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Tuesday, July 7, 2020

समाधि पाद


दोपहर के तीन बजे हैं. टीवी पर नारी शक्ति पर कार्यक्रम आ रहा है. कैप्टन क्षमता वाजपेयी तीस वर्ष से जहाज उड़ा रही हैं. एक अन्य महिला विश्व की सात ऊंची चोटियों में से छह चोटियाँ फतह कर चुकी हैं. कल महिला दिवस था. ब्लॉग्स पर नारी शक्ति पर लिखा, कुछ पढ़ा भी. वाकई नारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है. एक महिला उत्तर-पूर्व से आयी  हैं जिन्होंने वहां की महिलाओं के लिए सहायता केंद्र बनाया है. एक जन-प्रतिनिधि हैं, एक अन्य दिव्यांग हैं. वह अन्य दिव्यांग लोगों की मदद भी करती हैं. कल सुबह एक रिजॉर्ट जाना है, जहां भूत पूर्व अध्यक्षा के लिए पिकनिक कम लंच है. ज्यादा दूर नहीं है, बीस-बाइस महिलाएं आने वाली हैं. प्रकृति के सान्निध्य में भोजन और गीत-संगीत का कार्यक्रम होगा. 

आज दिन भर व्यस्तता बनी रही. सुबह चार बजे वे उठे थे और सीधे रात को नौ बजे ही विश्राम का समय मिला. सुबह नौ बजे ही रिजॉर्ट पहुँचना था. दोपहर बाद लौटे. कार्यक्रम अच्छा रहा. सन्डे योग कक्षा के बच्चे प्रतीक्षारत थे. शाम को एक महिला मृणाल ज्योति के लिए कुछ सामान लेकर आ गयी. उनका तबादला हो गया है. लोग जब घर बदलते हैं तो काफी सामान छोड़ना ही पड़ता है. उसने भी अभी से हर हफ्ते कुछ न कुछ देने का क्रम आरंभ कर दिया है. पुराणी वाशिंग मशीन और छोटा टीवी लेकर जाने वाली है. वर्षों पहले जब विवाह के बाद नया घर बसाया था तो हर माह वे कुछ न कुछ सामान खरीदते थे, अब फिर एक बार नया घर बसाना होगा, नन्हे का कहना है कि उस घर में सब कुछ नया ही हो, इतने वर्षों तक जो सामान इस्तेमाल करते आये हैं पुराना हो ही गया है, काफी कुछ छोड़ा जा सकता है. 

कल रात सोने से पूर्व उसने पतंजलि का ‘समाधि पाद’  सुना. मन समाहित हो गया था. सुबह उठने से पूर्व अनुभव हुआ जैसे परमात्मा कुछ संदेश दे रहा है. स्वप्न में वह छिपा हुआ नहीं रहता, वर्षों पूर्व उसने ही नूना की कलम से लिखवाया था. वह हजार हाथों वाला है और हजार नेत्रों वाला भी. उससे कुछ भी छिपा नहीं है. एक जगह देखा उसके भोजन में एक बाल है जो लाख निकालने पर भी नहीं निकल रहा है. यह उस व्यसन की ओर इशारा है जो उसके आहार को दूषित कर रहा है. एक स्वप्न में दाँत में दर्द होते हुए देखा, सम्भवतः यह भविष्य के लिए चेतावनी थी. एक जगह माइक लगाकर  (एओएल में) लोगों को भाषण देते हुए सुना पर लोग अपनी ही बातों में लगे थे. एक परिचिता को भी देखा एक स्वप्न में, वह दूर से मिलने आती है और गले लगकर रोने लगती है. एक साधक को सुख का प्रलोभन आत्मा के पद से नीचे उतार देता है. जो स्वयं से जुड़ना चाहता है उसे संसार से सुख की कामना का त्याग करना होगा, इसके परिणाम में दुःख ही मिलता है. हर सुख एक आभास मात्र ही है, जो अपने पीछे दुःख की एक लम्बी श्रृंखला छिपाये है. परमात्मा ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा है. वह हर जीव को, हर आत्मा को अनेक उपायों से संदेश भेजता है. तितलियों, कीट-पतंगों के माध्यम से, पालतू पशुओं के माध्यम से बादल व फूलों और स्वप्नों के माध्यम से वह न जाने कितने संदेश उसे भेज चुका है. वह उसे स्वाधीन और सुखी  देखना चाहता है. वह उनसे प्रेम करता है. उसके सिवाय इस जग में आत्मा का सुहृद कौन हो सकता है ? उसकी वाणी को अनसुना नहीं किया जा सकता, वह स्पष्ट वाणी बोलता है. 

उस डायरी में पढ़ा, एक निकट संबन्धी के बारे में लिखा था- वह स्वस्थ नहीं है. इसके कुछ  कारण जो ऊपर से दिखाई पड़ते हैं, उसे भी ज्ञात होंगे पर उन्हें दूर करने का उसने सही रूप में कोई प्रयत्न नहीं किया. इसमें उसकी भूल है. वह प्रसन्नचित्त रहकर अपने आपको चुस्तदुरुस्त व स्वच्छ रखकर अपने को यकीन दिलाये कि वह स्वस्थ है, उसे कुछ नहीं हुआ तो बात बन सकती है, पर इसके बजाय वह सुबह सात बजे बिस्तर छोड़ता है, घूमने नहीं जाता. जल्दी से नहाकर चाय-नाश्ता करता है फिर कमरे में बैठ जाता है, किताबें पढ़ता है, बातें करता है, रेडियो सुनता है. वह हर समय तैयार नहीं रहता, कोई काम कहे तो उसे कुछ देर लगती है उठने में. उसे अपना व्यवहार, अपनी रुचियाँ कुछ बदलनी होंगी. जासूसी नॉवल पढ़ने छोड़ने होंगे. साथ ही उपदेशात्मक पुस्तकें भी छोड़ देनी चाहिए. उसे सिर्फ पत्रिकाएँ पढ़नी चाहियें हल्की-फुलकी मगर स्तरीय. उसे बड़ों का विश्वास जीतना होगा, जिसे वह खो चुका है. वे जो कहें उसे करना होगा तभी वह उनका प्रिय बन सकता है. उसे अपने को खुश रखना सीखना  होगा. 

ये सारी बातें उससे कभी नहीं कहीं, पर विचार सिर्फ बोलकर ही तो प्रेषित नहीं किये जाते ! 

Thursday, August 1, 2019

रसगुल्ले और समोसे



आज 'विश्व महिला दिवस' है, अभी कुछ ही देर में वे इसे मनाने भी वाले हैं. आस-पास की नैनी क्वाटर्स की महिलाओं को बुलाया है उसने एक कप चाय के लिए और कुछ बातें करने के लिए, पर उनके पास उसके लिए भी समय कहाँ है ? परिवार व बच्चे उनकी पहली प्राथमिकता हैं, अपने लिए वक्त बचाना उन्होंने कभी जाना ही नहीं. तीन बजे बुलाया था पर सवा तीन होने वाले हैं, अभी तो कोई नहीं आई हैं. जून के भेजे समोसे ठंडे हो रहे हैं, उन्होंने रसगुल्ले भी भेजे हैं. सुबह उन्होंने व्हाट्स एप पर सौ संदेश भेजे 'महिला दिवस' पर, उनका हृदय विस्तृत हो रहा है, समाज और राष्ट्र की सभी इकाइयां उसमें शामिल हो रही हैं. जीवन को सहजता से जीना है, उसको सम्पूर्णता के साथ अपनाना है. जीवन को स्नेह भरी दृष्टि से देखें तो विष भी अमृत हो जाता है ! वह लिख ही रही थी कि वे सब आ गयीं, उन्होंने कुछ देर भजन गाये फिर कुछ बातचीत की, नैनी ने सबके लिए चाय बना दी फिर हँसते-हँसते वे सब खाने लगीं. बाद में उसने पूछा, आज कौन सा दिन है, उन्हें महिला दिवस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. लेकिन एक ने जब बताया उसका पति नशा करके आता है और वह डर जाती है, तो बाकी सब उसे समझाने लगीं. डरने की जगह उसे हिम्मत से काम लेना चाहिए. उसने कहा यदि वे नियमित रूप से कुछ देर योग-प्राणायाम करें तो भीतर की शक्ति जगा सकती हैं. पर वह जानती है ऐसा कर पाना उनके लिए सम्भव नहीं है. हफ्ते में दो बार उन्हें वह बुलाती है पर नियम से तो एक या दो ही आती हैं.

रात्रि के साढ़े आठ बजे हैं. टीवी पर हास्य धारावाहिक आ रहा है. अभी कुछ देर पहले वे अस्पताल से आये. उस सखी की बिटिया को इंजेक्शन लगना था, उसे थोड़ा सा आश्चर्य भी हुआ दस-बारह वर्ष की बालिका को इंजेक्शन लगवाने से इतना डर लगता है कि तीन लोग उसे संभालने के लिए चाहिये. बच्चों के प्रति ज्यादा मोह से माता-पिता ही उन्हें कमजोर बना देते हैं. ऐसी सोच जगी ही थी कि स्मरण आ गया उसे दोष दृष्टि रखने के अपने पुराने संस्कार का एक और बार अनुभव हुआ, इसका अर्थ हुआ यदि कोई सचेत न रहे तो मन किसी भी क्षण पुराने रंग-ढंग अपना लेता है.

आज सुबह नींद काफी पहले खुल गयी थी पर योग निद्रा करने लगी और फिर स्वप्न कब आरंभ हो गया पता ही नहीं चला. उठने से पूर्व स्वप्न में अज्ञेय की कोई किताब पढ़ रही थी. सफेद पृष्ठ पर काले अक्षर बिलकुल स्पष्ट थे और किसी-किसी वाक्य को दोहराया भी, ताकि बाद में भी याद रहे, यानि उस समय भी यह अनुभव था कि यह स्वप्न जैसा कुछ है, पर अब कुछ भी याद नहीं है. परमात्मा कितने-कितने ढंग से अपनी उपस्थिति का समाचार देता है. कल रात्रि मन कुछ क्षणों के लिए पुरानी व्यवस्था में लौट गया था, पर आज मन स्वच्छ है. वर्षा के बाद धुले आकश सा निर्मल ! भीतर जो चट्टान जैसी स्थिरता है उसके रहते हुए भी ऐसा होता है, इस पर आश्चर्य ही करना होगा. इसका कारण यही है कि उस क्षण वह परमात्मा को भुला देती है, पर वह इतना कृपालु है और सुहृदयी है कि बिना कोई दोष देखे संदेशे भेजता ही रहता है. वे सर्व शक्तिमान परमात्मा की सन्तान हैं, उनके भीतर ज्ञान, बल और प्रेम का अभाव हो ही कैसे सकता है ? सुख के लिए वे जगत पर निर्भर रहे तो उनमें और देहाभिमानियों में क्या अंतर रहा? उसे उस परम की ध्रुवा स्मृति बनाये रखनी है, सुख व आंनद का स्रोत वह परमात्मा उनका अपना है, वह अनंत है, प्रेम व शांति का सागर है ! वह सहज ही प्राप्य है, उसे अपने संस्कारों पर विजय पानी ही होगी, यह केवल कपोल कल्पना बन कर न रह जाये, हर बार की तरह उसका संकल्प टूट न जाये इसका पूरा ख्याल रखना  है.