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Friday, April 20, 2018

साबूदाने की खिचड़ी



काले रंग के कवर पर चमकदार लाल रंग से लिखा है तथा पन्नों के सिरों पर सुनहरी रेखा है जो डायरी बंद करने पर स्पष्ट दिखाई देती है. इस वर्ष की उसकी डायरी उनकी कम्पनी से मिली हुई नहीं है, बल्कि जून को एक प्राइवेट तेल कम्पनी द्वारा मिली है. सुबह क्लब की एक सदस्या का फोन आया, उसे एक प्रोजेक्ट की तस्वीरें चाहिए थीं, भेज दीं, ड्राप बॉक्स में सुरक्षित थीं. जून अगले हफ्ते तमिलनाडु जा रहे हैं और तीसरे सप्ताह में उन्हें कोलकाता जाना है, असमिया सखी के पुत्र की शादी में. अभी-अभी उससे फोन पर बात की, विवाह को लेकर कुछ चिंतित थी. जून कल दिन भर कुछ परेशान से थे, आज स्वस्थ हैं. उनमें से हरेक भिन्न है, हरेक एक अपने संस्कार हैं, दो आत्माएं जो साथ चलती हैं उन्हें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए. हर एक की अपनी यात्रा है. परमात्मा उन्हें ज्ञान, प्रेम और शक्ति देता है ताकि वे सुखपूर्वक जीवन की राह पर चल सकें. उन्हें कर्मयोगी बनना है, यानि धर्म में स्थित रहकर कर्म करना है ! जब वे किसी की आलोचना करते हैं, तब स्वयं भी दोषी हो जाते हैं, क्योंकि वह नकारात्मक ऊर्जा जो वे दूसरों को भेज रहे हैं, उनसे ही होकर जानी है, और सबसे पहले उनपर ही असर करेगी ! बाहर से बच्चों के रोने की आवाज आ रही है, सुबह वे आये थे, भजन के साथ नृत्य करने, जब वह रसोईघर में भोजन पका रही थी और देवी के भजन कैसेट द्वारा चल रहे थे. बच्चे भगवान के ज्यादा निकट होते हैं ! जून के एक सहकर्मी ने एक बड़ा सा बूमरैंग भिजवाया है, जो वे आस्ट्रलिया से लाये हैं. उसने सोचा उनकी श्रीमती जी को फोन करके धन्यवाद कहेगी. इस महीने उनके क्लब का ‘सेल’ भी लगने वाला है, मृणाल ज्योति का भी स्टाल लगेगा. वहाँ की एक अध्यापिका ने फोन करके कहा. क्लब की एक सदस्या के पुत्र का जन्मदिन है अगले ह्फ्ते, वह वहाँ मनाना चाहती है, एक अन्य सखी ने कहा, वह भी कुछ भिजवाना चाहती है. उनका जीवन कितने लोगों से जुड़ा होता है ! छोटी भाभी का जन्मदिन है आज, छोटी बहन ने व्हाट्स एप पर गाकर बधाई दी, तो भाभी ने भी गाकर जवाब दिया ! दोपहर को झपकी लगी तो स्वप्न में उसने खुद को बड़े आराम से गाते हुए देखा, सुना !   

साढ़े दस बजे हैं, यानि आधा घंटा है उसके पास खुद से बातें करने के लिए ! सुबह उठी उसके पूर्व ही कोई अलार्म की आवाज सुना गया, कैसे-कैसे अनोखे अनुभव होते हैं तंद्रा में, तारों भरा आकाश, कभी अग्नि की ज्वाला, कोई चित्र दिखेगा किसी व्यक्ति का और किसी जन्म की कोई स्मृति कौंध जाएगी. परमात्मा न जाने कितने तरीकों से अपनी उपस्थिति जताता है. उसकी करुणा अनंत है. उठकर टहलने निकले तो कोहरा था पर जनवरी के हिसाब से ठंड ज्यादा नहीं थी. नाश्ते में सांवक चावल की खीर बनाई. दोपहर के भोजन में साबूदाने की खिचड़ी, उबला कच्चा पपीता, सलाद व बथुए का रायता बना रही है. सभी कुछ पौष्टिक व स्वास्थ्यवर्धक ! कुछ देर पहले बाजार गयी, क्लब के कार्यक्रम के निमन्त्रण पत्रों में लगाने के लिए रिबन खरीदना था. बंगाली सखी को निमन्त्रण देने के लिए फोन किया. दो दिन बाद विवाह की वर्षगांठ है, उसमें वे अग्नि भी जलाएंगे, जैसे रोइंग में सीखी थी. अग्नि के दोनों तरफ नीचे ही बैठने का इंतजाम भी होगा.

शाम होने को है. आज सुबह पुनः एक स्वप्न देखा, किसी पुराने जन्म का स्वप्न था जैसे. वह एक समूह का अंग है, सभी बंगाली में प्रार्थना कर रहे हैं. स्वयं को स्पष्ट मंत्र बोलते हुए सुना, शायद रामकृष्ण परम हंस के आश्रम में थी वह, शायद उनके शिष्यों या भक्तों में से एक, तभी उनके प्रति उसके हृदय में एक गहरा आकर्षण है. टहलने गये वे तो जून को यूनिवर्स से आये नियमित संदेशों के बारे में बताया. इस वर्ष उन्हें जो लक्ष्य निर्धारित करने हैं, कदम दर कदम उन पर चलने के लिए प्रेरित करने वाले संदेश. एक अन्य डायरी में लक्ष्यों के बारे में लिख रही है, पहली बार कोई एक भीतर स्पष्ट जगा है, पहले जहाँ भीड़ थी वहाँ एक प्रकाश का केंद्र बन गया है, जो सदा ही प्रेमस्वरूप है. कल शाम एक सखी को ध्यान के बारे में बताया, ध्यान ही वह ऊर्जा है जिसके लिए गुरूजी कहते हैं, ‘अग्नि की मशाल’ बन जाओ ! प्रतिपल ध्यान ऊर्जा से वे जुड़े रह सकते हैं और उसका उपयोग श्रेष्ठ कार्यों में कर सकते हैं ! आज जून ने कहा, उनकी इस वर्ष की थीम है, ब्लिस, अच्छा लगा, उन्हें एक कार्ड भेजा है विवाह की वर्षगांठ का कार्ड, उनके लिए कविता भी लिखनी है. शाम को क्लब में ‘दिलवाले’ है, उसे प्रेस जाना है.