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Wednesday, September 23, 2020

गार्लिक ब्रेड

 

आज एक ऐतिहासिक दिन है. महीनों से इस दिन की प्रतीक्षा सारा देश कर रहा था, बल्कि विश्व के कई देश कर रहे थे, जहाँ भी भारतीय मूल के लोग रहते हैं अथवा जो देश भारत के मित्र हैं. बीजेपी ने भारी बहुमत से विजय हासिल की है तथा एनडीए एक बार फिर पांच वर्षों के लिए भारत को एक मजबूत सरकार देने वाला है. वे सुबह से ही चुनाव परिणाम पर नजर रखे हुए हैं. सुबह कम्पनी बाग घूमने गए, लोगों का एक हुजूम था वहाँ. कुछ लोग दौड़ रहे थे, कुछ योगासन कर रहे थे, कुछ टहल रहे थे , कुछ तस्वीरें उतार रहे थे. उन्होंने भी विशाल वृक्षों के चित्र लिए, आलूबुखारा व एक बेल खरीदी. वापसी में चचेरे भाई से मिलने का प्रयत्न किया, घर पर नहीं था, जिस दुकान पर चाय पीने आता है वहाँ भी देखा, पर नहीं मिला. उसकी कहानी भी बहुत विचित्र है पर मानव जीवन और यह सृष्टि सदा से ही विचित्रताओं से भरी है. वापस आकर नाश्ता किया फिर छोटी ननद की ससुराल गए. उसकी सासूमाँ बहुत स्नेही महिला हैं. उसके ज्येष्ठ के पुत्र से मिले जिसके पिताजी चाहते हैं वह उनकी दुकान संभाले, वह बीसीए करने के बाद घर आया हुआ था. वह निर्णय नहीं ले पा रहा है कि उसे क्या करना चाहिए. ढेर सारे फल खरीद कर जब वे वापस लौटे तो चुनाव परिणाम आने शुरू हो गए थे. एग्जिट पोल को सही सिद्ध करती हुई विजयमाल नरेंद्र मोदी जी के गले में सुशोभित हो गयी है. छोटी भाभी ने स्वादिष्ट मैंगो शेक बनाया व घर के बने आलू चिप्स भी तले. उन्होंने फल खाये और टीवी पर अमित शाह व नरेंद्र मोदी के भाषण सुने. कांग्रेस की हार पर अफ़सोस भी जताया, क्योंकि एक मजबूत विपक्ष भी लोकतंत्र के लिए अति आवश्यक है. 


सुबह मौसम सुहाना था. वे रजवाहे के किनारे-किनारे टहलने गए. सड़क सीमेंट की बनी है व साफ-सुथरी थी. इस मोहल्ले में भी सड़क पक्की हो गयी है. वापसी में वर्षा होने लगी, ठंडक बढ़ गयी. पिताजी अपने नियमों के अनुसार काम करते हैं, हिसाब-किताब भी पूरा रखते हैं. किस दिन गैस सिलेंडर लगाया था, इसकी डेट भी नोट करते हैं. नए प्रयोग करने से भी हिचकिचाते नहीं हैं. उनके जीवन से काफी कुछ सीखा जा सकता है. जून ने उन्हें मालिश के लिए तेजस तेल लाकर दिया है, वह स्वयं ही मालिश कर पा रहे हैं. आज घर पर गार्लिक ब्रेड बनी थी, जिसे पुलअपार्ट ब्रेड भी कहते हैं, साथ में मायोनीज की चटनी भी. नाश्ते के बाद टीवी पर मोदी जी की तकरीर फिर से सुनी. बीजेपी को तीन सौ तीन सीटें मिली हैं और एनडीए को तीन सौ बावन. पास ही की दुकान से वे मिठाई लाये, छोटे भाई ने दिल्ली के लिए भी मिठाई खरीद दी है. एक रात वे मंझले भाई के यहाँ बिताकर परसों असम वापस जा रहे हैं. दोपहर को दाल माखनी, रात को पनीर, इतना गरिष्ठ  भोजन वे घर पर नहीं करते हैं. शाम को टेलर से गुलाबी सूट लेकर आये, उसने वादा निभाया और समय पर सिल दिया. दोपहर को चचेरी बहन अपने दोनों बच्चों को लेकर आयी, दोनों बहुत प्यारे बच्चे हैं. उसने अपने पति व उसके काम के बारे में बातें बतायीं, उसे पथरी की समस्या हो गयी है, जबकि स्वयं उसे थायराइड की समस्या हो गयी है. देर रात्रि को दोनों भतीजियां आ रही हैं पर वे उसने सुबह ही मिलेंगे. 


सवा आठ बजने को हैं, आज उनकी यहाँ अंतिम सुबह है. सुबह का टहलना छत पर ही हुआ. मौसम आज गर्म है, धुप बहुत तेज है. वे आगे की यात्रा पर जाने के लिए तैयार हैं. चचेरा भाई भी उस दिन मिल नहीं पाया था, सुबह-सुबह स्वयं ही आ गया है. उसकी बहन  ने कल उसे बताया होगा, कल शाम वह अपने ममेरे भाइयों से भी मिलकर आई, तीन वर्ष बाद उसका आना हुआ है. 


आज वे पूरे एक महीने बाद घर वापस आये हैं, हवाई अड्डे से बाहर निकलने पर हरियाली ही हरियाली नजर आयी. ड्राइवर ने बताया महीने भर यहाँ वर्षा होती रही है. घर में कहीं चीटियों, कहीं चीटों और तिलचट्टों ने अपना घर बना लिया है. धूल, मिट्टी व मकड़ी के जाले तो हैं ही. दोनों नैनी व मालिन आ गयी हैं, मिलकर सफाई करेंगी. जून सब्जियां व फल लाने बाजार चले गए हैं। बाहर से कोयल के कूजन की आवाज लगातार आ रही है. 


अतीत के पन्ने खोले - उस दिन लाल स्याही से इतना ही लिखा था, माँ उसे कितना प्यार करती हैं, कितना ख्याल रखती हैं वह उसका ! कल शाम भी और आज सुबह भी ! 

  

उसका मन बस में नहीं है इस वक्त, यहाँ-वहाँ, इधर-उधर सारे संसार की सैर करता पागल मन ! वह नास्तिक होती जा रही थी, किन्तु अभी-अभी उसके मस्तिष्क में यह विचार कौंध गया कि इससे भयानक स्थिति क्या होगी ? ईश्वर का स्मरण मात्र ही पवित्रता को स्मरण करना है. शुभ, सुंदर, अच्छा, सत्य, प्रिय यही तो ईश्वर है. समय-असमय जो कुविचार उसे घेर लेते हैं उनसे त्राण पाने का एक अचूक साधन ! हे ईश्वर ! उसे ले चल ! उस राह पर जो पवित्र है, वह ... स्थिर मना, स्थितप्रज्ञ बन सके, अचंचल, दृढ बने. ऐसी भक्ति उसका मन करे कि तेरा दर्शन चहुँ और हो, और तब हे ईश्वर ! वह वह सब नहीं करेगी जो अब न चाहते हुए भी कर जाती है, कभी अनजाने में कभी जानबूझ कर. उसे अपनी शरण में ले, वह उसका चरवाहा बने, भटक जाये इससे पहले वह उसे संभाल लेगा, सहेज लेगा. उसने ईश्वर को धन्यवाद दिया. 


Tuesday, August 4, 2020

हनुमान जयंती


आज ये सुंदर वचन सुने, अच्छे लगे तो लिख लिए. “मित्रता और शत्रुता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जब तक वे दूसरे के प्रति बह रहे हैं, स्वयं से दूर ही जा रहे हैं. चित्त की शुद्धि के लिए आवश्यक है कि वे देह के श्रृंगार और स्वादिष्ट भोजन में अत्यधिक रस न लें. अन्य की मौजूदगी में यदि वे स्वयं को अनुभव करते हैं तो स्वयं की अभी खबर नहीं है. भीतर की ऊर्जा को अनुभव करने के लिए उन्हें मात्र स्वयं को जानना है.” इस समय रात्रि के साढ़े सात बजे हैं. बाहर से टहलकर आये तो गंधराज का एक फूल लाये. आजकल फूलों की बहार है यहाँ, टेसू, रूद्र पलाश और भी न जाने कितने सुंदर फूल ! आज एक योग साधिका अस्वस्थ थी, उसे अस्पताल जाने को कहा है, ईश्वर करे वह जल्दी स्वस्थ हो जाये. सुबह उठने से पूर्व स्वप्न में नैनी के पुत्र का पूर्वजन्म देखा, उसका बचपन का चेहरा, फिर किशोरावस्था का, नीले रंग की कमीज पहने था, वह बहुत बहादुर था उस जन्म में. इसीलिए वह जरा भी नहीं डरता, बारिश में भीगता है. मिट्टी पर लोटता है और मन को दिन भर तक देता है. आज ही सुना कि साधना गहरी होती है तो अपने ही पूर्वजन्म का पता नहीं चलता अपने आस-पास के लोगों के पूर्वजन्म का भी ज्ञान होने लगता है. 

रामदेव जी जयपुर में राज्यवर्धन राठौर के नामांकन कार्यक्रम में लोगों का आवाहन कर रहे हैं कि वे एक बार फिर मोदी जी को जिताएं और देश को ऊँचाइयों तक ले जाने में अपना भी योगदान दें. आज चुनाव का दूसरा चरण है, मोदी जी अपने कामों के द्वारा एक बार पुनः भारी बहुमत से जीतकर आ जायेंगे, ऐसा उसे ही नहीं हर देशभक्त भारतीय को पूर्ण विश्वास है. लगभग एक महीने बाद परिणाम आ जायेंगे. आज एओल के एक शिक्षक का संदेश आया, गुरूजी के जन्मदिन पर कवि सम्मेलन होगा, उसके लिए दो कविताएं भेजनी हैं. वे इस वर्ष बंगलूरू में रहेंगे उस दिन. उसने कवि सम्मेलन के लिए रजिस्ट्रेशन किया. व्हाट्सएप पर एओल कवियों के ग्रुप में शामिल हुई. कविता बाहर-भीतर सब ओर मुखरित हो रही है. आत्मा की छिपी और गूढ़ सौंदर्य राशि का भावना के आलोक में प्रकाशित हो उठना ही कविता है ! 

आज सुबह उठने से पूर्व किसी ने चेताया वह उसकी बात सुनेगी या नहीं ? ये शब्द एक बार नहीं अनेक बार सुने. इतनी तीव्रता से कि जैसे कोई धमका रहा हो. परमात्मा उन्हें प्यार से अनेक इशारों से और फिर दृढ़ता से समझाता है. वह उन्हें अपने जैसा देखना चाहता है, वह उनका सुहृद है, उनका सखा और उनका अपना ! आज हनुमान जयंती है, नैनी ने हनुमान जी की तस्वीर के आगे सुंदर फूल सजाये. पूरी हनुमान चालीसा पढ़ी वर्षों बाद. सत्य के मार्ग पर उन्हें अपार आनंद मिलता है फिर भी वे राग-द्वेष के शिकार हो जाते हैं. शाम को मीटिंग थी, नई अध्यक्ष को क्लब का चार्ज दे दिया. 

अब अतीत की बात.. बरसों पुरानी, कालेज के अंतिम वर्ष की. सुबह नींद नहीं खुली और आज वह स्वतन्त्र है, कल से जल्दी उठ सकती है. बाजार गयी थी, सूट सिल गया, बेहद सुंदर लग रहा है पर पहनने वाला सुंदर हो तब तो बात भी है.  होली का दिन, महीना फागुन का नहीं सावन का लग रहा है, या आषाढ़ का एक दिन !  पानी तेजी से बरस रहा है. ईश्वर भी होली खेलना पसन्द करते हैं. वह इस समय किताबें लेकर बैठी है. तीन बजने वाले हैं, किसी को होली खेलना पसन्द नहीं, पिछले वर्ष भी होली इसी तरह मनायी गयी थी. दरबारा सिंह जी, पंजाब के मुख्य मंत्री का भाषण सुना, उसने इससे पूर्व प्रधान मंत्री या जगजीवन राम के अतिरिक्त किसी का भाषण नहीं सुना. दरबारा सिंह जी बोले और खूब बोले लेकिन अधिकतर बातें ऐसी थीं जो कई बार सुनी हुई थीं. इसके अलावा पंजाब में सिखों के अलग प्रदेश बनाये जाने के बार में, उस विवाद के बारे में उन्होंने कोई बात नहीं की, जिसकी कि कुछ लोग उनसे आशा रखते होंगे जो कि आज के भाषण से सम्बन्धित भी थी. कौमी एकता कमेटी के प्रेसीडेंट की आवाज में जो जोश था, उससे उनके दिल की गहराई में जो बात है, वह वाकई में है, यह जाहिर हुई. वे जहनी तौर पर इस कदर सहमे हुए हैं मुसलमानों से, उन्हें उनसे एक दूरी का अहसास बराबर होता रहता है. जब तक ये आंतरिक जड़ें जो मन में दूर तक धंस गयी हैं समाप्त नहीं होतीं, जब तक सिर्फ यह भाव पैदा नहीं होता कि कोई व्यक्ति इस वजह से कि वह बंगला भाषी है या मुसलमान है या किसी अन्य प्रदेश का है, इस तरह का या उस तरह का है, कौमी एकता दूर की चीज है. प्रश्न सिर्फ भाषा का नहीं है. भाषा का प्रश्न उछाला जाता है नारे बाजी में, दरअसल वे अपने-अपने खानों में इस तरह फिट बैठ गए हैं कि बाहर निकल कर देखना ही नहीं चाहते. कूप मंडूक की तरह अपने इर्दगिर्द नजर डालकर चुप हो जाते हैं, इस पीढ़ी को अपनी पुरानी पीढ़ी से क्या मिला ! कुशिक्षा, असभ्य भाषा, आधुनिकता के नाम पर भोंडापन, फ़िल्में और नारेबाजी. वे अपनी पीढ़ी को क्या देकर जायेंगे इससे भी नीचे की चीजें. आदर्शवाद का जिस तरह मखौल आज उड़ाया जा रहा है, आगे चलकर तो वह सिर्फ कल्पना की वस्तु रह जाएगी. 

Saturday, July 18, 2020

श्री मद देवी भागवत



रात्रि के पौने आठ बजे हैं. पिछले चार दिन खुद से मिलना नहीं हुआ, भला ऐसी भी क्या व्यस्तता ... कल एक सखी आयी, वे लोग कुछ वर्ष पहले तबादला होने पर चले गए थे, अब पुनः वापस आ गए हैं, अपना घर देखने आयी थी. सम्भवतः अगले महीने वे लोग सामान लेकर आ जायेंगे. आज से चैत्र नवरात्र आरंभ हो रहे हैं. सात्विक भोजन और देवी पुराण का पाठ, अष्टमी को कन्या पूजन, नवरात्र साधना के लिए उत्तम समय है. जीवन को उच्च बनाने ले लिए कुछ व्रतों को धारण करना बहुत आवश्यक है. सुबह मृणाल ज्योति गयी, जून ने अपने बहुत से वस्त्र दिए जो भविष्य में काम नहीं आएंगे. हॉस्टल के बच्चे थे और कुछ टीचर्स, उसने योगासन करवाये और एक खेल भी. स्कूल में पीले रंग की मुख्य दीवारों पर बच्चों ने सुंदर कलाकृतियां बनायी हैं. लगभग सभी बच्चे आर्ट में कुशल हैं. 

सुबह उठे तो मौसम खुला था, धूप थी, दस बजे जब क्लब गयी तो हल्की गर्मी भी, पर एक घण्टे बाद जब बाहर आयी तो हवा चलने लगी थी और बाद में वर्षा भी हुई, शाम तक बूंदा बांदी जारी रही. क्लब का सेल का आयोजन अच्छा रहा है आज, आज किसी को भी ज्यादा काम का अहसास नहीं हुआ. भूतपूर्व अध्यक्षा दिन भर स्वयं भी वहीं रहकर अन्यों को भी रुके रहने के लिए प्रेरित करती थीं.  उसने भी कुछ सामान खरीदा. मृणाल ज्योति का भी एक स्टाल था, उन्होंने कहा, ‘बोहनी हो गयी’. दोपहर को योग कक्षा के लिए बच्चे व महिलाएं प्रतीक्षारत थे. बच्चों ने बाद में चित्र बनाये और कागज के फूल बनाना भी उन्हें सिखाया. सुबह पिताजी से फोन पर बात हुई, वह बदले हुए मौसम से खुश हैं और अब रोज स्नान करने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होती. उन्होंने कहा, मोदी जी बहुत ज्ञानवान हैं और वही भारत को आगे ले जा सकते हैं. करोड़ों भारतवासी मोदी जी के साथ हैं, उनके विरोधी कितना भी प्रयास कर लें, उनसे जीत नहीं पाएंगे. वह हर दिन तीन रैलियां कर रहे हैं. देश में चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गयी हैं. टीवी, अख़बार, या मोबाइल सभी पर नेता और पार्टियां अपना प्रचार करती नजर आ रही हैं. नवरात्रि का दूसरा दिन है आज. प्रकृति के देवी स्वरूपों के विषय में ‘देवी भागवतम’ में पढ़ा, अद्भुत व्याख्या है देवियों के रूप में जीवन की. 

अहंकार कितने सूक्ष्म रूप में मन में रहता है, इसको प्रकट करने के लिए परमात्मा ही भिन्न परिस्थितियों को उत्पन्न करते हैं. आज फेसबुक पर एक लेखिका द्वारा उसकी एक कविता को  अपरिपक्व कहे जाने पर उसने हटा लिया, यह अहंकार ही तो है. आलोचना को सहने के लिए निरहंकार होना है और दूसरों की राय से प्रभावित होना भी उचित नहीं. उसने देखा है, वह दूसरों की राय से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाती है, वह स्वयं को दिखावा करते हुए भी देख पाती  है कभी-कभी. अभी तक अपने समय और ऊर्जा का सही उपयोग भी नहीं कर पाती। समय बीतता जा रहा है, आसक्ति से मुक्ति अभी नहीं हुई. ‘मैं ‘की सही पहचान हो भी गयी है, पर ‘मैं’ की मिथ्या पहचान अभी भी बनी हुई है. समाधि का अनुभव सतत नहीं बना रहता. आज बीजेपी ने अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है. उनका संकल्प पत्र एक मिशन को लेकर आगे बढ़ने का पत्र है जिसमें अंत्योदय, राष्ट्रवाद तथा सुशासन की बात कह़ी गयी है. 

और अब वह पुरानी डायरी... जिसकी बातें पढ़कर उसे लगता है जैसे किसी और ने लिखी हैं... यूँ तो वर्तमान में भी वह केवल साक्षी है जो भी घट रहा है, जिसके साथ घट रहा है उससे वास्तविकता का जरा सा भी तो मेल नहीं...उस दिन के पन्ने पर ऊपर लिखी सूक्ति पढ़कर उसे लगा था, फिर वही बदमिजाज वाक्य उसे चिढ़ाने आ गया है. वाक्य था, ‘लोमड़ी खाल बदलती है आदत नहीं’ आज तो और भी, पर आज तो उसे खुश रहना चाहिए. उसने किसी को मुक्त कर दिया है, उसने ऐसा चाहा नहीं फिर भी उसने कहा, वह उसे आजाद करती है. आज उसकी समझ में आ रहा है कि वे व्यर्थ के जंजाल में फंसे थे. कुछ नहीं होता यह सब.... अर्थात मित्रता आदि. यह ठीक है कि वह अच्छा है और इसलिए वह उसका आदर करे उसकी अच्छाई के लिए पर वह नहीं जो वह समझता है या वह समझना चाहती थी. आज उसका पत्र मिला, पढ़कर कुछ भी नहीं हुआ. उसे निहायत बचकाना पत्र लगा, वह घिसापिटा चुटकुला और नसीहतें. उसका टाइम टेबल जानने की उत्सुकता या फिर आई एम ओके यू आर ओके पुस्तक की बात. वह उसे पत्र नहीं लिखेगी. वह जिस ओर जा रहा है उधर क्या है, कभी इधर कभी उधर कभी नौकरी, कभी  कुछ, उसकी तो कुछ समझ नहीं आता. कभी शोध कार्य करने की बात. एक लक्ष्य क्यों नहीं है. परीक्षाओं की भी चिंता नहीं उसके पेन की चिंता है. उसने सोचा दूसरा पत्र आने से पूर्व वह कोई पत्र नहीं लिखेगी. लगता है ज्यादा मीठा खाने को मिल गया है सो अब अच्छा नहीं लगता. अब वह हवा से हल्की है, कोई बोझ नहीं, कोई बंधन नहीं, मुक्त, बिलकुल मुक्त ! सिरदर्द मोल ले लिया था या पता नहीं क्या था वह, खैर ! अब तो सब ठीक है. अभी पढ़ाई करनी है जब तक नींद नहीं आएगी, और नींद आने का वक्त निकल चुका है अब जाग सकती है देर तक. कल विवेकानन्द की किताब से एक वाक्य पढ़ा था - मुक्ति का संदेश ! कुछ देर पहले एक अपनी जैसी एक लड़की से भेंट हुई रेडियो पर. गाड़ी में यात्रा करते-करते वह कितनी कल्पनाएं करती जाती है, स्वप्न देखती है कि .. कि .. और फिर स्टेशन आ जाता है. समांतर पटरियों पर चलने वाली गाड़ी !  


Tuesday, July 14, 2020

तेनाली रामा में कौए



दोपहर बाद के चार बजे हैं. जून पिताजी से बात कर रहे हैं. उनके यहाँ भी ग्यारह अप्रैल को चुनाव होने हैं. कल रात को गर्जन-तर्जन के साथ वर्षा हुई. पिछले एक-दो दिन से बाएं कान में भारीपन लग रहा है, व सांय-सांय की आवाज आ रही है. नाक-कान के विशेषज्ञ को फोन किया पर वह शहर से बाहर गए हैं. सम्भव है उनके लौटने तक कान ठीक-ठाक ही हो जाये. पिछले दिनों होली पर गहमा-गहमी रही. उस दिन तीन परिवार आये , सभी को गुझिया खिलाईं. असम में यह उनकी अंतिम होली थी. आज दोपहर को कम्पनी  के भूतपूर्व उच्च अधिकारी के परिवार को लंच पर बुलाया था, उन्हें एक स्टोल दिया जो बड़ी भांजी विदेश से लायी थी, उन्हें अच्छा लगा. वे भी उनके नए घर के लिये कांच का एक कछुआ लाये हैं. कहते हैं, शुभ होता है. जीवन इसी आदान-प्रदान का नाम है. नैनी ने उनसे कहा है, उसके पति को गेस्टहाउस में नौकरी दिला दें, पर अब जब वह यहाँ से जा रहे हैं, शायद ही कुछ कर पाएं. कल सुबह स्कूल गयी थी. नई अध्यक्षा ने स्कुल के अकाउंट में काफी रूचि दिखाई. वह स्वयं एक कम्पनी में सीएसआर प्रोजेक्ट देखती हैं. पिछले दिनों कई अनोखे स्वप्न देखे, जिन्हें लिखा नहीं सो अब याद नहीं हैं , पर उनसे पिछले जन्मों के कई राज पता चले जिनका असर वर्तमान तक चला आया है. वे  जिन विकारों का अनुभव अपने भीतर करते हैं उनकी गाठें उन्होंने पिछले जन्मों में बाँधी होती हैं या कहना चाहिए कि उनके जीवन में जो भी घटता है वह पूर्व का फल होता है, उसके प्रति उनकी प्रतिक्रिया वर्तमान में किया उनका कर्म होता है. उन्हें अपने भीतर की गाँठों को पहले देखना है, फिर उन्हें खोलना है. बंधी हुई चेतना से विकार ही जन्म लेते हैं. मुक्त चेतना के साथ जीना सीखना है, जिसमें पूर्व के संस्कार के कारण कोई यन्त्रवत प्रतिक्रिया नहीं होती, बल्कि सजग होकर नए कर्म बढ़ने से रोकने भी हैं. 

तेनालीराम में आज कौओं का प्रकोप दिखाया गया, कम्प्यूटर ग्राफी का कमाल था. आज योग कक्षा में एक साधिका ने कहा, उसे आज क्रोध आया. जो भीतर भरा है वह बाहर तो आएगा ही, पर इसके लिए प्रतिक्रमण करना होगा. आगे उसने कहा, पिछले दो वर्षों से जब से वह योग साधना करने आ रही है, उसने अपने को अतीत के बंधनों से मुक्त किया है. इंसान कितनी जंजीरों में जकड़ा रहता है. गुरूजी के वाक्य उसे शीतलता से भर देते हैं. कल उसकी बहने आ रही हैं, उन्हें भी साथ लेकर आएगी एक दिन. आज दोपहर कई दिन बाद ‘डायरी के पन्नों पर’ ब्लॉग में  लिखा, मन में उत्साह जगा और सद प्रेरणा मिली एक पुरानी डायरी से, और उस समय भी परमात्मा के प्रति श्रद्धा थी, पर अनुभव नहीं था. एक लंबी यात्रा रही है उसके जीवन में अध्यात्म की, जो अभी तक चल रही है. सुबह देर से उठे वे आज, कल शाम एक विदाई समारोह में गए थे, सोने में देर हुई. कल दोपहर तिनसुकिया में डॉ को कान दिखाया, पहली बार सिरिंज से साफ़ भी करवाया. अभी भी टिंगलिंग की आवाज आ रही है. उसकी देखा-देखी अचानक जून भी अपने कान में कुछ आवाज सुनने का प्रयत्न करने लगे हैं. 

आज भारत सेटेलाइट को मार गिराने वाली क्षमता को हासिल करने वाला चौथा देश बन गया है, प्रधानमंत्री ने इस बात को देश के सम्मुख रखा तो विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. चुनाव आने वाले  हैं, मात्र तरह दिन रह गए हैं, सो सभी पार्टियां  वोटरों को रिझाना चाहती हैं. बीजेपी ही चुनाव जीतेगी इसमें दो राय नहीं हैं. प्रधानमंत्री का चुनावी दौरा आरंभ हो गया है. सुबह आजकल सुहानी होती है अब स्वेटर की आवश्यकता नहीं है. 

और अब उन पुराने दिनों की बात.. दादाजी के यहाँ रहते दो दिन हो गए, परसों उसे घर वापस जाना है. घर जाना भी कितना सुखद अवसर है, उसका कमरा, मेज.. उसका बेड, किताबें, माँ-पिताजी, बहन, भाई, भाभी, दीदी, भांजे, भांजी.. सबसे मिलना. कमलकुंड, मधुवन या फिर वह मैदान, उसका प्रिय वृक्ष.. सब ही तो उसकी कमी महसूस करते होंगे, सूरज निकलता होगा वहाँ पर उसे उसकी तरह देखने वाला कौन होगा ! उसके पत्थर मेज पर रखे होंगे. फिर परीक्षा की तैयारी. यहाँ रहकर कुछ लाभ हुआ है तो यही कि दादी-दादा जी का आशीर्वाद मिला. लग रहा है कितने दिन बाद जा रही है ! 

क्या लिखे ? उसके बचपन की सखी के पिताजी नहीं रहे. कल शाम वह उससे मिली थी, वह खुश थी, क्या मालूम था कि तीसरा दिल का दौरा कल रात को ही पड़ना है. वह उससे मिलने नहीं गयी, क्या कहेगी मिकलर, समझ नहीं आता... उसका मन आज ही जाने को हो रहा है, अच्छा नहीं लग रहा कुछ भी. आज शिवरात्रि है, पिछली शिवरात्रि कैसे मनायी उसे याद नहीं, [अर उससे पिछली अच्छी तरह याद है, तब वे दूसरे शहर में थे. तब भी उसने व्रत रखा था. कल जाने से पहले कहना बनकर जाएगी, दिन का भी और शाम का भी. 

उस सखी को देखा आज, उसके घर गयी थी, बेहद उदास, सूजी आँखें, रूखे बाल, उसकी दीदी उससे भी ज्यादा उदास थीं. 

Tuesday, July 11, 2017

हरियाली का गीत


वर्षा आज भी लगतार हो रही है. पिछले तीन दिनों से वर्षा के कारण प्रातः या सांय भ्रमण नहीं हुआ, आज वर्षा थमने पर जाना ही होगा.  पेड़-पौधे और घास गहरी तृप्ति का अनुभव कर रहे हैं. हरियाली एकाएक बढ़ गयी है. आकाश बादलों से घिरा है. वायुदेव मंदगति से पेड़ों को झुला रहे हैं. बूंदों की टिपटिप और पंछियों के स्वर दोपहर को संगीतमय कर रहे हैं. अभी कुछ देर पूर्व ही उसने चाय पी और आकाश को निहारते हुए कुछ प्रकाश बिन्दुओं को हवा में तैरते देखा. सम्भवतः ये जीवात्माएं हैं जो उनके चारों ओर एक और आयाम में रहती हैं. कभी-कभी प्रकृति अपने रहस्य खोल देती है. एक धुआं सा कभी-कभी धरा से उठता दिखाई देता है, कभी गगन से बरसता हुआ..परमात्मा अपनी उपस्थिति से उन्हें भर देना चाहता है. उसका अंतर उसके लिए खाली है, वहाँ और कोई नहीं है, वही है, वैसे भी वहाँ क्या था, सिवाय अहंकार से उपजी पीड़ा के. वे व्यर्थ ही स्वयं को ढोए चले जाते हैं. शायद नहीं निश्चय हो गया है अब, मन जिसे वे कहते हैं केवल उनकी मूर्खता का दूसरा नाम है, अज्ञानवश वे देख ही नहीं पाते. सतोगुण को तमस व रजस ढक लेता है और उनकी दृष्टि ही दूषित हो जाती है. अपना भला-बुरा भी सोचने की क्षमता नहीं रहती. प्रारब्धवश जो भी सुख-दुःख मिलते हैं, उनमें उनका क्या योगदान है, अहंकार करने जैसा तो यहाँ कुछ भी नहीं है. 

दोपहर को उस छात्र को फोन किया जो बैठे-बैठे सो जाता था, वे लोग तीन दिन बाद जा रहे हैं, उसके पिताजी रिटायर हो गये हैं. कल सामान चला जायेगा. उसके लिए कविता लिखी, जून प्रिंट करके लाये, वह कोओपरेटिव गयी, एक मग और एक चाकलेट ली, उसकी माँ बहुत खुश हुईं, वर्षों पहले उन्होंने उसे संगीत सिखाया था. आज भी लगातार वर्षा हो रही है. शाम को किशोरियों के लिए महिला क्लब का एक कार्यक्रम था, उनकी शारीरिक व अन्य समस्याओं के बारे में कुछ जानकारी दी गयी. लेडीज क्लब ने अच्छी पहल की है. यहाँ की लडकियों को एक मंच दिया है जहाँ वे अपनी समस्यायें कह सकती हैं. कल ही खबर सुनी थी कि एक लड़की ने आत्महत्या कर ली. महिलाओं के प्रति अत्याचार बढ़ते ही जा रहे हैं. डिब्रूगढ़ में एक लेडी डाक्टर की हत्या वार्डबॉय ने कर दी. टीवी पर मोदी जी का इंटरव्यू आ रहा है. नन्हा कल अपने एक मित्र की शादी में जा रहा है. एक दिन उसकी शादी में भी सभी मित्र आयेंगे.

पांच दिनों का अन्तराल. आज चुनाव के परिमाण आ गये हैं. बीजेपी ने ऐतिहासिक विजय हासिल की है. टीवी पर सुबह से एक ही चर्चा है. मौसम अब अपेक्षाकृत गर्म है. पिछले दिनों छोटी ननद, बहन के पास गयी, फोन किया तो पता चला मंझली भांजी घर आ गयी है ससुराल छोड़कर. वे सभी बहुत परेशान हैं. उन्होंने छोटी व मंझली दोनों भांजियों को यहाँ आने को कहा है. एक महीना वे उनके साथ रहेंगी. परसों नन्हा भी आ रहा है. अगला एक महीना व्यस्त रहने वाला है. जीवन में कुछ परिवर्तन हो तो अच्छा लगता है.

आज दोनों बहनें आ गयी हैं, वह उन्हें लेने एयरपोर्ट गयी थी, दोनों खुश लग रही हैं. नन्हा भी आ गया है, उसने ‘श्रद्धा सुमन’ ब्लॉग में लेबल ठीक करने में उसकी सहायता की.  उसके एक मित्र के विवाह में उन्हें जोरहाट जाना था, वापस आकर भी दो-तीन दिन हो गये हैं.

इस समय वर्षा हो रही है, वह बाहर के बरामदे में बैठी है. दोनों लड़कियाँ अपने कमरे में हैं. बड़ी किताब पढ़ रही है, छोटी फोन पर व्यस्त है, मौसम की कारगुजारी देखने का उनके पास वक्त नहीं है. बड़ी की समस्या सुलझती नजर नहीं आ रही है. वह अपने आप को जरा भी बदलना नहीं चाहती पर वह नहीं जानती ऐसा करके वह अपना ही नुकसान कर रही है. वे सभी किस तरह माया के पाश में जकड़े हुए हैं. उसने आर्ट ऑफ़ लिविंग टीचर से बात की शायद वह कुछ सुझाव दें, अगले हफ्ते वह आएँगी. गुरूजी के ज्ञान से बड़ी के जीवन में कुछ परिवर्तन तो आएगा ही. नन्हा वापस चला गया है.

आज उसका जन्मदिन है, सुबह से ही बधाई संदेश आ रहे हैं. सुबह वे मृणाल ज्योति गये, भाजिंयों ने बच्चों को नृत्य के कुछ स्टेप्स सिखाये, उन्हें अच्छा लगा. सभी को मिठाई व नमकीन वितरित किया. अभी कुछ देर में शाम के मेहमान आयेंगे, उसने जून का लाया फूलों वाला टॉप और लंबा स्कर्ट पहना है. मौसम आज अच्छा है.  

Sunday, October 26, 2014

विधान सभा के चुनाव


“राग और द्वेष भीतर से निकलते नहीं, परमात्मा की प्रीति को भरने से ये अपने आप निकल जायेंगे” आज बाबाजी ने सुबह यह सुंदर वचन कहा साथ ही कबीर के तीन  सूत्र बताये- जोड़ो और तोड़ो, खाली करो और भरो, याद करो और भूल जाओ. अब क्या जोड़ना है और क्या तोड़ना है, किसे और किससे खाली करके फिर भरना है, किसे याद करना है और किसे विस्मृत...ये चिन्तन का विषय है. प्रेम हृदयों में उपजे तो जुड़ना संभव होगा. अहम इसमें सबसे बड़ा शत्रु है, कोई अपना भी यदि प्रतिकूल बात कह दे तो मन कुम्हला जाता है, उस फूले हुए गुब्बारे की तरह पिचक जाता है जिसमें सूई से छेद कर दिया गया हो. इस समय शाम के चार बजे हैं, वर्षा हो रही है, आज सांध्य-भ्रमण का कार्यक्रम सम्पन्न नहीं हो पायेगा. सुबह वह उठी तो जून से कल पड़ने वाले वोट के बारे में थोड़ी बहस हुई, वह वोट देने जाना चाहती है पर जून इसके सख्त खिलाफ हैं, उनकी राय में नेताओं की वजह से ही समाज में सारी बुराइयाँ हैं. नेता लोग करोड़ों का चारा, सीमेंट, यूरिया सभी कुछ हजम कर जाते हैं. दो सखियों से बात की, दोनों सपरिवार वोट देने जाएँगी, यानि उसकी तरह सोचने वाले लोग ज्यादा हैं, पर सदा बहुमत ठीक हो यह जरूरी तो नहीं.

आज चुनाव हैं. चार प्रदेशों असम, बिहार, तमिलनाडु, केरल तथा केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी में तेरह करोड़ मतदाता वोट के अधिकार का प्रयोग करेंगे, अपने भाग्य का फैसला स्वयं करेंगे. शाहजहांपुर तथा कर्नाटका के किसी स्थान पर लोकसभा का उपचुनाव भी होगा. गणतन्त्र ही आज के समाज के लिए या किसी भी युग में सर्वोत्तम शासन पद्दति है. इसमें मानव को पूरी स्वतन्त्रता है, उसके मूल अधिकारों का हनन आसानी से नहीं किया जा सकता. आज सुबह छुट्टी के कारण वे देर से उठे सो सभी कार्य देर से हो रहे हैं. साढ़े दस होने को हैं, बाबाजी को भी ध्यान से नहीं सुना, न ही उचित ढंग से व्यायाम हो पाया न ही हारमोनियम को हाथ लगाया है. आज नाश्ते में कोटू के आटे की रोटी खायी, वर्षों बाद.. बचपन में माँ के हाथ की बनी रोटी खाते थे, व्रत के दिनों में वह इसे बनाती थीं. नन्हा इस समय केमिस्ट्री का गृहकार्य कर रहा है, जून टीवी देख रहे हैं. मौसम आज खुला है, अधिक से अधिक लोग वोट देने जा सकें इसलिए मौसम सहायक हुआ है. कल दिन भर वर्षा होती रही. इस समय चारों ओर निस्तब्धता है, कोई गाड़ी नहीं चल रही है, सिर्फ पंछियों की आवाजें रह रहकर आती हैं या कभी-कभार कोई साइकिल खड़कती हुई चली जाती है, लो, अभी-अभी एक वैनेट भी निकल गयी. नन्हे के कमरे का दरवाजा खोल कर बैठें तो ठंडी हवा हर वक्त आती रहती है तथा सड़क का आवागमन भी स्पष्ट दिखाई देता है !

बाबाजी अक्सर मंत्र की शक्ति की बात करते हैं, पर वह मंत्र जाप नहीं कर पाती, उसे ध्यान में प्रार्थना ही उच्चतर केंद्र तक ले जाने में सहायक होती है. आज सुबह भी कितनी काम की बातें उसने सुनीं. ‘भोजन मात्र पेट भरने का साधन नहीं है, इसके पीछे जीवन दर्शन होता है. रसोईघर की पवित्रता जीवन की पवित्रता बनकर सम्मुख आती है. शुद्ध और निर्मल सात्विक आहार विचारों को संस्कारित करता है. अन्न का प्रभाव विचारों पर, जीवन दृष्टि पर पड़े बिना नहीं रह सकता. भूख लगने पर खाना प्रकृति है इसके विपरीत विकृति है, मेहमान को खिलाना संस्कृति है’. व्यक्ति को बदलने का काम व्यक्ति करता है. जब कोई किसी श्रद्देय व्यक्ति को जानता, मिलता अथवा उसके बारे में अध्ययन करता है तो उसके गुणों को धारण करने की प्रेरणा जगती है. बचपन से उसके जीवन पर न जाने कितने जीवन प्रभाव डाल चुके हैं. माता-पिता, संबंधी, शिक्षक सभी से कुछ न कुछ ग्रहण किया है. उसके व्यक्तित्त्व को ढालने में पुस्तकों के अलावा इनका ज्यादा हाथ है. आज ‘अमृत कलश’ में एक अन्य कलाकार से मुलाकात हुई, ‘राजेश जौहरी’ का यह कार्यक्रम अंतर्मन को छू जाता है. आज भी बदली बनी हुई है, पंखे से ठंडी हवा आ रही है. नन्हा अभी कुछ देर पूर्व ही सोकर उठा है. रात को देर तक जगता है सो सुबह उठ नहीं पाता. कल दोनों बहनों को फोन किया, घर पर फोन करने का अब उत्साह नहीं होता, माँ तो अब सदा उसके साथ हैं, पिता सुबह-सुबह व्यस्त रहते हैं, चाहें तो वह भी कभी-कभी कर सकते हैं पर उन्हें कभी इसकी आवश्यकता महसूस नहीं हुई, पहले भी नहीं और अब माँ के जाने के बाद भी नहीं.


Tuesday, October 21, 2014

अमराई की छाँव



आज असम बंद है, आसू की मांग है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल की जगह सेना की नियुक्ति की जाये. जून साइकिल से ऑफिस गये पर थोड़ी ही देर में वापस लौट आये. इस वक्त टीवी पर एक पुरानी फिल्म देख रहे हैं. सुबह-सुबह समाचारों में सुना कि डिब्रूगढ़ से बीजेपी के प्रत्याशी तथा कुछ अन्य राजनितिक कार्यकर्ताओं की उल्फा ने गोली मारकर हत्या कर दी है. वे लोग राज्य में शांति के पक्षधर नहीं लगते, चुनाव का बहिष्कार करने का कितना भयंकर मार्ग उन्होंने अपनाया है. नन्हा आज पहली बार एक आंटी से विज्ञान विषय पढने गया है, वह काफी उत्साहित है. आज लंच में वह दक्षिण भारतीय भोजन बना रही है. शाम के टिफिन के लिए जून तरबूज लाये हैं. इस समय नौ बजे हैं, धूप बहुत तेज है जैसे हजारों वाट के बल्ब लगा दिए गये हों. ऐसा ही ज्ञान का प्रकाश उनके दिलों में उदित हो ऐसी ईश्वर से उसकी प्रार्थना है.

धर्म को जीवन में उतारना होगा तभी क्रोध, मोह, अहंकार और लोभ से स्वयं को मुक्त किया जा सकता है. अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए सदा अपने आप में स्थित रहना होगा. जीवन की कहानी का पटाक्षेप हो जब वे एक मुट्ठी राख में बदल जायें इसके पूर्व ही स्वयं को जानना होगा. यदि पुकार भीतर से फूटी हो तो कभी खाली नहीं जाती. आज भी बंद के कारण नन्हे का स्कूल बंद है. मौसम कल की तरह है. जून भी एक बार वापस आकर दुबारा दफ्तर चले गये हैं. कल शाम दो मित्र परिवार आये, दिन भर बंद के कारण शाम को बाहर निकलना चाहते थे. उसने बाद में अनुभव किया वह भी दिन भर चुपचाप अपना काम करते रहने के कारण शाम को कुछ ज्यादा मुखर हो गयी थी. आज आकाश में बादल हैं. संगीताभ्यास की जगह नन्हे को आज नरोत्तमदास की एक कविता पढ़ाई. कुछ नया लिखा भी नहीं, उसके लिए भी एक खास मूड की जरूरत होती है जो नितांत एकांत चाहता है. कहीं से कोई व्यवधान न हो मन कल्पना तथा विचारों के धरातल पर विचरने के लिए मुक्त हो, तभी कुछ सृजन सम्भव है. कल रात छोटी बहन का फोन फिर आया, अब वह ठीक है. इतना तो स्पष्ट है कि वे उसकी समस्या को हल करने के विषय में कुछ भी नहीं कर सकते. हर कोई अपना जीवन जीने के लिए स्वतंत्र है और इस बात के लिए भी कि कोई अन्य उस उस पर कितना और किस तरह का प्रभाव डाल रहा है.

‘बड़ा होने की दौड़ में ही लोग अपने जीवन में द्वंद्व पैदा करते हैं. भौतिक उपलब्धियों को अपनी उपलब्धि मानकर उसके सहारे बड़ा होने का प्रयास कितना बचकाना है. मनों के बीच दीवारें तब खिंचती चली जाती हैं जब सभी स्वयं को एक दूसरे से आगे दिखाना चाहते हैं.’ आज जागरण में उपरोक्त विचार सुने. नन्हा अंततः आज स्कूल जा सका. मौसम कल की अपेक्षा ठंडा है. कल शाम माली ने नींबू का एक पेड़ बगीचे में लगाया. जीनिया की पौध भी लगा दी है. कल पेड़ से गिरी अम्बियाँ भी लायी, छोटी-छोटी अम्बियाँ देखकर बचपन के दिनों की याद हो आयी. अल्फ़ा की हिंसा का शिकार कुछ और लोग भी हुए हैं, उन लोगों के घरों में भी शोक का माहौल होगा. मृत्यु किस रूप में और कब मिलेगी कोई नहीं जानता पर असम के राजनीतिज्ञों को चुनाव से पहले बंदूक की गोली से मिलेगी इतना तो कोई भी कह सकता है.



Tuesday, February 25, 2014

काला कोट गुलाबी गुंचा


बाहर धूप तेज है पर कमरे में बैठने पर अभी भी ठंड लगती है, वह बरामदे की धूप में चटाई बिछा कर  बैठी है, पिता बाहर आंगन में फोल्डिंग कॉट पर लेटे हैं. माँ अंदर सोयी हैं, दोपहर की आधे एक घंटे की झपकी लेने के लिए. सुबह बड़े भाई का फोन आया, वे वहाँ स्टेशन पर आयेंगे, कल जून भी उन्हें फोन करेंगे जब ट्रेन यहाँ स्टेशन से छूट जाएगी. कल उसकी संगीत अध्यापिका ने फिर उसे टोका, उसे और अभ्यास करना होगा. कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये उनकी नई डाइनिंग टेबल देखी, बहुत सुंदर है, हल्के लकड़ी के रंग की, सनमाइका का डिजाइन भी टीक का है, एक सुंदर कलात्मक वस्तु है जिसकी कीमत वक्त के साथ बढ़ती ही जाएगी.

जून अभी तक नहीं आए हैं, उसने मन ही मन हिसाब लगाया, दोपहर को क्लब के लिए गिफ्ट पैक करने हैं, पड़ोसिन सहायता करने आएगी, सेक्रेटरी के कहने एक जगह फोन करना है, एक रेडियो सिंगर महिला जो क्लब की मेम्बर हैं उनकी कव्वाली में कुछ शब्द ठीक करवाने के लिए, वैसे बहुत जोरदार कव्वाली है, पर सोचती है तो लगता है, फोन उन्हें करना चाहिए, एक दिन उनका गाना सुना था, वैसे उनका नाम पहले कई बार सुना है पर आमने सामने बात नहीं हुई, चाहने पर भी वह मन की बात कह नहीं पाती, उन्होंने जब कहा गिफ्ट उनके यहाँ रखवाने हैं, तो बजाय यह कहने के कि आप ड्राइवर को भेज कर मंगवा लीजियेगा, उसके मुंह से यही निकला कि क्लब जाते समय वे उनके यहाँ छोड़ जायेंगे. माँ-पापा के कल वापस चले जाने के बाद आज काफी अकेलापन महसूस हो रहा है. कुछ देर पूर्व एक सखी ने फोन पर सुझाव दिया कि उसे अपनी थकावट, उलझन और अनुत्साह को लिखकर दूर करना चाहिए. आज सुबह छह बजे उठे, पिछले एक महीने से उठते ही चाय पीने का जो नियम बन गया था आज छूट गया.  

पिछले तीन दिन नहीं लिख सकी, पहले दिन बंद था आसू द्वारा, वोटर लिस्ट में सुधार करने हेतु बन्द का आह्वान किया गया था. उसके अगले दिन सुबह नन्हे को पढ़ाने में बीती, शाम को क्लब गयी, रिहर्सल कर रही महिलाओं के लिए चाय का इंतजाम करना था. कल शाम को क्लब में ‘फ्लावर शो’ था, उसके बाद एक असमिया विवाह में जाने का मौका मिला, जहाँ दुल्हन स्वयं तैयार होकर सौंफ-सुपारी से भरा होराई लिए मेहमानों का स्वागत करती मिली. भोज में था गर्मागर्म भात, दाल और सब्जी. आज चुनाव का दिन है, पर कोई भी वोट डालते जाता नजर नहीं आ रहा है. देश में स्थायी सरकार बने यह सब चाहते हैं पर इसके लिए प्रयास करना कोई नहीं चाहता, सब एक-दूसरे पर अपनी जिम्मेदारी थोपकर स्वयं दूर खड़े रहकर तमाशा देखना चाहते हैं. पिछले लोकसभा चुनावों में हालात इतने बुरे नहीं थे. लोग उत्साहपूर्वक वोट डालने गये थे, पर इस बार भय व आतंक का ऐसा माहौल बन गया है, डरे हुए लोग और डर गये हैं, लोगों का खून पानी बन गया है. 

वर्षा रात से हो रही थी, अब भी हो रही है, ठंड वापस लौट आयी है.  सुबह भजन सुनने का समय नहीं था, ‘जागरण’ भी नहीं सुना, माँ-पापा थे तो सब सुनते थे. नन्हा समय पर तैयार हो गया था, वह बहुत समझदारी की बातें करता है, यूँ तो हर माता-पिता को अपनी सन्तान प्रिय होती है पर वह सचमुच गर्व करने लायक है. सुबह ‘शांति’ पांच मिनट के लिए देखा, लगा कि अंतिम एपिसोड है, सब कुछ ठीक-ठाक हो गया है, इसी तरह जिन्दगी में भी उलझनें और परेशानियाँ आती है, फिर सब कुछ ठीक हो जाता है. आज उसने अपने और पड़ोसिन के घर से कुल मिलाकर तीस गुलाब की कलियाँ इकठ्ठी कर ली हैं अब प्रतीक्षा है तो एक कमेटी मेम्बर की जो इन्हें ले जाकर कोट में लगाने के लिए फ्लावर स्टिक के रूप में तैयार करेंगी. कल ‘हसबैंड नाइट’ है, अभी तक लेडीज ज्वाइन कर रही हैं, अब पौने दो सौ से ऊपर सदस्याएं हो गयी हैं. तैयारी ठीक चल रही है, उसके जिम्मे ज्यादा काम नहीं था, सारे गिफ्ट पैक कर दिए हैं. कल सुबह डोंगे आदि रिसीव करने हैं. जून उसे सुबह क्लब ले गये थे, दोपहर को फिर जाना था, अब वह पहले से ज्यादा समझने लगे हैं कि उसे हर हल में अब क्लब का काम भी करना है.  
                                                                                                                             





Saturday, February 22, 2014

बैटरी की चोरी


और आज उनकी बैटरी चोरी हो गयी, अर्थात उनकी मारुति कार की. चोर रात को दो बजे से थोड़ा पहले आया होगा, बड़ी सफाई से उसने कार का दरवाजा खोला और फिर बोनट. ‘आराम से किया काम है, सूझ-बुझ से निकाली गयी है’, ये दोनों वाक्य थे उस सिक्योरिटी ऑफिसर के जो देखने आया था कि बैटरी कैसे चोरी हुई. जून को आज सुबह-सवेरे ही मोरान जाना था, वह वहाँ से दो बार फोन कर चुके हैं. वह भी कितने ही फोन कर चुकी है. पहले सेक्रेटरी को फोन किया कि शाम को मीटिंग में नहीं आ पायेगी पर प्रेसिडेंट ने इसरार किया, उसे जाना ही चाहिए. इस महीने एक मीटिंग और है CMD आ रहे हैं, उसके बाद सम्भवतः तीन दिन का बंद है, चुनावों के बहिष्कार के लिए इस बंद का आयोजन किया गया होगा. उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं लगता, कल सुबह से ही उस बच्चे के पैर से बहता खून देखकर मन जैसे क्षत-विक्षत हो गया है, उसका असर तन पर भी पड़ा ही है. सुबह साढ़े चार बजे उठी, छात्रा पढ़कर गयी तब तक सब ठीक था, जून बाहर निकले और जब अंदर आये तो चेहरा फक था, वे सभी बाहर गये. चोर के निशान कहीं नहीं थे पर बोनट के अंदर की खाली जगह मुंह चिढ़ा रही थी. नन्हे ने कहा, गनीमत है गाड़ी नहीं गयी. वह सकारात्मक सोच सकता है, उसके लिए अच्छा ही है.

कल के घाव का दर्द अब कम हो गया है, वक्त के साथ इन्सान का मन बड़े से बड़ा दुःख भी सह सकता है. कल शाम आखिर उसे जाना ही पड़ा, लौटी तो जून बेहद थके हुए थे, दिन भर की यात्रा के कारण थकान हुई सो अलग, शाम को दो परिवार आ गये चोरी की बात सुनकर. मेहमान नवाजी की भी एक थकान होती है. उनका skit होगा या नहीं समय ही बतायेगा, लेकिन उसके लिए उसे घर की शांति भंग नहीं करनी चाहिए, इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बना लेना चाहिए. ईश्वर जो करेगा अच्छा ही करेगा. माँ-पापा के जाने में मात्र एक हफ्ता रह गया है, फिर वे तीनों रह जायेगे, अपनी छोटी सी दुनिया में. इन्सान के मन में कभी-कभी ऐसे विचार भी आते हैं जिन्हें वह खुद से भी छिपाना चाहता है. अपनी आजादी की कीमत पर वह कुछ भी नहीं चाहता. आज के भौतिकतावादी युग ने भीड़ में भी अकेले रहने की आदत डाल दी है, अथवा सवाल यह है कि उसे जो है वह नहीं जो नहीं है वह चाहिये.

आज सुबह की चाय पी ही थी, वह कुछ देर बैठकर उन लोगों से बातें कर रही थी, वे लोग चार-पांच दिन बाद जाने वाले हैं, हर वक्त यह बात मन में बनी रहती है कि अचानक पिता को कुछ घबराहट सी महसूस हुई, चक्कर आ रहा है कुछ ऐसे ही. वह तो बहुत डर गयी, दौड़कर पानी लेने गयी और जून को बताया, वह भी फौरन शेव छोड़कर आये और पिता को लेटने को कहा. तब तक वह थोड़ा ठीक महसूस कर रहे थे. जब से वे लोग आये हैं पहली बार ऐसा हुआ है बल्कि उन्होंने बताया कई साल पहले एकाध बार हुआ था.

आज धूप फिर भली लग रही है, हवा में ठंडक है इसलिए धूप का रेशमी स्पर्श भा रहा है. कल शाम वे एक मित्र के यहाँ गये, प्रोजेक्टर से इंग्लैण्ड व हालैंड में खिंची स्लाइड्स देखीं, बहुत सुंदर फोटो आये हैं, रगीन फूलों के चित्र, बिगबेन और बंकिघम पैलेस के चित्र, हालैंड के ट्यूलिप और अन्य फूल बेहद सुंदर थे, टेम्स पर बने पुल, जहाज से यात्रा, उन्नत देश ऐसे ही होते हैं. तभी तो जो भारतीय एक बार विदेश जाते हैं, वापस भारत की धूल भरी टूटी-फूटी सडकों पर लौटना नहीं चाहते. आज सुबह से सभी कुछ सामान्य रहा है, लेकिन कल रात कोकराझार में हुई बम विस्फोट की घटना से कुछ सोच सबके मनों में है. अगले हफ्ते तक ट्रेनस् सामान्य रूप से चलने लगेंगी या नहीं इसे लेकर.







Thursday, August 22, 2013

नाटक की रिहर्सल



दस बजे हैं, वर्षा है कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही. आज सुबह समाचारों में सुना, आन्ध्र प्रदेश में लू से कुछ लोग मर गये, यहाँ उन्हें स्वेटर निकलने पड़ रहे हैं. दिल्ली में ओले पड़ते रहे पूरे बीस मिनट तक, सडक पर snow fall जैसा  दृश्य बन गया था प्रकृति के विभिन्न रूप एक साथ देखने को मिलते हैं भारत में. आज वह  लिखने में ध्यान केन्द्रित नहीं कर पा रही है, नन्हा भी यहीं है और एक के बाद एक सवाल पूछे जा रहा है, आलू इतने छोटे क्यों हैं ? इससे भी छोटे मिलते हैं ? कल शाम उसी परिचिता से बात हुई, वह दोपहर को तीन-चार बच्चों को लेकर आयेगी skit की प्रैक्टिस के लिए. केंद्र में बीजेपी के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है, सारे देश के लोगों की जो एक इच्छा थी कि एक बार बीजेपी को मौका मिलना ही चाहिए, पूरी हो गयी. असम विधान सभा में एजीपी की सरकार बनेगी, कहीं फिर से वह आतंक तारी न हो जाये जो ४-५ वर्ष पहले यहाँ छाया हुआ था.

आज सुबह वर्षा बहुत तेज हो रही थी जब बच्चे पढ़ने आये, children meet के कारण सुबह आते हैं आजकल, कल रात देर तक वह एक सवाल हल करती रही थी उनके लिये, पर उन्होंने वह स्वयं ही हल कर लिया था. नन्हा कम्प्यूटर क्लास से आकर खुश था, he is really enjoying this class. इस समय दोनों पिता-पुत्र क्लब गये हैं, वह बगीचे में काम कर रही थी. नैनी और उसके दो बच्चे भी उसके साथ बगीचे की सफाई कर रहे थे. बच्चे अपने घर की, घर में लगे आम, बेर के पेड़ों की, पिता की, नानी की बातें कर रहे थे, उन्हें सुनकर यही लगता है, उनका पहले का जीवन अच्छा बीता है, अब भी खुश रहते हैं ये लोग, कभी-कभी माँ परेशान रहती है जो स्वाभाविक है, पति ने दूसरी शादी कर ली है और वह तीन बच्चों को लेकर घर छोड़ आयी है. रोज सुबह ‘जागरण’ सुनने-देखने के बाद भी कभी-कभी वह भी अपने मन पर नियन्त्रण नहीं कर पाती है और न जाने क्या–क्या सोचने लगती है. गोयनका जी ठीक ही कहते हैं, यह मन अंदर से बड़ा बेचैन है, बड़ा अशांत है, कैसी-कैसी गांठें पड़ी हैं, कभी राग कभी द्वेष, कभी कामना के बंधन में जकड़ा न स्वयं सुखी होता है न दूसरों को सुखी करता है. यदि कोई प्रतिक्षण इस पर नजर न रखे तो मौका मिलते ही यह कहीं से कहीं भाग जाता है, मरकट राज की तरह इस डाल से उस डाल उछलता रहता है, कभी चोट खाता है तो कभी कोई मीठा फल मिल गया तो उछल पड़ता है. यह मन बड़ा ही चंचल है पर इसे बस में तो रखना ही होगा. अध्यात्म मार्ग पर चलने वाले को तो इसे साधना ही होगा.

मौसम आज भी वही है बादलों भरा. नन्हा कम्प्यूटर क्लास गया है, जून फील्ड गये हैं. उनके नाटक की रिहर्सल ठीक चल रही है पर अभी समूह गान के बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है. बच्चों में भी उत्साह की कमी नहीं है. सुबह-सवेरे ‘जागरण’ में इतनी अच्छी बातें सुनीं कि उसका मन अभी तक उनमें डूबा हुआ है. बाहरी कर्मकांड को त्याग कर आन्तरिक प्रवृत्तियों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है. मन जो सदा किसी न किसी जोड़-तोड़ में लगा रहता है उसको  स्थिर करने की, शांत चित्त होने की प्रक्रिया ही धर्म है. धर्म को आचरण में लाने का सबसे अच्छा उपाय है कि अपने मन पर नजर रखी जाये, सद्विचार हों, धार्मिकता स्वयंमेव आ जाएगी.

कल बंद था, उल्फा ने बंद कॉल किया था और इसीलिए बंद पूरी तरह सफल था. वे लोग अलबत्ता साइकिलों से घर से निकले, पर जिस कार्य के लिए गये वह  सफल नहीं हो पाया, अभी तक तो ऐसा लग रहा है जिस गाने का अभ्यास बच्चे कर रहे थे, वह शायद नहीं हो पायेगा. सुबह से शायद इसी कारण या मौसम के कारण वह कुछ झुंझला रही है पर उसी क्षण गोयनका जी के शब्द याद आ जाते हैं और मन को समझा लेती है. जून की फरमाइश पर साम्भर व नारियल चटनी बनाई है, इडली अभी बनानी है. दोपहर को एक जगह फिर रिहर्सल के लिए जाना है, कल की तरह सारी शाम भी उसी में जाएगी. उसने सोचा, अगले वर्ष से कम से कम वह तो इस रिहर्सल आदि से दूर ही रहेगी. इस हफ्ते खतों के जवाब भी नहीं दे सकी, और भी कई  काम इन पिछले दिनों नहीं हो पाए, और तो और इस वक्त भी मन में उन्हीं बातों की पुनरावृत्ति हो रही है, जो सुबह  से इस कार्यक्रम के सिलसिले में फोन पर की हैं. मन के आगे चारा है और जुगाली किये जा रहा है. परसों से कार्यक्रम शुरू हैं यह एक अच्छी बात है. इतवार को अंतिम दिन होगा, उस रात वे किसी नये सफर की कहानी सोचकर सोयेंगे. नन्हे का गृहकार्य जो बीच में ही रुक गया है शुरू हो जायेगा और शामों को उनका टीटी खेलना भी, लाइब्रेरी से किताबें बदलना और घर आकर एक साथ बैठकर कोई बोर्ड गेम खेलना भी. कितनी जल्दी इन्सान एक चीज से बोर हो जाता है. 










Monday, August 19, 2013

आचार्य गोयनका जी


“दुनिया को एक बच्चे की निगाह से देखने की कोशिश यानि एक नजर जो कौतूहल से भरी हो और उन छोटी-छोटी बातों और चीजों के लिए तारीफ से भरी हो जिन्हें बड़े नजरंदाज कर जाते हैं”. पीटीवी पर उसने यह टिप ऑफ़ the week सुना, अच्छा है. कल से चुनावों के परिणाम आने का सिलसिला जारी है, कांग्रेस पिछड़ रही है बीजेपी उभर रही है लेकिन यही लग रहा है कोई पार्टी स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं कर पायेगी. कल दोपहर दो बच्चे पढ़ने आये और एक घंटा कैसे बीत गया पता ही नहीं चला, अपने समय और शक्ति का सही उपयोग ! शाम को वापस आकर नन्हे के साथ बैडमिन्टन खेला, फिर वहीं लॉन में ही जून के साथ ठंडी हवा में टहलते हुए दिन भर की बातों का जायजा और अगले दिन की प्लानिंग...

जून आज मोरान गये हैं, सुबह से वर्षा हो रही है. एकबार उसके मन में आया फोन करके पुरानी पड़ोसिन को घर आने को कहे, पर कल शाम ही उससे हिन्दू-मुस्लिम पर बहस हो गयी. कल शाम को जाने क्यों उसे पाक पत्तन, मिंटगुमरी की याद हो आयी, अपने उस सपने की भी जिसमें वह पाकिस्तान गयी है. रात को सपने भी इसी से सम्बन्धित आते रहे, वे एक बड़े हॉल में हैं, आधे में हिन्दू और आधे में मुस्लिम, दोनों एक बड़े तनाव से गुजर रहे हैं. फिर नींद खुल जाती है और दहशत से मुक्ति मिलती है. पता नहीं वह दिन कब आयेगा जब लोगों के दिलों की नफरत दूर होगी. शताब्दियों पूर्व मुस्लिम इस मुल्क में आये और शासक बन कर रहे, यही कारण था कि हिन्दू-मुस्लिम कभी एक नहीं हो पाए. हालाँकि कितने कवियों, शायरों व विद्वानों ने एकता की बात की और किसी हद तक दोनों ने एकदूसरे को अपना लिया पर मनों की मलिनता गयी नहीं है. लेकिन वह शुरू से उस मुल्क से जुड़ी है, एक सपना है कि कभी न कभी वह  वहाँ जाएगी. आज शुक्रवार है यानि बदलते मौसम का दिन. पिता की डायरी में कुछ प्रेरणास्पद बातों को पढ़ा, पूरा खजाना है उसमें ऐसी बातों का जो दिल को गहरे तक छू जाती हैं. उन्हें लिखेगी इसके बारे में. कल जून से क्रोशिये का धागा भी मंगवाया है, टीवी देखते समय हाथ खाली रहें तो कुछ अजीब सा लगता है.

आज महीनों बाद ‘आधा चाँद’ देखा, इतना छोटा सा देश है पर वहाँ इतनी शायराएँ हैं और उन्हें टीवी के जरिये लोगों तक पहुंचाया भी जाता है, डीडी पर ऐसा कार्यक्रम कभी नहीं देखा. आज धूप निकली है, वर्षा में लगातार भीगते पेड़-पौधे धूप का स्पर्श पाकर सूखने का प्रयास कर रहे हैं, उनके भुट्टे भी लगभग तैयार हैं. आज का tip of the day है, दिन भर में कम से कम एक बात को बर्दाश्त करें, यानि आपको वह बात बुरी भी लग रही तो अपना क्रोध जाहिर न करें. कल शाम एक परिचित ने फोन किया children meet के लिए एक skit लिखने को कह रही है, उसने ‘हाँ’ कह दी है, उसे यकीन है, खोजकर या स्वयं लिखकर वह दे देगी. उसे कुछ काम चाहिए.

कल रात जून और नन्हा star trek देख रहे थे और वह पढ़ रही थी, thought verses action, अच्छा लगा. ‘आपकी सरकार’ में कई राजनेताओं के विचार सुने, अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है कि केंद्र में किसकी सरकार बनेगी.

आज सुबह नींद जल्दी खुली थी पर आलस्य वश (जो चित्त की दुर्बलता है)  नहीं उठी, फिर जून ने उठाया. ‘जागरण’ में आचार्य गोयनका जी ने श्वास को देखते हुए मन को विकारों से मुक्त करने का उपाय विस्तार से बताया, अंत में धर्म की परिभाषा दी-

धर्म न हिन्दू बुद्ध है, धर्म न मुस्लिम जैन
धर्म हृदय की शुद्धता, धर्म हृदय का चैन

जो इतनी सरल है कि कोई भी उसे समझ सकता है, और इतनी कठिन है की उसका सार अंतर में उतारने में किसी को वर्षों लग जाएँ. कल शाम से वर्षा हो रही है, बगीचे में कोई काम नहीं हो पा रहा है. कल जून उन्हें दफ्तर ले गये, कम्प्यूटर पर गेम खेला व पेंटिंग का अनोखा अनुभव लिया, कम्प्यूटर पर काम करते समय लगता है, किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गये हैं, जून पिछले कई दिनों से कम्प्यूटर लेने के विषय में जानकारी इक्कट्ठी कर रहे हैं. कल वह वैक्यूम क्लीनर के लिए तिनसुकिया फोन भी करते रहे पर नहीं मिला. दोनों घरों पर फोन करने का प्रयास भी किया पर निराशा ही मिली. उसका ध्यान इन सब बातों की ओर नहीं जाता, उसके भीतर विचारों की एक अनोखी दुनिया है.


Wednesday, August 14, 2013

आखिर किसे दें वोट


वे यात्रा से कुछ दिन पहले वापस लौट आये, अप्रैल के भी दस दिन बीत गये हैं, परसों बैसाखी है, आज बहुत दिनों बाद कुछ लिख रही है वह, हर दिन सुबह  कोई न कोई काम आ जाता था और दोपहर को याद ही नहीं आया...लेकिन कलम हाथ से खिसका जा रहा है, अर्थात लिखाई बिगड़ी जा रही है, लगता है शुभ मुहूर्त अभी नहीं आया है.

१९ अप्रैल. आज नन्हे ने पहली बार उसके सामने जानबूझ कर झूठ बोला, पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया, उसकी आदतें कुछ बदलती जा रही हैं. रोज सुबह  की घबराहट और सुबह का मूड, शायद वह बड़ा हो रहा है, किशोरावस्था की शुरुआत है यह, धीरे-धीरे दुनियादारी सीखता जायेगा या फिर बच्चे भी उतने निर्दोष और भोले नहीं होते जितना लोग उन्हें समझते हैं, उसके अपने बचपन की कुछ घटनाएँ जो आज तक उसे याद हैं, इसका प्रमाण हैं. लेकिन वह नन्हे को ऐसा कुछ नहीं करने देगी कि बड़ा होकर वह भी उन बातों को याद करके पश्चाताप करे. आज सुबह ‘जागरण’ में बापू ने ईश्वर के अवतारों के बारे में बताया. ईश्वर बार-बार हंमारी सहायता करते हैं, प्रेरणा देते हैं मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं लेकिन हम कृतघ्न होकर उन्हें धन्यवाद देना तो दूर याद भी नहीं करते.

आज वह बगीचे से तोड़ी शिमला मिर्च की सब्जी बना रही है, किचन से उसकी खुशबू यहाँ तक आ रही है नन्हे का स्कूल बंद है. परसों शाम वे क्लब से आ रहे थे कि असम के मुख्यमंत्री श्री सैकिया जी के देहांत का समाचार मिला, आज उनका अंतिम संस्कार नाजीरा में किया जायेगा, सभी को उनकी असामायिक मृत्यु का दुःख है. तीन दिन बाद चुनाव शुरू हो रहे हैं, पर उसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है सो वोट देने नहीं जा पायेगी हालाँकि उसका मन बहुत है. पर अभी तक यह तय नहीं कर पायी है अगर जाती तो किसे वोट देती, कांग्रेस या बीजेपी, शायद उस वक्त जो मन में आता वही करती. कल शाम वे एक मित्र के साथ यहाँ से कुछ दूर स्थित एक मन्दिर में गये, मौसम बहुत अच्छा था, ठंडी हवा चेहरे को सहलाती जा रही थी और खेतों में फैली हरीतिमा मन को. मन्दिर जाना और आना अच्छा लगा पर वहाँ पूजा करना उसके बस की बात नहीं है, यह इतना निजी मामला है उसके लिए कि सबके सामने करना कुछ अच्छा नहीं लगता. इस वक्त नन्हा सामने बैठकर ‘साइंस वर्कबुक’ में अभ्यास कर रहा है पर कितने-कितने प्रश्न पूछता है,, हर दूसरे मिनट में एक प्रश्न उसे भी तभी अच्छा लगता है जब वह खुशदिल रहता है, थोड़ी देर भी चुप हो जाये या गम्भीर तो लगता है पता नहीं क्या कारण है. उसका स्कूल अब कुछ ही दिन और खुलेगा  फिर ग्रीष्मावकाश के लिए बंद हो जायेगा, उन दिनों उसे व्यस्त रखने के लिए उसे कुछ रोचक कामों के बारे में सोचना होगा.

Today again after so many days at 10 am she is with herself alone. Almost all the work is done and all is silent around her. Dada Vasvani told about life after death, He says that there is a thin curtain between living and dead, and he gave an example of a dead mother, who was helping her son. I may be true but till today she has seen dead persons only in dreams. One day when she will be dead she may find the truthfulness of this, and then she will also help others. किन्तु ये बातें अभी यही रहने दें क्योकि अभी कई साल उसे और जीना है, एक जीवित व्यक्ति को मृत्यु कितनी दूर की चीज लगती है. परसों यहाँ चुनाव के कारण छुट्टी है, फिर इतवार है और सोमवार को कोई मुस्लिम त्योहार  है, शायद इस बार ईदुलजुहा है. परसों ही उनके एक मित्र के यहाँ विवाह की वर्षगाँठ में जाना है, उसने सोचा उसके लिए अगर वह एक कविता लिखे तो क्या उसे पसंद आएगी. हफ्तों हो गये कोई अछूता सा अहसास मन को हुए, जैसे.. गन्धराज के फूलों से खुशबू उड़कर हवा को नशीली बना दे, या बादलों के घरौंदों में कोई उड़ता पंछी कैद हो जाये, वह उड़ता पंछी चाँद भी हो सकता है और सूरज भी ! आज दोपहर को कल शाम की तरह उसे लेडीज क्लब के काम के सिलसिले में एक सदस्या के यहाँ जाना है, और वापसी में पैदल आयेगी, ठंडी हवा और हरियाली के  साथ. उसने सोचा, जून अगर उसकी बातें पढ़ लें तो हंसेंगे या फिर वह कुछ समझेंगे ही नहीं, महीनों बीत जाते हैं उन्हें कभी डायरी उठाते, जबकि शुरू-शुरू में वह हर शब्द पर ध्यान देते थे, तब उसे जानने की इच्छा थी पर अब वह उससे जान-पहचान कर चुके हैं, बहुत अच्छी तरह से.



Thursday, January 10, 2013

बॉम्बे टू गोवा



सतावन महीनों के राष्ट्रपति शासन के बाद पंजाब में आज चुनाव हो रहे हैं. कल से रसोईघर के बाहर गैस लीक हो रही थी अभी कुछ देर पूर्व ठीक करके गए हैं कम्पनी के कर्मचारी. आज मौसम निखा पर है, धूप खिली है और सारे पेड़-पौधों ने, लॉन की घास ने जैसे राहत की साँस ली है. बाहर से पंछियों की मधुर आवाजें आ रही हैं, हौलिऔक के फूलों में एक लाली पक्षी तरह-तरह की आवाजें निकाल रहा है. कैलेंडुला के फूल अब सारे खिल गए हैं, उसने सोचा अगले साल उन्हें और घना लगायेगी. नन्हा आज सुबह पूछ रहा था, आप डायरी क्यों लिखती हैं, क्या फायदा है इससे ? आज सुबह वह इस सर्दी में पहली बार प्रातः स्नान करके गया है, वरना ग्यारह बजे वापस आकर ही करता है. कद के हिसाब से वह छोटा लगता है पर समझ के हिसाब से बड़ा. कल वे क्लब गए पर बच्चों की भीड़ थी, वे पुस्तकालय में चले गए, ‘लाइफ’ पत्रिका पहली बार देखी, अच्छी है, ‘परेड’ अब शायद नहीं आती, अगली बार तिनसुकिया जाने पर खरीदेगी उसने मन ही मन सोचा. कल उन दीदी से बात हो गयी, वे लोग अगले महीने चले जायेंगे, इतवार को उसने उन्हें लंच पर बुलाया है. कल दोपहर उसकी आँख लग गयी और जब जगी तो जून के आने का समय होने ही वाला था, आज उसने न सोने का तय किया है फूल बनाएगी, ढेर सारे फूल, बेंत की वह सुंदर टोकरी जो वे गोहाटी से लाए थे, खाली पड़ी है, कल ‘तलाश’ की थी और आज ‘सवाल’ क्योंकि हर ‘सवाल’ के ‘जवाब’ की तलाश ही तो जिंदगी का सफर है-

यह जिंदगी एक सवाल है?
हम क्यों हैं? कब से हैं?
जैसे बड़े सवाल
और छोटे-छोटे सवाल भी
पिताजी गुस्सा क्यों करते हैं ?
भैया गुमसुम क्यों है ?
गुडिया हँसती क्यों नहीं ?
या माँ की ऑंखें नम क्यों हैं?

कल शाम वह अपनी बंगाली सखी से मिली, बातें हुईं बहुत देर तक. अच्छा लगा, कभी उलझन भी, वह बहुत सारे पूर्वाग्रहों से ग्रसित लगती है, खैर..किसी और की जिंदगी का विश्लेषण करने का उसे क्या अधिकार है? फिर भी वह बहुत धीरे-धीरे काम करती है, इतनी धीरे चलकर वह जिंदगी के साथ चल पायेगी. आज छोटी ननद का पत्र आया है, अपने विवाह को लेकर वह बहुत उत्सुक है जैसा कि स्वाभाविक है. उसे शनिवार को ही जवाब देगी. कल छोटी बहन का भी पत्र आया वे लोग गोवा से वापस आ गए हैं, विवाह के बाद घूमने गए थे, उसने सोचा कभी वे भी गोवा जायेंगे. कल क्लब न जाकर उन्होंने घर पर ही बैडमिंटन खेला.  ‘कशिश’ देखा टीवी पर नायिका को गुस्सा कुछ ज्यादा ही आता है.कल मार्केट में उनके एक पुरने परिचित दम्पत्ति मिले, उनसे मिलना उसे हमेशा ही अच्छा लगता है, दोनों ऊर्जा से भरे होते हैं, चहकते हुए से. कल शाम जून ने उसे पिघला कर रख दिया, कल जब उसने कहा कि एक-दूसरे की निकटता में ही सब कुछ मिल गया, बाकी तो सब फार्मेलिटी है, तो उसे बहुत अच्छा लगा. कई बातों में वे दोनों एक सा सोचते हैं पर बहुत सी बातों में नहीं और शायद यही वजह है जो उनके सम्बन्धों को जीवन प्रदान करती है.

जब तुम मेरी आँखों में अपना चेहरा तलाशते हो
मेरी ऑंखें समुन्दर बन जाती हैं
फिर डूबते-उतराते हो लहरों में तुम
और मैं ऑंखें बंद कर लेती हूँ अब तुम कैद हो मेरे अंतर्मन में
गहरे और गहरे उतरते जाते हो
फिर सीप में मोती की तरह
आँखों से एक बूंद बन बरस जाते हो..!