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Tuesday, July 26, 2016

गॉड लव्स फन


अगले दिन समुद्र तट पर कार्यक्रम था लोग फूल, मालाएं व उपहार दे रहे थे जिन्हें वह गुरूजी के हाथ से लेकर कार में रख कर आते थोड़ी देर में पुनः गुरूजी का हाथ भर जाता वह पकड़ा देते, रेत पर धोती पहन कर भागना बड़ा कठिन लग रहा था, डर था कहीं धोती में पैर न फंसे I गुरूजी को अब मंच पर जाना था, उन्हें आगे जाकर आसन बिछाना था, पर लोगों का हुजूम आगे जाने से रोक रहा था, लगभग भीड़ को धकेलते हुए जब तेजी से आगे बढ़े तो अचानक धोती खुल गयी, बहुत शर्म आयी, पर इतनी भीड़ में किसी का ध्यान नहीं था लोग गुरूजी की झलक पाने को बेताब थे जो अभी आने वाले थे, आसन बिछाने का काम किसी अन्य सहयोगी को सौंपा और किनारे पर जाकर धोती ठीक करने लगे, गुरूजी मंच पर पहुँच गए और अपनी जगह पर जाकर बैठ गये, रैम्प पर चल कर जब वह लौटे तो माइक हटा कर मुस्कुराते हुए बोले, अब सब टाइट है न ? हनी शर्म से पानी-पानी हो गये, कहाँ वह सोच रहे थे अच्छा हुआ किसी ने देखा नहीं, गुरूजी तो काफी पीछे थे, अब लगता है गुरूजी ठीक कहते हैं, God Loves Fun” I

उसी टूर की बात है, एक शाम दिन भर के थके एक हाल में जमीन पर ही अपने बैग पर सर रखकर लेट गये, सबके लिये कमरे नहीं थे, मच्छर भी काट रहे थे, माँ की याद भी आ रही थी, अपने घर का सुविधाजनक वातावरण छोड़ कर यहाँ अकेले सोये हैं, मन बहुत उदास था, सोचते-सोचते नींद आ गयी I सुबह क्या देखते हैं एक वरिष्ठ शिक्षक भी निकट ही फर्श पर सोये हैं I उनसे पूछा आपको तो सोने का स्थान मिला था फिर यहाँ कैसे? उनका जवाब सुनकर आँखों से अश्रुपात होने लगा, वे बोले आधी रात को गुरूजी का फोन आया, हनी हाल में अकेला रो रहा है, उसके पास जाओ I लगा कोई है जो माँ से भी ज्यादा ध्यान रखता है I पल भर में सारा दर्द कृतज्ञता में बदल गया I

यात्रा समाप्त हुई और वह घर लौटे, बहुत कुछ बदल चुका था, जीने में आनंद आ रहा था I पहले मन में क्रोध था, हिंसा थी, गुस्सा आने पर हाथ में पकड़ी वस्तु तक तोड़ देता था, why-why मन अब  Wow-Wow मन में बदल चुका था I प्रश्न वाचक चिन्ह ? का घुमाव सीधा होकर विस्मय बोधक ! चिन्ह में परिवर्तित हो गया था I खुशी-खुशी कॉलेज गये, कोर्स कर लिया था, गुरूजी के साथ रहे थे मन एक अद्भुत आनंद व शक्ति का अनुभव कर रहा था I पहले ही दिन कुछ लड़के पकड़ कर रैगिंग के लिये ले गए, मन में जरा भी डर नही था, उन्होंने व्यर्थ के सवाल पूछने शुरू किये, व्यर्थ के काम करने को कहे, मना किया तो दस-बारह लड़कों ने पकड़ लिया और उनके नेता ने लोहे की एक चेन निकाल ली I गुरूजी ने कहा था कि यदि किसी के मन, वाणी और भाव से हिंसा विलीन हो जाती है तो उसके सामने हिंसक प्राणी भी हिंसा त्याग देता है I जरा भी भय नहीं लग रहा था, भीतर गुरूजी के वचनों के प्रति विश्वास था, अचानक उस लड़के ने मारने के लिये उठाया हाथ नीचे कर लिया, कॅालर से पकड़ कर धक्का दिया और वे सब चले गये I उस दिन पता चला कि सबसे बड़ी ताकत क्या है? कि वे ज्यादा शक्तिशाली थे या भीतर का प्रेम व आनंद !  

Saturday, December 26, 2015

जिंजर ब्रेड


सुबह के साढ़े नौ हुए हैं, छोटी बहन, उसके पतिदेव अपनी-अपनी ड्यूटी पर चले गये हैं. जून मस्कट के लिए रवाना हो गये हैं, उनकी फ्लाईट साढ़े आठ बजे की थी, अब वे हवाई जहाज में बैठे होंगे. दोनों भांजियां घर पर हैं तथा बड़ी बहन की बेटी व दामाद भी. कल सुबह तीन बजे ही वे उठ गये थे, साढ़े पांच से पहले से ही एअरपोर्ट पहुंच गये, पर फ्लाईट सवा नौ बजे चली, साढ़े तीन घंटे में पहुंचे. सभी लेने आये थे. वापस घर आते-आते दो बजे, खाना खाते सवा तीन, कुछ देर आराम किया, शाम को घूमने निकले. पहले समुन्दर के किनारे, फिर मार्किट में, जहाँ सड़क के किनारे टहलने के लिए सुंदर पेवमेंट बने हैं. समुद्र का पानी पीछे लाकर झील का आकार दिया गया है, जिसमें पंक्तिबद्ध रोशनियाँ भी झिलमिला रही थीं. एक होटल के बाहर सड़क किनारे अरबियन नृत्य चल रहा था, जिसमें परंपरागत पोषाक पहने युवा लोकधुन पर नाच रहे थे. कुर्सियां पड़ी थीं तथा एक मेज पर फलों के ढेर ! वहाँ से वे मॉल गये, जहाँ थोड़ी-बहुत खरीदारी की. बहन ने घर का सामान लिया, बच्चों ने डीवीडी लिए. छोटी बहन का एक लिफाफा जो वह अस्पताल से लायी थी, जिसमें कुछ रूपये थे, कहीं गुम गया है, कल शाम को खोजती रही पर नहीं मिला, अस्पताल में भी नहीं है, अभी फोन पर उसने बताया. नुकसान तो हुआ है पर किसने ऐसा किया होगा ? वह परेशान है, लेकिन असावधानी तो उसी ने की, वे  सभी अपनी ही गलतियों की सजा पाते हैं. यहाँ रोटी को खबूस कहते हैं तथा इस जगह का नाम खुजाम है.

आज यहाँ उनका तीसरा दिन है. जून मस्कट में हैं, बहन आज घर पर है उसके जो पैसे उस दिन खो गये थे, मिल गये. सुबह उन्होंने ‘क्रिया’ की, फिर नाश्ते में दाल का परांठा खाया. दोनों बच्चे पिता के साथ क्रिसमस के लिए जिंजर ब्रेड से सजावट करने होटल गये हैं. बहन ने बताया पूरे यूएई में रसल खैमा को भुतहा राज्य मानते हैं. उनके घर में भी जिन-भूत हो सकते हैं. कितने जानवर उनके घर में आये और मर गये शायद भूतों की वजह से. कुत्ता, बकरी, मुर्गा, बिल्ली तथा चिड़िया आये कुछ समय रहे फिर..रसल खैमा छोटा सा राज्य है, यहाँ से दुबई जाने के रास्ते में सबसे पहले उम-अल-क्वेन आएगा, फिर अजमान व शारजाह भी आयेंगे. शाम को वे समुद्र तट पर गये. सागर की लहरें, रंग-बिरंगी सीपियाँ तथा डूबता हुआ सूर्य सभी अद्भुत थे. वे देर तक पानी में नहाते रहे. वापसी में कार के पहिये रेत में धंस गये, कुछ लोगों ने उसे निकालने में मदद की. सागर किनारे पर एक झोंपड़ी थी जो बंद पड़ी थी, उसके पीछे पत्थरों की चारदीवारी थी, एक परिवार जिसकी सफाई करके, कुछ बेंच रखके तथा आग जलाने का प्रबंध करके गया. कल यूएइ का राष्ट्रीय दिवस था, शायद शाम को वे वहाँ पार्टी के लिए पुनः आने वाले थे. बहन का धोबी आया तो ढेर सारी सब्जियां लाया, लौकी, खीरे, तोरी आदि, वह खुद उगाता है तथा मुफ्त में बाँट देता है. उसने उनतीस कपड़े प्रेस किये, इसी तरह एक दिन सफाई कर्मचारी आया था. माली शायद रोज आता है. वह पाकिस्तानी है, शेष दोनों मलयाली हैं.

आज दोनों बच्चे और वह घर पर हैं. उसने लंच में रोटी व चावल बनाये, शेष बहन जाने से पहले बना कर रख गयी थी. बर्तन धोते समय उससे एक गिलास टूट गया. छोटी भांजी ने आज दो पेंटिग्स बनायीं, वह गाना भी सीखती है. हर शनिवार को आधे घंटे की क्लास होती है. बड़ी आज सुबह से अपनी पढ़ाई में लगी है. हाँ, एक बार उसने कम्प्यूटर पर फोटोग्राफ्स दिखाए. यहाँ नूना को समय का तथा दिन का भी बोध नहीं रहता. आज कौन सा दिन है यह याद करना पड़ता है, कल जून से बात हुई. उनके एक मित्र उन्हें वीजा प्रिंट करने में मदद करेंगे. ईश्वर कोई न कोई सहायक भेज ही देता है. बहन ने उसे सत्य साईं बाबा के विचारों पर आधारित उनके दो भक्तों द्वारा लिखी गई एक पुस्तक पढ़ने को दी है, yoga of action, जिसमें कर्मयोग के द्वारा इश्वर प्राप्ति की साधना बताई गयी है. वह भी वही बोलते हैं जो सद्गुरू कहते हैं, ‘सत्य एक है’. बहन सेवा के द्वारा परमात्मा को जानने का प्रयत्न कर रही है, परमात्मा की कृपा उस पर सदा से ही है. वे अपने जीवन को साधना, सेवा, सत्संग तथा स्वाध्याय की फूलों से महका सकते हैं. यहाँ आने से पहले वे घर गये थे, पिताजी, बड़ी बहन, छोटा भाई, मंझला भाई सभी के अध्यात्मिक विचार सुने तथा अब बहन को साधिका के रूप में देखकर अच्छा लग रहा है. बड़े भाई से अभी इस बारे में बात नहीं हुई है. ईश्वर सबके साथ है. यहाँ से भी पिताजी, नन्हा, बड़ी बहन, भैया व भतीजी सभी से उन्होंने बात की. शाम होने को है, बहन घर आने वाली है, वह एक फैक्ट्री के अस्पताल में काम करती है, एक हफ्ते के लिए किसी प्राइवेट क्लिनिक में गयी थी, जहाँ उसके सीनियर ने अपना प्राइवेट क्लिनिक खोला था. बड़ा घर है, घर सामान से भरा है. बच्चे समझदार और बड़े प्यारे हैं. कुल मिलाकर एक खुशहाल परिवार है. बहन अहंकार को अपने काम में बाधा नहीं बनने देती. मन की समता बनाये रखने का प्रयत्न भी करती है. गुरु का पदार्पण जीवन में हो चुका है. आज वे लोग माधुरी दीक्षित की नई  फिल्म देखने जाने वाले हैं.