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Wednesday, April 10, 2019

स्वच्छ भारत



सवा ग्यारह बजने को हैं. आज जून की मनपसन्द पकौड़ों वाली कढ़ी बनायी है. दो सप्ताह तक गाय के दूध की एकत्र की हुई मलाई से ‘घी’ बनाया और बचे हुए अंश में आता भूनकर गेहूँ का चूर्ण भी. सारी सुबह रसोईघर में ही बीत गयी जैसे. अभी-अभी एक परिचिता का फोन आया, स्व्च्छता पर कम्पनी की तरफ से आयोजित ‘स्लोगन प्रतियोगिता’ के बारे में बताया, उसने हिंदी में कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं, भाषा शुद्ध है या नहीं, पूछ रही थी. परसों यहाँ कम्पनी की तरफ से स्वच्छता पखवाड़ा मनाने के कार्यक्रम में ‘वाकाथन’ है यानि कुछ दूर तक बैनर लिए पैदल चलना है. रास्ते में गंदगी भी दिखेगी, उसे साफ नहीं करना है बस लोग साफ करें इसका प्रचार करना है. पता नहीं मनुष्य अपने आप को कब तक धोखा देता रहेगा. अचानक तेज वर्षा होने लगी है. घर के बाहर नाले में पानी भर जाता है जो वर्षा समाप्त होने के घंटों बाद तक भी बना रहता है, बड़े नाले से उसका सम्पर्क शायद टूट गया है. आज सिविल विभाग से कोई कर्मचारी देखने के लिए आया है. सुबह तरणताल गयी पर बहुत भीड़ थी, ठीक से अभ्यास नहीं हो पाया. कल से वह समय चुनेगी जब कम से कम लोग हों. कल मृणाल ज्योति की वार्षिक सभा है.

आज जुलाई का अंतिम दिन है. टीवी पर प्रधानमन्त्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम आ रहा है. वह कह रहे हैं, वर्षा मनोहारी है पर बाढ़ की विभीषिका भयंकर होती है. बरसात में हर वर्ष देश के कितने ही भागों में बाढ़ आती है. वह जीएसटी की बात भी कर रहे हैं. उन्होंने भारत छोड़ो आन्दोलन तथा अगस्त क्रांति की बात भी कही. साथ ही कहा, इस वर्ष को संकल्प वर्ष के रूप में मनाएं तो पांच वर्ष में भारत का चित्र बदल जायेगा. संकल्प को सिद्धि में बदलना है. गणेश पूजा का जिक्र करते हुए कहा कि इस पूजा को मनाते हुए इस वर्ष सवा सौ वर्ष हो जायेंगे. प्रधान मंत्री कुछ ही देर में इतने सारे विषयों को लेते हुए इतना सार गर्भित भाषण देते हैं. महिलाओं के सशक्तिकरण की बात की तो साथ ही राखी बनाने वाले कारीगरों की भी.

अगले हफ्ते रक्षाबन्धन का त्यौहार है. अभी अभी मृणाल ज्योति से फोन आया, पूछ रही थी, क्या वह और कुछ अन्य महिलाएं उस दिन स्कूल आएँगी. राखियाँ अभी तक बन नहीं पाई हैं, पर तब तक बन जाएँगी, अन्यथा वे बाजार से भी खरीद सकते हैं. आज तैराकी में हाथ चलाना सिखाया, दांया हाथ उठाकर श्वास लेना है. अब लगता है कुछ आगे बढ़ रही है. आजकल योग दर्शन पर नियमित व्याख्यान सुन रही है, काफी कुछ स्पष्ट हो रहा है. आज शाम को योग कक्षा में ‘क्रिया’ के बारे में ठीक से बताना है. सुना कि अन्तरायों का अभाव होने लगता है जब आत्मदर्शन होता है. कोई कहता है अंतराय खत्म होने पर आत्मदर्शन होता है ! ‘व्याधि’ और ‘उपाधि’ आदि अंतराय ही उन्हें समाधि से दूर रखते हैं. योग के प्रभाव से ही वे स्वस्थ रहते हैं, यानि ‘स्व’ में स्थित रहते हैं. ‘स्व’ में प्रतिष्ठित होने पर ही वे जगत में अभय को प्राप्त होते हैं. चित्त की शुद्धि होने पर ही ‘स्व’ का दर्शन होता है. इन्द्रियों पर जय होने पर ही चित्त शुद्ध होता है. एकाग्रता में ही इन्द्रियों पर जय होती है और चित्त में आत्मा की झलक मिलती है.