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Sunday, October 26, 2014

विधान सभा के चुनाव


“राग और द्वेष भीतर से निकलते नहीं, परमात्मा की प्रीति को भरने से ये अपने आप निकल जायेंगे” आज बाबाजी ने सुबह यह सुंदर वचन कहा साथ ही कबीर के तीन  सूत्र बताये- जोड़ो और तोड़ो, खाली करो और भरो, याद करो और भूल जाओ. अब क्या जोड़ना है और क्या तोड़ना है, किसे और किससे खाली करके फिर भरना है, किसे याद करना है और किसे विस्मृत...ये चिन्तन का विषय है. प्रेम हृदयों में उपजे तो जुड़ना संभव होगा. अहम इसमें सबसे बड़ा शत्रु है, कोई अपना भी यदि प्रतिकूल बात कह दे तो मन कुम्हला जाता है, उस फूले हुए गुब्बारे की तरह पिचक जाता है जिसमें सूई से छेद कर दिया गया हो. इस समय शाम के चार बजे हैं, वर्षा हो रही है, आज सांध्य-भ्रमण का कार्यक्रम सम्पन्न नहीं हो पायेगा. सुबह वह उठी तो जून से कल पड़ने वाले वोट के बारे में थोड़ी बहस हुई, वह वोट देने जाना चाहती है पर जून इसके सख्त खिलाफ हैं, उनकी राय में नेताओं की वजह से ही समाज में सारी बुराइयाँ हैं. नेता लोग करोड़ों का चारा, सीमेंट, यूरिया सभी कुछ हजम कर जाते हैं. दो सखियों से बात की, दोनों सपरिवार वोट देने जाएँगी, यानि उसकी तरह सोचने वाले लोग ज्यादा हैं, पर सदा बहुमत ठीक हो यह जरूरी तो नहीं.

आज चुनाव हैं. चार प्रदेशों असम, बिहार, तमिलनाडु, केरल तथा केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी में तेरह करोड़ मतदाता वोट के अधिकार का प्रयोग करेंगे, अपने भाग्य का फैसला स्वयं करेंगे. शाहजहांपुर तथा कर्नाटका के किसी स्थान पर लोकसभा का उपचुनाव भी होगा. गणतन्त्र ही आज के समाज के लिए या किसी भी युग में सर्वोत्तम शासन पद्दति है. इसमें मानव को पूरी स्वतन्त्रता है, उसके मूल अधिकारों का हनन आसानी से नहीं किया जा सकता. आज सुबह छुट्टी के कारण वे देर से उठे सो सभी कार्य देर से हो रहे हैं. साढ़े दस होने को हैं, बाबाजी को भी ध्यान से नहीं सुना, न ही उचित ढंग से व्यायाम हो पाया न ही हारमोनियम को हाथ लगाया है. आज नाश्ते में कोटू के आटे की रोटी खायी, वर्षों बाद.. बचपन में माँ के हाथ की बनी रोटी खाते थे, व्रत के दिनों में वह इसे बनाती थीं. नन्हा इस समय केमिस्ट्री का गृहकार्य कर रहा है, जून टीवी देख रहे हैं. मौसम आज खुला है, अधिक से अधिक लोग वोट देने जा सकें इसलिए मौसम सहायक हुआ है. कल दिन भर वर्षा होती रही. इस समय चारों ओर निस्तब्धता है, कोई गाड़ी नहीं चल रही है, सिर्फ पंछियों की आवाजें रह रहकर आती हैं या कभी-कभार कोई साइकिल खड़कती हुई चली जाती है, लो, अभी-अभी एक वैनेट भी निकल गयी. नन्हे के कमरे का दरवाजा खोल कर बैठें तो ठंडी हवा हर वक्त आती रहती है तथा सड़क का आवागमन भी स्पष्ट दिखाई देता है !

बाबाजी अक्सर मंत्र की शक्ति की बात करते हैं, पर वह मंत्र जाप नहीं कर पाती, उसे ध्यान में प्रार्थना ही उच्चतर केंद्र तक ले जाने में सहायक होती है. आज सुबह भी कितनी काम की बातें उसने सुनीं. ‘भोजन मात्र पेट भरने का साधन नहीं है, इसके पीछे जीवन दर्शन होता है. रसोईघर की पवित्रता जीवन की पवित्रता बनकर सम्मुख आती है. शुद्ध और निर्मल सात्विक आहार विचारों को संस्कारित करता है. अन्न का प्रभाव विचारों पर, जीवन दृष्टि पर पड़े बिना नहीं रह सकता. भूख लगने पर खाना प्रकृति है इसके विपरीत विकृति है, मेहमान को खिलाना संस्कृति है’. व्यक्ति को बदलने का काम व्यक्ति करता है. जब कोई किसी श्रद्देय व्यक्ति को जानता, मिलता अथवा उसके बारे में अध्ययन करता है तो उसके गुणों को धारण करने की प्रेरणा जगती है. बचपन से उसके जीवन पर न जाने कितने जीवन प्रभाव डाल चुके हैं. माता-पिता, संबंधी, शिक्षक सभी से कुछ न कुछ ग्रहण किया है. उसके व्यक्तित्त्व को ढालने में पुस्तकों के अलावा इनका ज्यादा हाथ है. आज ‘अमृत कलश’ में एक अन्य कलाकार से मुलाकात हुई, ‘राजेश जौहरी’ का यह कार्यक्रम अंतर्मन को छू जाता है. आज भी बदली बनी हुई है, पंखे से ठंडी हवा आ रही है. नन्हा अभी कुछ देर पूर्व ही सोकर उठा है. रात को देर तक जगता है सो सुबह उठ नहीं पाता. कल दोनों बहनों को फोन किया, घर पर फोन करने का अब उत्साह नहीं होता, माँ तो अब सदा उसके साथ हैं, पिता सुबह-सुबह व्यस्त रहते हैं, चाहें तो वह भी कभी-कभी कर सकते हैं पर उन्हें कभी इसकी आवश्यकता महसूस नहीं हुई, पहले भी नहीं और अब माँ के जाने के बाद भी नहीं.