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Sunday, February 24, 2013

खंडहर में खजाना




कल से मैं अपने आप स्नान करता हूँ. मुझे..”  नन्हा इतना लिखकर पड़ोस में अपने मित्र के घर चला गया है. आज न ही स्वीपर आया है न ही लक्ष्मी है, वह अस्पताल गयी है. उसे कम से कम झाड़ू तो लगाना ही पडेगा. माली आज सुबह से ही काम में जुटा था, डहेलिया के पौधे निकाल दिए हैं, जीनिया के बीज डाले हैं. कल बहुत दिनों के बाद वह अपनी असमिया सखी के यहाँ गयी, पर जितनी उत्सुकता होती है उससे मिलने की, जाने के बाद खत्म हो जाती है, वह थोड़ी रुड है, अर्थात रूखे स्वभाव की, मन जो ऊपर ऊपर से ही भीगे, है उसके पास. वह  सोच रही है, एक दूसरी सखी को रजनीगन्धा के लिए कहे या नहीं, फोन पर कहना ठीक नहीं है, मिलने पर ही कहेगी.

आज उसका सुबह का कार्य इतना लम्बा खिंचता चला गया कि साढ़े दस पर अभी खत्म हुआ है. सुबह से कुछ खाने की इच्छा भी नहीं हो रही है, वही पुराना रोग.. नन्हा और उसका मित्र खेल रहे थे पिछले एक डेढ़ घंटे से, अभी उन्हें भी पढ़ने-लिखने के लिए बैठाया है. दोनों बच्चों की बातों में ध्यान बंट जाता है. क्या लिखे..हाँ कल वे तिनसुकिया गए थे, जून ने कार के दो टायर रिट्रेडिंग के लिए दिए हैं, कुछ दिन बाद मिलेंगे.  

उसे खतों के जवाब देने हैं, सुबह समय नहीं मिला, दोपहर को पाकिस्तानी टीवी नाटक देखती थी, ‘लकीरें’....खास नहीं है. कल दोपहर नन्हा ड्राइंग सीखने गया था. हफ्ते में दो दिन जायेगा. कल छोटे भाई का अंग्रेजी में लिखा पत्र मिला, शायद उसने जल्दी में लिखा है, गलतियाँ थीं, वैसे अंग्रेजी में लिखना जरूरी तो नहीं. जून ने लिखा है कि वह सेंट्रल स्कूल में जॉब करेगी, पर अभी तक उसने एप्लाई भी नहीं किया है. कर सकती है या नहीं, इसका पूरा विश्वास नहीं है उसे, पहले उसने कभी पूरी कोशिश भी नहीं की. सोनू का परीक्षा परिणाम तीस तारीख को मिलेगा, उसी दिन एप्लीकेशन दी जा सकती है. लक्ष्मी वापस आ गयी है, पर सुबह बहुत उदास लग रही थी, जैसे किसी से लड़ाई की हो. आज सुबह सुबह उसकी पड़ोसिन ने मेडिकल गाइड मांगी, उसके बेटे को गले में कुछ प्राब्लम है, नन्हे को भी हल्की सर्दी है.

कल शाम को उसे लग रहा था कि वे अकेले हैं, इतने बड़े संसार में सिर्फ वे तीनों, नूना, जून और नन्हा, पहले भी ऐसा लगता था कि वह अकेली है, कि जून मिल जायेंगे तो....उनका स्वास्थ्य आजकल ठीक नहीं है, एक महीना भी ऐसा नहीं बीत पाता कि वे तीनों पूरी तरह स्वस्थ रहें. उन लोगों का खान-पान व दिनचर्या ही इसके लिए दोषी है, मगर दोष कहाँ है इसका पता नहीं लग पा रहा है. कल छोटी ननद का पत्र आया, अगले महीने उसकी डिलीवरी होनी है, यानि शादी के ठीक एक साल बाद. कल शाम बहुत दिनों बाद एक परिचित परिवार मिलने आया, महिला काफी स्वस्थ लग रही थी, सिल्क की साड़ी और ढेर सरे स्वर्ण आभूषणादि के साथ. वह अपने बगीचे में उगायी गाजरें भी लायी थी. उसे आज अनुभव हो रहा है कि कविता से दूर होती जा रही है, कविता एक खास मूड में लिखी जाती है, लेकिन वह मूड वह टालती जा रही है. और इसका खामियाजा भी उसे ही भुगतना पड़ा है. कल रात इतने दिनों बाद पहली बार वह उस रात को याद किये बिना सोयी, जिस रात नन्हा अस्वस्थ हुआ था.

आज सुबह वह जल्दी उठ गयी, सो सारा काम हो चुका है, नाश्ते में गाजर का हलवा खाया, जो कल शाम ही बनाया था. नन्हे ने अपना एक स्वप्न बताया, जो बहुत रोचक और खतरनाक है, उसने कहा कि “मैं और पड़ोस का मित्र स्कूल से वापस आ रहे थे, उस लडके को एक गड्ढा दिखाई दिया, उसमें जाने को कहा, मैंने मना भी किया पर वह नहीं माना, हमने अंदर जाकर देखा तो एक खंडहर था, उसमें राक्षस रहते थे, देखा, वहाँ खजाना है, हमने पुलिस को बुलाया, पुलिस एक पहलवान व क्रेन को लेकर आयी, पुलिस ने दरवाजे का पत्थर क्रेन की सहायता से उठाया, अंदर गए, पहलवान ने एक दरवाजा खोला जिस पर बड़े-बड़े ताले लगे थे. हमें खजाना मिल गया फिर मैं उठ गया और सपना टूट गया”.
समाचारों में उसने सुना कि पाकिस्तान में नवाज शरीफ की सरकार गिर गयी है. संजय दत्त जेल में है.