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Thursday, April 9, 2026

बैनरघट्टा नेचर कैंप’

बैनरघट्टा नेचर कैंप


आज शाम वे दोनों आश्रम गये थे। वहाँ संगीतमय फ़ौवारे चल रहे थे, और लड़ियों के प्रकाश से विशालाक्षी मंटप सजा हुआ था। वीडियो कॉल पर पापाजी को आश्रम के दर्शन कराये। जून ने अपने एक मित्र को भी आश्रम का सौंदर्य दिखाया। कुछ देर वहाँ के दिव्य वातावरण में बैठे रहे। स्टोर से कुछ किताबें और उपहार ख़रीदे। दिवाली के लिए घी के दीपक भी लिए। नूना दोपहर को तीन घंटे अनुलेखन कार्य करती रही। पिछवाड़े के बगीचे में पपीते का पेड़ जून ने कटवा दिया है, उसके स्थान पर दूसरा पेड़ लगा दिया है। सौ से अधिक फल दिये होंगे इस एक वृक्ष ने, उन्होंने कई लोगों को वितरित भी किए। भारत ने सौ करोड़ वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बना लिया है।


पापाजी से बात हुई तो उन्होंने कहा, दुनिया में कई लोग ठगने के लिए बैठे हैं, हरेक को सतर्क रहना होगा। साइबर अपराध की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। इस उम्र में भी वह नियम से दो अख़बार पढ़ते हैं, ये समाचार उन्हें वहीं से मिलते हैं। शाम को जून एक नयी झील दिखाने ले गये, जिसका नाम मरियापुरा झील है, थतगुप्पे नामक गाँव में स्थित है। गुरुजी पर बनी एक कॉमिक बुक पढ़ी, बहुत रोचक है।जून प्रतिदिन नौ बजे दफ़्तर जाते हैं, बारह बजे लौट आते हैं।आज उन्होंने सोसाइटी के लिए फ़ैसिलिटी मैनेजर का इंटरव्यू लिया।  


आज शाम जून का हाथ भाप से जल गया, वह मूँग दाल का हलवा बना रहे थे। दाल कुकर में भूनी थी, नूना ने पानी डाला तो भाप ऊपर आ गयी, दो सेकंड ही छुआ होगा भाप ने, पर बहुत ही दर्द हुआ। ठंडे पानी में हाथ रखने से लाभ हुआ।आज नन्हा अपने दो सहयोगियों के साथ किसी अन्य कंपनी के मर्जर की बात करने गया है। कल उसके यहाँ जाना है।


आज सुबह सवा छह बजे वे दोनों नन्हे के यहाँ से लौट आये, कल रात वहीं रुक गये थे।सुबह जून मीटिंग से देर से लौटे। काम आगे बढ़ रहा है, उन्हें यह काम अच्छा लग रहा है। कह रहे थे, दिल की जगह दिमाग़ से काम लेना उन्हें अच्छी तरह आता है।पापाजी से बात हुई, वह अपने मित्र की तेहरवीं में नहीं गये। वह कर्ता भाव से मुक्त होने की बात भी कह रहे थे। नूना से कहा, एक ग़ज़ल में कहीं पर लय टूट रही है, उसे ठीक कर ले। वह कल उसे दुरस्त करने के बाद दुबारा भेजेगी।कल एक मित्र परिवार आ रहा है, वे लोग एक-दो दिन उनके यहाँ रुकेंगे।


सुबह नौ बजे मेहमान आ गये थे। शाम की चाय के बाद जून उन्हें झील पर ले गये और उसके बाद सभी टीके फॉल अर्थात थॉटिकल्लू झरना देखने गये। यह मौसमी झरना अति विशाल और बेहद आकर्षक है, वहाँ तक जाने का रास्ता भी अति रोमांचक है।वे सब कभी बैठ कर कभी एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर फिसलन भरी चट्टानों पर बढ़ते हुए ऊपर पहुँचे, तो वहाँ का नजारा अतुलनीय था। अति वेग से श्वेत जल धाराएँ बहती हुई आ रही थीं। वापसी में जून एक अन्य झील दिखाने ले गये। सबने कई सुंदर तस्वीरें उतारीं। रात्रि भोजन में पनीर  की सब्ज़ी जून ने बनायी। उनकी बिटिया को यहाँ रहना अच्छा लग रहा है।अमेरिका में रहने वाले उनके पुत्र से भी बात की।


आज सुबह नाश्ते के बाद जून सभी को 40 एकड़ में फैले पिरामिड वैली स्थान दिखाने ले गये। जहाँ दुनिया का सबसे बड़ा दस मंज़िल ऊँचा मैत्रेय बुद्ध ध्यान पिरामिड है।इसे ब्रह्मर्षि पत्रिजी ने 2003 में बनवाया था।स्वागत कक्ष में उन्हें ध्यान का महत्व बताया गया और छोटा सा ध्यान कराया भी गया, ताकि मुख्य हॉल में जाकर सभी को ध्यान का कुछ न कुछ अनुभव हो सके। दोपहर को लौटकर पहली बार नूना ने शेफ़ कॉर्नर से कुछ भोजन मंगाया, कुछ घर पर बनाया। कल सुबह मेहमान वापस जा रहे हैं। 


जून को कर्नाटक के राज्य दिवस पर एक छोटा सा भाषण देना है। जिसका कुछ अंश उन्हें कन्नड़ भाषा में बोलना होगा।उन्होंने तैयारी कर ली है। रविवार को जून के पूर्व अधिकारी के पूरे परिवार के लिए आयोजित विशेष भोज अच्छा रहा। नन्हा व सोनू अपने कुक से एक दो व्यंजन बनवा कर ले आये थे। जून ने उन्हें घर दिखाया तथा सोसाइटी का एक चक्कर लगवा कर लाए। शाम को असम के एक पुराने परिचित आये, वे आश्रम में एडवांस कोर्स करने आये थे, गुरुजी से भी मिले। उसी समय ‘हेलोवीन’ के लिए विचित्र पोशाकों में सजे बच्चे ट्रीट लेने आये।बड़े उत्साह में भरे वे बच्चे एक घर से दूसरे घर जा रहे थे, जैसे वे लोग बचपन में लोहड़ी माँगने घर-घर जाते थे। 

राज्योत्सव का कार्यक्रम अच्छा रहा।आज गुरुजी द्वारा निर्देशित ध्यान किया। उन्होंने कहा, जब कोई प्रसन्न होता है, भीतर कुछ फैलता है, जब दुखी होता है, भीतर कुछ सिकुड़ता है। जो फैलता व सिकुड़ता है, वह अहंकार है। आत्मा न कभी फैलती है, न कभी सिकुड़ती है।यदि किसी के भीतर अहंकार बना हुआ है, तो यह घाव है, जिसे चोट लगेगी तो दर्द भी होगा। जब दर्द होगा तभी अहंकार का अहसास भी होगा। प्रकृति या परमात्मा चेताते हैं कि यदि दर्द से बचना है तो इस अहंकार से छुटकारा पा लो, यह सारे अनर्थों की जड़ है। इसे मिटाने का एक ही तरीक़ा है, प्रेम, वे प्रेम को प्रकट होने से रोकते हैं और स्वयं को अन्यों से काट लेते हैं। परमात्मा प्रेम है और वे परमात्मा का अंश होने से प्रेम ही हुए !   

     

दिवाली की तैयारी चल रही है।छत पर लाइट्स भी लग गई हैं। जून ढेर सारे फूल ले आये हैं। नन्हे ने दिये भेजे हैं। बड़ी ननद ने चिक्की भेजी है। कल सुबह डेंटिस्ट के पास भी जाना है, नूना को दायीं तरफ़ का ऊपर वाला एक विजडम टूथ निकलवाना है। इन्हें अक़्ल दाढ़ क्यों कहा जाता है, शायद इसलिए कि यह काफ़ी बड़े होने के बाद निकलते हैं।


आज शाम  नन्हा और सोनू आ गये थे, पूजा के बाद सबने दीपक जलाये। सभी परिवार जनों से बात की, विशेष भोज किया और पैदल व कार से घूम कर सोसाइटी के घरों में जल रहे दीपक और लड़ियाँ निहारीं। बाद में वे लोग वापस चले गये। 


आज गोवर्धन पूजा है, यानि छप्पन भोग बनाने का दिन। आज के दिन मंदिरों में विशेष प्रसाद बनाया जाता है। पापा जी ने बताया, उन सभी ने मंदिर में बना भोजन दोपहर को ग्रहण किया। छोटी बहन एक चित्र बना रही थी। कल भाईदूज पर वे लोग दीदी से मिलने जा रहे हैं। 


आज भाईदूज पर नूना ने सभी भाइयों से बात की। जून ने कहा है, इस बार नये साल का स्वागत वे लोग शहर की भीड़भाड़ से दूर जंगल में ‘बैनरघट्टा नेचर कैंप’ में रहकर करेंगे।आज ही वे लोग जिसे देखने गये थे।