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Tuesday, April 11, 2023

सफल हुई तलाश


सुबह के साढ़े दस बजे हैं। जून को कल रात ठीक से नींद नहीं आयी, इसलिए आराम कर रहे हैं। मौसम धूप भरा है। कल दोपहर उन्होंने सोसाइटी के एप अड्डा पर संदेश देखा, नन्हे की एक बिल्ली काफ़ी ऊँचाई से गिर गयी है और नीचे कहीं मिल नहीं रही है। उसे चोट लगी होगी और डर कर छुप गयी है। शाम को पाँच बजे बात हुई तो पता चला अभी तक नहीं मिली है, उसकी आवाज  में काफ़ी चिंता थी, पालतू पशु परिवार के अंग जैसा हो जाता है। उन्होंने निश्चय किया कि वहाँ जाना चाहिए। अभी आधे रास्ते तक ही पहुँचे थे कि पता चला, मिल गयी है, घर पहुँचे तो वे उसे लेकर डाक्टर के पास जा रहे थे। वहीं सांध्य भ्रमण किया, शाम की चाय पी और गुरु जी द्वारा  निर्देशित ध्यान किया, फिर ‘देवों के देव’ देखा, जिसमें पार्वती अब बड़ी हो गयी हैं, पर उनकी भेंट अभी महादेव से नहीं हुई है।वह शिव को पाने के लिए साधना करना चाहती है, पर वे सफल नहीं होने दे रहे हैं ।प्रतीक्षा करते-करते उन्होंने खाने की मेज सजा दी, रसोइया ख़ाना बनाकर चला गया था। साढ़े आठ बजे दोनों बच्चे वापस आए; बताया, बिल्ली को रीढ़ की हड्डी में मामूली चोट लगी है, एक इंजेक्शन भी डाक्टर ने लगा दिया है । खाने की मेज पर उन्होंने सुबह का पूरा क़िस्सा सुनाया। लगभग ग्यारह बजे वे दोनों अपने-अपने ऑफिस के काम में व्यस्त थे, कि नीचे वाले फ़्लोर से एक फ़ोन आया, आपकी बिल्ली फंस गयी है। उन्होंने देखा, मुख्य शयन कक्ष की खिड़की से निकल कर वह पाइप के सहारे सातवीं मंज़िल पर चली गयी है।और रो रही है, उसे उतारने का कोई साधन नहीं था। एक घंटा तक कई उपाय आज़माते रहे पर आख़िर वह नीचे गिर गयी, पर उसकी गति शायद दीवार से टकराने से कम हो गयी थी, सो ज़्यादा चोट नहीं लगी। वे लोग उसी समय से बिना कुछ ग्रहण किए लगातार बेसमेंट में उसे ढूँढते रहे, आख़िर वह एक कार के नीचे पीछे वाले पहिए पर चढ़ी मिली। शायद वह डर कर या थककर सो गयी होगी।  कहते हैं न मुसीबत कभी अकेले नहीं आती।एक नकारात्मक घटना दूसरी नकारात्मक घटना को जन्म देती है। पिछले हफ़्ते ही वे लोग कोरोना के भय से मुक्त हुए थे।जीवन में ऐसी घटनाएँ इंसान को मजबूत बनाने के लिए होती हैं। रात्रि भोजन करने में काफ़ी देर हो गयी सो उस दिन वे वहीं रुक गए। वे पूरे सात महीने बाद वहाँ गए थे, कोरोना के कारण जाना ही नहीं हुआ था। नन्हे ने टीवी पर आशुतोष राणा का दिनकर लिखित ‘रश्मि-रथी’ के तीसरे सर्ग का पाठ सुनवाया, उन्हें कंठस्थ था, प्रस्तुतीकरण बहुत प्रभावशाली था। जब नन्हे ने कहा, वे लोग नियमित योग सीख रहे हैं, जून ने उन्हें इड़ा, पिंगला व सुषुम्ना नाड़ी के बारे में बताया। कुछ दिन पहले गुरुजी से  वेगस नाड़ी के बारे में भी सुना था जो शरीर में सबसे लम्बी नाड़ी है और कई अंगों से जुड़ी है।प्राणायाम के द्वारा इन नाड़ियों को शुद्ध रखा जा सकता है।  


आज टाटा की नयी इलेक्ट्रिक कार आ गयी है; नील हरित रंग यानी मोर के रंग की। शाम को नन्हा और सोनू भी आ गए, रात्रि भोजन  के बाद सब ड्राइव पर गए। दस बजे वे लोग वापस चले गए। आज वर्षों पूर्व की डायरी का एक पन्ना पढ़ा, कितनी मधुर यादें हैं और कितनी मीठी कश्मकश। उस वक्त जो तलाश भीतर चल रही थी, वह अब पूरी हो गयी है। कितना ठहराव आ गया है मन में। आज शाम को तेज वर्षा हुई, थे कि सारी खिड़कियाँ बंद करनी पड़ीं। शाम को पापा जी से बात हुई, उन्हें ट्रांज़िस्टर पर विविध भारती सुनने में कठिनाई हो रही थी। उन्हें ऑल इंडिया रेडियो का एक एप ‘न्यूज़ ऑन एयर’ डाउन लोड करने को कहा है, जिस पर रेडियो कभी भी सुना जा सकता है। 


आज नन्हे का एक मित्र भी आया था, जो उसके साथ कालेज में था। दोपहर को जब बाक़ी लोग विश्राम करने लगे तो वे दोनों ड्रोन उड़ाने चले गए;  कुछ समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दो घंटे खोजने के बाद पता चला कि पिछली गली में एक विला की छत पर गिरा था। इलेक्ट्रिशियन को फ़ोन करके उसकी सीढ़ी मँगवाई, क्योंकि विला का मालिक दूसरे शहर में था। शाम काफ़ी हो गई थी, कुछ फल खाकर वे लोग वापस चले गये। उसने दीदी के विवाह की वर्षगाँठ के लिए कविता लिखी।


Tuesday, February 11, 2014

स्वामी योगानन्द का अनुभव


आज कई  हफ्तों बाद बुधवार को कपड़े धोने की मशीन लगाई, सर्दियों में नैनी को ठंड में जितने कम कपड़े धोने पड़ें उतना ही अच्छा है न, मशीन को तो ठंड लगती नहीं, आज ये बेसिर-पैर की बातें क्यों कर रही है. कुछ देर पहले एक सखी से बात की उसने किन्हीं परिचिता के स्कूल जाने की कही बात कही, सो मन का एक कोना फिर पंख फड़फड़ा रहा है, कितना हल्का है उसका मन, हवा के एक झोंके के साथ इधर-उधर चला जाता है. मान लेना चाहिए कि जून को किसी का भी तकलीफ उठाना पसंद नहीं है, पर उस ख्वाहिश का क्या करे जो लाख गहरा दबाने पर भी अंकुर सी उठ खड़ी होती है, तभी तो उनके पूर्वजों ने कहा है कि इच्छा ही सारे दुखों की जड़ है, न ख्वाहिश होगी न उसके अधूरा रहने की पीड़ा होगी. किसी को जो नहीं मिलता उसी की ख्वाहिश रहती है और जो मिल जाये उस की कद्र नहीं रहती, उसके पास ढेर सारा वक्त है और उसमें भरने के लिए कल्पना के रंग हैं, इस वक्त का सम्मान करना चाहिए और जून के प्रेम का भी. नन्हा आज सुबह साढ़े पांच बजे उठकर टेनिस कोचिंग में गया था और वापस आकर समय पर तैयार भी हो गया, स्कूल से आकर फिर कोचिंग और शाम को स्कूल से मिला गृहकार्य, उसकी दिनचर्या व्यस्त हो गयी है पर वह खुश है बेहद खुश ! 

आज सुबह नाश्ता करते समय याद आया, आज उसकी बंगाली सखी के विवाह की वर्षगाँठ है, उन्हें फोन करके शुभकामना दी, उन्हें भी यकीनन उतनी ही ख़ुशी हुई होगी जितनी उन्हें. आज धूप खिली है और वह पिछले बरामदे में बठी है, बरसों बाद जब वे यहाँ से चले जायेंगे तो यह घर और धूप याद आएंगे. आज जून भी सुबह जल्दी उठ गये थे, उन्होंने चाय पी और समाचार सुने साथ-साथ, वक्त गुजरने के साथ साथ उनके दिल एक-दूसरे के ज्यादा करीब होते जा रहे हैं. कल दोपहर को उन्होंने सउदी अरबिया के सपने देखे साथ-साथ, जहाँ के लिए जून ने apply किया है. कल उनका बायोडाटा देखा, पिछले पन्द्रह वर्षों में कई पेपर लिखे हैं, सब देखकर उसे गर्व हुआ. कल शाम एक मित्र परिवार आया अपने साथ बगीचे के ‘बनाना’ लेकर बहुत मीठे और पके हुए केले ! वह पूसी तो अब उनके परिवार की सदस्य ही बन गयी है, दोपहर भर दरवाजे के बाहर रहती है. कल रात तो बरामदे में उसके साथ एक और बिल्ली भी थी.

आज छोटे भाई की शादी की सालगिरह है, आज से नौ वर्ष पहले वह सिर्फ एक-दो दिन के लिए ही जा पाई थी उसकी शादी में. कुछ समय पूर्व ही ससुराल में दुखद घटना घटी थी. सुबह नन्हे को उठाने में दिक्कत हुई पर समय पर जा पाया. कल उस अंग्रेजी में सौ में से ९१ अंक मिले, पर उन्हें अभी भी कम लग रहे हैं, जो गलतियाँ उसने की हैं, वे नहीं करनी चाहिए थीं. उसके English teacher के कारण लिखाई जरूर सुधर गयी है, संस्कृत में भी उसने सफाई से काम किया है. उन्हें उस पर गर्व है. आज पीटीवी पर एक फनकार अफसाना निगार का इंटरव्यू सुना / देखा. वह नौकरी करते रहे और साथ-साथ लिखते भी रहे. उसे भी गौहाटी से आने वाले पत्र की प्रतीक्षा है जिससे रचनात्मक लेखन में डिप्लोमा कोर्स की शुरुआत हो सके. कल दोपहर डाइनिंग टेबल पर बिल्ली के एक बच्चे को बैठा देखकर बहुत आश्चर्य हुआ, उस पर बरबस ही स्नेह उमड़ आया पर आज वह दिखाई नहीं दे रहा, कहीं रात्रि की ठंड में उसे कुछ हो न गया हो? दोपहर उसे  हिंदी कक्षा के लिए भी जाना है, सो संगीताभ्यास अभी करना है. वैसे भी कविता लिखने के लिए सिवाय शीर्षक के अभी कुछ नहीं है, “आदमी और दरख्त”, अच्छा शीर्षक है न !

“हम ईश्वर को पा सकते हैं, उसे अनुभूति में उतार सकते हैं, वह हमारे सवालों का जवाब दे सकता है, ध्यान और मनन द्वारा हम उसके निकट जा सकते हैं.” कितने दृढ निश्चय के साथ ये सारे शब्द स्वामी योगानन्द ने कहे हैं, उन्होंने ईश्वर को पाया था, उससे साक्षात्कार किया था, वे भी यानि वह भी ऐसा अवसर पा सकती है, लेकिन उसके लिए दुनिया के सारे सुखों को भुलाकर ईश्वर में ही अपना सुख खोजना होगा, अपना सारा समय उसी में लगाना होगा, उसे दिल से प्यार करना होगा, उसे पुकारना होगा और यकीनन वह सुनेगा, वैसे भी उसने सदा विपत्ति में उसकी सहायता की है. आज सुबह नन्हा कोचिंग के लिए गया, कल शाम को वह नहीं जा पाया. वह उस पर क्रोधित हुई, थकान के कारण सम्भवतः वे दोनों झुंझलाए हुए थे, स्कूल से आते ही उसका स्वागत नहीं किया था क्यों कि वह भी उसी वक्त आई थी. अपने बाल सुलभ स्वभाव के कारण वह जल्दी ही भूल गया और पढ़ाई करने लगा.





Monday, September 2, 2013

पड़ोस की बिल्ली


आज नन्हा पानी की बोतल ले जाना भूल गया, जबकि वह उसके बैग के निकट ही रख देती है. बस में चढ़ने के बाद उसने इशारा  किया, पर जब तक वह घर जाकर बोतल लेकर आती बस को चले ही जाना था, उसने सोचा यही ठीक है कि आज वह पानी के बिना ही रहे, तभी भविष्य में ऐसी भूल नहीं करेगा. परसों शाम को लेडीज क्लब की मीटिंग है, फोन करके सबको बताना है, कल तैयारी भी करनी होगी. आज सुबह से पड़ोस के बच्चे की सूसी नाम की एक बिल्ली उनके स्टोर में आकर सोयी है, शायद उसे यह घर भी अपना घर लग रहा है. उसे आवाज सुनाई दी, धोबी आ गया था, वैसे भी आज इधर-उधर की बातें लिख कर वह पेज भर रही थी, सही मायनों में जिसे आत्मशोध कहते हैं या आत्मज्ञान उसके करीब जाने का प्रयास नहीं था. आज ध्यान में अपेक्षाकृत सफलता मिली. मन को जब चाहे तब संयमित कर पाने की विद्या कुछ-कुछ सध रही है. पर कल दोपहर को उसे नैनी पर क्रोध करना पड़ा, क्या वह असंयम नहीं था, शायद नहीं, क्योंकि वह सोच-समझ कर उठाया गया कदम था. क्या इसका अर्थ यह नहीं कि यदि कोई गलत कार्य करे और उसे उचित ठहरने के लिए तर्क का सहारा ले तो कार्य सही हो जाता है. उसे तो लगता है क्रोध एक प्रभाव में आकर किया जाता है सम्मोहन की अवस्था में और वह मन का ही एक रूप है.

आज सुबह नन्हे को उठाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी, उसकी एक आँख तो चिपकी होने के कारण खुल ही नहीं रही थी. आज न तो जागरण पर ही ध्यान टिका पायी और न ही बाद में ध्यान के लिए बैठी. मीटिंग के लिए फोन करते-करते ही सारी सुबह निकल गयी. दोपहर पढ़ने-पढ़ाने में, शाम भ्रमण व बागवानी में. कल रात सैलाब में शिवानी को इतना बेबस देखा की उसके दुःख में शामिल हो गयी.

जून के आने में अभी काफी वक्त है और उसका सुबह का काम लगभग समाप्त हो गया है. जागरण में आज दादा का संदेश सुना- what is silence is turning to God बाहर का शोर यदि न भी हो तो हमारे भीतर जो आवाजों का शोर है उसे खत्म करके ही सच्चा मौन पाया जा सकता है. There are voices of desires, of anger, of so many feelings, so many useless thoughts then one can not turn to God even for a single minute. ईश्वर को पाना इतना कठिन क्यों है ? दूरदर्शन पर ‘मजहब नहीं सिखाता’ में हिन्दू-मुस्लिम एकता पर एक भाव प्रवण दृश्य देखा, बच्चों का जन्मदिन मनाने जो नाराज मुसलमान पड़ोसी हिन्दू के घर नहीं आते वे रात को उसकी चीख सुनकर आ जाते हैं. जब तक लोगों में एक-दूसरे के मजहब के प्रति नफरत है तब तक लोग मजहब का असली रूप पहचान ही नहीं सकते. दादा कहते हैं, Make a relationship with God ! पर यह उसके लिए पहले कभी सम्भव था जब वह बरबस यह वाक्य बोला करती थी, God is with her always because he is her friend. लेकिन अब इतनी निकटता अनुभव नहीं कर पाती, भावना पर बुद्धि हावी हो जाती है और कभी-कभी लगता है कि ईश्वर की आवश्यकता ही नहीं है. पर वह जानती है, किसी भी विपत्ति के आने पर उतनी ही श्रद्धा से फिर उसे पुकारेगी. ईश्वर उसका मददगार है क्योंकि उसमें यह चाह है.




  

Tuesday, May 7, 2013

विश्व संचार दिवस



आज जबकि उसे भोजन में सिर्फ दाल ही बनानी थी, पौने ग्यारह बज गए हैं, और अब जाकर वह सुबह के कामों से निवृत्त हुई है. अभी भी सलाद आदि का काम है जो जून के आने के बाद ही करेगी, थोड़े से पल ये जो मिले हैं इनका उपयोग कर ही लेना चाहिए. कल जून ने भगवद्गीता के दो कैसेट और रिकार्ड कर दिए. इस समय भी एक बज रहा है, “जो स्थिरवान पुरुष सर्दी-गर्मी, मान-अपमान, सुख-दुःख में सम है, जो ममता से रहित है, वह मुझे प्रिय है” इतने उच्च आदर्शों तक पहुंच पाना असम्भव नहीं तो कठिन अवश्य है, किन्तु वह किसी सीमा तक इन बातों पर अमल कर सकती है. मन को शांत रखने के लिए यह रामबाण है यानि सर्वोत्तम उपाय. कल उसकी एक उड़िया सखी अपनी नवविवाहिता ननद और उसके पति जो डॉ हैं, को लेकर आई थी, दोनों बहुत शांत स्वभाव के लगे, अच्छा लगा उनसे मिलकर, उसने उन दोनों को एक पेन सेट व दो पेन दिए जो पिता ने उसे बरसों पहले दिए थे. कल दोपहर बाद उसने सात पत्र लिखे, भाइयों को भाईदूज का टीका भेजना था, और दो कार्ड्स भी जो उसकी पड़ोसिन ले आयी थी तिनसुकिया से, शाम को उसे एक सखी के यहाँ जाना है, ‘जूनून’ देखने के बाद, उसे लगा कि वह इतनी छोटी-छोटी बातों को इतना महत्व देने लगी है कि उन्हें लिख रही है, शायद घर गृहस्थी के इस ताने-बाने में उलझ कर रह गया है उसके मन का वह कोना भी जो किसी और तरह सोचता था..पर यह घर संसार उसे इतना प्रिय है कि इसके बदले स्वर्ग भी मिले तो तुच्छ है. नन्हे के भोले-भाले से सवाल और शरारतें, जून का झूठमूठ का गुस्सा, सभी कुछ तो मोहक है. लेकिन उसके पास और भी बहुत कुछ है जो महत्वपूर्ण है.

  परसों रात की तरह कल स्वप्न में बिल्ली को फिर देखा, एक बार लगा गला घुट रहा है, शायद उसकी चेन फंस गयी थी. दीवाली की सफाई अभी बहुत शेष है. कल दोपहर बाद वे पड़ोसी के यहाँ गए, लगभग शाम को ही उनके यहाँ कम्यूनिटी फीस्ट था, अच्छा लगा, लोगों को बेहिचक मिलते-जुलते देखना उसे हमेशा ही अच्छा लगता है.

  कल दोपहर से ही उसे वही हर बार वाला सिर दर्द था, जून ने ऑफिस जाने से पहले दवा दी, फिर चाय बनाकर भी. कुछ देर सोयी. शाम को वह बाम लगाकर लेटी थी और जून साइकलिंग करके आये ही थे कि एक मित्र परिवार आ गया, और वे लोग जा ही रहे थे कि एक दूसरा परिवार. कल सुबह से ही बैठक की शक्ल बिगाड़ दी थी सारे कुशन कवर आदि धोबी को दे दिए थे, खैर, आज अभी रेडियो पर कमेंट्री आ रही है, वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड के बीच मैच हो रहा है. कल नन्हा दोनों घुटनों में चोट लगाकर आया, बहादुर है, इतनी चोट पर भी रोया नहीं, शायद रोया भी हो उसे बताया नहीं. ही इज सच अ स्वीट ...जेम ऑफ हर हार्ट. उसे अपने से दूर भेजने की हिम्मत कैसे आयेगी. कल जून ने घरों पर फोन से बात की, वे लोग भी पीएंडटी फोन के लिए अप्लाई कर रहे हैं. जून उसका व नन्हे का पासपोर्ट भी बनवा रहे हैं, इसका अर्थ हुआ कभी न कभी वे विदेश यात्रा पर जायेंगे ही.
  नवम्बर माह का पहला दिन, “विश्व संचार सप्ताह” का भी पहला दिन. दीवाली में सिर्फ एक दिन बाकी है, कल शाम उन्होंने नमकपारे बनाये आज नारियल के लड्डू बनाएंगे. उसकी उड़िया सखी का फोन आया था, उसे कैलेंडुला के पौधे चाहिए थे, वे उनका इंतजार करते रहे, जब वे नहीं आए तो वे एक मित्र के यहाँ चले गए, असमिया सखी ने आलू क्रश करके पकौड़े बनाये, जून को बहुत पसंद आये, कभी वह भी बनाएगी उनके लिए. कल शाम से ही वे एकदूसरे के साथ निकटता महसूस कर रहे थे, जैसे पहले-पहल किया करते थे, और जो कभी- कभी दुनिया भर के कामों में कहीं खो सी जाती थी. नन्हे की चोट अब ठीक हो रही है, आखिर उस दिन जून ने अन्ताक्षरी में भाग ले ही लिया, उन्हें गानों का शौक है और व गानों की धुन भी जानते हैं, लेकिन झिझक के कारण अपने इस शौक को बढ़ा नहीं पाते हैं, वह तो काम करते-करते ही गुनगुनाती रहती है. यकीनन गाना गाना थोड़ा बहुत तो आना ही चाहिए.



Monday, May 6, 2013

पालतू बिल्ली



आज फिर कुछ दिनों बाद डायरी खोली है, नन्हा पूजा की छुट्टियों के बाद आज स्कूल गया है, यूँ कारण यह नहीं है. कल दीदी को खत में लिखा कि लिखने का शौक बस डायरी लिखने तक ही सीमित रह गया है, लिखना चाहिए था कि कभी-कभार लिखने तक, पर स्वयं के प्रति ईमानदार रह सके इतनी हिम्मत अभी तक नहीं आयी है. हर बार छला है स्वयं को शब्दों से, सही-सही मन की बात बाहर आने से कतराती रही है. खैर अब उसकी फितरत यही है तो यही सही, ज्यादा भावुक होने की जरूरत नहीं, हाँ, अपनी बात को सच साबित करने के लिए कल से नियमित लिखना चाहिए. जून आज नन्हे को छोड़ने गए हैं, उसे प्रोजेक्ट वर्क लेकर जाना था. जिसमें पूरी छुट्टियों भर वे व्यस्त रहे. एक दिन दो अन्य परिवारों के साथ दिगबोई गए पिकनिक मनाने. पूजा देखने गए एक दिन, कुल मिलाकर पूजा का यह अवकाश अच्छा रहा. शाम को उनका एक मित्र परिवार घर जा रहा है, उनकी बिल्ली कुछ दिन यहाँ रहेगी, कुछ दिनों तक पेट् पालने का अनुभव भी हो जायेगा, पहले वह घबरा रही थी पर अब लगता है वे उसे आराम से रख पाएंगे. कल उसने पांच खतों के जवाब लिखे जो बहुत दिनों से पेंडिंग थे.  

  आज सुबह उठी तो सबसे पहले बिल्ली का ध्यान आया, दरवाजा खोल कर देखा तो बड़ी-बड़ी ऑंखें खोले वह रात वाली जगह पर ही बैठी थी, शायद रात को उसके लिए रखे बोरी के बिस्तर पर गयी ही नहीं. मालकिन को बहुत मिस कर रही है शायद, दिन भर बहुत थोड़ा सा ही खाया उसने. समय पर नैनी तो आ गयी पर सारा रूटीन अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण दोपहर तक उसे काफी थकान लग रही थी, जून के जाने के बाद पढ़ना शुरू किया कि नींद आ गयी तेज और गहरी नींद. जो पौने तीन बजे खुली, फिर मशीन चलाई, कपड़े यूँ ही पानी में भीगे हुए थे, सुबह लाइट गायब हो गयी थी. नन्हे की सोशल की टीचर नहीं आयीं, उसे मॉडल और चार्ट सब वापस लाने पड़े. शाम को कुछ देर बगीचे में काम किया, कुछ देर बैडमिंटन खेला, फिर कुछ देर फिल्म देखी, और इस समय एक फिल्म के गाने बज रहे हैं, जो उसकी सखी ने बड़ी तारीफ करके दिया है, बेतुके से गाने हैं, वह पहला गाना जो उसे ज्यादा पसंद है अभी नहीं बजा, शायद वही अच्छा हो. जून भी कई दिन की छुट्टियों के बाद ऑफिस गए हैं उनका काम भी बढ़ गया है, विभाग में एक अधिकारी ने त्यागपत्र दे दिया है, उनकी पत्नी की अनुपस्थिति से लेडीज क्लब का आकर्षण भी कम हो जायेगा.

  आज सुबह बिल्ली जून की कार के नीचे छुप कर बैठ गयी और बहुत बुलाने पर भी नहीं निकली. वे दोनों जब सारे प्रयत्न करके हार गए तो नन्हे ने बिस्किट देकर उसे बाहर निकाला, उससे पहले जून ने बताया कि वह गेट से बाहर चली गयी थी, उसे हमेशा बाँध कर ही रखना होगा. उसकी मालकिन ठीक ही कहती थी, चीजलिंग शौक से खाती है, कोर्नफ्लेक्स कभी खाती है कभी सूंघ कर छोड़ देती है. लेकिन उसके कुछ दिन यहाँ रहने से बिल्लियों के प्रति उनके नजरिये में काफी बदलाव आ जायेगा.

 अभी साढ़े दस ही हुए हैं, यानि आधा घंटा तो है ही अपने आस-पास रहने का, सुबह साढ़े पांच बजे से लगातार कुछ न कुछ करते रहने से इस वक्त बैठना सुकून से भर गया है. मौसम आज भी पिछले कई दिनों की तरह अच्छा है, गर्म और खुला खुला सा दिन. सुबह उसकी पड़ोसिन ने सोमवार को उससे बड़ा पतीला देने को कहा, और फौरन ही उसने ग्रीटिंग्स कार्ड्स लाने का काम उसे थमा दिया, उसे शायद अच्छा न लगा हो. परसों कार्तिक का पहला सोमवार है, उनके यहाँ बहुत सारी महिलाएं आएँगी. उड़िया लोग त्योहारों को मिलजुल कर  मनाना पसंद करते हैं. कल नन्हे का न ही स्टोरी कम्पीटिशन हुआ न ही असेम्बली कार्यक्रम. बच्चों को निराशा का अनुभव कैसा लगता होगा, स्कूल से आया तो एक क्षण उदास था फिर सब भूल गया, यही तो बचपन कई सबसे बड़ी विशेषता है. इस हफ्ते उसे दो पत्र लिखने हैं, दीवाली तक चादर भी पूरी करनी है, दीवाली आने में सिर्फ बारह दिन शेष हैं, हो ही जायेगी, अर्थात होनी ही है.

Wednesday, July 18, 2012

बिल्ली के भाग से दही लगा



कल रात हुई वर्षा के कारण सुबह शीतल है और सुखद है पौधौं के पास बैठना, सभी कुछ धुला-धुला सा लगता है. पक्षियों का कलरव वातावरण में चेतना भर रहा है. कल रात लगभग साढ़े नौ बजे एक घोषणा हुई थी, पिछले तीन दिन से पहले बंद फिर घेराव के कारण कितनी हानि और कष्ट होता रहा है लोगों को, अवश्य ही उसी सिलसिले में यह घोषणा हुई होगी. सोनू और जून अभी सोये हैं, नन्हें ने आज सुबह ही सुबह बिस्तर गीला कर दिया है, जून का गला पिछले तीन-चार दिनों से खराब है, नाक भी बंद है, पर वह इलाज नहीं कराते. कल शायद घर से पत्र आये और उनके आने की खबर मिले. तभी उसे लगा कि इन सामान्य बातों के अलावा कुछ लिखना चाहे तो कितना प्रयास करना पड़ेगा. उसका दायरा भी तो कितना सीमित हो गया है. जब नए अनुभव नहीं होंगे तो नए विचार कहाँ से आएँगे. पर इतनी पत्रिकाएँ पढ़ती है उसका कुछ तो असर होना चाहिए था. पड़ोस के घर में जिस बिल्ली ने तीन बच्चे दिए थे, कल रात वह दही जूठा कर गयी है जबकि कल ही उन्होंने दूध न पीकर अधिक दही लगाया था. वह कहते हैं न बिल्ली के भाग से छींका फूटा.

अभी सुबह के पांच भी नही बजे हैं और वातावरण में इतनी गर्मी है. रात भर ही रहती आयी है. आकाश पर थोड़े से बादल हैं भी तो छितराए हुए, हवा का नाम नहीं. कल भाई का पत्र आया माँ पापा जुलाई में आ रहे हैं. नन्हें के जन्मदिन से एक दिन पहले. कल जून तिनसुकिया गए थे, उनके जूतों ने बिल्कुल ही जवाब दे दिया है. सामने वाले घर की उड़िया वासिनी घूमने के लिये निकली है, व्यायाम का यह भी एक तरीका है. आज भी दोनों बाप-बेटे सोये हैं. कल शाम वह अपनी बंगाली मित्र के घर गयी वह एक किताब पढ़ रही है ‘exodus’ बाद में वह भी पढ़ेगी. अभी तो जाकर अमिताभ बच्चन का इंटरव्यू पढ़ेगी जो धर्मयुग में छपा है. पर इसके पहले व्यायाम.

तेज धूप निकली है आज, इतनी कि धूप में चावल बना लो चाहे तो चाय बना लो. रात को स्वप्न में उसने पापा, मम्मी व छोटी बहन को देखा. वह स्वयं बी.एड. की पढ़ाई के लिये हॉस्टल जा रही है. उसने सोचा जब नन्हा बड़ा हो जायेगा तभी आगे की पढ़ाई के बारे में सोच सकती है.