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Wednesday, February 26, 2014

शिवरात्रि का अवकाश


कल ही वह दिन था, जिसके लिए इतने दिन से तैयारी चल रही थी, वह लगभग सारा दिन व्यस्त रही, सुबह का थोड़ा वक्त, दोपहर के दो घंटे और पूरी शाम वहीं बीती, बल्कि रात्रि को लौटने में उन्हें आधी रात हो गयी थी. नन्हा गहरी नींद में सो रहा था. उसने असम सिल्क की साड़ी पहनी और एक कमरे की चाबी भी उसे दी गयी थी, जिसकी देखभाल उसे करनी थी. बहुत सी समर्पित सदस्याएं थीं जो बड़ी लगन से सब काम कर रही थीं. आज फिर वह क्लब गयी और एक सखी से मंगाई लकड़ी की बड़ी मेज उनके यहाँ वापस भिजवाने का प्रबंध किया. शाम को वहाँ बधाई देने जाना भी है, उन्होंने एक पुरस्कार जीता है, तीन दिनों के लिए दो बड़ों और दो बच्चों के लिए मुफ्त गोवा यात्रा का पुरस्कार.

आज उसे लग रहा है, जीवन एक वफादार दोस्त की तरह हर पल साथ निभाता है. खुशियाँ देता है, उन्हें महसूसने की सलाहियत भी और कितने नये किस्से कहानियाँ गढ़कर मन बहलाता है उसका असीम-अतीव अनोखा स्नेह भाव, जो वह अंतर में भर देता है, कोमल भावनाएं, सिहरन और शांत हृदय की हिलोरें, ऊपर उठने का मौका देती हैं. वह सम्भालता है अपने दोनों हाथों से संवारता है आज और कल को, वह मौका देता है दानी बनने का और उसकी खुद की झोली में तो न जाने कितने कितने उपहार भरे हैं, नीले आकाश पर टंके सितारे, हरी धरती पर चमकते मोती, कोई अनोखा गीत और संगीत !

जीवन प्रतिपल बदलता रहता है, यह नदी की उस धारा के समान है जिसमें गति है, स्पंदन है, गहराइयों और अनंत की चाह है न कि उस तालाब के पानी की तरह जो अपनी सीमाओं में बंधा हुआ है.

आज नन्हे ने कहा परीक्षाएं आने वाली हैं, वह घर में ज्यादा पढ़ सकता है, सो स्कूल नहीं जायेगा, पर उस समय भूल ही गया कि आज स्कूल में निबंध प्रतियोगिता होनी थी. उसकी छात्रा का कोर्स भी पूरा हो गया है. आज संगीत कक्षा उनके घर में होगी. सुबह जून के जाने के बाद समाचार सुने, वही चुनाव सम्बन्धी और उत्तर प्रदेश के संवैधानिक संकट के समाचार, फिर zee पर सुधांशु जी महाराज का प्रवचन आ रहा था, बहुत अच्छी बातें कहीं उन्होंने, अच्छे भाव का मन में प्रस्फुरण होना कभी-कभी ही होता है सो ‘शुभस्य शीघ्रम’ का पालन करते हुए उस कार्य का सम्पादन कर ही लेना चाहिए. सात्विक लहरें मन में यदा-कदा ही उठती हैं जैसे वसंत ऋतु में वाटिका से उठने वाली सुवासित पवन ! पौधों को सहेज रही थी कि जून आ गये, आज उन्हें जल्दी जाना था. कल फोन से घर पर बात की, सासु माँ की आवाज ख़ुशी से भरी हुई थी, वहाँ इतनी परेशानियों को सहकर भी वे लोग खुश हैं, यह इन्सान की जिजीविषा का ही तो परिणाम है, मानव मन की विचित्रता पर ही तो आज प्रवचन में कहा गया - यह ऊंचा उठे तो आकाश की ऊँचाइयां भी कम हैं और गिरने को आये तो पाताल की गहराई भी कम पड़ेगी.

कल सुबह जब सारे कार्य हो गये तो जून की बात याद आयी कि वह घर पर पत्र लिख दे जिसमें सासु माँ को होली पर साड़ी खरीदने के लिए कहना था, क्योंकि जो पार्सल उन्होंने भेजा था, खुला हुआ मिला और साड़ी गायब थी. उसने एक के बजाय दोनों घरों पर पत्र लिखे. फिर कुछ देर टीवी पर ‘हम पांच’ देखा, पूरी टीम बाँध लेती है और एक बार देखना शुरू कर दें तो पूरा देखे बिना मन नहीं मानता. जून आज सुबह तीन दिनों के लिए ‘शिकोनी’ गये हैं, इस समय जोरहाट पहुंचने वाले होंगे, नन्हा आज घर पर है, आज शिवरात्रि का अवकाश है. मौसम ठंडा है, बादलों की वजह से पूरे घर में बल्ब जल रहे हैं. माँ होतीं तो पीछे आंगन में या बरामदे में चारपाई पर बैठतीं कि सुबह हो गयी है इसका पता तो चले.

जून के बिना यह शाम कितनी सूनी-सूनी लग रही है, दिल है कि बैठा जा रहा है, हाथ-पाँव ठंडे हो रहे हैं और आँखें पता नहीं क्या तलाश रही हैं, मालूम नहीं था कि जून के बिना वक्त काटना इस कदर भारी होगा, दिन भर तो ठीक ही रहा, नन्हे को पढ़ाने में कुछ टीवी देखने में गुजर गया पर शाम...लम्बी हो गयी है, फोन भी नहीं मिला, यूँ शाम को उन्होंने फोन किया था, नम्बर भी दिया था पर अभी करने पर नहीं मिला, कल सुबह बैक डोर पड़ोसिन के यहाँ जाना है, शाम को मीटिंग है, सो बीत जाएगी, वैसे, कमेटी की मीटिंग में जाने का उत्साह दिनोंदिन कम होता जा रहा है. अब उसे कोई ऐसा कार्य ढूँढना चाहिए जिसमें एक घंटा आराम से बीत जाये और याद न सताये.


Saturday, August 10, 2013

अंगूठे का दर्द


आज वर्षा के कारण ठंड बढ़ गयी है कल शाम वे एक मित्र की शादी की सालगिरह की पार्टी में गये. उसने वही ड्रेस पहनी थी जो जून लाये थे, सभी ने तारीफ की. खाना अच्छा था, गृहणी ने घर सलीके से सजाया था, शांत स्वभाव की है, और धीरे-धीरे बोलती है, क्या जीवन की इन छोटी-छोटी खुशियों को महसूस करना गलत हो सकता है, कभी-कभी ऐसा भी होता है. जब कोई इन छोटी-छोटी बातों को याद करता है, क्या ये पल उसने व्यर्थ गंवाए ऐसा कहना या मानना ठीक है? ईश्वर ने यह सुंदर संसार और महसूस करने वाला मन दिया है, किसी को पीड़ित न करते हुए बिना किसी राग-द्वेष के सुखी रहना और हो सके तो दूसरों को सुखी करना क्या इतना पर्याप्त नहीं है ? संसार में रहकर उसमें लिप्त हुए बिना सांसारिक कर्त्तव्यों का पालन करते जाना और जो मार्ग में आये उसे अपने हित में साधते जाना..नैतिकता के मूल्यों को समझ कर उन्हें धारण करना और सुख-दुःख दोनों में समभाव बनाये रखना यही पूजा इस जन्म में उसके लिए पर्याप्त है. आध्यात्मिकता का अर्थ अच्छाई पर विश्वास, नैतिकता पर पूर्ण श्रद्धा और संयमित जीवन चर्या ही है.

वही कल का वक्त है, पर मौसम कल जैसा नहीं है, धूप निकल आई है. रातभर की मूसलाधार वर्षा के कारण बढ़ गयी ठंड से राहत दिलाती फरवरी की धूप भली लग रही है. ‘जागरण’ आजकल नहीं देख पा रही है, आजकल प्रवचन की जगह उसमें कोई साक्षात्कार दिखाया जा रहा है. कल उसका टेबल टेनिस का मैच है, उसे यकीन है कोई पुरस्कार तो जीतेगी. अभी कुछ देर पहले एक १८-२० साल का लड़का सफेद धोती पहन कर आया श्राद्ध के लिए पैसे मांग रहा होगा, वह उसकी ड्रेस देखकर ही समझ गयी थी, भीख मांगने का यह बहुत बेहूदा तरीका है.

आज भी पीटीवी पर ‘आधा चाँद’ देखा सुना, पर आज की शायरा में वह बात नहीं थी, सामान्य सी शायरी थी, पर उन्हें अपने पर यकीन था और जिसे खुद पर यकीन होता है वह शायर चाहे अच्छा न हो इन्सान जरुर अच्छा हो सकता है. वह जापानी सिखा चुकी हैं और आज भी सर्विस करती हैं, फिर भी इतना वक्त निकल लेती हैं की मुशायरों में शिरकत कर सकें और इधर वह है कि अपने इस छोटे से घर को ही दुनिया मानकर खुश रहती है. शायद इस जन्म में यही उसकी दुनिया है अपने चंद टूटे-फूटे अश्यार के साथ.

कल मैच में उसने एक मैच जीता पर दो हारे, रात भर इसी के सपने आते रहे. कई चीजों का असर जानबूझ कर न लिया जाये तो भी गहरा पड़ता है, सुबह उठते ही जागरण में ‘श्री सिंघल’ के विचार सुने, क्वांटम थ्योरी के अनुसार शरीर और आत्मा के संबंध को समझाया फिर प्रकृति और पुरुष अर्थात ईश्वर के सम्बन्ध को. प्रकृति में कुछ भी कारण रहित नहीं होता पर ईश्वर के विधान में कारण खोजना व्यर्थ है. इसी तरह सुख, शांति, प्रेम और इसी तरह की भावनाएं देने से बढ़ती हैं तथा दुःख, अपमान और इसी तरह की भावनाएं लेने से. प्रश्नकर्ता ने उनसे पूछा था, सदा सुख का अनुभव हो तथा दुःख से मुक्ति, ऐसा क्या सम्भव है ? सांसारिक वस्तुओं का संग्रह करने से वे बढ़ती हैं पर आत्मिक वस्तुओं को बांटने से वे बढ़ती हैं, इस विरोधाभास को समझ कर उसे  ग्रहण कर लेने पर दुःख की प्रतीति नहीं होगी और सुख का अभाव नहीं होगा. आज गीता के चौदहवें अध्याय में सत्व, रज और तम गुणों के बारे में पढ़ा, कल शाम को तम गुण का असर ज्यादा हो गया था जो जून के मन को अपनी बेवजह की तकरार से चोट पहुंचाई, वह किस तरह चुप हो गये थे जैसे कोई फूल मुरझा गया हो पर आज वह जरुर खुश होंगे क्योंकि उनकी पसंद के भोजन ने उनके दिल को पहले सा भर दिया होगा. वह उसके दिल की बातें खूब समझते हैं बस कहने का अंदाज अलग है, उसे भी तो इतने सालों में समझ जाना चाहिए कि ही इज मैन ऑफ़ एक्शन नोट वर्ड्स, उसने मन ही मन उनसे क्षमा मांगी. आज उसने छह पत्र लिखे और होली के लिए सफाई भी शुरू की. नन्हा स्कूल से आ गया है और उसके toenail में बहुत दर्द है फिर भी फोन करके अपने मित्र को बैडमिन्टन खेलने के लिए बुलाया है.


Friday, June 7, 2013

बाम्बे-कुची कुची


फिर एक अन्तराल, पिछले हफ्ते यात्रा के कारण नहीं लिख सकी, इन्टरव्यू सामान्य रहा, उसने जैसा सोचा था वैसा ही. उसके बाद मन ही नहीं हुआ. उसने बहुत सोचा बाद में कि खुद में विश्वास बढ़ाने के लिए क्या-क्या करना होगा, पर एक सूक्ति पढकर मुस्करा दी.

कल उसने नौ पत्र लिखे, संबंधियों और मित्रों को. नन्हे ने आज घर के काम में उसकी सहायता की, क्लब मीट खत्म हो गयी है और वह सारी सुबह  घर पर था. शाम को पुरस्कार वितरण समारोह है, उन्हें क्लब जाना है.

आज मौसम सुहाना है, नन्हा अपने किसी मित्र के यहाँ गया है, और यही वक्त है डायरी खोलने का, यूँ पिछले दिनों भी खोली पर हर मिनट पर होने वाले नन्हे के सवालों के कारण दो लाइनों से ज्यादा नहीं लिख सकी. पिछले हफ्ते वे तिनसुकिया गये, नन्हे को क्लब में छोडकर. उसे हल्का गुलाबी टॉप मिल ही गया और काले कपड़े पर क्रीम कलर के फूलों वाला स्कर्ट भी.  शनिवार को क्लब गये बच्चों ने बाम्बे फिल्म के ‘कुची कुची’ गाने पर नृत्य किया था. रविवार को गर्मी बहुत थी पर परसों से वर्षा हो रही है. इतवार की सुबह से उसने गुलदाउदी की कटिंग्स लगाने का कार्य शुरू किया है, उसकी बंगाली सखी नहीं है पर उसके दिए फूलों के पौधे तो हैं. बड़ी ननद का पत्र आया है उन्हें पार्सल मिल गया है, स्वेटर पसंद आये लिखा है. एक पत्र बुआ जी का भी आया. परसों उसकी पुरानी पड़ोसिन का जन्मदिन था, उन्होंने यहीं मनाया उसका जन्मदिन, उन्हें अच्छा लगा होगा.

Feeling great in green top and white creased pant. Weather is also pleasant and mind is in tune with it. Last night she felt some uneasiness and jun woke up. She was in trans or something like that maybe it was due to the book she was reading in the evening. But soon she slept and dream t of relatives, bua and chichi were angry with her,  father was sad and looking indifferent. Anyway.. night has gone and morn has come with all of its beauty. So many days are passed without writing a poem, today she thought, mood is poetic …but…to write is not that easy. Yesterday she translated one page of GGM's address to Oil Indian. She thought rather wished it might be up to the mark. Earlier whenever she did the translation work, jun had helped her. Yesterday one good thing also happened, their Assamese teacher came and they studied more grammar. Then she rang her asamiya friend, but her husband answered her questions, he was slow on phone otherwise they cannot understand him, he speaks very fast.

Yesterday when jun brought  club bulletin, it was there, her add for tuition in clear letters. Today morning she got one call from one parent, for his daughter of class four. She referred him to her friend, then she called to ask, when did she decided to give tuition. Nanha came back late after playing tennis with him friends, There is no more coaching now.

Today weather is clear , no more clouds after  4-5 days of heavy rain. Last night and today morning news she heard about  grim condition of flood in Assam. They are safe here in this small town. Last night they saw one Hindi film after so many months. Earlier in the evening there was no current and they were invited by one family to have have dinner with them, they were so kind but she could not properly thank them for their love and helping hand.