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Thursday, November 28, 2019

सिंधी कोकी




रात्रि  के आठ बजने वाले हैं, आज सुबह उठने में देर हुई. उठते ही पहले की तरह मन उत्साह व शक्ति से भरा नहीं था. नींद जैसे पूरी न हुई हो, या फिर नींद पूरी नहीं है यह भाव अथवा विचार.. उसने स्वयं ही नींद को मृत्यु की निशानी मानकर सम्मान देना बन्द कर दिया था. सोने से पूर्व ध्यान करके मन को इतना होश से भर लेती थी की नींद के लिए जरूरी तमस कहीं दूर चला जाता था, निद्रा भी आवश्यक है पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए, ध्यान के समय ध्यान करना है और नींद के समय नींद लेनी है. पिछले दिनों ध्यान के बाद कुछ सुनकर सोने का क्रम बना लिया था तो मन उस पर भी चिंतन करता ही रहता होगा. खैर .. अब भी कुछ देर नहीं हुई है, जब जागो तभी सवेरा ! दिन सामान्य रहा. मौसम आजकल बहुत सुहावना है. पंछियों का कलरव दिनभर गूँजता रहता है. गंधराज की सुगन्ध भी आती होगी पर उसकी सूंघने की क्षमता कुछ घट गयी है. कोई अन्य गन्ध ही उसे घेरे रहती है, कभी लगता है यह कोई रोग है  फिर लगता है नहीं इसका अध्यात्म से ही कोई संबंध है. परमात्मा उसके साथ है, उसे सब ज्ञात है. आजकल उसे अपनी अल्पज्ञता का बहुत भान होता है, लगता है उसे कुछ भी ज्ञात नहीं है, बिलकुल अज्ञानी जान पड़ती है स्वयं को. वैसे भी जब इतना विराट आयोजन चल रहा है, पंछी बिना पढ़ाये  ही अपने गीत बना लेते हैं, ऋतुएँ बदल जाती हैं तो उसमें उसका होना भी तो शामिल है. अस्तित्त्व को जो बनाना हुआ बनाएगा, करना हुआ कराएगा. शरीर प्रकृति का अंश है और आत्मा परमात्मा का, मन समाज का दिया हुआ है. ‘मैं’ एक  भ्रम ही है. इसी देह को तुष्ट करने के सारे प्रयास होते हैं . पर देह तो जड़ है, सूक्ष्म इन्द्रियां चेतन होती हुई प्रतीत होती हैं जो मन को नचाती हैं, जैसे मन बुद्धि को नचाता है और जैसे बुद्धि स्वयं को नचाती है . स्वयं जो आत्मा के सान्निध्य में समीपता का अनुभव कर सकता था, इतर सुखों के लिए लोभ से भरा नजर आता है, गिरने की भी कोई गरिमा होनी चाहिए न, आसक्ति उसी को तो कहते हैं जो आ तो सकती है पर जा नहीं सकती. सत्य में स्थित होना है तो हर आसक्ति को जाना होगा.



आज ‘आर्ट ऑफ़ लिविंग’ कोर्स का तीसरा दिन था, सोचा था कि जायेगी पर शाम को प्रेजिडेंट का संदेश फोन पर पढ़ा, गवर्निंग बॉडी की मीटिंग बुलायी है. स्कूल में एक बच्चे को चोट लग गयी है. जब वहां गयी तो  पता चला आँख के ऊपर माथे पर दरवाजे से चोट लगी है, हाथ में हल्का फ्रैक्चर भी है, डिब्रूगढ़ ले जाना पड़ा है बच्चे को. प्रिंसिपल भी आयी थीं, दो शिकायतें भी आयी थीं दो बच्चों के माता-पिता की और से, दो अध्यापिकाओं के खिलाफ. शायद उन्होंने बच्चों पर ज्यादा कठोरता दिखाई थी. मीटिंग में और किसी विषय पर कोई बात नहीं हुई. क्लब के स्थापना दिवस पर सफाई का सेवा कार्य करने के लिए जो सुझाव व तस्वीर उसने भेजी थी, उस पर भी कोई टिप्पणी नहीं की किसी ने. जून आज गेस्टहाउस गए हैं, आजकल वह सेफ्टी विभाग भी देख रहे हैं कोई ऑडिटिंग टीम आयी है, जिसको पार्टी दी गयी है. जाने से पूर्व उन्होंने पिताजी से बात की, उन्हें जून का भेजा वेट वाइप्स का पैकेट मिल गया है.



ग्यारह बजने वाले हैं. अभी-अभी बिजली चली गयी. मौसम आज गर्म है. बाहर से एक कोयल के कूकने की आवाज आ रही है. नैनी ने बगीचे से ढेर सारी गाजरें लाकर दीं। आजकल फूलों से भी बगीचा भर हुआ है. पिटूनिया, गंधराज, श्वेत लिली, जरबेरा अपने पूरे शबाब पर हैं. माली भी इस हफ्ते रोज ही आ रहा है. उस समय जून आ गए, फिर दोपहर का भोजन, कुछ देर विश्राम, ब्लॉग लेखन, सांध्य योग कक्षा, रात्रि भोजन तथा बाद का भ्रमण, सब कुछ करने के बाद अब पुनः डायरी उठायी है, भोजन करते समय जून ने ‘कोकी’ बनाने  का वीडियो  दिखाया. किन्हीं पूनम जी ने इस सिंधी नाश्ते की अच्छी सी विधि सिखाई है. उनका कहना है पहली तारीख को मई दिवस पर दफ्तर बन्द है उसी दिन यह नाश्ता बनाएंगे. उसके बाद उन्हें शिवसागर जाना है. आज दो वर्ष पूर्व की डायरी में चेट्टीनाड की साड़ियों का जिक्र पढ़ा, जून अगले महीने फिर वहीं जाने वाले हैं. कल पुस्तकालय से दो नई किताबें लायी, एक ‘न्यू एज पेरेंटिंग’ पर है और दूसरी ‘जे पी वासवानी’ की लिखी है, जो परमात्मा के प्रति प्रेम से भरी हुई है. भक्ति और श्रद्धा जीवन में न हों तो जीवन कितने सूना-सूना रहता है. परमात्मा जो सदा ही मानव के साथ है, वह उससे दूर ही रह जाता है. वे पूरी तरह उसके प्रति समर्पित नहीं होते तो वह भी उन्हें पूरा नहीं मिलता. आज दोपहर को कितनी गहरी नींद आयी, पिछले दिनों रात की नींद गहरी नहीं थी, नींद में वे अहंकार से मुक्त हो जाते हैं और उस परम् के साथ एक हो जाते हैं. आज योग कक्षा में गुरूजी का ज्ञान सुनकर एक साधिका ने कहा, यह ज्ञान पहले मिला होता तो इतना दुःख नहीं सहना पड़ा होता.