद होने लगे हैं। महिलाएँ वे सभी कार्य कर रही हैं, जो कभी पुरुषों के एकाधिकार में थे। 


रात्रि के आठ बजे हैं, गुरूजी श्री श्री यूनिवर्सिटी से ध्यान साधना करवा रहे हैं। उन्होंने कहा, जो आंदोलन देश में चल रहा है, वह सीएए के ख़िलाफ़ नहीं है, क्योंकि ऐसे क़ानून अन्य देशों में भी हैं। कुछ ऐसे लोग जो खुद को कटा हुआ मानते हैं, इसमें शामिल हैं, और कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी इसका लाभ उठा रही हैं। सरकार भी झुकने को तैयार नहीं है। गुरूजी ने यह भी कहा, वकीलों को काले कोट की जगह कोई और रंग पहनना चाहिए। उनके सत्संग में एक अन्य साधक प्रसानी जी भी आए हैं, जिन्हें उड़िया में कविता सुनाने को कहा है।  उन्होंने गुरूजी के नाम की श्रेष्ठता बतायी। नाम सुमिरन से ज्ञान की वृद्धि होती है और चेतना की शुद्धता से शांति का प्रसरण होता है।परमात्मा के सिवा आत्मा का कौन निकटस्थ है। 


आजकल हर जगह एक नयी बीमारी कोरोना का भय है इसलिए होली खेलने का उत्सव इस बार नहीं मनाया जाएगा, ऐसा प्रधानमंत्री ने भी कहा। कोरोना के कारण छोटे भाई की विदेश यात्रा भी स्थगित हो गयी है। नन्हा और सोनू एक मित्र के विवाह में कोचीन गये हैं, सुबह मोबाइल पर उन्होंने अपना कमरा दिखाया, नदी के किनारे स्थित है उनका होटल। मौसम गर्म हो गया है।  





Thursday, October 7, 2021

तुंगभद्रा के किनारे

तुंगभद्रा के किनारे 


रात्रि के नौ बजे हैं, रात्रि भोजन के बाद टहलते समय पिताजी से बात की। वह आज व कल अकेले रहेंगे, नवासी वर्ष की उमर में भी वह अकेले रह सकते हैं, यह क़ाबिलेतारीफ़ है। उन्होंने बताया, एक नयी किताब पढ़ी, ‘गॉड डेल्यूजन’, जो छोटी पोती ने दी है। उसे भी आध्यात्मिक किताबें पढ़ने का शौक़ है, पर नूना ने इस किताब के बारे में पढ़ा तो आश्चर्य हुआ, इसमें ईश्वर के अस्तित्त्व को नकारा गया है। लेखक नास्तिक है और उसे धर्म की कोई आवश्यकता नज़र नहीं आती। शायद आस्तिक होने के लिए नास्तिकता के पुल को पार करके ही आना होता है। शाम को वे निकट स्थित एक नर्सरी में माली ढूँढने गये, कल एक माली छत देखने आएगा, जहाँ टैरेस गार्डन उगाना है, शायद अगले वर्ष तक उनके सपनों का बगीचा तैयार हो जाए।आज लॉन में नयी घास भी लगवायी। जून ने बताया सोलर पैनल के द्वारा आज बिजली का अधिकतम उत्पादन हुआ, सुबह ठंड थी पर दिन में तापमान बत्तीस डिग्री था। आज अचानक शयनकक्ष के स्नानघर में पानी रिसने लगा, शायद दीवार में कोई पाइप ब्लॉक हो गयी है।


कल शाम एक पुराने परिचित के पुत्र के विवाह समारोह में सम्मिलित हुए, जहाँ कई पुराने परिचित  मिले। पुराने मित्रों से मिलना कितना सुखद अनुभव होता है। आज दिन में एओएल का ट्रांसक्रिप्शन का कार्य पहली बार किया। शाम को शिवरात्रि उत्सव के कार्यक्रम में आश्रम गये। हज़ारों की भीड़ थी। ‘मैं’ को पीछे रखकर किया गया कार्य ही सेवा है, गुरूजी ने अपने प्रवचन में कहा। सुबह जून के एक मित्र परिवार सहित आए थे,  उनकी डाक्टरी पास पुत्री अगले पाँच दिन यहीं रहेगी। वह सहयोगी प्रवृत्ति रखने वाली बहुत शांत स्वभाव की है और समझदार भी। मृदुभाषी है, सहज और धीरे बोलती है। उसे एमडी की परीक्षा की तैयारी करनी है।  अगले हफ़्ते दोनों परिवारों को मिलकर हम्पी और हौस्पेट की यात्रा पर जाना है।  बहुत दिनों बाद रेलयात्रा का आनंद मिलेगा। 


सुबह-शाम बगीचों में भ्रमण करते, सूर्योदय व सूर्यास्त की तस्वीरें उतारते दिन बीत रहे हैं। शाम को बैडमिंटन खेला। नन्हे ने बगीचे के लिए सौर ऊर्जा से जलने वाली दो मशालें भेजी हैं, दिन भर में ऊर्जित हो जाती हैं, रात भर जलती हैं, उनकी रोशनी दूर से ही दिखती है। कल छोटी डाक्टर अपने घर चली जाएगी। 


आज सुबह सात बजे वे एक मित्र परिवार के साथ हौस्पेट पहुँच गये थे। समाचारों में सुना, कोलकाता में गृह मंत्री ने बयान दिया है कि सीएए का व्यर्थ ही विरोध किया जा रहा है। आस्था पर संत संचित, क्रियमाण व प्रारब्ध कर्म के बारे में बता रहे हैं। यह यात्रा क्रियमाण कर्म है, इसमें होने वाले अनुभव प्रारब्ध कहे जा सकते हैं। संचित कर्म में से कुछ कर्मों के कारण ही वे इस दुनिया में आए हैं। आज तुंगभद्रा नदी पर बना बांध देखने जाना है। कर्नाटक में कई सुंदर प्राकृतिक स्थल हैं तथा मानव की अपरिमित क्षमता से बनाए गए कई दर्शनीय स्थान भी। यहाँ लोहे का बड़ा भंडार है जिस कारण स्टील की कई फ़ैक्टरियाँ भी हैं। ज्वर,

कल सुबह यात्रा का आरंभ एक ऐसे स्थान से किया जहाँ बच्चों और युवाओं के लिए रोमांचक खेल थे, वहाँ कुछ झूले, रस्सी के पुल आदि बने थे। उन्होंने उस स्थान का भरपूर लाभ उठाया और अपनी क्षमता को पहचाना। दोपहर को एक सहकारी बैंक में गए। जिसकी स्थापना मित्र के पिता जी ने की है। शाम तक तुंगभद्रा के किनारे पहुँचे। सूर्यास्त का अनुपम दृश्य देखने बहुत सारे दर्शक आए थे। पार्क में संगीतमय फ़ौवारे लगे थे। पूरा वातावरण एक मोहक स्वप्नलोक की रचना कर रहा था। उसके बाद मित्र अपने चचेरे भाई के यहाँ ले गये। जहाँ ज्वार की रोटी के साथ मूली-टमाटर का रायता, मूँगफली व लाल मिर्च की चटनी, मेथी-पालक वाली दाल तथा अंकुरित सलाद था, सभी व्यंजन स्थानीय थे और अति स्वादिष्ट भी।मित्र की चाचीजी से  ज्वार की रोटी बनाना भी सीखा। लगभग उबलते हुए पानी में इसका आटा गूँथा जाता है। घर में दो बच्चे भी थे जो काफ़ी समय तक मोबाइल पर ही खेल रहे थे।एक ही दिन में कितने सारे अनुभव हो गये, यात्रा कितना कुछ नया सिखाती भी है। कल उन्हें बादामी गुफ़ाएँ देखने जाना है। 


Tuesday, June 15, 2021

पुलवामा का दर्द


उस दिन “शांति धाम” से लौटकर भी वहाँ की स्मृति दिन भर मन में बनी रही. वहाँ की मैनेजर एक महिला थीं, उनके पति को मधुमेह की बीमारी है, शरीर पर पूरा नियंत्रण नहीं है फिर भी काम में उनकी सहायता करते हैं. उन्होंने ही आश्रम दिखाया. एकमात्र पुत्र दुर्घटना में चल बसा, अभी कुछ समय पहले ही वे ये लोग यहाँ आये हैं, और काम समझ रहे हैं, ऐसा कहा. पुत्र होते हुए भी कुछ लोग अकेले रहने को विवश हैं शायद यही सोचकर वे अपने मन को समझा लेते होंगे। दोपहर को मोदीजी का कोकराझार में दिया भाषण सुना, जिसको सुनने के लिए चार लाख लोग आए थे, सभी बोडो भारत सरकार के साथ हुए समझौते से प्रसन्न थे. पूरे शहर में मानो उत्सव का माहौल बना हुआ था. बीती रात असम के इस शहर में लाखों दीये भी जलाए गये. मोदीजी ने कहा कि सरकार ने बोडो की समस्याओं को समझा और उनका हल निकाला. बोडो आतंकवादी संगठनों ने भी शांति का मार्ग अपना लिया है. उन्होंने कहा, सभी को बैर छोड़ना होगा, हिंसा से कभी कुछ हासिल नहीं हुआ है. उसे असम में निवास के समय बोडो आंदोलन के कारण हुई हिंसा और आए दिन के असम बंद के दिन याद हो आए। कोकराझार का नाम ही तब हिंसा का पर्याय बन गया था। आज उसका मन भी उन लोगों की ख़ुशी में शामिल था। कल दिल्ली में चुनाव है, संभवतः इस बार बीजेपी जीतेगी। कल वे आर्ट ऑफ़ लिविंग के अनुसंधान विभाग में गये, जून को बुलाया था सेवा काम के सिलसिले में। रास्ते में श्री श्री स्कूल भी देखा। बहुत सुंदर स्थान है। परसों इस सोसाइटी में स्थित एक नया पार्क देखा, वह मुख्य सड़क से काफ़ी अलग है। आज घर के सामने की सड़क बनना आरम्भ हुई है।आज आश्रम में स्थित एम्पिथिएटेर में सत्संग हुआ। गुरूजी ने पहले ध्यान कराया फिर प्रश्नों के उत्तर दिए। उन्होंने कन्नड़ में भी बोला, अब काफ़ी समझ में आने लगा है, संस्कृत के कई शब्द इसमें भी हैं। भीड़ बहुत थी। एक व्यक्ति जो मैक्सिको से आया था उसकी श्रद्धा अपार थी, उसने थैंक्स कहा और उसकी आवाज़ डबडबा गयी हो जैसे आंसुओं में। एक लड़की ने मधुर गीत गाया। छोटी बहन ने उसके और अपने एक पुराने फ़ोटो को देखकर एक पेंटिंग बना दी है, वे दिगबोई के गोल्फ़ के मैदान में थे, जब यह चित्र लिया गया था। यूएई में उसके घर को एओएल का एक सेंटर बना दिया है। वह बहुत खुश थी, सेवा से जो ख़ुशी और शक्ति मिलती है उसकी तुलना किसी अन्य ख़ुशी से नहीं की जा सकती।


कल सुबह सवा नौ बजे वे घर से निकले और रात को नौ बजे वापस आए। जून का स्वास्थ्य परीक्षण हो गया, सब सामान्य है। वह लाओत्से की पुस्तक पढ़ती रही, कुछ देर एक फ़िल्म देखती रही मोबाइल पर प्रियंका चोपड़ा की। नन्हा व सोनू एक मित्र के विवाह के संगीत में गये हैं, उन्हें वहाँ छोड़ते हुए वे घर आए। आज सुबह वे गाँव के पोस्ट ऑफ़िस गये जो किसी के घर में है, एक कमरे का डाक खाना, जिसकी ब्रांच पोस्ट मास्टर एक महिला हैं, वह अपने पति को काम सिखा रही थीं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर वह भी कुछ कर सकें।
सुबह से बड़ी भाभी का स्मरण हो रहा है। पाँच वर्ष हो गये उन्हें जग से विदा लिए हुए, उससे एक या दो वर्ष ही बड़ी रही होंगी उमर में। बेहद ख़ुशदिल और जीवंत स्वभाव वाली पर उन्हें हृदय का रोग था। भाई ने उनकी तस्वीरों से एक सुंदर वीडियो बनाया है। उसे एओएल के कोर्सेस के लिए बनी वेब साइट्स का हिंदी अनुवाद करना था, तब पता चला कितने सारे कोर्स होते हैं आश्रम में। गुरूजी कितना काम करते हैं, शायद सत्रह-अठारह घंटे तो करते ही होंगे। कल संभवतः वे ‘शिकारा’ देखने जाएँ, अगले हफ़्ते एक मित्र के पुत्र के विवाह में सम्मिलित होने जाना है। ‘आप’ को दिल्ली में बासठ सीटें मिली हैं और बीजेपी को मात्र आठ। केजरीवाल ने काफ़ी काम किया है दिल्ली में और बिजली पानी मुफ़्त, महिलाओं के लिए बस व मेट्रो में टिकट भी नहीं लगती।जनता तो तत्काल लाभ देखती है।


आज पुलवामा हमले को पूरा एक वर्ष हो गया। पिछले वर्ष आज ही के दिन जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सी आर पी एफ के क़ाफ़िले पर विस्फोटक सामग्री से भरे वाहन से टकराकर आत्मघाती हमला किया गया। इस हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैशे मोहम्मद ने ली थी।उसे याद है टीवी पर सैनिकों के शव की पंक्तियाँ थीं, सारा देश आक्रोश से भर गया था। आज भी एक कविता लिखी, दोपहर को रिकार्ड की फिर पोस्ट भी की। शाम को आश्रम में गुरूजी का एक रिकॉर्डेड साक्षात्कार देखा, बच्चों ने सुंदर गीत गाए। आश्रम में अंतर्राष्ट्रीय महिला सम्मेलन आरंभ हो गया है। दोपहर को मृदुला सिंह जी को सुना, अन्य कई वक्ता भी थीं। पैशन, डिस्पैशन व कम्पैशन पर उन्हें बोलना था।


आज दोपहर जून के परिचित दक्षिण भारतीय एक पुराने सहकर्मी मिलने आए, पूरे तेईस वर्षों के बाद वे मिले। उनके लिए भोजन बनाने में नन्हे और सोनू ने बहुत मदद की, वे लोग कल आ गये थे, शाम को जून सभी को अपने बड़े भांजे के यहाँ ले गये, काफ़ी दूर है उसका घर, दो घंटे की ड्राइव के बाद वहाँ पहुँचे, इतने समय में तो कोई दूसरे शहर ही जा सकता है,। उसे लेकर सब ‘उटा’ गये विशुद्ध स्थानीय भोजन के लिए प्रसिद्ध है यह जगह। उटा का अर्थ कन्नड़ भाषा में भोजन होता है। पिताजी से पता चला, छोटा भाई परिवार के साथ यूरोप जा रहा है अगले महीने, उस दौरान बड़े भाई उनके पास आकर रहेंगे।

Wednesday, June 9, 2021

वीर सावरकर पर फिल्म

 


आज श्री रामसुखदास जी की लिखी भगवद् गीता के अठारहवें अध्याय की व्याख्या पढ़ी। एक श्लोक में कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, जिस ज्ञान से मनुष्य पृथक-पृथक सब भूतों  में एक अविनाशी परमात्मा भाव को विभाग रहित समभाव से स्थित देखता है, उसी ज्ञान को तुझे सात्त्विक जानना चाहिए. ऐसे ही सात्विक ज्ञान को प्राप्त करना हर साधक के एकमात्र लक्ष्य होता है. जेन ऑस्टिन की पुस्तक “सेंस एंड सेंसिबिलिटी” पर बनी फ़िल्म का कुछ भाग देखा, वर्षों पहले यह पुस्तक पढ़ी थी। दोपहर को लेखन, शाम को योग, दिन इधर शुरू होता है उधर बीत जाता है। कल छोटी बहन के विवाह की वर्षगाँठ है, कुछ पंक्तियाँ लिखेगी उनके लिए। जून ने छत पर बने शेड के लिए चाइम मँगवाया है, कुछ देर में आने वाला है। 


आज छोटी बहन से बात की, कल शाम उसके यहाँ शानदार पाँच कोर्स पार्टी हुई। कुल बाइस लोग थे। दो दशक से दो वर्ष अधिक हो गये विवाह को। आज गणतंत्र दिवस पर एक कविता प्रकाशित की ब्लॉग पर। सुबह असम से एक सखी का फ़ोन आया, पुत्र का विवाह तय हो गया है, अक्तूबर में होगा। मार्च में ‘रोका’ है। परसों माँ की पुण्यतिथि है, उनके लिए भी मन में कुछ पंक्तियाँ उमड़ रही हैं।


यहाँ उनका पहला  गणतन्त्र दिवस बहुत अच्छा बीता। सुबह जल्दी उठे, आठ बजे ध्वजारोहण था। वे तैयार होकर समय से पूर्व ही पहुँच गये। सुबह ही एक छोटी सी कविता लिखी थी, उसे रिकार्ड करके व्हाट्सएप पर भेजा। पहली बार यहाँ के निवासियों से मिलना हुआ। उन्होंने अपना परिचय कराया। उसने एक कविता पढ़ी, जून को ध्वजारोहण करने का सौभाग्य मिला, उन्होंने सूट पहना था और तिरंगे का एक ब्रोच भी लगाया था कोट पर। कई लोग तो घर के वस्त्रों में ही उठकर आ गये थे। वहाँ मैसूर पाक भी बाँटा गया। लौटकर परेड देखने बैठे, पूरे मनोयोग से एक साथ पूरी परेड शायद वर्षों बाद देखी, झांकियाँ, नृत्य के कार्यक्रम, सेनानी, तथा सेना के उपकरण ! प्रधानमंत्री ने लोगों का स्वागत किया। दोपहर को नन्हा और सोनू आ गए, वे दोनों डाइटिंग कर रहे हैं, एक महीने का कोर्स है, दोनों का वजन घटा है. सबने मिलकर छत पर असम से लाया लकड़ी और बेंत का झूला लगवाया. फैमिली ट्री के लिए फोटो चुने. जून जिन्हें घर पर ही प्रिंट कर देंगे और फिर वे उन्हें फ्रेम में लगा देगें. शाम की चाय नन्हे ने बनाई, फिर सब  रॉक गार्डन में टहलने गए, घर में चल रहा सिविल का काम अगले दो हफ्ते और चलेगा. इसके बाद वे वर्टिकल गार्डन का शुभारम्भ करेंगे. कल गेस्टरूम में एसी लग रहा है, परसों बेड भी आ जायेगा, मेहमान आएं, उसके पूर्व ही उनका कमरा तैयार होना चाहिए. घर में वाटर सॉफ्टनर भी लग गया है, यहां का पानी खारा होने के कारण स्टील के नलों पर सफेद निशान बन जाते हैं. बहते हुए पानी वाली बुद्धा की जो मूर्ति पिछले हफ्ते नन्हे ने भिजवाई थी, बहुत आकर्षक है पर उसमें से पानी छलक जाता है और कमरे के फर्श भीग जाता है, उसे वापस भिजवाना पड़ेगा. 


आज शाम ‘वीर सावरकर’ पर बनी एक पुरानी फिल्म का पहला भाग देखा. देश को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारियों ने कितने कष्ट सहे हैं. आज मोदी जी व अमित शाह को कितने लोगों के अपशब्द सुनने पड़ते हैं, देश को चलाने का काम करना काँटों का ताज पहनना है. दिल्ली के चुनावों में कुछ ही समय शेष रह गया है. इस बार चुनावी मुद्दा सीएए ही है, यदि मोदी जी जीतते हैं तो उनकी साख बढ़ेगी अन्यथा भी उनका प्रभाव घट तो नहीं सकता है. भारत को उनके जैसा दृढ इच्छाशक्ति वाला प्रधानमंत्री चाहिए. योग शिक्षिका ऋषिकेश से वापस नहीं आयी है. उन्हें घर पर ही साधना का क्रम जारी रखना होगा. वह मंगल व गुरुवार को ललितासहस्रनाम व विष्णु सहस्रनाम के पाठ में वह जा सकती है, यहां महिलाओं का एक समूह उसे आयोजित करता  है. 


आज शाम को आश्रम से एक स्वयंसेवक का फोन आया और बाद में संपादक के नाम एक पत्र, जिसका हिंदी में अनुवाद करना था, शाम तक करके भेज दिया. अनुवाद का पहला सेवा कार्य करके उसे ख़ुशी हुई. अभी-अभी नन्हे का भेजा कुछ सामान आया, ऐसा सामान जिसका नाम भी नहीं सुना था, कोल्ड प्रेस जूस आदि. सावरकर की फिल्म का दूसरा भाग भी देख लिया, उनकी भविष्यवाणी सही सिद्ध हो रही है. 


आज शहर जाकर एक नई फिल्म देखी, पंगा, आजकल की लड़कियों के जीवन से जुड़ी हुई फिल्म. गुरुजी के एक ज्ञान पत्र का हिंदी अनुवाद किया.  शाम को आश्रम गए. वहीं स्थित एक भोजनालय में कल रात हुए किसी कार्यक्रम के बाद फूल बिखरे हुए थे. सजावट घर के लोग अपना सामान समेट रहे थे पर बासी फूलों की उनके लिए क्या कीमत होगी, गुलदाउदी व गेंदे के सैकड़ों फूल और मालाएं वहां बिखरी हुई थीं. गुरूजी को अष्टावक्र गीता पर बोलते हुए सुना. कितना अनोखा ज्ञान  है उनके पास, जीवन को धन्य करने वाले शब्द, ब्रह्म की सुंदर व्याख्या और उस तक पहुंचने के कितने सुंदर मार्ग ! अध्यात्म ही जीवन का सार है और परमात्मा ही जगत का सार ! 


पिछले दो दिन कुछ नहीं लिखा, कल बच्चे आये थे, देर रात वापस गए, परसों की बात याद नहीं है, और वे पिछले जन्मों को याद करने का प्रयत्न करते हैं. आज वे सोसाइटी में स्थित एक घर से अक्की रोटी लाये, अक्की रोटी यानि चावल के आटे की रोटी ! जून कल सामान्य जाँच कराने अस्पताल जाने वाले हैं, दिन भर लग जायेगा. आज पहली बार श्लोक पाठ में सम्मिलित हुई. कई बार मन में यह विचार आया है कि सही उच्चारण करके श्लोक पाठ करना सीखे, ईश्वर ने यह इच्छा पूरी करने का सुअवसर भी दे दिया है. गुरूजी भी कहते हैं, संस्कृत के श्लोक, मन्त्र आदि का उच्चारण मात्र ही ऊर्जा को ऊपर उठा देता है. आज सासु माँ की सातवीं पुण्यतिथि है, वे ‘शांति धाम’ गए जो यहां से निकट ही स्थित एक वृद्धाश्रम है. जहां तीस महिलाएं और दस पुरुष आश्रमवासी हैं. वहां का वातावरण अच्छा था. हरियाली और साफ-सफाई थी, पर ऐसी जगहों पर एक अजीब सी उदासी भी रहती है. वह भी झाँक रही थी. न जाने किन परिस्थितियों में उन्हें घर से बाहर आश्रम में आना पड़ा हो. आश्रम के लिए कुछ सामग्री देकर व कुछ समय बिताकर वे लौट आये.