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Monday, May 21, 2018

मोटो जी का अलार्म



परसों रात साढ़े दस बजे वे यहाँ पहुँचे थे. कल शाम को टहलने गये. धूप तेज निकलती है यहाँ आजकल. एक कबूतर बाहर सूख रहे गमले से एक सूखी पत्ती का टुकड़ा अपनी चोंच में दबाकर ले गया है, शायद घर बनाएगा. जून नेत्रालय गये हैं. नैनी काम कर रही है. नन्हा व उसके मित्र, जो उसके साथ ही रहते हैं, पहले ही काम पर चले गये हैं, अब सभी देर शाम को वापस आयेंगे. नन्हा अभी तक अपने भविष्य के बारे में तय नहीं कर पाया है. वह अकेला ही रहना चाहता है, दो होकर भी अकेला, पता नहीं ऐसा कब तक चलेगा. समय कितना बदल गया है, अस्तित्त्व तो दूर स्वयं की भी खबर नहीं है. एक नींद में जैसे जी रहे हैं लोग, उसकी खुमारी को आनंद समझते हैं. जीवन की भव्यता और दिव्यता से सर्वथा अपरिचित ! उसे सभी के प्रति सहानुभूति होती है और यह भाव भी होता है, इसी तरह की या इससे भी गयी अवस्था में वह भी थी. ये भी एक दिन नींद से जगेंगे और तब धर्म के मार्ग पर कदम रखेंगे, खुद को जानने का प्रयत्न करेंगे. कल मकान की रजिस्ट्री हो जाएगी, परसों से सफाई का काम शुरू हो जायेगा. शनिवार को गृह प्रवेश के पूजन का कार्यक्रम होगा, इतवार को उन्हें वापस जाना है. नन्हा अगले महीने शिफ्ट करेगा, हो सकता है पहले ही कर ले.
आज से इस सोसाइटी में एक घर उनका अपना भी है. दस बजे से पहले ही वे रजिस्ट्रार के दफ्तर पहुँच गये थे. रजिस्ट्री हो गयी है. नन्हे और उसके नाम पर. अगली बार जब वे बंगलूरू आयेंगे तो नये घर में ही रहेंगे. शाम को जायेंगे वे उस घर में, कल से रंग-रोगन का काम आरम्भ हो जायेगा. छोटी बहन ने गाकर बधाई दी है नये मकान की, वह ऊर्जा से भरी है, सकारात्मक ऊर्जा ! ईश्वर उसे हर ख़ुशी दे !  उन्होंने ‘१९४७’ में दोपहर का भोजन खाया. रेस्तरां के नाम भी लोग बहुत चुन कर रखते हैं यहाँ. सुबह प्राणायाम के बाद आज अनोखे अनुभव हुए, कोई जैसे भीतर गा रहा था, पढ़ रहा था, सिखा रहा था. जैसे कोई सृष्टि के आरम्भ की बात समझा रहा था. सतयुग की बात और जीव के इस जगत में आने की बात. आरम्भ में सब कुछ नया होता है तो विकार रहित होता है फिर धीरे-धीरे परिवर्तन आता है. सद्गुरू की बताई साधना के बाद भीतर एक गहन शांति का अनुभव होता है. तभी वे चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग इस ज्ञान से जुड़ें. वह पांचवीं मंजिल पर है, नीचे से बच्चों के खेलने की आवाजें आ रही हैं. जून दूसरे कमरे में फोन पर बात कर रहे हैं, छुट्टी पर भी उनका दफ्तर चलता रहता है.

आज सुबह उसके पुराने मोटो जी के अलार्म से नींद खुली. वह जो एक बार गाड़ी में छूट गया था और जिसे वापस लाने के लिए ड्राइवर को एक हजार देने पड़े थे. बाद में एक दिन गिरकर जिसकी स्क्रीन टूट गयी थी, जिसे जून ने नोएडा में बदलवा दिया था, पर दो-तीन दिन ही चली नई स्क्रीन. इतने दिनों से बैग में बंद पड़ा था, आज अचानक उसकी घंटी पूर्व निर्धारित समय पर बजने लगी. शायद रोज बजती हो और उसने सुनी ही न हो...नींद खुलने के बाद कुछ देर ध्यान किया. किसी भी विधि से ध्यान करे, सभी अंत में एक हो जाते हैं, जिसके बाद मन खाली हो जाता है और तन हल्का. फेसबुक पर एक प्रसिद्ध तथा वरिष्ठ लेखक ने कहा है, मई में होगा हिंदी सम्मेलन. जोरहाट का माजुली भी उसका एक केंद्र है. वे अवश्य जायेंगे. माजुली देखने की उनकी इच्छा भी ऐसे पूर्ण हो जाएगी.